kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
06-27-2018, 12:08 PM,
#61
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
विजय ने जब ये देखा तो रश्मि को कहा- अब यहाँ कुछ नहीं बचा.. तुम जय को लेकर घर जाओ.. मैं रंगीला के साथ बाद में आ जाऊँगा।
रश्मि को भी यही सही लगा.. वहाँ का माहौल काफ़ी गंदा हो गया था.. तो उसने जय को घर जाने के लिए मना लिया और दोनों वहाँ से निकल आए।
उनके जाते ही रंगीला और विजय अन्दर चले गए।
एक मस्त लड़की विजय के पास आई और उसके कान में कुछ कहा तो विजय उसके साथ एक कमरे में चला गया।
साजन ने जब यह देखा कि रंगीला अकेला है तो वो उसके पास आया।
साजन- वाह बॉस.. आज तो मज़ा आ गया.. साली क्या मस्त माल है.. कसम से उसको तो बस एक घंटे तक सिर्फ़ चूसता ही रहूँगा.. उसके बाद साली को घोड़ी बना कर ऐसा चोदूँगा कि वो मेरे को क्या याद करेगी।
रंगीला- साला तू भी बड़ा हरामी है.. तुझे बस उसको छू कर मज़े लेने को कहा था तूने उसकी चूत में उंगली कर दी और उसको पकड़ भी लिया।
साजन- अरे बॉस उस टाइम मेरे को कंट्रोल ही नहीं हुआ.. साली ने क्या सेक्सी ड्रेस पहना था.. एक बार तो मन किया कि यहीं पटक कर साली को चोद दूँ।
रंगीला- अच्छा ठीक है.. ठीक है.. यह बता वो दोनों आइटम उसकी जेब में डाले या नहीं तूने.. और हाँ.. कोमल को कॉल करके कल के लिया बता देना और अभी मुझे एक काम और निपटाना है.. ठीक है मैं चलता हूँ।
रंगीला वहाँ से निकल गया और साजन फिर से लड़कियों के आस-पास मंडराने लगा.. और नाचने लगा।
उधर रश्मि और जय गाड़ी में जा रहे थे.. दोनों पर नशा छाया हुआ था.. जय बातें कर रहा था.. मगर उसकी ज़ुबान लड़खड़ा रही थी। रश्मि का भी कुछ-कुछ यही हाल था।
रश्मि- भाई अपने ये क्या कर दिया.. मैं आपकी बहन हूँ.. उस साजन के इरादे मुझे अच्छे नहीं लग रहे।
जय- अरे तू डरती क्यों है.. कुछ नहीं होगा.. कल उस कुत्ते को दिखा दूँगा कि मैं क्या चीज़ हूँ।
रश्मि- भाई मुझे बहुत डर लग रहा है.. कल क्या होगा?
जय- अरे तू डरती क्यों है.. कुछ नहीं होगा।
जय आगे और कुछ कहता मगर रोड के बीच में पुलिस की गाड़ी देख कर उसने जल्दी से ब्रेक मारी।
रश्मि- आह्ह.. क्या करते हो भाई.. ऐसे गाड़ी क्यों रोक दी?
जय- अरे वो सामने देख ठुल्ले खड़े हैं लगता है चैकिंग है।
एक पुलिस वाला जो करीब 40 साल का मोटा सा था.. वो डंडा हाथ में लिए गाड़ी के पास आया।
हवलदार- आ जा भाई.. आजा नीचे आजा.. ला गाड़ी दे कागज और डीएल दिखा।
जय ने रश्मि को कहा कि वो अन्दर ही रहे और खुद नीचे उतर गया।
जय- क्या बात है हवलदार साहब.. ऐसे रास्ते में गाड़ी क्यों खड़ी कर रखी आपने?
हवलदार- अरे बावली पूंछ.. हम यहाँ साँप सीढी खेलने रुके हैं कि चैकिंग चाल री है चैकिंग.. चल गाड़ी के काग़ज फड़ और डीएल निकाल.. जल्दी से..
जय- पेपर तो समझ आया.. ये डीएल क्या बला है?
हवलदार- ओये तू दिल्ली का ना है.. कि जो डीएल ना समझता बावले ड्राइविंग लाइसेन्स को बोले हैं डीएल..
जय- ओह्ह.. अच्छा बस अभी दिखाता हूँ.. आप दो मिनट रूको।
जय ने गाड़ी में देखा तो पेपर नहीं थे.. फिर उसने अपना पर्स देखा.. वो भी उसकी जेब में नहीं था। शायद घर भूल आया होगा.. अब उसको अहसास हुआ कि आज तो फँस गया।
हवलदार- रे के हो गया.. जल्दी कर साब जी आगे नी.. तो तन्ने सीधे थाणे ले जांगे.. फेर ढूँढ़ते रहियो तू..
जय- वो क्या है ना.. मैं पेपर और लाइसेन्स घर भूल आया हूँ।
हवलदार- वाह रे छोरे.. एक तो तू दारू पिया हुआ है.. ऊपर से आधी रात को लड़की साथ में.. अब गाड़ी के काग़ज और लाइसेन्स भी नहीं.. चल्ल भाई.. अब तेरा फैसला तो साब जी ही करेंगे।
हवलदार ने जय का हाथ पकड़ा और उसको जीप की तरफ़ ले जाने लगा।
जय- हैलो क्या बदतमीज़ी है ये.. मैं कोई ऐरा-गैरा नहीं हूँ.. रणविजय खन्ना का नाम सुना है ना.. उनका बेटा जय खन्ना हूँ।
हवलदार- अरे छोरे तू मन्ने धौंस ना दिखा.. तेरा बाप कौण है.. मैं नी जानता.. अब सीधे से चलता है कि 2 डंडे लगाऊँ पिछवाड़े में?
इंस्पेक्टर- ओये रतन सिंग.. के होरा रै.. कौण है ये छोरा.. मन्ने आना पड़े कै थारे कणे..?
रतन सिंग- ऊउ साब जी या छोरा थोड़ा टेढ़ा लगे सै मन्ने..
रतन सिंग की बात सुनकर इंस्पेक्टर जीप से उतरा और उनकी तरफ़ आने लगा।
इंस्पेक्टर करीब 32 साल का हट्टा-कट्टा लंबे कद का इंसान था।
इंस्पेक्टर उनके पास आकर रुक गया और जय को ऊपर से नीचे तक घूर कर देखने लगा।
इंस्पेक्टर- म्हारो नाम पता है कै.. म्हारो नाम बदलसिंग सै.. कै होरा है रे छोरे.. कै चाहवे है तू?
ये हैं बदल सिंग.. इसका बाप राजस्थान का था.. और माँ हरियाणा की.. दोनों के प्यार का ये नतीजा निकला कि ये पैदा हुआ.. अब इसकी भाषा आधी हरयाणवी तो आधी मारवाड़ी है।
जय- वो वो.. सर मैं अपना लाइसेन्स घर भूल आया हूँ.. ये हवलदार समझने को तैयार ही नहीं हैं.. मैं कोई ऐसा वैसा लड़का नहीं हूँ।
रतन सिंग- ओ साब जी.. ना डीएल है.. ना कागज.. साथ में लौड़ा पिया हुआ भी है.. और भीतर एक छोरी भी डाल रखी है ससुरे ने..
जय- ज़ुबान संभाल के बात करिए आप.. वो मेरी बहन है।
बदल सिंग- ओये छोरे कै नाटक सै यो.. हाँ.. यो थारा..पता लगा सकै.. जो थाने जान देगो ना.. थारे कन गाड़ी के काग़ज हैं.. ना डीएल.. और बावले पीकर गाड़ी चला रा है.. यो और भी बड़ा गुनाह है.. थारे पर तो इब बेरा कोनी कौण-कौणसी धारा लगेगी क़नून की.. और तेरी भें लंगड़ी सै.. कै जो भीतर बैठी सै.. बाहर बुला भाई.. ज़रा मैं भी तो देक्खूं तरी भें न..
बदल सिंग की बात सुनकर जय को थोड़ा गुस्सा आया.. मगर वो जानता था यहाँ गुस्सा करना ठीक नहीं है.. यहाँ उसकी दाल गलने वाली नहीं।
जय- देखिए आप समझ नहीं रहे.. हम पार्टी में गए थे.. वहाँ थोड़ी दोस्तों ने जबरदस्ती पिला दी।
बदल सिंग- अब तू बुलावे है या मैं काड़ दूँ बाहर?
उनकी बात सुनकर रश्मि थोड़ी घबरा गई और बाहर आकर खड़ी हो गई।
दोनों के दोनों बस रश्मि को देखते ही रह गए.. दोनों की आँखों में उस टाइम हवस साफ नज़र आ रही थी। अगर जय ना बोलता.. तो शायद वो दोनों का ध्यान ना हट पाता।
जय- सर प्लीज़ हमें जाने दीजिए देर हो रही है।
बदल सिंग- ले भाई रतन सिंग या छोरा तो क़ानून ने अपने बाप की जागीर समझे सै.. ना काग़ज.. ना डीएल.. दारू ये पी रखा.. और साथ में लौंडिया भी और हमें उल्लू बना के जाना चावे है।
रतन सिंग- साब जी मन्ने तो झोल लगे सै.. या गाड़ी भी इसकी ना लागे.. और या छोरी तो कड़े ही ईकी भैन ना सै..
रश्मि- एक्सयूज मी.. ये मेरे भाई हैं ओके.. और हम आपको किधर से चोर लगते हैं. हम अच्छी फैमिली को बिलांग करते हैं. मेरे पापा इस शहर के नामी गिरामी इंसान हैं।
बदल सिंग- आ छोरी.. ज़्यादा चपर चपर ना कर.. थारे पास कोई सबूत है कि लगा फोन तेरे बाप ने.. इब दूध का दूध और पानी का पानी हो जागा..
जय ने जेब में देखा फोन नहीं मिला फिर उसने गाड़ी भी चैक की.. मगर फ़ोन वहाँ भी नहीं था। वो सोचने लगा आज ये क्या हो गया.. पर्स नहीं है.. फ़ोन नहीं है अब कैसे इनसे पीछा छुड़ाऊँ.. अगर पैसे पास में होते.. तो भी इनको देकर निकल जाता।
बदल सिंग- ओ छोरे कै हो गया सै.. रे भाई फ़ोन होवेगा तो मिलेगा न.. चल भाई अब या रमायन बन्द कर.. और जीप में बैठ जा.. अब थाने चलकर ही थारी पूछताछ करनी पड़ेगी।
जय- सर प्लीज़ आप बात को समझो मैं सच बोल रहा हूँ.. हम भाई-बहन ही हैं. मैं फोन और पर्स भूल आया हूँ।
बदल सिंग- रे चुप कर.. भैन का टका.. म्हारे को लल्लू समझे है कै.. कद से भैन का राग अलाप रिया सै.. मैं अच्छी तरह जानू हूँ.. तू इसके साथ रासलीला करके आया है.. या करने जा रा है.. ये कोई भैन बैन ना है थारी..
बदल सिंग का गुस्सा देख कर जय की हवा निकल गई थी।
रश्मि- सर सच्ची में हम..
बदल सिंग- चोप्प.. तू फेर बोली.. छोरी तेरे मुँह से भी शराब की बू आ री सै.. अब तू बता.. यो कैसा भाई है जो तू आधी नंगी और शराब पी रखी है.. बो भी अपने भाई के साथ.. अब बोल इको कै मतलब सै?
उसकी बात का रश्मि के पास कोई जबाव नहीं था.. वो बस वहीं पर नजरें झुकाए खड़ी रही।
रतन सिंग- साब जी अब कै करना है .. दोनों का?
बदल सिंग- रे करना कै है .. धर ले ससुरा नै थाने जाकर पूछंगे.. ईनका रिस्ता..
जय- सर प्लीज़ हमें माफ़ कर दो दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करेंगे।
बदल सिंग- मन्ने लगे है छोरा कान कोई 2 नम्बर का माल है .. तभी यो बड़ी जल्दी में है .. रतन सिंग तलाशी ले भाई..
रतन सिंग ने जय की तलाशी शुरू कर दी.. पैन्ट में तो कुछ नहीं मिला.. मगर उसकी जैकेट की एक जेब में हनुमान चालीसा और दूसरी जेब में 2 कन्डोम और एक ड्रग्स की पुड़िया निकली.. जिसे देख कर जय की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।
रतन सिंग- लो साब जी.. यो देखो छोरा तो बड़ा तेज निकला.. ड्रग्स की पुड़िया निकली है .. और ससुरा कन्डोम के साथ हनुमान चालीसा भी रखे है..
बदल सिंग ने ड्रग्स और कन्डोम हाथ में लेकर जय की ओर गुस्से से देख कर पूछा- ये क्या है?
जय कुछ कहता उसके पहले रतन बोला।
रतन सिंग- साब जी कन्डोम.. हिन्दी में बोले तो निरोध..
बदल सिंग- रे तू घना होसियार ना बण.. मैं जानू हूँ कन्डोम का मतलब निरोध होवे है।
ये चीजें देख कर तो रश्मि के पैर काँपने लगे कि अब क्या होगा।
जय- सर प्लीज़ यकीन करो ये मेरे नहीं है.. पता नहीं मेरी जेब में कहाँ से आए।
बदल सिंग- ले भाई जो चीज जेब में रखनी चाहिए.. बिका तो नाम निसाण ना सै.. और ये अफ़ीम और कन्डोम रखे है .. छोरा..?
जय- मैं सच कह रहा हूँ.. मुझे नहीं पता.. ये मेरे पास कहाँ से आए.. आप मेरा यकीन करो।
बदल सिंग- चुप कर ते ते कर्ण लग रा है मन्ने तू ये बता.. छोरा हनुमान चालीसा और कन्डोम का कै चक्कर सै?
रतन सिंग- साब जी आप ना जानो कै आजकल का छोरा कै बोले हैं कि भूत और चूत का कै भरोसा.. कद भी मिल जावें.. जड़ इंतजाम तो साथ में रखना पड़े सै कै ना..
बदल सिंग- चुप कर बावले.. कुछ भी बक देवे.. देखे कोनी छोरी खड़ी है पास में..
रतन सिंग- साब जी छोरी की आँखों में मन्ने चोर नज़र आवे है.. लगे है बाकी का माल छोरी के पास सै..
बदल सिंग- बदल सिंग नाम सै म्हारा.. तन्ने पता ना है.. म्हारी नजरां सै कोई ना छुप सकै.. आ छोरी चल सीधी खड़ी रह… तेरी भी तलाशी होगी.. अब तो देखूँ तो कितना माल छुपा रखा सै तन्ने।
रश्मि- मेरे पास कुछ नहीं है.. प्लीज़ आप मेरी बात का यकीन करो।
बदल सिंग- चुप कर छोरी जादा घनी स्यानी ना बण.. मैं जानू हूँ.. कीपे यकीन करना है .. कीपे नहीं..
जय- सर ये ग़लत है.. एक लड़की की तलाशी ये हवलदार कैसे ले सकता है कोई लेडी कांस्टेबल होती तो कोई बात नहीं होती।
बदल सिंग- रै बावले.. इब थारे खातिर लेडी कांस्टेबल साथ में लेके घूमू कै.. चल थाणे चल्ल.. वहाँ दे देना तलासी..
रश्मि- भाई प्लीज़ कुछ करो.. वहाँ गए तो बात और बढ़ जाएगी।
बदल सिंग- देख भाई थाणे चलेगा.. तो रात भर वहाँ की हवा भी खानी पड़ेगी तू यही तलाशि दे दे और कुछ ना निकला तो चले जाणा.. और इस हवलदार से तन्ने एतराज है.. तो मैं तलाशी ले लूँगा।
रश्मि- ओके सर आप मेरी तलाशी ले लीजिये.. मेरे पास कुछ नहीं होगा तो आप हमें जाने दोगे।
बदल सिंग- देख छोरी एक पुड़िया तो ये छोरे के पास मील गी.. अगर तेरे पास भी निकली तो बहुत लंबी लगेगी थाने और हाँ अगर ना निकली तो मैं सोचूँगा कि थारा के करणा है।
रश्मि समझ गई कि अब तलाशी के बाद भी ये नाटक करेगा.. मगर जैसे-तैसे वो उसको मना लेगी.. यही सोच कर वो तलाशी के लिए रेडी हो गई।
बदल सिंग तो खुश हो गया। उसको ऐसी हुस्न परी के जिस्म को छूने का जो मौका मिल रहा था।
बदल सिंग रश्मि के करीब आया और गले से हाथ को ले जाता हुआ उसके मम्मों पर जाकर रुक गया और धीरे-धीरे उनको दबाने लगा।
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06-27-2018, 12:08 PM,
#62
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
जय- हैलो.. वॉट आर यू डूयिंग सर.. ये कैसी तलाशी है.. आपको शर्म नहीं आती.. एक लड़की के साथ ऐसा करते हुए.. हाँ?
बदल सिंग- ओये भैन के टके.. ज़्यादा होशियारी ना कर.. नहीं इस छैलछबीली को यही नंगी करके तलाशी लूँगा मैं..
रश्मि- भाई प्लीज़ आप चुप रहो..
जय- मगर रश्मि ये तुमको कैसे गंदी तरह से टच कर रहा है।
रश्मि- भाई प्लीज़ कीप क्वाइट.. आपको नहीं पता ये बात पापा तक गई तो क्या हो जाएगा.. इनको अपना काम करने दो एंड प्लीज़ आप बीच में ना बोलो।
बदल सिंग- ये छोरी तो घनी स्यानी सै.. रतन सिंग तू ऐसा करियो.. इस छोरे का ध्यान रखियो.. मैं वहाँ जीप के पास इस छोरी की अच्छे से लेता हूँ.. यहाँ तो ये छोरा ठीक से लेने नहीं देगा इसकी..
रतन सिंग- के साब जी.. के लेन नहीं देगा ये छोरा आपको?
बदल सिंग- रे बावले तलाशी लूँगा.. तू और के लेवे था.. अब धर ले इस छोरे नै.. मैं आऊँ तलाशी लेकर..
जय का गुस्सा सातवें आसामान पर चला गया था.. अगर रश्मि साथ ना होती तो वो उस पुलिस वाले को पीट ही देता.. मगर उसको पता था अगर उसने ये किया तो ये बात उसके पापा तक चली जाएगी और रश्मि की ऐसी हालत का उनको पता लग जाएगा। इसलिए वो खून का घूँट पीकर वहीं खड़ा रहा और रश्मि को जाने को कह दिया।
बदल सिंग रश्मि को जीप के पास ले गया और दोबारा से उसके मम्मों को दबा कर देखने लगा।
रश्मि- उफ़.. आराम से चैक करो ना.. आप मुझे दुखता है न..
बदल सिंग- देखन तो दे.. तूने अन्दर के छुपाया हुआ है.. चल ऐसा कर तू जीप के भीतर चल.. वहाँ ये निकाल के मुझे दिखा अन्दर के है?
रश्मि- सर प्लीज़.. ये बहुत ज़्यादती है आप ऐसा नहीं कर सकते।
बदल सिंग- अरे बावली करने को तो मैं घनो कुछ कर सकूँ हूँ.. देख म्हारो उठ चुक्यो है.. सबर अब तू चुपचाप अपनी दे दे म्हारे को.. तलाशी.. नहीं तो दोनों को थाणे ले जाकर नंगे कर दूँगा।
रश्मि- सर प्लीज़ हम अच्छे घर से है.. आप ऐसा मत करो।
बदल सिंग- रे अगर तू शरीफ होती.. तो ऐसे अधनंगी अपने भाई के साथ ना घूमती और वो ससुरा जेब में कन्डोम लेकर ना घूमता.. मन्ने तो लागे है वो ससुरा बहनचोद है.. जो अपनी बहन को चोदे है..
रश्मि- ये क्या बकवास कर रहे हो?
बदल सिंग- ओ छोरी घणी ऊँची आवाज़ में ना बोल.. नहीं साली को अभी अस्पताल लेकर जाऊँगा और चूत का टेस्ट करवा दूँगा.. तब पता लग जा गा कि तू चुदी के.. ना चुदी.. उससे..
रश्मि को अब पक्का यकीन हो गया कि आज ये बदल सिंग उसको चोदे बिना नहीं मानेगा। वो उसके आगे बहुत गिड़गिड़ाई.. मगर वो एक ना माना और मजबूरन रश्मि को जीप के अन्दर उसके साथ तलाशी देने जाना पड़ा।
अन्दर जाकर बदल सिंग ने रश्मि को अपनी गोद में बैठा लिया और उसके गाउन के अन्दर हाथ डालकर उसके मम्मों को दबाने लगा।
उसका खड़ा लौड़ा रश्मि अपनी गाण्ड पर साफ महसूस कर रही थी।
बदल सिंग- छोरी तेरा जिस्म बाहर से तो चमकता सोना है.. ज़रा ये परदा हटा कर भीतर का भी नजारा दिखा दे मन्ने..।
रश्मि कुछ कहती उसके पहले ही उसको रंगीला और साजन की आवाज़ सुनाई दी.. जो हवलदार से ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रहे थे और जय भी उनके साथ बोल रहा था।
रश्मि ने जब उनकी आवाज़ सुनी वो झट से उसकी गोद से उठी और उनकी तरफ़ भाग गई। पीछे से बदल सिंग भी उनकी तरफ़ हो लिया।
रंगीला- रश्मि तुम ठीक तो हो ना उसने कोई बदतमीज़ी तो नहीं की ना?
साजन- मैंने रश्मि को बस टच किया तो तेरे को बड़ा गुस्सा आया था.. अब जा जय उसको मार दे.. उसने तेरी बहन के साथ पता नहीं क्या-क्या किया होगा।
रंगीला- साजन तू चुप हो ज़ा.. ये वक़्त लड़ने का नहीं है।
बदल सिंग- ओये के तमाशा सै यो.. रतन सिंग धर ले सब ससुरा ने..
रंगीला- लुक इंस्पेक्टर हम कोई गली के गुंडे नहीं हैं. जो आप ऐसे ही हमें ले जाओगे.. आपकी सारी हरकत मुझे पता है.. अब देखो मैं क्या करता हूँ.. अभी एसीपी साहब आते ही होंगे.. उनको बताता हूँ और तुम्हारा भांडा फोड़ता हूँ कि तुम तलाशी के नाम पर क्या गुल खिलाते हो।
बदल सिंग कुछ बोलता उसके पहले ही जेम्स बाइक पर वहाँ आ गया.. उसके तो ठाठ-बाठ ही अलग थे.. ब्लू जींस और वाइट टी-शर्ट में वो बहुत अच्छा दिख रहा था।
जेम्स- क्या बात है रंगीला.. क्या हो गया तुम यहाँ क्यों खड़े हो?
जेम्स को देख कर बदल सिंग की सिट्टी-पिटी गुम हो गई।
बदल सिंग- नहीं साब जी.. बस रूटीन चैकिंग चाल री सै..
रंगीला- अरे जेम्स आओ यार.. अच्छे मौके पर आए.. ये तुम्हारा इंस्पेक्टर कुछ ज़्यादा ही हवा में उड़ रहा है.. अब आप ही इसे समझाओ।
जेम्स- बदल सिंग अभी के अभी इन सब से माफी माँगो और यहाँ से दफा हो जाओ।
बदल सिंग ने बहस करना ठीक नहीं समझा और सब से माफी माँग कर वहाँ से चला गया।
रश्मि को उस ड्रेस में देख कर जेम्स का लौड़ा ‘धिन.. का.. चिका.. धिन.. का चीका..’ करने लगा.. मगर इस वक़्त वो कोई ऐसी हरकत नहीं करना चाहता था.. जिससे प्लान पर कोई असर पड़े।
अब आपको यह भी समझाना पड़ेगा क्या.. ये सब रंगीला का किया धरा है.. ये नकली पुलिस.. ये जेम्स.. सब एक नाटक का हिस्सा है।
ओके.. अब आगे देखो..
रंगीला ने जेम्स से सब का परिचय करवाया और जेम्स को रंगीला ने एसीपी बताया.. ताकि जय पर अपनी धौंस जमा सके और उसको नीचा दिखा सके।
जय- तुम लोग यहाँ कैसे आए?
साजन- मेरी वजह से आए.. समझे तू तो मेरे से लफड़ा करके निकल गया था ना.. ये तो अच्छा हुआ विक्की भी तुम लोगों के साथ ही वहाँ से निकला और उसने तुम्हें रास्ते में खड़ा देख लिया। बस उसने मुझे खबर की और मैंने रंगीला को बताया.. तो इसने अपने दोस्त एसीपी साहब को यहाँ बुला लिया.. नहीं आज तो तेरी बहन गेम के पहले ही.. हा हा हा तू समझ गया ना..
साजन ने जय को जलील करने के लिए ये सब कहा.. मगर जय इस वक़्त उसके मुँह लगना नहीं चाहता था।
जय- बस बस.. अपना मुँह बन्द रख.. कल फार्म पर देखूँगा.. तू हँसता है या रोता है..
जेम्स- अरे रंगीला तूने तो कहा था उस गेम में अबकी बार मुझे भी शामिल करोगे.. मगर तुम लोग तो अकेले ही जा रहे हो।
जेम्स की बात सुनकर सब ठंडे पड़ गए कि ये क्या हुआ.. इसको कैसे पता फार्म पर क्या होने वाला है।
रंगीला- अरे यार, सब इतना अचानक हुआ मैं बताना भूल गया। अब तो जय ही आपको बताएगा क्योंकि वो फार्म भी उसका है और गेम भी उसी का है।
जय- अरे मैं क्या बोलूँ यार.. त..त..तू ही बता दे.. तू भी तो सब जानता है।
रंगीला- अरे ये एसीपी बाद में है.. पहले मेरा यार है.. इसको सब पता है वहाँ क्या होगा.. अब तू कहे तो ये भी आ जाए यार!
जय- तेरा यार तो मेरा यार.. इसमें पूछना क्या.. आप भी कल शाम को आ जाना.. एड्रेस आपको सुबह रंगीला बता देगा ओके..
जेम्स- थैंक्स यार.. जो तुमने ‘हाँ’ कही.. ओके अब मैं चलता हूँ.. उस बदल सिंग की भी मुझे थाने जाकर क्लास लेनी है।
जेम्स के जाने के बाद जय ने गुस्से में साजन को देखा।
साजन- ये गर्मी संभाल के रख.. कल काम आएगी.. ओके अपुन अब चलता है।
जय को एक और ताना देकर साजन भी वहाँ से निकल गया।
जय- रश्मि तुम गाड़ी में बैठो.. मैं आता हूँ।
रश्मि के जाने के बाद जय ने रंगीला से कहा- ये अचानक एसीपी तेरा दोस्त कैसे बन गया और वहाँ इसको क्यों बुलाया.. इसका वहाँ क्या काम?
रंगीला- यार अब यह लंबी कहानी है.. फिर कभी बताऊँगा.. फिलहाल तू इतना समझ ले.. ये भी हमारी तरह चूत का भूत है.. अब साजन की बहन को हमारे साथ ये भी चोदेगा।
जय- चल अब आ रहा है तो आने दे.. उस रंडी को तो जितना चोदें.. उतना कम है.. तू इसको कल सब बता देना ओके.. मैं अब निकलता हूँ.. साला आज तो मूड पूरा खराब हो गया.. पता नहीं मेरी जेब में ये ड्रग्स और कन्डोम वगैरह किसने डाले होंगे।
रंगीला- ये सब बाद में सोचना.. रश्मि बहुत डिस्टर्ब लग रही है.. तू उसको लेकर घर जा..
जय- अरे विजय कहाँ है.. वो तेरे साथ आने वाला था ना?
रंगीला- उसको इस सबके बारे में कुछ पता नहीं है.. वो तो एक लड़की के साथ लगा हुआ था.. तो मैंने उसको डिस्टर्ब नहीं किया।
जय- अच्छा अब उसको इस बारे में बताना भी मत.. आज का दिन ही मनहूस है साला.. जलील होके रह गया मैं..
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06-27-2018, 12:09 PM,
#63
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रंगीला ने उसको समझाया- ऐसा होता है कभी-कभी.. अब तू जा रश्मि वेट कर रही है।
जय के जाने के बाद रंगीला वहीं खड़ा रहा, थोड़ी देर में साजन और जेम्स एक साथ वहीं पर आ गए।
रंगीला- आओ आओ.. मेरे दोस्तो.. आज तो उस साले को जलील करके मज़ा आ गया..
साजन- बॉस क्या बताऊँ.. आज तो साली कयामत लग रही थी.. उस साले पुलिस वाले ने जीप के अन्दर तो उसके बहुत मज़े लिए होंगे..
रंगीला- कुछ मज़े नहीं लिए.. बस उसके जिस्म को छूकर देखा है.. उसको इतने ही काम का कहा था मैंने.. साले कुत्ते ने इतने से काम के 20000 ले लिए।
साजन- मानना पड़ेगा बॉस आपको.. कहाँ कहाँ अपने सैटिंग बना रखी है और ये एसीपी कहाँ से ले आए आप?
रंगीला- ये कोई एसीपी नहीं.. मेरा दोस्त है.. अब ये भी हमारे साथ उस रंडी के मज़े लेगा।
जेम्स- यार रंगीला उसको रंडी मत बोलो.. उसको तो मैं चोदने के बाद रंडी बनाऊँगा.. हा हा हा हा..
जेम्स के साथ साथ दोनों भी हँसने लग गए।
साजन- बॉस अपने कैसे उसको कल के लिए मना लिया.. मज़ा आ गया.. अब बस ये बता दो कि मैं जीत कर पहले उसको चोदूँगा ना..
रंगीला- चुप कर साले.. मेहनत मैं करूँ.. और फल तू खाए.. पहले मैं जाऊँगा.. उसके बाद तुम और तेरे वो चमचे जाएँगे लास्ट में जेम्स करेगा उस कुतिया की चुदाई।
साजन- अरे हम सब चोद देंगे तो उसकी चूत का भोसड़ा बन जाएगा.. बेचारे जेम्स को क्या मज़ा आएगा?
रंगीला- साले.. अगर ये पहले गया ना.. तो जरूर हम में से किसी को मज़ा नहीं आएगा.. इसका लौड़ा नहीं बांस है.. इसलिए इसको लास्ट में ही चान्स देना ठीक रहेगा.. वैसे भी इसके जाने के बाद हमारा नंबर कहाँ आने वाला है।
जेम्स- सही कहा रंगीला.. तुम सब जल्दी निपट लेना.. उसके बाद असली चुदाई तो मैं करूँगा उस साली की.. कसम से लौड़ा अभी से उसके लिए खड़ा हो गया है.. ना जाने ये रात कब बीतेगी।
साजन- बॉस एक बात समझ नहीं आई.. गेम तो मेरे और जय के बीच में है.. तो आप कैसे पहले चोदोगे.. और जय तो आपका दोस्त है..
रंगीला- साले हर चीज़ का एक टाइम होता है.. कल क्या करना है.. अब सुन ले अच्छे से.. मैं कैसे पहले जाऊँगा ये प्लान को तुझे अंजाम देना है।
रंगीला उनको समझने लगा कि कैसे कल सब काम करना है और उसने जेम्स को भी कुछ बातें समझा दीं।
उधर जय गाड़ी में बैठा ही था कि रश्मि उस पर बरस पड़ी।
रश्मि- भाई ये क्या नाटक है.. हाँ आपकी वजह से आज मेरी कितनी बेइज़्ज़ती हुई.. आप ऐसे ही शहर में जय खन्ना का ढोल पीटते हो क्या.. एक मामूली पुलिस वाले को नहीं समझा सके और आपके ही दोस्त की एसीपी तक से पहचान है।
जय- सॉरी रश्मि.. ऐसी बात नहीं है मैं क्यों पुलिस से पहचान रखूँ.. पापा की तो बहुत पहचान है.. अब ऐसी हालत में हम दोनों को उसने पकड़ा था। तुम समझ सकती हो पापा तक यह बात चली जाती तो गड़बड़ होती.. नहीं तो मैं उस कुत्ते को दो घूंसे लगा देता।
रश्मि- हाँ भाई यही सोच कर तो मैं चुप थी.. वरना उस कमीने ने जब मेरे मैंगोज को टच किया.. उसी टाइम उसको धक्का मार देती।
जय- यार रश्मि गाड़ी में उसने कुछ गलत तो नहीं किया ना?
रश्मि- कुछ नहीं बस मुझे गोद में बैठा कर मेरे मम्मों को दबाया और गंदी बातें कीं।
जय- उसकी ये हिम्मत.. कल तू देखना थाने जाकर साले को जलील करूँगा।
रश्मि- अब बस रहने दो.. कोई जरूरत नहीं है.. और अपने कल फार्म पर जाने का प्रोग्राम किससे पूछ कर बनाया है?
जय- यार प्लीज़.. अब तुम कोई नाटक मत करना.. मैंने तुम्हें सब बताया हुआ है.. अब मेरी ज़ुबान तेरे हाथ में है। उस साजन ने तेरे साथ जो सुलूक किया उसका बदला लेना है।
रश्मि- अच्छा एक बात बताओ.. आप जीत जाओगे.. तो साजन की बहन को सब मिलकर चोदेंगे.. तो मैं वहाँ अकेले बैठ कर क्या करूँगी?
जय- अरे तुझे वापस घर भेज दूँगा.. वहाँ थोड़ी रहने दूँगा.. वहाँ तो उस कुत्ते की बहन की चीर-फाड़ मचेगी.. साला बहुत अकड़ता है।
रश्मि- कहीं आप हार गए तो मेरी खैर नहीं वहाँ पर.. आपका खास दोस्त रंगीला भी मेरी चुदाई करेगा क्या?
जय- मुझे नहीं लगता रंगीला ऐसा करेगा.. बस वो तीन कुत्ते ही करेंगे.. मगर तू ऐसा सोच क्यों रही है.. मैं हारूँगा ही नहीं यार..
रश्मि ने कुछ सोचा फिर चुप हो गई क्योंकि पार्टी में रंगीला भी उससे बहुत चिपक के मज़े ले रहा था। उसको पता था कि अगर उसको मौका मिला तो वो जरूर उसको चोदेगा।
ऐसे ही बातें करते हुए वो दोनों घर पहुँच गए और नशे और थकान के कारण दोनों सो गए। उधर विजय भी देर रात को घर आ गया था और आते ही सो गया था।
दोस्तो, अब जिस गेम के लिए यह कहानी शुरू हुई है.. उसका टाइम आ गया है। बस अब कल सूरज किसकी जिंदगी में क्या तूफान लाएगा.. वो तो अब कल ही पता लगेगा.. तो आओ हम सब कल क्या होता है वो देख लेते हैं।
रात की थकान ऐसी थी कि सभी देर तक सोते रहे.. दोपहर बीत जाने पर वो लोग उठे और फार्म पर जाने की तैयारी करने लग गए। 
उधर जेम्स ने भाभी और निधि को समझा दिया- आज उसको किसी काम से जाना होगा.. तो कल ही वापस आ पाऊँगा.. तुम दोनों अपना ख्याल रखना।
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06-27-2018, 12:09 PM,
#64
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
इधर.. 
विजय- भाई मैं वो कुर्ता ले आया हूँ रश्मि के लिए..
रश्मि- कैसा कुर्ता.. मैं कुछ समझी नहीं क्या करना है उसका?
जय- अरे मैंने तुम्हें बताया था ना.. रंगीला ने हमको आइडिया दिया.. अगर एक-दो राउंड में हार भी जाऊँ.. तो तुम्हारा जिस्म कोई देख ना पाए।
रश्मि- वो कैसे भाई.. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा..
जय- देख मान ले एक बार मैं हार गया.. तो तू अपनी जींस निकाल देना.. ये कुर्ता इतना लंबा है.. कि तेरे घुटने तक रहेगा.. तो जींस निकल जाने के बाद भी तू सेफ रहेगी।
रश्मि- हाँ समझ गई.. अब दूसरी बार मैं आप मुझे पैन्टी निकालने को कहोगे यही ना?

रश्मि ने यह बात जल्दी से बोली.. मगर जैसे ही उसका ध्यान विजय की तरफ़ गया उसको बहुत शर्म आई और उसने अपने चेहरे पर हाथ लगा लिया।
जय- हाँ सही कहा तूने और ये शर्माना छोड़.. विजय सब जानता है कि वहाँ क्या होने वाला है।
विजय- भाई, एक बात कहूँ.. एक बार और सोच लो.. वहाँ जाकर कहीं आपको पछताना ना पड़े.. रश्मि कोई ऐरी-गैरी लड़की नहीं है.. बहन है आपकी..
जय- अरे कुछ नहीं होगा और ऐसा क्यों बोल रहा है.. ये क्या सिर्फ़ मेरी बहन है.. तेरी कुछ नहीं क्या?
विजय- सारे फैसले आपके.. बहन आपकी.. मुझे बीच में मत लाओ.. आप अगर मेरी बहन होती तो मैं ऐसी शर्त कभी ना लगाता।
जय- अच्छा अच्छा.. ज़्यादा जज्बाती ना हो.. निकलने की तैयारी कर और हाँ तू अलग गाड़ी में आना.. आते समय रानी को भी साथ ले आना.. वहाँ पर थोड़ा मनोरंजन उसके साथ भी कर लेंगे।
रश्मि- ये रानी कौन है भाई?
जय- अरे गाँव की एक लड़की है.. घर के काम करती है।
रश्मि- भाई आप कितनी लड़कियों को जानते हो.. पहले तो आप ऐसे ना थे।
विजय- पहले तुम भी कहाँ इतनी ओपन थीं इसके साथ.. अब जब ओपन हुई हो तो आगे-आगे देखो क्या-क्या होता है तुम्हारे साथ?
विजय की बात सुनकर रश्मि और जय दोनों अचम्भित हो गए। उनको लगा जैसे उसके सामने उनका राज फास हो गया हो.. मगर दोनों ने कुछ नहीं कहा और वहाँ से निकलने की तैयारी में लग गए।
उधर रंगीला सीधा जेम्स के पास गया.. उसको साथ लेकर साजन के पास पहुँचा.. जहाँ वो तीनों के साथ कोमल भी मौजूद थी। साजन ने उसको सारा गेम समझा दिया कि कैसे सब करना है और रंगीला के बारे में भी सब कुछ बता दिया।
कोमल ने लाइट पिंक स्लीब लैस टॉप और ब्लैक शॉर्ट स्कर्ट पहना हुआ था.. जिसमें उसका यौवन और भी अच्छा लग रहा था।
रंगीला- वाह यार.. साजन तेरी बहन तो बड़ी सेक्सी बन कर आई है.. साला जय तो इसको देख कर ही घायल हो जाएगा।
साजन- क्या बॉस.. कुछ भी मत बोलो.. ये साली रंडी मेरी बहन कैसे हुई?
कोमल- अबे ओ भड़वे.. रंडी होगी तेरी माँ.. साले बहनचोद.. मैंने पहले भी कहा था.. मुझे गाली मत देना.. नहीं तो अच्छा नहीं होगा।
रंगीला- अरे लड़ो मत तुम दोनों.. मेरे कहने का मतलब है नाटक में तो ये तुम्हारी बहन का किरदार निभा रही है ना।
साजन- हाँ सही कहा बॉस.. ओके मेरी प्यारी बहनियां मुझसे ग़लती हो गई.. माफ़ कर दो मुझे..
कोमल- अच्छा ठीक है.. ठीक है.. ये नया मुर्गा कौन है.. पहले तो नहीं देखा मैंने कभी.. ये कुछ बोल क्यों नहीं रहा.. गूंगा है क्या?
जेम्स- मेरा नाम जेम्स है और मैं तुम्हें देख कर तुम्हारे हुस्न में खो गया था.. इसलिए चुप था।
कोमल- तेरे जैसे मुझे देख कर ऐसे ही सपनों की दुनिया में खो जाते हैं मगर ये कोमल ऐसे ही किसी के हाथ नहीं आती.. समझे..
रंगीला- कोमल इससे पंगा मत ले.. नहीं तो फार्म पर तू लंगड़ाती हुई जाएगी.. ये तेरी चाल बदल देगा।
कोमल बड़ी अदा के साथ जेम्स के पास जाकर खड़ी हो गई और उसकी पैन्ट के उभार को देखते हुए बोली- अच्छा.. ऐसा क्या खास है इसके पास.. जो मेरी चाल ही बदल देगा।

जेम्स- अब यहाँ सब के सामने दिखाऊँ या अकेले में देखना पसन्द करोगी मेरी जान?
साजन- अरे यार ऐसे माहौल को गर्म ना करो.. एक तो साली तू इतनी सेक्सी लग रही है.. साला लौड़ा पहले ही तुझे सलामी दे रहा है.. अब तेरी ये बातें माहौल को और गर्म कर रही हैं।
कोमल- इतनी आग लगी है लौड़े में.. तो आजा मेरे राजा.. अभी तुझे ठंडा कर देती हूँ.. मगर रोकड़ा जेब में है ना?
रंगीला- अरे बस-बस.. तू यहा धन्धा लेकर मत बैठ.. अब वहाँ जाना भी है.. पहले वो काम हो जाए उसके बाद जिससे चाहे चुदवा लेना।
कोमल- अच्छा अच्छा.. चलो मगर मुझे इसका हथियार देखना है.. इसने ऐसा क्यों कहा कि मेरी चाल बदल देगा ये..
रंगीला- अरे इस सोए हुए नाग को मत छेड़.. एक बार इसने फन उठा लिया ना तो काटे बिना नहीं मानेगा।
जेम्स- अरे यार रंगीला डरो मत.. कुछ नहीं करूँगा.. बस 5 मिनट इसको दिखा दूँ.. नहीं ये सारे रास्ते परेशान रहेगी कि मेरा कैसा है।
रंगीला- जाओ वो सामने कमरे में जाओ यहाँ रहोगे तो हमारी भी नियत बिगड़ जाएगी।
जेम्स ने कोमल का हाथ पकड़ा और उसको कमरे के अन्दर ले गया और अन्दर जाते ही उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
कोमल भी जेम्स का साथ देने लगी.. कुछ देर ये किस चलता रहा उस दौरान जेम्स ने कोमल के मम्मों का और गाण्ड का अच्छे से जायजा ले लिया।
कोमल- अब बस भी करो.. जिस काम के लिए आए हो वो करो.. दिखाओ तो ज़रा अपना साँप.. मैं भी तो देखूँ कितना ज़हरीला है वो?
जेम्स- अब मैं क्या दिखाऊँ.. तू खुद अपने हाथों से उसको आज़ाद कर ले।
कोमल नीचे बैठ गई और जेम्स की पैन्ट को खोल दिया और एक ही झटके में अंडरवियर समेत पैन्ट नीचे को खींच दी।
जेम्स का लंबा लौड़ा एकदम से तना हुआ उसकी आँखों के सामने आ गया।
कोमल- हाए राम.. ये क्या है.. इतना लंबा और मोटा..! ये तो किसी घोड़ी को भी चिल्लाने पर मजबूर कर दे।
जेम्स- अरे डरती क्यों है.. मैं तुझे घोड़ी बना कर ही चोदूँगा।
कोमल- ना बाबा ना.. मैं नहीं लेती इसको.. मेरी चूत तो फट ही जाएगी।
जेम्स- अरे कुछ नहीं होगा.. तू तो खेली खाई है.. मैंने तो कुँवारी लड़की की सील तोड़ी इससे..
कोमल- बाप रे… वो तो मर गई होगी।
जेम्स- अरे पागल.. लौड़े से कोई मरता है क्या.. अब बातें बन्द कर.. तूने साँप को बाहर तो निकाल दिया है.. अब जल्दी से चूस कर इसका जहर भी निकाल दे।
कोमल- हाँ ये तो मैं करूँगी.. इतने प्यारे लौड़े को में चूसे बिना कैसे रह सकती हूँ।
इतना कहकर कोमल ने अपनी जीभ सुपारे पर घुमानी शुरू कर दी.. वो बड़े प्यार से लौड़े को चूसने लगी।
जेम्स- अहहा.. चूस.. मेरी जान.. तेरे होंठ ऐसे हैं तो चूत कैसी होगी..
कोमल- इतना बड़ा लौड़ा मेरे मुँह में ठीक से नहीं जा पा रहा.. तो मेरी छोटी सी चूत में कैसे जा पाएगा।
जेम्स- बुरा मत मानना.. मगर तेरा तो पेशा यही है ना.. जाने कितने लौड़े खा चुकी अब तक तू..
कोमल- हैलो.. मैं कोई रंडी नहीं हूँ.. कॉलेज स्टूडेंट हूँ.. वो तो मेरी कुछ जरूरतें है.. जिन्हें पूरा करने के लिए चुदवाती हूँ.. और रही बात बहुत लौड़े खाने की.. तो तुमको बता दूँ आज तक 7″ से बड़ा कभी नहीं लिया मैंने.. और इतनी भी नहीं चुदी जितना तुम सोच रहे हो।

जेम्स- अरे 7 इन्च का ले लिया तो इसमें क्या डर.. चल मान जा तुझे मज़ा ना आए तो कहना..
कोमल- वैसे एक बात कहूँ.. इसको देख कर मन तो मेरा बहुत मचल रहा है.. लेकिन बाहर जो बारात खड़ी है उनका क्या?
जेम्स- तू उनकी फिकर मत कर.. बस हाँ बोल.. बाकी मैं देख लूँगा।
कोमल- नहीं अभी नहीं.. वहाँ फार्म पर कर लेना.. ओके अब चलो यहाँ से!
जेम्स- अरे इसे जगाया है.. अब चूस कर ठंडा तो करो।
कोमल- अब इसको खड़ा ही रखो.. वहाँ वो लड़की की चुदाई करनी है।
जेम्स- अरे उसकी याद मत दिला.. साली उसको तो ऐसे चोदूँगा कि क्या याद करेगी वो..।
बाहर से आवाज आई..
रंगीला- अरे बस बहुत दिखा दिया.. अब आ भी जाओ बाहर.. देर हो रही है।
जेम्स ने कोमल से कहा- बस 2 मिनट रूको.. मैं अभी आता हूँ.. रंगीला को समझा कर.. आता हूँ.. आज तो यहाँ से तेरी ठुकाई करके ही जाऊँगा।
जेम्स बाहर आ गया और रंगीला से कहा- कैसे भी करके मुझको कोमल के साथ थोड़ी देर रहने दो.. मेरा मन आ गया है उस पर।
रंगीला- एक बात कहूँ.. साली राण्ड है तो मस्त.. मन तो मेरा भी आ गया है इस पर.. अब ये तीन लंगूर भी यहीं हैं इनका कुछ इंतजाम करके दोनों साथ में साली की ठुकाई करेंगे।
जेम्स- वाह.. दोस्त.. ये हुई ना बात.. चल तू उनको रास्ते लगा.. तब तक मैं उसको चोदने के लिए रेडी करता हूँ।
रंगीला- ठीक है मैं उनको भेज कर आता हूँ.. तब तक तू साली को नंगी कर.. आज शुरुआत इसी से करते है और एंड रश्मि पर करेंगे ओके..
रंगीला हँसता हुआ वहाँ से चला गया और जेम्स वापस अन्दर कोमल के पास चला गया।
साजन- बॉस क्या हो रहा है.. अब हमें निकलना है या नहीं।
रंगीला- आनंद और सुंदर तुम दोनों सीधे फार्म जाओ.. साजन और कोमल एक साथ आएँगे.. समझ गए ना?
साजन- यह नया फंडा क्या है बॉस?
रंगीला- मैंने जितना कहा उतना सुनो.. अब तुम दोनों निकलो.. बाकी हम बाद में आते हैं तब देखते हैं। 
उन दोनों के जाने के बाद रंगीला ने साजन को कहा- तुम जाकर शराब का बंदोबस्त करो.. एक घंटे बाद यहीं वापस आ जाना।
साजन- बॉस क्या लफड़ा है.. एक घंटा आप यहाँ क्या करोगे?
रंगीला- जेम्स को तेरी बहन ने छेड़ दिया है.. अब वो उसकी ठुकाई करे बिना जाने वाला नहीं.. तो अब तू यहाँ से जा.. और आराम से वापस आना।
साजन- बॉस ये क्या अपने बहन-बहन लगा रखा है.. उस साली रंडी को मेरी बहन ना बोलो आप..
रंगीला- अच्छा नहीं बोलता.. अब निकल भी यहाँ से।
साजन- बॉस वो साली आज बहुत मस्त लग रही है.. एक चान्स मेरे को भी दे दो ना..
रंगीला- अबे तेरे को रश्मि नहीं चाहिए क्या.. अब ज़्यादा बहस ना कर.. चल निकल यहाँ से..
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06-27-2018, 12:09 PM,
#65
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
साजन समझ गया अब ज़्यादा बोलने से कोई फायदा नहीं और वो वहाँ से निकल चुपचाप निकल गया।
इनकी ये बहस जब चल रही थी तब जेम्स ने क्या किया वो भी देख लो।
जेम्स वापस अन्दर गया और कोमल को बाँहों में लेकर किस करने लगा.. उसके चूतड़ों को सहलाने लगा।
कोमल- अरे हटो भी.. क्या हुआ बाहर.. उन सबको क्या बोलकर आए हो?
जेम्स- बारात को भेज दिया है मेरी जान.. बस अब मैं दूल्हा और तू मेरी दुल्हन.. चल अब देर ना कर.. तेरे मस्त चूचे और चूत के दीदार करा दे।
कोमल तो पहले ही गर्म हो गई थी.. ऊपर से जेम्स का लंबा लौड़ा उसको मदहोश किए जा रहा था। उसने देर ना करते हुए एक-एक करके सारे कपड़े निकाल दिए।
कोमल- ले राजा.. तेरी दुल्हन तैयार है सुहागरात के लिए.. अब तू भी तो नंगा हो जा.. ताकि दो जिस्मों का मिलन अच्छे से हो सके।
कोमल की 34″ नाप की मस्त चूचियां और 36″ की जबरदस्त गाण्ड को देख कर जेम्स पागल हो गया, उसने भी कपड़े निकाल दिए और बिस्तर पर कोमल को लेकर चूमने लगा।
रंगीला जब अन्दर आया तो जेम्स और कोमल किसी साँप के जोड़े की तरह एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
रंगीला- वाह.. भाई तूने तो बहुत जल्दी नंगा कर दिया इस छमिया को..
रंगीला की आवाज़ सुनकर कोमल थोड़ा सा चौंक गई और जल्दी से जेम्स से अलग होकर बैठ गई।
कोमल- ओह्ह.. तो आप नहीं गए बारात के साथ.. मुझे तो पहले ही आपकी नियत पर शक हो गया था कि आपके मन में भी मेरे लिए कुछ काला है।
रंगीला- अब ये काला-पीला तो मैं जानता नहीं.. हाँ एक बात है.. आज तेरी चूत को हम दोनों मारकर लाल जरूर कर देंगे हा हा हा हा हा..
कोमल- ऐसी बात है.. तो दूर क्यों खड़े हो.. आप भी नंगे होकर आ जाओ.. मैदान में..
कोमल की जवानी देखकर रंगीला का लौड़ा भी पैन्ट में अकड़ा हुआ था।
रंगीला ने देर ना करते हुए फ़ौरन अपने कपड़े निकाल दिए.. जब कोमल की नज़र लौड़े पर गई.. तो उसके होश उड़ गए क्योंकि यह भी छोटा-मोटा लण्ड नहीं था.. पूरे 8″ का मूसल था।
कोमल- हाय राम.. आज तो लगता है मैं मर ही जाऊँगी.. तेरा भी बहुत बड़ा है और इसका तो तेरे से भी बड़ा है.. अब मेरा क्या होगा!
कोमल की बात सुनकर दोनों ज़ोर से हँसने लग गए।
रंगीला- अबे साली.. नाटक मत कर, आनंद और सुंदर ने सब बता दिया उस दिन उनके लौड़े देख कर तू क्या बोली थी.. इतने से लौड़े लेकर मेरे पास आए हो, इससे बड़े-बड़े तो मैंने चूस कर फेंक दिए हैं. याद आया कुछ?
कोमल- अरे वो तो मैंने उन पर धौंस मारने के लिए ऐसे ही कह दिया था.. सच बताऊँ आज तक 6 इन्च से ज़्यादा बड़ा मेरी चूत और गाण्ड में नहीं गया और इतना मोटा लौड़ा तो कभी मैंने देखा भी नहीं.. जितना इस जेम्स का है..
रंगीला- आज देख भी ले और चख भी ले.. तेरी जैसी लड़की को डबल चुदाई का मज़ा लेना चाहिए.. हम जैसे लड़कों से.. ताकि आगे चलकर तुम्हें किसी भी छेद में लौड़ा लेने में कोई परेशानी ना हो.. बस घुसवाए जा घुसवाए जा.. और माल कमाए जा..
इतना कहकर रंगीला भी बिस्तर पर आ गया और कोमल के मुँह में लौड़ा घुसा दिया।
जेम्स उसके मम्मों को दबाने लगा और रंगीला उसके मुँह को चोदने लगा।
दोनों कुछ ज़्यादा ही मस्ती में आ गए और कोमल को कभी नीचे लेटा कर चूसते.. तो कभी हवा में उठा कर उसके मुँह को चोदते।
लगभग 15 मिनट तक वो दोनों बारी-बारी उसको मसलते रहे और लौड़ा चुसवाते रहे.. कभी उसकी चूत को चाटते.. तो कभी उसके निप्पल को निचोड़ते।
कोमल- आह्ह.. बस भी करो.. आह्ह.. मैं आ गई.. आह्ह..
जेम्स- अरे रुक रानी.. तेरा रस मुझे पीना है.. ऐसे नीचे मत गिराना उस अनमोल रस को..
इतना कहकर जेम्स कोमल की चूत से चिपक गया और रंगीला उसके मम्मों को चूसने लगा।
जेम्स अपनी जीभ की नोक से कोमल की चूत को चोदने लगा.. कुछ ही देर में कोमल की चूत का बाँध टूट गया और रस की धारा जेम्स अपनी जीभ से चाटने लगा।
कोमल जब शान्त हो गई तो जेम्स और रंगीला दोनों बिस्तर पर टेक लगा कर बैठ गए और कोमल को इशारा किया कि अब दोनों लौड़ों को बारी-बारी से चूस कर मज़ा दो।
कोमल तो बस हुकुम की गुलाम थी.. वो शुरू हो गई.. दोनों लौड़ों को चूसने में उसको बहुत मज़ा आ रहा था।
रंगीला- आह्ह.. चूस कोमल.. तू बहुत मस्त है साली.. उस रश्मि को बाद में चोदेंगे.. तेरी चूत का बाजा पहले बजाएंगे.. आ चूस आह..
थोड़ी देर लण्ड चुसवाने के बाद जेम्स ने कोमल को नीचे लेटा दिया और उसके पैरों के बीच आकर बैठ गया।
कोमल- आराम से डालना तुम्हारा लौड़ा बहुत बड़ा है.. सच में मुझे डर लग रहा है।
जेम्स- तू इतने प्यार से बोल रही है तो आराम से ही करूँगा.. नहीं तो आज मैं तेरी चूत को फाड़ ही देता।
रंगीला- यार अब जल्दी कर मेरा लौड़ा भी परेशान कर रहा है.. कब इसको चोदूँ.. कब सुकून आए।
जेम्स- बस 5 मिनट सबर कर ले यार.. उसके बाद हमें इसको डबल का मज़ा भी देना है न..
जेम्स ने सुपारे को चूत पर लगाया और धीरे से धक्का मारा।
कोमल- आह्ह.. बस राजा ऐसे ही धीरे से आगे डालना.. चूत की दीवार फ़ैल गई है.. तेरा बहुत मोटा है आह्ह..
जेम्स का सुपारा ही अन्दर गया था और कोमल की ‘आह्ह..’ निकल गई। जेम्स ने एक ज़ोर का धक्का मारा.. तो पूरा लौड़ा चूत को चीरता हुआ जड़ तक अन्दर घुस गया और कोमल की उस दर्द से चीख निकल गई।
कोमल- आह ह.. मर गई रे.. आह्ह.. मैंने कहा था ना.. आराम से डालना.. तूने तो आह्ह.. एक साथ ही पूरा घुसा दिया आह्ह..
जेम्स- अरे जानेमन.. अब इतना बड़ा लौड़ा धीरे डालूँ.. या तेज.. दर्द तो होगा ही ना.. चल अब चुदाई का मज़ा ले..
इतना कहकर जेम्स शुरू हो गया और ‘दे..दनादन..’ लौड़ा पेलने लगा।
कोमल- आह्ह.. आह.. छोड़ो आह्ह.. मर गई रे.. आह्ह.. तू आदमी है.. आह्ह.. या घोड़ा.. तेरा लौड़ा आह्ह.. मेरी बच्चेदानी तक जा रहा है आह्ह..
जेम्स तो बस कोमल की टाँगें कंधे पर डाल कर लौड़ा स्पीड से पेले जा रहा था और कोमल सिसकारियाँ ले रही थी.. आहें भर रही थी।
रंगीला- अबे तेरा स्टेमिना बहुत पावरफुल है.. अब तू लगा ही रहेगा या मुझे भी मौका देगा?
जेम्स ने एक झटके से लौड़ा बाहर निकाल लिया और खड़ा हो गया।
जेम्स- ले भाई.. मैं तो बस इसकी चूत का टेस्ट ले रहा था.. वैसे मेरी नज़र तो इसकी मोटी गाण्ड पर है.. अब तू नीचे से चोद.. मैं इसकी गाण्ड का बैंड बजाता हूँ।
कोमल- नहीं नहीं.. कभी नहीं.. तूने इतनी सी देर में मेरी चूत की हालत पतली कर दी.. अब गाण्ड को तो बख्श दे.. ना जाने मेरी गाण्ड का क्या हाल करेगा।
रंगीला- अब बस ज़्यादा सती सावित्री ना बन.. पूरी कीमत मिल जाएगी तुझे.. अब जल्दी से आ जा.. बैठ जा मेरे लण्ड पर.. कब से तेरी राह देख रहा हूँ।
कोमल ने थोड़ा ‘ना-नुकुर’ किया तो जेम्स ने उसको उठा कर रंगीला के ऊपर लेटा दिया.. फच्च की आवाज़ के साथ पूरा लौड़ा चूत में समा गया और कोमल एक बार फिर दर्द से कराह उठी- आह्ह.. आज तो तुम दोनों मेरी जान लेकर ही रहोगे।
जेम्स ने कोमल की बाँहें पकड़ लीं और उसको रंगीला के लौड़े पर ऊपर-नीचे करने लग गया। उधर नीचे से रंगीला ने भी ‘दे..दनादन..’ झटके देने शुरू कर दिए।
कोमल- आह्ह.. आईईइ.. यह..यह.. आइ चोदो.. आह्ह.. फास्ट आह्ह.. फाड़ दो मेरी चूत को.. आह्ह.. आ..
जेम्स ने देखा कि अब रंगीला का लौड़ा चूत में बराबर सैट हो गया है.. तो उसने रंगीला को इशारा कर दिया कि कोमल को अपने ऊपर लेटा कर अच्छे से चिपका ले.. ताकि वो उसकी गाण्ड में अपना लौड़ा घुसा सके।
रंगीला ने कोमल की कमर में हाथ डालकर उसको अपने सीने से चिपका लिया और धीरे-धीरे नीचे से झटके मारता रहा।
जेम्स ने अपने लौड़े को देखा वो एकदम रूखा सा हो गया था.. तो वो रंगीला के साइड में गया और कोमल के मुँह के पास लौड़ा कर दिया।
कोमल मस्ती में चुदाई करवा रही थी जेम्स के लौड़े को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
कुछ देर में जेम्स का लौड़ा कोमल के थूक से सराबोर हो गया था.. तो जेम्स ने लौड़ा उसके मुँह से निकाल दिया।
कोमल- अरे क्या हुआ.. डालो ना मेरे मुँह में.. आह्ह.. मज़ा आ रहा था लौड़ा चूसने में..
जेम्स- मेरी जान तेरे मुँह में तो बस लौड़े को गीला करने के लिए दिया था.. अब ये तेरी मोटी गाण्ड में जाएगा.. तब मज़ा आएगा।
कोमल- नहीं जेम्स.. ऐसा मत करना.. ये बहुत मोटा और बड़ा है.. मेरी गाण्ड को फाड़ देगा.. प्लीज़ नहीं..
रंगीला ने कोमल को अपनी बाँहों में कस कर पकड़ लिया और नीचे से झटके देने लगा.. इधर जेम्स उसके पीछे आ गया और हाथ से लौड़े को पकड़ कर गाण्ड के छेद पर रख दिया।
कोमल ना.. ना.. करती रही.. मगर जेम्स कहाँ मानने वाला था, उसने तो एक ही झटके में पूरा लौड़ा गाण्ड की गहराई में उतार दिया.. अगर वक़्त रहते रंगीला अपने होंठों से कोमल के होंठ ना बन्द करता तो एक दर्दनाक चीख कमरे में गूँज जाती।
जेम्स ने पूरा लौड़ा बाहर निकाला और डबल स्पीड से वापस अन्दर कर दिया.. बेचारी कोमल की तो आँखें बाहर को निकल आई थीं.. मगर वो कर भी क्या सकती थी.. बस उसकी आँखों से आँसू आने लगे और दोनों तरफ़ से उसको झटके लगने शुरू हो गए।
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06-27-2018, 12:10 PM,
#66
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
लगभग 15 मिनट तक कोमल की जबरदस्त ठुकाई होती रही.. अब उसका दर्द गायब हो गया था और मज़ा दुगुना हो गया था, वो ‘आहें..’ भरती हुई चुदाई का मज़ा ले रही थी- आह्ह.. फक मी.. आह्ह.. फास्ट.. चोद दो.. मुझे.. आह्ह.. फाड़ दो मेरी चूत.. आह्ह.. गई.. आह्ह.. मेरा रस निकलने वाला है.. यू फास्ट.. आह्ह.. और फास्ट आह्ह..
कोमल की बातों से दोनों को जोश आ गया और ऊपर से जेम्स स्पीड से उसकी गाण्ड मारने लगा.. तो नीचे रंगीला का लौड़ा भी ‘खचाखच’ उसकी चूत को पेल रहा था।
कोमल की चूत ने रस का फव्वारा छोड़ दिया और उसके साथ ही रंगीला भी अपना कंट्रोल खो चुका था। उसका लौड़ा भी वीर्य की धारा उसकी चूत में भरने लगा।
करीब 5 मिनट तक तीनों ऐसे ही पड़े रहे रंगीला का लौड़ा मुरझा कर चूत से बाहर आ गया था.. मगर जेम्स तो अभी भी गाण्ड का भुर्ता बनाने में लगा हुआ था।
रंगीला- अरे बस कर.. अब रहम कर इस पर और मुझ पर.. हमारा हो गया है यार.. अब तो निकल दे अपना मूसल..
रंगीला की बात सुनकर जेम्स ने दोनों हाथों से कोमल को उठाया और रंगीला के ऊपर से हटा दिया और बिस्तर पर घोड़ी बना कर स्पीड से चोदने लगा। जल्दी ही उसका लौड़ा भी झड़ गया.. तब जाकर कोमल को चैन आया।
कुछ देर वो सब ऐसे ही पड़े रहे उसके बाद अपने-अपने कपड़े पहन कर जाने के लिए र हो गए।
साजन जब वापस आया.. तब तक तीनों बाहर आ चुके थे, हाँ कोमल की चाल थोड़ी बदल गई थी।
साजन- अरे बाप रे.. क्या कर दिया बॉस ये बेचारी तो सच में लंगड़ा रही है।
कोमल- चुप कर कुत्ते.. मेरा मजाक ना बना.. इतना बड़ा अगर तेरी गाण्ड में जाए ना.. तो तू हिल भी ना पाए।
जेम्स और रंगीला ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे और साजन का पोपट हो गया।
थोड़ी देर बाद रंगीला ने साजन को बताया- हम दोनों पहले जाएँगे.. बाद में तू और कोमल आ जाना.. ओके!
और वो दोनों वहाँ से निकल गए।
उनके जाने के बाद साजन ने कोमल को ऊपर से नीचे तक देखा।
कोमल- क्या देखता है रे साले..?
साजन- देख रहा हूँ कि दोनों ने तेरी चुदाई बहुत जबरदस्त की है.. तेरी आँखें बता रही हैं.. तू रोई भी है।
कोमल- बड़ा कमीना है रे तू.. तू तो सब जान गया कुत्ते!
साजन- मेरी जान अब गाली मत दे तू.. मेरी बहन का रोल कर रही है.. चल बता ना.. ऐसा क्या कर दिया उन दोनों ने कि तेरी आँखों में आँसू आ गए।
कोमल- अब क्या बताऊँ तुझे.. वो जेम्स है ना.. साला आदमी नहीं कोई घोड़ा है.. उसका ‘इतना’ लंबा और इतना मोटा है।
कोमल ने हाथ के इशारे से साजन को लौड़े के बारे में बताया।
साजन तो बस कोमल को देखता ही रह गया.. क्योंकि बताते वक़्त उसके चेहरे पर एक अजीब सा डर था।
साजन- ओह्ह.. तभी तू रोई होगी.. साला बॉस ठीक बोला था.. इसको लास्ट चान्स देंगे.. नहीं तो ये रश्मि की चूत का भोसड़ा बना देगा और हमें कुछ मज़ा नहीं आएगा।
कोमल- हाँ उसका लौड़ा है ही ऐसा तगड़ा.. कि किसी को भी रुला दे.. अब बातें ही करेगा या यहाँ से चलेगा भी?
साजन- तुझे बड़ी जल्दी पड़ी है वहाँ जाने की.. क्या बात है?
कोमल- अबे जल्दी होगी ही ना.. कब तुम लोगों का ये नाटक ख़त्म होगा और कब मुझे मेरे पूरे पैसे मिलेंगे।
साजन- तू भी ना साली पैसे के लिए मरी जा रही है.. चल अब निकलते हैं।
ये दोनों भी फार्म के लिए निकल गए। अब ज़रा हम विजय की तरफ़ चलकर देखते हैं कि वो क्या कर रहा है।
जय और रश्मि एक गाड़ी में निकले और जेम्स उनके पीछे दूसरी गाड़ी में निकला.. क्योंकि उसको तो वहाँ पर रानी को लेकर जाना था ना।
रश्मि के दिल में अब भी थोड़ा डर था कि अगर जय हार गया तो क्या होगा? बस वो रास्ते में यही सब सोचती जा रही थी। उधर रंगीला और जेम्स कुछ खाने-पीने का सामान लेकर मंज़िल की ओर चल पड़े थे।
स्तों अब रास्ते का हाल आपको क्या बताऊँ.. तो चलो सीधे फार्म का सीन ही बता देती हूँ।
सबसे पहले जय और रश्मि वहाँ पहुँचे थे। वहाँ जाकर जय ने नौकरों को कुछ हिदायत दी और उसके बाद कमरे में रश्मि को आराम के लिए भेज कर खुद बाहर सब का वेट करने लगा।
उनके कुछ देर बाद सुंदर और आनंद भी वहाँ आ गए तो जय उनसे बातें करने लगा।
उधर विजय सीधा रानी के घर पहुँच गया.. जिसे देख कर रानी बहुत खुश हुई।
रानी- अरे बाबूजी आपने आने में बड़े दिन लगा दिए?
जेम्स- वो शहर में थोड़ा काम था ना.. इसलिए.. चल अब जल्दी से तैयार हो जा हमें अभी निकलना है।
रानी- आप अन्दर तो आओ.. माँ से मिल लो.. तब तक मैं कपड़े ले लेती हूँ।
विजय उसकी माँ से बातें करने लगा और कुछ पैसे भी दे दिए।
कोई 15 मिनट बाद वो रानी को लेकर वहाँ से निकल गया।
दोस्तो, रानी याद है या भूल गए.. चलो अगर भूल गए तो कोई बात नहीं.. अभी सब याद आ जाएगा।
रानी ने एक पुरानी सी मैक्सी पहनी हुई थी.. जो उसके बदन पर बहुत टाइट थी.. अन्दर उसने ब्रा भी नहीं पहनी थी जिससे उसके 30″ के चूचे साफ दिखाई दे रहे थे.. उसके निप्पल एकदम तने हुए थे।
विजय- अरे क्या बात है रे रानी.. तूने ये किसके कपड़े पहने हैं.. बहुत छोटे हैं ये तो.. और तेरे ये निप्पल ऐसे खड़े क्यों हो रहे हैं?
रानी का चेहरा शर्म से लाल हो गया, उसने शर्म के मारे अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया।
विजय ने एक हाथ से उसके मम्मों को हल्के से दबाया.. तो रानी के मुँह से ‘आह्ह..’ निकल गई।
विजय- अरे क्या हुआ हूँ रानी.. तू तो ऐसे शर्मा रही है.. जैसे पहली बार मैंने इनको छुआ है।
रानी- सस्स आह्ह.. बाबूजी.. आपका हाथ लगते ही बदन में बिजली सी रेंगने लगी।
विजय- अच्छा ये बात है.. लगता है इतने दिन में तू मेरा स्पर्श भूल गई है.. अब दोबारा तुझे नंगी करके पूरे जिस्म पर अपनी छाप देनी होगी।
रानी- आह्ह.. बाबूजी भगवान के लिए ऐसी बातें ना करो.. आपको देखते ही मेरे जिस्म में हलचल पैदा हो गई.. ये चूचुक जो तने हुए से हैं ये आपको देखने से तने हैं.. अब आप ऐसी बातें कर रहे हो.. तो नीचे भी कुछ-कुछ हो रहा है।
विजय- ओह्ह.. अच्छा ये बात है.. लगता है इतने दिन बिना चुदे रही हो.. तो तेरी चूत अब लण्ड के लिए प्यासी हो गई है.. अब तो मुझे ही कुछ करना होगा.. तेरी प्यासी चूत की प्यास अब मेरा लौड़ा ही बुझाएगा।
विजय की बात सुनकर रानी की चूत से पानी रिसने लगा.. वो काफ़ी ज़्यादा उत्तेजित हो गई और विजय के लण्ड को पैन्ट के ऊपर से मसलने लगी।
विजय तो पहले ही रानी के खड़े निप्पल देख कर गर्म हो गया था.. अब रानी की ये हरकत उसको पागल बना गई।
विजय- आह्ह.. रानी.. तेरे हाथों में क्या जादू है.. देख लौड़ा कैसे बेकाबू हो गया है।
रानी- बाबूजी आप गाड़ी आराम से चलाओ.. तब तक आपके लौड़े को मैं काबू में लाती हूँ।
इतना कहकर रानी ने विजय की पैन्ट का हुक खोल दिया और तने हुए लौड़े को बाहर निकाल लिया।
लौड़ा एकदम टाइट हो रहा था.. रानी ने देर ना करते हुए अपने होंठ लण्ड पर रख दिए और बड़े प्यार से पूरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी।
विजय- आह ससस्स.. रानी आह्ह.. मज़ा आ गया.. चूस.. आह्ह.. तेरे होंठ भी क्या कमाल के हैं.. आह्ह.. चूस मेरी जान।
विजय का लौड़ा एकदम फड़फड़ा रहा था.. अब उसकी साँसें तेज हो गई थीं। विजय ने रानी को अपने से अलग किया और गाड़ी को एक साइड में खड़ा करके वो रानी के मम्मों को कपड़ों के ऊपर से चूसने लगा।
रानी- आह्ह.. बाबूजी.. अब बर्दास्त नहीं हो रहा आह्ह.. मेरी चूत किसी भट्टी की तरह जल रही है.. आह्ह.. अपने लौड़े की बरसात कर दो.. आह्ह.. मेरी चूत में.. इससस्स.. आह्ह.. आहह..
विजय- रानी मेरा हाल भी ऐसा ही है.. अब तो तेरी चूत चोद कर ही सुकून आएगा.. चल पीछे की सीट पर चल.. आज तुझे गाड़ी में ही चोदूँगा।
रानी तो चुदने को बेकरार थी.. जल्दी से वो पीछे चली गई और विजय भी सीट को एड्जस्ट करके पीछे चला गया और रानी पर टूट पड़ा।
विजय ने रानी को जल्दी से नंगा किया और उसके निप्पल चूसने लग गया।
रानी- आह्ह.. बाबूजी.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा.. ओह्ह आह्ह.. घुसा दो अपना डंडा.. मेरी चूत में.. आह्ह.. कर दो मुझे शान्त..
विजय- चल मेरी जान अब तू घोड़ी बन जा.. अब मेरा लौड़ा भी बेताब है तेरी चूत में जाने के लिए।
रानी घोड़ी बन गई और विजय ने एक ही झटके में पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया।

रानी काफ़ी दिनों की प्यासी थी, उसकी चूत में लौड़ा जाते ही वो ‘आह्ह..’ भरने लगी और गाण्ड को पीछे करके चुदवाने लगी।
विजय- आह्ह.. मेरी जान तू तो बड़ी चुदक्कड़ बन गई रे.. आह्ह.. ले साली.. एक बात तो बता.. गाँव में तो किसी से नहीं चुदी ना… इतने दिन.. आह्ह..
रानी- आह्ह.. फाड़ दो.. चोदो आह्ह.. नहीं बाबूजी.. आह्ह.. ये आप कैसी बात करते हो.. आह्ह.. आपके अलावा में किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती आह्ह..
विजय- आह ले आह्ह.. अच्छा किया.. नहीं तो साली मज़ा खराब हो जाता मेरा.. आह्ह.. ले आह्ह..
विजय स्पीड से रानी की चूत को चोद रहा था.. वो भी उसका पूरा साथ दे रही थी। लगभग 20 मिनट तक ये तूफान जोरों पर था.. उसके बाद रानी की चूत नामक बाँध में दरार पैदा हो गई.. वो बाँध कभी भी फट सकता था।
रानी- आह्ह.. तेज तेज करो.. आह्ह.. मेरी चूत आह्ह.. गई.. आआ एयेए..
रानी का झरना फूट पड़ा और उसके साथ ही विजय का लौड़ा भी झड़ गया.. दोनों के पानी का संगम हो गया।
कुछ देर दोनों ऐसे ही पीछे की सीट पर पड़े रहे.. उसके बाद इस चुप्पी को रानी ने तोड़ा- अच्छा बाबूजीm अपने बताया नहीं.. आप अकेले क्यों आए हो.. जय जी कहाँ हैं?
विजय- क्यों साली.. मेरा लौड़ा कम पड़ गया तेरे को.. जो जय को याद कर रही है तू हाँ?
रानी- अरे बाबूजी.. आप भी ना बस.. मैं तो ऐसे ही पूछ रही हूँ और वैसे भी अब वहाँ तो आप दोनों मुझे कहाँ सुकून लेने दोगे.. वहाँ तो दोनों मेरी जमकर चुदाई करोगे ना..
विजय- मेरी भोली रानी.. वहाँ हम दो के अलावा 5 दोस्त और हैं.. तू बच के रहना.. कहीं सभी तेरे पीछे ना पड़ जाएं हा हा हा।


विजय की बात सुनकर रानी चौंक गई- हे राम रे पांच और.. ना ना बाबूजी.. ऐसा ज़ुल्म ना करना.. मैं तो मर ही जाऊँगी।
विजय- अरे डरती क्यों है.. मजाक कर रहा हूँ.. वहाँ मेरे दोस्त की बहन और जय की बहन भी होगी।
रानी- हाय राम.. तब तो मुझे बहुत सावधान रहना होगा आपकी बहन के सामने.. थोड़ी आप कुछ कर पाओगे.. मैं तो बस चुपचाप अपना साफ सफ़ाई का काम ही करती रहूँगी.. ठीक है ना..
विजय- अबे साली.. तू क्या समझ रही है.. वो यहाँ कोई भजन कीर्तन करने आई है क्या.. और हाँ मेरी नहीं.. जय की बहन कहा है मैंने..
रानी- बाबूजी आप तो पहेलियाँ सी बुझा रहे हो.. और जब आप दोनों भाई हो.. तो वो आपकी बहन हुई ना?
विजय समझ गया कि इसको ऐसे कुछ समझ नहीं आएगा.. तो उसने रानी को सब कुछ साफ-साफ बताया.. जिसे सुनकर रानी की आँखें फटी की फटी रह गईं।
रानी- हाय राम कैसा जमाना आ गया.. ऐसा भी कोई खेल होता है क्या जिसमें अपनी बहन को दांव पर लगाना पड़े.. ना बाबा ना.. ये तो कलयुग है।
विजय- अबे साली द्रौपदी का चीर हरण हुआ था.. वो भी तो कुछ ऐसा ही गेम था.. बस फ़र्क ये है उसमें बीवी थी.. यहा बहन है।
रानी- बाबूजी हम ठहरे गाँव के लोग.. हमें क्या पता ऐसे खेल के बारे में.. आप बड़े लोग हो.. आप ही जानो।
विजय- अब सुन.. वहाँ तुझे नॉर्मल ही रहना है.. वैसे तो रश्मि को पता है कि तू हमसे चुदी हुई है.. फिर भी तू उससे ज़्यादा बात ना करना।
रानी- हाय राम.. कैसे भाई हो आप.. ऐसी बातें कोई अपनी बहन को बताता है क्या?
रानी की बात सुनकर विजय का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसकी आँखों में खून उतर आया- चुप साली कुतिया.. क्या बार-बार उस रंडी को मेरी बहन बता रही है.. वो उस कुत्ते की बहन है बस.. समझी..
विजय का ये रूप देख कर रानी बहुत डर गई- माफ़ करना बाबूजी.. दोबारा नहीं कहूँगी.. मगर आप उसको रंडी क्यों बोल रहे हो?
विजय- अबे साली रंडी को रंडी ना बोलूँ तो क्या बोलूँ.. हाँ बता.. वो हरामजादी कुतिया जब ऐसे गेम के लिए मानी.. तभी वो मेरे लिए एक रंडी बन गई थी.. समझी?
रानी- बाबूजी आप भगवान के लिए शान्त हो जाओ.. इतना गुस्सा मत करो.. मैं अब आपसे कोई सवाल नहीं करूँगी।
विजय- सॉरी यार.. मैं थोड़ा गुस्से में आ गया था.. अब सुन तुझे एक बहुत जरूरी बात बतानी है.. वहाँ जाकर कोई गड़बड़ ना कर देना।
रानी- ठीक है बाबूजी आप बताओ।
विजय बड़े आराम से रानी को कुछ समझाने लगा.. जिसे सुनकर रानी के चेहरे के भाव बदलने लगे। उसका सर चकराने लगा.. वो बस गर्दन ‘हाँ’ या ‘ना’ में हिला कर सब कुछ चुपचाप सुनती रही।
विजय- अब समझ आ गया ना.. वहाँ कोई गड़बड़ ना कर देना तू..
रानी- ना बाबूजी ना.. अब आप चिंता ना करो.. अब मैं सारी बात समझ गई हूँ। अब तो आप बस अपनी रानी का कमाल देखना।
विजय ने खुश होकर रानी को किस किया, उसके बाद दोनों वहाँ से अपनी मंज़िल की ओर बढ़ गए।
दोस्तो, ये रास्ते में चुदाई कर रहे थे रंगीला और जेम्स वहाँ पहुँच भी गए।
हाँ एक बात और साजन भी कोमल को लेकर वहाँ पहुँच गया था.. जिसे देख कर रश्मि मन ही मन सोच रही थी कि आज इसका क्या हाल होगा.. पता नहीं और वहीं कोमल भी रश्मि को देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थी कि बेचारी आज पता नहीं कितने लौड़ों से चुदने वाली है।
जब विजय और रानी वहाँ पहुँचे तो हॉल में सब बैठे हुए चिप्स और कोल्डड्रिंक्स का मज़ा ले रहे थे।
रानी को देख कर साजन और उसके फालतू दोस्तों की आँखें चमक गईं.. वहीं मगर जेम्स और रंगीला ने नॉर्मल बिहेव किया। यही हाल रानी का था जेम्स को देख कर उसको ज़रा भी ताज्जुब नहीं हुआ।
दोस्तो, आपके मन में कई सवाल खड़े हो गए होंगे। अब ज़्यादा वेट नहीं करना होगा.. बस वक़्त आ गया है तो आगे खुद देख लो।
साजन- अरे विजय.. ये किसको साथ ले आए तुम?
विजय- काम वाली है.. दिखाई नहीं देती क्या तुझे?
साजन- अच्छा कौन-कौन से काम कर लेती है ये.. हा हा हा हा..
जय- अबे चुप साले कुत्ते.. जब देखो लार टपकाता रहता है।
साजन- अरे यार जय अब बस भी कर ये शराफत का ढोंग.. अब तो बन्द कर दे सबको पता है.. हम यहाँ क्यों जमा हुए हैं.. अब थोड़ा तो मज़ा लेने दे।
विजय- साजन, ये यहाँ खाना बनाने के लिए आई है.. हम जो करेंगे वो करेंगे.. इसका इससे कोई मतलब नहीं है ओके.. अब चुपचाप बैठ।
विजय ने रानी को अन्दर भेज दिया और खुद सोफे पर बैठ कर एक कोल्डड्रिंक ली और आराम से पीने लगा।
कोमल और प्रिया पहले ही कमरे में चली गई थीं.. आराम करने के लिए।
साजन- अरे यार ये कोक ही पीओगे क्या.. अब तो कोई दारू-वारू का राउंड चालू करो..।
विजय- साले अभी से पीने लगेगा तो रात तक टुन्न हो जाएगा.. फिर गेम क्या तेरा बाप आकर खेलेगा।
साजन- देख विजय तू बाप तक मत जा.. हाँ बोल देता हूँ मैं।
जय- अबे चुप साले हरामी.. कल बड़ा अकड़ रहा था ना.. तेरे बाप का तो पता नहीं.. मगर तेरी बहन की आज हालत बिगाड़ दूँगा।
साजन- वो तो वक़्त ही बताएगा कि तू मेरी बहन की हालत बिगाड़ता है या रश्मि की चीखें सुनकर अपने कान बन्द कर लेगा.. हा हा हा।
जय- अबे कुत्ते.. तेरी इतनी हिम्मत कि तू अपनी गंदी ज़ुबान से रश्मि का नाम ले.. साले रुक अभी तुझे बताता हूँ।
जय गुस्से में साजन की तरफ़ लपका तो रंगीला ने उसका हाथ पकड़ लिया।
रंगीला- जय ये क्या हो रहा है.. तुम बोलो तो ठीक है.. और ये बोले तो गुस्सा.. ऐसा क्यों?
जय- यार तूने सुना ना.. इसने रश्मि के बारे में क्या कहा अभी?
रंगीला- हाँ सब सुना और ऐसा क्या गलत कह दिया.. हम यहाँ जिस काम के लिए जमा हुए हैं.. उसमें एक की चीखें तो निकलेंगी ही.. अब ये गुस्सा जाने दो और और रूल्स की बात कर लो। सब पहले वाले होंगे या कुछ चेंज करना है।
विजय- नहीं आज खास गेम के लिए खास रूल होंगे.. रंगीला तुम ऐसा करो रश्मि और कोमल को भी बुला लाओ.. ताकि वो भी रूल सुन लें।
रंगीला ने दोनों को बुला लिया.. अब वो भी पास में आकर बैठ गईं।
जेम्स चुपचाप बस ये तमाशा देख रहा था.. उसको तो बस रश्मि की चुदाई से मतलब था.. बाकी दुनिया जाए भाड़ में।
साजन- बोलो क्या रूल चेंज होंगे?
विजय- देखो हम 6 लोग खेलेंगे एसीपी साहब तो हमारे मेहमान हैं.. तो ये बस साइड में बैठ कर गेम देखेंगे।
साजन- हाँ सही बात है.. आगे बताओ।
विजय- ये गेम टीम बना कर खेलेंगे तुम तीन और हम तीन.. सबको पहले की तरह तीन-तीन कार्ड्स दिए जाएँगे। अब नया रूल ये है कि हम तीनों आपस में एक-एक कार्ड बदल सकते हैं.. सेम तुम भी ऐसा कर सकते हो।
रंगीला- गुड यार.. इसमें तो मज़ा आएगा जैसे मेरे पास बड़ा कार्ड आ गया तो मैं जय को दे दूँगा और वो जीत जाएगा।
साजन- मस्त है ये आइडिया.. तो मगर तुम तीनों में अगर जय के पास बड़े कार्ड्स होंगे.. वो तो जीत जाएगा मगर तुम्हारा क्या होगा?
विजय- गधे के गधे रहोगे तुम.. ये गेम तुम्हारे और जय के बीच है.. समझे? बस तुम दोनों के कार्ड्स ही ओपन होंगे.. बाकी सब सारे कार्ड्स गड्डी में मिला देंगे।
रश्मि- वाउ भाई.. इट्स न्यू आइडिया मज़ा आएगा आज तो..
रश्मि के बोलने के साथ ही जेम्स की नज़र उससे मिली.. उसका लौड़ा तो उसको देख कर ही सलामी दे रहा था।
विजय- और कुछ पूछना है?
साजन- हाँ एक बात बताओ.. रूल तो वही हैं ना.. एक गेम हारा तो एक कपड़ा निकालना होगा?
जय- हाँ वो सब वही होगा.. इसमें पूछना क्या है।
साजन- अच्छा एक बात और क्लियर कर लो.. जो हारेगा उसकी बहन के साथ कौन-कौन लेटेगा?
कोमल- छी.. साजन कुछ तो शर्म करो.. सबके सामने ये कैसी बात कर रहे हो.. तुम्हें शर्म नहीं आती।
कोमल ने बड़ी अदा के साथ ये बात बोली थी.. जिसे सुनकर सब ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे।
विजय- अरे कोमल तू तो बड़ी भोली बन रही है यहाँ.. ये तुझे ऐसे तो लाया नहीं होगा, सब बता कर ही लाया होगा ना.. अब थोड़ी देर में जब सबके सामने कपड़े उतारोगी तो शर्म नहीं आएगी क्या.. हा हा हा..

विजय की बात सुनकर कोमल सहम गई और सब फिर से हँसने लगे। बेचारी रश्मि का हाल भी कोमल जैसा था.. मगर मजबूरी में वो भी हँसने का नाटक कर रही थी।
साजन- भाई हँसना बन्द करो और मेरे सवाल का जबाव दो।
जय- जबाव क्या देना था.. हारने वाली लड़की के साथ सब करेंगे।
जय को तो पूरा यकीन था.. वो जीतेगा इसलिए सबका नाम ले रहा था मगर उसको कहाँ पता था उसके साथ क्या खेल खेला जा रहा है।
साजन- एक बात कहूँ.. बुरा मत मानना.. अगर तू हार गया तो हम तीन तो करेंगे ही.. एसीपी साहब भी करेंगे.. तुम तीनों तो नहीं करोगे.. दो की तो बहन है और रंगीला आपका बेस्ट फ्रेण्ड है?
जय- तू ज़्यादा होशियार मत बन.. कोमल को बचाना चाहता है क्या.. बस तू उसका भाई है.. तो नहीं करेगा बाकी हम सब करेंगे ओके..
साजन- ऐसी बात है तो रश्मि के साथ भी ऐसा ही होगा.. समझे उसके साथ भी तुम्हारे अलावा सब करेंगे.. बोलो मंजूर है?
विजय- नहीं.. हम दोनों के अलावा सब करेंगे.. मैं भी तो उसका भाई हूँ।
रंगीला- मगर यार विजय में कैसे कर सकता हूँ रश्मि के साथ?
रंगीला ने जब ये बात कही तो रश्मि उसकी तरफ़ देखने लगी और सोचने लगी कि रात को तो इसके इरादे कुछ और ही थे.. अब ये मेरे भाई के सामने शराफत क्यों दिखा रहा है?
जय ने रंगीला को आँख मारी कि हम हारेंगे तब ये नौबत आएगी ना.. बस हाँ कहने में क्या जाता है और इस तरह सब की रजामंदी हो गई।
जय- देखो अब खाना खा लेते हैं.. उसके बाद थोड़ा रेस्ट करेंगे.. और शाम को हमारा गेम शुरू हो जाएगा.. ठीक है ना..
सब ने हामी भर दी और जय के कहने पर नौकरों ने खाना लगा दिया, सबने मिलकर खूब खाया, उसके बाद अलग-अलग कमरों में सब चले गए।
साजन की टीम अलग और जय की अलग कमरे में गई.. ताकि गेम के बारे में कुछ बात करनी हो तो एक-दूसरे को पता ना लग पाए।
हाँ। हमारे एसीपी यानि जेम्स को आराम के लिए अलग कमरा दिया गया।
रानी मौका देख कर जेम्स के कमरे में चली गई।
जेम्स- रानी तू यहाँ क्यों चली आई.. कोई देख लेगा तो मुसीबत हो जाएगी.. जा वापस..
रानी- अच्छा, मेरे आने से मुसीबत हो जाएगी.. और तू यहाँ जो फोकट की चूत के चक्कर में आया है.. उससे कुछ नहीं होगा क्या?
जेम्स- देख तू बात को समझ.. मैं सब कुछ तुझे बाद में बता दूँगा.. अभी तेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं।
रानी- डर मत.. मेरे राजा मुझे विजय बाबूजी ने खेल के बारे में सब बता दिया है।
जेम्स- नहीं तू कुछ नहीं जानती.. मैं यहाँ कोई खेल के लिए नहीं अपनी आशा का बदला लेने आया हूँ। अब तू कुछ नहीं बोलेगी.. तुझे मेरी कसम है.. जा यहाँ से अब..
रानी कुछ कहना चाहती थी.. मगर जेम्स ने उसको जबरदस्ती कमरे से बाहर निकाल दिया।
रानी बेचारी कुछ बोल भी ना पाई और जेम्स ने दरवाजा बन्द कर दिया।
उधर विजय और रंगीला चुपचाप बैठे हुए जय और रश्मि को देख रहे थे।
रश्मि- भाई मुझे बहुत डर लग रहा है कहीं आप हार ना जाओ।
जय- अरे पागल.. कुछ नहीं होगा अभी देख में कैसी सैटिंग जमाता हूँ.. हम किसी हाल में नहीं हारेंगे।
रश्मि- वो कैसे भाई.. ज़रा मुझे भी तो बता?
रंगीला- मैं बताता हूँ.. ये तीन पत्ती का गेम है.. इसमें सिर्फ़ बड़े कार्ड्स से ही गेम नहीं जीता जाता.. कभी-कभी एक दुग्गी भी गेम जिता देती है।
रश्मि- वो कैसे? ये बात तो मेरी समझ के बाहर है?
रश्मि की बात सुनकर सब के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।
रंगीला- देखो रश्मि तुम्हारी उलझन मैं दूर करता हूँ.. मान लो जय के पास 3, 7, 9 पत्ते हैं और विजय के पास इक्का गुलाम और 5 हैं.. और मेरे पास बादशाह 2, 2 है.. तो मैं बड़ा पत्ता बादशाह और विजय गुलाम जय को देगा.. और यदि जय के पास 9 आया है.. तो अब क्या बना.. इक्का बादशाह और 9..
अगर साजन के पास इससे कोई बड़े पत्ते हुए जैसे 8 8 6 भी हुआ.. तो भी वो जोड़ी में जीत जाएगा।
रश्मि- हाँ आपने बिल्कुल ठीक कहा.. ये गेम मुझे अच्छी तरह आता है।
रश्मि आगे कुछ बोलती.. तभी विजय बीच में बोल पड़ा- इसी लिए हम दिमाग़ से खेलेंगे.. जय अपने तीन पत्ते हमें इशारे से बता देगा.. उसके बाद हम अपने-अपने पत्ते उसे बता देंगे.. और वो जो माँगेगा.. वही पत्ते हम उसको दे देंगे और वो जीत जाएगा।
रश्मि- वाउ भाई.. अब मैं सब समझ गई.. आप भाई को इक्का देंगे और रंगीला 2 यानी दुग्गी देगा और भाई के पास 3 पहले से ही है.. तो हो गई सेक्वेल 1 2 3 की और भाई जीत जाएगा.. वाउ वाउ.. मज़ा आएगा..
दोस्तो, वैसे तो ये बात यहाँ बताना जरूरी नहीं थी.. मगर मैं चाहती हूँ गेम के बारे में आप सब कुछ जान लो तो ज़्यादा अच्छा रहेगा। अब हर कोई तो तीन पत्ती का गेम जानता नहीं है.. इसी लिए मैंने थोड़ा विस्तार से यहाँ बता दिया। अब आगे शॉर्ट में निपटा दूँगी।
वो लोग काफ़ी देर तक आगे की प्लानिंग करते रहे और उधर साजन अपने दोस्तों को उनकी प्लानिंग बता रहा था कि वहाँ क्या हो रहा है और तुम्हें क्या करना है।
कुछ देर बातें करने के बाद सभी रेस्ट करने लगे और शाम तक सब सोकर फ्रेश हो गए।
दोस्तो, अब वक़्त आ गया है हमारे गेम शो का.. जो कहने को तो एक बस खेल है.. मगर उसमें कितने राज छुपे हैं.. आज सब आपके सामने आ जाएँगे ..तो खुद मजा देख लो।
शाम को हल्का सा दौर चाय नाश्ता का चला.. उसके बाद सब हॉल में जमा हो गए और इधर-उधर की बातें करने लगे।
कोमल और रश्मि उन सबसे अलग बाहर गार्डन में घूम रही थीं।
रश्मि- हाय कोमल.. कैसी हो तुम?
कोमल- मैं अच्छी हूँ.. जब से यहाँ आई हूँ.. तुमसे बात करना चाह रही थी.. मगर मौका ही नहीं मिला..
रश्मि- हाँ यार मेरा भी कुछ ऐसा ही है और सुनाओ कहाँ पढ़ती हो?
कोमल तो पहले से ऐसी बातों के लिए तैयार थी। उसने अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में रश्मि को फँसा लिया और जो तीर वो मारना चाहती थी.. वो उसने निशाने पर लगा दिया।
कुछ देर बाद रंगीला ने दोनों को अन्दर बुला लिया और पार्टी का दौर शुरू हो गया। सब बियर और चिकन फ्राइड का मज़ा लेने लगे।
करीब आधा घंटा बाद जय ने रात का खाना तैयार करवा कर सब नौकरों को छुट्टी दे दी। बस रानी वहाँ उनकी सेवा के लिए रह गई।
विजय ने सुंदर और आनंद की मदद से बियर का पूरा कार्टन वहीं रखवा लिया और गेम के लिए कार्ड्स भी ले आया।
रश्मि- गेम शुरू हो उसके पहले मैं कुछ कहना चाहती हूँ।
रश्मि की बात सुनकर सबका ध्यान उसी तरफ़ हो गया।
साजन- क्या हुआ जय.. तेरी बहन का इरादा बदल गया क्या.. कहीं ये ना तो नहीं बोल रही ना.. हा हा हा हा..
रश्मि- नो वे.. ऐसी कोई बात नहीं है.. मैं बस इतना कहना चाहती हूँ कि ये गेम आप दोनों के बीच हो रहा है.. कोई भी जीते.. इसमें मेरा और कोमल का क्या फायदा होगा.. हाँ हमें तो तुम सब के नीचे आना ही पड़ेगा।
रश्मि की बात सुनकर सबको झटका सा लगा कि ये पॉइंट तो इसने बहुत जोरदार मारा है।
रंगीला- तुम कहना क्या चाहती हो?
रश्मि- कुछ नहीं मैं बस ये चाहती हूँ इस गेम का रिजल्ट जो भी हो.. हम दोनों लड़कियों की भी एक-एक डिमाँड पूरी होनी चाहिए।
विजय- बिल्कुल ठीक कहा तुमने.. रश्मि ये गेम में तुम दोनों का रोल बहुत बड़ा है.. तो तुम अपनी भी डिमाँड रखो।
साजन- नहीं नहीं.. यह गलत है जब सुबह सब प्लानिंग चल रही थी.. तब क्यों नहीं इसने कुछ कहा.. अब कोई रूल चेंज नहीं होगा ओके..
कोमल- साजन भाई.. आप चुप रहो, यह फैसला अकेली रश्मि का नहीं.. मेरा भी है.. आपने कैसे मुझे यहाँ आने के लिए रेडी किया? याद है ना..? अब भूलो मत। अगर हम दोनों ने इन्कार कर दिया तो खेलते रहना अकेले-अकेले दोनों मिलकर गेम..
कोमल थोड़ी गुस्से में आ गई थी.. जिसे देख कर वहाँ बैठे सबकी गाण्ड फट गई।
ओह्ह सॉरी.. ‘सबकी’ कहना ग़लत होगा क्योंकि यह तो एक सोची समझी चाल का हिस्सा है..
हाँ किसी और का पता नहीं, जय की जरूर फट गई.. तभी तो सबसे पहले वो बोला- ओह्ह साजन.. तू चुप रह.. साला सारे किए कराए पर पानी फेर देगा। पहले इनकी डिमाँड तो सुन लो।
रंगीला- बिल्कुल ठीक.. मैं इन दोनों लड़कियों के साथ हूँ.. बोलो रश्मि पहले तुम बोलो क्या डिमाँड है?
रश्मि- ओके तो सुनो, हारने वाली लड़की को यह हक़ होगा कि उसके साथ पहले कौन करेगा.. यह वो खुद तय करेगी ओके?
साजन- नो नो.. यह गलत है.. यह जरूर जय की कोई चाल है.. अरे मैं जीतूँगा तो पहले मैं ही जाऊँगा ना.. नो… मैं नहीं मानता इस बात को..
विजय- ओये चूतिए, तुझे कैसे पता तू जीतेगा.. साला हार गया तो यह फैसला तेरी बहन के बहुत काम आएगा.. वो भी अपनी मर्ज़ी से बोलेगी.. समझे..
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Reply
06-27-2018, 12:11 PM,
#67
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
साजन ने थोड़ी देर नाटक किया उसके बाद वो मान गया.. वैसे रश्मि ने क्लियर बोल दिया कि जरूरी नहीं जीतने वाली टीम का कोई लड़का पहले जाए.. वो किसी को भी पहला मौका दे सकती है.. सिवाय जय और विजय के क्योंकि वो उसके भाई हैं और वैसे भी हारने वाला तो कर ही नहीं सकता.. यह भी रूल है।
विजय- चलो, ये बात तो हो गई.. अब कोमल तुम भी अपनी डिमाँड बताओ?
कोमल- आप लोग यहाँ जब जमा हो ही गए तो नंगापन तो होगा ही.. अब कोई शर्म की बात तो है ही नहीं यहाँ पर.. सही कहा ना मैंने?
रंगीला- हाँ एकदम सही कहा तुमने.. मगर इसका मतलब क्या हुआ?
कोमल- अपने बड़ी आसानी से रूल बना लिए कि टीम में खेलेंगे और कार्ड्स चेंज कर लेंगे.. मगर ज़रा ये सोचो आपने अपनी बहनों को दांव पर लगा रखा है और गेम को इतना आसान बना लिया.. ये कहाँ का इंसाफ़ हुआ बोलो?
जय- तुम कहना क्या चाहती हो.. साफ साफ बोलो ना?
कोमल- मेरी डिमाँड ये है कि रूल वही रहेगा.. मगर छोटा सा ट्विस्ट आएगा इसमें.. आनंद और सुंदर आपको कार्ड्स देंगे और विजय रंगीला मेरे भाई को कार्ड्स देंगे।
कोमल की बात सुनकर जय हिल गया उसकी तो सारी प्लानिंग धरी की धरी रह गई थी।
जय- ये क्या बकवास है.. ऐसा कैसे हो सकता है.. ये दोनों मुझे क्यों अच्छे कार्ड्स देंगे.. ये तो साजन के दोस्त हैं.. ऐसे तो मैं साफ-साफ हार जाऊँगा।
कोमल- यही तो ट्विस्ट है जय जी.. आपने बस अपने बारे में सोच लिया.. ज़रा मेरे भाई के बारे में भी सोचो.. आपके भाई और दोस्त उनको कैसे बड़े कार्ड्स देंगे.. वो भी तो आपको जिताना चाहते हैं।
रंगीला- वाह.. कोमल वाह.. क्या आइडिया निकाला है तूने.. अब आएगा गेम का मज़ा.. अब होगी कशमकश..
विजय- मगर रंगीला इससे तो गेम बहुत हार्ड हो जाएगा।
सुंदर- देखो भाई अब पहले हम कार्ड्स जीतने के लिए देने वाले थे अब हराने के लिए देंगे.. मज़ा आएगा..
जय का तो सर घूम गया कि अब क्या होगा.. उसने जल्दी से बियर की बोतल ख़त्म की और सोचने लगा।
साजन- मैं तो तैयार हूँ भाई.. अब मेरी प्यारी कोमल की बात कैसे मना कर सकता हूँ.. क्यों जय अब तू क्या कहता है.. अपनी बहन की बात तो तूने मनवा दी.. अब मानने की बारी तेरी है?
जय- अब मैं क्या कहूँ.. चल मान ली मैंने भी.. मगर मुझे 5 मिनट विजय और रंगीला से अकेले में बात करनी है.. कुछ अर्जेंट है।
साजन- जा कर ले नई प्लानिंग.. मैं तो यहीं रहूँगा.. मुझे नहीं आता तेरी तरह चाल चलना.. मैं तो बस अपने लक के ऊपर यहाँ आया हूँ.. हा हा हा..
साजन को पता था कि अब क्या होगा क्योंकि रंगीला ने सारा गेम ऐसे सैट किया था कि किसी भी हाल में साजन नहीं हारेगा.. ऐसी प्लानिंग के रश्मि को भी अपनी तरफ़ कर लिया। वैसे अंजाने में ही सही मगर रश्मि रंगीला के मुँह की बात ही बोल रही थी। उसने कोमल के जरिए उसके दिमाग़ में ये बात भर दी थी।
अब जय ने दोनों को कोने में ले जाकर कहा- हमने जो इशारा बनाया था उसका क्या होगा?
रंगीला- अरे कुछ नहीं होगा.. हमें अब इशारे की नहीं दिमाग़ की जरूरत है.. तुम बस ध्यान से कार्ड्स चेंज करना और हम दोनों भी उस साजन को ऐसे कार्ड्स देंगे कि वो जीत ना पाए।
रंगीला ने जय को झूठी तस्सली देकर वापस वहीं ले आया।
विजय- चलो भाई अब सब बातें क्लियर हो गई हैं.. अब तो किसी को कुछ नहीं कहना है ना?
नीचे एक बड़ा सा गोल गद्दा बिछा हुआ था.. सब उस पर बैठे थे.. मगर जेम्स को इन्होंने एक आरामदायक कुर्सी पर बैठाया हुआ था.. जहाँ से वो सब को चुपचाप देख रहा था। उसके मन में तो बस लड्डू फूट रहे थे कि कब ये गेम ख़त्म होगा और कब उसको रश्मि की चूत के दीदार होंगे।
रंगीला- नहीं.. अब कुछ बोलना नहीं है.. बस एसीपी साहब के हाथों से गेम की शुरुआत हो जाए.. तो इनका भी सम्मान हो जाएगा.. आख़िर ये हमारे मेहमान जो हैं।
जेम्स- नहीं नहीं.. रंगीला जब सारे फैसले आप लोगों ने ले ही लिए.. तो अब ये औपचारिकता मत करो।
रश्मि- अरे सर.. आप नाराज़ क्यों हो गए.. सॉरी इन लोगों ने आपसे कुछ पूछा नहीं.. मगर अब आप कुछ कहना चाहो तो कह दो..
जय- हाँ सही है.. आपने कल हमारी बहुत हेल्प की थी.. अब आप ऐसे नाराज़ मत हो प्लीज़..
जेम्स- अरे मैं तो मजाक कर रहा था.. लाओ मैं कार्ड्स बाँट कर गेम को शुरू कर देता हूँ।
रंगीला- नहीं यार.. ऐसा नहीं होगा ग़लती मेरी है.. मैं ही भूल गया अब बस 2 मिनट मुझे बोलने दो प्लीज़।
जेम्स- क्या भूल गया बोलो तो..
रंगीला- दोस्तो, आप सब जेम्स को तो जानते ही हो.. ये एसीपी की पोस्ट पर हैं मगर अन्दर से ये बिल्कुल हमारी तरह शराब और शवाब के शौकीन है। आज हारने वाली लड़की को ये भी टेस्ट करेगा.. ये तो हम जानते हैं.. मगर इनकी मेहमाननवाज़ी के लिए मैंने एक आइडिया सोचा है.. अगर किसी को एतराज ना हो तो बता देता हूँ।
जय- अरे एतराज कैसा यार.. सर कौन सा रोज आते हैं यहाँ.. बोलो तुम..
रंगीला- गेम तो जैसे चलना ही वैसे ही चलेगा.. बस हर राउंड के बाद हारने वाली लड़की जो कपड़ा निकालेगी वो अगर जेम्स अपने हाथ से निकाले.. तो कैसा रहेगा?
साजन- वाह रंगीला.. क्या दूर की कौड़ी मारी है.. ऐसे गेम का रोमांच भी बढ़ जाएगा और हमारे साहब भी खुश हो जाएँगे।
जेम्स- अरे नहीं नहीं.. तुम लोगों के कहने से क्या होता है.. मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा.. क्या पता कोमल और रश्मि को ये पसन्द ना हो।
विजय- क्या जेम्स जब हारने के बाद ये साथ सोने को राज़ी हैं तो कपड़े निकलवाने में इनको क्या दिक्कत?
रश्मि और कोमल ने भी विजय की बात का समर्थन किया और जेम्स के चेहरे पर एक क़ातिल मुस्कान आ गई।
खेल तो अब शुरू हुआ है
जेम्स ने पहले राउंड के लिए कार्ड्स बाँट दिए रंगीला और विजय ने साजन से कार्ड बदल लिए और जय ने भी ऐसा ही किया।
जब कार्ड पलटे गए तो जय के पास बादशाह, गुलाम, 8 और साजन के पास दो बेगमें और 5 निकला।
साजन- यस यस.. क्यों जय क्या बोलता है.. जीत गया मैं?
जय को इस बात का दु:ख था कि पहले ही राउंड में वो हार गया.. मगर उसने अपने आप पर काबू रखा।
जय- बस बस.. ज़्यादा उछल मत.. अभी एक ही राउंड हुआ है।
साजन- उठो जेम्स साहब चीरहरण की रस्म पूरी करो.. रश्मि जी का कुर्ता निकाल कर इसके मादक जिस्म की झलक सबको दिखाओ।
जेम्स कुर्सी से खड़ा होकर रश्मि के पास आया.. तो रश्मि ने कहा- एक कपड़ा निकालना है.. तो पहले जींस निकाल दो आप..

साजन- ओये होये.. क्या बात है.. बड़ी जल्दी में है तू तो रश्मि.. डाइरेक्ट नीचे से नंगी हो रही है..
जय- साजन ये क्या बकवास है.. कुछ भी मत बोल..
साजन- ओह जय.. अब बस कर यार ये शराफत का नाटक बन्द कर.. हम यहाँ एंजाय करने आए हैं.. तू जीते या मैं.. मगर मज़ा सबको आने वाला है.. तो अब ये बातें ही महफ़िल का मज़ा बढ़ाएंगी समझे..
रंगीला- साजन ठीक बोल रहा है जय.. तू रश्मि के सामने ऐसी बातें सुनना पसन्द नहीं कर रहा.. मगर ज़रा सोच के तो देख.. वो अभी सबके सामने नंगी होगी.. जब उसको कोई शर्म नहीं तो तू क्यों भड़क रहा है?
साजन की बात सुनकर रश्मि थोड़ा शर्मा गई.. मगर उसने हिम्मत करके बोलने का सोचा- हाँ भाई जब ये गंदा खेल खेलने की प्लानिंग की.. तब आपको सोचना चाहिए था.. अब आप चुप रहो बस..
रश्मि थोड़ी गुस्सा होकर बोली और नीचे से बियर की बोतल उठा कर गटागट तीन-चार घूँट स्पीड से गटक गई।
साजन- जाओ भाई निकालो पैन्ट.. ज़रा इसकी गोरी टाँगों के दीदार तो करा दो।
जेम्स आगे बढ़ा उसने रश्मि का कुर्ता ऊपर किया और पैन्ट का हुक खोल कर धीरे-धीरे नीचे सरकाने लगा.. इस काम के दौरान जेम्स रश्मि की गाण्ड को अच्छे से दबा कर उसका मज़ा ले रहा था। जब पैन्ट घुटनों तक आ गई तो रश्मि ने कुर्ता नीचे कर दिया जिससे उसके पैर नंगे होने से बच गए।
पैन्ट निकल जाने के बाद रश्मि ऐसे बैठ गई कि लग ही नहीं रहा था वो नीचे से नंगी भी हुई है।
साजन- वाह जय वाह.. मान गया तेरे दिमाग़ को.. इसी लिए ये लंबा कुर्ता पहनाया है तूने.. एक राउंड हारने के बाद भी रश्मि सेफ है.. गुड गुड.. मज़ा आएगा.. इस खेल में..
जय कुछ नहीं बोला बस अपनी होशियारी पर मंद-मंद मुस्कुरा दिया।
दूसरा राउंड शुरू हुआ उसमें जय के पास 4-5-6 बन गए और साजन के पास 3 3 गुलाम बने.. वो हार गया।
जय- अब आएगा मज़ा साला.. बहुत अकड़ रहा था ना..
कोमल खड़ी हो गई और जेम्स ने उसको पूछा तो उसने टॉप निकालने को कहा.. तो बस जेम्स बड़े प्यार से उसके टॉप को अलग कर दिया और हल्का सा उसके मम्मों भी दबा दिया।
अब कोमल ब्लू ब्रा में सबके सामने बैठ गई। सबकी भूखी नजरें उसको घूरने लगीं। सभी के लौड़े पैन्ट में तंबू बना रहे थे.. खास कर जय उसके बड़े-बड़े खरबूजों को देख कर होंठों पर जीभ फेरने लगा.. जो शायद रश्मि को अच्छा नहीं लगा।
तीसरा राउंड.. फिर से साजन हार गया और इस बार जेम्स ने कोमल का स्कर्ट निकाल दिया। उसकी गोरी जांघें सबको पागल बना रही थीं। एक तो बियर का नशा.. ऊपर से ये मदमस्त करने वाली जिस्म की खुश्बू.. सबको पागल बना रही थी।
जय- वाह रे साजन.. ब्रा पैन्टी में तो तेरी बहन अलग ही जलवा दिखा रही है.. साला अब बस 2 राउंड और उसके बाद बूम बूम हा हा हा..
रश्मि- भाई ज़्यादा मत हँसो.. ये कार्ड्स गेम है.. कुछ भी हो सकता है.. आप बस गेम पर ध्यान दो।
सुंदर- हा हा हा हा.. अरे रश्मि तो डर गई.. इसका मुँह तो देखो..
सब हँसने लगे तो रश्मि थोड़ी गुस्सा हो गई और उसने बियर की बोतल खाली करके ज़ोर से रखी तो सब चुप हो गए और नेक्स्ट राउंड स्टार्ट हुआ।
अबकी बार साजन जीत गया और जय उसको बस देखता रहा।
साजन- ले हो गई बूम.. जेम्स जी जल्दी से कुर्ता निकाल दो.. अब बर्दाश्त के बाहर है.. ज़रा मैं भी जलवे देख लूँ।
रश्मि- नहीं.. मैं इस बार पैन्टी निकालूँगी.. जेम्स जी मेरी पैन्टी निकाल दीजिए।
साजन- आहह.. क्या बात है तू तो बड़ी सेक्सी है रे.. पहले नीचे से नंगी हो रही है.. आह्ह.. जल्दी करो जेम्स जी आह्ह.
साजन की बातें माहौल को और गर्म कर रही थीं, सुंदर और आनंद का तो बहुत बुरा हाल हो गया था।
जेम्स ने कुर्ता ऊपर किए बिना अपना हाथ रश्मि की पैन्टी पर लगा दिया.. वो उसकी चूत को हल्का सा दबा कर अपनी उंगली उसकी फाँक पर फिराने लगा।
रश्मि की नजरें जेम्स से मिलीं तो वो नशे में थी.. और अब उसकी उत्तेजना भी धीरे-धीरे बढ़ रही थी।
जेम्स ने अच्छे से उसकी चूत को दबा कर जायजा लिया.. उसके बाद पैन्टी निकाल कर साइड में रख दी।
रश्मि दोबारा सेफ होकर बैठ गई मगर उसकी नजरें बस जेम्स को देख रही थीं, वो समझ गई थी कि जेम्स उसका दीवाना हो गया है।
साजन- ओह्ह.. ये तो फिर बच गई कुछ दिखा ही नहीं.. जेम्स जी जल्दी कार्ड्स बाँटो.. अबकी बार देखता हूँ कैसे बच पाती है.. हा हा हा..
जय- साले अब बहुत हो गया.. इस बार तेरी बहन की ब्रा ना निकलवा दी तो कहना तुम।
विजय- भाई गुस्सा मत दिखाओ.. गेम पर ध्यान दो.. ये क्या हो रहा है ऐसे तो साजन जीत जाएगा और रश्मि सबके सामने बिना कपड़ों के आ जाएगी.. आप समझो बात को।
रंगीला- यस जय ठंडे दिमाग़ से खेलो तुम हार भी सकते हो।
जय बेचारा कहाँ जानता था कि आज वो कैसे भी खेल ले.. हारना तो उसको ही होगा और हुआ भी वैसा ही अगला राउंड भी जय हार गया।
रश्मि- ओह्ह नो.. भाई आपने तो कहा था ज़्यादा से ज़्यादा दो राउंड हारोगे और तब तक गेम फिनिश.. मगर आप तो फिर हार गए.. अब क्या होगा?
साजन- होगा क्या मेरी जान.. नीचे से तो तू पहले ही पूरी नंगी हो चुकी है.. अब ये कुर्ता निकाल कर अपने हुस्न को हमें दिखा दे जल्दी से.. हा हा हा हा हा हा..

साजन किसी शैतान की तरह हँस रहा था और जय चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा था।
रश्मि- नहीं अब मैं कुर्ता नहीं निकालूंगी बस बन्द करो ये खेल।
साजन- अरे मेरी जान.. ऐसे कैसे नहीं निकालोगी.. ये खेल बीच में छोड़ने का मतलब पता है ना.. तेरा भाई हार जाएगा और तुझे आज रात के लिए सबकी दुल्हन बनना होगा।
जय- चुप कर साले कुत्ते.. बहुत सुन ली तेरी बकवास.. जा नहीं खेलता.. मैं आगे जो उखाड़ना है.. तू उखाड़ ले मेरा.. साला अब अगर मेरी बहन के बारे में एक शब्द भी बोला ना.. तो हलक से ज़ुबान बाहर निकाल दूँगा।
जय की बातों से माहौल एकदम गर्म हो गया, सब अचम्भित हो गए कि अब क्या होगा?
विजय- भाई इतना गुस्सा क्यों आ रहा है.. आपको हाँ.. जब मैंने बार-बार चेतावनी दी थी.. तब क्या कहा था कि जो होगा देखा जाएगा.. अब कहाँ गई.. वो जय खन्ना की ज़ुबान हाँ? बोलो अब जो हो रहा है.. वो पूरा होगा। आप ज़ुबान से फिर सकते हो.. मैं नहीं समझे.. साजन को पता था आप ऐसा कुछ करोगे.. तभी इसने पहले ही मुझसे ज़ुबान ले ली थी कि अगर गेम बीच में रोका या हारने के बाद कोई नाटक किया तो मुझे क्लब में सबके सामने थूक कर चाटना होगा। अब ये बात तुम सुन लो.. मैं अपनी ज़ुबान से नहीं फिर सकता.. समझे आप?
जय- विजय तू मेरा भाई होकर इस कुत्ते का साथ दे रहा है और ये ज़ुबान वाली बात मुझे अब बता रहा है.. क्यों विजय क्यों?
रंगीला- जय सिर्फ़ विजय ही नहीं.. मैं भी साजन के साथ हूँ.. ये गेम वाली बात शुरू हुई तभी सब क्लियर हो गया था। अब तुम और रश्मि ऐसे पीछे नहीं हट सकते।
साजन- वेट वेट.. आपस में मत लड़ो तुम.. अगर जय पीछे हटना चाहता है तो हट सकता है.. मगर एक शर्त पर.. मेरा थूक इसे चाटना होगा यहीं सबके सामने..
रश्मि- साजन कुत्ते.. वो मेरा भाई है.. मर जाएगा मगर ज़ुबान से नहीं जाएगा.. वो तो बस मेरे लिए ये सब कर रहा है और सुन.. मैं अब कहती हूँ ये गेम पूरा होगा और तू कौन सा अभी जीत गया.. हाँ अभी एक राउंड बाकी है समझा?
जय ने रश्मि को कहा- वो देख लेगा। 
मगर रश्मि भी तो उसकी ही बहन थी वो कहाँ मानने वाली थी। उसने जय को अपनी कसम दे दी और जेम्स से कुर्ता उतारने को कहा।
जेम्स- सबका बोलना हो गया तो अब मेरी सुनो.. ये गेम पूरा होगा और मैं अपनी तरफ़ से रश्मि को एक मौका देता हूँ.. इस बार वो कुर्ते की बजाए अपनी ब्रा निकाल दे.. ताकि उसका जिस्म अब भी सबके सामने ना आए.. अगर जय जीत गया तो ये ढकी रहेगी.. वरना पूरी नंगी हो जाएगी.. अब इस बात पर किसी को एतराज तो नहीं है ना.?
जेम्स की बात सुनकर रश्मि के दिल में उसके लिए अच्छी इमेज बन गई, उसने आँखों से इशारे में उसको ‘थैंक्स’ कहा।
रंगीला- अरे बहुत अच्छा.. जेम्स ये बात कोई ना माने.. ऐसे-कैसे हो सकता है। क्यों साजन क्या कहते हो?
साजन- वैसे तो ये रूल के खिलाफ है.. मगर आप मेहमान हो तो मान लेता हूँ। फिर भी एक बात बताओ बिना कुर्ता निकाले.. आप ब्रा कैसे निकालोगे?


जेम्स- थैंक्स.. कि तुमने मेरी बात मानी.. अब कैसे निकालूँगा.. ये भी सुन लो.. मैं सामने कमरे में रश्मि के साथ जाऊँगा.. वहाँ निकालूँगा और हाँ कोमल भी मेरे साथ होगी.. ताकि रश्मि को डर जैसी फीलिंग्स ना आए।
जेम्स की बात सुनकर सबने उसकी तारीफ की कि वाकयी जेम्स ने बहुत अच्छी बात कही है और रश्मि तो बस उसकी गुलाम ही हो गई।
रश्मि- थैंक्स जेम्स जी.. मगर कोमल हमारे साथ नहीं जाएगी.. मुझे आपसे कैसा डर.. आप तो मेरी इज़्ज़त को ढकने वाले हो.. मुझे आप पर पूरा भरोसा है।
रंगीला- हाँ जेम्स रश्मि ने सही कहा.. आप पर शक करना आपकी तौहीन है.. आप जाओ और जल्दी से ब्रा निकाल कर ले आओ.. ताकि गेम आगे बढ़ाया जा सके।
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Reply
06-27-2018, 12:11 PM,
#68
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रश्मि खड़ी हुई तो उसकी गोरी टाँगें देख कर साजन ने आह्ह.. भरी। उसके पीछे जेम्स भी सामने के कमरे में चला गया।
रश्मि- थैंक्स जेम्स.. अपने मेरे लिए ये सब किया.. अब आप जल्दी से अपना काम कर लो।
जेम्स- अरे नहीं.. मैं मुँह उधर कर लूँगा तुम खुद निकाल के दे दो।
रश्मि- जेम्स जी.. बुरा मत मानना आप इतनी शराफत मत दिखाओ.. पैन्टी उतारते वक़्त आपके इरादे मैं समझ गई थी और वैसे भी अगर मैं हार गई तो आप मेरे साथ सेक्स तो करोगे ना.. तो अब ये शराफत क्यों?
जेम्स- हाँ सही कहा तुमने.. जब से तुम्हें देखा है.. मैं बेकरार हूँ.. वैसे तुम भी जितनी सीधी दिखती हो.. उतनी हो नहीं।
रश्मि- ऐसे घटिया गेम शो पर कोई सीधी लड़की आएगी क्या? अब जल्दी करो और निकाल दो में ब्रा..
जेम्स आगे बढ़ा उसने रश्मि का कुर्ता निकाल दिया और उसके मादक जिस्म को देख कर उसकी सांस थम गई।
रश्मि सिर्फ़ ब्रा में उसके सामने खड़ी थी उसकी चूत का उभार देख कर जेम्स ने पैन्ट के ऊपर से लौड़े को दबाया और धीरे से रश्मि के पास जाकर खड़ा हो गया।
जेम्स ने रश्मि को पकड़ कर अपने से चिपका लिया और पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
जेम्स बड़े आराम से ये सब कर रहा था जिससे रश्मि की उत्तेजना भी बढ़ रही थी.. मगर उसने खुद को रोके रखा और बस मज़ा लेती रही।
जेम्स ने ब्रा अलग कर दी तो रश्मि के मम्मों नंगे हो गए.. जिन्हें देख कर जेम्स अपना होश खो बैठा और रश्मि के मम्मों को दबाने लगा।
रश्मि ने जेम्स को पीछे धकेला और जल्दी से अपना कुर्ता पहन लिया।
रश्मि- सारा मज़ा अभी ले लोगे क्या.. चलो बाहर सब वेट कर रहे हैं।
रश्मि ने जिस अदा के साथ ये बात कही थी.. उससे साफ पता लग रहा था वो उत्तेजना के भंवर में फँस गई है और जेम्स का लौड़ा लेने को तैयार है।
रश्मि वापस अपनी जगह बैठ गई और पीछे से जेम्स उसकी ब्रा हाथ में लिए हुए बाहर आया।
साजन- हे जेम्स जी.. आप तो बड़े लकी हो हमने यहाँ बहनों को दांव पर लगा रखा है.. और आप उनके मज़े ले रहे हो।
रंगीला- साजन कुछ भी मत बोल.. ये हमारे मेहमान हैं.. अब इतना मज़ा लेना तो इनका बनता है ना।
साजन- अरे मैं तो मजाक कर रहा हूँ.. बस ये ब्रा मुझे दे दो.. ताकि इसको सूंघ कर मेरा जोश और बढ़ जाए।
रश्मि- बस बस.. अपनी हद में रहो.. ऐसी कोई बात नहीं हुई थी.. ओके.. अब आगे का गेम शुरू करो।
रश्मि के मन से अब डर मानो बिल्कुल निकल गया था.. शायद उसने हार मान ली थी और अब वो बस मस्ती के मूड में थी।
फिर से कार्ड्स बनते और इस बार के कार्ड्स देख कर जय के चेहरे पर ख़ुशी झलक आई.. क्योंकि उसके पास दोनों से कार्ड्स बदल कर 7 8 9 बन गए थे.. मगर जब साजन ने अपने तीन गुलाम दिखाए.. तो उसके होश उड़ गए.. वो गेम हार चुका था।
जय- ओह्ह नो.. ये कैसे हो गया.. नहीं ऐसा नहीं हो सकता.. तुम्हारे पास तीन गुलाम कैसे आ सकते हैं विजय.. तुमने इसको कैसे ये कार्ड्स दे दिए.. हाँ.. बोलो?
रंगीला- नहीं यार.. मैंने तो इसको 5 दिया था.. ये कैसे हो गया?
विजय- हाँ भाई और मैंने 3 दिया था।
साजन- ओये ज़्यादा अकल मत लड़ाओ.. मैंने तुम दोनों के कार्ड्स बदल कर तुम्हें वापस दे दिए.. मेरे पास यही 3 कार्ड्स आए थे.. हा हा हा हा..
जय- नहीं ये ग़लत है.. तुम ऐसा नहीं कर सकते.. तुम्हें इनसे कार्ड्स बदलने थे ओके..
साजन- हैलो.. ऐसी कोई बात नहीं हुई थी समझे.. बस कार्ड्स बदलने थे.. मैंने दोनों के बदल दिए सिंपल..
वहाँ बहुत देर इस बात पर बहस चली आख़िर जीत साजन की हुई.. क्योंकि रंगीला और विजय भी उसका साथ दे रहे थे।
जय- अब तुम सब कह रहे हो तो ठीक है.. मैं अपनी हार मान लेता हूँ मगर साजन रश्मि के साथ कुछ मत करो तुम जितने पैसे चाहो ले लो..
साजन- अपुन ये सब पैसे के लिए नहीं किया समझे.. तेरी अकड़ मुझे तोड़नी है और वो टूटेगी.. तेरी बहन की चीख के साथ.. जब मेरा लौड़ा उसकी चूत में जाएगा.. हा हा हा..
साजन अब खुले शब्दों में बोल रहा था और उसके दोस्त उसका साथ दे रहे थे मगर जय को रंगीला ने चुप रहने का इशारा किया।
जय भी समझ गया था कि अब बोलने से कोई फायदा नहीं.. उसने रश्मि की तरफ़ देखा तो उसने भी हामी भर दी कि जो हो रहा है होने दो..
रश्मि बार-बार जेम्स की तरफ़ देख रही थी.. तो रंगीला को शक हुआ.. कहीं ये पहला मौका उसको ना दे दे..
रंगीला- अब सब चुप रहो और जेम्स तुम रश्मि का आख़िरी कपड़ा निकाल कर गेम को पूरा करो.. उसके बाद रश्मि उस लड़के का नाम बताएगी.. जो उसकी पसन्द का होगा।
साजन- हाँ भाई जल्दी कर.. दिखा दे इसका जिस्म.. आह्ह.. मैं तो कब से बस इसी वक़्त का इन्तजार कर रहा हूँ।
रंगीला- एक बात और सुन लो.. रश्मि सिर्फ़ उसी का नाम लेगी जो गेम से रिलेटेड हो.. जेम्स का नंबर बाद में आएगा।
रंगीला की बात सुनकर रश्मि ने गुस्से में उसकी तरफ़ देखा.. वो कुछ कहती तभी विजय ने भी उसकी ‘हाँ’ में ‘हाँ’ मिला दी.. तो वो चुप ही रही।
जेम्स आगे बढ़ा और रश्मि का कुर्ता भी निकाल दिया.. अब वो सब के सामने एकदम नंगी खड़ी थी। उसने जब देखा कि सबकी नजरें उसके जिस्म को घूर रही हैं.. तो उसने शर्म के मारे नजरें झुका लीं।
साजन- वाउ यार.. क्या पटाखा माल है ये… इसकी चुदाई में तो आज बड़ा मज़ा आने वाला है..
कोमल- साजन.. तुझे ज़रा भी शर्म नहीं है मेरे सामने तू ऐसी गंदी बातें कर रहा है?
साजन- अबे चुप कर साली.. तू यहाँ कोई सत्संग सुनने आई थी कि क्या.. हाँ तू ऐसे अधनंगी क्यों खड़ी है.. चल अपने कपड़े पहन जल्दी से.. आज तो बस रश्मि रानी ही नंगी रहेगी।
विजय- साजन तुम जीत गए.. वो ठीक है मगर हमारे सामने ऐसी बातें मत करो.. जो कहना है कमरे में जाकर कहना ओके..
साजन- मेरी जान.. जल्दी से बता दे तू पहले किसकी दुल्हन बनना चाहेगी.. आह्ह.. मेरा लौड़ा कब से फुंफकार मार रहा है.. आह्ह.. बता ना जान.. आह्ह..
रश्मि- साजन.. भले ही तू जीत गया होगा मगर फिर भी मैं तुझे पहले टच नहीं करने दूँगी.. और ना ही तेरे इन कुत्ते दोस्तों का नाम लूँगी।
साजन- अच्छा इतनी अकड़.. तो बता मेरी जान बाद में बचा ही कौन है.. ये तेरे दो भाई या उनका जिगरी दोस्त रंगीला.. हा हा हा..
साजन की बात से रश्मि को बहुत गुस्सा आ रहा था, उसने गुस्से में ही बोला- हाँ रंगीला ही जाएगा मेरे साथ ओके..
रश्मि की बात सुनकर जय उसकी तरफ़ देखने लगा कि ये रश्मि ने क्या किया और फिर उसने रंगीला की तरफ़ देखा.. उसको लगा शायद वो मना कर देगा।
रंगीला- बहुत खूब रश्मि.. मुझे तुमसे यही उम्मीद थी। इस साजन से ज़्यादा मज़ा मैं तुम्हें दूँगा और तेरी ऐसी मस्त चुदाई करूँगा कि तू बस याद करेगी।
जय- रंगीला.. तू ये क्या बकवास कर रहा है.. हाँ रश्मि मेरी बहन है..
रंगीला- अरे यार.. बुरा क्यों मान रहा है.. ये साजन उसको चोदेगा.. तो तू खुश हो जाएगा क्या..? और तेरा खास दोस्त करेगा तो तुझे प्राब्लम है साले.. ये गेम तू कब से खेल रहा है.. आज तक नहीं सोचा कि जिन-जिन लड़कियों को तू यहाँ लाता था.. वो भी किसी की बहन होती थीं.. अब जो हो रहा है चुपचाप देख..
रंगीला के बदले तेवर देख कर जय की गाण्ड फट गई.. वो कुछ बोलने की हालत में नहीं था।
रंगीला आगे बढ़ा और रश्मि के पास जाकर उसको गोद में उठा लिया।
रश्मि बस उसको देखती रही और वो उसको दूसरे कमरे में ले गया।
कोमल ने अपने कपड़े पहन लिए थे और वो एक कमरे में चली गई।
साजन अपने दोस्तों के साथ बियर पीने में मस्त हो गया और साथ में वो गंदी-गंदी बातें भी कर रहा था।
साजन- साली रंडी.. पहले रंगीला से चुदेगी.. अब देखना थोड़ी देर बाद उसकी चीखें बाहर आने वाली हैं।
जेम्स भी उनके साथ बियर पीने बैठ गया था।
जय- विजय, यह क्या हो गया.. हाँ.. देखो रंगीला हमारा खास दोस्त है.. वो क्या बोलकर गया है अभी?
विजय- तुम इतने टेन्शन में क्यों हो.. वो ऐसा मौका कोई नहीं छोड़ता… समझे.. और वैसे भी ये खेल तुम्हारा ही जमाया हुआ है.. अब भुगतो..
जय को तो कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि अब वो क्या करे.. वो एक कोने में बैठ गया और बियर पीने लगा.. मगर बार-बार वो उस कमरे की तरफ़ देख रहा था.. जिसमें रश्मि और रंगीला गए थे।
उधर रंगीला ने रश्मि को बिस्तर पर लेटा दिया और अपने कपड़े निकालने शुरू कर दिए।
रश्मि- बहुत जल्दी में हो तुम.. अपने दोस्त की बहन को कर पाओगे?
रंगीला- अब क्या बताऊँ मेरी जान.. तू है ही ऐसी माल कि देर तक बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा है.. वैसे भी तेरी नज़र तो जेम्स पर थी.. मगर मैंने बात को संभाल लिया और अब देख पहला मौका मुझे मिला है।
रश्मि- जेम्स है ही ऐसा.. कि उसको देख कर मन मचल सा गया था मेरा.. और वैसे भी कपड़े निकालते टाइम उसने हरकतें ऐसी कीं कि बस मैं उसकी तरफ़ खिंचने लगी।
रंगीला ने बातों के दौरान सारे कपड़े निकाल दिए.. बस अंडरवियर नहीं निकाला।
रश्मि की निगाहें रंगीला को लौड़े के उभार को गौर से देख रही थीं.. उसको वो काफ़ी बड़ा लग रहा था।
रंगीला- ऐसे क्या देख रही हो जान?
रश्मि- देख रही हूँ काफ़ी बड़ा लग रहा है.. अब इसे आज़ाद कर दो तो ठीक से देख सकूँ!
रंगीला- इतनी भी क्या जल्दी है मेरी जान.. पहले थोड़ा प्यार तो कर लूँ तुम्हें.. उसके बाद देखना..
इतना कह कर रंगीला बिस्तर पर चढ़ गया और रश्मि के ऊपर लेट कर उसके होंठ चूसने लगा.. उसके मम्मों को दबा के मज़ा लेने लगा।
रश्मि भी रंगीला का साथ दे रही थी उसकी उत्तेजना बढ़ गई थी। रंगीला अब रश्मि के निप्पल को चूस कर मज़ा लेने लगा था।
रश्मि- आह्ह.. उफ़फ्फ़.. रंगीला प्लीज़ आराम से करो ना.. आह्ह.. नहीं आह्ह..
रंगीला तो जैसे बरसों का प्यासा था.. बस वो रश्मि के जिस्म को चूस कर सारा रस निकाल देना चाहता था।
दस मिनट तक जबरदस्त चुसाई के बाद रश्मि अब काम वासना की आग में जलने लगी थी, अब उसकी चूत को लौड़ा ही शान्त कर सकता था।
रश्मि- इसस्स.. आह्ह.. रंगीला.. अब बस भी करो.. आह्ह.. घुसा दो अपना लौड़ा मेरी चूत में.. आह्ह.. जल्दी..
रंगीला ने रश्मि को कहा- वो बिना हाथ लगाए उसका अंडरवियर निकाले.. तभी वो उसकी चूत को शान्त करेगा।
रश्मि तो काम वासना में जल रही थी फ़ौरन मान गई। रंगीला खड़ा हो गया और रश्मि अपने दांतों से अंडरवियर पकड़ कर निकालने की कोशिश करने लगी।
थोड़ी कोशिश के बाद वो नीचे कर पाई और रंगीला का 8″ का नाग फुँफकारता हुआ उसके सर से टकराया.. जिसे देख कर रश्मि के होंठों पर मुस्कान आ गई, वो उसको हाथ लगा कर देखना चाहती थी.. मगर रंगीला जल्दी से पीछे हट गया।
रश्मि अचम्भित सी होकर रंगीला को देखने लग गई- क्या हुआ छूने दो ना.. कितना मस्त लौड़ा है तुम्हारा..
रंगीला- मेरी जान ऐसे नहीं.. तुम अपने नर्म होंठों से छूकर इसकी ओपनिंग करो।
रश्मि ने बोलने के साथ ही अपने होंठ लौड़े पर रख दिए और किस करने लगी। वो धीरे-धीरे किस करती हुई अपनी जीभ से सुपारा चाटने लगी।
रंगीला- आह्ह.. ऐसे ही करो डार्लिंग.. मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. चूस ले.. अब आ लेले पूरा मुँह में आह्ह..
रश्मि बड़े प्यार से लौड़े को चूस रही थी.. उसके गले तक पूरा लौड़ा घुसा कर रंगीला उसके सर को पकड़ कर चोद रहा था।
रंगीला- आह्ह..ह ले आह्ह.. चूस आह.. मज़ा आ रहा है आह्ह…
उधर बाहर जय बार-बार उस कमरे की ओर देख रहा था जिसमें रश्मि और रंगीला गए थे।
आनंद- साजन भाई.. वो देखो कैसे जय बार-बार उधर देख रहा है।
साजन- अबे जय क्या सोच रहा है अभी तो रंगीला उसको लौड़ा चुसा रहा होगा.. थोड़ी देर रुक इसकी रंडी बहन की चीखें आती होगीं.. हा हा हा हा..
जय गुस्से में उसको मारने आगे बढ़ा तो विजय ने उसको पकड़ लिया।
विजय- कहाँ जा रहे हो.. अब तुम ये गुस्सा काबू में रखो।
जय- उस कुत्ते को देखो वो रश्मि को क्या बोल रहा है..
विजय- तो क्या ग़लत बोल रहा है.. एक रंडी को रंडी नहीं कहेगा तो क्या कहेगा हाँ बोलो?
विजय का अंदाज अचानक बदल गया था उसकी आवाज़ में कड़कपन आ गया था।
जय- तू कैसी बातें कर रहा है.. वो हमारी बहन है।
विजय- चुप साला कुत्ता कहीं का.. वो बहन होगी तेरी.. समझे मेरे लिए तो वो एक रंडी है बस.. और आज ये सब उसको यहाँ पर चोद कर उसे पक्की रंडी बना देंगे।
जय की समझ के बाहर बात हो गई थी कि अचानक ये विजय को क्या हो गया।
जय- विजय तू होश में तो है.. ये कैसी बातें बोल रहा है तू.. हाँ.. वो सिर्फ़ मेरी बहन है.. तेरी कुछ नहीं?
विजय- होश में ही बोल रहा हूँ कुत्ते.. आज तक जो था वो सब नाटक था। ये बरसों की आग जो मेरे दिल में लगी थी.. आज वो लावा बनकर बाहर आएगी।
जय- तू कहना क्या चाहता है?
विजय- बदला लेना चाहता था मैं तेरे उस कुत्ते बाप से.. और तेरी इस रंडी बहन से बरसों बाद आज मुझे मौका मिला है.. हा हा हा हा हा..
सब के सब चौंक गए कि यह क्या हो रहा है.. ये सीन तो कहानी से अलग चल रहा है.. विजय के मुँह से ऐसी बातें सुनकर सब हैरान थे।
अन्दर से रानी और कोमल भी बाहर निकल आई थीं।
जय- तू बदला ले रहा है हमसे.. मगर किस बात का बदला.. हाँ बोल?
विजय- बताऊँगा.. सबर कर.. पहले रंगीला को.. तेरी रंडी बहन को चोदकर बाहर आ जाने दे.. उसके बाद तुझे सब बताऊँगा।
जय गुस्सा हो गया और विजय की तरफ़ लपका.. मगर जेम्स ने उसको पकड़ लिया और कुर्सी पर बैठा दिया।
जेम्स- इतनी भी क्या जल्दी है जय बाबू.. पहले हमें रश्मि की ठुकाई तो कर लेने दो.. उसके बाद तेरी पिटाई भी कर देंगे हम..
विजय- रानी वहाँ क्या खड़ी है.. जल्दी रस्सी लेकर आ.. इस कुत्ते को बाँध कर बैठा दो यहाँ.. ताकि उस रंडी की चुदाई में रुकावट ना आए।
जेम्स- जा रानी.. जल्दी जा.. साला बहुत ताक़त लगा रहा है।
रानी भाग कर रस्सी ले आई और जेम्स ने जय को कुर्सी से बाँध दिया और सब उसके पास आ गए।
साजन- विजय ये सब चक्कर क्या है.. मेरा तो सर घूम रहा है?
विजय- चुप साले.. तेरे जैसे आदमी को विजय द ग्रेट का प्लान कहाँ समझ में आएगा.. ये सब कुछ मेरा प्लान था समझे तुम?
साजन- मतलब तुम और रंगीला मिलकर ये सब कर रहे थे?
विजय- हाँ और आज के दिन के लिए मैंने बहुत इन्तजार किया है।
इनकी बातें होती रहेगी.. हम थोड़ा रश्मि को भी देख लेते हैं।
रश्मि लौड़े को मज़े से चूस रही थी और रंगीला ‘आहें..’ भर रहा था। रंगीला ने लौड़ा बाहर निकाल लिया और रश्मि को लेटा दिया।
रश्मि- आह्ह.. अब घुसा दो.. आह्ह.. बर्दाश्त नहीं हो रहा मुझसे..
रंगीला ने रश्मि के पैरों को मोड़ा और लौड़ा चूत पर सैट करके जोरदार धक्का मारा.. जिससे पूरा लौड़ा जड़ तक चूत में समा गया और रश्मि के मुँह से बहुत ज़ोर से चीख निकली.. जो बाहर सबको सुनाई दी।
साजन- ले भाई जय तेरी बहन की चूत फट गई.. गाड़ दिया झन्डा किले पर रंगीला ने.. हो गया उसकी चूत का मुहूरत.. हा हा हा हा!

जय- विजय प्लीज़.. मुझे खोल दे इन कुत्तों के हवाले रश्मि को मत कर.. देख वो कैसे चिल्ला रही है।
विजय- चुप साला.. बहनचोद कहीं का.. जिस दिन तूने उसकी सील तोड़ी थी.. उस दिन नहीं सोचा उसको कितना दर्द हुआ होगा.. जो आज उसके लिए रहम की भीख माँग रहा है।
विजय एक के बाद एक झटके जय को दे रहा था और साथ ही साथ बाकी सब भी यह सुनकर चौंक गए थे।
जय- तत..तू यह क्या बकवास कर रहा है हाँ?
विजय- बताऊँगा सब बताऊँगा.. मगर उस रंडी के सामने बताऊँगा.. पहले उसको ठीक से चुद तो जाने दे।
उधर रश्मि दर्द से कराह रही थी और रंगीला स्पीड से उसको चोद रहा था।
रश्मि- आह्ह.. रंगीला आह्ह.. आराम से.. करो ना.. उफ़फ्फ़ एक साथ ही पूरा घुसा दिया.. आह्ह.. मेरी जान निकाल दी।
रंगीला- तू कौन सी कुँवारी है… तेरी चूत तो खुली हुई है.. अब यह नाटक बन्द कर और पनी चूत चुदाई का मज़ा ले।
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06-27-2018, 12:11 PM,
#69
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रश्मि समझ गई कि रंगीला को पता लग गया है.. अब वो ज़्यादा बोलेगी तो उसका और जय का भांडा फूट जाएगा। इसलिए वो बस चुपचाप लौड़े के मज़े लेने लगी। कोई 20 मिनट तक रंगीला ने उसको अलग-अलग पोज़ में चोदा तब जाकर वो ठंडा हुआ।
रश्मि- आह.. मज़ा आ गया.. सच्ची.. तुम्हारा लौड़ा बहुत मजेदार है.. मोटा भी और लंबा भी है.. आह्ह.. अब प्लीज़ कुछ ऐसा करो वो तीन कुत्ते मुझे ना चोद पाएं..
रंगीला- नो बेबी.. ऐसा नहीं हो सकता.. चुदाई तो तुम्हें करवानी होगी.. अब प्यार से या जबरदस्ती से.. यह फैसला तुम्हारा है.. ओके बाय..
रंगीला ने कपड़े पहने और कमरे के बाहर आ गया।
साजन- अरे वाह बॉस.. क्या झटका मारा आपने.. साली की चीख बाहर तक आई थी.. सुन कर ही मज़ा आ गया।
जय- कुत्तों मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोड़ूंगा.. और रंगीला तू तो मेरा दोस्त है.. फिर भी इनका साथ दे रहा है?
रंगीला- चुप साले.. किसका दोस्त कैसा दोस्त.. हाँ विजय, तूने इसे बताया नहीं क्या.. ये सब हमने क्यों किया है?
विजय- थोड़ा सा बताया है.. बाकी तू बता दे.. बड़ी जल्दी है इसे हा हा हा..
रंगीला- साले, आशा याद है ना तुझे.. उसका इंतक़ाम लेने के लिए मैं तड़प रहा था.. एक दिन नशे में मैंने ये सब विजय के सामने बोल दिया और ये भी किसी ऐसे मौके की तलाश में था। बस उसी दिन हमने सोचा कि मिलकर तुमसे और रश्मि से बदला लेंगे और प्लान के मुताबिक मैंने हॉस्टल में जाल बिछाया कि रश्मि को थोड़ा बिगाड़ कर उसका वीडियो बना लेंगे.. बाद में उस वीडियो के जरिए उससे बदला लेंगे.. मगर वो रंडी हाथ नहीं आई.. तो विजय ने दूसरा प्लान बनाया.. जिससे सबका बदला एक साथ पूरा हो जाए। बस ये साजन को तैयार किया.. ये गेम सब कुछ हमारे हिसाब से फिक्स किया हमने.. और तू साला चूतिया इसमें फँस गया.. हा हा हा हा हा..
विजय- ना ना.. तू कुछ मत बोल.. मैं जानता हूँ तेरे दिमाग़ में क्या चल रहा है.. मैं किस बात का बदला लेना चाहता हूँ.. यही ना.. तो साले ये तेरे उस कुत्ते बाप और रंडी बहन से पूछना तू… तेरे हरामी बाप ने मेरी माँ की लाइफ बर्बाद कर दी और इस रंडी ने मेरी माँ को बार-बार जलील किया.. उसको रंडी कहा.. तभी मैंने सोच लिया था कि इसको रंडी का मतलब में समझाऊँगा.. इसीलिए ये सब किया..
जय- इसका मतलब ये गेम भी फिक्स था.. मुझे सबने मिलकर हराया है.. और ये कोमल भी शायद नकली है..
साजन- हाँ रे.. मेरे भोले दोस्त ये कोई मेरी बहन नहीं है.. कॉलगर्ल है और तू इसके लिए अपनी सग़ी बहन को ले आया.. हा हा हा हा..
रंगीला- जाओ साजन तुम तीनों साथ जाओ एक-एक करके टाइम खराब मत करो..
साजन- ठीक है बॉस.. जैसा आपका हुकुम मगर ये विजय साथ था.. ये बात हमको क्यों नहीं बताई..
रंगीला- तुम्हें याद है.. मैंने कहा था ताश में 4 इक्के होते हैं और हम चारों वो इक्के हैं।
साजन- हाँ बॉस याद है अच्छे से..
रंगीला- तो बस हम चार इक्के हैं और इस गेम का असली खिलाड़ी विजय है.. ये सब इसके दिमाग़ का खेल है..
रंगीला ने शुरू से अब तक की सारी कहानी बताई कि कैसे रश्मि को नशा देकर जय के करीब ले गया.. वो एसी खराब होना विजय का जय को बार-बार मना करना ताकि इसको जरा भी शक ना हो.. सब कुछ एक प्लान था इनका..
जय की तो गाण्ड फट गई ये सब सुनकर… वो कुछ बोलने की हालत में नहीं था..
रानी उसके पास आई और एक तमाचा उसके गाल पर जड़ दिया।
रानी- आशा को मारा तुमने कुत्ते.. अब भुगत अपने किए की सज़ा..
जेम्स- अरे बस कर.. मेरी बुलबुल अभी नहीं.. पहले इसकी बहन को चुद जाने दे.. उसके बाद मार लेना इसको अभी तो मेरा लौड़ा तुझे देख कर मचल रहा है.. चल थोड़ा चूस दे..
विजय- जाओ तुम लोग और मज़ा करो.. तब तक मैं कोमल के साथ थोड़ी मस्ती कर लेता हूँ.. बहुत सुना है इसके बारे में आज उसको भी टेस्ट करके देख लेता हूँ..
साजन- ठीक है भाई.. आप भी मज़ा करो तब तक उस रंडी को हम मसल कर आते हैं।
रंगीला- यार जेम्स बुरा ना लगे तो मैं भी रानी को थोड़ा सा प्यार करना चाहूँगा।
जेम्स- अरे इसमें बुरा क्या लगना.. ये कौन सी मेरी बीवी है.. आ जा तू भी साथ में मज़ा करेंगे..
रंगीला- बहुत खूब यार.. चल चल.. और तुम लोग सुनो.. रश्मि को अभी कुछ मत बताना.. पहले सब मिलकर उसका मज़ा ले लो.. उसके बाद ही बताएँगे कि उसके साथ क्या हो रहा है.. और इस कुत्ते के मुँह पर पट्टी बाँध दो.. ताकि ये साला शोर ना मचा सके..
रश्मि बिस्तर पर लेटी हुई सोच रही थी कि अब साजन आएगा.. तो उसके साथ वो कैसे पेश आएगी.. तभी वो तीनों अन्दर आ गए..
रश्मि- आह्ह.. हैलो.. ये क्या है तुम एक साथ क्यों आए हो? हाँ?
साजन- सुना है तू बहुत बड़ी रंडी है.. तो हमने सोचा एक-एक करके तुझे मज़ा नहीं दे पाएँगे.. इसी लिए एक साथ आ गए..
रश्मि- जाओ यहाँ से.. नहीं मैं किसी को हाथ लगाने नहीं दूँगी हाँ।
साजन उसके पास गया बोला- चुप साली छिनाल.. अब यहाँ तेरी नहीं.. हमारी मर्ज़ी चलेगी.. प्यार से चुदवा ले.. नहीं साली तुझको हम तड़पा-तड़पा कर चोदेंगे..

रश्मि भी जिद्दी थी वो कहाँ मानने वाली थी.. मगर वो अकेली उन तीन के सामने कहाँ टिक पाती.. आनंद और सुंदर ने उसके हाथ पकड़ लिए और साजन ने उसकी चूत को चूसना शुरू कर दिया। वो जानता था.. एक बार ये गर्म हो जाए तो अपने आप लाइन पर आ जाएगी और हुआ भी वैसा ही.. थोड़ी देर बाद रश्मि उत्तेजित हो गई..
रश्मि- आह्ह.. इससस्स.. आह.. मेरे हाथ छोड़ो आह्ह.. चूसो आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. कुछ हो रहा है.. आह्ह.. तुम दोनों क्या बैठे हो.. मेरे मुँह में लौड़ा घुसा दो.. आह्ह..ईईइ आह..
अब सुंदर और आनंद भी शुरू हो गए..
तीनों नंगे होकर रश्मि के इर्द-गिर्द लेट गए.. कोई उसके मम्मों को चूस रहा था तो किसी का लौड़ा वो चूस रही थी।
लगभग 25 मिनट तक ये तीनों बारी-बारी से रश्मि को चोद कर ठंडे हो गए। इस दौरान साजन ने रश्मि की गाण्ड भी मारी और उसको ज़ोर-ज़ोर से चोदा ताकि वो तेज आवाज में चीखे.. और बाहर जय तड़पे..
जब तीनों का हो गया.. तो वो बाहर आ गए.. अन्दर इन्होंने रश्मि का हाल बेहाल कर दिया था.. इनके लौड़े भले ही बड़े नहीं थे.. मगर इन्होंने उसको काट कर.. चूस कर बहुत परेशान किया था।
जब ये तीनों बाहर आए.. तो इनके चेहरे पर जीत की ख़ुशी साफ नज़र आ रही थी.. जिसे देख कर जय आग-बबूला हो गया।
साजन ने उसका मुँह खोला और उसके मुँह पर थूक दिया- साला बहनचोद कहीं का.. पहले ही चूत और गाण्ड को ढीला कर दिया.. मज़ा ही नहीं आया..
आनंद- बॉस आपने साली को चोद-चोद कर लाल कर दिया.. उसमें कुछ तो मज़ा आया ही होगा ना आपको.. हा हा हा हा..
जय- सालों में किसी को जिंदा नहीं रहने दूँगा.. मैं एक-एक को चुन-चुन कर मारूँगा..
साजन- अरे.. अरे.. कुत्ते को गुस्सा आ गया.. देखो कैसे भौंक रहा है.. साले तेरी बहन की अभी चूत गाण्ड और मुँह को चोद कर आ रहे हैं.. ये तो पहला राउंड है.. अभी तो पूरी रात बाकी है.. उसके बाद सुबह तेरे साथ क्या करेंगे.. तू सोच भी नहीं सकता.. फिर चुन-चुन कर हमें अपना जीजा बोलना.. हा हा हा हा हा..
जय गुस्से में था.. मगर वो कर भी क्या सकता था.. बस वो खून के घूँट पीकर रह गया।
ये तीनों अन्दर थे तो जेम्स और विजय ने क्या गुल खिलाए.. हम वो भी देख लेते हैं।
विजय ने कोमल को अलग कमरे में ले जाना ठीक समझा क्योंकि दूसरे कमरे में रंगीला और जेम्स साथ में रानी को ले गए थे।
विजय- आ जा मेरी जान.. पहले लौड़ा चूस कर मज़ा दे.. उसके बाद मैं तेरी चूत का मज़ा लूँगा।
कोमल- क्यों क्या तुम रश्मि के साथ चुदाई नहीं करोगे?
विजय- नहीं.. वो कैसी भी है.. मगर रिश्ते में मेरी बहन लगती है.. और मुझे बहनचोद शब्द से ही नफ़रत है.. इसलिए मैं उसके साथ कुछ नहीं करूँगा.. मगर उसको रंडी शब्द का मतलब बता दूँगा।
कोमल बड़े प्यार से विजय के लण्ड से खेलने लगी और उधर जेम्स ने रानी को कस कर चुम्बन किया, उसके चूतड़ों को दबा कर मज़ा लेने लगा।
रंगीला- अरे बस भी कर यार.. कोमल को चोद के आया है और रश्मि को चोदना अभी बाकी है.. अब इसको तो बख्श दे.. क्यों तू नन्ही सी जान को परेशान कर रहा है?
जेम्स- तुझे पता है ना.. गाड़ी को जितना चलाओ.. वो उतनी रवां होती है.. अब मैं इसको चोदूँगा थोड़े ही.. बस टाइम पास कर रहा हूँ यार.. और तू भी तो अभी रश्मि को चोद कर आया है।
रंगीला- अरे ऐसे जल्दबाज़ी में मज़ा नहीं आया.. साले वो तीनों जो लाइन लगा के खड़े थे.. अब दोबारा करूँगा तो आराम से करूँगा।
जेम्स- अब मैं मौका दूँगा दोबारा तब करेगा ना.. हा हा हा हा..
रानी- कोई बात नहीं बाबूजी.. मैं किस लिए हूँ.. आप मेरे साथ मज़ा कर लेना। वैसे भी जेम्स तो अब रश्मि को चोद-चोद कर बेहाल कर देगा.. तो आप कहाँ उसको चोद पाओगे।
रानी की बात सुनकर रंगीला खुश हो गया और उसने रानी को गोद में उठा कर बिस्तर पर पटक दिया।
दोनों रानी को चूमने-चाटने लग गए और वो भी उनका साथ देने लगी।
काफ़ी देर तक ये चलता रहा.. रानी को नंगा करके दोनों उसका रस पीने में लगे हुए थे।
उधर विजय ने भी कोमल की मस्त चुदाई की और बियर पीने का बोलकर वो बाहर आ गया।
जब विजय बाहर आया.. उस वक्त तीनों जय का मजाक बना रहे थे।

जय- विजय, रोक ले ये गंदा खेल.. मत कर ऐसा प्लीज़..
विजय- चुप कुत्ते.. इस खेल की शुरुआत तेरे बाप ने की थी.. अब इसका अंत मैं करूँगा।
साजन- विजय भाई.. अब जेम्स को बोल दो, लास्ट में उसका नम्बर है.. फिर दोबारा राउंड घुमाना है।
विजय के चेहरे पर मुस्कान आ गई.. वो उस कमरे में गया.. जहाँ वो दोनों रानी का रसपान कर रहे थे।
विजय- वाह.. तो यहाँ मस्ती चल रही है और वहाँ वो तीनों बाहर आ गए हैं।
जेम्स- क्या बात करते हो.. बड़ी जल्दी आ गए साले.. क्या सब 5-5 मिनट वाले हैं?
विजय- लगता तो ऐसा ही है.. अब क्या इरादा है तुम्हारा.. वो बोलो?
रंगीला- रूको अब लास्ट काम को अंजाम देने दो.. मेरी रानी.. मैं बस अभी आया.. तू तब तक जेम्स से चूत चटवा।
रंगीला वहाँ से सीधा रश्मि के कमरे में गया, उसको देख कर रश्मि थोड़ी चौंक सी गई।
रश्मि- रंगीला तुम वापस कैसे आ गए जेम्स कहाँ है?
रंगीला- डर मत मेरी जान.. मैं तुझे दोबारा चोदने नहीं आया हूँ.. बस इतना बताने आया हूँ कि जेम्स के साथ ऐसे करेगी क्या.. वो हमारा खास मेहमान है.. ज़रा नहा कर फ्रेश हो जा.. उसके बाद करना।
रश्मि- तुम लोगों ने मुझे रंडी समझ लिया क्या.. वो तीन कुत्ते मेरी क्या हालत करके गए हैं.. देखो कैसे जगह जगह निशान बना गए.. अब जैसी हूँ ठीक हूँ.. जेम्स को बोल दो आ जाए।
रंगीला- अगर ऐसी बात है.. तो वो नहीं आएगा.. आज रात भर के लिए तुम्हें उन तीनों के हवाले कर देता हूँ ओके.. खुश?
रश्मि- नो नो प्लीज़.. उन जानवरों को दोबारा यहाँ मत आने दो.. मैं अभी फ्रेश हो जाती हूँ.. जेम्स से कहो कि वो दस मिनट बाद आ जाए।
रंगीला- ठीक है.. मैं बोल दूँगा और सुनो अगर उनसे बचना है.. तो जेम्स को पटा लो.. वो मान गया ना.. तो किसी की हिम्मत नहीं.. उसके आगे आने की आख़िर एसीपी है वो.. तुम समझ रही हो ना बात को..
रश्मि ने ‘हाँ में गर्दन हिला दी और रंगीला वहाँ से वापस बाहर निकल आया… वो जय के पास रुक गया।
रंगीला- अरे कमीनो.. अकेले-अकेले शराब पी रहे हो.. मेरे खास दोस्त को नहीं पिलाओगे क्या?
साजन- अरे इसको पिलाने की क्या जरूरत है.. हम पीकर साले के मुँह में मूत देंगे.. तो इसको भी नशा हो जाएगा।
जय- कुत्ते एक बार मेरे हाथ खोल दे.. उसके बाद देखना मैं क्या करता हूँ?
रंगीला- खोल देंगे यार.. थोड़ा सबर तो कर.. बस ये जेम्स बाकी है तेरी बहन की चूत और गाण्ड की असली ठुकाई यही करेगा.. उसके बाद तुझे आज़ाद कर देंगे.. हम भी तो देखें.. तू क्या करता है?
जय- रंगीला तुम लोगों का वो हाल करूँगा.. तुम सोच भी नहीं सकते..
साजन- अबे चुप साले.. तू क्या बिगाड़ लेगा.. हाँ अभी थोड़ी देर रुक.. हाल तो जेम्स तेरी बहन का खराब करेगा.. साला वो पूरा हब्शी है.. खा जाएगा उसको.. हा हा हा.. अब तेरी बहन की असली चुदाई होगी।
रंगीला- सच कहा तूने साजन.. उसका लौड़ा ऐसा है कि कोई गधी को भी चोदे.. तो वो भी चीखने लगे.. इसकी बहन तो चिल्ला कर घर उठा लेगी।
साजन- बॉस प्लीज़.. एक बात बोलूँ.. कुछ ऐसा नहीं हो सकता कि साली रंडी को जेम्स चोदे और हम सब उसको देख कर मज़े करें.. प्लीज़ कुछ करो ना..
रंगीला- वैसे आइडिया बुरा नहीं है.. चल तू भी क्या याद करेगा.. इस कुत्ते को भी तो दिखा देते हैं.. इसकी रंडी बहन की चुदाई..
आनंद- वाह.. मज़ा आएगा.. तो चलो सब उस कमरे में चलते हैं।
रंगीला- अबे चुप साला चूतिया वहाँ जाने की जरूरत नहीं है.. ये इतनी बड़ी एलसीडी किस लिए लगी है.. इसमें देखना.. सब मिलकर आज तक ट्रिपल एक्स फिल्म देखी है ना.. आज रियल देखना।
साजन- वो कैसे बॉस.. क्या अन्दर कैमरा लगा हुआ है?
रंगीला- हाँ साजन जिस दिन से ये गेम की शुरुआत हुई है.. तब से ये कुत्ते और इसकी बहन का एक-एक सीन रेकॉर्ड किया है हमने.. अब देख मैं कनेक्ट करता हूँ.. साली को नहाता हुआ देखो सबके सब.. उसके बाद जेम्स उसकी कैसी ठुकाई करता है.. वो भी मज़े से देखना सब के सब.. हा हा हा हा हा..
रंगीला ने टीवी ऑन कर दिया जिसमें रश्मि बाथरूम में नहाती हुई सामने आई.. वो अपनी चूत को रगड़-रगड़ कर साफ कर रही थी और मज़े से नहा रही थी।
साजन और सब रश्मि को देख कर गंदी बातें कर रहे थे.. जिससे जय का रहा सहा खून भी सूख गया.. वो तो बस नजरें झुकाए सबकी सुनता जा रहा था।
रंगीला वापस रानी के पास चला गया और जेम्स से कहा- तुम्हारी दुल्हन नहा रही है.. जाओ जाकर आख़िरी सीन पूरा कर दो.. उसके बाद तो उसकी ऐसी दुर्गति होनी है कि वो सपने में भी नहीं सोच सकती।
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06-27-2018, 12:11 PM,
#70
RE: kamukta kahani अय्याशी का अंजाम
रानी- जेम्स जाने से पहले तेरा लण्ड मेरे होंठों पर लगा के जा न..
रानी एकदम नंगी लेटी हुई थी और जेम्स कब से उसके निप्पल को सहलाए जा रहा था।
जेम्स- क्यों मेरी रानी.. इससे क्या होगा ये रंगीला है ना.. इसका हथियार होंठों पर लगा.. मुँह में ले.. जो तेरी मर्जी वो कर..
रंगीला- हाँ मेरी जान मेरे पास भी कोई मामूली लौड़ा नहीं है.. माना जेम्स जैसा नहीं है.. मगर इतना छोटा भी नहीं है.. तेरी प्यास तो मैं मिटा ही दूँगा।
रानी- अरे बाबूजी ऐसी बात नहीं है.. आज मेरी बहन जैसी आशा का बदला पूरा होने जा रहा है.. तो जेम्स के लण्ड को चूम कर अच्छा सगुन करना चाहती हूँ.. ताकि जैसे आशा तड़फी थी.. उससे कहीं ज़्यादा ये उन दोनों भाई और बहन को तड़पाए।
रानी की बात से जेम्स और रंगीला खुश हो गए और जेम्स ने लौड़ा रानी के सामने कर दिया.. जिसे उसने बड़े प्यार से चूमा.. थोड़ा सा मुँह में लेकर चूसा और अलग हो गई।
जेम्स- लो भाई सगुन तो हो गया है.. अब यार मेरी रानी को तेरे हवाले करके जा रहा हूँ.. जरा प्यार से करना..
रंगीला- अरे कैसी बात करता है यार.. इसको तो बड़े प्यार से चोदूँगा.. वैसे भी तेरी चुदाई के बाद उस रंडी को दोबारा चोदना है मुझे..
जेम्स मुस्कुराता हुआ वहाँ से निकल गया.. बाहर सभी खड़े थे।
साजन- ले भाई दूल्हा आ गया.. अब होगी असली सुहागरात तेरी बहन की.. हा हा हा हा.. भाई जेम्स ये टीवी पर हमें चुदाई देखनी है.. ज़रा स्टाइल से करना ताकि हमारा मज़ा दुगुना हो जाए और इस कुत्ते की अकड़ भी निकल जाए हा हा हा हा हा..
जेम्स ने सब को मुस्कुरा के देखा और वो उस सामने के कमरे में चला गया जहाँ रश्मि नहा कर बाहर आ गई थी और तौलिये से अपना जिस्म पोंछ रही थी.. जिसे देख कर जेम्स का लौड़ा ठुमके मारने लगा।
‘वाह रश्मि कुदरत ने बड़ी फ़ुर्सत से तुम्हें बनाया है.. क्या मस्त जिस्म की मालकिन हो तुम.. मगर इस गोरे जिस्म पर ये निशान कैसे?’
रश्मि- वो तीन कुत्ते एक साथ आए थे, उन जानवरों ने ये हाल किया है।
जेम्स- क्या उन सालों की तो ऐसी की तैसी.. ऐसा कैसे कर सकते है वो?
रश्मि- जेम्स, प्लीज़ मुझे इस गेम की सज़ा से बचाओ.. अब मैं उन सबसे तंग आ गई हूँ प्लीज़ प्लीज़..
जेम्स- अगर मैं जैसा कहूँ.. और तुम प्यार से वैसा करोगी तो कोई तुम्हें दोबारा परेशान नहीं करेगा ओके..
रश्मि- आप जो कहोगे.. मैं तो ऐसे ही करने को तैयार हूँ.. आप बस उनसे मेरी जान बचा लो।
जेम्स- वो बात नहीं है.. मैं जानता हूँ तुम सब करोगी.. मगर मैं कुछ और बात कर रहा हूँ.. जैसे मुझे कुछ खास तरीके से और खास बातों के साथ किसी लड़कों को चोदने का मन था.. आज वो तुम पूरा कर दो प्लीज़।
रश्मि- अरे आप बोलो तो सही?
जेम्स उसको कुछ कान में बताता है जिसे सुनकर रश्मि मुस्कुराने लगती है और ‘हाँ; कह देती है।
साजन- अरे भाई अब ये क्या नाटक है? ये जेम्स ने क्या कहा होगा जय.. तेरी बहन तो बड़ी मुस्कुरा रही है।
आनंद- लगता है आज तो कोई मजेदार सेक्स होने वाला है।
सभी ने देखा कि जेम्स बिस्तर पर जाकर लेट जाता है और आँखें बन्द कर लेता है।
रश्मि बड़ी अदा के साथ उसके पास जाती है और उसके होंठों को किस करती है.. उसके सीने पर हाथ घुमाती है।
जेम्स- ये क्या कर रही हो.. रश्मि सोने दो ना.. नींद आ रही है..
रश्मि- ऐसा हुस्न आपके सामने बिना कपड़ों के है.. और आप सोने की बात कर रहे हो?
जेम्स- मुझे तो नींद आ रही है.. तुम्हें जो करना है कर लो।
रश्मि मुस्कुराने लगी और जेम्स के कपड़े निकालने लगी।
जब पूरे कपड़े निकल गए.. तो जेम्स का डंडा देख कर रश्मि की आँखें बड़ी हो गईं।
रश्मि- ओ माय गॉड.. ये क्या.. इतना बड़ा लण्ड?
जेम्स- अब तूने इसको आज़ाद किया है तो साली शान्त भी तू ही करेगी।
रश्मि- अब मेरा काम यही है.. छोटा हो या बड़ा मुझे तो इसको लेना ही पड़ेगा.. आख़िर में एक टॉप क्लास रंडी जो हूँ ठीक कहा ना मैंने..
जेम्स- हाँ साली छिनाल तू बहुत बड़ी रंडी है.. चल अब इसको चूस के मज़ा दे.. उसके बाद सोचूँगा तेरी ठुकाई कैसे करनी है।
साजन- बाप रे बाप ये साला जेम्स का लौड़ा देख किसी गधे जैसा लंबा और मोटा है.. जय आज तो तेरी बहन गई काम से.. हा हा हा हा..
जय ने भी ना चाहते हुए एक बार देख ही लिया और उसको देख कर उसकी साँसें रुक गईं।
सुंदर- थोड़ी आवाज़ तेज़ करो.. देखो साली कैसे अपने आप को रंडी बोल रही है हा हा हा हा..
रश्मि बड़े प्यार से लौड़े को चाटने लगी.. सुपारे को धीरे-धीरे मुँह में लेने लगी।
बस 5 मिनट में ही रश्मि पूरा लौड़ा ‘गपागप’ मुँह में लेकर चूसने लगी। साथ ही साथ आंडों को भी हाथ से सहला रही थी।
जेम्स- चूस साली रंडी आह्ह.. तेरे इन होंठों का तो मैं दीवाना हूँ.. आह्ह.. जितना पावर है लगा दे.. उसके बाद मैं तुझे बताऊँगा कि असली मर्द की चुदाई कैसे होती है।
बहुत देर तक रश्मि लौड़े को चूसती रही.. उसका मुँह दुखने लग गया।
रश्मि- बस में थक गई.. इतनी देर में तो लौड़ा पानी फेंक देता है.. मगर तुम्हारा लौड़ा पता नहीं किस मिट्टी का बना है.. अब तो चूत में डाल दो बस तभी ये ठंडा होगा।
जेम्स- ऐसे नहीं साली रंडी.. मैंने क्या कहा था.. वैसे बोल..
रश्मि- मेरे राजा आपकी रंडी चुदने को तड़प रही है.. घुसा दो लौड़ा मेरी चूत में और फाड़ दो..
जेम्स- ये हुई ना बात.. चल अब लेट जा.. पहले तेरे रसीले होंठों से शुरू करूँगा उसके बाद इन चूचों को मसलूंगा फिर तेरी चूत चाटूँगा.. उसके बाद तुझे चोदना शुरू करूँगा।
‘इतना सब करोगे तो मेरी चूत का लावा फूट जाएगा..’
जेम्स- तू बस देखती जा.. आज तेरा क्या-क्या फटेगा..
इतना कहकर जेम्स उसके होंठों को चूसने लगा.. बड़ी बेदर्दी से उसको मम्मों को दबाने लगा।
रश्मि जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी और जेम्स उसको मसले जा रहा था।
साजन- उफ़ साला.. क्या पक्का खिलाड़ी है.. कब से लौड़ा चुसवा रहा था इतनी देर में तो मेरा 2 बार निकल जाए।
आनंद- भाई इसकी चुसाई देख कर तो लौड़ा खड़ा हो गया.. अब मैं इसको कैसे शान्त करूँ।
सुंदर- रश्मि के नाम की मुठ्ठ मार ले..
साजन- अबे नहीं सालों.. कोई मुठ नहीं मारेगा आज.. उसको पूरी रात चोदना है। ये देखो पावर की गोली.. पहली बार में रंगीला ने लेने से मना किया था.. अब लेंगे और सब साथ मिलकर साली रंडी को चोदेंगे।
सुंदर- भाई उसको देखो साला कैसे नजरें चुरा कर अपनी बहन की चुदाई देख रहा है।
सुंदर की बात सुनकर साजन खड़ा हुआ और जय के पास जाकर उसको लौड़े को छूकर देखा वो अकड़ा हुआ था।

साजन- अबे साला बहनचोद कुत्ता कहीं का.. देखो अपनी बहन को चुदता देख कर कैसे इसका मन मचल रहा है इसका लौड़ा खड़ा हुआ है।
आनंद- इसके जैसा हरामी भाई मैंने कहीं नहीं देखा.. साला उस रंडी की सील इसने ही तोड़ी थी.. अब दोबारा चोदने का मन कर रहा होगा।
साजन ने जय का मुँह खोल दिया और उसको बियर की दो घूँट पिला दीं।
साजन- बोल जय.. अगर तू कहे तो रंगीला से बात करूँ.. तू भी हमारे साथ उस रंडी को चोद लेना.. तेरे लौड़े की अकड़न दूर हो जाएगी।
जय- साजन प्लीज़.. रहम करो ऐसा मत करो.. मेरी बहन बहुत सीधी है उसको रंडी मत बनाओ.. बख्श दो प्लीज़..
साजन- क्या बात है तेरी अकड़ कहाँ गई.. तेरा तो सारा गुस्सा फुर्र हो गया?
जय- तुम मुझे जान से मार दो.. मगर रश्मि को जाने दो.. उसका ऐसा वीडियो मत बनाओ.. प्लीज़ प्लीज़ प्लीज़..
साजन- देख भाई अपुन को तेरे से कोई लेना-देना नहीं.. अपुन को तो रंगीला ने ढेर सारे पैसे दिए.. और रश्मि जैसी मस्त माल की चूत दी.. अब ये खेल वही रोक सकते हैं।
जय- तुम जितने बोलो.. मैं पैसे देने को तैयार हूँ.. बस मेरे हाथ खोल दो और मेरा साथ दो।
जय आगे कुछ बोलता उसके पहले उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा लगता है.. जो रंगीला ने मारा था।
रंगीला- साला हरामी मैं जानता था तू ऐसी कोई हरकत जरूर करेगा.. तभी मैं तुझे देखने आ गया और सालों कुत्तों मेरे फेंके टुकड़ों से पेट नहीं भरा क्या.. जो तुम लोग इसकी हड्डी लेना चाहते हो?
साजन- अरे नहीं बॉस.. आप को गलतफहमी हो गई.. हम खाली सुन रहे हैं आप ना आते तो मैं भी इसको मारने ही वाला था।
पीछे-पीछे रानी भी बाहर आ गई और जय के चेहरे पर थूक दिया।
रानी- कुत्ते पैसे के बहाने तूने मेरी इज़्ज़त लूट ली.. अब तेरी बहन चुद रही है.. तो डर लग रहा है।
रंगीला- अरे डार्लिंग.. तुम क्यों बाहर आ गईं.. मैं आता हूँ ना.. बस बियर लेने आया था.. तो इस कुत्ते की बातें सुनकर रुक गया.. चल आता हूँ.. तेरी चूत का टेस्ट तो मस्त था.. अब मेरे लौड़े का मज़ा भी तो तुझे देना है।
साजन- बॉस ये जेम्स तो पक्का चोदू है तब तक हमारा क्या होगा?
रंगीला- सालों सबर कर लो… उसके बाद पूरी रात लगे रहना।
रंगीला वहाँ से रानी को वापस अन्दर ले गया और वो सब जेम्स का खेल देखने लग गए।
दोस्तो, अब कहानी का अंत आ गया है तो सबकी चुदाई एक साथ दिखानी पड़ेगी.. ऐसा समझो कैमरा घूमता रहेगा बस।
जेम्स अब रश्मि की चूत को चाट रहा था और वो सिसकारियाँ ले रही थी।
रश्मि- आह्ह.. ससस्स जेम्स आह्ह.. प्लीज़ अब नहीं आह्ह.. बस करो.. डाल दो लौड़ा आह.. अब बर्दाश्त नहीं होता आह..
जेम्स- ठीक है मेरी रंडी.. अब तुझे दिखता हूँ अपना पावर।
इतना कहकर जेम्स रश्मि के पैरों के पास बैठ गया और उसके पैर उठा कर अपने कंधे पर डाल लिए।
रश्मि- उफ़फ्फ़.. ये कैसी स्टाइल है आह्ह..
जेम्स कुछ नहीं बोला और सुपारे को चूत पर सैट करके एक जोरदार झटका मारा जिससे पूरा लौड़ा एक ही बार में चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया।
रश्मि- आआआआह्ह.. आआआ मर गग्गयई.. आह सस्सस्स आह..
रश्मि की दर्दनाक चीख सुनकर जय का कलेजा हिल गया और साजन ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगा।
इसाजन- अब आया मज़ा.. साली राण्ड की चूत फट गई.. हा हा हा हा..
उधर विजय बड़े प्यार से कोमल की गाण्ड मार रहा था।
कोमल- आह्ह.. आराम से मारो मेरे राजा.. उधर रश्मि की चूत फट गई शायद देखो कैसे तड़प रही है।
विजय- तड़पने दे कुतिया को.. वो इसी क़ाबिल है साली..
विजय अब स्पीड से कोमल की गाण्ड मारने लग गया।
उधर रानी बड़े प्यार से रंगीला का लौड़ा जड़ तक मुँह में लेकर चूस रही थी और रश्मि की आवाज़ सुनकर रंगीला को जोश आ गया। उसने रानी का सर पकड़ कर उसको स्पीड से चोदना शुरू कर दिया।
जेम्स तो जानवर बन गया था.. वो पूरा लौड़ा बाहर निकालता और एक बार में पूरा घुसा देता.. जिससे रश्मि की सांस अटक जाती.. उसका चीखना अभी भी जारी था।
दस मिनट बाद उसका दर्द मज़े में बदल गया, अब वो ‘आहों..’ के साथ बोलने लगी- आह ससस्स.. फाड़ दी आह्ह.. मेरी आज चूत तूने.. आह्ह.. फास्ट अब मज़ा आ रहा है.. आह चोदो आह्ह..
जेम्स- साली रंडी.. आह्ह.. ऐसे क्यों चीखी आह्ह.. ले चुद आज तू.. आह्ह.. तेरी चूत तो बड़ी मस्त है ले पूरा.. आह्ह..
जेम्स 25 मिनट तक ‘दे..दनादन..’ उसको चोदता रहा.. रश्मि की चूत झड़ गई.. मगर जेम्स वैसे ही लगा रहा।
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