Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
08-20-2017, 10:40 AM,
#1
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हिन्दी सेक्सी कहानियाँ 

हाय फ्रेंड्स माय सेल्फ राजेश. में २४ साल का हूँ. में चंदिगढ से हूँ. आई ऍम वैरी बिग फेन ऑफ़ सकसेक्स. में इस को बहोत इयर्स से पढ़ रहा हूँ. मेरा लंड का साइज कभी मीजर नहीं किया बट इतना हे की ये किसी भी लेडी को सटिसफाय करने के लिए काफी हे. ये स्टोरी मेरी और मेरी ट्युशन टीचर की हे में उस टाइम १२th में पढ़ रहा था. मेरी इंग्लिश वीक थी सो मेरे पेरेंट्स ने मुझे पास की एक ट्युशन लेडी के पास पढ़ ने के लिए भेजा. उसका नाम था कंचन (नाम बदला हे ).

वो ट्युशन के साथ साथ स्टिचिंग भी करती थी. वो मेरिड थी और उसके दो बच्चे बी थे. एक गर्ल जो की ५ या ६ इयर्स की होगी. और एक बॉय जो की १ इयर का था. उसका हसबंड ड्रिंक बहोत करता था. और डेली लड़ाई करता था, उसके साथ वो मेरी पडोश में रहती थी सो हमें डेली उसके लड़ाई झगड़े की आवाज आती रहती थी. कंचन बहोत मस्त माल थी. उसका फिगर ३६-३०-३४ था. (जो उसने मुझे बाद में बताया). उसके पास और भी बॉयज एंड गर्ल्स ट्यूशन पढ़ने आते थे. बट वो मेरी पड़ोस में रहती थी सो वो ज्यादा ध्यान मुझ पर देती थी. क्यू की वो नहीं चाहती थी की उसे मेरे घर से कोई कंप्लेंट आये की उसने मुझे ठीक से नहीं पढाया.

जब वो सूट कटिंग कर रही थी निचे बेठ कर तो उसके कमीज मेसे बूब्स दीखते थे. उसके बूब्स बहोत मस्त थे सो में उसे चोर नजर से देखता रहता था. एक दिन में उसके पास ट्यूशन पढने गया तो वहा उसने सबको घर वापस भेज दिया. में उसके गर के पास रहता था, सो उसने मुझे वहीँ रुकने के लिए बोला. क्यू की उसे कुछ काम था. तो उसने मुझे कहा की बेडरूम में बेठ कर लेसन रिवीज कर लो. जेसा उसने मुझे कहा में उसके बेडरूम में चला गया. और उसके बेड पर बेठ कर लेसन रिवीज करने लग गया. करीब १५-२० मिनट बाद उसका बेटा जो की अभी दूध पिता था वो सो कर उठ गया और रोने लगा शायद उसे भूक लगी थी.

वो भागते हुए बेडरूम में आई और अपने बेटे को उठाया और उसे चुप करवाने लगी बट उसे शायद भूक लगी थी. तो वो चुप नि हो रहा था. तो वो वहीँ मेरे सामने बेठ कर अपना एक बूब्स निकाल कर उसे दूध पिलाने लगी. वाव क्या बूब्स था उसका एक दम गोरा और ऊपर निपल. में उसे चोर नजर से देख रहा था और वो मुझे नोटिस कर रही थी. मेरा लंड भी एर्रेक्ट हो गया. में उसे सेट करने लगा तो उसने मुझे देख लिया और गुस्से में बोली क्या कर रहे हो ? में डर गया.

में; कुछ नहीं.

कंचन; तुमने निचे हाथ लगाया क्या हुआ तुम तुम पढाई की तरफ क्यू घ्यान नि लगा रहे. क्या हे निचे बताओ.

में; कुछ नहीं मेम सॉरी.

कंचन; आज कल तुम पढाई से ज्यादा कही और ही ध्यान लगा रहे हो इस लिए मुझे आज ज्यादा काम हे फिर भी मेने सब को छुट्टी दे दी और तुम्हे ट्यूशन पढ़ा रही हूँ.

में; कहा सॉरी मेम तो वो बोली ओके पढाई की तरफ ध्यान दो.

में पढाई करने लगा बट चोर नजर से उसके बूब्स को बार बार देख रहा था. उसने मुझे उसका बूब्स देखते हुए फिर पकड़ लिया.

कंचन; क्या देख रहे हो ?

में; कुछ नहीं मेम.

कंचन; देखो तुम अभी बच्चे हो ये सब बाद में करना थोडा बड़े हो जाओ अपने पेरो पर खड़े हो जाओ फिर ये सब करना.

में; फिर पढाई करने लगा. उसका बेबी सो गया और वो उठ कर बहार चली गयी और काम करने लगी.

उसके जाने के बाद मुझे उसके बूब्स के बारे में सोच कर अपने लंड को सहला रहा था, अचानक ही वो रूम में आई और मुझे देख लिया और बोली क्या कर रहे हो / में बुरी तरह से डर गया, मेरी तो गांड फट गयी की भाई आज तो मेरे पेरेंट्स को ये सब बता देगी. वो मेरे पास आई और अचानक मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरी पेंट की जिप खोल कर मेरा लंड बहार निकाल लिया, और बोली लड़का जवान हो गया हे, में उसके इस अचानक से चेंज हुए बिहेव को समज नहीं पाया. इससे पहले की में कुछ कहता उसने मेरा लंड अपने मुह में ले लिया. और फिर जोर जोर से वो चूसने लगी. में तो जेसे सातवे आसमान पे था, बहोत मझा आ रहा था. में उस टाइम तक वर्जिन था और किसी को किस भी नहीं किया था में १० मिनट में ही झड गया. उसने मेरा सारा माल पि लिया, और वो उठी और बोली की कपडे उतारो अपने भी और मेरे भी, जेसा उसने कहा मेने किया. वाओ क्या बूब्स थे उसके मस्त लग रहे थे, में उन्हें सुक करने लगा और वो मेरे सर पर हाथ फेरने लगी.

वो मुझे अपने बूब्स में प्रेस करती जा रही थी, में वेसा ही कर रहा था जेसा मेने पोर्न मूवीज में देखा था, थोड़ी देर बाद वो बोली की उसकी चूत सैक करो. मेने कभी नहीं किया था तो जेसे ही में उसकी चूत के पास गया मुझे अजीब सी स्मेल आई. उसने मुझे जातक से अपनी चूत की तरफ प्रेस किया और में उसे चाटने लगा, वो मोअन कर रही थी आआआआआआ……ऊऊऊऊऊउ…ऊऊऊऊउ….और जोर से करो राजा बहोत दिन हो गए किसी ने हाथ नहीं लगाया इसे…. वो भी थिदी देर में झड गयी.

मेने उसका माल नहीं पिया क्यू की उसका टेस्ट मुझे अच्छा नहीं लगा. वो बोली जल्दी कर जान अब इस चूत को तृप्त कर दो बहोत टाइम से प्यासी हे, तेरे अंकल तो मुझे हाथ भी नहीं लगाते. दारु पि कर आते हे और लड़ाई करते हे डेली. और सो जाते हे. और जब करते हे थोड़ी देर में झड जाते हे.

मेने तो कभी नहीं किया था तो सो मुझे नहीं समज आ रहा था. केसे करूँ तो उसने मुझे निचे लिटाया और मेरे ऊपर बेठ गयी. और मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया, वाओ क्या माझा आ रहा था लग रहा मेरा लंड जेसे किसी ज्वाला मुखी में हो, गरम. और वो जोर जोर से मेरे ऊपर कूद रही थी, मेने उसे निचे आने को कहा.

और फिर मेने उसके ऊपर लेट कर उसे चोदा, और फिर दोग्गी पोजीशन में, वो लगातार मोअन कर रही थी की बहोत दिनों के बाद चुदाई हुई की बहोत माझा आ रहा हे, और जोर्र्र्रर्र्र से चूओद जूओर्र्र से.., फास्ट फ़क मीई फुच्क्क मीई ..वोव्वव्व्वव्व्व्व याआआ याआअ याआआअ याआअ और लगातार चिल्ला रही थी, और वो अब तक ३ बार झड चुकी थी. में भी बस झड ने वाला था और में उसे जोर जोर से चोदने लगा ३० मिनट हो गए थे और उसकी चूत में झड गया.

वो जोर जोर से साँसे ले ताहि थी और में भी बोली की तुम्हारा लंड बहोत मस्त हे, तुम्हारे अंकल का तो छोटा सा हे, शादी के कुछ टाइम तक तो वो सही चोदते थे बट जेसे जेसे टाइम बितता गया उनका चोदाई का टाइम कम होता गया और में अपनी फिंगर से ही सेटीसफाय होती रही. मुझे अब मस्त लंड मिल गया हे में तुमसे जब चाहे तब चोदूंगी.

फिर वो मेरे लंड को दुबारा चूसने लगी. और मेरा फिर खड़ा हो गया, और मेने उसे कहा की मुझे गांड मारनी हे तो वो बोली नहीं प्लीज् मेरी गांड मत मारन. मेने उसे ज्यादा फ़ोर्स नहीं किया और फिर से उसकी चूत मारी. और दुबारा उसकी चूत में झड गया. उसने मुझे फिर दूध पिलाया और बोली ये तुम्हारा फर्स्ट टाइम था सो तुम्हे वेअक्नेस महसूस होगी. तो दूध पि लो मेने दूध पिया और अपने घर चला गया. उसके बाद जब भी मेरा या उसका मन होता में उसे चोदता.
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08-20-2017, 10:40 AM,
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एक रात माँ के साथ

में दिल्ली का हूँ और अभी जोधपुर राजस्थान में जॉब कर रहा हूँ तो तैयार हो जाइये अपने लंड को सहलाने के लिये और अपनी चूत में उंगली करने के लिये ये स्टोरी पिछले महीने की है जब मेरी माँ मुझसे मिलने दिल्ली से जोधपुर आई थी मेरी माँ की उम्र
42 साल है और उनकी फिगर इतनी सेक्सी है की कोई भी उन्हे देख के मूठ ज़रूर मारता होगा.
मेरी माँ का नाम प्रिया है वो एक हाउस वाइफ है जो की मेरे दादा-दादी के साथ दिल्ली में रहती है में उनका इकलौता बेटा हूँ पापा का निधन 2003 में हो गया था एक कार एक्सिडेन्ट में अब स्टोरी पर आता हूँ मेरी उम्र 26 साल की है और 7 इंच का लंड है और 3 इंच मोटा मेरी माँ का फिगर 34-28-34 है और 5 फुट 6 इंच की लम्बाई गोरा रंग क्या क़यामत लगती है.

मेरी माँ न्यू ईयर पर मेरे साथ रहने आई थी क्योकि में 6 महीने से जॉब की वजह से घर नही गया था में हमेशा ही माँ को चोदने का सपना देखकर मुट्ठ मारता था और उनकी पेंटी चुरा के उसे सूँघा करता था जब मेंने माँ को देखा यार मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया क्या क़यामत लग रही थी मैने माँ को गले लगाया और हम घर आ गये मेरा कमरा फ्लेट में है.

माँ आते ही फ्रेश होने चली गयी माँ जब नहा के निकली तो माँ ने क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहना था और क्रीम कलर की ब्लाउज जिसमे उनका सफ़ेद ब्रा दिख रहा था मुझे ऐसा लगा की इस वक़्त उनको पकड़ लूँ और चोद दूँ पर कंट्रोल किया क्योकि मेरी हिम्मत उतनी नही थी.
हमने खाना खाया यहाँ वहाँ की बाते की और फिर माँ बोली की में सोने जा रही हूँ मैने कहा माँ क्या में तुम्हारे साथ सो सकता हूँ में दिल्ली में कभी कभी माँ के साथ सोता था तो माँ ने हाँ बोल दिया हम कमरे में गये बड़ा बेड था ठंड बहुत पड़ रही थी और हम एक ही रजाई में लेटे थे बात करते करते माँ सो गयी पर मुझे नींद नही आ रही थी.

माँ अपना एक हाथ सर पर रख कर सो रही थी और उनके बूब्स सांस की वजह से उपर नीचे हो रहे थे अब मुझसे रहा नही गया और में माँ के और करीब जा कर लेट गया और अब मेरा लंड उनकी कमर पर टच हो रहा था मैने धीरे से अपना हाथ माँ के पेट पर रखा माँ हिली नही तब मेंने धीरे से अपना हाथ माँ के सीधे बूब्स पर रख दिया और सहलाने लगा माँ हिली मैने तुरंत अपनी आँख बंद कर ली माँ ने आँख खोली और मेरा हाथ बूब्स पर से हटा के अपने पेट पर रख दिया और सोने लगी.
फिर मेंने कुछ देर इन्तजार किया की माँ सो जाये और मैने फिर से बूब्स पर हाथ रखा क्या सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स थे जैसे ही मैने उनका बूब्स दबाया माँ ने तुरंत आँख खोल दी और मेरा हाथ पकड़ लिया बोली बेटा क्या कर रहे हो ये ग़लत है अब मै हिम्मत करके उनके उपर चड गया और उनके होठो को चूसने लगा वो छटपटाने लगी और मुझे धक्का मारने लगी पर में नही हटा कुछ देर बाद माँ भी मुझे किस करने लगी मेरे होठ को चूसने लगी 10 मिनिट तक किस करने के बाद मैने माँ के होठो को छोड़ा.
माँ मेरी आँखों में देख कर बोली बेटा अब मत रुक मैं बहुत साल से प्यासी हूँ आज बुझा दे मेरी प्यास ये सुनते ही मैने उनकी साड़ी हटा दी और आइसक्रीम की तरह उनके गले गाल और होठ चूसने लगा माँ भी पागल हुये जा रही थी माँ ने मेरे सारे कपड़े उतार दिये मैने भी माँ की साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार दिया माँ सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी मै एक साइड में हो कर उनको देखने लगा किसी अप्सरा से कम नही लग रही थी.
माँ ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपने उपर खींच के चूमने लगी और मै माँ को चूमे जा रहा था मैने माँ की ब्रा खोल दी और और उनके निपल्स को काटने लगा माँ भी हाँ बेटा आआआहह काटो काट लो राज चूस लो आआअहह सस्स्स्स्स्स्शह आनाआघह काट राज काट आआआहह ह्म्‍म्म्मममममम आआहहाआहह और मेरे बालो को ज़ोर से खीच कर अपने बूब्स पर दबा रही थी

मैने माँ को उल्टा लेटा दिया और उनके कन्धो और उनकी पूरी पीठ को चाट रहा था और माँ आआअहह ह्म्‍म्म्ममममममम राज आआआआहह ह्म्‍म्म्ममममममममम आआआअहह राज चाटो राज मैने भी माँ को आआहह माँ क्या जिस्म है तेरा आआहह माँ बोली बेटा तू मुझे प्रिया बोल गाली दे राज चाट साले मादारचोद चाट मैंने धीरे से माँ की पेंटी के उपर से उनकी गांड काटने लगा फिर माँ की पेंटी अपने दांत से खीच कर उतार दिया और उनकी गांड चाटने लगा और राआज्जजज्ज्ज्ज्ज्ज चाट चाट साले चाट अपनी प्रिया की गांड चाट साले आआआनाआअहह चाट.
फिर मैने माँ को सीधा लेटा दिया उनकी चूत से निकले पानी ने बिस्तर को गीला कर दिया था मैने अब उनके पैरो के बीच बैठ कर उनके पैरो को फैला कर उनकी चूत को अपने हाथ से फैला के उनकी चूत के अंदर वाले हिस्से को चाटने लगा माँ पागल हो रही थी राआआआअशज्जजज्ज आआआअहह चाआटततटतत्त आआआहह साले चाट मादारचोद चटाआआअटतततटतफ तेरे बाप ने कभी मेरी चूत नही चाटी तू साले मादरचोद चाटततटटटटतत्त कहते कहते माँ का जिस्म थोड़ा टाइट हुआ और वो झड़ गयी और माँ ने पूरे रस को चाट लिया.

अब माँ बोली राज अब चोद अपनी माँ को चोद मै माँ के उपर लेटा और माँ ने मेरे लंड को अपनी चूत पर रखा और बोला राज धीरे से बहुत दिनो बाद चुदने जा रही हूँ मैने धीरे से अपना लंड अपनी माँ की चूत में धीरे धीरे से डाला और माँ के उपर लेट गया जब लंड पूरी तरह अंदर चला गया माँ बोली राज चोदो मुझे चोदो.

मैं धीरे धीरे से माँ को चोदने लगा माँ आह राज हाँ राज चोदो राज आआअहह आह आह आह आह आह आह चोदो राज आज इस चूत की गर्मी बुझा दो आआहन चूत का कचूमर बना दो आआअहह चोदो आआअहह आआआअहह हा हा हा हा राज चोदो राज कोँम्म्मममम्मूऊऊँ न्‍न्‍नणणन् आह आह आह आह चोद मादरचोद चोद अपनी माँ को माँ आज दो बार झड़ चुकी थी मैं भी झडने वाला था मैने बोला माँ आज़ में कहाँ झड़ने वाला हूँ.

माँ बोली राज अंदर ही डालो अंदर ही छोड़ दो आआसस्स्स्स्स्शह आआआआहाहह प्रिया आइ लव यू आआआआआआहह करके में झड़ गया और हम दोनो उसी तरह नंगे सो गये।
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08-20-2017, 10:40 AM,
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कहानी न्यू ईयर की

यह कहानी न्यू ईयर की है जब शाम को मौका पाकर के मेरे पापा ने मुझे चोद दिया वैसे तो में पापा से कई बार चुद चुकी

हूँ मगर इस बार नये साल की रात में चुदने का मज़ा ही दूसरा था यह बात है की शाम के 5 बज रहे थे में ऑफीस से निकली और घर की और चल दी में भी नये साल की पार्टी उम्मीद में खोई हुई थी तभी मेरे मोबाइल पर एक मैसेज आया मैने देखा तो पापा का था.

वो मुझे विश कर रहे थे और लिखा था की बेटी अगर कुछ मज़ा लेना चाहती हो तो पार्क रॉयल होटल में आ जाओ में वहाँ तुमको किसी से मिलाना चाहता हूँ में समझ गई की पापा ने कोई मुर्गा फँसा लिया है और उसके साथ मिल के मेरी चुदाई का प्रोग्राम रखा होगा में मन ही मन बहुत खुश हो गई मेरी चूत ने पानी छोड़ दियाथा में तुरंत एक ऑटो कर के घर पहुँची और कपड़े बदल कर सीधी पार्क रॉयल होटल पहुँच गई पापा ने जिस रूम में कहा था में सीधी वहीं चली गई दरवाजा खुला में देख कर हक्का बक्का रह गई.

वो आदमी कोई और नही मेरी कंपनी का मालिक था मुझे देख कर बोला अरे आशा तुम में तो तुमको चोदने के बारे में कई बार सोच चुका था मगर में सोच भी नही सकता था की आज नये साल के मौके पर में तुमको चोद पाउँगा भगवान का लाख लाख शुक्रिया है की तुम आ गई हो आज बहुत मज़ा आने वाला है में मुस्कुरा कर अंदर पहुँच गई बेड पर मेरे पापा हाथ मे शराब का गिलास लिये बैठे थे में उनको देख के मुस्कुरा दी वो भी मुस्कुराये में सोच रही थी की पापा मुझे चोदने का कोई भी मौका नही छोड़ते है आज मेरे बॉस के साथ भी मुझे चोदने आ गये थे.

में नखरे करती हुई पापा के पास पहुच गई और उनके पास जा के बैठने लगी मगर मेरे पापा एक हरामी ज़ात के है फ़ौरन अपनी उंगली मेरी गांड में दे दी में उछल गई उई क्या करते हो पापा मेरा बॉस एकदम से खड़ा हो गया हहाई यह तुम्हारे पापा है में मुस्कुरा के बोली हाँ क्यो में हैरान हूँ की कोई पिता अपनी बेटी को हाँ में ज़ोर से हँसीयह पिता नही है यह मेरे पति भी है जब हम दोनो का मन होता है तो हम दोनो चुदाई कर लेते है मेरे पिता होने से पहले यह एक मर्द है और में एक बेटी होने से पहले एक लड़की हूँ तो मेरी चूत पर मेरे बाप का पहला अधिकार है इसलिये में उनको कभी मना नही करती समझे.

बॉस ने मुझे देखा और बोला काश की तुम्हारी जितनी समझदार हर लड़की हो जाये तो हम जैसो को यहाँ वहाँ मुँह नहीं मारना पड़े मैने उसे कहा की कोई बात नही सर आप अपनी बेटी का नम्बर मुझे दे दो में आपकी बेटी को आपसे ना चुदवा दूं तो मेरा नाम बदल दीजियेगा वो खुश हो गया और उसने तुरंत मुझे अपनी बेटी का नम्बर दिया और बोला आशा यह काम जल्दी करवाना में उसकी जवानी को जब भी देखता हूँ तो में बहुत खुश होता हूँ मगर साली चुदने को तैयार नही होती है में क्या करूँ.

मैने उनसे पूछा की आज आपकी बेटी क्या कर रही है मुझे नही पता शायद कही घुमने गई होगी अच्छा तो में पता करूँ मैने यह कह के अपने मोबाइल से उसको फोन मिला दिया उसका नाम रिचा था हेलो..“ “ हेलो.. कौन.. में आशा बोल रही हूँ में रिचा से बात कर रही हूँ जी हाँ आप को मैने पहचाना नही जी आप मुझे नही जानती हैं में आपके पापा की दोस्त हूँ मेरा नाम आशा है. “ अच्छा..जी.. बोलीये..क्या बात है

मुझे आपको कुछ दिखाना था अगर आप फ्री हों तो में आपके पापा के बारे में बहुत कुछ जानती हूँ और उनको एक्सपोज़ करने का यह एक अच्छा मौका है वो आज पार्क रॉयल होटल में किसी के साथ मज़े ले रहे है अगर देखना चाहती हो तो वहाँ पहुँच जाओ में तुमको रूम नम्बर बता देती हूँ उनको वहाँ पर पकड़ सकती हो तुम झूठ बोल रही हो वो ऐसे नही है में अपने पापा को जानती हूँ समझी नही तुम उनको नही जानती हो में उनका नया रुप तुमको दिखा सकती हूँ वो तो ऐसा खराब आदमी है की तुमको भी नही छोड़ेगा.

अगर मौका लगे तो तुमको भी चोद सकता है शट-अप कुत्तिया कौन बोल रही है अरे मेरी प्यारी रंडी अगर तुमको विश्वास नही होता तोआकर अपनी आँखों से देख लो ठीक है चुड़ैल में आ रही हूँ मेने फ़ोन बंद करते ही मेरे बॉस बोले यह क्या किया वो यहाँ आ गई और बात नही बनी तो क्या होगा अरे कैसे मर्द हो अगर प्यार से ना माने तो ज़बरदस्ती चोद देना कोई प्रोब्लम होगी तो मेरे पापा तो है ही साथ देंने के लिये तभी मेरे पापा ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुये बोले वो जब आयेगी तब की तब देखेंगे.

अभी तो कुछ दिखा दो मैने उनको देखा और मुस्कुराती हुई बोली पापा तुमसे कुछ छुपा थोड़ी है मैने अपनी कोट उतार के अपनी टी-शर्ट उतार दी और अब मेरे बदन पर एक थर्मा-कोट था उन्होने मुझे मेरे बॉस की तरफ़ धक्का दे दिया में उनसे लिपट गई मेरे बॉस यही कोई 42 साल के मर्द होंगे मगर उनका शरीर काफ़ी भरा हुआ लग रहा था उन्होने मुझे पकड़ा और मुझे किस करने लगे में उनकी बाहों में मधहोश सी होती चली गई

उन्होने मेंरी कोट को उतार कर मेरी ब्रा खोल दी मेरे पापा भी कम नही थे वो नीचे से मेरे कपड़े उतारने के लिये लग गये मेरी पेन्ट उतार कर मेरी पेंटी को उतार रहे थे और मेरी चूत को सहलाने लगे मेरी चूत आग उगलने लगी थी आज सुबह से ही मुझे लग रहा था की में आज किसी ना किसी से तो चुदूगी जरुर। तभी मैने अपनी चूत को तैयार कर लिया था मतलब बालो को साफ कर लिया था।
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08-20-2017, 10:40 AM,
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नमकीन चूत 

दोस्तो मे अपनी एक भाभी की स्टोरी बताने जा रहा हूँ
उनका नाम अंकिता है वो 29 साल की है मैं जयपुर मे जहाँ रहता हूँ उसी सोसाइटी मे मेरे पास
वाले फ्लेट मे रहती है उनके पति यानी कमल भैया किसी कम्पनी मे एग्ज़िक्युटिव है तो वो पूरे दिनभर बाहर रहते है और भाभी भी जॉब करती है तो उनसे कभी कभी मुलाकात हो जाती है अंकिता भाभी का फिगर बहुत मस्त है 36-28-36 है मैने अब तक भाभी के साथ दो वेलेंनटाइन डे मनाये है और दोनो ही वेलेंनटाइन डे पर भाभी को सेक्सी से दो हॉट ड्रेस मँगवाकर दी है जो उन्हे बहुत पसंद आई है.

मैं भाभी से 2 साल पहले सोसाइटी के जिम मे मिला था पहले ही हेलो से बात स्टार्ट हुई फिर स्माइल पास करना कभी कभी मैं उन्हे जिम मे एक्सरसार्इज़ करते हुये देखता रहता तो वो आकर पूछती थी क्या देखता रहता है मुझमे तो मैं कह देता था की भाभी आप मे तो उपर से नीचे तक बहुत कुछ है दिखाने को लेकिन आप कभी दिखाती ही नही हो हमेशा स्माइल करके चली जाती हो उनका फ्लेट और मेरा फ्लेट पास पास है और हम दोनो के बेडरूम की बाल्कनी भी पास पास है तो हम बहुत बार बाल्कनी मे खड़े होकर बात करते थे.

एक दिन भैया और भाभी रात को चुदाई कर रहे थे और उनके रूम से आवाज़ मेरे रूम मे साफ साफ़ सुनाई दे रही थी मुश्किल से 5 मिनिट ही हुये थे भैया बाल्कनी मे आकर खड़े होकर सिगरेट पीने लगे मैं भी सिगरेट पीने बाल्कनी मे चला गया और ऐसे ही गप्पे मारने लगा अगले दिन भाभी मिली जिम मे तो मैने उन्हे कमेन्ट कर दिया की भाभी दो दो बार मेहनत कैसे करती हो पहले जिम में और रात मे भैया पर तो वो कुछ बोली नही और चली गयी.

मै अगले दिन उनके फ्लेट पर गया और उनसे पूछा भैया कहाँ है तो उन्होने कहा की वो ऑफीस गये है महीने का आखरी चल रहा है इसलिये मैने उनसे फिर वही सवाल किया तो वो रोना स्टार्ट कर दिया तो मैने पूछा ऐसा क्या हुआ तो मुझे हग करके रोने लगी मैं समझ गया की भैया से भाभी संतुस्ट नही है फिर क्या था भाभी को थोड़ी सी बाते की और उन्हे सेट किया फिर मैने उन्हे आइ लव यू बोल दिया उसने कुछ नही बोला मैने उन्हे किस किया लिप्स पर वो रेस्पॉन्स दे रही थी यारो क्या किस था मुझे तो लगा की यह तो आज मुझे खा जायेगी या मेरे लिप्स फिर 15 मिनिट किस करने के बाद वो खड़ी हुई और किचन मे चली गयी अब मेरा 8 इंच का लंड तैयार था मैं भी उनके पीछे किचन मे गया और उनके पीछे जाकर उनकी गर्दन पर किस करने लगा.

फिर धीरे धीरे मैने उनके एयररींग्स निकाल कर किस करने लगा और उनके साथ खेलने लगा भाभी ने उस दिन घर पर टॉप और स्कर्ट पहना था फिर उन्होने अपना फेस मेरी तरफ घुमाया और मुझे बहुत टाइट किस किया और धीरे से बोला की राहुल फक मी में आज से तुम्हारी हूँ फिर क्या था यह सुनते ही मैं उन्हे उनके बेडरूम मे ले गया और बेड पर लेटा दिया और उनकी आँखे बंद कर दी अब धीरे धीरे मैं उनके फेस पर किस करने लगा फिर धीरे धीरे गर्दन पर से होते होये कन्धो तक आया फिर मैने भाभी की टॉप की स्ट्रीप साइड मे कर दी और उनके कन्धो और गर्दन पर किस करने लगा उन्होने आहें भरना स्टार्ट कर दिया ओह राहुल्ल्ल्ल आआआआआआअहह. आहें वो भर रही थी और हालत मेरी ख़राब हो रही थी फिर मैंने उनका टॉप उतार दिया उन्होने ब्रा नही पहनी थी उनके बूब्स मेरे सामने थे और निपल भी टाइट हो रहे थे

मैने एक एक करके उनके निपल्स चूसना स्टार्ट कर दिया फिर उनके पेट पर किस करता हुआ मैं उनकी चूत तक आया पहले मैने उनकी कमर पर बहुत किस करी फिर उनका स्कर्ट उतार दिया अब वो सिर्फ़ अपनी लाल पेंटी मे थीमैंने उन्हे पूछा अंकिता कैसा चाहती हो सॉफ्ट और वाइल्ड सेक्स तो उन्होने कहा स्टार्ट करो सॉफ्ट एंड वाइल्ड मैं समझ गया आज यह बहुत चुदने के मूड मे है मैने उसकी जांघ पर किस करना स्टार्ट किया तो वो पागल हो गयी थी फिर एकदम से वो उठी और और मेरा सर पकड़कर अपनी चूत के पास ले गयी और बोली राहुल मत तड़पा और चाट मेरी चूत को मैने उनकी पेंटी उतारी और जैसे ही उनकी चूत के पास अपने लिप्स लेकर गया उन्होने मेरे सर को अपनी चूत मे घुसा दिया एक बार तो मैं साँस भी नही ले पा रहा था.

फिर मैने उनकी चूत चाटना स्टार्ट किया क्या नमकीन चूत थी मुझे बहुत मजा आ रहा था आह वो चिल्ला रही थी चाट राहुल मेरी चूत आआआआआआआहह और चाट खा जा मेरी चूत को आआआआआआआहह फिर उसने मुझे बेड पर लेटाया और मेरे मुँह के उपर अपनी चूत को रखकर रगड़ने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और उसे तो बता नही सकता पूरे रूम में आआआअहहस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह आआआआआआहह की आवाज़ आ रही थी फिर उसने मेरी जीन्स उतारी और मेरा लंड निकाल कर मुँह मे लेकर चूसने लगी क्या गर्म मुँह था उसका वो एक नंबर की एक्सपर्ट थी लंड चूसने मे हम कम से कम 20 मिनिट तक ऐसे ही रहे और फिर हम दोनो एक साथ झड़ने वाले थे तो उसने मुझे कहा की अभी मत निकालना मैने तो अपने आप पर कंट्रोल किया पर वो नही कर पाई.

फिर हम सीधे हुये और वो बोली राहुल अब डाल दो ना मैने फिर अपने पर्स मे से कन्डोम निकाला और उसे दिया उसने फट से कन्डोम लगाया और खूब सारा लूब्रिकेंट भी लगाया मेरे लंड पर जो मैं अपने साथ लाया था और मेरे लंड को अपनी चूत के पास ले गई और बोली डाल दो राहुल मैने एक झटका दिया और पूरा का पूरा 8 इंच का लंड उसकी चूत के अंदर चला गया उसे थोड़ी तकलीफ़ हुई लेकिन थोड़ी देर बाद वो बोली राहुल चोद दो अपनी रांड़ को कुत्तिया की तरहफिर मैने उसे चोदना स्टार्ट किया वो आआआआआआआआआहह फुउऊऊउक्ककककक मीईईईईई रहुल्ल्ल्ल्ल आआआआआआआहह हमम्म्ममममममममममम ममममाआआआआअ फफफफफफफफफफफूक्कककककककककककककककककक्क्क़मम्म्ममीईई कर रही थी और पूरे रूम मे पचक पचक की आवाज़ हो रही थी.

फिर मैने उसे डॉगी स्टाइल मे आने को कहा और उसके उपर चड़ गया और चोदने लगा सच में बहुत मजा आ रहा था और मैने कम से कम 20 मिनिट तक उसे चोदा और उसके बाद उसे बोला की मेरा आने वाला है तो वो बोली की वो अब तक 3 बार झड़ चुकी है और मेरे आने का इन्तजार कर रही थी उसने मेरे लंड से कन्डोम हटाया और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी फिर सारा पानी अपने बूब्स और फेस पर डलवा लिया फिर हम दोनो ने फटाफट अपने आपको साफ किया और तैयार हुये और चाय पीने बैठे ही थे की भैया आ गये किस्मत अच्छी थी की हम बच गये तब से लेकर आज तक 2 साल से हम महीने मे कम से कम 15 बार चुदाई करते है और बहुत इन्जॉय करते है.
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08-20-2017, 10:41 AM,
#5
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
में कुणाल है, जयपुर का रहने वाला हूँ, मैं डॉक्टर हूँ।
बात उन दिनों की है जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद एक सीनियर डॉक्टर के क्लिनिक में काम करने लगा था…
वहाँ उसने एक मस्त सी माल को भी लगा रखा था काम पर…
उन दिनों कॉलेज से निकलने के बाद मुझ पर जवानी के मजे लेने का ज्यादा ही जोश था और मैं हर लड़की को बस एक बार प्यार करने की ही सोचता था। क्लिनिक में काम करने वाली उस अप्सरा का नाम मालविका था और उसका कहर ढाता जिस्म किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी था… वो बहुत ही खूबसूरत और छरहरे बदन की थी, उसका बदन 34-30-36 का तो होगा, उसके मम्मे बड़े ही नुकीले थे और उसकी हर चाल के कदम से उसकी हिलते हुए चूतड़ किसी के भी सोते लंड को खड़ा करने के लिए काफी थे।
मैं भी उस हसीं मालविका का दीवाना हो चला था.. मन ही मन मैं उसे सोच कर मुठ मारा करता था.. मैं उसे मन ही मन चोद भी चुका था।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, एक दिन मेरा सीनियर किसी मरीज को देखने बाहर गया हुआ था और मैं उसके कहने पर क्लिनिक जल्दी पहुँच गया था.. क्लिनिक पहुँच कर मैं मालविका का इन्तजार करता रहा लेकिन वो समय पर नहीं आई।
बाहर मौसम भी बारिश का हो गया था तो मैंने उसे फोन करना ठीक समझा… क्लिनिक से ही मैंने उसका नंबर निकाला और उसको फोन किया तो उसने मुझे बताया कि वो रास्ते में ही कहीं रुक गई है और बारिश के कारण थोड़ी देर से आ पायेगी..
मैं भी उसका इन्तजार करने लगा..
इन्तजार ख़त्म हुआ और वो मेरे सामने ही थी.. उस दिन उसने नीले रंग का सूट पहना हुआ था जो पूरी तरह से भीग चुका था।
वो क्लिनिक के अन्दर आई और ठण्ड के मारे कांप रही थी, उसका सूट उसकी जवानी छुपाने में नाकाम हो रहा था… पूरा सूट उससे चिपका जा रहा था और वो अपने हाथों से अपनी इज्जत छुपाने की कोशिश कर रही थी।
और मेरी नजर उसके मम्मों से हट ही नहीं रही थी।
उस दिन उसने काले रंग की ब्रा पहनी थी जो कमीज में से साफ़ साफ़ दिख रही थी।
वो अन्दर जाने लगी कि तभी मैंने उसे रोका।
उसे हल्की हिचकिचाहट तो हुई लेकिन फिर वो रुक गई… पलट कर उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसे दूर से ही चुम्बन का इशारा कर दिया…
वो शरमा गई और अन्दर जाने लगी… मुझे लगा कि कहीं वो बुरा न मान जाए और मैं उसके पीछे ही चल पड़ा। वो बाथरूम में चली गई और कपड़े बदलने लगी, मैं भी चाबी के छेद से सब कुछ देखने लगा। उसने अपने सारे कपड़े उतारे और शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बदन को तौलिये से पौंछने लगी..
अचानक ही वो रुकी और अपने मम्मों पर हाथ रखकर शीशे में देखने लगी..जैसे कि उसे अपने आप से खेलने का मन किया हो..
उसके मम्मे देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मैं वहाँ से हटकर बाहर की तरफ आ गया। मैंने क्लिनिक को अन्दर से बंद कर दिया और उसका बाहर आने का इन्तजार करने लगा..
5 मिनट बाद वो बाहर आ गई और यह देखकर स्तब्ध सी रह गई कि क्लिनिक अन्दर से बंद था…
उसने मुझसे पूछा- क्लिनिक क्यों बंद कर दिया?
मैंने उसे बोला- आज काम करने का मूड नहीं है…
तो वो भी मेरे सामने आकर बैठ गई..
उसके बाल अभी भी गीले थे जिस कारण बालों से थोड़ा पानी उसके चेहरे पर भी आ रहा था।
उसके गीले बाल देख कर मुझे लगा कि शायद उसे ठण्ड लग रही होगी इसलिए सामने की थड़ी से ही मैंने दो चाय मंगा ली।
चाय पीते पीते मैं उसे ही देख रहा था… वो समझ चुकी थी कि मेरी नजर उसके मम्मों से हट नहीं रही थी।
हमारे बीच बस शांति ही थी, हम चाय पी रहे थे कि तभी अचानक वो हुआ जो सोचा भी नहीं था…
असल में ठण्ड के मारे वो कांप रही थी और चाय का गिलास उसके हाथ में हिल रहा था, मैंने ग्लास पकड़ना चाहा कि कहीं गिर न जाए…
जैसे ही मैंने उसका हाथ छुआ, वो मुझे देखने लगी और हाथ पकड़ लिया और बस नजरों में देखने लगी… मैं भी सोचने लगा कि यह हुआ क्या..
कि तभी अचानक वो मेज के इस पार आ गई और मेरे होंठों पे होंठ रख दिए.. इससे पहले मैं कुछ समझ पाता, वो मुझसे पूरी तरह से चिपक चुकी थी जैसे नागिन हो…
उसका ऐसा करना मुझे अच्छा लग रहा था और मैं भी उसका साथ देने लगा.. मैं उसके होंठों को कस कर चूस रहा था और मेरा हाथ भी उसके शरीर को टटोल रहा था… हाथ उसकी पीठ पर था और वो मेरी शर्ट उतारने लगी…उसने मेरे अन्दर अपने लिए वासना जगा दी थी, मेरा लंड तन गया था.. मैं भी उसका साथ देता जा रहा था।
मैंने कुर्ते के ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाना शुरू किया और वो मेरे होंठ चूसती जा रही थी.. उसके सख्त मम्मों को दबाने में बड़ा ही मजा आ रहा था और मैं बस उस समय उसके मम्मों को ही प्यार किये जा रहा था। मेरा ऐसा करना उसे और गरमाता जा रहा था और वो बस इ.. ई… ईईई…आह … किए जा रही थी… शायद उसे मेरा ऐसा करना अच्छा लग रहा था।
मैंने मम्मे दबाते हुए उसका कुर्ता हटा दिया ! क्या मम्मे थे उसके ! और बारिश से भीग जाने के कारण उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी…
बाहर बादल काफी गहरा गए थे, जिस कारण कमरे में ज्यादा उजाला भी नहीं था और थोड़े से उजाले में उसके मम्मे दूध जैसे चमक रहे थे… मैंने उन्हें दबाना छोड़ कर खाना शुरू कर दिया…
मेरा मुख उसके मम्मों को चूस रहा था और मेरी एक उंगली उसके मुँह में थी जिसे वो लंड की तरह चूस रही थी। उसने और जोर से अपनी चूचियों को मेरे चेहरे पर दबाते हुए कहा- कुणाल, चूसो इन्हें.. और जोर से चूसो… ओह ओह ओह ओह ओह… हाँ हाँ हाँ ऐसे ही… चूसो इन्हें…
उसका ऐसा कहने से जैसे मुझमें और जोश आ गया था और मैं बस उसके मम्मों में घुसा जा रहा था..
उसने बोला- आज पहली बार ऐसा कुछ हो रहा है मेरे साथ और मुझे ये सब बहुत अच्छा लग रहा है।
मैं भी बोला- हाँ, आज पहली बार मैं किसी लड़की के इतना नजदीक हूँ, मुझे बड़ा आनन्द आ रहा है..
और मैं उसके चुचूकों पर काटने लगा… इससे उसके मुंह से दर्द और आनन्द भरा स्वर निकल रहा था।
एक हाथ से उसके मम्मे को नीचे से पकड़ रखा था, निप्प्ल को मैंने अपने दांतों के बीच दबा दिया था और वो बहुत ज्यादा उत्तेजित होती जा रही थी और मेरा चेहरा अपने वक्ष पर बहुत जोर से दबा रही थी।
मैंने भी सही समय सोच कर उसकी सलवार में हाथ डाल दिया, उसने सलवार के अन्दर उसने पैंटी भी नहीं पहनी थी जिस कारण मेरा हाथ सीधा उसकी चूत से टकरा गया, उसकी चूत छूने में बड़ी चिकनी लग रही थी, एक भी बाल नहीं था, जैसे अभी ही शेव करके आई हो… उत्तेजना के कारण उसकी चूत काफी गीली भी हो चुकी थी…
मैंने मम्मों को चूसते चूसते ही उसकी चूत में उंगली करना शुरू कर दी.. जैसे ही उंगली उसकी चूत में गई वो बड़ी जोर से चिल्लाने लगी, वो जोर जोर से ओ ओह… ओह.. ओह.. ओह जैसे आवाजे निकलने लगी… और साथ ही अपने चूतड़ भी हिलाने लगी।
मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे भी उसके शरीर से अलग कर दिया।
एकाएक उसने मुझे पकड़ा और अपने ऊपर खींच लिया और मेरे होठों को फिर से चूसने लगी और बोली- सारे मजे खुद ही लोगे क्या? मुझे मजे नहीं करने दोगे?
मैं हँसा और बोला- जो करना है कर लो, मैं तुम्हारा ही तो हूँ..
यह सुन कर वो नीचे हुई और मेरी जींस के बटन खोलने लगी, उसने जींस के बटन खोल कर जींस अलग कर दी और मेरी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया…
उसके ऐसा करने से मेरे लंड में करंट सा दौड़ गया और लंड पहले से ज्यादा कड़क होने लगा…उसने चड्डी भी दूसरे हाथ से हटा दी और लंड को एकटक देखने लगी और बोली- इतना बड़ा? यह इतना बड़ा होता है क्या?
उसके चेहरे से डर साफ़ दिख रहा था…
मैं बोला- अरे मेरी जान, डरना कैसा, यह प्यार करने की चीज है, मजे लो और मस्ती मारो… यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।
लेकिन अब भी उसे मेरे 7 इंच लम्बे और 2 इंच मोटे लंड को देखकर डर सा लग रहा था। मैंने उसका डर दूर करने के लिए उसका चेहरा पकड़ा और लंड उसके होंठों पर सटा दिया। उसने भी ज्यादा झिकझिक नहीं की और लंड के टोपे को चाटने लगी। मैं उसके बाल पीछे से पकड़े था और वो लंड के टोपे को चाट रही थी… मैंने एक बार उसे थोड़ा और नीचे की तरफ धकेला और उसने पूरा लंड लेने की कोशिश की लेकिन आधे में ही हट गई और बोली- अगर और लिया तो उलटी हो जायेगी !
मालविका मेरे लंड को अपने मुँह में लेना तो चाहती थी लेकिन डर डर के आगे बढ़ रही थी। एक बार को तो मुझे भी लगा जैसे वो सच में ही उलटी करने वाली हो…
फिर 3-4 मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा और लंड को कुल्फी की तरह चाटने लगी और अपने जीभ से चाट भी रही थी। उसके ऐसा करने से लंड और ताव खा रहा था और तड़पता हुआ पूरा उसके मुँह में घुस रहा था…
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था, मैं भी अब उसके साथ मरीज के लेटने वाली मेज पर 69 की अवस्था में आ चुका था और उसकी चूत चाट रहा था, वो मेरे लंड को चूसे जा रही थी।
हम लोग बस एक दूसरे में खोये हुए थे और क्लिनिक अन्दर से बंद होने का कारण किसी के आने का डर भी नहीं था।
कुछ मिनट तक 69 अवस्था में रहने के बाद अचानक से मालविका जोर जोर से हिलने लगी और सारा पानी मेरे मुंह पर ही छोड़ दिया… उसका स्वाद बड़ा ही अच्छा था और मैं अब भी उसकी चूत चाटे जा रहा था और उसे गरम करने लगा… वो अब भी मेरा लंड मुँह में लिए थी…3-4 मिनट बाद ही वो फिर से तपने लगी और मुझसे बोली- कुणाल, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है… प्लीज अब मेरी गर्मी शांत कर दो… और अपनी गाड़ी को सही जगह पार्क कर दो… इस जानवर का पिंजरा कब से इसके लिए तड़प रहा है…”
यह सुनकर मैं सीधा हुआ और उसकी चूत के पास आकर बैठ गया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख दिया, मुझे पता था कि इस अवस्था में सेक्स करने में मजा भी आता है और लड़की के अन्दर पूरा जाता है…
मैंने थूक निकाला और उसकी चूत पर लगा दिया और अपने लंड को ठीक उसके छेद के ऊपर टिका दिया। चूंकि आज तक मालविका ने किसी के साथ कुछ नहीं किया था तो उसकी चूत बड़ी ही मुलायम और सील बंद थी, मैंने अपने हाथों से उसकी चूत को थोड़ा सा खोला और लंड के टोपे को थोड़ा अन्दर घुसाया। जरा सा घुसते ही वो चिल्ला पड़ी और लंड बाहर निकालने को कहने लगी लेकिन मुझे पता था की पहली बार में लड़कियाँ ऐसे ही कहती हैं, मैंने उसकी कमर के नीचे हाथ रखा और थोड़ा सा ऊपर किया। ज्यादा टाईट होने के कारण उसकी चूत में लंड बड़ी मुश्किल से ही जा पा रहा था, मैंने थोड़ा सा धक्का लगाया और लंड थोडा और अन्दर चला गया…
उसने मुझे धक्का देकर हटाने की बहुत कोशिश की मगर मैं हिला नहीं और चूत में आधे लंड को घुसा दिया। वो दर्द के मारे चिल्ला रही थी बहुत जोर से, उसकी चीख से सारा क्लिनिक गूँज रहा था।
मैं आधे लंड को घुसा कर रुक गया ताकि उसका दर्द थोड़ा कम हो जाए… दो मिनट बाद मैंने एक और धक्का लगाया और पूरा लंड उसकी चूत में समा चुका था। शायद उसे ज्यादा दर्द हो रहा था जिस कारण उसकी आँखों में आँसू आ गए थे, वो जोर जोर से आह… आह… आह… उई… इ..ई..आह… ह्ह…करने लगी और उसके चिल्लाने से मुझे भी अच्छा लग रहा था।
मैं धक्कों पे धक्के लगाये जा रहा था और कुछ के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।
मालविका की हालत बड़ी ख़राब थी, उसकी चूत से खून बह रहा था, उससे चला भी नहीं जा रहा था… मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसे बाथरूम में ले गया और अपने हाथों से ही उसकी सफाई की।
फिर मैंने मालविका को लिटा दिया वो मुझसे नजर नहीं मिला पा रही थी।
जब बाहर मौसम ठीक हो गया तो वो जाने लगी… मैंने उससे उस समय कुछ नहीं कहा… वो चली गई और मैं अगले मौके की इन्तजार करने लगा।
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08-20-2017, 10:41 AM,
#6
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
बहन के साथ रंगीन रातें

मैं अपनी बहन के बारे में बता दूँ !

मेरी बहन का नाम शैली है और वो मुझसे तीन साल छोटी है, दिखने में बहुत सुंदर है, उसके मम्मे 32 इन्च के हैं और गांड के बारे में क्या बताऊँ ! कोई भी लौड़ा खड़ा हो जाये उसकी मारने के लिए। अब मैं अपनी कहानी पर आता हूँ !

पहले मेरे मन में एसा कोई विचार नहीं था अपनी बहन को चोदने का ! लेकिन वो दिन पर दिन निखरती जा रही थी।

एक दिन घर में कोई नहीं था, सब बाहर गये थे और मैं अपने कॉलेज गया था। मेरी छुट्टी जल्दी हो जाने के कारण मैं घर जल्दी आ गया।

जब मैं घर पहुंचा तो शैली नहा रही थी, उसने दरवाजे की चिटकनी नहीं लगाई थी क्योंकि घर में कोई नहीं था।

मुझे भी मौके की तलाश थी, मेरे दिमाग में एक तरकीब आई।

मैं जल्दी से उसके बाथरूम में घुस गया जैसे अनजाने में अंदर गया हूँ।

मेरी बहन एकदम नंगी खड़ी थी, मैं उसे देखता ही रह गया !

क्या माल थी मेरी बहन !

उसके शरीर पर पानी की बूँदें मोती सी लग रही थी।

मैंने उससे सॉरी बोला और बाहर आ गया। मेरे दिमाग में अभी भी उसका नंगा बदन घूम रहा था।

मेरी बहन मेरे साथ ही सोती है। घर में भी कोई नहीं था, खाना खाने के बाद हम दोनों टीवी देखने लगे। हम आपस में कोई बात नहीं कर रहे थे। जब हम सोने लगे तो थोड़ी देर में उसे नींद आ गई, मैं जाग रहा था।

मैं उसे सोया देख कर अपना काम शुरू करने लगा। सबसे पहले मैंने उसे आवाज लगाई, वो कुछ नहीं बोली तो मैं समझ गया कि मेरी बहन नींद में है।

मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके मम्मे सहलाने लगा। फिर थोड़ा सरक कर उसके पास हो गया और अपना लौड़ा निकाल कर उसकी गांड पर लगाने लगा। ऐसा करते हुए मुझे डर भी लग रहा था कि शैली जाग न जाये। लेकिन मुझे ऐसा करने में बहुत मजा भी आ रहा था।

थोड़ी देर मम्मे सहलाने के बाद मैं उसकी टी-शर्ट उतारने लगा। मुझे बहुत मुश्किल हो रही थी पर थोड़ी देर बाद उसकी पीठ नंगी थी।मैं उसके साथ चिपक गया और मेरा लौड़ा उसके लोवर के ऊपर उसकी गांड को लगने लगा। मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा। फिर वो थोड़ा हिली और पीठ के बल लेट गई।

अब मुझे उसके मम्मे नंगे करने थे। मैंने आराम से उसकी टी शर्ट ऊपर की और उसकी गर्दन तक ले गया। उसके 32 इन्च के मम्मे मेरे सामने थे। उसके गुलाबी चुचूकों को मैं अपनी दो उंगलियों में लेकर मसलने लगा। फिर मैंने एक चुचूक को अपने मुँह में डाल लिया और अच्छी तरह से चूसने लगा।

क्या मजा आ रहा था !

अब मेरी बहन जाग चुकी थी और मेरे बालों में हाथ फेर रही थी। फिर मैंने अपनी बहन की पूरी टीशर्ट निकाल दी।

अब मैं उसके होंठ चूसने लगा और उसके मम्मों को अपने हाथों से दबाने लगा। मैं उसका एक हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर ले गया और उससे सहलाने के लिए बोला।

वो बड़े मजे से मेरे लौड़े को सहलाने लगी।

अब मेरी बहन के चुदने का वक्त हो गया था, मैंने उससे कहा- मेरी बहना, तैयार हो जा ! 

तो बोली- किस लिए ? 

मैंने कहा- चुदने के लिए ! 

अब मैं उसका लोअर उतारने लगा तो उसने मुझे रोका।

मैंने कहा- साली, आज न रोक ! आज मैं जो करना चाहता हूँ, मुझे करने दे ! 

फिर उसने मुझे कुछ नहीं कहा और अब मैंने उसे पूरी नंगी कर दिया।

क्या लग रही थी साली ! क्या चूत थी कुतिया की !

फिर मैं ऊपर हुआ और अपना लौड़ा जबरदस्ती उसके मुंह में दे दिया और उसकी हलक में उतार दिया और 5 सेकिंड तक लौड़ा उसके हलक में ही रखा।

और जब मैंने लौड़ा बाहर निकाला तो बोली- ऐसा क्यों कर रहे हो मेरे साथ ? मैं कौन सा मना कर रही हूँ ? पर आप आराम से कीजिये ! 

मैंने कहा- मैं तुझे एक रंडी की तरह चोदना चाहता हूँ, मेरी रांड बहन ! 

और मैंने फिर उसे अच्छी तरह से लौड़ा चुसवाया और फिर उसकी मुलायम चूत चाटी।

फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी कोमल चूत पर लगाया और रगड़ने लगा।

क्या मजा आ रहा था !

मैंने एक झटका मारा और लंड का अग्र भाग उसकी चूत में घुसा दिया।

शैली बड़ी जोर से चिल्लाई !

मैंने कहा- कुतिया ! आज तू जितना मर्जी चिल्ला ले ! तेरी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं है आज ! 

फिर मैंने एक जोरदार झटका मारा और 5 इंच लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया। मेरी बहन बड़ी जोर से चिल्लाई जैसे अभी बेहोश हो जाएगी। उसकी आँखों में पानी आ गया।

जब मैंने उसकी चूत देखी तो वहाँ बहुत खून लगा था। पर मैं उसे बेरहमी से चोदता रहा। मैंने फिर एक जोरदार झटका मारा और अपना 7 इंच का लौड़ा अपनी प्यारी बहन की चूत में डाल दिया।

वो तड़फने लगी।

मैंने कहा- आज मेरी प्यारी बहना औरत बन गई है ! आज से तू मेरी रंडी है, मेरा जब दिल करेगा, मैं तुझे चोदूँगा मेरी रांड ! आःह्ह ! क्या मजा आ राहा है बहन को चोद कर ! 

मुझे नहीं पता कि मैं क्या-क्या बोल रहा था, पर मैंने झटकों की रफ्तार थोड़ी कम कर दी।

थोड़ी देर मेरी बहन रोती रही, फिर शांत हो गई।

मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है? 

तो बोली- भैया, अब दर्द कम है ! 

मैंने कहा- फिर मारूँ तेरी चूत तेजी से ? 

तो बोली- पहले मुझ पर रहम नहीं किया ! अब पूछ रहे हो ? 

तो मैंने कहा- अच्छा, अब तुझे कोई दर्द नहीं है गश्ती साली? 

तो बोली- नहीं भैया ! और अब बातें मत करो और चोदो अपनी रांड बहन को ! ठोको आज अपनी बहन की चूत ! 

मैंने झटकों की रफ़्तार तेज कर दी और अपनी बहन की चूत बजाने लगा।

वो आःह ऊओह्ह्ह्ह आआह्ह ! भाई और तेज करो ! आह्ह्ह भैया मैं झड़ रही हूँ ! कुत्ते, तेजी से मार अपनी बहन की चूत ! आआह्ह्ह्ह मैं मर गई। 

मैंने कहा- कुतिया साली ! ले अपने भाई को लौड़ा अपनी चूत में ! मैं भी झड़ने वाला हूँ रांड ! 

मैं उसकी आहें सुनते ही झड़ गया। मेरे लौड़े से वीर्य की धार मेरी बहन की चूत में निकली तो उसकी गर्मी पाकर मेरी बहन बड़ी जोर से झड़ी।

मैं उसके ऊपर ही गिर गया और उसके होंठ चूसने लगा।

मेरी रांड बहन बोली- कोई भाई ऐसा भी करता है? 

तो मैंने उससे कहा- मेरी रांड ! चूत और लौड़े का कोई रिश्ता नहीं होता ! 

फिर मैंने उसे अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़वाई, जिन्हें पढ़ कर उसे अच्छा लगा कि और दुनिया में और भी भाई हैं जो अपनी बहन को रंडी बना कर चोदते हैं।

मैंने अपनी बहन को कहा- मैं तो तुझे एक ऐसी गश्ती बनाऊंगा कि तू साली तीन-तीन लौड़े एक साथ लेगी मेरी बहन ! जो तेरी चूत, गांड और मुँह में होंगे ! क्यों मेरी रांड बनेगी न गश्ती? 

तो बोली- सच भाई? मैं भी यही चाहती हूँ ! और बाकी आपकी मर्जी ! आप जो मर्जी बनाओ मुझे ! मेरे दलाल भाई ! 

फिर तो मैं रोज चोदने लगा कुतिया को ! मेरे साथ ही जो सोती थी।

हम दोनों की रातें रंगीन हो गई थी।
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08-20-2017, 10:41 AM,
#7
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
मेरी ज्योति दीदी

ज्योति दीदी मुजसे 1 य्र बड़ी ह. ई आम 22 एअर ओल्ड और मी कजिन्टर इस 24 एअर ओल्ड. म जब क्लास 6त म था तब मुझे पहली&नबस्प; बार अट्रॅक्षन हुआ ज्योति दीदी को देख कर ओर&नबस्प; तब मुझे लगा की ज्योति मेरे लिए ह&नबस्प; ओर म तब से ज्योति डिड क साथ सेक्स करना चाहता था.
दीदी ओर मैं एक ही कॉलेज से एक ही क्लास म ब्स्क कर रहे ह. सुबह का वक़्त था, ज्योति दीदी बात ले रही ती, शायद वो बाथरूम का डोर बंद करना भूल गयी ती. मुझे बी बात लेना था, म बाथरूम म गया तो देखा की मेरी बेहाँ ज्योति नंगी ह ओर वो बात ले रही ह, मैं उसको देखा तो उसको देखते ही रह गया.&नबस्प; उसने बी मुझे देखा तो वो बी जैसे ती वैसे ही खड़ी रही ओर मुझे देखती रही. मैं बी उसको देखता रहा, मैने उसकी चूत को पहली बार देखा ओर देखता ही रह गया, कितनी प्यारी ती मेरी बेहाँ ज्योति की चूत, ज्योति की चूत प हल्के-2 हेर ते. मैने उसके बूब्स को देखा, ज्योति की नहीपल बहोत ही मस्त ते. मैं उसको देखते ही रा ओर वो बी मुझे देख रही ती. शायद उस वक्त हम दोनो का ब्रायन काम करना बंद कर दिया था. फिर मुझे होश आया तो मैने सॉरी कहा ओर वाहा से चला गया.
हम कॉलेज साथ म जाते ते कार से.&नबस्प; कॉलेज जाते वक़्त रास्ते म कार म हम दोनो एक दूसरे से नज़र नही मिला पा रहे ते. कार म एक नज़र&नबस्प; उसने मुझे देखा ओर उसकी नज़र मुजसे मिली&नबस्प; ओर फिर हम दोनो एक दूसरे को स्माइल दिया बुत हमने कुछ कहा नही.
रात म हम साथ म सोते ते. एक ही बेड प एक ही रज़ाई म. उस वक़्त डिसेंबुर का मंत था. हम दोनो पास म बैठ क स्टडी कर रहे ते. मैं बाइयालजी पढ़ रा था, उसमे एक चॅप्टर था “रिपड़ीोडक्टिव कजिन्टम”. उस चॅप्टर म गर्ल्स ओर बाय्स क लंड ओर चूत क बारे म डीटेल म दिया था वित फिगर, ओर बचे कैसे होठे ह ये बी बताया था उस चॅप्टर म. चॅप्टर म लंड कैसे चूत म डालते ह ये बी दिया था वित फिगर. ज्योति मेरे बगल म सो गयी रज़ाई ओढ़ क. मुझे सुबह का याद आ रा था, ज्योति की चूत मेरे दिमाग़ म ती, मेरा मान ज्योति को पेलने का कर रा था, मैं उस चॅप्टर म चूत का डाइयग्रॅम देखा तो मैने आपना अंडरवेर नहीकल दिया ओर लंड को हाथ म लिया ओर मसल रहा था&नबस्प; लंड को ओर उपर-नीचे करता रा. मेरा लंड गरम हो गया. मुझे लगा की मेरे लंड स कुछ नहीकल रा ह. मैं ज्योति दीदी क सेर क पास बैठ गया ओर ज़ोर-ज़ोर से मूठ मरता रा. मैं लाइफ म पहली बार मूठ मारा उसेस दिन. मेरा सफेद-सफेद स्पर्म नहीकालने लगा लंड से, मैने स्पर्म आपने हाथ म ले लिया. मैं आपना स्पर्म एक हाथ म ले के ज्योति दीदी क लिप्स प लगाया ओर उनका लिप्स चाटने लगा. ज्योति दीदी नीड म ती, उन्हे कुछ पता नही चला. मैं ज्योति दीदी का लिप्स छत रा था स्पर्म लगा क. मुझे बहोत अछा लग रा था बुत डर बी लग रा था की अगर ज्योति दीदी जाग गयी तो. फिर मैं आपना हाथ पानी से सॉफ कर क ज्योति दीदी के बगल म उनके पास उनसे चिपक क लेट गया. मुझे नीड नही आ रही ती. मैने आपना हाथ ज्योति दीदी क बूब्स पेर रखा, ओर उनके बूब्स को पड़ीेस करने लगा. मैं धीरे-2 एक्शिटे हो रा था, मुझे सेक्स का नशा चड़़ने लगा.
मैं ज्योति दीदी क सलवार हटा क उनके पेट प हाथ रखा ओर फिर मैने उनका सलवार ओर उपर कर दिया. मेरा हाथ&नबस्प; ज्योति दीदी क बूब्स क उपर उनके ब्रा प थी. मैं उनका बूब्स दबाने लगा. फिर मैने आपना हाथ ज्योति दीदी क कमर प रखा. फिर उनकी पेंटी प हाथ रखा. मैं उनके चूत म फिंगरे डालने लगा. मैने ज्योति दीदी क चूत म फिंगरिंग की ओर फिर मैं दूसरे साइड होके सो गया.
नेक्स्ट नाइट को मैने फिर से जब ज्योति दीदी सो गयी तो मैं उनकी चूत म फिंगरिंग की. मुझे दीदी क साथ सेक्स करने का मान कर रा था, बुत हिम्मत नही हो रही ती. मैने आपना लंड नहीकल क मूठ मारा(मस्तेरबाटिंग). और स्पर्म हाथ म लेके ज्योति&नबस्प; दीदी क लिप्स प लगा क चाटने लगा. मुझे लगा की ज्योति दीदी जाग रही ह. मैं सोने का नाटक करने लगा. 15 मिनहीट्स बाद दीदी को लगा की म सो गया हू तो ज्योति दीदी बैठ गयी ओर उन्होने मूजा हिलाया, मैने कोई रिक्षन नही दिया. ज्योति दीदी को लगा की मैं सो गया हू. ज्योति दीदी ने मेरा हाथ आपने तरफ किया ओर आपने पेट प रख दिया, ओर फिर मेरा हाथ आपने बूब्स प रख क पड़ीेस करने लगी.
ज्योति दीदी ने मेरे अंडरवेर म आपना हाथ डाला ओर मेरे लंड को पकड़ लिया ओर लंड को मसालने लगी. ज्योति दीदी आपने हाथ स मेरे लंड को पकड़ क मेरा मूठ मार रही ती. मेरे लंड से स्पर्म नहीयालने लगा तो ज्योति दीदी ने मेरा सारा स्पर्म आपने हाथ म ले लिया ओर ज्योति दीदी मेरा स्पर्म चाटने लगी ओर मेरा सारा स्पर्म खा लिया. ज्योति दीदी ने मेरा लंड फिर आपने हाथ म पकड़ा ओर फिर मेरी प्यारी ज्योति दीदी ने मेरा लंड आपने मूह म लिया ओर ज्योति दीदी मेरा लंड चूसने लगी. मेरा लंड टाइट ओर गरम हो गया था, बुत ज्योति दीदी क मौत क अंडर था इस लिए उनके मौत क पानी से गरम मेरे गरम लंड को एक अजीब सा नशा छा रा था. ज्योति दीदी 15 मीं से मेरा लंड आपने मौत म लेके चूस रही ती. मेरा स्पर्म नहीकालने लगा ओर मेरी प्यारी ज्योति दीदी ने मेरा सारा स्पर्म पी गयी.
मैं&नबस्प; उठ क बैठ गया.&नबस्प; ज्योति दीदी मुझे चुप छाप देख रही ती ओर मैं बी ज्योति दीदी को देख रा था. 2 मिनहीट्स क बाद ज्योति दीदी ने कहा भाई तुम मेरे बॉय फ़्रेंड बनॉगे. मैने आपनी प्यारी ज्योति दीदी को गले लगा लिया. ज्योति दीदी ने कहा म कल जागी ती जब तुम आपना मूठ मार क आपना स्पर्म मेरे लिप्स प लगा क किस कर रहे ते, ज्योति दीदी ने कहा मुझे बहुत अछा लग रा था.
फिर मेरी प्यारी ज्योति दीदी मेरे लिप्स प किस करने लगी ओर एक हाथ से मेरा लंड पकड़ क मसालने लगी. मैं बी आपना हाथ ज्योति दीदी क बूब्स प रख कर दबाने लगा. हम 15 मिनहीट्स तक एक दूसरे के लिप्स चूस्ते रहे ओर एक-दूसरे को एक्शिटे करने लगे. मैने आपनी प्यारी ज्योति दीदी से कहा की दीदी आप मेरा लंड आपने मौत म लेका चूसो. ज्योति दीदी मेरा लंड आपने मौत म लेके चूसने लगी. मैने ज्योति दीदी का सेर हाथ से पकड़ क उनके मौत म आपना लंड से पेलने लगा, फिर मैं ज्योति दीदी क मौत म ही आपना सारा स्पर्म नहीकल दिया. ज्योति दीदी मेरा सारा लंड का स्पर्म्ज़&नबस्प; खा गयी, जैसे कोई करीम खाते ह.
फिर मैने आपनी प्यारी ज्योति दीदी का कुरती नहीकाला, ज्योति दीदी एब्ब सिर्फ़ ब्रा ओर स्कर्ट म थी. मैने एब्ब ज्योति दीदी की स्कर्ट बी नहीकल दी. मेरी प्यारी ज्योति दीदी एब्ब सिर्फ़ ब्रा & पनटी म थी.&नबस्प; मेरी&नबस्प; प्यारी ज्योति दीदी ब्रा & पनटी म बहुत हॉट, सेक्सी & खूबसूरत लग रही ती. फिर ज्योति दीदी ने मेरा त-शर्ट आपने हाथ स नहीकाला, फिर ज्योति दीदी ने मेरा लोवर नहीकाला. मैं सिर्फ़ अंडरवेर म था ओर मेरी प्यारी ज्योति दीदी सिर्फ़ ब्रा & पनटी म थी. ज्योति दीदी ने मेरा अंडरवेर नहीकल दिया, मैने बी ज्योति दीदी का ब्रा नहीकाला फिर मैने आपनी ज्योति दीदी की पनटी बी नहीयक्ली.
ज्योति दीदी मेरे सामने नंगी थी ओर मैं बी ज्योति दीदी क सामने नंगा खड़ा था. ज्योति दीदी बेड प खड़ी थी ओर&नबस्प; मैं बैठ क नीचे से&नबस्प; आपनी ज्योति दीदी की चूत को देखने लगा. मेरी ज्योति दीदी की चूत प हल्के-हल्के, छोटे-छोटे हेर&नबस्प; ते . ज्योति दीदी की चूत बहुत टाइट थी. मैनी दीदी की चूत प आपना एक फिंगरे रखा, ओर फिर फिंगर से ज्योति दीदी की चूत को मसालने लगा. मैने आपनी फिंगर दीदी की चूत की छेद म डालने की कोकजिन की. ज्योति दीदी की चूत बहुत टाइट थी, फिर मैने धीरे-धीरे आपना फिंगर दीदी की चूत म डाली ओर दीदी की चूत म फिंगरिंग करने लगा. मेरी ज्योति दीदी के मौत से&नबस्प; ‘आ-आ-उफ्ह’&नबस्प; की आवाज़ नहीकल रही ती. मैने 10 मीं तक ज्योति दीदी की चूत म फिंगरिंग की, मेरी ज्योति दीदी झार गयी ओर दीदी की चूत ने पानी चोर दिया. मैने आपना मूह दीदी की चूत प रखा ओर आपने जीब से आपनी ज्योति दीदी की चूत से जो पानी नहीयकल रहा था उसको चाटने लगा. मैने आपना जीब (तौँगे) ज्योति दीदी की चूत के छेद प रख कर चाटने लगा ओर फिर मैने आपने जीब से ज्योति दीदी की चूत म लीयकिंग करने लगा. मेरी ज्योति दीदी मेरे सेक्स क नशे म माधोस हो गयी थी ओर मेरा सेर पकड़ के आपने चूत प दबा रही ती. ज्योति दीदी फिर से झाड़ गयी ओर मैने उनके चूत का सारा पानी आपने जीब से सॉफ कर दिया.
मेरी ज्योति दीदी मेरे सेक्स की माधोसी म पागल सी हो रही ती. मेरी दीदी ने मेरा लंड को फिर से आपने मूह म लेके ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी, मैं बी पागल सा हो रा था. मैने ज्योति दीदी को बेड पी लेता दिया ओर आपना लंड आपनी प्यारी ज्योति दीदी की प्यारी सी गुलाबी चूत पी रखा ओर चूत के अंडर डालने की कोकजिन करने लगा. ज्योति छीलने लगी, मैने दीदी के लिप्स प आपना लिप्स रखा ओर दीदी की लिप्स चूसने लगा ओर धीरे-धीरे आपना लंड ज्योति दीदी की चूत म अंडर डालने लगा. मेरी ज्योति दीदी की आँखो से आँसू आने लगे. मैने मेरी प्यारी ज्योति की चूत की&नबस्प; सील&नबस्प; तोड़ दी थी. ज्योति दीदी की चूत से ब्लड नहीकालने लगा. मैने लंड चूत से बाहर नहीकाला. दीदी ने कहा की भाई तुम परेसन ना हो, जब ‘चूत म पहली बार लंड डालते ह तो चूत की&नबस्प; सील&नबस्प; टूट जाती ह ओर ब्लड नहीकलता ह’
मैने फिर आपना लंड ज्योति दीदी की चूत प रखा ओर अंडर डालने लगा, दीदी ने कहा आराम से डालो. मैने आपना पूरा लंड दीदी की चूत म डाल दी. मेरी प्यारी ज्योति दीदी डर्द से छीलाने लगी ओर रोने लगी. मैने ज्योति दीदी&नबस्प;&नबस्प; के लिप्स प आपना लिप्स रखा ओर दीदी की लिप्स चूसने लगा ओर साथ म लंड&नबस्प; दीदी की चूत म अंडर-बाहर करने लगा. ज्योति दीदी की मूह से ‘आ-आ –उफ़-आ’ की आवाज़ नहीकल रही थी. मैने आपनी पेलने की स्पीड तेज की ओर ज्योति दीदी को ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगा. ज्योति दीदी&नबस्प;&नबस्प; ‘आ-आ –उफ़-आ’**********’आ-आ –उफ़-आ’*****&नबस्प;&नबस्प;&नबस्प;&नबस्प; कर रही ती, ज्योति दीदी का डर्द कुछ कूम हुआ. मेरी ज्योति दीदी एब्ब मेरे सेक्स का मज़ा ले रही ती. मेरी ज्योति दीदी की चूत म मेरा लंड पूरा अंडर तक जा रा था, जिससे ज्योति दीदी को बहुत अछा लग रा था. 15 मिनहीट्स तक म ज्योति दीदी को चोदता रहा. ज्योति दीदी एब्ब जरने वाली ती, ज्योति दीदी ने आपना बॉडी हल्का कर दिया. बुत मैं ज्योति दीदी को पेलता रहा. 20-या-25 मिनहीट्स बाद मैं बी जारना वाला था. ज्योति दीदी फिर से जरने वाली थी. ज्योति दीदी ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया ओर मैने ज्योति दीदी को पकड़ लिया. मैं ज्योति दीदी की चूत म ही जर गया ओर दीदी बी साथ म जर गयी. मैने आपना सारा स्पर्म मेरी ज्योति दीदी की चूत म ही अंडर नहीकल दिया.
फिर मैं ज्योति दीदी के उपर ही लेट गया. ज्योति दीदी मेरा लंड हाथ म पकड़ के मसालने लगी फिर ज्योति दीदी ने मेरा लंड आपने मूह म लेके चूसने लगी. मैं फिर सोफे प बैठ गया ओर ज्योति दीदी आ क मेरे&नबस्प; उपर बैठ गयी.&नबस्प; मैने ज्योति दीदी को लंड प बैठाए ही खड़ा हो गया.&नबस्प; मैं फ्लोर प खड़ा था ओर मेरी ज्योति दीदी मेरे लंड प आपनी चूत डाल क बैठी थी मेरी गोदी म मुझे पकड़ क.&नबस्प; मैं ज्योति दीदी को खड़े-खड़े ही चोदने लगा.&नबस्प; ज्योति दीदी ने मुझे ज़ोर से पकड़ा हुआ था, ज्योति दीदी को डर्द हो रा था इसलिए वो मेरे लिप्स प आपने लिप्स रख कर पागलो की तरह मेरा लिप्स चूस रही ती. मैं 30 मिनहीट्स तक खड़े-खड़े आपनी प्यारी ज्योति दीदी को पेलता रहा. ज्योति दीदी ओर मैं दोनो जरने वाले ते. हमने एक-दूसरे को ज़ोर से पकड़ लिया ओर फिर से मैं आपनी ज्योति दीदी की चूत म ही आपना सारा स्पर्म नहीकल दिया. ओर फिर हम बेड प लेट गये ओर एक-दूसरे की बॉडी प किस करते रहे & एक-दूसरे को चूमते रहे. ओर फिर ह्यूम नींद आ गयी ओर हम दोनो ऐसे ही नंगे एक-दूसरे से लिपटे सो गये. 
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08-20-2017, 10:41 AM,
#8
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
हैल्लो दोस्तों मेरा नाम सौरव है। में कोलकाता मे रहता हूँ मेरी उम्र 27 साल की है। में इस साईट का बहुत बड़ा फैन हूँ। मैंने इस पर कई कहानियाँ पढ़ी है लेकिन लिखी पहली बार है ये मेरी पहली कहानी है। दोस्तों ये स्टोरी जो में लिख रहा हूँ, ये एक रियल स्टोरी है। ये स्टोरी मेरी बहन और मेरे बीच की एक घटना है, जो कि में आज आप सभी को बताने जा रहा हूँ। दोस्तों अगर मुझे कोई गलती हुई हो तो प्लीज आप सभी मुझे माफ़ करना।
दोस्तों मेरे घर पर हम चार लोग हैं। में मेरी बहन रिया और माँ और पापा, रिया मेरी बहन मुझसे सिर्फ एक साल बड़ी है लेकिन दिखने मे वो बहुत ही खूबसूरत है। उसके बूब्स उसकी उम्र के हिसाब से ज्यादा है। उसके बूब्स करीब 32-36-40 है। उसकी गांड को देखकर अच्छे अच्छो के लंड का पानी निकल जाता है। उसकी चूत के मजे हर कोई लेने को तैयार रहता है। वो चीज ही कुछ ऐसी है बहुत मस्त और सेक्सी। दोस्तों हमारी फेमेली बहुत फ्री और फ्रेंक है। हमारे यहाँ पर शनिवार रात को हमेशा हर वीक एक पार्टी होती है। जहाँ पर ड्रिंक्स वगेरा सब होता है। रिया कॉल सेंटर मे काम करती है। ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
दोस्तों ये बात जुलाई की है, जब पापा ऑफीस के काम से टूर पर गये हुए थे और उस शनिवार घर मे सिर्फ़ में रिया और माँ ही थे। हम उस शाम को ऑफीस से आने से पहले ड्रिंक्स और स्नेक्स लेकर घर पहुंचे। में जल्दी से घर पहुंचा और मुझे बहुत ज़ोर की टॉयलेट आई थी, तो मैंने सीधा बाथरूम गया और फिर मैंने गेट भी खुला छोड़ दिया। अब में जैसे ही अपना लंड बाहर निकाल कर पेशाब करने लगा इतने मे ही रिया अचानक से घुस गयी। उसे मालूम नहीं था कि में बाथरूम मे हूँ दो तीन सेकिण्ड के लिए तो वो मेरे लंड से निकलते हुए पेशाब को देखती ही रही। फिर अचानक से हंसकर बाहर आ गई। फिर मुझे बहुत गुस्सा आया में बाहर निकल कर उसको बोला कि तुम्हे देखकर आना चाहिए था। तभी वो बोली कि मुझे लॉक करना चाहिए था। उसके चेहरे मे एक अजीब सी मुस्कान थी।
फिर रात को 9 बजे हम तीनो ड्राइंग रूम मे टीवी देखते देखते ड्रिंक ले रहे थे। रिया ने रेड कलर की टी-शर्ट और जिन्स पहनी हुई थी, जो की उसके बहुत शॉर्ट और टाईट थी।
वो अब जैसे ही खड़ी होती तो उसकी गांड पर उसकी पेंटी और अंदर से बूब्स की साईज साफ साफ दिखाई दे रही थी। उसके बूब्स को देखकर मेरा लंड हर बार खड़ा हो जाता। फिर मैंने करीब दो पेग के बाद नोटीस किया कि रिया मेरी तरफ बहुत ध्यान से देख रही थी। वास्तव में हम दोनो बहुत फ्री और फ्रेंक है और एक दूसरे से लगभग सभी तरह की बातें शेयर करते है। लेकिन उस रात उसकी आँखों मे कुछ अलग सा नशा था।
फिर मैंने अपना ड्रिंक खत्म किया और फिर में छत पर गया, वहाँ पर मैंने एक सिगरेट पीने के लिए जलाई कि अचानक रिया वहाँ पर आ गयी। वो ये बात अच्छी तरह से जानती थी कि में स्मोक करता हूँ, तो अब मुझे कोई प्राब्लम नहीं हुई तभी अचानक उसने मेरे हाथ से सिगरेट ली और फिर वो सिगरेट पीने लगी। मैंने भी उसे कुछ नहीं बोला लेकिन मुझे इतना समझ मे आया था कि वो ये पहली बार नहीं पी रही है। क्योंकि उनके कॉल सेंटर मे ये सब होता ही है।
फिर हम सिगरेट पीने के बाद वापस नीचे आ गये। तभी माँ खाना गरम कर रही थी कि अचानक रिया ने मुझसे बोला कि चल आज थोड़ा ज़्यादा पीते है, क्योंकि अगले दिन सन्डे था तो मैंने कहा कि ठीक है बोला फिर वो दो ग्लास लाई और बोली आज हो जाए में वोड्का लेकर आया था। फिर हमने पेग बनाया और एक एक करके पीते गये। अब हम दोनो को बड़ा मज़ा आ रहा था।
रिया की आँखे एकदम लाल हो गयी क्योंकि उसने ज़्यादा पीली थी। फिर हम सभी ने साथ मे बैठकर खाना खाया और फिर खाना खाने के बाद में अपने रूम मे चला गया और रिया और माँ दूसरे रूम मे, अब में अपना लेपपटॉप खोलकर इस साईट की स्टोरीस पढ़ रहा था, कि अचानक रात को 1.30 बजे किसी ने मेरा रूम नॉक किया मुझे लगा कि शायद वो माँ होगी वो मुझे पानी देने आई होगी। फिर मैंने लेपटॉप में पेज मिनिमाईज़ किया और गेट खोलकर देखा तो बाहर रिया खड़ी हुई थी।
तभी वो एकदम से अंदर आ गई और फिर उसने मुझे बोला कि माँ सो गई है और उसे नींद नहीं आ रही है। वो अकेली बोर हो रही थी, उसने मेरे रूम की लाईट जली हुई देखी तो वो मेरे पास आ गयी। फिर उसने बात करते करते बेड से लेपटॉप को अपनी तरफ खींचा और फिर कुछ सेकिण्ड में ही पेज खोल दिया। तभी में थोड़ा डर गया।
अब मैंने झट से लॅपटॉप उससे ले लिया और फिर से पेज क्लोज़ कर दिया। अब उसने मुझसे पूछा कि तुम क्या पढ़ रहे थे? मैंने बोला कुछ नहीं फिर ऐसे ही बात करते करते वो मेरे बेड पर ही सो गयी। में भी उसके पास सो गया करीब आधे घंटे बाद अचानक मेरा हाथ उसकी कमर पर चला गया लेकिन रिया का रिएक्श्न देखकर में बहुत हैरान हो गया। उसने मेरा हाथ खींचकर अपनी चूचियों पर रख दिया और उसकी आँखे बंद थी लेकिन उसकी साँसे बहुत तेज़ चल रही थी। शायद उस पर शराब का नशा कुछ ज़्यादा ही चड़ गया।
उस दिन में बहुत खुश हो गया, फिर मैंने थोड़ी हिम्मत की और फिर में धीरे धीरे हाथ को आगे बड़ाता गया में अपना हाथ उसके शरीर पर हर जगह घुमा रहा था। फिर मैंने मौका देखकर हाथ को आगे बड़ा कर उसके बूब्स पर रख दिया और ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स दबाने लगा और अब उसकी साँस और तेज़ होने लगी। फिर में धीरे से उसके और करीब आ गया और फिर में उसको गर्दन मे और कान पर किस करने लगा, वो अब एकदम पागलो की तरह मचल रही थी।
फिर वो भी मुझे ज़ोर से किस करने लगी और मेरे लंड को अपने हाथ मे पकड़ कर उसके साथ खेलने लगी। उसका सलाइवा बहुत टेस्टी था। फिर मैंने धीरे धीरे उसकी कमर के पास जाकर उसकी नाईटी को ऊपर किया उसने ब्लॅक कलर की पेंटी पहनी हुई थी। फिर में उसकी पेंटी सूंघने लगा क्या स्मेल थी यारों मैंने अब थोड़ी नाईटी और ऊपर करके उसे उतार दिया, अब वो मेरे सामने सीधी लेटी हुई थी ब्लेक ब्रा और पेंटी मे फिर मैंने ब्रा को भी पूरा खोल दिया, तो उसके बूब्स अचानक से उछल कर बाहर आ गये।
फिर में पागलो की तरह उसे काटने और चूसने लगा उसके मुहं से बस अह्ह्ह्ह चोदो मुझे प्लीज चोदो की आवाजें आ रही थी। फिर मैंने उसकी पेंटी भी उतारी तो देखकर में हैरान हो गया ब्लेक पेंटी के अंदर वाईट कलर हो गया था, क्या स्मेल थी उसकी फिर मैंने जल्दी से अपना मुहं उसकी चूत के पास ले जाकर अपनी जीभ चूत पर टच की वो एकदम हिल गई जैसे करंट लगा हो फिर मैंने जीभ उसकी चूत मे घुसाकर चूत को चाटने लगा। वो उछल गयी और मेरा सर पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी अचानक उसके मुहं से शब्द बाहर आए जो सुनकर में बहुत खुश हो गया।
रिया कहने लगी तू कितना खुश नसीब है जो तुझे आज अपनी सगी बहन की चूत चाटने को मिल रही है। चोद तू मेरी चूत को आज जी भरकर में कुछ भी नहीं कहूंगी। में ये सुनकर अपने दाँत से चूत को काटने लगा और चूसने लगा। करीब दस मिनट चूसने के बाद उसने मेरे बाल पकड़ कर उसने मुझे अपने ऊपर खींचा और फिर किस करने लगी, फिर उसने मेरी टी-शर्ट और हाफ पेंट खोल दिया। में झट से अपना अंडरवियर खोलकर खड़ा हो गया। फिर वो बेड से उठकर नीचे बैठ गयी और लंड को हाथ मे लेकर सहलाने लगी फिर मैंने लंड उसके मुहं के अंदर डाला और वो लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी खा रही हो।
करीब पांच मिनट तक चूसने के बाद मैंने उसे उठाया और बेड पर लेटा दिया और एक तकिया उसकी गांड के नीचे रख दिया और उसके दोनों पैर फैला दिये। अब उसकी चूत बिल्कुल मेरे लंड के पास थी फिर में उसे और तड़पाने के लिए अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रगड़ रहा था। तभी वो कहने लगी फाड़ ना मेरी चूत को दिखा अपनी मर्दानगी। मैंने झट से उसकी चूत मे एक जोरदार धक्के के साथ लंड डाल दिया। वो चीख पड़ी और बोली प्लीज बाहर निकाल चूत फट गयी मेरी, मुझे बहुत दर्द हो रहा है।
फिर में उसके ऊपर लेट गया और उसे किस करने लगा और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा। अब धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा। तभी कुछ देर बाद उसकी चूत बहुत चिकनी हो गई। अब उसे भी मज़ा आने लगा था। अब वो बोले जा रही थी कहाँ था तू इतने दिन इतना प्यारा लंड क्यों छुपाकर रखा था। चोद मुझे ज़ोर और जोर पूरे जोश से बना ले अपनी रंडी। तभी मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी फिर अचानक मुझे महसूस हुआ कि वो झड़ गयी है वो अचानक से पूरी अकड़ गई थी। लेकिन में नहीं रुका और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। उसने मुझे जोर से पकड़ रखा था।
फिर अचानक कुछ देर बाद मुझे लगा कि में भी झड़ने वाला हूँ, तभी मैंने उसको बोला कि अंदर डाल दूँ क्या? फिर उसने बोला कि नहीं मुहं मे डाल। अब मैंने जल्दी से लंड को चूत से बाहर निकाला और उसके मुहं के पास ले गया और ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगा। अचानक पूरा पानी उसके मुहं मे, नाक मे, आँख मे, पूरे चेहरे पर फैल गया था।
फिर हम दोनो थक कर लेट गये और फिर वो आधे घंटे बाद उठकर मुझे किस करने लगी और थेंक्स बोला और अपने रूम मे चली गयी माँ के पास।
दोस्तों अब जब भी हमे मौका मिलता है, हम सेक्स मे कोई कमी नहीं छोड़ते।
दोस्तों में आशा करता हूँ कि आप को मेरी स्टोरी आप सभी लोगो को जरुर पसंद आई होगी ।।
धन्यवाद …
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08-20-2017, 10:42 AM,
#9
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
Mera naam Indra hai. Umar 25 saal ki lekin aaj mein ek vidhwa hoon. Aaj mein meri jindagi ka ek secret aapko bayan kar rahi hoon.


Meri shaadi huye 2 saal beet gaye aur mere pati meri shaadi ke 6 mahine baad hi gujar gaye. Mere papa aur mummy ka dehant 7 barash pahle ek car accident mein ho gaya tha. 2 saal pahle mere do bhai, Sunil aur Suresh ne bade dhoom-dhaam se meri shaadi ki. Dono bhai mujhse 7 aur 5 saal bade hai. Dono ki shaadiyan ho chuki hai.

Shaadi to bade dhoom-dhaam se huyi lekin Suhaag Raat se hi main apne aap ko taghi huyi mehsoos karne lagi. Mera pati Rohan bada hi sexy aadmi tha. Shuhaag Raat ki raat woh saraab ke nashe mein jhoomta hua aaya aur mere saath koyi baatein naa karke sirf apni hawas mitane ki koshish karne laga. Mere kapde usne kheench kar mujhese alag kar diye. Mere nange jism ko dekhkar uski aankhein chamak ne lagi.

Aakhir kyon nahi chamakti. Mere husn hai hi aisa. Meri ufanti huyi jawaani ko dekhkar kayi ghayal ho chuke hai. Gora-chitta badan aur uss per upar waale ki meharbaani se ekdum perfect utaar aur chadhav. Badi ankhon ke alaawa mere patle aur nazuk honth. Taraase huye mere mumme aur patli kamar. Gol-gol chutad aur gadrayi huyi janghein. Kapde pahne hone ke bavzood raah chalte huye log aahein bharte the phir yahan to mera jism ek dum beparda mere pati ki ankhon ke saamne tha.

Rohan ne jhat se apne kapde utaare aur jhumta hua mujhe apni bahon mein lekar bedardi se mere gaal aur mere dono mummo ko masalne laga. Apne daanto se mujhe kaat kar mere mummo per apne nishaan de daale. Phir apne Lund ko haath mein lekar meri tango ko chauda kiya aur mujh per toot pada. Uska Lund dikhne mein ek mazboot Lund dhikayi pad raha tha. Mujhe laga ki yeh maujhe buri tarah se raund daalega.

Usne mere dono hothon per apne hoth rakhte huye ek karara shot meri Choot per de maara. Main cheekh se bilbilai lekin mere hoth uske hotho se chipke huye the. Awaaj nahi nikli lekin ankhon se dard ke aanshu bah nikle. Phir wah mujhe chodta gaya lekin 5 minute mein hi mujh per se utar kar bagal mein so gaya. Uske Lund se nikla virya meri Choot aur meri jhangho per chipchipahat paida kar raha tha. Mere jism abhi tak tyaar hi nahi hua tha ki uska rus nikal gaya. Maine siskate huye saari raat gujaari.

Phir yeh sissalaa roj hone laga. Ab mujhe Rohan ke baare mein sab kuchh pata chal chuka tha. Woh bachpan se hi aiyaashi karta aa raha tha. Uski kayi auraton se sambandh the. Isi wajah se uske ghar waalo ne uski shaadi kar di ki shaadi ke baad sudhar jaayega. Lekin uski jawaani khatam ho chuki thi. Roj mere badan mein aag lagaa kar khud chain ki neend sota aur main raat bhar karwatein badalte huye saari raat nikaal deti. Kabhi-kabhi blue films ki CD laakar room ke CD player mein mujhe filme dikhata.

Un films ko dekhkar main to sulagti rahti lekin Rohan 5-7 minute ke maje lekar unko raat bhar dekhta rahta. In filmo ki tarah hi kabhi-kabhi meri gaand bhi maar deta. Mukh se uske Lund ko 3-4 din mein choosna hi padta. Jis din uska Lund mere muhn mein jaata us din meri Choot ko sakoon rehta tha. Lekin dhire-dhire uska kamjor jism aur kamjor padta gaya aur shaadi ke 6 maah baad is duniya se gujar gaya.

Mere dono bhai mujhe apne saath hi apne ghar le aaye. Halanki dono ab alag-alag rahne lage the. Dono ke ghar paas-paas hi the. Do-teen mahine to jaise-taise gujar gaye lekin ab mere andar ki vasna ki aag mujhe jalaane lagi. Her raat ko bhabhiyon ko bhaiya ke saath hansi-mazak karte dekh mera man bhi chhat-pataane lagta. Meri dono bhabhiya hai bhi sexy nature ki aur mere dono bhaiyo ko apne control mein rakhti thi. Lekin naa jaane kya hua ki dono bhabhiyan mujhse naraaz rahne lagi. Unhe lagta tha ki main unki CID karti hoon. Ek din mujhe lekar ghar mein bada hangama hua. Phir faisla hua ki mere naam 10 laakh ki fixed deposit kar mujhe hamare puraane ghar mein rahna hoga. Main badi dukhi huyi. Sasuraal to chhuta hi tha ab maika bhi chhoot raha hai.

Phir main apne bhaiya logo ko dukhi nahi karna chahti thi. Apne puraane makaan mein aa gayi. Yeh makaan mere mummy papa ne liya tha. 1 bedroom aur 1 hall ka cottage tha. College ke paas tha. Din bhar to chahal pahal rahti lekin shaam hone ke baad ekka-dukka aadmi hi road per nazar aata. Main akeli us ghar mein rahne lagi. Jab din mein man nahi lagta to college campus mein chali jaati. Aajkal ke nauzavaan chhore aur chhokriyon ko dekha karti thi. Halaanki mujhe college chhode huye 5 saal hi beetein hai lekin tab mein aur ab mein kaafi farak aa chuka hai.

Iss college ke paas hi ek pahadi hai aur sunsaan jungle numa jagah hai. Bada jungle to nahi hai lekin sunsaan rahta hai. College ke ladke-ladki wahan apne pyaar ka izhaar karne chale jaate hai. Dopahar mein ghumne jaati to 7-8 jode mujhe mil hi jaate. Apas mein khoye huye. Ek dusre ki bahon mein chhupe huye. Kayi chumban lete huye mil jaate. Dur kahin ghani jhaadiyon mein ek dusre ke badan ko sahlaate huye bhi milte the. Main inko dekhte huye aage badh jaati lekin mere jism mein ek sarsarahat shuru ho jaati. Kitni baar mera man bekaabu ho jaata lekin kya karti main. Kaafi baar kisi ladke ko ladki ke mumme ko chuste huye dekha aur kitni hi baar kisi ladki ko apne pyaare ke Lund se khelte huye dekha hai maine. Dil mein halchal machi huyi rahti.

Ghar aa kar thande paani se naha kar apne jism ko thanda karne ki koshish karti lekin sab bekaar tha. Phir ek din market se gazar le aayi aur apni Choot mein daal kar apni aag ko thanda karne ki koshish ki. Iss se thodi raahat mili. Ab yeh meri roj ki aadat ho gayi.

Phir ek din mere nanihaal ke ghar ke paas se ek aadmi aaya. Jise dekhte hi main pahchaan gayi. Kamal naam hai uska. Mujhse 4 saal bada. Mera nanihaal yahan se 60 kilometer ki duri per ek chhote se gaon mein hai. 7-8 saal pahle gayi thi. Tab mere nanaji jinda the. Ab mauzud nahi hai. Wahi meri jaan-pehchaan Kamal se huyi thi. Kamal ek graduate tha aur waha ek chhoti si dukaan chalata hai. Gaon ka alhad nauzavan jise maano kisi ki fikra nahi ho. Manchale kism ka hai lekin badmaash nahi.

Maine use dekhte hi puchha, "Arre Kamal, yahan kaise?"

Kamal mujhe dekhte hi kaha, "Kaisi ho Indra. Tumhare baare mein pata chala to milne aa gaya. Tumhare sasuraal gaya tha lekin maloom pada tum yahan rahti ho."

Main boli, "Haan ab takdeer ko jo manzoor wahi..."

Kamal bola, "Sun kar bada dukh hua."

Main boli, "Koyi baat nahi. Tum batao kaise ho. Shaadi ki yaa nahi?"

Kamal, "Aare itni jaldi kya hai? Jise dekho meri shaadi ke pichhe pada rahta hai."

Main kaha, "To naraaz kyon hote ho. Jab shaadi ke laayak umar ho tabhi to sab jane puchhte hai naa."

"Kar lenge shaadi bhi aur jab karenge to sab ko bataa kar hi karenge," kahkar Kamal hansne laga.

Phir hum logo mein nayi-purani baatein hone lagi. Baaton se hi pata chala ki Kmal har 15-20 dino se shahar aata tha apni dukaan ke liye kharid-dari karne. 2-3 din rukta phir gaon chala jaata. Raat ko kisi hotel yaa kisi guesthouse mein rukta aur din bhar bazaar mein ghumta purchasing ke liye.

Tabhi maine kah diya, "Hotel yaa guesthouse mein kyo rukte ho. Yeh ghar kis kaam aayega."

Kamal thoda sakpaka kar bola, "Lekin tum to yahan akeli rahti ho."

Maine usse kaha, "Arre tum koyi gair thode hi ho. Apne waalo ko nahi bolu to kya kisi gair insaano ko bolu. Tum ek-aadh din rahoge to mera man bhi bahal jaayega. Waise bhi yeh sunsaan ghar kaatne ko daudta hai."

Kamal ne haan bhari aur bola, "Theek hai. Aaj to main wapas gaon jaa raha hoon lekin abki baar aaonga to tumhare idhar hi rukunga." Aur yeh kahkar Kamal chala gaya.

Meri dincharya jaisi chalti thi chalne lagi. Dopahar mein college ke ladke-ladkiyon ki raaslila dekhti aur raat mein gazar se apni Choot ki bhookh mitane lagti. Phir 20 deeno baad Kamal mere dawaaje per khada tha.

Main khush ho kar boli, "Wah, mujhe laga tha tum kewal bol kar hi chale gaye. Ab nahi aaoge."

Kamal, "Kaise nahi aata. Ab pure teen din rukunga main yaha. Pehle khana to bana kar khilao badi bhookh lagi hai."

Main khaana banane kitchen mein chali gayi aur Kamal hall mein araam karne laga. Hum dono ne saath hi khaana khaya aur phir Kamal bazaar chala gaya. Main usse shaam ke aate waqt subji laane ko kaha aur gazar laane ko bhi kaha. Shaam 7-7.30 baje Kamal wapas aaya. Maine uske aate hi bathroom mein paani rakh kar usse kaha ki tum tyaar ho jao tab tak main khaana bana deti hoon. Khaana khaane ke baad hum log baatein karne lage. Phir main apne kamre mein chali gayi sone aur Kamal hall mein hi so gaya.

Raat ke waqt jab bechaini hone lagi to main uthkar kitchen mein gayi aur apni pyaari gazar ko utha laayi. Aaj baichaini ki wajah thi. Ek ladka aaj apni jaaneman ki jungle mein chudai kar raha tha. Maine saansein roke huye yeh nazaara dekha. Aadhe ghate tak chali chudai ne mere hosh uda diye the. Main us seen ko soch-soch kar abhi bhi hamph rahi thi. Mera jism ainthne laga tha. Halanki shaam mein Kamal aane ke baad thodi der ke liye hi yeh nazaara bhooli thi lekin tanhai mein phir se meri nazron ke saamne woh chudai ka seen ghumne laga. Aur gazar ko tej-tej apni Choot ke andar bahar kar apni bechaini ko shaant karne lagi. Jab Choot se paani nikal gaya tab jaakar raahat mahsoos ki.

Subah nahane-dhone ke baad khaana banaya aur Kamal jab jaane laga tab use shaam ke liye sabji laane ko bol di aur phirse apni pyaari gazar ke liye bhi bol di. Kamal ke aane ka intezar karne lagi. Ab akele mein phir se woh kal waala seen ankhon ke saamne ghumne laga aur apne aap ko rok nahi paayi. Chal padi college ke pichhe ki pahadi waale jungle ki taraf.

Aaj waisa nazaara to nahi dikhayi pada lekin ek jhaadi ki aut mein ek ladki ko do ladko ke beech paaya. Ladki dono ki pant ki chain khole unke Lund ko shahla rahi thi. Ufff... main phir se pagal hone lagi. Woh ladki baari-baari se unke Lund ko apne hoth mein dabati aur choosne lagti. Jiska Lund muhn mein nahi hota uske Lund ko woh apne hath se hila-hila kar maje de rahi thi. Ek baar to main unke saamne jaa hi rahi thi ki yahan ek ladki do-do Lund aur mujhe ek bhi Lund naseeb mein nahi lekin jaise-taise apne aapko roka.

Wapas aayi to badi bechain thi aur sidhe so gayi. Shaam ke samay tak besudh soyi padi rahi. Neend tabhi khuli jab darwaaje per jor-jor se pitne ki awaaz aayi. Darwaaja khola to saamne Kamal khada tha.

"Kya baat hai? Badi der kar di darwaaza kholne mein. Main kitni der se darwaaza khad-khada raha hoon," Kamal ne aate hi puchha.

Maine alsayi si boli, "Haan. Thodi aankh lag gayi thi. Maloom hi nahi pada."

Phir uske hath se saubzi ka thaila le liya aur kitchen mein aakar boli, "Tyaar ho jao. Abhi thodi der mein hi khaana bana deti hoon."

Khana khaane ke baad hum log baat-cheet karte rahe phir main uthkar apne kamre mein sone chali aayi. Sone se pahle kitchen se gazar le aayi thi. Gazar haath mein aate hi din waala seen nazron ke saamne ghumne laga. Kitchen mein khade-khade ji apni nighty ke upar se hi gazar ko Choot per ragadne lagi. Phir achanak yaad aaya ki Kamal bhi ghar per hi hai. Lekin Choot ki aag ne mujhe andhi kar diya aur gazar ko ragadte huye hi apne kamre ki aur chal padi.

Bister per letne ke saath hi din waala seen ko yaad karke nighty ko upar kar gazar ko Choot mein phansa diya aur karne lagi andar-bahar. Aaj bada maza aa raha tha. Shayad do-do Lund ka nazaara blue film ke alawa pehli baar dekha tha isliye. Maine pehle aapko bataya tha ki mera husband blue film's ki CD laakar mujhe dikhata tha.

Gazar Choot mein daalne se mujhe bada shakoon milne laga aur mere muhn se siskaari nikalne lagi. Jab paani nikal gaya to badi raahat mehsoos ki. Nighty niche kar sone lagi to maine ek shaaya darwaaje ke paas se jaate dekha. Ohh... aaj darwaja band karna bhool gayi thi main. Shayad Kamal ne dekh liya ho. Lekin man mein phir aaya shaayad yeh mera waham ho. Khair.

Subah uthi to raat waali baat bhool chuki thi main. Raat ko mujhe sabse jyaada maza aaya tha. Isliye pura badan halka-halka mahsoos kar rahi thi main. Lekin mujhe Kamal ki nazron mein farak mahsoos nazar aaya. Lekin mujhe kya? Khaana banane ke baad Kamal ko khaane ke liye awaaz di aur do thaali mein khaana daal kar hall mein hum dono baith gaye. Kamal nahane ke baad lungi pehne huye mere saamne baith gaya aur chup-chaap khaana khane laga.

Khaane khaane ke baad Kamal se maine puchh liya, "Abhi rukoge yaa gaon jaa rahe ho?"

Kamal ne mujhe ghurte huye puchha, "Kyon? Mera yahan rahna achchha nahi lag raha hai?"

Maine dapat-te huye kaha, "Kaisi baatein kar rahe ho? Mujhe kyon bura lagega. Maine isliye puchha ki agar shaam ko agar ruk rahe ho to subzi lekar aajana."

Kamal ne meri ankhon mein jhaankte huye kaha, "Aur gazar bhi."

Gazar ka naam uske muhn se sunte hi main chonk padi. Aur mere muhn se kuchh bhi niklte nahi bana.

Lekin Kamal ne wapas puchha, "Roj jo main gazar laata hoon uska aakhir tum karti kya ho?"

Main aankhein niche kiye huye chup-chaap baithi rahi. Yaani mera raat ko woh saaya dekhna waham nahi tha balki haqikat thi.

Kamal ne phir puchha, "Kyon karti ho yeh sab? Jab tumhare paas yeh mojuad hai tab tumhe gazar ki kya jarurat."

Yeh kahkar Kamal ne apni lungi ke beech mein se apna funfannaata hua apna moosal Lund bahar nikaala. Main fati ankhon se uske moosal Lund ko dekhti rahi.

Mujhe chup-chaap dekhkar Kamal ne mera hath pakda aur meri hatheli mein apna Lund thama kar bola, "Indra Raani, dekho kaise tumhare liye tadaf raha hai. Ise pyaar karo."

Uska garama-garam laal Lawda mere hath mein aate hi uchhal-kood machane laga. Maine jab haath hatana chaha to usne mere hath ko kaskar pakad liya aur meri hatheli se apne Lund ko hilaane laga. Uska Lund aur tan gaya. Phir usne mujhe apni bahon ke ghere mein le liya aur mere chehre ko upar uthate huye mere hothon ko choom liya. Uske tapte huye hoth mere naram-mulayam hothon ko chusne lage. Main beshudh hone lagi. Kayi der tak mere hotho ko chusne ke baad Kamal ne mere hoth azaad kar diye aur mere chehre ko dekhne laga.

Maine kuchh bolne ki koshish ki lekin usne mujhe apni bahon mein uthaya aur mere hotho per apne hoth rakhte huye mujhe apni bahon mein jhulate huye bedroom mein le aaya aur bister per mujhe lita kar mere upar let gaya. Main uske jism ke niche dabi huyi badi rahat mahsoos kar rahi thi. Uske wazan se mere dabta hua yauvan mujhe shakun de raha tha. Kamal mere hotho ka rus peeta raha, peeta raha aur peeta raha. Jab mujhe saans lene mein takleef hone lagi tab maine use apne upar se dhakela.

Phir boli, "Nahi Kamal nahi. Nahi karo yeh sab."

Lekin Kamal kahan maanne waala tha. Woh bed ke niche baithkar mere ek taang ko pakda aur laga use choomne. Woh pahle meri pairon ki anguliyon ko chuma phir mere tango per badhta hua mere ghutno tak choomta hua chala aaya. Mere pure badan mein ak ajeeb si gudgudi hone lagi. Mera badan jalne laga. Phir usne uss taang ko chhod kar meri dusri taang ko pakda aur choomta hua meri saari ko upar karta hua meri jangho tak choomta hua aa gaya. Ab mere hosh udne lage. Mujh per nasha sawaar hone laga. Main ab kisi tarah ka virodh nahi kar paa rahi thi.

Kamal meri saari ko aur upar karta hua meri dono jaanghon ko chaatne aur choomne laga. Mere dono haath uske sir per chale gaye. Shayad main yeh chahne lagi thi aur uske sir per hath rakhkar maine apna ishaara de diya. Kamal ne meri dono janghon ko chauda kiya aur mere panty ke niche tak mujhe choomne laga. Meri Choot mein rus niklne laga. Bahar to nahi aaya lekin main chaah rahi thi ki Kamal aur aage badhe aur meri Choot ko daboch le.

Kamal ne koyi jaldibaazi nahi dikhate huye meri jaanghon per se apna sir hataya aur mere chehre ki taraf dekhne laga. Ab main aur Kamal dono ek dusre ki ankhon mein jhaankne lage. Apne-apne pyaar ka izhaar karne lage. Ek dusre ko samajhne lage. Phir Kamal ne apna muhn aage badhaya aur mujhe apni bahon mein lete huye mere gadraaye huye rasile hoth ko phir apne hoth ki giraft mein le liya. Ab hum dono lage chumban per chumban lene. Hamari jeebh ek dusre ke muhn bagair visa liye aa rahi aur jaa rahi thi. Kisi paasport ki jarurat nahi thi. Dono jane ek dusre ke rus ko pee rahe the.

Phir Kamal ne meri saari ke palluh ko hata kar mere dono Mummo ko apne hatho mein jakad liya aur laga unhe dabaane. Mere muhn se siskaari nikal rahi thi. Usne mere hoth ko chhodkar ab apna muhn mere Mummo per de diya. Blouse ke upar se hi mere Mummo ko choomne aur kaatne laga. Mera pura blouse uske thook se gila ho gaya.

Main phusphusai, "Pahle kapde to khol do."

Kamal ne jhat se mere blouse ke button khole shuru kar diye. Blouse ke hatne ke saath hi mere Mumme joki abhi bhi choli ke neeche the uske saamne aa gaye. Meri choli ke cup mein pure samaaye huye nahi the isiliye bahar ki aur jhalak rahe the. Jise dekhkar Kamal ka dhairya jawab de diya aur meri choli ke saath hi mere Mummo ko choosna shuru kar diya. Uski deewangi dekh kar main kaamp uthi. Uska Lund meri janghon per gad raha tha. Woh mere upar leta hua mere dono Mummo ko choli ke saath hi masal raha tha aur choos raha tha.

Ab maine apna haath neeche kiya aur uske Lund ko kas kar apni muthi mein pakadne lagi. Lekin uska size itna tha ki meri muthi mein aa hi nahi paaya. Bahut mota tha uska Lawda. Mujhe laga jaise maine koyi angaara apne hath mein le liya ho. Raat bhar se jo sulag raha tha. Apne haath se uske Lund ki chamdi ko upar-neeche karne lagi. Lambai bhi bahut jyada thi uske Lawde ki. Hath se naapa to jaana ki meri hatheli se bhi bada hai.

Ab Kamal apne hath meri peeth per le gaya aur meri choli ke hook ko kholne laga. Jaise hi meri choli ke hook khule mere dono Mummey azzad ho kar uchhal pade. Mere Mummey masle jaane ke liye betaab the. Jarurat thi do mazboot hatho ki jo mere saamne ab Kamal ke roop mein maujud the. Kamal ne jhat se mere dono narangiyon ko pakad liya aur laga unka rus pine. Kamal ne apne daant, hoth aur jeebh se mere dono Mummey ki baari-baari se khoob dhunai ki. Main nihaal ho uthi. Mere muhn se siskaariyan nikal padi.

Kamal ne ab mere hotho phir se apni giraft mein le liya aur apne hathon se mere Mummey aur meri peeth ko sahla raha tha. Mera badan thar-tharane laga. Maine Kamal ke sir ke baal pakde aur apne hothon per uske hothon ka dawab badha diya. Kamal meri jeebh ko choosne laga. Mere nazuk hothon se rus ki her boond ko choos raha tha. Maine bhi Kamal ke Lawde ka jakad liya aur lagi hilaane.

Kamal ka sakht lohe jaisa Lund ekdum garam tha. Main uski garam aanch mein sulag rahi thi. Meri Choot rus se bhar chuki thi. Main apni janghon ko daba kar apni Choot ko ragad rahi thi. Isse mere jism ki aag aur bhadak gayi. Ab mujhse sahan nahi ho paa raha tha.

Maine Kamal se kaha, "Kamal. Ab sahan nahi ho paa raha hai. Ab tum apne is Lund ko meri Choot mein daal kar meri aag ko bujhao."

Lekin Kamal mere Mummo ko masalte huye bola, "Thodi aag aur bhadakne do. Phir dekhna main kaisi chudai karta hoon tumhari. Tum abse jindgi bhar ke liye koyi gazar apni Choot mein daalna bhool jayogi."

Maine apne Mummo per meethe-meethe dard ka anubhav karte huye boli, "Haan Kamal. Aaj tum meri aisi hi chudai karo ki mujhe kabhi bhi kisi gazar ki jarurat nahi pade. Ab jaldi se mujhe chodo."

Kamal ne kaha, "Jaldibaazi nahi, meri Raani. Abhi pehle mere Lund ko chaato. Mere Lawde ko chooso. Mere iss hathiyaar ko pyaar karo Jaaneman."

Yeh kahkar Kamal ne mere sir per apne haath ka dawab badhaya aur mera sir uske Lawde ki taraf jhukta chala gaya. Ab uska Lund mere chehre ke saamne tha. Halka laal aur kaalapan liye uska supara ekdum gulabi tha. Lag raha tha jaise sharab piye huye nashe mein jhoom raha ho. Maine uske moosal Lund ko apne dono hatho ki hatheli ke beech le liya aur lagne lagi usko mathne. Ekdum sakht Lund tha uska. Jara bhi nahi dab raha tha. Phir maine apni jeebh bahar nikaali aur uske Lund ke tip per apni jeebh sataa di.

Kamal meri jeebh ke chhute hi Ufff kar baitha. Mujhe bhi laga jaise maine koyi jalti huyi koyi cheese apni jeebh se laga di ho. Phir maine uske Lund ko upar se neeche aur neeche se upar ki aur chaatne lagi. Apne thook se us garam Lund ko thoda thanda karne lagi. Thook se bhar diya usko. Tabhi Kamal ne mere sir ko jor se pakda aur apne Lund ko mere muhn ke andar jabardasti daalne laga.

Maine kaha, "Leti hoon Baba. Jaraa ruko to sahi. Pehle mujhe isse khelne to do."

Lekin Kamal kahan maanne wala tha. Wo to bahut besabra tha. Usne phir mere sir ko pakad kar Lund ko mere hothon se sataa diya aur bola, "Ab sabra nahi ho raha hai. Ek baar mere Lund ko apne muhn mein lekar chooso."

Maine apna muhn thoda khola. Kamal ne jhat se apna Lund mere muhn mein daalne ki koshish ki. Lekin kaise jaata uska Lund mere muhn ke andar. Kitna mota aur moosal tha uska Lund. Lund mere daanto se takra kar hi rah gaya. Phir maine apna pura muhn khola aur uske Lund ko ¼ hi le paayi. Mera muhn pura bhar gaya. Andar to pura nahi gaya tha lekin mote hone ki wajah se andar lene mein takleef hone lagi. Kamal apna jor maar raha tha aur main bhi mere muhn ko aur kholne ki koshish kar rahi thi. Aakhir uska ½ Lund mere muhn mein chala gaya.

Ab maine apna sir hila-hila kar uske Lund ko choosna shuru kar diya. Mujhe bada maza aane laga. Maza to Kamal ko bhi aa raha tha. Isiliye uske muhn se siskariyan nikal rahi thi. Wo apne chutad hila-hila kar apne Lund ko mere muhn ke andar bahar kar raha tha aur main bhi uski taal mein taal milate huye uska saath de rahi thi. Mujhe lagne laga ki uska Lund aur phool gaya. Tabhi Kamal ne jor-jor se shot maarne shuru kar diye tab maine apna muhn hataa liya.

Kamal ne poochha, "Kyon nikaali mera Lund?"

Maine kaha, "Kaise jor se mere andar daal rahe ho? Mera muhn dukhne laga aise to."

Kamal ne kaha, "Bada maza aa raha tha tumhare choosne se. Achchha ab dheere-dheere hi hilaunga. Lo wapas se muhn ke andar aur ab tum jor-jor se chooso."

Maine phir se uske Lund ko gupp se apne muhn mein le liya. Abki baar uska Lund ¾ tak andar chala gaya. Main ab jor-jor se muhn hilaa kar uske Lund ko chusne lagi. Iss tarah ki chusai se Kamal bekaabu ho gaya. Wo phir se jor ke jhatke dene laga. Lekin maine ab koyi parwaah kiye bagair uske Lund ko choosti rahi.

Tabhi Kamal cheekh pada, "Haiii. Chooso... mere Lund ko... Indra Raani... chooso mere Lawde ko.... bada maza de rahi ho tum... choosne mein ekdum expert... aise hi chooso... main jhad jaoonga... chooso... mere Lund ko..."

Maine bhi uska Lund bahar nahi nikaala. Main bhi chahti thi ki uska ek baar rus nikal jaaye. Phir chudwaane mein mujhe bada maza aayega. Main choosti rahi uske Lund ko aur tabhi maine mehsoos kiya mere gale mein andar ki aur kuchh khatti aur chip-chipi bunde. Tabhi ek dhaar aur nikali aur sidhe halak se utar gayi. Phir to dher saari pichkaari chhuti aur main gatakti gayi uske rus ko.

Udhar Kamal apne rus ko nikaalte huye bol raha tha, "Ufff... kya choosi ho mere Lund ko... lo piyo mere rus ko... lo yeh lo... aur lo... piyo mere rus ko.... bada maza aa raha hai.... Jaaneman ... tum to expert ho Lund se khelne ki..."

Dheere-dheere uska josh kam hota gaya. Mera muhn pura uske Virya se bhar gaya. Maine uske Lund ko apne muhn se baahar nikala. Lekin yeh kya ek aur dhaar uske Lund se nikali. Abki baar mere gale per padi. Phir maine hath se hila kar uski akhri boond tak rus nikaal diya aur phir se uske Lund ko choosne lagi. Ab uska Lund dheela padne laga. Lekin ab wo Lund mere muhn mein barabar aa raha tha. Mujhe uske murjhate Lund ko choosne mein mazaa aa raha tha.

5-7 minute tak choosti rahi. Tabhi phir se uska Lund kadak hone laga. Kamal bade maze lekar chuswa raha tha apne Lawde ko. Uska Lund phir ekdum se kadak ho gaya. Uski taqat phir se uske Lund mein samaane lagi. Uske phoolte huye Lund ko dekhkar meri Choot mein aag lag gayi. Ab maine uske Lund ko bahar nikaal diya aur bister per let kar uske sir ko pakad ker apni Choot ki taraf le gayi.

Phir usse boli, "Ab apne Lund ki pyaas to bujha li. Ab tum bhi meri Choot ko chaato aur meri Choot ko apni jeebh se chodo."

Kamal meri Choot ke upar ke halke mulayam jhaanto se khelta hua bola, "Aise thode hi Lund ki pyaas bujhti hai. Jab tak mera Lund teri Choot mein andar tak jaa kar nahi chodega tab tak mere Lund ki thodi pyaas bujhegi."

Phir Kamal meri Choot aur jhaanto ko anguli se sahlata raha. Apne anguthe se meri Choot ke daane ko khojne laga. Meri Choot ka dana meri Choot ke dono lips ke beech ubhara hua tha. Ek dum laal aur phool chuka tha. Kamal ne mere daane ko anguthe se masla. Masalte hi mere muhn se siskaari nikal padi. Phir mere daane ko ragadne laga. Thodi der ke baad Kamal ne apni ek anguli meri Choot ke andar daal di. Choot rasili ho chuki thi. Anguli dhad se andar chali gayi. Phir dheere-dheere meri Choot mein anguli andar-baahar karke chodne laga.

Main mast ho ho gayi uski anguli chudai se aur bol uthi, "Uff... kya maza aa raha hai. Kitne dino baad koyi meri Choot ko chhed raha hai. Haiii... tej-tej chodo anguli se... aur andar tak daalo... Uff.."

Mere aise bolte hi Kamal ne apni speed badha di aur saath hi apni dusri anguli bhi meri Choot mein daal di. Meri haalat buri hone lagi. Main apne chutad utha-utha kar uski anguli ko aur andar lene lagi. Tabhi Kamal ne apni dono anguliyan bahar nikaal di aur apni jeebh mere daane per rakh di. Main sihar uthi. Mera badan akadne laga. Maine jor ki siskaari maari. Kamal ne apni jeebh ka jadoo dikhate huye mere daane ko chaatne laga. Phir usne apne hothon ke beech mere daane ko chhupa liya aur choosne laga.

Ab mujhse sahan nahi ho paa raha tha. Main apne chutad asmaan ki taraf utha diye. Uske sir ko pakad kar pura jor laga diya taaki wo mere daane ko aur andar tak le le. Kamal ne ab mere daane ko chhod apni jeebh meri Choot ke andar daal di. Main pagla gayi. Main hawa mein udne lagi. Meri Choot mere juice se bhar uthi. Kamal ki jeebh teji se meri Choot ke andar jaati aur dheere-dheere bahar aati. Main uski Jeebh-Chodan ka maza le rahi thi.

Ab maine vasna ke gahre saagar mein doob chuki thi. Main cheekh padi, "Ufff... Kamal... aur tej... jeebh ko teji se andar bahar karo... maine yeh sukh kabhi nahi paaya... mujhe aaj jaisa maza kabhi nahi mila... kaat khao meri Choot ko... apne daant ragad do meri nigodi Choot se... Ahhh... khoob maza de rahe ho mujhe... main tarash gayi thi aise maze ke liye... chodo mujhe apni jeebh se.."

Kamal aur tej speed se Jeebh-Chodan karne laga. Maine Kamal ke baal kas kar pakad liye. Mera badan ainthne laga. Maine apni ek taang utha kar Kamal ke upar rakh di. Kamal bhi meri Choot ko andar tak chod raha tha. Lekin mujhse sahan bilkul nahi ho paa raha tha. Mujhe laga meri Choot ab jhadne waali hi hi.

Maine Kamal ke sir ko kas kar pakda aur apne hath se uske sir ko apni Choot per jor-jor se ragadti huyi cheekhi, "Haan Kamal... aise hi ragdo aur chodo... mera paani nikal jaayega... Haan aise hi mere Raja... chooso aur ragdo... nikalegaaaa meraaaa paannnniiii.... Niklaaaaa..."

Iske saath hi mera paani meri Choot se nikalne laga. Main besudh hone lagi. Mera tan-badan hawa mein udta hua mahsoos hone laga. Dheere-dheere meri pakad dhili hoti gayi aur main shaant ho gayi. Kamal bhi meri pakad dhili padte hi mere baaju mein palat kar so gaya aur gahri-gahri saansein lene laga. Main ab ekdum halka mahsoos karne lagi. Phir dhire se karwat lekar Kamak ke badan se chipat kar so gayi.

Thodi der baad Kamal ne mere Mummey aur mere gaal per apne hath firaana shuru kar diya. Mere jism mein bhi harkat hone lagi. Maine apna hath badha kar uske adhe khade Lund se khelne lagi. Mere hath ke lagte hi uska Lund tight hone laga. Kamal ne apna sir thoda neeche kiya aur mere ek Mumme ko apne muhn mein le liya. Meri nipple ko chusne laga. Dusre haath se wo mere dusre Mumme ko masalne laga. Main uske Lund ko apni hatheli mein bhar kar hilaane lagi.

Jab uski harkatein badhne lagi to maine Kamal ko chitt lita diya aur us per sawar ho gayi. Main apni Choot ko uske Lund se ghisne lagi. Meri Choot ki ragad se uska Lund ekdum sakht ho gaya. Uske Lund ko ekdum kadak paakar maine apni Choot ko uske Lund ke nishane per lagaya aur uska Lund meri Choot mein jaane laga. Uska mota Lund meri Choot mein dheere-dheere jaise andar jaa raha tha waise hi mujhe josh aa raha tha. Main apne chutad utha kar ek jor ka jhatka maara aur uska Lund aadhe se jyaada meri Choot mein ghus gaya.

Ab main apne chutad ko halke-halke upar uthati aur phir dhamm se neeche girati. Aise 7-8 jhatko mein uska pura Lund meri Choot mein chala gaya. Ab main apne chutad utha kar jor ke jhatke dene shuru kar diye. Mere muhn se siskaariyan nikalti jaa rahi thi aur main jhatke dete jaa rahi thi. Kamal ne apne hath badha kar mere dono Mummo ko daboch liya aur pyaar bhari chutki kaatne lagaa. Isse meri speed badh gayi. Main maze se usper sawaari karte huye chudwa rahi thi.

Jab maza apne charam per pahunchne laga to maine jhatke dene band kar diye aur apni jaangho se uski jaangho se ragadne lagi. Isse mere Choot ka daana dabne laga aur mera anand badh gaya. Kamal bhi mere Mummo ko chhod kar ab meri kamar ko dono hath se pakad liya aur mujhe ragadne mein meri sahayata karne laga. Isse mera josh aur maza duguna ho gaya. Saath hi meri speed double ho gayi. Uska Lund meri Choot ke andar tak pahuncha hua tha aur meri Choot uski ragad se rus chhodne lagi.

Tabhi maine mehsoos kiya ki mera paani nikalne waala hai. Meri anand bhari cheekh nikal padi, "Kamal.... Apne haath se meri kamar ko hilao... jor se hilao... meri Choot mein kuchh ho raha hai... mujhe bada maza aa raha hai... jor se ragdo mujhe... haan... aise hi... aise hi...."

Iske saath hi meri kamar aur meri Choot jhatke khaane lagi aur main jhad gayi. Ufff... mera pura jism akda aur dheela pad gaya. Meri saansein tej chalne lagi. Main hamphte huye Kamal ke seene se jaa lagi aur gahri-gahri saansein lene lagi. Ab mere badan ka tanaav dur ho chuka tha. Lekin chaahat aur bhi thi. Maine Kamal ke hontho ko apne hontho ki giraft mein le liya aur lagi unko choosne. Mere dono Mummey uske seene se chipte huye the. Meri dono janghein uski dono janghon se mili huyi thi. Wo meri peeth per haath rakhe huye mere chumban ka jabab chumban se de raha tha. Uska Lund meri Choot se ragad khaa raha tha. Uska danda chubh raha tha.

Thodi der mein jab hum dono ki saansein niyantran mein aa gayi to Kamal ne palti maari. Ab mein bed per chitt leti huyi thi aur Kamal mere upar chhaa gaya. Uska Lund sidhe meri Choot ke andar chala gaya aur aur wo apne chutad utha-utha kar thaap dene laga. Uska Lund dur andar tak meri Choot mein samaya hua tha. Meri Choot ki bhitari deewarien uske lawde ka jakde huyi thi. Uske shot meri Choot ke andar tak lag rahe the.

Kamal mere hothon ko chumta hua mujhe chod raha tha. Main neeche padi huyi apni tangein uski kamar mein lapete huyi chudwa rahi thi. Uske dhakke ka jawab mein apne chutad utha kar de rahi thi. Jaise hi wo apne chutad utha kar meri Choot per apne Lund ka prahar karta mein apne chutad utha kar uske Lund ka swaagat karne bechain ho uthati. Lagbhag 15-20 minute tak wo mujhe lagataar bagair thake meri Choot ki dhunayi karta raha. Main nihaal ho uthi. Mujhe lagne laga ab main tikne waali nahi hoon. Meri Choot ab kabhi bhi paani chhod sakti hai.

Tabhi Kamal chodte-chodte chillaya, "Le meri jaan, khaa mere dhakke... Bahut chudaasi hai naa teri Choot. Kha mere Lund ke dhakke. Le andar tak mere Lund ko apni Choot mein. Le pee mere Lund ka paani. Teri Choot ki pyaas mitaa le... Le mera paani..."

Isi ke saath hi Kamal ne apni pichkaari chhod di. Uski pichkaari chhutne ke saath maine apni tangein kas kar Kamal ki kamar ke saath lappet li aur saath hi meri Choot bhi apna paani chhodne lagi. Hum dono ka sangam ho raha tha. Yeh Choot aur Lund ka milan tha. Dono hamph rahe the. Dono paseene se tarbatar ek dusre se chipke huye iss aanand ke kisi bhi pal ka chhodna nahi chahte the.

Kaafi der tak hum dono isi tarah pade rahe. Phir Kamal mere upar se uth kar baith gaya. Main bhi uth kar Kamal ki bahon mein sama gayi. Hum dono phir chumban lene lage. Kaafi der tak chumma-chaati ke baad hum dono alag ho gaye aur dono apne-apne kapde pahan liye.

Uske baad Kamal ko wapas apne goan jaana tha. Main badi udaas ho gayi. Lekin mera bas nahi chal raha tha.

Tab Kamal ne kaha, "Pagli, udaas kyon ho rahi ho? Main kahi hamesha ke liye thode jaa raha hoon. Hafte-dus din baad phir aaunga tab tak teri Choot mere Lund ke liye betaab ho jaayegi tab chudwane mein bada maza aayega."

Phir Kamal chala gaya. Ab Kamal her hafte-dus dino mein aata hai aur meri Choot ki khoob chudayi karta hai. Do-do dino tak meri Choot uske Lund se lagi rahti hai.
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08-20-2017, 10:42 AM,
#10
RE: Hindi Porn Stories हिन्दी सेक्सी कहानियाँ
मुझे दीदी ना कहो


मैं दिन को घर में अकेली होती हूँ। बस घर का काम करती रहती हूँ, मेरा दिल तो यूँ पाक साफ़ रहता है, मेरे दिल में भी कोई बुरे विचार नहीं आते हैं। मेरे पति प्रातः नौ बजे कर्यालय चले जाते हैं फिर संध्या को छः बजे तक लौटते हैं। स्वभाव से मैं बहुत डरपोक और शर्मीली हूँ, थोड़ी थोड़ी बात पर घबरा जाती हूँ।
मेरे पड़ोस में रहने वाला लड़का आलोक अक्सर मुझे घूरता रहता था। यूँ तो वो मुझसे काफ़ी छोटा था। कोई 18-19 साल का रहा होगा और मैं 25 साल कि भरपूर जवान स्त्री थी। कभी कभी मैं उसे देख कर सशंकित हो उठती थी कि यह मुझे ऐसे क्यूँ घूरता रहता है। इसका असर यह हुआ कि मैं भी कभी कभी उसे यहाँ-वहाँ से झांक कर देखने लगी थी कि वो अब क्या कर रहा है। पर हाँ, उसकी जवानी मुझे अपनी तरफ़ खींचती अवश्य थी। आखिर एक मर्द में और एक औरत में आकर्षण तो स्वाभाविक है ना। फिर अगर वो मर्द सुन्दर, कम उम्र का हो तो आकर्षण और ही बढ़ जाता है।
एक दिन आलोक दिन को मेरे घर ही आ धमका। मैं उसे देख कर नर्वस सी हो गई, दिल धड़क गया। पर उसके मृदु बोलों पर सामान्य हो गई। वो एक सुलझा हुआ लड़का था, उसमें लड़कियों से बात करने की तमीज थी।
वो एक पैकेट लेकर आया था, उसने बताया कि मेरे पति ने वो पैकेट भेजा था। मैंने तुरन्त मोबाईल से पति को पूछा तो उन्होंने बताया कि उस पैकेट में उनकी कुछ पुस्तकें हैं, आलोक एक बहुत भला लड़का है, उसे जलपान कराए बिना मत भेजना।
मैंने आलोक को बैठक में बुला लिया और उसे चाय भी पिलाई। वो एक खुश मिज़ाज़ लड़का था, हंसमुख था और सबसे अच्छी बात यह थी उसमें कि वो बहुत सुन्दर भी था। उसकी सदैव चेहरे पर विराजती मुस्कान मुझे भा गई थी। मुझे तो आरम्भ से ही उसमें आकर्षण नजर आता था। मेरे खुशनुमा व्यवहार के कारण धीरे धीरे वो मेरे घर आने जाने लगा। कुछ ही दिनों में वो मेरा अच्छा दोस्त बन गया था।
अब मुझे कोई काम होता तो वो अपनी बाईक पर बाज़ार भी ले जाता था। वो मुझे कामिनी दीदी कहता था। आलोक की नजर अक्सर मेरी चूचियों पर रहती थी या वो मेरे सुडौल चूतड़ों की बाटियों को घूरता रहता था।
आप बाटियाँ समझते हैं ना ... ? अरे वही गाण्ड के सुन्दर सुडौल उभरे हुए दो गोले ...।
मुझे पता था कि मैं जब मेरी पीठ उसकी ओर होगी तो उसकी निगाहें पीछे मेरे चूतड़ों का साड़ी के अन्दर तक जायजा ले रही होंगी और सामने से मेरे झुकते ही उसकी नजर वर्जित क्षेत्र ब्लाऊज के अन्दर सीने के उभारो को टटोल रही होती होंगी। ये सब हरकतें मेरे शरीर में सिरहन सी पैदा कर देती थी। कभी कभी उसका लण्ड भी पैंट के भीतर हल्का सा उठा हुआ मुझे अपनी ओर आकर्षित कर लेता था।
शायद उसकी यही अदायें मुझे भाने लगी थी इसलिये जब भी वो मेरे घर आता तो मेरा मन उल्लासित हो उठता था। मुझे तो लगता था कि वो रोज आये और फिर वापस नहीं जाये। लालसा शायद यह थी कि शायद वो कभी मेरे पर मेहबान हो जाये और अपना लण्ड मुझे सौंप दे।
छीः छीः ! मैं यह क्या सोचने लगी?
या फिर वो ऐसा कुछ कर दे कि दिल आनन्द की हिलौरें लेने लगे।
एक दिन वो ऐसे समय में आ गया जब मैं नहा रही थी। जब मैं नहा कर बाहर आई तो मैंने देखा आलोक मुझे ऊपर से नीचे तक निहार रहा था। मैं शरमा गई और भाग कर अपने शयनकक्ष में आ गई।
"कामिनी दीदी, आप तो गजब की सुन्दर हैं !" मुझे अपने पीछे से ही आवाज आई तो मैं सिहर उठी।
अरे! यह तो बेड रूम में ही आ गया? फिर भी उसके मुख से ये शब्द सुन कर मैं और शरमा गई पर अपनी तारीफ़ मुझे अच्छी लगी।
"तुम उधर जाओ ना, मैं अभी आती हूँ !" मैंने सिर झुका कर शरमाते हुये कहा।
"दीदी, ऐसा गजब का फ़िगर? तुम्हें तो मिस इन्डिया होना चाहिये था !" वो बोलता ही चला गया।
उसके मुख से अपनी तारीफ़ सुन कर मैं भोली सी लड़की इतरा उठी।
"आपने ऐसा क्या देख लिया मुझ में भैया?" मैं कुछ ऐसी ही और बातें सुनने के लिये मचल उठी।
"गजब के उभार, सुडौल तन, पीछे की मस्त पहाड़ियाँ ... किसी को भी पागल कर देंगी !"
मेरा दिल धड़कने लगा। मेरे मन में उसके लिये प्यार भी उमड़ आया। मैं तो स्वभाव से शर्मीली थी, शर्म के मारे जैसे जमीन में गड़ी जा रही थी। पर अपनी तारीफ़ सुनना मेरी कमजोरी थी।
"भैया... उधर बैठक में जाओ ना ... मुझे शरम आ रही है..." मैंने शर्म से पानी पानी होते हुये कहा।
वो मुझे निहारता हुआ वापस बैठक में आ गया। पर मेरे दिल को जैसे धक्का लगा, अरे ! वो तो मेरी बात बहुत जल्दी ही मान गया ? मान गया ... बेकार ही कहा ... अब मेरी सुन्दरता की तारीफ़ कौन करेगा? मैंने हल्के फ़ुल्के कपड़े पहने और जान कर ब्रा और चड्डी नहीं पहनी, ताकि उसे मेरी ऊँचाइयाँ और स्पष्ट आ नजर आ सके और वो मेरी मस्त तारीफ़ करता ही जाये। बस एक सफ़ेद पाजामा और सफ़ेद टॉप पहन लिया, ताकि उसे पता चले कि मेरे उरोज बिना ब्रा के ही कैसे सुडौल और उभरे हुये हैं और मेरे पीछे का नक्शा उभर कर बिना चड्डी के कितना मस्त लगता है। पर मुझे नहीं पता था कि मेरा यह जलवा उस पर कहर बन कर टूट पड़ेगा।
मैं जैसे ही बैठक में आई, वो मुझे देखते ही खड़ा हो गया।
उफ़्फ़्फ़ !
यह क्या?
उसके साथ उसका लण्ड भी तन कर खड़ा हो गया था। मुझे एक क्षण में पता चल गया कि मैंने यह क्या कर दिया है? पर तब तक देर हो चुकी थी, वो मेरे पास आ गया था।
"दीदी, आह्ह्ह ये उभार, ये तो ईश्वर की महान कलाकृति हैं ..." उसके हाथ अनजाने में मेरे सीने पर चले गये और सहला कर उभारों का जायजा ले लिया। मेरे जिस्म में जैसे हजारों पावर के तड़ तड़ करके झटके लग गये। उसके स्पर्श से मानो मुझे नशा सा आ गया। मेरे गालों पर लालिमा छा गई, मेरी बड़ी बड़ी आँखें धीरे से नीचे झुक गई। तभी मैंने उसके हाथों को धीरे से थाम लिया और अपने गोल गोल उरोजों से हटाने लगी।
"मुझे छोड़ दो आलोक, मैं मर जाऊंगी... मेरी जान निकल जायेगी ... आह्ह !"
"आपकी सुन्दरता मुझे आपकी ओर खींच रही है, बस एक बार चूमने दो !" और उसके अधर मेरे गालों से चिपक गये। मुझे अहसास हुआ कि मेरे गुलाबी गाल जैसे फ़ट जायेंगे ... तभी उसकी बाहें मेरी कमर से लिपट गई। उसके अधर मेरे अधरों से मिल गये। सिर्फ़ मिल ही नहीं गये जोर से चिपक भी गये।
मुझे जैसे होश ही नहीं रहा। यह कैसी सिरहन थी, यह कैसा नशा था, तन में जैसे आग सी लग गई थी।
उसका नीचे से लण्ड तन कर मेरी योनि को छू कर अपनी खुशी का अहसास दिला रहा था। मुझे लगा कि मेरी योनि भी लण्ड का स्पर्श पा कर खिल उठी थी। इन दो प्रेमियों को मिलने से भला कोई रोक पाया है क्या ?
मेरा पजामा नीचे से गीला हो उठा था। दिल में एक प्यारी सी हूक उठ गई। तभी जैसे मैं हकीकत की दुनिया में लौटने लगी। मुझे अहसास हुआ कि हाय रे ! मुझे यह क्या हो गया था? मैंने अपने जिस्म को उसे कैसे छूने दिया... ।
"आलोक, तुम मुझे बहका रहे हो ..." मैंने उसे तिरछी मुस्कान भरी निगाह से देखा। वो भी जैसे होश में आ गया। उसने एक बार अपनी और मेरी हालत देखी ... और उसकी बाहों का कमर में से दबाव हट गया। पर मैं जान कर के उससे चिपकी ही रही। आनन्द जो आ रहा था।
"ओह ! नहीं दीदी, मैं खुद बहक गया था ... मैंने आपके अंग अनजाने में छू लिये ... सॉरी !" उसकी नजरें अब शर्म से नीचे होने लगी थी।
"आलोक, यह तो पाप है, पति के होते हुये कोई दूसरा मुझे छुए !" उसके भोलेपन पर मैंने इतराते हुये कहा।
अन्दर ही अन्दर मेरा मन कुछ करने को तड़पने लग गया था। शायद मुझे एक मर्द की... ना ना ... आलोक की आवश्यकता थी ... जो मुझे आनन्दित कर सके, मस्त कर सके। इतना खुल जाने के बाद मैं आलोक को छोड़ देना नहीं चाह रही थी।
"पर दीदी, यह तो बस हो गया, आपको देख कर मन काबू में नहीं रहा... मुझे माफ़ करना !" कुछ हकलाते हुये वो बोला।
"अच्छा, अब तुम जाओ ..." मेरा मन तो नहीं कर रहा था कि वो जाये, पर शराफ़त का जामा पहनना एक तकाजा था कि वो मुझे कही चालू, छिनाल या रण्डी ना समझ ले। मैं मुड़ कर अपने शयनकक्ष में आ गई। मुझे घोर निराशा हुई कि वो मेरे पीछे पीछे नहीं आया।
फिर जैसे एक झटके में सब कुछ हो गया। वो वास्तव में कमरे में आ गया था और मेरी तरफ़ बढ़ने लगा और वास्तव में जैसा होना चाहिये था वैसा होने लगा। मुझे अपनी जवानी पर गर्व हो उठा कि मैंने एक जवां मर्द को मजबूर कर दिया वो मुझे छोड़ ना सके। मैं धीरे धीरे पीछे हटती गई और अपने बिस्तर से टकरा गई, वो मेरे समीप आ गया।
"दीदी, आज मैं आपको नहीं छोड़ूंगा ... मेरी हालत आपने ही ऐसी कर दी है..." आलोक की आँखों में एक नशा सा था।
"नहीं आलोक, प्लीज दूर रहो ... मैं एक पतिव्रता नारी हूँ ... मुझे पति के अलावा किसी ने नहीं छुआ है।" मन में मैं खुश होती हुई उसे ऐसा करने मजबूर करते हुये उसे लुभाने लगी। पर मुझे पता था कि अब मेरी चुदाई बस होने ही वाली है। बस मेरे नखरे देख कर कहीं यह चला ना जाये। उसकी वासना भरी गुलाबी आँखें यह बता रही थी कि वो अब मुझे चोदे बिना कहीं नहीं जाने वाला है।
उसने अपनी बाहें मेरी कमर में डाल कर मुझे दबा लिया और अपने अधरों से मेरे अधर दबा लिये। मैं जान करके घू घू करती रही। उसने मेरे होंठ काट लिये और अधरपान करने लगा। एक क्षण को तो
मैं सुध बुध भूल गई और उसका साथ देने लगी।
उसके हाथ मेरे ब्लाऊज को खोलने में लगे थे ... मैंने अपने होंठ झटक दिये।
"यह क्या कर रहे हो ...? प्लीज ! बस अब बहुत हो गया ... अब जाओ तुम !"
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