Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
07-26-2017, 11:21 AM,
#1
Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
रिश्ते अनजाने 




मेरी आँखें खुलीं मैने मोबाइल मे देखा सुबह के सवा चार बज रहे थे , मुझे सुबह सवा नौ की फ्लाइट ले कर बॅंगलॉर जाना था. मैने कॅब वाले को फोन लगाया ही था कि

बगल में लेटी शिखा ने मेरी छाती पर सिर रखकर उसे अपने गालों से आहिस्ता आहिस्ता सहलाया . मेरे ठंडे बदन पर उसके घने बालों गर्म हाथों और नर्म मुलायम

गालों की छुअन का अहसास बड़ा ही मीठा था , दूसरी ओर से फ़ोन रिसीव कर लिया गया था , अचानक ही उस मीठे अहसास की जगह तेज जलन ने ले ली .


"उफ़" मैं दर्द से कराहा , और फ़ोन काट दिया मेरी छाती के बाल शिखा की हीरे की अंगूठी में फँस कर टूट गये थे
"ही ही ही" शिखा मेरी इस हालत पर हंस पड़ी .
"सोई नहीं शिखा ?" उसके माथे को लेते हुए ही प्यार से चूमते हुए पूछा "नींद नहीं आई रात में?"
"उन्हूँ " अंगड़ाई लेते हुए वह बोली और एकदम से मेरे उपर औंधी लेट गयी "तुम मुझे छोड़ कर जा रहे हो यह सोच कर पूरी रात जागती रही " फिर मेरी छाती को चूमते

हुए धीरे से बोली "जाना ज़रूरी है?"

"काम है भई , जाना तो पड़ेगा , और २-३ दिन की तो बात है" मैने प्यार से उसके बालों को सहलाते हुए बोला.
"यहा पर भी तो हम काम ही कर रहे हैं " वह शरारत से बोली और मेरे सीने में मुँह छुपा लिया
"हाँ भई , तुम्हारा पति तो वहाँ कॉल सेंटर में काम कर रहा है औरयहाँ तुम्हे मेरे साथ काम करना हैं , क्यों?"
मैने उसको चिढ़ाते हुए कहा , और अगले ही पल उसने मुझे चिढ़ाने की सज़ा दे दी
"आईई..आहह उफ़" मेरे मुँह से चीख निकल गयी
उसने गुस्सा कर मेरे छाती के निप्पल्स पर जोरों से काट खाया
'छी..थू..थू" वह एकदम से उठी , नाइट लॅंप की रोशनी में मैं कुछ देख नही पाया लेकिन वह बाथरूम की ओर लपकी.
"क्या हुआ ?" मैने उठकर बनियान पहनते हुए कहा लेकिन अभी वह बाथरूम में ही थी.
मैं उठ कर वॉश बेसिन की ओर मुँह धोने गया और टॉवेल से मुँह पोंछ ही रहा था कि वह बाहर निकली.
"बाथरूम का नल खराब हो गया है बदलवा लेना" उसने अपने बाल ठीक करते कहा "पानी टपक रहा है"
"तुम ही कर दो न दिनभर में .. मुझे तो कुछ देर में निकलना है" मैने मुँह पोंछते कहा
"अच्छा जी ? मैं क्या बीवी लगती हूँ तुम्हारी? जो तुम्हारे घर के सब काम करूँ ' उसने पूछा
"नहीं तो मेरे बाथरूम के नल को बदलवाने कि तुम्हें क्या सुझि?" मैने भौंहें उचकाई
"मुझे क्या पड़ी है" उसने मुँह बिचका कर कहा
मैं उसकी इस अदा पर हंस पड़ा
"और तुम यह छाती में कड़वा पाउडर क्यों लगाते हो?" उसने गुस्सा होते हुए पूछा
"नहीं तो क्या चॉकलेट लगाऊ ?" मैने शेविंग का झाग बनाते हुए कहा
"उस कड़वे पाउडर के गंदे टेस्ट से मुँह खराब हो गया मेरा " वह बुरा सा मुँह बनाते हुए मेरे बगल से गुज़री तो मैने पीछे से उसको अपनी बाँहों में भर लिया "अभी

आपके मुँह का टेस्ट ठीक कर देता हूँ मेडम"
" हटो मुझे चाय बनाने दो" वह कसमसाई "पहले मुझे अपनी शिखा के मुँह का टेस्ट तो ठीक करने दो" मैं उसकी गर्दन को चाटते हुए बोला और हम दोनो एक बार फिर

बिस्तर पर गये और एक दूसरे में फिर से खो गये.

शिखा बेंद्रे , अपने पति राजन बेंद्रे के साथ मेरे सामने वाले फ्लॅट में रहती थी , दोनो की शादी हुए ४ साल हो गये लेकिन कोई औलाद नहीं . राजन एक कंपनी में काम

करता था और टुरिंग जॉब होने की वजह से सफ़र करता . शिखा एक हाउसवाइफ थी. दोनो अपर मिडिल क्लास मराठी कपल थे और गैर मराठी लोगों से ज़्यादा बात

नहीं करते. वह तो मैं तीन महीने पहले इनके सामने वाले फ्लॅट में शिफ्ट हुआ तो बात चीत शुरू हुई.

मुझे आज भी याद है वो दिन जब शिखा ने मेरे फ्लॅट का दरवाज़ा खटखटाया था . दोपहर के बारह बज रहे थे और मैं अभी सो कर उठा ही था , टूथ ब्रश हाथ में लिए

हुए मैं टूथ पेस्ट लगा ही रहा था की घंटी बजी

"अब कौन मरने आ गया इस वक्त " मैने सोचा
और दरवाज़ा खोला . जो सामने देखा तो हैरान रह गया.
हरी रेशमी ट्रडीशनल नौ गज की पीली साड़ी पहने एक दम गोरी , पतली बौहों , बड़ी आँखों और लाल होंठों वाली सुंदर लड़की अपना पल्लू ठीक करते हुए सामने खड़ी थी.
"भाभी जी घर पर हैं ?" उसने पूछा
उसके होंठ एक दूसरे से जुदा हुए हुए और मैं एकटक उन्हें देखता रहा
"भाभी जी घर पर हैं ?" उसने तेज आवाज़ में पूछा.
मेरा ध्यान टूटा " ओह ... माफ़ कीजिएगा अपने कुछ कहा?"
"मैने पूछा भाभी जी घर पर हैं?" एक एक शब्द पर ज़ोर देती हुई शिखा ने झल्ला कर पूछा.
"जी नहीं , मैं शादीशुदा नहीं हूँ " मैने मुस्कुरा कर जवाब दिया
मैं अभी भी उसकी सुंदरता को एकटक अपनी आँखों से निहार रहा था , वाकई शिखा ऐसी खूबसूरत दिखती थी कि हर मर्द वैसी खूबसूरत बीवी पाने की दुआ करता हो.
"क्या ? आर यू बॅचलर?" पीछे से एक तेज आवाज़ सुनाई दी
मैने देखा तकरीबन पाँच फुट ८ इंच का साँवले से थोड़ा काला और दुबला आदमी बनियान और पायज़मा पहने सामने खड़ा था .
"जी साहब" मैने जवाब दिया "हाउ इस दिस पॉसिब्ल? और सोसाइटी डोज़्न्ट अलौज़ बॅचलर टेनेंट" वह आदमी अपनी इंग्लीश झाड़ते हुए बोला

"आई बेग युवर पार्डन , आई एम नॉट अ टेनेंट आई एम ओनर" मैने कहा
"ओ आई सी...सॉरी आई फॉर मिस अंडरस्टॅंडिंग " वह झेंपते हुए बोला
मैने बुदबुदाते हुए कहा " यू शुड बी ..."
"वॉट ? डिड यू साइड सम्तिंग?" उसने चौंक कर पूछा
"साले के कान बड़े तेज हैं " मैने मन ही मन सोचा
" आई जस्ट विस्पर्ड इट्स ओके " मैने मुस्कुराते कहा
"एनीवे ... लेट मी इंट्रोड्यूस माइसेल्फ .. आई एम राजन बेंद्रे असोसीयेट वाइस प्रेसीडेंट , बॅंक ऑफ..."
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07-26-2017, 11:21 AM,
#2
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लेकिन वह अपनी बात पूरी न कर सका , उसकी पत्नी शिखा चिल्लाई
"अर्रर...दूध उबल गया" शिखा को दूध जलने की महक आई और वह उल्टे पाँव भागी
"वॉट? हाउ कम?" राजन ने उसकी ओर मूड कर तेज़ आवाज़ में कहा "स्टुपिड वुमन.."
मैं सन्न रह गया मैने शिखा को देखा , उसे अपने पति द्वारा किसी अंजन आदमी के सामने की गयी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं हो रही थी. उसकी आँखें भर आईं , मैं कुछ

कहने जा ही रहा था कि राजन बेंद्रे मेरी ओर मुखातिब हुआ
"एक्सकूज़ अस" और म्रा कहना न सुनते हुए "भड़ाक" से मेरे मुँह पर उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.
राजन के लिए गुस्से , और शिखा के लिए हमदर्दी और दोनो के अजीबोगरीब बिहेवियर से हैरत भरे जसबातों मुझ पर हावी हो गये

"चूतिया साला" गुस्से से यह लफ्ज़ मेरे मुँह से निकला .
". जी साहब" नीचे सीढ़ियों से आवाज़ आई

यह आवाज़ लुटिया रहमान थी , लुटिया हमारी सोसाइटी में कचरा बीना करता था और कान से कमज़ोर था.
"साहेब अपने अपुन को याद किया?"
"नहीं भई " मैने मुँह फेरते कहा , राजन की अपनी बीवी से बदसलूकी से मेरा मन उचट गया था.
"साहेब कचरा डाले नही हैं क्या आज?"
"डॅस्टबिन में पड़ा है उठा लो" मैने कहा और अंदर चला गया.

एक दिन सुबह उठकर मैने अख़बार लेने के लिए दरवाज़ा खोला , तो शिखा अपने फ्लॅट की चौखट पर रंगोली बना रही थी
अपने बालों को तौलिए में लपेटे और पतला झीना गाऊन पहने वह कोई मराठी गाना गुनगुना रही थी.
उसकी मीठी आवाज़ शहद की तरह मेरे कानों में घुल रही थी , और मैं वहीं खड़ा रह कर उसकी नशीली खूबसूरती को अपनी आँखों से पी रहा था.

गालों पे घिर आई बालों की पतली लट को उसने अपने हाथों से हटाने की कोशिश की , मेरी नज़रें उसके उरूजों पर टिक गयीं , झीने गऊन में उसके उरूजों में उभार आया था , मैं पेपर उठाने नीचे झुका तो उसकी नज़र मुझ पर पड़ी , उसने बालों की लट को हटाने की कोशिश की तो रंगोली का सफेद रंग उसकी आँख में चला गया .

"उफ़" उसने अपनी आखों को मींचते हुए आवाज़ निकाली और कराहने लगी , रंगोली के रंग उसकी आखों में चुभ रहा था .
अब या तो यह हुस्न का जादू था , या मेरे दिल में उसके लिए हमदर्दी चाहे जो कह लें मुझे उसका यूँ दर्द से कराहना सहा नहीं गया और मैं पेपर छोड़ कर उसे उठाने गया .

पहली बार उसे इतने करीब से देख रहा था मैने अपने हाथों से उसे हौले से उठाया , वह अभी भी कराह रही थी
"आखें खोलिए" मैने कहा
"न..नहीं जलता है.."
"मुझे देखने दो .."
"न..नहीं"
"प्लीज़ मिसेज़ राजन "
उसने आँखें खोलीं

अपने आप को मेरी बाहों में देख कर वह घबराई टुकूर टुकूर इधर उधर देखने लगी , उसके हाथ में पकड़ी रंगोली का रंग मुझ पर उडेल दिया

"घबराईए नहीं मैं आपकी आँखों में फूँक मारता हूँ , ठंडक लगेगी"
"न..नहीं आप जाइए में देख लूँगी" वह गिड गिडाआई"

मैने उसको अपनी बाहों को कस कर पकड़ लिया , मुझे उसका जिस्म अपनी बाहों के बीच महसूस जो करना था सो यह मौका हाथ से कैसे जाने देता.

उसने आखें खोली और मैने फूँक मारी

"आहह..." उसने मानों चैन की सांस ली

"वाट्स हॅपनिंग देयर?" मैने राजन की आवाज़ सुनी

शिखा एक झटके से मुझसे अलग हट कर एक कोने में खड़ी हो गयी , मैं भी बिजली की तेज़ी अपना पेपर पकड़े फ्लॅट में लपका.

राजन बाहर आया और शिखा से कहा "आर यू ओके? शिखा क्या हुआ?"

"अँ?" शिखा से उसकी ओर देखा "क..क..कु.कुछ न नहीं... कुछ भी तो नहीं"
उसने हकलाते हुए कहा और हंस दी

"क्या बिनडोक पना है" राजन झुंझलाते हुए बोला

मैं पेपर की आड़ से उनको देख रहा था और राजन को देखा मेरी हँसी छूट गयी

राजन बदहवासी में लुँगी लपेटे आया था , और इसके अलावा उसने कुछ पहना नही था

उसको इस हालत में देख कर मैं अपनी हँसी नहीं रोक पाया , उसकी बीवी शिखा भी मुँह छुपा कर हँसने लगी

मुझे देख कर वह उसी हालत में मेरे घर आया "ओह.. मिसटर? सॉरी फॉर डॅट डे.. लेट मी इंट्रोड्यूस माइसेल्फ आई एम राजन बेंद्रे असोसिएट वाइज़ प्रेसीडेंट , बॅंक ऑफ .." उसने मुस्कुराते कहा
मैने उसकी बात काटते हुए कहा "नाईस मीटिंग योउ मिस्टर बेंद्रे आई एम अमन मलिक " और शेक हॅंड के लिए हाथ बढ़ाया
उसने भी हंसते हुए हाथ तो बढ़ाया पर फिर उसे अहसास हुआ की उसी लुँगी सरकने लगी है..
वह कभी एक हाथ से अपनी लुँगी पकड़ता कभी दोनो हाथों से मशक्कत करता
उसे यूँ अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए उट पटांग हरकतें करते देख बड़ा मज़ा आ रहा था
उसकी हालत वाकई बड़ी शर्मनाक थी , किसी भी पल उसकी लुँगी खिसकती.
"एक्सक्यूस मी , मिस्टर मलिक , आई विल सी यू लेटर , यू नो ई हॅव टू अटेंड एन इंपॉर्टेंट बिज़्नेस राइट नाउ , होप यू वॉन'त माइंड" बेंद्रे अपनी लूँगी संभालते बोला
"टेक इट ईज़ी मिसटर बेंद्रे" मैने मुस्कुरा कर कहा
"शिखा..? शिखा?" वह अपने घर के अंदर घुसते हुए अपनी बीवी के नाम से चिल्लाए जा रहा था
"चाय अब तक क्यों नहीं बनी अब तक?" अब जाहिर था सुबह सुबह हुई अपनी इस दुर्गति का गुस्सा उसे बेचारी शिखा पर निकालने था.

"पूरा पागल है यह बेंद्रे" मैने का " हरामी , चूतिया साला"

"आपने हुमको बुलाया साहेब" लुटिया कचरा उठाने आ धमका

"तुम्हारा नाम हरामी है?" मैने पूछा
"नहीं साहेब हम हरिया नहीं है" उसने भोले पनेसे जवाब दिया.
"फिर क्या चूतिया है?" मैने दोबारा पूछा
"नहीं साहेब हम लुटिया है लुटिया" उसने समझाते कहा
"तो जा के कचरा लूट ले , क्यों अपनी इज़्ज़त मुफ़्त में लुटवा रहा है?" मैने कहा और दरवाज़ा बंद किया
अंदर जाते मैने सुना "ये साहेब भी बड़े अजीब है , क्या कहते हैं ससुरा कुछ समझ ही नही आता" 
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07-26-2017, 11:21 AM,
#3
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मेरी नौकरी एक बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी में थी , जाहिर था वर्किंग अवर्स इधर उधर होते थे. घर पर कोई नहीं था , बूढ़ी माँ भाई और उसके परिवार के साथ दिल्ली में रहतीं थी और मैं यहाँ नौकरी के वास्ते पुणे में रहता था.
सामने रहने वाले राजन बेंद्रे एक मल्टी नॅशनल बॅंक के आई टी डिपार्टमेंट में एवीपी था और खूब कमाता था इसी वजह से वह खुद को दूसरों से उँचा समझता , बिल्डिंग में रहने वाले ज़्यादातर लोग रिटाइर्ड बॅंक के एंप्लायीस थे और
सीधे साधे थे .
उनमें सबसे उँची हैसियत बेंद्रे की ही थी इसलिए लोगों से ऐंठा रहता. लोग बाग उसकी अमीरी से काफ़ी जलते और पीठ पीछे खूब गालियाँ देते.
उसकी बीवी शिखा बेंद्रे जितनी खूबसूरत दिखती थी उतनी ही खूबसूरत और उम्दा लड़की थी , हमेशा बिल्डिंग के लोगों की मदद में आगे रहती थी , बिल्डिंग में कई घरेलू फंक्षन्स में लोगों के यहाँ उसका आना जाना होता . हालाँकि
वह राजन जितनी पढ़ी लिखी तो न थी लेकिन संस्कृत में उसने एम ए किया था और अब वह पीएचडी करना चाहती थी , लेकिन राजन को उसका आगे पढ़ना या नौकरी करना सख़्त नापसंद था. अपना खाली वक्त काटने वह बिल्डिंग
के क्लब हाउस में वीकेंड को बड़ों को योगा सिखाती और छोटों संस्कृत श्लोक , लेकिन उसके पति राजन को यह भी पसंद नहीं था.
एक दिन शनिवार की शाम को ऑफीस से घर आते वक्त मैं पीने का सामान ले आया , दोस्तों के साथ पीने का प्रोग्राम था .
तो मैं जल्दी घर आ कर तैयारियाँ करने लगा . फ्रिज खोला तो पता चला बर्फ जमाना भूल गया था , अब बाज़ार जाने की हिम्मत नहीं बची थी मैने सोचा , पड़ोसियों से पूछा जाए मैने बेंद्रे के घर की बेल बजाई और कुछ देर बाद
दरवाज़ा खुला , सामने देखा शिखा खड़ी थी , शायद अभी अभी नहा कर आई थी .
"ओह अमन जी आप? अंदर आइए न " उसने स्वागत करते हुए कहा और मुस्कुराइ
" जी नहीं ठीक है , मैं तो बस थोड़ी बर्फ माँगना चाहता था , घर पर मेहमान आने वाले हैं" मैने कहा
"जी आप कुछ मिनट बैठिए , मैं अपनी पूजा ख़त्म कर आपको बर्फ देती हूँ , तब तक आप बैठ कर टीवी देखिए' उसने समझते हुए कहा.
अब मरता क्या न करता , कुछ देर यहीं बैठ कर बोर होना था , सोचा बैठे बैठे इसी को देख कर अपनी आँखों की प्यास मिटाई जाए. मैं अंदर आ कर सोफे में बैठ गया और वह पूजा घर की तरफ चली गयी जो सोफे से दिखता था .
मैने देखा सामने शू रॅक के उपर फेंग शुई के बंबू ट्री रखा हुआ था उसी के बगल में एक फोटो फ्रेम रखी थी जिसमे राजन और शिखा की शादी की तस्वीर थी.
"ओह , इन गहनों को पहने और शादी के जोड़े में शिखा कितनी खूबसूरत दिख रही है , जैसे कोई अप्सरा हो"
मैने सोचा और इधर उधर देखा दीवारों पर सर्टिफिकेट फ्रेम टँगे हुए थे . जो शिखा ने कई कॉंपिटेशन में जीते थे.
"अच्छा तो शिखा इतनी ट्रडीशनल होते हुए भी टॅलेंटेड है" मैने मन ही मन सोचा
"शुभम करोती..." मुझे शिल्पा के श्लोक सुनाई दिये.
मेरा मन मे उसके लिये रेस्पेक्ट और भी बढ़ गयी , की इतनी अमीर होते हुए भी वह अपनी जड़ों को नहीं भूली. वहीं उसका बदतमीज़ पति जो किसी से सीधे मुंह बात भी नहीं करता. मैं यही सोच कर हैरान था की इतने में शिखा
आरती का थाल पकड़े मेरी ओर आई
"लीजिये अमन जी आरती लीजिये" और मुस्कुराई
मैने चुपचाप "आरती ली और अपने मुंह पर हाथ फेरे.
" माफ करियेगा लेकिन पूजा के कारण मैने आपको चायपानी तक नहीं पूछा" उसने माफी मांगते कहा
"जी वह सब रहने दीजिये , मुझे बस इस कंटेनर में बर्फ दे दीजिये , चाय पीने मैं फिर कभी आऔंगा" मैने कहा
"जी अभी लीजिये" वा कंटेनर ले कर अंदर गयी और बर्फ से भर कर उसे मुझे थमाया.
"कुछ मदद लगे तो बताईयेगा" वह हंस कर बोली
"जी जरूर" मैने उसको थॅंक्स कहा और अपने फ्लॅट चले आया.
अंदर पँहुचा तो पता चला दोस्*त लोगों को ऑफीस में काम आया.है इसलिये वो देर से आयेंगे , मैने सोचा शाम के वक़्त घर बैठ कर बोर होने से अच्छा है थोड़ा बाहर घूम लिया जाए


मैं फ्लॅट के बाहर निकला तो शिखा मेरी ओर पीठ कर ताला लगा रही थी.
उसने पंजाबी सूट पेहना हुआ था और उसकी लम्बी चोटी उसकी कमर के नीचे लटक रही थी , मैं उसकी खूबसूरती को देख ही
रहा था कि वह पीछे मुड़ी
"ओह अमन जी अच्छा हुआ जो आप बाहर आ गये , देखिये ना ये ताला जाम हो गया , प्लीज़ ताला लगने में मेरी मदद कीजिये"
वह बोली
"लाइये" मैं उसकी ओर बढ़ा "ताला चाभी मुझे दीजिये , मैं लगता हूँ टाला" कह कर मैने उसकी ओर हाथ बढ़ाया.
लेकिन उसने अपना हाथ खींच लिया "न.. नहीं आप मुझे यह टाला लगाना सिखाईये , राजन बाज़ार से नया ताला कल ही लाये हैं
अगर उन्हें पता चला कि मुझे यह ताला लगाना नहीं आता तो बहुत नाराज़ होंगे" उसने घबराए हुए कहा
"अरे छोडिये शिखा ज़ी , ताला लगने में कौन सी बड़ी बात है ? मैं आपको सिखाता हूँ आप ताला लगाइये"
"जी अच्छा"
वह मुड़ी और ताला लगने लगी , मैं उसके एकदम करीब जा कर पीछे खड़ा हो गया , उधर मेरा लंड भी उसकी फूली गांड़ को
देख कर बड़ा होने लगा हालांकि वह ताला लगने की अभी भी कोशिश कर रही थी.
मैने उसके करीब जा कर उसके बदन से उठति भीनी भीनी खुश्बू को महसूस किया ही था की उसने ताला लगा कर जोर से
झटका दिया और वह पीछे हटी.
उसके एकदम से पीछे हटने की वजह से उसके सिर से मेरी नाक टकरा गयी , और मैने उसके खुशबूदार काले घने बालों को
सूंघा , उसकी बम भी मेरे कड़क लॅंड से टकरा गयी,

"ओह अमन जी सॉरी आपको लगी तो नहीं?" उसने चिंतित हो कर पूछा
मैं अपनी नाक को सहला रहा था
"अपना हाथ हटाओ मुझे देखने दो" उसने मेरा हाथ हटते कहा
"अरे आपकी नाक से तो खून आ रहा है" उसने परेशान होते हुए कहा
"अरे ये मामूली चोट है मैं मुँह धो कर आता हूँ" मैने कहा
"नही.. नही आपको मेरी वजह से चोट लगी है, आइए में आपको डॉक्टर जोशी के पास ले चलती हूँ"
"अरे शिखा जी ये मामूली चोट है आप परेशन मत होइए"
"नही अमंजी आप इस चोट को इग्नोर ना करे , आपको मेरे साथ चलने में ऑक्वर्ड हो रहा है तो मैं डॉक्टर साहब को बुला लाती हूँ , वह पहले फ्लोर पर ही रहते हैं" उसने समझाते हुए कहा
"जैसा आप ठीक समझे" मैने हार कर कहा , मुझसे उसकी बात काटी नही गयी
"जी अच्छा , आप अंदर जा कर आराम कीजिए मैं डॉक्टर को ले आती हूँ" कहकर वह तेज़ी से सीढ़ियाँ उतरने लगी.
इधर मैं घर आ कर मुँह धोया और सोफे पे बैठ गया लेकिन खून अभी भी बह ही रहा था, दरवाज़ा मैने जान बूझ कर खुला ही रखा.
10 मिनिट बाद वह हाँफती हुई उपर आई और बेल बजाई .
"अरे शिखा जी आइए बैठिए"
"डॉक्टर साहब किसी एमर्जेन्सी केस में हॉस्पिटल गये हैं"
"जी कोई बात नही , आप मेरे वजह से तकलीफ़ ना लें , मैने जख्म धो लिया है"
"लेकिन अभी भी आपकी नाक से खून बहना बंद नही हुआ"
"वो रुक जाएगा , आप आराम से बैठिए तो सही?" मैने कहा
"एक मिनिट" कह कर वा उल्टे पाँव अपने फ्लॅट की ओर भागी
"अब ये कहाँ चली गयी? बेफ़लतू में मेरे कारण टेन्षन लेती है" मैने परेशान होते हुए सोचा. नाक तो कम्बख़्त अभी भी दुख रही थी और खून था की साला रुकने का नाम ही नही ले रहा था.
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07-26-2017, 11:21 AM,
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RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
इतने में शिखा एक बड़ा सा प्याज़ ले कर अंदर आई
"ये क्या लाई हो?" मैने पूछा
"यह कटा हुआ प्याज़ है , इसकी तेज़ गंध सूंघने से नाक से खून निकलना बंद हो जाता है"
उसने समझते हुए बोला
"और जो खून निकलना बंद ना हुआ तो"
"अरे तुम सूंघ के तो देखो" कहकर उसने कटी हुई प्याज़ मेरे नथुनो की ओर बढ़ाई
मैने एक लंबी साँस ले कर उसकी गंध खींची.. "आहह"
"अब थोड़ी देर नाक को इस टिश्यू पेपर से दबाए रखो और हर पाँच मिनिट में ऐसे ही दोबारा सांस लो"
उसने फरमान सुनाया. देखते ही देखते नाक से खून बहना बंद हो गया
"अरे वा अपने तो कमाल कर दिया शिखा जी" मैने उसकी तारीफ करते हुए कहा
"आपके देसी इलाज ने तो मेरा जख्म ठीक कर दिया"
"ये आयुर्वेद है अमन जी हर मर्ज की दावा है इसमे" उसने बताया
"अछा?"
"हन"
"आपको कैसे मालूम?"
"मैने आयुर्वेद पढ़ा है"
"तो आप वैद्य भी हैं?"
"थोड़ी बहुत नुस्खे जानती हूँ"
"जो भी हो , आपके नुस्खे से मेरी नाक का खून बहना बंद हो गया , बहुत बहुत शुक्रिया आपका" मैने धन्यवाद देते हुए उसको बोला
"अरे अमन जी आप तो शर्मिंदा कर रहे हैं , आप बैठिए आराम कीजिए आपके लिए मैं हल्दी वाला गर्म दूध ले आती हूँ"
उसने जवाब दिया और अपने फ्लॅट की तरफ चली गयी.
"कितनी प्यारी और केरिंग औरत है यह" मैने सोचा "मुझे ऐसी बीवी मिल जाए तो पलकों पर बिता कर रखूँगा"

"आउच" मैने ज़ोरो से चीखा
शिखा ने मेरी चादर खींच ली थी
"बीप.. बीप.. बीप"
"ओह साला अलार्म बज गया" मैने उठते हुए कहा
"ढपाक"
की आवाज़ के साथ शिखा मेरे उपर औंधे मुँह कूदी और मुझे वापस बिस्तर पर पीठ के बल गिरा दिया

अब वो मेरे उपर सवार थी और मैं पूरा नंगा पीठ के बल उसके नीचे लेटा हुआ था

"हटो शिखा अभी इस सब का वक़्त नही है" मैने उसको हटाने की कोशिश की
"आआह नही" मैं दोबारा दर्द से कराहा
उसने मेरे कान ज़ोरों से अपने दाँतों तले दबाए और काट खाए
"उफ्फ"
"सुनो" वह फुस फुसाई
"नही देखो अलार्म क्लॉक बज रही है...5:30 बजे ड्राइवर आएगा , बॅंगलुर की फ्लाइट पकड़नी है" मैने मना करते हुए कहा

"हा हा हा" वह हंसते हुए बोली वा मेरी जांघों पर बैठ गयी
मेरा लंड एकदम तन कर उसकी नाभि पर टिक गया , मेरे लंड को उसके गर्म मुलायम गद्देदार
पेट का अहसास हुआ
"अभी मैं तुम्हे शिखा एरलाइन्स की फ्लाइट पर ले चलती हूँ" वह हंसते हुए बोली
और फिर घुटनों के बाल बैठ कर तोड़ा उठ कर उसने अपनी अंडरगार्मेंट निकाल कर बगल में फेंक दी , दाएँ हाथ से उसने नाइट लॅंप बुझा दिया और बाएँ हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी पुच्चि में बेदर्दी से खींच कर घुसाया.

"उफ्फ क्या कर रही हो" मैं दर्द से चीखा

"तुम्हे प्यार कर रही हूँ" उसने झुक कर अपनी नाक मेरी नाक से टकरा कर कहा और बाए गाल को अपने जीभ से सहलाया
"अभी 4:30 ही हुए हैं फ्लाइट सवा आठ की है , चलो ना एक शॉट मारते हैं" उसने मनाते हुए कहा
"आइी ईई"
"क्या हुआ मेरे राजा?"
"उफ़फ्फ़" मैं दोबारा हल्के से चीखा
मेरा सबूत लंड उसकी पुच्चि में जा घुसा था और अब उसकी पुच्चि में धंसते हुए मेरे लंड का गुलाब खिल उठा था.
"अया" मेरे गर्म गुलाब को अपने अंदर पा कर उसने चैन की साँस ली.
मैने देखा मेरी जांघों को बीच अपनी टाँग फैलाए मेरे लंड को अपनी योनि में दबाए वह घुटनो के बल खड़ी हुई थी , उसके दोनो हथेलियन मेरी हथेलियों पर टिकी थी

उसने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुकाई और उसकी पुकचि मेरे लंड के इर्द गिर्द तेज़ी से दबाव बनाते हुए आ धँसी
अब की बार मैने उसकी हथेलियों पर दो उंगलियों के बीच अपनी उंगलियाँ फसाईं और अपनी टाँगें उसकी कमर पर लपेट ली और उसे उपर की ओर धक्का दिया.

"अयाया...उफ़फ्फ़" वह दर्द से बिलबिला उठी और उतनी ही तेज़ी से मुझ पर आ गिरी.
हमारी गर्म सांसो की आवाज़ से आज समा हाँफ रहा था
सर्द अंधेरी रात में हम दोनो के जिस्म से पसीना पसीना हो गये थे
वा धीरे धीरे उपर नीचे होने लगी , उसके उपर नीचे होते हुई जिस्म की छुअन से मेरा गुलाब भी अंदर बाहर होने लगा
हौले हौले उसने अपनी स्पीड बधाई और उसकी साँसे तेज तेज चलने लगी.
मैं उसकी तेज चलती साँसों की आवाज़ सुन कर हंस पड़ा ऐसे लग रहा था जैसे कोई स्टीम एंजिन पफ पफ करते हुए जा रहा हो.

"क्या हुआ ऐसे पागलों के जैसे हंस क्यो रहे हो?" वह गुस्सा हो कर बोली और उसने मेरे लंड पर अपनी चूत की दीवारों से दबाव बढ़ाया , मुझे गुदगुदी हो रही थी
"हा हा हा" मैने उस गुड गुडी से खुद को बचाने के लिए खुद को सिकोड़ना चाहा
"आइ नही .....तुम्हारी चिकनी डंडी मेरी गिरफ़्त से निकल रही है .... हँसो मत" वह अपने दाँत भींच कर बोली
उसने अपने हथेलियों की पकड़ मेरी हथेलियों पर और मज़बूत की , किसी भी कीमत पर वो मेरे लंड को अपनी छूट से निकालने नही देना चाहती थी

"स्लॉप" की आवाज़ से मेरा लंड उसकी पुच्चि से निकल गया
मैने देखा उस नीली रोशनी में मेरी जांघों के बीच मेरा लंड मीनार की तरह टन कर खड़ा था और हमारी मुहब्बत के रंग में सराबोर हो कर चौदहवी के चाँद की तरह चमक रहा था.

"सब गड़बड़ कर दिया तुमने" शिखा शिकायती लहज़े में बोली "कुछ देर अपनी हँसी कंट्रोल नही कर सकते थे?"
"तुम जानते हो की अब 4-5 दीनो तक मुझे तुम्हारा प्यार नही मिलेगा" उसकी आँखों में आँसू भर आए
"तुम हमेशा अपनी मनमानी करते हो" उसने रुआंसी हो कर कहा "कभी मेरा ख़याल नही करते"
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07-26-2017, 11:21 AM,
#5
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
शिखा की कद्र उसके पति राजन को न थी , वह हमेशा उसको सबके सामने जली-कटी सुना कर बेइज्जत करता.
असल में उस जैसा इंसान , किसी भी लिहाज से शिखा के लायक नहीं था . उसकी शिखा के लिए बेरूख़ी का ही
नतीजा था कि उसे अमन की बाँहों के सहारे की ज़रूरत पड़ी , और अमन ने हाथ में आया हुआ मौका लपका.
अब यह शिखा की चरित्रहीनता थी या राजन की रिश्तों को लेकर असंवेदनशीलता , कुछ कह नहीं सकते हाँ , राजन एक पति के तौर पर पूरी तरह 'फेल' हुआ

"मेरी बात सुनो शिखा देखो रोना मत" मैने उसको अपनी बाहों में लेते कहा
"हटो तुम सब मर्द एक जैसे होते हो" उसने मेरे सीने में मुँह छुपा कर रोना शुरू किया
"खुद की प्यास बुझते ही डोर हो जाते हो और औरत को प्यासा छ्चोड़ देते हो" वह फफक कर रो पड़ी
"इधर देखो शिखा ... मेरी ओर देखो" मैने अपनी हथेलियों में उसका चेहरा भर लिया
उसके आँसू की धारा बह चली थी , उसके बाल भी अस्त व्यस्त हो गये थे
अपने हूथों से उसको हूथों को च्छुआ कर कहा
"क्या तुम्हे मुझ पर यकीन नही? अपने अमन पर भरोसा नहीं?"
"त..तुम पर मुझे अपने आप से ज़्यादा भरोसा करती हूँ अमन.. ले..ले..लेकिन" वह अपने आअँसू पोंछते बोली
"लेकिन? लेकिन क्या? शिखा?" मैने उठते कहा
"हम जो कर रहे हैं वा ग़लत है अमन" उसने सिसकते हुए कहा
"मैं राजन को धोखा नही दे सकती" उसने आँसू पोंछते हुए कहा
"मैं एक बार तुम्हे छोड़ सकती हूँ लेकिन राजन को नही" उसने अपना फ़ैसला सुनाया
उसका पति प्रेम देख कर मेरे टन बदन में आग लग गयी
"हर बार का तुम्हारा यही रोना है शिखा , जब भी हम साथ होते हैं और प्यार करते हैं तुम राजन का नाम ले कर रोना धोना शुरू कर देती हो" मैने झुंझला कर कहा

"वा मेरे पति है अमन" वह रुक कर बोली "और अगर एक पत्नी अपने पति की याद में रोटी है तो क्या बुरा है"
"ओह कम ओं शिखा" मैने उसकी ओर बढ़ते कहा "वा तुम्हारे लायक नही है , और इतना होने के बावजूद भी तुम्हे उसकी फ़िकरा है"

"वा मेरे पति हैं अमन" उसने दोहराया "मैं उनके नाम का मंगलसूत्र पहनती हूँ और उनके नाम का सिंदूर लगती हूँ" उसने अपने गले में पड़ा मंगलसूत्रा हाथ में ले कर मुझे दिखाते हुए कहा.

"तो फिर उसी के पास क्यों नही चली जाती" मैने भड़क कर कहा "मेरे पास मुँह उठा कर क्यों चली आती हो?"
मैने रुक कर कहा "तुम अपनी फीलिंग्स मेरे सामने बोल देती हो , लेकिन मैं कुछ कहूँ तो तुम्हारा रोना धोना शुरू"

"अच्छा? ऐसा क्या कह दिया मैने?" उसने मुझसे सवाल किया

"आज भी मेरा तुमसे सेक्स करने का कोई मूड नही था...तुम्हारी खातिर तैयार हुआ और तुम हो की मेरे हंसने से तुम्हे तकलीफ़ होती है" मैने तेज़ आवाज़ में कहा
"देखो शिखा मैं तुम्हारा पति नही हूँ जो तुम्हारे इशारे पर नाचू, मेरी अपनी फीलिंग्स हैं और उनको एक्सप्रेस करने से तुम मुझे रोक नहीं सकती" मैने खिड़की की ओर देखते हुए कहा , मैने सिगरेट सुलगा ली थी.
"तुम्हारा पति क्या तुम्हे इतनी खुशी दे सकता है?" मैने धुआ छ्चोड़ कर कहा "नही ना ? तभी तुम मेरे पास आई"

यह सुनना था की शिखा बिजली की तेज़ी से बिस्तर से उठ खड़ी हुई और तेज़ कदमो से चलकर मुझे पीछे से आ दबोचा
एक झटके से मुझे घुमाया और "चटाक़" की आवाज़ से कमरा गूँज उठा

ऐसा झन्नाटे दार झापड़ खा कर मैं तो अपनी सुध बुध ही भूल गया , एक पल तो समझ ही नही आया की क्या हुआ , अपने बाए हाथ से मैं अपना गाल सहला रहा था

"क्या? कहा तुमने मैं तुम पर ज़बरदस्ती करती हूँ?" उसने चीख कर कहा
"तुम्हारा सेक्स करना को मूड नही होता?"
"नही शिखा मेरा वो मतलब नही था" मैने समझाते हुए कहा
"मैं क्या खुद तुम्हारे पास चल की आई थी ?" उसने गुस्सा कर पूछा और बगल में रखा फ्लवर पॉट उठा कर मेरी और फेंका
"छणाक" की आवाज़ से वो मेरी पीछे वाली दीवार से टकरा कर टूटा
वा तो अच्छा हुआ की लास्ट मोमेंट पर मैं कूद कर अलग हट गया , वरना उस फ्लवरपॉट से बच नही पता
"वा तुम थे अमन जिसने मेरे साथ प्यार की पींगे बधाई" वा पैर पटकते बोली
"वा तुम थे अमन जिसने मुझे प्यार करना सिखाया , वह तुम थे जिसके साथ मैने जिंदगी के कुछ हसीन पल गुज़रे, वा तुम थे जिसने मुझे अपने प्रेम जाल में फँसाया और अपनी सेक्स की भूख मिटाई , और अब तुम कहते हो की तुम्हे सेक्स का मूड नही होता?"


"शिखा" मैं उसकी ओर लपका और उसके खुले बाल पकड़ लिए
"मैं तुमसे अपनी जान से भी ज़यादा प्यार करता हूँ शिखा"
"छोड़ो मुझे तुम जैसे लोग सिर्फ़ अपने आप से प्यार करते हैं" उसने मेरी बाहों में कसमसा कर कहा.

उसने रोते कहा "अगर राजन बाप बन सकता तो मैं तुम्हारे पास आती भी नहीं" उसने अपने दोनो हाथों से मुँह छुपा लिया
"मेरे पति राजन ने औलाद की उम्मीद हो छोड़ दी थी , वह तो मेरे सास ससुर थे जिन्होने उसे मुझे तलाक़ देने को कहा"
"बिल्डिंग के औरतें मेरी पीठ पीछे मुझे बांझ कहती है , जानते हो मुझे कैसा लगता है ?" उसने मेरे सीने पर मुक्का मारते हुए कहा "तुम नहीं समझोगे.

"शिखा , जब तुम्हें मालूम है कि तुम्हारा पति बाप बनने के काबिल नहीं तो छोड़ क्यों नहीं देती उसे?" मैने एक एक शब्द पर ज़ोर देते कहा "तलाक़ दे दो उसे , और मेरे साथ चलो , हम शादी करेंगे और कहीं दूसरे शहर बस जाएँगे"
"नहीं " उसने भड़क कर कहा "मुझे यह साबित करना है कि कमी मुझमें नहीं राजन में है" उसका चेहरा तमतमा गया
"मेरे प्रेग्नेंट होते ही जब राजन खुश होगा तब मैं यह राज सबके सामने जाहिर कर दूँगी कि मेरे पेट में पल रहा बीज किसका है" उसने कहा
"इससे क्या फायदा?" मैने पूछा
"मुझे राजन को मज़ा चखाना है" उसने मुत्ठियाँ भींचते हुए कहा
"देखो शिखा , तुम जो मेरे पास आती हो और मेरे साथ सेक्स करती हो यह सब तुम माँ बनने के लिए नहीं करती"
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07-26-2017, 11:22 AM,
#6
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
मैने समझाते बोला "फिर ? तुम्हें क्या मैं ऐसी वैसी लगती हूँ?" उसने भौहें तरेर कर पूछा
"नहीं मेरा यह मतलब नहीं था"
"क्या मतलब था"
"यही कि तुम्हारा राजन के उपर गुस्सा है इसलिए यह सब तुम करती हो"
"नहीं यह मेरा राजन के लिए प्यार है"
"नहीं यह गुस्सा और जलन ही है जो तुमसे यह सब करवा रही है" मैने उसकी बात काटते कहा
"तुम्हें यह बर्दाश्त नहीं कि तुम्हारे जैसी सुंदर बीवी के होते हुए राजन अपनी सेक्रेटरी के साथ रातें बिताता है"
"हाँ मेरा खून खौल जाता है, इसमें मेरी क्या ग़लती है?" उसने पूछा
"ग़लती तुम्हारी नहीं हालात ग़लत हैं , और तुम उन्हें सुधार नहीं सकती" मैने उसे समझाया
"कोशिश तो कर ही सकती हूँ ?" उसने नर्म हो कर कहा
"उसके माँ बाप , तुमको बांझ ठहरा कर तलाक़ करवा देंगे तुम दोनो का , कैसे सुधरोगी हालातों को?" मैने सवाल किया
"इसीलिए तो तुमसे कह रही हूँ मेरी मदद करो" उसने हाथ जोड़ कर कहा
"देखो शिखा मैं तुमको पहले भी कह चुका हूँ , तुम्हें प्रेगनेंट बनाने के लिए इस सब में पड़ना नहीं चाहता " मैने साफ किया
"तुम पहले भी कई लड़कियों से सेक्स कर चुके हो , क्या मैं नहीं जानती ? हर शनिवार और रविवार की रात तुम क्या करते थे ?" शिखा ने मुझे धमकाते हुए कहा
"शिखा , उससे तुम्हारा कोई लेने देना नहीं" मैने उसको डाँटते कहा
"लेना देना है , हमारे बीच तय हुआ था कि तुम मुझे औलाद दोगे और मैं तुम्हें सेक्स" उसने याद दिलाते हुए कहा
"हाँ , लेकिन तुम बार बार उस राजन को बीच में ले आती हो"
"क्यों न लाऊँ?" उसने पूछा
"मुझे वह पसंद नहीं "
"तो उस दिननवमी के रोज जब मैं मंदिर गयी थी तो आप दोनो मिल कर रंडी क्यों चोद रहे थे ?" उसने पूछा मैं सन्न रह गया.

"रंडी तुम्हारा पति राजन लाया था , उसने दलाल का नंबर मुझसे लिया था , जब दलाल रंडी ले कर पंहुचा तो राजन के पास पैसे नहीं थे , राजन मेरे शौक जानता था उसने मुझसे पैसे माँगें और साथ में मज़ा लेने को कहा , मैंने पैसे दिया और अपने हिस्से की खुशी लूट ली" मैने समझाते हुए कहा

"झूठ , मेरा राजन कभी ऐसा नहीं कर सकता , उसे तुमने बिगाड़ा है" उसने वापस मुझे मारते हुए कहा
"तुमने अपनी आँखों से देखा है उसे यह सब करते हुए शिखा" मैने कहा "मुझ पर इल्ज़ाम मत लगाओ , राजन कोई दूध पीता है ?

"तुम भी बेहद अजीब हो शिखा , तुम्हारा पति तुम्हे अपने पैरों की जूती समझता है , तुम्हारी रेस्पेक्ट नही करता फिर भी तुम उसे अपना पति मानती हो?" मैने उसको झकझोर कर पूछा

"हाँ क्योंकि वो मेरा पति है , अग्नि को साक्षी मान कर हमारी शादी हुई है" उसने अपने आपको मुझसे छुड़ाते कहा .

"किस शादी की बात कर रही हो शिखा?" मैने चिल्लाते हुए पूछा
"ऐसी शादी जहाँ राजन दूसरी औरतों के साथ नाजायज़ रिश्ते बनाए और तुम उसके के लिए अपनी जवानी रातों में अकेले गुज़ार दो?" मैने कहना जारी रखा

"ऐसी शादी जहाँ तुमको हर पल यह अहसास कराया जाए की तुम उसकी लाइयबिलिटी हो?"
"ऐसी शादी जहाँ तुम्हारा पति बाप बनने के काबिल नही और समाज तुमको बांझ ठहराए?"
"क्या मतलब ऐसे रिश्ते का?"

वह अपना चेहरा हथेलियों में छुपा कर रोती रही , मेरी कही सच्ची बातों को वो काट नही सकती थी
"शायद तुम सही हो ग़लती राजन की नही मेरी है , मैं ही उसे वह खुशी नही दे सकी जिसका वो हकदार है" उसने कहा
"ओह फॉर हेवेन'स सेक शिखा प्लीज़ उस राजन के बारे में बात ना करो" मैने भड़क कर कहा "अभी हमने इनटेन्स सेक्स किया और तुम हो की मुझे उसके बारे में बातें कर कर के जलाए जा रही हो" मैने कहा "कौन मर्द होगा जो किसी औरत से सेक्स करने के बाद , किसी दूसरे मर्द की तारीफ सुनना पसंद करेगा?"

"ये उसकी तारीफ नही थी अमन , मुझे तो यह चिंता खाए जा रही थी की जो ग़लत बात उसने मुझसे की वही में उसके साथ कर रही हूँ"

"ग़लत बात? कौनसी ग़लत बात और ये तारीफ नही तो और क्या था"
"ग़लत ये की उसके पीठ पीछे मैं किसी और के साथ" उसने अपनी आँखें मीच कर कहा
"छी..मुझे अपने आप से घिन आती है"

"बोलो शिखा" मैने कहा

"मुझे घिन आती है ये सोच कर की मैं अपनी पति से अलग किसी और की बाहों में रातें गुज़रती हूँ"

"इसमे घिन कैसी? ये तो इंसानी ज़रूरत है" मैने कहा
"ज़रूरत कैसी ज़रूरत?" उसने हैरत से पूछा

मैने घड़ी देखी सुबह के 6 बज रहे थे उजाला हो चुका था कॅब वाला कभी भी आ सकता था ,उसने चाय बनाई और में ब्रश कर के आया. वह कुर्सी पर बैठी और चाय का एक घूँट लिया "तुम किसी ज़रूरत के बारे में बात कर रहे थे"
"हमम्म" मैने चाय की चुस्कियाँ लेते कहा "पहले तो यह की ये बात तुम अपने दिल से निकाल दो , की तुम कुछ ग़लत कर रही हो"
"और?" उसने दूसरी चुस्की ली

"और यह की यह जो तुम कर रही हो वह जिस्मानी ज़रूरत है"
"कैसे" उसने अपने बालों हाथों से साँवरते बोला
"भूख लगने पर तुम क्या करती हो?" मैने अख़बार उठाते कहा
"ये कैसा सवाल है?" उसने कहा
"जवाब दो शिखा भूख लगने पर तुम क्या करती हो" मैने दोहराया
"भूख लगने पर इंसान खाना ख़ाता है , और क्या?" उसने अपने बालों को कलुतचेर से बाँधते हुए कहा.
"तो यह तुम्हारी भूख ही है , जो राजन के साथ होते हुए नहीं बुझती" मैं उठ कर उसके पीछे गया
और उसके बालों का क्लट्चर निकाल कर टेबल पर रखा , उसके काले लंबे खुश्बुदार बाल आज़ाद हो गये.
"और तुम्हारी भूख प्यास का इलाज केवल मेरे पास है" मैने झुक कर उसके बालों को सूँघा और बाए हाथ से उसके उभरे हुए उरूज़ पर हाथ फेरा. उसने उतीज़ना से आँखें बंद कर ली और मेरा हाथ थाम लिया
"शायद तुम सही कहते हो अमन" शिखा ने हल्की आवाज़ में कहा
"जब तुम मेरे साथ होती हो छोड़ दो यह बेकार की चिंता और स्ट्रेस" मैने अपने हाथों से उसके बूब्स मसल्ते कहा . वैसे ही वो गर्म होने लगी.

"आ अमन थोड़ा इधर ...हाँ हाँ ... थोड़ा नीचे हाआँ... प्लीज़ उसको पकड़ के मस्लो...बड़ा अच्छा लग रहा है" 
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07-26-2017, 11:22 AM,
#7
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
मैं समझ गया था उसकी भावनाएँ भड़का कर ही उसको चुप कराया जा सकता था वरना वो ऐसे ही रोते चीखते मेरा दिन खराब करती.

मैने उसको अपने कंधो से उठा लिया , एक झटके से उसके बाल खुल कर मेरी पीठ पर लहराने लगे. मेरी नंगी पीठ पर उसके रेशमी बालों की छुअन अजीब गुदगुदी का अहसास दे रही थी.

"अरे अमन छोड़ो मुझे प्लीज़ नीचे उतारो"
"हा हा हा"
"उसने अपने मुट्ठी भींच कर मेरी पर गुद्दे मारना शुरू किया"
"मैं कहती हूँ नीचे उतारो मुझे.. देखो सुबह हो गयी है"
उसे मुझे मनाते हुए कहा
"छोड़ो ना मुझे"
"तुम हाइपर हो रही थी मैने सोचा तुम्हारा मूड थोड़ा नॉर्मल किया जाए" मैने हंसते हुए कहा
"नही देखो सुबह हो गयी है राजन अभी आता ही होगा , तुम्हे बॅंगलॉर भी तो जाना है, मुझे तुम्हारा नाश्ता भी तो बनाना है , फ्लाइट मिस हो गयी तो?" एक ही साँस में वह सब बोल गयी
मैने उसको बिस्तर पर लिटाया और खुद अपनी अंडरवेर उतार कर बगल में फेंक दी
उसने भाँप लिया की मैं उसके साथ सेक्स करना चाहूँगा
"नही अमन प्लीज़ सुबह का वक़्त है , सुबह सुबह सेक्स नही किया करते" उसने कहा
"मेरा तो जब मन चाहे तब सेक्स करता हूँ" मैने उसकी बातों को इग्नोर करते कहा
"ग़लत है यह" उसने सामने तकिया लाते कहा
"किसने कहा" मैने तकिया हाटते कहा , उसने हंसते हुए मुँह दूसरी और फेरते कहा
"आयुर्वेद में लिखा है"
"अच्छा?"
"हन"
"मैने आयुर्वेद नही पढ़ा काम्सुत्र पढ़ा है" मैने आँखें मिचका कर कहा
"चलो उसकी एक दो पोज़िशन आज़माते हैं" मैने हंसते हुए कहा
"अभी?" उसने आखें फैला कर हैरानी से कहा
"हन अभी इसी वक़्त" मैं बोला "2-4 शॉट लगाएँगे"
"अच्छा?" उसने पूछा
"हाँ"
"डॉगी स्टाइल करते हैं" उसने शरमाते हुए कहा
"नही पहले साइड किक करते हैं" मैने कहा
"नही , मेरी बम दुखती है बाबा" उसने परेशान होते हुए कहा
"बस एक ही शॉट" मैं मनाते हुए बोला
"अच्छा चलो ठीक है . लेकिन ज़्यादा ज़ोर से नही"
"ओके"

मैने उसका गऊन उतारने की कोशिश की उसने लेते लेते ही घुटने खड़े कर लिए
"क्या हुआ"
"मुझे शर्म आती है"
"तुम क्या पहली बार कर रही हो"
"फिर भी"
"पैर नीचे लिटाओ , मुझे गौन उतरना है"
"नही"
"जल्दी"
"तुमने तो बात दिल पे ले ली"
"हॅम"
"मैं तो बस मज़े ले रही थी"
"चलो अब ज़्यादा नखरे मत दिखाओ , मुझे लेट हो रहा है"
"मेरी बात सुनो आज रहने देते हैं , तुम्हारा कॅब वाला आ जाएगा तुम्हारी फ्लाइट छूट जाएगी"
"छूटने दो"
"तुम्हारा नाश्ता बनाना है , तुम भूखे कैसे जाओगे"
"तुम वह सब रहने दो , बाहर खा लूँगा कुछ"
"आआह नही" मैने उसके हाथों के उपर अपने हाथ रख कर दबाया और कहा "बहाने मत बनाओ"
"प्लीज़ नही"
"आज तुम्हे शॉट नही लगाया तो अगले 3 दिन काम में मन नही लगेगा"
"नही ना"
"हाँ" और मैने उसके गाओन के फटे हिस्से में उंगली डाली और उसको फाड़ते चला गया
"चिरर्र तररर.." की आवाज़ से गॉन फट गया
"हाय मेरा नया गाओन फाड़ डाला" उसने शर्मा कर कहा
"अभी तो और भी बहुत कुछ फाड़ना है" मैने मुस्कुरा कर कहा
"क्या फड़ोगे?" उसने मुझे अपनी ओर खींच कर कहा
"क्या फदवाने का इरादा है?" मैने आँख मारी
"हटो शैतान" कह के उसने करवट बदली
"नही" कहते हुए मैने बाएँ हाथ से वापस ज़बरदस्ती उसे पीठ के बल लिटाया
"हा हा हा हा" वा हंस पड़ी
"चलो अब जल्दी अपने कपड़े उतरो शिखा , मुझे देर हो रही है , नो मोर एक्सक्यूसस" मैने उसे कहा
"तुम तो एकदम ऑफीसर की तरह हुक्म देते हो" उसने गाओन उतरते हुए कहा.
मैने देखा उसका दूधिया शफ्फाक़ जिस्म पर अब केवल ब्रा और चड्डी थी
"ब्रा और चड्डी उतरने के लिए क्या अब राजन को बुलाना पड़ेगा?" मैने कहा
"हट शैतान" वह शरमाई
"तो उतार दो इसे भी , मैने बेड पर बैठते हुए कहा उसको नंगा इस हालत में देखते हुए अंजाने ही मेरा लंड फूल रहा था
"सच्ची उतार दूँ?" उसने पूछा
"हां बाबा" मैने हाथ जोड़ कर कहा
"ऐसे नहीं मेरे पैरों पर सिर झुका कर कहना होगा" उसने हुकुम सुनाया
मैने उसके पैरों के पास सिर रखा
"प्लीज़ अब तो उतार दो?"
"हन ऐसे" उसने कहा "जब तक मैं ना कहूँ सिर ना उठना"
"अच्छा बाबा ओके , अब उतार भी दो , इतना क्या नखरा"
"देखो फिर ना नही कहना" उसने चेताया
"नही बाबा अब और मत खेलो " मैने कहा
"1..2...3" कहकर उसने एक झटके से मेरी गर्दन उठाई और अपनी पहनी हुई उतार कर अंडरवेर मेरे नाक पर दबा दी
"हा हा हा हा.." वा ज़ोरों से हंसते हुए बोली
इधर मेरा बदबू के मारे बुरा हाल था "यक" मैने थूकते हुए कहा
"मज़ा आया न मिसटर अमन , पहले शॉट मारने के लिए बेचैन हो रहे थे मैने किसी गूगली डाल दी ना , बोल्ड हो गये"
उसने शरारती हँसी हंसते हुए कहा
मैं लपक कर उस पर कूदा , और अपने नंगे बदन तले उसको दबाया दोनो हाथो से उसके हाथ पकड़े और अपने पैर के अंगूठो के बीच उसके पैर दबाए
"अया छोड़ो मुझे अमन क्या कर रहे हो , दुख़्ता है"
"पनिशमेंट दे रहा हूँ तुम्हे" मैने कहा
"पनिशमेंट?"
"हाँ पनिशमेंट , तुम्हारी चीटिंग के लिए"
"एवेरी थिंग इस फेर इन लव आंड वॉर" उसने इतराते हुए कहा
"नोट रियली" मैने कहा
"अच्छा जी?" उसने कहा
"हाँ जी" मैने कहा
"क्या कर लोगे?"
"तुम बस देखती जाओ"
कहकर मै अपना हाथ उसकी पीठ के पीछे ले जा कर उसकी ब्रा का हुक टटोलने लगा
"नही" उसने कहा
"हाँ" मैने कहा
उसने अपनी पीठ पर पूरा ज़ोर लगाया और उसकी पीठ के पीछे मेरा हाथ दब गया.
"हा हा हा" वह हंस पड़ी
"ये ब्रा हम को दे दे शिखा"
"नही"
"ये ब्रा हमको दे दे शिखा"
"नही"
"हाआअँ" कहते हुए मैने उसके चेहरे के अँधा धुन्द किस्सेस लेने शुरू कर दिए
"उफ़फ्फ़...अया" "आराम से अमन" "नही ना" "ओफफो तुम्हारा वज़न कितना है" "उफ्फ नही"
"उफ्फ मैं तो दब ही गयी तुम्हारे नीचे कितने मोटे हो गये हो १०० किलो के पूरे रोड रोलर हो गये हो" "चि.. तुम नीचे से लीक हो रहे हो , अया अमन तुम्हारे छाती के बाल कितने कड़े हैं मुझको चुभ रहे हैं आइईइ नहीं न प्लीज़ , उफ़फ्फ़"
की आवाज़ों से पूरा कमरा गूँज उठा
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07-26-2017, 11:22 AM,
#8
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
कोई दस मिनिट तक हम यूँ ही आपस में गुत्थम गुत्था थे , जब अलग हुए तो हम दोनो अगल बगल लेट गये.
"तुम्हारी टूतपेस्ट का टेस्ट कितना गंदा है छी , ऐसा लगता है चुइंग गम खाई हो "
"हा हा हा" मैं हंसा
"और तुम्हारी जीभ...कितनी खट्टी है टेस्ट में" उसने शिकायत करते हुए कहा "करौंदे जैसी"
" तुम्हारे छाती के बाल कॅक्टस जैसे चुभते हैं "
"तुम मत चूसों ना , चुपचाप मुँह खोल कर पड़ी रहो , तुम्हारी लंबी ज़बान की नमकीन टेस्ट मुझे अच्छी लगती है , मैं चूस लिया करूँगा तुम्हारी ज़बान"
"नहीं" उसने कहा
"और तुम ये जो अपने होंठो से मेरे गालों को पकड़ कर ज़ोरो से जो चिंता लेते हो जानते हो कैसे लगता है?" उसने पूछा
"कैसे?" मैने कहा
"ऐसे"
"आआइईई शिखा छोड़ दे यार आइ स्वेअर दुबारा परेशान नही करूँगा" मैं दर्द से चिल्ला पड़ा
उसने हाथों में मेरे आँड ले कर मसलना चालू कर दिया
"अब क्यों ? औरतों को अपने बदन के बोझ तले दबाने में मज़ा आता है तुम मर्दों को?"
वह हंसते हुए बोली
"लो अब सज़ा भुगतो मुझे परेशान करने के लिए"
वह मेरे गोटियों पर प्रेशर बढ़ाती गयी , मुझे लगा आज में दर्द से रो दूँगा
की मैने दाए हाथ से उसके बाल पकड़ लिए
"आऐइईए , अमन छोड़ो मुझे मेरे बाल टूट जाएँगे"
"ऐसे नही , तुम्हे पनिशमेंट देनी है"
"पनिशमेंट?"
"हाँ"
"कैसी पनिशमेंट?"
उसने पूछने के लिए मुँह खोला
और मैने उसके सिर को सीधे अपने तने हुए लौडे पर धर दिया
"मुँह में लो इसे"
"छी मुझे घिन आती है"
"लेना पड़ेगा"
"नही"
"ले कर तो देखो मज़ा आएगा"
"छी मैं नही करूँगी"
"उस दिन ब्लू फिल्म देखते हुए पॉर्न स्*तर की तारीफ कर रही थी अब क्या हुआ"
"नही ये गंदा है"
मैने उसको सिर को झटका दिया और अब मेरा 5 इंच का लंड उसके मुँह में था

"अया नही" शिखा मना करते बोली
"मुझे घिन आती है"
"चखो तो सही" मैने कहा
जैसे ही उसकी ज़ुबान मेरे सूपाडे को लगी एक मीठे झंझनाहट मेरे बदन में दौड़ गयी मानो सावन की रात आसमान में जैसे बिजली कौंध गयी हो
"आआह शिखा" मैने उसके बालों के बीच उंगलियों फिराते कहा
"और एक बार जीभ से प्यार करो ना वहाँ" मैने आँखें मूंद ले थी मैं मानो सांत्वे आसमान पर था
"हाआँ वही , तोड़ा नीची ... आआह यू गॉट इट....आआह"
वह बड़े प्यार से मुझे ब्लो जॉब दे रही थी और में उसको गाइड कर रहा था
धीरे धीरे मैने अपनी रॉड उसके गले में अंदर घुसाते गया
"उन्ह..उनह" उसने लंबी लंबी साँसे लेना शुरू की
"हॉवववव आआह" उसने अपने मुँह से मेरे लंड को निकाला और हाँफने लगी
"आअख थू" उसने मुँह से थूका फिर अपने हाथ से मुँह पोंछते बोली "पानी पानी"
मैने पास में पड़ी हुई बोतल उसको दी जो उसने हाथ में पकड़ी

"तुम्हारा जूस कितना खट्टा है" उसने शिकायती अंदाज़ में हंस कर कहा और बगल में पड़े ग्लास में पानी की बॉटल से पानी डाल कर पिया वह जा कर बिस्तर पर लेट गयी "कितने गंदे हो तुम" उसने मुझे कहा "ओरल सेक्स करते शर्म नही आती तुम्हे?" उसने चादर से मुँह पोंछते कहा
"तुम्हे आई शरम?" मैने पूछा
"मुझे क्यों आएगी भला"
"क्यों"
"मैने किया ही क्या है?" उसने भौहे तरेर कर पूछा
"जो किया तुमने ही तो किया"
"क्या किया मैने?"
" मुझे ब्लो जॉब क्या तुम्हारी नानी दे रही थी"
"हट शैतान " उसने कहा "तुमने मुझे फोर्स किया"
"मैने तो तुम्हारे मुँह में अपना दिया था , तुम उसको कुलफी की तरह चाट रही थी"
"तुम्हारे रॉड का टेस्ट शुरू में कुलफी जैसा था लेकिन बाद में अंगूर जैसा खट्टा हो गया" उसने कहा
"देखो मैने तुम्हारा चूसा अब तुम मेरी चूसो" उसने मुझे उंगली दिखाते हुए कहा
"नहीं तुमने आपनी झाटों के बाल साफ नही किए" मैने माना करते हुए कहा
"नही देखो ना मैने वेट टिश्यूस से सॉफ किया है"
"नही" मैने कहा
"प्लीज़"
"अच्छा अपनी टाँग फैलाओ"
उसने बैठे बैठे टांगे फैला दीं और में उसकी फैली टाँगों के बीच बैठा और अपने मुँह को उसकी योनि के मुहाने पर ले गया
उसके पुसी लिप्स एक दम पिंक थे मैने अप्पर लीप को दाँतों में दबाया और दो उंगलियाँ च्छेद में घुसाई

"आआहह अमन...प्लीज़" 
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07-26-2017, 11:22 AM,
#9
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
"आह अमन नही" उसने अपने आँखों पर हाथ रख लिया और बाएँ हाथ से तकिया खींच कर अपनी पीठ को सहारा दिया इधर मैं उसके दो पैरों के बीच बैठ कर उसकी छूट से उंगलियाँ अंदर बाहर किए जा रहा था
"आआहह नही"

मुझे उसकी चूत में डाली गयी अपनी उंगलियों पर गीलापन महसूस हो रहा था.
"छी तुम्हारे नाख़ून कितने बड़े हैं"
"नाख़ून गड़ाऊं?"
"आ नही"
"क्यो"
"दुख़्ता है उसने कहा"

मैं खड़ा हो गया और तेज़ी से उसकी चूत में उंगली अंदर बाहर करने लगा

"आ क्या कर रहे हो?"
"प्यार"
"ऐसे करते हैं प्यार?" उसने शर्मा कर पूछा
"बताऊं कैसे करते हैं?" मैने आँख मार कर कहा
"हाँ " उसने कहा
"लो देखो" कहते हुए मैने हथेली की बाकी उंगलियाँ उसकी चूत में घुसा दी
"आऐइइईईई" की चीक से कमरा गूँज उठा
मैं अपनी पाँचो उंगलियों से उसकी अन्द्रुनि चूत को सहलाकर टटोलने लगा
"हाफ़ हाफ़ हाफ़" वह जीभ निकल कर हाँफने लगी
"हाफ़..हाफ़...ये प्यार है या अत्याचार..हाफ़..हाफ़" उसने हानफते हुए पूछा
"तुम चाहे जो समझ लो" मैने हंसते हुए कहा
"आइइईई..नही अमन प्लीज़ रूको" वा चीखे जा रही थी
मैं खड़ा था और वा बिस्तर पर तकिये के उपर लेती थी , लेकिन उसका दर्द से चीखना जारी था.
मैं नीचे झुका और उसके मुँह से अपना मुँह भिड़ा दिया
"उन्हूँ" उसने मुँह फेर लिया
"क्यों? मेरे मुँह लगने में आपको क्या तकलीफ़ है मेडम?" मैने पूछा
"हाफ़.. हाफ़..तुम्हारी जीभ खट्टी है..हाफ़..हाफ़" वा हानफते हुए बोली
"चूसनी तो पड़ेगी" मैने कहा और उसके होठों पर कटा
"ईईए" वह चीलाई "तुम बड़े वो हो"
"वो माने?"
"वो"
"क्या?" मैने उंगली करना रोक कर पूछा
"समझो ना कुछ बातें बताना ज़रूरी होता है क्या?"
मैने अपना हाथ बाहर निकाला , पाँचो उंगलियाँ चिपचिपी हो गयी थी
"वितड्रॉ क्यों कर लिया?" उसने चादर से अपनी योनि सॉफ करते कहा
"ब्रेक" मैने कहा और अपने लंड पर उंगलियों से उसका जूस लगाने लगा
"आइसिंग कर रहे हो क्या" उसने तकिये को बाहों भर कर कहा
"नही लंड की ग्रीसिंग चल रही है" मैने जवाब दिया
"अच्छा?"
"हन"
"एक कम करो ना मेरी कोल्ड क्रीम लगाओ"
"लाओ"
उसने डिब्बी देने के लिए हाथ बढ़ाया , तो मैने उसकी हथेलियों में अपना लंड देते कहा
"तुम्ही लगाओ इसको"
"नही"
"क्यों?"
"मुझे घिन आती है" उसने कहा
"अरे तुम्हारा भविश्य तुम्हारे हाथों में दे रहा हूँ शिखा"
"ऐसा क्या?" उसने शरारती हँसी हंसते कहा
"और क्या?" मैने आँख मारते कहा

"तो तुम मुझे माँ बनाना चाहते हो" वह इठला कर बोली
"अब तुम्हे एक शॉट में दादी मा तो बना नही सकता शिखा" मैने उसे चूमते हुए कहा
"तो तुम मा ही बन लो"

"मेरी कोख तो राजन के लिए रिज़र्व्ड है" वह आँखें छोटी करती बोली "डॉन'त यू नो?"
"उसका रिज़र्वेशन तभी कॅन्सल हो गया , जब तुमने उसकी सीमेन अनॅलिसिस की रिपोर्ट मुझे दिखाई थी"
"ह्म्*म्म्म डॉक्टर भी यही बोले थे"
"तो शुभ काम में देर कैसी? अपनी टांगे फैलाओं और मेरे लॉड का वेलकम करो" मैने उसकी टांगे पकड़ कर बोला तो उसने अपनी टाँगों से ज़ोर का झटका दिया , मैं फ्लोर पर गिर पड़ा और वह हंसते हुए पेट के बल बेड पर लेट गयी

"हा हा हा कैसा मज़ा चखाया" वह बोली
"मज़ा चखना है तुमको?"
"तुम्हारा मज़ा तो चख के देख भी लिया मैने...कितना खट्टा है" वह मुँह चिढ़ा कर बोली

"अब की बार मज़ा दूसरा होगा"
"कैसा?" शिखा अपने बाल ठीक करते बोली
"तीखा" मैने तेज़ आवाज़ में कहा
"लौडे पे क्या मिर्च लगा कर चुस्वाओगे मुझे?" उसने मज़ाक उड़ाया
"ठहरो मैं किचन से लाल मिर्च का पाउडर ले आती हूँ" , उसने बिस्तर से उठते कहा.
"रूको ठहरो" मैने उसका हाथ पकड़ा और मरोड़ते हुए कहा "इतनी जल्दी क्या है शिखा जानेमन"

"हटो छोड़ो मुझे , मुझे देखना है तुम्हारा तीखा टेस्ट" उसने मेरे हाथ पर दाँत गाड़ते कहा

"आअहह" उसके तेज दाँत मेरी बाँह में गड़ रहे थे मैने देखा उसके दाँतों की छाप उभर गयी थी "पिछले जनम में तुम कुतिया थी क्या शिखा ?"

"मैं कुतिया तो तू कुत्ता" वा खिलखिला के हंस पड़ी "और तू ऐसा वैसा नही बड़ा हरामी कुत्ता है अमन"
"मैं और कुत्ता?" मैने हैरत से पूछा
"हां कुत्ता है तू मुझ जैसी सीधी साधी लड़की को तू अपने बिस्तर पर खींच लाया" उसने अपने मांसल कूल्हे मेरी जाँघ पर रगड़ते कहा

"हां शिखा तू तो जैसे बड़ी सती सावित्री है , पति के पीछे गैर मर्द से चुद्ति है" मैने उसके मम्मे हाथों में दबा कर बोला

"आअहह अमन" उसने अपने चूतड़ हिला कर धक्का दिया "हर औरत में एक रंडी छुपी होती है , तुमने मेरे भीतर की रंडी को जगा दिया"

मैने उसके मम्मे ज़ोर से मसले और उसकी गर्दन पर अपनी जीभ फिराई और कंधे के तिल पर काट खाया

"आअहह अया अमन नही , ऐसे मुझे कंधे पर मत काटो" उसने मना करते कहा "राजन तुम्हारे दाँतों की छाप मेरे बदन पर देखेंगे तो क्या कहेंगे?"
"कुछ नही कहेगा वो , उसके पास इतना टाइम कहा"
"वह मुझे रंडी समझ लेंगे"
"तू रंडी नही कुतिया है , मेरी पालतू शिखा कुतिया" कहते हुए अपना लंड उसकी गॉंड की दरार में घुसाया
मखमली गांद का रेशमी अहसास मुझे पागाल बना रहा था

"अया अमन" आराम से शिखा अपने चारों पैरों पर खड़ी होते बोली
"अब मुझे आराम कहाँ स्खिका डार्लिंग" मैने उसके पीछे घुटनों के बल खड़े होते कहा
"चलो अब अपना एस होल फैलाओ"
"पहले वॅसलीन तो लगा लो"
"ज़रूरत नही"
"मतलब?"
"तुम्हारी कुँवारी गंद को ल्यूब्रिकेशन की ज़रूरत नही"
"क्या सच?" उसने चहकते पूछा
"हाँ , गीली गांद में लंड ऐसे ही चला जाता है"
"तुम्हे कैसे मालूम?" उसने बेड पर तकिये रखते हुए कहा
"तुम्हारी गंद में एक बार उंगली की थी" मैने हंसते हुए कहा
"और तुम ये मुझे अब बता रहे हो?" उसने नाराज़ होते हुए पूछा
"तो तुम क्या चाहती हो? तुम्हारी गांद में उंगली करने का मैं रेकॉर्ड पब्लिश करूँ तुम्हारे पति को ?" मैने अपना लंड उसकी गांद में घुसते कहा
"अरे कॉंडम तो पहन लो" उसने अपने चेहरे पर आए बलों को सँवरते कहा "तुम्हे इन्फेक्षन हो जाएगा"
"नही होगा , तुम बाद में ब्लो जॉब दे देना"
"ची ची..गांद मरवाने के बाद में अपने मुँह में तुम्हारा बुल्ला नही लूँगी" उसने मना करते कहा
"डॉन'त पुट कंडीशन्स डार्लिंग" मैने अँग्रेज़ी में उंगली दिखाते कहा
"आइ विल , आस इस मिने सो इट्स सोल्ली माइ डिसिशन"
"ओक...देन ई वितड्रॉ" मैने खड़े होते कहा
"नो..नो प्लीज़ वेट" उसने कहा
"आटिट्यूड दे रही थी?"
"तो क्या? मुझे बिना बताए तुम मेरी गंद में उंगली करोगे?" उसने सवाल किया "बताओ कब मेरी गंद में उंगली की थी?"
"तुम उस दिन फेंट हो गयी थी और तुम्हारे पति ने घर पे मेडिसिन पंहुचने कहा था उस दिन" मैने कहा
"यक" उसने मुँह बनाते हुए कहा "उस दिन तो मेरा पीरियड था"
"तो?"
"तो क्या? सारा दिन सवाल जवाब ही करना है ? फ्लाइट नही पकड़नी क्या " मेरी गांद में लंड क्यतुम्हारा बाप आ कर डालेगा?" उसने हाथों से मेरी आरती उतारने का नाटक किया
"तुम मुडोगी तब तो मैं गांद मारूँगा ना" मैने उसको कमर से घूमते कहा "और ये अपने बाल खोल दो"
"वो क्यूँ?" उसने पूछा
"खुले हुए बालों की महक मेरी सेक्स अपेटाइट बढ़ाते हैं" मैने उसकी गर्दन का तिल चाटकर कहा
"अच्छा जी?"
"हां जी"
मैने दोबारा लंड उसकी एस में घुसाया , वो झुक कर कुतिया की तरह बैठ गयी और मैं उस पर सवार हो गया
"तुम्हारी एस कितनी टाइट है" मैने शिकायत करते बोला
"अमन तुम्हे मेने क्या कहा था?"
"क्या?" मैने अंजन बनते हुए पूछा
"वॅसलीन लगाने को कहा था" वह बोली
"नही" मैने मना करते हुए कहा
"तुम्हे नही पसंद तो नारियल तेल ही लगा लो , तुम्हारा करेले जैसा लंड अंदर जाएगा तो मुझे दुखेगा" उसने कहा
"ना , लंड चिकना हो जाता है"
"तुम्हे एनल सेक्स क्या मॅगी 2 मिनिट नूडल लगता है? जो बिना चिकनाई के मेरी गाअंड लेना चाहते हो?" उसने कहा.
"क्यों? तुम्हारा पति राजन आराम से मिश्रा जी से मरवा लेता है , तुम्हारे ही नखरे हैं" मैने उसे चिढ़ाते हुए कहा
"वो तो है ही गांडू" उसने मुँह बना कर गाली बकते कहा "उसकी बात यहाँ ना करो , जल्दी एक शॉट लगाओ तुम्हारी कॅब आती होगी" 
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07-26-2017, 11:22 AM,
#10
RE: Nangi Sex Kahani रिश्ते अनजाने
"तुम पहली बीवी होगी जो खुले आम पति को गन्दू कहती हो" मैने पीछे से धक्का लगते कहा

"आउच" वह दर्द से चिहुन्क उठी "आहिस्ता , धीरे धीरे आराम से" वह बोली
"टाइम नही है जल्दी निबताओ" मैने कहा "देखो अलार्म बजने लगा सुबह के 7:30 बज रहे हैं"

"बस एक शॉट और" वह मिन्नत करते बोली
"ओके डार्लिंग" मैने कहा
शिखा की मखमल जैसी गांद को छोड़ कर जाने को जी नही कर रहा था लेकिन अब ड्यूटी पर जाना था.

तीन चार बार धक्कम पेल होने के बाद शिखा बोली "ओक पॅकप"
मैने उसकी गंद से लंड निकालते कहा "पॅकप ? खुद को क्या बॉलीवुड हीरोईन समझती हो?"

"और क्या? वरना तुम कितनी शादी शुदा लड़कियों के पीछे लंड हिलाते घूमते थे?" उसने भाव खाते कहा

"एक्सक्यूस मी तुम आई थी मेरे पास" मैने चादर से अपना लॉडा पोंछते कहा "वो महाभारत की कहानी का प्रिंट आउट निकालने"

उसने मुँह बिचका कर कहा "मैं तो उस दिन प्रिंट आउट निकालने आई थी तुम्हारे पास , तुमने तो मेरे भीतर की रंडी मेरे सामने निकाल कर रख दी"

"तो? तुमको प्रिंट आउट निकलना था तो प्रिंट आउट निकालती मेरे डेस्कटॉप मे हिडन फोल्डर खोलने की क्या ज़रूरत थी?" मैने चड्डी पहनते कहा

"मुझे जिग्यासा हुई थी" उसने चादर समेटते हुए कहा
"क्या हुई थी?" मैने पूछा
"जिग्यासा बाबा" उसने जवाब दिया "क्यूरीयासिटी" उसने मेरे हाथ से अपना गाऊँ खींचते कहा
"तुम इंग्लीश मीडियम में पढ़े लड़कों को तो मैं प्रणाम करती हूँ" उसने हाथ जोड़ कर प्रणाम करते कहा
"हरामी साली नखरा करती है" मैने कहते हुए उसकी हाथ अलग किए तो उसने दांतो तले जीभ दबाई
"तुम लड़कियों को नंगी लड़कियाँ देखने की क्या क्यूरीयासिटी है?" मैने उसके हाथों को मरोड़ते हुए पूछा
"क्यूरीयासिटी लड़की को देखने की नही , उन पर चढ़ने वाले लड़को को देखने की होती है" उसने एकदम से मुझे दीवार की तरफ धकेलते हुए कहा ,और मेरी नंगी छाती चूमने लगी
"अभी तक जिग्यासा शांत नही हुई तुम्हारी?" मैने उसका माथा चूमते कहा
"अभी कहाँ ? 4 दिन तक मुझे भूखे रह कर दिन काटने हैं" वह बोली
"आईई" मैं दर्द से चीख उठा उसने मेरी छाती पर काट खाया
"हा हा हा." वा हंसते बोली "अब पता चला? तुम जब मेरे मम्मे काटते हो मुझे ऐसे ही दर्द होता है"
"तुम्हारी जहाँ तहाँ काटने की आदत से मैं परेशान हूँ" अपनी छाती सहलाते मैं बोला
"आह अमन" उसने कहा और लॉड पर ज़ोर से थप्पड़ मारा
"आईई आहह" मैं दर्द से चीख उठा , वार ज़ोर का था "क्यों मारा मुझे?" मैने दर्द से बिलबिलाते पूछा
"तुम्हारे लॉड पे मच्छर बैठा था , एक मच्छर आदमी को...." उसने डाइयलोग मरते कहा
"बस बस.. जाओ जा कर कॉफी बना मैं नहा कर आता हूँ...कॅब कभी भी आ सकती है" मैं बाथरूम जाते बोला
"नही अमन" उसने पीछे से मुझे पकड़ते बोला "मच्छर तुम्हारे लॉड को काट रहा था...मेरे होते हुए कोई और तुम्हारे लॉड पर कटे मुझे ये मंज़ूर नही" उसने लॉड को अपने हाथों से सहलाते कहा

"बहुत हो गया अब देखो फोन वाइब्रट हो रहा है" मैने खुद को उस से छुड़ाते कहा
" मैं देखती हूँ तुम जा कर नहा लो" उसने कहा
उसने फोन रिसीव किया , कॅब ड्राइवर का फोन था "मेडम सर हैं ? एरपोर्ट ड्रॉप है" फोन से आवाज़ आई
"हाँ वह नहा रहे है रूको थोड़ी देर" उसने कहा
मैं जब तक तैयार हो कर आया वह डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा रही थी
"शिखा जो तुम्हे राजन के लिए करना चाहिए वह तुम मेरे लिए कर रही हो" मैने आमलेट खाते कहा
"तो? इस वक़्त तुम मेरे पति हो" उसने कॉफी पीते कहा
"पति? आर यू जोकिंग ? हमारी शादी कब हुई?" मैने पूछा
"ये अस्थाई विवाह है अमन " उसने कहा
"अस्थाई विवाह?" मैने पूछा
"हाँ बाबा ... संतान प्राप्ति के लिए तुमसे संबंध बना रही हूँ" उसने हंसते कहा
"अब ये हाइ लेवेल हिन्दी मत बोलो" मैने झुंझलाते कहा , फोन वापिस बजने लगा
"ये कमीना कॅब ड्राइवर..." मैने कहा
"क्यों बेचारे पर नाराज़ हो रहे हो?" उसने पूछा "मैने संतान वाली बात तुम्हे याद दिलाया इसलिए?" उसने कनखियों से कहा
"तुमसे में बाद में बात करता हूँ" मैने बॅग उठाते कहा "अब यहाँ आओ और मुझे गुड बाइ किस दो शिखा"
वह मेरे करीब आई और मैने उसके होठों पर अपने होंठ टिका दिए .

मैं नीचे आ कर कॅब में बैठा "चलो भाई जल्दी 08:30 से पहले रिपोर्ट करना है" मैने कहा
"जी साहब" ड्राइवर ने कहा और कॅब एरपोर्ट की ओर चल पड़ी.

गाड़ी के पहिए घूम रहे थे और मेरा मन मुझे अतीत की ओर ले गया.

मुझे याद आया की कैसे राजन हमेशा बाहरी लोगों के सामने शिखा को जलील करता था और कैसे शिखा अकेले में आँसू बहाया करती.

राजन को काम काज के आगे सोसाइटी में ज़यादा किसी से घुलता मिलता नही था , हालाँकि मेरे यहाँ कभी वीकेंड नाइट पर आ बैठता दरअसल हमारी दोस्ती "दारू" की वजह से हो गयी थी

"दारू" भी बड़ी गजब की चीज़ है दो अलग टेंप्रमेंट के आदमियों को दोस्त बना देती है और दारू पी कर लोग बाग खुल कर बात करते हैं.

शिखा को राजन का मेरे साथ बैठकर दारू पीना पसंद नही था , खास तौर से मेरे जैसे बॅच्लर्स के साथ.
उसके मुताबिक बॅच्लर्स निहायत ही गैर ज़िम्मेदार होते हैं और पड़ोस में रहने वाली लॅडीस के साथ फ्लर्ट करते हैं.

ऐसे ही एक दिन मैं ड्रॉयिंग रूम में बैठ कर शाम के वक़्त बियर पी रहा था , दरवाज़ा खुला हुआ था.
मैं टीवी पर फुटबॉल का मॅच देख रहा था , की मैने दरवाज़े पेर राजन को खड़ा देखा

"अरे राजन जी , प्लीज़ कम" मैने कहा

"ओह अमन जी सॉरी.. आइ सॉ यू वाचिंग फुटबॉल मॅच" उसने मुस्कुराते कहा " सो आइ थॉट इफ़ आइ कॅन जाय्न यू"

"ओह शुवर राजन जी , प्लीज़ कम इन" मैने हंसते हुए कहा

"थॅंक यू" उसने कहा "लेट मी टेक अ वॉश आंड देन आइ विल जाय्न यू शॉर्ट्ली"

"शुवर राजन जी टेक युवर टाइम" मैने कहा

वह मूड कर फ्लॅट की ओर गया और बेल बजाई , मैने देखा उसकी पत्नी शिखा ने दरवाज़ा खोला और वह अंदर चली गयी
उसने अपने जूते उतार कर रॅक में रखे और दरवाज़ा खुला ही छोड़ कर अंदर गया

"अरे.. अरे... दरवाज़ा तो बंद करना था" अंदर से आती शिखा बोली
"रूको.. मुझे पड़ोस में जाना है" अंदर बाथरूम से राजन की आवाज़ आई
"अभी तो आएँ है अभी जाएँगे क्या?" शिखा परेशान होते बोली
"हाँ..पड़ोस में अमन के घर जा रहा हूँ फुटबॉल मॅच देखने" राजन से मुँह धोते कहा
"लेकिन आज गुरुवार है , हमे मंदिर जाना है" शिखा ने कहा
"तुम चली जाओ , मुझे मॅच देखना है" राजन मना करते बोला
"आज आपने मुझे वादा किया था कि मंदिर जाएँगे" शिखा उसे याद दिलाते बोली
"देखो मुझे मंदिर वंडिर में इंटेरेस्ट नही , तुम्हे है तो तुम चली जाओ" राजन नाराज़ होते बोला
उनके घर रोना धोना शुरू हो गया
मैने बियर की बॉटल खोली और घूँट लेते हुए मॅच देखने लगा हालाँकि मेरे कान उन्ही के घर की तरफ थे.

कुछ देर बाद राजन मेरे ड्रॉयिंग रूम में आते बोला "सॉरी , मुझे थोड़ी देर हो गयी आक्च्युयली वाइफ थोड़ी अपसेट हो गयी"
"इट्स ओके" मैने कहा "एनितिंग सीरीयस?"
"नो नो" वह बोला "शी गॉट अपसेट एज़ आइ चेंज्ड प्लान" वह हंसते बोला
"ओह आइ सी" मैने पॉपकॉर्न खाते बोला
"यॅ यू नो दीज़ वाइव्स" वह बोला
"ड्रिंक?" मैने उसके सामने बियर की बॉटल बढ़ाते कहा
उसने इधर उधर देखा दरवाज़ा खुला था वह बोला "लेट मी क्लोज़ डोर फर्स्ट" और दरवाज़े की तरफ बढ़ गया
"थॅंक्स फॉर ड्रिंक" उसने कहा और दांतो से बॉटल की सील तोड़ते कहा
"चियर्स" हमने बॉटल टकराई और सीप लिए
"यॅ... गोल" वह चीखा , मॅच में गोल हो गया था और हाफ टाइम हो गया था
"आप फुटबॉल काफ़ी एंजाय करते हैं राजन जी" मैने कहा
"हाँ आइ एंजाय अलॉट" उसने कहा
"आक्च्युयली मेरी वाइफ स्टुपिड टीवी सीरियल्स की वजह से मुझे मॅच देखने नही देती" उसने शिखा की शिकायत करते कहा
"आब्वियस्ली" मैने पॉपकॉर्न मुँह में डालते कहा "टीवी का रिमोट तो लॅडीस के हाथ में ही होता है"
"एग्ज़ॅक्ट्ली" उसने कहा और पॉपकॉर्न की ट्रे की तरफ हाथ बढ़ाया लेकिन वह ख़त्म हो गये थे
"आइ आम सॉरी पोप कॉर्न ख़त्म हो गये , मैं कुछ ऑर्डर करता हूँ" कहते हुए मैने फोन हाथ में लिए
"अरे अमन प्लीज़" उसने कहा की इतने में बेल बाजी
"लेट मी सी कौन आया है" मैं उठते बोला
"में देखता हूँ" उसने कहा और दरवाज़ा खोला
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