Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
11-07-2017, 11:57 AM,
#71
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
ननद की ट्रैनिंग – भाग 7
(लेखिका - रानी कौर)

आज उसका हाफ डे था, इसलिए दोपहर को ही स्कूल से आ गयी. साथ मे उसकी एक सहेली भी थी. गोरी, गदराई, तीखे नाक नक्श, बड़े उभार और हिप्स देख के लग रहा था कि खेली खाई है.

" मेरी सहेली है भाभी, दिया." गुड्डी ने इंट्रोड्यूस कराया.

" दिया,... अरे किसको किसको दिया." मैने हंस के, उसका हाथ पकड़ के पूछा.

" अरे भाभी ये पूछिए, किसको किसको नही दिया, मेरी सहेलियों मे सबसे पहले इसीने... ये तो एक्सचेंज प्रोग्राम मे भी... ." हंस के गुड्डी बोली.

दिया ने आँखे तरेर के गुड्डी को देखा तो मैने उनका ब्लाइंड फोल्ड और मूह मे ठुँसी पैंटी निकाल दी गुड्डी ने उससे बोला कि भाभी से मैं कुछ छिपाती नही और ये मेरी सबसे अच्छी सहेली भी है. मैं भी दिया को गले लगाती बोली कि हे ननद भाभी मे क्या शरम. गुड्डी ने उसकी पोल खोली कि जब वो 8 मे पढ़ती थी तो एक दिन उसके बड़े भाई ने उसे छिप के, जव वो एक ब्लू फिल्म देख रहे थे, देखते हुए पकड़ लिया, और उसी समय चोद दिया और तबसे उन दोनो मे लगातार..."

" और ये एक्सचेंज प्रोग्राम क्या है." 
मैने उत्सुकता से पूछा. 

दिया बोली, " भाभी, मेरी एक सहेली पे भैया का दिल आ गया था...और उस का भाई मुझे चाहता था . एक दिन हम चारों लोग साथ साथ पिक्चर देखने गये और फिर लौट के...फिर तो रेग्युलर....हम दोनो के भाई साथ साथ जाते थे इसलिए घर से परमिशन भी मिल जाती थी और कोई शक नही करता था."

" देख गुड्डी, सबक सीख अपनी सहेली से " 
मैने छेड़ा.

" अरे भाभी, मेरी क्लास मे अकेले यही बची है, जो क्लास के नाम पे दाग है." हंस के, दिया ने मेरा साथ दिया.

" अरे तुझे एक खुश खबरी सुनाऊ, दिया. अब ये भी, मेरे तेरे ग्रुप मे ज्वाइन कर गयी है"


अब गुड्डी की आँख तरेरने की बारी थी. वो बात बदलते हुए बोली, " भाभी मैं ज़रा स्कूल की ड्रेस चेंज कर के आती हू, तब तक आप लोग बात करे."

" अरे तूने बताया नही, और अभी तो हॉस्पिटल चलना था ना तुझे मेरे साथ" दिया बोली.

" अरे बैठो जल्दी क्या है, क्या हुआ तुम्हारी भाभी को" मैने पूछा

" अरे वही जो भाभियों को होता है, भाई की मेहनत का कमाल. उनके बच्चा होने वाला है."

तब तक गुड्डी फ्रॉक चेंज कर के आ गयी. (छोटी सी फ्रॉक, जिससे उसकी गोरी गोरी जंघे सॉफ दिख रही थी और लग रहा था कि घर मे पहनने के लिए जो मैने उसके लिए रूल बना रखा था, बिना ब्रा और पैंटी के, उसे उसने फॉलो किया था.)
" हे दिया, भाभी को बताओ ना. कल हॉस्पिटल वाली बात" गुड्डी ने उसे उकसाया

" अरे कल रात मे मैं वही थी. जो रेसिडेंट डॉक्टर था वो तो सुनता ही नही था और नर्स के पास गयी तो उसने उल्टे मुझसे पूछा कि जब तुम्हारी भाभी डलवा रही थी तब तो हंस के डलवा रही होंगी और अब जब निकलने वाला है तो क्यों चीख रही है. वही पास मे एक और औरत थी वो बोली कि इत्ता दर्द हो रहा है कि अब मैं कान पकड़ती हू दुबारा नही करवाउंगी. पर नर्स ने कहा कि अरे मैने बहोत देखा है, साल भर के अंदर दुबारा आ जाओगी पेट फूला के. ऐसे खुल के मज़ाक हो रहे थे...कि."

तब तक राजीव वहाँ आ गये. उनको देख के सब लोग खड़े हो गये. वो दिया की सीट पे बैठ गये. सब लोग बैठे पर दिया खड़ी रही और कोई सीट थी नही. मैने उसे चॅलेंज किया,

" हे बैठ जाओ ना, अपनी भैया की गोद मे, क्यों डरती हो क्या, कि..."


" अरे भाभी डरना क्या, जिसके मन मे चोर हो वो डरे..." ये कह के वो राजीव की गोद मे बैठ गयी.

" और क्या दिया, जैसे तेरे भैया वैसे मेरे, मज़े से बैठ." गुड्डी ने उसके और उसके भैया के रिश्ते की ओर इशारा करते हुए छेड़ा. राजीव टी शर्त और शर्ट मे हॅंडसम लग रहे थे. दिया उनकी ओर वासना भरी निगाहों से देख रहे थे. और राजीव भी...एक खूबसूरत टीनएजर, गोद मे बैठी हो तो...उनका खड़ा होना शुरू हो गया था. उनकी आँखे बार उसके नशीले उभार की ओर जा रही थी और दुष्ट दिया भी, हल्के हल्के अपना भारी सेक्सी चूतड़ उस पे रगड़ रही थी.

" हे, कुछ गढ़ तो नही रहा है." मैने उसे छेड़ा.

" अरे गड़ भी रहा होगा तो ये बोलेगी नही' गुड्डी ने भी मेरा साथ दिया.

थोड़ी देर मे दिया उठ गयी और गुड्डी से बोली कि अच्छा चल अब तू बैठ, ज़रा मैं बाथ रूम होके आती हू उनके शर्ट मे उनका खड़ा खुन्टा एकदम सॉफ सॉफ दिख रहा था.

" ठीक तो कह रही है ये. हिम्मत हो तो बैठ के दिखा दे."
 मैं गुड्डी से बोली.

" अरे भाभी आपकी ननद हू, ये क्यों भूल जाती है आप " और उनकी गोद मे जाके बैठ गयी. बैठने मे उसकी छोटी सी फ्रॉक सिकुड के बिलकुल उपर तक उठ गयी थी. जैसे ही दिया बाहर गयी, मैने उसकी फ्रॉक बिल्कुल कमर तक खींच दी और उनका शर्ट भी नीचे सरका दिया. अब तो सटाक से उनका तननाया लंड सीधे निकल के उसकी जाँघो के बीच मे आ गया. मैने दोनो को इस तरह पकड़ रखा था कि वो हिल नही सकते थे. काफ़ी देर तक उनका लौंडा उसकी चूत पे ठोकर मारता रहा. कसमसाने की दोनो आक्टिंग कर रहे थे, पर मुझे मालूम था कि मज़ा दोनों को आ रहा है. जब दिया की आने की आहट हुई तो दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए.

" हे तुम बात रूम मे इत्ति देर ...कुछ और तो नही कर रही थी, भैया की गोद मे बैठ के कुछ गड़बड़ तो नही हो गया था."

" क्या पता भाभी..." 
उस ने भी उसी अंदाज मे हंस के जवाब दिया."

" मैं तैयार हो के आती हू अभी." 
गुड्डी उठते हुए बोली.

" चल, मैं तेरे कपड़े निकाल के देती हू और हाँ तब तक तुम लोगों को जो गड़बड़ करना हो कर लेना." दिया और राजीव से मैं बोली.

गुड्डी जब लौटी तो उस पे आँख नही टिकती थी. लैयकरा का टाइट शोल्डर लेस टॉप, और वो इत्ता टाइट था कि उसके उभार सॉफ सॉफ दिख रहे थे और लो कट भी,गहराई कटाव सब कुछ और उसके अंदर एक पुश अप हाफ कप ब्रा थी. उसके उभार कम से कम दो नंबर ज़्यादा लग रहे थे और निपल ना सिर्फ़ ब्रा से थोड़े निकले हुए थे बल्कि टाप से रगड़ खाते हुए उनकी झलक सॉफ दिख रही थी. और उदर दर्शाना तो जींस थी ही उसके चूतडो के पूरे उभार सॉफ दिख रहे थे और वो इतनी लो कट थी कि नितम्बो के क्रैक भी...राजीव की निगाह तो उसके जोबन पे फिर मस्त चूतडो पे चिपक गयी थी

" हे कैसे और कब तक लोटोगी तुम." मैने पूछा.

" भाभी थोड़ी देर तो हो जाएगी." दिया बोली.

कोई बात नही हम लोग भी शापिंग के लिए जाएँगे और देर से ही आएँगे और लौटने का.."
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11-07-2017, 11:57 AM,
#72
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" डरिये मत मैं छोड़ दूँगी आपकी ननद को.." हंस के दिया बोली.

" अरे नही भाभी, मैं आ जाउन्गि." और वो दोनो हँसते खिलखीलाते चल दी.

देर शाम जब वो लौटी तो मैं किचेन मे खाने की तैयारी कर रही थी, राजीव अपने किसी दोस्त के यहाँ गये थे. वो बड़ी खुश खुश लग रही थी. मैने पूछा, " हे, किसके साथ आई और बड़ी चहक रही है चिड़िया क्या कोई खास बात हुई हॉस्पिटल मे."

" भाभी, नीरज के साथ आई. उसकी बाइक पे. बड़ी अच्छी बाइक है. पूछ रहा था इतने दिन से दिखी नही तो मैं बोली जनाब आप ही कौन से दिखे तो हंस के उसने मान लिया. उसक पेरेंट्स आए है तीन चार दिन मे चले जाएँगे, फिर वो अकेला रहेगा.'

" क्यों बाइक ही अच्छी लगी या बाइक वाला भी."

" बाइक वाला भी, स्मार्ट, डॅशिंग लग रहा था, जीन्स और टी-शर्ट मे. दिया तो एकदम जल गयी वो सोच भी नही सकती थी की इत्ता हॅंडसम लड़का मुझे इस तरह से, मुझे देख के खुद आया और वो बहाने बना के बात कर रहा था और जब मैने कहा कि मुझे घर जाना है तो तुरंत वो कहने लगा हे मेरी बाइक पे चलो ना. और जान बुझ के उसे जलाने के लिए जब मैं बाइक पे बैठी ना तो उसके कमर पे हाथ बाँध लिया, और फिर तो वो ऐसी जली...." हंस के गुड्डी बोली.

" अरे देखना एक दिन शहर के सारे लड़के तेरे दीवाने होंगे पर बता हॉस्पिटल मे क्या हुआ."

" अरे भाभी हॉस्पिटल मे वो जो दिया कह रही थी ना डॉक्टेर, वो रेसिडेंट डॉक्टेर वही जाइनो मे पी.जी कर रहा है, जो कल एकदम उन लोगों को घास नही डाल रहा था ना, अनुज नाम है उसका जब मैं गयी ना तो मुझसे न सिर्फ़ प्यार से मिला बल्कि काफ़ी भी पिलाई. बहोत देर तक हम बाते करते रहे. बल्कि उसने मुझसे कहा कि मैं इंटर करने के बाद मेडिकल मे एडमिशन ले लू. उसने भाभी अपने कमरे पे मुझे बुलाया. मैने भी कहा जब तक ये यहाँ एडमिट है तो मैं आती जाती रहूंगी,
तो बोला अरे तो मैं तो रहूँगा ना उसके बाद तो फिर क्या नही आओगी. ऐसी बाते कर रहा था कि.."


" देखने मे कैसा था..."

" भाभी, बहोत हॅंडसम, लंबा, तगड़ा क्या मसल्स थी, और हँसता खूब था."

मैं हँसने लगी .

" क्यों हंस रही है आप, " चकित हो के उसने पूछा.

" मर्द मे जानती हो तीन चीज़े देखनी चाहिए. और ये बात मेरी मम्मी ने मुझे तब बताई थी जब तुम्हारे भैया मुझे देखने आए थे. आँखे, आँखे खुश खुश होनी चाहिए और ये भी कि वो नजरे मिला पा रहा है या नही और मम्मी ने ये भी बोला था कि वो छुप के तुम्हारे सीने की ओर देख रहा है कि नही. अगर उसकी आँखों से वो तुम्हारे कपड़े उतार के चक्षु चोदन ना करे तो बेकार ...बोर होगा वो. और दूसरी चीज़ है उसके होंठ, मुस्कान, सेन्स ऑफ ह्यूमर, और उस पे डिपेंड करता है कि वो चूमने के लिए कितना बेताब है. और तीसरी चीज़ है उसके हिप्स, कित्ते छोटे, कड़े और सख़्त मसल्स है वहाँ की,


" पर भाभी हिप्स ...क्यों"

" अरे पगली धक्के लगाने के लिए, चोदने के लिए ताक़त की ज़रूरत पड़ती है ना. मेरी भाभी ने कहा था एक ओर मसल्स होती है तो मम्मी ने कहा कि ये तेरा काम की ननदोयि की वो वाली मसल्स चेक कर लेना, तो कैसा हे तेरा ये डॉक्टेर, इस टेस्ट मे."

" भाभी चौथी का तो अब तक नही मालूम पर बाकी तीन मे तो एकदम 10 मे 10. निगाहे तो उसकी एकदम मेरे सीने पे ही चिपकी थी और बात बात पे जॉक सुनाता था और कयि तो एकदम नोन वेज."


" अरी ननद रानी तेरे उभार है ही ऐसे अच्छा एक बात इनके लिए मैं कुछ चोली सिलवा के ले आई हू, जो तुम लोगों का बार डॅन्सर की लाइफ वाला प्ले हो रहा है ना उसके लिए बॉब्बी टेलर्स के यहाँ. मैं आज गयी थी उसके यहाँ तेरी ड्रेस लाने और अपनी नाप देने. मैं तेरे लिए कुछ और कपड़े दे आई हू, तू दो तीन दिन मे उधर जाना तो, नाप भी दे देना और उसके पैसे भी."

" भाभी, आप ने सिर्फ़ नाप दिया या और कुछ..." अब मेरी चिड़िया भी चहकने लगी थी.

" अरे तेरे भैया साथ थे. पर तू जाएगी ना तो दे देना सब कुछ... बहोत याद कर रहा था तुझे, बहोत प्यार से तेरे लिए चोलिया सिलि है उसने.

" भाभी एक बात और सुबह से मैं परेशान थी आप को बताने के लिए पर जब स्कूल से आई तो दिया साथ थी.. और फिर मैं उसके साथ चली गयी. आज वो मिला था, अंशुल. बहोत रिकवेस्ट कर रहा था, प्लीज़ भाभी बस एक बार...वो कह रहा था कि किसी तरह,थोड़ी देर के लिए भी. तीन दिन बाद नरसों उसे गाव जाना है, वो 6-7 दिन बाद ही लौट पाएगा. भाभी ..प्लीज़"

" हे बहोत सिफारिश कर रही है. पहले चिट्ठी का जवाब तक नही देती थी और अब उसको बोल देना जब गाव से लौट आएगा तब तक इंतजार करे." बहुत मुश्किल से मैं अपनी मुस्कराहट रोक पा रही थी.'

" भाभी, आप ठीक कह रही है पर वो बिचारा आख़िर इत्ते दिन से मेरे पीछे पड़ा था, मैं उसे लिफ्ट भी नही देती थी तब भी लगा रहा आख़िर. भाभी आप चाहेगी तो उस का मैं मन रख लूँगी दुबारा मैं आप से रिकवेस्ट नही करूँगी. प्लीज़ भाभी."

" ओके, ननद रानी तुम भी क्या याद करोगी. परसों रात मे तुम्हारे भैया नही रहेंगे. वो सुबह ही चले जाएँगे और अगले दिन आएँगे. तो बुला लो परसों रात को अपने यार को. और थोड़ी देर क्यों, बात तो सही है, बहोत तड़पाया है तुमने बेचारे को. चलो. परसों रात भर मज़े करो. खुश हो जाएगा तेरा यार. तुम्हारे कमरे का जो दरवाजा बाहर खुलता है ना, उसे खोल के रखना और बाहर वाले गेट की डुप्लिकेट चाभी अपने यार को दे देना. उसको समझा देना कि जब लाइट बंद हो तो उसके ठीक 15 मिनट बाद आ जाए."

" अरे भाभी, आप बहोत बहोत.... अच्छी है ओह्ह रियली भाभी पूरी रात भर, मैं सोच भी नही सकती थी...भाभी मैं कुछ भी...कुछ भी कर सकती हू आप के लिए, मेरी अच्छी भाभी" और उसने मुझे गले से लगा लिया.और मैने भी उसे कस के भींच के गालों पे कस के चूमते हुए कहा, " ननद रानी अभी तो फिल हाल तुम मेरी किचिन मे मदद करो, ज़रा आज खाने की जल्दी है"

" एक दम भाभी, कल भैया को जल्दी थी आज लगता है...आप को जल्दी है और ये जूस क्या बना रही है, लाइए, मैं बना देती हू.

" अनार का जूस. तुम्हारे भैया के लिए. बहुत ताक़त देता है." उसने मुझसे मिक्सी ले ली और बनाने लगी. मुझे छेड़ते हुए वो बोली, भाभी आज कल भैया को कुछ ज़्यादा ही ताक़त की ज़रूरत पड़ रही है. मैं कुछ पलट के जवाब देती उससे पहले उसने पूछा, " भाभी, भैया को सबसे ज़्यादा क्या पसंद है."

" तेरे ये सेक्सी मम्मे" मैने उसके उभारों को दबाते हुए चिढ़ाया.
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11-07-2017, 11:57 AM,
#73
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“तेरे ये सेक्सी मम्मे…” मैंने उसके उभारों को दबाते हुए चिढ़ाया। 

गुड्डी- “वो तो मुझे मालूम है, मेरा मतलब है, खाने में…” 

“खाने में, खाने में उन्हें नान-वेज बहुत अच्छा लगता है और नान-वेज में सब कुछ, तंदूरी चिकेन, मटन कोरमा, बिरयानी…” 

गुड्डी- “पर भाभी, ये सब तो कभी बनता नहीं…” उसने आश्चर्य से पूछा। 

“तेरे मारे ननद रानी तू जो नम्बरी भगतिन है, शुद्ध शाकाहारी। वो सोचते हैं कि पता नहीं तुम्हें बुरा लगे? अच्छा चल इसको फ्रिज़ में रख, चल तुझे उनके सब काम बता दूं…” और मैं उसे लेकर उनके कमरे में गयी। मैंने उसे बताया की जब वो आते हैं तो सबसे पहले उनका जूता उतारना झुक के और फिर मोजे, अपने घुटने पे उनका पैर रख के। हां थोड़ा बहुत पैर का, तलुवों का मसाज भी कर देना और चाहना तो आगे भी बढ़ सकती हो। ये इधर स्लीपर रखे हैं वो दे देना। और उनकी शर्ट भी मैं ही उतारती हूं। और फिर उसे आल्मारी खोलकर दिखाया कि कहां उनकी शर्ट, टी-शर्ट अंडर-गार्मेंटस रखे हैं। 

एक बंद खाने को देखकर उसने पूछा- ये क्या है? 

मैं टालती रही पर बहुत कहने पे मैंने खोला। वो उनकी बार थी। 

गुड्डी- “हे भाभी ये। ऐसे छिपा के क्यों?” 

“वो भी तुम्हारे चलते रानीजी उन्हें पता है तुम्हें शायद बुरा लगे…” 

गुड्डी- “भाभी, पर भैया ने कब से? शादी के पहले तो वो नहीं…” 

“अरे जिंदगी का हर मजा आखिर आदमी कभी ना कभी लेना शुरू करता है, उनकी सास का इसमें बड़ा हाथ है, अपने दामाद को बरबाद करने में। मेरे मायके में सभी लेते हैं, लेडीज भी…” 

उसे बंद करके हम लोग किचेन में आ गये। वो कुछ सोच रही थी। थोड़ी ही देर राजीव आ गये। वह अनार का जूस लेकर उनके पास चली गयी। जब तक वो उन्हें ‘फ्रेश’ करती रही, मैंने जल्दी-जल्दी खाना बना लिया। खाने के बाद वो ऊपर चले गये और हम लोग किचेन समेटने में। 

ऊपर जाने के पहले जब मैं दूध लेकर गुड्डी के कमरे में गयी तो मैंने उसे समझाया- “सुन, परसों तेरा रात भर का प्रोग्राम है ना तो आज से डिल्डो, कैंडिल सब बंद। हां, वो कसरत तुम करती हो ना? जो मैंने बताया था, सोने के पहले सब कपड़े उतारकर शीशे के सामने अपने हर अंग को देखना, उसे हल्के-हल्के छूना…” 

गुड्डी- “हां भाभी…” 

“और वो जो ‘जे’ की ‘हाउ टू बिकम ए सेन्सुअस वोमेन’ वाली किताब में दी गयी है वो, अपनी बाडी को छूना, बाडी से छू के स्पर्श की संवेदना बढ़ाना, और वो जीभ की कसरत और सबसे जरूरी है, के-जेल मैंने कहा था ना हर घंटे पे, अपनी चूत की मस्ल्स को सिकोड़ के बस सारा ध्यान वहीं लगाना…” 

गुड्डी- “हां भाभी, वो मैं करती हूं यहां तक की क्लास में भी…” 

“शाबाश, हां तुम उँगली कर, बल्की जरूर करना रात में कम से कम तीन बार झड़ना लेकिन हर बार कोशिश करना की जितनी देर टाल सको और हां सिर्फ उँगली की टिप अंदर डालकर और बिना क्लिट को छुए। और हां आज बिना कुछ भी पहने सोना। सोने के पहले बिस्तर पे रोल करना और अपने यार या यारों के बारे में सोचना…” 


जब मैं मुड़ने लगी तो कुछ और याद आया- “हे, कल तुम क्लास गोल कर देना। तुम्हारे भैया कल सुबह ही चले जायेंगे और फिर हम दिन भर मस्ती करेंगें। मैं तुम्हें सेक्स पोज़िशन्स के बारे में बताऊँगी। तुम रात में कोक शास्त्र और कामसूत्र से 64 आसन के बारे में भी पढ़ लेना। सुबह तुम्हारा टेस्ट होगा…” और उसको कसकर एक गुडनाइट किस लेकर मैं ऊपर राजीव के पास चल दी। 

अगले दिन राजीब बहुत सुबह ही चले गये थे। जब मैं बेड-टी लेकर गुड्डी के पास पहुँची तो वो बिना कुछ पहने लेटी थी। बेड-टी के बाद, उसने कपड़े पहनने की कोशिश की पर मैंने मना कर दिया। मैं बोली- “चलो पहले कसरत करते हैं…”

वो बोली- “भाभी, ये बेइमानी है मैं कुछ नहीं पहने हूं और आप…”

“मान गये बात तुम्हारी ननद रानी…” और मैंने भी नाइटी उतार दी।

पहले मैंने योगा और प्राणायाम से शुरूआत की। मैंने उसे समझाया की सेक्स के दौरान इसका कैसे इश्तेमाल कर सकते हैं और सही ब्रीदिंग से कैसे स्टेमिना बढ़ती है। उसके बाद म्युजिक लगाकरके साथ-साथ हम दोनों ने एरोबीक्स की। फिर मैंने जेन फोंडा का कैसेट लगाके उसके साथ कसरत की। मैंने उसे खास तौर से पेल्विक मसल्स, जांघों, पैरों और कमर की कसरत करवाई। उसके बाद रिलैक्शेसन टेक्निक। फिर कहा- “अब रोज 30- 45 मिनट तक तुम ये करना और अब चलो वो वाली कसरत…” 
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11-07-2017, 11:58 AM,
#74
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हम दोनों पलंग पे आमने सामने बैठ गये। मैंने उससे कहा- “अब तुम आँख बंद करके अपने एक-एक बाडी पार्ट को छुओ, उसके स्पर्श को इन्ज्वाय करो और उस समय सिर्फ उसी अंग को महसूस करो और थोड़ा जोर से उस अंग का नाम लो…” 

उसने आँख से शुरू किया पर जब वह सीने तक पहुंची तो, वो थोड़ा हिचकी और बोली- “सीना…” 

“ना… अब तुम वही शब्द इश्तेमाल करोगी जो तुम्हें बताया था, बोलो चूची और फिर से शुरू करो…” मैंने कहा।

अबकी उसने कोई हिचक नहीं महसूस की और अपनी चूत, गाण्ड सबको उसी तरह स्पर्श करके बोली। 

“ठीक है अब तुम आँखें बंद करके मेरे हर अंग को छुओ और उसके नाम लो…” उसके बाद यही कसरत मैंने की। मैंने उसके हर अंग छुये और उसने नाम लिया और फिर हम दोनों ने साथ-साथ। ठीक है चलो नाश्ता कर लो और उसके बाद तुम्हारी ट्रेनिंग होगी। 

गुड्डी- “भाभी, प्लीज अब तो कपड़े पहन लें…” कमरे से बाहर निकलने के पहले वो बोली। 

“ना ना… किससे शरमा रही है? कल रात भर यार के साथ तो नंगी रहेगी, और मेरे सामने…” 

बरामदे में डाइनिंग टेबल पे नाश्ता करके हम लोग फिर कमरे में आ गये। मैं अपना ‘ट्वाय बाक्स’ भी साथ ले आई-“चल ये मान की मैं तेरा यार हूं, अंशुल या कोई भी लड़का, मर्द। मैं एक मर्द की तरह तुझे चिपकाऊँगी, चूमूंगी और तू रिस्पांड करना, जैसे अपने यार के साथ करेगी…” 

गुड्डी- “ठीक है भाभी…” वो बोली। 

मैंने उसे अपने आलिंगन में भर लिया और होंठो पे चूम लिया। उसने भी कसकर रिस्पांड किया। 

“उंहू… ऐसे नहीं, पहले लड़के को शुरूआत करने दो। फिर हल्के से होंठ हिला के रिस्पांड करो, और फिर जब वो कस-कसकर चूमने लगे तो फिर तुम भी। और वो अगर जीभ मुँह में डाले तो उसे कुछ देर बाद हल्के से चूसो और अपनी जीभ का भी इश्तेमाल करो। चलो फिर से…” 

अबकी जब मैंने चूमा तो उसके होंठ हल्के से हिले, जैसे हवा के जोर से कोई फूल लहरा जाये। 

“एकदम ठीक… जानती हो कामसूत्र में इसे सफुरक कहते हैं। ठीक अब कस के…” और फिर मैंने धीरे से उसके होंठों पे दबाव बढ़ाया और चूमते-चूमते, चूसने लगी। 

वो भी अब रिस्पांड कर रही थी। फिर मैंने उसके होंठों के बीच अब जीभ घुसेड़ दी। कुछ रुक के वो जीभ हल्के से चूसने लगी, और फिर तो थोड़ी देर में जीभ की लड़ाई शुरू हो गयी। कुछ देर चूमने के बाद मैंने होंठ हटाये तो वो मुझे देख रही थी। 

“एकदम सही 10 में 10, लेकिन एक बात- जब लड़का होंठ हटा ले तो इसका मतलब ये नहीं की तुम चूम नहीं सकती और चूमना सिर्फ होंठ पे हो ये भी जरूरी नहीं। तुम उसकी आँख, गाल, ठुड्डी कहीं भी चूम सकती हो और हां, मर्द अक्सर कानों के लोब्स पे बड़े सेंसिटिव होते हैं। एक बात और… शुरू में तुम्हें कम पहल करनी चाहिये क्योंकी कुछ मर्द असुरक्षित होते हैं, और कुछ शुरू में खुद पहल करना चाहते हैं पर बाद में तुम एकदम जम के बराबरी कर सकती हो। चल, एक बार फिर से। और जैसे मैं करूं ना, वैसे तुम रिपीट करो…” 

हम लोगों ने दुबारा चुंबन क्रीड़ा शुरू कर दी। अबकी हम लोग खुलकर जीभ का इश्तेमाल कर रहे थे। कभी मैं उसकी जीभ को हल्के से चूसती तो कभी वो मेरी जीभ चूसती, कभी मैं हल्के से जीभ फ्लिकर करती, कभी उसके मुँह में घुमाती, कभी जीभ एक दूसरे का पीछा करती और एक बार तो मैंने हल्के से काट भी लिया। 
अबकी जब हम लोग अलग हुए तो मैं बोली- “इसे फ्रेंच किस कहते हैं, और सच में इसमें बहुत मजा आता है…” 

गुड्डी- “हां भाभी…” 

“और किस के समय, सर चेहरा कैसे पकड़ना चाहिये, ये भी इम्पार्टेंट है। किस के बाद ये ध्यान देना चाहिये की अचानक बाडी कांटैक्ट ना टूटे। और होंठ हमेशा अट्रैक्टिव होने चाहिये। इसलिये कुछ मेक-अप हो ना हो, हल्की लिपस्टिक हमेशा होनी चाहिये, और तेरे होंठों पे तो वेट-लुक बहुत सेंसुअस लगेगा। अचछा चल अब मेन कोर्स पे…” 

हम दोनों पलंग पे आ गये। मैंने उससे कोक शास्त्र और कामसूत्र दोनों निकालकर लाने को कहा। मैंने सबसे पहले मिशनरी पोजीशन से शुरूआत की- “देख ये सबसे कामन पोजीशन है, इसमें मर्द ऊपर रहता है। लेकिन एक बात और… शुरूआत में तुम्हारी उमर में ये जरूरी है कि टांगें जितना फैला सकती हो उससे भी ज्यादा फैलाओ, और टांगें ऊपर रखो। अगर कम दर्द से चुदाना है तो ये जरूरी है। हां तो इस आसन में फायदा ये है की पूरी देह संपर्क में रहती है। मर्द के लिये ये मजा है की वो मन भरकर चूची दबा सकता है, चुम्मी ले सकता है। और तुम्हारे लिये- तुम हल्के-हल्के उसके धक्के के साथ अपने चूतड़ उठाओ। टांगें वो अपने कंधे पे रख सकता है, घुटने से मोड़कर टांगें फैला सकता है, या कसकर मोड़कर दोहरा कर सकता है। अक्सर शुरूआत, टांगों को कंधे पे रखकर होती है। ये फोटो देखो, टांगों की पोजीशन… और ये देखो थोड़ा सा अलग है इसमें मर्द थोड़ा सा और आगे बढ़के लेटा है औरत के ऊपर, और दोनों टांगें सीधे करके लेटे हैं। इसमें दो फायदा है- कई बार टांगें उठाये-उठाये दुखने लगती हैं तो वो आराम मिल जाता है और दूसरा जो ज्यादा मजे वाली बात है, इसमें क्लिट सीधे, लण्ड के बेस से रगड़ खाती है। इसमें भी ढेर सारे वैरीयेसन हैं। तुम उसकी पीठ, चूतड़ पकड़ सकती हो। अच्छा, थ्योरी बहुत हो गयी। चल, अब तुझे प्रैक्टिकल करके बताती हूं…”

गुड्डी- “प्रैक्टिकल… वो कैसे भाभी?”

“वो ऐसे…” और मैंने अपना स्ट्रैप-आन निकाला। फिर कुछ सोचकर उसमें अपना सबसे पतला और छोटा 6 इंच का वाइब्रेटर सेट किया। उसके सिरे पे वैसलीन लगाकर गुड्डी की चूत के मुँह पे भी लगाया और उसके सामने बैठकर उसकी टांगें अपनी कंधे पे ले ली। मैंने चूत का मुँह फैलाकर अंदर थोड़ा सा पेल दिया और कहा- “देख, हां इसी तरह तुम जित्ती टांगें चौड़ी करके और उठाकर रखोगी उत्ता ही आराम होगा चुदवाने में। और जब वो तुझे चूमे, चूची पकड़े तो तुम भी उसे बाहों में ले सकती हो…” 
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11-07-2017, 11:58 AM,
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फिर मैंने पोज बदली और उसकी टांगों को घुटने से मोड़कर, फैलाकर हल्के-हल्के चोदना शुरू किया और बताया की इस तरह थोड़ा टांगों को आराम मिलता है। इस आसन में जब लण्ड थोड़ा अंदर चला जाय तो तुम्हें भी धक्के लगाना चाहिये। एक हाथ से उसके चूतड़ को उठाके मैंने धीरे-धीरे पूरा वाइब्रेटर अंदर घुसेड़ दिया। अब मैं उसकी चूची रगड़ रही थी और गाल चूम रही थी। 

उसकी आंखों में आँखें डाल के, मैंने समझाया- “अब तुम कैंची की तरह टांगें ऊपर करके चूतड़ पे बांध लो, और जब लण्ड अंदर जाय तो उसे साथ-साथ दबाकर के, खींच सकती हो…” 

उसने वैसे ही किया। थोड़ी देर उस तरह करने के बाद, हम दोनों ने टांगें एक साथ सीधी कर लीं और मैंने उसे थोड़ा आगे करके वाइब्रेटर के बेस से उसकी क्लिट को रगड़ना शुरू किया। मजे से उसकी आँखें बंद होने लगीं। मैं बोली- “ये असली फायदा है इसका, देख क्लिट की इसमें रगड़ाई कैसे होती है…” इसी तरह करके मैंने सारे वैरियेसन बताये और उनके फायदे भी। 

“देख, हर तरह की साइज, स्पीड वाले मर्द, मोटे और पतले, तुझे मिलेंगे। तो अगर ये मालूम हो तो तुम उसी तरह से पोजीशन बदल के पूरा मजा ले सकती हो। और ये तो हुई आसन की बात उसी के साथ है कैसे धक्के लगायेगा वो। हम औरतों के साथ सबसे गड़बड़ बात ये है की ज्यादातर किताबें मर्दों के लिये लिखी रहती हैं इसलिये मैं तुम्हें इतना डिटेल में समझा रही हूं…” 

गुड्डी- “भाभी, आप तो मुझे एकदम एक्स्पर्ट बना देंगी…” 

“अरे और क्या? देख क्रिकेट वालों को, कोई शाट पढ़ो तो कितना डिटेल में बताते हैं कि किस बाल पे क्या फुटवर्क होगा, कहां जोर देना होगा। लेकिन उसकी तैयारी करके नेट में प्रैक्टिस करके कैसे वो हर बाल पे चौके छक्के जड़ते हैं। इसी तरह से मेरी ननद पढ़ के फिर प्रैक्टिस करके चुदाई में चौके छक्के मारेगी…”
 और ये कह के, मैंने उसकी दोनों किशोर चूचियों को कसकर पकड़कर एक करारा धक्का मारा। 

गुड्डी- “हां भाभी…” कहकर उसने भी चूतड़ उठाकर, धक्के मारकर जवाब दिया। 

मैंने उसे उसी तरह, पकड़े पकड़े उठाकर गोद में बिठा लिया और उसे सिटिंग पोजीशन के बारे में बताने लगी, की इसमें मर्द कसकर चूची का मजा ले सकता है, चूम सकता है। मैं उसकी पीठ और चूतड़ पकड़ के हल्के धक्के मार रही थी और वो भी गांद हिला हिला के जवाब दे रही थी. एकदम नेचारूल चुदक्कड थी मेरी ननद और ज़रा सी ट्रैनिंग से वो पक्की छिनार बनने वाली थी. और मैं भी उस की ट्रैनिंग मे कोई कोर कसर बाकी नही छोड़ने वाली थी. मैने उसे समझाया, " देख काम सूत्र मे भी इस पोज़िशन के बड़े तरीके बताए गये है. अगर मुख से मुख, जंघाओं से जंघाएँ, बाहों से बाँहे जुड़ी रहती है. ऐसे. हाँ इसी तरह, तो उसे कुर्म आसन कहते है अगर तुम्हारी जाँघो के बीच की गुफा मे डाल के, वो अपने नितंब, भौरे की तरह घुमाता है, तो उसे मरकट आसन कहते है. जब तुम्हारे उरोज उसके सीने से रगड़ खा रहे हो, तुम दोनों अपनी पैर क्रास कर के अपनी एडीया सटा के, झूले की तरह आगे पीछे होते हुए चुदाई करो तो उसे दोलित या झूला आसान कहते है." इस तरह मैने बैठ के चुदाई के सारे पॉज़ उसको अच्छी तरह दिखाए.


" पर भाभी, इस मे नुकसान क्या है,"

" देख, पहले फ़ायदा समझ ले. गोद मे बैठ के चुदने मे चुम्मा चाटि, चूंची की रगड़ा रगड़ी का खूब मज़ा है पर इसमे कस के धक्के, नही लग सकते. इसीलिए, ये आसन अक्सर शुरू या अंत मे नही इस्तेमाल कर के, चुदाई के बीच मे करते है. इससे मज़ा प्रोलॉंग हो जाता है."

धीरे धीरे दोपहर हो गयी थी. मैने कहा अब इंटरवल की छुट्टी, बाकी क्लास नहा धो के, खाने के बाद लगेगी. नहा हम साथ साथ रहे थे, और उसमे भी छेड़ खानी जारी थी. वो बोली, " भाभी, आज आप को मैं साबुन लगाउन्गि, जैसे भैया से आप लगवाती है." और हाथ मे साबुन ले के पहले तो उसने मेरे पीठ पे लगाया और फिर दोनो स्तनों पे रगड़ने लगी. मैं क्यों पीछे रहती. मैने नोज़ल शावर लेके, सीधे उसकी चूत पे हमला किया और उसकी चूत के बीच मे फिर क्लिट पे कस के धार छोड़ी. देख शावर से भी कैसे मज़ा ले सकते है, 

शायद शावर का ही असर था, वो बोली, " भाभी, मुझे ...आ रही है..."

" क्या..बताओ ना." मुस्कराहट दबा के मैं बोली.

" वही...ज़ोर से लगी है."

" खुल के बोलो... तो करने दूँगी." 
उसे पकड़ के मैं बोली.

" मुझे ...पेशाब लगी है, बहोत ज़ोर से." 
किसी तरह रोकती वो बोली.

" उहू रानी ऐसे नही, जैसे मैने तुम्हे बाकी चीज़े सिखाई है ना, वैसे बोलो."

" ओहो भाभी, मुतना है मुझे."


" अरे तो मुतो ना, टाय्लेट तो है. जा के बैठ जा."

" ऐसे कैसे आप के सामने, आप प्लीज़ थोड़ी देर बाहर चली जाइए ना या आँखे बंद कर लीजिए."

" देख, हनिमून मे तुम्हारे भैया ने सिर्फ़ इसी लिए मुझे हड़काया था. हम लोग साथ साथ नहा रहे थे और यही बात मैने भी कही तो वो डाँट के बोले कि जब हम हर काम साथ साथ बिना किसी शर्म के कर रहे है तो इसमे कौन सी शर्म. हमे सारे बॉडिली फंक्षन एक दूसरे के सामने करने चाहिए और फिर और उन्होने प्यार से समझाया भी कि, बॉडी फंक्षन और बॉडी फ्लूईड से चूँकि तैबु जुड़े रहते है, इस लिए उसे तोड़ना ज़रूरी है. फिर वो ये भी बोले की लड़कों को देखो, साथ साथ दीवाल के किनारे खड़े हो जाते है और लड़कियाँ भी, गाव मे तो औरते साथ साथ जाती है,"
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11-07-2017, 11:59 AM,
#76
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
उसके मूत्र के छिद्र पे पूरी तेजी से शावर का प्रेसर डालती मैं बोली। अब उसकी हालत वाकई खराब हो गयी थी और वो जांघों को सिकोड़ के बैठी थी। 

गुड्डी- “भाभी, आप भैया का बदला बहन से ले रही हैं बस प्लीज थोड़ी देर आँखें बंद कर लीजिये और आखिरी बार। आगे से मैं नहीं कहूंगी, आपके सामने। कर लूंगी…” 

“ओके, लो, लेकिन बस एकदम थोड़ी देर…” और मैंने जैसे ही आँखें बंद की वो बैठ गयी। मैं उसके ठीक बगल में खड़ी थी और उसे कनखियों से देख रही थी, जैसे ही सुनहली धार तेज हुई, मैं समझ गयी की वो रुक नहीं सकती। मैंने उसे पकड़ लिया और उसने आँखें खोल दी। 

गुड्डी- “हे भाभी…” बेचारी शर्मा रही थी लेकिन अब उसकी धार रुक नहीं सकती थी और मैं घूर-घूर कर उसे मूतते देख रही थी। 

“अरे क्या शरमा रही हो…” और जैसे ही वो उठी मैंने अपने साबुन लगे हाथों से उसे… वहां साफ कर दिया। 

गुड्डी- “हे भाभी, यहां गंदा…” 

“अरे बुद्धू, कल रात में अपने यार का लालीपाप चूसेगी तो क्या पूछेगी की उसने साफ किया था? ये सब मन की बात है, मैंने बताया था ना कि तीन महीने पहले जब मैं अपने कजिन की शादी में गयी थी तो जीजा ऐसे ही शरमा रहे थे तुम्हारी तरह। और उनकी धार खतम भी नहीं हुई थी की मैंने मुँह में ले लिया, और चूसने लगी…”

गुड्डी- “सच भाभी…” साथ-साथ नहाते हुये उसने पूछा। 

“और क्या? उनका मोटा मस्त लण्ड कसकर मेरी गाण्ड मारकर निकला था और उन्होंने साफ भी नहीं किया था, आगे तुम सोच सकती हो। तेरे भैया भी जब भी मेरी गाण्ड मारते हैं तो सीधे निकालकर मेरे मुँह में डालते हैं। पहले तो थोड़ा बहुत मैं हिचकती थी पर अब तो मुझे भी…”

नहा के हम निकले तो मैंने अपने हाथों से उसके उभारों पे ‘सुडौल’ तेल लगाया और उससे बोला की वो आराम करे। क्योंकी खाने के तुरंत बाद फिर उसकी ट्रेनिंग चालू होगी। किचेन से जब मैं निकली तो देखा की बन्नो, संजीव कपूर को टी॰वी॰ पे तंदूरी चिकेन बनाते न सिर्फ देख रहीं थी बल्की रेसीपी को कापी भी कर रह ही थीं। मैंने कापी पल्टी तो उसमें ढेर सारी नान-वेज रेसीपी लिखी थीं। खाना खाने के बाद हमने थोड़ी देर आराम किया। उस दौरान भी हम दोनों कामसूत्र और बाकी किताबों से सब आसन देख रहे थे। फिर मैंने उससे झुकने के लिये कहा, और उसके पीछे जाके उसकी टांगें खूब फैला दीं। मैंने उसकी चूत में अपना थूक लगाकरके गीला किया और फिर एक धक्के में अपना ‘स्ट्रैप आन’ अंदर घुसेड़ दिया। बेचारी की आह निकल गयी, लेकिन कमर पकड़कर मैं पेलती रही। 
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11-07-2017, 11:59 AM,
#77
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
मैंने समझया- ““देख ये रियर एन्ट्री है, इसमें लड़की हाथ और घुटने के बल झुक जाती है, और मर्द पीछे से घचाघच चोदता है, जैसे कुतिया चुदवाती है वैसे। इसलिये, इसे डागी पोजीशन भी कहते हैं। इसमें मर्द को बहुत मजा आता है क्योंकी वो कसकर चूची की रगड़ाई मसलाई करते हुये हचाहच चोद सकता है। इसके कई तरीके और भी हैं जैसा तुम्हें मैंने फोटो में दिखाया था ना… जैसे तुम पेट के बल लेट जाओ, और कुशन या तकिया लगाकरके वो तुम्हारे चूतड़ ऊपर उठाकरके पीछे से चोदे…” 

गुड्डी- “भाभी, इसमें मुझे क्या करना होगा?” बड़े भोलेपन से उसने पूछा। 

“तुम्हें? तुम अपनी चूत से लण्ड को सिकोड़ो और हर धक्के के साथ-साथ, जवाब में पीछे की ओर अपने चूतड़ से धक्के मारो कस-कस के…” 

गुड्डी ने वैसा ही किया। मैं खचाखच वाइब्रेटर से चोदते हुये बोली- “देख, इस पोजीशन में लड़की को मजा खूब आता है क्योंकी लण्ड चूत में घच्चा-घच्च रगड़ते हुए अंदर जाता है और मर्द को भी बहुत अच्छा लगता है क्योंकी वह खूब ताकत से चोद पाता है। चूचियों की जम के रगड़यी मसलाई, साथ-साथ क्लिट को भी छेड़ने का मजा, और गाण्ड में भी उँगली कर सकता है। हां, कई बार घुटने में दर्द होता है, तो अगर तुम घुटने के सहारे हो तो उसके नीचे कुशन लगा सकती हो…” इसके बाद मैंने उसे साइड इन्ट्री के तरीके, खड़े-खड़े चुदाने के तरीके सब सिखाये। मैंने बताया की मर्द पीछे से भी, लेटकर ले सकता है, टांगें उठाकर। इसमें चिपका-चिपकी पूरी होती है लेकिन सेक्स की स्पीड धीमी होती है। 

गुड्डी- “भाभी, आपको कितने आसन पता हैं? भैया करते हैं इस तरह?” हँसकर उसने पूछा। 

“हां, सोने के पहले। इसको स्पूनिंग कहते हैं क्योंकी चम्मच की तरह इसमें एडजस्ट हो जाते हैं। ऐसा अकसर वो अंत में करते हैं और चोदते-चोदते हम सो जाते हैं। झड़ के उनका लण्ड मेरी चूत में ही पड़ा रहता है। वो पीछे से मेरी चूचियां पकड़े-पकड़े सो जाते है, और मुझे भी उनकी देह का अहसास नींद में भी होता रहता है। और सुबह उनका हरदम खड़ा होता है तो वो फिर से चालू हो जाते हैं…” 

गुड्डी- “और भाभी, जब आप ऊपर होती है तो?” 

“अच्छा तो तेरा खुद चोदने का मन कर रहा है? चल वो भी सिखा देती हूं। पर ये ध्यान रखो की किसी भी आसन में तीन बातें होनी चाहिये, पहली बात उसमें तुम दोनों कम्फरटेबल हो, दूसरा उसमें चुदाई के साथ और क्या-क्या कर सकते हो और तीसरा उसमें आगे-पीछे धक्का लगाने में कितनी आसानी है। और इसके अलावा मौके और मूड पे भी डिपेंड करता है। उस दिन तुम्हारे घर पे इत्ते मेहमान थे पर राजीव में मुझे इशारा करके बाथरूम में बुलाया और खड़े-खड़े मैंने साड़ी उठा ली और उन्होंने सिर्फ जिप खोली। टांग उठाकर मैंने जम के चुदवा लिया। हां जो मैंने तुम्हें एक्सरसाइज़ बतायी थी ना वो जरूरी हैं टांग, जंघाओं, कमर इन सबकी मजबूती के लिये। तभी चुदाई का भरपूर मजा ले सकती हो…” 

फिर मैंने उसे औरत ऊपर आकर कैसे चोद सकती है, खूब डिटेल में समझाया। मैं वाइब्रेटर इश्तेमाल तो कर रही थी पर इस बात का ध्यान रख रही थी कि वो कहीं झड़ ना जाये या ज्यादा उत्तेजित न हो क्योंकी फिर उसका ध्यान सीखने की बजाय मजा लेने में लग जाता। लेकिन हालत तो हम दोनों की खराब हो रही थी। वो बेचारी खुलकर बोली- “भाभी बहुत मन कर रहा है…” 

“ठीक है लेकिन बहुत हो गया मर्द बने। चल, अब लड़कियों की तरह मजा लेते हैं…” 

गुड्डी- “हां भाभी हां। बस, मुझे किसी तरह एक बार झाड़ दो…” 

“उंहं, ऐसे नहीं मैंने तुम्हें इत्ती ट्रेनिंग दी, चल पहले मुझे गुरूदक्षिणा तो दे। चाट मेरी बुर…” 

गुड्डी- “ठीक है भाभी, लेकिन आपको मुझे सिखाना पड़ेगा…” 

“एकदम, चल नीचे मेरी टांगों के बीच बैठकर किस कर पहले, अरे सीधे चूत पे नहीं पहले आस-पास…” और उसने ऐसा ही करना शुरू किया। 

मेरी चूत तो पहले ही गीली हो रही थी। अब एकदम पानी फेंकने लगी- “हां चूस अब, जैसे संतरे की फांक चूसती है ना वैसे ही पहले हल्के-हल्के। हां, अब कस-कसकर… हां, अब जीभ अंदर ठेल, हां हां ऐसे ही…” 
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11-07-2017, 11:59 AM,
#78
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
अब उसने कस-कसकर चूसना शुरू कर दिया। वो एकदम नेचुरल थी। उसके किशोर होंठों के बीच मेरी चूत एकदम मस्त हो रही थी। मैंने अपने घुटने सिकोड़ के उसके सर को कसकर दबा लिया। अपने दोनों हाथों से उसके सर को दबाकर उस कच्ची कली के मुँह को अपनी चूत पे कस-कसकर रगड़ रही थी। तब तक उसकी जीभ ने मेरी क्लिट को भी ढूँढ़ लिया था और वो उसे कसकर चाट रही थी। उसकी अनगढ़ चुसाई ने मेरी चूत की चूस-चूस के हालत खराब कर दी। मैं भी कसकर उसका सर पकड़कर उसका मुँह चोद रही थी। थोड़ी देर में उसने मेरा सारा रस झाड़ दिया।

थोड़ी देर तो मैं आँखें बंद करके चुपचाप पड़ी रही। फिर जब मैंने उसकी ओर देखा तो मैं मुश्कुराये बिना नहीं रह सकी। वह मेरी चूत के रस की एक-एक बूंद चाटकर, पी रही थी। मुझे देखकर मेरी ओर अपनी बड़ी-बड़ी किशोर आँखें उठाकर बोली- “भाभी, अब मेरी…” 

“एकदम… मेरी ननद रानी…” और उसको खींचकर मैंने अपने साथ पलंग पे लिटा लिया। 

पहले तो मैंने उसके गुलाबी होंठो पे कसकर एक चुम्मा लिया और फिर मेरे होंठ सरक कर उसके छोटे-छोटे रसीले उभारों पे आ गये। मैंने न सिर्फ उन्हें कसकर चूमा बल्की उसके चूचुकों को अपने मुँह में लेकर कसकर चूसा भी। बेचारी की हालत खराब हो गयी, पर अभी असली किला तो बाकी ही था, उसका रस कूप। मेरी जीभ वहां अगल-बगल घूमती रही, टहलती रही। पर मजे में बेताब वो अपने चूतड़ उछालने लगी तो मुझे दया आ गयी और एक झटके में मेरे होंठों ने उसके पतले गुलाबी रस की फांकों को एक झटके में गड़प कर लिया। मेरे होंठ उसे कसकर चूस रहे थे और जीभ कसकर चाट रही थी। 

थोड़ी ही देर में वो झड़ने के कगार पे आ गयी। पर मैं इत्ती आसानी से उसे छोड़ने वाली थोड़ी थी। थोड़ा सरक के मैंने अपनी दोनों जांघें उसके सर के दोनों ओर इस तरहकर ली की मेरी चूत ठीक उसके मुँह के ऊपर थी। थोड़ा रुक के मैं फिर चालू हो गयी। अबकी मैंने उसके चूत के दोनों पपोटों को देखा, एकदम गुलाबी और कसकर सटे। मैं सोचने लगी की कुछ ही दिनों में लण्ड के धक्के खाकर इनकी रंगत कैसे बदलने वाली है। मैंने उन्हें उँगली से फैलाकर अपनी जुबान अंदर कर दी और उसकी चूत चोदने लगी। 

थोड़ी देर में वो फिर गाण्ड पटकने लगी। कुछ देर तक ऐसे ही चोदकर मैंने जीभ निकाली। मैंने दोनों हाथों से उसके चूतड़ कसकर पकड़ रखे थे। जब मेरी जीभ उसकी चूत से निकलकर पीछे की ओर बढ़ी तो मेरी शैतान उंगलियों ने उसकी गाण्ड के छेद को फैलाने की कोशिश की। मैंने ढेर सारा थूक मुँह में बनाकर उसकी गाण्ड के छेद पे लगा दिया। एकदम कसा, चिपका। 

गुड्डी- “नहीं भाभी, उधर नहीं, प्लीज मेरी चूत चूसो ना…” 

“क्यों नहीं ननद रानी। क्या गाण्ड अपने भैया से चुसवाओगी। चल पहले मेरी चूत चूस…” और मैंने अपनी बुर उसके मुँह पे कसकर दबाकर सील कर दिया। वो बेचारी पहले तो गों-गों करती रही, फिर चूसने लगी। अब मैंने अपने होंठ उसकी गाण्ड पे कसकर लगाकरके दो चार चुम्मे ले लिये और बोली- “अरे ननद रानी घबड़ाती क्यों है। इसमें भी मोटे-मोटे लण्ड घुसेंगे। अच्छा ले मैं तेरी गाण्ड चूम रही है और तो तू बिदक रही है। ले, तू भी मेरी गाण्ड चाट, चूत मरानी…”

और ये कहकर थोड़ा सरक के मैंने अपनी गाण्ड भी उसके मुँह पे लगा दी। मैं इतनी कसकर उसके मुँह पे बैठी थी की गाण्ड चाटने के अलावा उसके पास और कोई चारा नहीं था। मैंने दो उँगली लगाकरके पूरी ताकत से उसकी कसी सकरी कुंवारी गाण्ड बड़ी मुश्किल से, बहुत थोड़ी सी फैलायी और फिर वहां चूमकर अपनी जीभ की टिप अंदर डाल दी। थोड़े देर उसे इस तरह छेड़कर, वापस मैंने उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी और उसके मुँह में भी अपनी चूत दे दी। 

उसके ऊपर से मुँह उठाकर मैंने कहा- “देख, इसे ही 69 कहते हैं इसमें हम दोनों कैसे साथ-साथ मजा ले रहे हैं। तुम्हारे भैया को भी ये बहुत पसंद है। मैं नीचे से उनका लण्ड चूसती हूं और वो ऊपर से मेरी चूत। मुझे भी बहुत अच्छा लगता है कई बार तो वो अपनी नाक भी मेरी क्लिट पे रगड़ते हैं…” और हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को चूसना चालू कर दिया। इस बार जब वो झड़ने के कगार पे पहुँची तो मैं रुकी नहीं। मैंने उसके क्लिट पे जीभ कस के रगड़ी और वो कस-कसकर झड़ने लगी। लेकिन वो भी अब शैतान हो चुकी थी, उसने मेरी क्लिट अपने होंठों में लेकर कसकर चूसा और हल्के से काट भी लिया। मैं भी साथ-साथ झड़ने लगी। देर तक हम दोनों साथ-साथ झड़ते रहे। 
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11-07-2017, 11:59 AM,
#79
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
जब हम उठे तो शाम होने वाली थी। तब तक मुझे कुछ याद आया तो उसके चूतड़ पे, कसकर मार के मैं बोली- “हे, हम भी गजब के… अरे तेरे यार को तो कल का प्रोग्राम बताया ही नहीं। बेचारा बेताब होगा…” 

गुड्डी- “हां भाभी, आज मैंने स्कूल तो गोल ही कर दिया। वो बेचारा इंतेजार कर रहा होगा। अब?” 

“ऐसा कर तू आज म्यूज़िक क्लास जा और…” 

गुड्डी- “पर भाभी, आज तो म्यूज़िक क्लास है ही नहीं…” 

“अरे तो उससे क्या होता है, तुझे तो मालूम ही है उसका अडडा, जहां वह अपने दोस्तों के साथ…” 

गुड्डी- “पर भाभी, वहां उसके साथ उसके दोस्त भी होंगे। क्या सोचेंगे वो?” 

“अरे अब तुझे उसके दोस्तों के सोचने की फिक्र पड़ी है, ऐसी शरमाती रहेगी तो मजे ले चुकी। अरे, उसे दोस्तों से थोड़ा दूर बुला के प्रोग्राम समझा देना, वरना वो बेचारा रात भर तड़पता रहेगा। चल ये फ्राक पहन और जा…” उसके जाने के बाद मैंने येलो कलर का एक शलवार-सूट पहन लिया और उसके लिये स्पोर्टस शर्ट और शार्ट निकाल दिया। 

वो कुछ देर बाद जब आई तो खुशी से गुनगुना रही थी और सीधे किचेन में घुस गयी। जब वो बाहर निकली तो मैंने उसको एक टीन स्पोर्टस ब्रा दी और कहा कि इसे पहन लो। पहनते हुये वो बोली- “भाभी, आपने सही कहा था। वो बेचारा बहुत परेशान था की मैं स्कूल क्यों नहीं आई? कहीं मेरी तबीयत कुछ और? जब मैंने प्रोग्राम बताया तो वो खुशी से पागल हो गया। क्योंकी परसों सुबह ही उसे अपने गांव वापस जाना है। लेकिन एक बात गड़बड़ हो गई…” 

“क्या जल्दी बता, ये स्पोर्टस टी-शर्ट पहन…” 

गुड्डी- “भाभी, वहां दिया मिल गयी थी। वो मुझे उससे बात करते देखकर जल के खाक हो गयी, अब वो सबसे जाकर गायेगी कि मैं चुदाना चाहती थी। पर वो भी बात किये ही जा रहा था…” 

“अरे तो क्या हुआ? गाने दे। खुद तो कितने सालों से अपने सगे भैय्या से चुदा रही है और… अच्छा ले ये शार्ट पहन…” 

गुड्डी- “लेकिन भाभी एक अच्छी बात भी उसने बतायी, मैंने तुमसे उस डाक्टर लड़के के बारे में बताया था ना। वो बोल रही थी की जब वो उससे मिलती है तो वो मेरे बारे में ही पूछ्ता है और अब कल-परसों उसकी भाभी फिर दाखिल होंगी तो वो कह रही थी कि मैं जरूर आऊँ। मेरे कहने से वो डाक्टर उनकी बहुत मदद कर देता है…” 

स्पोर्टस शर्ट में उसके उभार खूब खिल के दिख रहे थे और शार्ट तो छोटा था ही, उसकी गोरी जांघें एकदम साफ-साफ दिख रही थीं। मैंने उसे रैकेट पकड़ा दिया और हाथ पकड़कर बाहर ले आई। 

गुड्डी चकित रह गयी- “अरे भाभी, ये क्या?” 

“ये तेरे भैया से कहकर मैंने बैडमिंटन कोर्ट बनवा दिया है अब हम रोज यहां खेलेंगें…” हम दोनों नें खेलना शुरू किआ। जब वो झुकती या शाट मारती तो उसके उभार खूब खिल रहे थे। कालेज के दिनों में मैं भी बैडिमंटन चैम्पियन थी और गुड्डी भी अच्छा खेलती थी।

थोड़ी देर तक तो खेल ठीक चला। कुछ देर में मैंने देखा की उसका ध्यान बंट रहा है। वो बार-बार सामने देखती, जिधर नीरज का घर था। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कोई छाया सी उसके घर में घुसती दिखी। मैंने जब पूछा तो मुश्कुराकर उसने हामी भरी की नीरज ही था और अपने घर से उसे देख रहा था। हमने खेल खतम किया लेकिन साथ-साथ दो नैनो का खेल भी चल रहा था। 

नीरज बार-बार बाहर आ जाता। पहले तो वो सिर्फ देख रहा था, लेकिन बाद में दोनों ओर से इशारे भी चालू हो गये। और सच पूछिये तो, मैं चाहती भी यही थी। 

दो खेल पूरा करके हम अंदर आ गये। मैं किचेन में जाने वाली थी की उसने मुझे रोक दिया- “नहीं भाभी, आज आप किचेन में नहीं जायेंगी…” 

“क्यों…” चकित होकर मैंने पूछा। 

गुड्डी- “इसलिये मेरी अच्छी भाभी कि जैसा आपने कहा था भैया कल सुबह ही चले जायेंगे और फिर परसों देर रात और वो भी शायद आपका इतना लंबा उपवास रहेगा तो इस समय का आप सदुपयोग कर लीजिये। किचेन और भैया के बाकी काम मेरे जिम्मे और वो ‘काम’ आपके…” आँखें नचाकर शरारत से वो बोली। 

जैसे ही वो आये, उनकी आँखें गुड्डी के छलकते जोबन और शार्ट से बाहर झांकती जांघों पे पड़ीं। हम सब साथ कमरे में आये। गुड्डी ने उनके जूते उतारे, कपड़े दिये। 

मैंने पूछा- “नाश्ता क्या करेंगें?” 

वो बोले- “नाश्ता नहीं बस खाना जरा जल्दी, कल सुबह ही निकलना है…” 

गुड्डी- “अरे इत्ता अच्छा नाश्ता सामने है तो नाश्ते की क्या जरूरत। भैया तो आपका ही नाश्ता करेंगें…” मेरे गालों पे चिकोटी काटकर गुड्डी ने चिढ़ाया। 

“अच्छा बोली, भैया की बहना…” राजीव को दिखाकर उसके नितम्बों पे कसकर दबाते हुए मैं बोली। 

“सही तो कह रही है मेरी बहना…” कहकर राजीव ने मेरे गालों को कसकर सहलाया। अब हम तीनों के बीच शरम लगभग खतम सी हो गयी थी। 
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11-07-2017, 12:00 PM,
#80
RE: Nanad ki training--ननद की ट्रैनिंग
“तेरी बहन की… फुद्दी मारूं…” कहकर कसकर गुड्डी की चूची मसलकर मैं बोली। 

“मेरी बहन की तो बाद में देखना पर पहले अपनी फुद्दी बचा…” और वहीं उन्होंने मुझे पलंग पे लिटा लिया और कसकर चूमने लगे। 

गुड्डी- “ठीक है आप दोनों अपने काम में लग जाइये और मैं अपने। खाना बनते ही मैं बता दूंगी। भाभी, ब्रेक करके आ जाइयेगा…” और बिना दरवाजा बंद किये वो मुश्कुराते हुये चली गयी। 

राजीव तुरंत चालू हो गये। बिना इंतजार किये उन्होंने मेरी शलवार का नाड़ा खोला और… बेताब तो मैं भी हो रही थी। दो राउंड लगातार तूफानी चुदाई के बाद जैसे ही हम सुस्ता रहे थे की आवाज आई- “डिनर तैयार है…”

जब हम लोग बाहर पहुंचे तो दंग रह गये। जिस तरह डिनर लगाया गया था, उसके साथ ही आइस बकेट में एक बोतल भी रखी थी और ग्लासेज भी। 

“डिनर तो बहुत सेक्सी लग रहा है…” राजीव बोले। 

“और डिनर बनाने वाली?” मैंने छेड़ा। 

“वो तो सेक्सी है ही…” हँसकर वो बोले। और वास्तव में टैंक-टाप मुश्किल से उसके उभारों को ढक रहे थे, और टाईट और लो-कट भी थे। उसके निपल साफ-साफ दिख रहे थे। घर में तो वो ब्रा पहनती ही नहीं थी, और स्कर्ट भी घुटने से बहुत ऊपर। 

राजीव के पास आकर गुड्डी ने उनके ग्लास में पहले तो आइस क्यूब रखे और फिर बड़े अंदाज से व्हिस्की ढाली। मुझसे उसने पूछा- “भाभी आप क्या लेंगी हार्ड या साफ्ट? अपने लोगों के लिये मैंने कोल्ड ड्रिंक रखा है…” 

“अरे मुझे तो हर चीज हार्ड पसंद है। तुझे इत्ते दिन में इतना भी पता नहीं चला। और हां तू कैसी साकी है। दूर से दे रही है गोद में बैठकर दे ना…” 

गुड्डी- “लीजिये भाभी, और वो राजीव की गोद में बैठ गयी। साथ में खाने के लिये उसने एक प्लेट में टिक्का और कबाब पेश किये और अपने हाथ से एक टिक्का उठाकर सीधे राजीव के होंठों के बीच बड़ी अदा से दिया और कहा- “लीजिये भैया, मेरे हाथ से बनाया हुआ टिक्का…” 

“वाह… ये तो बहुत स्वादिष्ट हैं। पर ये तो चिकेन…” वो खुश होकर बोले। 

“तू ने बनाया है चिकेन टिक्का? तू तो प्योर शाकाहारी है, हाथ तक नहीं लगाती थी…” चकित होकर मैंने पूछा।

गुड्डी- “अरे भाभी, आप ही तो कहती थीं ना कि हर चीज को कभी ना कभी पहली बार शुरू करना पड़ता है। तो मैंने भी सोचा की आप और भैया जब मजा लेते हैं तो मैं क्यों पीछे रहूं…” मजे से उनके हाथ से बचा हुआ चिकेन टिक्का लेकर गप्प करती हुई वो इठलाते हुए बोली। 

“अरे तो फिर ये चीज क्यों बची है, ये भी चखा दो ना इसको…” राजीव से उनके ग्लास की ओर इशारा करते हुए मैं खिलखिला के बोली। 

“एकदम…” और राजीव ने साइड से उसके उभारों को पकड़कर अपनी ओर खींचा, और अपना ग्लास उसके गुलाबी होंठों पे लगाकरके प्रेस किया। 

थोड़ा नखड़ा दिखाने के बाद वो गटक गयी। फिर क्या था, उसी ग्लास से हम तीनों… थोड़ी देर में हम तीनों ने पूरी बोतल खाली कर दी और उसके बहुत नखड़े दिखाने पे भी मैं उसको तीन चार पेग पिलवा के ही मानी। हम तीनों ही हल्के नशे में थे। राजीव की उंगलियां अब खुलकर उसके किशोर उभारों पे भटक रही थीं, और उसके बाद जब उसने खाने की डिशेज खोलीं तो… वाकई पूरी दावत थी, तंदूरी चिकेन, मटन कोरमा, बिरयानी। 

जब उसने राजीव की प्लेट में एक लेग पीस रखी तो थोड़ा सा खाकर ही वो बोले- “वाह…” और गुड्डी की ओर बढ़ाकर बोला- “ले तू भी तो खा…” 

उसने उसको लेकर इस तरह से चाटना करना शुरू किया की किसी मोटे शिश्न को चाट रही हो। फिर एक बार में गड़प कर गयी। मैंने अपना हाथ राजीव की शार्ट में डाला तो उनका मोटा लण्ड ये सीन देखकर के एकदम तन्ना गया था। 

“हे, तेरा इंटरकोर्स के बाद क्या इरादा है?” राजीव के लण्ड को मुठियाते हुए मैंने पूछा। 

गुड्डी- “भाभी…” चिकेन लेग को उसी तरह चाटते हुए, उसने बुरा सा मुँह बनाया। 

“अरे, तेरी भाभी का मतलब है की इंटर का कोर्स के बाद तू क्या करेगी?” राजीव ने बात सम्हाली। 

गुड्डी- “ओके… मैं तो समझी थी कि यहां किसी सड़े से कालेज में बी॰एससी॰ करूंगी और क्या? यहां और…” 

“हे तू पी॰एम॰टी॰ की कोचिंग क्यों नहीं करती। आकाश कोचिंग में अच्छी जान पहचान है इनकी…” मैंने उसे सलाह दी। 

गुड्डी- “पर भाभी, उसका इंट्रेंस बहुत कड़ा होता है और फिर उसमें कहां एडमिशन हो पायेगा…” वो बाली। 

“अरे तू उसकी परवाह ना कर, पिछली बार जब वो फंसा था ना पेपर आउट में, उसकी तो मार ही लेते, उस समय मैंने ही बचाया था। साल भर के कोर्स का बहुत अच्छा रिजल्ट होता है, तो मैं करूं ना बात? अरे मेरी ननद कब से कड़े से डरने लगी? और हां तू हमारे साथ रहना, लेकिन पेइंग गेस्ट बनके रहना पड़ेगा, बोल तैयार है?” 

गुड्डी- “एकदम भाभी… क्या पे करना पड़ेगा…” 

“करना नहीं करवाना पड़ेगा। मेरा मतलब है ‘काम’ करना पड़ेगा…” 

गुड्डी- “भाभी, आपकी ये ननद ‘काम’ से भागने वाली नहीं। जित्ती बार कहियेगा उत्ती बार, दिन रात, हमेशा तैयार रहेगी…” 

और हम तीनों असली मतलब समझ के हँसने लगे। राजीव ने उसकी आंखों में आखें डालकर पूछा- “पक्का…”

और उसने उनका हाथ कसकर पकड़कर कहा- “एकदम पक्का…” 

तय ये हुआ की जब हम लोग होली में आयेंगें तो वो हमारे साथ चलेगी और एडिमशन टेस्ट दे देगी और उसके बाद हम लोगों के साथ साल भर रह के कोचिंग करेगी।
राजीव इतने उत्तेजित थे की वहीं मुझे चोदना शुरू कर देते। मैंने उन्हें समझाया की तुरंत मैं किचेन समेट के ऊपर अभी आती हूं। 

पर गुड्डी हँसकर बोली- “नहीं भाभी, आप जाइए ना मैं सब समेट दूंगी…” 

“मेरी अच्छी प्यारी ननद, चल कल मैं तेरा सारा बदला चुका दूंगी। लेकिन याद रखना आज कोई कैंडल, उँगली कुछ नहीं। सिर्फ आराम…” मैं भी अच्छी तरह से नशे के शुरूर में थी। मैंने उसके टाप को उठाकर उसके किशोर जोबन कसकर दबा दिये। जब मैंने देखा की राजीव भी उधर देख रहे हैं, तो टाप निपल तक उठाकर उन्हें दिखाते हुए उसे कसकर रगड़ दिया। 

उस रात राजीव ने सारी रात मुझे कसकर रगड़ के चोदा। एक मिनट भी नहीं सोये हम, बस चुदवाती रही, चुदवाती रही मैं। राजीव तो अगले दिन सुबह चले गये। 

जब वो स्कूल से आई तो मैंने पूछा- “हे मैंने कहा था गन्ने का रस… ले आई?” 

गुड्डी- “हां भाभी…” और उसने मुझे दो ग्लास गन्ने का ताजा रस पकड़ा दिया। 

“कित्ता पैसा लगा?” मैंने पूछा। 

“कुछ नहीं भाभी, फ्री…” हँसते हुए वो बोली। 

“क्यों, क्या मेरा नंदोई लगता था? तूने गन्ने वाले को भी यार बना लिया क्या? या उसे चूचियों की झलक दिखा दी जो फ्री में दे दिया…” मैंने चिढ़ाया। 

गुड्डी- “अरे भाभी ये सब तो आप अपनी ट्रिक बता रही हैं। असल में वहां नीरज मिल गया। उसने मुझे गन्ने का रस पिलाया और जब मैं ये खरीदने लगी तो उसका भी पैसा उसने दे दिया…” 

“अरी वो अपने गन्ने का रस तुम्हें पिलाने के चक्कर में है, लाइन मार रहा होगा…” 

गुड्डी- “आपने सही समझा, भाभी। कह रहा था की उसके पैरेंटस तीन चार दिन के बाद 10-15 दिनों के लिये बाहर जा रहे हैं। तब वो ज्यादा फ्री हो जायेगा…” हँसकर वो बोली। 

“और वो तेरा यार, जिसके साथ आज मिलन की रात है, मिला था की नहीं?” 

गुड्डी- “अरे भाभी, वो तो सुबह ही। पता नहीं बेचारा कब से राह देख रहा था, जैसे ही मैं घर से निकली, उसी समय मिला। मैंने उसे फिर से सब कुछ समझा दिया की ठीक रात के 10:00 बजे जैसे घर की लाइट बुझे…” 

“अच्छा तो चल अब चाय पीकर तू दो तीन घंटे आराम कर, आज तेरी पूरी रगड़ाई होने वाली है, उसके बाद मैं तुम्हें तैयार करती हूं…” मैं बोली। और चाय पीकर वो सो गयी और मैं अपने काम में लग गयी। 
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