Kamukta Story बदला
08-16-2018, 02:08 PM,
#71
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे... रात को कामिनी फिर से वीरेन के साथ उसकी कॉटेज मे नंगी
पड़ी हुई थी.वो अपनी बाई करवट पे लेटी थी & वीरेन अपनी दाई पे उसके
सामने.वीरेन का लंड उसकी चूत मे था.कामिनी ने अपनी दाई जाँघ वीरेन की
जाँघ के उपर चढ़ाई हुई थी,दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे हुए 1 दूसरे को
चूम रहे थे. वीरेन ने अपना बाया हाथ उसकी गंद की दाई फाँक पे रखा & अपनी
कमर हिलाके चुदाई शुरू कर दी.कामिनी ने भी जवाब मे वीरेन की गंद को अपने
दाए हाथ मे भींच लिया & अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी.वीरेन की चुदाई से
कामिनी हवा मे उड़ रही थी मगर उसकी 1 नज़र उस खिड़की पे ही थी जहा उसने
पिच्छली रात किसी साए को देखा था. "ऊव्वव..!",वीरेन के लंड के धक्को से
बहाल कामिनी की आहे निकलने लगी थी & वो उसकी गंद पे अपने नखुनो के निशान
छ्चोड़ रही थी.वीरेन भी बस अब जल्द से जल्द उसके साथ-2 अपनी मंज़िल पे
पहुँचना चाहता था.अपनी प्रेमिका के जिस्म से खेलते हुए उसे कोई 2 घंटे
होने को आए थे जिस दौरान वो तो 3-4 बार झाड़ चुकी थी मगर वो अभी तक 1 बार
भी नही झाड़ा था. दोनो प्रेमियो के दिल की धड़कने बहुत तेज़ हो गयी थी
साथ ही उनकी कमर के हिलने की रफ़्तार भी.कामिनी अब बिल्कुल मदहोश हो चुकी
थी मगर फिर भी उसने अपनी आँखे बंद नही की & खिड़की पे ही लगाए रखी.तभी
उसकी चूत मे बन चुका तनाव अचानक जैसे ढीला पड़ने लगा & उसके रोम-2 मे
खुशी भरने लगी.उसकी बाहो मे क़ैद वीरेन भी ज़ोर-2 से आहें भर रहा
था.झड़ने की खुशी को दिल मे शिद्दत से महसूस करती कामिनी ने अपनी चूत मे
अपने प्रेमी के गढ़े,गरम विर्य का गीलापन महसूस किया & समझ गयी की वो भी
झाड़ चुका है. आज रात उसे खिड़की पे कोई साया नही दिखाई दिया.रात काफ़ी
गहरी हो चुकी थी & उसे उमीद थी की अब आज रात कोई उनकी जासुसु नही
करेगा,"वीरेन.." "हूँ.",वीरेन उसकी चूचियो मे अपना चेहरा च्छुपाए वैसे ही
पड़ा था. "अगली बार यहा कब आओगे?",उसने उसके बालो मे प्यार से उंगलिया
फिराते हुए उसके सर को चूम लिया. "अगले महीने.क्यू?",उसने उसके सीने से
सर उठाया. "बस ऐसे ही पुचछा था.मैं तुम्हारे साथ फिर से यहा आना चाहती
हू.ये जगह बहुत खूबसूरत है & मैं 1 बार फिर इस खूबसूरती का लुत्फ़
तुम्हारे साथ उठाना चाहती हू.",बात दरअसल ये थी की कामिनी को वीरेन की
फ़िक्र होने लगी थी.सवेर चाइ पे जब उसने देविका से वसीयत की बात की तो
उसने कुच्छ समय वो काम करने की बात कही थी & इस से उसे ये खटका हुआ था की
कही देविका & शिवा मिलके तो ये खेल नही खेल रहे.ऐसी सूरत मे उनका अगला
शिकार वीरेन ही था.उसने सोचा की वीरेन को अपने शक़ के बारे मे बता दे मगर
ना जाने क्यू उसका दिमाग़ उसे ऐसा करने से रोक रहा था. अपनी प्रेमिका की
बात से वीरेन को काफ़ी खुशी हुई थी.उसने उसके नर्म होंठो को चूम लिया &
उसके गले से लग गया.ऐसा करने से कामिनी की मोटी चूचिया उसके चौड़े सीने
से पीस गयी.उसका हाथ खुद बा खुद कामिनी की कसी हुई गंद पे चला गया
था.चूचियो की गुदगुदी & गंद के नर्म,मस्त एहसास & कामिनी की प्यारी बात
ने उसे फिर से मस्त कर दिया & वो 1 बार फिर उसके जिस्म की गहराइयो मे
डूबने लगा. ------------------------------
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"तुमने सेक्यूरिटी सिस्टम्स के लिए जो कंपनी तय की है उसे अगले महीने
बुला के डील फाइनल कर लेते हैं.",देविका ने 1 फाइल पे दस्तख़त कर उसे
किनारे किया & दूसरी खोल ली.शिवा उसके सामने उसके डेस्की की दूसरी तरफ
बैठा उसे देख रहा था. "हूँ.",उसके दिल मे 1 बार ख़याल आया की उस दूसरी
कंपनी के सेल्स रेप के उसे रिश्वत देने की बात के बारे मे अपनी प्रेमिका
को जो अब उसकी बॉस भी थी,बता दे मगर फिर उसने सोचा की क्यू वो उसे नाहक
परेशान करे!ये सब तो चलता ही रहता था & फिर देविका पे अब काम का कितना
बोझ भी था.वो एकटक उसे निहारे जा रहा था & बेख़बर देविका अपना काम किए जा
रही थी.शिवा के दिल ने उस वक़्त ये दुआ माँगी की बस ये पल यही थम जाए &
वो बस ऐसे ही अपनी महबूबा के सामने बैठा उसे निहारता रहे,क़यामत के दिन
तक. देविका ने नज़रे उठाई & अपने आशिक़ को खुद को निहारते पाया तो काम की
मसरूफ़ियत के बावजूद उसके गुलाबी होंठो पे मुस्कान खिल गयी..कितना चाहता
था ये शख्स उसे?..अगर हालात कुच्छ और होते तो वो कब का इसको अपना पति बना
चुकी होती.ऐसा आशिक़ तो किस्मतवालो को मिलता है!मगर ये मुमकिन नही
था..शिवा तुम मुझे पहले क्यू नही मिले?..देविका के दिल मे हुक उठी..क्या
हो जाता अगर मिल भी जाता तो?..उसके ज़हन ने उसके दिल से पूचछा..ये
शनोशौकत ये ऐशोआरम तो ये शख्स तुम्हे कभी नही दे पाता....ज़माने की नज़रो
मे वो उसका नौकर है मगर हक़ीक़त मे तो वो उसका आशिक़ है.अभी उसके पास
दौलत & इश्क़ दोनो हैं.अगर शिवा उसे पहले मिल जाता तो वो इस दौलत से तो
महरूम रह जाती..जो होता है वो अच्छे के लिए होता है! "क्या देख रहे
हो?",दिल की जद्ड़ोजेहाद को देविका ने चेहरे पे नही आने दिया था. "दुनिया
का सबसे हसीन चेहरा." "अच्छा.अब बहुत देख लिया,अब जाओ.काम नही
तुम्हे?",उसने शिवा को प्यार से झिड़का. "हां वो तो है.",आ भरता शिवा उठ
खड़ा हुआ & दरवाज़े की ओर मूड गया. "शिवा..",महबूबा की आवाज़ सुन वो
घुमा,"..उदास क्यू होते हो,जानम!अपनी हर रात तो मैने तुम्हारे नाम कर दी
है.",शिवा को महबूबा के प्यार के इज़हार से बहुत खुशी हुई & वो बेज़री जो
उसके चेहरे पे आई थी वो गायब हो गयी & वो वाहा से निकल गया. रात के 10
बजे इंदर अपने क्वॉर्टर मे अंधेरे मे बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था.उसे
एस्टेट मॅनेजर की नौकरी करते 1 महीने से उपर हो गया था मगर सुरेन सहाय की
मौत के बाद वो अपने प्लान के अगले कदम अभी तक नही उठा पाया था.इस वक़्त
उसे शिवा सबसे बड़ा ख़तरा नज़र आ रहा था.वो बहुत वफ़ादार था & अभी तक
इंदर को उसकी कोई भी कमज़ोरी या कोई ऐसी बात का पता नही चला था जिसे वो
उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकता. उसे बौखलाहट होने लगी मगर अभी उसे थोड़ी
देर बाद रजनी के पास जाना था & उसके पास शराब पी के जाना ठीक नही था.शिवा
के बारे मे जानने के लिए 1 बार उसके कमरे की तलाशी लेना ज़रूरी था क्यूकी
साथ काम करने वालो से उसके बारे मे कोई भी काम की बात नही पता चली थी
लेकिन शिवा बंगल के अंदर रहता था & वो बंगल के अंदर घुसे कैसे,ये उसकी
समझ मे नही आ रहा था. तभी उसकी निगाह मे,जोकि बंगल से क्वॉर्टर्स की ओर
आते रास्ते पे थी,उसके हाथो की कठपुतली का अक्स उभरा.बंगल के अंदर काम
करने वालो के लिए देविका ने वर्दी बनवाई थी.नौकर तो कमीज़ & पॅंट &
सर्दियो मे कोट पहनते थे वही नौकरानिया या तो सारी या फिर घुटनो से नीचे
तक की काले रंग की पूरे या आधे बाज़ू की ड्रेस पहनती थी. रजनी ने भी इस
वक़्त आधे बाज़ू वाली ड्रेस पहनी हुई थी.रसोई मे काम करते वक़्त पहनने
वाला एप्रन अभी भी उसकी ड्रेस के उपर बँधा था & हाथो मे 1 छ्होटा सा बॅग
था जिसमे कभी-कभार वो लंच ले जाती थी.नौकरो को सारा खाना बंगले मे ही
मिलता था मगर रजनी & कुच्छ और लड़किया कभी-कभार अपने घर से भी कुच्छ
बनाके ले जाती थी ज़ेयका बदलने की गरज से. उसे देखते ही इंदर की आँखे चमक
उठी & वो अपनी कुर्सी से उठ फुर्ती से अपने दरवाज़े से निकल गया.
"आहह..!",रजनी ने दरवाज़ा खोल अभी क्वॉर्टर मे कदम रखा ही था की इंदर ने
उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया,"..कैसे चोरो की तरह आते हो?!!डर के मारे
मेरी तो जान ही निकल गयी थी!",इंदर ने दरवाज़ा बंद किया & 1 मद्धम रोशनी
वाला बल्ब जला दिया. "देखो,तो मेरा दिल कैसे धड़क रहा है.",शोखी से
मुस्कुराती रजनी ने अपने सीने की ओर इशारा किया.इंदर ने उसे दरवाज़े के
बगल की दीवार से लगा के खड़ा किया हुआ था & खुद उस से सॅट के खड़ा था.
"अभी शांत करता हू इसे.",उसने अपना दाया हाथ रजनी की कमर के पीछे कर उसके
एप्रन की ड्राइव को खोला & बाए से उसके हाथ का बॅग & क्वॉर्टर की चाभी
लेके बगल की दीवार मे बने शेल्फ पे रख दिया.डोर खुलते ही रजनी ने एप्रन
को गले से निकाला & अपनी बाहे अपने प्रेमी के गले मे डाल दी. इंदर का हाथ
रजनी की गंद पे फिर रहा था & जैसे ही उसने उसके गंद को दबा उसकी चूत को
अपने लंड से पीसा उसे रजनी की ड्रेस मे से उसकी कमर के पास कुच्छ
चुबा,"ये क्या है?",रजनी के खुले होंठ जोकि उसके होंठो की ओर बढ़ रहे
थे,सवाल सुन वही रुक गये. "ओह्ह..ये है.",उसने जेब मे हाथ डाल कर 1 चाभी
निकाली,"..ये तो बंगले की चाभी है." "क्या?",बड़ी मुश्किल से इंदर अपनी
हैरानी & खुशी को च्छूपा पाया,"..बंगल की चाभी तुम्हारे पास कैसे
आई?",उसका दाया हाथ रजनी की ड्रेस को उपर कर उसकी बाई जाँघ को उठा के उसे
सहला रहा था. "ये बंगले की रसोई के दरवाज़े की चाभी है.देविका मॅ'म ने
मुझे दे रखी है ताकि सवेरे जब मैं काम पे जाऊं तो उनकी नींद मे खलल ना
पड़े,वो थोड़ा देर से उठती है ना.",इंदर ने उस से चाभी ले ली & अपने होंठ
उसके होंठो से मिला दिए.उसने चाभी वाला हाथ 1 रजनी के ड्रेस की जेब मे
घुसाया मगर चाभी अंदर नही डाली बल्कि उस चाभी को अपने शॉर्ट्स की जेब मे
डाल लिया. रजनी का हाथ अब उसकी शॉट्स के उपर से उसके लंड को टटोल रहा
था,इंदर ने फ़ौरन उसे ढीला का नीचे गिरा दिया.वो नही चाहता था की रजनी को
चाभी के बारे मे पता चले,"जान,खाना खाया तुमने?" "हां.",इंदर के इस
मामूली से सवाल ने रजनी के दिल को बहुत खुश कर दिया.उसे अपने प्रेमी पे
बहुत प्यार आया..कितनी फ़िक्र करता था वो उसकी!उसने और गर्मजोशी से उसके
तगड़े लंड को अपनी गिरफ़्त मे कस लिया & उसे चूमते हुए हिलाने लगी.इंदर
भी उसकी कामुक हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगा,उसने तो सवाल इसलिए किया था की
कही रजनी उसे गरम करने के बाद खाना ना खाने लगे & उसे झड़ने के लिए
इंतेज़ार करना पड़े. इंदर ने भी उसकी पीठ पे लगी ड्रेस की ज़िप को नीचे
कर दिया था & अपने हाथ अंदर घुसा उसकी चूचियो से खेल रहा था.रजनी ने
बेचैन हो इंदर की टी-शर्ट निकाल दी & बड़ी बेताबी से उसके सीने पे अपने
हाथ फिराती हुई उसे चूमने लगी.उसके होंठ इंदर के चेहरे से नीचे उसके सीने
पे आए,"इंदर.." "हूँ..",इंदर उसकी पीठ & बाल सहला रहा था. "हम शादी कब
करेंगे?",रजनी उसके सीने से नीचे उसके पेट पे पहुँच गयी थी. "बहुत जल्द
मेरी जान,बहुत जल्द.",इंदर ने उसका सा नीचे अपने प्यासे लंड की ओर
धकेला,"..बस थोड़े पैसे जमा हो जाएँ ताकि शादी के बाद हनिमून के लिए मैं
तुम्हे किसी बहुत ही खूबसूरत जगह ले जा सकु. "ओह्ह..इंदर.इतना खर्च करने
की क्या ज़रूरत है?",रजनी इस बात को सुनकर फूली नही समा रही थी.उसने इंदर
के लंड को दोनो हाथो मे लिया & अपना सर बाई तरफ झुका लंड की बगल मे चूमने
लगी. "उन्न्न..!",..ये लड़की देखने मे जितनी साधारण थी चुदाई मे उतनी ही
मस्त!इंदर का दिल जोश से भर गया था,"..प्रसून जैसा आदमी अगर शादी कर मौज
उड़ा सकता है तो हम क्यू नही!",उसने रजनी के बालो को पकड़ उसके सर को लंड
पे दबाया. "उनकी बात और है..",रजनी लंड की जड़ पे जहा से इंदर के अंडे
शुरू होते थे,अपनी जीभ चला उसे पागल कर रही थी,"..वो रईस हैं,जान.देखो
ना,सर को गुज़रे अभी कितने ही दिन हुए हैं & अब मॅ'म की वकील उन्हे नयी
वसीयत बनाने के लिए कह रही है." "क्या?!",1 बार फिर इंदर बड़ी मुश्किल से
अपने हैरत भरे जज़्बातो को रजनी से च्छूपा पाया.रजनी ने लंड को अपने मुँह
मे भर लिया था & उसे हिलाते हुए चूस रही थी & इसलिए उसने फ़ौरन इंदर को
जवाब नही दिया.इंदर का दिल तो किया की लंड खींच उसे 2 तमाचे जड़े & उसे
पूरी बात बताने को कहे मगर ये मुमकिन नही था.वो रजनी के जवाब का इंतेज़ार
करता रहा. काई पॅलो तक लंड को जी भर के चूसने के बाद रजनी ने सांस लेने
के लिए उसे मुँह से निकाला,"..उस दिन उनकी वकील नही है..क्या नाम है
उसका.." "कामिनी शरण.",इंदर ने उसे उठाया & बाहो मे भर उसकी ड्रेस को
नीचे सरका दिया.ब्रा का बाया कप नीचे था & उसकी बाई चूची नुमाया थी.इंदर
तो पूरा नंगा ही था.उसने रजनी को गोद मे उठाया & उसके बेडरूम मे ले
गया.बिस्तर पे लिटा उसने उसकी पॅंटी उतारी & उसकी गंद की फांको के नीचे
अपने हाथ लगा उसकी झांतो को अपनी लपलपाति जीभ से चीर उसकी चूत मे घुसा
दिया. "आअनह...ऊन्णन्न्....!",रजनी तो जिस्म मे फुट रहे मज़े की
फुलझड़ियो मे अपनी कही बात भूल ही गयी थी मगर इंदर को तो उसके मुँह से
अभी बात निकलवानी ही थी. "तो क्या कह रही थी वकील कामिनी शरण?",वो अपने
घुटनो पे था & रजनी की गंद को थाम उसने हवा मे ऐसे उठा रखा था मानो उसका
वज़न कुच्छ खास ना हो. "ऊन्ंह....कह रही थी की मॅ'म को अब वसीयत
बना...आअनह..ले..नि..चाअ..हिई...हाइईईई..!",रजनी झाड़ आयी थी मगर इंदर की
लपलपाति जीभ अभी भी उसकी चूत के दाने को चाट रही थी. "तो मॅ'म ने क्या
कहा?" "उउन्ण..हहुन्न्नह....कहा की कुच्छ दिन रुक जाइए...ऊओह.....!",इंदर
ने उसकी जाँघो को अपनी जाँघो पे टीका लिया था & अपना लंड उसकी चूत मे
घुसा रहा था.रजनी ने बेचैन हो उसकी बाहो को थाम लिया था. "और कुच्छ नही
कहा उन्होने?" नही.",इंदर समझ गया की इस से ज़्यादा रजनी को कुच्छ नही
पता.रजनी ने उसकी बाँह पकड़ के नीचे खींचा तो इंदर ने उसकी बात मानते हुए
अपना उपरी बदन नीचे किया & उसे चूमने लगा.ये कठपुतली उसका सबसे बढ़िया
हथ्यार थी & वक़्त आ गया था की अभी दी गयी जानकारी के लिए उसे इनाम दिया
जाए.इंदर ने अपनी जनघॉ को फैलाया & रजनी के उपर लेट गहरे धक्के लगा उसे
मदहोश करते हुए उसकी चुदाई करने लगा.
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08-16-2018, 02:08 PM,
#72
RE: Kamukta Story बदला
"आपको तो बस 1 ही बात सूझती है हर वक़्त!",कामिनी ने चंद्रा साहब को
तड़पाने की गरज से परे धकेला.कामिनी अपने दिल मे उठ रहे सवालो के जवाब
ढूँडने के लिए अपने गुरु के घर आई थी.मिसेज़.चंद्रा के इसरार पे वो खाने
के लिए रुक गयी तो चंद्रा साहब ने कहा की काम की बातें खाने के बाद
करेंगे.खाना ख़त्म होते-2 मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी & दोनो मिया-बीवी
ने उसे रात को उनके यहा रुकने के लिए मना ही लिया.चंद्रा साहब की खुशी का
तो ठिकाना ही नही था. उन्हे देर रात तक काम करने की आदत थी & वो जानते थे
की अगर उस वक़्त कामिनी उनके साथ जितनी देर तक रहे उनकी बीवी को ज़रा भी
शुबहा नही होगा.मिसेज़.चंद्रा के सोने जाते ही वो कामिनी को बंगले के
दूसरे हिस्से मे बने अपने दफ़्तर मे ले गये & अंदर से दरवाजा बंद कर
दिया.कामिनी ने मिसेज़.चंद्रा की पुरानी नाइटी पहनी थी जिसका गला थोड़ा
बड़ा था & उसमे से अब उसका मस्त क्लीवेज झाँक रहा था.दरवाज़ा बंद करते ही
चंद्रा साहब ने उसे धर दबोचा था & अपने प्यासे होंठ उसके चेहरे पे घूमने
लगे थे. "तुम्हे देख के कुच्छ और सूझ सकता है भला.",कामिनी बड़े सोफे पे
बैठ 1 किताब के पन्ने पलटने लगी तो वो उसके पीछे आ बैठे & उसके कंधो पे
हाथ रख उसके बाल चूमने लगे.कामिनी ने उन्हे और तड़पाना चाहा & वाहा से भी
उठने लगी मगर इस बार चंद्रा साहब होशियार थे & उन्होने उसे अपनी बाहो मे
कस लिया. "उम्म....क्या करते हैं!छ्चोड़िए ना!",चंद्रा साहब उसकी कमर को
कस के थामे उसके होंठो को अपने होंठो से ढूंड रहे थे. "इतनी मुश्किल से
हाथ आती हो,तुम्हे कैसे छ्चोड़ दू!",उन्होने कामिनी के सर को अपने दाए
हाथ को उसके सीने के पार ले जाते हुए घुमाया & उसके होंठ चूमने
लगे.कामिनी को भी मज़ा आ रहा था.चंद्रा साहब उसकी नाइटी मे नीचे से हाथ
घुसाने लगे तो वो च्चटपटाने लगी मगर उन्होने उसे अपने चंगुल से नही
निकलने दिया & हाथ अंदर घुसा ही दिया.उनका हाथ सीधा उसके सीने पे जा
पहुँचा & उसकी चूचियो से खेलने लगा. चंद्रा साहब का जोश अब बहुत ज़्यादा
बढ़ गया था & वो उसके कपड़े उतारने की कोशिश करने लगे,"..कही आंटी ना आ
जाएँ.",कामिनी ने घबराई आवाज़ मे कहा.उसे घबराया देख उसके गुरु का जोश
दुगुना हो गया. "कोई नही आएगा यहा हम दोनो के मिलन मे खलल डालने.",वो
फुर्ती से उसकी नाइटी खिचने लगे.कामिनी समझ गयी की अब वो मानने वाले नही
हैं.थोड़ी ही देर मे वो अपने गुरु के साथ सोफे पे नंगी बैठी थी.चंद्रा
सहभ की गोद मे बैठी कामिनी उनके सीने के बॉल सहला रही थी & चंद्रा साहब
अपने जिस्म के उपर पड़ी उस हुस्न परी को पाँव से लेके सर तक चूम रहे
थे,सहला रहे थे. उनके लंड को हिलाते हुए कामिनी ने उन्हे सहाय परिवार के
बारे मे सब कुच्छ बताया.शिवा पे शक़ होना & देविका का उस से मिला होने
वाली बात भी उसने उन्हे बताई.उसकी सारी बात सुन के जो बात चंद्रा साहब ने
कही उसे सुन के कामिनी का चेहरा शर्म से लाल हो गया. "ह्म्म..यानी वीरेन
सहाय भी तुम्हारे हुस्न के तीर से घायल हो चुका है!",कामिनी ने उन्हे ये
नही बताया था की उसने वीरेन की कॉटेज की खिड़की से झँकते साए को जब देखा
था उस वक़्त वो उस कॉटेज मे क्या कर रही थी मगर चंद्रा साहब पहुँचे हुए
वकील थे,उन्हे ये भाँपने मे ज़रा भी वक़्त नही लगा की उनकी शिष्या को 1
नया प्रेमी मिल गया है,"..लगता है इसलिए हमारे लिए वक़्त नही हैं
तुम्हारे पास आजकल?" कामिनी उनसे चुदती थी & उनकी शिष्या नही अब तो
प्रेमिका थी मगर फिर भी थी तो वो 1 लड़की ही & उसे उनकी बात से शर्म आ
गयी थी.उसने अपना उपरी बदन मोड़ उनके गले मे बाहे डाल उनके दाए कंधे पे
अपना सर रख उनकी गर्दन मे चेहरा च्छूपा लिया था. "ऐसे मत बोलिए..",उसने
उनके कंधे पे सर रखे-2 उनका गाल चूमा,"..1 तो काम की मसरूफ़ियत उपर से
आंटी का डर.मेरा जी नही करता क्या आपकी बाहो मे सोने को!..मगर मजबूरी
है." "मैं तो छेड़ रहा था,तुम तो संजीदा हो गयी!",उन्होने कामिनी का
चेहरा अपने सामने किया & उसे चूम लिया.कामिनी ने अपनी ज़ुबान उनके मुँह
मे घुसा दी.षत्रुजीत सिंग,करण & वीरेन तीनो को उसने इतना जता दिया था की
वो अपनी मर्ज़ी की मालकिन है & कोई ये ना समझे की वो उसपे अपना हक़ जता
सकता है..अगर वो उनके साथ सोती है तो उसका ये मतलब नही की वो उनकी बीवी
या फिर रखैल बन गयी जिसपे वो रोब गाँठ सकते हैं..ये दूसरी बात थी की तीनो
वैसे मर्द थे भी नही & उस से जितनी मोहब्बत करते थे उतनी ही उसकी इज़्ज़त
भी करते थे & उसकी ज़िंदगी मे 1 हद्द से ज़्यादा दखल देने की उन्होने कोई
कोशिश भी कभी नही की थी लेकिन चंद्रा साहब वो अकेले मर्द थे जिनकी कामिनी
सबसे ज़्यादा इज़्ज़त करती थी & अभी उसे 1 पल को डर लगा था की कही वो उस
से खफा ना हो जाएँ या फिर कही जलन के मारे कुच्छ उल्टा-सीधा ना बोल दें
मगर उन्होने ऐसा कुच्छ नही किया. इस बात से कामिनी के दिल मे उनके लिए
इज़्ज़त और भी बढ़ गयी & उसे उनपे बहुत प्यार आया.वो उन्हे चूमे जा रही
थी & वो भी उसके जिस्म के उभारो को अपने हाथो मे तोल रहे थे.अचानक
उन्होने उसे अपनी गोद से नीचे करते हुए सोफे पे लिटाया & फिर कमर मे हाथ
डाल उसे उल्टा का पेट के बल लिटा दिया.कामिनी ने भी झट से अपनी कमर थोड़ा
उपर कर दी.चंद्रा साहब ने 1 कुशन उसके पेट के नीचे लगा दिया ताकि वो आराम
से लेट सके & उसकी चूत भी & उभार के उनकी आँखो के सामने आए. वो बेचैनी से
उसकी गंद की भरी फांको को मसालते हुए गंद की दरार पे लंबाई मे जीभ चलाने
लगे.दफ़्तर मे कामिनी की आहे गूंजने लगी. "वो साया तो 1 राज़ है मगर मुझे
बहुत ख़तरनाक लग रहा है.",उनकी जीभ उसके गंद के छेद को सहला रही
थी.कामिनी की चूत कसमसाने लगी थी,उसने अपना दाया हाथ पीछे किया & चंद्रा
साहब के बाल सहलाए,"..देविका पे भी शक़ की तुम्हारी वजह काफ़ी ठोस है &
शिवा को भी शक़ के दायरे से बाहर नही रखा जा सकता." कामिनी की गंद का छेद
जीभ के एहसास से कभी बंद होता कभी खुलता.बेताबी से कामिनी ने अपने पेट के
नीचे दबे कुशन को थोड़ा नीचे सरकाया & अपनी चूत को कमर हौले-2 हिला उसपे
दबाने लगी.चंद्रा साहब समझ गये की पहले उन्हे उनकी शिष्या की चूत को शांत
करना पड़ेगा उसके बाद ही वो इतमीनान से उसकी गंद से खेल पाएँगे.उन्होने
जीभ को थोड़ा नीचे किया & उसकी चूत पे लगा दिया. "..वसीयत करने मे देरी
इस शक़ को और पुख़्ता करती है.",उन्होने अपनी जीभ को उसकी चूत मे घुसा
दिया & तब तक चलते रहे जब तक वो झाड़ नही गयी.सोफा काफ़ी बड़ा था.चंद्रा
साहब ने कामिनी की टाँगो को फैलाया & अपना लंड उसकी चूत मे घुसा
दिया.गीली चूत मे लंड सरर से घुस गया.2-3 धक्को के बाद वो उसकी पीठ पे
लेट गये.कामिनी ने अपनी गर्दन दाई ओर घुमाई & उन्हे चूमने लगी. "..लेकिन
1 बात है जो मुझे परेशान कर रही है.",चंद्रा साहब ने अपनी शिष्या के होंठ
छ्चोड़ उसकी मखमली पीठ पे किस्सस की झड़ी लगा दी.उनके धक्के कामिनी की
चूत को पागल कर रहे थे.वो बेचैनी से अपने घुटनो से मोड़ टाँगो को उपर उठा
रही थी.उसकी चूत मे वही मीठा तनाव बन गया था. "..अगर देविका चाहे अकेले
या फिर शिवा के साथ मिलके सुरेन जी को रास्ते से हटाने के लिए उनकी दवा
से कुच्छ छेड़ चाड करती है तो फिर वो उस डिबिया को फ़ौरन गायब कर
देगी.",चंदर साहब अब अपने हाथो पे अपना भार संभाले उछलते हुए धक्के लगा
रहे थे. "ऊन्ंह.....आनह....ऐसा...हाइईईईईई....ऐसे ही
करिए..बस...तो..दी...देर...आआहह.....!",कामिनी झाड़ गयी थी मगर चंद्रा
साहब का काम अभी बाकी था.थोड़ी देर बाद उन्होने लंड को बाहर खींचा,फिर
अपने थूक से कामिनी की गांद का च्छेद भरा. "..मैं कह रही थी की ऐसा भी तो
हो सकता है..",कामिनी ने अपनी गंद हवा मे उठा दी & अपना उपरी बदन आगे को
झुका के सोफे का हत्था था अपने गुरु के हमले के लिए तैय्यार हो गयी,"..की
कामिनी डिबिया हटाना भूल गयी हो." "नही..",चंद्रा साहब ने गंद के छेद को
अच्छी तरह से गीला किया & फिर धीरे-2 लंड को अंदर घुसाने लगे,"..अगर
सुरेन जी की मौत दवा से छेड़ खानी की वजह से हुई है तो वो डिबिया इस केस
मे मर्डर वेपन है & कोई भी गुनेहगर सबसे पहले जुर्म मे इस्तेमाल हुए
हथ्यार को ही ठिकाने लगाता है." "एयीयैआइयियीईयीईयी..!",लंड का 2 इंच
हिस्सा गंद से बाहर था & चंद्रा साहब ने उसकी गंद मारना शुरू कर दिया
था.थोड़ी देर पहले झड़ने के वक़्त कामिनी की चूत के सिकुड़ने-फैलने की
मस्त हरकत के दौरान बड़ी मुश्किल से उन्होने अपने लंड को काबू मे कर उसे
झड़ने से रोका था.इतनी बार कामिनी को चोदने का बाद भी वो उसके जिस्म के
मादकता के आदि नही हुए थे.उसकी गंद का छेद बहुत ज़्यादा कसा हुआ था &
बड़ी मुश्किल से उन्होने 1 बार फिर अपने को झड़ने से रोका हुआ था.
"ऊहह...तो..हाइईइ..आपका..कह..ना..है..की...कोई...और
भी...है...वाहा....सहाय ख़ान..दान..का...दुश्मन....हाई
राआंम्म्म....!",चंद्रा साहब के धक्के तेज़ हो रहे थे & उनका दाया हाथ
कामिनी की चूत भी मार रहा था. "बिल्कुल सही समझा तुमने.",चंद्रा साहब भी
अपनी मंज़िल के करीब पहुँच रहे थे,"..मेरा ख़याल है की सुरेन सहाय की मौत
के पीछे कोई और है & देविका & शिवा,चाहे वो सुरेन जी की मौत चाहते
हो,उन्हे केवल पैसो से मतलब है." "औउईईई..मान्न्न्न्न्न........मगर
प्रसून का क्या...ऊहह..होगा फिर...ऊऊऊहह.....!",कामिनी के होंठ "ओ" के
आकर मे गोल हो गये थे & उसके गले से आवाज़ भी नही निकल रही थी.उसके झड़ने
मे इतनी शिद्दत थी की उसे कुच्छ होश नही था की वो कहा & किसके साथ है.वो
सोफे पे निढाल हो गयी थी.उसके उपर आहे भरते हुए चंद्रा साहब अपने गाढ़े
रस से उसकी गंद को भर रहे थे मगर वो अपनी ही दुनिया मे खोई हुई थी जहा
चारो तरफ बस फूलो की खुश्बू थी & बदन मे मदहोश करने वाला एहसास.
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08-16-2018, 02:15 PM,
#73
RE: Kamukta Story बदला
कयि पलो
बाद उसे जब होश आया तो उसने पाया की वो सोफे पे बाई करवट से पड़ी हुई है
& उसके गुरु उसके पीछे उसकी कमर पे अपनी दाई बाँह लपेटे लेटे हुए
हैं.उसने फिर से बातो का टूटे सिलसिले को शुरू किया,"प्रसून का क्या होगा
फिर?",अपने सर को उसने पीछे घुमाया & अपने गुरु के चेहरे पे अपना दाया
हाथ फिराया. "देखो,प्रसून के लिए तो देविका ट्रस्ट बनाएगी ही मगर वो सब
तो देविका की मौत के बाद होगा ना.",उन्होने अपना सर सोफे से उठाया &
कामिनी के चेहरे पे हल्क-2 किस्सस छ्चोड़ने लगे,"..अगर उसके सर पे शिवा
का जादू चढ़ा हुआ है तब तो शिवा जो कहेगा वो करेगी.शिवा को ये दौलत अगर
चाहिए तो वो वसीयत मे कुच्छ ऐसा लिखवाएगा की सब कुच्छ उसी की झोली मे
आए." "ऐसे तो प्रसून की जान को भी ख़तरा है?",चंद्रा साहब का हाथ उसके
पेट पे चल रहा था & वो अपने दाए हाथ से उनके बालो से खेल रही थी.
"हां,बिल्कुल.",उन्होने अपनी उंगली से उसकी नाभि को कुरेदा. "तो फिर शिवा
ने प्रसून की शादी क्यू होने दी?" "ये तो तुमने पते की बात कही!",उनकी
उंगली अभी भी नाभि को कुरेद रही थी,"अगर शिवा ग़लत आदमी है तो वो इस शादी
को किसी भी कीमत पे रोकता.शादी हो गयी इसका मतलब है की देविका ने उसकी
सुनी नही & उसने भी ज़्यादा दबाव नही डाला होगा की कही देविका को उसपे
कोई शक़ ना हो जाए मगर अब घर मे 1 और शख्स है जिसे की उसे रास्ते से
हटाना होगा." "लेकिन वो प्री-नप्षियल अग्रीमेंट भी तो है उसके हिसाब से
प्रसून की मौत के बाद रोमा को बस 1 तय की हुई रकम मिलेगी और कुच्छ नही.तो
शिवा को अगर उसे पैसे देने भी पड़ते हैं तो वो ये मामूली नुकसान सह
लेगा." "हूँ..",चंद्रा साहब के हाथ कामिनी के बदन से खेल रहे थे मगर
दिमाग़ गहरी सोच मे डूबा था. "आपको क्या लगता है की मुझे देविका को आगहा
करना चाहिए या फिर वीरेन को?" "देखो मेरे हिसाब से तो जब तक वसीयत नही
बनती शिवा कुच्छ नही करेगा..-" "..-लेकिन अगर वसीयत मे सब प्रसून के नाम
है तो वो उसे ख़त्म कर अपनी मर्ज़ी की वसीयत बनवा सकता है." "वो क्यू
करेगा ऐसे?" "क्यू नही करेगा?" "प्रसून मंदबुद्धि है.अगर वो मालिक बन
जाता है जयदाद का तो भी बस नाम का ही रहेगा.सारी डोर तो देविका & देविका
की डोर संभाले शिवा के हाथ मे ही रहेगी.क़त्ल कर वो बिना बात का झमेला
क्यू मोल ले?..फिर प्रसून को तो वो कभी भी हटा सकता है क्यूकी प्रसून का
क़त्ल तभी ज़रूरी है जबकि देविका की वसीयत मे देविका की मौत के बाद
सबकुच्छ प्रसून के नाम हो जाता है.",बात कामिनी की समझ मे आई तो वो
चंद्रा साहब के पैने दिमाग़ की दाद दिए बिना नही रह सकी.उसने करवट बदली &
अपने गुरु के सीने से लिपट गयी,"मैं कब सोच पाऊँगी आपकी तरह!",दोनो अभी
भी करवट से ही लेटे थे & 1 दूसरे के जिस्मो को सहलाते हुए हौले-2 चूम रहे
थे. महबूबा के मुँह से तारीफ सुन चंद्रा साहब खुशी से हँसे,"..तुम मुझसे
भी ज़्यादा होशियार हो.ये बात तुम भी समझ जाती मगर शायद आज उपरवाला चाहता
था की हम-तुम ये नशीली रात साथ गुज़ारें.",उनकी बात सुन कामिनी मुस्कुराइ
& 1 बार फिर उनकी बाहो मे खो गयी. इंदर बिस्तर से उतरा,रजनी गहरी नींद
सोई हुई थी & सोती भी क्यू ना!..पिच्छले 3 घंटो तक इंदर ने उसे जम के
चोदा था.चेहरे पे परम संतोष का भाव लिए रजनी थकान से निढाल हो सो गयी
थी.क्वॉर्टर के दरवाज़े पे गिरी अपनी शॉर्ट्स की जेब से उसने चाभी निकली
& रजनी के बाथरूम मे गया.1 कोने मे पड़े नहाने के साबुन को उसने लिया &
उसपे चाभी दबा के उसकी छाप ले ली.काम हो जाने के बाद उसने चाभी बाहरी
कमरे के शेल्फ पे रजनी के क्वॉर्टर की चाभी के साथ रख दी. उसने घड़ी देखी
तो रात के 1.30 बज रहे थे.उसने अपने कपड़े पहने & फिर बिस्तर पे नंगी सोई
रजनी के बगल मे लेट गया.30 मिनिट बाद वो उसे जगाके दरवाज़ा लगाने को
कहेगा & अपने क्वॉर्टर मे चला जाएगा.उसका दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था & वो
कल रात के बारे मे सोच रहा था.कल भी उसे रजनी को इसी तरह थकाना था ताकि
जब वो यहा से निकल के बंगल के अंदर जाए तब उसे इस बात का बिल्कुल भी पता
ना चले. "उम्म्म....!",रजनी के मुँह मे इंदर का लंड भरा हुआ था जोकि उसके
नीचे लेटा उसकी चूत चाट रहा था.रजनी उसके उपर थी & उसकी बेशर्म ज़ुबान से
परेशान हो अपनी कमर उसके मुँह पे ऐसे हिला रही थी मानो चूत मे जीभ नही
लंड घुसा हो. "रजनी..",इंदर ने जीभ को चूत से बाहर निकाला & उसके दाने पे
फिराया. "हूँ....!",रजनी ने आह भरी. "तुम 2-3 महीनो के लिए अपने
माता-पिता के पास क्यू नही चली जाती?",इंदर उसकी मोटी गंद को दबाते हुए
उसके दाने को छेड़ रहा था.रजनी ने चौंक के लंड को मुँह से निकाला & अपनी
गर्दन घूमके इंदर की ओर देखा. "हां,तुम अभी ही हो आओ क्यूकी जब हमारी
शादी हो जाएगी फिर तो मैं तुम्हे 1 पल के लिए भी खुद से जुदा नही होने
दूँगा & कभी भी तुम्हे मयके नही जाने दूँगा.",इंदर की जीभ की छेड़-छाड़
से रजनी की चूत बहाल हो गयी थी & उसमे से रस की धार बह रही थी.प्रेमी की
बात सुन उसके जिस्म के साथ-2 दिल मे भी खुशी की लहर दौड़ गयी.ठीक उसी
वक़्त इंदर की ज़ुबान ने उसके दाने को कुच्छ ऐसे छेड़ा की वो झाड़ गयी.
आहे भरती हुई वो झाड़ रही थी मगर वो फ़ौरन घूमी & इंदर के सीने पे अपनी
छातिया दबाते हुए उसके चेहरे को हाथो मे थाम लिया,"ओह!इंदर.." "हां,मैं
अब और इंतेज़ार नही कर सकता.तुम अपने गाँव जाके अपने माता-पिता के साथ 2
महीने रह लो.उन्हे मेरे बारे मे बता देना & फिर अपने साथ उन्हे यहा ले
आना ताकि उनके आशीर्वाद के साथ हम शादी कर सकें." रजनी की आँखे भर आई.उसे
यकीन तो था की इंदर उस से शादी ज़रूर करेगा मगर जब उसने ये बात कही तो
उसका दिल इस खुशी को झेल नही पाया & आँखो से आँसुओ की धार बह निकली.
"क्या हुआ?मेरी बात अच्छी नही लगी?",इंदर के माथे पे शिकन पड़ गयी.जवाब
मे रजनी ने हंसते हुए उसके चेहरे पे किस्सस की बरसात कर दी.इंदर अभी भी
हैरान था. "ठीक है.मैं मॅ'म से छुट्टी माँग के घर जाती हू.",उसने अपने
प्रेमी को झुक के चूमा. "हां,लेकिन अभी देविका जी को हमारे बारे मे बात
बताना..",इंदर ने उसकी गंद की दरार मे हाथ फिराया तो रजनी उसका इशारा समझ
गयी & अपने घुटने उसके बदन की दोनो तरफ टिकते हुए चूत को लंड के लिए खोल
दिया,"..क्यूकी मैं नही चाहता की सब बातें करें.जब वापस आओगी तब हम दोनो
मिलके उन्हे बताएँगे." इंदर ने उसकी गंद से हाथ नीचे ले जाते हुए उसकी
चूत को हाथो से फैलाया तो रजनी ने दाया हाथ पीछे ले जा लंड को पकड़ उसे
चूत के अंदर का रास्ता दिखाया,"जैसा तुम कहो,मेरी जान.",लंड अंदर जाते ही
वो उसके चेहरे पे झुक गयी & दोनो चूमते हुए चुदाई करने लगे.
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क्रमशः..............
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08-16-2018, 02:15 PM,
#74
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"वीरेन,प्लीज़..ज़रा रूको तो..",उसके कपड़े उतारते वीरेन को कामिनी ने
रोकने की कोशिश की मगर वो उसके रूप का ऐसा दीवाना हो चुका था की उसे सब्र
कहा था.कामिनी की ड्रेस का ज़िप खोल उसने उसे कंधो से नीचे कर दिया था &
अब ब्रा के बाए स्ट्रॅप को भी कंधे के नीचे सरकाते हुए उसकी बाई चूची को
अपने हाथो मे भर रहा था.

"प्लीज़,वीरेन..तुमसे 1 बहुत ज़रूरी बात करनी है.",वीरेन झुक के उसकी
चूची को चूसने लगा था.उसकी ज़ुबान महसूस करते ही कामिनी की नस-2 मे भी
मस्ती दौड़ गयी मगर वो इस सब से पहले उस से बात करना चाहती थी.बड़ी
मुश्किल से उसने उसके बाल पकड़ उसे अपने सीने से अलग किया.

"आख़िर ऐसी कौन सी बात है जो की हमारे प्यार से भी ज़्यादा ज़रूरी
है?!",वीरेन झल्ला के उस से अलग हो गया.दोनो उसके बेडरूम के बिस्तर पे
बैठे थे.

"ये तुम्हारे परिवार के बारे मे है."

"क्या?!"

"हां.",कामिनी उसके करीब आई,"मेरी बाते ध्यान से सुनो,वीरेन..",कामिनी ने
बात शुरू की कैसे उसे दवा की डिबिया की मॅन्यूफॅक्चरिंग डेट से सुरेन
सहाय की मौत के पीछे किसी साज़िश का शक़ हुआ & फिर कैसे उसे लगा की शिवा
भी कुच्छ खेल खेल रहा है नही तो देविका वसीयत मे देर क्यू कर रही थी.

प्रेमिका की बातें सुन वीरेन के चेहरे का रंग बदल गया.अब वाहा मस्ती की
जगह चिंता & परेशानी थी,"तुम्हारा कहना है की देविका ने भाय्या को मारा?"

"नही.उन्होने बिल्कुल भी वो घिनोनी हरकत नही की नही तो वो मुझे ये कभी
नही बताती की उन्होने दवा कब खरीदी थी बल्कि अगर देविका जी गुनेहगर होती
तब तो वो डिबिया कभी भी मेरे हाथ ही ना लगती!"

"तो क्या शिवा ने ये किया है?"

"हो भी सकता है & नही भी.",कामिनी की बात सुन वीरेन को थोड़ी हैरत हुई.

"देखो,मुमकिन है देविका जी से च्छुपके उसने ऐसा किया हो मगर वो तो बंगल
के अंदर रहता है बड़ी आसानी से वो दवा की डिबिया को गायब कर सकता था."

"हो सकता है उसे मौका नही मिला हो?"

"हो सकता है मगर वो ये भी जानता है की 1 वोही है घर के मेंबर्ज़ के अलावा
जो रात को भी बंगल के अंदर मौजूद रहता है.तो किसी भी गड़बड़ मे सबसे पहले
शक़ उसी पे जाएगा."

"तो फिर किसने किया ये?"

"जिसने भी किया बहुत चालक & ख़तरनाक इंसान है.मैं चाहती हू की तुम भी
सावधान रहो,वीरेन.दौलत की हवस इंसान को अँधा बना देती है & वो उसके लिए
किसी भी हद्द तक गिर सकता है.",उसने अपने प्रेमी को बाहो मे भर लिया,"मैं
नही चाहती तुम पे ज़रा भी आँच आए."

"घबराओ मत.",उसने कामिनी के होंठ चूम लिए,"..लेकिन देविका वसीयत मे देर
क्यू कर रही है?"

"यही तो मेरी समझ मे नही आ रहा.कही शिवा उनसे अपनी मर्ज़ी की वसीयत तो
नही बनवा रहा?",वीरेन ने उसकी ढीली ड्रेस को जिस्म से अलग करना चाहा तो
कामिनी बिस्तर से उठ गयी & उसे उतार दिया.अब वो केवल 1 गुलाबी ब्रा जिसका
1 कप नीचे हो उसकी बाई चूची नुमाया कर रहा था & मॅचिंग पॅंटी मे अपने
प्रेमी की गोद मे बैठी थी जिसने उसके खड़े होते ही खुद के कपड़े भी निकाल
दिए थे & अब पूरा नंगा था.

"देखो वीरेन,शिवा चाहे तो देविका जी को कठपुतली बनाके आसानी से एस्टेट पे
राज कर सकता है."

"हां,ये तो है & देविका भी....",वीरेन ने बात बीच मे ही रोक दी & उसके
ब्रा को हटाने लगा,"..कुच्छ भी हो सकता है.तुम्हे क्या लगता है मुझे
देविका से बात करनी चाहिए क्या?"

"नही.",कामिनी ने उसका लंड थाम लिया था,"..हमे कुच्छ पक्का थोड़े ही ना
पता है.हो सकता है वो भड़क जाएँ & फिर शिवा भी होशियार हो जाए.",उसके
कोमल हाथो मे लंड अपना दानवी आकार ले रहा था.

"ये तो है..",वीरेन ने बया हाथ उसकी कमर मे डाला हुआ था & दाए से उसकी
चूचिया मसल रहा था.उसकी बाई चूची को दबा के उसने उसके गुलाबी निपल को
अपने मुँह मे भर लिया & उसपे जीभ फिराने लगा.कामिनी उसकी गोद मे
च्चटपटाने लगी & मस्त हो लंड को हिलाने लगी.

"देखो,वीरेन.मुझे लगता है की अगर शिवा दौलत हथियाना चाहता है
तो....आहह....",वीरेन उसकी चूचिया चूस्ता हुआ दाए हाथ की 1 उंगली को उसकी
चूत मे घुसा रहा था,"..उऊन्ह..वो अभी किसी को नुकसान नही पहुँचाएगा खास
कर के तब तक जब तक वसीयत नही बन जाती क्यूकी..ओईइ माआ.....क्या करते
हो!!!!!..हाइईईईईईईईईईई.......",वीरेन इतनी तेज़ी से अपनी उंगली से उसकी
चूत मार रहा था की कामिनी अपनी बात भूल बस मस्ती के समंदर मे गोते खाने
लगी.उसकी चूत से रस की धार बहे चली जा रही थी मगर वीरेन था की रुकने का
नाम ही नही ले रहा था.उसके होंठ बदस्तूर उसकी चूचियो को चूसे जा रहे
थे.अपने बदन पे ये दोहरी मार कामिनी ज़्यादा देर तक नही झेल पाई & झाड़
गयी.

झाड़ते ही वीरेन ने उसे बिस्तर पे लिटा दिया & उसकी टाँगो को 1 साथ सटा
के हवा मे उठा दिया फिर उसके बाए तरफ घुटनो पे बैठ उसकी टाँगो को हवा मे
उठाए वो उसकी चूत से रिस्ता रस पीने लगा.कामिनी अब पूरी तरह से मदहोश जो
चुकी थी & उसी हाल मे उसने बात आगे बढ़ाई,"..ऊहह....अगर देविका जी की मौत
बिना वसीयत लिखे हो जाती है तो सब कुच्छ तुम्हारा हिस्सा तुम्हे देने के
बाद अपनेआप प्रसून की देखभाल वाले ट्रस्ट को चला जाएगा.....आनह..!"

"तो शिवा चाहेगा की देविका कुच्छ ऐसी वसीयत करे की अगर देविका की मौत भी
हो जाती है तो भी उसे नुकसान ना हो?",वीरेन घुमा & उसकी टाँगो को अपने
कंधो पे चढ़ा लिया.कामिनी को हैरत हुई,वो कभी भी इतनी जल्दी तो चुदाई नही
शुरू करता था!जब तक की वो उसके लंड के लिए बिल्कुल पागल नही हो जाती थी
वो उसे उसकी चूत मे नही घुसाता था फिर आज ये क्या था,"..आआआहह..!",आगे
उसे सोचने का मौका नही मिला क्यूकी वीरेन ने उसकी टाँगे कंधे पे चढ़ाए
उसकी चुदाई शुरू कर दी थी & बहुत तेज़ धक्के लगा रहा था.
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08-16-2018, 02:15 PM,
#75
RE: Kamukta Story बदला
"आअहह...हां..बिल्कुल ऐसा ही चा...हेगा..शिवा..हाइईईईई....!",वीरेन के
तेज़ धक्के उसे फिर से आसमान मे ले गये थे & 1 बार फिर उसकी चूत से रस की
धार & बदन मे फुलझड़िया च्छुत रही थी.वीरेन ने जैसे ही देखा की कामिनी
फिर से झड़ी है उसने फ़ौरन लंड बाहर खींचा.कामिनी फिर से हैरत मे पड़
गयी.वीरेन ने उसकी टाँगे फैलाई & उनके बीच झुक उसकी चूत चाट फिर से उसके
रस को पीने लगा.कामिनी मस्ती मे बहाल हो गयी.वो समझ गयी थी की आज तक
वीरेन ने उसे तडपा-2 के चोदा था मगर आज रात वो उसे चोद-2 के तडपाएगा!

वीरेन उसकी जाँघो को पूरा फैलाए उसकी चूत को चाट रहा था & कामिनी मस्ती
मे बेचैन हो अपने हाथो से अपनी मोटी,कसी चूचियो को दबा रही थी.उसके पूरे
बदन मे जैसे कोई मीठी ऐंठन सी थी जो उसे & मदहोश कर रही थी.काई पॅलो तक
उसकी चूत चाटने के बाद वीरेन उठा & उसे बाई करवट पे लिटा दिया & खुद भी
उसके पीछे आ लेटा.कामिनी अपनी बाई कोहनी पे उचक के लेट गयी & अपनी दाई
जाँघ हवा मे खुद ही उठा दी क्यूकी उसे पता था की वीरेन अपना लंड अब फिर
से उसकी चूत मे डालेगा लेकिन वीरेन ने उसे फिर से हैरान किया & लंड की
जगह उसने अपना दाया हाथ उसकी कमर पे लपेटते हुए उसकी चूत से लगा उसकी
उंगली उसमे घुसा दी.

बाया हाथ उसने उसकी गर्दन के नीचे से घुसाते हुए उसके सीने पे लगा दिया &
उसकी चूचिया दबाने लगा,"तो हमे करना क्या चाहिए,कामिनी?",उसकी उंगली
कामिनी को पागल कर रही थी.वो 1 बार के झड़ने से उबरती नही थी की वो उसे
दूसरी बार की ओर ले जाता था.

"मैं बस....ऊन्ह..इतना चाह..ती..हूँ...की...ईईईई.......",कामिनी 1 बार और
झाड़ रही थी.उसके झाड़ते ही झट से वीरेन ने चूत मे उंगली की जगह अपना लंड
घुसा दिया.कामिनी को इस पल ये लग रहा था की कोई भी उसकी चूत को ना
च्छुए..उसे बड़ी तकलीफ़ जैसी महसूस हो रही थी मगर उस तकलीफ़ मे बहुत सारा
मज़ा भी घुला था,"..ना...वीरेन..ऊव्व..प्लीज़....",अब वो रो रही थी मगर
गर्दन घूमके मस्ती मे अपने प्रेमी को बेतहाशा चूमे भी जा रही थी.वीरेन
उसकी दाई जाँघ को दाए हाथ से हवा मे उठाए चोद्ते हुए, उसी हाथ की उंगली
से उसके दाने को छेड़ भी रहा था.

कामिनी अब पूरी तरह से मस्ती मे पागल हो चुकी थी.अब उसे कोई होश नही था
की वो आहे भरती हुई क्या बोल रही थी & क्या कर रही थी.उसे बस ये एहसास था
की उसके बदन मे बस मस्ती बिजली बन के दौड़ रही है & उसके दिल मे बहुत ही
खुशी का एहसास है.उसकी आँखो से आँसू बह रहे थे & वो चीखे जा रही थी.जोश
की इंतेहा हो गयी थी आज तो!बदनो के मिलन से मिलने वाले मज़े का कोई
मुकाबला नही था ये वो जानती थी मगर वो मज़ा इतना ज़्यादा होगा की वो
बिल्कुल ही होश खो बैठेगी उसे ज़रा भी अंदाज़ा नही था!

"हान्न्न्न्न्न.....चोदो........हाईईईईईईई...आअहह...आनह......ह्बीयेयेययाया......!",वीरेन
बहुत तेज़ी से धक्के लगा रहा था & उसकी उंगली भी बड़ी तेज़ी से उसके दाने
को रगड़ रही थी.अचानक चीखती कामिनी बिस्तर पे निढाल हो गयी,उसके चेहरे पे
ऐसे भाव थे की मानो उसे बहुत तकलीफ़ हो & वो सूबक रही थी.उसकी आँखो से
आँसू भी बह रहे थे मगर ये सब उस शिद्दती एहसास की वजह से जो कामिनी ने
पहली बार झड़ने मे महसूस किया था.वीरेन समझ गया था की वो झाड़ रही है.वो
भी जल्दी-2 धक्के लगाके अपना पानी उसकी चूत मे खाली करने लगा.

वीरेन ने निढाल पड़ी कामिनी को अपनी बाहो मे भरा & बस उस से चिप्टा हुआ
उसके बालो को बहुत हल्के-2 चूमता लेटा रहा.काफ़ी देर बाद कामिनी ने अपने
सीने पे पड़ी उसकी बाँह को सहलाया तो वो समझ गया की अब वो संभाल गयी
है.उसके पीछे लेटा हुआ वीरेन अपनी कोहनी पे उचका & अपनी महबूबा का चेहरा
अपनी ओर किया.कामिनी के चेरे पे जो भाव था उसे देखा कोई ये समझने की भूल
कर सकता था की वो उदास है मगर वीरेन जानता था की असल मे उसके दिल का हाल
बिल्कुल उल्टा है.

दोनो कुच्छ नही कह रहे थे बस 1 दूसरे को देखे जा रहे थे.फिर कामिनी ने ही
पहल की & उसके चेहरे को नीचे झुका उसे चूम लिया.थोड़ी ही देर मे दोनो 1
बार फिर बातें कर रहे थे,"..मैं बस इतना चाहती हू,वीरेन की तुम अपनी भाभी
के मन का हाल ज़रा टोहो की आख़िर उनका इरादा क्या है?बेटे से तो उन्हे
बहुत लगाव है मगर ये शिवा उनके लिए कितनी अहमियत रखता है या फिर कही कोई
और तो नही है जोकि हमारी नज़रो से ओझल है & हम बेकार मे ही शिवा पे शक़
कर रहे हैं.वो दवा की डिबिया कुच्छ ऐसा ही इशारा करती है मगर बाकी बाते
शिवा को शक़ के दायरे मे ले आती हैं."

"नही,कामिनी.मुझे भी लगता है की शिवा जो दिखता है वो है नही.तुम फ़िक्र
मत करो मैं कुच्छ करता हू.ज़रा पता लगाया जाए की आख़िर ये शिवा है क्या
चीज़!"

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क्रमशः.............
Reply
08-16-2018, 02:16 PM,
#76
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
रजनी चुदने के बाद बेख़बर सो रही थी.इंदर धीरे से उठा & अपने कपड़े
पहने.अपनी जीन्स की जेब टटोली तो वाहा वो ड्यूप्लिकेट चाभी थी जो उसने आज
सवेरे ही हलदन मे बनवाई थी.वो रजनी के क्वॉर्टर से बाहर निकला & सीधा
बंगले के पीछे रसोई के दरवाज़े पे रात के चौकीदारो से छिपता हुआ पहुँच
गया.अगले ही पल वो बंगले के अंदर था.सुरेन जी की मौत के वक़्त उसे ये तो
पता लग गया था की शिवा नीचे के कमरे मे रहता है & परिवार के लोग उपरी
मंज़िल के कमरो मे.

वो दबे पाँव शिवा के कमरे के पास पहुँचा & हौले से बंद दरवाज़े को
दबाया.दरवाज़ा फ़ौरन खुल गया तो इंदर घबरा के पीछे हट गया.उसे लगा की
कमरे के अंदर कही शिवा जगा हुआ ना हो.काफ़ी देर तक जब अंदर से कोई आहट
नही आई तो उसने दरवाज़े को ओट मे खड़े हो अंदर झाँका & चौंक गया अंदर कोई
भी नही था.कमरे मे लगा पंखा या एसी भी नही चल रहे थे.वो कमरे के अंदर
दाखिल हुआ & अटॅच्ड बाथरूम को चेक किया,वो भी खाली था..तो इतनी रात गये
शिवा गया कहाँ?अपनी ठुड्डी खुजाता इंदर कमरे से बाहर निकाला.

शिवा तो वही था जहा वो हर रात होता था-अपनी महबूबा की बाहो मे मगर आज रात
उस से 2 ग़लतिया हो गयी थी.हर रात देविका के केमर मे जाने से पहले वो
अपने कमरे का ताला लगा देता था मगर आज वो ये करना भूल गया था & दूसरी
ग़लती जो थी उसने इंदर को खुशी से पागल कर दिया.

वो दूसरी ग़लती थी की शिवा ने आज रात हर रात की तरह देविका के कमरे का
दरवाज़ा अंदर से बंद नही किया.इंदर चाहता तो था की 1 बार शिवा के कमरे की
तलाशी ले मगर उसके पहले वो ये पक्का कर लेना चाहता था की शिवा उस दौरान
कमरे मे वापस नही आएगा लेकिन उसकी समझ मे बिल्कुल नही आ रहा था की आख़िर
शिवा गया कहा!

इसी उधेड़बुन ने उसने उपरी मंज़िल चेक करने की सोची & अपने रब्बर सोल
वाले जूते पहने बिना आवाज़ किए सीढ़ियाँ चढ़ गया.पहले प्रसून का कमरा था
फिर 2 कमरे जोकि गेस्ट रूम्स थे,के बाद देविका का कमरा था.इंदर ने प्रसून
के कमरे के दरवाज़े पे कान लगाया.अंदर खामोशी च्छाई थी,उसने दरवाज़े का
नॉब घुमाया मगर वो अंदर से बंद था.वो आगे बढ़ा & दोनो गेस्ट रूम्स को भी
खाली ही पाया.

फिर वो देविका के कमरे पे पहुँचा & फिर उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा.अपनी
प्रेमिका के जिस्म का लुत्फ़ उठाते शिवा को पता भी नही था की उसकी
ग़लतिया उसके लिए & उसकी महबूबा के लिए कितनी भारी पड़ने वाली हैं!इंदर
ने देविका के दरवाज़े को च्छुआ तो वो हल्का सा खुल गया & उसके कानो मे
अंदर से ऐसी आवाज़ आई मानो कोई कराह रहा हो.कमरे मे बिल्कुल अंधेरा
था.उसने धीरे से दरवाज़ा और खोला & फिर उसी की ओट मे हो अंदर झाँका.

झाँकते ही उसकी समझ मे आ गया की कराहने की आवाज़ देविका की थी & वो दर्द
मे नही मस्ती मे आहे भर रही थी.जब उसकी आँखे अंधेरे की आदि हुई तो उसने
देखा की देविका अपने घुटनो पे बैठी अपनी कमर हिला रही है.अंधेरे मे भी
इतना तो ज़ाहिर था की वो नंगी थी & बेचैनी से कमर हिला रही थी मगर उसे ये
समझ नही आ रहा था की नीचे कौन था क्यूकी उसे ये लग रहा था की वो चुदाई कर
रही है मगर फिर नीचे वाला आदमी क्या बिना पैरो के था देविका का चेहरा
दरवाज़े की तरफ ही था & उसके नीचे जो था वो यक़ीनन किसी का लंड ही था मगर
ऐसा पैर कटा इंसान कौन था जो उसे चोद रहा था?

ये उलझन भी देविका ने फ़ौरन ही दूर कर दी.मस्ती मे पागल हो जैसे ही उसने
अगली आह भरी इनडर सब समझ गया & उसे अपनी बेवकूफी पे हँसी भी
आई,"..आअन्न्न्नह...शिवाआआ....आइ लव यू..जान्न्न्न्न..!",देविका दरअसल
शिवा के मुँह पे बैठी कमर हिला रही थी & इंदर जिसे लंड & कमर समझ रहा था
वो असल मे शिवा की जीभ & सर थे.देविका सरक के पीछे हुई & बिजली की तेज़ी
से लंड को अपनी चूत मे घुसाया & 1 बार फिर अपने प्रेमी के उपर लेट
उच्छलने लगी.

..तो ये बात है!..शिवा भाई देविका जी के प्रेमी हैं & इसलिए अपने कमरे से
गायब हैं..चलो अच्छा है..अपना काम और आसान हो गया.इंदर का शैतानी दिमाग़
अब तक 1 तरकीब सोच चुका था.वो जानता था की शिवा को अभी यहा बहुत वक़्त
लगने वाला है मगर तभी अंदर से आ रही आवाज़ो पे उसका ध्यान गया.

देविका मस्ती मे पागल हो चुद्ते हुए पीछे हो शिवा की टांगो पे लेट गयी
थी.शिवा भी उठ बैठा था & उस पोज़िशन मे ही बड़ी हल्की-2 कमर हिला उसे चोद
रहा था.उसका दिल किया की वो अपनी जानेमन की चूचियो का भी लुत्फ़ उठाए तो
उसने हाथ बढ़ाके दोनो मोटे गोलो को थामा & उन्हे पकड़ के देविका को अपनी
टाँगो से उठा लिया.

"आआअहह..!",दर्द & मस्ती से भरी देविका की तेज़ आह ने ही इंदर का ध्यान
खींचा,"..बड़े शरीर हो तुम!",देविका शिवा की गोद मे बैठी उसके सर को थामे
प्यार से चूम रही थी & वो भी उसकी कमर को सहलाते हुए उसकी छातियो को चूम
& चूस रहा था.

"शनिवार को फिर जाओगे अपने भाई के पास?",देविका ने उसका सर अपनी चूची से उठाया.

"हां.",शिवा ने बाए हाथ से देविका के सर को नीचे किया & दाए से उसकी गंद
को मसला & उसे चूमने लगा.

"उन्न्ह..इस बार मत जाओ..",देविका बहुत मस्त हो चुकी थी,"..मैं कैसे
गुज़ारुँगी पूरी रात अकेली..आनंह..!"

"बस 1 ही रात की बात है.फिर नही जाऊं तो भाई साहब चिंता करते हैं.",शिवा
ने बिना लंड चूत से निकाले अपने घुटने मोड & देविका की गंद को थाम गहरे
धक्के लगाने लगा,"..घबराओ मत.आके तुम्हे यान्हा छ्चोड़ने की सारी कसर
पूरी कर दूँगा.",इसके बाद कमरे मे बस दोनो प्रेमियो के बदनो की रगड़ की
आवाज़ & उनकी मस्त आहो के शोर के सिवा कुच्छ ना था.इंदर वाहा से निकला &
जल्दी से नीचे पहुँचा & शिवा का कमरा खंगालने लगा.कमरे मे कोई बहुत चीज़े
तो थी नही.15 मिनिट बाद ही वो उस कमरे की चाभी जो उसे वही कमरे के 1
शेल्फ पे मिल गयी थी,की छाप 1 साबुन पे ले रसोई के दरवाज़े से बाहर निकल
उसमे ताला लगा वापस सर्वेंट क्वॉर्टर्स की ओर जा रहा था.

शिवा गहरी नींद मे सोया था जब उसे अपनी पीठ पे कुच्छ महसूस हुआ.वो देविका
के बिस्तर मे नंगा पेट के बल सोया था,उसने आँखे खोली तो देखा देविका उसके
उपर लेटी,उसकी पीठ मे अपनी छातिया दबाए उसकी पीठ को चूम रही थी.खिड़की से
सुबह के उगते सूरज की किर्ने पर्दे से छन के अंदर आ रही थी.शिवा ने करवट
ली & उठ बैठा,अब उसके देविका के प्रेमी से वापस उसके नौकर बनने का वक़्त
हो चला था.

"थोड़ी देर और रूको ना!",देविका ने बिस्तर से उतरते शिवा के बदन को पीछे
से बाहो मे भर लिया.जवाब मे शिवा बस हंसा & अपनी शर्ट के बटन बंद करने
लगा.उसके पीछे घुटनो पे बैठी देविका ने उसके हाथ शर्ट से अलग किए & फिर
खुद उन्हे बंद करने लगी.

"अरे!मैं तुमसे 1 ज़रूरी बात तो करना भूल ही गयी!"

"क्या?"

"तुम मुझे इंदर से होशियार रहने को क्यू कहते थे?वो तो बहुत ही ईमानदार &
शरीफ इंसान है."

"देखो देविका,उस इंसान को देख हमेशा मुझे ऐसा लगता था जैसे की वो अंदर से
कुच्छ और है & उपर से अच्छे होने का ढोंग करता है.",बटन बंद होते ही वो
बिस्तर से उठ गया,"..लेकिन अभी तक उसने कोई ग़लत काम किया नही है & हो
सकता है मैं भी फ़िज़ूल उसपे शक़ कर रहा हू.तुम्हे भी 3 महीने तो हो ही
गये हैं उसके साथ काम करते हुए.अगर तुम कहती हो तो हो सकता है वो अच्छा
इंसान ही हो."

"अच्छा,अब चलता हू.रात को मिलते हैं.",शिवा झुका & दोनो कुच्छ पॅलो तक 1
दूसरे को चूमते रहे & फिर वो कमरे से बाहर चला गया इस बात से बेख़बर की
वो पहले ही सही था & अब ग़लत & इस ग़लती की कितनी बड़ी सज़ा उसे & उसकी
महबूबा को भुगतनी पड़ेगी.

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Reply
08-16-2018, 02:16 PM,
#77
RE: Kamukta Story बदला
इंदर के बदले के प्लान के अगले दौर मे ये बहुत ज़रूरी था की देविका के
पास उसका कोई भी भरोसेमंद नही हो.उसके पति को तो वो पहले ही किनारे कर
चुका था,देवर से उसे कोई खास ख़तरा था नही क्यूकी वो यहा रहता ही नही था
& बेटा..उस से तो खैर कोई परेशानी होने का सवाल ही नही था.

अब रह जाता था केवल शिवा जिसे हटाने की चाल इंदर ने अच्छी तरह से सोच ली
थी लेकिन इसके लिए ज़रूरी था की रजनी वाहा मौजूद ना रहे.इस बात को पूरा
करने के लिए इंदर उसका क़त्ल भी कर सकता था पर वो बेवजह कोई ख़तरा नही
मोल लेना चाहता था इसलिए उसने रजनी को छुट्टी पे जाने के लिए मना लिया
था.

अब बस उसे इंतेज़ार था उस रोज़ का जिस दिन शिवा एस्टेट से बाहर जाता अपने
भाई से मिलने.और आख़िर वो दिन भी आ गया.

रजनी 5 दिन पहले ही अपने मा-बाप से मिलने 2 महीने की छुट्टी पे चली गयी
थी & सवेरे ही शिवा भी पंचमहल चला गया था अपने भाई से मिलने.आज सही मौका
था & इसके लिए इंदर ने सारी तैय्यारि कर ली थी.शनिवार का दिन था & आज
दफ़्तर मे बहुत कम स्टाफ आता था.

"कम इन.",देविका अपने कंप्यूटर पे काम कर रही थी & मॉनिटर से नज़र हटाए
बिना उसने दस्तक देने वाले को कॅबिन के अंदर आने की इजाज़त दी.

"गुड मॉर्निंग,मॅ'म."

"आओ,इंदर.बोलो क्या बात है."

"मॅ'म 1 बहुत ज़रूरी बात करनी है मगर समझ नही आता की शुरू कैसे
करू.",उसकी बात सुन देविका के माथे पे शिकन पड़ गयी.उसने कंप्यूटर से
नज़र हटके उसकी ओर सवालिया निगाहो से देखा.

"मॅ'म.बात शिवा भाई के बारे मे है.",1 पल को देविका को बहुत घबराहट
हुई.उसे लगा की कही ऐसा तो नही की इंदर को उसके & शिवा के रिश्ते के बारे
मे पता चल गया है.

"क्या बात करनी है शिवा के बारे मे?",उसके चेहरे पे उसके दिल की घबराहट
नही आने पाई थी.

"मॅ'म. कुच्छ दिन पहले सभी बिज़्नेसस & डिपार्ट्मेंट्स के अकूउंतस चेक कर
रहा था की तभी मेरी नज़र सेक्यूरिटी डिपार्टमेंट मे हुए इस घपले पे गयी."

"घपला!",देविका चौंक पड़ी.उसे थोड़ा चैन तो मिला की उसका राज़ महफूज़ था
मगर शिवा & घपला!

"जी,मॅ'म.ये देखिए सर के गुज़रने के बाद हमारे यहा कोई भी नयी भरती नयी
हुई है..",उसने कुच्छ प्रिंट आउट्स उसके साइन किए,"..लेकिन सर के गुज़रने
के बाद ही सेक्यूरिटी डिपार्टमेंट 2 एक्सट्रा लोगो के नाम पे अकाउंट्स से
उनकी तनख़ाह के पैसे ले रहा है.छान-बीन करने पे पता चला की इन दोनो के
नाम का कोई शख्स हमारे यहा काम ही नही करते बल्कि इन फ़र्ज़ी मुलाज़िमो
के नाम से कोई हर महीने तनख़्वाह अपनी जेब मे डाल रहा है."

"कौन है वो धोखेबाज़?",देविका को जवाब मालूम था मगर फिर भी दिल का कोई
कोना इस उमीद मे था की इंदर कोई और नाम लेगा.

"जी..",इंदर ने नज़रे नीची कर बहुत परेशान & दुखी होने का नाटक किया,"..शिवा भाई."

"इंदर,इस बात के सबूत हैं तुम्हारे पास."

"वो प्रिंट-आउट्स देखिए मॅ'म.इन फ़र्ज़ी नामो के अकाउंट्स शिवा भाई ही
ऑपरेट कर रहे हैं.उनका फोन नंबर & डीटेल्स इस्तेमाल किया गया है दोनो
अकाउंट्स खुलवाने मे.",देविका का गला भर आया था & दिल मे
गुस्सा,दुखा,अपमान & धोखा खाने का दर्द था.वो सर झुकाए बस उन काग़ज़ो को
देखे जा रही थी जिन्होने कोई शुबहा नही छ्चोड़ा था की शिवा वो शिवा जो
उसे मरते दम तक चाहने का दम भरता था..वो शिवा जो उसका आख़िरी सांस तक साथ
निभाने की कसमे ख़ाता था..वो शिवा जिसके सहारे उसने बाकी की ज़िंदगी
गुज़ारने का सपना देखा था......वो शिवा उसे चंद रुपयो के लिए धोखा दे रहा
था.

देविका खामोश बैठी उन काग़ज़ो को देख रही थी.उसके दिल मे तूफान उठा हुआ
था.इंदर का काम हो गया था,वो धीरे से उठा & कॅबिन से बाहर चला गया.

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क्रमशः............
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08-16-2018, 02:17 PM,
#78
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"सरासर बकवास है!..झूठे हैं ये काग़ज़ात..!",शिवा ने वो सारे काग़ज़ हवा
मे उड़ा दिए,"..देविका..ये चाल है उस इंदर की वो कमीना कोई बहुत बड़ा खेल
खेल रहा है..",देविका लगातार उसे देखे जा रही थी.शिवा ने देखा की उन आँखो
मे आज उसके लिए ना प्यार था ना ही उनमे भरोसे की झलक थी.वो समझ गया था की
आज अगर उपरवाला खुद भी उसकी पैरवी करे,देविका को भरोसा नही होगा.

"आपने बुलाया,मॅ'म.",इंदर बंगल के ड्रॉयिंग हॉल मे दाखिल हुआ.

"आइए,इंदर धमीजा जी!",देविका के कुच्छ बोलने से पहले शिवा ताली बजाते हुए
बोला,"..कमाल की चाल चली आपने.अब क्या मैं जान सकता हू कि आपका असली
मक़सद क्या है?",शिवा की बातो से देविका को भी ऐसा लगने लगा था की कही
शिवा ही सच ना हो.आख़िर जो काम उसने आज तक नही किया वो अब क्यू करेगा
लेकिन फिर इंसान की फ़ितरत का क्या भरोसा!

"शिवा भाई,मैने तो बस अपना फ़र्ज़ अदा किया है.ये बात मॅ'म से च्छुपाना
नमकहरामी होती."

"अच्छा.तो ये बताओ की ये काग़ज़ात आपको कैसे मिले?"

"आपने सॅलरी अकूउंतस खुलवाए थे इन दो फ़र्ज़ी नामो के.मैने एस्टेट मॅनेजर
की हैसियत से बॅंक से ये काग़ज़ात माँगे थे."

"अच्छा.तो इनमे ये कहा लिखा है की ये मैने खुलवाए हैं?"

"नाम आपका नही है शिवा भाई पर पॅन नंबर & मोबाइल नंबर्स तो आप ही के हैं."

"तो आपका कहना है की मैं इतना बेवकूफ़ हू की अपने डीटेल्स इस्तेमाल करूँगा?"

"शिवा भाई,आप तो मुझ से ऐसे पुच्छ रहे हैं जैसे की मैं मुजरिम हू जबकि
फरेब आपने किया है!",इंदर की आवाज़ मे 1 ईमानदार इंसान पे तोहमत लगाने से
पैदा हुए गुस्से की झलक थी.

"इंदर बिल्कुल सही कह रहा है,शिवा.",प्रेमिका की बात सुन शिवा का दिल टूट
गया,"..तुम साबित करो की ये कागज झूठे हैं."

"अच्छा.ठीक है.मिस्टर.इंदर इन काग़ज़ो को बनवाने पे मुझे बॅंक से डेबिट
कार्ड्स,चेकबुक वग़ैरह मिली होगी वो तो मेरे पास होनी चाहिए?",इंदर खामोश
रहा.

"तुमने तो ये सब पहले ही सोच लिया होगा & कही च्छूपा रखा होगा वो
सब.",देविका ने बिना शिवा की ओर देखे ये कड़वी बता कही.कल रात भर वो सोई
नही थी & अपने तकिये मे मुँह च्छूपा रोती रही थी.दिल मे 1 उमीद थी कि
शायद शिवा वापस आए तो सब झूठ साबित हो मगर ऐसा नही होता दिखता था.

"तो फ़ायदा क्या होगा मुझे?अगर पैसे चुराए हैं तो उन्हे खर्च भी तो
करूँगा नही तो चोरी किस काम की!",शिवा ने टॅन्ज़ कसा.

"ये मुझे नही पता.",देविका ने गुस्से से कहा.

"अब मैं 1 बात कहता हू.मेरे कमरे की,मेरे बॅंक अकाउंट्स,लॉकर्स & मेरे
भाई की घर-हर जगह की तलाशी लीजिए & अगर कही से कोई भी सबूत मिले तो मुझे
क़ानून के हवाले कर दीजिएगा.",उसकी बात सुन इंदर की खुशी का ठिकाना ना
रहा.कल रात ही उसने सब इंतेज़ाम कर दिया था.शिवा के कमरे की चाभी की नकल
का उसने बखुबी इस्तेमाल किया था.

"ठीक है.कमरे से ही शुरू करते हैं.",देविका ने तल्खी से कहा & 2-3 नौकरो
को आवाज़ दी.

देविका,इंदर & शिवा कमरे मे 1 कोने मे खड़े थे & नौकर कमरे का समान
उलट-पलट रहे थे.लगभग पूरा कमरा छान मारा मगर कुच्छ हाथ नही लगा.कमरे मे 1
बेड था & 1 कबॉरॅड,1 कोने मे 1 पढ़ने की मेज़ & कुर्सी थे.इसके अलावा
कमरे मे और कोई फर्निचर नही था.कमरे को छानने के बाद 1 नौकर बाथरूम मे
घुस गया.बाथरूम मे भी कोई अलमारी तो थी नही नही कोई ऐसी जगह थी जहा कुच्छ
च्छुपाया जाए.

नौकर बाथरूम से निकल के बहा आया तो उसकी नज़र ठीक सामने दीवार मे बने
कपबोर्ड को खंगालते दूसरे नौकर पे पड़ी.दूसरा नौकर स्टूल पे चढ़ा कपबोर्ड
के उपर के खाने मे ढूंड रहा था मगर उसे वो नही दिखा जो इस नौकर को दिख
गया था,"वो क्या है?"

"कहा?",उसके साथी ने पुचछा.

"अरे,ये जो सूटकेस अभी उतारा उसके पीछे देखो."

"देख तो लिया,पुरानी मॅगज़ीन हैं."

"अरे हटो यार.",वो उसे हटा खुद चढ़ा & उन मॅगज़ीन्स के बीच रखे 1 पतले से
बॅग को उसने खींच निकाला.बॅग 6 इंच लंबा & 4 इंच चौड़ा था & मोटाई थी बस
2 इंच.ये काग़ज़ात वग़ैरह रखने के काम आने वाला बाग था.नौकर ने उसे खोल
तीनो के सामने उस बॅग को पलट दिया & अंदर से डेबिट कार्ड्स,चेकबुक्स &
बॅंक के और काग़ज़ात गिर पड़े.

देविका आगे बढ़ी & काँपते हाथो से कार्ड्स को उठा के उनपे नाम पढ़ा-वो
वही फ़र्ज़ी नाम थे.उसकी आँखो मे गुस्सा & दुख आँसुओ की शक्ल मे उतर
आए.शिवा समझ चुका था की इंदर ने ये बाज़ी जीत ली है.उसकी आँखो मे हार सॉफ
झलक रही थी मगर साथ ही दुख & अपनी महबूबा की फ़िक्र भी झलक रही थी.आज
उसकी समझ मे आया था की इंदर के बारे मे उसे क्या खटकता था-वो बहुत
ज़्यादा शरीफ था!

हां..इतना शरीफ की उसे कभी किसी बात पे झल्लाहट भी नही होती थी लेकिन अब
क्या फ़ायदा था!वो बाज़ी जीत चुका था & शिवा अपनी जान की नज़रो से गिर
चुका था.देविका से जुदाई की बात से उसके दिल मे टीस सी उठी मगर अगले ही
पल उस पुराने फ़ौजी के जिगर ने उसे ललकारा....वो मर्द का बच्चा था!..इस
वक़्त हवा का रुख़ उसके खिलाफ था & उसे शांत रहना था मगर वो इस
ज़िल्लत,इस धोखे का बदला लेके रहेगा..चाहे कुच्छ भी हो जाए,देविका का बाल
भी वो बांका नही होने देगा & इस ज़लील इंसान से इस बात का बदला ज़रूर
लेगा.

कमरे मे अब कोई भी नही था.नौकर वाहा से जा चुके थे & उनके साथ इंदर भी.1
कोने मे बुत की तरह खड़ी देविका के दिल ने जैसे अब जाके ये बात जैसे समझी
थी की जिस शख्स पे उसने इतने सालो आँख मूंद के भरोसा किया था....अपने पति
से भी ज़्यादा भरोसा उसी ने उसकी पीठ मे च्छुरा घोंपा था!

इस एहसास से उसके दिल का गुबार आँखो से आँसू बनके छलक उठा.

"देविका..",शिवा ने उसके कंधे पे हाथ रखा.

"मत च्छुओ मुझे!",देविका ने उसका हाथ झटक दिया.

"मेरी बात..-"

"कुच्छ नही सुनना मुझे!",देविका चीखी,"..बस मेरी नज़रो से दूर हो जाओ &
कभी अपनी घिनोनी शक्ल नही दिखना!",शिवा ने 1 बार फिर अपनी प्रेमिका के
करीब आना चाहा मगर वो और दूर हो गयी.

"1 बात कान खोल के सुन लो अगर अभी तुम्हारे साहब होते तो यहा अभी तक
पोलीस आ चुकी होती.",देविका की आँखो से आँसू बह रहे थे मगर साथ-2 उनसे
अँगारे भी बरस रहे थे,"..पर मैं बस बीते दीनो का ख़याल करके तुम्हे यहा
से जाने दे रही हू.2 घंटे मे यहा से निकल जाओ.",देविका वाहा से निकल गयी.

दरवाज़े के बाहर दूसरी तरफ ओट मे खड़ा इंदर सारी बातें मुस्कुराते हुए
सुन रहा था.उसे यकीन ही नही हो रहा था की वो अपने प्लान मे इस कदर कामयाब
हो गया था.
वो मुस्कुराते हुए बंगल से बाहर निकल अपने क्वॉर्टर चला गया.

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"क्या बात है मम्मी?",नाश्ते की मेज़ पे बैठी देविका को कुच्छ ना खाते
देख रोमा अपनी कुर्सी से उठ उसके करीब आ गयी.

"हूँ..क-कुच्छ नही.",देविका जो गुम्सुम बैठी थी बहू को देख जल्दी से
नाश्ता ख़तम करने लगी.3 दिन हो गये थे शिवा को गये हुए.रोमा को ये तो पता
था की शिवा ने क्या घपला किया है मगर उसे ये पता नही था की उसकी सास का
शिवा से असल मे क्या रिश्ता था.उसे अब देविका की फ़िक्र होने लगी
थी.बिज़्नेस मे तो ये सब होता रहता था.अगर वो इस तरह की हर बात को यू दिल
पे लेंगी तो बिज़्नेस का नुकसान तो होगा ही साथ ही उनकी सेहत पे भी बुरा
असर पड़ेगा.

नाश्ता ख़तम होते ही देविका लॉन मे गयी तो रोमा भी उसके पीछे-2 वाहा चली
गयी,"मम्मी."

"हां,बेटा."

"आप इतना क्यू परेशान हैं?देखिए,हमे समय रहते सब पता चल गया & कोई बहुत
बड़ा नुकसान भी नही हुआ.और आप ये सोचिए मम्मी की अगर 1 इंसान ने हमे धोखा
दिया तो वही दूसरे ने अपना फ़र्ज़ निभा के हमारे साथ नमकहलाली की है.हमे
1 भरोसेमन आदमी का फाय्दा ही हुआ है इस बात से."

देविका ने रोमा को देखा,ठीक ही बात कर रही थी वो.इंदर सचमुच 1 ईमानदार &
भला इंसान था लेकिन उस बेचारी को क्या पता की शिवा ने उसका दिल तोड़ दिया
था & वो दर्द इतनी आसानी से नही मिटता.दिल की तकलीफ़ च्छूपाते हुए देविका
मुस्कुराइ,"तुम तो सच मे बड़ी सयानी है,बेटा.",बहू के गाल पे उसने प्यार
से हाथ फेरा.

"अच्छा.अब आप आज से टाइम पे ऑफीस जाएँगी & टाइम से आएँगी!ओके?"

"ओके."

"& अगर कभी भी ज़रूरत पड़े तो मुझसे अपनी परेशानी बाँटेंगी.ओके?"

"ओके."

"मम्मी,ज़रूरत पड़े तो मैं भी ऑफीस का काम देख सकती हू."

"हां बेटा,मुझे पता है & तुम्हारा ही ऑफीस है मगर हमे इस बात का भी तो
ख़याल रखना है की तुम्हारा पति घर मे अकेला ना रह जाए.",रोमा का नाम
पुकारते हुए लॉन मे आते प्रसून की ओर देविका ने इशारा किया,"देखो,कुच्छ
पॅलो के लिए तुम गायब हुई तो कैसे शोर मचा रहा है!ऑफीस जाओगी तब तो पूरा
घर सर पे उठा लेगा.",रोमा के गाल शर्म से सुर्ख हो गये & वो झट से लाजते
हुए पति के पास चली गयी.

देविका हंस पड़ी & दूर खड़ी दोनो को बात करते देखने लगी.रोमा की बात ने
उसका दिल हल्का कर दिया था & उसे बहुत सहारा मिला था.बस यही बच्चे तो
उसका सबकुच्छ थे & इन्ही के लिए तो उसकी ज़िंदगी थी.उसने लॉन मे खड़े हो
चारो ओर नज़र घुमाई,ये सब इनके लिए महफूज़ रखना ज़रूरी था & उसके लिए
उसका दफ़्तर जाना ज़रूरी था.ख़याल आते ही खुद बा खुद उसके कदम दफ़्तर की
ओर मूड गये.

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क्रमशः......
Reply
08-16-2018, 02:17 PM,
#79
RE: Kamukta Story बदला
गतान्क से आगे...
"क्या?!सच मे!",कामिनी की बड़ी-2 आँखे हैरत मे और बड़ी हो गयी.

"हां.",कामिनी वीरेन के साथ उसके बंगल के लॉन के झूले मे बैठी थी.आज
थोड़ी गर्मी थी तो उसने घुटनो तक की ढीली-ढली शॉर्ट्स & टी-शर्ट पहनी
थी.वीरेन की बाई बाँह के घेरे मे बैठी वो उसके चेहरे को देख रही थी.

"तुम्हे कैसे पता चला?",वीरेन ने उसे अपने करीब किया & उसकी ठुड्डी चूम
ली,".उन्न..बताओ ना!"

"रोमा का फोन आया था.",वो उसकी कमर शर्ट के उपर से ही सहला रहा था.कामिनी
जानती थी की थोड़ी ही देर मे हाथ उसकी शर्ट एक अंदर होगा.

"छ्चोड़ो ना."उसने वीरेन का दाया हाथ कमर से हटाया तो उसने उस हाथ को
उसकी नंगी टाँगो से लगा दिया.कामिनी ने हार मान ली & इस बार हाथ को नही
हटाया,"क्या बोला रोमा ने?"

वीरेन कामिनी को शिवा की धोखधड़ी के बारे मे बताने लगा.बोलते हुए उसका
दाया हाथ कामिनी की शॉर्ट्स के अंदर घुस उसकी मखमली जाँघो पे फिसल रहा
था.कामिनी पे खुमारी छाने लगी थी पर उसका ध्यान वीरेन की बातो पे
था..आख़िर ये कमाल हुआ कैसे?

"तो इंदर को पता लगा सब कुच्छ..",ढीले शॉर्ट्स मे वीरेन का दाया हाथ अब
उसकी दाई जाँघ से उसकी कसी गंद की दाई फाँक पे चला गया था & पॅंटी के
अंदर घुस रहा था,"..ऊव्वव..!",वीरेन गंद की मांसलता देख खुद को चूटी
काटने से रोक नही पाया.कामिनी ने उसका हाथ खींचना चाहा मगर उसने गंद को
और मज़बूती से दबोच लिया & पॅंटी के अंदर उसकी गंद की दरार पे उंगली
फिराने लगा.कामिनी अब और मस्त हो गयी & प्रेमी की शरारत की जवाब मे उसने
भी उसकी टी-शर्ट उपर की & उसके दाए निपल को दन्तो से काट लिया.

"मैं एस्टेट गया था फिर..",वीरेन की उंगली कामिनी के गंद के छेद मे घुसी
तो कामिनी ने चिहुन्क के गंद का छेद कस लिया.वीरेन छेद मे क़ैद उंगली को
अंदर-बाहर करने लगा.अब कामिनी झूले से उठ वीरेन की गोद मे बैठी मचल रही
थी.वीरेन टी-शर्ट के उपर से ही उसकी मस्त चूचियो को चूम रहा था.

"रोमा ने मुझे सारी बात बताई & ये कहा था की देविका बहुत परेशान है.इसलिए
मैं एस्टेट गया & देविका से बात की.",वीरेन का बाया हाथ कामिनी की शर्ट
के अंदर घुस उसकी मोटी चूचियो को मसल रहा था.कामिनी भी अब उस से चिपकी
उसे पागलो की तरह चूम रही थी.उसकी चूत मे कसक उठने लगी थी & उसे अब दोनो
के जिस्मो के बीच पड़े कपड़े बहुत बुरे लग रहे थे.
वीरेन जैसे उसके दिल की बात समझ गया,वो कामिनी की शर्ट मे हाथ घुसा उसकी
दाई चूची को दबाते हुए शर्ट के उपर से ही उसकी बाई चूची को चूम रहा
था.उसने अपना सर उसके सीने से उठाया & उसकी शर्ट को उसके सर के उपर से
खींचते हुए निकाल दिया.कामिनी ने भी उसकी शर्ट निकाल दी & दोनो ने 1
दूसरे को बाँहो मे कस लिया.

"तुम्हे क्या लगा..आहह....दाँत नही....ऊओवव्व....बदतमीज़...ये
लो..!",वीरेन ने कामिनी के बाए निपल को दाँत से काट लिया.जब उसने मना
करने के बावजूद उसने फिर से वही हरकत उसकी दाई छाती पे दोहराई तो कामिनी
ने भी सर झुकते हुए उसके सीने पे काट लिया.

"पहले बताओ ना..आनह..",अब वो अपनी टाँगे वीरेन की कमर पे लपेटे उसकी गोद
मे बैठी थी & वीरेन उसकी नंगी पीठ से सरकते हुए दोनो हाथो को 1 बार फिर
शॉर्ट्स मे घुसा रहा था मगर इस बार हाथ उपर से घुस रहे थे.हाथो ने जैसे
ही कामिनी की चौड़ी गंद को च्छुआ वो उसे मसल्ने & दबाने मे जुट गये.

"तुम नही मनोगे...उऊन्ह..तुम्हे क्या लगता है देविका & शिवा के बीच कुच्छ
था की नही?..ऊहह...!",कामिनी ने अपने महबूब को अपनी बाँहो मे और कस लिया
क्यूकी उसने अपने दाए हाथ की उंगली उसकी गंद से फिराते हुए नीचे से उसकी
पॅंटी मे क़ैद चूत मे घुसा दी थी.

"नही,ऐसा लगता तो नही है.",वीरेन उसके सीने के उभारो को चूमते हुए उसकी
चूत को उंगली से कुरेद रहा था.कामिनी अब पूरी तरह से जोश मे पागल उसकी
गोद मे कूद रही थी.वीरेन की उंगली उसकी चूत से रस की धार निकलवा रही थी &
वो अपने झड़ने के बहुत करीब थी,"..लेकिन अगर कुच्छ था भी तो इस बात के
बाद सब ख़त्म हो गया होगा.अब फ़िक्र की कोई बात नही है.",वीरेन की उंगली
चूत मे कुच्छ ज़्यादा ही अंदर घुसा गयी & चूत बर्दाश्त नही कर पाई & उसमे
से रस की तेज़ धार छूट पड़ी.कामिनी झाड़ चुकी थी.

निढाल कामिनी को वीरेन ने झूले पे लिटाया & उसकी शॉर्ट्स & पॅंटी को
निकाल दिया.बदन पे बस केवल ब्रा था जिसके कप्स उसकी मोटी चूचियो के नीचे
दबे पड़े थे.वीरेन ने अपनी शॉर्ट्स खोली & अपने लंड को बाहर
निकाला.कामिनी की टाँगे फैला के अपनी दाई टांग झूले से नीचे लटकाई & बाई
को आगे कामिनी दाई टांग के बगल मे फैला उस टांग के तलवे को उसके दाई छाती
की बगल मे लगा दिया.

"ऐसा सोचने की ग़लती नही करना वीरेन.अभी तक शिवा आँखो के सामने था अब
नज़रो से ओझल है.पहले हम उसपे नज़र रख सकते थे अब नही.& फिर इतना तो
पक्का है की दवा से छेड़-छाड मे उसका हाथ नही था...ऊहह..!",वीरेन ने अपना
लंड उसकी चूत मे घुसा दिया था.झूले पे वो तेज़-2 धक्के लगा चुदाई तो कर
नही सकता था सो उसने इस तरह बैठके अपनी महबूबा की चूत की सैर करने की
सोची.

"आनह.....उउम्म्म्मम.....पूरा अंदर घुसाओ ना...हन्णन्न्..",वीरेन ने अभी
आधा ही लंड अंदर किया था तो कामिनी ने हाथ से पकड़ कमर हिला पूरे लंड को
अपने अंदर किया.जब वीरेन का लंबा,मोटा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत मे समा
जाता तो वो भरा-2 एहसास उसे बहुत गुदगुदाता था & उसे बहुत मज़ा आता
था.वीरेन का लंड उसकी चूत के 1-1 हिस्से को च्छू रहा था & उसके बदन के
रोम-2 मे बस जोश भर गया था.

"होशियार रहना,वीरेन.ख़तरा अभी टला नही है....आआननह..!",शाम गहरा रही
थी.पन्छि अपने घोंस्लो को लौटने लगे थे,आसमान पे डूबते सूरज ने अपना
सिंदूरी रंग बिखेर दिया था.उस सुहाने आलम मे अपने महबूब की क़ातिलाना
चुदाई ने कामिनी को बिल्कुल मदहोश कर दिया.उसने अपनी बात कह ली थी & अब
वो बस उसके इश्क़ मे डूब जाना चाहती थी.उसने अपनी दोनो टांगो को मोड़
बैठे हुए वीरेन की कमर को जाकड़ लिया & उसकी ताल से ताल मिला कमर हिलाने
लगी.लॉन मे अब एस्टेट से जुड़ी बाते नही बल्कि दोनो के जिस्मो की
जद्दोजहद से पैदा होती झूले के हिलने की आवाज़ & दोनो के 1 दूसरे के
खूबसूरत जिस्मो से आहट होने से पैदा हुई मस्तानी आहो की आवाज़े थी.

----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

"नमस्ते आंटी!नमस्ते सर!..",अपने बंगल के पोर्टिको मे खड़ी कामिनी ने
चंद्रा साहब & उनकी बीवी का इस्तेक़्बल किया.उसने दोनो को अपने घर रात के
खाने की दावत दी थी.कामिनी ने घुटनो तक की काली स्कर्ट & लाल ब्लाउस पहना
था.चंद्रा साहब ने उतरते ही अपनी शिष्या के हुस्न को आँख भर के
निहारा.कामिनी से उनकी ये हरकत च्छूपी ना रही & उसने उनकी तरफ 1 शोख
मुस्कान फेंकी.उसे ये तो पता था की उसके गुरु उसके साथ कोई गुस्ताख हरकत
करने का मौका छ्चोड़ेंगे नही मगर वो हरकत कितनी गुस्ताख थी बस यही देखना
था.

ड्रॉयिंग हॉल मे बैठ तीनो बाते करने लगे,नौकर शरबत के ग्लास रख गया
था.तीनो ने अपने-2 ग्लास उठा लिए.

"अरे कामिनी,ये तुम्हारी तस्वीर है क्या?",1 दीवार पे कामिनी की वीरेन के
हाथो बनाई गयी सबसे पहली पैंटिंग लगी थी जिसमे उसने लाल सारी पहनी
थी,वीरेन ने ये पैंटिंग उसे तोहफे मे दी थी.मिसेज़.चंद्रा का इशारा उसी
की ओर था.

"हां..",कामिनी ने पैंटिंग कुच्छ ऐसे लगाई थी की हर किसीकि नज़र उसपे ना
पड़े मगर मिसेज़.चंद्रा ने उसे देख ही लिया था & अब दोनो मिया-बीवी
पैंटिंग के सामने खड़े उसे देख रहे थे.

"वीरेन सहाय की बनाई पैंटिंग है भाई!",चंद्रा साहब ने अपनी पत्नी को
तस्वीर के कोने मे वीरेन के दस्तख़त दिखाए.

"वाह..",मिसेज़.चंद्रा कामिनी से पैंटिंग के बारे मे पुच्छने लगी.

"मुझे ये पैंटिंग कुच्छ खास नही लगी.",चंद्रा साहब की बात सुन दोनो चौंक गयी.

"क्यू?"

"ये देखो..वीरेन ने नाक ठीक नही बनाई है.",चंद्रा साहब ने दाए हाथ की
उंगली कामिनी की नाक पे फिराई,"..ये देखो उसने थोड़ी सी चपटी बनाई
है..यहा..",उनकी उंगली नाक की नोक पे थी.कामिनी का बदन अपने बुड्ढे आशिक़
की छुने से सिहर उठा था.वो समझ गयी थी की उन्होने बड़ी चालाकी से अपनी
बीवी की नज़रो के सामने ही उसके जिस्म को छुने का रास्ता निकाल लिया है.

"हां..सही कह रहे हो."

"फिर ये देखो..गर्दन कुच्छ ज़्यादा लंबी बना दी है..",उनकी उंगली अब उसकी
गर्दन की लंबाई पे चल रही थी.कामिनी के बदन के रोए खड़े हो गये थे.

"बाहें भी थोड़ी मोटी कर दी हैं..",आधे बाज़ू के ब्लाउस से निकलती उसकी
गोरी,गुदाज़ बाहो पे उनकी उंगलिया फिरी तो कामिनी ने अपने पैर को बेचैनी
से हिलाया.उसकी चूत इस छेड़ छाड से रिसने लगी थी.

"और कमर तो देखो..",मिसेज़.चंद्रा ने खुद ही पति को मौका दे
दिया,"..कितनी पतली कमर है अपनी कामिनी की & इसने इसे मोटा कर दिया
है.",मिसेज़.चंद्रा ने उसकी कमर पे हाथ फिराया & जैसे ही पैंटिंग की ओर
वापस देखा मिस्टर.चंद्रा ने अपनी बाई बाँह उसकी कमर मे डाल उसके मांसल
हिस्से को दबा दिया & फिर फुर्ती से हाथ वापस खींच लिए.

कामिनी को लगा की उसकी टाँगो मे जान नही है & अगर अब वो थोड़ी देर & यहा
खड़ी रही तो ज़रूर मस्ती मे चूर हो गिर जाएगी,"..अब उसे मैं ऐसी ही लगी
तो क्या किया जा सकता है!आपने मेरा घर नही देखा है ना आंटी!आइए आपको
दिखाती हू.",उसने बात बदली & दोनो को वाहा से हटाया.अपने आशिक़ की ओर
उसने गुस्से से देखा मगर वो बस मुस्कुरा रहे थे.उनकी मुस्कान देख कामिनी
को भी हँसी आ गयी जिसे उसने बड़ी मुश्किल से मिसेज़.चंद्रा से
च्छुपाया.आख़िर उनकी मौजूदगी मे चंद्रा साहब के साथ मस्ताना खेल खेलने मे
उसे भी तो मज़ा आता ही था.
Reply
08-16-2018, 02:17 PM,
#80
RE: Kamukta Story बदला
थोड़ी देर बाद तीनो खाने की मेज़ पे बैठे खाना खा रहे थे.मेज़ के सिरे पे
अकेली कुर्सी पे चंद्रा साहब उनके बाए तरफ वाली कुर्सी पे कामिनी & दाए
तरफ वाली पे मिसेज़.चंद्रा बैठी थी.हल्की-फुल्की बातो के साथ खाना हो रहा
था जब कामिनी को वही जाना-पहचाना एहसास अपनी दाई जाँघ पे हुआ.चंद्रा साहब
का हाथ मेज़ के नीचे से उसकी स्कर्ट के अंदर घुस उसके घुटनो के थोड़ा उपर
उसकी जाँघ पे घूम रहा था.हाथ जाँघ के अंदर की तरफ बढ़ा तो कामिनी ने
उसेआपने घुटनो मे भींच लिया.

"और आंटी..आपके यहा बहुत चूहे थे पिच्छली बार वो भाग गये?",उसने दाया हाथ
टेबल के नीचे किया & अपने गुरु का लंड दबा दिया.

"हां,मुझे तो नही दिखे फिर.जब तुम आती हो तभी दिखता है मुआ!",बेख़बर
मिसेज़.चंद्रा ने जवाब दिया.चंद्रा साहब उसकी बात का मतलब समझ
मुस्कुराए,".इस बात जब तुम आओ ना & वो दिखे तो डंडे से मार देना उसे."

"ठीक है आंटी.",कामिनी ने चंद्रा साहब को देखा & फिर दोबारा हाथ नीचे ले
गयी & उनके लंड पे चूटी काट ली,"..मार दूँगी आंटी.",चंद्रा साहब ने बड़ी
मुश्किल से अपनी कराह रोकी & हाथ को उसके घुटनो की गिरफ़्त से छुड़ा उसकी
जाँघो को मसल दिया.

खाना ख़त्म होते ही कामिनी ने स्वीट डिश मँगवाई-कस्टर्ड,"सर,आप इसमे फल
लेंगे & आप आंटी?",कटोरियो मे कस्टर्ड निकालते हुए उसने कटे फल
डाले,"..मुझे तो फल के साथ ही पसंद है खास कर के केले के साथ.",उसने फिर
इशारो भरी नज़रो से अपने गुरु को देखा.उसे पता नही था की उसकी बातो ने
उन्हे कितना गरम कर दिया है & वो बस मौके की तलाश मे हैं.

"केला तो बहुत अच्छा फल है,कामिनी रोज़ खाना चाहिए बड़े फ़ायदे की चीज़
है.",मिसेज़.चंद्रा कस्टर्ड खा रही थी.

"जी आंटी,मैं तो रोज़ खाती हू जिस दिन ना मिले उस दिन दिल थोड़ा बेचैन हो
जाता है.",इस आख़िरी बात को कह जब कामिनी ने चंद्रा साहब को शोखी से देखा
तो उन्होने दिल मे फ़ैसला कर लिया की चाहे कुच्छ भी हो जाए आज वो अपनी
शिष्या के अंदर अपना गरम लावा उड़ेले बगैर नही जाएँगे.

खाना खा तीनो फिर से हॉल के सोफॉ पे बैठ गये,"अरे कामिनी ज़रा टीवी लगाना
आज मेरे सीरियल का स्पेशल 1 घंटे का एपिसोड आने वाला है.",टीवी ऑन हो गया
& कामिनी & चंद्रा साहब दोनो अपने पेशे से जुड़ी बाते करने लगे.

"ओफ्फो!तुम भी भी हर जगह काम लेके बैठ जाते हो.मुझे डाइलॉग तो सुनने
दो!",मिसेज़.चंद्रा ने पति को झिड़का.

"सर,मुझे आपसे सहाय एस्टेट के बारे मे भी बात करनी थी.हम उधर के कमरे मे
चलें.आंटी आपको बुरा तो नही लगेगा ना की हमने आपको यहा अकेला छ्चोड़
दिया?"

"अरे नही क्या तकल्लूफ भरी बेकार बाते कर रही हो.जाओ.",वो अपने सीरियल मे मगन थी.

"ओई..थोड़ा तो सब्र कीजिए!",दूसरे कमरे मे पहुँचते ही चंद्रा साहब ने उसे
बाहो मे भर लिया.

"पहले ऐसी बाते करके भड़काती हो & फिर सब्र रखने को बोलती हो!",उन्होने
उसकी स्कर्ट को कमर तक उठा दिया & उसकी गंद पे चूटी काट ली,"..ये मेरे
लंड पे चिकोटी काटने के लिए!"

"अफ....अपनी शिष्या से बदला ले रहे हैं!"

"हां,मेरी जान.इश्क़ मे सब जायज़ है!",उन्होने अपनी पॅंट खोल अपना लंड
निकाला & सोफे पे बैठ गये.कामिनी ने लंड को पकड़ मुँह मे लेना चाहा तो
उन्होने उसे रोक दिया,"नही,इतना वक़्त नही है."

"वाउ!",कामिनी की स्कर्ट के नीचे लेसी लाल पॅंटी देख वो खुश हो
गये.उन्होने उसे नीचे किया & उसकी चूत को चूम लिया.कामिनी ने देखा की
पॅंटी उतार उसे उन्होने अपनी जेब मे डाल लिया.

"आंटी!",चंद्रा साहब चौंके & खड़ी हुई कामिनी की चूत से मुँह हटाया मगर
कामिनी ने उनका सर वापस अपनी चूत पे लगा उपर से स्कर्ट डाल दी.

"हां,कामिनी."

"आपको पता है मेरी दोस्त के यहा 1 चूहा घुस गया था जोकि उसके कपड़े चुरा लेता था."

"अच्छा.",कामिनी ने स्कर्ट उठा अपने आशिक़ को उसमे से निकाला & फिर सोफे
के पीछे की दीवार की ओट से खड़ी हो गयी & ड्रॉयिंग हॉल के अंदर बैठी
मिसेज़.चंद्रा को देखा,"सर बाथरूम गये हैं इसलिए जल्दी से बता रही
हू..",उसने आवाज़ थोड़ी नीची की,"..वो उसकी पॅंटी चुरा के अपने बिल मे ले
जाता था!"

"क्या?!",दोनो औरते हंस पड़ी.कामिनी दीवार की ओट मे थी & बस उसका कमर तक
का हिस्सा मिसेज़.चंद्रा को दिख रहा था.अगर वो नीचे देख लेती तो उन्हे
शायद दिल का दौरा पड़ जाता.पीछे उनके पति कामिनी की स्कर्ट उठाए उसकी गंद
की दरार मे अपना मुँह धंसाए उसके गंद के छेद & उसकी चूत को अपनी ज़ुबान
से गीला कर रहे थे.

"उसकी अलमारी से निकल लेता था क्या?"

"अरे नही,जब उतार के रखती थी ना बाथरूम मे या फिर अपने कमरे मे तब लेके
भाग जाता था.हुमलोग हंसते थे की बड़ा रंगीन मिज़ाज है कही मौका मिलने पे
पॅंटी के नीचे भी हाथ ना सॉफ कर दे.",इस बार दोनो औरते और ज़ोर से हंस
पड़ी मगर तब तक सीरियल का ब्रेक ख़त्म हो चुका था & चंद्रा साहब की
ज़ुबान ने उसे भी काफ़ी मस्त कर दिया था.

"सर आ गये.जाती हू.",कामिनी घूमी & अपने गुरु को ज़मीन पे बिछे कालीन पे
लिटा दिया & फिर स्कर्ट कमर तक उठा उनके उपर बैठ गयी.ये कहने की ज़रूरत
नही की बैठते ही उसकी चूत उनके लंड से भर गयी थी.उच्छल-2 के उसने उनके
लंड को जन्नत की सैर कराना शुरू कर दिया.चन्द्रा साहब के हाथ उसकी स्कर्ट
के नीचे च्छूपे हुए उसकी गंद की फांको बेरहमी से दबा रहे थे.कामिनी ने
अपने हाथो से अपने ब्लाउस के आगे लगे बटन्स को खोला & फिर ब्रा के कप्स
को उपर कर अपनी चूचिया अपने गुरु के लिए नुमाया कर दी.

"वो सहाय एस्टेट के बारे मे क्या कह रही थी?",चंद्रा साहब ने जैसे ही उन
मस्त गोलो को नंगा देखा,उनके हाथ गंद से सीधा उनपे चले गये & थोड़ी देर
उनके साथ खेलने के बाद उन्होने कामिनी को अपने सीने पे झुका उसकी गर्दन
को चूम लिया.

"इस से तो यही लगता है की शिवा & देविका के बीच कोई चक्कर नही
था...ऊहह..!",कामिनी ने सारी बात उन्हे बताई.बड़ी मुश्किल से उसने अपनी
मस्त आहो पे काबू रखा था.तभी उसकी चूत ने वही सिकुड़ने-फैलने की मस्तानी
हरकत शुरू की तो चंद्रा साहब समझ गये की वो झड़ने वाली है.उन्होने उसे
अपने सीने पे सुलाते हुए उसके होंठो को खुद के लबो से कस उसके मुँह को
बंद किया & फिर उसकी कमर को जाकड़ ज़ोर के धक्के लगाने लगे.

कामिनी भी उनसे चिपटि झाड़ रही थी.दूसरे कमरे मे उनकी बीवी बैठी थी & वो
यहा उनसे चुद रही थी-हर बार की तरह इस बार भी इस ख़याल ने उसके मज़े की
शिद्दत को दोगुना कर दिया.कुच्छ देर बाद चंद्रा साहब ने उसे अपने उपर से
उठाया.वो अभी नही झाडे थे.उन्होने कामिनी को कालीन पे घुटनो पे खड़ा किया
& सोफे की सीट पे हाथ रख खुद को संभालने को कहा फिर खुद भी वैसे ही घुटनो
पे उसके पीछे आए & उसकी गंद को अपने थूक से गीला करने लगे.

कामिनी ने सोफे अपनी छाती टिकाते हुए उसे बड़ी मज़बूती से पकड़ लिया &
उनके हमले के लिए तैय्यार हो गयी.कुच्छ पलो बाद लंड आधा अंदर था & उसके
गुरु बाए से उसकी चूचियो को दबातये हुए & दाए से चूत के दाने पे उंगली
चलाते हुए उसकी पीठ से खुद का सीना साटा उसके दाए कंधे के उपर से झुके
उसके होंठो को चूमते,उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाते उसकी गंद मार रहे
थे.
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