Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
10-11-2019, 01:13 PM,
#1
Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
दोहरी ज़िंदगी

एक नयी कहानी आरएसएस के आप सब पाठको के साथ शेयर कर रही हूँ! मैं पहले ही साफ़ कर देती हूँ की मैं इस कहानी का लेखक नहीं हूँ! तबस्सुम अख्तर जी इस कहानी की लेखिका हैं और उनकी लिखी इस उर्दू-हिंदी की कहानी को मैंने केवल अंग्रेजी फॉण्ट से हिंदी फॉण्ट मे परिवर्तित किया है| आशा हैं आप सबको पसंद आयेगी|

करीब तीन साल पहले मैं अठाइस साल की ही थी जब मेरे शौहर की सड़क हादसे में मौत हो गयी। तब हम दिल्ली में रहते थे। उसके दो-तीन महीने बाद दिल्ली का मकान किराये पे दे कर मैं मेरठ से थोड़ी दूर अपने पेरन्ट्स के साथ आकर रहने लगी। मैं अच्छे खानदान से हूँ और पैसे की कोई कमी नहीं है। मेरे वालिद की शुगर-मिल है और वो मुक़ामी पॉलिटिशन भी हैं। मैं शुरू से ही ऐशो-आराम में पली बड़ी हुई हूँ... बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी और फिर दिल्ली के नामी कॉलेज से बी-ए और फिर बी-एड किया था। आज़ाद ख्यालात की की होने के बावजूद मैं काफी अच्छे इखलाक़ वाली तहज़ीब यफ़ता और परहेज़गार थी।

अपने पेरन्ट्स के यहाँ आकर मैंने वक़्त गुज़ारने के लिये अलीगढ़ युनिवर्सिटी से कॉरस्पान्डन्स से इंगलिश में एम-ए करना शुरू किया। मुझे यहाँ आये हुए दो-तीन महीने ही हुए थे कि मेरे अब्बा के एक दोस्त ने उनके स्कूल में इंगलिश पढ़ाने की ऑफर दी। मेरठ के पास उनका एक बड़ा प्राइवेट स्कूल था। ये स्कूल बारहवीं क्लास तक था और मैं कम क्वालिफिकेशन होने पर भी बारहवीं क्लास तक इंगलिश पढ़ाने लगी। इसकी दो वजह थी। एक तो मैं शुरू से ही इंगलिश मीडियम में पढ़ी थी और बी-ए भी इंगलिश में ही किया था। दूसरी ये कि स्कूल भी मेरे अब्बा के दोस्त का था और उन्हें कोई और काबिल टीचर मिल भी नहीं रहा था।

स्कूल में तमाम स्टाफ़ को मालूम था कि मैं स्कूल के मालिक के करीबी पहचान की हूँ और मुक़ामी पॉलिटिशन की बेटी हूँ... जिस वजह से स्कूल में मेरा काफ़ी रुतबा था। मैं बहुत ही स्ट्रिक्ट टीचर थी और स्कूल के ज्यादा बिगड़े हुए और नालायक काम-चोर लड़कों की पिटायी भी कर देती थी। इसलिये सब स्टूडेंट्स मुझसे डरते थे। कुछ ही हफ़्तों में मैं स्कूल की डिसप्लिन इंचार्ज और स्टूडेंट काउन्सलर भी बन गयी थी और मुझे अपना छोटा सा ऑफ़िस भी मिल गया था। प्रिंसपल मैडम स्कूल के तमाम इंतेज़ामी मुआमलातों में भी मुझे शामिल करने लगीं ।

स्कूल मेरे घर से करीब पच्चीस किलोमिटर था। शुरू में दो-तीन हफ़्ते मैं खुद कार ड्राइव करके जाती थी लेकिन फिर मैं स्कूल की बस से ही जाने लगी। हमारे रूट की स्कूल की बस हमेशा खचाखच भरी होती थी लेकिन टीचरों को और छोटे बच्चों को हमेशा बैठने की जगह मिलती थी और बड़े स्टूडेंट्स खड़े होकर जाते थे।

सब कुछ बखूबी चल रहा था। पर एक दिन छुट्टी के बाद घर जाते वक़्त मैंने देखा कि बारहवीं क्लॉस की एक लड़की रोने जैसा चेहरा लिये हुए बस से उतरी और उसकी सहेली उसके कान में कह रही थी, "सुहाना तू घबरा मत... कल हम इंगलिश वाली तबस्सुम मैम से बात करेंगे... वो उन्हें अच्छा सबक सिखायेंगी!" मुझे बात कुछ समझ में नहीं आयी लेकिन मैंने सोचा कि अगले दिन जब ये मुझसे बात करेंगी तब खुद-ब-खुद पता चल जायेगा। स्कूल की सभी बड़ी लड़कियाँ कभी-कभी अकेले में अपने कईं मसले अक्सर मेरे साथ डिस्कस करती थीं। इसकी वजह शायद ये थी कि बाकी टीचरों के मुकाबले मैं काफी यंग थी। बारहवीं क्लॉस की लड़के-लड़कियों से तो उम्र में मैं सिर्फ़ दस-ग्यारह साल ही बड़ी थी। इसके अलवा बारहवीं के कुछ चार-पाँच लड़कों और दो-तीन लड़कियों से तो मैं सिर्फ़ आठ-नौ साल ही बड़ी थी क्योंकि वो पहले किसी ना किसी क्लॉस में कमज़-कम दो-दो दफ़ा फेल हो चुके थे।

खैर अगले दिन मैं जब स्कूल पहुँची तो मैं इंतज़ार कर रही थी कि कब वो लड़कियाँ आ कर मुझे अपना मसला बतायें और मैं उसे हल कर सकूँ। वैसे वो दोनों लड़्कियाँ भी उन फेल होने वाले लडके-लड़कियों में से एक थीं और स्कूल की सबसे बड़ी लड़कियाँ थीं। उनकी उम्र करीब बीस-इक्कीस साल होगी। एक दिन बीता... दो दिन बीते, फिर पूरा हफ़्ता बीत गया पर उन्होंने मुझसे कोई बात नहीं की और मैं भी उसे भूल गयी। फिर एक दिन अचानक उसी दिन की तरह वो लड़की इस दफ़ा रोते हुए बस से उतरी। बल्कि बाकी टीचरें भी उसकी सहेलियों से पूछने लगी कि इसे क्या हुआ। इस पर उसकी सहेली ने कहा, "मैम इसका सर बहुत ज़ोर से दर्द कर रहा है!"
Reply
10-11-2019, 01:13 PM,
#2
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
उन टीचरों के लिये बात वहीं दब गयी लेकिन मुझे इस बात पर यकीन नहीं हुआ क्योंकि दोनों काफी दबंग किस्म की लड़कियाँ थीं थीं और इतनी ज़रा सी बात पे रोने वाली लड़कियाँ नहीं थीं। इसलिये मैंने अगले दिन खुद सुहाना और उसकी सहेली फ़ातिमा को खाली पीरियड में अपने कमरे में बुलाया और उससे पूछा कि प्रॉब्लम क्या है। वो बोली, "कुछ नहीं तबस़्सुम मैम... सब ठीक है!"

"मुझसे झूठ मत बोलो", मैंने कहा, "उस दिन भी मैंने तुम्हें इसी तरह बस से रोते हुए उतरते देखा था और फ़ातिमा तुम्हें कह रही थी कि हम कल तबस़्सुम़ मैम को ये बात बतायेंगे और वो उनकी खबर लेंगी! मुझसे छुपाओ मत और खुल के बताओ कि प्रॉब्लम क्या है?"

इस पर सुहाना फूट-फूट कर रोने लगी। तब फ़ातिमा बोली, "त़बस्सुम मैम मैं आपको बताती हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। आप तो जानती हैं कि हमारी बस में कितनी भीड़ होती है और हमें पीछे खड़े हो कर जाना पड़ता है!"

"हाँ! हाँ!" मैंने कहा।

"तो मैम प्रॉब्लम ये है कि पिछले एक महीने से वो हमारी क्लॉस के मुस्टंडे... वो बास्केटबॉल प्लेयर्स... वो फेल्यर्स... हमें बस में रोज़ तंग करते हैं। हम लड़कियों का उन्होंने बस में सफ़र करना मुश्किल कर दिया है! कभी तो वो हमारे लोअर बैक में उंगली डालते हैं तो कभी हमारी ब्रेस्ट पर चुँटी काटते हैं! कल तो उन्होंने हद ही कर दी। कल उन चारों ने हमें कस कर पीछे से पकड़ लिया और ज़ोर से हमारी ब्रेस्ट्स मसल दी!" वो बोली।

"क्या उनकी ये हिम्मत! मैं आज ही उनकी शिकायत प्रिंसपल से करती हूँ और खुद भी उनकी अच्छी पिटाई करुँगी... और ये सब तुमने पहले क्यों नहीं बताया... और बाकी लड़कियों ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?" मैं बोली।

"नहीं-नहीं त़बस्सुम मैम... आप प्लीज़ ये बात किसी से ना कहियेगा वरना सब हम पर हसेंगे और हमारी स्कूल में बदनामी होगी और मज़ाक बनेगा। आप चाहें तो उनकी पिटाई कर दीजिये पर ये बात आप उनसे भी ना कहियेगा कि हमने बताया है वरना वो हमें और तंग करेंगे या फिर बदनाम करेंगे!" वो बोली।

"ठीक है, मैं देख लूँगी!" मैंने कहा। उस दिन उस क्लॉस में जाते ही मैंने उन चारों को खड़ा कर लिया और बिना कुछ बताये उनको जमकर थप्पड़ लगाये कि मेरे हाथ दुखने लगे और उनके गालों पर मेरे थप्पड़ों की वजह से निशान पड़ गये। जब उन्होंने पूछा कि "अख़तर मैम आप हमें क्यों मार रही हैं?" तो मैंने कहा, "तुम्हें बस में सफ़र करने की तमीज़ सिखा रही हूँ!" और वो चारों सिर झुका कर खड़े हो गये।

उस वाकिये के बाद कुछ दिन तक सब ठीक रहा, लेकिन एक दिन फिर वो लड़कियाँ मेरे पास आयी तो मैंने उनसे पूछा, "अब क्या हुआ... अब तुम किस बात पर परेशान हो? क्या वो तुम्हें अभी भी तंग करते हैं?"

इस पर वो मुझे बोलीं, "त़बस्सूम मैम आपने जब उनकी पिटाई की थी तो कुछ दिन तक सब ठीक रहा लेकिन पिछले दो दिन से वो फिर से हमें तंग कर रहे हैं!"

"लगता है अब प्रिंसपल से बात करनी ही पड़ेगी।" मैं बोली।

"प्लीज़ प्लीज़ तबस्सुम मैम आप प्रिंसपल से कुछ मत कहियेगा... ये बात अगर फ़ैल गयी तो हमारा मज़ाक उड़ेगा! हमारा स्कूल आना मुश्किल हो जायेगा!" वो गिड़गिड़ायीं।

"तो ठीक है... आज मैं तुम लोगों के साथ बस में खड़ी रहुँगी। अगर उन्होंने कुछ किया तो में उनकी वहीं पिटाई करूँगी!" मैंने गुस्से में तमतमाते हुए कहा।

उस दिन मैंने क्लॉस में फिर उन चारों की पढ़ाई और होमवर्क ना करने के बहाने से पिटाई की और छुट्टी के बाद बस में लड़कियों के साथ पीछे खड़ी हो गयी। जब मेरी साथी टीचरों ने पूछा तो मैंने कहा कि मैं स्टूडेंट्स के साथ मिक्स-अप होने की कोशिश कर रही हूँ ताकि ये मुझसे इतना ज़्यादा ना डरें। उस दिन सब ठीक रहा। मैं उनके साथ तीन-चार दिन बस में खड़े हो कर सफ़र करती रही। वो चार बदमाश हमारे पीछे ही खड़े रहते थे लेकिन उनमें से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि कुछ कर सकें। फिर कुछ दिन बाद मैं फिर आगे बैठने लगी। दो ही दिन बाद वो लड़कियाँ फिर मेरे पास वही शिकायत ले कर आ गयीं। उस दिन मैं फिर पीछे खड़ी हो कर सफ़र करने लगी।

दो-एक दिन तक सब ठीक था लेकिन फिर एक दिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई चीज़ मेरे पीछे मेरे चूतड़ों के बीच घुसा दी हो। मैं एक दम काँप गयी। मेरा पूरा जिस्म ठंडा पड़ गया। मेरे शौहर को गुज़रे हुए सात-आठ महीने हुए थे और इस दौरान मैंने अपनी जिस्मनी ख्वाहिशों को बिल्कुल दबा कर रखा था। कभी-कभार रात को अपनी उंगलियों से अगर खुद-लज़्ज़ती कर भी लेती थी तो तसव्वुर हमेशा अपने मरहूम शौहर का ही होता था। मैं बेहद पाक और नेक तरबियत वाली औरत थी। वैसे तो मैं गोरी-चिट्टी बेहद खूबसूरत और स्लिम और सैक्सी हूँ और अपने शौहर के साथ बेहद एक्टिव और अच्छी सैक्स लाईफ़ थी मेरी। लेकिन मेरे शौहर के अलावा किसी गैर-मर्द ने मुझे कभी छुआ तक नहीं था और ना ही मैंने कभी उनके अलावा किसी को ऐसी नज़र से देखा था।
Reply
10-11-2019, 01:13 PM,
#3
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
लेकिन उस पल मुझे जैसे बिजली का झटका लगा। इतने महीनों में पहली मर्तबा मैंने किसी को अपने जिस्म के एक नाज़ुक हिस्से के अंदर शरारत करते हुए महसूस किया था। मेरी टाँगें कमज़ोर हो गयीं और हाई हील सैंडल में मेरा बैलेंस बिगड़ने लगा। एक लम्हे के लिये मेरे होश उड़ गये... चेहरे का रंग एक दम फ़ीका पड़ गया... गला सूख गया... मैं लड़खड़ा कर गिरने लगी लेकिन फिर बस की सीट पर लगे हैंडल को पकड़ कर अपने आप को संभाला। मेरे हाथ काँप रहे थे। उन लड़कियों ने पूछा, "तवस्सुम मैम आप ठीक तो हैं?"

"हाँ मैं ठीक हूँ", मैंने कहा लेकिन मेरे चेहरे के उतरे रंग को देख कर मेरी साथी टीचरों ने जब यही सवाल मुझसे पूछा तो मैंने कहा कि शायद मुझे बुखार हो रहा है। उस दिन रात को देर तक मुझे नींद नहीं आयी। पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों के बीच वो चीज़ सरकती महसूस होती रही। उस एहसास ने मेरे अंदर दबी हुई चिंगारी को जैसे हवा दे दी थी। मैंने उस रात करीब तीन मर्तबा अपनी उंगलियों से मैस्टरबेशन किया। मैं अगले दो दिन स्कूल भी नहीं गयी और बिमार होने का बहाना कर दिया।

जिस दिन मैं स्कूल गयी भी तो उस दिन बस में मैं आगे अपनी सीट पर जा कर चुपचाप बैठ गयी। वो लड़कियाँ उतरे से चेहरे के साथ मेरी जानिब देखती रही। मुझे टीचरों ने भी पूछा, "आज आपने स्टूडेंट्स के साथ खड़े नहीं होना क्या? क्या बात है? सब ठीक तो है ना तब्बू मैम?" सब टीचर्स मुझे त़ब्बू कह कर बुलाती थीं।

"सब ठीक है... बस थोड़ी वीकनेस लग रही है", मैंने बहाना किया। अगले दिन वो लड़कियाँ फिर मेरे पास आयी और मुझसे बोली, "तबस्सुम मैम आपको क्या हुआ? मैम जब आप हमारे साथ खड़ी नहीं होती हैं तो वो लोग हमें फिर तंग करना शुरू कर देते हैं! मैम आप प्लीज़ हमारे साथ पीछे खड़ी हो जाया कीजिये... प्लीज़!"

मैंने कहा, "अच्छा ठीक है!" और वो चली गयी लेकिन मैं पूरा दिन टेंशन में रही और उस दिन का वाक़या याद करती रही। छुट्टी के बाद किसी तरह हिम्मत जुटा कर मैं पीछे जा कर खड़ी हो गयी। तकरीबन पूरा सफ़र आराम से कट गया और मैं भी इत्मिनान से हो गयी थी लेकिन मेरा स्टॉप आने से तीन-चार मिनट पहले ही किसी ने फिर पीछे से मेरे चूतड़ों में हाथ दे दिया और इस दफ़ा अच्छी तरह एक झटके में मेरे चूतड़ों के बीचों-बीच नीचे से सरकाते हुए ऊपर तक ले गया। मैं एक दम से पीछे पलटी तो सभी लड़के इधर-उधर देख रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि ये किसने किया है। सुहाना और फ़ातिमा भी मेरे साथ ही खड़ी थीं। उन्होंने पूछा, "तब़स्सुम़ मैम सब ठीक है ना?" उन लड़कियों के पूछने के अंदाज़ में मुझे फ़िक्र की बजाय तंज़ महसूस हुआ और ऐसा लगा जैसे कि उन्हें पता था कि मेरे साथ किसी ने क्या हरकत की है। "हाँ!" मैंने जवाब दिया।

उस रात भी मैं ठीक से सो नहीं पायी। आज भी उन लड़कों की हरकत ने मेरे अंदर दबी हुई जिस्मानी हसरतें भड़का दी थी जो मैं बिल्कुल नहीं चाहती थी। ये मेरे तहज़िबे-इख्लाक़ के खिलाफ़ था लेकिन अपने जिस्म में उठती मीठी सी सनसनाहट मुझे कमज़ोर कर रही थी। अपनी अजीब सी जिस्मानी और ज़हनी हालत के लिये मुझे उन लड़कों पे बेहद गुस्सा आ रहा था। अगले दिन क्लॉस में जाते ही मैंने जानबूझ कर उन चारों से इंगलिश के ऐसे मुश्किल सवाल पूछे जिनका मुझे पता था कि वो नालायक जवाब नहीं दे सकेंगे और इस बहाने से उनकी खूब पिटाई की। उस दिन शाम को बस में चढ़ते ही जब लड़कियों ने मुझे पीछे बुलाया तो मैं कॉन्फिडेंस के साथ उन लड़कों को घूरती हुई पीछे जा कर खड़ी हो गयी। अब इतनी पिटाई होने के बाद भला वो क्यों नहीं सुधरेंगे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही किसी ने मेरे चूतड़ों में फिर हाथ दे दिया। जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो इस बार चारों ने मेरी आँखों में देखा और मुस्कुरा पड़े। मैं आगे देखने लगी।

उन चारों में से दो लड़कों की उम्र तो करीब बीस साल होगी और चारों थे भी हट्टे-कट्टे। मेरी हाइट पाँच फुट पाँच इंच है और ऊपर से मैं हमेशा चार से पाँच इंच ऊँची पेन्सिल हाई हील की सैंडल ही पहनती हूँ तो भी मैं उनमें से सबसे बिगड़े लड़के कुल्दीप के कंधे तक ही पहुँचती थी जबकी सैंडल पहन के बाकी तीनों के करीब-करीब बराबर पहुँचती थी।

खैर कुछ पल बाद उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों में हाथ दिया तो इस दफ़ा मैं थोड़ा सरक कर आगे हो गयी। उन्होंने फिर मेरे चूतड़ों हाथ दिया तो मैं थोड़ा और आगे सरक गयी। ऐसा चार-पाँच दफ़ा हुआ। आज भी पूरी रात मुझे अपने चूतड़ों में उनके हाथ ही महसूस होते रहे और मैंने तीन-चार मर्तबा मैस्टरबेट किया। मुझे बेहद शर्मिंदगी और गुनाह का एहसास हो रहा था। फ्रस्ट्रेशन और गुस्से में अगले दिन मैंने फिर किसी बहाने से उनकी पिटाई कर दी और क्लास के बाहर खड़ा कर दिया। शाम को बस में उस दिन उन्होंने मुझे छुआ भी नहीं।
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#4
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
मैं बहुत खुश थी लेकिन तीन दिन बाद ही फिर बस में उन्होंने अचानक मेरी गाँड में हाथ डाला तो मैं चिहुँक कर झटके से थोड़ा आगे सरक गयी जिस से बस के मटैलिक फर्श पे मेरे हील वाले सैंडल के ज़ोर से बजने की आवाज़ भी हुई। हर रोज़ की तरह सुह़ाना और फ़ातिमा बारहवी क्लास की कुछ और लड़कियों के साथ मेरे पास ही खड़ी थी। फ़ातिमा ने मुस्कुराते हुए पूछा कि मुझे क्या हुआ तो मैंने कहा कि "कुछ नहीं... बस खड़े-खड़े पैर सो गया था!" लेकिन अब मुझे गुस्सा आ गया था और मैंने ठान लिया कि अबकी बार मैं आगे नहीं सरकुँगी और देखती हूँ इनमें कितनी हिम्मत है। आखिर कब तक ये ऐसे ही उंगली देते रहेंगे। इस मर्तबा जब फिर से मेरे चूतड़ों में किसी ने हाथ दिया तो मैं वहाँ से नहीं हिली। उसने दो-तीन दफ़ा फिर हाथ दिया तो भी मैं नहीं हिली। इस बार उसने हाथ मेरे चूतड़ों के बीच डाल कर वहाँ टिका कर ही रख लिया। मैंने भी अपनी रानें जोड़ कर चूतड़ों के बीच उसके हाथ को दबा लिया। कुछ देर तक ना वो हिला और ना मैं। जब मैंने गर्दन घुमा कर पीछे देखा तो उनमें से सब से ज्यादा बिगड़ा लड़का मेरे पीछे खड़ा था। मेरे पीछे गर्दन घुमाने पर भी उसने हाथ नहीं हटाया बल्कि उसे मेरी टाँगों के बीच सरकाता हुआ आगे मेरी चूत तक ले गया और सलवार के ऊपर से उसे मसलने लगा। मेरे चेहरे का रंग उड़ गया। मेरी तो हालत खराब हो गयी और मेरी टाँगें काँपने लगीं। मेरी आँखें बंद हो गयीं और मेरे पेट में बल सा पड़ा और मेरी चूत ने धड़धड़ाते हुए पानी छोड़ दिया। बड़ी मुश्किल से अपने होंठ दबाते हुए मैंने अपने मुँह से सिसकारियाँ निकलने से रोकीं। पहली मर्तबा इस तरह मैं पब्लिक प्लेस में झड़ी थी और वो भी स्टूडेंट्स से भरी हुई बस में। सच कहुँ तो मुझे बेहद अच्छा लगा और मेरे चेहरे का रंग तो ठीक हो गया लेकिन मेरी चूत ने इतना पानी छोड़ा था कि मेरी रानों के गिर्द सलवार बिल्कुल गीली हो गयी थी।

घर पहुँच कर बार-बार बस का सीन मेरे ज़हन में घूमता रहा। रात को बेडरूम लॉक करके मैं सारे कपड़े उतार के बिल्कुल नंगी हो गयी और वही सीन याद करते हुए दो दफ़ा अपनी चूत को उंगलियों से सहलाते हुए झड़ी। फिर भी जब चैन नहीं पड़ा तो ज़िंदगी में पहली दफ़ा गाजर चूत में घुसेड़ कर मैस्टरबेट किया। इससे पहले सिर्फ़ उंगलियों से ही मैस्टरबेट किया था। बाद में ऐसे ही नंगी सो गयी लेकिन ख्वाब में भी मुझे वही बस में उस लड़के का बार-बार मेरी चूत और गाँड को रगड़ना और सहलाना ही याद आया और मैं सोते हुए भी अपनी चूत सहलाती रही। सुबह जब उठी तो मेरे हाथ टाँगों के बीच में चूत पे ही मौजूद थे।

अगले दिन क्लास में जब वो लड़के फिर से होमवर्क करके नहीं लाये तो पहली दफ़ा ना चाहते हुए भी मैंने उनकी पिटाई की क्योंकि शायद मैं ये जताना चाहती थी कि पिछले दिन बस में हुए वाकिये के बावजूद मेरा इख़्तियार बरकरार है। टीचर हूँ इसलिये रौब रखना भी ज़रूरी है... लेकिन मुझे दिल में बेहद अफ़सोस महसूस हुआ। उस दिन बस में उनके करीब खड़ी थी लेकिन जब उन्होंने मुझे नहीं छुआ तो थोड़ी मायूसी हुई। लेकिन पता नहीं क्यों अब पहली बार मैं चाहती थी कि वो मुझे छुयें... मेरे चूतड़ों के बीच में हाथ डालें... मेरी चूत को सहलायें। इसी उम्मीद में मैं बस में पीछे उनके पास जाकर खड़ी होती लेकिन अगले दो-तीन दिन भी मेरे साथ ऐसी कोई हरकत नहीं की और उसके बाद फिर चार-पाँच दिन तो वो स्कूल ही नहीं आये। मैं तड़प कर रह जाती और मायूस हो कर अपने स्टॉप पे उतर जाती। वो लड़के मेरे दिलो-दिमाग में बस से गये थे और ये हालत हो गयी थी कि रोज़ रात को उनके बारे में सोच-सोच कर बार-बार अपनी चूत सहलाती और गाजर से मैस्टरबेट करती। स्कूल में भी कईं दफ़ा उनका ख्याल आ जाता तो चूत गीली हो जाती और फिर अपने ऑफिस या टॉयलेट में जा कर खुद-लज़्ज़ती करती। मुझे पोर्नोग्राफी से नफ़रत थी लेकिन एक रात को मैंने पहली दफ़ा अपने लैपटॉप पे पोर्न-वेबसाईट तक खोल ली। इससे पहले मैंने कभी गंदी तस्वीरें या ब्लू-फिल्म नहीं देखी थी लेकिन उस रात और फिर अगली दो-तीन रातें मैंने घंटों तक अलग-अलग तरह की चुदाई की क्लिप्स का मज़ा लिया। मेरे जिस्म में हवस की आग इस कदर भड़क गयी थी कि मेरे सारे इख़लाक़ और नेक तर्बियत उसमें जल कर ख़ाक हो रहे थे और कुछ ही दिनों में मेरी फ़ितरत और चाल-चलन में किस कदर बेइंतेहा तब्दीली आ गयी थी।

फिर एक दिन काफी बारिश हो रही थी और स्कूल में बच्चे भी कम आये थे तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गयी। उस दिन बस में भीड़ नहीं थी। मैं आसानी से कहीं भी खड़ी हो सकती थी लेकिन खुश नसीबी से मुझे वो लड़के पीछे खड़े नज़र आये तो मैं पीछे उन ही लड़कों के पास जा कर खड़ी हो गयी क्योंकि मैं तो दिल में ये ही चाहती थी कि वो मुझे छुयें। हमेशा की तरह सुहाना और फ़ातिमा भी वहीं मौजूद थीं। मुझे पूरा शक हो गया था कि वो दोनों भी जानती थी कि लड़के मेरे साथ क्या फ़ाहिश हरकतें करते हैं।

बस में भीड़ ना होने की वजह से वो मुझसे थोड़ा पीछे खड़े थे। लेकिन बस चलने के थोड़ी देर बाद ही वो मेरे नज़दीक आ गये। बारिश की वजह से हाईवे पे काफी ट्रैफिक था और बस धीरे-धीरे चल रही थी। मैं मोबाइल फोन पे किसी से बात करने में मसरूफ थी कि अचानक मुझे महसूस हुआ कि कोई लड़का एक दम मेरे साथ चिपक कर खड़ा हो गया हो। मैंने फोन कॉल बंद करते हुए पीछे देखा तो वो बोला, "अखतर मैम आप ज्यादा पीछे आ गयी हैं... थोड़ा आगे सरक सकती हैं!" उस लम्हे मैंने गौर किया कि दर असल मैं ही फोन पे बात करते हुए पीछे उन लड़कों तक सरक गयी थी। इसके अलावा मैंने देखा कि सुहाना और फ़ातिमा भी उनमें से दो लडकों से बिल्कुल चिपक के खड़ी थीं। मैंने उन लड़कियों की जानिब देखा तो वो मेरी जानिब देखते हुए मुस्कुराने लगीं। तब मुझे एहसास हुआ कि हक़िकत में वो दोनों भी इन लड़कों से मिली हुई हैं और खुद उनसे उंगली करवा के मज़े लेती हैं।

मैं भी झेंप कर थोड़ा सा आगे सरक गयी तो वो सब भी आगे सरक आये और एक लड़के ने हल्के से मेरी गाँड में हाथ दे दिया। मैं तो खुद इसी इंतज़ार में थी इतने दिन से और इस बार मैं भी थोड़ा पीछे सरक गयी ताकि उसका हाथ अच्छी तरह से मेरी टाँगों के बीच में घुस जाये। मैंने अपनी रानों को थोड़ा-थोड़ा खोला और फिर बंद किया तो उस लड़के ने एक हाथ मेरी टाँगों के बीच में घुसा दिया और दूसरा हाथ वो मेरे चूतड़ों पे फेरने लगा। मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। मेरी तरफ़ से कोई मुखालफ़त ना देख कर शायद मेरी नियत का भी अंदाज़ा हो गया था। फिर उसने मेरे कान में कहा, "तब़्बू मैम अगले स्टॉप पर पीछे की सीट खाली हो रही है... आप मेरे और मेरे दोस्त के बीच मैं बैठ जायें... बाकी दोनों लड़के और ये लड़कियाँ आगे अपनी हो जायेंगे ताकि किसी को आगे से पता ना चले!"
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#5
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
मैं कुछ नहीं बोली। ये लड़के हमेशा मुझे अख़्तर या तबस़्सुम़ मैम कह कर बुलाते थे लेकिन आज बाकी स्टॉफ की तरह तब्बू मैम कह कर उस लड़के ने मुझसे बात करी। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और चूत गिली हो चुकी थी। बारिश की हल्की सी ठंडक मेरे जिस्म की गर्मी में और इज़ाफ़ा कर रही थी। हवस ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि अगर वो वहीं मुझे नंगी करके चोदना भी शुरू कर देते तो शायद मैं उन्हें मना नहीं करती। उस वक़्त मुझे अपनी इज़्ज़त-आबरू... हैसियत और सोसायटी में रुसवाई या बदनामी... किसी बात की ज़रा सी भी परवाह नहीं थी। मैंने देखा कि वो दोनों लड़कियाँ असल में मजे से दूसरे दो लड़कों का हाथ अपनी स्कूल युनीफॉर्म की ट्यूनिक के अंदर अपनी टाँगों के बीच में ले रही थी। वो मेरी जानिब देख कर बेहयाई से मुस्कुराने लगीं। तब मेरे पीछे वाले लड़के ने मेरे कान में कहा, "ये दोनों तो अक्सर हम चारों चुदती हैं... तब्बु मैम आप इनकी परवाह ना कीजिये... इनका काम अब पूरा हो गया... अब इन्हें अगले संडे मजे से चोदेंगे... आज आपका नम्बर है!"

मैं उसकी हिम्मत पे हैरान थी कि किस तरह खुल कर गंदे लफ़्ज़ों में वो अपनी टीचर के साथ चुदाई की बातें कर रहा था। उसकी गंदी बातें सुनकर मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन मुझे ज़रा भी बुरा नहीं लगा। मैं कुछ नही बोली और चुप रही। मैं तो खुद अपनी हवस की आग में अंधी हो गयी थी और अपनी इज़्ज़त लुटाने के लिये खुद ही तड़प रही थी। अगले स्टॉप पर पीछे वाली सीट खाली हुई तो मेरे पीछे वाला लड़का दायीं तरफ़ बैठ गया और मैं चुपचाप उसके बगल में बैठ गयी। दूसरा लड़का मेरी बांयी तरफ़ बैठ गया। बाकी दोनों लड़के और वो लड़कियाँ हमारे आगे खड़ी हो गयीं। बस चलने लगी तो मेरी बगल वाले लड़कों को जैसे खुली छूट मिल गयी मेरे साथ खेलने की... मेरे खज़ाने लूटने की।

दायीं तरफ़ वाले लड़के ने एक बाँह मेरे सर के पीछे सीट पर पसार दी और दूसरे हाथ को मेरी नरम और हवस की वजह से गरम दाहिनी रान पर रख दिया और उसे सहलाने लगा। बांयी तरफ़ वाला लड़का मेरी बांयी रान को सहलाने लगा। मेरी साँसें एक दम से और तेज़ और गरम हो गयीं और मेरा सर हल्का-हल्का महसूस होने लगा। मैं मदहोश सी हो गयी थी। मैंने आँखें बंद कर लीं। दोनों लड़कों ने अपने हाथ मेरी रानों पर ऊपर की जानिब सरकाये और मेरी कमीज़ के पल्ले के नीचे से सरकाते हुए मेरे पेट की तरफ़ बढ़ा दिये। तभी एक लड़के ने अपने हाथ को मेरी रानों के बीच मेरी चूत की जानिब सरकाने की कोशिश की तो मेरे मुँह से हल्की सी सिसकरी छूट गयी और मैंने अपनी दोनों टाँगों को ज़ोर से आपस में जोड़ लिया और अपने हाथों से उन लड़कों के हाथों को पकड़ लिया और मेरे मुँह से ज़ोर से एक साँस अटकती हुई निकली। इस पर मेरी दांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख कर ज़ोर से से चूम लिया और मेरे होंठ चूसने लगा।

मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी हो। मेरे होश उड़ गये और मेरा सर बिल्कुल हल्का हो गया। मेरा जिस्म काँपने लगा और वो मेरे होंठ चूसता रहा। मेरे शौहर ने भी कभी मेरे होंठों को चूमते हुए इस तरह नहीं चूसा था। ये मेरी ज़िंदगी का पहला माकूल फ्रेंच-किस था। उसने मेरे सर के पीछे वाले अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ कर हमारे होंठों को कस कर सी लिया और उसी पल मेरी बांयी तरफ़ वाले लड़के ने अपने दूसरे हाथ से मेरी छाती पकड़ ली और कमीज़ के ऊपर से ही मेरे बूब्स मसलने लगा। मेरी साँसें फूलने लगी और मैं अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ कर रोकने लगी तो दोनों लड़कों ने मेरी रानों को सहला रहे दूसरे हाथों से हल्का सा ज़ोर लगा कर मेरी टाँगों को खोल दिया और दांयी तरफ़ वाले लड़के ने तपाक से अपना हाथ मेरी सलवार के ऊपर से मेरी चूत पे रख दिया और उसे ऊपर से ही सहलाने लगा। कुछ ही देर में मेरे पेट में अकड़ाव पैदा हुआ और फिर एक ज़ोर का झटका लगा और मेरी चूत में फ़ुव्वारे फूटने लगे। मैं झड़ चुकी थी और मेरी पैंटी और उसके आसपास की सलवार भी भीग गयी। मैं झड़ी तो उस लड़के ने मेरे होंठ चूसने बंद कर दिये और मेरी साँसें भी ठीक हो गयीं।

फिर दूसरा लड़का मुझे फ्रेंच-किस करने लगा तो पहले वाला बोला, "वाह यार मज़ा आ गया... आज तो अंग्रेज़ी वाली को अच्छे से चूसा है और अब अच्छे से चोदेंगे भी! साली मारती बहुत ज़ोर से है... आज उतने ही ज़ोर से हम इसकी मारेंगे!" और फिर वो बारी-बारी मुझे चूमने लगे।

थोड़ी देर बाद जो लड़के हमारे सामने खड़ी उन लड़कियों की गाँड में उंगली कर रहे थे उन्होंने कहा, "चलो बहुत हुआ... अब हमें भी तो त़बस्सूम मैडम का थोड़ा मज़ा लेने दो... तुम इधर आ कर इन लड़कियों के मम्मों को थोड़ा मसल दो... ये भी बहुत गरम हैं आज बरिश की ठंडक में!"

फिर उन चारों ने जगह बदल ली। अब दूसरे दोनों लड़के मेरे अगल-बगल बैठ कर मुझे किस करने और मेरे मम्मे और चूत को सहलाने लगे। फिर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोलना शुरू किया तो मैंने अपने दोनों हाथों से नाड़ा पकड़ लिया। फिर दोनों लड़कों ने मेरे दुपट्टे के नीचे से मेरी कमीज़ के गले में से हाथ डाल कर मेरे एक-एक मम्मे को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगे। मैं पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी और मैंने अपने हाथ दोनों की एक-एक रान पर रख दिये और उनके किस के बदले में उन्हें किस करने लगी। बेहद अजीब पर मजेदार चुंबन थे। बार-बार वो मेरे होंठ चूमते हुए अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल रहे थे। चारों लड़कों ने शायद पोलो-मिन्ट काफी खा रखी थी इसलिये उन्हें किस करते हुए मुझे मीठा-मीठा लग रहा था।
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#6
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
तभी मौका पाकर उनमें से एक ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल ही दिया और मेरी सलवार और भीगी पैंटी को एक साथ नीचे खींचने लगा। पता नहीं मुझे क्या हुआ मैंने भी अपनी गाँड सीट से ऊपर उठा दी और उसे मेरी सलवार और पैंटी मेरे घुटनों के नीचे तक खींच दी। फिर उसने अपनी उंगली को अपने मुँह में डाल कर गीला किया और मेरी चूत के हल्का सा अंदर ऊपर-ऊपर घुमाने लगा। हाय अल्लाह! मैं तो पागल सी हो गयी और मेरे मुँह से तेज़-तेज़ आहें निकलने लगी। बच्चों से भरी स्कूल की बस में अपनी नंगी चूत खोले मैं अपने ही स्टूडेंट से उसमें उंगली करवा रही थी। इस एहसास ने मेरी गरमी और बढ़ा दी और मैं कुछ ही पलों में फिर झड़ गयी।

मेरे झड़ते ही उसने मेरी पैंटी ओर सलवार को ऊपर कर दिया और मेरा नाड़ा दोबारा बाँध दिया। फिर वो बोला, "तबस़्सुम़ मैम अगर आपको चुदाई का पूरा मज़ा लेना है तो आप घर फोन कर दीजिये कि आप अपनी किसी सहेली के घर जा रही हो और हमारे स्टॉप पर ही उतर जाओ! ये संजय पास ही अपने घर से कार ले आयेगा... हम इसके खेत पे चलते हैं ऐश करने के लिये.... बाद में शाम को हल्का सा अंधेरा होते ही अपको आपके घर के करीब छोड़ देंगे!"

मैंने थोड़ा शरमाते हुए गर्दन हिलाकर रज़ामंदी ज़ाहिर की। मेरे अब्बू और अम्मी एक हफ़्ते के लिये अजमेर गये हुए थे एक रिश्तेदार की शादी में लेकिन मैं इन लड़कों को ये ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी इसलिये अपने पर्स में से मोबाइल निकाल कर झूठमूठ एस-एम-एस करने का नाटक किया। इतने में जब उनका स्टॉप आ गया तो मैं उनके पीछे-पीछे वहीं उतर गयी। बस में आगे बैठी एक टीचर ने पूछा, "अरे तब़्बू... तुम कहाँ छुपी बैठी थी और तुम यहाँ क्यों उतर रही हो?"

मैंने कहा, "मैं यहाँ अपनी एक सहेली के घर जा रही हूँ... कई दिनों से मिली नही उससे और आज किस्मत से जल्दी छुट्टी हो गयी तो मैंने सोचा उसे मिल लूँ.... और मेरा थोड़ा सर दर्द कर रहा था... इसलिये पीछे की सीट पर लेट कर थोड़ा सो गयी थी!"

"अरे तू अभी कुछ दिन पहले भी तो बीमार हो गयी थी! तेरी अम्मी से बोलुँगी कि अपनी बेटी को कुछ अच्छा खिलाया करो... स्लिम और खूबसूरत दिखने के चक्कर में कैसे सूख के मरी जा रही है!" उनमें से सबसे उम्र-दराज़ टीचर जो मेरी अम्मी को जानती थी वो बोली।

"जी सकीना आँटी ज़रूर बता देना... पर मैं इतनी भी कमज़ोर नहीं हूँ... आप मुझे कभी अपनी क्लास के मुस्टंडों की पिटाई करते देखना... फिर पता चलेगा आपको!" मैं हंसते हुए बोली और बस से उतर गयी।

बस से उतरी तो बारिश रुक गयी थी। मैं पीछे की जानिब चल पड़ी और एक साइड वाली गली में मुड़ गयी और एक तन्हा जगह पर जा कर खड़ी हो गयी। हवस में मैं इतनी बहक गयी थी कि उस वक़्त एक मर्तबा भी मुझे किसी तरह की शर्मिंदगी या बद-अखलाक़ी का एहसास नहीं हुआ। मेरी शरमो-हया और सारी सक़ाफ़त और अखलाक़ियत हवस की आग में फ़ना हो गयी थी। धड़कते दिल के साथ मैं बेकरारी से उन लड़कों के आने का इंतज़ार कर रही थी। जिस्म की आग ने मुझे इतना अंधा कर दिया था कि एक दफ़ा भी ख्याल नहीं आया कि मैं कोई गुनाह करने जा रही हूँ और इस बदकारी का क्या नतीजा होगा। मेरी टाँगें काँप रही थी और चूत गिली हो रही थी और इक्साइटमेम्ट में निप्पलों में भी सनसनाहट महसूस हो रही थी।

कुछ ही देर में एक काले शीशों वाली टाटा सफ़ारी आ कर मेरे सामने रुकी और उसका पिछली सीट वाला दरवाजा खुला। उसमें से मेरा एक स्टूडेंट नीचे उतरा और बोला, "अंदर आ जाओ तब़्बु मैडम!" अंदर पीछे की सीट पर एक लड़का बैठा था जबकि दो लड़के आगे बैठे थे। जैसे ही मैं गाड़ी के अंदर घुसकर बैठने लगी तो अंदर बैठे दूसरे लड़के ने मुझे कमर से पकड़ कर ज़ोर से अपनी गोद में खींच लिया। दूसरे ने भी फ़ौरन अंदर बैठते ही गाड़ी का दरवाज़ा बंद किया और गाड़ी चल पड़ी। जिस लड़के की गोद में मैं बैठी थी उसने अपना एक हाथ मेरी बगल में से निकालकर मेरी छाती पर रख दिया और मेरे मम्मे ज़ोर से रगड़ने लगा और दूसरा हाथ उसने मेरी रानों के बीच मेरी चूत पर रख दिया और उसे प्यार से मसलने लगा।

दूसरे लड़के ने मेरे ऊँची पेन्सिल हील वाली सैंडल वाले पैरों को पकड़ा और मेरी टाँगों को अपनी जानिब खींच लिया। अब मेरी टाँगें उसके अगल बगल थीं और वो मेरी टाँगों के बीच। "साली रंडी! कुत्ती! क्लास में बहुत मारती है ना... आज तेरी गाँड ना फाड़ दी तो हमारे नाम बदल देना!" ये कहते ही वो मेरी चूत को ज़ोर से मसलने लगा। दूसरे वाले ने झुक कर मेरे होंठों को अपने होंठों से सी लिया और मेरे निचले होंठ को काटने लगा और मेरे मम्मों को मसलने लगा। तभी आगे बैठा लड़का बोला, "यार दारू के ठेके पे रोकना पहले... दारू पी के तब्बू मैडम जी को चोदने में और मज़ा आयेगा!"

"हाँ यार... इस साली तब़्बू को भी पिलायेंगे तो ये भी खुल के चुदवायेगी....!" दूसरा बोला। स्कूल की बस में तो चारों लड़के फिर भी मुझसे इज़्ज़त और अदब से बात कर रहे थे लेकिन अब उनका लहज़े में अचानक तब्दीली आ गयी थी और बेहद बद-तमीज़ी से पेश आ रहे थे। 'मैम' या 'मैडम' कहते हुए भी उनका लहज़ा तंज़िया था।

इधर एक लड़के ने ज़ोर से अपने दाँत मेरी कमीज़ में बाहर निकल रहे थोड़े से कंधे वाले हिस्से पर गड़ा दिये। मेरे मुँह से चींख और सिसकरी एक साथ निकली। उस एक लम्हे में मुझे दर्द और मज़े का एक साथ ऐसा एहसास हुआ कि मुझे लगा कि मैं उसी लम्हे झड़ जाऊँगी लेकिन झड़ी नहीं। वो दोनों मिल के मुझे मसल रहे थे.... चूम रहे थे... काट रहे थे और मेरे होंठों से मुसलसल सिसकारियाँ निकल रही थी। इतने में कार हाइ-वे पे एक शराब के ठेके पे रुकी तो उन्होंने मुझे अपने बीच में सीधी कर के बिठा लिया। आगे ड्राइविंग सीट वाला संज़य उतर कर ठेके पे चला गया। इतनी देर मेरी अगल-बगल बैठे दोनों लड़के मुझे दोनों तरफ से चूमते रहे और मेरे मम्मे और रानें सहलाते रहे। मैं भी मस्त होकर उनकी युनिफॉर्म की ग्रे पैंट के ऊपर से उनके लंड मसलते हुए महसूस करने लगी।
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#7
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
इतने में संजय शराब की बोतल लेकर आ गया। आगे बैठा दूसरा लड़का बोला, "यार गिलास तो हैं नहीं कार में... खेत पे जा के ही दो-दो पैग खींचेंगे!"

ये सुनकर मेरी बगल में बैठा एक लड़का हंसते हुए बोला, "यार तब़्बु मैम को क्यो इंतज़ार करवा रहे हो... लाओ इन्हें तो बोतल से ही पिला दें थोड़ी... तो खेत पे पहुँचने तक इसकी शरम तो खुल जाये...!"

ये सुनकर मैं इंकार करते हुए बोली, "नहीं.. नहीं... मैं शराब नहीं पीती... तुम चारों को पीनी हो तो पियो... मैं नहीं पियुँगी!"

"अरे तब्बू मैम... पी कर तो देखो... जब थोड़ा नशा होगा तो चुदाई में खूब मज़ा आयेगा....!" मेरे बगल में बैठा एक लड़का बोतल खोलते हुए बोला और मेरे होंठों से लगाने लगा तो मैंने मुँह फेरते हुए फिर इंकार किया, "नहीं... मुझे नहीं पीनी... पहले कभी नही पी मैंने...!"

"अरे रंडी तब़्बू साली... पहले नहीं पी तो आज पी ले... अपने स्टूडेंट्स के साथ चुदाने भी तो पहली बार आयी है कि नहीं... या फिर और दूसरे स्टूडेंट्स से चुदवाया है पहले!" उनमें से एक लड़का बोला और सब हंसने लगे। "थोड़ी सी पी लो तबस़्सुम़ मैम... कुछ नहीं होगा... हम चारों के नाम के दो-दो घूँट भर लो बस... फिर अच्छी नहीं लगे तो और ज़ोर नहीं देंगे!" आगे ड्राइविंग सीट से संजय बोला।

वो लोग मानने वाले तो थे नहीं और जब फिर से उस लड़के ने बोतल मेरे मुँह से लगा दी तो पता नही क्यों मैंने और मुज़ाहमत नहीं की और एक बड़ा सा घूँट भर के हलक के नीचे उतार लिया। मेरे हलक और पेट में इस क़दर जलन हुई कि मेरा दम घुटने लगा और मैं खाँसने लगी। मेरी बगल में बैठा एक लड़का मेरी कमर सहलाते हुए बोला, "बस बस त़ब्बू मैडम जी... अभी ठीक हो जायेगा... पहली बार पी रही हो ना इसलिये...!"

फिर कुछ ही लम्हों में मेरी साँसें नॉर्मल हो गयीं और जलन भी खतम हो गयी तो उन्होंने ये कहते हुए फिर बोतल मेरे मुँह से लगा दी कि इस बार मुझे अच्छी लगेगी और तकलीफ भी नहीं होगी। जब मैंने दूसरा घूँट पिया तो उतनी जलन नहीं हुई और ऐसे ही उन्होंने इसरार करते हुए ज़बरदस्ती आठ-दस घूँट पिला दिये। कुछ ही देर में मुझे बेहद खुशनुमा सुरूर महसूस होने लगा और मैं उन लड़कों के बीच में बैठी हुई झूमने लगी।

इतने में उस लड़के का खेत आ गया जो ज्यादा दूर नहीं था। बारिश तो पहले ही बंद हो चुकी थी लेकिन काले बादल अभी भी छाये हुए थे। काले बादलों के बीच में से सूरज की हल्की गुलाबी सी रोशनी क़ायनात को रंगीन बना रही थी। उनके खेत में पानी की मोटर के साथ एक छोटा सा कमरा था। उसके बाहर तीन-चार मजदूर बैठे थे। आगे वाले एक लड़के ने गाड़ी से उतरते ही उनसे कहा, "ओये! आज तुम सबकी छुट्टी है... तुम सब घर जाओ अभी!"

"जी बाबू जी!" ऐसा बोल कर वो सब मजदूर जाने के लिये उठे। इतने में गाड़ी के पीछे वाली सीट का दरवाजा खोल कर एक लड़का मुझे गोद में उठाये बाहर निकला। अरे ये तो वो आपके स्कूल वाली मास्टरनी है ना! वो शुगर मिल वाले खुर्शीद साहब की लौंडी? इसको चोदने लगे हो बाबू.... आपने तो राम कसम हमारा दिल खुश कर दिया! ऐसी मक्खन जैसी चिकनी गोरी कहाँ मिलेगी और वो भी अपनी ही मास्टरनी! जियो बाबू जियो! और खूब जम कर चोदना! रंडी बना देना आज साली को! और तू घबरा मत मास्टरनी हम किसी से नहीं कहेंगे कि तू इस मोटर पर किनसे चुदी है!" एक मजदूर बोला।

"अच्छा अच्छा... अब तुम जल्दी जाओ यहाँ से!" एक लड़का बोला।

"जाते हैं बाबू जी! पर एक तकलीफ़ होगी आपको! मोटर पर जो चारपायी है ना वो टूट गयी थी इसलिये बनने के लिये गयी हुई है... आपको इसे अंदर कमरे में जो सूखे चारे का ढेर पड़ा है उसी पर चोदना पड़ेगा!" वो मजदूर जाता-जाता बोला।

उस एक लम्हे के लिये मुझे एहसास हुआ कि आज मैं कितनी बिगड़ गयी हूँ और मुझे अपने पर थोड़ी सी शरम भी आयी और थोड़ी घबराहट भी महसूस हुई। लेकिन अगले ही लम्हे चार-चार जवान लड़कों से एक ही साथ खेत में सूखे चारे के ढेर पर चुदने के खयाल से मेरी हवस और ज़्यादा बढ़ गयी। इतने में वो लड़का मुझे गोद से नीचे उतार चुका था। मैं खुद ही मोटर के साथ बने कमरे की जानिब झूमती हुई चलने लगी। एक तो मैंने ऊँची पेन्सिल हील के सैंडल पहने हुए थे और फिर शराब का सुरूर भी था तो ज़ाहिर है मेरे कदम ज़रा लड़खड़ा से रहे थे। कमरे के दरवाजे के पास पहुँच कर मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो चारों लड़के मेरी जानिब देख कर हंस पड़े।

"बड़ी जल्दी है भई हमारी तब़स्सुम़ मैडम को चुदने की आज तो... फिर शुरू हो जाये!" एक ने कहा और सभी हंस पड़े।

"हाँ-हाँ जल्दी चलो!" दूसरा बोला।

"अरे पहले तब्बू मैम से तो पूछ लो के हम से चुदना है कि नहीं!" तीसरा बोला।

"क्यों त़बस्सूम मैडम चुदोगी हमसे?" एक ने सवाल किया।

अब तक शराब के सुरूर में मैं बिल्कुल बेशरम हो चुकी थी। मैंने मुस्कुराते हुए अपने टीचर वाले कड़क अंदाज़ में कहा, "तो अब क्या ये भी दो-दो थप्पड़ मार के तुम नालायकों को समझाना पड़ेगा...!"
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#8
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
उनमें से एक लड़के ने डॉयलॉग मारा, "हाय तब़स्सुम़ मैडम जी... मार लो थप्पड़ भी मार लो... हमें आपके थप्पड़ से डर नहीं लगता... आपकी सैक्सी अदाओं से लगता है!" और सब हंसने लगे और मुझे भी उसकी बात पे ज़ोर से हंस पड़ी।

"चलो यरों! हरी झंडी मिल गयी", एक लड़का बोला। फिर वो मुझे लेकर कमरे में घुस गये और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और एक मद्धम सी रोशनी वाला बल्ब चालू कर दिया। उनमें से एक लड़के ने आ कर पीछे से मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे दबोच लिया और मेरे गाल और गर्दन को पीछे से चूमने लगा और मेरे चूतड़ दबाने लगा। मेरे होंठों से सिसकरी निकलने लगी। इतने में दूसरे लड़के ने आगे से मुझे दबोच लिया और मेरे मम्मे और तने हुए निप्पल मसलने लगा। मुझे उसकी पैंट में से उसका तना हुआ लौड़ा अपनी नाफ़ के नीचे चुभता हुआ महसूस हुआ और वैसे ही अपनी कमर के नीचे चूतड़ों के बीच में भी पीछे वाले का लौड़ा महसूस हो रहा था। पीछे वाला लड़का कपड़ों के ऊपर से ही अपने लंड से मेरी गाँड में धक्के मारने लगा तो मैंने भी तड़पते हुए अपने चुतड़ उसके लौड़े पे दबा दिये।

"अरे देखो यार... साली तबस़्सुम मैडम को कितना मज़ा आ रहा है... क्यों री चूतमरानी... बोल मज़ा आ रहा है कि नहीं!" तीसरा लड़का बोला।

मैं कुछ नहीं बोली तो एक लड़का जोर से बोला, "बोल ना साली चूत... शरमा क्यों रही है... खुल के बता मज़ा आ रहा है कि नहीं...?"

मैंने गर्दन हिलाते हुए धीरे से कहा, "हाँ! हाँ! अच्छा लग रहा है!" और आगे वाले लड़के की गर्दन में बाँहें डाल दी।

फिर मेरे आगे खड़े लडके ने मेरी कमीज़ का दामन उठा कर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और बाकी दोनों लड़के बैठ कर मेरी पेंसिल हील वाले सैंडल खोलने लगे क्योंकि मेरी टाइट चुड़ीदार सलवार बिना सैंडल खोले उतारना मुमकिन नहीं होता। सैंडल खुलते ही उन्होंने मेरी सलवार पैरों तक खिसका दी और पहले एक ने मेरा पैर उठा कर सलवार मेरे पैर से निकाली और फिर दूसरे ने दूसरे पैर से मेरी सलवार निकाल दी। उसके बाद दोनों ने फिर मेरे सैंडल दोबारा पहना कर स्ट्रैप के बकल लगा दिये। मेरे आगे और पीछे मुझसे से चिपक कर खड़े दोनों लड़के अभी भी मुझे चूमते हुए मेरे जिस्म पे हाथ फिरा रहे थे। मैं बिल्कुल मस्त होकर सिसकारियाँ भर रही थी और अपनी गाँड आगे पीछे हिलाते हुए उनकी युनिफॉर्म की पैंटों में तने हुए लौड़ों पर दबाने लगी।

फिर एक लड़का बोला, "अरे अखतर मैम... इतनी बेसब्री क्यों हो रही हो... बहुत टाईम है हमारे पास... हम कहीं भागे नहीं जा रहे... ज़रा ढंग से ऐश करेंगे...!" और अचानक दोनों लड़के मुझसे अलग हो गये। एक लड़का भाग के गाड़ी में से शराब की बोतल ले आया और उन्होंने जल्दी से कमरे में पड़े गिलासों में शराब और पानी डाल कर पाँच पैग तैयार लिये। चारों ने एक-एक गिलास उठया और मुझे भी एक गिलास पकड़ा दिया और फिर चारों लड़के मेरे गिलास से अपने गिलास टकराते हुए ज़ोर से 'चियर्स' बोले। मैं तो अब तक पुरी तरह मस्त हो चुकी थी और मैंने भी चियर्स कह के गिलास अपने होंठों से लगा लिया और पीने लगी। इस बार तो शराब में पानी मिला होने की वजह से उसका ज़ायका बिल्कुल बुरा नहीं लगा।

उनमें से एक लड़का बोला, "अरे यार सुरिंदर! अपने फोन पे कोई गरमा-गरम ऑइटम साँग तो बजा यार... आज तब्बू मैडम का मुजरा देखेंगे पहले!"

ये सुनकर मैं चौंकते हुए बोली, "नहीं... नहीं... पागल हो गये हो क्या.... मुझे नाचना नहीं आता!"

"अरे तब़्बू मैडम! क्यों नखरा कर रही हो! तुम क्या कटरीना या हिरोइन तब्बू से कम हो क्या... और गाने पे ठुमके लगाते हुए ज़रा अदा के साथ धीरे-धीरे नंगी ही तो होना है तुम्हें... वो क्या कहते हैं तुम्हरी अंग्रेज़ी में... स्ट्रिपटीज़!" उन्होंने कहा तो मैं उनकी बात मानने को राज़ी हो गयी। चारों अपने-अपने गिलास लेकर ज़मीन पे बैठ गये और सुरिन्दर ने अपने स्मार्ट-फोन पे "चिकनी चमेली... छुप के अकेली... पव्वा चढ़ा के आयी..." लगा दिया। मैंने जल्दी से अपना गिलास खाली किया और फिर बिना सलवार के सिर्फ़ कमीज़ और ऊँची पेन्सिल हील वाले सैंडल पहने एक आइटम-गर्ल की तरह अपने स्टूडेंट्स के बीच में नाचने लगी। वो लोग "वाह-वाह" करने लगे। नाचते-नाचते मैं बारी- बारी से उनके करीब जाती और किसी को झुक कर चूम लेती तो किसी की टाँगों के बीच में पैर रख के लौड़े को सैंडल के पंजे से दबा देती।

फिर एक लड़का खड़े हो कर मेरे साथ चिपक कर नाचने लगा और और मेरी कमीज़ की पीछे से ज़िप मेरी कमर तक खोल दी तो मैंने मुस्कुराते हुए उसे प्यार से धक्का मार के वापस बिठा दिया और नाचते हुए बड़ी शोख अदा से उन्हें तड़पाते हुए धीरे-धीरे अपनी कमीज़ उतारने लगी। कुछ ही लम्हों में मैं सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और हाई पेन्सिल हील के सैंडल पहने नशे में झूमती हुई अपने स्टूडेंट्स के सामने नाच रही थी। चारों लड़के मस्त होकर पैंट के ऊपर से ही अपने लौड़े मसलने लगे। ये देख कर मैं भी और ज्यादा गरम हुई जा रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे अपनी ब्रा भी उतार के एक लड़के के चेहरे पर फेंक दी। इतने में गाना खतम हुआ तो सुरेंदर ने वही गाना फिर से चला दिया। मैंने अपने नंगे बूब्स उछालते हुए नाचना ज़ारी रखा। उसके बाद मैंने अपनी गाँड मटकाते हुए धीरे-धीरे पैंटी अपनी टाँगों से नीचे खिसकानी शुरू की तो चारों लड़के आँखें फाड़े हवस-ज़दा नज़रों से मुझे देखने लगे।

जब मैंने अपने पैरों से पैंटी निकाल के हवा में उछाली तो चारों उसे पकड़ने के लिये लपके लेकिन पैंटी उनमें से सबसे बिगड़े और बड़े लड़के कुलदीप के हाथ आयी। वो फतेहाना अंदाज़ में इतराते हुए बैठ कर मेरी गीली पैंटी को सूँघने लगा। अब मैं सिर्फ़ ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल मादरजात नंगी उन लड़कों के बीच में नाच रही थी। मुझे अपने जिस्म पर बाल अच्छे नहीं लगते इसलिये मैं वैक्सिंग करके सिर के अलावा जिस्म के हर हिस्से को बालों से पाक रखती हूँ।
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#9
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
"अरे तबस़्सुम मैडम... साली तू तो मक्खन से भी ज्यादा चिकनी और गोरी है और तेरे गोल-गोल बूब्स कितने प्यारे हैं! इसकी चिकनी चूत भी कितनी गोरी है और गुलाबी है... आज तो मज़ा आ जायेगा इसे चोदने का! और गाँड भी कितनी सैक्सी है... आज साली रंडी की चूत फाड़ देंगे...! मैं तो रसीली गाँड भी मारुँगा साली तब़्बू मैडम की!" ये सब तबसरे करते हुए चारों लड़के खुद भी अपनी स्कूल की युनिफॉर्म उतार के नंगे होने लगे। उनके नंगे जिस्म और खासतौर पे उनके तने हुए जवान लौड़े देख कर मेरी धड़कने तेज़ हो गयी और फरेफ्ता हो कर उनके लौड़े निहारने लगी। तने हुए चार नौजवान बे-खतना लौड़े मेरी हवस की आग बुझाने के लिये मौजूद थे। चारों लौड़े मेरे मरहूम शौहर के लंड के मुकाबले काफी बड़े थे। उनमें से सबसे छोटा लंड कमज़ कम आठ इंच होगा और कुल्दीप का लंड तो दस-ग्यारह इंच से कम नहीं था। अचानक मुझे शराब का नशा पहले से बुलंद महसूस हो रहा था। ज़िंदगी में पहली दफ़ा जो शराब पी थी।

उनमें से एक लड़का बोला, "ऐसे आँखें फाड़े क्या देख रही हो त़ब्बू मैडम... ये चारों लौड़े आज तेरी जम के खूब चुदाई करेंगे कि तेरी सारी अकड़ निकल जायेगी... स्कूल में लड़कों की पिटाई करने का बहुत शौक है ना तुझे... आज इन लौड़ों से चुद के तेरी सारी फ्रस्ट्रेशन दूर हो जायेगी!"

"चल मैडम... पहले हमारे लौड़े तो चूस के चिकना कर...!" दूसरा लड़का मुझे नीचे बिठाने के मकसद से मेरे कंधे दबाते हुए बोला। चारों लड़के मुझे घेर के खड़े थे और जैसे ही मैं उनके बीच में उकड़ू बैठी तो एक लड़के ने अपना लंड मेरे चेहरे के आगे कर दिया। उसके लंड की चमड़ी में से बाहर झाँकती टोपी उसकी मज़ी से भीगी हुई थी। मैं अपने शौहर का लंड कईं दफ़ा चूसती थी इसलिये मुझे इन लड़कों के लंड चूसने में कोई परहेज़ नहीं था। वैसे भी इस वक़्त मैं शराब और हवस के नशे में इस कदर मखमूर थी कि कुछ भी नागवार नहीं था।

उस लड़के ने अपना लंड मेरे होंठों पे लगाया तो पेशाब और पसीने की तेज़ बू मेरी नाक में समा गयी लेकिन उस वक़्त मेरी कैफ़ियत ऐसी थी कि वो बू भी मेरे लिये शहवत-अंगेज़ थी। उसके लंड में से चिकना सा मज़ी रिस रहा था। मैंने एक लम्हा भी ताखीर किये बिना अपने होंठ खोलकर उसके लंड की टोपी अपने मुँह में ले ली। उसका तीखा सा तल्ख ज़ायका भी वाकय में मुझे बेहद लज़ीज़ लगा। ठोस और सख्त होने के साथ-साथ उसका लौड़ा गुदगुदा और लचकदार भी था। मेरे लरज़ते होंठों पे तपिश भरा मखसूस एहसास मेरी तिश्नगी बढ़ा रहा था। अपने मुँह के अंदर ही मैं अपनी ज़ुबान उसके लंड के सुपाड़े पे ज़ोर से चारों तरफ़ फिराने लगी जैसे कि वो कोई लज़ीज़ कुल्फ़ी हो। फिर अपने होंठ और ज्यादा खोल कर मैंने उसका लंड अपने मुँह में और अंदर तक ले लिया और बिल्कुल बेहयाई से मस्ती में अपने स्टूडेंट का लौड़ा चूसने लगी। ये बे-खतना लौड़ा मेरे मरहूम शौहर के लंड के मुकाबले काफी बड़ा था।

बाकी तीनों लड़के भी मेरे चारों तरफ़ खड़े थे। मेरे दोनों तरफ़ खड़े लड़के अपने लौड़े मसलते हुए मेरे दोनों गालों पे छुआ रहे थे और पीछे खड़े लडके का लंड मेरी गर्दन पे टकरा रहा था। अपने सामने वाले लड़के का लौड़ा चूसते हुए मैंने अपने दोनों तरफ़ खड़े लड़कों के लंड अपने एक -एक हाथ में पकड़ लिये और उन्हें मसलते हुए उनकी चमड़ी आगे-पीछे करने लगी। चार-चार जवान तगड़े लौड़ों से घिरी हुई मैं बे-इंतेहा मस्ती के आलम में थी। कुछ ही देर में मैं ऐसे बारी-बारी से चारों के लंड बदल-बदल कर अपने मुँह में ले कर मस्ती में शिद्दत से चूसने लगी और साथ-साथ दोनों मुठियों में दो लौड़े मसलने लगी। मेरे दोनों हाथ दो लड़कों के लौड़ों पे मसरूफ़ होने की वजह से मेरे सामने जो भी लड़का मौजूद होता वो खुद अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर आगे-पीछे करते हुए चुसवाता और मैं भी पूरी शिद्दत से उनके लौड़े चूस रही थी। उनकी मज़ी का ज़ायका जब मुझे अपनी ज़ुबान पे महसूस होता तो पूरे जिस्म में सनसनी लहर दौड़ जाती। कितना फ़ाहिश मंज़र था। एक टीचर अपने से कम उम्र के स्टूडेंट्स के बीच में उनसे घिरी हुई सिर्फ़ ऊँची हील वाले सैंडल पहने बिकुल नंगी बैठी उनके लौड़े चूस रही थी।

"हाय मैडम... क्या मस्त लंड चूसती है साली.... साली तब़्बू का मुँह इतना मज़ेदार है तो चूत कितनी गरम होगी... मज़ा आ गया... मस्त लंड-चुसक्कड़ है साली!" उन लड़कों के फाहिश तबसरे मेरा जोश और हवस भी बढ़ा रहे थे। अपना लंड मेरे मुँह में चोदते हुए मस्ती में वो लड़के बाज़ दफ़ा अपना लंड मेरे हलक तक ठेल देते तो मेरी साँस घुट सी जाती लेकिन मुझे तड़पते देख कर वो कुछ लम्हों के लिये मेरे थूक से सना हुआ अपना लंड बाहर खींच लेते। मैं खाँसते हुए ज़ोर-ज़ोर से लंबी साँसें लेती तो मेरी हालत पे हंस पड़ते और तबसीरे कसते, "अब पता चला तब़स्सुम मैडम... क्लास में थप्पड़ मार-मार के हमारे गाल सुजा देती है साली!"

इसी तरह करीब आठ-दस मिनट मैं उनके लौड़े चूसती रही। इस दौरान मेरा मुँह और हलक़ भी उनके लौड़ों की जसामत से काफी हद तक मुवाफिक़ हो गये थे। फिर जब एक लड़का बोला कि "चलो यारों... अब इस साली मुसल्ली तब़्बू को चोदना भी है कि नहीं!" तो उन्होंने अपने लौड़े मेरे मुँह और मुठियों में से निकाले।

उनके तने हुए लौड़े मेरे थूक से बूरी तरह तरबतर थे और मेरे खुद के गाल, गला और छाती भी मेरे थूक से भीगे हुए थे। मैं वहीं ज़मीन पे अपने चूतड़ टिका कर बैठ गयी और पास पड़े अपने डुपट्टे से अपना चेहरा, गला और छाती पोंछने लगी। इतने में दो लड़कों ने जल्दी से पाँच गिलासों में फिर से व्हिस्की और पानी मिला कर पैग तैयार कर लिये। मैं तो पहले से ही नशे में मखमूर थी तो मैंने कोई मुज़ाहमत नहीं की और अपना गिलास ले कर धीरे-धीरे पीने लगी। वो चारों भी खड़े-खड़े अपने पैग पी रहे थे। एक लड़का बोला, "वाह तब़्बु मैडम... कमाल का लंड चूसती हो... मज़ा आ गया!"

"वो सुहाना और फ़ातिमा तो बिल्कुल अनाड़ी हैं आपके सामने... तबस़्सुम़ मैडम जी अंग्रेज़ी के साथ-साथ लंड चूसना भी तो सिखाओ उन माँ की लौड़ियों को!" दूसरे लड़के ने कहा और फिर तीसरा बोला, "देखो तो चूस-चूस के हमारे लौड़े किस तरह भिगो दिये त़ब्बू मैडम ने अपने थूक से!" इतने में एक लड़का मेरे हाथ से मेरा आधा भरा गिलास लेते हुए बोला, "तो क्या हुआ दोस्तों... लो साफ़ कर लो अपने-अपने लौड़े!" और ये कहते हुए वो अपना लंड मेरे गिलास में शराब में डुबा के हिलाने लगा। बाकी तीनों लड़के हंसने लगे और फिर उन तीनों ने भी बारी-बारी अपने लंड उस गिलास में डाल कर शराब से धोये। उसके बाद जब उन्होंने वो गिलास मुझे वापस पकड़ाया तो उनका इरादा समझ आते ही मैं हैरान रह गयी ओर थोड़ा गुस्से से बोली, "ये क्या बदतमीज़ी है... तुम लोगों का दिमाग तो ठिकाने पे है?"

"अरे मैडम जी... क्यों भड़क रही हो... अभी यही लौड़े तो मज़े से मुँह में लेकर चूस रही थी और इन पे लिसड़ा हुआ थूक भी तुम्हारा ही तो था...!" एक लड़के ने कहा तो इतने में दूसरा बोला, "अरे पी लो त़बस्सूम मैडम... बड़ा मज़ा आयेगा... चार-चार लौड़ों के मर्दाना फ्लेवर का मज़ा मिलेगा...!"
Reply
10-11-2019, 01:14 PM,
#10
RE: Kamvasna दोहरी ज़िंदगी
उन्होंने इसरार किया तो मुझे भी लगा कि वो सही ही तो कह रहे हैं और मैं ज़रा झिझकते हुए पीने लगी। ये देख कर वो खुशी से तालियाँ और सीटियाँ बजाने लगे तो मेरे चेहरे पे भी मुस्कुराहट आ गयी। उसके बाद उन्होंने मुझे खड़ा किया और फिर एक लड़के ने पीछे से मुझे कंधे से पकड़ कर और एक ने आगे से टाँगों से पकड़ कर उठा लिया और सूखी घास पे लिटा दिया। उनमें से सबसे बड़ा लड़का कुल्दीप मेरे ऊपर झुक कर मेर गालों पर, होंठों पर और गर्दन पर सब जगह चूमने लगा। उसका लंड बीच-बीच में मेरी चूत को छू जाता तो मुझे बिजली का झटका सा लगता और मैं सिसक जाती। फिर कुल्दीप गर्दन उठा कर अपने दोस्तों से बोला, "देख क्या रहे हो... आओ मिलकर तब़्बू मैडम की नशीली जवानी को शराब में मिलाकर पियेंगे...!"

उसके बाद बाकी तीनों भी मेरे करीब आ गये। एक लड़के ने मुझे कंधे से पकड़ कर बिठा दिया औरे मेरी दोनों तरफ़ अपनी टाँगें खोलकर मेरे पीछे बैठ गया। उसका लौड़ा मेरी कमर में चुभ रहा था। इतने में दो लड़के मेरे एक-एक पैर पे झुक गये और बोतल से थोड़ी-थोड़ी व्हिस्की मेरे सैंडल और पैरों पे उड़ेल कर उन्हें चाटने और चूमने लगे। उन लड़कों को इस तरह अपने सैंडल के तलवे, हील और स्ट्रेप्स के बीच में से मेरे पैर शराब में भिगो कर चाटते देख मेरे जिस्म में अजीब सी मस्ती भरी लहरें उठने लगी। इसी तरह मेरे जिस्म को शराब में भिगोते हुए वो दोनों आहिस्ता-आहिस्ता मेरी टाँगों को चूमते और चाटते हुए मेरी रानों की जानिब बढ़ने लगे। मेरी बगल में बैठा लड़का मेरे मम्मों पे अपने गिलास में से शराब उड़ेल-उड़ेल कर चाट रहा था और मेरे पीछे वाला मेरी गर्दन और कमर पे व्हिस्की उड़ेल कर चाट रहा था। इसी तरह कुछ देर वो चारों मेरे हुस्न को शराब में भिगो कर चूमते और चाटते रहे।

इतने में सुरिंदर बोला, "बस यार अब नहीं रुका जाता मुझसे... मैं तो अब तब्बू मैडम की चूत मारुँगा!" ये सुनके संज़य बोला, "गाड़ी मेरी... ये खेत मेरे बाप का तो पहले मैं चोदुँगा तब़्बु मैडम को!" इतने में कुल्दिफ बोला, "ओये इसको सुह़ाना और फात़िमा की हेल्प से इसे फंसाने का प्लैन मेरा था और बस में भी मैंने ही सबसे ज्यादा खतरा उठा कर तब़स्सुम मैडम की गाँड में उंगली करी थी तो इसकी चूत में मैं ही सबसे पहले अपना लौड़ा पेलुँगा!"

मुझे सबसे पहले चोदने के लिये उन लड़कों को इस तरह बहस करते देख मुझे बेहद अच्छा लगा और अपने हुस्न पे फ़ख्र सा महसूस हुआ। खैर कुळदीप ही एक बार फिर मुझे लिटा कर मेरे ऊपर आ गया और बाकी तीनों एक तरफ़ हो गये। कुल्दीप ही सबसे लम्बा-चौड़ा था और उसका लंड भी उनमें से सबसे बड़ा था। कुलद़ीप मेरे ऊपर झुक कर मेरे होठों पर अपने होंठ रख कर चूमने लगा। मैं भी उससे लिपट गयी और उसके होंठ और ज़ुबान चूसने लगी। मेरी कमर और चूतड़ों पर सूखा चारा रगड़ खा रहा था पर मेरे अंदर की हवस की आग मुझे इसका एहसास भी नहीं होने दे रही थी।

मेरे होंठों को चूमने के बाद कुल्दीप ने मेरे मम्मे भींच-भींच कर चूसे और चाटे। फिर से वो पास पड़ी बोतल उठा कर फिर से मेरे पेट और नाफ़ पे व्हिस्की उड़ेल कर उन्हें चाटने लगा। उसके बाद उसने दोनों हाथों से मेरे घुटने पकड़ कर मेरी टाँगें खोल दीं। जब वो मेरी चूत पे शराब डाल कर मेरी चूत चाटने लगा तो मैं मस्ती में पागल सी हो गयी। मेरे मरहूम शोहर ने भी कभी मेरी चूत को नहीं चाटा था। ये मेरे लिये बिल्कुल नया तजुर्बा था और मैं जोर-जोर से सिसकने लगी और उसके बाल अपनी मुठ्ठियों में जकड़ कर उसका चेहरा अपनी रानों में भींचने लगी। मेरा पेट अकड़ने लगा और चूत में फुव्वारे फूट पड़े। फिर उसने मेरी टाँगों के बीच में बैठ कर अपने अकड़े हुए सख्त लौड़े को मेरी चूत पे रख दिया तो मैं जोर से सिसक उठी "ऊँऊँम्फफ!"

.

"ओये कंडोम नहीं डालेगा क्या?" एक लड़के ने पूछा तो कुल्दीप बोला, "साला कंडोम लाया ही कौन है... पता थोड़ी था कि ये छिनाल त़ब्बू इतनी आसानी से आज ही चुदवाने के लिये तैयार होके दौड़ी चली आयेगी हमारे साथ!"

"कोई बात नहीं यार... इसे घर छोड़ते हुए रास्ते में केमिस्ट से आई-पिल दिलवा देंगे!" संज़य ने कहा।

"चल रंडी साली... कुत्तिया तब़स्सुम़ मैडम... तुझे स्वर्ग की सैर कराता हूँ!" कहते हुए कुलद़ीप ने अपना बे-खतना लौड़ा मेरी चूत में डालना शुरू किया। मेरी चूत तो महीनों से चुदी नहीं थी और उससे पहले भी चुदी थी तो अपने मरहूम शौहर के लंड से जो लंबाई और मोटाई दोनों में कुल्दीप के लंड से आधे से भी कम था। इसलिये कुल्दीप को मेरी बेहद भीगी हुई चूत में भी अपना लंड दाखिल करने के लिये काफी ज़ोर लगाना पड़ रह था। दर्द के मारे मेरी ज़ोर से चींख निकल गयी तो उसने फौरन अपने होंठों से मेरे होंठों को सी दिया और ज़ोर से अपना पूरा लौड़ा मेरी चूत में आगे ढकेलने लगा। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी से ने गरम-गरम लोहे की मोटी सलाख मेरी चूत में घुसेड़ दी हो। मैं अपना सिर भी नहीं हिला पा रही थी और उसके जिस्म के नीचे कुचली पड़ी हुई दर्द से छटपटा रही थी और वो था कि मेरी चूत फाड़ने पर अमादा था। इतना दर्द तो मुझे अपनी सुहागरात में अपने शौहर से पहली दफ़ा चुदवाने में भी नहीं हुआ था।

उसका लंड मेरी चूत में फंस-फंस कर जा रहा था तो उसने मेरे होंठों से अपने होंठ हटा लिये और मेरी कमर में अपनी बाँहें डाल कर जकड़ते हुए ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचते हुए अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसाने लगा। मेरी टाँगें छटपटा रही थीं और मैं अपनी मुठियों में सूखी घास भींचे हुए बे-तहाशा चींखने लगी, "आआआईईईई.... हाय.... अल्लाह के लिये छोड़ दो... प्लीज़... ऊऊऊँईईई कुऽऽलदीऽऽप बहोत बड़ाऽऽ है तेरा...!"

"और चिल्ला साली रंडी... और चिल्ला... तुझे कहा था ना कि आज तेरी चूत फाड़ देंगे... साली तब़्बू क्लॉस में बहुत मारती है ना!" वो बोला।

"प्लीज़ मुझे छोड़ो... आआआअहहह ईईईई! नहीं प्लीज़..." मैं गिड़गिड़ायी तो चारों हंसने लगे। "अभी बोल रही है छोड़ दो... पर जब दर्द चला जायेगा और मज़ा आने लगेगा तो डियर तब्बू मैडम... तुम ही बार-बार कहोगी कि मुझे चोद दो!" एक लड़का बोला।
Reply


Possibly Related Threads...
Thread Author Replies Views Last Post
Thumbs Up Desi Sex Kahani रंगीला लाला और ठरकी सेवक sexstories 179 38,724 10-16-2019, 07:27 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna Sex kahani मायाजाल sexstories 19 5,289 10-16-2019, 01:37 PM
Last Post: sexstories
Star Incest Kahani दीदी और बीबी की टक्कर sexstories 47 49,975 10-15-2019, 12:20 PM
Last Post: sexstories
Star Desi Sex Story रिश्तो पर कालिख sexstories 142 137,236 10-12-2019, 01:13 PM
Last Post: sexstories
Star Antarvasna kahani नजर का खोट sexstories 120 325,942 10-10-2019, 10:27 PM
Last Post: lovelylover
  Sex Hindi Kahani बलात्कार sexstories 16 180,395 10-09-2019, 11:01 AM
Last Post: Sulekha
Thumbs Up Desi Porn Kahani ज़िंदगी भी अजीब होती है sexstories 437 189,743 10-07-2019, 01:28 PM
Last Post: sexstories
  XXX Kahani एक भाई ऐसा भी sexstories 64 420,057 10-06-2019, 05:11 PM
Last Post: Yogeshsisfucker
Exclamation Randi ki Kahani एक वेश्या की कहानी sexstories 35 31,819 10-04-2019, 01:01 PM
Last Post: sexstories
Star Incest Kahani परिवार(दि फैमिली) sexstories 658 707,206 09-26-2019, 01:25 PM
Last Post: sexstories

Forum Jump:


Users browsing this thread: 2 Guest(s)
This forum uses MyBB addons.

Online porn video at mobile phone


Pottiga vunna anty sex videos hd teluguअंजाने में बहन ने पुरा परिवार चुदाईsexbaba peerit ka rang gulabirinki didi ki chudai ki kahania sexbaba.net prfak mi yes bhaiya सेक्स स्टोरीबियफ कहानि पति पत्नी का b f xxx 61*62bhabhi ke nayi kahaniyanwww.coNpavroti vali burr sudhiya ke hindi sex storyBaby subha chutad matka kaan mein bol ahhhsadisuda didi se chudai bewasi kahaniNadan bachiyo ko lund chusai ka khel khilayaanju ke sath sex kiyavideohttps://www.sexbaba.net/Thread-amazing-indiansNafrat sexbaba.netwww.sexy stores antarvasna waqat k hatho mazbur ladkijaffareddy0863malish karbate time bhabhi ki chudaitki kahaniwww.saraaali khan xxx pusy nind vedio .comxxx massage karke chuppe se daal diyaअब मेरी दीदी हम दोनों से कहकर उठकर बाथरूम मेंSexbaba.comThakur ne rat bhar rulaya chudai kahaniXxxviboe kajal agrval porn sexy south indianXxx gand aavaz nekalaमुसल मानी वियफ तगड़े मे बड़ी बडी़ चूचीआह आराम से चोद भाई चोद अपनी दीदी की बुर चोद अपनी माँ पेटीकोट में बुरhindiantarvashna may2019Verjin sex vidio.sri lankan.chutad ka zamana sexbabasexysotri marati vidioeesha rebba fake nude picsactress shalinipandey pussy picsschool me chooti bachhiyon ko sex karna sikhanabroadmind Maa, Papa ka incest sex storiesmutmrke cut me xxxXnxx.com marathi thamb na khup dukhatay malamuh me pura ulti muhchodchaddi badate ladki xnx videoरंडी बहिणी च्या सेक्सी मराठी कथाvelemma hindi sex story 85 savita hdwww.bas karo na.comsex..sex babanet bahan bane mayake sasural ke rakhel sex kahanemom di fudi tel moti sexbaba.netDesi kudiyasex.comjuhi chaula ki boor me lund Dalne ki nangi photosHindi bolti Hui majedar chudai kasakasa landchootचूदाई हह आआआmaa bani Randi new sex thread XXXCOKAJALchoti bazi ki bur muh se chisai ki hindi bold sex kahani in hindixxxxbf movie apne baccho Ke Samne sex karne waliBollywood desi nude actress ananya pandey and tara sutaria sex babapativrata maa aur dadaji ki incest chudaiWww orat ki yoni me admi ka sar dalna yoni fhadna wala sexladkiya yoni me kupi kaise lgati hai xxx video de sathtv actress sayana irani ki full nagni porn xxx sex photosathiya shetty ki nangi photoPani me nahati hui actress ki full xxx imageindian auntys ki sexy figar ke photoउंच आंटी सेक्स स्टोरीxxxvrd gxxxvideoitnamotaबच्चू का आपसी मूठ फोटो सेकसीलंहगा फटा खेत में चुदाई से।maa beta ka real sex vidoes lockal hindiXxx hindi hiroin nangahua imgeचुत बुर मूत लण्ड की कहानीboksi gral man videos saxyमाँ बेटी की गुलाम बनी porn storieskes kadhat ja marathi sambhog kathaanjali mehta pussy sexbabaantarvasna थोङा धीरे करोमेरी बॅकलेस सारी और बेटाबाबा हिंदी सेक्स स्टोरीsonaksi xxx image sex babaMaa k sath chuttiyan betaye aur jam k sex keya maa beta sex storySadisuda badi bahan chote bhai ki galiwali sex storyDidi xnxx javr jateerumatk sex khane videoराजशरमा की कामुख हिँदी स्टोरी बाबा सेक्स नेट पेgeetha sexbabaIndian sex stories ಮೊಲೆಗೆ ಬಾಯಿ ಹಾಕಿದwww bus me ma chudbai mre dekhte huyehot sexi bhabhi ne devar kalbaye kapde aapne pure naga kiya videoxxxaunty se pyaar bade achhe sex xxxहोसटल मे चुदवाति लडकिPichala hissa part 1 yum storiesजबरदस्ति नंगी करके बेरहमी बेदरदी से विधवा को चोदने की कहानीsex. baba. net. pege. 17boor ka under muth chuate hua video hd