Porn Sex Kahani पापी परिवार
10-03-2018, 03:58 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
कुछ दिनो बाद उनका प्रेम घरवालो पर ज़ाहिर हुआ और काफ़ी समझहिशो के बाद भी दोनो प्रेमी अलग ना हुए .... दीप कम्मो को घर से भगा कर मुंबई ले आया और अपने अभिन्न मित्र जीत की मदद से सामान्य रोज़गार भी प्राप्त कर लिया परंतु जल्द ही भीषण ग़रीबी उन पर पुनः हावी होने लगी और इस बार दीप की डूबती नैया पार हुई .... एक मश - हूर नगर - सेठ की जवान विधवा बहू का साथ पाकर.

भरी जवानी में बेचारी दुखिया हो गयी थी .... फॅक्टरी के बाद पार्ट टाइम की कमाई में दीप उसके ससुर की कार ड्राइव करता था .... कुछ दिनो बाद ससुर साहेब भी हवा हो गये और अब उनकी जवान बहू ने सारा राज - पाट सम्हाल लिया.

कुछ कुद्रती हादसे और कुछ दीप की मर्दानगी .... मालकिन और नौकर का मिलन ऐसा हुआ जिसने मुंबई जैसे बड़े शहेर में दीप को हर तरह से स्थापित कर दिया.

मालकिन आज विदेशी कारोबार समहाल्ती हैं .... वे अपने साथ दीप को भी ले जाना चाहती थी परंतु वह अपनी पत्नी व नन्हे बच्चो से विमुख ना हो सका और अपने परिवार की खातिर उसने मालकिन की गान्ड पर भी लात मार दी.

वर्तमान में वह बहुत पैसे वाला है, उसकी काफ़ी जान पहचान है लेकिन उसके जीवन में प्रेम नही .... आज तक सिर्फ़ वासना उसके गले से लिपटी रही, कभी उसने भी अपनी अर्धांगनी कम्मो के साथ ऐसे हज़ार मन - भावन सपने देखे थे .... अपनी जवानी में वह ग़रीबी के चलते मजबूर था और आज जब उसके पास अथाह पैसा है तब अपनी पत्नी का साथ नही .... बाहरी जिस्म तो केवल उत्तेजित तंन की तपन मिटा सकते हैं परंतु आंतरिक प्रसन्नता का अनुभव एक बीवी या पेमिका ही प्रदान करवा सकती है.

यह पहली मर्तबा हुआ जब किसी स्त्री ने दीप की अवहेलना की, उसका तिरस्कार किया था और वह स्त्री कोई बाज़ारू नही उसकी अपनी कम्मो है .... यक़ीनन दीप उसके साथ ज़बरदस्ती कर सकता था, एक हक़ से लेकिन जो कार्य वह बीती अपनी पूरी जवानी में नही कर पाया .... तो अब कैसे मुमकिन होता.

आज से पहले जब भी उसने कम्मो के साथ सहवास की इक्षा जताई, उसकी पत्नी ने उसे कभी मना नही किया था .... भले ही वह बिस्तर पर निष्प्राण पड़ी रहती लेकिन अपने पति की आग्या का पालन करती आई थी .... स्वतः ही दीप का ध्यान कम्मो से हट कर अपनी छोटी बेटी निम्मी पर पहुच गया, जिसने अल्प समय में ही अपने पिता पर अपना सर्वस्व न्योछावर करना स्वीकार किया और भविश्य में भी करती रहेगी .... बिना किसी हिचकिचाहट व शंका के दीप का दिल इस बात की गवाही देने लगा और उसके होंठो पर मुस्कान फैलती चली गयी.

इन 2 - 3 दिनो में बाप - बेटी के दरमियाँ जो कुछ पाप घटित हुआ .... अब दीप ने उसमें अपना स्वार्थ क़ुबूल कर लिया और वह तंन के साथ मन से भी अपनी सग़ी बेटी का भोग लगाने को लालायित हो चला .... शायद यही वह चोट थी या इंतज़ार जिसमें उसे कम्मो की भी मज़ूरी मिल गयी थी.

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वहीं कम्मो मरणासन्न बिस्तर पर लेटी अपने आँसू बहा रही थी .... वह जानती थी आज उसने अपने पति का घोर अपमान किया है परंतु ऐसा करने को वह विवश थी .... अपने तंन से भी और मन से भी.

जिस वक़्त दीप ने उससे सहवास का आग्रह किया, वह प्रसन्नता से भर उठी थी .... उसने पल में निश्चय कर लिया था कि आज वह अपने पति को काम - क्रीड़ा का ऐसा जोहर दिखाएगी .... जिसकी दीप ने हमेशा से कल्पना की थी.

वह खुद भी अपनी उत्तेजना का हरसंभव मर्दन चाहती थी, उसे ललक थी एक घनघोर चुदाई की .... आज वह मर्ज़ी से अपने पति का विशाल लिंग भी चूस्ति और उसे अपनी स्पंदानशील योनि का रस्पान भी करवाती, उसके जिस्म में इतना ज्वर समा चुका था कि वह उसकी आग में अपने पति को स्वाहा कर देना चाहती थी परंतु ज्यों ही उसका ऊपरी धड़ नंगा हुआ वह बुरी तरह से काँप उठी .... कारण, उसके निच्छले धड़ का उसके अनुमान से कहीं ज़्यादा पतित हो जाना था.

उस वक़्त कम्मो की धधकति योनि से गाढ़े रस की धारा - प्रवाह नदी बह रही थी जबकि दीप ने उसे हर संसर्ग पर बेहद ठंडा पाया था .... यक़ीनन वह इस अप्रत्याशित बदलाव को झेल नही पाता और कम्मो का संपूर्ण भविष्य बेवजह ख़तरे में पड़ जाता .... कहीं दीप उसके चरित्र पर उंगली ना उठा दे, सोचने मात्र से उसके मश्तिश्क में अंजाने भय की स्थापना हो गयी और खुद - ब - खुद उसकी कामग्नी,
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10-03-2018, 03:58 PM,
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वह बेड पर लेटी खुद को कोस रही थी .... उसके दैनिक जीवन में जिस तेज़ी से उथल - पुथल मची, उससे उसका निरंतर पतन ही होता जा रहा था .... कल तक वह अपने पति की पवित्रा थी और आज पूर्णरूप से एक कुलटा नारी में बदल चुकी थी .... कल तक जिस शारीरिक ज़रूरत का उसे भान भी नही था आज वह अपने ही पुत्रो के साथ अपना मूँह काला करने को लालायित थी.

शर्मसार होने के बावजूद कम्मो का पापी मन उसे प्रायश्चित करने का कोई मौका नही दे रहा था .... उसने जाना अब भी वह निकुंज को तीव्रता से पाना चाहती है, अपने विचलित मन को समझाना उसके वश से से कहीं ज़्यादा बाहर हो चला था.

ज्यों ही उस पापिन के मश्तिश्क में पुत्र लोभ पैदा हुआ स्वतः ही उसका हाथ अंधेरे का फ़ायदा उठा कर रघु के निष्प्राण शरीर पर रैंगने लगा .... अपने पति की उपस्थिति में वह इस कार्य को करने से अत्यधिक रोमांच महसूस करने लगी और कुछ देर के अथक प्रयासो के उपरांत मनवांच्छित सफलता मिलने पर उसके बंदन में सिरहन का पुनः संचार होने लगा.

वह अपने बेटे के सुस्त लिंग से खेलने लगी और अगली खुशनुमा सुबह के इंतज़ार में उसकी योनि भरकस लावा उदेलने लगी.

उस रात घर के अन्य सदस्य :-

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डिन्नर करने के फॉरन बाद निक्की अपने कमरे में दाखिल हो गयी थी, उसने ना तो ठीक से खाना खाया और ना ही परिवार के किसी मेंबर से कोई बात - चीत की .... डाइनिंग - टेबल पर बार - बार उसकी नम्म आँखें निकुंज का चेहरा देखने लगती लेकिन उसके भाई ने इक - पल को भी उसे कोई तवज्जो नही दी.

बेहद दुखी मन से वह अपने कमरे में लौटी और फूट - फूट कर रोने लगी .... निकुंज का उसे यूँ इग्नोर करना खाए जा रहा था, काई बार उसने अपने आँसुओं को रोकने की नाकाम कोशिश की परंतु वे 1000 प्रयत्नो के बाद भी नही रुके और थक - हार कर वह बिस्तर पर ढेर हो गयी.

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निकुंज अपने बड़े भाई का बेड रेडी करने के बाद अपने कमरे में वापस लौट आया था .... इस वक़्त उसके चेहरे पर बेहद गंभीरता छायि हुई थी, वह निक्की से कहीं ज़्यादा दुखी अपनी मा से था.

जब कभी वह खाने की टेबल पर अपनी बहेन की तरफ देखता स्वतः ही उसकी आँखें कम्मो की आँखों से टकरा जाती और भयवश वह दोबारा ऐसा प्रयत्न नही कर पाता .... वह जानता था निक्की की उदासी की असल वजह क्या है लेकिन वह खुद को बेहद लाचार महसूस कर रहा था .... बेड पर लेटे हुए उसे 2 घंटे ज़्यादा बीत चुके थे परंतु अत्यंत थकान होने के बावजूब उसे ज़रा भी नींद नही आ रही थी, उसकी तड़प बढ़ने लगी और वह बिस्तर से उतर कर बाहर हॉल में जाने लगा.

कमरे के गेट पर पहुचते ही उसकी नज़र हॅंगर पर टाँगे अपने गंदे कपड़ो पर गयी .... ज्यों ही उसने अपना शॉर्ट्स देखा, बीते कुछ दिनो पहले की याद उसके जहेन में ताज़ा हो गयी .... यह वही शॉर्ट्स था, जिस पर उसकी बहेन का ब्लड लगा हुआ था और जो अब उस पर पूरी तरह से अपना दाग छोड़ चुका था .... निकुंज ने वह शॉर्ट्स हॅंगर से उतार लिया ...... " मैने तो बेचारी से उसकी चोट तक के बारे में नही पूछा " ....... यह कहते वक़्त उसके चेहरे पर छायि उदासी और ज़्यादा बढ़ गयी थी.

वह सोच में डूबा था और तभी उसे कुछ ऐसा यादा आया जिसके फॉरन बाद उसके पूरे जिस्म में कप - कपि दौड़ गयी ....... " अब तक रखी है " ....... शॉर्ट्स की जेब में हाथ डाल कर उसने उसमें रखी अपनी बहेन निक्की की रेड पैंटी बाहर निकाल ली और स्वतः ही उसके ढीले लंड में हलचल होने लगी, वह एक - टक कभी उस पैंटी को देखता तो कभी उस द्रश्य को याद करता .... जब उसकी सग़ी बहेन अपने भाई की आँखों में झाँकति हुई हस्त - मैथुन कर रही थी.

" नही ये सरासर ग़लत है " ...... उसके इस कथन को झूठा साबित करते हुए उसके लंड ने विकराल रूप धारण कर लिया था ....... " मुझे अभी इसे निक्की के बाथ - रूम में रख आना चाहिए " ....... यह सोच कर उसने अपने खड़े लंड को पॅंट में अड्जस्ट किया और अपने कमरे से बाहर निकल आया.

इस वक़्त पूरे घर में सन्नाटा खिचा हुआ था और जल्द ही उसके कदम निक्की के कमरे की खुली चौखट पार कर गये .... अंदर ट्यूब - लाइट जल रही थी और किसी शातिर चोर की भाँति निकुंज ने कमरे को बोल्ट कर लिया और धीरे - धीरे चलता हुआ वह अपनी बहें के बिस्तर के ठीक सामने पहुच गया.

नींद में निक्की का चेहरा बेहद मासूम दिखाई दे रहा था और अब निकुंज खुद को रोक पाने में बिल्कुल असमर्थ महसूस करने लगा .... वह बिस्तर पर उसके नज़दीक बैठ गया और ज्यों ही उसने निक्की के बालो पर प्यार से अपना हाथ फेरा, सीढ़ियों पर से किसी के उतरने की तेज़ आवाज़ उसके कानो में सुनाई पड़ी और घबराहट में निकुंज बेड से उठ खड़ा हुआ.

" भाई !!! उउउम्म्म्मम " ....... हलचल महसूस कर निक्की की भी आँखें खुल गयी और जैसे ही उसने अपने भाई को अपने कमरे में पाया .... वह खुशी लगभग चिल्लाने को हुई और तभी निकुंज ने फुर्ती से अपना हाथ उसके खुले मूँह पर रखते हुए उसे चुप करवा दिया.

" श्ह्ह्ह्ह्ह !!! " ........ हड़बड़ाहट की इस जद्दो - जहद में निकुंज को भान तक नही रहा था कि जिस हाथ से उसने निक्की का मूँह बंद किया है .... उसी हाथ में उसने उसकी रेड पैंटी पकड़ रखी थी और जब तक वह सम्हल पाता .... निक्की ने उसके हाथ से वह पैंटी अपने हाथ में ले ली.

" अन्बिलीवबल भाई !!! यह अब तक आप के पास थी " ....... शाम के घटना - क्रम से दुखी होने के बाद निक्की यह तय कर के बैठी थी कि अब से वह निकुंज से खुल कर बात करेगी .... शायद उसकी चुप्पी ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है और इसी को ध्यान में रखते हुए उसने निकुंज से यह लफ्ज़ कहे.

" न .. न नही निक्की !!! वो मैं पूना चला गया था तो कमरे में रखी रह गयी थी " ....... निकुंज का चेहरा उतर गया, बात सच थी ... वह पैंटी और शॉर्ट्स वाली बात पूरी तरह से भूल चुका था और तभी वह उसे लौटाने अपनी बहेन के कमरे में आया था लेकिन किस्मत ने उल्टा उसे फसा दिया.

" बड़े नॉटी हो .. जैसे मैं कुछ समझती ही नही हूँ " ....... निक्की ने उसके सामने अपनी पैंटी को अपने बूब्स पर फैला कर रख लिया .... वह इस वक़्त बेड पर लेटी हुई थी और निकुंज बैठ हुआ था ..... " वैसे तब से ही मेरे पास पॅंटीस की शॉर्टेज हो गयी थी लेकिन आप को चाहिए हो तो रख लो " ....... यह कहते हुए उसने अपने भाई का हाथ अपने बूब्स पर रख दिया जैसे उसके हाथ में पैंटी वापस पकड़वाना चाहती हो.

एका - एक से निक्की का यह हमला निकुंज सह नही पाया और उसकी बहेन ने उसके हाथ को अपने राइट बूब पर ताक़त से दबा दिया ...... " इष्ह !!! " ....... दोनो के जिस्म एक साथ सुलग उठे और जिसमें निकुंज काफ़ी हद्द तक पिघल गया.

" निक्की यह सही नही है .. बेटा हम कल सुबह बात करेंगे " ....... उत्तेजित होने के बावजूद निकुंज ने फॉरन अपना हाथ उसके बूब से हटाना चाहा लेकिन मस्ती से सराबोर निक्की उसके हाथ से अपनी दाई चूची पंप करने लगी ...... " आअहह !!! भाई आप को बहुत मिस किया मैने " ...... उसकी बढ़ती आहों ने निकुंज के लंड में बेहद तनाव ला दिया और कुछ देर बाद उसके हाथो ने स्वतः ही अपनी बहेन की मांसल चूची को दबोचना शुरू कर दिया.

" उफफफफफ्फ़ भाई ज़ोर से !!! यहीं मेरा दिल है .. जिसे आप ने तोड़ दिया " ...... निक्की फुसफुसाई .... वह अपना हाथ बूब से हटा चुकी थी, जिसे अब निकुंज अपनी मर्ज़ी से दबाए जा रहा था ....... " ह्म्‍म्म्मम !!! लव मी भाई " ....... निक्की का फ्री हाथ तेज़ी से उसकी सलवार के अंदर पहुच गया और वह अपनी कुँवारी चूत से छेड़ - खानी करने लगी.

काफ़ी देर से निकुंज अपनी बहेन के वश में था .... वह बिना कुछ बोले उसके इशारे पर नाच रहा था, वहीं निक्की की चूत में अत्यधिक स्पंदन होने से रति - रस का रिसाव होने लगा और इसके साथ ही उसकी मानसिक स्थिति पूर्ण रूप से डाँवाडोल हो गयी.

" उंघह भाई !!! मेरी पुसी को प्यार करो ना .. जैसा आप ने उस दिन पार्क में किया था " ...... निक्की तड़प कर बड़बड़ाई, वह कयि दिनो से भरी बैठी थी और ऊपर से अपने भाई का तिरस्कार .... अब तो वह अपनी सारी इक्षाओ को आज रात ही पूरा करने को मचल उठी थी.
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10-03-2018, 03:58 PM,
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निकुंज अपनी बहेन के मूँह से निकले शब्द सुन कर स्तब्ध रह गया .... पुसी वर्ड का इतना सॉफ उच्चारण वह भी निक्की जैसी भोली, मासूम व संस्कारी लड़की के मूँह से .... सोचते ही निकुंज के होश उड़ गये और जब उसने जाना उसकी बहेन की चूची वह अपनी मर्ज़ी से मसले जा रहा है .... उसकी हैरानी का पार नही रहा ...... " नही निक्की !!! " ..... यह कहते हुए उसने अपना हाथ बहेन के बूब से हटा लिया और बेड से नीचे उतर कर खड़ा हो गया .... हलाकी अब भी उसका वह हाथ अपने आप पंप हुए जा रहा था, लेकिन इस बात से उसे कोई मतलब नही रहा.

निकुंज की इस हरक़त ने निक्की का जिस्म अधर में लटका दिया .... वह आनंद के जिस अकल्पनीय सागर में ढेरो गोते लगा रही थी .... फॉरन बह कर किनारे आ लगी और अपनी चूत पर उसके हाथ की सहलाहट का भी उसी क्षण अति - निर्दयी अंत हो गया.

" भाई ये कैसा मज़ाक है .. पहले मेरे दिल से खेलते हो और जब मैं खुद पर काबू नही रख पाती .. दिल तोड़ देते हो " ...... तैश में आ कर निक्की के मूँह से यह कथन निकल गया और जिसे सुनने के पश्चात निकुंज उसके कमरे के दरवाजे की तरफ अपने बेजान कदम बढ़ाने लगा.

" सच कहा तूने निक्की .. मैं तेरा दिल तोड़ रहा हूँ पर जो दिल से खेलने वाली बात तूने कही .. यह सरासर झूठा इल्ज़ाम है मुझ पर, क्या मैं उत्तेजित नही होता लेकिन मैं इस पाप का भागीदार नही बनना चाहता और ना तुझे बनने दूँगा " ...... इतना कहते हुए वह उसके कमरे से बाहर चला गया और निक्की नाराज़गी में तकिये से अपना चेहरा ढक कर लेट गयी.

अपने कमरे में आने के बाद तो जैसे निकुंज सारी सुध बुध खो बैठा .... उसने अपने उसी काँपते हाथ को गंभीरतापूर्वक देखा जिससे उसने अपनी बहेन की गुदाज़ चूची मसली थी, वह खुद पर कितना भी कंट्रोल करता लेकिन पॅंट के अंदर खड़ा उसका लंड इस बात की सच्ची गवाही दे रहा था की वह निक्की के जिस्म की तपन से तप रहा है .... फॉरन निकुंज ने अपना पॅंट उतार कर डोर उच्छाल दिया और अंडरवेर की जकड़न से अपने विकराल लंड को मुक्ति दिला दी.

इसके बाद उसने अपना वही कांपता हाथ अपने पूर्ण विकसित लंड के इर्द - गिर्द लपेट लिया और काफ़ी कठोरता से हस्त - मैथुन करने लगा .... आनंद से सराबोर वह बार - बार निक्की की झांतो भरी चूत को याद करते हुए अपने लंड में निर्दयता से झटके देता और साथ ही उसके मूँह से काई ऐसे शब्द फूट जाते .... जिनसे यह साबित हो चला कि उसके मन में भी अब चोर बस चुका है.

कुछ ही देर के घमासान के पश्चात उसकी टांगे ऐंठन से भरने लगी और वह अपनी बहेन के नाम की रॅट लगाते हुए झड़ने लगा .... आश्चर्य से परिपूर्ण वीर्य स्खलन ने उसके पूरे जिस्म में अजीब सी सनसनी फैला दी थी और साथ ही कुछ पॅलो के लिए उसके जहेन में अपनी मा का वही चेहरा घूमने लगा .... जब उसके गुलाबी होंठो के बीच निकुंज का लंड प्रचंडता से झटके खाए जा रहा था और कम्मो उतनी ही तेज़ी से अपने जवान बेटे के गाढ़े वीर्य की फुहारों से .... अपना गला तर करती रही थी.

सब कुछ सामान्य हो गया, बिस्तर पर जहाँ - तहाँ उसकी पापी करतूत के अंश बिखरे पड़े थे लेकिन निकुंज के चेहरे पर किसी प्रकार की कोई संतुष्टि नही आ सकी थी .... वह किसी जायज़ वास्तु की बेहद कमी महसूस कर रहा था, फिर चाहे वह वास्तु उसकी मा का प्रभावित मूँह हो .... जिससे कम्मो ने निकुंज को अपनी बलपूर्वक लंड चुसाई का आनंद दिलाया था या वह वास्तु उसकी सग़ी छोटी बहेन निक्की की कुँवारी चूत हो .... जिसे वह खुद अपने भाई के लंड से कुटवाने की, अपनी बेशरम इक्षा ज़ाहिर कर चुकी थी.

यूँ ही सोचते - सोचते निकुंज भी नींद के आगोश में समाने लगा इस प्रण के साथ, कि अब वह कभी अपने पापी मन को अपने ऊपर हावी नही होने देगा परंतु आँखें बंद करते ही उनमें .... कभी निक्की तो कभी कम्मो के अक्स बारी - बारी से उतरते रहे .... अत्यधिक बेचैनी की इस अवस्था ने निकुंज को और भी ज़्यादा ध्यांमग्न कर दिया और जल्द ही उसने ऐसा फ़ैसला ले लिया, जिसमें एक मा की उदारता .... एक बहेन की निकृष्ट'ता से हार गयी और इसके बाद निकुंज की सारी सोच सिर्फ़ अपनी जवान बहेन के ऊपर केंद्रित हो गयी .... अब उसकी आँखों ने झपकना छोड़ दिया था और वह नींद की गोद में चला गया.
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10-03-2018, 03:59 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
वहीं घर की सबसे छ्होटी बेटी निम्मी डिन्नर के वक़्त खूब हस्ती - खेलती रही थी .... कम्मो के साथ निकुंज ने भी उसके सलवार - कमीज़ में होने से हैरानी जताई, परंतु वे दोनो ही किस्मत के अजीबो - ग़रीब खेल के आगे दम तोड़ते नज़र आ रहे थे तो उनका ध्यान ज़्यादा देर तक निम्मी के इस बदलाव पर टिक नही पाया था.

डिन्नर के पश्चात भी निम्मी ने खूब चाहा कि वह दीप के साथ अठखेलियाँ करे लेकिन घर के अन्य सदस्यों की उपस्थिति में वह हर तरह से इसमें नाकाम रही और फिर एक प्यार भरा गुड नाइट किस अपने पिता के गालो पर देती हुई .... वह भी अपने कमरे में चली गयी.

हमेशा की तरह पूरी नंगी बिस्तर पर लेटने के बाद उसके चंचल मष्टिशक में काई तरह के उत्तेजक प्रश्न उठने लगे और उनके सही समाधान हेतु वह अपने लॅपटॉप पर सेक्स का ग्यान बढ़ाने के लिए .... पॉर्न देखने लगी.

उसने चुदाई के काई वीडियोस देखे परंतु उसकी चूत में ज़रा भी उबाल नही आ पाया और इसके बाद उसने गूगले पर ...... " फादर - डॉटर सेक्स " ....... नामक कयि वेबसाइट्स चेक की .... आख़िर - कार उसके हाथ एक ऐसी वीडियो लग गयी जिसे देखते ही उसकी कुँवारी चूत में घनघोर रति - रस प्रज्वलित होना शुरू गया और वह फॉरन अपने अति - संवेदनशील भग्नासे से खेलने लगी .... उंगलियों और अंगूठे की मदद से उसे मरोड़ने लगी .... हेड - फोन के ज़रिए वह वीडियो की उत्तेजक आवाज़ें बड़े आराम से सुन सकती थी और साथ उसने वॉल्यूम बेहद ऊँचा कर रखा था.

वीडियो का टाइटल था ..... " किकी सेक्स बिट्वीन डॅडी आंड हर ब्यूटिफुल डॉटर " ..... किकी का सही अर्थ उस वक़्त निम्मी को पता नही था लेकिन जैसे ही बाप - बेटी के दरमियाँ घमासान चुदाई का आगाज़ हुआ .... वह खुद - ब - खुद इस शब्द को लेकर आहें भरने लगी, उसने सॉफ जाना .... ना तो बेटी के चेहरे पर कोई लाज - शरम के भाव थे और ना ही उसके बाप के दिल में किसी प्रकार का कोई रेहेम.

निर्दयी बाप अपना विकराल लंड बेटी के छोटे से मूँह में थेल्ता ही जा रहा था और साथ ही उसकी अविकसित चूचियों के निप्प्लो को ताक़त से उमेथ देता .... उसकी बेटी के बंद गले से ...... " गून गून " ..... की असहाय ध्वनियाँ निकलती रही लेकिन उसके बाप ने अपनी कमर को प्रचंडता से आगे - पीछे करते हुए .... उसका मूँह चोदना नही छोड़ा बल्कि उसके हर विध्वंसक धक्के पर उसकी बेटी की आँखें बाहर को निकल आती और वह बुरी तरह से चोक हो जाती.

जल्द लड़की के मूँह से ढेर सारी लार और लंड - रस का मिक्स्चर बहकर नीचे फ्लोर पर गिरने लगा और उसके बाप ने चीखते हुए बलपूर्वक अपनी बेटी का चेहरा अपनी टाँगो की जड़ से चिपका लिया ...... " उमल्लप्प्प !!! ....... यह नज़ारा देखते ही निम्मी को बुरी तरह से अक - बकाई आ गयी और वह फॉरन बिस्तर पर उठ कर बैठ गयी.

हेड फोन अब भी उसके कानो से बुरी तरह चिपका हुआ था जिसे उसने तीव्रता से झटक दिया और वह अपने गले पर अपना हाथ फेरने लगी ...... " ओह गॉड !!! कहीं मर तो नही गयी ? " ...... निम्मी को उस पल अपना बेहोश होना याद आ गया .... जबकि उसके पिता का मूसल लॉडा भरकस कोशिसो के बाद वह आधा ही निगल पाई थी और कुछ देर तक इसी जिग्यासा में उसके प्राण अटके रहे कि वीडियो वाली लड़की सच में ज़िंदा बची या मर गयी.

जल्द ही उसने देखा बाप की कमर अब हिलना बंद हो चुकी है और धीरे - धीरे उसकी बेटी के मूँह से उसका विकराल लंड बाहर निकलता जा रहा है .... हलाकी अब भी लंड में हल्की सी अकड़न बची थी और वह पूर्णरूप से ढीला नही पड़ा था .... निम्मी बड़े गौर से इस सीन को देखने लगी और इसके बाद तो उसके कौतूहल की कोई सीमा नही रही जब उसने लड़की को मुस्कुराते पाया ...... " साली !!! यह तो ज़िंदा बच गयी " ...... वह ताली बजाती हुई उसका उत्साहवर्धन करने लगी जैसे सच में लड़की ने कोई बहुत बड़ा तीर मारा हो.

लड़की ने लंड से निकाला सारा वीर्य निकाल लिया था और अब वह अपने चेहरे व ठोडी पर लगा वीर्य उंगलियों की मदद से चाटने लगी .... वह नाशपीटी तब भी नही रुकी और निम्मी को लगभग चौंकाते हुए उसे दोबारा से अपने बाप का ढीला लंड चूसना शुरू कर दिया ...... " अब क्या काट कर खा जाएगी ? " ...... कहते हुए निम्मी की हसी छूट गयी और इसके बाद उसने वीडियो फास्ट मोड़ पर प्ले कर दिया.
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10-03-2018, 03:59 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
इस मोड़ में भी उसने सारे सीन बड़ी बारीकी से देखे .... कैसे चूस - चूस कर लड़की ने जल्द ही लंड को फिर से विकराल बना दिया और इसके बाद उसके बाप ने दो बार उसकी चूत को चाटा .... इसी दौरान दोनो में दर्जनो किस भी हुए आंड अट लास्ट बाप ने अपने विशाल लंड से बेटी की अति - नाज़ुक चूत की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी .... इस वक़्त निम्मी बेहद गंभीर हो चुकी थी वरना अन्य कोई कुँवारी लड़की इस निर्मम चुदाई को देख रही होती .... अवश्य ही डर के मारे आजीवन कुँवारी रहने का संकल्प कर लेती.

वीडियो समाप्त होने के पश्चात निम्मी ने भी अपना चरमुत्कर्ष पा लिया .... उसकी उंगलियों ने भी उसकी कमसिन चूत पर कोई रहमत नही बक्शी थी बल्कि उसे तो मज़ा आ रहा था इस बुरी तरह से अपनी कुँवारी चूत पर ज़ुल्म करने में.

वह अब जान गयी थी चुदाई का सही अर्थ क्या है, कोई शरम कोई हया इसमें काम नही आती ..... " मैं भी ऐसा ही करूँगी और डॅड को अपना दीवाना बना कर छोड़ूँगी " ...... कुछ इसी प्रकार का प्रण करने के बाद वह भी बिस्तर पर ढेर हो गयी या शायद अत्यधिक खुशी से सराबोर हो उसकी आँखें स्वतः ही बंद हो गयी होंगी.

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नेक्स्ट मॉर्निंग :-

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5 बजे के अलार्म से निकुंज की नींद खुल गयी .... हलाकी उसका उठने का ज़रा भी मन नही हुआ लेकिन वह रात में ही तय कर के सोया था कि सुबह टाइम से निक्की के साथ पार्क जाएगा और उससे अपने किए की माफी भी माँगेगा.

" अपनी तरफ से सेक्स के लिए कोई ज़ोर नही दूँगा और कोशिश करूँगा निक्की भी मेरी बात को समझे .. बाकी सारा कुछ किस्मत के ऊपर छोड़ा " ....... इतना सोचने के बाद वह फ्रेश होने के लिए बाथ - रूम में एंटर हो गया, मीडियम शवर ले कर वह रूम में वापस लौटा और फिर शॉर्ट्स &; टी-शर्ट पहेन कर पूरी तरह से रेडी हो गया.

" अरे हां !!! सर्प्राइज़ गिफ्ट तो निकाल लूँ .. आख़िर मेरी प्यारी शहज़ादी को मनाना जो है " ...... कमरे से बाहर निकलने से पहले उसके दिमाग़ की बत्ती जली और उसने वॉर्डरोब खोल कर अंदर रखी कर्ध्नी अपनी शॉर्ट्स की ज़िप्ड पॉकेट में छुपा ली ..... " अब देखता हूँ कैसे नही मानेगी .. मोम के लिए दूसरी ले लूँगा " ..... मुस्कुराता हुआ वह फॉरन हॉल में आया और बिना कोई एक्सट्रा खतर - पतर किए निक्की के कमरे में चला गया.

वह सीधा उसके बेड पर जा कर बैठ गया, निक्की बेहद गहरी नींद में सो रही थी .... एक पल को तो निकुंज को लगा जैसे वह उसे यूँ ही सोते हुआ देखता रहे लेकिन आज कैसे भी कर उसे अपनी रूठी बहेन को मनाना था और इसके लिए वह चाहता था .... जल्द से जल्द वे दोनो घर की इस चार - दीवारी से बाहर निकल जाएँ, एक ऐसी जगह जहाँ उन दोनो के अलावा कोई तीसरा मौजूद ना हो.

बीती रात की सारी बातें उसके जहेन में उतनी ही ताज़ा थी जितनी रात को करते वक़्त थी .... उसकी आँखों के ठीक सामने निक्की की वह चूची थी जिसे उसने काफ़ी देर तक अपने हाथ से मसला था ..... " निक्की चल उठ जा फटाफट .. पार्क चलना है " ...... वह उसके कान में फुसफुसाया.

" अरे उठ जा मेरी मा " ..... काई आवाज़ें देने के बाद भी जब निक्की नही उठी, शरारतवाश निकुंज ने उसकी दाहिनी चूची पर जान बूझ कर अपना हाथ रखते हुए उसके बदन को हल्का सा हिलाया .... इसके साथ ही उसके खुद के बदन में कामुकता की एक लघु लहर दौड़ गयी और वह बिना कुछ बोले अगले चन्द सेकेंड्स तक अपनी बहेन के गुदाज़ बूब को अपने हाथ में फील करने लगा.

अब उसकी नज़र निक्की के सोते चेहरे पर टिक गयी थी, जैसे - जैसे वह उसकी चूची पर अपने हाथ को पंप करता वैसे - वैसे उसकी बहेन के चेहरे पर दर्ज़नो तरह के भाव आ कर चले जाते .... निकुंज को भी इसमें अत्यधिक आनंद का अनुभव होने लगा था और वह अपनी मर्ज़ी से अपने हाथ में और ज़्यादा कठोरता लाने लगा लेकिन जल्द ही उसे अपने लंड के अप्रत्याशित कदकपन्‍न का एहसास हुआ और फाइनली उसने अपना हाथ पीछे खीच लिया.

" निक्की !!! " ...... चूची पर से हाथ हटाने के पश्चात उसने अपनी बहेन के दोनो कंधे ताक़त से झंझोड़ दिए और निक्की एक झटके से अपनी आँखें मसल्ति हुई बिस्तर पर उठ कर बैठ गयी ..... " चल तैयार हो जा पार्क चलते हैं " ..... निकुंज ने उसे स्माइल देते हुए कहा जिसके एवज़ में निक्की उसे घूर कर देखने लगी .... माना उसकी आँखें खुल चुकी थी मगर अब भी वह पूर्णरूप से जाग नही पाई थी.

" ओये कुम्भ्कर्न !!! " ....... निकुंज अपनी बहेन की इस सुंदर निश्छल अवस्था पर मोहित हो गया और प्रेमवश उसने अपने हाथो की मजबूत पकड़ से उसे बिस्तर से अपनी गोद में उठा लिया ...... " चलिए शहज़ादी जी !!! आप को रेडी होना है पार्क जाने के लिए " ...... वह हँसता हुआ बाथ - रूम के गेट पर पहुचा और निक्की के गोरे गाल पर एक किस देने के बाद उसे अपनी गोद से नीचे उतार कर फ्लोर पर खड़ा कर दिया.

" जा और जल्दी आना .. मैं वेट कर रहा हूँ " ..... इतना कह कर निकुंज वापस बिस्तर पर बैठ गया और निक्की कुछ देर तक अपने भाई के चेंज्ड बिहेवियर को हैरानीपूर्वक देखने के बाद बाथ - रूम में एंटर हो गयी .... उसे कल रात से ही निकुंज पर बेहद गुस्सा आ रहा था ...... " हुहह !!! अब मैं किसी झाँसे में नही आउन्गि " ..... वह जल्द ही फ्रेश हो गयी लेकिन इस जल्दबाज़ी में उसे याद नही रहा कि उसने अपने सारे कपड़े उतार कर पानी से भारी बकेट में डाल दिए हैं और अब अपना गीला बदन पोंच्छने के लिए बाथ - रूम में टवल तक मौजूद नही था.

अगले पाँच मिनिट वह असमंजस की स्थिति में खड़ी रही ...... " बेटा तू अपने साथ नये कपड़े ले कर तो गयी नही !!! रुक मैं हॉल में जा रहा हूँ .. जल्दी आना " ....... निकुंज की यह बात सुनते ही निक्की के तंन - बदन में बिजली कौंध गयी ....... " क्या भाई को पता है मैं नंगी हूँ ? " ....... उसके इस कथन में क्रोध, निराशा, अनियंत्रित कामुकता के तीनो रूप शामिल थे और जिसका सीधा असर उसकी धड़कनो से कहीं ज़्यादा उसकी कुँवारी चूत पर हुआ .... उसने जाना एक दम से उसके निपल कड़क हो गये हैं और इसके बाद वह अपनी टाँगो में बेहद कंपन महसूस करने लगी.

" ईश्ह्ह्ह्ह !!! यह क्या हो रहा है मुझे ? " ...... वह ज़्यादा देर तक खड़ी ना रह सकी और नीचे गिरने से अपना बचाव करने हेतु उसने आगे बढ़ते हुए बाथ - रूम के दरवाज़े की कुण्डी पकड़ ली .... कुछ देर तक गहरी साँसे लेने के पश्चात वह अपने कमरे में दाखिल हुई और फॉरन अपने बिस्तर पर जा कर लेट गयी.

वहीं भाई - बेहन के अलावा घर का एक और सदस्य अपनी आँखें खोल चुका था और वह थी कम्मो .... वह तो लगभग पूरी रात ही नही सो पाई थी और उसने अपने पति की मौजूदगी में जी भर के अपने बड़े बेटे के ढीले लिंग से खेला था, उसमें जान फूकने की नाकाम कोशिश करती रही थी .... हॉल के सोफे से निकुंज ने ज्यों ही अपनी बहेन को आवाज़ दी, कम्मो के कान भी खड़े हो गये .... वह फॉरन समझ गयी दोनो भाई - बहेन पार्क में दौड़ने जा रहे हैं.

" मैं भी साथ जाउन्गि " ...... विद्युत की गति से कम्मो अपने बिस्तर से नीचे उतरी और तब तक निक्की भी अपनी बिगड़ी हालत में काफ़ी सुधार ला चुकी थी .... इसके बाद तो जैसे दोनो मा - बेटी में होड़ सी लग गयी ...... " कौन पहले तैयार हो पाता है ? "
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10-03-2018, 03:59 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
निक्की ने जल्द ही अपने कपड़े पहेन लिए और तब तक कम्मो का नहाना भी नही हो पाया था .... यहाँ निक्की अपने कमरे से बाहर निकली और वहाँ कम्मो बाथ - रूम से नंगे बदन अपने पति और बेटे रघु के सामने चली आई .... उसे इस वक़्त कोई होश नही था कि वह क्या किए जा रही है .... उसे तो बस कैसे भी कर निकुंज के संग पार्क जाना था.

कम्मो ने भरकस प्रयास किए .... उसकी आँखों में आँसू तक आ गये थे परंतु वह सही समय से पहले तैयार ना हो सकी और यह जानते हुए, कि अभी उसने जो सलवार - कमीज़ पहना है .... उसके अंदर वह बिल्कुल नंगी है और काफ़ी हद्द तक वह उसके गीले बदन से चिपक कर, उसके ब्रा - पैंटी ना पहने होने की गवाही दे रहा है .... वह सब कुछ भूल कर अपने कमरे का दरवाज़ा खोलती हुई सीढ़ियाँ उतरने लगी.

कम्मो ने हॉल में देखा जहाँ अब कोई मौजूद नही था और इसके बाद उसके कानो में कार स्टार्ट होने की आवाज़ सुनाई दी .... उसके कदम लड़खड़ाते हुए तेज़ी से घर के मेन गेट की तरफ बढ़े परंतु जब तक वह अपने घर की चौखट को पार कर पाती .... उसका लाड़ला निकुंज उसे यूँ ही तड़प्ता हुआ छोड़ कर .... उससे काफ़ी दूर निकल गया था.

वह असहाय पीड़ा से भर उठी .... निकुंज के साथ अब उसे अपनी बेटी निम्मी पर भी बेहद क्रोध आ रहा था .... एक जलन्भाव उसके अतर्मन्न में पैदा हुआ और वह अपनी फटी छाती पर हाथ की सहलाहट देती हुई .... नीचे ज़मीन पर बैठती चली गयी.

इसके बाद उसके अश्रु तीव्रता से बहने लगे ...... " मैने तुझे नव - जीवन प्रदान किया है निकुंज और तू मेरे साथ ही विश्वास - घात किए जा रहा है " ...... इस कथन को कहते वक़्त उसकी आँखें आग उगलने लगी थी ...... " तुझ पर सिर्फ़ मेरा हक़ है और मैं तुझे कभी पराया नही होने दूँगी " ...... वह ज़मीन से उठ खड़ी हुई और अपने अश्रु पोंछती हुई, वापस घर के अंदर आ गयी .... उसकी आंतरिक पीड़ा को बढ़ाने में आज उसकी बेटी निक्की ने भी कोई कसर नही छोड़ी थी और अब उसे गहन विचार करना था ..... " क्या भाई - बहेन के दरमियाँ वह खुद दीवार बन कर खड़ी हो पाएगी ? "
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10-03-2018, 03:59 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
पापी परिवार--48

उसी सुबह दीप की नींद भी जल्दी खुल गयी .... आँखें खोल कर उसने कमरे में देखा .... कम्मो वहाँ मौजूद नही थी सिर्फ़ रघु लेटा हुआ था.

बिस्तर से नीचे उतरने के बाद उसने प्यार से अपने बड़े बेटे के बालो पर हाथ फेरा और फिर कमरे से बाहर निकल गया.

कम्मो हॉल के सोफे पर सो रही थी .... दीप थोड़ी देर तक सीढ़ियों की ओट में छुप कर उसके ऊपर नज़र रखे रहा और फिर उसके कदम अपनी छ्होटी बेटी निम्मी के कमरे की तरफ मूड गये.

" अंदर से लॉक है " ...... दरवाज़े को ठेलने के पश्चात उसे पता चला निम्मी ने कयि दिनो बाद अपने कमरे को अंदर से लॉक किया हुआ था ..... " हुहह !!! इसे भी आज ही सुधरना था " .... वह उदासी भरा चेहरा लिए अपने कमरे में वापस लौट आया और बाथ - रूम में फ्रेश होने लगा.

वहीं निम्मी ने तो आज अपना नाम .... " लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स " .... में दर्ज़ करवा दिया था .... वह पिच्छले 1 घंटे से अपने बिस्तर पर तैयार बैठी कुछ सोच रही थी कि तभी उसका सेल रिंग हुआ.

" यस डॅड !!! " ...... कॉल पिक करते ही उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी.

" तुझे आज कहीं जाना है क्या !!! मेरा मतलब बाहर किसी काम से .. कहीं भी ? " ...... दीप ने जिग्यासावश पूछा तो निम्मी का कमीना दिमाग़ फॉरन हरक़त में आ गया ...... " हां डॅड !!! कल वो कॉंडम छुपाया था ना .. आज सोच रही हूँ उद्घाटन करवा ही लूँ .. वैसे आप क्यों पूच्छ रहे हो .. हमारे रास्ते तो अलग हैं ना ? " ..... निम्मी ने बड़े उदास मन से कहा .. जैसे वह अपने पिता से ही यह उद्घाटन करवाना चाहती हो लेकिन दीप ने उसका गोल्डन प्रपोज़ल ठुकरा दिया था.

" न .. न ..निम्मी !!! पागल मत बन .. तेरे फ्यूचर का सवाल है .. गुस्सा थूक दे बेटा " ...... अपनी बेटी की बात सुनते ही दीप की गान्ड सुलग गयी और वह हकलाने लगा ...... " तो क्या हुआ डॅड !!! सेक्स भी तो फ्यूचर का ही एक पार्ट है .. अभी से एक्सपीरियेन्स ले लूँगी तो बाद में दिक्कत नही आएगी .. आप फोन काटो मुझे कॉलेज जाने के लिए लेट हो रहा है और वहीं से अपने बॉय फ्रेंड के साथ होटेल चली जाउन्गि " ..... शातिर निम्मी ने अपने पिता पर दबाव बनाते हुए कहा.

" नही निम्मी !!! ऐसा मत करना .. खेर ये बता .. तू कब तक अपने कॉलेज के लिए निकलेगी ? " ...... दीप ने वॉर्डरोब खोलते हुए पूछा .. अपनी बेटी के बॉय फ्रेंड का सुनकर तो जैसे उसके चेहरे ही हवाइयाँ ही उड़ गयी थी.

" बस 5 मिनिट .. लेकिन आप को इससे क्या मतलब .. हेलो .. हेलो डॅड " ....... निम्मी चिल्लाति रही लेकिन तब तक दीप कॉल कट कर चुका था ...... " 5 मिनिट " ...... वह भी एक रेकॉर्ड बनाते हुए अपने कपड़े पहनने लगा और दौड़ता हुआ अपने कमरे से बाहर निकल आया.

अपनी बेटी के कमरे के बंद दरवाज़े को देख कर उसने राहत की साँस ली और फिर सीढ़ियाँ उतर कर हॉल में आ गया .... कम्मो अब भी ज्यों - की - त्यों सोफे पर ढेर थी परंतु दीप ने उसके चेहरे को एक नज़र नही देखा और सीधा घर के मेन गेट की चौखट पार कर गया.

निम्मी को भी अपने कमरे के बाहर किसी के तेज़ कदमो से गुज़रने की आहट सुनाई दी थी और वह फॉरन जान गयी कि आहट उसके डॅड के सिवा किसी और की नही हो सकती .... अपने प्लान पर मुस्कुराती हुई वह भी अपने कमरे से बाहर निकल आई और घर के बाहर जाने लगी .... दिखावे के लिए उसने अपने हाथ में कॉलेज बॅग पकड़ रखा था परंतु उस बॅग में उसकी सबसे हॉट ड्रेस और मेक - अप किट के अलावा कुछ और ना था .... यक़ीनन यह भी उसके कमीने प्लान का ही कोई पार्ट होगा.

" क्या हुआ कोई दिक्कत है क्या ? " ..... निम्मी को उसकी अक्तिवा में दर्ज़नो किक मारते देख दीप ने पूछा .... वह अपनी कार के शीशे सॉफ कर रहा था.

" यह स्टार्ट नही हो रही .. कोई बात नही मैं टॅक्सी कर लूँगी .. कॉलेज जल्दी पहुचना है मुझे " ...... निम्मी ने अपना मूँह टेढ़ा करते हुए कहा .... वह जानती थी उसकी अक्तिवा स्टार्ट ना होने की वजह उसके डॅड की कोई कारिस्तानी है ... उसने अपना बॅग कंधे पर टाँगा और चलने लगी.

" अरे सुन !!! मुझे भी आज तेरे कॉलेज की साइड काम है .. आजा !!! तुझे ड्रॉप कर दूँगा " ....... दीप कार में बैठते हुए बोला .... निम्मी ने भी ज़्यादा नाटक ना करते हुए उसके बगल की सीट पकड़ ली.

वे दोनो मेन रोड पर पहुचे ही थे कि निम्मी ने अपने बॅग से मेक - अप किट बाहर निकाल लिया और अपना खूबसूरत चेहरा और भी ज़्यादा खूबसरत बनाने लगी .... जैसे ही उसने अपने बालो की क्लिप हटाई कार के शीशे बंद होने की वजह से एक आनंदमयी सुगंध पूरी कार में फैल गयी ..... " यह शॅमपू मस्त है ना डॅड !!! इसकी स्मेल कितनी अच्छी है " ...... निम्मी ने अपना चेहरा अपने पिता की तरह घूमाते हुए पूछा.

दीप के फॉरन होश उड़ गये .... अपनी बेटी का इतना सुंदर चेहरा तो उसने आज तक नही देखा था .... खुले बालो की कुछ लट निम्मी के चेहरे को काफ़ी ज़्यादा एरॉटिक बना रही थी जिससे हल्का सा स्लट लुक भी दीप को दिखाई पड़ा .... वह तो जैसे अपनी सुध बुध ही खोता चला गया.
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10-03-2018, 03:59 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
" ओ हेलो !!! आक्सिडेंट हो जाएगा " ..... निम्मी ने मुस्कुराते हुए उसके कान के पास चुटकी बजाई और दीप यथार्थ में लौट आया.

" ह .. हां अच्छी है " ...... दीप ने सकपकाते हुए स्टियरिंग - व्हील थाम ली .... बेटी के बालो के साथ ही उसके बदन की भीनी - भीनी महक से दीप की नाक किसी कुत्ते के सूंघने की तरह आवाज़ निकालने लगी थी और जिसे सुनकर निम्मी के चेहरे पर तो जैसे हसी रुकने का नाम ही नही ले रही थी .... लेकिन फिर भी उसने खुद तो सम्हाल लिया क्यों कि यह तो सिर्फ़ शुरूवात है .... आज एक लोमड़ी शेर का शिकार करने में हर तरह से सफल होने जा रही थी.

" वाउ डॅड !!! यह लिप ग्लॉस देखा है आप ने ? " ...... निम्मी ने उससे पूछा ...... " क्या है ये !!! मैने नही देखा कभी " ...... अब दीप को क्या पता लिप ग्लॉस क्या होता है उसे तो वह एक लिपस्टिक जैसा दिखाई दे रहा था ..... " हां !!! याद आया .. तेरी मोम के पास है ऐसी लिपस्टिक " ...... उसने जवाब दिया.

" व्हाट !!! लिपस्टिक हे हे हे हे .. अब तो आप भी मुझे 18वी सदी के लग रहे हो " ..... निम्मी ने उसे अपने होंठो पर लगाते हुए कहा ......

" क्यों ऐसा क्या ख़ास है तेरे इस लिप ग्लॉस में .. लिपस्टिक का नाम 21वी सदी के हिसाब से रख दिया है बस .. हुहन !!! बड़ी आई मॉडेल " ..... दीप ने थोड़ा चिढ़ कर जवाब दिया.

" डॅड !!! प्लीज़ ज़रा कार रोकना " ...... ग्लॉस लगाने के बाद उसने दीप से कहा .....

" अब क्या हुआ !!! तू मुझे परेशान क्यों करती है हमेशा " .... नाराज़गी से दीप ने उसकी तरफ देखा ही था कि निम्मी ने फॉरन अपने सॉफ्ट जुवैसी लिप्स उसके कड़क होंठो से चिपका दिए .... हड़बड़ी में दीप ने ब्रेक लगाए और जब तक उनकी कार पूरी तरह से रुक पाती निम्मी ने सारा ग्लॉस उसके होंठो पर रगड़ दिया था ...... " निम्मी ऐसी बदतमीजी मत किया कर " ...... दीप ने उसे डाँट लगाते हुए कहा

" डोंट वरी डॅड !!! मैने देख लिया था रोड खाली है .. अब बताओ कुछ टेस्ट आया ? " ...... निम्मी ने खुद के होंठो पर जीभ घुमाते हुए पूछा .... किस करने के बावजूद भी उसके लिप्स बेहद शाइन कर रहे थे .... " फ्लवॉरड है !!! चॉक्लेट " ..... यह कहते हुए वह मुस्कुराइ और एक बार फिर से अपने होंठ दीप के होंठो के बिल्कुल करीब कर लिए.

" ह्म्‍म्म्म !!! देखो ना डॅड .. चॉक्लेट ही है ना ? " ...... सब इतने जल्दी हुआ कि दीप सम्हल नही पाया .... उसकी बेटी की साँसे बेहद भारी हो चुकी थी और उसके मूँह से बाहर आती गरम हवा वह अपने होंठो से छूता महसूस कर रहा था.

" डॅड !!! किस मी प्लज़्ज़्ज़्ज़ " ...... निम्मी ने अपनी आँखें बंद कर ली और लगभग दीप की छाति से चिपक गयी .... वहीं दीप का भी खुद पर कंट्रोल कर पाना मुश्क़िल होने लगा था लेकिन उसने जल्द ही अपने आप पर काबू पा लिया ..... " अब तुझे कॉलेज के लिए देर नही हो रही .. कहीं तेरा बॉय फ्रेंड तुझे नाराज़ ना हो जाए " ..... दीप ने उसके चेहरे से बालो की लट उसके कान के पीछे सरकाते हुए कहा.

अपने डॅड की इस हरक़त पर निम्मी के गाल टमाटर से लाल हो गये और वह उसके गले से चिपक गयी ...... " मेरे बॉय फ्रेंड का बहुत ख़याल है आप को मगर उसकी गर्ल फ्रेंड को हर बार रुलाते हो " ...... वह सच में रुआंसी होने लगी और फॉरन दीप ने बड़े प्यार से उसके माथे को चूम लिया ...... "

तो फिर जाएगी जहाँ तेरा बॉय फ्रेंड तुझे ले जाएगा .. बोल ? " ...... उसने सॉफ्ट टोन में पूछा.

" ह्म्‍म्म !!! " ..... बस इसी क्षण का तो निम्मी को इंतज़ार था .... उसका सारा नाटक अब दीप पर ज़ाहिर भी हो चुका था .... इसके बाद वह अपने डॅड की गोद में बैठ गयी और दीप ने गियर डालते हुए कार घुमा कर अपने ऑफीस की तरफ बढ़ा दी .... जल्द ही वे दोनो ऑफीस के कॉंपाउंड में एंटर हो गये.

" तू अंदर जा .. मैं 10 मिनट में आता हूँ " ...... इतना कह कर दीप पैदल ही कॉंपाउंड से बाहर निकल गया और निम्मी ऑफीस के अंदर आ गयी.

दीप पास की वाइन शॉप पर पहुचा और उसने विस्की की एक फुल बॉटल खरीद ली ...... " हां !!! अब ठीक है " ....... थोड़ा बहुत स्नॅक्स लेने के बाद वह ऑफीस की तरफ लौटने लगा .... इस वक़्त भी उसके दिमाग़ में पाप - पुन्य की ढेरो बातें चल रही थी और वह जानता था बिना नशे के वह अपनी बेटी के साथ सेक्षुयल इंटरकोर्स कभी नही कर पाएगा .... शायद इसलिए इस मुश्क़िल घड़ी में हौसला बढ़ाने के लिए उसने विस्की की बोटल खरीदी होगी.
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10-03-2018, 04:00 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
वहीं निम्मी सीधे ऑफीस के गेस्ट रूम में एंटर हो गयी थी .... अंदर आते ही सबसे पहले उसकी नज़र बेड की तरफ गयी, जिस पर बिछि चादर काफ़ी अस्त - व्यस्त थी ...... " तो यह है डॅड का चुदाई खाना .. बड़े छुपे रुस्तम निकले .. ऑफीस में ही धमाल " ...... इतना कह कर वा मुस्कुराती हुई बाथ - रूम में चली गयी.

" ओ तेरी !!! फीमेल अंडरगार्मेंट्स " ....... बाथ - रूम के फ्लोर पर निम्मी को शिवानी के अंडरगार्मेंट्स पड़े दिखाई दिए और जिन्हें देखते ही उसकी आँखें बड़ी हो गयी ....... " क्या डॅड यहाँ से लड़कियों को नंगी वापस भेजते हैं ? " ........ अनायास ही उसके मूँह से यह कथन निकल गया और इसके बाद उसके कमीने दिमाग़ में अपने डॅड के इस वाइल्ड नेचर की वाह - वाही उठने लगी .... जितना उसने दीप के बारे में इन दो - तीन दिनो में जाना था उतना तो शयाद कम्मो बीती अपनी पूरी ज़िंदगी में नही जान पाई होगी.

" ड्रेस चेंज कर लेती हूँ .. वैसे तो बाद में उतारनी ही है !!! हे हे हे हे " ..... बाथ - रूम में आने का उसका मेन मोटिव था शवर चेक करना और जिसे चलता देख वह मस्त हो गयी .... दीप के ऑफीस लौटने से पहले उसने अपनी हॉट ड्रेस पहेन ली थी और सोफे पर बैठ कर उसका इंतज़ार करने लगी .... पैंटी ना पहने होने की वजह से उसकी कुँवारी चूत फ्यूचर का सोच कर अभी से बहे जा रही थी और वह चाहती थी जितनी जल्दी हो सके उसके डॅड का विकराल लंड उसकी चूत का कुँवारापन नष्ट कर दे.

इसी बीच इक दम से दीप गेस्ट रूम में एंटर हुआ और उस वक़्त निम्मी अपनी चूत से खेल रही थी .... पर्पल टॉप और डेनिम छोटी सी स्कर्ट में अपनी जवान बेटी की इस कामुक हरक़त को देखते ही दीप के ढीले लंड में जान प्रज्वलित होने लगी और उसने खाँसते हुए सपने में खोई निम्मी को अपनी प्रेज़ेन्स का एहसास दिलाया.

" एहेंम्म !!! अगर तू बुरा ना माने तो क्या मैं यहाँ ड्रिंक कर सकता हूँ ? " ...... दीप ने एक सभ्य लुक देते हुए उससे पूछा और फॉरन हड़बड़ा कर निम्मी ने अपनी टांगे आपस में जोड़ ली ..... " यह भी कोई पूच्छने वाली बात है डॅड !!! गो - अहेड " ...... वा सोफे से उठ कर कमरे में घूमने लगी और वहीं दीप के पीने का सिलसिला शुरू हो गया.

डॅड - डॉटर का इंटरॅक्षन हुए काफ़ी टाइम बीत चुका था और दोनो ही चुप्पी साधे हुए थे ...... " डॅड !!! वो बाथ - रूम में जो फीमेल अंडरगार्मेंट्स रखे हैं .. किसके हैं ? " ...... आख़िर - कार निम्मी ने ही कमरे में छायि शांति भंग करते हुए पूछा और दीप के मूँह में भरी सारी विश्की एक झटके से बाहर आ गयी .... साथ ही बीता हुआ हर लम्हा उसके जहेन में बिजली की तेज़ी से घूमने लगा.

" वो .. वो !!! कहाँ .. मुझे नही पता " ...... दीप ने झेन्प्ते हुए कहा और वह उसे बताता भी कैसे .... शिवानी निम्मी की दोस्त और साथ ही उसके घर की होने वाली बड़ी बहू थी.

" वाह !!! क्या जोक मारा है डॅड .. आप के ऑफीस का गेस्ट रूम और आप को ही नही पता कौन सी लड़की यह अदभुत कारनामा कर के गयी है " ...... निम्मी हस्ती हुई उसके नज़दीक आ गयी और बेड पर रखी प्लेट में से चिप्स का पीस उठाने के लिए आगे को झुकी .... दीप नेक टॉप से उसकी नंगी चूचियों का यूँ खुला दीदार होते ही दीप का लंड फॉरन अकड़ गया और कुछ देर तक वह अपनी आँखें झपकाना भी भूल गया .... यह पहली मर्तबा था जब वह निम्मी के मोटे बूब्स और खड़े निपल्स का सही आकार दिन की सॉफ रोशनी में देख रहा था .... उसकी बेटी की उमर के हिसाब से उसकी चूचियाँ इतनी बड़ी नही होनी चाहिए थी और जल्द ही वे दीप के बढ़ते कौतूहल का विषय बनने लगी.

" आप बहुत नॉटी हो डॅड !!! " ...... निम्मी ने उसके पॅंट में बने तंबू की तरफ देखते हुए कहा .... दीप ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसके बूब्स को टच करना चाहा लेकिन निम्मी उसकी मंशा हाल ताड़ गयी और सीधी खड़ी हो कर फिर से कमरे के चक्कर काटने लगी .... दीप के चेहरे पर मायूसी की एक ल़हेर छा गयी और वह अगले दो पेग नीट खीच गया.

" बताओ ना डॅड !!! उस लड़की के साथ आप ने क्या किया था ? " ...... डेनिम की स्कर्ट बेहद छोटी होने से निम्मी के मांसल चूतड़ो की शुरूवात उसके बढ़ते कदमो के हर मूव्मेंट पर शो हो रही थी .... वह खुद भी इतनी एग्ज़ाइटेड हो चुकी थी की उसकी चूत से निकल कर रति - रस उसकी सपाट जाँघो पर बहने लगा था परंतु वह अपने पिता के अत्यधिक नशे में आ जाने का इंतज़ार कर रही थी .... ताकि उसका वाइल्ड नेचर और भी करीब से जान सके.

" पहले तू इधर तो आ .. फिर बताउन्गा " ...... दीप ने अपनी लड़खड़ाती ज़ुबान से कहा ..... " नो वे डॅड !!! आप को च्चढ़ गयी है और मैं इन छोटे कपड़ो में हूँ .. कहीं आप का मन ललचा गया तो ? " ...... यह कहते हुए निम्मी सोफे पर बैठ गयी और अपनी टांगे काफ़ी हद्द तक विपरीत दिशा में फैला ली ..... " आप वहीं से बता दो " ...... कहते हुए वह अपनी मिड्ल फिंगर मूँह में डाल कर चूसने लगी.

" वैसे तो वो यहाँ चुदने के लिए ही आई थी लेकिन ऐसा पासिबल नही हो सका " ...... दीप के नशे में आ जाने का प्रमाण उसके अश्लील शब्दो ने दे दिया ..... " बस ब्लोवजोब देकर चली गयी थी "

" उफफफफ्फ़ !!! " ...... निम्मी ने अपनी मिड्ल फिंगर को चूत के अंदर डालते हुए दर्द भरी आह ली ..... " ब्लोवजोब पसंद है ना आप को डॅड ? " ...... वह तेज़ी से अपनी उंगली अंदर बाहर करते हुए बोली.

" सेक्स स्टार्ट करने से पहले तो हर मर्द यही चाहता है कि लड़की उसका लंड चूस कर खड़ा करे " ..... दीप ने अपने पॅंट में बने तंबू पर हाथ रखते हुए कहा ..... " इसमें ग़लत भी क्या है .. आख़िर वह भी तो अपनी पार्ट्नर की चूत चाट'ता है " ...... कहते हुए स्वतः ही उसकी जीभ उसके होंठो पर घूमने लगी .... वह अब तक खुद पर सैयम रखे हुए था .... एक डर, कि अब वह ऐसा पिता बनने वाला है जो अपनी ही सग़ी बेटी को चोद्ता है और यही वजह थी जो वह अब तक बिस्तर से नीचे नही उतरा था.

" तो डॅड !!! अभी कहाँ है आप की पार्ट्नर ? " ..... यह सवाल पूछते ही निम्मी की साँसे मानो उसके बस से बाहर हो गयी और अपने पिता के मूँह से चुदाई के इस अश्लील वर्णन ने तो जैसे उसका पूरा बदन ही कंपा डाला था .... उसके गाल स्वयं के कथन पर बेहद लाल हो गये और फॉरन उसने शरम से सराबोर अपना कामुक चेहरा नीचे झुका लिया.

आदि - अनादि काल से औरत की इस अवस्था का आशय मर्द की वासना के आगे अपने घुटने टेक देने का संकेत रहा है .... दीप ने भी निम्मी की इस लज्जित हालत से उसके समर्पण की हर संभव मंज़ूरी पा ली और फिर वह बेड से नीचे उतर कर सोफे के नज़दीक आ गया.
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10-03-2018, 04:00 PM,
RE: Porn Sex Kahani पापी परिवार
निम्मी बेहद सकते में आ चुकी थी .... उसका सोफे से खड़ा होना हुआ और उसकी ढीली डेनिम स्कर्ट, खुद - ब - खुद उसकी चिकनी व सपाट जाँघो से फिसल कर उसके कदमों में आ गिरी .... लेकिन इस बात पर ध्यान ना देते हुए वह अपने पिता के चेहरे पर आए पीड़भाव से बेहद रुवासि होने लगी थी.

" डॅड !!! क्या हुआ आप को ? " ....... उसने देखा दीप अपनी आँखें मून्दे दर्द भरी आहें ले रहा था .... निम्मी से कुछ करते बन नही पाया तो उसने तेज़ी से उसकी शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए .... जल्द ही वह इसमें कामयाब हो गयी और इसके फॉरन बाद वह अपने पिता की गोद में बैठने लगी .... उसने अपने हाथ से दीप के विकराल लंड को हल्का सा बेंड किया .... ताकि वह मूसल उसके चूतड़ो की गहरी दरार में पूरी तरह से फिट हो जाए .... अब निम्मी की कुँवारी चूत अपने पिता की घनी झांतो से रगड़ खाने लगी और साथ ही वह अपने अति संवेदनशील गुदा - द्वार पर लंड की अत्यंत गरमाहट महसूस कर सिरहन से भरने लगी.

इसके पश्चात उसने अपने होंठ दीप के होंठो से जोड़ दिए और दोनो नंगे जिस्म आपस में गुथ्ते चले गये .... निम्मी के नुकीले व तने निपल्स उसके पिता की वृहद छाति में धसने से दीप की आँखें खुलने लगी और उसने अपनी मजबूत बाहों में अपनी नन्ही सी जान को समेट लिया.

" किस मी !!! उम्म्म्मम लिक्क माइ टंग ना .. प्लज़्ज़्ज़ डॅड " ....... निम्मी फुसफुसाई .... उसका खूबसूरत चेहरा मारे उत्तेजना के लाल हो उठा था .... पिता के खड़े लंड पर अपने आप उसकी कमर हिलती हुई आगे पिछे होने लगी थी और वह दीवानो की तरह अपने डॅड के होंठो पर अपनी जीभ से चाटने लगी.

दीप ने यह कतयि एक्सपेक्ट नही किया था .... माना उसे पॅशनेट और इनटेन्स किस का काफ़ी एक्सपीरियेन्स था बट अपनी बेटी के साथ यह उसका पहला मौका था .... वह कुछ देर तक बिना कोई हरक़त किए अपनी बेटी की बेकरारी व मदहोशी पर गौर फरमाने लगा .... निम्मी ने कामुकतावश अपने दांतो में अपने पिता का ऊपरी होंठ जाकड़ कर ज़ोर से काटा लेकिन दीप पर तो जैसे इसका कोई असर ही नही हुआ .... बल्कि वह मुस्कुराने लगा ....... " आअहह !!! काट क्यों रही है ? " ....... उसने निम्मी को चिडाते हुए कहा.

" डॅड ह्म्‍म्म्मममम !!! किस मी " ........ निम्मी आउट ऑफ कंट्रोल होकर सिसकी .... नीचे उसकी चूत से लावा बह कर दीप के लंड को और भी ज़्यादा चिकना बना रहा था और जिससे निम्मी अपने चूतड़ो की घाटी बड़ी कठोरता से अपने पिता के बलिष्ठ लंड पर घिसे जा रही थी.

" आहह .......... ओह " ...... इसके बाद उसकी आँखें बंद होने लगी .... दीप ने उसे प्यार जो करना शुरू कर दिया था .... उसने निम्मी के रेशमी बाल उसकी गर्दन से हटाए और वहाँ अपने होंठो से बेतहाशा चूमने लगा .... स्वतः ही उसकी बेटी की मोटी चूचियाँ उसकी साँसें लेने से और ज़्यादा फूलने लगी और उसका संपूर्ण बदन थरथरा उठा.

" फकक्क्क्क मी डॅड !!! मत तडपाओ प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़ " ........ वह कराहने लगी और जब तक दीप कुछ अलग प्लान कर पाता .... जल्दबाज़ी में निम्मी ने अपने घुटने सोफे पर टिकाते हुए अपने बदन को ऊपर उठाया .... साथ ही अपने हाथ से अपने पिता के लंड का सूजा सुपाड़ा अपनी कुँवारी चूत के बंद मूँह पर अड़ा लिया.

" ओह माइ गॉड .......... निम्मीईीईईईईईईईई " ....... दीप ज़ोर से चीखा क्यों कि यह पोज़िशन किसी वर्जिन लड़की के फर्स्ट इंटरकोर्स के लिए ज़रा भी सही नही थी .... उसने ताक़त लगा कर अपनी बेटी के जिस्म को ऊपर खीचना चाहा और जिसमें वह पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ .... उत्तेजित निम्मी उसके हाथो से फिसल गयी और उसका मोटा सुपाड़ा बेटी की नाज़ुक कुँवारी चूत में फस्ने लगा.

" फ़चह " ....... इस साउंड के साथ सुपाड़ा उसकी चूत में एंटर हुआ और इसके फॉरन बाद निम्मी का कुँवारापन हमेशा - हमेशा के लिए ख़तम हो गया .... उसकी चूत के होंठ ज़रूरत से ज़्यादा खुल चुके थे और ऐसा लगा जैसे वहाँ कोई बल्लून फटा हो.

" आईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ......... ममममी " ........ निम्मी की चीख ने उस बंद कमरे मे भूचाल ला दिया और वह अपने पिता के नंगे जिस्म पर ढेर हो गयी .... वहीं ज्यों ही दीप को अपनी नग्न जाँघो पर पनियल रिसाव होता महसूस हुआ फॉरन उसके होंठ फैलने लगे .... वह अपनी अग्रिम विजय पर मुस्कुरा उठा था.
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