Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
कामया ने विमल के सर को अपनी नाभि पे दबा दिया, जिस्म कमान की तरहा उठ गया और वो चीखती हुई झरने लगी, उसकी पैंटी बुरी तरहा से गीली हो कर बिस्तर पे उसके कामरस को फैलाने लगी और बिस्तर पे एक तालाब सा बन गया. अभी तो विमल ने उसकी चूत को छुआ भी नही था और उसका ये हाल हो रहा था.
‘ ओह मोम, आइ लव यू, कितनी खूबसूरत हो तुम’

कहते हुए विमल कामया की नाभि से फिर उसके रोज़ तक पहुँच गया और दोनो उरोजो की घाटी को चाटने लगा

‘अहह है राम क्या क्या करता है तू उफफफफफफफ्फ़’

अच्छी तरहा उसकी घाटी को चाटने के बाद विमल ने उसके उरोज़ पे ज़ुबान फेरना शुरू कर दिया और उसके निपल को अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगा.

उूुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ आआआअहह

कामया की सिसकियाँ फिर से छूटने लगी और उसकी चूत में फिर से खलबली मच गई.
कामया समझ गई कि विमल फिर कल की तरहा अच्छी तरहा तडपाएगा, और आज उसके सब्र का प्याला टूट चुका था.

कामया ने पलट कर विमल को बिस्तर पे पीठ के बल कर दिया और उसके उपर चढ़ गई.
कामया झुक कर विमल के निपल्स को चूसने और काटने लगी, अब विमल की बारी थी सिसकियाँ लेने की.

‘ओह मम्मूओंम्म्मममममम’

विमल के जिस्म को चूमते चाट्ते और काटते ही वो उसके लंड पे आ पहुँची और उसके अंडर वेर को उतार कर उसके लंड को अपने हाथ में ले कर सहलाने लगी, 

जैसे ही कामया ने उसके लंड को सहलाना शुरू किया, विमल सिसक उठा.

कामया ने उसके लंड को चाट्ना शुरू कर दिया और उसके स्पेड पे अपनी ज़ुबान फेर कर उसके निकलते हुए रस को चाट गई.

विमल की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी आर कामया धीरे धीरे उसके लंड को अपने मुँह में भरती चली गई. यहाँ तक की उसकी थोड़ी विमल की गोलाईयों को छूने लगी और उसका लंड कामया के गले में घुस गया. विमल को ऐसा लगा जैसे किसी टाइट चूत में उसका लंड घुस गया हो और कामया की हालत खराब होने लगी, विमल के मोटे लंड की वजह से उसके गले में दर्द होने लगा, आँखों से आँसू बहने लगे, पर उसने हिम्मत नही हारी, वो विमल को इतना मज़ा देना चाहती थी, कि सबको भूल कर वो सिर्फ़ उसका दीवाना बन जाए.

कामया हर थोड़ी देर बाद उसके लंड को बाहर निकल कर साँस लेती और फिर अपने गले तक ले जाती.

विमल कामया के मुँह और गले की गर्मी को ज़्यादा देर तक सह नही पाया और उसकी पिचकारी कामया के गले में छूटने लगी.

कामया उसकी एक एक बूँद को अपने अंदर समा गई और फिर उसकी बगल में गिर कर अपनी साँसे संभालने लगी.

कामया ने जो मज़ा विमल को दिया था वो उसे पहले कभी नही मिला था अब विमल ने भी ठान लिया था कि वो कामया को इतना मज़ा देगा कि वो बस उस मज़े में खो कर रह जाएगी.

जब कामया की साँसे सम्भल गई तो विमल ने उसे अपने पास खींच लिया और उसके होंठ चूसने लगा, कामया के मुँह से उसे अपने वीर्य का स्वाद मिलने लगा, पहले उसे कुछ अजीब लगा पर कामया को खुश करने की वजह से वो अपने रस के स्वाद लेने में मग्न हो गया.

दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने में मग्न हो गये और विमल साथ साथ कामया के उरोज़ मसल्ने लगा, कामया की सिसकियाँ उसके होंठों पे दबी रह गई और उसकी चूत ने बागवत कर दी, हज़ारों चीटियाँ उसकी चूत में रेंगने लगी और कामया का हाथ अपने आप विमल के लंड को सहलाने लगा, उसमे फिर से जान फूकने लगा.

थोड़ी देर में विमल का लंड फिर फॉलाद की तरहा सख़्त हो गया और कामया उसे पकड़ के खींचने लगी, अब उसकी बर्दाश्त के बाहर था, उसे जल्द से जल्द विमल का लंड अपनी चूत के अंदर चाहिए था.

विमल कामया की इच्छा समझ गया और उसने कामया की गान्ड के नीचे एक तकिया रख दिया फिर उसकी जांघों के बीच में आ कर अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा.

अहह द्द्द्द्द्द्दददाााआाालल्ल्ल्ल्ल्ल द्द्द्द्द्ड़ड़डीईईई 

कामया ने अपनी टाँगे पूरी फैला दी और विमल को अपने उपर खींचने लगी, वो बार बार अपनी कमर उछाल कर उसके लंड को अंदर लेने की कोशिश कर रही थी.
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08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
विमल ने अपने लंड के सुपाडे को उसकी चूत की फांको के बीच में रखा और एक धक्का लगाया, मुस्किल से उसका सुपाडा ही अंदर घुसा, आर कामया की चीख निकल गई

उूुुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई म्म्म्म मममममाआआआआअ

विमल हैरान हो गया, ये क्या चक्कर है, सुबह सुनीता की चूत बहुत टाइट मिली और अब कामया की, बिल्किल ऐसा लगा जैसे किसी कुँवारी की चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा हो.

कामया की आँखों से आँसू बहने लगे, एक तो विमल का लंड वैसे भी बहुत मोटा था उपर से उसने आयंटमेंट लगा कर अपनी चूत भी बहुत टाइट कर ली थी. कामया की तो जान निकल पड़ी उसे ऐसा लगा जैसे पहली बार चुद रही हो.

विमल झुक कर कामया के आँसू चाटने लगा.

‘ये क्या किया है मोम, आज तो कल से भी ज़्यादा टाइट चूत हो गई है तुम्हारी’

‘तेरे लिए ही तो किया है – ताकि तुझे कुँवारी टाइट चूत चोदने का मज़ा मिले – भूल जा मेरे दर्द को बस घुसा दे अंदर – मैं कितना भी चीखू परवाह मत करना – अब घुसा अंदर सोच क्या रहा है’

‘ओह मोम आइ लव यू!’

और विमल एक ज़ोर का झटका मार कर अपना आधा लंड अंदर घुसा देता है.
आआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

कामया फिर ज़ोर से चीखती है, और विमल अपने होंठ उसके होंठों से चिपका कर उसे होंठ चूसने लगता है.

थोड़ी देर में जब कामया थोड़ी शांत होती है तो विमल अपने आधे घुसे लंड को अंदर बाहर करने लगता है , धीरे धीरे कामया भी अपनी गान्ड उछाल कर उसका साथ देने लगी और उसी वक़्त विमल ने ज़ोर का धक्का लगा कर अपना पूरा लंड अंदर घुसा दिया, उसे ऐसा लगा जैसे किसी सन्करि गुफा ने उसके लंड को जाकड़ लिया.

और कामया का बुरा हाल हो गया उसकी दर्द भरी चीख विमल के होंठों में दब के रह गई.

विमल थोड़ी देर ऐसे ही रहा और कामया के होंठ चूस्ता कभी उसकी आँसू चाट ता और फिर उसने अपना ध्यान कामया के निपल्स पे लगा दिया और दोनो को बारी बारी चूसने लगा, कुछ ही देर में कामया का दर्द कम हो गया और उसकी कमर ने हिलना शुरू कर दिया और विमल ने अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया, कामया की सन्करि चूत गीली होनी शुरू हो गई और विमल का लंड आसानी से अंदर फिसलने लगा.

आआआआआअहह वववववववववीीईईईईईईईईइइम्म्म्मममममम्मूऊऊुुुुुुुउउ कककककककककचूऊऊओद्द्द्द्दद्ड द्द्द्ददडाालल्ल्ल्ल्ल्ल

कामया के मुँह में जो आया वो बोलने लगी और कमरे में एक तूफान आ गया, दोनो के जिस्म एक लय में एक दूसरे से टकराने लगे और कामया जल्द ही अपने मुकाम पे पहुच गई उसका जिस्म अकड़ने लगा और उसकी चूत ने विमल के लंड के चारों तरफ एक बाद सी फैला दी.

ऐसा ऑर्गॅज़म कामया को पहले कभी नही हुआ था, उसकी आँखें बंद होती चली गई और जिस्म ढीला पड़ गया. विमल भी रुक गया ताकि कामया अपने अंदर के सागर में गोते लगा सके.

कुछ देर बाद कामया होश में आई और विमल के धक्के फिर शुरू हो गये विमल ने तेज गति अपना ली, कामया ने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया. जिस्मो के टकराने से ठप ठप की आवाज़ गूँज रही थी और कामया की चूत फॅक फॅक फॅक का राग आलाप रही थी.

पूरा कमरा ही कामुकता का गढ़ बना हुआ था. विमल के धक्के और भी तेज हो गये.

अहह तेज और तेज यस यस डू इट फास्टर फास्टर 

कामया फिर अपने चरम पे पहुँचने लगी और साथ साथ विमल भी और कुछ ही पलों में दोनो चीख कर झड़ने लगे.

कामया की चूत ने विमल के लंड को जाकड़ लिया और उसके वीर्य की एक एक बूँद निचोड़ने लगी.

विमल भी हांफता हा कामया के उपर ढेर हो गया और दोनो इस स्वर्णिम आनंद की अनुभूति में खो गये.

जब विमल का लंड कामया की चूत में ढीला पड़ गया और उसकी साँस थोड़ी सम्भल गई वो कामया से अलग हो कर उसकी बगल में लेट गया.

दोनो ही दुनिया से बेख़बर अपने अहसास को समेट रहे थे और दोनो कब नींद के आगोश में चले गये दोनो को ही पता ना चला.

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08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
रमेश रिया के होंठ चूम रहा था और साथ ही साथ सोच रहा था कि उसे कितना आगे बढ़ना चाहिए. एक पल के लिए उसके दिमाग़ में ये डर भी आ गया था कि रिया का कुछ पता नही किसी से कुछ भी कह देगी. बड़ी मुँहफट है अगर कामया को पता चल गया तो ?

वहीं दूसरी तरफ उसके दिमाग़ में रिया की धमकी गूँज रही थी.
रमेश ने सोच लिया था कि वो रिया को बिना चोदे ऑर्गॅज़म की तरफ ले जाएगा फिर देखें गे कि आगे क्या करना है.

रमेश ने अभी रिया के होंठ चूसने में जो पहले तेज़ी दिखाई थी से थोड़ा हल्का कर दिया और बिल्कुल एक नाज़ुक कली की पंखुड़ियों को संभालते हुए उसके होंठ चूसने लगा, रिया भी उसके होंठ को चूसने लगी और दोनो की ज़ुबाने आपस में मिलने लगी. 

रिया ने खुद ही रमेश का हाथ पकड़ के अपने उरोज़ पे रख दिया और रमेश ने उसे धीरे धीरे मसलना शुरू कर दिया.

रिया के होंठों को छोड़ रमेश ने उसकी गर्दन पे चुंबन करना शुरू कर दिया और रिया की सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी.
‘ओह पापा – बहुत प्यार करो मुझे – बहुत तडपी हूँ मैं. अहह एस किस मी – किस मी मोर’
रमेश ने रिया के टॉप को उसके जिस्म से अलग कर दिया अंदर रिया ने ब्रा नही पहनी थी. उसके उरोज़ खुली हवा में अपनी सुडौलता का बखान करने लगे. निपल उत्तेजना के कारण एक दम तन गये थे. दूधिया गुलाबी रंगत के वक्ष और हल्के भूरे रंग के निपल रमेश को अपने तरफ खींच रहे थे.

रमेश ने जैसे ही एक निपल के उपर अपनी ज़ुबान फेरी रिया सिसक पड़ी 
म्म्म्म ममममम
और जैसे ही रमेश के होंठों ने निपल को अपने क़ब्ज़े में लिया रैया के हाथ रमेश के सर पे चले गये और उसके बालों को सहलाते हुए उसके सर को अपने उरोज़ पे दबाने लगे.
रिया जिस्म में उठती हुई तरंगों को सह नही पा रही थी और बिस्तर पे नागिन की तरहा बल खाने लगी. उसके निपल से उठती हुई तरंगे सीधा उसकी चूत पे प्रहार कर रही थी और बेचारी चूत ने खलबलाते हुए अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया.
रिया ने खुद ही अपना दूसरा उरोज़ मसलना शुरू कर दिया और रमेश भी उसके निपल को ज़ोर ज़ोर से चूस्ता या फिर पूरे उरोज़ पे अपनी ज़ुबान फेर कर चाट ता.

‘ आह पापा चुसू ज़ोर से चूसो – पी जाओ मेरा दूध – आह कितने अच्छे लग रहे हैं आपके होंठ इन पर – और चूसो – आह आह आह मसल डालो’

और रिया रमेश के दूसरे हाथ को अपने नंगे उरोज़ पे रख कर सिहर उठती है.

‘मसलो मुझे – रागडो मुझे – रंडी बना लो अपनी – अपने लंड की रंडी उम्म्म्ममममम’

रिया के मुँह में जो आ रहा था बकती जा रही थी और अंदर ही अंदर रमेश की हालत खराब हो रही थी.
रमेश ने उसके दूसरे उरोज़ को ज़ोर ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया और उसके निपल को हल्के हल्के काटने लगा.
‘हां ऐसे – काटो मुझे – खा जाओ मुझे आह आह उफफफफफफ्फ़’

रमेश चाहे अंदर ही अंदर डरा हुआ था पर उसके जिस्म में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी – जिस्म दिमाग़ से बग़ावत कर रहा था.
रमेश से और सहा नही गया उसने झट से अपने कपड़े उतार फेंके और रिया को भी नग्न कर दिया.
रिया का नंगा मदमाता बदन उसे पागल कर गया और वो रिया के होंठों पे टूट पड़ा. रिया भी बेल की तरहा उस के साथ लिपटती चली गई.

रमेश के हाथ फिर रिया के उरोज़ पे चले गये और बेदर्दी से उन्हें मसल्ने लगा
रिया की सिसकियाँ रमेश के मुँह में घुलने लगी.
रमेश ने झुक कर रिया के निपल को मुँह में ले लिया और अपनी ज़ुबान से से छेड़ने लगा और दूसरे उरोज़ को बेदर्दी से मसल्ने लगा.

आआआआहह

रिया की सिसकियाँ छूटने लगी.

‘अह्ह्ह्ह पापा लव मी, अहह सक मी , चूसो मुझे, निकाल दो मेरा दूध’

रिया के मुँह में जो आ रहा था बडबडा रही थी.
जी भर के रिया के निपल्स को चूसने और उसके उरोजो को बुरी तरहा मसल्ने के बाद रमेश उसके जिस्म के और नीचे बढ़ा और उसकी नाभि को चाटने लगा

उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

‘ओह रिया ! बहुत सुंदर है तू, बिल्कुल अपनी माँ की तरहा’

‘तो आज लगा लो भोग इस सुंदरता का – सिर्फ़ आपके लिए है ये’

और रमेश उसके जिस्म को चाट्ता हुआ उसकी चूत पे पहुँच गया.
जैसे ही रमेश की ज़ुबान ने उसकी चूत को छुआ रिया बिस्तर से उछल पड़ी.

‘ऊऊओह म्म्म्म ममममाआआआ’

रमेश उसकी चूत के लबों को हल्के हल्के काटने लगा.
रिया के हाथ रमेश के सर पे चले गये और ज़ोर से उसे अपने चूत पे दबा डाला.
रमेश ने उसकी चूत की फांको को अपनी उंगलियों से फैलाया और अपनी ज़ुबान बीच में डाल दी.

आआआआआआआहह

रिया ज़ोर से सिसक पड़ी

रमेश उसकी चूत को अपनी ज़ुबान से चोदने लगा और रिया मस्ती के सागर में डूबती चली गई.

रिया की उतेज्ना इतनी बढ़ी कि वो अपनी चूत रमेश के मुँह पे मारने लगी.
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08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उूुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़ हहाआआऐययईईईईईईईईईईईईईई
ययए क्य्ाआआआ हहूऊओ रहा हाईईईईईईईईईईई मुझे

एक दौरा सा चढ़ गया रिया को, उसका जिस्म अकड़ने लगा और एक चीख के साथ उसने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया.

म्म्म्मनममममममाआआआआआआआआआआआअ

रमेश लपलप उसके रस को पीता चला गया और रिया का जिस्म ढीला पड़ता चला गया. उसकी आँखे मूंद गई और वो अपने पहले ऑर्गॅज़म के नशे में खो गई.

रिया अपने ओर्गसम की सुखद अनुभूति में खो गई थी और उसकी पलकें बंद हो गई थी, पर रमेश का बुरा हाल हो रहा था उसका लंड आकड़ा हुआ था और इस वक़्त उसे चूत चाहिए थी चाहे किसी की भी क्यूँ ना हो.

रमेश ने बढ़ी मुश्किल से खुद को रोका रिया की चूत का सत्यानास करने को क्यूंकी अगर वो रिया के साथ आगे बढ़ता तो उसे रोन्द डालता और रिया की पहली चुदाई भयंकर हो जाती, उसके दिमाग़ में एक दम रानी आ गई.

रमेश ने फटाफट रिया के नंगे जिस्म को चद्दर से ढाका और यूही नंगा कमरे से बाहर निकल गया. जैसे ही वो बाहर निकला उसे रानी अपने कमरे की तरफ जाती हुई दिखाई दी, यानी रानी ने सब देख लिया था. अब रानी के मुँह को बंद करने के लिए रमेश को ये और भी ज़रूरी लगा कि वो उसे अपने लंड का स्वाद चखा दे.

और वैसे भी वो उस वक़्त रानी को चोद रहा था जब रिया बीच में आ टापकी. रमेश रानी के पीछे लपका और उसके पीछे पीछे उसके कमरे में घुस गया. जैसे ही रानी पलटी, रमेश ने उसे दबोच लिया और उसके होंठों को ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गया. रानी भी अधूरी चुदाई की वजह से गरम थी और जो लाइव शो वो देख के आ रही थी, उसकी वजह से उसके जिस्म में आग लगी हुई थी.

रानी भी उसी तेज़ी के साथ रमेश के होंठ चूसने लग गई और उसके हाथ रमेश के लंड को सहलाने लगी.

रानी के होंठों को चूस्ते हुए रमेश उसके जिस्म को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद करता चला गया.
रमेश से और सहन नही हो रहा था, उसने रानी को बिस्तर पे पटक दिया और उसके उपर चढ़ गया, रानी ने भी अपनी जांघें फैला दी और रमेश ने उसकी चूत के मुँह पे अपने लंड को रख ज़ोर का धक्का लगा दिया. एक ही झटके में रमेश का पूरा लंड रानी की चूत में था और रानी की ज़ोर दार चीख निकल गई.

आआआआआआआआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

रमेश पे पागलपन सवार हो चुका था वो ढकधक रानी की चूत का मर्दन करने लगा.
रानी की ज़ोर दार सिसकियाँ हवा में फैलने लगी. और रमेश का लंड तेज़ी से उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था.
ऐसे दम दार चुदाई रानी की कभी नही हुई थी, आज रमेश उसे पहली बार चोद रहा था और रानी रमेश की गुलाम बन चुकी थी.

जब तक रमेश झाड़ता रानी दो बार झाड़ चुकी थी और जब रानी ने महसूस किया कि रमेश के धक्के और तेज हो गये हैं वो समझ गई कि रमेश झड़ने वाला है. रमेश को मज़ा देने के लिए रानी ने उसके लंड को अपनी चूत से पकड़ना और छ्चोड़ना शुरू कर दिया और उसकी की लय में अपनी गान्ड उछाल उछाल कर उसका लंड अपनी चूत में लेने लगी.
कमरे में एक भूचाल सा आ गया और दोनो के जिस्म तूफ़ानी गति से एक दूसरे से टकरा रहे थे.
थोड़ी ही देर में दोनो बुरी तरहा एक दूसरे से चिपक गये और साथ साथ झड़ने लगे रमेश की हुंकार और रानी की चीख दोनो साथ साथ हवा में घुल गई और रमेश के लंड से निकलती हुई उसके वीर्य की बोछार रानी की चूत को भरती चली गई.

दोनो ना जाने कितनी देर एक दूसरे के साथ चिपके रहे.
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08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
ऋतु को चोदने के बाद, रमण किसी काम से चला जाता है, आज वो खुश था ऋतु ने उसका मज़ाक नही उड़ाया था उसके अहम को वो चोट नही दी थी जो उसने पहले दी थी. पर माँ की तरहा बेटी भी गान्ड को हाथ नही लगाने दे रही थी.

ऋतु वैसे ही नंगी बिस्तर पे पड़ी रहती है और रवि का इंतेज़ार करने लगती है, वो जान भुज कर खुद को सॉफ नही करती, वो चाहती थी कि रवि को उसकी चूत से बहता हुआ वीर्य दिखे और वो समझ जाए कि ऋतु घर आने के बाद रमण से चुदि है.

आज ऋतु ने कसम खा रखी थी – रवि के दिमाग़ को हिलाने की – रवि जब घर पहुँचा तो उसने अपनी चाबी से दरवाजा खोला और घर में घुस गया – रमण के कमरे की लाइट जलती देख कर वो अंदर गया और सामने वही नज़ारा था जो ऋतु उसे दिखाना चाहती थी.

रवि को गुस्सा चढ़ जाता है और वो अपने कमरे में चला जाता है.

ऋतु बंद आँखों की कनखियों से उसे देख रही थी और जब रवि भुन्भुनाता हुआ अपने कमरे में चला गया तो ऋतु बिस्तर से उठी और नंगी ही किचन में जा जकर रवि के लिए कॉफी बनाने लगी.

उसकी चूत से रमण का वीर्य बहता हुआ उसकी जांघों तक आ रहा था.
ऋतु उसी हालत में कॉफी ले कर रवि के कमरे में चली गई.

कॉफी टेबल पे रख कर ऋतु रवि के साथ चिपक के बैठ गई.

‘क्या बात है यार तू उखड़ा हुआ क्यूँ है?’

रवि कोई जवाब नही देता.

‘बता ना यार ये नखरे क्यूँ चोद रहा है’

रवि गुस्से में मुँह दूसरी तरफ कर लेता है.

‘ ओह नही बात करना चाहता – ठीक है मत कर – रात को तेरा काम हो गया था – दो बार चोद लिया – अब लंड में इतनी जल्दी जान कहाँ आएगी – कॉफी रखी है पीनी है तो पी लेना – ना पीनी हो तो फेंक देना – या तो सीधे मुँह बात कर – नही तो मैं भी तेरे पैर नही पड़ने वाली’

और ऋतु को गुस्सा आ जाता है कॉफी का कप ले कर अपने कमरे में चली जाती है.
बड़ा आया – ऐसे गुस्सा कर रहा है जैसे इसकी बीवी हूँ – भाड़ में जा देखती हूँ कितने दिन मुझ से दूर रहेगा – जब लंड सर उठाएगा भागा भागा आएगा – तब बताउन्गि उसे – 
भूंभुनाती हुई सोचती हुई अपनी कॉफी पीने लगी. 

और रवि तो बिल्कुल हैरान रह गया था – ऋतु तो किसी रंडी की तरहा बात करके चली गई – ये हो क्या है है उसे – कल तक तो बिल्कुल ठीक थी – रात को भी कितनी मस्ती करी थी दोनो ने. तो क्या आज पापा ने ज़बरदस्ती उसके साथ…… नही …. पापा ऐसे नही हैं….ज़बरदस्ती नही करेंगे – ये खुद ही गई होगी उनके पास – पर ये गई क्यूँ – रात को क्या इसकी प्यास नही भुजी थी – क्यूँ नही समझती कि मैं इससे प्यार करता हूँ- मुझ से नही बर्दाश्त होता ये किसी और के पास जाए.
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08-11-2018, 02:27 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
उधर राम्या और सुनीता कमरे में रह गये थे जब कामया विमल के पीछे उसके कमरे में चली गई.
दोनो ही जानते थे कि क्या होगा दोनो के बीच, दोनो ही अपनी पारी खेल चुकी थी दिन में विमल के साथ.
पर जिस्म की प्यास ऐसी होती है जो एक बार जाग जाती है फिर वो कभी ठंडी नही होती, वो बार बार जागती रहती है.वैसे तो दोनो ने एक दूसरे के जिस्म की प्यास पिछली रात भुज़ाई थी, फिर भी सुनीता के दिमाग़ में एक लड़की साथ सेक्स करना सही नही था. तड़प तो वो भी रही थी विमल का लंड फिर से लेने के लिए लेकिन जानती थी कि आज रात कोई मोका नही मिलेगा कामया विमल को छोड़ेगी ही नही.

राम्या सुनीता के करीब जा कर उसके गले में अपनी बाँहें डाल देती है.
‘मासी अब लंड के बिना नही रहा जाता – एक विमल किस किस को चोदेगा – मेरा जिस्म जल रहा है – कुछ करो ना’ इस से पहले सुनीता कुछ जवाब देती राम्या अपने होंठ सुनीता के होंठों से चिपका देती है. दोनो पहले से ही बियर के नशे में थी. कुछ पल सुनीता ठंडी रहती है फिर उसके होंठ खुल जाते हैं और दोनो एक दूसरे के होंठ चूसने लगती हैं तभी राम्या का मोबाइल बजता है.

मजबूरन राम्या सुनीता से अलग होती है और अपना मोबाइल उठा के देखती है – सोनल की कॉल थी.

‘अरे सोनल – आज कैसे फोन किया’

‘यार कहाँ है तू कितने दिन हो गये मिले हुए’

‘अपनी फॅमिली के साथ घूमने आई हूँ – बस 2 दिन में वापस आ रही हूँ’

‘ हाई तू वहाँ मस्ती मार रही है और मैं यहाँ अकेले बोर हो रही हूँ’

‘तो ढूँढ ले ना कोई – एक बार ले लेगी – फिर देख जिंदगी कैसी रंगीन हो जाएगी’

‘नही नही – यार कुछ लफडा हो गया तो – और तू तो ऐसे कह रही है जैसे ले चुकी है’

‘कहाँ यार ऐसी किस्मत कहाँ’ राम्या ये नही बोल सकती थी कि भाई से ही चुद रही है.

‘अच्छा सोनल 3 दिन बाद मिलते हैं- माँ बुला रही है मुझे जाना है ‘

‘चल ठीक है- मिलते हैं’ और सोनल फोन काट देती है.

फोन रखते ही राम्या फिर सुनीता के साथ चिपक जाती है.

लेकिन सुनीता अपनी जिंदगी का बहुत बड़ा और भयंकर निर्णय ले चुकी थी. वो किसी भी कीमत पे राम्या को आज अपनी चूत के पास नही आने देना चाहती थी. लेकिन वो ये भी जानती थी इस वक़्त बियर का नशा चढ़ा हुआ है और दोनो के जिस्म में आग भड़क रही है – अपने आप को वो संभाल लेती लेकिन राम्या को शांत करना ज़रूरी था इस लिए वो आक्रामक रूप ले कर राम्या के होंठों को चूसने लग गई और साथ ही साथ राम्या के उरोज़ मसल्ने लगी.

आनन फानन सुनीता ने राम्या के कपड़े उतार डाले और उसे बिस्तर पे धकेल कर उसकी चूत पे हमला बोल दिया.

अहह म्म्म्मयमममममाआआआआआआसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

सुनीता ने ज़ोर ज़ोर से राम्या की चूत को चूसना शुरू कर दिया.


राम्या की चूत को चूस्ते हुए सुनीता अपनी दो उंगलियाँ एक साथ राम्या की चूत में घुसा देती है.

ऊऊऊऊऊऊ म्म्म्म ममममममाआआआआआआआआआआ

राम्या चीख पड़ती है.
पर सुनीता यहीं बस नही करती और उसकी चूत को चूसने और चाटने के साथ अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में पेलने लगती है.

आह आह मासी आह उफफफफफफ्फ़ उम्म्म्म करो ज़ोर से करो और ज़ोर्स से चूसो 

राम्या ज़ोर ज़ोर से सिसकने लगी और सुनीता ने अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल कर उसकी चूत में अपनी जीब डाल दी और जीब से ही उसे चोदने लग गई.
राम्या को अब ज़्यादा देर नही लगी और वो भरभराती हुई झड़ने लगी – सुनीता उसका सारा रस पी गई. राम्या निढाल हो चुकी थी उसकी आँखें बंद हो चुकी थी. इस से पहले की राम्या को ऑर्गॅज़म के बाद होश आता. सुनीता ने उसके जिस्म पे एक चद्दर डाल दी और कमरे से बाहर निकल गई.

कमरे से बाहर आ कर सुनीता नीचे लॉबी में उतर गई, बार बस बंद होने वाला था और वो बार में घुस गई एक वाइन की बॉटल का ऑर्डर दे डाला और वहीं पीने बैठ गई.
बार के सारे लॅफंडर उसे ही घूर घूर के देख रहे थे.
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08-11-2018, 02:28 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
बार टेंडर से विमल दोस्ती गाँठ चुका था और उसने सुनीता को विमल के साथ देखा था, उसने चुपके से विमल के कमरे का नंबर मिलाया – विमल को थोड़ी ही देर हुई थी कामया को अच्छी तरहा संतुष्ट करने में और वो लगभग सोने की ओर था की रूम का फोन बज गया – गालियाँ देते हुए विमल ने फोन उठाया और जो उसने सुना – उसके कान खड़े हो गये- नींद काफूर हो गई – मासी बार में बैठी वाइन पी रही थी और वहाँ के लोगो का निशाना बनी हुई थी. उसने बार टेंडर को थॅंक्स बोला और फटाफट अपने कपड़े पहने. कामया को तो कोई होश ही नही था.

कमरे से बाहर आ कर सुनीता नीचे लॉबी में उतर गई, बार बस बंद होने वाला था और वो बार में घुस गई एक वाइन की बॉटल का ऑर्डर दे डाला और वहीं पीने बैठ गई.
बार के सारे लॅफंडर उसे ही घूर घूर के देख रहे थे.

बार टेंडर से विमल दोस्ती गाँठ चुका था और उसने सुनीता को विमल के साथ देखा था, उसने चुपके से विमल के कमरे का नंबर मिलाया – विमल को थोड़ी ही देर हुई थी कामया को अच्छी तरहा संतुष्ट करने में और वो लगभग सोने की ओर था कि रूम का फोन बज गया – गालियाँ देते हुए विमल ने फोन उठाया और जो उसने सुना – उसके कान खड़े हो गये- नींद काफूर हो गई – मासी बार में बैठी वाइन पी रही थी और वहाँ के लोगो का निशाना बनी हुई थी. उसने बार टेंडर को थॅंक्स बोला और फटाफट अपने कपड़े पहने. कामया को तो कोई होश ही नही था.

विमल फटा फट बार में पहुँचता है और देखता है की कितने ही नशेड़ी सुनीता को ऐसे घूर रहे थे कि अभी रेप कर डालेंगे. अपने गुस्से को काबू में रखते हुए वो टेबल के पास पहुँचता है लेकिन जाने से पहले वो गर्देन हिला कर बारमेन की तरफ देखता है उसका शुक्रिया करने की खातिर, और सीधा टेबल पे जा कर सुनीता के सामने जा के बैठ जाता है.
अपने आप को रोक नही पाता और पूछ लेता है

‘आप यहाँ इस वक़्त – महॉल देख रही हो?’

सुनीता बड़ी मुस्किल से अपने आँसू रोकती है.

‘तू आ गया- पर क्यूँ?’
इस एक सवाल के पीछे कई सवाल छुपे हुए थे.
विमल की अंतरात्मा तक कांप जाती है.

ये चूत और लंड का रिश्ता नही था – ये खून का रिश्ता था जिसे सिर्फ़ तीन लोग जानते थे – सुनीता खुद और कामया और रमेश जिसने इसे अंजाम दिया था.

‘माँ’ बोलता बोलता विमल रुक जाता है और सुनीता को ऐसा लगता है जैसे विमल ने उसे 'माँ' कह के पुकारा हो.

‘बोल ना – फिर एक बार बोल’

अब विमल के कान , नाक, दिमाग़ सब खड़े हो जाते हैं.

वो मासी बोलता बोलता माँ तक रुक गया था -क्यूंकी सुनीता की ये हालत देख कर बहुत भावुक हो गया था.

और सुनीता को ऐसा लगा कि उसने उसे “माँ” कह के पुकारा हो.

विमल बात को पलट ता है – ‘ प्लीज़ चलो यहाँ से’

‘तूने फिर नही बोला………….’

सुनीता की आँखों से आँसू बहने लगते हैं – और वो इस कगार पे पहुच चुकी थी कि उसकी रुलाई रोके ना रुकती, विमल ये भाँप गया और उठ के सुनीता को कंधा देते हुए उठाया और सिर्फ़ इतना बोला ‘ कमरे में बात करेंगे’

जैसे ही विमल ने उसे छूआ सुनीता को चैन मिल गया – उसके बहने वाले आँसू रुक गये- उसकी ज़ुबान का लड़खड़ाना रुक गया – मानो जैसे कोई शक्ति उसके अंदर प्रवाहित कर गई हो वरना बियर और उसके उपर वाइन की जो घमासान कॉकटेल युद्ध होती है पेट के अंदर जो सीधे दिमाग़ तक पहुँचती है उसको बड़े बड़े पियाक्कड़ नही झेल पाते.

विमल सुनीता को अपने कमरे में ले गया, जहाँ कामया अपनी चुदाई की सुखद अनुभूति में नग्न बिस्तर पे सो रही थी. आज उसे इतना आनंद मिला था कि अगर नगाड़े भी बजते तब भी उसकी आँख जल्दी नही खुलती.

कमरे में पहुँच कर विमल दरवाजा अंदर से बंद करता है और सुनीता को ले कर सोफे पे बैठ जाता है. वाइन की आधी बॉटल वो साथ ले आया था.
विमल : क्या हुआ है अब बताओ?

सुनीता : तुझे नही मालूम?

विमल : कुछ कुछ लेकिन आपके मुँह से सुनना चाहता हूँ.

सुनीता : मैं तेरे बिना अब जी नही पाउन्गि.

विमल : आपके पास ही तो हूँ – आपका ही हूँ – फिर ये ख़याल क्यूँ – मैं कौन सा आपको छोड़ के कहीं जा रहा हूँ. एक आवाज़ देना और मैं आपकी बाँहों में समा जाउन्गा.

सुनीता : तू समझता क्यूँ नही – मेरा दिल – मेरी आत्मा – मेरा जिस्म- सब तेरा हो चुका है – अब मैं वापस नही जा सकती – मैं रमण से कोई रिश्ता नही रखना चाहती – मैं बस सिर्फ़ तेरी बन के रहना चाहती हूँ.

विमल हैरानी से सुनीता को देखने लगा – उसे लगा ये वक़्ती जनुन है – जो शायद ज़्यादा पीने की वजह से हो रहा है – वो ये नही समझ पाया – कि सुनीता वाकई में अपने दिल की बात बोल रही है

सुनीता : विमू – लव मी 

और विमल सुनीता को अपनी बाँहों में ले कर उसके होंठों पे अपने होंठ रख देता है. विमल के लिए ये सिर्फ़ जिस्म की प्यास बुझाने का एक और रास्ता था पर सुनीता ने जिस्म की प्यास नही अपनी तपती हुई बरसों से तड़पति हुई ममता की प्यास बुझाई थी – वो प्यास भुजाते बुझते ऐसे मुकाम पे पहुँच गई थी कि अब वो सिर्फ़ अपने विमू की हो कर रहना चाहती थी – उसे हर वक़्त अपने सीने से चिपका के रखना चाहती थी – उसके लंड को अपनी चूत में रखना चाहती थी- वो फिर से अपने मम्मो में दूध भर के विमू को पिलाना चाहती थी – वो फिर से एक बार और एक बच्चे को जनम देना चाहती थी – वो बच्चा उसके विमू का होगा – उसके विमू का – और ये बात वो विमल से करना चाहती थी – पर अभी उसमे इतनी हिम्मत नही आई थी कि खुल के अपने दिल के बात विमल से कर सके.
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08-11-2018, 02:28 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
जब दोनो के होंठ आपस में मिले तो दोनो के जिस्मो में एक अंजानी अनुभूति दौड़ गई – ये वो अनुभूति थी जो सुनीता तो समझ रही थी पर विमल नही समझ पा रहा था- क्यूँ वो सुनीता की तरफ खिचता चला जाता है – जब की उसके पास दो चूत और थी – जिस्म की प्यास तो उनसे भी भुजा सकता था – आख़िर ऐसा क्या था जो हर वक़्त वो सुनीता की तरफ खिचा चला जाता था – उसे अपनी बाँहों में भरना चाहता था – उसके होंठों का रस पीना चाहता था – उसके जिस्म में समाना चाहता था. – शायद जब उसे ये पता चले कि सुनीता ही उसकी असली माँ है तब कहीं जा कर उसे इस अनुभूति को समझने में आसानी हो.

सुनीता पिघलती चली गई और और दोनो बड़ी शिदत से एक दूसरे के होंठों का रास्पान करने लगे.

दोनो के कपड़े कब उतरे, कुछ पता ही ना चला और विमल सुनीता को लेकर बाल्कनी में चला गया. खुले आसमान के नीचे सामने चमकती हुई नैनी झील.
यूँ खुले में उसके साथ नंगी होने पे सुनीता का चेहरा शर्म से लाल पड़ गया और उसने अपने चेरा विमल की छाती में छुपा लिया.

विमल ने उसकी थॉडी से उसके चेहरे को उपर उठाया – सुनीता ने अपनी आँखें बंद कर ली उसके होंठ कमकपा रहे थे और विमल उसके होंठों पे झुकता चला गया. सुनीता ने अपनी बाँहों का हार उसके गले में डाल दिया और एक जौंक की तरहा विमल के साथ चिपकती चली गई.

दोनो एक दूसरे के होंठ चूस्ते रहे और तब तक लगे रहे जब तक उनकी साँस नही फूलने लगी और मजबूरन दोनो को अलग होना पड़ा.
‘ओह विमू मेरी जान ‘ कहती हुई सुनीता विमल से चिपक गई. विमल के हाथ उसके उरोजो का मर्दन करने लगे 
‘माँ आज मुझे अपना कुँवारा पन दे दो’
‘ये क्या कह रहा – मैं कुँवारी कहाँ से रही बच्चो की माँ हूँ – बहुत बार तेरे मूसल से चुद चुकी हूँ- तू भी मुझे चोद चुका है’
‘नही तुम अब भी कुँवारी हो – मुझे अपनी गान्ड का कुँवारापन दे दो’
‘नही नही- बहुत दर्द होगा – मैने आज तक गान्ड नही मरवाई’
‘तभी तो कह रहा हूँ आज मुझे अपनी गान्ड दे दो – मैं तुम्हारी गान्ड मारना चाहता हूँ’
‘नही रे – जितना मर्ज़ी चूत मार ले पर गान्ड नही’
‘बस इतना ही प्यार करती हो मुझ से – अभी तो कह रही सिर्फ़ मेरी बन के रहना चाहती हो’
‘ओह तू बातों में फसा रहा है – मुझे बहुत दर्द होगा प्लीज़ ज़िद मत कर’
‘नही मैं दर्द नही होने दूँगा – मुझ पे भरोसा रखो- बढ़े प्यार से लूँगा तुम्हारी’
‘मान जा ना – प्लीज़ क्यूँ ज़िद कर रहा है’
‘नही मुझे आज तुम्हारी गान्ड मारनी है – बहुत दिनो से तड़प रहा हूँ’
‘अगर दर्द हुआ तो बाहर निकाल लेना’
‘वादा’
और विमल ने सुनीता को वहीं रेलिंग पे झुका दिया और नीचे बैठ कर उसकी गान्ड को चाटने लग गया.
जैसे ही विमल की ज़ुबान ने उसकी गान्ड को छुआ – सुनीता के जिस्म में थरथराहट मच गई
अहह सुनीता सिसक पड़ी.

विमल सुनीता की गान्ड को चाट ता रहा और साथ ही अपनी एक उंगली सुनीता की चूत में डाल दी.

ओह 

सुनीता ज़ोर से सिसक पड़ी, कुछ देर तक विमल सुनीता की चूत में उंगली करता रहा फिर झट से उंगली बाहर निकली और सुनीता की गान्ड में घुसा दी.

उूुुुुुुुुउउइईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई दर्द के मारे सुनीता चीख पड़ी. 

विमल थोड़ी देर ऐसे ही रुका रहा फिर उसने अपनी उंगल सुनीता की गान्ड में अंदर बाहर करनी शुरू कर दी और सुनीता की सिसकियाँ निकालती रही फिर विमल ने एक साथ दो उंगलियाँ उसकी गान्ड में घुसा डाली

आआआआअहह सुनीता फिर चीख पड़ी और विमल दो उंगलियों से उसकी गान्ड को चोदने लगा. धीरे धीरे सुनीता को मज़ा आने लगा और विमल समझ गया कि अब वक़्त आ गया है गान्ड में लंड घुसाने का.
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08-11-2018, 02:28 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
विमल ने सुनीता को थोड़ा और झुकाया, उसकी टाँगें और फैला दी और एक ही झटके में अपना लंड उसकी चूत में घुसा डाला.
म्म्म्मीममममाआआआआआआआररर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर गगगगगगगगगगाआआआआऐययईईईईईईईईईईईईई
और विमल दनादन सुनीता को चोदने लगा. उसके हर धक्के से साथ सुनीता के मम्मे उछल रहे थे, सुनीता ने भी अपनी गान्ड पीछे करनी शुरू करदी और विमल के लंड को अपनी चूत में लेने लगी- जल्दी ही सुनीता झाड़ गई और विमल का लंड उसके रस से अच्छी तरहा चिकना हो गया. फिर विमल ने अपना लंड सुनीता की चूत से बाहर निकाल लिया और अपने लंड को उसके गान्ड के छेद पे रगड़ने लगा.

अहह सुनीता फिर सिसक पड़ी और समझ गई कि अब आगे क्या होगा.

‘आराम से डालना’

‘मेरी जान क्यूँ डर रही हो – बस थोड़ा सा दर्द होगा उसी तरहा जैसे चूत में पहली बार लेते हुए हुआ था – फिर मज़ा ही मज़ा आएगा’ कहते हुए विमल ने एक ही झटके मे अपना आधा लंड सुनीता की गान्ड में घुसा डाला

आआआआआआआआआआऐययईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई

सुनीता इतनी ज़ोर से चीखी कि कमरे में सो रही कामया की नींद खुल गई.
विमल थोड़ी देर के लिए रुक गया और अपने दोनो हाथ आगे बढ़ा कर सुनीता के मम्मे मसल्ने लगा

‘निकाल ले बहुत दर्द हो रहा है’

‘बस मेरी जान जितना दर्द होना था हो गया अब तो मज़ा आएगा थोड़ी देर में’

सुनीता की गान्ड बहुत टाइट थी और विमल का लंड उसकी गान्ड में फस सा गया था. 

सुनीता को थोड़ा आराम मिला तो विमल ने अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया

आह आह उफ़ उफ़ उफ़ उम उम ओह आआआआआअहह

सुनीता की सिसकियाँ निकल रही थी जो सॉफ बता रही थी कि ये दर्द भरी सिसकियाँ हैं.

5मिनट बाद सुनीता को मज़ा आना शुरू हुआ तो उसने अपनी गान्ड विमल के लंड पे मारनी शुरू कर दी. दोनो इतना खो चुके थे कि पीछे खड़ी कामया जो उनको देख रही थी उन्हें पता ही नही चला.

विमल ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और सुनीता भी उसका साथ देने लग गई. फिर अचानक विमल ने ज़ोर का झटका मारा और पूरा लंड अंदर घुसा डाला.

म्म्म्म मममममममममममममाआआआआआआआआआआआआआआआआआआ
सुनीता ज़ोर से चीखी.

कामया भी उत्तेजित हो गई थी और अब वो दोनो से अलग ना रह सकी, वो भी साथ में जुड़ गई और नीचे बैठ कर सुनीता की चूत चाटने लग गई. कामया ने अपनी ज़ुबान सुनीता की चूत में डाल थी. ये दोहरी मार सुनीता नही झेल पाई और चीखती हुई कामया के मुँह में झड़ने लगी. कामया उसका सारा रस पी गई फिर भी उसने सुनीता की चूत को चूसना नही छोड़ा आंड विमल ने भी तेज़ी से उसकी गान्ड मारनी शुरू करदी. 

विमल के धक्को की वजह से सुनीता आगे होती और उसकी चुत कामया के मुँह से टकराती फिर सुनीता अपनी गान्ड पीछे कर फिर से विमल का लंड अंदर लेती और इस तरहा 15 मिनट तक विमल उसकी गान्ड मारता रहा . इस दोरान सुनीता 4 बार झाड़ गई और विमल ने भी अपना सारा रस सुनीता की गान्ड में भर दिया. अब सुनीता में खड़े होने की ताक़त नही बची थी. विमल ने अपना लंड उसकी गान्ड से बाहर निकाला और उसे सहारा दे कर अंदर बिस्तर पे लिटा दिया.

पर अब तक कामया बहुत गरम हो चुकी थी. उसने विमल को सुनीता की साथ ही बिस्तर पे धकेल दिया और उसके उपर चढ़ उसके होंठ चूसने लग गई.
............................................................
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08-11-2018, 02:28 PM,
RE: Kahani भड़की मेरे जिस्म की प्यास
ऋतु नंगी बैठी अपने कमरे में भूनबुना रही थी. कॉफी पीते पीते उसने कप
यूँ ही रख दिया और नंगी ही रमण के कमरे में जा कर वाइन की बॉटल उठा लिए और बॉटल से ही पीने बैठ गयी.

उधर रवि भी सोच रहा था अपने कमरे में कि उसने ऋतु को नाराज़ क्यूँ किया क्यूँ उसके साथ बेरूख़ी दिखाई, प्यार से भी तो उसे समझा सकता था – क्या मैने रखती है वो उसके लिए.

कुछ देर बाद रवि ऋतु के कमरे में आता है और ऋतु को वाइन पीते हुए देख के हिल जाता है.

‘ऋतु!’

ऋतु कोई जवाब नही देती.

‘ऋतु मुझे कुछ कहना है’

ऋतु गुस्से के मारे मुँह मोड़ लेती है और गतगत वाइन पीने लगती है. आधी बॉटल वो चढ़ा चुकी थी और उसका सर घूमने लग गया था.

‘ऋतु प्लीज़ एक बार मेरी बात सुन ले – फिर कभी कुछ नही कहूँगा’

रवि की आवाज़ में एक तड़प थी, एक इल्तिजा थी, जो ऋतु को अंदर तक हिला के रख देती है.

ऋतु रवि की तरफ देखती है – उसका चेहरा आँसुओ से भीगा हुआ था.

रवि सब कुछ बर्दाश्त कर सकता था पर ऋतु की आँखों में आँसू नही.

वो तड़प के ऋतु के पास जाता है उसके हाथ से वाइन की बॉटल छीन कर साइड में रख देता है और उसे अपने सीने से लगा लेता है.

‘मुझे माफ़ कर दे गुड़िया – मुझ से बर्दाश्त नही होता – तू किसी और के पास जाए – चाहे वो पापा ही क्यूँ ना हों – मैं तुझे किसी के साथ नही बाँट सकता और ना ही मैं तुझे छोड़ के किसी और को देख सकता हूँ - - मैने कभी कोई गर्लफ्रेंड नही बनाई क्यूंकी तेरे अलावा कोई दिखता ही नही था – मेरी आँखों मे – मेरे दिल में – सिर्फ़ तू ही तू है – मेरी जिंदगी में और कोई नही आ सकता’

ऋतु तड़प जाती है रवि की बात सुन कर- सारा नशा काफूर हो जाता है.

‘रवि?’

‘याद है जब हम पहली बार करीब आए थे मैने तुझ से क्या वादा किया था – वो वादा हमेशा कायम रहेगा – तूने कहा था – मैं माँ के साथ---- नही ये कभी नही हो सकता – मैं माँ की पूजा करता हूँ – वो मेरी देवी है और देवी के बारे में मेरे ऐसे ख़याल सोचने से पहले मैं मर जाउन्गा’

ऋतु ज़ोर से रवि के साथ चिपक जाती है.

‘मुझे माफ़ कर दे रवि मैं सोचती थी ये सिर्फ़ जिस्म की प्यास मिटाने का खेल है जब तक शादी नही होती’

सही कहा है दोस्तो खेल जिस्म की प्यास से शुरू होता है रिश्तों के बीच- लेकिन कब – भावनाएँ बीच में आ जाती हैं – ये कोई जान नही पाता – जो हाल सुनीता का विमल के लिए हो रहा था वही हाल रवि का ऋतु के लिए हो गया – देखते हैं ये कहानी हमे क्या क्या रंग दिखाएगी

अब ऋतु के लिए अपने अंदर दबे हुए तूफान और राज़ को और छुपाना मुश्किल हो गया था. वो रवि के सामने सब कुछ उगल देती है – 
1. उसकी और राम्या की बातें – कि जिस्म की प्यास घर में ही मिटाओ
2. रमण ने सुनीता को कितना प्रताड़ित किया था जब उसने गान्ड नही दी थी
3. किस तरहा रमण से चुदने पे उसने उसके पोरुश को धराशाई किया था
4. और आज उसपे रहम खा कर चुद गई – क्यूंकी रमण एक सही आदमी था – वो बाहर मुँह नही मारता था – उसके अंदर भी चूत के लिए एक तड़प थी – क्यूंकी सुनीता यहाँ नही थी.

पर वो एक बात छुपा जाती है – दो लंड के साथ चुदने की चाहत.

ऋतु की बातें सुनते सुनते रवि का खून खोलने लग गया उसे अपने बाप से नफ़रत होने लग गयी. उसकी देवी को प्रताड़ित करना – चाहे वो कोई भी हो उसके लिए असेहनीय था.

रवि : मुझ से वादा कर अब तू ……

आगे रवि बोल ही नही पाया क्यूंकी ऋतु के होंठ उसके होंठों से जुड़ चुके थे. 
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