Hindi Sex Stories By raj sharma
07-17-2017, 12:45 PM,
#11
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
raj sharma stories

मामा के घर

हाई मैं कुसुम उमर 17 रंग गोरा चुचि गोल,फिगर 34 30 32,खास मेरे चुतताड की गोलाई और मेरे पिंक निपल लड़के देख कर पागल हो जाते है मुझे सेक्स बहुत पसंद है सखत सेक्स,चुदवाते वक़्त गालिया सुन-ना मुझे पसंद है. 


मैं एक बार अपने मामा के घर गयी मामा विलेज मे रहते है उनकी लड़की है पिंकी मेरी उमर की चंचल लड़की, उसकी चुचि मुझसे बड़ी फिगर होगी कोई 36 30 34 गोरी चित्ति हम आपस मे बाते कर रही थी बाते सेक्स पर आ गयी मैने पिंकी की चुचि पर हाथ फेरा और बोली पिंकी ये तो बहुत बड़ी है वो शर्मा गयी, शाम को हम गाओं मे घूमने निकली तो मुझे उसकी बड़ी चुचिओ का राज पता लग गया हम जिस भी गली से जाते उस पर कॉमेंट होते मेरी छेमिया मेरी जान एट्सेटरा हम जब घर आए तो मैने पूछा ये क्या था पहले तो वो टालती रही पर जब मैने कहा कि मैं भी मज़े लेना चाहती हू तो वो खुल गयी उसने बताया यहा तो जब मैं 14 साल की थी जब से ही मज़े कर रही है फिर तो हम स्टार्ट हो गयी मैने पूछा कैसे करती हो तो वो बोली रात को बताउन्गी वो बोली यहा तो लगभग हर लड़की 15 साल की उमर मे चुद जाती है मुझे बड़ी जलन हुई उस से, वो बताती रही कि लड़के जब लड़की को चोद्ते है है तो बहुत तंग करते है कई बार तो मार भी देते है मैं बोली मेरी चूत को लंड मिलेगा वो बोली तुम्हारे उप्पर तो टूट के पड़ेंगे आज रात को ही तेरा कल्याण हो जाएगा पर तू सह तो लेगी मैं बोली यार चिंता मत कर. 


रात तक हम एक दूसरे को छेड़ते रहे रात को 9 के करीब हम रूम मे गये मैने पिंकी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए उसे पूरी नंगी करके मैने उसकी कूची पर हाथ फेरा और उस-से पूछा पिंकी तेरी इस चूत का उद्धाटन किसके लंड से हुआ था वो बोली पापा के दोस्त है उन्होने ही मेरी सील तोड़ी थी, अंकल ने मम्मी की चुदाई भी की हुई है और आज अंकल और उसके दोस्त तेरी चूत का कल्याण करेगे मैं बोली उनका लॉडा कैसा है, पिंकी बोली जान चिंता मत कर तेरी चूत की तो धज्जिया उड़ा देंगे हमारी बातो मे 10 के करीब टाइम हो गया मैं बोली कब उड़े गी चूत की धहाज़िया उसने खिड़की खोली और मुझे बोली नीचे कूद जा मैं नीचे कूदी पीछे पीछे चादर लपेटे वो कूद गयी अब हम दोनो खेत मे खड़े थे वो बोली चल मैं उसके पीछे चल पड़ी थोड़ी दूर ही खेत मे एक मकान था हम दोनो उसमे घुस गयी. 


वाहा आँगन मे तीन 40-45 साल के आदमी ताश खेल रहे थे मुझे डर सा लगा वो तीनो कछे और बनियान मे थे उनमे से एक बोला आ गयी छेमिया, ये कॉन है मेरी तरफ देखते हुए बोले, पिंकी बोली शहर से आई है मेरी बुआ की लड़की अपनी चूत की धहाज़िया उड़वाने, वो बोले अरे ये तो बिम्ला की लड़की लगती है अपनी मम्मी का नाम सुन कर मैं हैरान हो गयी मैं बोली तुम कैसे जानते हो मम्मी को वो बोला तेरी मा यहा बहुत चुदी है आज तो हमारी किस्मत खुल गयी जवानी मे मा को चोदा अब लड़की को वाह,पिंकी ने अपनी चादर उतार दी अब वो पूरी नंगी थी. 


पिंकी बोली यार हमे तो चोद लो मम्मी को बाद मे चोद लेना, उन तीनो नई हम दोनो को अपनी और खींच लिया हम दोनो उनकी गोदी मे लेटी पड़ी थी मेरी कुर्त और पाजामी दो मिनिट मे ही मुझसे अलग हो गये वे तीनो(मैं तीनो के नाम लिख दू सुरेश,रमेश,मनोज) हमे बुरी तरह से चूसने लगे मसलने लगे मेरी चुचिओ पर गर्दन पर नीले मार्क्स बना दिए हम दोनो के मूह से. 


आआआआआअऊऊऊ वॉववववववव एयाया वॉववववव ऊऊऊ ऊऊ आआआआ ऊऊऊऊऊऊओह निकल रही थी रमेश बोला साली अपनी मा से भी चिकनी पड़ी है तभी रमेश ने मुझे गोदी मे ही उल्टी कर दिया अब मेरे चुतताड रमेश की गोदी मे थे और मेरा मूह सुरेश के लंड के पास था सुरेश ने अपना कछा उतारा उसका 10" लंबा. 


लंड स्प्रिंग के तरह मेरे चेहरे से टकराया, उसके लंड देख कर मेरे होश उड़ गये रमेश ने मेर लेग्स खोल के मेरी चूत मे 2 उंगलिया डाली मैं चिहुक गयी वो बोला क्या हुआ, मैं बोली मैने नही चुदवाना ये तो मेरी चूत ही फाड़ देगा पिंकी बोली क्यू बड़ा शौक चढ़ा था चूत की धहाज़िया उड़वाने का सुरेश बोला तू वैसे ही डर रही है पिंकी तेरे से छ्होटी है फिर भी इससे रोज़ाना चुदवाति है 14 साल की उमर मे ही ये इसे अपनी चूत मे ले गयी थी मैने सुरेश का लोड्‍ा अपने हाथ मे पकड़ा उसका लंड लोहे से भी सखत था पिंकी मनोज की गोदी मे बैठी थी मनोज पिंकी की चुचिया चूस रहा था सुरेश मेरी गॅलो मेरे होंठो पर अपना मोटा लंड फिरा रहा था मेरे होठ सख्ती से बंद थे तभी रमेश ने मेरी गांद मे उंगली दे दी मेरा मूह खुला मूह खुलते ही सुरेश ने अपना लंड मेरे मूह मे सरका दिया सुरेश का लंड बड़ी मुश्किल से मेरे मूह मे आ रहा था पर उसने धक्के मार- मार के मूह मे जगह बना ली मैं धीरे धीरे उसका लंड चूसने लगी तभी रमेश ने मेरे को अपनी गोदी से नीचे पटक दिया और अपने कपड़े उतार कर मेरे सामने आ गया मैं उसका लंड देख कर फिर कांप गयी उसका लंड सुरेश से भी बड़ा और बीच मे से कुछ टेडा था वो अपना लुंड पूचकारता हुआ मेरे सामने खड़ा था. 


मैं मन मे सोच रही थी आज मेरी खैर नही इतने मे मूज़े पिंकी की चीख सुनाई दी आाआूऊ ऊऊऊऊ माआआआआअ ऊऊऊऊऊ धीरेयययययययी ऊऊऊऊऊऊओ माआआआआआ आआमम्म्ममममाआआआररर्र्र्र्र्रृिईईईईईईईईईई मैने उसकी तरफ उसकी दोनो टांगे हवा मे थी और मनोज अपना लंड उसकी चूत मे सरका रहा था मैं पिंकी की तरफ देख रही थी सुरेश बोला उधर क्या देख रही है तेरा भी यही हॉल होना है मुझे भी मस्ती चढ़ि थी पिंकी को देख कर पर मैं नाटक करती बोली, मैने नही चुदवाना तुमसे अपनी चूत नही फदवाणी इतने मोटे मोटे लॉड मेरी चूत मे नही जा पाएगे, पिंकी चुद्ते हुए बोली साली तो यहा भजन करने आई है अभी तक शहर के लूलिओ से चुदवाइ होगी आज पता चलेगा गाओं का लंड क्या मस्ती देता है पिंकी सुरेश को बोली अंकल इसे बड़ा शौक है अपनी चूत की धहाज़िया उड़वाने का आज इसकी चूत की धहाज़िया ही उड़ानी है मैं डर गयी मैं बोली पिंकी क्या बोल रही है तू, पर सुरेश ने मेरे मूह से लंड निकाला लंड निकलते ही टक की आवाज़ आई. 


सुरेश और रमेश मुझे खींच कर पिंकी के पास ले गये पिंकी की चूत मे मनोज का लंड सटा-सॅट आ जा रहा था उसकी चूत की दोनो किनारिया दूर तक अलग हुई पड़ी थी मनोज की स्पीड इतनी तेज़ थी कि बस लंड सिर्फ़ चमकता था मैं पिंकी की चुदाई मे खो सी गयी मैं झुकी तो हुई थी रमेश ने मुझे थोड़ा और झुका दिया रमेश अंकल ने मेरी टांगे खुलवा कर अपना लंड मेरी चूत पर लगाया तो मैं चोकते हुए बोली अंकल अंदर मत करना पिंकी बोली क्यू मैं बोली मुझे इनके मुड़े हुए लंड से डर लग रहा रहा है रमेश बोला ये मुड़ा हुआ लंड तेरी मा को बहुत पसंद है उसने मेरी कमर पकड़ के ज़ोर से धक्का मारा तो छ्होटा गुबारा फटने की आवाज़ आई और लंड चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया मेरे मूह से भयनकर चीख निकली आआआआआहह ऊऊऊऊ ऊओ मर गई ईईइ उउईईईईईईईईईई माआआआआ ऊऊऊओ माआआआआ फत्त्तटटटटतत्त गैिईईईईईईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ आआआअ हहूओ ऊऊहह हमाआआआआ आआआआ बाहर निकालो प्ल्ज़ बहुत दर्द हो रहा है पिंकी बोली साली दो मिनिट रुक जा तू ही बोलेगी और अंदर डालो, रमेश ने धीरे धीरे धक्के लगाने स्टार्ट किए मैं उउउउउआआअ कर रही थी रमेश बोला कुसुम पूरा डाल दू पिंकी बोली अभी इस हरंजड़ी के अपना पूरा लोड्‍ा अंदर नही डाला रमेश ने दुबारा धक्का मारा उसका लंड छूट को चीरता हुआ मेरी बच्चे दानी को टच करने लगा मैं चीखती रही पर रमेश ने स्पीड से धकके मारने शुरू कर दिए, उधर पिंकी झड़ने वाली थी वो आंट-शॅंट बोल रही थी आआआ......राजा ज़ोर से चोदो अपनी रानी को मुझे चोद चोद के मार डालो मनोज भी झड़ने वाला था मनोज भी बोल रहा ले संभाल इसको अपनी चूत मे ले मैं आअ रहा हू आआआ मैं गया 


जैसे ही मनोज झाड़ा दो काम एक साथ हुए, मनोज ने अपना टपकता लंड मेरे मूह मे डाल दिया और सुरेश ने पिंकी को अपने उप्पर खींच के पिंकी की चूत मे लंड घुसा दिया मेरे मूह मे मनोज का लंड झाड़ रहा था उसके लंड से पिंकी की चूत का स्वाद आ रहा था पूरी तरह झड़ने के बाद भी मनोज का लंड बड़ा दिख रहा था मैं लंड पकड़ कर बोली पिंकी अपनी चूत मे इतना बड़ा लंड कैसे ले गयी, पिंकी सुरेश के लंड पर बैठे थी सुरेश ने उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपने उप्पर लिटा लिया पिंकी की चुचिया रमेश की छाती से दब गयी और पिंकी के चुतताड बाहर को उभर आए सुरेश ने अपनी टांगे मोड़ के धक्के मार रहा था मैं पिंकी की ओर देख रही थी तो रमेश ने मुझे उठाया और पिंकी की चूत के पास ले आया वाहा मुझे कुत्ति की तरह झुका के पीछे से लंड दुबारा घुसा दिया मेरा मूह पिंकी के चुतताड़ो की तरफ था मनोज ने मेरा मूह पिंकी की गांद पर लगा दिया मैं पिंकी की गांद चाटने लगी पिंकी के मूह से सिसकारिया निकल रही थी मेरी जीब थोड़ी सी नीचे आई तो वो सुरेश के लंड को टच कर रही थी मैं सुरेश की गोलिया सहला रही थी तभी सुरेश ने लंड निकाला मैने उसे चूस के दुबारा पिंकी की चूत मे डाल दिया मैं अपने चरम पर थी मैं रमेश को बोली अंकल तेज़ चोदो मुझे और हा सनडे को मम्मी आ रही है मैने मम्मी के साथ चुदना है रमेश बोला ये कैसे होगा मैं बोली मैं और मम्मी साथ मे चुद चुकी है पिंकी बोली मैं भी बुआ के साथ चुड़ूँगी रमेश ने स्पीड बढ़ाते हुए कहा ठीक है मैं उुआअ कर रही तभी मेरा बदन कस गया और मैं निढाल सी पड़ गयी रमेश ने भी मेरी चूत मे पिचकारी मारनी स्टार्ट कर दी उधर पिंकी और सुरेश झाड़ चुके थे सारी रात मैं और पिंकी ऐसे ही चुद्ती रही . 

समाप्त
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07-17-2017, 12:45 PM,
#12
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
'कैसी लगी रात की चुदाई '


दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा एक और कहानी लेकर हाजिर हूँ दोस्तो मैं रक्षाबन्धन की छुट्टी मे घर पर अकेला था. सनडे को मैं अपने दोस्त के घर गया. उसकी एक बहन है जिसका नाम है भावना. देखने मे बिल्कुल ही डॉल लगती थी. उसकी हाइट 5 फिट 6 इंच थी. मैं अक्सर अपने दोस्त के घर उसके पास जाता था. वो इतनी सुंदर और गोरी थी कि मैं उसे बयान नही कर सकता हू. मैने उसके साथ सेक्स करने का प्लान तो कयि बार बनाया लेकिन मौका ही नही मिलता था. उस दिन मेरे दोस्त के मम्मी,पापा नोएडा गये हुए थे,मेरा दोस्त और उसकी बहन घर पर अकेली थे जब मैं पहुचा तो मेरे दोस्त ने मुझसे कहा कि वो भी नोएडा जाना चाहता था पर भावना के एग्ज़ॅम(यूनिट टेस्ट)के वजह से नही जा पाया, फिर उसने कहा कि तुम कुछ दिन मेरे घर रुक जाओ तो मैं नोएडा चला जाउन्गा, मेरे तो दिल की हसरत जैसे पूरी हो गयी लेकिन उसे शक ना हो इस लिए मैं हिचकिचाने लगा पर वो रिक्वेस्ट करने लगा तो मैं तैयार हो गया मेरा दोस्त दोपहर की ट्रेन से नोएडा चला गया.उसे स्टेशन छोड़ने के बाद मैं जब वाहा पहुँचा तो मैने भावना को हाफ पैंट और टी शर्ट मे बेड पर बैठा पाया. मैं उसकी गोरी टाँगो पर देखता रहता था. लेकिन उसने कभी ध्यान नही दिया. मैं कुच्छ देर तक उसके साथ बात करता रहा. अब मैं सोने के लिए तैयार होने लगा. मैने अपनी पैंट खोल के तावेल पहन लिया और बेड पर लेट गया.उसके घर मे सिर्फ़ दो रूम ही थे चुकी इस रूम मे ए.सी.था इस लिए वो भी उस रूम मे आ गयी. 

भावना भी सीधी रूम के दरवाजा को बंद कर के लाइट बुझा के नाइट बल्ब को जलाकर के मेरे बगल मे आके लेट गयी. उसने अपनी पीठ को मेरे तरफ कर रखा था. मैं कुच्छ देर तक सोचता रहा. कुच्छ देर के बाद मैने फाइनल डिसाइड कर लिया कि अब मुझे सोचना नही चाहिए. मैने अब अपनी कमर को उसकी कमर से सटा दिया. उसने अपनी कमर को थोड़ा सा खिचा. मैने फिर थोड़ी देर के बाद अपनी कमर को उसकी कमर से सताया. अब वो दीवाल मे सॅट चुकी थी. सो मैने अपनी कमर को उसकी कमर मे सताने के बाद जैसे ही अपने हाथ को उसकी कमर पर रखा तो उसने बोला 'ये क्या कर रहे हो' मैने बोला वही जो एक जवान लड़का एक सुंदर जवान और हसीन लड़की को अकेले मे पाकर करता है. वो बोली ' नही मैं ये नही करूँगी'. मैने बोला कि 'क्यो तुम्हारा मन नही करता' वो बोली नही ये ग़लत है. मैने बोला कि ग़लत क्या है. ये तो बिल्कुल सत्य है. अब मैं ने ये कहते हुए उसकी पैंट के एक बटन को खोल दिया. उसने मेरे हाथ को पकड़ के अपने कमर से हटा दिया. मैने पिछे से उसके पैंट को खिच दिया. वो पैंट को खिच के पहनने लगी तो मैने उसके हाथ को हटा दिया और उससे बोला ' क्यो दिखावा कर रही है, तुम्हारा मन भी तो है., और मैने उसकी पैंट को दोनो हाथो से पकड़ के खोल दिया. उसने मुझे धक्का दे दिया और रूम का डोर खोलने लगी मैने उसे पक्कड़ कर बेड पर गिरा दिया और उसके बूब्स दबाने लगा. अब मैं अपने एक हाथ से लंड को पकड़ के दूसरे हाथ को उसके गंद पर फेरते हुए अपने लंड को उसके गंद के होल के पास ले गया. अब मैने एक हाथ से उसके गंद को फैलाते हुए अपने लंड को उसकी गंद मे जाने के लिए रास्ता दिखाया. अपने लंड को. 

मैने उसकी गंद के होल के दरवाजे पर रखते हुए उसके कमर को पकड़ के अपनी कमर को ज़ोर का झटका मारा और वो आआऔऊक्कककककककााआआअ कर के सिसक उठी. मैने पुछा क्या हुआ गया है. वो बोली हाआआआआअ अब मैने अपने हाथ से उसकी कमर को पकड़ के अपने तरफ खीच के अपने लंड को उसकी गंद मे जल्दी से जल्दी ले जाने के लिए ज़ोर ज़ोर के झटके मारने लगा. वो मेरे हर झटके के साथ आआआआआआआआआआअहह ऊऊऊऊऊओह हाआआआआआत की आवाज़ निकालती जो मेरे मन को और भी बढ़ाती थी. कुच्छ देर मे मैने अपने पूरे लंड को उसके गंद मे घुसा दिया था. दस मिनट के ठेलम पेल के बाद मेरा संपूर्ण लंड उसकी गंद मे घुस गया था मैने कुछ ही धक्के लगाए थे की मेरा वीर्य निकल गया फिर मैने अपने लंड को निकाल दिया और कुच्छ देर तक वैसे ही लेटे रहने के बाद उठ के बाथ रूम मे चला गया. मैने पेशाब करने के बाद अपने लंड को पूरी तारह से सॉफ किया और तब मे रूम मे आया. आने के बाद मैने भावना को वैसे ही बेड पर पड़ा पाया. मैने बोला जाओ बाथरूम नही जाना.' वो बिना कुच्छ बोले बाथ रूम मे चली गयी . मैने अब अगले दौर की तैयारी करना सुरू कर दिया. मैने अपने लंड को तेल के डिबे मे डाल दिया. जैसे ही भावना रूम मे आई मैने उससे पूरे कपड़े उतारने के लिए बोला वो बोली कि 'अब चोदोगे भी?' मैने बोला हा ये तो अभी ट्रेलर था अभी फाइनल तो बाकी है. उसने अपनी टी शर्ट और ब्रा को खोल के बेड के पास रख दिया. मैने देखा कि उसकी चूत पर तो एक भी बाल नही था. मैं इसी तरह के चूत को चोदना पसंद करता हू. मैने उसके हाथ को पकड़ के अपने लंड को उसके हाथ मे पकड़ाते हुए उसे मूह मे लेने के लिए बोला क्योकि मैं अभी पूरी तरह से तैयार नही हुआ था. उसने मेरे लंड को अपने हाथ मे लेलिया और अब झुक के मेरे लंड को अपने मूह मे लेने के बाद चूसने लगी. 

मैं कुछ देर मे बिल्कुल ही हॉट हो गया, मैने उससे लंड छ्चोड़ के बेड पर लेटने के लिए बोला. उसने अपने मुँह से लंड को निकाल दिया और बेड पर सीधे लेट गयी. मैने डिबे से तेल निकाल के उसके छूट पर लगा दिया. उसके चूत की साइज़ 3 इंच होगी.मैं अब उसकी जाँघ पर बैठ के उससे चूत को फैलाने के लिए बोला. भावना की चूत इतना सुंदर थी कि मैं अपने लंड को जो कि लगभाड़ 8 इंच लंबा और 2 इंच चौड़ा है, एक झटके मे पूरा अंदर डाल देना चाहता था. मैने अपने लंड को जैंसे ही उसकी चूत के उपर रखा उसने अपने दोनो हाथो से अपनी चूत को फैला दिया. मैने अपने लंड के फ्रंट पार्ट को एक हल्के से झटके के साथ जैसे ही चूत के अंदर किया वो आआ आआआ एयाया ऊऊओ ऊऊ ऊ आआआ अहह नहियीईई धेरेय्य्य्य्य्य्य धेरेय्य्य्य्य्य्य्य धेरेय्य्य्य्य्य्य्य्य आआ ऊऊऊऊओ ऊऊऊऊऊ स्लॉवववव बाबययययययी गो स्लॉवववववववव लग जय्गीईईई स्लॉववववववववव की आवाज़ के साथ पूरी तरह से सिहर उठी. उसने अपने दोनो पैरो को पूरी तरह से टाइट कर दिया. मैने अब उसकी दोनो तनी हुए चुचिओ को अपनी दोनो हथेलियो मे लेते हुए हल्का हल्का दबाना सुरू किया. मैने कुछ देर के बाद जब देखा कि उसके पैर अब धीरे धीरे ढीले पड़ने लगे तो मैने अपनी कमर को फिर से हिलाना सुरू कर दिया. अब उसके मूह से फिर से आआअहह आअहह ऊऊसस ऊआाअ अहह अहह की आवाज़ निकलने लगी. मैने उसकी चुचिओ को ज़ोर ज़ोर से मसलना सुरू कर दिया. कुच्छ देर पर मैने एक ज़ोर का झटका मारा तो वो आअऊओ ऊऊऊऊऊओ नहियीईईईईईईईईई माआआआअ लगगगगगगगगगगगग गैिईईईईईईईईईईईईई नहियीईईईईईईईईईई निकालूऊऊऊऊऊऊ दर्द्द्दद्ड हूऊओ रहा हाईईईईईईईई आआआआअ बसस्स्स्स्स्स्सस्स ऊऊऊऊ मात्त्तटटटटटटतत्त करूऊऊऊओ आआहनाईईईईईईईईईईईईई कर के चिल्ला उठी. मैने पुछा क्या हुआ वो बोली कि लगता है चूत फॅट गयी. मैने अपने लंड के तीन हिस्से मे से दो हिस्से को उसकी चूत मे डाल दिया था. अब मैने उसके पैर को फैलाने के लिए उठ के के बैठ गया और उसके पैरो को पकड़ के समेटते हुए फैला दिया. अब मैं अपने लंड को उसके चूत के अंदर ले जाने का पूरा फ़ैसला कर लिया. 

मैने उसके कमर को पकड़ के एक ज़ोर का झटका मारा इस बार तो वोआाहह नाहहिईीईईईईईईईईईईईईईई लगगगगगगगग रहाआआआआअ है ईईईईईईईईईईईईईई माआआआआआअ आआअहबब्ब्ब्बबबाआआआअपरीए आआआआअ करके जैसे बुरी तरह से छटपटा उठी. मैने जब उसके चूत पर देखा पाया कि मेरा पूरा लंड उसके गोरी चूत के अंदर जा चुका था. मैने जब देखा कि वो ऐसे शांत नही होगी तो मैं उसके उपर लेट गया और उसके होंठो को अपने होटो मे लेके दबा लिया और अपने दोनो हाथो से उसकी दोनो चुचिओ को मसल्ने लगा. मैने ज़ोर ज़ोर से झटका लगाना भी सुरू कर दिया. मैं कुच्छ देर के बाद अपनी कमर के नीचे देखा तो पाया कि वो भी अब अपनी कमर को हिलाने लगी थी. सयद उसे भी अब मज़ा आ रहा था. मैने पुछा कि मज़ा आ रहा है तो उसने मुस्कुरा के सर को हिलाया. कुच्छ देर तक इसी तरह से चुदाई करने के बाद मैने अपने स्पर्म को जैसे ही उसकी चूत मे गिराया तो मैने उसके होटो को कुछ देर तक चुसता रहा और एक तरफ उसकी दोनो चुचिओ को मसलता रहा तो दूसरी तरफ उसके होटो को चूस्ता रहा और उसने भी पूरा साथ दिया. अब हम दोनो बुरी तरह से थक चुके थे. मैं कुच्छ देर तक उसके उपर लेटा रहा तब उठ के अपने लंड को निकाल के भावना के बगल मे लेट गया. और कुच्छ देर मे हम दोनो वैसे ही सो गये. सुबह जब नींद खुली तो दिन के 9 बज रहे थे. मुझे अपने काम से जाना था. मैं उठ के तैयार हो गया. भावना भी उठ गयी थी. वो भी खुस थी. मैने मुस्कुराते हुए पुछा 'कैसी लगी रात की घटना' वो मुस्कुराते हुए बोली 'बहुत अच्छा लगा तुमने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली.' मैने उसके कपड़ा पहनने के बाद दरवाज़ा खोला और अपने रूम के लिए निकल गया. इसके बाद भावना को 3 दिन और चोदा. दोस्तो कैसी लगी ये दास्तान ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा
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07-17-2017, 12:45 PM,
#13
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma

raj sharma stories
मेरी कज़िन नीलिमा 



दोस्तों मैं यानि आपका दोस्त राज शर्मा एक और नई कहानी के साथ हाजिर हूँ ये कहानी तब की है जब मेरी उमर मेरी उमर 25 साल थी और मैं ग्रॅजुयेशन कर के नौकरी तलाश रहा था ,मेरी दो कज़िन है पहली की उमर 16 और दूसरी की 21 साल है . एक का नाम रीता है और दूसरी का नाम नीलिमा है.ये अभी कुछ दिन पहले की बात है. मेरी दोनो कज़िन छूत्टियाँ बिताने हमारे घर आई हुई थी. मेरे मोम और डॅड दोनो ही सर्विस करते है. सो सुबह दोनो ड्यूटी पर निकल जाते है. मैं घर पर अकेला थे .मेरी बड़ी कज़िन नीलिमा(21 एअर) शॉपिंग के लिए गयी थी और छोटी कज़िन रीता(16 एअर) इसी शहर मे हमारे एक रिलेटिव के घर गयी थी. रीता का अड्मिशन हो गया था फॅशिन डिज़ाइनिंग मे और उसे अगले दिन हॉस्टिल जाना था. उस दिन मैं अपने रूम मे बैठ कर चतिंग कर रहा था. उसी समय मैने बाहर देखा तो आसमान मे बड़े घने बदल दिखे. मैने फोन से नीलिमा और रीता से बात की रीता ने कहा कि वो शाम तक आएगी लेकिन नीलिमा ने कहा कि बस थोड़े देर मैं वो घर आ जाएगी ,शी ईज़ ऑन दा वे. फिर मैने देखा कि जोरो से पानी पड़ना स्टार्ट हो गया. मुझे बरसात मे नहाना बहुत अच्छा लगता है इस लिए तुरंत हाफ पॅंट पहन कर छत पर चला गया और बारिश मे भीग कर बारिश का मज़्ज़ा लेने लगा.थोड़े देर मे दरवाजे की घंटी बजी. मैं भीगा हुआ ही नीचे आया और डोर को खोला मैने देखा कि दरवाज़े पर नीलिमा खड़ी है और वो पूरी तरह से भींगी हुई है 


जब मैने दरवाज़ा खोला तो वो अपने दुपट्टे को हाथ मे लेकर उससे पानी निचोड़ रही थी इस लिए उसके बूब्स मुझे दिखे पानी मे भीगने की वज़ह से उसकी पूरी ड्रेस उसके बदन से चिपक गयी थी. 


मैने देखा कि उसकी ब्लॅक ब्रा उसके पिंक सूट से नज़र आ रहा था और उसकी चुचि (बूब्स) उपर से आधे वाइट और गोल नज़र आ रहे थे. मुझे तो देखते ही मदहोशी छाने लगी और मेरा लंड खड़ा होने लगा.तभी वो अंदर की तरफ आई मैने पीछे से उसकी गांद(आस)को बड़े गौर से देखा वाउ एक दम गोल गोल और मस्त लग रही थी. मैं उसके पीछे भीतर गया और पूछा कि पानी मे भीगने की क्या ज़रूरत थी तो नीलिमा ने कहा कि मैं पास मे ही थी तो बारिश स्टार्ट हो गयी और वैसे भी मुझे पानी मे भीगना अच्छा लगता है. 


तो मैने कहा कि ठीक है मैं छत पर जा रहा हू बरसात मे नहाने. ये कह कर मैं उपर आ गया और नहाते हुआ नीलिमा के फिगर के बारे मे सोचने लगा.तभी मैने देखा की नीलिमा भी उपर आ गयी और पानी मे भीगने लगी. इधर पानी पूरे ज़ोर से बरस रहा था मैं तो यही चाह रहा था कि वो उपर आ जाए.मैं नीलिमा से नज़रे बचा कर उसके भीगे बदन को देख रहा था मैने देखा कि उसके गुलाबी होंठ एक दम लाल हो गये है और उसकी आधी चुचि उसके सूट से निकलने को बेताब है और उसके सुडौल पैर एक दम मस्त लग रहे थे .मेरा तो मूड खराब होने लगा और मैने सोचा कि अब तक अपनी प्यारी कज़िन को सिर्फ़ ख्यालो मे चोदा आज इससे रियल मे मज़्ज़ा लिया जाए. जो होगा देखा जाएगा ये सोच कर मेरा लंड खड़ा होने लगा इधर नीलिमा पूरे मध्होशि मे भींग रही थी. थोड़ी ही देर मे मेरा लंड मेरे हाफ पॅंट मे खड़ा हो गया था और उपर से साफ दिख रहा था ,मैने देखा कि नीलिमा की नज़र मेरे पॅंट पड़ रही उसने देखा और फिर थोड़ी सी मुस्करा कर भीगने मे मस्त हो गयी. उसके पूरे बदन पर बरसात का पानी पड़ रहा था और उसके होंठ एक दम गुलाबी होते जा रहे थे ,इधर मुझसे रहा नही जा रहा था मैं धीरे से नीलिमा के पीछे गया और उसे पीछे से कमर मे हाथ डाल कर उठा लिया इससे मेरा लंड उसकी गांद से एक दम सॅट गया. नीलिमा तुरंत मुझे झटकते हुआ आलग हो गयी और बोली कि "ये क्या कर रहे हो भैया" ,तो मैने उससे बोला "नीलिमा आज तुम ग़ज़ब की लग रही हो मैं तुम्हे प्यार करना चाहता हू"मैं तुम्हे बचपन से चाहता हू और तुमसे प्यार करना चाहता हू" तो नीलिमा ने "बोला कि आपको शरम नही आती अपनी कज़िन के बारे मे ऐसा सोचते है" तो मैने कहा मेरी रानी जब तुम्हे मेरे लंड देखने मे और मेरे सामने आधे नंगे बदन नहाने मे शरम नही आ रही तो मुझे कैसे आईगी . 

ये बोल कर मैने उसके सर को पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठो से सटा दिए और ज़ोर से उसके होंठो को चूसने लगा और मैने एक हाथ से उसकी राइट साइड के चूतड़ को दबाने लगा और लेफ्ट साइड मे मैने हाथ से कमर को पकड़ा,मैने नीलिमा को ज़ोर से पकड़ा था और वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी. मैं 3 मिनिट तक उसके होंटो को चूस्ता रहा और उसके चूतड़ दबाता रहा . ओह माइ गॉड क्या बड़े बड़े और मस्त चूतड़ थे उसके मुझे तो जन्नत लग रहा था ,फिर मैने देखा की अब कुछ कुछ नीलिमा भी कमजोर पड़ती जा रही थी क्योकि मैने उसे बड़ी ज़ोर से पकड़ा था. पानी अभी भी पूरे रफ़्तार मे बरस रहा था. मैने नीलिमा के होंटो को छ्चोड़ उसकी चुचियो को उसके सूट के उपर से ही दबाने और चूसने लगा अब मैं पूरे जोश मे आते जा रहा था. 

मैने नीलिमा की सलवार का नाडा खिच दिया. सलवार लूस होकर रह गया. क्यूकी उसका बदन से गीला होकर चिपका हुआ था. मैने उसे उसकी गांद से नीचे कर दिया. और एक हाथ अंदर डाल कर उसके पॅंटी मे हाथ को डाल दिया और उसे सहलाने लगा. नीलिमा अब सिर्फ़ मुझे "छ्चोड़ दो भैया ये ग़लत है" ऐसा बोले जा रही थी लेकिन मैं कहा सुनने वाला था मैं तो अपनी धुन मे ही था और उसके गांद और चुचि को दबाए जा रहा था. मैने उसकी सलवार को नीचे से पकड़ कर हाथो से खिचने लगा और मैने उसकी सलवार नीचे से ज़ोर से खिच कर उतार दिया उसकी नंगी टाँगो को देख कर मुझे और जोश आ गया और मैं उसकी टाँगो को चूमता हुआ उसकी टाँगो पर पड़ने वाली बूँदो को चूस रहा था और अपनी जीब से उसकी चिकनी टाँगो को चाट और चूम रहा था. 

टाँगो को 5 मिनिट तक चूमता रहा और नीलिमा अब उसे भी अब मज़्ज़ा आने लगा था वो सिर्फ़ आँखे बंद किए हुई थी मैने अब तुरंत उसकी समीज़ भी उपर से खिच कर निकाल दी अब और उसे ज़मीन पर लेटा दिया, छत के चारो तरफ से बौंड्री होने के कारण हमे कोई भी अगाल बगल के लोग नही देख सकते थे अब मेरी प्यारी कज़िन नीलिमा ब्रा और पॅंटी मे थी. मैने उसके गोरे बदन को देखकर पागल हो गया एक तो गोरा ओर मासल बदन उपर से पानी का पड़ना, क्या बताऊ दोस्तो ग़ज़ब की फिगर लग रही थी.मैने उसके पेट को पहले चूमा और चूमते हुए उसके चुचियो की तरफ बढ़ा मैने अब नीलिमा की एक हाथ से चुचि दबाना स्टार्ट किया और नीलिमा के होंठो को चूसने लगा. नीलिमा अब थोड़ी जोश मे आ गयी थी और सीई सीयी सीयी स आहह..उम्म्म्म…संजूऊू..उफफफ्फ़..एमेम..की आवाज़ निकाल रही थी. मैने नीलिमा के ब्रा को खोल कर उसकी चुचियों को उपर से आज़ाद कर दिया उसके टाइट ब्रा के खुलते ही उसकी प्यारी और मस्त चुचिया आज़ाद हो गयी मैने उस्स्की चुचियो के निपल को दबाने लगा और बीच बीच मे उसे चूस और बाइट भी कर रहा था, 


मैं धीरे धीरे उसके बदन को चूमते हुआ नीलिमा के जाँघो के पास आया और नीलिमा की गुलाबी पॅंटी को खींच कर उतार दिया मैने जैसे ही पॅंटी उतारी नीलिमा ने अपने पैरो को मोड़ लिया जिससे उसकी चूत च्छूप गयी. पानी अभी भी पड़े जा रहा था. मैने नीलिमा के दोनो पैरो को ज़ोर लगा के हटाया नीलिमा की चूत गुलाबी और टाइट लग रही थी और उस पर ब्लॅक कलर के हल्के बाल थे मैं अब उसकी चूत को चूमने लगा मैने नीलिमा रानी की गुलाबी चूत के दोनो फांको को हटाया और उसे अपनी जीभ से चाटने लगा . वाउ क्या टेस्ट था मेरी कज़िन की चूत का मैं उसकी चूत को चूस्ते जा रहा था मैने देखा अब नीलिमा भी जोश मे आ गयी थी और उसके मूह से आहह आ अहह अहह ह आआअसस्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आस्स्स्स्स्स्सस्स आस्स्स्सस्स ष्ह.. हाईईईई..माआआअ… अच्छाअ.लग रहा हाईईईई.. कारू.. की आवाज़ आ रही थी. करीब 10 मिनिट नीलिमा की चूत चूसने के बाद मैने नीलिमा की टाइट चूत मे एक उंगली घुसा कर फिंगरिंग स्टार्ट कर दी नीलिमा मेरे हाथ को पकड़ कर निकालने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने उसके हाथो को हटाए रखा और उसकी फिंगरिंग करता रहा मैने देखा कि उससे वाइट टाइप का कोई चिपचिपा पानी जैसी चीज़ चूत से निकल रही है मैं समझ गया कि मेरी रानी का चूत का पानी गिरने लगा है मैने झत से झुक कर उसे चाटने लगा जैसे ही मेरी जीभ चूत के अंदर गयी नीलिमा एक दम पागलो की तरह आआआअहह आआहह ह ऊऊऊऊ ऊऊओ आआआआअहह..ओह…माआ..इष्ह….. उफफफफफफफफफफफ्फ़.. ज़ोर से..और ज़ोर सीईए… चटूऊऊओ.... किए जा रही थी. उसने ना जाने कितना पानी मेरे मुँह के अंदर डाला. मेरा 7.5 इंच का लंड भी अब पूरी तरह से खड़ा हो गया था, अब मुझे देर करना ठीक नही लगा सो मैने अपनी पॅंट निकाल दी. 

अंदर अंडरवेर नही था. मैने नीलिमा के पैरो को उठा कर फैलाया और अपना लंड का सूपड़ा उसकी चूत पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा, मेरा आधा लंड मेरी प्यारी कज़िन नीलिमा की चूत मे घुस गया और नीलिमा की ज़ोर से चीख निकल गयी "अहह मुम्मय्ययययययययययी आआआआहह ऊऊहह दरर्रदद्ड़ हूओ र्र्र्र्र्र्र्रररहहााअ हाइईईईईई आआआआहह "भैया दर्द हो रहा है निकालो जल्दीीई आआआआआआहह .. मैं.. मर जौंगिइिईईईईईईईईईईईईई…. बहुत दर्द हो रहा हाईईईईईईई….. उसकी चूत से खून निकल कर छत के फ्लोर पर फैल रहा था.. उसकी सील टूट गयी थी.. लंड का सूपड़ा अंदर फँस गया था…और वो धीरे धीरे रोने लगी , मैने उससे कहा मेरी जान बस थोड़ी देर मे मज़्ज़ा आने लगेगा और ये कह कर मैं उसके उपर लेट कर उसके गुलाबी निपल को चूसने लगा और उसकी चुचियो को दबाने लगा फिर भी नीलिमा अपने सिर को दोनो तरफ हिला रही थी और मुझे हाथो से धकेल कर हटाने की कोशिश कर रही थी. उसका मुँह से हुशह..हाअ…ही आहह आह की आवाज़ आ रही थी. मेरा आधा लंड नीलिमा की चूत मे था और फुफ्कार रहा था और मुझसे बर्दस्त नही हुआ और मैने नीलिमा की कमर को हाथो से पकड़ कर ज़ोर से एक शॉट और दिया और इस बार मेरा पूरा लंड नीलिमा की चूत मे घुस्स गया मैने तुरंत अपने एक हाथ से उसका मूह दबा दिया जिससे नीलिमा की आवाज़ दब के रह गयी मैने देखा दर्द से नीलिमा के आँखो से आँसू गिर रहे थे और वो ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर को हिला रही थी ताकि मेरा लंड उसकी चूत से निकल जाए .मैने झुक कर उसके आँसुओ को चूस लिया और फिर उसके मूह से हाथ को हटा कर उसके होंटो को चूसने लगा थोड़े देर ऐसे ही करने के बाद मैने आपने लंड को बाहर ताकि निकाल कर एक ज़ोर का शॉट मारा और मेरा लंड नीलिमा की चूत के जड़ तक घुस गया अब मेरे लंड का बॉल और उसकी चूत का बॉल एक दम सत गया था मैं पूरे जोश मे नीलिमा की चुदाई करने लगा .नामिया के मूह से सिर्फ़ कराह निकल रही थी वो" आआआअहह अहह अहह ऊऊऊऊहह "किए जा रही थी.. करीब 10 मिनिट मे वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी..आआहह.. भैया… मुझे कुछ हो रहा है… कुछ निकलेगाआ… मैं समझ गया वो झड़ने वाली है.. मैने स्पीड और तेज कर दी.. वो मुझसे चिपक गयी और अपने पैर मेरे कमर से लप्पेट दिए.. उसने पहली बार मेरे होंटो को चूमा और वैसे चिपक कर झाड़ गयी… मैं रुका नही.. उसे किस किया और मैं उसे ज़ोर ज़ोर से चुचियो को दबाते हुए बहुत कस कस के उसकी टाइट चूत मे लंड आगे पीछे किए जा रहा था. करीब 15 मिनिट लगातार चोदने के बाद मैने देखा कि अब नीलिमा थोड़ा शांत लग रही थी और आँखे बंद करके आअहह ह ह किए जा रही है मैने अपने लंड को चूत से बाहर निकाला और नीलिमा की कमर को पकड़ कर उसे डॉगी स्टाइल मे कर दिया नीलिमा घुटनो के बल डोगी स्टाइल मे हो गयी क्योकि मैं नीलिमा को गांद की तरफ से चोदना चाहता था ताकि उसकी रसबरी गांद का मज़्ज़ा भी ले सकु .उसके बाद मैने नीलिमा रानी की चूत मे अपना लंड पीछे से लगाया.. थोड़ा उसे गांद और चूत पर रगड़ा.. उसने अपनी चूत उभार दी.. मैने अपने लंड को चूत मे घुस्सा कर उसे पूरी रफ़्तार से चोदने लगा ,चोदते समय मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे जा रहा था,मैं उस समय हैवान के जैसा फील कर रहा था इस तरह और 15 मिनिट की चुदाई के बाद मैने तेज धक्को के साथ मेरा लंड उसका चूत मे घुसेड़ा और अंदर करीब 7-8 गरम पिचकारी मार के चूत को भर दिया. उसकी गरमी से नीलिमा भी सिहर कर झाड़ गयी.इस तरह से मैने आपना रस नीलिमा के चूत मे ही गिरा दिया . 


मैं अब पूरी तरह से थक गया था मैं नीलिमा के बगल मे ज़मीन पर उस मूसलाधार बरसात मे ही लेट गया, नीलिमा भी आँखे बंद करके लेटी हुई थी. मैने सोए हुआ सोचा कि मैने क्या कर दिया पता नही नीलिमा क्या करेगी इतने मे नीलिमा मेरी तरफ मूड कर के बोली "भैया आप बहुत बेदर्दी से करते हो, मेरी चूत की क्या हालत कर दी है.. थोडा प्यार से नही कर सकते थे. एक तो तुम्हारी लंड इतना मोटा और सख़्त है उपर से तुम्हारी धक्के.. पूरे एक घंटे चोदा तुमने मुझे.. देखो चूत कैसी हो गयी है.. मैं हाथ भी नही लगा पा रही ..सूज गयी है और दर्द भी हो रहा है." 

मैं तो ये सुन कर हैरान था. मुझे तो लगा था कि वो मुझे दाँटेगी और मेरे मोम डॅड से शिकायत की बात कहेगी. लेकिन उसने ऐसा कुछ नही कहा. फिर उसने बोला कि भैया मुझे मालूम था कि मेरे सोने के बाद आप मेरी पॅंटी से मेरी चूत मे उंगली करते हो और जब आप ब्लू फिल्म देखते थे तो मैं भी छुप कर देखती थी. इस पर मैने पूछा कि तो तुमने कुछ बताया क्यो नही. तो नीलिमा ने बोला भैया मुझे भी मज़्ज़ा आता था. लेकिन बोलने मे शरम भी आती थी. और ये कह कर वो मुझसे लिपट गयी और मेरे गालो को किस करने लगी. थोड़ी देर मे हमे ठंड लगने लगी और पानी भी बरस रहा था. इस लिए हम दोनो सीढ़ी पर आकर टवल से अपने बदन को पोछने लगे तभी नीलिमा को नंगे देख कर मुझे फिर से जोश आने लगा. मैने पीछे से जाकर नीलिमा को फिर से पकड़ लिया . अब मैं उसके मखमली बदन और उसके मस्त गांद को चूमने लगा और नीलिमा प्यार से बोल रही थी "छ्चोड़ो ना भैया क्या कर रहे हो अभी तक मन नही भरा" मैने बोला माइ लव तुमसे कभी दिल भर सकता है और मैं उसके पैरो और गांद(आस )को चूमते रहा. थोड़ी देर पूरे बदन को चूमने के बाद नीलिमा भी थोड़ी जोश मे आ गयी. मैने कहा कि नीलिमा मैं इस बार तुम्हारी गांद भी मारूँगा तो उसने मना कर दिया बोली की नही भैया, मैं नही मरवाउन्गि मुझे बहुत दर्द होगा. मेरी एक शादीशुदा सहेली ने बताया की गांद मरवाने से बहुत दर्द होता है और तुम तो बहुत बेदर्दी से करते हो. तो मैने बोला कि नही मेरी जान इस बार मैं धीरे धीरे करूँगा ,तो बहुत मिंन्नत करने के बाद वो बोली की ठीक है लेकिन धीरे धीरे, मैने कज़िन को कहा कि वो एक टांग को दीवाल के सहारे फैला दे उसने वैसा ही किया और मैने आपने लंड का सूपड़ा उसकी चूत पर रख कर और उसके कमर को ज़ोर से पकड़ा और लंड को घुस्सा दिया और उसे चोदने लगा ,ऐसा करने से उसके मूह से ज़ोर से "आआआअहह" निकल गयी थी ,मैं उसके गांद के साइड से उसे खड़े खड़े चोद रहा था और नीलिमा मेरे बालो को और हाथ को पकड़ कर "आअहह आआहह आहह आस्स्स्स्स्स्स्स्सिईई सस्स्स्स्स्स्स्स्साइीइ की आवाज़ निकाल रही थी" करीब 10 मिनिट चोदने के बाद मैने देखा की नीलिमा ढीली पड़ गयी थी मैं समझ गया कि इसका पानी निकल गया है फिर मैने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर नीलिमा को झुकने को कहा और उसकी गांद पर सूपड़ा रख दिया और हल्का सा धक्का दिया लेकिन मेरा लंड भीतर नही जा रहा था .मैने तुरंत अपने मूह से थूक निकाल कर थोड़ी सी गांद के छेद पर और अपने लंड पर लगाई और फिर से गांद के छेद पर रख कर ज़ोर से पेला इस बार मेरा सूपड़ा अंदर चला गया नीलिमा ज़ोर ज़ोर से आहह भरने लगी वो चिल्लाईयौर बोली" आआआआहह.. भैय्ाआआ… निकालूओ… फट गाइिईईईई मेरी गांद…. कितना मोटा हाईईईई… दर्द हो रहा हाईईईई…..निकाल लो भैया बहुत दर्द हो रहा है "मैने बोला "थोड़ी देर रुक जाओ "और मैं उसकी कमर पकड़ कर ज़ोर से 3-4 शॉट मारा और मेरा पूरा लंड उसकी गांद मे घुस्स गया नीलिमा ज़ोर ज़ोर से कराह रही थी और मैं उसके चुचि को दबा रहा था और अपना लंड उसकी मस्त गांद मे अंदर बाहर कर रहा था .नीलिमा आआहाहह आआआअहह आह ऊऊओह किए जा रही थोड़ी देर के बाद नीलिमा सिर्फ़ सीईईईईई सीयी सीईइ कर रही थी अब उसे भी मज़्ज़ा आ रहा था वो भी गांद को धीरे धीरे पीछे कर रही थी . 10 मिनिट पूरे ज़ोर से पेलाई के बाद ,मैने आपना पानी नीलिमा रानी के गांद मे ही डाल दिया और मैं नीलिमा के होंठो को चूमने लगा और हल्के हल्के उसके चुचि दबा रहा था.थोड़ी देर मे हम दोनो ठंडे हो गये . 
नीलिमा ने मुझे प्यार से मारते हुए कहा कि मैं आप से कभी नही ये सब करवाउँगा आप बहुत ज़ोर से करते हो और मुझे मारने लगी मैने उसे किस कर के शांत किया और बोला मेरी प्यारी नीलू मुझे माफ़ कर दो मैने तुम्हारे प्यार मे पागल होकर ऐसा किया और फिर हमने कपड़े बदले और जाकर सो गये . 
समाप्त
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Reply
07-17-2017, 12:45 PM,
#14
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
raj sharma stories


तजुर्बा

उईईईइमाआआअ…..बसस्स्स्सस्स करूऊओ नाआ….. आआज्ज्ज्ज तो तुम मेरी जान लेने का इरादा कर के आए हो.धीरे-धीरे करो ना,मैं कही भागी तो नही जा रही…..रात भर यही रहूंगी तुम्हारे पास.किरण मेरे साथ है तो मेरे घर वाले भी मेरी चिंता नही करेंगे. मैं बाहर खड़ी ये सब सुन रही थी और वैशाली की मस्त आवाज़े मेरे कान मे समा कर मेरे गालो को और भी लाल कर रहे थे. मुझे रह-रह कर आज शाम(ईव्निंग) की बाते याद आ रही थी जब ये मेरे स्टाफ क्वॉर्टर मे आकर मुझसे मिली थी………….

किरण!प्लीज़ आज तू मेरे घर पर बोल दे ना कि मैं तेरे साथ रात मे यही रुकूंगी…डॉक्टर.अशोक का मेरे साथ पार्टी मे जाने का प्लान है. पार्टी मे नही पगली! तेरी बजाने का प्लान है ये बोल,मैने हसते हुए कहा. ओये-होये तू इतनी भी सीधी-सादी नही है जितनी मैं तुझे समझती हू. अब ये तो तेरे पर निर्भर है की तू मुझे ग़लत समझती है, मैं रिज़र्व-नेचर हू पर ईडियट नही हू. तू जो भी सही पर मेरे घर मे तेरी इमेज बेहद मजबूत कॅरक्टर वाली लड़की की है वैशाली ने चिढ़ाते हुए कहा. सो तो मैं हू ही, मैने हंस के जवाब दिया. अरे यार हमसे छ्होटी उम्र की लड़किया हमसे आगे निकल गई है और हमे आज तक दुनिया की रंगीनियो का कोई तजुर्बा ही नही हुआ. देख वैशाली तुझे जो करना है वो तू कर पर मुझे इन सबमे मत घसीट, मेरे अतीत के बारे मे जानते हुए भी तू ऐसा कैसे कह सकती है.

कौन सा अतीत,कहे का अतीत, अरे जब उसमे तेरी कोई ग़लती थी ही नही तो तू अपने आप को कैसे सज़ा दे सकती है. तेरी शादी एक आर्मी के सेकेंड-ल्यूटेनेंट से हुई, शादी वाले दिन ही बिना अपनी सुहा रात मनाए वो बॉर्डर पर चला गया, और वाहा आतंकवादियो के साथ मुठभेड़ मे शहीद हो गया तो इसमे तेरी ग़लती कहा से हुई भला. तेरे सास ससुर ने तुझे अपने घर से मनहूस कह कर निकाल दिया,तेरे भाई-लोगो ने तुझे बोझ समझ कर तुझे अपने से दूर यहा इस छ्होटे से हॉस्पिटल मे नर्स बनवा कर यही रहने को मजबूर कर दिया, इन सब मे कहा से तेरी कोई ग़लती साबित होती है. मैने सरेंडर सा करते हुए वैशाली से कहा…….ठीक है मेरी मा,तू जीती मैं हारी. अब बता मुझे क्या करना है,ये सुनते ही वैशाली के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने कहा, ज़्यादा कुच्छ नही बस मेरे घर फोन कर दे,मुझे अपनी एक मस्त सी साड़ी दे-दे जिसमे मैं गजब की सेक्सी लगू और वो स्साला ड्र.अशोक मुझे सिस्टर वैशाली की जगह डार्लिंग वैशाली कहने लगे.इतना सुनते ही नमई हंस पड़ी जिसमे वैशाली ने भी मेरा साथ दिया. अरे हां! एक और बात , उसने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा . अब और क्या! मैने खीझते हुए कहा. तुझे भी मेरे साथ पार्टी मे चलना होगा. पार्टी यही पास वाले डॉक्टर्स बिल्डिंग के टेरेस पर है और मेडम किरण जी मेरे साथ आ रही हैं न तट’स फाइनल. उसकी बात सुनकर पहले तो मैने उसे मना करना चाहा पर फिर मैने सोचा कि सच मे मेरी जिंदगी कितनी बे-नूर और फीकी हो गयी है. ना दोस्तो का साथ बसेक ढर्रे पर चलती हुई बेमानी जिंदगी.

मैने वैशाली को अपने कलेक्षन की बेस्ट साड़ी पहन’ने को दी और खुद एक आसमानी रंग का साधारण सा सलवार-कुर्ता पहन लिया. वैशाली ने ज़बरदस्ती मेरे चेहरे पर अपने साथ लाया हुआ मेक-अप के सामान से कुछ क्रीम,लोशन्स,लिपस्टिक लगा दिया जिससे मेरी सुंदरता मे सादगी के बावजूद चार चाँद लग गये. कॉलेज के टाइम मे मेरे पीछे कयि लड़के पड़े थे मगर मैने कभी किसी को लिफ्ट नही दी थी. खैर वैशाली और मैं ड्र.अशोक की पार्टी मे गये.वाहा पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी. कुच्छ को तो मैं जानती थी पर काफ़ी सारे चेहरे मेरे लिए अंजाने थे. ड्र.अशोक ने हमारा हॉस्पिटल नया-नया जाय्न किया था, सारी फीमेल स्टाफ मे वो आते ही काफ़ी मश’हूर हो गये थे. वैशाली अपने चंचल स्वाभाव के कारण सबकी चहेती थी. शीघ्र ही वो ड्र.अशोक के दिल मे उतर गयी. आज तो वैसे ही वैशाली मेरी वाली साड़ी मे गजब ढा रही थी. ड्र.अशोक ने हम दोनो का स्वागत किया और हमे अपने केयी अन्य दोस्तो से भी मिलवाया . सबके के साथ मिलते हुए जब हम दोनो उनके एक बेहद करीबी दोस्त(जोकि आज ही यूएसए से अपना एम.एस. कंप्लीट करके आया था)से मिलवाया. इनसे मिलो ये मेरा जिगरी दोस्त सौरभ है, ये मेरा हम-प्याला,हम-नीवाला और भी काई ‘हम-वाला’ है, जो सुन कर हम सब हंस दिए.सौरभ ने एकदम विलायती अंदाज मे पहले वैशाली तथा बाद मे मुझे अपने गले लगा कर हमारे गालो को चूम लिया.

उसकी ये बेबाकी हमे ख़ास तौर पर मुझे बड़ी अजीब लगी मगर उसकी आँखो की कशिश ने मुझे कुछ कठोर शब्द कहने से रोक दिया. रात के 12:30 बजते-बजाते पार्टी की भीड़ छाटने लगी थी और चंद ख़ास लोग ही वाहा बचे थे,वैशाली को काई बार इशारो मे मैने भी कहा कि अब चलो यहा से बहुत लेट हो गये है मगर वो ‘बस थोड़ी देर और’ कहते हुए और देर करे जा रही थी. उसको ड्र.अशोक की संगत का असर खूब रास आ रहा था. उसने शायद कुच्छ हार्ड-ड्रिंक्स भी किए थे जिसका सुरूर उसकी आँखो से पता चल रहा था. फिर वो मेरे पास आकर बोली कि ड्र.अशोक हम दोनो को रुकने के लिए बार रिक्वेस्ट कर रहे हैं और मैं उनका रिक्वेस्ट ठुकरा नही पा रही हू . पल्ल्ल्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ नाराज़ मत हो और मेरे साथ रुक जाओ ना, वैशाली जब ऐसे बच्चो की तरह मचल कर मुझसे कोई बात कहती थी तो मैं उसे मना नही कर पाती थी. वही आज भी हो रहा था. मैं पार्टी मे होते हुए भी अकेला महसूस कर रही थी की तभी मुझे अपने पीछे से आवाज़ सुनाई दी

ढलती शाम सी खामोश हो,

हँसी ले चेहरे पर यू उदास हो,

मैने तेरे दीदार मे पाया है कुच्छ ऐसा,

जैसे तेरी आँखो से ही मुझे कुच्छ आस हो.

पीछे मूड कर देखने पर मैने पाया कि सौरभ अपने दोनो हाथो मे ग्लास लेकर खड़ा था.उसने मुझे एक ग्लास पकड़ा दिया,मैने एक मुस्कुराहट के साथ उससे पुच्छा कि गोयो आप शायर भी हैं, उसने उसी बेबाक अंदाज मे मेरी आँखो मे झाँकते हुए कहा

यू तो मैं कुछ कहता नही,

सबसे यू घुलके-मिलता नही,

पर तेरी संगत है या रंगत तेरे चहरे की ,

दिल बेचारा अब संभाले यू संभलता नही.

ये सुनते ही मैं खिलखिला कर हंस पड़ी जिसे देख कर सौरभ ने ताली बजाते हुए कहा! ये आज शाम का पहला ओरिजिनल लाफटर दिया है आपने. मैने शर्मा कर नज़र नीचे कर ली मगर मेरी मुस्कुराहट अभी कायम थी, जिसे देख कर उसने फिर से कहा कि अब ऐसा तो कोई गुनाह नही हुआ मुझसे जो आप हमे अपनी नायाब हँसी देखने से वंचित रखेंगी. मैने उसे कहा! आप कि भाषा और लहजे से आप यूरोप रिटर्न कम और लनोव रिटर्न ज़्यादा लगते है, उसने तुरंत जवाब दिया की मोह्तर्रिमा आपने खाकसार को क्या खूब पहचाना, नाचीज़ वही की पैदावार है. एम.एस. तो मैने अपने बाप की ख्वाहिश पूरी करने के लिया किया है पर दिल से एकदम लिटरेचर की पूजा करता हू. आपको देखकर सोचता हू कि आपके पेशेंट्स पर क्या गुजरती होगी जब वो आपको बुलाते होंगे. क्या मतलब,मैं समझी नही…….मैने हैरानी से कहा. अरे जब आप जैसी हसीना को कोई बेचारा ‘सिस्टर’ बुलाता होगा तब उसके दिल पर तो च्छूरिया चल जाती होंगी. ओह ऐसाआ……..मैं फिर से उसकी बात समझ कर हँसने लगी.

ऐसे ही बातो का सिलसिला चल निकाला, उसकी बातो से हँसते-हँसते मेरी आँखो से पानी निकलने लगा और पेट दर्द करने लगा.मुझे याद नही कि मैं आख़िरी बार कब इतना हँसी थी.कब रात के 2 बज गये मुझे पता ही नही चला. अचानक मेरा ध्यान मेरी घड़ी की तरफ गया और मैं चौंक पड़ी.जिंदगी मे पहली बार मैं इतनी देर तक घर से बाहर रही हू. मैने चारो तरफ गर्दन घुमा कर देखा,मुझे वैशाली कही नज़र नही आई.मेरे हाथ मे पकड़ा ग्लास भी अब खाली हो चुका था, सौरभ की बातो को एंजाय करते हुए मैने ध्यान भी नही दिया कि मैने पिया क्या था पर वो जो भी था पीने मे अच्च्छा लगा और पीने के बाद भी मुझे अच्च्छा महसूस हो रहा था. मेरे हाथ-पाँवो मे रात की ठंडक अब सिहरन बन कर दौड़ रही थी. मैने ड्र.अशोक के लिए भी चारो तरफ नज़र दौड़ाई मगर वैशाली की तरह वो भी नदारद थे. मुझे यू इधर-उधर देखते हुए पाकर सौरभ ने मुस्कुरा कर कहा की जिनको आप ढूँढ रही हैं उन्ही दोनो ने मुझे आपका ख़याल रखने को कहा है. मैं उसकी तरफ ना-समझने वाले अंदाज मे देखा तो उसने कहा कि वैशाली और अशोक ने ही मुझे आपकी तन्हाई का ख्याल रखने को कह कर खुद किसी तन्हाई की तलाश मे गये हैं.

मैने उसकी बातो का मतलब समझते हुए उससे पुछा कि क्या तुम्हे कुच्छ अंदाज़ा है कि वो कहाँ गये है.उसका जवाब था की हां मैं जानता हू की वो दोनो कहा गये है पर उनकी प्राइवसी का ख्याल रखते हुए मैं आपको वाहा जाने से मना ही करूँगा. क्यो? ऐसा क्यो भला?मैने हैरानी जताते हुए पुच्छा. आप जानती नही या ना-समझी का नाटक कर रही है. मैने अपने चेहरे पर बिना कोई भाव लाए उसको फिर से पुच्छा की वैशाली कहा है, मुझे अभी उससे मिलना है. उसने धीरे से मेरे कान मे कहा ,बता तो क्या मैं दिखा भी दूँगा मगर आप उनको डिस्टर्ब नही करेंगी……ऐसा प्रॉमिसस करने के बाद ही मैं आपको वाहा ले जाउन्गा.मैने झक मार कर प्रॉमिसस कर दिया कि चलो तुम मुझे जल्दी से वाहा ले चलो.सौरभ ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे टेरेस से नीचे बने फ्लॅट्स की तरफ ले जाने लगा जहा एक फ्लॅट मे अंदर जाते हुए उसने अपनी एक उंगली को अपने होंठो पर रखते हुए मुझे खामोश रहने का इशारा किया,मैने भी हामी मे सर हिला दिया. फ्लॅट के अंदर मैने वही आवाज़ सुनी जिसका ज़िकरा मैने उपर किया था.

कुच्छ-कुच्छ समझते हुए मेरे हाथ पाँव ढीले पड़ गये थे. तभी मुझे एहसास हुआ की मैं एक ऐसे शख्स के साथ खड़ी हू जिसे मैं अभी मुश्किल से 3-4घंटो पहले मिली हू . सौरभ मेरे ठीक पिछे खड़ा था और उसने मेरे कानो मे अपना मूह(माउत) सटा कर धीरे से कहा , क्या तुम ये सब देखना भी चाहती हो? मैं निरुत्तर वही खड़ी रही, उसने फिर से अपना सवाल दोहराया….. इससबार मैने ना जाने कैसे हा मे सर हिला दिया,वो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे दूसरे कमरे ले गया जहा की एक आल्मीराः के पिछे लगे शीशे का परदा हटाने से वो सब दिख रहा था जो उस कमरे मे हो रहा था. मेरे सभी मसामो से पसीने छूट गये.पढ़ा-सुना अलग होता है मगर आँखो के सामने सजीव(लाइव) सेक्स होता देख कर और वो भी अपने जाने-पहचाने लोगो के बीच, मैं तो अर्धमुरछछित अवस्था मे आ गयी.पूरे कमरे मे उन्न दोनो के कपड़े फैले पड़े थे जिनको देख कर समझा जा सकता है की ये उतारे गये थे या नोचे गये थे.सामने एक बेड के उपर अशोक और वैशाली एकदम जन्मजात नग्न-अवस्था मे लिपटे हुए थे अशोक बेतहाशा वैशाली के यौवन-उभारो को चूसे जा रहा था और बीच-बीच मे उनपर अपने दाँत(टीत) भी गढ़ा देता जिसकी वजह से वैशाली के मूह से कामुक सिसकी निकल जाती. वैशाली के हाथो मे अशोक का लंबा-मोटा लिंग था जिसे वो अपने हाथो से सहला रही थी. अशोक ने उसके हाथो को पकड़ कर उसके सर के उपर ले गया और वैशाली की आँखो मे देखते हुए अपने लिंग को वैशाली की योनि पर रगड़ने लगा.वैशाली का तो मानो बुरा हाल हो गया वो उत्तेजना से च्चटपटाने लगी और अशोक से लिंग को अपनी योनि मे घुसाने की विनती करने लगी. अशोक पर भी मस्त पूरी सवार थी उसने अपने खेल को जो जाने कितनी देर से चल रहा था उसको और लंबा ना खींचते हुए अपने लिंग को वैशाली की योनि मे प्रवेश करवा दिया.उययययीीईईईईईई….माआआआआआअ….

.पहले ही अपने जीभ और दांतो से मुझे इतना घायल कर दिया था और अब इसको भी एक झटके घुस्साअ दिया.और ये सब कहते हुए अपने मूह से ज़ोर-ज़ोर से कुच्छ बड़बड़ाती हुई वैशाली अपनी कमर को उचकाने लगी.कमरे मे थ्वप-थ्वप की आवाज़े गूंजने लगी और कमरे का तापमान बढ़ने लगा.

ये सब देखते हुए मुझे होश भी नही रहा कि कब सौरभ का एक हाथ मेरे कुर्ते के अंदर मेरे यौवन-शिखरो को तथा दूसरा मेरे सलवार के नाडे को खोलकर मेरी पॅंटी मे घुस चुका था.वो धीरे-धीरे मेरी योनि और मेरे यौवन-शिखरो को सहला रहा था,मेरी मस्ती बढ़ती चली गयी……मगर दिमाग़ को झटका देते हुए मैने उसके हाथो को पकड़ कर उसको रोक दिया.उसने मेरे कान मे धीरे से पुच्छा , क्या हुआ?अच्च्छा नही लग रहा क्या….मैं खामोश खड़ी रही,मेरी खामोशी को मेरी मंज़ूरी समझते हुए वो फिर से अपने काम मे मशगूल हो गया.उसके हाथो के जादू ने मुझे एक नशे की हालत मे पहुचा दिया था. सर्र्ररर-सर्र्र्ररर कब मेरी सलवार मेरे पैरो से और कब मेरा कुर्ता मेरे उपरी-शरीर से अलहदा हो गये मुझे पता ही नही चला.जब उसने मेरी पॅंटी और ब्रा को भी उतार दिया तो मैने उसकी तरफ देखा जो, वो वही चिर-परिचित मुस्कान लिए मेरी तरफ देखा रहा था.उसकी आँखो मे मनुहार थी,मेरे शरीर की तारीफ़ थी और लाल रंग केड ओर भी थे जो उसकी खुमारी की निशानी थी. उसने धीरे से मेरे बूब्स को चूमा,मैं उसके चूमने की सिहरन बर्दाश्त नही कर पाई और काँपने लगी.उसने अपने दोनो हाथो मे मुझे उठा लिया और बड़े नज़ाकत के साथ मुझे बेड पर लिटा दिया.

उसकी ज़बान मेरे शेरर पर हलचल मचती हुई अपना असर छ्चोड़ रही थी और मैं उत्तेजना के शिखार पर पहुचि हुई ततर काअंप रही थी.मेरी योनि से पानी का बहाव निकले ही जा रहा था. मगर सौरभ एकदम शांत-चित्त भाव से अपनी रफ़्तार से जुटा हुआ था.ना कम नाजयदा, वो एक रफ़्तार से मुझे चूमे-चाते जा रहा था. माने बेखयाअली मे उसकी पीठ को अपने नाखुनो से खरोंच-खरोंच कर लाल कर दिया था. उसने अपने कपड़े उतारे और फिर से मेरी तरफ आगेया उसके लिंग को देखा कर मैं घबरा गयी. ये तो अशोक के लंड से भी लंबा था. मैने सौरभ को बताया कि मैं वर्जिन हू प्ल्ज़्ज़ बी जेंटल विथ मी. उसने मुझे प्यार से देखते हुए हामी मे सर हिला दिया. सौरभ ने मेरे पैरो को फैला कर अपने लिंग को मेरी योनि पर टीका दिया और मुझ पर झुकता चला गया, उसका लिंग धीरे-धीरे मेरी योनि मे समाने लगा.मुझे दर्द के साथ-साथ एक सुखद और अंजाना एहसास प्राप्त हुआ जो मैं अपनी जिंदगी मे पहली बार तजुर्बा कर रही थी. उसने धीरे-धीरे घर्षण चालू किया जिससे मैं उत्तेजना के शिखर पर पहुच गयी और झाड़ गयी. मगर वो ना रुका और लगभग 30मिनट तक अपना काम करता रहा,अचानक वो हान्फता हुआ मेरे उपर गिर पड़ा.मैने अपनी योनि मे उसके वीर्य को महसूस किया. जाने कब तक हम ऐसे ही पड़े रहे.खुमारी उतरने के बाद मुझे मेरी हालत का अंदाज़ा हुआ और मैं फ़ौरन अपने कपड़े पहन कर बाहर की तरफ निकल पड़ी. बाहर मुझे वैशाली ड्र.अशोक के साथ खड़ी मिली जो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी मानो इशारो ही इशारो मे मुझसे पूछना चाह रही हो कि ये तजुर्बा कैसा रहा जो तुम अभी-अभी करके आ रही हो.

समाप्त
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07-17-2017, 12:46 PM,
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रश्मि के साथ पहली बार

मेने रश्मि को हमेशा पार्टीस या किसी शादी के फंक्षन्स में ही देखा था. रश्मि समाज की एक मानी हुई हस्ती थी. कामयाब बिज़्नेस वोमेन होने के अलावा वो सामाजिक कार्यकर्ता भी थी. अक्सर उसके किस्से किसी ना किसी सामाजिक कार्य के लिए चर्चित थे. रश्मि का आकर्षक व्यक्तित्व और उसका सुन्दर बदन किसी भी मर्द को उसकी तरफ आकर्षित कर सकता था. एक फंक्षन में मुझे उसके बगल में बैठने का मौका मिला. में उससे बात करना चाहता था पर ऐसा हुआ नही, उसे किसी चॅरिटी फंक्षन में जाना था और वो एक अलग सी छाप मेरे जेहन में छोड़ चली गयी. रश्मि की एक अड्वर्टाइज़िंग कंपनी थी जिसे वो बेचना चाहती थी, और इसी सिलसिले में वो मेरी सेक्रेटरी सीमा से अपायंटमेंट बुक करना चाहती थी. मेरी एड कंपनी अच्छी चल रही थी, और ना मैं कोई कंपनी को खरीदने का इरादा रखता था. जब रश्मि की कंपनी के बारे में मुझे सीमा ने बताया तो मेने उससे पूछा, "क्या तुम पेरसोन्नाली उसके बारे मे कुछ जानती हो?" "मेरा एक दोस्त उसके लिए काम करता है." उसने जवाब दिया. "तुम उसके बारे में कितना जानती हो?" मेने फिर पूछा. "यही कि उसकी शादी शुदा जिंदगी अच्छी नही है. किसी कारण से उसका तलाक़ होने वाला है. रश्मि एक बहोत ही मेहन्नति और ईमानदार महिला है. अपने वर्कर्स का वो अपने परिवार के सद्स्य जैसा ख़याल रखती है." सीमा ने जवाब दिया. "ठीक है में उससे मिलूँगा." सीमा ने हंसते हुए कहा, "में जानती थी आप उससे ज़रूर मिलेंगे." रश्मि ने मेरे कॅबिन में इस तरह कदम रखा जैसे कि वो कॅबिन उसी का हो. उसका ऑफीस में घुसने का अंदाज़ सॉफ कह रहा था कि वो एक फर्स्ट क्लास बिज़्नेस वोमेन थी. दिखने में वो 5"9 की थी. वो मेरे टेबल की ओर बढ़ी और मुझसे हाथ मिलाया. मेने भी खड़े हो उससे हाथ मिलाया और अपनी कुर्सी पर झट से बैठ गया. इस तरह की औरतें मुझे काफ़ी गरम कर देती थी और उनसे अपने खड़े लंड को छुपाना मुश्किल हो जाता था. रश्मि मेरे सामने कुर्सी मेरे सामने बैठ गयी और उसने अपना ब्रीफकेस बगल में रख लिया. रश्मि ने घूटने तक का काले रंग का स्कर्ट पहन रखा था जिससे उसकी आधे से ज़्यादा नंगी टाँगे दिखाई दे रही थी. उसे देखते ही मेरे लंड में सिरहन हुई और वो गर्माने लगा. "राज मुझे खुशी हुई कि तुमने मुझसे मिलने के लिए वक्त निकाला. मुझे मालूम है तुम अपने बिज़्नेस में काफ़ी कमियाब हो और मेरी कंपनी तुम्हारी कंपनी के मुक़ाबले कुछ भी नही है." रश्मि मुझे देखते हुए बोली. "मुझे भी आपसे मिलकर काफ़ी खुशी हुई." मेने कहा. "हम बात आगे बढ़ाए उसके पहले में तुम्हे कुछ दिखाना चाहती हूँ." वो अपना ब्रीफकेस उठाने के लिए थोड़ा नीचे झुकी तो उसकी स्कर्ट थोडा और उपर खिसक गयी जिससे उसकी जाँघो का उपरी हिस्सा नज़र आने लगा. उसने वापस घूमकर अपना ब्रीफकेस अपनी गोद में रख लिया. उसने ब्रीफकेस खोल कर उसमे सी एक फाइल निकाली और फिर ब्रीफकेस बंद कर उसे अपने पाओ के पास रख दिया. इस दौरान उसने कई बार अपने पाओ पर पाओ चढ़ाए और उतारे जो एक औरत लिए नॉर्मल सी बात है लेकिन रश्मि ने इस तरह से किया कि मुझे उसकी ब्लॅक कलर की पॅंटीस साफ दिखाई दे. वो खड़ी हो गयी और झुक कर मुझे फाइल दिखाने लगी. मेने तिरछी नज़रों से देखा कि उसके सफेद मम्मे लो कट के ब्लाउस में से साफ झलक रहे थे. उसने एक काले रंग की पारदर्शी ब्रा पहनी हुई थी. "राज इस डील से तुम्हे पहले ही साल में . 5 लॅक्स का फ़ायदा हो सकता है." वो और टेबल पे झुकते हुए बोली. पर मेरा ध्यान उसकी बॅलेन्स शीट देखने में कहाँ था. मेरा ध्यान तो उसकी अनबॅलेन्स्ड चुचियों पे अटका था. मेने देखा कि उसके ब्लाउस के उपरी दो बटन खुले थे. मुझे अच्छी तरह याद है कि जब वो ऑफीस में आई थी तो उसके ब्लाउस के सभी बटन बंद थे. ज़रूर उसने वो बटन जब अपनी ब्रीफकेस में से फाइल निकाल रही थी तब खोले होंगे. मुझे ये औरत काफ़ी खेली खाई और समझदार लगी. मैं भी इस खेल में उसका साथ देने लगा. उसने मुझे फाइल के एक पन्ने को दिखाते हुई जान बुझ कर अपना पेन ज़मीन पर गिरा दिया. और जब घूम कर वो पेन उठाने के लिए झुकी तो उसकी मस्त चूतड़ ठीक मेरे चेहरे के सामने थे. उसकी मस्त गांद को देख कर मेरे लंड एक दम तन गया. उसने पेन उठाया और फिर टेबल पर झुक गयी. में भी अपनी कुर्सी को थोड़ा पीछे खिसका ऐसे बैठ गया जिससे उसे मेरा लंड जो पॅंट में तंबू बनाए हुए था साफ दिखाई दे. पर वो एकदम अंजान बने हुए मुझे पेपर्स समझाने लगी. फाइल के पन्ने पलटते हुए उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. तब मुझे उसके बदन से आने वाले पर्फ्यूम की महेक आई. महेक तो कमरे में पहले से फैली हुई थी किंतु उसके बदन की सुंदरता मे में इतना खोया हुआ था कि महसूस नही कर पाया. खुसबु गुलाब की थी या हिना की पता नही पर उसका नज़दीक होना और बदन से उठती खुश्बू मुझे पागल किए दे रही थी. में उसे छूना चाहता था, पर मैं अपने जज्बातों को रोक रहा था. रश्मि मुझे एक एक चीज़ समझा रही थी, और मैं उसके मम्मो की गोलैइओ में खोया उसकी हां में हां मिला रहा था. मन तो कर रहा था कि उसकी प्यारी गांद पर हाथ फेर दूं, पर बदले में कहीं थप्पड़ ना पड़ जाए सोच कर चुप रह गया. मेने सोचा चलो टाँगो से शुरू करते है. जैसे ही मेने अपनी उंगली धीरे से उसकी टाँगो की छुई, "राज जहाँ तक में समझती हूँ तुम्हारी कंपनी खर्चों के मामले में कुछ ज़्यादा लापरवाह है. हमारी कंपनी एक प्लान के तहत ही खर्चा करती है, ये तुम्हारे काम आएगी. पैसो को पकड़ कर जब्त करना चाहिए ना कि खर्च करना." वो मेरी ओर देखते हुए बोली. तब मेने उसके घूटनो को जब्त कर लिया, जब्त नही बल्कि अपनी पूरी हथेली उसके घूटनो पे रख दी. उसे इस बात का अहसास ज़रूर हुआ होगा पर वो फिर अंजान बनते हुए बोली, "राज ये अच्छा समय है, मार्केट में बहोत काम है और तुम अपने सब सपने पूरे कर सकते हो." मुझे लगने लगा कि वो भी मुझसे खेल खेल रही है. वो मुझे अपने और कामो के बारे मे बताने लगी और मैं अपना हाथ धीरे धीरे उप्पर बढ़ने लगा. घुटनो से होता हुआ मेरा हाथ अब उसकी जांघों पर था. एरकॉनडिशन चालू होने के बावजूद मुझे गर्मी लगने लगी, मेने अपने बाए हाथ से अपनी टाइ की नाट ढीली की और दूसरे हाथ से उसकी जाँघो को सहलाने लगा. वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराइ और फिर मुझे फाइल दिखाने समझाने लगी. मेरा हाथ उपर की ओर बढ़ रहा था और वो अंजान बनी मुझे समझा रही थी. मेरा हाथ अब उसकी जांघों के अन्द्रुनि हिस्से पे रेंग रहा था. अगर वो इस समय मुझे रोकती तो में नही जानता कि मैं क्या करता पर मेने अपने हाथ को हटाया नही. मेरा हाथ अब इसके आगे नही बढ़ सकता था जब तक कि वो अपनी टाँगो को थोड़ा और फैला मुझे रास्ता दे. "राज तुम्हारी कंपनी पुराना सॉफ्टवेर यूज़ करती है, हमारी कंपनी के मध्यम से तुम लेटेस्ट टेक्नालजी से काम ले सकोगे. इससे तुम हर लाइन की अन्द्रुनि से अन्द्रुनि जानकारी हासिल कर सकोगे." ये कहते हुई वो अपने ब्रीफकेस से एक फाइल निकालने के लिए झुकी और इस दौरान अपनी टाँगे थोड़ी फैला दी. आन्द्रुनि जानकारी हासिल करने के लिए मेरे हाथों को रास्ता मिल चुक्का था. मेने अपना हाथ थोड़ा उपर खिसकाई तो पाया उसकी पॅंटीस पूरी तरह गीली हो चुकी थी. "राज हमारी कंपनी के पास एक सॉफ्टवेर है जिससे कंपनी का हर आदमी किसी भी डाटा को चेक कर सकता है. तुम उन डेटा को भी पा सकते हो जो आम इंसान के पाने की हद के बाहर है." उसने अपनी टाँगो को और फैलाते हुए कहा. मैं और मेरा हाथ तो किसी और डाटा की तलाश में थे. मेने अपना हाथ उसकी गीली हुई चूत पर पॅंटी के उपर रख दिया. उसकी पूरी पॅंटी गीली थी और मेरी शर्ट भी पसीने में भीग चुकी थी. वो अब टेबल पे बैठ चुकी थी, "राज हमारे पास में ऐसे वेब सर्वर्स हैं जो हर दिक्कतों को मिटा सकते है. तुम्हारे मुलाज़िम 24 घंटे किसी भी डाटा को पा सकते है." में उसकी चूत में उंगली किए जा रहा था. "रूको पहले रास्ते की दिक्कतों को हटाओ?" मेने धीरे से उसकी चूत को दबा दिया. मेने अपनी उंगलियाँ उसकी पॅंटी के एलास्टिक में फँसा उन्हे नीचे खिसकाना शुरू किया. रश्मि अभी भी शान बने हुए मुझे अपनी कंपनी का हर डाटा समझा रही थी. मेने अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसाइ तो मुझे लगा जैसे कि मेने किसी भट्टी में उंगली डाल दी हो. उसकी चूत से पानी बह रहा था. मैं अपनी दो उंगलियों से उसे चोद रहा था पर उस पर इस बात का बिल्कुल भी असर नही था. मेने उसकी पॅंटी उतार कर ज़मीन पर गिरा दी थी. उसकी खुली हुई चूत मुझे इन्वाइट कर रही थी. मेने अपना हाथ बढ़ा उसके टॉप को खोलना चाहा, "राज तुम्हे हमारी कंपनी से काफ़ी फ़ायदे हो सकते हैं, इससे तुम्हारे बिज़्नेस में काफ़ी तरक्की हो सकती है." रश्मि मेरी आँखों में झाँकते हुए बोली. मैं और ज़ोर से उसकी चूत में उंगली करने लगा. उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों में पकड़ पूछा, "अब मेरी कंपनी को खरीदने का और क्या लोगे?" मेने देखा कि वो इस डील को ख़त्म ही करना चाहती है, और उसके लिए वो कुछ भी पेश कर सकती है अपने आप को भी. मेने फोन उठाया और इनटरकम पर अपनी सेक्रेटरी सीमा का नंबर दबाया, उम्मीद थी कि वो लंच से वापस आ गयी हो. "हां राज," "सीम क्या तुम हमारे लॉयर के साथ बात कर डॉक्युमेंट्स तय्यार कर सकती हो कि हम म्र्स रश्मि की फर्म को 3 करोड़ में खरीद रहे हैं, एक कन्फर्मेशन लेटर पहले तय्यार कर के ले आओ." "अभी लेकर आती हूँ," सीम अपने काम में काफ़ी होशियार थी. में रश्मि की स्कर्ट को उपर उठता रहा जब मैं सीमा से बात कर रहा था, अब उसकी जंघे और चूत एक दम नंगी हो चुकी थी. उसकी गुलाबी चूत और झीने झीने भूरे बाल दिखाई दे रहे थे. रश्मि मेरी ओर देखते हुए बोली, "राज इस डील का तुम्हे मुझे अड्वान्स देना होगा?" "रश्मि क्या अड्वान्स देना होगा?" मेने पूछा. "तुम्हे मुझे चोदना होगा. अपना लंड अपनी पॅंट से बाहर निकालो, पिछले एक घंटे से सहन किए जा रही हूँ. जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डाल कर मुझे जोरों से चोदो." जैसा रश्मि ने कहा था में खड़ा हो कर उसके पीछे आ गया. रश्मि टेबल पर झुक कर घोड़ी बन गयी. मेने अपनी पॅंट और अंडरवेर उतार दी. रश्मि ने अपने टाँगे एकदम फैला दी थी जिससे उसकी चूत का मुँह और खुल गया था. "तुम मुझे पहले ही इतना गीला कर चुके हो कि तुम्हारा जी चाहे वैसे और ज़ोर से चोद सकते हो." रश्मि ने मेरी और गर्दन घुमा कर कहा. मेने अपने लंड को थोड़ी देर उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अपने सूपदे को अंदर घुसाया. जैसे ही मेरे लंड का सूपड़ा उसकी चूत की दीवारों को चीरते हुए अंदर घुसा उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी, "ऊऊऊऊहह हााआ ओह राज तुम्हारा लंड कितना बड़ा है. मेने सुना था तुम्हारे लंड के बारे में कि काफ़ी बड़ा है और तुम चुदाई भी अछी करते हो." "कहाँ सुना तुमने ये?" मेने अपने लंड को पूरा उसकी चूत में घुसाते हुए कहा. "राज इस तरह की बातें बहोत जल्दी फैलती है सोसाइटी में. एक औरत से दूसरी औरत तक फिर सड़कों पे. राज सुना है क़ि तुम चोदने मे माहिर हो, औरत को चुदाई का पूरा मज़ा देते हो. और आज तुमसे चुदवा के पता लगा कि जो सुना उससे कहीं बेहतर चोदते हो." रश्मि ने अपने चुतताड पीछे करते हुए कहा. में ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत में धक्के मार रहा था. वो भी पूरे जोश में अपने चुतताड पीछे धकेल मेरे धक्के का जवाब दे रही थी, "ओह राज मज़ा आ रहा है, और ज़ोर से चोदो फाड़ दो मेरी चूत को." मैं और ज़ोर से अपने लंड को उसकी चूत की जड़ तक लंड घुसा धक्के मार रहा था. वो मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में ले रही थी. उसकी चूत बहोत टाइट और गरम थी. मुझे बहोत मज़ा आ रहा था. मेने उसके स्कर्ट को एकदम उपर उठा उसके चुतताड को कस के अपने हाथों से पक्कड़ ज़ोर के धक्के मार रहा था."ऊऊहह हहाा रूको मत चोदते जाओ हााआआं आईसस्स्स्स्ससे हीईीईई ओह राज मेरा छूटने वाला है," वो ज़ोर के धक्के लगा रही थी, मेने उसके पानी का स्पर्श अपने लंड के चारों तरफ महसूस किया तभी मेरी नज़र दरवाज़े पर खड़ी सीमा पर पड़ी. सीमा मेरे ऑफीस के बंद दरवाज़े पर खड़ी एक हाथ में रश्मि का लेटर और अपनी स्कर्ट पकड़े हुए थी, और दूसरे हाथ से अपनी खुली चूत में उंगली कर रही थी. रश्मि की नज़र उसपर पड़ी और वो मुस्कुरा दी, समझ गयी कि एक बॉस के कॅबिन में अगर उसकी सेक्रेटरी अपनी चूत में उंगल कर रही है तो कोई मुसीबत नही आने वाली. सीमा समझ गयी कि मेने उसे देख लिया है वो मुस्कुराते हुए हमारे करीब आई और हम लोगो को चुदाई करते देखने लगी. मेने रश्मि को चोदना चालू रखा था. सीमा हमारे करीब आई और अपने हाथ रश्मि की गांद पर रख बोली, "राज इसकी गांद कितनी सुदार और प्यारी है, है ना!" सीमा ने अपना एक हाथ रश्मि के खुले टॉप के अंदर डाल उसकी चुचियों को सहलाया और उसके निपल मसल दिए, "और सुंदर चुचियाँ भी है." मेने कहा. "राज रश्मि बहोत सुन्दर है, क्या इसकी चूत भी इसकी चुचियों की तरह कसी है?" "हां बहोत ही टाइट चूत है इसकी." मेने ज़ोर का धक्का मारते हुए कहा. "तुम्हे पता है आज मैं खाना खाने कहाँ गयी थी?" ये क्या चुदाई के बीच में ये खाना का रोना ले के बैठ गयी मैं सोचने लगा, "नही मुझे नही पता." में थोड़ा उखड़ते हुए बोला. "मैं आज सेयेज़र्ज़ पॅलेस गयी थी" में सीमा को सुन रहा था और रश्मि ने अपनी चूत को सिकोड लंड को अपनी चूत की गिरफ़्त मे ले लिया. रश्मि सिसकारियाँ भरते हुए मेरे लंड के पानी को निचोड़ रही थी. उसने एक हाथ बढ़ा कर सीमा के टाँगो पर से रेंगते हुए उसकी चूत पर रख दिया. "ओह राज देखो तो ये मेरी चूत से खेल रही है. रश्मि ने अपनी दो उंगली मेरी चूत मे डाल कर अपने अंगूठे से मेरे चूत के दाने को सहला रही है." "तुम मुझे सेआसोर्स पॅलेस के बारे में बता रही थी?' "गोली मारो सेआसोर्स पॅलेस को इस वक़्त, जब हम इससे निपट लेंगे तब में तुम्हे बताउन्गि." वो अपनी कमर हिलाते हुए बोली. रश्मि अपनी उंगलियों से सीमा की चूत को चोद रही थी, सीमा की साँसे भी अब उखाड़ने लगी थी. सीमा ने अपना हाथ बढ़ा रश्मि की चूत पर रख दिया. मेरा लंड रश्मि की चूत में घुसते हुए मेरा लंड सीमा की उंगलियों से टकराता तो एक अजीब ही सनसनी मच जाती. अब वो रश्मि को चूत को सहला रही थी. "क्या तुम्हे मेरी चूत अच्छी लगी राज?' उसने ज़ोर से मेरे लंड को भींचते हुए अपना पानी मेरे लंड पर छोड़ दिया. मेने भी दो तीन धक्के ज़ोर के मार के अपना सारा पानी उसकी चूत में उंड़ेल दिया. मेने अपना लंड रश्मि की चूत से बाहर निकाला. मेरे लंड से छू कर रश्मि की चूत का पानी ज़मीन पर टपक रहा था. रश्मि भी जब सीधा होना चाही तो सीमा ने उसे रोक दिया. सीम उसके पीछे आ अपनी दो उंगली रश्मि की चूत में घुसा दी. थोड़ी देर अपनी उंगली उसकी चूत में घुमाने के बाद, वीर्य से लिपटी अपनी उंगली उसने रश्मि को चूसने के लिए दी. रश्मि ने बिना जीझकते हुए अपने मुँह के अंदर तक लेकर उसकी उंगलियों को चूसा और चॅटा. सीमा ने अपनी उंगलियाँ बाहर खींच ली. रश्मि खड़ी हो कर अपने स्कर्ट को सीधा करने लगी. सीमा ने रश्मि की पॅंटी जो ज़मीन पर पड़ी थी, उसे उठा कर सूंघने लगी. रश्मि की और देख आँख मार कर बोली, "तुम्हारी चूत की खुश्बू सही में बड़ी मतवाली है." कहकर उसने पॅंटी रश्मि को पकड़ा दी. रश्मि ने पॅंटी पहन अपने कपड़े ठीक कर लिए. रश्मि ने अपनी स्कर्ट और ब्लाउस भी ठीक किया पर अपने ब्लाउस के दो बटन खुले ही रहने दिए. उसने डील का लेटर उठाया और मेरे सामने रख दिया. मेने साइन करके उसे वो लेटर दे दिया. उसने वो लेटर ले कर अपने ब्रीफकेस में रख उसे बंद किया और खड़ी हो गयी. "थॅंक यू राज. उमीद हमारा रिश्ता आज के बाद और मजबूत होगा." कहकर वो वहाँ से चली गयी. "कमाल की औरत है, ऐसी औरतें कम ही देखने को मिलती है." सीमा मेरी ओर देखते हुए बोली. "हां तुम सही कह रही हो, इतना आत्मविश्वास किसी में मे कम ही होता है. रश्मि उन औरतों में से है, जो चाहा वो हर हाल में हासिल करती है." मेने सीमा की बात का जवाब दिया. "मैं शुरू से ही तुम्हे देख रही थी. जब तुम रश्मि को चोद रहे थे तो मुझ से रहा नही गया, मैं भी इस सुंदर औरत की चूत देखना चाहती थी, इसीलिए चली आई." "कोई बात नही, अच्छा तुम सेआसेर्स पॅलेस के बारे में कुछ बता रही थी?" मेने सीमा से पूछा. "में वहाँ पे टेबल पे बैठी सूप पी रही थी कि तभी एक बहुत ही सुंदर लड़की जिसका नाम चाँदनी था मेरे पास आई और पूछा कि क्या वो वहाँ बैठ सकती है. बड़ी ही अजीब लड़की थी हम लोग बात कर रहे थे और उसी दौरान उसने अपना हाथ मेरी जांघों पर रखा और मेरी चूत से खेलने लगी." "फिर क्या हुआ?" मेने पूछा. "उसने मुझसे लॅडीस वॉश रूम में चलने को कहा, वो इतनी सुंदर थी और साथ ही उसने मेरी चूत को सहला सहला के इतना गरम कर दिया था की में अपने आप को रोक नही पाई और उसके पीछे वॉश रूम में आ गयी." सीमा अपनी चूत खुजाते हुए बोली, "वहाँ उसने मेरी चूत को इतना कस कस के चूसा और चटा की मेरी चूत ने तीन बार पानी छोड़ा. मुझे देर हो रही थी इसलिए में उसकी चूत का स्वाद नही चख पाई." "उम्म्म काफ़ी दिलचस्प लड़की होगी." सीमा वापस अपने कॅबिन में जाने के लिए उठी, "वैसे राज वो फरोज़ और फरोज़ में काम करती है. मेने उसे अपनी कंपनी में काम करने के लिए मना लिया है. वो कल से मेरी असिस्टेंट के रूप में हमें जाय्न कर रही है, तुम चाहो तो सुबह उसका इंटरव्यू ले सकते हो." मैं भी उस लड़की की सुंदर चूत और बदन के ख़यालों में खो गया. समाप्त
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#16
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
मासूम बच्चे की ख्वाहिश

हेलो दोस्तो मैं रश्मि दिल्ली से वैसे तो पंजाबी हूँ बट शादी के बाद देल्ही आ गई, में अपने बारे मे थोड़ा इंट्रो दे दूं फिर स्टोरी पर आउन्गि तो दोस्तों मेरी एज 24 रंग गोरा और फिगर 38डी-28-40 जो कि टाइपिकाल पंजाबी गॅल्स का होता है,,,शादी को 2 साल हो चुके है बच्चा कोई नही वजह आप जानते है पति घर पर रहे तो बच्चे के चान्स बने,,,:-) मेरे पति मेरीन इंजीनियर है और साल मे 10 मंत शिप पर रहते है. हमारी फमिली में हम पति पत्नी, जेठ जी और उनकी पत्नी, उनका एक 10 साल का बेटा और मेरे ससुर रहते थे ,,,,,,,,,,,, "थे" का मतलब आप को आगे पता लग जाएगा........... बात कुच्छ ज़्यादा पुरानी नही है कोई 6 मंत्स हुवे हैं,,मेरी शादी के 3 मंत बाद ही जेठ जी और उनकी पत्नी की डेथ एक कार आक्सिडेंट मे हो गयी, अब आप थे का मतलब समझ गये होंगे,, नाउ हम घर मे सिर्फ़ 3 लोग बचे मे, ससुर जी और जेठ जी का बेटा जब उनकी डेथ हुई तो नॅचुरली उनका बेटा मुझसे बहुत अटॅच्ड हो गया, उसका सारा काम मे ही करती हूँ,होम वर्क , ब्रेक फास्ट , लंच बॉक्स, डिन्नर यहाँ तक कि जब तक वो सो नही जाता मुझे अपने पास से उठने नही देता,, 6मंत्स पहले तक कभी मेने सोचा भी नही था कि ऐसा कुच्छ मेरे साथ भी हो जाएगा, जब में इन्सिस्ट पढ़ती थी तो मुझे सब झूठ लगता था,, खैर 6 मंत्स पहले एक दिन बंटी[मेरे जेठ जी का लड़का] स्कूल से काफ़ी लेट हो गया दुपहर मे उसका वेट करते हुवे मे अपने रूम मे आकर सो गयी. कुच्छ देर बाद बंटी स्कूल से आया तो मुझे उसकी आवाज़ आई वो मुझे ही पुकार रहा था,ढूँढते ढूँढते वो मेरे कमरे मे आ गया मेने कहा आज लेट क्यूँ हो गये तो उसने कुच्छ नही कहा मेने फिर कहा खाना डाइनिंग टेबल पर रखा है ख़ालो, तब उसने कुच्छ अजीब से अंदाज़ मे कहा कि मुझे नही खाना, उसकी आवाज़ कुच्छ घबराई हुई सी थी तब मेने उसे गोर से देखा उसकी साँसे भी तेज़ चल रही थी मेने पूछा क्या हुवा तो बोला मुझे आप से कुच्छ पुच्छना है मेने कहा क्या ? तो उसने जो मुझे बताया पहले आप वो पढ़ ले

बंटी:- चाची जी लड़के और लड़की क्या करते हे,, आज ऑफ के स्कूल के टाय्लेट मे एक लड़का और एक लड़की को मेने देखा वो क्या कर रहे थे

में:-ये तुम केसी बाते कर रहे हो चलो जाओ और खाना खाओ

बंटी:-नही पहले आप बताओ वो क्या कर रहे थे नही तो में दादाजी से पुछुन्गा?

तब मेने सोचा बच्चा है यह सब देख कर उत्सुक तो होगा अगर उसकी उत्सुकता शांत नही की गयी तो हो सकता है वो कोई और रास्ता निकाले जो उसके लिए ग़लत हो सकता है,, और वो बिगड़ भी सकता हे तब मेने फ़ैसला किया कि उसे कुच्छ बता कर बहला दूँगी ,,,,लेकिन यही सोच मेरी ग़लती बन गयी..... मेने उससे कहा बेटा यह बड़े लोग करते हे

बंटी:- लेकिन वो तो मुझ से सिर्फ़ 3 क्लास सीनियर थे

में:- हां बेटा इसे प्यार करना कहते हे वो दोनो प्यार कर रहे थे

बंटी:- आप तो मुझसे ऐसा प्यार नही करती?

में:- बेटा वो प्यार में तुम्हारे चाचा जी के साथ करती हूँ

बंटी:- लेकिन उन्होने कपड़े क्यूँ उतारे हुवे थे?

अब मे थोड़ा झल्ला गयी कि यह तो बहेल ही नही रहा है

में:- बेटा यह प्यार कपड़े उतार कर ही होता है

बंटी:- तो क्या इसमे मज़ा आता हे

में:- हां बेटा बहुत मज़ा आता हे

इसके बाद मेने उससे गोर से देखा उसकी साँस और तेज़ हो गयी थी और उसका हाथ अपने लंड की जगह पर रखा हुवा था फ्रेंड्स में भी एक औरत हूँ वो भी शादी शुदा जिसे पिच्छले 1.5 यियर्ज़ से सेक्स का मज़ा नही मिला वजह मेरे पति शादी के बाद 4 मंत्स लीव पर थे अब उन्हे कॉन्टिन्यू... 20 मंत्स ड्यूटी करनी थी...

जब मेने उसके लंड की तरफ देखा तो मुझे कुच्छ हुवा मेने फिर गोर से उसके लंड को देखा निक्कर का वो हिस्सा काफ़ी उठा हुवा था ... बंटी ने फिर कहा चाची जी हमे पता नही क्या हो रहा है

मेने पुछा क्या हो रहा है तो वो थोड़ा झिझक कर अपने लंड पर से हाथ हटाता हुवा बोला यहाँ दर्द हो रहा है मेने पुछा कब से.अब मेरी नज़रे उसके लंड का उठाव महसूस कर रही थी, उसने कहा जबसे हमने स्कूल में वो सब कुच्छ देखा है

चाची जी हमे सब कुच्छ जानना है प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़ बताइए ना क्या होता है..

तो मेने फ़ैसला किया कि आज इसे बता ही देती हूँ

मेने कहा फिर तुम मेरे पास आओ और अपने कपड़े उतारो तो उसने कहा कपड़े क्यू उतारू मेने थोड़ा गुस्से से कहा अगर तुम्हे सब जानना है तो कपड़े उतारो

वो इतना उत्सुक था कि फॉरन अपने सारे कपड़े उतार दिए और में उसका लंड देख कर कुच्छ देर के लिए सब कुच्छ भूल गयी.... आप लोग यकीन नही करेंगे मगेर उसका लॅंड 10 साल की एज मे 6"इंच लंबा और करीब 2 इंच मोटा था उसे देख कर मेरी चूत मे खुजली होने लगी लेकिन फिर मेने अपने आप को समझाया कि वो एक बच्चा है....जब वो मेरे पास आया तो उसकी आँखें लाल हो रही थी मेने उससे कहा बेटा यह जो तुम्हारी नूनी है इसे लड़की की चूत मे डालते हैं ..

बंटी:- चाची यह क्या होती है

तब मेने अपनी नाइटी उतार कर उसे अपनी चूत दिखाई तब तक मेरा उसके साथ सेक्स करने का कोई मूड नही था.

बंटी ने कहा चाची में भी अपनी नूनी आपकी चूत मे डालूगा, में थोड़ा डर गयी कि यह तो सर पर ही चढ़ा जा रहा है मैं इसे बच्चा समझ कर कर सब बता रही हूँ और यह है कि मान ही नही रहा है , तब फिर वो बोला चाची मेने भी इसे आपकी चूत मे डालना है उसके अंदाज़ मे बच्चो वाली ज़िद थी ना कि कोई सेक्स अपील

मेने उसे फिर समझाया . नही बेटे इसमे सिर्फ़ तुम्हारे चाचा जी की नूनी डालते हैं तुम अपनी नूनी शादी के बाद अपनी वाइफ की चूत मे डालना

यह सब शादी के बाद करते है

तो वो बोला लेकिन स्कूल वाली गर्ल/बॉय की शादी तो नही हुई थी फिर वो क्यू कर रहे थे..

हमे नही पता अब हमे भी वोही करना है ,,, तो मेने सोचा अभी इसका लंड खड़ा है जब तक यह ठंडा नही होगा ऐसे ही परेशान करेगा यह सोच कर मेने उसे कहा ठीक है इधर आ कर लेट जाओ उसके बाद मे उसके लंड को सहलाने लगी और धीरे धीरे मूठ मारने लगी मेने सोचा था कि इससे वो शांत हो जाएगा लेकिन मूठ मारते हुवे में खुद गरम हो गई और मेरी चूत बुरी तरह गीली होने लगी तब मैं धीरे से उसका लंड मुँह मे ले कर चूसने लगी उसके मुँह से सिसकिया निकल रही थी और मैं जैसे तैसे अपनी आग पर काबू रखे हुवे थी कुछ ही देर मे वो छूट गया तो मेने उसका सारा पानी मुँह मे से थूक दिया इसके बाद उसने कहा सॉरी चाची मुझे पता ही नही लगा और मेने आपके मुँह मे सू सू कर दी तब मुझे उसकी मासूमियत पर हँसी आ गयी मेने कहा कोई बात नही अब तुम जाओ और खाना खा खाकर सो जाना क्योंकि अब वो ठंडा हो चुका था इसलिए बिना कुच्छ कहे चला गया और में अपनी आग अपनी उंगलियों से शांत करने लगी ....अपने आपको ठंडा करने के बाद मैं भी सो गयी... उसके बाद शाम को उठ कर मेने खाना बनाया रात का खाना खाने के बाद जब सब अपने अपने रूममे चले गये थे मैं भी अपने रूम मे आकर लेट गयी, लेटे लेटे मे अपने और अपने पति की सेक्स लाइफ के बारे मे सोचने लगी कि वो किस तरह 4प्ले करते हे कैसे मुझे गरम करते है यही सब सोचते हुवे मे गरम हो गयी और नीचे से आवाज़ आने लगी प्लीज़ कही से लंड ले आओ तब मे एक बार फिर अपनी उग्लियों को तकलीफ़ देने लगी..........

उंगली करते हुवे मुझे बंटी का लंड याद आ गया उफफफफफफफफफ्फ़ मेरी हालत खराब होने लगी नीचे से आने वाली आवाज़ अब ओर भी तेज़ हो गयी थी रह रह कर मेरी चूत किसी का लंड माँग रही थी ,,,,,, तभी डोर पर किसी ने नॉक किया मेने पुछा कॉन ?

बंटी ने कहा मैं हू चाची

आ जाओ क्या हुवा बंटी तुम सोए नही अभी तक क्या बात है

बंटी ने कहा मुझे दर्द हो रहा हे मेने कहा कहाँ तो उसने अपने लंड पर हाथ रख कर बोला यहाँ मेने देखा शॉर्ट मे उसका लंड पूरी तरह खड़ा था मेने कहा यहाँ आओ और उसके बाद मे उसके शॉर्ट पर से उसका लंड सहलाने लगी,, थोड़ी देर बाद मेने पुछा कैसा लग रहा है तो कहने लगा बहुत अच्छा फिर मेने उसका शॉर्ट उतार दिया उफफफफफ्फ़ नीचे से फिर आवाज़ आई यही है यही लंड चाहिए तब मेने अपनी चूत पर हाथ रख लिया तो बंटी ने पुछा क्या आपको भी दर्द हो रहा है यहाँ पर मेने कहा हां बेटा तो उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया और मेरा हाथ हटाते हुवे बोला मे दबा देता हू जब उसने मेरी चूत पर हाथ रखा तो मेरी जान ही निकल गयी उसकी नरम उंगलियो की छुवन से ,,,

चाची मुझे वोही करना है जो स्कूल मे वो लड़का लड़की कर रहे थे मेने सोचा अब तो मुझे भी वोही करना है ,,,

ओके तुम डोर बंद कर के आओ जब तक वो डोर क्लोज़ कर के आया मे अपनी नाइटी उतार कर पूरी तरह नंगी हो चुकी थी मेने उसे बेड पर बुलाते हुवे कहा टी-शर्ट भी उतार दो शॉर्ट तो मे पहले ही उतार चुकी थी उसका वो भी पूरा नंगा हो कर बेड पर आया ऑर आते ही अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया मेने कहा रूको बेटा ऐसे नही करते हैं मैं तुम्हे आज सब सिखाउन्गि,, यह कह कर मेने उसके एक हाथ मे अपना लेफ्ट बूब दे दिया ऑर कहा दबाओ तो वो दोनो हाथो से मेरे बूब ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा उफफफफफफफफ्फ़ क्या बताऊ उसके नरम नरम हाथो मे केसा जादू था तब मेने उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा ऑर उसकी 2 उंगली चूत मे डाल कर अपने हाथ से अंदर बाहर करने लगी थोड़ी देर बाद जब मेने उसका हाथ छोड़ा तो वो खुद ही उंगली अंदर बाहर कर रहा था तब मेने अपना राइट बूब उसके होंठो से लगा कर कहा लो इसे चूसो वो आग्याकारी बच्चे की तरह सब कुच्छ करता जा रहा था और मैं धीरे धीरे उसका लंड सहला रही थी यही सब करते करते अचानक उसके हाथ और मुँह की पकड़ मेरे बूब्स पर एकदम टाइट हो गयी और वो फारिग हो गया थोड़ी देर मे उसका लंड मुरझा गया तो वो गुस्से से कहने लगा यह आपने क्या किया अब मे वो कैसे करूँगा तो मेने कहा बेटा तुम फिकर मत करो मैं हूँ ना आज तुम वो भी करोगे इतना कह कर मेने उसे अपने उपर 69 की पोज़िशन मे लिटा लिया और उसे अपनी चूत को चाटने का कहा वो फॉरन मेरी चूत से किसी जोंक की तरह चिपक गया और मेने उसका मुरझाया हुवा लंड अपने होंटो मे दबा लिया और चूसने लगी अभी तक जो भी हुवा था उससे मेरी चूत इतनी गरम हो गयी थी कि फॉरन लंड माँग रही थी मेने अपनी पूरी कोशिश की और उसका लंड 5 मिंट बाद ही नींद से जाग गया फिर मेने बंटी को अपने उपर सीधे लिटाया और उसका लंड अपने हाथ से चूत के मुँह पर टिका कर उससे कहा अंदर करो उसने पूरी ताक़त से धक्का लगाया और लंड एक ही झटके मे जड़ तक अंदर उतर गया 15 मिनट की ज़ोर आज़माइश के बाद हम दोनो एक साथ फारिग हुए और यह सिलसिला अब तक चल रहा हैं रोज़ रात मे बंटी मेर साथ सोता है और एक बार सेक्स ज़रूर करती हू,

दोस्तो ये तो साली कुतिया बन गई है अब इसको कौन समझाए कि एक बच्चे के भविष्य को खराब कर रही है दोस्तो सेक्स करना बुरा नही है मगर एक छोटे बच्चे के साथ सेक्स करना ग़लत बात हैऐसा किसी को नही करना चाहिए आपका दोस्त राज शर्मा
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07-17-2017, 12:46 PM,
#17
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
चुदाई के दिन चुदाई की रातें 



मेरा नाम सुधा है और मैं बीए मे पढ़ती हूँ. दिखने में सुंदर हूँ लेकिन नेचर शर्मीली है. मेरा फिगर 36-26-36 है और रंग गोरा है. पिच्छले हफ्ते तक मैं कुँवारी थी. मैने राज शर्मा की सेक्सी स्टोरीस पढ़ी थी और ब्लू फिल्म्स भी देखी थी जिस कारण मुझे सेक्स कि समझ तो थी लेकिन किसी ने मुझे कभी चोदा नहीं था. मैं चुदाई की इच्छा के कारण हमेशा अपनी चूत को शेव कर के रखती थी कि ना जाने कब कोई चुदाई करने वाला मिल जाए. लेकिन जैसे कि मैने कहा, मैं डरती थी और किसी को चुदाई के लिए न्योता देने की हिम्मत नहीं पड़ती थी. घर में मेरे सिवा पापा और एक छोटी बेहन नामिता थी. पापा श्री हंस राज एक दुकान मालिक थे और छ्होटी बेहन 12 क्लास में पढ़ती थी. नामिता भी दिखने में बहुत सेक्सी थी. वो अक्सर स्कर्ट्स और टीशर्ट पहनती थी. उसस्की स्कर्ट्स बहुत छ्होटी होती और उसस्के उरोज़ उसस्की टी-शर्ट से बाहर निकलने को तैयार रहते. 

एक दिन नामिता की नज़र मेरी पॉर्न बुक्स पर पड़ी और वो बोली,” दीदी, ये क्या बच्चो वाली किताबें पढ़ती हो, मैं तुझे ब्लू फिल्म दिखाती हूँ जिस में हबशी लड़के एक गोरी औरत को आगे पीच्छे से चोद्ते हैं. दीदी आज कल कहानी तो बच्चे पढ़ते हैं. एक बात बतायो, तेरा कोई बाय्फ्रेंड है या नहीं, कभी क़िस्सी ने तेरी चूत का उद्घाटन किया है या नहीं?” मैं अपनी छ्होटी बेहन की बात सुन कर दंग रह गयी. “नामिता क्या बकती हो? तुम अभी बच्ची हो. तुझे अपना मन पढ़ाई में लगाना चाहिए. अगर पापा को तेरी ऐसी बातों का पता चल गया तो मार पड़ेगी. फिर मुझे मत कहना” नामिता हंस पड़ी,”दीदी, जब चूत में जलन होती है तो लंड ही बुझाता है वो आग. तुझे अगर मज़े लेने हैं तो बता देना. मैं स्कीम बना लूँगी. अपने यार से तेरी भी चूत ठंडी करवा दूँगी. और रही पापा की बात, तुम फिकर मत करो. हमारे पापा भी ऐश करते हैं. तू नहीं जानती कि पापा के संबंध उषा मौसी के साथ हैं. पापा मौसी के साथ जो कुच्छ करते हैं, शायद हमारी मा के साथ भी ना किया हो उन्हों ने. दीदी ये दुनिया इतनी सीधी नहीं है जितनी दिखती है” 

मेरी मा की मौत के बाद उषा मौसी हमारा ख्याल रखती थी और हमारी गली में ही रहती थी. उषा मौसी के साथ पापा का चक्कर? सोचते ही मेरी चूत गीली हो गयी. मेरी मा की मौत आज से 3 साल पहले हुई थी. नामिता मेरे पास आई और मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे गालों पर हाथ फेर कर बोली,” दीदी, ज़िंदगी मज़े लेने के लिए है. जब पापा मौसी के साथ चुदाई करते हैं तो हम को किस बात की रोक है. हम तो अभी जवान हैं. इस चूत में जो आग लगती है उसस्के लिए भगवान ने लंड नाम की मज़ेदार चीज़ बनाई है. और रही पापा की बात आज रात को तुझे पापा की और मौसी की चुदाई दिखा दूँगी और तू कहे तो कल अपने यार से तुझे भी जवानी के मज़े दिलवा दूँगी. वैसे भी साला तुझे भूखी नज़रों से देखता है वो.” मेरे मन ज़लज़ला उठा खड़ा हुआ और मेरी चूत से पानी आने लगा. 

रात को उषा मौसी आई और खाना बनाने लगी. मौसा जी नाइट शिफ्ट में काम करते थे और मौसी हमारे घर ही सो जाती थी. मैने नामिता की बात सुन कर उषा मौसी को गौर से देखा. मौसी की उमर कोई 32 साल की होगी और वो भरे जिस्म की मालिका थी. चूतड़ काफ़ी भारी और चुचि भी बड़ी थी. मौसी ने ग्रीन रंग की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी लेकिन उसस्की चुचि जिस तरह उठक बैठक कर रही थी लगता था उससने ब्रा नहीं पहनी थी. पापा रसोई में चले गये और मैने देखा की पापा का हाथ मौसी के चूतड़ को टटोल रहा था और मौसी शर्मा कर नीचे की तरफ देख रही थी. मैं और नामिता डाइनिंग रूम से ये नज़ारा देख रहे थे. नामिता ने धीरे से कहा,”देखो दीदी, पापा कैसे हाथ फेर रहे हैं मौसी की गांद पर. आज ज़रूर चोदेन्गे मौसी को.” इसके साथ ही नामिता ने मेरे चूतड़ को ज़ोर से मसल दिया,” नामिता, ये क्या करती हो, कितना दर्द होता है मुझे” नामिता मुस्कुरा पड़ी,”दीदी, ये दर्द नहीं है, यही तो मज़ा है. आज दिखाती हूँ तुझे लंड और चूत का मधुर मिलन.” 

टेबल पर पापा अपने सामने शराब का ग्लास रखे हुए थे और चुस्की ले रहे थे. आज वो पानी जैसी दिखने वाली शराब पी रहे थे. फिर अचानक पापा ने ग्लास मौसी की तरफ बढ़ा दिया और मौसी ने चुप चाप पी लिया. मैने देखा के पापा ने टेबल के नीचे से अपना हाथ मौसी की जाँघ पर फेरना शुरू कर दिया. पापा और मौसी की आँखों में लाल रंग के डोरे तैरने लगे थे. उनकी साँसों में तेज़ी बता रही थी की दोनो चुदाई करने के लिए बेताब हैं. नामिता और मैने खाना जल्दी से ख़तम किया और अपने अपने कमरे में चली गयी. नामिता ने मुझे आँख मारी और कहा,” दीदी आज तुम मेरे साथ ही सो जाओ, मुझे तुमसे कोई बात करनी है.” मैं उसस्के पीछे चल पड़ी. नामिता के कमरे की दीवार में एक बड़ा सा छेद था जिस में से हम दोनो पापा की चुदाई का खेल देखने वाले थे. नामिता और मैं दोनो ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और बिस्तर पर चली गयी. 



नामिता का जिस्म भी बहुत सेक्सी था. उसस्के चुचक काफ़ी बड़े थे और उससने अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव कर रखा था. मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरी बेहन ने मेरी चुचि को मसल डाला और मेरे होंठों पर किस करने लगी, मेरे चूतड़ को सहलाने लगी, मेरी चूत पर हाथ फेरने लगी,” ओह नामिता….ये क्या कर रही हो….मुझे कुच्छ होता है….मेरे बदन में झूर झूरी सी हो रही है…नामिता…..मेरी चूत में खुजली हो रही है…तुम मुझे किस कैसे कर रही हो….हाई मेरी बेहन मुझे क्या हो रहा है..तेरा आलिंगन मुझे उतेज़ित कर रहा है….तेरे बदन का सपर्श मुझे जला रहा है….मुझे छ्चोड़ दो प्लीज़” मेरे मूह से निकला तो नामिता शरारती तरीके से मुस्कुरा पड़ी और फिर से मेरी गर्दन और कंधों को किस करती रही. नामिता की जीभ से मेरी गर्दन और कंधे गीले हो गये लेकिन मुझे बहुत कामुक आनंद आ रहा था. नामिता का हाथ मेरी चूत को रगड़ने लगा तो चूत रस से उसस्की उंगलियाँ भीग गयी,” सुधा, साली देख तेरी चूत का रस कैसे बह रहा है. तेरी चूत अब चुदाई के लिए तड़प रही है. आज की रात तो मैं तुझे लेज़्बीयन प्यार से खुश करूँगी लेकिन कल तेरी चुदाई का वो बंदोबस्त करूँगी की याद रखोगी सारी उमर भर. नामिता ने अगर आज भी तेरी चूत का पानी ना निकाला तो मेरा नाम बदल देना.” 

दूसरे कमरे में भी हुलचूल शुरू हो चुकी थी. नामिता मुझे छेद के पास ले गयी और हम दोनो पापा के कमरे में झाँकने लगे. पापा और मौसी दोनो शराब पी रहे थे और पापा ने मौसी के कपड़े उतारने शुरू कर दिए. मौसी चिहुक कर बोली,” जिज़्जु, अपने पाजामे को भी तो उतारो, अपनी साली को भी तो अपने लोड्‍े के दर्शन करवायो. मेरी बेहन को चोद कर तो दो लड़कियाँ पैदा कर ली हैं तुमने, अब मुझे भी तो एक बच्चे की मा बना दो मेरे जिज़्जु राजा,” मौसी बिस्तर पर टाँगें फैला कर बोल रही थी. मौसी की चूत पर काले काले बाल थे. तभी पापा ने अपना पाजामा खोल दिया और अपना काला लंड मौसी के मूह पर रख दिया और खुद मौसी की चुचि को सहलाने लगे,” उषा, मेरी रानी तेरा पति तुझे बच्चा नहीं देता क्या? अगर तू चाहे तो मैं तुझे मा बना सकता हूँ. मैने तुझे कभी ममता(हमारी मा) से कभी अलग नहीं समझा,” मौसी गुस्से में बोली,” जीजू मेरा पति कुच्छ नहीं कर पाता. साला चूत पर लंड रखते ही झाड़ जाता है और मैं तरसती रह जाती हूँ. इसी लिए तो अपने जिज़्जु के सामने टाँगें खोल देती हूँ, जिज़्जु राजा. लेकिन हर रोज़ चोरी से चुदवाते हुए डर लगता है, कहीं सुधा और नामिता को शक हो गया तो क्या होगा?” 

पापा ने अपना लंड अब मौसी के मूह में धकेलते हुए कहा” मेरी दोनो बेटियाँ भी जवान हो चुकी हैं. उनको भी लंड की तलाश होगी. वो अपने पापा की स्थिति को समझ लेंगी. वो समझ लेंगी कि अगर उनका पापा उनकी मौसी को चोद लेता है तो कोई बुरा नहीं करता. ये तो डिमॅंड और सप्लाइ का सिधान्त है. अगर मेरी साली को उसका पति नहीं चोदेगा तो क्या मैं भी छ्चोड़ दूँगा उसको पड़ोसी के लिए? शाबाश मेरी रानी चूस मेरा लंड, चाट ले मेरे अंडकोष. आज की रात मैं तुझे अपने बच्चे की मा बना कर यादगार बना देना चाहता हूँ, ज़ोर से चूस लंड को रानी, काट खायो मेरे लंड को उषा रानी.”
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07-17-2017, 12:46 PM,
#18
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
पापा अपनी गांद आगे पीच्छे कर रहे थे और मौसी मज़े से लंड को चूस रही थी. देखते ही देखते पापा भी पलंग पर लेट गये और उन्हों ने अपना मूह मौसी की जांघों के बीच डाल कर मौसी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. तभी नामिता ने मेरे निपल को किस कर के चूसना शुरू कर दिया और बोली,” सुधा, पापा की पोज़िशन को 69 कहते है. बहुत मज़ेदार पोज़िशन होती है जब मर्द औरत की चूत चाटता है और औरत मर्द का लंड चुस्ती है तो उस्स्को 69 कहते हैं. मैं आज तेरी चूत को चाट कर खलास कर दूँगी तो देखना कितना मज़ा आए गा, दीदी. पापा और मौसी तो अपनी मस्ती में खो चुके हैं. तुम मुझे अपने जिस्म के साथ खेलने दो. मुझे तेरी चूत का पानी निकालना है किओं की कल तो तेरी ज़िंदगी का हसीन दिन होगा,” 

मैं मंतर मुग्ध हो कर पापा और मौसी का खेल देख रही थी. मुझे महसूस हो रहा था जैसे मेरी चूत के होंठ उतेज्ना से फूल गये हों. मेरा पूरा बदन गान गॅना चुका था. मेरी बेहन के हाथ जब मेरे जिस्म पर चलते तो मैं झुन झुना जाती. मुझे भी इच्छा होती कि मौसी की तरह मुझे भी लंड मिलता जिस्सको मैं चुस्ती और अपनी चूत को चुस्वाति. मौसी के मुख रस से पापा का लंड भीग कर चमक रहा था और दोनो की भारी साँसें चलने की आवाज़ सुन रही थी. उधर नामिता ने मेरे निपल्स को चूसना जारी रखा हुआ था और वो मेरी चूत को सहलाए जा रही थी.” ओह्ह्ह्ह नामिता…मुझ से नहीं रहा जा रहा…मुझे भी पापा जैसा लंड ला दो कहीं से…अपनी बेहन की चूत को मस्त लंड से भर दो…मेरी चूत में आग लगी हुई है मेरी बेहन…मेरी आग बुझा दो नामिता” 

दूसरे कमरे में पापा ने मौसी को घोड़ी बना दिया. मौसी अपने घुटने और हाथों के बल झुक चुकी थी और पापा उसस्के चूतड़ को थाम कर अपना लंड उसस्की चूत पर पीच्छे से धकेलने लगे.” रानी, मुझे घोड़ी बना कर चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है. तुझे कैसा लगता है उषा मेरी रानी. तेरे चूतड़ बहुत सेक्सी लगते हैं मुझे. एक दिन तेरी गांद ज़रूर चोदुन्गा. वह कितनी सेक्सी हो तुम मेरी साली.” उषा मौसी नी चे से बोल रही थी,” जिज़्जु तुम चोदना शुरू करो. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मुझे मेरे जिज़्जु चोद्ते हैं. तुम मुझे घोड़ी बनाओ या कुतिया, मुझे बस अपने जिज़्जु का लंड अपनी चूत में चाहिए….चोदो मुझे जिज़्जु राजा….थोक्दो अपना लोड्‍ा मेरी चूत में….चोद लेना मेरी गांद भी जिज़्जु….पेल मुझे” 

मेरे बिस्तर पर नामिता ने अब मुझे पीठ के बल लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल दिया. मेरी बेहन मेरे उप्पेर चढ़ि हुई थी. उसस्की चुचि मेरे वक्ष स्थल पर रगड़ रही थी. मुझे किस करते हुए उसस्के होंठ मेरे निपल्स से होते हुए पेट पर और आख़िर मेरी चूत की त्रिकोण की तरफ बढ़ने लगे. उसस्के होंठ आख़िर मेरी चूत की फांकों को खोलते हुए अपने निशाने पर जा पहुँचे. उसस्की जीभ मेरे क्लाइटॉरिस को चाटने लगी और फिर उससने मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसा दी. मुझे उसस्की ज़ुबान क़िस्सी लंड जैसी लग रही थी. नामिता नेमेरी जांघों को कस कर पकड़ रखा था. उसस्की ज़ुबान मेरी चूत को चोद रही थी. पापा के कमरे में अब मैं देख नहीं सकती थी लेकिन उनकी आवाज़ें सुनाई पड़ रही थी. मुझे नहीं मालूम था की औरत भी दूसरी औरत की जब चूत चाटती है तो इतना मज़ा आता होगा. “हे भगवान, मुझे अपनी बेहन के चूमने चाटने से इतना मज़ा मिल रहा था तो असली लंड से मेरी हालत क्या होगी? 

मेरी चूत से लगातार रस टपक रहा था और मेरी बेहन मज़े से उस्स्को चाट रही थी. मुझे लगा कि मेरी चूत झड़ने लगी है. मैने अपने चूतड़ उप्पेर उठाने शुरू कर दिए ता कि मैं नामिता की पूरी ज़ुबान को अपनी चूत में घुस्सा कर और मज़ा ले सकूँ,’ आआआअ……ऊऊऊऊ…..आअगग्घह ……हाईईईई….उससिईईईई,,,नामिताआअ….चूस मेरी चूत….मैं गइई,….मेरी चूत से पानी जा रहा है….या मुझे क्या हो गया मेरी बहना…डाल दे अपनी जीभ मेरी फुदी में मैं झदीए” 

मैं ना जाने कितनी देर तक बिस्तर पर शरीर एन्थ कर तड़पती रही, मेरी चूत रो रो कर रस छ्चोड़ती रही और मेरी बेहन मेरी चूत का रस चाटती रही. जब नामिता ने चेहरा उठाया तो उसस्के होंठों से चूतरस टपक रहा था. नामिता मेरी बेहन बहुत खूबसूरत लग रही थी. जब उससने मुझे होंठों पर किस किया तो उसस्के मूह से मुझे अपनी चूत के रस का स्वाद मिला. नामिता की आँखें लाल हो चुकी थी और फिर उससने मेरे कानो को चूमा. मैने भी अपनी बेहन को मज़ा देने की सोच ली. मैने भी उस्स्को वैसे ही किस करना शुरू कर दिया जैसे उससने मुझे किया था.. मुझे हैरानी थी कि जो मैं कर रही थी वो लेज़्बीयन सेक्स था लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. नामिता का जिस्म बहुत नमकीन लग रहा था मुझे. मैने उसस्की मस्त चुचि को जब अपने मूह में लिया तो मुझे जन्नत मिल रही थी. नामिता के चुचक बहुत कड़े हो चुके थे. मैने नामिता को पेट के बल उल्टा दिया और फिर उस्स्को गर्दन से चूमना शुरू कर दिया. मेरी बेहन की गांद का उभार बहुत कामुक लग रहा था. 

मैने धीरे से नामिता की पीठ को किस करना शुरू कर दिया और उसस्के चूतड़ को सहलाया. मेरी बेहन के चूतड़ की दरार मुझे बहुत सेक्सी लग रही थी. अपना हाथ नीचे ले जा कर मेने उसस्की चूत को सहलाया और पीठ को चूमते हुए अपने होंठ मैने उसस्की गांद की घाटी तक पहुँचा दिए. नामिता अपनी चूत मेरे हाथ पर ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी और उस पर धक्के मार रही थी. आख़िर मैने अपनी ज़ुबान को नामिता के चूतड़ की दरार में डाल कर चाटना शुरू कर दिया. मुझ पर चुदाई का एक नशा च्छा रहा था. नामिता के चूतड़ का बहुत मज़ेदार स्वाद था और मैने अपनी ज़ुबान उसस्की गांद के छेद में घुसा दी,” ऊऊऊऊ…..आआआअ……दीदी…..चॅटो…बहुत मज़ा आ रहा है…..शाबाश दीदी चाटती जाओ….हाईईईईईई” 
नामिता की गांद से नमकीन स्वाद मुझे बहुत सेक्सी लगा और मैने उसस्की गांद को चटाना जारी रखा और उंगली से उसस्की चूत को चोदना जारी रखा. पहले मेरी एक उंगली उसस्की चूत में थी फिर मैने उसकी चूत दो और फिर तीन उंगली डाल कर चुदाई शुरू कर दी. मेरी ज़ुबान उसस्की गांद चोद रही थी और उंगलियाँ उसस्की चूत को चुदाई सुख दे रही थी. मेरा हाथ उसस्की चूत के रस से भीग गया था और वो मेरे हाथ पर अपनी चूत ऐसे चोद रही थी जैसे की क़िस्सी लंड पर पेल रही हो. उससने थोड़ी देर में पानी छ्चोड़ दिया. जब वो झाड़ गयी तो मैने उसस्की चूत को खूब चूसा और चूत का रास्पान कर लिया.” सुधा तू तो बहुत मस्त चुस्ती है. मैं तो तुझे अनारी ही समझ रही थी, तू तो साली मस्त लेज़्बीयन निकली” मैने उसस्के चूतड़ पर काट खाया और बोली,” नामिता जैसी जिसकी बेहन हो वो अनारी कैसे हो सकती है. अब कल की चुदाई को मत भूल जाना” 

क्रमशः...............
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07-17-2017, 12:46 PM,
#19
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
चुदाई के दिन चदाई की रातें 2 

गतान्क से आगे...................... 

मैं सुधा, एक बार फिर से अपनी चुदाई की कहानी जारी रखती हूँ. मेरा रात को पापा के साथ मौसी की चुदाई देख कर उतेज्ना से बुरा हाल हो गया था और फिर मेरी बेहन नामिता ने मुझे जो मज़ा दिया, मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था. मेरी बेहन बेशक मुझ से छ्होटी है, पर चुदाई में मेरी गुरु है. उसस्के भीगे हुए चुंबन ऐसे थे कि मेरी चूत से रस की नदिया बहने लगी थी और जो मज़ा मुझे अपनी बेहन के मुख से और हाथों से मिला, कभी नहीं महसूस हुआ था. उसस्के बाद मैने अपनी बेहन को भी प्यार किया जो एक यादगार लम्हा बन गया मेरी ज़िंदगी का. जब सुबह मेरी आँख खुली तो मेरा जिस्म एक दम हल्का महसूस हो रहा था. नामिता के होंठों के स्पर्श की भावना मुझे आनंदित कर रही थी. 

मैं नामिता से लिपट कर नंगी ही लेटी हुई थी. जब मेरी आँख खुली तो नामिता को अपनी बाहों में पाया. हम दोनो बहने एक दूसरे से लिपटी हुई थी. तभी मौसी चाइ ले कर आई.” क्या बात है बेटी, आज उठना नहीं है क्या? अर्रे तुम ने तो कपड़े भी नहीं पहने आज! क्या बात है? बच्चो अब तुम जवान हो चुकी हो, कपड़े पहन कर रखा करो. वाह सुधा, तेरा जिस्म तो भर चुका है. मैं बात करती हूँ जिज़्जु से की तेरी शादी करवा दें जल्दी से. सुधा, ये जवानी चली गयी तो ज़िंदगी में कुच्छ नहीं रहे गा. मज़े ले लो जवानी के जवानी में.” मैं अब मुस्कुरा पड़ी,” मौसी, हम लोगों को भी सीखा देना कि कैसे मज़ा लिया जाता है जवानी का. लगता है तुम को काफ़ी तज़ुर्बा है मज़े लेने का. कहीं तू भी तो हमारे घर में मज़ा लेने ही तो नहीं आती? पापा का ख्याल रखना ज़रा, मम्मी के बाद अकेले हो गये हैं कुच्छ. और वैसे भी जीजा साली का रिश्ता तो होता ही प्यार वाला. है” 

मौसी मुस्कुरा पड़ी,” तेरे पापा तो मेरे प्यारे जिज़्जु हैं, मैं उनका ख्याल नहीं रखूँगी तो कौन रखे गा? मैं तो ऐसे ही कह रही थी कि अगर क़िस्सी चीज़ की ज़रूरत हो तो पुच्छ लेना, मेरी बच्चियो. अब मैं निकलती हूँ, तेरे मौसा जी भी लौट आए होंगे. शाम को मिलेंगे” पापा भी तैयार हो कर चले गये. नामिता ने फोन घुमाया और अपने दोस्तों से बातें करने लगी. मैं नहाने चली गयी और जब लौटी तो मेरी बेहन बोली,” सुधा, पहले दौर में मैं तुझे अपने यार करण से चुदवाती हूँ. मैने उसको कहा है कि मैं घर में अकेली हूँ, और वो जल्दी से आ कर मुझे चोद डाले. जब मैं उसके साथ हूँगी तो तुम हम को रंगे हाथ पकड़ लेना और हम को ब्लॅकमेल करके उस से चुदवा लेना, मैं भला ना किओं कहूँगी. एक बार कारण से चुदाई करवा लेना फिर दोपहर को मेरे यारों की मंडली आ जाए गी जो हम दोनो को लंड से हर तरफ से चोद चोद कर कुतिया बना देंगे,” 

मैं आने वाले वक्त के बारे सोच कर मुस्कुराने लगी. मेरी चूत चुदाई सुहाने ख्वाब देख कर पानी छ्चोड़ने लगी. नामिता ने एक पाजामा पहन लिया जिसके नीचे उसने कोई पॅंटी नहीं पहनी थी और उप्पेर एक पारदर्शी कुर्ता पहन लिया. मैं एक सेक्सी मागज़िने ले कर अपने कमरे में चली गयी. मैने एक नाइटी पहन रखी थी और कुच्छ भी नहीं. थोड़ी देर में बेल बजी और नामिता डोर खोलने गयी. कुच्छ देर में वो अपने दोस्त कारण को ले कर ड्रॉयिंग रूम में गयी. वो बोल रही थी” करण यार, अब देर मत करो, मैं तेरे लंड को भूखी हूँ, तुम मेरी चूत को ठंडा कर दो इस से पहले कि कोई कबाब में हड्डी आ जाए. ज़रा मेरी चूत पर हाथ रख कर देखो, कैसे जल रही है चुदाई की आग में,” कहते ही नामिता ने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. करण ने भी अपनी पॅंट उतारनी शुरू कर दी,” नामिता, साली तेरी चूत है ही इतनी गरम की लंड बिना तो रह नहीं सकती. पहले मैं तेरी चूत को चाट कर ठंडा करूँगा और फिर लोड्‍े से चोद कर, ” 

नामिता नंगी हो कर सोफे पर लेट गयी और करण उसस्की जांघों को खोल कर अपना मूह उसस्की चूत पर झुका कर चूमने चाटने लगा. करण काफ़ी बलिश्त जिस्म का मालिक था. उसका लंड कम से कम 7 इंच का होगा और बहुत मोटा भी था,” करण साले मेरी चूत को चॅटो, कब से तरस रही हूँ इस्सको चटवाने के लिए. जल्दी से घुसा दो अपनी ज़ुबान को इससके अंदर, नामिता टाँगें खोले पड़ी है तेरे सामने.” करण बिन बोले चूत में जीभ घुसा कर चाटने लगा,” अहह……आअरररगगगगग…..हह…..म्‍म्म्मममम” नामिता के होंठों से सिसकारियाँ निकलने लगी. मैने भी नाइटी के उप्पेर से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, मुझे उतेज्ना हो रही थी. मेरी चूत को आज तक किस मर्द ने टच भी नहीं किया था, चूमना तो दूर की बात थी. मेरी नाइटी का वो हिस्सा जो मेरी चूत के सामने था, मेरी चूत के रस से भीग गया था. प्लान के मुताबिक, मुझे नामिता और करण को चुदाई के खेल में रंगे हाथों पकड़ कर ब्लॅकमेल करना था.
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07-17-2017, 12:46 PM,
#20
RE: Hindi Sex Stories By raj sharma
नामिता की जंघें अब करण की गर्दन के इर्द गिर्द कसी हुई थी. करण के चुटटर दरवाज़े की तरफ थे और उसस्के चुटटर उप्पेर नीचे हो रहे थे जब वो मेरी बेहन की चूत चाट रहा था. मैने कुच्छ इंतज़ार किया और फिर अपनी आवाज़ में में गुस्सा लाती हुई कमरे में दाखिल हुई,” नामिता की बच्ची, ये सब क्या हो रहा है, कुछ शरम नाम की चीज़ तेरे पास है या नहीं? ये लड़का कौन है? मैं पापा को बताती हूँ कि तुम कौन से गुल खिला रही हो” नामिता ने घबराने का नाटक किया और बोली,” दीदी आप यहाँ? आप तो बाहर गयी हुई थी…दीदी मुझे माफ़ कर देना…करण को तो आप जानती हैं…मेरा दोस्त है….मुझ से बहुत प्यार करता है…दीदी प्लीज़ पापा को मत कहना..हम तेरी हर बात मानेगे..प्लीएज” करण बहुत घबरा गया और हड़बड़ा कर नामिता की चूत से अपना मूह अलग करते हुए बोला,”दीदी, हम से ग़लती हो गयी…माफ़ कर दो ना….हम आपकी हर बात मानेगे….ऐसी ग़लती अब फिर नहीं होगी…” मैने देखा कि करणअब डर गया है और नामिता दूसरी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी. करण मेरे पैरों पर गिर पड़ा और गिड़गिदने लगा. 

“ठीक है…मैं तुमको माफ़ कर सकती हूँ….करण तुम इस्सको ग़लती कहते हो, लेकिन तेरा लंड तो इस्सको ग़लती नहीं मान रहा…देखो कैसे खड़ा है अभी, जैसे कि अभी चुदाई कर देता मेरी बेहन की अगर मैं 5 मिनिट लेट हो जाती…नामिता, सच बतायो कितनी बार चोद चुका है करण तुझे? मुझ से झूठ मत बोलना” नामिता भी घबराहट की आक्टिंग करती हुई बोली,” दीदी ये मुझे कई बार चोद चुका है और बहुत मज़ा देता है मेरी चूत को इसका लंड. करण मेरा पहला यार है जिससने मेरी सील तोड़ी थी” मैने मुस्कुराते हुए करण के लंड पर हाथ फेरते हुए कहा”तो फिर माफी तभी मिल सकती है अगर करण मुझे भी चोद कर वोही मज़ा दे जो इससने तुझे दिया था, बोलो मंज़ूर है?” नामिता और करण एक दूसरे को देखने लगे और फिर कमरे की दूसरी तरफ जा कर बातें करने लगे. जब वो वापिस आए तो करण मेरे पास आ कर बोला,” दीदी हम को मंज़ूर है. मैं आपको चोद लेता हूँ पर आप क़िस्सी को मत बताना हमारी चुदाई की बात.” 

मेरी बात बन चुकी थी. मैने हंस कर कहा” करण साले एक तरफ मुझे “दीदी” बोल रहा है और दूसरी तरफ चोदने की बात करता है, क्या बात है राजा?” करण मेरी नाइटी को सिर के उप्पेर उठता हुआ बोला”बहुत लड़कियो को चोदा है, लेकिन क़िस्सी को बेहन बना कर नहीं चोदा है. सोचता हूं के अब अपनी दीदी को भी चोद कर मज़ा ले लूँ. वाह सुधा दीदी, आपकी फिगर तो कमाल की है और आपकी चुचि का तो जवाब ही नहीं है. नामिता, तुमने मुझे बताया ही नहीं कि तेरी बेहन इतनी सेक्सी माल है और वो भी चुदाई की प्यासी है. सुधा दीदी अब तुम घूम जयो और मुझे अपनी गांद के दर्शन करवा दो. मैं गांद का दीवाना हूँ. मुझे बहुत देर इच्छा है की क़िस्सी मस्त गांद को चोदु और आपकी गांद के तो क्या कहने?” उससने मुझे अपनी बाहों में भरते हुए मेरे चूतड़ पर कस के हाथ फेरना शुरू कर दिया. मेरा रोम रोम रोमांचित हो उठा जब करण के लंड का मोटा सूपड़ा मेरी चूत पर रगड़ने लगा. मैने प्यार से अपने होंठ करण की होंठों पर रख दिए. तभी नामिता बोली,” अच्छा भाई, अब मेरा यहाँ क्या काम? तुम दोनो भाई बेहन मज़े लो मैं चलती हूँ.” मैने कहा,”तुम भी यहीं रूको, तुम कहाँ चली?” नामिता ने कहा” दीदी जिस तरह आपने हम दोनो पर छापा मार दिया था, वैसे कोई आप पर छापा ना मार दे, इस लिए छ्होटी बेहन रखवाली के लिए बाहर बैठ जाए गी”
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