Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली माँ और बेहन
03-08-2019, 02:08 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
89

हम दोनो गहरी साँसे लेते हुए अपनी सांसु को दुरस्त करने के कॉसिश कर रहे थे कि, अचानक से नज़ीबा की आवाज़ सुन कर हम दोनो एक दम से चोंक गये….”अम्मी… “ 

जैसे ही नज़ीबा की आवाज़ सुन कर हम दोनो को होश आया….मैं नाज़िया के ऊपेर से उठा तो नाज़िया भी एक दम से उठ कर खड़ी हो गयी….हम तीनो के फेस पर हैरानी थी….हम तीनो एक दूसरे को पलके झपकाई बिना देख रहे थे…

.” मैं वो आप नीचे नही थी….वो ऊपेर लाइट ऑन थी…वो मैं….” नज़ीबा ने लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे कहना चाहा..कि वो नाज़िया को ढूंढते -2 ऊपेर आई है… पर वो अपनी बात पूरी नही कर पाई….और आख़िर कार नीचे चली गयी….

“समीर….” नाज़िया ने टवल पकड़ कर मेरे ऊपेर फेंकते हुए कहा…तो मुझे अहसास हुआ कि, मैं अभी तक नंगा बैठा हुआ था….और नाज़िया मुझे गुस्से से घुरती हुई नीचे चली गयी…नीचे क्या हुआ मुझे नही मालूम…और ना ही मेरी नीचे जाने की हिम्मत हुई…..अगली सुबह जब मैं तैयार होकर नीचे आया…तो मैने नाज़िया को हॉल रूम में बैठे हुए देखा…मैं उसके पास चला गया…जैसे ही नाज़िया ने मुझे देखा तो वो एक दम से खड़ी हो गयी….

नाज़िया: समीर अब क्या होगा….(नाज़िया ने घबराते हुए कहा….)

मैं:हुआ क्या है…?

नाज़िया: समीर कल इतना कुछ हो गया….और तुम पूछ रहे हो हुआ क्या है….

मैं: मेरा मतलब वो नही था…मतलब उसके बाद तुम्हारी नज़ीबा से बात हुई…

नाज़िया: नही…..और आज भी वो बिना कुछ बोले अकेली कॉलेज चली गयी है….मुझे बहुत डर लग रहा है समीर..कही कुछ गड़बड़ ना हो जाए….

मैं: कुछ नही होता तुम घबराओ नही….करते है कुछ ना कुछ….

उसके बाद हम बॅंक आ गये….उस दिन और कोई ख़ास बात ना हुई….नाज़िया नज़ीबा को लेकर बेहद पेरशान थी…पर जब हम घर पहुँचे तो, नज़ीबा घर आ चुकी थी… दो तीन दिनो तक नज़ीबा और नाज़िया के बीच कोई बात नही हुई….चोथे दिन नाज़िया ने मुझसे बात की और बताया कि, उसे अभी भी बहुत डर लग रहा है….कही नज़ीबा खुद को कुछ कर ना ले….वो खाना पीना भी ठीक तरह से नही खा रही है…..जब मैने नाज़िया से कहा कि, वो उससे बात कर ले….बात करने से मुसबीत का हल निकलेगा…तो नाज़िया ने ये कह कर सॉफ इनकार कर दिया कि, अब उसमे नज़ीबा के सामने जाने की हिम्मत भी नही है…. आख़िर कार मैने नाज़िया से कहा कि, अगर वो नज़ीबा से बात नही कर सकती….तो मैं उससे बात करता हूँ….

एक दो बार मना करने के बाद आख़िर कार नाज़िया को राज़ी होना पड़ा…इसीलिए उस दिन मैं लंच टाइम के वक़्त ही छुट्टी लेकर घर आ गया…मुझे पता था कि, नज़ीबा भी 2 बजे तक घर आ जाती है….और 2 से 6 बजे तक मुझ नज़ीबा से बात करने के लिए काफ़ी वक़्त मिल जाएगा….जब मैं 2 बजे घर पहुँचा तो, बाहर गेट को लॉक नही लगा हुआ था… इसका मतलब नज़ीबा घर आ चुकी थी….मैने डोर बेल बजाई तो थोड़ी देर बाद नज़ीबा ने गेट खोला…एक पल के लिए नज़ीबा मुझे उस वक़्त जल्दी घर मे देख कर चोंक गयी….पर फिर उसने साइड में होकर मुझे अंदर आने का रास्ता दिया….

अंदर आकर मैं सीढ़ियों के पास आकर खड़ा हो गया….नजीबा जैसे ही गेट के कुण्डी लगा कर वापिस मूडी तो, मुझे सीढ़ियों के पास देख कर झिझक गयी…और झिझकते हुए आगे बढ़ी….जैसे ही वो मेरे पास आई…तो मैने उसे कहा…”नज़ीबा क्या मैं तुमसे बात कर सकता हूँ….मुझे तुमसे बहुत ज़रूरी बात करनी है…” पर नजीबा ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया…और अंदर जाने लगी…. “प्लीज़ नज़ीबा एक बार मेरी बात सुन लो…सिर्फ़ दो मिनिट…” नजीबा ने पलट कर मेरी तरफ देखा ..और फिर सर नीचे करते हुए, हां में सर हिला कर अंदर चली गयी…जब मैं उसके पीछे अंदर गया तो, देखा नज़ीबा नाज़िया के रूम मे बेड पर बैठी हुई थी…..

मुझे अंदर आता देख नज़ीबा ने फॉरन ही अपने सर को झुका लिया…मैं नज़ीबा के पास जाकर बेड पर बैठ गया…..मुझे समझ नही आ रहा था कि बात कहाँ से शुरू करू.. क्या कहूँ और क्या ना कहूँ…आख़िर बहुत सोचने के बाद जो पहले अल्फ़ाज़ मेरे मुँह से निकले वो ये थे….”तुम अपनी अम्मी से बात क्यों नही कर रही हो…..?” मैने नज़ीबा की तरफ देखते हुए कहा….तो नज़ीबा ने अपना सर उठा कर मेरी आँखो में देखा तो मुझे अहसास हुआ कि उसके आँखो में नमी थी…. “इतना सब कुछ हो जाने के बाद आप को क्या लगता है….कि मुझे उनसे बात करनी चाहिए थी….”
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
मैं: क्यों नही वो तुम्हारी अम्मी है…

नज़ीबा: जानती हूँ कि वो मेरी अम्मी है….

मैं: तो फिर उनसे नाराज़ क्यों हो….

नज़ीबा: उसकी वजह आप जानते हो….

मैं: आख़िर कब तक ऐसा चलेगा….कितने दिन अपनी अम्मी से बात नही करोगी….

नज़ीबा: इतना कुछ हो जाने के बाद कोई मुझसे ये तवक्को कैसी रख सकता है कि, मैं उससे बात करूँ….

मैं: जो कुछ हुआ उसमे मैं भी तो शामिल था….तो क्या अब तुम मुझसे बात नही कर रही हो….

नज़ीबा: आपने जो किया मुझे उसका उतना दुख नही है….कि अपने मेरे साथ ये सब कुछ किया….पर अम्मी ने जो मेरे साथ किया…उसके बारे मैं मैने कभी खवाब मे भी नही सोचा था कि, अम्मी मेरे साथ ये सब करेंगी….

मैं: देखो नज़ीबा जो हो गया…..अब उसे भूल जाओ….और अपनी अम्मी से बात कर लो. तुम्हे पता भी है वो तुम्हारे लिए कितना पेरशान है….वो तुम्हे कितना प्यार करती है….

नज़ीबा: हूँ प्यार ,,,, वो मुझसे प्यार करती होती तो उन्होने भी मुझसे एक बार भी बात करने के कॉसिश क्यों नही की….

मैं: अगर वो तुमसे बात करने से झिझक रही हो…तो इसका मतलब ये तो नही कि वो तुम्हे चाहती नही है…

नज़ीबा: नही वो मुझसे प्यार नही करती…अब उन्हे मेरी कोई परवाह नही….मुझे पता है वो सिर्फ़ तुमसे प्यार करती है..मुझसे नही….

मैं: तुम्हारा वेहम है…..वो उस दिन जो तुमने देखा….वो एक ग़लती थी….जो हम कर बैठे….प्लीज़ भूल जाओ इसे….मैं सच कह रहा हूँ..वो मुझसे प्यार नही करती.. वो सब बस अंजाने मे हो गया….हम बहक गये थे…..तुम्हे पता नही है वो उस दिन से तुम्हारे लिए कितनी परेशान है….

नज़ीबा: आप मुझे दूध पीती बच्ची ना समझे….मुझे पता है कि वो मुझे कितना प्यार करती है….और तुम्हे कितना…जब से आप यहाँ आए हो…वो मुझे ऊपेर छत पर भी नही जाने देती थी…हमेशा कहती रहती थी कि, समीर के सामने मत जाया करो…और खुद….. नज़ीबा बोलते-2 चुप हो गयी…

.”तुम्हे ये लगता है ना कि नाज़िया को तुम्हारी फिकर नही है…वो ये सब अपने जिस्म की आग को ठंडा करने के लिए कर रही थी.. तो लो सुनो….” मैने अपना मोबाइल निकाला और नाज़िया का नंबर मिला कर उसे स्पीकर मोड पर डाला…थोड़ी देर बाद नाज़िया ने कॉल रिसीव की और नाज़िया की काँपती हुई आवाज़ आई… “जिसको सुन कर ही अंदाज़ा हो जाता कि, वो उस वक़्त कितनी फिकर मंद थी… “हेलो समीरर… क्या हुआ….तुम्हारी नज़ीबा से बात हुई….”

मैं: नही अभी तक नही हुई….अभी मैं घर की गली मे पहुँचा हूँ…..

नाज़िया: फिर किस लिए कॉल की….

मैं: यार मुझे समझ मे नही आ रहा कि, क्या करूँ….उससे कैसे बात करूँ…

नाज़िया: देखो समीर कुछ भी करो…पर नज़ीबा से बात करके उसे मना लो…. मैं अपनी बेटी के बेगैर नही रह सकती…तुम्हे नही पता उस दिन से मेरे दिल पर क्या बीत रही है…जब से उसने मुझसे बात करना छोड़ दिया है….अर्रे बात करना तो, दूर वो तो मेरी तरफ देखती भी नही….तुम्हे नही पता समीर….मेरा दिल दो फाड़ हो जाता है….जब वो मुझे इग्नोर करती है…दिल करता है…ऐसे रहने से तो अच्छा है कि मैं मर ही जाउ….”

मैं: देखो नाज़िया मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ….

नाज़िया: हां बोलो समीर….

मैं: नाज़िया मैं नज़ीबा से बहुत प्यार करता हूँ….और मैं उसके साथ निकाह करना चाहता हूँ….

नाज़िया: समीर ये कैसी बातें कर रहे हो…यहाँ पर मेरी जान पर बनी है और तुम…

मैं: हां मुझे पता है तुम पर क्या बीत रही है…पर मैं तुम्हे अपने दिल की बात बताना चाहता था… आज मैं नज़ीबा से बात करने जा रहा हूँ….

नाज़िया: ठीक है जो करना है करो….पर समीर देखना मेरी बेटी कुछ उल्टा सीधा कदम ना उठा ले….अगर उसने कुछ क्या तो मैने खुद खुशी कर लेनी है…

मैं: तुम्हे मुझ पर यकीन नही है..

नाज़िया: समीर यकीन तो है पर….

नाज़िया: समीर यहाँ मेरी जान पर बनी है…और तुम ये कैसे बाते कर रहे हो..एक बात ध्यान से सुन लो….अगर कुछ हुआ तो, उसके ज़िमेदार तुम होगे…तुम हमें अकेला छोड़ कर चले क्यों नही जाते….

मैं: तुम तो मुझस प्यार करती हो ना…फिर मुझे चले जाने को क्यों कह रही हो….

नाज़िया: हां प्यार करती हूँ….पर अपनी बेटी से ज़्यादा नही….वो मेरी जान है समीर… और अपनी बेटी की खुशी के लिए मुझे जो भी करना पड़े….मैं करूँगी…चाहे उसके लिए मुझे तुम्हे ही क्यों ना छोड़ना पड़े…मेरे लिए मेरी जिंदगी में मेरे बेटी से ज़्यादा कोई भी अहमियत नही रखता…

नाज़िया ने कॉल कट कर दी….

मैं: सुन लिया तुम्हारी अम्मी ने क्या कहा….अब उसने तुम्हारे लिए मुझे यहाँ से चले जाने तक को कह दिया….ठीक है मैं ही तुम दोनो की मुसबीत की वजह हूँ ना..तो मेरा यहाँ से चले जाना ही ठीक है….नज़ीबा मैं ना तो तुम्हे दुखी देख सकता हूँ..और ना ही तुम्हारी अम्मी को…इसलिए अच्छा यही होगा कि, मैं यहा से और तुम दोनो की लाइफ से दूर चला जाउ…अब तो खुश हो ना…तुम्हारी अम्मी की नज़र में मेरी तुम्हारे आगे कोई अहमियत नही है….वो तुमसे बेहद प्यार करती है…और तुम उसको इतना दुख दे रही हो..

मैं जैसे ही उठ कर बाहर जाने लगा तो, नज़ीबा ने मेरा हाथ पकड़ लिया…. मैने मूड कर नज़ीबा की तरफ देखा तो, वो सर झुका कर खड़ी थी….”प्लीज़ ऐसा ना कहिए…..आप बैठो…. मैं आपको कुछ दिखाती हूँ….” नज़ीबा ने मेरा हाथ छोड़ा और नाज़िया की अलमारी खोल कर उसमे कुछ ढूँढने लगी….और फिर वो मेरी तरफ मूडी और मेरे पास आकर एक फोटो मेरी तरफ बढ़ा दी…मैने जैसे ही उस फोटो को नज़ीबा के हाथ से लिया तो, ये देख कर चोंक गया कि, ये तो मेरी फोटो है…और ये नाज़िया की अलमारी मे कहाँ से आ गयी….

मैं हैरानी से कभी फोटो की तरफ देखता तो, कभी नज़ीबा की तरफ ये जानने के लिए इस फोटो का अब जो हो रहा है….उससे क्या लेना देना….. “ये फोटो अम्मी की अलमारी में कहाँ से आई….आपको पता है….”

मैने नज़ीबा की बात सुन कर ना में सर हिला दिया…

“मुझे भी नही पता…शायद गाँव से आते वक़्त अम्मी साथ ले आई थी…और एक दिन मैने अम्मी को इसी फोटो को अपनी छाती से लगा कर तड़पते हुए देखा था… और वो बार -2 एक ही बात दोहरा रही थी…..”

मैं: क्या….

नज़ीबा: आइ लव यू समीर…..

मैं नज़ीबा की बात सुन कर एक दम से चुप हो गया…अब मेरे पास कहने को कुछ भी नही बचा था….”समीर अम्मी आपसे बहुत मुहब्बत करती है…. मैने उन्हे देखा है आपके प्यार मे तड़पते हुए….अब मैं ये कैसे मान लूँ कि वो तुमसे प्यार नही करती…और उस दिन जो हुआ वो एक हादसा था….”

मैं: चलो ठीक है…मैने मान लिया कि तुम जो कह रही हो वो सच है….पर जो अभी नाज़िया ने कहा…क्या वो झूट है..उसे आज भी मेरी नही तुम्हारी ज़्यादा परवाह है…

नज़ीबा: मैं जानती हूँ….पर वो आपको भी बेहद प्यार करती है…और मुझे पता है कि, आपके यहाँ से जाने के बाद वो तड़पती रहेंगी…इसलिए प्लीज़ आप ना जाओ…

मैं: और तुम तुम मुझसे प्यार नही करती…

नज़ीबा: पर मैं अम्मी के रास्ते मे नही आना चाहती थी….

मैं: फिर तुमने आज तक मुझसे बात करनी की कॉसिश क्यों नही की….तुम मुझे प्यार करती हो या नही….

नज़ीबा: मुझे अम्मी ने आपसे दूर रहने के लिए कहा था….

मैं: अब नही कहेंगी…बोलो तुम मुझे प्यार करती हो या नही…

नज़ीबा: पता नही…मुझे कुछ समझ में नही आ आ रहा….मुझे सोचने के लिए वक़्त चाहिए…..

मैं: ठीक है सोच लो….मैं तुमको कल तक वक़्त देता हूँ….अगर तुम्हरा जवाब ना मे हुआ तो, मैने यहाँ से और तुम दोनो की जिंदगी से हमेशा -2 के लिए दूर चले जाना है…

ये कह कर मैं ऊपेर अपने रूम मे आ गया….और नाज़िया को फोन करके सारी बात डीटेल मे बता दी…..जिसे सुन कर नाज़िया को थोड़ा सकून हुआ…उसके बाद और कोई ख़ास बात ना हुई….अगले दिन जब मैने नज़ीबा से उससे अपने सवाल का जवाब माँगा तो, उसने सोचने के लिए कुछ और वक़्त माँगा…दो दिन इसी तरह गुजर गये…कुछ ख़ास बात नही हुई….नाज़िया से ये पता चला कि, अब दोनो के बीच नॉर्मल बात चीत होने लगी है…..नाज़िया ने नज़ीबा से ये भी पूछा कि, क्या वो मुझसे निकाह करना चाहती है..तो नज़ीबा ने नाज़िया को भी यही जवाब दिया कि, वो अभी तक कुछ सोच नही पाई है….

मैं रोज दिन मे कई बार नाज़िया को नज़ीबा से अपने बारे मे बात करने के लिए कहता पर नतीजा हर बार वही रहता…एक दिन हार नाज़िया ने मुझसे खीजते हुए कहा…कि मैं खुद ही क्यों नही उससे बात कर लेता…
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
90

पर मुझे नज़ीबा से बात करने का मौका नही मिल रहा था….एक दिन दोपहर का वक़्त मे अपने रूम मैं सो रहा था….उस दिन बॅंक बंद था….दोपहर के 12 बजे का वक़्त था कि, मेरा मोबाइल बजने से मेरी आँख खुल गयी…मैने उठ कर देखा तो, नाज़िया की कॉल थी…मैने दिल मे सोचा आख़िर नाज़िया तो घर पर ही है तो फिर मुझे कॉल क्यों कर रही है….मैने कॉल पिक की तो नाज़िया बोली….

नाज़िया: हेलो समीर कहाँ पर हो….?

मैं: मैं तो घर पर ही हूँ….तुम मुझे फोन क्यों कर रही हो…?

नाज़िया: वो समीर मैं यहाँ अपनी फ्रेंड के घर पर आई हुई थी….यहाँ पर लॅडीस पार्टी है…और बाहर बारिश शुरू हो गयी….मैने सुबह ऊपेर कपड़े सूखने के लिए डाले थे…नज़ीबा को कॉल की थी…पर वो कॉल नही उठा रही…कही सो ना रही हो…जाओ उसे उठा कर ऊपेर से सारे कपड़े उतार लाओ…नही तो गीले हो जाएँगे….

मैं:ठीक है…

मैने कॉल कट की और जैसे ही अपने रूम से बाहर आया तो देखा नज़ीबा सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी….उसने अपने हाथो मे कपड़े पकड़ रखे थे….शायद वो तब ऊपेर थी….जब नाज़िया उसे कॉल कर रही थी….नज़ीबा ने लाइट येल्लो कलर का कमीज़ और वाइट कलर की शलवार पहनी हुई थी….जो अब पूरी तरह गीला होकर उसके जिस्म से चिपका हुआ था….जैसे ही हम दोनो के नज़रें मिली…नज़ीबा ने अपने सर को झुका लिया…और ऊपेर बरामदे मे पड़ी हुई चारपाई पर जाकर कपड़े रख दिए…और कपड़े रख कर जैसे ही वो नीचे जाने के लिए घूमी तो, सामने का मंज़र देख कर मैं अपनी पलके झपकाना भूल गया….उसकी येल्लो कलर की कमीज़ भीग कर उसके जिस्म से एक दम चिपकी हुई थी…यहाँ तक कि उसके पिंक कलर की ब्रा भी सॉफ नज़र आ रही थी….

देखने से ऐसा लग रहा था….जैसे उसने ऊपेर सिर्फ़ पिंक कलर की ब्रा ही पहनी हो… मुझे उसका पेट यहाँ तक नाफ़ भी सॉफ नज़र आ रही थी….और उसकी शलवार का नाडा भी उसकी कमीज़ के पल्ले से सॉफ नज़र आ रहा था…जब नज़ीबा ने मुझे इस तरह अपने आप को घुरते हुए देखा तो, वो सर को झुका कर जल्दी से नीचे चली गयी… उसके जाने के बाद मैं कुछ पलों के लिए बुत की तरह खड़ा रहा…थोड़ी देर बाद मुझे अहसास हुआ कि, आज नाज़िया घर पर नही है…और हम दोनो घर पर अकेले है…

मुझे आज हर हाल में नज़ीबा से बात करके सारे मस्लो का हल निकाल लेना चाहिए… यही सोच कर मैं नीचे गया….और जैसे ही मैं नीचे नज़ीबा के रूम मे दाखिल हुआ तो, नज़ीबा अंदर नही थी…उसके रूम में भी अटेच बाथरूम था… जिसका डोर उस वक़्त खुला था…और फिर जैसे ही मैं नजीबा को देखने के लिए उसके बाथरूम में गया….तो सामने जो मंज़र था…..उसे एक देख कर मे एक बार के लिए तो हिल ही गया….मेरे सामने नज़ीबा ऊपेर से पूरी नंगी खड़ी थी… उसके येल्लो कलर की कमीज़ और ब्रा बाथरूम के फर्श पर एक कोने मे नीचे पड़ी थी….जैसे ही उसने मुझे इस तरह अचानक बाथरूम मे देखा….तो वो मुझे देख कर एक दम से चोंक गये….

और अपने बाज़ुओं से अपने मम्मों को कवर करने लगी…”समीर आप आप आप बाहर जाए….” नज़ीबा ने काँपती हुई आवाज़ मे कहा…पर मेरे कानो ने तो जैसे सुनना ही बंद कर दिया था…नज़ीबा को इस हालत मे देख कर मुझे पता नही क्या हो गया था….मेरा लंड कुछ ही सेकेंड्स में एक दम हार्ड हो चुका था…जब नज़ीबा ने देखा कि मे बाहर नही जा रहा हूँ….तो उसने वहाँ हॅंगर मे टॅंगी हुई एक वाइट कलर की टी-शर्ट को उठा कर जल्दी से पहनना शुरू कर दिया…

पर हाए री किस्मेत…. नज़ीबा ने जल्दी बाज़ी से जैसे ही वो टीशर्ट पहन कर मेरी तरफ देखा…तो मेरी नज़र उसकी गीली वाइट कलर के गीली शलवार पर उसकी फुद्दि वाली जगह पर जा टिकी….क्योंकि उसने जो टीशर्ट पहनी थी…..वो उसके शलवार के नैफे तक ही लंबी थी….उसकी गीली वाइट कलर की शलवार उसके थाइस और उसकी फुद्दि के ऊपेर एक दम चिपकी हुई थी….उसके गोरे-2 मोटे राने मुझे सॉफ दिखाई दे रही थी…यहाँ तक कि, उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच की लाइन भी सॉफ नज़र आ रही थी….नज़ीबा को फॉरन ही इस बात का अंदाज़ा हो गया…..”आ आ आप बाहर जाए….” नज़ीबा ने फिर से काँपती हुई आवाज़ मे कहा…..जब उसने देखा कि, मैं तो हिल भी नही रहा तो, नज़ीबा खुद बाहर जाने के लिए आगे बढ़ी….

और जैसे ही वो जल्दबाज़ी मे बाहर जाने के लिए मेरे पास से गुजरने लगी…उसका पैर बाथरूम के गीले फर्श पर स्लिप कर गया….मैने नज़ीबा को गिरने से बचाने के लिए उसे पकड़ा तो, मेरा एक बाज़ू उसके पीठ के पीछे आ गया…और दूसरा बाज़ू उसके पेट पर उसके शलवार के नाडे के पास आ चुका था…अब हालत ये थी कि, नज़ीबा मेरी बाहों में क़ैद थी…और उसके पीठ पीछे दीवार से लगी हुई थी…हम दोनो खामोशी से एक दूसरे की आँखो मे देख रहे थे…और हम दोनो एक दूसरे की गरम सांसो को अपने फेस पर फील कर रहे थे….

इस दौरान मेरे हाथो मे नज़ीबा की सलवार का नाडा आ चुका था....और शायद इस बात का अंदाज़ा नज़ीबा को भी था....इसीलिए उसने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर मेरे उस हाथ की कलाई को मज़बूती से पकड़ लिया....और जैसे ही मैने उसकी सलवार के नाडे को पकड़ कर खेंचा तो, उसका नाडा खुल गया....और उसने अपनी सलवार को नीचे गिरने से बचाने के लिए अपनी सलवार को पकड़ना चाहा.....पर मेने उसके हाथो को पकड़ कर रोक दिया....उसकी गीली सलवार सरक कर उसके रानो तक नीचे उतर चुकी थी..."न न नही समीर.....म म मुझे नही लगता हम ठीक कर रहे है....."

मैं समझ चुका था कि, नज़ीबा अभी भी कुछ डिसाइड नही कर पा रही है...ज़रूरत थी तो उसके बदन की आग को और भड़काने की, मेने उसके राइट साइड के कान को अपने होंटो मे भर ज़ोर से चूस लिया, तो नज़ीबा सिसकते हुए एक दम से कसमसा गयी......"श्िीीईईई समीर प्लीज़....." अगले ही पल मेने उसे झटके से अपनी तरफ घुमा लिया.....उसकी गीली टीशर्ट मे उसके तेज साँसे लेने से उसके मम्मे तेज़ी से ऊपेर नीचे हो रहे थे....उसके निपल्स एक दम तने हुए थे.....

जैसे चीख-2 कर कह रहे हो.....आओ और हमें मुँह मे भर कर चूस लो. नज़ीबा आँखे बंद किए हुए तेज़ी से साँसे ले रही थी...मेने उसको बाहों मे भरते हुए, पीछे दीवार के साथ सटा दिया....और अगले ही पल उसके रसीले होंटो को अपने होंटो मे लेकर चूसना शुरू कर दिया....जैसे ही मेने उसके होंटो को अपने होंटो मे भर कर चूसा तो, उसके बदन ने जबरदस्त झटका खाया, और उसने अपने हाथो को मेरे कंधो पर रखते हुए, पीछे हटाने की कॉसिश करनी शुरू कर दी...

शायद वो अभी भी तैयार नही थी....मेरा पाजामे मे तना हुआ लंड नज़ीबा की फुद्दि ठीक ऊपेर ऊपेर रगड़ खा रहा था.....नज़ीबा बुरी तरह से मचल रही थी....वो अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करने की कॉसिश भी कर रही थी....पर मैने उसके होंटो को और ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया.....मैं उसके होंटो को चूस्ते हुए अपने होंटो को उसकी नेक पर ले आया, और उसकी गर्दन को पागलो की तरह चूमने लगा....

वो सिसकने लगी....और अगले ही पल उसने मुझे पूरी ताक़त से पीछे की तरफ धकेला तो, मैं पीछे दीवार के साथ जा लगा....उसने अपनी आँखे खोली, जो एक दम नशीली लग रही थी...."आ आप जाओ यहाँ से समीर..." उसने अपने सर को झुकाते हुए मुझसे थोड़ा गुस्से से कहा, मुझे अहसास हो गया था कि, शायद मैने एक बार फिर से बहुत जलद बाज़ी कर दी है...

मैं सर झुकाए हुए बाथरूम से बाहर आया, तो वो भी मेरे पीछे बाहर आ गयी.....मैं उसके रूम से बाहर जाने लगा तो वो भी मेरे पीछे रूम के डोर तक आई, पता नही क्यों मैं टूट सा गया था. मुझे कुछ समझ मे नही आ रहा था. मैं उदास उसके रूम से बाहर आकर हॉल रूम मे सोफे पर बैठ गया…..मुझे इस बात से पछतावा हो रहा था.....कि आख़िर मैने ऐसा क्यों किया….मुझे नज़ीबा के दिल की हालत का अंदाज़ा भी था….पर फिर भी मैने अपनी हरक़तों से बाज़ क्यों नही आया…मुझे ये सब नही करना चाहिए था….

अभी मैं कुछ देर बैठा ही था....तो मुझे नज़ीबा के रूम से उसकी आवाज़ आई, वो अपने रूम से ही मुझे बुला रही थी.....क्योंकि वो जानती थी कि, घर मे मेरे सिवाय उसकी आवाज़ और कोई नही सुन सकता....."समीर प्लीज़ इधर आओ ना....." उसने फिर से मुझे अपने रूम से आवाज़ लगाई....मैं सोफे से खड़ा हुआ उसके रूम की तरफ गया तो, देखा कि, उसके रूम का डोर अभी भी खुला हुआ था....जब मैं रूम मे पहुँचा तो नज़ीबा रूम में नही थी...."कहाँ हो तुम नज़ीबा...." मेने इधर उधर देखते हुए कहा......

नज़ीबा: वही जहाँ आप छोड़ कर गये थे....

नज़ीबा ने बाथरूम के अंदर से आवाज़ लगाते हुए कहा......"हां बोलो क्या काम है....." मेने वही खड़े-2 पूछा...

."समीर प्लीज़ इधर आओ ना,काम भी बताती हूँ....." नज़ीबा ने फिर से बाथरूम के अंदर से आवाज़ लगाते हुए कहा....तो मैं बाथरूम की तरफ बढ़ा....बाथरूम का डोर अभी भी खुला हुआ था....

और जैसे ही मैं बाथरूम के डोर के सामने पहुँचा तो, अंदर का नज़ारा देख मैं एक दम से हिल गया.....नज़ीबा शवर के नीचे खड़ी थी...ऊपेर से बिल्कुल नंगी... उसके 32 साइज़ के मम्मे देखते ही, मेरे लंड ने पाजामे को आगे से ऊपेर उठाना शुरू कर दिया.....उसने मेरी तरफ मुस्कराते हुए देखा, और फिर मुस्कराते हुए बोली..... "सॉरी समीर....प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो...."
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
91


उसके क्यूट से स्माइल ने मेरे सारे गुस्से को एक ही दम से पिघला दिया...फिर उसने वही स्माइल के साथ अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया, और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर बाथरूम में खेंच लाया....उसके तने हुए मम्मो के तने हुए निपल्स मेरी चेस्ट मे आ दबे...."उफ़फ्फ़ क्या नरम अहसास था. उसके नरम मम्मों का.....

हम दोनो एक दूसरे के आँखो मे देख रहे थी....उसकी आँखो मे वासना के गुलाबी डोरे तैर रहे थे....नज़ीबा ने अपने सर को थोड़ा सा ऊपेर उठा कर अपने होंटो को ऊपेर कर लिया...जैसे कह रही हो....भर लो इन रस के प्यालो को अपने होंटो मे और चूस जाओ इनका सारा रस...गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे उसके गुलाबी होंठ...जिन्हे देखने से उनमे से रस टपकता हुआ दिखाई दे रहा था....मेने अपने होंटो को जैसे ही उसके होंटो की तरफ बढ़ाया तो, उसने मेरे गले मे अपने बाहों को डालते हुए अपनी आँखे बंद कर ली....

और जैसे ही मैने उसके गुलाबी होंटो को अपने होंटो के बीच में दबा कर उन्हे चूसा तो, नज़ीबा एक दम से मचलते हुए, मुझे एक दम से चिपक गयी....उसके दोनो हाथ मेरे कंधो और पीठ पर थिरक रहे थे....और मैं उसके होंटो को चूस्ते हुए, उसकी बुन्द को दोनो हाथो से सहला रहा था...मेरे हाथ के स्पर्श से उसके जिस्म मे कपकपि से दौड़ जाती.....

मैने उसकी सलवार के ऊपेर से ही उसकी बुन्द को अपने हाथो में भरते हुए दबाना शुरू कर दिया...."शीई समीर उम्ह्ह्ह्ह्ह रूको एक मिनिट....." नज़ीबा ने सिसकते हुए अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करते हुए कहा, और फिर बोली...."समीर बेड पर चलो..." मैं उससे अलग हुआ, और बाथरूम से बाहर निकल कर बेड पर जाकर लेट गया....मेरा लंड मेरे पाजामे को फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो रहा था.....

फिर थोड़ी देर बाद नज़ीबा बाथरूम से बाहर आए, उसने अपने बदन पर टवल लपेटा हुआ था....वो धीरे-2 मेरी तरफ बढ़ी....उसके होंटो पर शरमाली मुस्कान थी.....और जैसे ही वो बेड के पास आए, तो मेने उसका हाथ पकड़ कर खेंचते हुए अपने ऊपेर लेटा लिया...टवल उसके मम्मों से सरक गया था....अगले ही पल मेने उस टवल को निकाल कर फेंक दिया...और फिर उसको नीचे लेटते हुए खुद उसके ऊपेर आ गया...

हम दोनो फिर से पागलो के तरह एक दूसरे के होंटो को चूसने लगी...इस बार मेरे दोनो हाथ उसके मम्मों पर थी....और मैं नज़ीबा के मम्मों को ज़ोर-2 से मसल रहा था.....नज़ीबा के मुँह से उम्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह की आवाज़ निकल रही थी....हम दोनो की ज़ुबान आपस मे रगड़ खाने लगी तो, उसने अपनी ज़ुबान मेरे मुँह मे धकेल दी.....मेने उसकी ज़ुबान को अपने होंटो में भर कर ज़ोर-2 से चूसना शुरू कर दिया....

नज़ीबा आँखे बंद किए हुए, अपनी ज़ुबान को चुस्वाते हुए मस्त हुई जा रही थी....उसने अपनी बाहों को मेरी पीठ पर कस रखा था...मैने उसके होंटो और ज़ुबान को चूसना छोड़ा और फिर उसकी गर्दन से होते हुए, उसके मम्मों पर आ गया....मैं पागलों की तरह उसके मम्मों की हर इंच को चूस रहा था....चाट रहा था....मेरे ऐसा करने से उसका पूरा बदन मस्ती मे थरथरा जाता....और उसके मुँह से मस्ती भरी सिसकी निकल जाती.....

फिर मेने उसके एक मम्मे को पकड़ते हुए, अपने मुँह में जितना हो सकता था भर कर चूसना शुरू कर दिया....जैसे ही मेने उसके मम्मे को मुँह में भर कर चूसा तो, उसके बदन ने एक जोरदार झटका खाया......और वो मचलते हुए मुझसे और चिपक गयी....उसने मेरे सर को दोनो हाथो से पकड़ कर अपने मम्मों पर ऐसे दबा लिया...जैसे वो अपने निपल को मेरे मुँह से कभी अलग नही होने देगी...

नज़ीबा: ओह्ह समीर उम्ह्ह्ह्ह्ह श्िीीईईईईईईई हाां चूसो और्र चूसो.....अपनी बीवी के मम्मों को चूसोआ अह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह......

मैने उसके मम्मे को मुँह से निकाला और दूसरी मम्मे पर टूट पड़ा...और पहले वाले को ज़ोर-2 से दबाने लगा......"अहह उंह समीर देर करो ना उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह समीर येस्स्स सक मी सक मी....ओह्ह्ह्ह येस्स्स अहह उन्घ्ह्ह्ह्ह्ह......" मैने करीब 5 मिनिट उसके मम्मों को बारी-2 चूसा.....और जैसे ही मैने उसके मम्मो से अपने होंटो को हटा कर उसकी तरफ देखा तो, उसका चेहरा लाल होकर दहक रहा था....उसने अपनी मदहोशी से भरी हुई आँखो को खोल कर देखा, और फिर अपने दोनो हाथों मे मेरे फेस को थामते हुए, मुझे अपने होंटो पर झुका दिया...

इस बार नज़ीबा मेरे होंटो को चूस रही थी.....मेने अपने होंटो को नज़ीबा के होंटो से अलग किया, और उसकी टांगो को फेलाते हुए, जब उसके दोनो रानो के बीच मे आया था, तो उसकी एक दम सॉफ गुलाबी फुद्दि जैसे ही मेरे आँखो के सामने आई, तो मेरे लंड ने एक ज़ोर दार झटका खाया....मेने उसकी आँखो में देखते हुए, धीरे से अपनी उंगलियों से उसकी फुद्दि के लिप्स को खोल कर अंदर देखा तो, उसकी फुद्दि का गुलाबी सूराख उसके कामरस से एक दम भीगा हुआ था....

क्या नज़ारा था....एक दम छोटी सी फुद्दि.....जो लंड को अपने अंदर समा जाने के लिए अपना प्यार टपका रही थी....और फिर जैसे ही मैने अपने एक उंगली को उसकी फुद्दि के गुलाबी गीले सूराख पर रखा था. उसकी कमर ने एक और जोरदार झटका खाया....उसकी बुन्द बेड से ऊपेर उठ गयी...."ष्हिईीईईईई उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह समीर......." उसने सिसकते हुए अपने सर के नीचे रखे तकिये को कस कर पकड़ लिया.......मेने अपने घुटनो पर बैठते हुए अपने पाजामा और अंडरवेर को उतार फेंका....इस दौरान नज़ीबा आँखे खोल कर मेरी तरफ देख रही थी.....

और जैसे ही उसकी नज़र मेरे तने हुए 8 इंच के लंड पर पड़ी, तो उसके आँखे फेल गयी......" स समीर ये तुम्हारा ये तो बहुत बड़ा है...." उसने हैरानी से मेरे लंड की ओर देखते हुए कहा....

."क्यों क्या हुआ, पसंद नही आया क्या....?" मेने मुस्कराते हुए उसकी ओर देखते हुए कहा तो उसने हकलाती हुई आवाज़ मे कहा......

नज़ीबा: समीर ये बहुत बड़ा है....ये ये इससे बहुत तकलीफ़ होगी ना....?

मैं: हां थोड़ी तकलीफ़ तो होगी.....पर थोड़ी देर के लिए.....हम पहले भी तो कर चुके है…..

नज़ीबा: हां पर समीर प्लीज़ आराम से करना....मुझे तो ये और बड़ा लग रहा है..

मैं: हां कुछ नही होता घबराओ नही....

मैने अपने लंड के मोटे कॅप को उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच में जैसे ही लगाया तो, वो मेरे लंड के दहकते हुए कॅप को अपनी फुद्दि के लिप्स के बीच महसूस करते हुए, उसकी कमर तेज झटके खाने लगी. मेने उसकी एक जाँघ को कस्के पकड़ा और अपने लंड की कॅप को उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच धीरे-2 रगड़ना शुरू कर दिया.....

नज़ीबा: ओह समीर उम्ह्ह्ह्ह्ह श्िीीईईईईई समीररर ये ये करना कितना अच्छा लगता है अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उफफफफ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है समीर प्लीज करो ना......अब और मत तडपाओ....

मैं: करूँ.....?

नज़ीबा: हां समीर करो ना......

नज़ीबा ने सिसकते हुए कहा....मैं अब पूरे जोशो ख़रोश से उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच मे अपने लंड की कॅप को रगड़ रहा था.....और बीच-2 में जब मेरा लंड नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर जाकर रगड़ ख़ाता तो, वो और सिसकने लगा जाती.....मैने नज़ीबा की दोनो टाँगो को ऊपेर उठा कर घुटनो से मोड़ा....और फिर एक हाथ से अपने लंड की कॅप को उसके फुद्दि के सूराख पर सेट किया, तो नज़ीबा सिसक उठी....."ओह्ह्ह्ह समीर अब डाल भी दो....क्यों तडपा रहे हो...." मैं कुछ पलों के लिए रुका, मैने अभी भी एक हाथ से अपने लंड की कॅप को पकड़ रखा था....और फिर अपनी पूरी ताक़त के साथ अपने लंड की कॅप को उसकी फुद्दि के टाइट सूराख पर दबाता चला गया......

नज़ीबा: ओह्ह्ह्ह समीर धीरे….. (नज़ीबा के फेस से ऐसा फील हो रहा था..जैसे उसे लंड लेने में बहुत दिक्कत हो रही हो….)

मेने अपने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक झटका मारा और फिर से अंदर करते हुए झटके लगाने लगा..

..."अह्ह्ह्ह समीर...." नज़ीबा फिर से ऐसे सिसकी, जैसे उसे बहुत दर्द हुआ हो...

.मैं फिर से उसके मम्मो को चूसने लगा....करीब 2 मिनिट बाद, मैने धीरे -2 अपने लंड को कॅप तक बाहर निकाला और फिर धीरे-2 उसकी फुद्दि के अंदर करने लगा....इस बार जब नज़ीबा को अपनी फुद्दि की दीवारो पर मेरे लंड के कॅप की रगड़ महसूस हुई, तो मस्ती में सिसक उठी.....

उसने मेरे फेस को दोनो हाथो से पकड़ कर ऊपेर खेंचते हुए मेरे होंटो को अपनी गर्दन पर लगा दिया...."ओह्ह्ह्ह समीर ...बहुत मज़ा आ रहा है....." नज़ीबा ने नीचे से अपनी फुद्दि को ऊपेर की तरफ पुश करते हुए कहा....वो नीचे से धीरे-2 अपनी बूँद को ऊपेर नीचे करने लगी थी....

.मैं भी धीरे-2 अपने लंड को नज़ीबा की फुद्दि के अंदर बाहर करने लगा....हम दोनो का रिदम ऐसा था कि, मैं जब अपनी कमर को ऊपेर की तरफ उठाता तो, नज़ीबा अपनी बुन्द को नीचे कर लेती, जिससे मेरा लंड कॅप तक उसकी फुद्दि से बाहर आ जाता....और जब मैं अपने लंड को अंदर करने के लिए अपनी कमर को नीचे की तरफ करता,

तो नज़ीबा भी साथ में अपनी बुन्द को ऊपेर की तरफ उठाती, तो लंड फुद्दि की गहराइयों में समा जाता, और हम दोनो की जाँघो की जड़ें आपस में सट जाती...ऐसे ही हम एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे....और जब नज़ीबा बहुत ज़्यादा गरम हो गयी, तो उसने अपनी बुन्द को उठाना बंद कर दिया...और अपनी टाँगो को उठा कर फेला लिया..... अब असली चुदाई का वक़्त आ चुका था....मैं सीधा होकर अपने घुटनों के बल बैठ गया....मेरा लंड सिलिप होकर नज़ीबा की फुद्दि से बाहर आ गया था
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
92


मेने नज़ीबा की टाँगो को पकड़ कर फिर से ऊपेर उठाया, और उसकी रानो के बीच अपने आप को सेट करते हुए, उसके फुद्दि के सूराख पर अपने लंड के कॅप को रख कर थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो, लंड का कॅप फिसलता हुआ उसकी फुद्दि के अंदर चला गया....."ओह्ह्ह्ह समीर शियीयियीयियी धीरे......" नज़ीबा ने सिसकते हुए मेरे हाथो को पकड़ लिया....मेने धीरे-2 अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया....हर बार मे अपने लंड को और अंदर धकेल देता.....

कुछ ही देर मे मेरा पूरा लंड नज़ीबा की फुद्दि के अंदर बाहर हो रहा था.....नज़ीबा अब बहुत उँची आवाज़ मे सिसकते हुए मज़ा ले रही थी..."ओह्ह्ह्ह येस्स समीर अहह ओह फक मी अहह उम्ह्ह्ह्ह्ह म्म्म्मदममम......." मेरा लंड उसकी फुद्दि के कामरस से और भी चिकना हो गया था....नज़ीबा बेहद गरम हो चुकी थी....

नज़ीबा: ओह्ह्ह समीर येस्स्स फक मी.....समीर मुझे डॉगी स्टाइल मे चोदो आहह मेरा बहुत मन था कि, आप मुझे इसी तरह चोदे...प्लीज़ समीर मेरी ये तमन्ना पूरी कर दो......

मैं: आहह हां क्यों नही मेरी जान.... मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ.....

मेने अपने लंड को नज़ीबा की फुद्दि से बाहर निकाला....तो नज़ीबा खुद ही, जल्दी से अपने पैरों पर डॉगी स्टाइल में हो गयी....मेने नज़ीबा के पीछे आते हुए, उसकी फुद्दि के लिप्स के बीच अपने लंड को सूराख पर सेट करते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा...."अहह समीर येस्स डियर फक मी ओह्ह्ह्ह हार्डर....."मेने उसके गले मे अपनी एक बाजू को लिपटाते हुए, तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया....

"अहह शीइ समीर हाआन ऐसे हीए और ज़ोर से करो आह ओह्ह्ह्ह समीर अहह.....उंह हाई समीर.....मुझसे शादी कर लो ना.....मैं तुम्हे बहुत खुस रखूँगी....अहह अहह ओह समीर आइ आम कमिंग......"नज़ीबा ने भी पीछे की तरफ अपनी बुन्द को धकेलना शुरू कर दिया था…मेरे जांघे नज़ीबा की बुन्द पर बुरी तरह से टकरा रही थी.....तभी नज़ीबा का बदन एक दम से काँपने लगा....और वो आगे की तरफ लूड़क गयी.. वो बुरी तरह से फारिघ् हो रही थी....पर मैं लगतार अपने लंड को इनआउट किए जा रहा था...."ओह्ह्ह्ह समीर उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अहह येस्स्स्स बेबी......"

और कुछ ही पलों बाद मैं भी कराहते हुए फारिघ् होने लगा.....लंड ने नज़ीबा की फुद्दि के अंदर झटके खाते हुए लावा उगलना शुरू कर दिया...और जैसे ही मैं नज़ीबा के ऊपेर लुड़का तो नज़ीबा मेरे वजन से नीचे दब गयी....हम तेज़ी से साँसे लेते हुए हाँफ रहे थे....मैं नज़ीबा की बगल मे लेट गया....चुदाई के जोश में हम दोनो के बदन गरम हो गये थे.....पर अब जब वासना का नशा उतरा तो, सर्दी ने अपना रंग दिखाया तो, नज़ीबा जल्दी से बेड से उठी, और मेरी तरफ देखते हुए, कंबल से अपने आप को और मुझे कवर किया.....और अपना सर मेरे बाज़ू के ऊपेर रख कर लेट गयी….

मैं नज़ीबा की तरफ फेस करके करवट के बल लेट गया….वो शरमाते हुए, मुझे देख रही थी….और कभी अपनी नज़रें झुका लेती….”अब तो नाराज़ नही हो ना….?” मैने नज़ीबा की चिन को पकड़ कर उसके फेस को ऊपर उठा कर उसकी आँखो में देखते हुए कहा…तो उसने ना में सर हिला दिया…

.”और अपनी अम्मी से….” नाज़िया ने एक बार फिर से मेरी आँखो में देखा और इस बार शरमाते हुए ना में सर हिला दिया….”

मैं नज़ीबा की तरफ मुँह करके करवट के बल लेता हुआ था....और उसकी कमर पर हाथ रखते हुए, जैसे ही उसे अपनी तरफ पुश किया तो, वो खुद ही मेरे जिस्म से लिपट गयी.....उसके सख़्त मम्मे मेरी चेस्ट में दब गये....सर्दी में एक रज़ाई की गर्माहट और एक नज़ीबा के बदन की गरमी, उफ्फ मेरा लंड फिर से हार्ड होने लगा था.....मेने नज़ीबा के गालो पर से उसके बिखरे हुए बालो को हटा कर, उसके होंटो पर अपने होंटो को रख कर स्मूच करना शुरू कर दिया.....

नज़ीबा ने भी अपनी एक बाहों को मेरी पीठ पर कस लिया...वो मुझे अपने ऊपेर लेने के लिए खेंचने लगी, तो मैं खुद ही उसके ऊपेर आ गया… मेने उसके होंटो से अपने होंटो को अलग किया, और थोड़ा सा नीचे को सरकते हुए, उसके राइट निपल को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया....."शियीयीयीयीयियी ओह ...... "नज़ीबा सिसकते हुए मेरे सर के बालो को सहला रही थी.....नीचे मेरा लंड एक दम तन चुका था...जो नज़ीबा की फुद्दि के लिप्स पर रगड़ खा रहा था...मेने अपने आप को थोड़ा सा अड्जस्ट किया और अपने लंड की कॅप को नज़ीबा की गीली फुद्दि के सूराख पर टिका कर जैसे ही अंदर को दबाया तो, नज़ीबा ने सिसकते हुए मेरे कंधो को कस पकड़ लिया....."मुझे सक करना है......"

नज़ीबा ने सिसकते हुए कहा....तो मैं उसकी बात सुन कर चोंक गया...." क्या कहा तुमने....." 

नज़ीबा: उम्ह्ह्ह्ह्ह मुझे सक करना है.....

मैं: क्या.....

नज़ीबा: आपका वो......

मैं: (मुस्कराते हुए) मेरा वो क्या नाम लेकर कहो ना....?

नज़ीबा: आपका लंड अब खुश प्लीज़.....(नज़ीबा ने मुझे अपने ऊपेर से साइड में करते हुए कहा....) 

तो मैं बेड पर पीठ के बल लेट गया....नज़ीबा ने मेरी रानो तक रज़ाई को उठा दिया. और खुद मेरे पेट पर झुक कर मेरे तने हुए मोटे लंड को पकड़ लिया, और उसके कॅप को हसरत भरी नज़रों से देखने लगी….नज़ीबा ने मेरे लंड की कॅप को गोर से देखा, और फिर मेरी आँखो में झाँकते हुए अपने होंटो को मेरे लंड की कॅप पर लगा दिया...जैसे ही नज़ीबा के रसीले गुलाबी होन्ट मेरे लंड की कॅप पर लगे तो, मैं एक दम से सिसक उठा...और अगले ही पल मेरे लंड का कॅप नज़ीबा के होंटो के बीच में दबा हुआ था....

नज़ीबा मेरे लंड की कॅप को अपने होंटो से पूरी ताक़त के साथ दबाते हुए अंदर बाहर कर रही थी....सच कहूँ दोस्तो मेरी तो जान ही निकले जा रही थी....इतना मज़ा आ रहा था कि, क्या बताऊ....नज़ीबा का सर तेज़ी से ऊपेर नीचे हो रहा था....और उतनी ही तेज़ी से मेरे लंड का कॅप नज़ीबा के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था.....

मैं: अह्ह्ह्ह श्िीीईईई नज़ीबा रूको नही तुम्हारे मुँह मे ही मेरा काम हो जाएगा.....

नज़ीबा आँखे ऊपेर उठा कर मेरी तरफ देखने लगी....और साथ ही पूरे जोश के साथ मेरे लंड के चुप्पे लगाने लगी....अब वो मेरे लंड को 4 इंच के करीब मुँह मे लेकर चूस रही थी....मैं फारिघ् होने के बेहद करीब था....मेने नज़ीबा को दो तीन बार कहा...पर जब तक नज़ीबा मेरी बात को सीरियस्ली लेती, मेरा लंड फटने को आ चुका था....अगले ही पल जैसे ही नज़ीबा ने मेरे लंड को मुँह से बाहर निकाला मेरे लंड से गाढ़े पानी की पिचकारियाँ निकल कर नज़ीबा के फेस पर पड़ी....नज़ीबा ने बुरा सा मुँह बनाते हुए मेरी तरफ देखा....तो मैने मुस्कराते हुए अपने कान पकड़ते हुए कहा....

मैं: बताया तो था.....और लगाओ चुप्पे.... हा हाहाहा....

नज़ीबा: करूँगी.....जब तक मेरा दिल नही भर जाता.....

नज़ीबा ने बेड से उठ कर बाथरूम के तरफ जाते हुए कहा....थोड़ी देर बाद नज़ीबा जब बाथरूम से बाहर आई, मेने बेड पर बिठाते हुए खुद ही उसका हाथ पकड़ लिया, और उसे अपनी तरफ खेंच लिया…वो झुकते हुए मेरी गोद मे आ बैठी…उसकी पीठ मेरी चेस्ट पर लगी हुई थी….दिल कर रहा था ये लम्हे यही ठहर जाए…..
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
93


नज़ीबा: आह आराम से क्या कर रहे हो….? अभी मैने गिर जाना था….?

मैं: ऐसे कैसे गिर जाती…..मैं हूँ ना तुम्हे संभालने के लिए…..

मेने नज़ीबा की दोनो जाँघो को उठा कर फेलाते हुए अपनी जाँघो की दोनो तरफ कर दिया….इस पोज़ीशन में मेरा लंड नज़ीबा की दोनो जाँघो के बीच उसकी फुद्दि पर चिपका गया…तो नज़ीबा अपनी फुद्दि के लिप्स पर मेरे लंड को सटा हुआ महसूस करके एक दम सिसक उठी….उसने अपनी मदहोशी से भरी आँखो को खोल कर मेरी तरफ देखा और फिर शरमा कर मुस्कराते हुए बोली…”आपका ये तो इतनी जल्दी फिर से कैसे तैयार हो गया….….”

मैं: आज तुम्हारी फुद्दि की खुसबु ने इसे दीवाना बना दिया है…..फिर से तुम्हारी फुद्दि को चूमने के लिए खड़ा हो गया….

मेने नज़ीबा की राइट थाइ के नीचे से अपना हाथ डाल कर अपने लंड को पकड़ा और उसकी फुद्दि के लिप्स पर अपने लंड को रगड़ते हुए बोला, तो नज़ीबा एक बार फिर से सिसक उठी….”हाई समीर….आपका ये अगर ऐसी खड़ा होता रहा…तो आपसे निकाह के बाद मेरा क्या हाल होना है….मुझे तो सोच कर ही डर लग रहा है…..” नज़ीबा ने अपनी बुन्द को मेरी रानो से थोड़ा सा ऊपेर उठाते हुए कहा….और फिर मेरे लंड को पकड़ कर अपनी फुद्दि के सूराख पर टिकाते हुए धीरे-2 फुद्दि को लंड की कॅप पर दबाने लगी….

जब फुद्दि के सूराख का लंड की कॅप पर दबाव बढ़ा, तो मेरे लंड का कॅप नज़ीबा की फुद्दि के सूराख फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा….नज़ीबा की फुद्दि तो पहले ही चुदाई के हम दोनो के कामरस से एक दम गीली थी…इसीलिए मेरे लंड का कॅप बिना किसी परेशानी के नज़ीबा की फुद्दि के टाइट सूराख को फैलाता हुआ अंदर जा घुसा….”ओह्ह्ह्ह उंह समीर….” नज़ीबा ने एक साइड में खिसकते हुए, अपने एक बाजू को मेरी गर्दन के पीछे से निकाल कर कंधे पर रख लिया…और मेरी तरफ हवस से भरी नज़रों और कामुक मुस्कान के साथ देखते हुए बोली…..

नज़ीबा: अहह आपका ये तो हाई सच मे बहुत मोटा है….

मैं: तुम फिकर ना करो…जब तुम थक जाया करोगे….तो नाज़िया इसकी देख भाल कर लिया करेगी….

नज़ीबा अभी भी धीरे-2 अपनी फुद्दि को मेरे लंड पर दबाते हुए नीचे मेरी रानो पर बैठने लगी थी…अब मेरा लंड पूरा का पूरा नज़ीबा की फुद्दि में एक बार फिर से समा चुका था….जैसे ही नज़ीबा की फुद्दि की गहराइयों में मेरा मोटा और लंबा लंड समाया, तो नज़ीबा का पूरा बदन मस्ती में कांप गया…उसने अपना फेस पीछे घुमा कर मेरे होंटो पर अपने होंटो को रख दिया….और मेने उसके दोनो मम्मों को हाथ मे लेकर दबाते हुए उसके होंटो को चूसना शुरू कर दिया….

नज़ीबा की फुद्दि से एक बार फिर से पानी रिसना शुरू हो गया था….जिससे मैं उसकी फुद्दि से निकल कर अपने बॉल्स को गीला करता हुआ सॉफ महसूस कर पा रहा था…मेने नज़ीबा के होंटो को चूस्ते हुए, अपना एक हाथ उसके मम्मे से हटाया और फिर नज़ीबा का हाथ पकड़ कर अपने बॉल्स पर रख दिया….तो नज़ीबा ने अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करके मेरी आँखो मे देखना शुरू कर दिया…..

मैं: ओह्ह्ह्ह मेरी जान देख ना तुम्हारी फुद्दि कितना पानी छोड़ रही है…मेरे आँड भी गीले कर दिए……

मेने नज़ीबा का हाथ छोड़ दिया, तो उसने मेरे बॉल्स को हाथ मे लेकर धीरे-2 सहलाते हुए मेरी तरफ देखा, और फिर हाथ ऊपेर लाकर उसपर लगे अपने फुद्दि से निकले कामरस को देखते हुए शरमा गयी….”ये तो एक बीवी की फुद्दि का प्यार है, अपने शोहार के लिए…” नज़ीबा ने धीरे-2 अपनी बुन्द को आगे पीछे करते हुए कहा, तो मेरा लंड उसकी फुद्दि मे धीरे-2 अंदर बाहर होने लगा…इस पोज़िशन मैं मेरा लंड उसकी फुद्दि की दीवारो से कुछ ज़्यादा ही रगड़ खा रहा था…वो अपनी पीठ मेरे चेस्ट से टिकाए हुए, धीरे-2 अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे करने लगी…..

नज़ीबा: ओह्ह्ह्ह समीर ऐसे सेक्स करने में कितना मज़ा आता है……आप नही जानते, जब से मैने आपको अम्मी के साथ वो सब करते हुए देखा है…मेरी फुद्दि कितना तरसी थी…..हाईए…..सच में बहुत मज़ा आ रहा है….

नज़ीबा ने अब पूरी रफ़्तार से अपनी बुन्द को ऊपेर नीचे करना शुरू कर दिया था…मेरे लंड का कॅप उसकी फुद्दि की दीवारो से बार-2 रगड़ ख़ाता हुआ अंदर बाहर हो रहा था….नज़ीबा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…”ओह्ह्ह्ह समीर यस फक मी ओह्ह्ह्ह अहह अह्ह्ह्ह उंह फक मी डियर…..” मैने एक हाथ से नज़ीबा के मम्मे को दबाते हुए, दूसरे हाथ को आगे लाते हुए नज़ीबा की फुद्दि के दाने (क्लिट) को अपनी उंगलियों से दबाना शुरू कर दिया….

तो नज़ीबा मस्ती मे एक दम से तड़प उठी….उसकी कमर अब और तेज़ी से झटके खा रही थी….”ओह्ह्ह समीररर उफफफफ्फ़ ऐसे मत करो ना….अहह अह्ह्ह्ह श्िीीईईईईईईईई ओह्ह्ह्ह समीरर ओह मेरीई जान…प्लीज़ आअहह समीरररर ओह हाईए कारर्र दी ना अपनी बीवी की फुद्दि ठंडी ओह्ह्ह्ह रुक जाओ ना….” नज़ीबा मेरी रानो पर बैठी मेरे लंड को अपनी फुद्दि मेंलिए बुरी तरह से कांप रही थी…उसकी फुद्दि की दीवारो ने मेरे लंड को अंदर ही अंदर दबोच रखा था….उसने अपने सर को मेरे कंधे पर टिका दिया था……

मैं: क्या हुआ तुम्हारी फुद्दि तो अभी से पानी छोड़ गयी…..

मेने नज़ीबा के मम्मों को दोनो हाथों में लेकर दबाते हुए कहा. तो नज़ीबा एक दम से सिसक उठी…..”ओह्ह्ह आप भी कर लो ना…..अब मुझसे नही होगा….हाई इतनी जल्दी पानी निकाल दिया आपके लंड ने….” 

मेने नज़ीबा को आगे की तरफ पुश करते हुए, उसे डॉगी स्टाइल मे कर दिया…और उसके पीछे आते हुए, अपने लंड को फिर से उसकी फुद्दि के सूराख पर सेट करते हुए, एक ज़ोर दार धक्का मारा तो, नज़ीबा एक दम तड़प उठी…..”ओह्ह्ह्ह समीर धीरे उफ्फ…..” 

मेने नज़ीबा के खुले हुए बालो को पकड़ कर बिना रुके ताबडतोड धक्के लगाने शुरू कर दिए. नज़ीबा अभी अभी फारिघ् हुई थी….इसीलिए उसे थोड़ी तकलीफ़ का सामना करना पड़ रहा था. मैं अब अपने लंड को पूरा निकाल-2 कर नज़ीबा की फुद्दि में डाल रहा था….

नज़ीबा: ओह्ह्ह्ह हाईए समीर धीरे उफ़फ्फ़ अह्ह्ह्ह समीर…

मैं अब पूरी जोशो ख़रोश के साथ नज़ीबा की फुद्दि की ठुकाइ कर रहा था….जब मेरी जांघे नज़ीबा की बूँद से टकराती, तो उसके मोटी बुन्द का गोश्त काँपने लग जाता...मेरा हर शॉट नज़ीबा को फिर से गरम कर रहा था….करीब 5 मिनिट तक मेने उसी पोज़िशन मे नज़ीबा की फुद्दि के ज़बरदस्त ठुकाइ की…और फिर जैसे ही मैने अपना लंड नज़ीबा की फुद्दि से बाहर निकाला तो नज़ीबा आगे की तरफ लूड़क गयी….

नज़ीबा: ओह्ह्ह समीर….आराम से करो ना……

मैने नज़ीबा को सीधा करके पीठ के बल लिटाया और उसकी टाँगो को उठा कर अपने कंधो पर रखा और फिर एक हाथ से अपने लंड की कॅप को नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर रखते हुए, एक जोरदार झटका मारा…..इस बार मेरा पूरा का पूरा लंड नज़ीबा की फुद्दि में एक ही बार मे समा गया….नज़ीबा का मुँह दर्द से पूरा खुल गया….”ओह्ह्ह्ह समीरररर श्िीीईईईईईई मर गयी मैं…..हाईए अम्मी उफ़फ्फ़….”

मैं: इस वक़्त अपनी अम्मी को याद करके क्या फ़ायदा…वो यहाँ होती तो तुम्हारी तकलीफ़ बाँट लेती…

नज़ीबा: वो कैसे….सीईईईईईईईईईईई…..

मैं: अब तक तो उसने मेरे लंड को तुम्हारी फुद्दि से निकाल कर खुद अपनी फुद्दि मे ले लेना था….

नज़ीबा: सीईईईईईईई उंह हइई यी आप क्या कह रहे हो…..

मैं: सच कह रहा हूँ…शादी के बाद तुम दोनो की रोज ऐसी ही लेनी है मैने….

पर मैं फिर भी ना रुका, और उस पर झुकते हुए अपने लंड को पूरी रफतार से उसकी फुद्दि के अंदर बाहर करने लगा….नज़ीबा एक बार फिर से गरम होने लगी थी… अब उसके फेस पर उभरे हुए दर्द भरे भाव मस्ती मे बदलने लगे थे…..” ओह्ह्ह सामीएर आप पूरे जानवर बन जाते हो….…..” नज़ीबा ने ऐसे हल्का सा हंसते हुए कहा…जैसे इंसान रोते-2 एक दम हँसता है…..”

मैं: आहह तुम्हारी अम्मी को यही जानवर तो पसंद है……

नज़ीबा: (अब नज़ीबा एक दम गरम हो चुकी थी….और उसने अपनी बुन्द को थोड़ा सा धीरे-2 ऊपेर उठाना चालू कर दिया था…..)शियीयियीयियी मुझे भी ये जानवर बहुत पसंद है…..(अपनी बुन्द को ऊपेर उठाते हुए मेरे लंड को अपनी फुद्दि की गहराइयों मे लेने की कॉसिश करते हुए कहा…)

उसकी फुद्दि एक बार फिर से पूरे सबाब पर थी….जो हर धक्के के साथ अपने कामरस को बहा रही थी…..नज़ीबा दूसरी बार जब फारिघ् हुई तो रूम मे सिसकराइयों का मानो तूफान सा आ गया….उसने फारिघ् होते हुए अपनी टाँगो को उठा कर मेरे कमर पर लपेट लिया….और बाहों को पीठ पर कस लिया….इतने ज़ोर से मैं हिल भी नही पा रहा था….मुझे उसकी कमर तेज़ी से झटके खाती हुई महसूस हो रही थी….. उसकी फुद्दि ने अपने अंदर मेरे लंड को इस क़दर मजबूती से दबाना शुरू कर दिया कि, मेरे लंड ने भी अपना लावा उगलना शुरू कर दिया….अपनी फुद्दि मे बहते हुए मेरे गाढ़े पानी को महसूस करके, नज़ीबा ने और मजबूती से मुझे आपनी बाहों मे कस लिया….

नज़ीबा: ओह समीईररररर आइ लव यू आइ लव यू सो मच….अम्मी से मेरा हाथ माँग लो…और उनको बोल देना कि मैं अपना प्यार उनके साथ बाँटने के लिए तैयार हूँ….ल् लव यू समीर…..आइ रियली लव यू….मेरी जान….

मैं: ठीक है मेरी जान….पर तुम्हे मुझसे एक वादा करना होगा….

नज़ीबा: हां आप एक बार कहो तो सही…मैं आपके लिए आपनी जान भी दे दूँगी….

मैं: मैं सुहागरात तुम दोनो के साथ मनाना चाहता हूँ….

नज़ीबा ने मेरी बात सुन कर चोंक कर मेरी तरफ देखा और फिर एक दम से मुस्कराते हुए मेरे फेस को अपने हाथो में लेकर बोली….”क्या अम्मी राज़ी हो जाएँगी…”

मैं: ये ड्यूटी तुम्हारी है….

नज़ीबा: मैं वादा करती हूँ मैं अपनी तरफ से पूरी कॉसिश करूँगी….
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
दोस्तो यहाँ से अब कुछ शॉर्ट मे लिखता हूँ….ताकि अब आप लोगो को जल्द से जल्द समीर नाज़िया और नज़ीबा के लास्ट अपडेट्स की तरफ ले चलु….दोस्तो उसके तीन महीने बाद जब नज़ीबा के एग्ज़ॅम हुए, उसके बाद मैने नज़ीबा से निकाह कर लिया….और आख़िर कार वो वक़्त भी आ गया…..जिसका मुझे बड़ी शिदत से इंतजार था….उस रात जैसे मैं नज़ीबा के रूम मे दाखिल होने लगा तो, देखा नज़ीबा ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी हुई थी…..और नाज़िया उसके पास खड़ी उससे बात कर रही थी….

नाज़िया: नज़ीबा…..(नज़ीबा ने फेस घुमा कर नाज़िया की तरफ देखा…)

नज़ीबा: जी अम्मी….

नाज़िया: बहुत प्यारी लग रही हो तुम….ऐसे बार-2 आयने में अपने आप को ना देखो… कही खुद की ही नज़र ना लग जाए तुम्हे….

नज़ीबा: अम्मी आप भी बहुत प्यारी लग रही है…

नाज़िया ने आगे बढ़ कर नज़ीबा को अपनी बाहों मे भर लिया…और उसके माथे को चूमते हुए बोली….”किसी की नज़र ना लगे मेरी बेटी की खुशियों को….” 

नज़ीबा: अम्मी एक बात पूछूँ….

नाज़िया: हाँ पूछो….

नज़ीबा: मुझे तो याद ही नही रहा….आज रात मैं समीर को क्या गिफ्ट दूं..

नाज़िया: ये तो मुझे भी याद नही रहा…चलो कोई बात नही….उसे इतना प्यारा गिफ्ट तो मिल ही गया है… नाज़िया ने नज़ीबा के गाल पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा….तो नज़ीबा एक दम से शर्मा गयी….

”अम्मी एक बात पूछूँ….” नज़ीबा ने खड़े होकर नाज़िया की तरफ फेस करते हुए कहा…

.”हां बोलो…” नाज़िया ने उसको कंधो से पकड़ कर बेड के पास लेजा ते हुए कहा..और फिर बेड पर बिठा दिया….

“अम्मी आप अभी भी समीर से प्यार करती है ना….?” 

नज़ीबा की बात सुन कर नाज़िया एक दम सीरीयस हो गयी,….”पता नही बेटा… पर मुझे बहुत ख़ुसी है कि तुम्हे तुम्हारा समीर मिल गया….और मेरा यकीन करो.. तुम्हारी अम्मी तुम्हारी खुशियों के रास्ते के बीच मे कभी भी नही आएगी…”

मैं: सॉरी अम्मी मेरा मतलब वो नही था…मैं दरअसल कहना…..

नाज़िया: कोई बात नही….(नाज़िया नज़ीबा को बीच में टोकते हुए बोली….)

नज़ीबा: अम्मी आज तक मैने आप से जो भी माँगा….वो आपने मुझे दिया है… आप ने आज तक मेरी सारी ख्वाहिशें पूरी की है….क्या आज आप मेरी आख़िरी ख्वाहिश पूरी करोगी…..

नाज़िया: तुम बोलो तो सही…मेरी प्यारी सी बेटी के लिए मेरी जान भी हाज़िर है….और आगे से ऐसा कभी मत कहना…ये तुम्हारी आख़िरी ख्वाहिश है….जो तुम्हारी अम्मी पूरी कर सकती है….मैं तो तुम्हारी हर खुशी और हर ख्वाहिश पूरी करने के लिए अपनी जान भी दे दूँगी….बोलो क्या चाहिए तुम्हे….

नज़ीबा: सच अम्मी…..

नाज़िया: हां सच तुम कह कर तो देखो…तुम्हे नही पता आज मैं कितनी खुश हूँ…. 

नज़ीबा: अम्मी मैं वो….

नाज़िया: हां-2 बोलो रुक क्यों गयी…..

नज़ीबा: वो मैं आज समीर को गिफ्ट मैं आपको देना चाहती हूँ….

नाज़िया नज़ीबा की बात सुन कर एक दम शॉक्ड हो गयी….”क्या ये क्या कह रही हो….?” नाज़िया ने हैरत से भरी आँखो से नज़ीबा की तरफ देखते हुए कहा…

.”अम्मी मुझे पता है आप समीर से बहुत प्यार करती हो….और समीर आपसे….प्लीज़ अम्मी इनकार ना करना….” 

नाज़िया: ये तुम क्या कह रहे हो…..तुम्हे पता भी है आज तुम्हारी सुहागरात है…

नज़ीबा: मुझे पता है अम्मी….प्लीज़….मेरी खातिर….समीर की खातिर…..

नाज़िया: बेटा तुम्हे पता भी है आज इस रात की अहमियत क्या होती है….एक हज़्बेंड वाइफ की लाइफ में….

नज़ीबा: मुझे पता है….

नाज़िया: तुम पागल हो गयी हो…..

नज़ीबा: अम्मी आपने वादा किया है मुझसे….

नाज़िया: पागल मत बनो…समीर क्या सोचेगा मेरे बारे मे…..

नाज़िया बेड से उठ कर जैसे ही बाहर आने लगी तो, मुझे रूम के डोर पर खड़ा देख कर एक दम से चोंक गयी….और अगले ही पल उसकी नज़रें शरम के मारे झुक गयी… और सर झुका कर जैसे ही वो रूम से बाहर जाने लगी…मैं रूम का डोर बंद करके डोर और नाज़िया के रास्ते बीच में खड़ा हो गया….

.”समीर मुझे बाहर जाने दो…..” नाज़िया ने मुझसे नज़रें मिलाए बिना ही कहा….

.मैने डोर को अंदर से लॉक किया…और फिर जैसे ही नाज़िया की तरफ मुड़ा तो, नाज़िया अभी भी सर झुकाए खड़ी थी…और उसके पीछे नज़ीबा भी बेड के पास खड़ी सर झुकाए तिरछी नज़रों से हमारी तरफ देख रही थी….

नाज़िया: समीर मुझे बाहर जाना है…मुझे जाने दो…..

मैने आगे बढ़ कर नाज़िया को उसके दोनो कंधो से पकड़ा और उसे अपनी तरफ पुश किया….जैसे ही वो मेरी करीब आई तो, नाज़िया एक दम से पीछे की ओर हटने की कॉसिश करते हुए बोली…..”आह समीर ये क्या कर रहे हो…..?” नाज़िया के गाल एक दम सूर्ख हो चुके थे

…”कोई बीवी अपने शोहर से ऐसी बात करती है क्या….?” मैने नाज़िया के होंटो पर उंगली रख कर उसे चुप करते हुए कहा…”बोलो अपने शोहर को नाम से पुकारते है….?” 

नाज़िया ने मेरी बात सुन कर चोंक कर मेरी तरफ देखा…और फिर नज़रें झुका कर बोली…”बाहर बहुत काम पड़ा है….मुझे जाने दो…….”

मैं: काम तो कल भी हो सकता है….अब तुमने बाहर जाने की बात की तो, तुम जाओ ना जाओ….मैने यहाँ से बाहर चले जाना है….अगर यहाँ से कोई बाहर जाएगा तो, मैं….

नाज़िया: ये कैसी ज़िद है….

मैं: ज़िद्द तो तुम कर रही हो…..अपने शोहर से ज़ुबान लड़ा कर….

मैने नाज़िया को अपने बाज़ुओं में लेकर उसके कमर पर कसते हुए कहा….तो नाज़िया मुझसे एक दम चिपक गयी…उसकी पूरी फ्रंट साइड मेरी फ्रंट साइड से टच हो रही थी.. “आज की रात तो, हर बीवी अपने शोहर का पूरा ख़याल रखती है….वो शोहर जिससे प्यार तो, दूर शादी से पहले वो उनको जानती तक नही होती…और एक तुम हो… जिसे उसकी पसंद का शोहर भी मिला तो भी नखरे कर रहे हो….” 

नाज़िया: वो नज़ीबा……

मैं: नज़ीबा कोन सी पराई है….

मैने अपने हाथो को नाज़िया की कमर से नीचे करते हुए, जैसे ही उसकी शलवार के ऊपेर से उसकी बुन्द के दोनो पार्ट्स को पकड़ कर दबाया….नाज़िया एक दम तड़प उठी.. “ओह खुदा के लिए मुझे मेरी बेटी के सामने ऐसे शर्मिंदा तो ना करो…. आह मैं उसका सामना कैसी करूँगी…”

मैने नाज़िया की बुन्द के दोनो पार्ट्स को दबाते हुए उसे पीछे की तरफ पुश करते हुए बेड के पास ले गया….और उसे बेड पर लेटा कर खुद भी बेड पर चढ़ गया…अब नाज़िया बेड पर पीठ के बल लेटी हुई थी…उसने शरम के मारे अपनी आँखो को बंद किया हुआ था…और मैं उसकी तरफ फेस करके करवट के बल लेटा हुआ था…नाज़िया का एक बाज़ू मेरे कंधे के नीचे था…और उसके दूसरे हाथ को मैने अपने एक हाथ से पकड़ा हुआ था…नज़ीबा सर झुकाए बेड के पास खड़ी थी…”इधर आओ…” मैने नज़ीबा की तरफ देखते हुए कहा….तो नज़ीबा बेड पर आ गयी…मैने उसे नाज़िया के पास दूसरी तरफ लेटने का इशारा किया…तो नज़ीबा भी नाज़िया की तरफ फेस करके करवट के बल लेट गयी….

नज़ीबा को अपने पास लेटता हुआ महसूस करके नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर नज़ीबा की तरफ देखा….और फिर मेरी तरफ देखने लगी…नाज़िया का एक बाजू मेरे कंधे के नीचे था….और उसके दूसरे हाथ को मैने उसी हाथ से पकड़ रखा था…और दूसरे हाथ को उसके पेट पर फेर रहा था….मैने नाज़िया के पेट पर हाथ फेरते हुए, धीरे-2 अपने होंटो को जैसे ही नाज़िया के होंटो की तरफ बढ़ाना शुरू किया तो, नाज़िया ने अपना फेस घुमा कर नज़ीबा की तरफ कर लिया….”माँ मुझे बहुत शरम आ रही है….प्लीज़ ऐसे तो ना करें….” नाज़िया की नज़रें जब नज़ीबा की नज़रों से टकराई तो, नाज़िया ने अपनी आँखो को बंद कर लिया…

जिस हाथ से मैं नाज़िया के पेट को सहला रहा था…उसी हाथ से मैने नाज़िया के फेस को अपनी तरफ घुमाया….और नाज़िया के होंटो को अपने होंटो में लेकर चूसना शुरू कर दिया…पर नाज़िया रेस्पॉंड नही कर रही थी…उसने अपने होंटो को ज़बरदस्ती बंद कर रखा था….मैने नाज़िया के होंटो से अपने होंटो को अलग किया…और उसके फेस की ओर देखते हुए बोला…”मेरी बड़ी बीवी को तो किस भी नही करना आता….चलो नज़ीबा इसे दिखाओ कि किस कैसे करते है….” मैने नाज़िया के फेस से हाथ हटा कर नज़ीबा की चिन को नीचे से पकड़ा और उसे अपनी तरफ पुश किया तो, नज़ीबा कठपुतली की तरह आगे आ गये,….

अब सूरते हाल ये था कि, मेरा और नज़ीबा दोनो का फेस नाज़िया के फेस के ऊपेर चन्द इंचो के फाँसले पर था….और नाज़िया का फेस हम दोनो की तरफ ऊपेर था…पर उसने अपनी आँखे बंद कर रखी थी….जैसे ही मैने नज़ीबा के होंटो को अपने होंटो मे लेकर सक करना शुरू किया तो, नज़ीबा ने मेरा साथ देते हुए अपने होंटो को खोल लिया… मैं पूरे जोशो ख़रोश के साथ नज़ीबा के रसीले होंटो को चूस रहा था…थोड़ी देर नज़ीबा के होंटो को सक करने के बाद मैने नज़ीबा के होंटो से अपने होंटो को अलग किया और सरगोशी से भरी आवाज़ में बोला…”अपनी ज़ुबान मेरे मुँह मे डालो… मुझे तुम्हारी ज़ुबान चुसनी है…” मैने नाज़िया की तरफ देखा उसकी आँखे अभी भी बंद थी….पर उसका फेस एक दम रेड हो चुका था….

जैसे ही मैने दोबारा नज़ीबा के होंटो को अपने होंटो मे लेकर चूसना शुरू किया तो, नज़ीबा ने अपने होंटो को चुस्वाते हुए, अपनी ज़ुबान को मेरे होंटो के दरमियान कर दिया….मैने भी जोश में आकर नज़ीबा की ज़ुबान को सक करना शुरू कर दिया… नज़ीबा मेरा भरपूर साथ दे रही थी…..नज़ीबा की ज़ुबान सक करते हुए हम दोनो के मुँह से सुपुड-2 की आवाज़ आ रही थी…मैने एकदम से नज़ीबा के होंटो से अपने होंटो अलग किया….और नाज़िया की तरफ देखा तो नाज़िया हैरत और शरम से भरी नज़रों से हमारी तरफ देख रही थी….
Reply
03-08-2019, 02:09 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
95


जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया की तरफ देखा तो, नाज़िया ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली….”सीईइ नाज़िया नज़ीबा की ज़ुबान बहुत मीठी है….तुम्हारी सौतन ने तो अपने होंटो और ज़ुबान के जाम पिला कर अपने मुझे खुश कर दिया है….तुम मुझे खुश नही करोगी…” मैने नाज़िया के कान के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी में कहा तो, और फिर नाज़िया के कान को अपने होंटो में लेकर जैसे ही चूसा…नाज़िया एक दम से तड़प उठी….मैने हाथ से नाज़िया के फेस को अपनी तरफ घुमा कर उसके होंटो को अपने होंटो में लेकर सक करना शुरू कर दिया…..

पर नाज़िया ने फिर से कोई रेस्पॉन्स नही दिया….मुझे पता था कि, नाज़िया अभी भी शरमा रही है….आख़िर उसकी बेटी साथ मे थी….जो शरम हया उसमे थी….उसे दूर करने में मुझे पता नही कितना वक़्त लगने वाला था….इसीलिए मैने नाज़िया के होंटो को छोड़ आगे बढ़ने की सोची….मैने नाज़िया के फेस से हटा कर नाज़िया के पेट पर उसकी नाफ़ के पास रखा….और उसके कमीज़ को पकड़ कर धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया…जैसे ही नाज़िया को इस बात का अहसास हुआ तो, नाज़िया ने हिलना शुरू कर दिया.. क्योंकि नाज़िया का कोई भी हाथ फ्री नही था….जिससे वो मुझे रोक पाती….”अह्ह्ह्ह समीररर ये क्या कर रहे हो….क्यों मुझे शर्मिंदा कर रहे हो….प्लीज़ समीर छोड़ दो मुझे… ऐसे तो ना करो…”

मैं: बड़ी बदजुबान हो तुम…….कैसी बेबाकी से अपने शोहर का नाम ले रही हो…. मुझे लगता है तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत है ही नही….

मेरी बात सुन कर नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर मेरी तरफ देखा…और रुआंसी सी आवाज़ मे बोली….”सॉरी पर ऐसे तो ना करिए….” 

मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए उसकी कमीज़ को ऊपेर करना शुरू कर दिया…नाज़िया ने भी मान लिया था कि, अब वो कुछ नही कर सकती…नाज़िया ने हथियार डालते हुए फिर से अपनी आँखे बंद कर ली…. मैने नाज़िया की कमीज़ को उसके गले तक ऊपेर उठा दिया….जैसे ही नाज़िया की कमीज़ उसके गाले तक ऊपेर हुई, मैने नाज़िया की ब्रा को एक हाथ से नीचे से पकड़ कर नज़ीबा की तरफ देखते हुए नज़ीबा को दूसरी मम्मे के नीचे से ब्रा पकड़ने का इशारा किया तो, नज़ीबा ने शरामते हुए नज़रें झुका ली…

.”तुमने सुना नही मैने क्या कहा…” मैने थोड़ा गुस्से में कहा तो, नज़ीबा ने दूसरी साइड से नाज़िया के ब्रा को पकड़ लिया….

“ऊपेर उठाओ….” और फिर मैने नज़ीबा ने एक हाथ से नाज़िया के ब्रा को जैसे ही ऊपेर उठाया…नाज़िया के गोरे 38 साइज़ के मम्मे उछल कर बाहर आ गये…मैने अपने साइड वाले मम्मे को अपने हाथ में लेकर दबाते हुए नज़ीबा की तरफ देखा….जो नज़रें झुका कर लेटी हुई थी….”ये देखो तुम्हारी अम्मी के मम्मे कितने बड़े है…सीईइ देखो इनके निपल कैसे सख़्त हो चुके है….” मेरी बात सुन कर नाज़िया ने ऐसे होंका भरा जैसे वो रो रही हो….”हाईए मैं मर गयी… मैं अब तुम दोनो के साथ आँखे कैसी मिलाउन्गी….नज़ीबा प्लीज़ इस तरफ मत देखना….” 

मैं: क्यों क्यों नही देखना उसे….उसने देखना भी है और अपनी सौतन के मम्मों को चूसना भी है….

नाज़िया: नही…..

मैने देखा कि नज़ीबा बड़ी ही नशीली नज़रों से मेरी तरफ देख रही थी….मैने उसकी तरफ देखते हुए नाज़िया के मम्मे के ऊपेर झुकते हुए, जितना हो सकता था.. उसके मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईईईईईईई अहह….” जैसे ही नाज़िया को अपने मम्मे पर मेरी गरम ज़ुबान फील हुई, नाज़िया एक दम से तड़प उठी… 

मैने नाज़िया का राइट मम्मा पकड़ा और मुँह में डाल लिया फिर रूम में मुकामल खामोशी छा गयी ....मैं नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए नज़ीबा की आँखो में देख रहा था…मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए, नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाया…तो नाज़िया के दूसरे मम्मे का निपल और तीखा होकर बाहर निकल आया….मैने नाज़िया के मम्मे को चूस्ते हुए आँखो ही आँखो से नज़ीबा को नाज़िया के मम्मे को सक करने को कहा तो, नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुकते हुए,नज़ीबा ने पूरा मुँह खोला और नाज़िया का मम्मा मुँह में डाल लिया...जैसे ही नज़ीबा ने नाज़िया के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू किया...

तो नाज़िया ऐसे तडपी, जैसे उसे करेंट लग गया हो….”हाए मैं गयी… हाई ओईए खुदा ये तुम दोनो आअहह मेरे साथ कियाअ कर रहे हो…ओह्ह्ह्ह नज़ीबा तुम तो ऐसा ना करो….तुम तो आह तुम तो मेरी बेटी हो…प्लीज़ ऐसा ना करो…” नाज़िया बुरी तरह तड़प रही थी….मैने नाज़िया के मम्मे को बाहर निकाला तो नज़ीबा ने भी ने भी नाज़िया के मम्मे को मुँह से निकालना चाहा…पर मैने उसे मना कर दिया…नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को सक करना शुरू कर दिया… “बेड रूम में वो तुम्हारी बेटी नही है….आज के बाद बेडरूम के अंदर तुमने उसे बेटी नही कहना….” नज़ीबा बड़ी नफ़ासत से नाज़िया के मम्मे को सक कर रही थी...

नाज़िया: अह्ह्ह्ह ऐसा करने से सच्चाई तो बदल नही जाएगी….

मैं: अच्छा अगर मेरी बात का यकीन ना हो…तुम खुद ही नज़ीबा से पूछ लो… बताओ नज़ीबा नाज़िया बेडरूम में ये तुम्हारी क्या लगती है….

मैने फिर से झुक कर नाज़िया के मम्मे को मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईई ओह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह अब्ब बस भी करो….मुझे बहुत शर्म आ रही है….”मेरी बात सुन कर नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह से बाहर निकाला और सरगोशी से भरी आवाज़ में कहा…”मैं आपकी बेटी नही…आपकी सौतन हूँ बाजी…” और नज़ीबा ने फिर से नाज़िया के मम्मे को अपने मुँह में लेकर सक करना शुरू कर दिया…”सीईईईईई ओह हाईए तुम पागल हो गयी है….सीयी ओह्ह्ह्ह मुझसे बर्दास्त नही हो रहा…अहह बस करो….” नाज़िया बुरी तरह मस्ती में सिसक रही थी….

नाज़िया: आह मेरे बाज़ू में दर्द हो रहा है…

नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे कंधे के नीचे से खेंचते हुए कहा…तो मैं खुद ही थोड़ा ऊपेर हो गया….नाज़िया ने अपने बाज़ू को मेरे नीचे से निकाल लिया…मेरे और नज़ीबा के दरम्यान मम्मे चूसने का मुक़ाबला स्टार्ट हो चुका था.. ....हम दोनो ने मम्मे चूस चूस कर नाज़िया को इस क़दर मजबूर कर दिया कि उस ने अपने दोनो हाथ हम दोनो के बालों में फेरने शुरू कर दिए.....”ओह्ह ये तुम मुझसे क्या करवा रहे हो….अह्ह्ह्ह हइईए आह नज़ीबा ओह जी मुझे कुछ हो रहा है…अहह मैने मर जाना है….ओह्ह्ह्ह,……”

मैं: क्या हो रहा है सच क्यों नही कहती कि तुम्हे अपने मम्मे चुसवा कर मज़ा आ रहा है….

नाज़िया: आहह खुदा के लिए चुप हो जाओ आप….

नाज़िया ने अपने दोनो बाज़ुओं में मेरे और नज़ीबा के सर को कस लिया…और हम दोनो के सर को अपने मम्मों पर दबाने लगी….वो कभी कभी सीयी की आवाज़ निकालती...मगर और कुछ ना कहती...नज़ीबा और मेरे गाल आपस में टकरा रहे थे...हम दोनो नाज़िया को ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा दे कर नाज़िया को भरपूर गरम करने की कोशिश कर रहे थे...नाज़िया भी अपने हाथों के ज़ोर से हमारे सिर अपने मम्मों पर दबा रही थी...

नाज़िया की कमीज़ और ब्रा उस के गले में थी...हम तीनो उस वक़्त खामोश थे और कुछ भी बोलने के मूड में नही थे....बस मैं और नज़ीबा इशारों से और ऐक दूसरे को देख कर समझाते हुए कर रहे थे…नाज़िया की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….नज़ीबा ने भी अपनी साइड संभाली हुई थी…और नाज़िया के राइट मम्मे को चूस रही थी….

नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…अब वो किसी भी तरह का विरोध नही कर रही थी…नाज़िया को मस्त होकर अपने मम्मे चुस्वाते देख कर थोड़ी ही देर बाद मैने नाज़िया की कमीज़ को पकड़ कर तोड़ा सा खींच कर नाज़िया को उतारने का इशारा दिया...नाज़िया नशे में डूबी हुई उठ बैठी और अपनी कमीज़ को आगे पीछे से पकड़ कर उतारा नज़ीबा ने भी उस की मदद करते हुए ब्रा का हुक खोल कर उस को भी उतार दिया...

नाज़िया ने नशीली निगाहों से पहले नज़ीबा के फेस पर अपनी लंबी पलकें झुका कर उस को देखा ..फिर ऐसे ही मेरे चेहरे को देखा…फिर जैसे ही मैने नाज़िया को अपनी बाजुओं में लेकर उसे गले से लगाया…..तो नज़ीबा ने भी नाज़िया को अपनी बाहों में कस लिया….नाज़िया भी उस वक़्त फुल गरम हो चुकी थी…उसने मुझे और नज़ीबा को अपने बाज़ुओं के घेरे मे ले लिया…जैसे ही मैने नाज़िया के गालों को चूमना शुरू किया…तो मुझे देख कर नज़ीबा ने फॉरन नाज़िया के गाल चूमते हुए उस को प्यार करना शुरू कर दिया...


नज़ीबा आहिस्ता आहिस्ता किस करते हुए गर्दन पर आइ फिर नाज़िया की चेस्ट को मुँह में ले लिया और उस को चूसने लगी...नाज़िया ने तड़प कर सिसकी की आवाज़ निकाली और मेरे फेस को अपने फेस के सामने ला कर मेरे होंठो पर अपने नर्म ओ नाज़ुक होन्ट रख दिए.

मैने पागल होते हुए नाज़िया के होंठों का जाम अपने होंठो से लगा लिया ...नाज़िया को आहिस्ता आहिस्ता बेड पर लेटा दिया….और पूरी शिदत से मेरे होन्ट चूसने लगी उधर नज़ीबा भी नाज़िया की चेस्ट को हाथों में ले कर चूस रही थी..

मेरा एक हाथ खुद ही नाज़िया के एक मम्मे पर चला गया जिस को नज़ीबा ने पहले ही पकड़ रखा था मैं नज़ीबा के हाथ के ऊपेर से ही मम्मा दबाने लगा… नाज़िया मज़े के नशे में डूबी हुई सिसकारियाँ भर रही थी….मैने नज़ीबा का हाथ पकड़ कर नाज़िया के मम्मे से नीचे करते हुए धीरे-2 नाज़िया के पेट की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….जैसे -2 नाज़िया नज़ीबा के हाथ को अपने पेट की तरफ नीचे जाता हुआ महसूस कर रही थी…वैसे -2 उसका जिस्म उसकी कमर रुक-2 कर झटके खा रहे थे….फिर जैसे ही नज़ीबा और मेरा हाथ नाज़िया की शलवार के नैफे से टकराया….तो मैने नज़ीबा के हाथ से अपना हाथ हटा कर नाज़िया की शलवार का नाडा पकड़ा और नज़ीबा की आँखो में देखते हुए धीरे-2 नाज़िया की शलवार का नाडा खोलना शुरू कर दिया….

नज़ीबा मदहोशी से भरी नज़रों से कभी मुझे और कभी नाज़िया की शलवार के नाडे को खुलता हुआ देख रही थी….जैसे ही नाज़िया का शलवार का नाडा खुला…मैं उठ कर बैठ गया….और नाज़िया की टाँगो को खोल कर उसकी टाँगो के दरम्यान आते हुए, उसकी शलवार को दोनो साइड से पकड़ कर जैसे ही नीचे करने लगा तो, नाज़िया ने मेरा हाथ पकड़ लिया….नही प्लीज़ इसे मत उतारो….” नाज़िया ने बिना आँखे खोले ही कहा…. 

“तुमने मुझे फुद्दि प्यार से देनी है या मार खा कर देनी है….” मैने नाज़िया की शलवार को नीचे की तरफ झटकते हुए कहा….पर नाज़िया ने अपनी शलवार को नही छोड़ा.. 

“जो करना है कर लो….पर प्लीज़ ये लाइट ऑफ कर दो….” नाज़िया ने सिसकते हुए कहा….

पर मैने नाज़िया की एक ना सुनी और नाज़िया की शलवार के साथ-2 नाज़िया की पैंटी की इलास्टिक को भी पकड़ कर ज़ोर से नीचे खेंचा…जैसे ही नाज़िया के हाथो से उसकी शलवार निकली मैने नाज़िया की शलवार और पैंटी को उतार कर साइड में रख दिया…मेरी नज़र नाज़िया की पैंटी पर पड़ी….जो उसकी फुद्दि वाली जगह से एक दम गीली थी….मैने नाज़िया की पैंटी को पकड़ा और नज़ीबा को दिखाते हुए कहा….”ये देखो तुम्हारी सौतन की फुद्दि कितना पानी छोड़ रही है….देखो लंड लेने के लिए कितनी बेकरार है…फिर भी नखडे कर रही है….” मैने नज़ीबा की तरफ पैंटी बढ़ाई…तो नज़ीबा ने शरमाते हुए नाज़िया की पैंटी को पकड़ कर जैसे देखना शुरू किया.. तो नाज़िया ने झपट्टा मार कर उसके हाथ से पैंटी छीन ली…

नाज़िया: नज़ीबा तुम भी बेशर्मी पर उतर आई हो….

नाज़िया ने पैंटी को बेड के दूसरी साइड पर फेंकते हुए कहा….तो मैने नज़ीबा की तरफ अपना हाथ बढ़ाया…तो नज़ीबा ने जैसे ही अपना हाथ मेरे हाथ में दिया… मैने नज़ीबा को अपनी तरफ खेंचा…नज़ीबा उठ कर घुटनो के बल बैठ गयी…मैने नज़ीबा को अपने आगे नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आने को कहा… जैसे ही नज़ीबा नाज़िया की टाँगो के दरम्यान आई…नाज़िया ने अपने सर के नीचे रखे हुए तकिये को उठा कर अपनी फुद्दि पर रख लिया…

.”नज़ीबा तुम्हारी सौतन तो बहुत शरमाती है….” मैने पीछे से अपने बाज़ुओं को आगे करते हुए, नज़ीबा के मम्मों को कमीज़ के ऊपेर से पकड़ते हुए कहा….और धीरे नज़ीबा के मम्मों को दबाने लगा….सामने लेटी नाज़िया हम दोनो को नशीली नज़रों से देख रही थी...

जैसे ही मेरी नज़रें नाज़िया की नज़रों से टकराती तो, नाज़िया अपनी नज़रें फेर लेती… “इसे उतारो….” मैने नाज़िया की तरफ देखते हुए नज़ीबा की कमीज़ को पकड़ कर उसे उतारने के लिए कहा…..तो नज़ीबा ने अपनी कमीज़ को पकड़ लिया....नज़ीबा भी उस वक़्त मदहोश हो चुकी थी…. उस ने फॉरन कमीज़ पकड़ कर ऊपेर करते हुए उतार दी... मैने उसकी ब्रा के हुक्स फॉरन ही खोल दिए…फिर उसने अपनी स्किन कलर की ब्रा को भी उतार दिया...फिर मैने नज़ीबा की शलवार का नाडा पकड़ कर खेंचा और नज़ीबा को खड़े होने के लिए कहा…जैसे ही नाज़िया की टाँगो के दरम्यान नज़ीबा खड़ी हुई, मैने उसकी शलवार के साथ-2 उसकी पैंटी को भी पकड़ कर नीचे खेंच दिया….
Reply
03-08-2019, 02:10 PM,
RE: Kamukta Story मेरा प्यार मेरी सौतेली मा�...
96

और नज़ीबा ने खुद अपने दोनो पैरो को बारी-2 ऊपेर उठाया और मैने उसकी शलवार और पैंटी को निकाल कर साइड मे रख दिया… जैसे ही मैने नज़ीबा को पूरी नंगी किया…वो फिर से नाज़िया की टाँगो के दरम्यान ठीक वैसे ही अंदाज़ मे बैठ गयी… जैसे मैं नाज़िया को चोदते हुए उसकी टाँगो के दरम्यान घुटनो के बल बैठता था….मैने फिरसे नज़ीबा के मम्मों को पीछे से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया….और उसके कानो के पास अपने होंटो को लेजा कर सरगोशी से भरी आवाज़ मे कहा.. “नज़ीबा मैं देखना चाहता हूँ कि तुम मुझसे कितना प्यार करती हो…इसलिए जब तक मैं अपने कपड़े उतारता हूँ….तब तक तुम मुझे नाज़िया से प्यार करके दिखाओ… कि तुम्हारे लिए मेरी हर बात की क्या अहमियत है…”

मैने तोड़ा सा पीछे होकर अपनी कमीज़ के बटन के खोलने शुरू किए… नज़ीबा ने एक बार फेस घुमा कर मेरी तरफ देखा…और फिर वो नाज़िया के ऊपेर झुक गयी… मैं जब तक कमीज़ उतार रहा था…. तब तक नज़ीबा ने नाज़िया के ऊपेर झुक कर अपने अपने होन्ट नाज़िया के होंठो पर रख दिए थे….पहले तो सिर्फ़ नज़ीबा ही किस कर रही थी….पर जैसे ही मैने नज़ीबा की टाँगो के नीचे से एक हाथ निकाल कर नाज़िया की फुद्दि के अंदर अपने दो उंगलियों को डाल कर अंदर बाहर करना शुरू किया…फिर दोनो ने ऐसे जोश से ऐक दूसरे को किस की कि मैं वो नज़ारा देख कर पागल होने लगा. 

मैं पास बैठ कर दोनो को देख रहा था... बिलाख़िर नाज़िया ने भी नज़ीबा का साथ देते हुए, अपने बाज़ुओं को नीचे लेटे लेटे नज़ीबा की गर्दन के गिर्द डाला और उसने नज़ीबा को अपने जिस्म के साथ लगा लिया….नज़ीबा की पूरी फ्रंट साइड नाज़िया के फ्रंट साइड से टच हो रही थी…पर नाज़िया ने अपनी फुद्दि के ऊपेर टिकाया रखा हुआ था….जिसकी वजह से नज़ीबा की फुद्दि नाज़िया की फुद्दि के साथ टच नही हो रही थी..कुछ देर बाद नज़ीबा ने नाज़िया के होंटो को छोड़ा और नाज़िया के एक मम्मे को मुँह मे डाल लिया...

और पूरे जोशो ख़रोश के साथ नाज़िया के मम्मे को चूसना शुरू कर दिया… नज़ीबा ने मेरी तरफ़ देखते हुए नाज़िया के दूसरे मम्मे को पकड़ कर दबाते हुए मुझे इशारा किया… तब तक मैं अपने सारे कपड़े उतार चुका था… नाज़िया की आँखे मस्ती में एक बार फिर से बंद हो चुकी थी….मैने फॉरन नाज़िया के ऊपेर झुक कर उस के दूसरे मम्मे को चूसना शुरू कर दिया...नाज़िया ने फिर से अपने हाथ हम दोनो क सिर पर रख दिए...फिर हाथों से सिर को दबा कर अपनी चेस्ट ऊपेर उठाने लगी. ..

नाज़िया बुरी तरह तड़प ने लगी...उस की हालत बिगड़ने लगी….और ऐसा होता भी क्यों ना उस के दोनो मम्मो को हमने मुँह मे जो डाला था उस का तो रोम रोम मज़े मे डूबा था…कुछ देर बाद नज़ीबा ने नाज़िया के मम्मे को मुँह से बाहर निकाला…और नाज़िया के जिस्म के हर हिस्से को चूमते हुए पेट की तरफ़ का सफ़र शुरू कर दिया.... नज़ीबा ने पेट पर नाफ़ के चारों तरफ़ ज़ुबान घुमा कर दोनो हाथों से नाज़िया की फुद्दि के ऊपेर रखे हुए तकिये को हटा कर साइड में कर दिया….जैसे ही तकिया हटा…मैने फॉरन नाज़िया की फुद्दि पर हाथ रख कर उसकी फुद्दि को रब करना शुरू कर दिया….

नाज़िया का जिस्म एक बार फिर से काँपने लगा…नज़ीबा एक बार फिर से नाज़िया के फेस के ऊपेर झुक गयी…नाज़िया ने अपनी आँखे खोल कर हवस से भरी नज़रों से नज़ीबा की तरफ देखा और इस बार नाज़िया ने फॉरन सिर उठा कर नज़ीबा के होंठों से होन्ट लगा दिए और पागलों की तरह किस करने लगी...नाज़िया ने हाथ मेरे सिर पर रख कर मुझे ऊपेर खींचा फिर मेरा मुँह भी नज़ीबा के होंठो से लगा दिया और हम तीनो ने अपने होन्ट ऐक दूसरे के होन्ट से जोड़ दिए...

कभी नाज़िया नज़ीबा के होंठ चूमती कभी मैं कभी हम तीनो के होंठ ऐक साथ जुड़ जाते...किस करते हुए नज़ीबा फॉरन नाज़िया के ऊपेर आइ. ..और नाज़िया के मम्मों को चूसने लगी...मैने नाज़िया के होंठो को सक करना शुरू कर दिया...नज़ीबा ने फिर आहिस्ता आहिस्ता पेट की तरफ़ जाना शुरू कर दिया. .. नज़ीबा फॉरन नाज़िया के ऊपर आइ और उस के मम्मे दबाने लगी...फिर नज़ीबा भी मेरे साथ नाज़िया के होंटो का रस पीने लगी...

नाज़िया ने आहिस्ता आहिस्ता अपनी टांगे खोल दी...नज़ीबा की फुद्दि नाज़िया की फुद्दि के साथ टच हुई …फिर जो नज़ीबा ने किया वो मंज़र देख कर तो मैं भी बे काबू होने लगा…दो दिन पहले मैने नज़ीबा को एक थ्रीसम वीडियो दिखा कर उसके जेहन में ये भर दिया था….ऐसा करने मैं बहुत मज़ा आएगा….और आज मुझे यकीन नही हो रहा था…कि दो दिन पहले जो नज़ीबा ने देख कर मुझसे वादा किया था…कि वो मुझे हर वो ख़ुसी देगी…जिसकी ख्वाहिश मेरे दिल में है….वो आज नज़ीबा सच में पूरी कर रही थी…नज़ीबा ने अपनी बुन्द को दबा कर नाज़िया की फुद्दि से फुद्दि रगड़नी शुरू कर दी...

नज़ीबा अपनी लचकीली कमर को ऐसी धीरे-2 हिला हिला कर नाज़िया की फुद्दि से फुद्दि को बड़ी महारत से रगड़ रही थी....जैसे उसकी कमर में कोई स्प्रिंग लगा हो…मैं ये सब देख कर और जोश में आ गया...दोनो को इस तरह देख कर मेरा तो बुरा हॉल होने लगा...मैने नाज़िया के होंटो से अपने होंटो को अलग किया…और उन दोनो के पीछे जाकर दोनो की टाँगो के दरम्यान बैठ गया…..फिर जो मंज़र मेरी आँखो के सामने आया… उसे देख कर मेरा लंड फूटने को आ गया…नाज़िया और नज़ीबा दोनो की फुद्दियो के लिप्स उनकी फुद्दि से निकल रहे लेसदार पानी से सारॉबार हो चुकी थी…दोनो की फुद्दिया एक दूसरे के साथ रगड़ खाती हुई फिसल रही थे…और दोनो की सिसकारियाँ पूरे रूम में गूँज रही थी….

मैने आगे बढ़ कर नज़ीबा की कमर को दोनो तरफ से पकड़ा और उसे नाज़िया के ऊपेर से नीचे उतारने लगा….तो नज़ीबा ने अपनी कमर हिलाना बंद कर दिया…. और पीछे फेस घुमा कर मेरी तरफ हवस और सेक्स म्न डूबी हुई आँखो से देखा और खुद ही नाज़िया के ऊपेर से उतर कर साइड पर बैठ गयी….नाज़िया का भी वही हाल था… उसकी आँखो में हवस के लाल डोरे तैर रहे थी… मैने आगे होते हुए नाज़िया की टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठाया….और अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के लिप्स के पास लेजा कर नज़ीबा की तरफ देखा…तो नज़ीबा फॉरन ही मेरा मकसद समझ गयी….

और फिर जैसे ही नज़ीबा ने आगे झुक कर अपने हाथों से नाज़िया की फुद्दि के लिप्स को खोला तो, नाज़िया एक दम से सिसक उठी…..”सीईईईई ओह्ह्ह्ह कुछ तो शरम कर लो….” 

नज़ीबा अपने साँसे थामे नाज़िया की फुद्दि को देख रही थी… नाज़िया की फुद्दि के लिप्स खुला देख कर मैने अपने लंड के कॅप को नाज़िया की फुद्दि के सूराख पर टिका दिया… जैसे ही नाज़िया को अपनी फुद्दि के सूराख कर मेरे लंड के गरम दहकते हुए कॅप का अहसास हुआ, नाज़िया ने अपने दोनो हाथों से अपने मम्मों कस्के पकड़ लिया…मैने अपनी कमर को पूरी ताक़त से आगे की तरफ पुश किया….. 

लंड फुद्दि के लिप्स को फेलाता हुआ अंदर घुस गया… नाज़िया के मुँह से घुटि हुई अहह निकल गइई… मैने आगे झुक कर नाज़िया के हाथों को उसके मम्मों से हटा दया और नाज़िया के थाइस को पकड़ कर धना धन शॉट लगाने लगा… और अपने एक हाथ को नीचे लेजा कर नाज़िया की कमर के पास बैठी नज़ीबा की फुद्दि में अपनी दो उंगलियों को डाल कर उंगली को अंदर बाहर करने लगा….जैसे ही मैने नज़ीबा की फुद्दि में अपनी उंगलियों को डाल कर अंदर बाहर करना शुरू किया…. नज़ीबा एक दम से सिसक उठी…..सीईईईईईईईई अहह अम्मी……” नज़ीबा के सिसकते ही मैने एक ज़ोर का झटका मारा…..तो लंड ठप की आवाज़ के साथ नाज़िया की फुद्दि में जड तक घुस गया..

नज़ीबा अपनी अध खुली नशीली आँखो से मेरे लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर होता देख कर सिसक रही थी….मैने नाज़िया की फुद्दि में अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए, नज़ीबा को आगे करके नाज़िया के ऊपेर झुका दिया….और नज़ीबा की एक टाँग उठा कर नाज़िया के ऊपेर से दूसरी तरफ रख दी… अब नज़ीबा नाज़िया के ऊपेर डॉगी स्टाइल मे आ गयी थी…. नीचे नाज़िया लेटी हुई थी नज़ीबा उसके ऊपेर दोनो तरफ पैर करके घुटनो के बल झुकी हुई थी….

नाज़िया: सीईइ हइईए समीर अहह माँ मुझे कुछ हो रहा है…..

मैने बिना कुछ बोले नाज़िया की फुद्दि से लंड निकाला और थोड़ा सा ऊपेर होकर नज़ीबा की फुद्दि पर अपने लंड के कॅप को नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर रगड़ने लगा… नाज़िया ने अपनी आँखें बंद की हुई थी…. उसे ये तो पता था कि नज़ीबा अब उसके ऊपेर है.. पर उसे पता नही था कि मैं अब क्या कर रहा हूँ…. नज़ीबा ने भी अपने फुद्दि पर मेरे लंड के कॅप की रगड़ को महसूस करते ही गरम अपनी बुन्द को पीछे की तरफ पुश करना शुरू कर दिया….

नज़ीबा; अहह ईए क्या कर रहे हूओ ओह आईसीए तो ना तड़पाओ…प्लीज़ फक मी… (नज़ीबा ने लगभग चिल्लाते हुए कहा…)

नज़ीबा को लंड के लिए इस क़दर तड़पता देख कर मैने भी जोश में आते हुए, एक ही झटके में नज़ीबा की फुद्दि में अपना पूरा का पूरा लंड घुसा दया… और नज़ीबा की कमर पकड़ कर अपने लंड को अंदर बाहर करके फुल स्पीड से चोदना शुरू कर दिया… नाज़िया ने अपनी आँखों को थोड़ा सा खोला और देखा नज़ीबा उसपर झुकी हुई थी… उसके 34 साइज़ के मम्मे आगे पीछे उसके चहरे के ऊपेर 1 इंच की दूरी पर हिल रहे थे….. नीचे मेरी थाइस नज़ीबा की बुन्द पर चोट कर रही थी…

नाज़िया अपनी बेटी को ऐसी हालत में देख कर गरम होने लगी…. उसने अपनी जिंदगी में सोचा भी नही होगा कि, वो ऐसे भी अपनी बेटी को इतने करीब से चुदवाते हुए देखे गी….मैने अपने दोनो हाथों को नज़ीबा के कंधों पर रख कर नज़ीबा को नाज़िया के ऊपेर झुकाना शुरू कर दिया…. नज़ीबा अपनी फुद्दि को अपनी रानो को खोल कर चुदवा रही थी…. नज़ीबा के मम्मे अब जब हिलते तो, नाज़िया के मम्मों पर रगड़ खाने लगते…. नज़ीबा के तने हुए निपल्स नाज़िया के निपल्स पर बार-2 रगड़ खा रहे थे… कुछ ही पलों में नज़ीबा के मम्मे…. नाज़िया के बड़े-2 मम्मों के ऊपेर दब गये….

नाज़िया बिना कुछ बोले अपनी आँखें बंद किए लेटी रही… मैने अपनी पूरी ताक़त से नज़ीबा की फुद्दि में लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदने लगा… नज़ीबा अहह ओह सीईईईईईईईईईईई करने लगी….. मैने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर नाज़िया की फुद्दि के दाने (क्लिट ) को अपनी उंगलियों से दबाना चालू कर दिया नाज़िया के जिस्म में मानो जैसे करेंट दौड़ गया हो….

नाज़िया:ओाहह उंह सीईईई हइईए मैं हाई मेरी फुद्दि….

अब नाज़िया भी पूरी गरम हो चुकी थी…. उसने भी मदहोश होकर नज़ीबा को अपनी बाहों में भर लिया….. मैने नज़ीबा की फुद्दि से लंड निकाला…. तो नज़ीबा की फुद्दि के पानी की कुछ बूंदे नाज़िया की फुद्दि के ऊपेर गिरी…. मैने नीचे होकर अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि पर टिका दिया और उसकी टाँगों को घुटनो से पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का दिया लंड नाज़िया की फुद्दि के अंदर चला गया….. \

मैं: ओह्ह्ह मेरी दोनो बीवियों को कैसा लग रहा है….

नाज़िया: ओह्ह्ह मैं आपको बता नही सकती…..कैसा लग रहा है…सीईईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह समीईर करो और जोर्र्र से करो…..मुझे रोज ऐसे ही प्यार किया करो…. आज तो चाहे मेरी फुद्दि सूजा ही दो…. मैने आज के बाद आपको कभी मना नही करना है…

मैं: क्यों नज़ीबा सुना तुम्हारी सौतन क्या कह रही है….

मैने अपने लंड को नाज़िया की फुद्दि के अंदर बाहर करते हुए, नज़ीबा की फुद्दि में अपनी उंगलियों को घुआ कर अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….. “हाआँ…..अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सुना……सीईईईईई अहह हाईए…” नज़ीबा का जवाब सुन कर मैने और ज़ोर से नाज़िया की फुद्दि मे घस्से लगाने शुरू कर दिए….

मैं: तुम्हे कोई एतराज तो नही….अगर मैं तुम्हारे साथ साथ नाज़िया की भी रोज लिया करूँ….

नज़ीबा: अहह नहियीईईईई बाज़ी और मैं आपको हमेशा खुश रखेंगे….बोलो ना बाजी आप समीर को खुश रखने में मेरा साथ दोगी ना…..

नाज़िया: हान्णन्न् मेरी जान….आप दोनो तो मेरी जान हो….आप दोनो के लिए कुछ भी…

मैने धना धन शॉट लगा कर नाज़िया की फुद्दि को चोदे जा रहा था….नाज़िया मस्ती से भर चुकी थी…. नज़ीबा भी अपनी नाज़िया के साथ चिपकी हुई थी …. दोनो की साँसें एक दम तेज चल रही थी… मैने नज़ीबा के कंधों को पकड़ कर सीधा किया और उसके कान में बोला…

मैं: नाज़िया के मम्मों को चूसो….

और नज़ीबा फिर से नाज़िया पर झुक गयी और नाज़िया के मम्मे को मुँह मे ले लिया नाज़िया की फुद्दि का ज्वाला मुखी अब फटने को तैयार था….नाज़िया ने भी अपनी कमर को हिलाते हुए अपनी बूँद को ऊपेर की तरफ उठाना शुरू कर दिया… रूम मे थप-2 की आवाज़ पूरे रूम में गूंजने लगी और नाज़िया का जिस्म झटके खाने लगा और उसकी फुद्दि ने पानी छोड़ दिया…. फिर नाज़िया का जिस्म एक दम से ढीला पड़ गया…. मैने नाज़िया की फुद्दि से लंड निकाल कर नज़ीबा की फुद्दि के सूराख पर सेट किया और नज़ीबा की बूंद को पकड़ कर पीछे की ओर खींचने लगा लंड फुद्दि की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस गया….. 

और फिर मैं नज़ीबा की बुन्द को पकड़ कर आगे पीछे करने लगा और कुछ देर बाद मैने नज़ीबा की बुन्द से अपने हाथ हटा लिया… नज़ीबा ने आगे की तरफ झुक कर पीछे अपनी बुन्द को ऊपेर उठा लिया… जिससे उसकी फुद्दि ऊपेर की तरफ हो गयी और वो अपनी बुन्द पीछे धकेल धकेल कर मेरे लंड को अपनी फुद्दि मे लेने लगी…

मैं: और तेज करो….. मेरी जान…..

नज़ीबा ने भी पूरे जोश में आकर अपनी बुन्द को पीछे की तरफ धकेलना चालू कर दिया….मेरा लंड अब और तेज़ी से नज़ीबा की फुद्दि के अंदर बाहर होने लगा…

नज़ीबा;अहह ओह सीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई मैईईईईईन्न्नननननननणणन् ओह 

और नज़ीबा की फुद्दि ने भी पानी उगलना चालू कर दिया और वो नाज़िया के मम्मों पर गिर पड़ी….मैने नज़ीबा की कमर को अपने हाथों से पकड़ लिया और तबडतोड़ धक्के लगाने चालू कर दिए…. फिर जैसे ही मुझे अहसास हुआ कि, मैं भी फारिघ् होने वाला हूँ….. मैने नज़ीबा की फुद्दि से लंड को बाहर निकाल लिया और अपने लंड को हाथ से दो तीन बार ही हिलाया था कि, लंड से पानी की पिचकारियाँ निकलने लगी और सीधा नज़ीबा की फुद्दि के ऊपेर जाकर गिरने लगी… एक के बाद एक मेरे लंड से चार बार रुक रुक कर पिचकरी छूटी और नज़ीबा की फुद्दि को भीगो दिया…. 

नज़ीबा की फुद्दि से मेरा लेसदार पानी बह कर नाज़िया की फुद्दि पर गिरने लगा…. दोनो की फुद्दियाँ मेरे लंड से निकले काम रस से भीग चुकी थी…. दोनो को अपनी फुद्दि पर गरम लेसदार पानी का अहसास हो रहा था…और उस मज़े के अहसास को महसूस करके दोनो का जिस्म रह रह कर झटके खा रहा था…. मैं थक कर पीछे की तरफ लेट गया.. फिर हम तीनो बारी-2 जाकर बाथरूम में फ्रेश हुए और फिर से बेड पर आ गये…. उस रात हम तीनो मैं से कोई भी नही सोया…नाज़िया और नज़ीबा की शरमो हया में कोई कमी नही आई थी….

इसलिए वो सेक्स के दौरान झिझक रही थी…और दोस्तो यही झिझक मुझे वो लुफ्त देती थी… जिसके बारे मे मैं कभी सपनो में सोचता था….जिसके बारे मे मैने खुली आँखो से नज़ाने कितनी बार सपने देख लिए थे…आज मेरी खुली आँखो के वो सपने पूरे हो चुके थे….

एंड.

समाप्त
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Star Hindi Kamuk Kahani वो शाम कुछ अजीब थी sexstories 334 62,326 07-20-2019, 09:05 PM
Last Post: sexstories
Star Desi Porn Kahani कहीं वो सब सपना तो नही sexstories 487 223,760 07-16-2019, 11:36 AM
Last Post: sexstories
  Nangi Sex Kahani एक अनोखा बंधन sexstories 101 203,613 07-10-2019, 06:53 PM
Last Post: akp
Lightbulb Sex Hindi Kahani रेशमा - मेरी पड़ोसन sexstories 54 47,623 07-05-2019, 01:24 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna kahani वक्त का तमाशा sexstories 277 99,234 07-03-2019, 04:18 PM
Last Post: sexstories
Star vasna story इंसान या भूखे भेड़िए sexstories 232 74,139 07-01-2019, 03:19 PM
Last Post: sexstories
Thumbs Up Incest Kahani दीवानगी sexstories 40 53,084 06-28-2019, 01:36 PM
Last Post: sexstories
Lightbulb Bhabhi ki Chudai कमीना देवर sexstories 47 68,359 06-28-2019, 01:06 PM
Last Post: sexstories
Star Maa Sex Kahani हाए मम्मी मेरी लुल्ली sexstories 65 64,941 06-26-2019, 02:03 PM
Last Post: sexstories
Star Adult Kahani छोटी सी भूल की बड़ी सज़ा sexstories 45 51,880 06-25-2019, 12:17 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 11 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


mere gandu beta sexy desi kahani commaa ne saree pehnke choda sex storieswww.भाई ने अपनी बहन को बोला की तुम आवाज मत करना मै जब तेरी चुत मे लंड डालू तब सैक्स विडीयों गाँव का सैक्स विडीयों. com कलेज कि लरकिया पैसा देकर अपनी आग बुझाती बौबा जम्प सैक्स वीडीयौMain Aur Mera Gaon aur mera Parivar ki sexy chudaibudhi maa aur samdhi ji xxxtoral rasputra faked photo in sexbabaDidi ki gand k andr angur dal kr khayeऐक इंडियन लड़की के चूत के बाल बोहुत सारे सेक्स विडियों xxxXxx new kahani 2019 teacher ko chodaचूत पर कहानीchhodate chhodate milk girne lage xx videosarojaaa (a) muviemeri chudai majoboori main hui javan ladke sebhai ka hallabi lund ghusa meri kamsin kunwari chut mainmummy okhali me moosal chudai petticoat bursil tutti khoon "niklti" hui xxx vedioRukmini mitra fuck pussy sex wallpaper. In भाई मेरी गुलाबी बुर को चाट चाटकर लाल कर दियाwww.desi didi ki jabar jasti sex story.comraja paraom aunty puck videsindan ladki chudaikarvai comఅమ్మ నల్ల గుద్దचाची को दबोच , मेने उनकी गांड , लंडbete ka lund ke baal shave kiyamarathi sex kathaRaste m gand marne ke kahanyaChudaiki rasbhara manmohak kahaniyagame boor mere akh se dikhe boor pelanevalaXxx चुचिकाmein kapro mein tatti ki or khayi sex storyxxxxbf boor me se pani nikal de ab sexxpuri nanga stej dansh nanga bubs hilatimahila ne karavaya mandere me sexey video.amma bra size chusanu xxnxsotesamayhindiactresssexbabasaree uthte girte chutadon hindi porn storiesxxx kahania familyhospitol lo nidralo nurse to sex storyबोल्ड माँ को उसके स्कूल दोस्त से चुड़ते हुआ पापा ने देखा सेक्स स्टोरीRu girl naked familnanand nandoi bra chadhi chut lund chudai vdoAbitha fake nudechuchi dabakar pel denge bur me land apna gali wala sexy stori hindiSister Ki Bra Panty Mein Muth Mar Kar Giraya hot storyLadka ladki ki jawani sambhalta huapukulo vellu hd pornमस्तराम झाँट निकलने वाला बुर चुदाई कहानीYes mother ahh site:mupsaharovo.ruXxx vide sabse pahale kisame land dalajata haiSoya ledij ke Chupke Se Dekhne Wala sexmuh me hagane vala sexy and bfWidhava.aunty.sexkathaChudva chud vake randi band gai mesaumya tandon fucking nude sex babasex baba incest storiesme mere fimly aur mera gawoबड़ी झाट न्यूड गर्लmast chuchi 89sexrandi maa ke karname sex storiessexbaba maa ki samuhik chudayiXXXWWWTaarak Mehta Ka veerye peeneki xnxतेर नाआआआxxxwww xnxxwww sexy stetasma ke kehene par bur me pani girayaindian actress mallika sherawat nangi nude big boobs sex baba photoXxx vide sabse pahale kisame land dalajata haiसगी चोदन को कली से फुल बनाया बडे लंडसेGanda sex kiyanude storySaxy hot kajli kuvari ki chudai comजैकलीन Sexy phntos नगाDehati aunty apni jibh Nikal mere muh me yum sex storiesबीटा ne barsath मुझे choda smuder किनारे हिंदी sexstoryxxnx छह अंगूठे वीडियोMamma ko phasa k chuadaभोली - भाली विधवा और पंडितजी antarvasnaBahen sexxxxx ful hindi vdoMaa ne bahan ko mujhse suhagraat manwane ko majbur kiya sex storiesmummy ki rasili chut,bra, salwar or betaसोते समय लडकी की चुची लडका पकडता है फोटोnewsexstory com hindi sex stories E0 A4 85 E0 A4 82 E0 A4 A7 E0 A5 87 E0 A4 B0 E0 A5 87 E0 A4 95 E0sister ki dithani ke sath chudai ki kahaniशादी बनके क्सक्सक्सबफMummy ko dulahan bana kr choodaChuchi pi karsex