Kamukta Story बदला
08-16-2018, 01:34 PM,
#11
RE: Kamukta Story बदला
उसने सुरेन जी के सीने से सर उठाया & उनकी गर्दन मे मुँह च्छूपा के सोने
लगी.दोनो पति-पत्नी 1 दूसरे के सहारे से आश्वस्त तो हो गये थे मगर सुरेन
जी ने कुच्छ ग़लत नही कहा था,देविका ने उन्हे भरोसा दिलाने के लिए उन्हे
अपनी बातो से समझा लिया था मगर अपने बेटे प्रसून के लिए वो भी उनके जैसे
ही चिंतित रहती थी बल्कि शायद उनसे ज़्यादा ही.

और होती भी क्यू ना?प्रसून मंदबुद्धि था.24 साल का हटता-कटता जवान हो गया
था मगर उसका दिमाग़ किसी बच्चे से भी कमज़ोर था.उसके मा-बाप को हमेशा यही
बात परेशान करती रहती थी की उनके बाद उस बेचारे का क्या होगा.देविका ने
इस बाबत 1 बात भी सोची थी मगर अभी तक इस बात के बारे मे पति से बात करने
का मौका उसे नही मिला था.पूरी तरह से नींद मे बेसूध होने से पहले उसने मन
ही मन तय किया की वो जल्दी ही सुरेन जी से इस बारे मे बात करेगी,फिर उसने
आँखे मूंद ली & पति की बाहो मे सो गयी.
क्रमशः......................
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08-16-2018, 01:34 PM,
#12
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे.
कामिनी ने किताबो का बंड्ल हाथो मे उठाया & चंद्रा साहब के ड्रॉयिंग रूम
मे दाखिल हुई.दोपहर का वक़्त था,लग रहा था सब सो रहे हैं.अभी 2 दिन पहले
ही वो उनसे मिली थी & आज यहा आने का उसका इरादा नही था मगर ये कुच्छ
क़ानूनी किताबे थी जो चंद्रा साहब ढूंड रहे थे.इत्तेफ़ाक़ से ये आज
कामिनी को कही मिल गयी तो उसने सोचा की खुद ही उन्हे दे आए तो पंचमहल
क्लब जाने से पहले वो यहा आ गयी.

कोई नौकर भी नज़र नही आ रहा था,उसने दरवाज़े पे दस्तक
दी,"अरे,कामिनी..अचानक!",दस्तक सुन कर आए चंद्रा साहब की बान्छे उसे
देखते ही खिल गयी.

"आप ही की कितबे देने आई हू.",चंद्रा साहब ने उसके हाथ से बंड्ल लिया &
उसे खींच कर दरवाज़ा बंद कर लिया.

"आंटी कहा हैं?...ऊफ्फ..छ्चोड़िए ना....!",वो कामिनी को बाहो मे भर के
दीवानो की तरह चूमे जा रहे थे.

"अंदर मालिश वाली से मालिश करवा रही है.",कामिनी ने आज घुटनो तक की
काले-सफेद प्रिंट वाली ड्रेस पहनी थी.ड्रेस उसकी छातियो के नीचे तक कसी
हुई थी फिर बिल्कुल ढीली.इसी का फाय्दा उठा ते हुए चंद्रा साहब ने उसकी
ड्रेस मे नीचे से हाथ घुसा के उसकी भारी गंद की फांको को दबोच लिया था.

"उन्होने ड्रेस को कमर तक उठा दिया,"हूँ..आज काली पॅंटी पहनी है
तुमने.ब्रा भी काला ही है क्या?",उनकी ऐसी बेशर्म बात सुनके कामिनी के
चेहरे का रंग हया से सुर्ख हो गया.

"अभी आंटी से आपकी शिकायत करती हू..",उसने उन्हे परे धकेला & अंदर जाने लगी.

"क्या कहोगी?"

"कहूँगी की जवान लड़कियो से उनके ब्रा का रंग पुछ्ते हैं..आपको ज़रा काबू
मे रखें..हाआ...!",चंद्रा साहब ने उसे पीछे से पकड़ लिया था & उसकी गर्दन
चूमने लगे थे.

"चलो कमरे मे चलते हैं..आधा घंटा लगेगा अभी उसे मालिश मे.",चंद्रा साहब
ने ड्रेस के उपर से ही उसकी चूचिया दबाई.

"..ऊवन्न्नह...नही..",कामिनी उनकी पकड़ से निकल भागी & घर के अंदर चली
गयी.1 कमरे से होके उस कमरे का रास्ता था जिसमे मिसेज़.चंद्रा मालिश करवा
रही थी,नमस्ते आंटी.",कामिनी ने कमरे के दरवाज़े पे जाके कहा.

"अरे कामिनी.कैसे आना हुआ?"

"सर को कुच्छ किताबे देने आई थी."

"अच्छा तो उनसे बाते करो लेकिन मेरे आने के पहले जाना मत..क्या करू?इधर
जोड़ो मे बहुत दर्द था इसलिए ये मालिश भी ज़रूरी है."

"हां-2 आंटी,आप मालिश करवाईए मैं बैठती हू."

तब तक चंद्रा साहब वाहा आ गये & उसे बाहो मे भर के वाहा से ले जाने लगे
मगर कामिनी मानी नही,"चलो दूसरे कमरे मे चलते हैं.",उन्होने उसे चूमा.

"नही..यही रहिए..",वो फुसफुसाई.दूसरे कमरे मे उनकी बीवी थी & यहा ये खेल
खेलने मे उसे फिर से वही मज़ा आने वाला था जो डर & रोमांच के एहसास से
पैदा होता था.उसने अपने गुरु के गले मे बाहे डाल दी & उनके होठ चूमने
लगी.चंद्रा साहब के हाथ 1 बार फिर उसकी गंद पे चले गये थे.जिस कमरे मे
मिसेज़.चंद्रा थी & जिस कमरे मे ये दोनो 1 दूसरे को चूम रहे थे उनके बीचे
की दीवार से लगा 1 शेल्फ था.
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08-16-2018, 01:35 PM,
#13
RE: Kamukta Story बदला
चंद्रा साहब कामिनी को चूमते हुए उस शेल्फ पे ले गये & उसे उसपे बिठा
दिया..आख़िर क्या कशिश थी इस लड़की मे जो वो भी किसी कॉलेज के लड़के की
तरह बर्ताव करने लगे थे..जैसी हरकतें..जैसी बाते वो इसके साथ करते थे
वैसी तो उन्होने अपनी बीवी से भी आज तक नही की थी.

शेल्फ पे बैठते ही कामिनी ने अपनी टाँगे फैला दी & चंद्रा साहब उनके बीच
खड़े हो उसे चूमते हुए उसकी ड्रेस के पतले स्ट्रॅप्स को कंधो से नीचे
उतारने लगे.पीठ पे लगी ज़िप को खोल उन्होने स्ट्रॅप्स को नीचे किया तो
ड्रेस सीने के नीचे उसकी गोद मे मूडी सी पड़ गयी,"..हां,काला ही
है.",उसके ब्रा को देखते ही उनके मुँह से निकला.

उनकी बात से कामिनी के होंठो पे मुस्कान आ गयी & उसने अपना हाथ नीचे ले
जाके उनके पाजामे की डोर खींच दी,पाजामा नीचे गिरा & उनका लंड उसके हाथो
मे आ गया.चंद्रा साहब ने बिना ब्रा खोले उसे उपर कर उसकी चूचियो को नंगा
किया,"कामिनी..तुम यही हो क्या?"

"जी आंटी..यही मॅगज़ीन पढ़ रही हू..सर कुच्छ काम कर रहे हैं उन्हे
डिस्टर्ब करना ठीक नही लगा."

"अच्छा..मैं भी बस 15-20 मिनिट मे फ्री हो जाऊंगी."

"ओके,आंटी.",उनकी बातचीत के दौरान वो लगातार चंद्रा साहब का लंड हिलाती
रही & वो झुक के उसकी चूचिया चूस्ते रहे.कामिनी उनका सर अपने सीने से
उठाया & झुक के उनके लंड को मुँह मे भर लिया.वो शेल्फ पे बैठी हुई झुक के
उनका लंड चूस रही थी & वो बेचैनी से उसकी पीठ पे हाथ फेर रहे थे & बीच-2
मे झुक के उसकी पीठ पे चूम रहे थे.उनकी असिस्टेंट लंड चूसने मे माहिर थी
& कुच्छ पॅलो बाद ही चंद्रा साहब को ऐसा लगा की अगर उन्होने उसे नही रोका
तो वो अब झाड़ जाएँगे & वो ऐसा नही चाहते थे.

उन्होने उसके सर को अपने लंड से अलग किया & उपर उठाया.काले,घने बालो से
घिरा कामिनी का खूबसूरत चेहरा इस वक़्त मदहोशी के रंग से सराबोर था.उसकी
काली,बड़ी-2 आँखो मे झाँकते हुए चंद्रा साहब ने उसकी पॅंटी खींची तो उसने
अपनी टाँगे हवा मे उठा दी & जैसे ही उन्होने अपना लंड उसकी चूत पे रख के
धक्का मारा उसने उनके गले मे बाहे डाल दी & हवा मे उठी टाँगो को उनकी कमर
पे लपेट उन्हे अपनी गिरफ़्त मे ले लिया.

"आहह....!",लंड जैसे ही चूत मे घुसा कामिनी कराही.

"क्या हुआ कामिनी?"

"कुच्छ नही,आंटी..आपके घर मे 1 बड़ा सा चूहा है..",उसने अपने गुरु की
आँखो मे देखते हुए मस्ती मे पागल हो उनके बाए कान को काट लिया.चंद्रा
साहब उसका इशारा समझ गये थे & उन्होने अपने धक्के तेज़ कर दिए.

"नौकर से कहके कल ही दवाई डलवाती हू वरना बड़ा नुकसान कर देगा."

"दवाई से इसका कुच्छ नही बिगड़ेगा..",कामिनी ने आँखो से चंद्रा साहब को
उनके लंड की ओर इशारा किया & अपनी कमर हिलाने लगी,"..बहुत बड़ा है..इसके
लिए तो कोई चूहे दानी लाइए.",उसकी बात से चंद्रा सहाब जोश मे पागल हो गये
& उसकी गंद को थाम तेज़ी से धक्के लगाने लगे.

कामिनी उनके गले से लगी हुई उनके बाए कंधे पे सर रखे हुए,अपनी टाँगे
लपेटे उनके धक्के झेले जा रही थी.इस तरह से खड़े होकर चोदने से चंद्रा
साहब का लंड ना केवल उसकी चूत की दीवारो को बल्कि उसके दाने को भी रगड़
रहा था & वो बहुत मस्त हो गयी थी.दोनो को पता था की अब किसी भी वक़्त
मिसेज़.चंद्रा की मालिश ख़त्म हो सकती है सो दोनो अब शिद्दत से झड़ने की
कोशिश कर रहे थे.

चंद्रा साहब के हाथो मे उसकी चौड़ी गंद का एहसास उन्हे पागल कर रहा था &
उसकी बातो ने तो उनका जोश बढ़ा ही दिया था,कामिनी भी इस मौके से & पकड़े
जाने के डर से कुच्छ ज़्यादा ही रोमांचित थी & उसकी चूत भी अब
सिकुड़ने-फैलने लगी थी.उसकी चूत की इस हरकत से चंद्रा साहब को पता चल
जाता था की उनकी शिष्या झड़ने वाली है,साथ ही उनका लंड भी मस्ती मे
बेक़ाबू हो जाता था.कामिनी अपने होठ काट कर अपनी आहो को रोक रही थी &
चंद्रा साहब उसके बाए कंधे पे सर रखे बस धक्के पे धक्के लगाए चले जा रहे
थे.
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08-16-2018, 01:35 PM,
#14
RE: Kamukta Story बदला
तभी कामिनी की चूत मे बन रहा सारा तनाव अपनी चरम सीमा पे पहुँच गया..उसके
गले से निकलती आह को उसने अपने गुरु के कंधे मे सर च्छूपा के वाहा पे
काटते हुए दफ़्न किया & झड़ने लगी,चंद्रा साहब का लंड भी पिचकारिया
छ्चोड़ अपना गाढ़ा पानी उसकी चूत मे गिराने लगा.

"लो हो गया,मालकिन.",अंदर से मालिश वाली की आवाज़ आई तो कामिनी जल्दी से
शेल्फ से उतरी & अपना ब्रा & ड्रेस ठीक करने लगी.उसने देखा की उसकी ज़मीन
पे गिरी पॅंटी चंद्रा साहब उठा के अपनी जेब के हवाल कर रहे हैं.

"आज नही..",कामिनी ने उनसे पॅंटी छीनी & तुरंत अपनी टाँगे उसमे डाल के
उसे उपर चढ़ा लिया,फिर उन्हे जल्दी से 1 किस दी & पास पड़ी कुर्सी पे बैठ
गयी.मिसेज़.चंद्रा के आने के बाद थोड़ी देर तक उसने उनसे बात की & फिर
क्लब चली गयी.
........................................
"अरे दवाइयाँ तो भूल ही गये..!",नाश्ते की मेज़ से उठ के दफ़्तर की ओर
बढ़ते सुरेन सहाय के कदम बीवी की आवाज़ सुनते ही रुक गये.

"लाओ..",उन्होने देविका के हाथो से दवा & पानी का ग्लास लेके दवा खा ली.

"चलिए.."

"कहा?"

"भूल गये?..आज से मैं भी दफ़्तर आने वाली हू."

"गुड मॉर्निंग,डॅडी!..गुड मॉर्निंग,मुम्मा!",सीढ़ियो से नीचे उतरते
प्रसून को देख दोनो के चेहरे पे मुस्कुराहट खिल गयी.

"गुड मॉर्निंग,बेटा!आज कितनी देर से उठा है?",देविका ने उसके बालो मे हाथ फेरा.

"सॉरी ममा!..पता ही नही चला ना..आज सूरज तो निकला ही नही!",सुरेन जी उसकी
बात सुनके हैरान हुए & देविका की ओर सवालिया नज़रो से देखा.

"बेटा,सूरज निकला है मगर बादल छाए हुए है ना..तो उनके पीछे छुप गया
है.",हंसते हुए उसने सुरेन जी को देखा तो उनकी भी हँसी छूट गयी.

"ओह्ह..तो क्या सूरज भी लूका-छीपी खेलता है ममा?"

"हां,देखो खेल तो रहा है..लेकिन जब हवा चलेगी ना तो बदल उड़ जाएँगे & फिर
वो दिखने लगेगा."

"हां..फिर पकड़ा जाएगा..फिर हम छुपेन्गे & वो हमे ढूंदेगा!",प्रसून खुशी
से ताली बजाने लगा.

"हां बेटा..अच्छा चलो अब नाश्ता करो.."

"आप नही करेंगी?"

"मैने कर लिया बेटा."

"मेरा वेट नही किया आपने.",प्रसून बच्चे की तरह रूठ गया..अब था तो वो 1
बच्चा ही.24 साल का हो गया था वो,6 फिट का कद,अच्छे ख़ान-पान & रहन-सहन
से शरीर भी काफ़ी भरा & मज़बूत हो गया था मगर दिलोदिमाग से वो कोई 7-8
बरस के बच्चे जैसा ही था.

"सॉरी बेटा मगर क्या करती आप ही देर से उठे & फिर आज ममा को डॅडी के साथ
ऑफीस भी जाना है ना."

"वाउ!..तो मैं भी चलु."

"नही,प्रसून..अभी नही..तुम तो लंचटाइम मे आते हो ना मेरा लंच
लेके.",सुरेन जी ने अपनी एकलौती औलाद को समझाया.

"..तो मैं घर मे अकेला क्या करूँगा?"

"अकेला कहा है..ये देख सभी तो हैं..",देविका ने नौकर-नौकरानियो की ओर
इशारा किया.वो सब भी प्रसून से 1 बच्चे की तरह ही पेश आते थे,"वो देख
रजनी भी आ गयी..रजनी चलो प्रसून को नाश्ता कराओ & इसे अकेला बिल्कुल मस्त
छ्चोड़ना वरना मैं आके तुम्हे बहुत डाँट लगाउन्गि!",डेविका ने प्रसून को
खुश करने के लिए रजनी से कहा.

"जी,मॅ'म..ये रहा भाय्या का नाश्ता..आज तो बाय्ल्ड एग्स हैं!",रजनी ने
टोस्ट पे मक्खन लगाके उसकी तश्तरी मे रखे.

"रजनी,सब संभाल लेना.",देविका सुरेन जी के पीछे तेज़ कदमो से दफ़्तर जा रही थी.

"डॉन'ट वरी,मॅ'म.आप बेफ़िक्र रहिए.",रजनी ने उसे भरोसा दिलाया.यू तो घर
मे कई नौकर थे मगर देविका को रजनी पे सबसे ज़्यादा भरोसा था.

35 साल की बहुत साधारण शक्ल-सूरत वाली साँवले रंग की रजनी थी भी बहुत
नेक्दिल & लगन से अपना काम करती थी.उसके मा-बाप ने उसकी शादी की बहुत
कोशिश थी मगर उन्हे कोई ऐसा लड़का नही मिला जोकि रजनी की मामूली शक्ल के
पीछे छुपे उसके गुण देख सकता,धीरे-2 रजनी ने भी शादी की आस छ्चोड़ दी थी
& पूरी तरह से सहाय परिवार की सेवा मे खुद को डूबा लिया था.

मगर इधर कुच्छ दीनो से उसकी सोई ख्वाहिशे फिर से जाग उठी थी,उसके दिल मे
फिर से अरमान मचलने लगे थे.इस सबका कारण था इंदर.सारे नौकरो को हफ्ते मे
1 छुट्टी मिलती थी-रविवार को.ज़्यादातर नौकर एस्टेट के आस-पास के गाँवो
या फिर हलदन से थे तो इस दिन अपने परिवार से मिलने चले जाते थे केवल 1
रजनी ही थी जोकि यहा की नही थी तो वो कभी भी छुट्टी नही लेती थी.

क्रमशः..............
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08-16-2018, 01:38 PM,
#15
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
देविका को अपनी इस नौकरानी पे ना केवल भरोसा था बल्कि बहुत लगाव भी
था.उसने भी कोशिश की थी उसका घर बस जाए पर कोई ढंग का लड़का उसे मिला नही
था.उसने ही रजनी को ज़बरदस्ती हर एतवार को हलदन घूमने जाने को कहा ताकि
उसे भी थोड़ा बदलाव मिले & मन भी बहले.रजनी ने पहले तो मना कर दिया मगर
जब देविका ने हुक्म सुना दिया की रविवार सुबह 10 से लेके शाम 5 बजे तक वो
घर मे नज़र नही आएगी तो मजबूरन रजनी को छुट्टी लेनी ही पड़ी.

हलदन पंचमहल & आवंतिपुर के बीचोबीच पड़ता था & दोनो शहरो के बीच चलने
वाली बस यहा ज़रूर रुकती थी.यही हाल यहा के स्टेशन का भी था.2 मिनिट के
लिए ही सही मगर सारी गाड़िया यहा रुकती थी.इस वजह से इस छ्होटे से कस्बे
मे हमेशा चहल-पहल रहती थी & यहा का बाज़ार भी काफ़ी बढ़िया था.

रजनी को वाहा घूम के काफ़ी अच्छा लगा.कस्बे मे 2 सिनिमा हॉल थे & अरसे
बाद उसने थियेटर मे फिल्म देखी थी.ऐसे ही 1 रविवार को वो इंदर से मिली
थी.1 छ्होटे से रेस्टोरेंट मे शाम की चाइ पी के वो उठी ही थी की उसने उसे
आवाज़ दी थी की उसका मोबाइल वही रह गया है.उसने उसे शुक्रिया कह के वाहा
से निकल ही रही थी की तभी तेज़ बारिश शुरू हो गयी.बारिश थमने का इंतेज़ार
करते हुए ही उन दोनो के बीच बातो का सिलसिल शुरू हो गया था,वो पास की 1
ग्लास फॅक्टरी मे मॅनेजर था & यहा अकेला रहता था.

रजनी को वो बहुत भला इंसान लगा था मगर उसने सोचा नही था कि उस से फिर
मुलाकात होगी मगर अगले एतवार वो फिर से उस से बाज़ार मे टकरा गयी थी &
फिर तो हर रविवार को उनकी मुलाकात होने लगी.धीरे-2 दोनो ने 1 दूसरे को
अपने-2 बारे मे सब कुच्छ बता दिया.रजनी को पता चला की इंदर के मा-बाप इस
दुनिया मे नही थे & भाई चेन्नई मे रहता था.

1 रविवार इंदर नही आया,रजनी उसका मोबाइल मिलाती रही मगर वो भी बंद पड़ा
था.उस दिन रजनी को बहुत बुरा लगा..चिंता,दुख & गुस्से से परेशान वो वापस
एस्टेट लौट गयी.दूसरे दिन इंदर का फोन आया की वो फॅक्टरी मे फँस गया था &
उसके मोबाइल की बॅटरी कब डिसचार्ज हो गयी उसे पता भी नही चला था.उसने उस
से माफी माँग ली मगर रजनी का गुस्सा शांत नही हुआ था.अगली मुलाकात मे
इंदर ने जैसे उसे मनाया तो रजनी के होश ही उड़ गये.

रेस्टोरेंट मे गुस्से से मुँह फूला के बैठी रजनी का हाथ पकड़ के जब इंदर
ने अपने प्यार का इज़हार करके & उसका वास्ता देके मान जाने को कहा तो
उसके पसीने छूट अगये थे.आजतक किसी लड़के ने उसमे कोई दिलचस्पी नही दिखाई
थी यहा तक की सड़क पे आते-जाते कभी उसे मर्दो की गुस्ताख निगाहो का भी
सामना नही करना पड़ा था & यहा ये इंसान उसका दीवाना होने की बात कर रहा
था!

इंदर ने फिल्म की 2 टिकेट्स लिहुई थी.जब रेस्टोरेंट मे रजनी को उसकी बात
का कोई जवाब नही सूझा तो वो घबरा के बाहर निकल आई.फिल्म का समय हो चुका
था,इंदर हाथ पकड़ के उसे हॉल मे ले गया.उनकी सीट्स सबसे पीछे की कतार मे
कोने मे थी.अंधेरा होते ही इंदर ने फिर से अपने दिल की बात छेड़ दी.उसकी
मान-मनुहार ने रजनी के मुँह से भी हां निकलवा दी & जब हॉल के अंधेरे मे
उसने रजनी के लबो को चूमा तो रजनी को पहली बार खुद के औरत होने का एहसास
हुआ.घबराहट के साथ-2 उसके बदन मे 1 अजीब सी सनसनाहट दौड़ गयी थी जिसने
उसके दिल मे गुदगुदी का एहसास पैदा कर दिया था.

अब तो उसे बेसब्री से रविवार का इंतेज़ार रहता था.इंदर की मज़बूत बहो मे
क़ैद होके उसके होतो का स्वाद चखने मे उसे बहुत मज़ा आता था.इंदर ने अभी
तक उसे कपड़ो के उपर से ही च्छुआ & चूमा था मगर वो समझ गयी थी की उसकी
हसरत अब आगे बढ़ कर सभी हदो को तोड़ने की है.चाहती तो वो भी यही थी मगर
उसे डर लगता था लेकिन इस बार उसने तय कर लिया था की अगर इंदर ने पहल की
तो वो खुद को उसे सौंप देगी.इंदर वो अकेला शख्स था जिसने उसकी कद्र की थी
अब उसका भी फ़र्ज़ था की उसे खुश कर दे.इस बार वो अपने आशिक़ को टूट के
प्यार करेगी..उसकी सारी हसरते पूरा करेगी..उसके जिस्म-

"दीदी,क्या कर रही हो?!ग्लास भर गया है!",प्रसून की आवाज़ से रजनी अपने
ख़यालो से बाहर आई.वो जग से जूस उसके ग्लास मे डाल रही थी जोकि पूरा भर
गया था & अब छलक रहा था.

"सॉरी,भाय्या.",रजनी ने हड़बड़ा के जग नीचे रखा & छल्के जूस को सॉफ करने लगी.

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08-16-2018, 01:38 PM,
#16
RE: Kamukta Story बदला
"हेलो..",सुरेन जी ने फाइल पे लिखते हुए मोबाइल उठाके कान से
लगाया,"..अरे वीरेन..कैसे हो?कितने दिन बाद फोन किया!"

देविका ने गर्दन उठाके पति को देखा,".हां-2..अच्छा..तो यहा क्यू नही
आए..ह्म..हां-2 मैं सब साफ करवा दूँगा...ओके.",फोन कट गया.

"वीरेन का फोन था?"

"हां."

"क्या कह रहा था?"

"पंचमहल आया हुआ है.."

"क्या?",देविका चौंकी.

"हां.कल यहा आएगा..कह रहा था की सोच रहा कि अब यही रहे."

सुरेन जी ने कलम नीचे रख दी थी & उनके चेहरे पे थोड़ी चिंता दिख रही थी.

"क्या हुआ?",देविका उनके सामने मेज़ के दूसरी ओर बैठी थी,वो वाहा से उठी
& उनके बगल मे आके खड़ी हो उनके सर पे हाथ फेरने लगी.

"देविका,पिताजी ने कोई वसीयत तो छ्चोड़ी नही थी अब अगर वीरेन अपना हिस्सा
माँगेगा तो..?"

"तो क्या होगा.दे देंगे."

"देविका,मैने ये सब कैसे खड़ा किया है तुम जानती हो..सब उसे दे दू."

"ओफ्फो..आप तो मज़ाक को भी सच मान लेते हैं!मैं मज़ाक कर रही थी.",उसने
झुक के उनके माथे को चूम लिया,"..ठीक से बताइए क्या कहा उसने?"

"कह रहा था की अब उसका वाहा दिल नही लगता..यही रहना चाहता है.."

"तो ये तो नही कहा कि उसे उसका हिस्सा चाहिए."

"कहा नही मगर इस तरह अचानक बिना बताए यहा आने का क्या मतलब है?"

"आप फिर परेशान हो रहे हैं..",देविका अब उनकी गोद मे बैठ
गयी,"..देखिए,अगर वीरेन आपसे हिस्सा माँगता है तो आप बस इतना कहिएगा कि
क्या उस से ये कारोबार संभाल जाएगा..उसका जवाब नही ही होगा..बस फिर आप
कहिएगा की वो ये समझे की उसने हमे अपना हिस्सा बेच दिया है..हम उसे
हिस्से किए बराबर की रकम किश्तो मे दे देंगे..",उसने उनके माथे को
चूमा,"..लेकिन मुझे लगता है की आप बेकार परेशान हो रहे हैं..",उसने उनके
सर को अपने सीने से लगा लिया,"..वीरेन ऐसा आदमी नही है.",अपने पति के सर
को सीने मे दफ़्न करते हुए देविका ने सामने की दीवार को देखते हुए
कहा.उसके चेहरे पे पता नही कितने रंग आ के गुज़र गये थे.

सुरेन जी को अब तसल्ली हो गयी थी मगर देविका के दिल मे तूफान मचा हुआ
था..क्यो यहा आ रहे हो वीरेन आख़िर क्यो?सुरेन जी उसके जिस्म की मादक
खुश्बू से उसके ब्लाउस के उपर से दिख रहे क्लीवेज मे सर घुसाए मदहोश हो
रहे थे & उनके सर को थामे उनकी गोद मे बैठी देविका इस नयी मुश्किल के
बारे मे सोच रही थी.

कामिनी चंद्रा साहब के यहा से सीधी क्लब पहुँची,आज बड़े दिन बाद वो
षत्रुजीत सिंग से मिलने वाली थी.वो कल ही बाहर से लौटा था & दोनो ने तय
किया था की इस वीकेंड को साथ ही गुज़रेंगे.

"अरे...ऑफ...ऑश...!",तेज़ी से क्लब के कामन रूम मे दाखिल होती कामिनी
किसी से टकराई & उस आदमी के ग्लास की ड्रिंक उसकी ड्रेस पे छलक गयी.

"सॉरी!",उस शख्स ने भारी आवाज़ मे कहा & आगे बढ़ गया.कामिनी ने देखा वो
वीरेन सहाय था....इतना बदतमीज़ इंसान उसने शायद ही कभी पहले देखा था!ये
दूसरी बार वो उस से टकराया था & फिर सॉरी भी ऐसे बोला था मानो एहसान कर
रहा हो.

कामिनी ड्रेस ठीक करने की गरज से वॉशरूम की ओर बढ़ गयी कि तभी उसे
शत्रुजीत दिखाई दिया,"हाई!कामिनी..देर कर दी तुमने..& ये क्या हुआ?"

"1 बदतमीज़ टकरा गया था.",कामिनी वॉशरूम मे गयी तो शत्रुजीत भी उसके
पीछे-2 वाहा चला आया.

"अरे,तुम यहा क्या करने आ रहे हो?",कामिनी ने वॉशबेसिन के बगल मे रखे
नॅपकिन्स मे से 1 उठाया & ड्रेस सॉफ करने लगी,"..ये लॅडीस वॉशरूम है."

"तुम्हारी मदद करने आया हू.",उसके हाथ से नॅपकिन लेके शत्रुजीत उसकी
ड्रेस को सॉफ करने लगा.वीरेन की ड्रिंक कामिनी के सीने पे छल्कि थी &
शत्रुजीत सॉफ करने के बहाने उसकी गोलाईयो को दबा रहा था.

कामिनी सब समझ रही थी,"..ये मदद हो रही है!",उसने उसके हाथ से नॅपकिन
लिया & उसे धकेल के वॉशरूम से बाहर निकाला,"..अरे मैं तो बस सॉफ कर रहा
था.."

"हां-2 पता है क्या कर रहे थे..चलो बाहर खड़े रहो.",कामिनी ने वॉशरूम का
दरवाज़ा बंद किया & ड्रेस ठीक करने लगी,बीवी के क़त्ल के बाद से शायद
पहली बार उसने शत्रुजीत को पुराने अंदाज़ मे देखा था.

कामिनी के वॉशरूम से बाहर निकलते ही षत्रुजीत सिंग ने उसे बाहो मे भर
लिया,"क्या कर रहे हो?!कही कोई आ गया तो!..",उसे अनसुना करते हुए
शत्रुजीत ने उसके गाल को चूम लिया.तभी किसी के उधर आने की आहट हुई तो
शत्रुजीत उस से अलग हो गया मगर उसका दाया हाथ अभी भी उसकी कमर पे ही था.

"अरे वीरेन जी!वॉट ए प्लेज़ेंट सर्प्राइज़!",शत्रुजीत ने कामिनी की कमर
से हाथ खींच के उधर आ पहुँचे वीरेन सहाय से हाथ मिलाया,"आप कब आए?"

"बस कुच्छ ही दिन हुए,शत्रु.तुम्हारा क्या हाल है?"

"बढ़िया है.",वीरेन सहाया ने कामिनी की ओर देखा,"ओह्ह..आइ'म सॉरी मैने आप
दोनो का परिचय नही कराया....ये हैं वीरेन सहाय जाने-माने पेनिंटर & ये
हैं कामिनी शरण,हमारे शहर की मशहूर वकील."
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08-16-2018, 01:39 PM,
#17
RE: Kamukta Story बदला
"प्लीज़्ड टू मीट यू.",वीरेन सहाय ने अपना हाथ आगे बढ़ाया तो कामिनी ने
उस से हाथ मिलाते हुए बड़े ठण्डेपन से जवाब दिया.थोड़ी देर दोनो मर्द
बाते करते रहे फिर कामिनी & शत्रुजीत कामन रूम मे आ गये & कॉफी & कुच्छ
खाने का ऑर्डर देके 1 टेबल पे बैठ गये,"तुम इसे कैसे जानते हो,जीत?"

"बरसो पहले मैं 6 महीने के लिए पॅरिस गया था,हम अपनी सेमेंट कंपनी मे
कुच्छ बदलाव लाना चाहते थे,उसी सिलसिले मे.पिताजी सहाय परिवार को अच्छे
से जानते थे..ये सहाय एस्टेट के..-"

"..-मालिक सुरेन सहाय का छ्होटा भाई है,पता है."

"तो पिताजी ने इन्हे मेरे बारे मे बताया,फिर इन्होने मेरी बहुत मदद की
थी.मुझसे उम्र मे तो काफ़ी बड़े हैं मगर हमेशा 1 दोस्त की तरह ही बर्ताव
किया है मेरे साथ.बहुत अच्छे इंसान हैं."

"मुझे तो पक्का बदतमीज़ लगता है..",& कामिनी ने उसे उस से टकराने वाली
दोनो घटनयो के बारे मे बताया.

"हा..हा..हा..!",शत्रुजीत हँसने लगा.वेटर कॉफी रख गया था,कामिनी ने उसका
1 घूँट भरा,"अच्छा!तो उन्होने ही तुम्हारी ड्रेस खराब कर दी थी.उनका तो
शुक्रिया अदा करना पड़ेगा!"

"क्यू?",कामिनी ने कप नीचे रखा.

"इसी बहाने तुम्हे छेड़ने का मौका तो मिल गया."

"मुझे छेड़ने के लिए तुम्हे किसी और के सहारे की ज़रूरत है?!",कामिनी ने
शोखी से कहा तो शत्रुजीत की आँखो मे भी शरारत भर गयी.दोनो जानते थे कि
काई दीनो बाद आज की रात फिर वही पुराने दिनो जैसी नशीली & मदहोशी भरी
होने वाली है.

-------------

क्रमशः.........
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08-16-2018, 01:39 PM,
#18
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...


"ये देखो..",शत्रुजीत के बेडरूम के कार्पेट पे बैठी कामिनी केबाज़ू मे
बैठते हुए उसने 1 आल्बम उसे थमाया,"..ये है वीरेन जी & मेरी तस्वीरे जब
हम पॅरिस मे थे.",कामिनी ने आल्बम हाथ मे लेके तस्वीरो पे नज़र
डाली.गर्दन तक लंबे,घुंघराले बालो वाला वीरेन 1 हॅंडसम शख्स था.उसका कद
शत्रुजीत के बराबर ही था & बदन भी इकहरा था.कामिनी ने आज क्लब मे देखे
वीरेन से उस तस्वीर के वीरेन को मिलाया तो उसे लगा की कोई ज़्यादा फ़र्क
नही था..इतने सालो के बाद भी अगर कोई शख्स वैसे का वैसा दिखता हो इसका
मतलब है कि वो अपना पूरा ख़याल रखता होगा.

कामिनी आल्बम के पन्ने पलट रही थी की तभी गर्दन के पीछे उसे शत्रुजीत के
होंठो की तपिश महसूस हुई.उसकी बाई तरफ बैठा शत्रुज्तीत उसे अपनी बाहो मे
घेर रहा था,"ओफ्फो!पहले ज़रा तस्वीरो के बारे मे तो बताओ.."

"क्या बताना है..",शत्रुज्तीत ने बाहो के घेरे को कसते हुए आल्बम को उसकी
गोद से हटाया & उसके चेहरे को अपनी तरफ घुमाया.उसकी आँखो से उसके जिस्म
की हसरत टपक रही थी,"..तस्वीरो मे तो सब दिख ही रहा है.",&उसने उसके
गुलाबी लबो पे अपने लब कस दिया.कामिनी भी सब भूल के उसकी बाहो मे और सिमट
के उसके करीब आ गयी & उसकी किस का जवाब देने लगी.

बीवी की मौत के बाद शत्रुजीत काफ़ी उदास हो गया था & ऐसा नही था कि उसके
बाद कामिनी उस से चुदी ना हो मगर दोनो के मिलन मे वो गर्मी नही रहती
थी.आज नंदिता की मौत के बाद पहली बार शत्रुज्तीत ने उसे पहले जैसी
गर्मजोशी के साथ अपनी बाहो मे भरा था.उसके होंठो को छ्चोड़ वो अब उसकी
ठुड्डी को चूम रहा था,कामिनी ने भी अपना सर पीछे झुका लिया था.

शत्रुजीत के हाथ उसके कंधो से उसकी ड्रेस के स्ट्रॅप्स को नीचे सरका रहे
थे.कामिनी ने भी कंधे थोडा मोड़ा तो स्टारप्स खुद बा खुद थोड़े ढीले हो
गये & फ़ौरन उसकी बाहो से नीचे उतार दिए गये.शत्रुजीत उसकी ठुड्डी से
उसकी गर्दन पे आया & फिर उसके मखमली कंधे उसके जलते होंठो की तपन महसूस
करने लगे.

कामिनी की मंद आहो की आवाज़ आनी शुरू हो गयी थी & वो अब अपने प्रेमी की
पीठ सहला रही थी,"सस्स्रर्र्र्र्र्र्र्र्ररर.....",शत्रुजीत ने उसकी पीठ
पे उसके ड्रेस के ज़िप को नीचे कर दिया था & अब उसके हाथ उसकी पीठ पे चल
रहे थे.कामिनी ने भी बेचैनी से उसकी शर्ट को उसकी पॅंट से खींचा & अलग
होते हुए उसे 1 झटके मे उसकी गर्दन से निकाल दिया & फिर उसके बालो भरे
सीने पे टूट पड़ी.शत्रुजीत पलंग से टेक लगाके बैठ गया & कामिनी उसके सीने
को चूमने लगी.उसके नाख़ून उसके निपल्स के किनारो को कुरेद रहे थे & जीभ
उनकी नोक को,"आआहह..!",प्रेमिका की ऐसी कामुक हर्कतो ने शत्रुजीत को भी
बेचैन कर दिया.

कामिनी उसके निपल्स से उसकी बालो की लकीर पे चलती हुई नीचे जाने लगी &
उसकी नाभि पे पहुँच 1 बार उसमे अपनी जीभ चलाई,शत्रुजीत के लिए ये नया
एहसास था & वो और जोश मे आ गया & कामिनी के बालो मे हाथ फिराने
लगा.कामिनी ने उसकी पॅंट खोली & उसके तने 9 इंच के लंड को बाहर
निकाला..कितने दीनो बाद उसने उसका दीदार किया था..अपनी मुट्ठी उसपे कसते
हुए उसने अपनी जीभ की नोक से लंड के छेद को च्छुआ तो शत्रुजीत के मुँह से
तेज़ आह निकली & उसने अपनी कमर उपर उचकाई.

कामिनी ने हाथो से उसके जाँघो को दबा के उसकी तरफ देखा मानो कह रही हो की
सब्र रखो.उसकी ढीली ड्रेस उसके सीने के नीचे हो गयी थी & काले ब्रा मे
कसी उसकी गोरी चूचिया दिख रही थी.कामिनी ने शत्रुजीत की पॅंट खींच के
निकाल दी,अब वो पूरा नंगा था,फिर वो उसके लंड पे झुक गयी & उसे मुँह मे
भर लिया.शत्रुजीत की आँखे मज़े मे बंद हो गयी & उसने उसके सर को थाम
लिया.कामिनी अपनी मुट्ठी मे जकड़े लंड को अब पूरी तरह से मुँह मे भर के
चूस रही थी.अरसे बाद शत्रुजीत ने उसकी ज़ुबान को अपने लंड पे महसूस किया
था & वो मज़े मे पागल हो रहा था.
Reply
08-16-2018, 01:39 PM,
#19
RE: Kamukta Story बदला
कामिनी को तो जैसे ये एहसास ही नही था की शत्रुजीत का बाकी जिस्म भी वाहा
है.वो अपने घुटनो पे बैठे झुकी हुई उसके आंडो को हाथो मे भरके दबाते हुए
उसके लंड के सूपदे को जीभ से छेद रही थी.शत्रुजीत के लिए अब सहना मुश्किल
था,उसनेकामिनी के बाल पकड़ के उसका सर लंड से उठाया & फिर उसके कंधे पकड़
उसे अपने उपर ले बाहो मे भर के चूमने लगा.उसके हाथ उसकी पीठ पे आए & ब्रा
के हुक्स को खोल दिया.

थोड़ी हिदेर मे कामिनी की ड्रेस,ब्रा & पॅंटी कमरे के 1 कोने मे फेंके
हुए थे & वो कालीन पे लेटी हुई थी & उसका प्रेमी उसके उपर चढ़ उसकी मोटी
छातियो को दबाते हुए चूस रहा था.चंद्रा साहब भी उसे पूरी शिद्दत से
चोद्ते थे मगर जो बात शत्रुजीत की चुदाई मे थी वो कामिनी ने अब तक किसी
और के साथ महसूस नही की थी.शत्रुजीत उसकी चूचियो को अपने सख़्त हाथो मे
मसले जा रहा था & उनके निपल्स को लगातार चूस रहा था.

कामिनी अब पूरी तरह से मस्त हो गयी थी.उसने उसे पलटा & उसके उपर सवार हो
उसे चूमने लगी.कुच्छ देर चूमने के बाद शत्रुजीत ने उसकी कमर पकड़ के उसे
उपर उठाया & 1 बार फिर उसकी चूचिया उसके मुँह मे
थी,"..हाइईइ.....!",शत्रुजीत ने हल्के से उसकी बाई चूची पे काट लिया
था.शत्रुजीत ने बाहो मे भर के उसके निपल को चूस्ते हुए करवट ली & 1 बार
फिर कामिनी उसके नीचे थी.काफ़ी देर तक निप्पल को चूसने के बाद वो नीचे
जाने लगा.कामिनी के चेहरे पे मुस्कान खिल गयी..बहुत जल्द उसकी प्यासी चूत
मे वो अपनी जीभ फिराएगा..इस ख़याल से उसकी चूत ने कुच्छ ज़्यादा ही पानी
छ्चोड़ना शुरू कर दिया.

शत्रुजीत उसके गोल पेट को चूम रहा था,उसकी उंगली कामिनी की नाभि की
गहराइयो मे घूम रही थी & उसके होंठ उसके आस-पास उसके पेट पे.कामिनी अब
उसके बालो को पकड़ के खींचे जा रही थी.शत्रुजीत और नीचे हुआ & उसकी
गोरी,भारी जाँघो को चूमने लगा,उसने उन्हे फैलाया & उनके बीच लेट के उसकी
चूत के ठीक उपर उसके पेट के निचले हिस्से पे चूमने
लगा,"ऊन्न्ह्ह..!",कामिनी मस्त हो उसके सर को पकड़ नीचे धकेलने लगी,उसकी
चूत मे आग लगी हुई थी & शत्रुजीत को मानो कोई परवाह ही नही थी!

शत्रुजीत उस से बेपरवाह बस वही पे चूमे जा रहा था & कामिनी बेचैन हुए जा
रही थी.उसने उसका सर कुच्छ मज़बूती से पकड़ के नीचे ठेला,"..आन्न
जीत...क्यू तड़पाते हो...?..नीचे जाओ ना.."

"नीचे कहा मेरी जान?",शत्रुजीत ने भोलेपन का नाटक किया.

जवाब मे कामिनी ने अपनी कमर उपर उचकाई & उसके सर को पकड़ के अपनी चूत पे
भींच दिया.शत्रुजीत ने उसकी जाँघो को अपने कंधो पे रखा & अपनी ज़ुबान
उसकी चूत से लगा
दी,"..आअननह.....हान्न्न्न्न...ऐसे..ही...हाइईईईईईई....राआअम्म्म्म्म्म......!",शत्रुजीत
की जीभ बिजली की तेज़ी से उसके दाने पे चल रही थी & कामिनी मस्ती मे पागल
हो झाड़ रही थी.शत्रुजीत ने 1 उंगली उसकी चूत मे घुसा दी & इतनी तेज़ी से
अंदर-बाहर करना शुरू किया की 1 बार झड़ने के बावजूद कामिनी फ़ौरन फिर से
मस्त हो गयी.अब शत्रुजीत उसके दाने को चाटते हुए उसकी चूत को उंगली से
मार रहा था & कामिनी इस दोहरे हमले को बिल्कुल भी नही झेल पा रही थी.उसकी
गरम साँसे बहुत तेज़ हो गयी थी & गुलाबी होंठ खुले हुए थे मगर उनसे कोई
आवाज़ नही आ रही थी.

अचानक वो बहुत तेज़ी से कमर उचकाने लगी & उसने शत्रुजीत के सर को अपनी
चूत पे बिल्कुल दबा दिया.शत्रुजीत समझ गया था की वो फिर से झाड़ रही
है,उसने फ़ौरन अपना मुँह उसकी चूत से उठाया & उपर होता हुए उसकी टाँगो को
अपने कंधो पे चढ़ा के 1 ही झटके मे अपना तना लंड उसकी चूत मे पूरा का
पूरा घुसा दिया,"हाआआआईयईईईईईईईईईईईई........!"

कामिनी की चीख कमरे मे गूँज उठी,इस लंड से ना जाने वो कितनी बार चूदी थी
मगर इधर काफ़ी दीनो से उसने इसका स्वाद नही चखा था.कुच्छ इस वजह & कुच्छ
उसकी चूत के कुद्रति कसाव ने उसे दर्द महसूस कराया मगर इस दर्द मे भी 1
अलग ही मज़ा था.उसकी टाँगे उसके प्रेमी के कंधो पे थी & गंद हवा मे उठ सी
गयी थी & ऐसी हालत मे शत्रुजीत का लंड उसकी चूत मे जड़ तक घुसा हुआ था &
उसके धक्के भी बड़े गहरे लग रहे थे.अपने हाथो पे अपने बदन का वजन संभाले
शत्रुजीत के 5-6 ही धक्को मे कामिनी की चूत ने हथियार डाल दिए & वो झाड़
गयी लेकिन ये तो बस शुरुआत थी.
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08-16-2018, 01:39 PM,
#20
RE: Kamukta Story बदला
उसके झाड़ते ही शत्रुजीत ने उसकी टाँगे अपने कंधो से उतारी & उसके उपर
लेट गया.उसकी बालो भरे मज़बूत छाती ने जब उसकी चूचियो को अपने नीचे पीस
दिया तो कामिनी को दिल मे बड़ी गुदगुदी महसूस हुई.उसने अपनी बाहे उसकी
पीठ पे कस दी & उसे चूमने लगी.थोड़ी देर चूमने के बाद शत्रुजीत ने उसके
होंठो को छ्चोड़ा & उसकी गर्दन का रुख़ किया.अब वो बड़े धीमे धक्के लगा
रहा था.कामिनी तो उसकी चुदाई की कायल थी.वो जानता था की अभी 2-3 बार
झड़ने के बाद कामिनी को दोबारा मस्त होने मे थोडा वक़्त लगेगा तो वो बस
इस तरह से चोद कर उसे समय दे रहा था फिर से तैय्यार होने को.कोई और होता
तो उसके झाड़ते ही खुद भी फारिग हो जाता मगर शत्रुजीत तो उसे तब तक नही
छ्चोड़ता था जब तक कि वो तक के सो ना जाए.

उसे अपने प्रेमी पे बहुत प्यार आया & उसने उसके बालो को चूम लिया.उसने
महसूस किया की धीरे-2 उसका बदन फिर से अपने प्रेमी की हर्कतो से गरम हो
रहा है.तभी उसकी चूत मे उसे हल्का तनाव महसूस हुआ & उसी वक़्त जैसे उसके
दिल मे कसक सी उठी.अपनेआप उसकी टाँगे शत्रुजीत की कमरा पे कस गयी & वो
नीचे से उसके धक्को का जवाब देने लगी.शत्रुजीत ने देखा की कामिनी फिर से
तैय्यार है तो उसने अपनी कोहनियो पे होते हुए धक्के फिर से तेज़ कर
दिए.वो लंड पूरा बाहर निकालता & फिर 1 झटके मे जड़ तक अंदर धंसा
देता,"..आऐईईययईईए....!",हर धक्के पे कामिनी की चीख निकल जाती.

उसकी चूत मे 1 बार फिर से बहुत तनाव बन गया था & उसके दिल मे जैसे कुच्छ
भर गया था.वो 1 बार फिर से मदहोशी के आलम मे मस्त होने लगी थी.शत्रुजीत
बड़े आराम से उसकी चुदाई कर रहा था मगर उसका दिल चाह रहा था की वो बहुत
तेज़ी से धक्के लगाके उसे फिर से उस खूबसूरत मक़ाम तक पहुँचा दे.

उसकी बेचैनी इतनी बढ़ी की उसने अपने प्रेमी को बाहो मे बाँध के करवट ली &
उसे नीचे करती हुई उसके उपर आ गयी.उसकी छाती पे अपने हाथ रख थोडा आगे को
झुकती हुई वो आहे भरती हुई तेज़ी से अपनी कमर हिलाने लगी.शत्रुजीत ने
उसकी कमर को थाम लिया & हल्के-2 उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उसकी
उच्छल-कूद का मज़ा उठाने लगा.कामिनी की चूत का कसाव लंड पे और भी बढ़ गया
था & उसके आंडो मे मीठा सा दर्द होने लगा था.

उच्छलने से कामिनी की चूचिया भी बड़े मादक तरीके से हिल रही थी.उन्हे इस
तरह से छल्छलाते देख शत्रुजीत का दिल उन्हे चूसने को ललचा उठा.उसने अपने
हाथ कामिनी की गंद से उपर बढ़ाए & उसे अपने उपर झुकाया & उसकी चूचियो को
मुँह मे भर लिया,"..ऊओवव्व....!",कामिनी ने उसके सर को थाम लिया & वैसे
ही कूदती रही.

बड़ी देर तक शत्रुजीत उसकी चूचियो को दबाते हुए चूमता,चूस्ता रहा.अब
कामिनी की मस्ती अपने चरम पे पहुँच गयी थी.उसने अपनी चूचिया शत्रुजीत के
मुँह से खींची & उठके पिछे की ओर झुक के उसकी मज़बूत जाँघो पे हाथ टीका
के ज़ोर-2 से कमर हिलाने लगी.आँखे बंद किए हुए कामिनी अपनी ही दुनिया मे
खोई हुई थी.

"..आआनन्नह.....!",उसकी चूत मे तनाव बस बाँध तोड़ के निकलने ही वाला था
जब शत्रुजीत ने उसकी चूत के दाने को अपने अंगूठे से रगड़ दिया.वो बाँध
टूट गया & कयि दिन बाद कामिनी ने उस मस्तानी खुशी का एहसास किया जो 1 औरत
शिद्दत से झड़ने के बाद महसूस करती है.वो निढाल हो आगे शत्रुजीत के सीने
पे गिर गयी तो उसने उसकी कमर को अपनी बाहो मे कस लिया & अपने घुटने मोड़
के वैसे ही नीचे से कमर उच्छाल-2 के ज़ोर-2 से धक्के लगाने लगा.

"ऊव्व...ऊव्व...ऊव्व...ऊव्वव..!कामिनी के मुँह से 1 बार फिर आहे निकलने
लगी.वो जानती थी कि जब तो वो 1 बार और ना झाड़ जाए शत्रुजीत भी नही
झदेगा.उसने अपने प्रेमी के सर को पकड़ के अपनी दाई चूची से लगाया & आँखे
बंद कर बस उसके लंड से पैदा हो रही रगड़ से मिलने वाले जिस्मानी मज़े पे
ध्यान देने लगी.

उसकी चूत तो मानो शत्रुजीत के लंड की गुलाम बन गयी थी,1 बार फिर वो झड़ने
को तैय्यार होने लगी थी.शत्रुजीत ने उसकी पूरी चुचि को मुँह मे भर के
इतनी ज़ोर से चूसा की उसके बदन मे बिजली सी दौड़ गयी जोकि उसकी छाती से
सीधा उसकी चूत तक पहुँची.वो बेचैनी से अपनी जंघे भींचने की कोशिश कर
शत्रु के लंड को और कसने की कोशिश करने लगी.

शत्रु के आंडो मे हो रहा मीठा दर्द भी अब इलाज चाहता था.वो पागलो की तरह
धक्के लगाए जा रहा था.कामिनी ने अपनी छाती उसके मुँह मे और घुसाते हुए 1
ज़ोर की आह भरी & उसकी चूत सिकुड़ने-फैलने लगी,शत्रुजीत के लंड को इसी
हरकत का इंतेज़ार था.ये कामिनी के झड़ने की निशानी थी & उसके झाड़ते ही
वो भी झाड़ गया & अपना सारा पानी उसकी चूत मे उडेल दिया.

झाड़ते ही कामिनी उसके उपर निढाल हो गिर गयी & उसकी गर्दन मे मुँह छुपा
लिया.शत्रुजीत भी अपनी साँसे संभालता हुआ उसकी पीठ सहला रहा था & उसके
बालो को चूम रहा था.कामिनी के दिल मे खुशी उमड़ रही थी,कितने दीनो बाद
उसने पूरे तरीके से चुदाई का मज़ा लिया था.

क्रमशः............
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