Aunty ki Chudai आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - Printable Version

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RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-09-2017

रिंकी ने दरवाज़ा खोला और प्रिया अंदर आ गई...अंदर आते हुए प्रिया की नज़र 
मेरे कमरे में पड़ी और उसने मेरी तरफ देखकर एक प्यारी सी मुस्कराहट 
दिखाई...और मुझे हाथ ।हिलाकर हाय किया और ऊपर चली गई... 



यह प्रिया और मेरा रोज का काम था, हम जब भी एक दूसरे को देखते थे तो प्रिय 
मेरी तरफ हाथ दिखाकर हाय कहती थी। मैं उसकी इस आदत को बहुत साधारण तरीके से
लेता था लेकिन बाद में पता चला कि उसकी ये हाय...कुछ और ही इशारा किया 
करती थी... 



अब सब कुछ सामान्य हो चुका था और पप्पू भी अपने घर वापस चला गया था। 



मैं अपने बिस्तर पर लेटा हुआ था और थोड़ी देर पहले की घटना को याद करके अपने
हाथों से अपना लण्ड सहला रहा था। मैंने एक छोटी सी निक्कर पहन रखी थी और 
मैंने उसके साइड से अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया था। 



मेरी आँखें बंद थीं और मैं रिंकी की हसीं चूचियों और चूत को याद करके मज़े 
ले रहा था। मेरा लण्ड पूरी तरह खड़ा था और अपने विकराल रूप में आ चुका था। 
मैंने कभी अपने लण्ड का आकार नहीं नापा था लेकिन हाँ नेट पर देखी हुई सारी 
ब्लू फिल्मों के लण्ड और अपने लण्ड की तुलना करूँ तो इतना तो तय था कि मैं 
किसी भी नारी कि काम पिपासा मिटने और उसे पूरी तरह मस्त कर देने में कहीं 
भी पीछे नहीं था। 



अपने लण्ड की तारीफ जब मैंने सिन्हा-परिवार की तीनों औरतों के मुँह से सुनी
तब मुझे और भी यकीन हो गया कि मैं सच में उन कुछ भाग्यशाली मर्दों में से 
हूँ जिनके पास ऐसा लण्ड है कि किसी भी औरत को चाहे वो कमसिन, अक्षत-नवयौवना
हो या 40 साल की मस्त गदराई हुई औरत, पूर्ण रूप से संतुष्ट कर सकता है। 



मैं अपने ख्यालों में डूबा अपने लण्ड की मालिश किए जा रहा था कि तभी... 



"ओह माई गॉड !!!! "...यह क्या है??" 



एक खनकती हुई आवाज़ मेरे कानों में आई और मैंने झट से अपनी आँखें खोल लीं...मेरी नज़र जब सामने खड़े शख्स पर गई तो मैं चौंक पड़ा... 



"तुम...यहाँ क्या कर रही हो...?" मेरे मुँह से बस इतना ही निकला और मैं खड़ा हो गया... 



मेरे सामने और कोई नहीं बल्कि प्रिया खड़ी थी जो अभी थोड़ी देर पहले ही घर 
वापस लौटी थी, उसके हाथों में एक प्लेट थी जिसमें वो मेरे लिए कुछ खाने को 
लेकर आई थी। 



यह उसकी पुरानी आदत थी, जब भी वो कहीं बाहर से आती तो सबके लिए कुछ न कुछ खाने को लेकर आती थी। 



खैर छोड़ो, मैं हड़बड़ा कर बिस्तर से उठ गया और उसके ठीक सामने खड़ा हो गया। 
मुझे काटो तो खून नहीं, समझने की ताक़त ही नहीं रही, सारा बदन पसीने से भर 
गया। 



मैंने जब प्रिया की तरफ देखा तो पता चला कि उसकी आँखें मेरे लण्ड पर टिकी 
हुई हैं और वो अपना मुँह और आँखें फाड़ फाड़ कर बिना पलके झपकाए देखे जा रही 
थी। हम दोनों में से किसी की भी जुबान से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे। 



तभी मेरे तन्नाये हुए लण्ड ने एक ठुमका मारा और प्रिया की तन्द्रा टूटी। 
उसने बिना देरी किये प्लेट सामने की मेज़ पर रखा और मेरी आँखों में एक बार 
देखा। उसके चेहरे पर एक अजीब सा भाव था मानो उसने कोई भूत देख लिया हो। 



वो सीधा सीढ़ियों की तरफ दौड़ पड़ी लेकिन वहीं जाकर रुक गई। मेरी तो हालत ही 
ख़राब थी, मैं उसी हालत में अपने कमरे से यह देखने के लिए बाहर निकला कि वो 
रुक क्यूँ गई। पता नहीं मुझे क्या हो गया था, वो उत्सुकता थी या पकड़े जाने 
का डर... पर जो भी था मैं अपन खड़ा लण्ड लेकर बाहर की तरफ आ गया और मैंने 
प्रिया को सीढ़ियों के पास दीवार से टेक लगाकर खड़ा पाया। 



उसकी आँखें बंद थी और साँसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। उसका चेहरा सुर्ख 
लाल हो गया था और माथे पर हल्की हल्की पसीने की बूँदें उभर आई थीं। उसका 
सीना तेज़ चलती साँसों की वजह से ऊपर नीचे हो रहा था और ज़ाहिर है कि सीने के
उभार भी उसी तरह थिरक रहे थे। 



पर मुझे उसकी चूचियों का ख्याल कम और यह डर ज्यादा था कि कहीं वो यह बात सब को बता न दे। सच बताऊँ तो मेरी फटी पड़ी थी। 



मैंने थोड़ी सी हिम्मत जुटाई और उसके तरफ यह बोलने के लिए बढ़ा कि वो यह बात किसी से न कहे। 



मैंने डरते डरते उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे थोड़ा सा हिलाया- प्रिया...प्रिया...! 



"हाँ..!" 



उसने फिर से हड़बड़ा कर अपनी आँखें खोली और हम दोनों की आँखें फिर से एक 
दूसरे में अटक गईं। उसकी आँखों में एक अजीब सा सवाल था मानो वो मुझसे पूछना
चाह रही हो कि यह सब क्या था... 



"प्रिया...तुमने जो अभी देखा वो प्लीज किसी से मत बताना, वरना मेरी बदनामी 
हो जाएगी और मुझे सजा मिलेगी..." मैंने एक सांस में डरते डरते अपनी बात 
प्रिया से कह दी। 



प्रिया ने एक मौन स्वीकृति दी और शरमा कर अपनी नज़र नीचे कर ली... 



"हे भगवन...!!" 



प्रिया के मुँह से फिर से एक चौंकाने वाली आवाज़ आई और वो मुड़कर सीढ़ियों से ऊपर की तरफ भाग गई। 



मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने जब नीचे की तरफ देखा तो मुझे होश आया। 
मेरा पप्पू अपने पूरे जोश में सर उठाये सलामी दे रहा था। रिंकी की चूत की 
कशिश ऐसी थी कि लण्ड शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-09-2017

मैं भाग कर अपने कमरे में घुस गया और दरवाज़ा बंद कर लिया। मैं उसी हालत में
अपने बिस्तर पर लेट गया और छत को निहारने लगा। मेरे मन में अजीब सी 
उथल-पुथल चल रही थी। मैं समझ नहीं पा रहा था कि ऐसी स्थिति में क्या करना 
चाहिए। आज जो हुआ उसका परिणाम पता नहीं क्या होगा। कहीं प्रिया इस बात को 
सबसे कह देगी या फिर मेरी बात मानकर चुप रहेगी... 



यह सोचते सोचते मैंने अपनी आँखें बंद कर ली... तभी मेरी आँखों के सामने 
प्रिया की ऊपर नीचे होती चूचियाँ आ गईं...और मेरा हाथ अपने आप मेरे खड़े 
लण्ड पर चला गया। 



और यह क्या, मेरा पप्पू तो पहले से ज्यादा अकड़ गया था। मेरे होठों पर एक 
मुस्कान आ गई और मैं अपने आप को एक गाली दी," साले चोदू...तू नहीं सुधरेगा 
!" 



और मैंने अपना अधूरा काम पूरा करने में ही भलाई समझी क्यूंकि इस खड़े लण्ड 
को चुप करना जरूरी था। मैंने अपने लण्ड को प्यार से सहलाया और मुठ मारने 
लगा। मज़े की बात यह थी कि अब मेरी आँखों में दो दो दृश्य आ रहे थे, एक 
रिंकी की हसीन झांटों भरी चूत और दूसरा प्रिया की चूचियाँ...मेरा जोश 
दोगुना हो गया और मेरे लण्ड ने एक जोरदार पिचकारी मार कर अपना लावा बाहर 
निकाल दिया। 



मैं बिल्कुल थक सा गया था मानो कोई लम्बी सी रेस दौड़ कर आया हूँ। और यूँ ही मेरी आँख लग गई। 



"सोनू...सोनू... दरवाज़ा खोलो, कब तक सोते रहोगे??" अचानक किसी की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी और मेरी नींद टूट गई। 



घड़ी पर नज़र गई तो पाया कि 7 बज चुके थे, मतलब कि मैं 2 घंटे सोता रहा। 
मैंने जल्दी से उठकर दरवाज़ा खोलना चाहा तभी मेरी नज़र अपने पैंट पर गई और 
मैंने अपने पप्पू को मुरझाये हुए बाहर लटकते हुए पाया। मैंने जल्दी से उसे 
अन्दर किया और दरवाज़ा खोला। 



बाहर मेरी दीदी हाथों में ढेर सारे बैग लिए खड़ी थी। उसे देखकर मुझे याद आया
कि वो सिन्हा आंटी के साथ बाज़ार गई थी। मैंने मुस्कुरा कर उनके हाथों से 
सामान लिया और उनसे कहा," वो, मेरी तबियत ठीक नहीं थी न इसलिए बिस्तर पर 
पड़े पड़े नींद आ गई। आप लोगों की शॉपिंग कैसी हुई?" 



"बस पूछो मत, सिन्हा आंटी ने पूरे साल भर का सामान खरीदवा दिया है।" दीदी ने अन्दर आते हुए कहा। 



"चलो अच्छा है, अब कुछ दिनों तक आपको बाज़ार जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।" मैंने हंसते हुए कहा। 



"ज्यादा खुश मत हो, हमें कल भी बाज़ार जाना है, कुछ चीज़ें आज मिली नहीं 
इसलिए मैं और आंटी कल फिर से सुबह सुबह बाज़ार चले जायेंगे और शायद आने में 
लेट भी हो जाएँ। आंटी की तो शॉपिंग ही ख़त्म नहीं होने वाली !" दीदी ने 
कुर्सी पर बैठते हुए कहा और हम दोनों भाई बहन उसकी बात पर हंसने लगे। 



शाम हो चली थी और हमारे यानि मेरे और पप्पू के घूमने का वक़्त हो गया था। मैंने अपने कपड़े बदले और बाहर जाने लगा। 



"अरे, तुम्हारी तो तबीयत ठीक नहीं थी न? फिर कहाँ जा रहे हो?" यह सिन्हा आंटी की आवाज़ थी जो सीढ़ियों से नीचे आ रही थी। 



मैंने पीछे मुड़ कर देखा और एक हल्की सी स्माइल दी,"कहीं नहीं आंटी, बस घर 
में बैठे बैठे बोर हो गया हूँ इसलिए बाहर टहलने जा रहा हूँ।" 



आंटी तब तक मेरे पास आ चुकी थी। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर बुखार देखने की तरह किया और मेरी आँखों में देखा। 



"बुखार तो नहीं है, लेकिन प्रिया बता रही थी कि तुम अच्छा महसूस नहीं कर 
रहे थे थोड़ी देर पहले। इसीलिए मैं तुमसे तुम्हारा हाल चाल पूछने आ गई।" 
आंटी ने चिंता भरी आवाज़ में कहा। 



पर दोस्तो, मैंने जैसे ही प्रिया का नाम सुना तो कसम से मेरी गांड फटने 
लगी। मुझे लगा जैसे प्रिया ने वो सब कुछ अपनी माँ को बता दिया होगा। मेरा 
सर शर्म और डर की वजह से झुक गया और मैं कुछ बोल ही नहीं पाया। आंटी ने 
मेरा सर एक बार फिर से अपनी हथेली से छुआ किया और एक गहरी सांस ली। 



"अगर तुम्हारा दिल कर रहा है तो जाओ जाकर टहल आओ, लेकिन जल्दी से वापस आ जाना।" आंटी ने अपनी वही कातिल मुस्कान के साथ मुझसे कहा। 



मैं बिना कुछ बोले बाहर निकल गया और अपने अड्डे पर पहुँच गया। मेरा यार 
पप्पू वहाँ पहले से ही खड़ा था। मुझे देखकर वो दौड़ कर मेरे पास आया। 



"भोसड़ी के, कहाँ था अभी तक? मैं कब से तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ।" पप्पू ने थोड़ी नाराज़गी के साथ मुझसे पूछा। 



उसका नाराज़ होना जायज था, हम हमेशा 6 बजे तक अपने चौराहे पर मिलते थे और 
फिर घूमने जाया करते थे। पर उसे क्या पता था कि उसके जाने के बाद मेरे साथ 
क्या हुआ और मैं किस स्थिति से गुजरा था। 



"कुछ नहीं यार, बस थोड़ी आँख लग गई थी इसलिए देर हो गई।" मैंने मुस्कुरा कर 
उसकी तरफ देखा और फिर हम दोनों पप्पू की बाइक पर बैठ कर निकल पड़े। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-09-2017

आज पप्पू की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। इतना खुश मैंने उसे पहले कभी नहीं 
देखा था। हो भी क्यूँ ना, इतनी मस्त माल जो हाथ लगी थी उसे। हम दोनों 
बिष्टुपुर (जमशेदपुर का एक मशहूर बाज़ार) पहुँचे और अपने पसंद की दूकान पर 
जाकर चाय और सिगरेट का मज़ा लेने लगे। पप्पू बार बार मुझे थैंक्स कह रहा था 
और मेरी खातिरदारी में लगा हुआ था। उसकी आँखों में एक अजीब सी विनती थी 
मानो वो कह रहा हो कि आगे का कार्यक्रम भी तय करवा दो। 



मैंने उसकी आँखों में वो सब पढ़ लिया था, आखिर दोस्त हूँ उसका और उसके बोले बिना भी उसके दिल की बात जान सकता हूँ। 



हम काफी देर तक वहीं घूमते रहे और फिर वापस अपने अपने घर की तरफ चल पड़े। 
रास्ते में मैंने पप्पू को यह खुशखबरी दी कि कल फिर से घर पर कोई नहीं होगा
और वो अपन अधूरा काम पूरा कर सकता है। 



पप्पू ने जब यह सुना तो जोर से ब्रेक मार दी और बाइक खड़ी करके मुझसे लिपट 
गया,"सोनू मेरे भाई, मैं तेरा एहसान ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगा। तू मेरा 
सच्चा यार है।" 



पप्पू मानो बावला हो गया था। 



"रहने दे साले, चूत मिल रही है तो दोस्त बहुत प्यारा लग रहा है न !" मैंने मस्ती के मूड में पप्पू से कहा। 



हम दोनों जोर जोर से हंस पड़े और बाइक स्टार्ट करके फिर से चल पड़े और अपने 
अपने घर पहुँच गए। अपने कमरे में पहुँचा और कपड़े बदलकर एक हल्की सी टीशर्ट 
और शॉर्ट्स पहन लिया। घड़ी पर नज़र गई तो देखा 9 बज रहे थे। दीदी कहीं दिखाई 
नहीं दे रही थी। तभी किसी के चलने की आहट सुनाई दी। मैंने पीछे मुड़ कर देखा
तो रोज़ की तरह प्रिया मुझे खाने के लिए बुलाने आई थी। 



"चलो भैया, खाना तैयार है। सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं।" प्रिया ने मेरी तरफ देख कर कहा। 



मैं उससे नज़रें मिलाना नहीं चाहता था लेकिन जब उसकी तरफ देखा तो मेरी नज़र अटक गई।
अपने कमरे में पहुँचा और कपड़े 
बदलकर एक हल्की सी टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन लिया। घड़ी पर नज़र गई तो देखा 9 बज
रहे थे। दीदी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी। तभी किसी के चलने की आहट सुनाई 
दी। मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो रोज़ की तरह प्रिया मुझे खाने के लिए बुलाने 
आई थी। 



"चलो भैया, खाना तैयार है। सब आपका इंतज़ार कर रहे हैं।" प्रिया ने मेरी तरफ देख कर कहा। 



मैं उससे नज़रें मिलाना नहीं चाहता था लेकिन जब उसकी तरफ देखा तो मेरी नज़र अटक गई। 



प्रिया ने आज एक बड़े गले का टॉप और एक छोटी सी स्कर्ट पहन रखी थी। उसकी 
चिकनी जांघें कमरे की रोशनी में चमक रही थी। मेरा मन डोल गया। उसके सीने की
तरफ मेरी नज़र गई तो मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा। बड़े से गले वाले टॉप में
उसकी चूचियों की घाटी का हल्का सा नज़ारा दिख रहा था। सच कहूँ तो ऐसा महसूस
हो रहा था जैसे उसकी चूचियाँ अचानक से दो इन्च और बड़ी हो गई हों।मेरी तो 
आँखें ही अटक गई थीं उन पर। मैंने सोचा था कि जब प्रिया मेरे सामने आएगी तो
मैं उससे पूछूँगा कि उसने कहीं दोपहर वाली बात अपनी माँ से तो नहीं बता 
दी। लेकिन मैं तो किसी और ही दुनिया में था। 



"क्या हुआ, खाना नहीं खाना है क्या? तबीयत तो ठीक है ना?" 



प्रिया की खनकती आवाज़ ने मेरा ध्यान तोड़ा और मैंने उसे अन्दर आने को कहा। 
प्रिया ने मेरी तरफ प्रश्नवाचक नज़रों से देखा, शायद उसे मेरा अन्दर बुलाना 
अजीब सा लगा हो या फिर हो सकता है उसे दोपहर वाली घटना याद आ गई हो। 



वो दरवाज़े ही खड़ी रही। मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ा और उसे अन्दर खींचा। उसका हाथ बिल्कुल ठंडा था, शायद डर की वजह से। 



उसने डरते डरते पूछा, "क.. क.. क्या बात है सोनू भैया??" 



"एक बात बताओ, जब मैंने तुम्हें मना किया था तो फिर भी तुमने आंटी को सब कुछ बता क्यूँ दिया?" मैंने रोनी सी सूरत बनाकर पूछा। 



"आपको ऐसा लगता है कि मैंने माँ से कुछ कहा होगा?" प्रिया ने एक चिढ़ाने 
वाली हंसी के साथ मेरी आँखों में देखते हुए मुझसे ही सवाल कर दिया। 



"मुझे नहीं पता, लेकिन जिस तरह से आंटी ने मुझसे मेरी तबीयत के बारे में 
पूछा तो मुझे लगा जैसे तुमने सब बता दिया है।"...मैंने असमंजस की स्थिति 
व्यक्त करते हुए कहा। 



"ये सब बातें सबसे नहीं की जातीं मेरे बुद्धू भैया...और हाँ, आगे से जब 
तुम्हें ऐसा कुछ करना हो तो कम से कम दरवाज़ा बंद कर लिया करो।" 



प्रिया की बात सुनकर मेरे कान खड़े हो गए और आश्चर्य से मेरी आँखें बड़ी हो 
गई। यह क्या कह रही है...इसका मतलब इसे सब पता है इन सबके बारे में...हे 
भगवन !! 



मैं एकटक उसकी तरफ देखता रह गया...
"अब उठो और चलो, वरना खाना ठंडा
हो जायेगा। खाना गर्म हो तो ही खाने का मज़ा है।" प्रिया ने मेरा हाथ पकड़कर
मुझे उठाने की कोशिश की और मेरी आँखों में देख कर आँख मार दी। 



मैं आश्चर्यचकित हो गया था उसकी बातें सुनकर। मैंने सोचा भी नहीं था कि जिसे मैं छोटी बच्ची समझता था वो तो पूरी गुरु है। 



"वैसे आपका राज छुपाने के लिए आपको मुझे थोड़ी रिश्वत देनी पड़ेगी।" प्रिया ने चहकते हुए धीरे से मुझसे कहा। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-10-2017

मैं डर गया, पता नहीं वो क्या मांग ले। फिर मैंने सोचा ज्यादा से ज्यादा 
क्या मांगेगी...मेरा लण्ड ही न, मैं तो पहले से ही किसी चूत में घुसने के 
लिए तड़प रहा था। मैंने जोश में आकर उसका हाथ जोर से पकड़ लिया और पूछा,"क्या
चाहिए, तू जो कहेगी मैं देने को तैयार हूँ।" 



"अरे डरो मत, मैं ज्यादा कुछ नहीं मांगूगी, बस मेरी थोड़ी सी हेल्प कर देना,
मुझे कुछ नोट्स तैयार करने हैं। तुम मेरी मदद कर देना।" उसने शरारत से 
मेरी ओर देखते हुए कहा। 



"ये ले, सोचा चूत और मिली पढाई !" मैंने अपने मन में सोचा...मेरा मूड थोड़ा 
ख़राब हो गया लेकिन इस बात की तसल्ली हो गई कि वो मेरे मुठ मारने की बात को 
किसी से नहीं कहेगी। प्रिया को मेरी हालत का अंदाज़ा हो गया था शायद। उसने 
मुझे फिर से पकड़ा और मुझे लेकर ऊपर जाने लगी। 



उसने मेरी बाह पकड़ ली और मुझसे सट कर सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। उसने इस तरह से 
मेरा बाजू पकड़ा था कि उसकी एक चूची मेरे बाजू से रगड़ खा रही थी और हम 
चुपचाप ऊपर खाने की मेज की तरफ बढ़ चले। 



ऊपर पहुँचते ही उसने मुझे छोड़ दिया ताकि किसी को कुछ पता न चले कि वो मुझसे अपनी चूचियाँ रगड़ रही थी। 



खाने की मेज पर सभी मेरा इंतज़ार कर रहे थे। मेरी दीदी भी वहीं थी। मैंने 
माहौल को हल्का करने के लिए अपनी दीदी की तरफ देखा और पूछने लगा,"अरे दीदी 
तुम ऊपर हो और मैं तुम्हे नीचे पूरे घर में खोज रहा था।" 



"मैं जल्दी ही ऊपर आ गई थी भाई, नीचे कोई नहीं था इसलिए मैंने ऊपर आना ही सही समझा।" दीदी ने मेरी तरफ देखकर कहा। 



मैं जाकर अपनी जगह पर बैठ गया। मेरे बगल वाली कुर्सी पर मेरी दीदी थी। मेरे
सामने एक तरफ रिंकी थी और मेरे ठीक सामने प्रिया बैठ गई। आंटी हम सबको 
खाना परोस रही थी। हमने खाना शुरू किया। 



मैं अपना सर नीचे करके खाए जा रहा था, तभी किसी ने मेरे पैरों में ठोकर 
मारी। मैंने अपना सर उठाया तो सामने देखा की प्रिया मुस्कुरा रही है और जान
बूझकर झुक झुक कर अपनी प्लेट से खाना खा रही थी। उसके टॉप के बड़े गले से 
उसकी आधी चूचियाँ झांक रही थीं। मेरा खाना मेरे गले में ही अटक गया। मैंने 
एकटक उसकी चूचियों को देखना शुरू किया और वो मुस्कुरा मुस्कुरा कर मुझे 
अपने स्तनों के दर्शन करवाए जा रही थी। 



"क्या हुआ बेटा, रुक क्यूँ गए...खाना अच्छा नहीं है क्या?" आंटी की आवाज़ ने मुझे झकझोरा। 



"नहीं आंटी, खाना तो बहुत टेस्टी है...जी कर रहा है पूरा खा जाऊँ...!" 
मैंने दोहरे मतलब वाली भाषा में कहते हुए प्रिया की तरफ देखा। उसका चेहरा 
चमक रहा था मानो मैंने खाने की नहीं उसकी चूचियों की तारीफ की हो।
बात सच भी थी, मैंने तो उसकी चूचियों को ही टेस्टी कहा था...लेकिन सहारा खाने का लिया था। 



रिंकी जो प्रिया के बगल में बैठी थी, उसकी नज़र अचानक मेरी आँखों की दिशा 
तलाशने लगे। मेरा ध्यान तब गया जब उसने मुझे प्रिया के सीने पर टकटकी लगाये
पाया। मेरी नज़र जब रिंकी के ऊपर गई तब मुझे एहसास हुआ कि मैं कुछ ज्यादा 
ही कर रहा हूँ और मेरी इस हरकत से बनती हुई बात बिगड़ सकती थी। लेकिन कहीं न
कहीं मुझे यह पता था कि अगर रिंकी मुझे प्रिया को चोदते हुए भी देख ले तो 
कोई दिक्कत नहीं होने वाली थी। आखिर उसे भी पता था कि उसके लिए लण्ड की 
व्यवस्था मेरी वजह से ही हुई थी। 



मैंने फिर भी अपने आप को सम्हाला और चुपचाप खाना ख़त्म करने लगा। खाना खाते 
खाते बीच में ही प्रिया बोल पड़ी,"माँ, मुझे आज अपने नोट्स तैयार करने हैं, 
बहुत जरूरी हैं इसलिए मैंने सोनू भैया से कह दिया है वो मेरी मदद करेंगे। 
मैं अभी नीचे उनके कमरे में जाकर अपने नोट्स बनाऊँगी।" 



प्रिया ने एक ही सांस में अपनी बात कह दी। 



"बेटा, तुम्हारे सोनू भैया की तबीयत ठीक नहीं है उसे परेशान मत करो। तुम 
रिंकी के साथ बैठ कर अपना काम पूरा कर लो।" आंटी ने प्रिया को रोकते हुए 
कहा। 



मैं एक बार प्रिया की तरफ देख रहा था तो दूसरी तरफ आंटी को। समझ में नहीं आ
रहा था कि किसे रोकूँ और किसे हाँ करूँ...एक तरफ प्रिया थी जिसने मुझे 
अपनी बातों और अपनी हरकतों से झकझोर कर रख दिया था और दूसरी तरफ आंटी थी 
जिन्हें मेरी तबीयत की फ़िक्र हो रही थी। मैं खुद भी थका थका सा महसूस कर 
रहा था और यह सोच रहा था कि खाना खाकर सीधा अपने बिस्तर पर गिर पडूंगा और 
सो जाऊँगा...। 



मेरे दिमाग में आने वाले कल की प्लानिंग चल रही थी जहाँ मुझे रिंकी और 
पप्पू की चुदाई का सीधा प्रसारण देखना था। लेकिन प्रिय के बारे में ख्याल 
आया तो दोपहर का वो वाक्य याद आ गया जब प्रिया ने मेरा खड़ा लण्ड देखा था और
मैंने उसकी चूचियों की गोलाइयाँ नापी थीं। 



मेरे बदन में एक झुझुरी सी हुई और मेरा मन यह सोच कर उत्साह से भर गया कि 
आज हो न हो, मुझे प्रिया की अनछुई चूत का स्वाद चखने को मिल सकता है... 



यह ख्याल आते ही मैंने अपनी चुप्पी तोड़ी,"आंटी, आप चिंता न करें, मेरी 
तबीयत ठीक है और मैं प्रिया की मदद कर दूँगा... मैं ठीक हूँ, आप खामख्वाह 
ही चिंता कर रही हैं।" मैंने बड़े ही इत्मीनान से अपनी बात कही। 



मैं नहीं चाहता था कि मेरी उत्सुकता किसी को दिखे और मुझ पर किसी को शक हो। 



"ठीक है बेटा, जैसा तुम ठीक समझो !" आंटी ने मुस्कुरा कर कहा। 



"और प्रिया, तुम भैया को ज्यादा परेशान मत करना। जल्दी ही अपना काम ख़त्म कर लेना और ऊपर आकर सो जाना।" आंटी ने प्रिया को हिदायत दी। 



"ठीक है माँ, आप चिंता न करें। मैं आपके सोनू बेटे का ख्याल रखूँगी और 
उन्हें ज्यादा नहीं सताऊँगी।" प्रिया ने ठिठोली करते हुए कहा और उसकी बात 
पर हम सब हंस पड़े। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-10-2017

हम सबने अपना अपना खाना खत्म किया और अपने अपने कमरे की तरफ चल पड़े। रिंकी 
और नेहा दीदी उनके कमरे में चले गए। आंटी घर का बिखरा हुआ सामान समेटने में
लग गईं। प्रिया भी अपने कमरे में चली गई अपने नोट्स और किताबें लेने के 
लिए। मैं नीचे अपने कमरे में आ गया और कंप्यूटर पर बैठ कर मेल चेक करने 
लगा। 



मेल चेक करने के साथ साथ मैंने एक दूसरी विंडो में अपनी फेवरेट पोर्न साईट 
खोल लिया। मैं कुछ चुनिन्दा पोर्न साइट्स का दीवाना था और आज भी हूँ। जब तक
एक बार उन साइट्स को चेक न कर लूँ मुझे नींद ही नहीं आती। 



थोड़ी देर के बाद मुझे किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। मैंने कंप्यूटर पर 
विंडो बदल दिया और फ़िर से मेल देखने लगा। मुझे लगा था कि प्रिया अपनी 
किताबें लेकर आई होगी लेकिन मुझे पायल के छनकने की आवाज़ सुनाई दी। 



मेरे दिमाग ने झटका खाया और मुझे याद आया कि ये सिन्हा आंटी हैं, क्यूंकि एक वो ही थीं जो पायल पहनती थीं।
वैसा ही हुआ और आंटी मेरे कमरे में दो दूध के गिलास लेकर दाखिल हुई। 
उन्होंने मेरी तरफ प्यार भरी नज़रों से देखा और मेरे मेज पर ग्लास रख दिया। 
उन्होंने मेरे माथे पर हाथ रखते हुए कहा,"ये तुम दोनों के लिए है, पी लेना 
और आराम करना, तुम्हारी तबीयत ठीक हो जाएगी। दूध में हल्दी भी मिला दी है, 
तुम्हें पिछले कुछ दिनों से कमजोरी सी महसूस हो रही है न, इसे पीकर 
तुम्हारे अन्दर ताक़त आ जाएगी और तुम्हें अच्छा लगेगा।" 



मैं चुपचाप आंटी की बातें सुनता रहा और उनके बदन से आती खुशबू का मज़ा लेता 
रहा। सच में यारों, एक अजीब सी महक आ रही थी उनके बदन से...बिल्कुल मदहोश 
कर देने वाला एहसास था वो। 



आंटी वापस चली गई और मैं उनकी खुशबू में खोया अपनी आँखें बंद करके सोच में 
पड़ गया कि मैं करूँ क्या। एक तरफ रिंकी थी जिसकी हसीं चूचियों और चूत के 
दर्शन मैं कर चुका था, दूसरी तरफ प्रिया थी जो अपनी अदाओं और बातों से मेरा
लण्ड खड़ा कर चुकी थी और तीसरी ये आंटी जिनकी तरफ मैं खुद बा खुद खिंचता 
चला जा रहा था। 



सच कहूँ तो मैं पूरी तरह से असमंजस में था, क्या करूँ क्या न करूँ। मैंने 
एक गहरी सांस ली और अपने कंप्यूटर पर वापस पोर्न साईट देखने लगा। मैं अपनी 
धुन में पोर्न विडियो देख रहा था और अपने लण्ड को पैंट के ऊपर से ही सहला 
रहा था। मैं इतना ध्यान मग्न था कि मुझे पता ही नहीं चला की कब प्रिया मेरे
कमरे में आ चुकी थी और मेरे बगल में खड़े होकर कंप्यूटर पर अपनी आँखें गड़ाए
हुए चुदाई की फिल्म देख रही थी। 



उसकी तेज़ सांस की आवाज़ ने मेरी तन्द्रा तोड़ी और मैंने बगल में देखा तो 
प्रिया फिर से उसी हालत में थी जैसे उसकी हालत दोपहर में मुझे मुठ मारते 
हुए देख कर हुई थी। 



मैंने झट से कंप्यूटर की स्क्रीन बंद कर दी और अपने कमरे के बाथरूम में भाग
गया। मैंने बाथरूम में घुस कर नल खोल दिया और कमोड पर बैठकर अपनी साँसों 
को सम्हालने लगा। 



अब तो मैंने सोच लिया कि मेरी वाट लगने वाली है। यह दूसरी चोरी थी जो 
प्रिया ने पकड़ी थी। मैं सच में समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ। फिर मैंने
थोड़ी सी हिम्मत जुटाई और बाथरूम से बाहर निकला। 



जब मेरी नज़र कमरे में पड़ी तो मैंने प्रिया को बिस्तर पर अपनी किताबों और 
नोट्स के साथ पाया। मैंने चुपचाप अपनी कुर्सी खींची और उसके सामने बैठ गया।
प्रिया बिस्तर पर अपने दोनों पैर मोड़ कर बैठी थी और झुक कर अपने नोट्स लिख
रही थी। मैंने उसकी एक किताब उठाई और देखने लगा। किताबों में लिखे शब्द 
मुझे दिख ही नहीं रहे थे। मैं परेशान था और थोड़ा डरा हुआ भी, पता नहीं 
प्रिया अब क्या कहेगी। 



मैंने धीरे से अपनी नज़र उठाई और उसकी तरफ देखा, उसके चेहरे पर एक अजीब सी 
मुस्कान थी और और वो थोड़ा झुकी हुई थी। उसके टॉप का गला पूरा खुला हुआ था 
और जब उसके अन्दर से झांकती हुई चूचियों पर मेरी नज़र गई तो मैं एक बार फिर 
से सिहर उठा। मुझे एहसास हुआ कि शायद उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी, तभी तो
उसकी साँसों के साथ साथ उसके अनार ऊपर नीचे हो रहे थे और पूरे स्वछंद होकर
हिल रहे थे। 



मेरा लण्ड फिर से शरारत करने लगा और अपन सर उठाने लगा। मैं ऐसी तरह से बैठा
था कि चाह कर भी अपने लण्ड को हाथों से छिपा नहीं सकता था। लेकिन लण्ड था 
कि मानने को तैयार ही नहीं था। मैंने मज़बूरी में अपने हाथ को नीचे किया और 
अपने लण्ड को छिपाने की नाकाम कोशिश की। मेरी इस हरकत पर प्रिया की नज़र पड़ 
गई और उसने मेरी आँखों में देखा। 



हम दोनों की आँखें मिलीं और मैंने जल्दी ही अपनी नज़र नीचे कर ली। 



"बताओ, तुम्हें कैसी मदद चाहिए थी प्रिया? क्या नोट्स बनाने हैं तुम्हें?" मैंने किताब हाथों में पकड़े हुए उससे पूछा। 



"बताती हूँ बाबा, इतनी जल्दी क्या है। अगर आपको नींद आ रही है तो मैं जाती हूँ।" प्रिया ने थोड़ा सा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा। 



"अरे ऐसी बात नहीं है, तुम्हीं तो कह रही थी न कि तुम्हें जरूरी नोट्स 
बनाने हैं। मुझे नींद नहीं आ रही है अगर तुम चाहो तो मैं रात भर जागकर 
तुम्हारे नोट्स बना दूंगा।" मैंने उसको खुश करने के लिए कहा। 



"अच्छा जी, इतनी परवाह है मेरी?" उसने बड़ी अदा के साथ बोला और अपने हाथों 
से नोट्स नीचे रखकर अपनी टाँगें सीधी कर लीं और अपने कोहनी के बल बिस्तर पर
आधी लेट सी गई।


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-10-2017

मेरा लण्ड फिर से शरारत करने 
लगा और अपन सर उठाने लगा। मैं ऐसी तरह से बैठा था कि चाह कर भी अपने लण्ड 
को हाथों से छिपा नहीं सकता था। लेकिन लण्ड था कि मानने को तैयार ही नहीं 
था। मैंने मज़बूरी में अपने हाथ को नीचे किया और अपने लण्ड को छिपाने की 
नाकाम कोशिश की। मेरी इस हरकत पर प्रिया की नज़र पड़ गई और उसने मेरी आँखों 
में देखा। 







हम दोनों की आँखें मिलीं और मैंने जल्दी ही अपनी नज़र नीचे कर ली। 







"बताओ, तुम्हें कैसी मदद चाहिए थी प्रिया? क्या नोट्स बनाने हैं तुम्हें?" मैंने किताब हाथों में पकड़े हुए उससे पूछा। 









"बताती हूँ बाबा, इतनी जल्दी क्या है। अगर आपको नींद आ रही है तो मैं जाती हूँ।" प्रिया ने थोड़ा सा बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा। 









"अरे ऐसी बात नहीं है, तुम्हीं तो कह रही थी न कि तुम्हें जरूरी नोट्स 
बनाने हैं। मुझे नींद नहीं आ रही है अगर तुम चाहो तो मैं रात भर जागकर 
तुम्हारे नोट्स बना दूंगा।" मैंने उसको खुश करने के लिए कहा। 









"अच्छा जी, इतनी परवाह है मेरी?" उसने बड़ी अदा के साथ बोला और अपने हाथों 
से नोट्स नीचे रखकर अपनी टाँगें सीधी कर लीं और अपने कोहनी के बल बिस्तर पर
आधी लेट सी गई। 











क्या बताऊँ यार, उसकी छोटी सी स्कर्ट ने उसकी चिकनी टांगों को मेरे सामने 
परोस दिया। उसकी टाँगे और जांघें मेरे सामने चमकने लगीं। मेरे हाथों से 
किताब नीचे गिर पड़ा और मेरा मस्त लण्ड पैंट में खड़े खड़े उसको सलामी देने 
लगा। लण्ड ठनक रहा था मानो उसे अपनी ओर आने का निमंत्रण दे रहा हो। 









प्रिया की आँखों से यह बचना नामुमकिन था और उसकी नज़र मेरे लण्ड पर चली गई। 
और उसकी आँखें बड़ी हो गईं। उसने एकटक मेरीपैंट में उभरे हुए लण्ड पर अपनी 
आँखें गड़ा लीं। 









मैंने अपने पैरों को थोड़ा सा हिलाया और प्रिया का ध्यान तोड़ा। उसने झट से अपनी आँखें हटा लीं और दूसरी तरफ देखने लगी। 









"अरे, माँ ने हमारे लिए दूध रखा है...चलो पहले ये पी लेते हैं फिर बातें करेंगे।" प्रिया ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा। 









"अच्छा जी, तो आप यहाँ बातें करने आई हैं?" मैंने उससे पूछा। 









तभी प्रिया ने आगे बढ़कर दूध का गिलास उठाया और मुझे भी दिया। 









"अरे, आपके गिलास का दूध पीला क्यूँ है?" प्रिया ने चौंक कर पूछा। 









"आंटी ने इसमें हल्दी मिली है। वो कह रही थीं की इसे पीने से मुझे थोड़ी 
ताक़त मिलेगी और मेरी तबीयत ठीक हो जाएगी।" मैंने इतना कहते हुए गिलास हाथ 
में लिया और मुँह से लगाकर पीने लगा। 









"हाँ पी लो हल्दी वाला दूध, तुम्हें जरुरत पड़ेगी।" प्रिया ने फुसफुसाकर कहा
लेकिन मैंने उसकी बात सुन ली। मेरे कान खड़े हो गए और मैं सोचने लगा कि 
आखिर यह लड़की क्या सोचकर आई है...कहीं यह आज ही मुझसे चोदने को तो नहीं 
कहेगी... 







शायद इसीलिए उसने अपनी चूचियों को ब्रा में कैद नहीं किया था। 









"हे भगवन, कहीं सच में तो ऐसा नहीं है..." मैंने अपने मन में सोचा और थोड़ा 
बेचैन सा होने लगा। चोदना तो मैं भी चाहता था। मैंने एक बात सोची कि देखता 
हूँ प्रिया ने नीचे कुछ पहना है या नहीं। अगर उसने नीचे भी कुछ नहीं पहना 
होगा तो पक्का वो आज मुझसे चुदवायेगी। 







मैं रोमांच से भर गया और उसके स्कर्ट के नीचे देखने की जुगाड़ लगाने लगा। 
प्रिया वापस उसी हालत में अपनी कोहनियों के बल लेट कर दूध पीने लगी। उसने 
सहसा ही अपनी एक टांग मोड़ ली जिसकी वजह से उसका स्कर्ट थोड़ा सा ऊपर हो गया।
लेकिन मुश्किल यह थी कि उसकी टाँगे बिस्तर पर मेज की तरफ थीं और मैं बगल 
में बैठा था। मैं उसकी स्कर्ट के अन्दर नहीं देख सकता था। 









मेरे दिमाग में एक तरकीब आई और मैं कुर्सी से उठ गया- अरे, मैंने दवाई तो ली ही नहीं ! 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-11-2017

मैंने दवाई लेने के लिए मेज की तरफ अपने कदम बढ़ाये और टेबल की दराज़ से 
क्रोसिन की एक गोली निकाली। मेरा पीठ इस वक़्त प्रिया की तरफ था। मैंने सोचा
कि अगर मैं खड़े खड़े ही वापस मुड़ा तो मुझे उसके स्कर्ट के नीचे का कुछ भी 
नज़र नहीं आएगा। तभी मैंने अपने हाथ से दवाई की गोली नीचे गिरा दी और प्रिया
की तरफ मुड़ कर नीचे झुक गया उठाने के लिए। यह तो मेरी एक चाल थी और यह 
कामयाब भी हो गई। 









जैसे ही मैंने झुक कर गोली उठाई और ऊपर उठने लगा मेरी नज़र सीधे प्रिया की 
स्कर्ट के अन्दर गई और मेरे हाथ से दुबारा दवाई गिर पड़ी। इस बार वो सचमुच 
मेरे हाथों से अपने आप गिर गई क्यूंकि मेरी आँखों ने जो देखा वो किसी को भी
विचलित करने के लिए काफी था। 







प्रिया ने अन्दर कुछ नहीं पहना था। स्कर्ट सी ढकी हुई हल्की रोशनी उसकी 
नंगी चूत को और भी हसीन बना रही थी...उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, 
बिल्कुल चिकनी थी उसकी जवान मुनिया। 









मेरे दिमाग में रिंकी की चूत का नज़ारा आ गया। लेकिन रिंकी की चूत पर बाल थे और प्रिया ने अपनी चूत शेव कर रखी थी। 









मेरा गला सूख गया और मैं वैसे ही झुका हुआ उसके चूत के दर्शन करने लगा। मेरी जुबान खुद बा खुद बाहर आ गई और मेरे होठों पर चलने लगी। 







प्रिया ने यह देखा और अपनी टाँगें सीधी कर लीं और अपनी स्कर्ट को ठीक कर लिया। 







मैं उठ गया और वापस आकर कुर्सी पर बैठ गया। अब मैं पक्का समझ चुका था कि आज
मुझे प्रिया की गुलाबी चिकनी चूत का स्वाद जरुर मिलेगा। मैं कुर्सी पर बैठ
गया और एकटक प्रिया की तरफ देखने लगा। 









"क्या हुआ भैया, तुम अचानक से चुप क्यूँ हो गए?" प्रिया ने अपनी आँखों में शरारत भर के मेरी तरफ देखा। 







मैंने भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा और अपने गिलास को वापस अपने होठों 
से लगा कर दूध पीने लगा। हम दोनों बस एक दूसरे को देखे जा रहे थे और 
मुस्कुरा रहे थे मानो एक दूसरे को यह बताने की कोशिश कर रहे हों कि हम 
दोनों एक ही चीज़ चाहते हैं। 









"भैया एक बात पूछूं?" प्रिया ने अचानक से पूछा। 







मैं हड़बड़ा गया,"हाँ बोलो...क्या हुआ?" 







"क्या आप मुझे कंप्यूटर चलाना सिखायेंगे?" बड़े भोलेपन से प्रिया ने कहा। मुझे लगा था कि वो कुछ और ही कहेगी। 









"इसमें कौन सी बड़ी बात है?" मैंने कुर्सी से उठते हुए कहा और अपनी कुर्सी 
को खींचकर मेज के पास चला गया। कुर्सी के बगल में एक स्टूल था। मैंने 
प्रिया की तरफ देखा और उसे अपने पास बुलाया। प्रिया बिस्तर से उतरकर मेरे 
दाहिनी तरफ स्टूल पर बैठ गई। वो मुझसे बिल्कुल सट कर बैठ गई जिस वजह से 
उसकी एक चूची मेरे दाहिने हाथ की कोहनी से छू गई। मुझे तो मज़ा आ गया। मैं 
मुस्कुराने लगा और माउस से कंप्यूटर स्क्रीन पर इधर उधर करने लगा। लेकिन 
मैंने अभी थोड़ी देर पहले ही कंप्यूटर की स्क्रीन को ऑफ किया था इसलिए 
स्क्रीन बंद था। मैंने हाथ बढ़ाकर स्क्रीन फिर से ऑन किया। 









और यह क्या, स्क्रीन पर अब भी वही पोर्न साईट चल रही थी। मेरे हाथ बिल्कुल 
रुक से गए। स्क्रीन पर एक वीडियो आ रही थी जिसमें एक लड़की एक लड़के का मोटा 
काला लण्ड अपने हाथों में लेकर सहला रही थी। बड़ा ही मस्त सा दृश्य था। अगर 
मैं अकेला होता तो अपना लण्ड बाहर निकल कर मुठ मारना शुरू कर देता लेकिन 
मेरे साथ प्रिया थी और वो भी मुझसे चिपकी हुई। 









मैंने तुरंत ही उस विंडो को बंद कर दिया और प्रिया की तरफ देखकर उससे सॉरी बोला। 









प्रिया मेरी आँखों में देख रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे मेरे विंडो बंद 
करने से उसे अच्छा नहीं लगा। उसकी शक्ल थोड़ी रुआंसी सी हो गई थी। मैंने 
उसकी आँखों में एक रिक्वेस्ट देखी जैसे वो कह रही हो कि जो चल रहा था उसे 
चलने दो। 







हम दोनों ने एक दूसरे को मौन स्वीकृति दी और मैंने फिर से वो पोर्न साईट लगा दी। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-11-2017

"उफफ्फ्फ्फ़..." एक हल्की सी मादक सिसकारी प्रिया के मुँह से निकली। 









साईट पर कई छोटे छोटे विंडोज में सेक्सी वीडियो लगे हुए थे जिसमें चुदाई के
अलग अलग सीन थे। किसी में लड़का लड़की की चूत चाट रहा था तो किसी में लड़की 
की चूत में अपना मोटा लण्ड डाल रहा था। 











मैंने एक विंडो पर क्लिक किया जिसमे एक कमसिन लड़की एक बड़े लड़के का विशाल 
लण्ड अपने हाथों में सहला रही थी। मैंने कंप्यूटर का साउंड थोड़ा सा बढ़ा 
दिया। अब हमें उस सेक्सी विडियो से आ रही लड़की और लड़के की सिसकारियाँ सुनाई
दे रही थीं। 









हम दोनों बिना एक दूसरे से कुछ कहे और बिना एक दूसरे को देखे कंप्यूटर 
स्क्रीन की तरफ देखने लगे। स्क्रीन पर लण्ड और चूत का खेल चालू था और इधर 
हम दोनों की साँसें अनियंत्रित तरीके से चल रही थीं। मेरी तो मानो सोचने 
समझने की शक्ति ही नहीं रही थी, सच कहो तो मुझे स्क्रीन पर चल रही फिल्म 
दिखाई ही नहीं दे रही थी। मैं बस इस उहा पोह में था कि अब आगे क्या करूँ। 







मुझसे रहा नहीं जा रहा था। आप लोग सोच रहे होंगे कि कैसा चूतिया है, मस्त 
जवान माल बगल में बैठ कर ब्लू फिल्म देख रही है और मैं चुपचाप बैठा हुआ 
हूँ। लेकिन दोस्तो, यकीन मानो अगर कभी आप ऐसी स्थिति में आओगे तब पता चलेगा
कि क्या हालत होती है उस वक़्त ! 









जो भी हो, पर प्रिया के पास होने के ख़याल से और थोड़ी देर पहले उसकी चूचियों
और चूत के दर्शन करने की वजह से मेरा लण्ड अपने पूरे शवाब पर था और मेरा 
पैंट फाड़ कर बाहर आने को बेताब हो रहा था। मेरा एक हाथ कीबोर्ड और दूसरा 
हाथ माउस पर था। मैं चाहता था कि अपने लण्ड को बाहर निकालूँ और उसके सामने 
ही मुठ मारना शुरू कर दूँ। लेकिन पता नहीं क्यूँ एक अजीब सी हिचकिचाहट थी 
जो मुझे हिलने भी नहीं दे रही थी। 









मेज के ठीक सामने दीवार पर बिजली का स्विच बोर्ड लगा था। मुझे पता ही नहीं 
चला और प्रिया ने धीरे से अपना हाथ बढ़ा कर लाइट बंद कर दी। अचानक हुए 
अँधेरे से मेरा ध्यान भंग हुआ और मैंने प्रिया की तरफ देखा। वो मेरी तरफ 
देख रही थी और उसकी आँखें चमक रही थीं। 







कंप्यूटर स्क्रीन से आ रही हल्की रोशनी में मुझे उसकी आँखें लाल लाल सी 
प्रतीत हुई। मेरा ध्यान उसके सीने की तरफ गया तो देखा कि थोड़ा सा झुकने की 
वजह से उसके बड़े से गले से उसकी चूचियों की घाटी दिखाई दे रही है। मेरा 
लण्ड उसे देखकर ठनकने लगा। मैंने एक नज़र भर कर उसे देखा और वापस स्क्रीन पर
देखने लगा। 







थोड़ी देर के बाद मैंने अपने पैंट के ऊपर कुछ महसूस किया जैसे कोई चीज़ मेरे 
जांघों पर चल रही हो और धीरे धीरे मेरे लण्ड की तरफ बढ़ रही हो। 







दिल कह रहा था कि यह प्रिया का हाथ है, लेकिन दिमाग यह मानने को तैयार नहीं
था। मुझे यकीन था कि चाहे प्रिया कितनी भी बेबाकी करे लेकिन मेरा लण्ड 
पकड़ने की हिम्मत नहीं करेगी। 









"ओह्ह्ह...ये क्या ?"...मेरे मुँह से अनायास ही एक हल्की सी आवाज़ निकल गई। 
ऐसा इसलिए हुआ क्यूंकि प्रिया ने अपना हाथ सीधा मेरे लण्ड पर रख दिया... 







मेरी आँखें मज़े में बंद हो गईं और मैंने अपन एक हाथ नीचे करके प्रिया के 
जांघ पर रख दिया। मेरी हथेली उसके चिकने जांघों पर टिक गई... 







प्रिया ने अपने हथेली को मेरे लण्ड पर कस लिया और बड़े ही प्यार से सहलाने 
लगी। मैं मज़े से अपनी आँखें बंद करके उसकी जांघों को दबाने लगा, जितनी जोर 
से मैं उसकी जांघ दबा रहा था उतनी ही जोर से वो मेरा लण्ड दबा रही थी। 







ज़िन्दगी में पहली बार किसी लड़की का हाथ मेरे लण्ड पर पड़ा था, आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते कि मेरी हालत कैसी होगी उस वक़्त। 







आँखें पहले ही बंद थी और उन बंद आँखों ने उस वक़्त मुझे पूरा जन्नत दिखा 
दी...मैंने अब अपनी हथेली को उसकी जांघों पर ऊपर नीचे सहलाना शुरू कर दिया 
मानो मैं प्रिया को ये सिखाना चाहता था कि वो भी मेरे लण्ड को ऐसे ही 
सहलाये... 







और ऐसा ही हुआ, शायद वो मेरा इशारा समझ गई थी...उसने मेरे लण्ड को अपनी 
पूरी हथेली में पकड़ लिया और ऊपर नीचे करने लगी जैसे मैं मुठ मारता था। 







जिन दोस्तों को कभी इस एहसास का मज़ा मिला हो वो मेरी फीलिंग समझ सकते हैं...उस मज़े को शब्दों में बयाँ करना बहुत मुश्किल है। 







मैंने अपनी हथेली को उसके जांघों से ऊपर सरका दिया और धीरे धीरे ज़न्नत के दरवाज़े तक पहुँचा दिया। 





उफ्फ्फ्फ़...इतनी गर्मी जैसे किसी धधकती हुई भट्टी पर हाथ रख दिया हो 
मैंने...मेरे हाथ उस जगह पर ठहर गए और मैंने उसकी चिकनी चूत को सहला दिया। 







"ह्म्म्मम्म...उफ्फ्फफ्फ्फ़"...प्रिया के मुँह से एक सिसकारी निकली और उसने अपने दूसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया। 







मैंने तुरंत उसकी तरफ गर्दन घुमाई और उसकी आँखों में देखने लगा। मैंने अपनी
आँखों में एक विनती भरे भाव दर्शाए और उससे एक मौन स्वीकृति मांगी। उसने 
मदहोश होकर मेरी आँखों में देखा और अपनी जांघें बैठे बैठे थोड़ी सी फैला दी।








अब मेरी हथेली ने उसकी कमसिन चूत को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में भर लिया और दबा दिया। 







"धीरे भैया"...और ये शब्द उसके मुँह से निकले जो कि उसने मुझसे सीधे सीधे कहे थे।
मैंने अपनी हथेली को उसके जांघों से ऊपर सरका दिया और धीरे धीरे ज़न्नत के दरवाज़े तक पहुँचा दिया। 



उफ्फ्फ्फ़...इतनी गर्मी जैसे किसी धधकती हुई भट्टी पर हाथ रख दिया हो 
मैंने...मेरे हाथ उस जगह पर ठहर गए और मैंने उसकी चिकनी चूत को सहला दिया। 



"ह्म्म्मम्म...उफ्फ्फफ्फ्फ़"...प्रिया के मुँह से एक सिसकारी निकली और उसने अपने दूसरे हाथ से मेरे हाथ को पकड़ लिया। 



मैंने तुरंत उसकी तरफ गर्दन घुमाई और उसकी आँखों में देखने लगा। मैंने अपनी
आँखों में एक विनती भरे भाव दर्शाए और उससे एक मौन स्वीकृति मांगी। उसने 
मदहोश होकर मेरी आँखों में देखा और अपनी जांघें बैठे बैठे थोड़ी सी फैला दी।




अब मेरी हथेली ने उसकी कमसिन चूत को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में भर लिया और दबा दिया। 



"धीरे भैया"...और ये शब्द उसके मुँह से निकले जो कि उसने मुझसे सीधे सीधे कहे थे। 



अब मेरे बर्दाश्त की सीमा खत्म हो गई थी। मैंने अपनी गर्दन उसकी तरफ घुमाई 
और उसके चेहरे के बिल्कुल करीब आ गया। उसकी साँसें मुझे अपने चेहरे पर 
महसूस हो रही थीं। मैंने उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से कहा,"अब भी भैया
ही कहोगी?" 



उसने एक हल्की सी मुस्कान अपने होठों पर लाई और अपने सुर्ख गुलाबी होठों को
मेरे होठों पर रख दिया। हम दोनों ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक दूसरे के
होठों का रसपान करने लगे। हमने अपनी पूरी तन्मयता से एक दूसरे को चूमना 
शुरू किया और सब कुछ भूल गए। 



मैंने अपनी जुबान धीरे से उसके होठों से होते हुए उसके मुँह के अन्दर डाल 
दिया। चुम्बन का कोई तजुर्बा तो था नहीं पर ब्लू फिल्मों में कई बार इस तरह
से चुदाई की शुरुआत करते हुए देखा था। अपने उन्ही अनुभवों को याद करके मैं
आगे बढ़ने लगा। 



हमारे हाथ अब भी अपनी अपनी जगह पर थे, यानि मैं प्रिया की चूत को सहला रहा था और वो मेरे लण्ड को ! 



स्क्रीन पर अब लण्ड की चुसाई चालू हो गई थी और लड़के तथा लड़की की मुँह से 
तेज़ आवाजें आने लगी थीं। उस आवाज़ को सुनकर हम दोनों का जोश और बढ़ गया और हम
और भी उत्तेजना में आ गए। 



तभी एक ज़ोरदार चीख निकली स्क्रीन पर चल रही फिल्म से। हम दोनों का ध्यान उस
आवाज़ पर गया और हम एक दूसरे को चूमना छोड़ कर स्क्रीन की तरफ देखने लगे। 
हमने देखा कि उस लड़के ने अपना मोटा सा लण्ड उस कमसिन सी लड़की के मुँह में 
पूरा का पूरा डाल दिया और उसका सर अपने हाथों से पकड़ लिया था जिसकी वजह से 
वो बेचारी लड़की की साँस अटक गई थी। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-11-2017

प्रिया ने जब यह देखा तो उसकी आँखें फटी रह गईं उसने जोर से मेरा लण्ड दबा दिया। मेरे मुँह से चीख निकलते निकलते रह गई। 



अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता था। मैं अपनी कुर्सी से उठ गया। मेरे उठने से 
प्रिया के हाथों से मेरा लण्ड छूट गया और मेरा हाथ भी उसकी चूत से हट गया। 



मैंने कुर्सी को अपने पैरों से पीछे धकेला और प्रिया के दोनों बाजुओं को 
पकड़ कर उठाया। प्रिया बिल्कुल किसी लता की तरह उठकर मुझसे लिपट गई। मैंने 
उसे अपनी बाहों में भर लिया। प्रिया ने भी अपनी बाहें मेरे गले में डाल दी।
अब हम खड़े होकर एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर एक दूसरे के शरीर को 
मसलने लगे। 



प्रिया की बड़ी बड़ी कोमल चूचियाँ मेरे सीने में गड़ सी गईं और मुझे बहुत मज़ा 
आने लगा। मैं अपने सीने को और भी ज्यादा चिपका कर उसकी चूचियों को रगड़ने 
लगा और अपने होंठ मैंने उसकी गर्दन पर टिका दिए। 



मैंने कहानियों में पढ़ा था कि लड़कियों के गर्दन और गले पर चुम्बन करने से 
उनकी चूत और भी गीली हो जाती है और उन्हें बहुत मज़ा आता है। मैंने अपने 
होठों को उसकी गर्दन पर धीरे धीरे फिरना शुरू किया। प्रिया की साँसें और भी
तेज़ हो गईं और वो मचलने सी लगी। मैंने तभी अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ 
पर ऊपर नीचे करना शुरू हुआ और मुझे अब यकीन हो गया की उसने सचमुच ब्रा नहीं
पहनी थी। 



मैं यह महसूस कर जोश में आ गया और अपना हाथ आगे ले जाकर उसकी चूचियों को 
पकड़ लिया। जैसे ही मैंने उसकी चूचियों को दबाया उसने मेरे होठों पर अपने 
होठों से काट लिया। 



मैं मस्त होकर उसकी चूचियों का मर्दन करने लगा। क्या चूचियाँ थीं। जैसा मैं
सोच रहा था उससे भी कहीं ज्यादा मस्त और अमरुद की तरह कड़ी। मैं धीरे से 
अपना एक हाथ नीचे करके उसके टॉप को ऊपर उठाने लगा। प्रिया को एहसास हुआ तो 
उसने अपने हाथ मेरे उस हाथ पर रख दिया जैसे वो नहीं चाहती हो कि मैं उसको 
नंगी करूँ। 



"रोको मत प्रिया, मैं पागल हो रहा हूँ...प्लीज मुझे देखने दो। मैं अब 
बर्दाश्त नहीं कर सकता !" मैंने उसको चूमते हुए कहा और अपने हाथों को ऊपर 
सरकाने लगा। प्रिया ने अपना हाथ हटा लिया और वापस मेरे होठों को चूमने लगी।




मैंने उसकी एक चूची को बाहर निकाल लिया, कंप्यूटर की हल्की रोशनी में उसकी 
दुधिया चूची और उस पर किशमिश के दाने के जैसी निप्पल को देखते ही मैं बेचैन
हो गया। 



मैंने अपना हाथ आगे बढ़ा कर लाइट जला दी। कमरे में पूरी रोशनी फ़ैल 
गई...प्रिया ने झट से मुझे खुद से अलग कर लिया और अपने टॉप को नीचे कर 
लिया। 



"प्लीज सोनू, लाइट बंद कर दो ...मुझे शर्म आएगी...प्लीज बंद कर दो !" प्रिया जोर जोर से सांस लेते हुए मुझसे कहने लगी। 



"नहीं मेरी जान, प्लीज ऐसा मत करो...मुझे तुम्हारी पूरी खूबसूरती देखनी 
है...मैं तुम्हारे जवान जिस्म को जी भर के देखना चाहता हूँ।" मैंने प्रिया 
को वापस अपनी तरफ खींचते हुए कहा। 



प्रिया मेरी बाहों में फिर से समा गई। तभी उसकी नज़र सामने दरवाज़े पर गई... 
दरवाज़ा पूरा खुला हुआ था। कोई भी हमें उस हालत में देख सकता था। प्रिया ने 
मुझे धक्का दिया और मैं अलग हो गया। मैं समझ नहीं पाया कि क्या हुआ और उसकी
तरफ देखने लगा। उसने इशारे से मुझे दरवाज़े की तरफ दिखाया तो मुझे होश आया 
कि मैं कितना बेवक़ूफ़ हूँ जो हर वक़्त दरवाज़ा खुला ही छोड़ देता हूँ। 



मैं भाग कर गया और दरवाज़ा बंद करके आया। 



अब तक हमें काफी देर हो चुकी थी और घड़ी में साढ़े ग्यारह बज चुके थे। मेरे 
मन में एक डर आया कि कहीं सिन्हा आंटी प्रिया को बुलाने न चली आयें। लेकिन 
उस वक़्त मुझे प्रिया की चूचियों और चूत के अलावा कुछ और नहीं सूझ रहा था। 
मैंने मन में सोचा कि भाड़ में जाए सब और फिलहाल इन हसीन पलों का लुत्फ़ 
उठाया जाये। 



मैं भागकर वापस प्रिया की तरफ लपका और उसको अपनी बाहों में भर कर चूम लिया।
मैंने उसे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी आँखों में देखते हुए उसके 
टॉप को अपने दोनों हाथों से ऊपर करने लगा। जैसे जैसे उसका टॉप ऊपर हो रहा 
था उसके बदन की चिकनाहट मेरे आँखों के सामने चमकने लगी थी। 



उसने अपना स्कर्ट अपनी नाभि से बहुत नीचे पहन रखा था इसलिए उसकी गोल हसीन 
नाभि दिखाई दे रही थी। मैंने उसका टॉप अब उसकी चूचियों से ऊपर तक उठा दिया 
और उसे पूरा उतारने लगा। 



"पूरा मत उतारो... कोई आ जायेगा तो मुश्किल हो जाएगी।" प्रिया ने मुझे रोकते हुए कहा। 



मैंने भी उसकी बात को ठीक समझा और उसके टॉप को चूचियों के ऊपर तक रहने 
दिया। मैंने उसको देखकर एक कातिल मुस्कान दी और अपनी नज़रें उसकी चूचियों पर
लगा दी। 



"हम्म्म्म...क्या मस्त हैं !"...मेरे मुँह से बस इतना ही निकल पाया और मैं आँखें फाड़ फाड़ कर उसकी चूचियों का दर्शन करने लगा। 



"देख लो जी भर के...तुम्हारे लिए ही इन्हें आज ब्रा में कैद नहीं किया 
है।"..प्रिया ने एक मादक अदा के साथ अपनी दोनों चूचियों को अपने हाथों से 
उठा कर मुझे दिखाते हुए कहा। 



मैं उसकी हरकतों से हैरान था। मैं अब तक उसे नादान ही समझता था। लेकिन अब 
पता चल रहा था कि वो पूरी तैयार माल है और उसे लड़कों को पागल बनाना आता है।




उसकी चूचियाँ मेरे दबाने की वजह से लाल हो गईं थीं और उसके निप्पल एकदम तन 
से गए थे। मेरी जुबान अपने आप बाहर आ गई और मैंने अपनी जुबान उसकी निप्पल 
पर रख दिया। उसके निप्पल का स्वाद अजीब सा था, जैसा भी था मुझे मदहोश कर 
रहा था। मैंने अपनी जुबान बारी बारी से उसके दोनों निप्पल पर फिराई और फिर 
उसे अपने होठों के बीच ले लिया और किसी चॉकलेट की तरह चूसने लगा। 



प्रिया को इतना मज़ा आ रहा था कि बस पूछो मत। उसकी सिसकारियाँ तेज़ होती जा 
रही थीं और वो मेरा सर अपने हाथों से पकड़ कर मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ 
फिराने लगी। 



मैं अपने पूरे जोश में भर कर उसकी एक चूची को अपने हाथों से मसलने लगा और 
एक हाथ नीचे ले गया। मैंने सोचा की उसे दोहरा मज़ा देते हैं जैसा मैं कई 
ब्लू फिल्मों में देख चुका था। 



मैंने अपनी एक हथेली से उसकी चूत को स्कर्ट के अन्दर से ही सहलाना शुरू 
किया। उसने मज़े में अपनी टाँगें थोड़ी चौड़ी कर लीं ताकि मैं अच्छे से उसकी 
चूत को सहला सकूँ। 



अब मेरे दोनों हाथों में मज़े ही मज़े थे। एक हाथ उसकी चूचियों को सहला रहा 
था तो दूसरा उसकी योनि के गीलेपन को महसूस कर रहा था। और मुँह में तो उसका 
चुचूक था ही। कुल मिलाकर मैं अपने होश खोकर पूरा मज़ा ले रहा था। 



अब मैंने उसकी दूसरी चूची को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। पहले वाली 
चूची को अब हाथों से मसल रहा था। उसकी चूचियाँ अब अपना रंग बदल रही थीं। 
मतलब और भी ज्यादा लाल हो गई थीं। मैंने इतनी जोर जोर से चूसा था कि प्रिया
अब दर्द से कराहने लगी थी। 



मैंने अब अपना ध्यान पूरी तरह से उसकी चूत पर लगाया और अपने दोनों हाथों से
उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया। कमरे की दूधिया रोशनी ने उसकी चूत को और भी 
हसीन बना दिया था। चूचियों को चूस चूस कर को मैंने रस पिया था वो सब उसकी 
चूत देखकर सूख गया। मैंने अपने होठों पर अपनी जुबान फिराई और अपने होठों को
उसकी चूत के दाने के ऊपर रख दिया। 



"आऊऊऊऊ...हम्मम्मम्म...सोनू...ये क्या कर रहे हो, मैं मर जाऊँगी...प्लीज 
ऐसा मत करो...ह्म्म्मम्म..." प्रिया की हालत एक बिन पानी की मछली की तरह हो
गई और उसके पाँव कांपने लगे। उसने अपना हाथ मेरे सर पर रखा और मेरे सर को 
अपनी चूत पर दबा दिया मानो वो मुझे पूरा अन्दर घुसा लेना चाहती हो। 



जिन लड़कियों या औरतों ने अपनी चूत पहली बार चटवाई होगी उन्हें पता होगा वो एहसास। 



खैर, मैंने अपनी जुबान निकाल कर ऊपर से नीचे तक उसकी चूत को चाटना शुरू 
किया। उसकी मुनिया की दरार बंद थी, मतलब वो अब तक चुदी नहीं थी...या फिर 
चुद भी गई होगी...क्यूंकि उसकी हरकतें और अदाएं उस पर शक करने के लिए काफी 
थी। 


RE: आंटी और उनकी दो खूबसूरत बेटियाँ - sexstories - 06-12-2017

मैंने उसका स्कर्ट छोड़ कर उसके चूत को अपनी दो उँगलियों से फैला दिया और अन्दर के गुलाबी भाग को अपनी जुबान से चाटने लगा... 



प्रिया ने अपन स्कर्ट अब अपने हाथों से ऊपर कर दिया और सिसकारियाँ लेकर मज़े लेने लगी। 



"हाँ...बस ऐसे ही सोनू... ह्म्म तुमने मुझे पागल कर दिया है...हाँ...ऐसे ही
चाटो...उफफ्फ्फ्फ़...और अन्दर तक चाटो...घुस जाओ पूरा मेरी चूत 
में...ह्म्म्म मेरे रजा...आज मुझे ज़न्नत दिखा दो..." 



प्रिया के मुँह से अचानक 'चूत' शब्द सुनकर मैं सन्न रह गया। मुझे यह उम्मीद
नहीं थी कि वो इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करेगी या वो जानती भी 
होगी...कसम से दोस्तों, ये लड़कियाँ सब जानती हैं...जरुरत है तो बस एक बार 
उन्हें छेड़ देने की ! फिर देखो... 



"ओह्ह्ह्हह...मां...मुझे कुछ हो रहा है सोनू...प्लीज कुछ करो...मैं मर 
जाऊँगी।" प्रिया ने मेरे बाल जोर से खींचते हुए मेरा मुँह अपनी योनि से हटा
दिया और मेरी आँखों में देखने लगी। उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कोई भूखी
शेरनी हो। 



मैंने उसका हाथ पकड़ा और वापस अपना मुँह उसकी चूत से लगा दिया और उसकी चूत 
की खुशबू लेते हुए अपना काम चालू कर दिया। उसकी आवाजें बढ़ने लगी थीं... 
मुझे डर लगने लगा कि कहीं कोई सुन न ले। लेकिन मैं रुका नहीं और चूत की 
चुसाई जारी रखी। 



"ह्म्म...ह्म्म... ह्ह्मम्म्म्म...और और और...हाँ...चाटो..." प्रिया की 
आवाज़ तेज़ हो गई और उसके पाँव और ज्यादा कांपने लगे। उसने अपना हाथ मेरे 
हाथों से छुड़ा कर मेरा सर पकड़ लिया और जोर जोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी...




"आआअह्ह ह्ह...हम्मम्मम्म...बस सोनू...अब बस..." इतना कहते कहते उसने अपनी चूत से ढेर सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया।
मैंने उसका हाथ पकड़ा और वापस अपना 
मुँह उसकी चूत से लगा दिया और उसकी चूत की खुशबू लेते हुए अपना काम चालू कर
दिया। उसकी आवाजें बढ़ने लगी थीं... मुझे डर लगने लगा कि कहीं कोई सुन न 
ले। लेकिन मैं रुका नहीं और चूत की चुसाई जारी रखी। 



"ह्म्म...ह्म्म... ह्ह्मम्म्म्म...और और और...हाँ...चाटो..." प्रिया की 
आवाज़ तेज़ हो गई और उसके पाँव और ज्यादा कांपने लगे। उसने अपना हाथ मेरे 
हाथों से छुड़ा कर मेरा सर पकड़ लिया और जोर जोर से अपनी चूत पर रगड़ने लगी...




"आआअह्ह ह्ह...हम्मम्मम्म...बस सोनू...अब बस..." इतना कहते कहते उसने अपनी चूत से ढेर सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। 



जिंदगी में पहली बार किसी चूत का स्वाद चखा मैंने, थोड़ा नमकीन, थोड़ा खट्टा...एक मस्त सा स्वाद था... 



मैंने एक एक बूँद अपनी जुबान से चाट कर पी लिया। लेकिन मैंने अब भी उसकी चूत को चाटना छोड़ा नहीं था। 



प्रिया ने मेरा मुँह हटा कर अपने हाथों से अपनी चूत को ढक लिया और अचानक से नीचे बैठ गई। 



उसके माथे पर पसीने की बूँदें साफ झलक रही थीं... उसने मेरी तरफ देख और 
मेरे होठों पर लगे उसके चूत के कामरस को देखा और शर्म से अपनी आँखें नीचे 
कर लीं। मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके गालों पर पप्पी करने
लगा। वो अब भी जोर जोर से साँसे लेते हुए मुझे अपनी तरफ खींच रही थी। 



मैं अचानक उसे बैठा हुआ छोड़ कर खड़ा हो गया। मेरे खड़ा होते ही मेरा विकराल 
लण्ड जिसने की पैंट में तम्बू बना रखा था, उसके सामने ठीक उसके मुँह के पास
आ गया। 



प्रिया ने देरी न करते हुए उसे पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया और दबाने लगी। 
उसने एक बार अपनी नज़र उठा कर ऊपर देखा और मेरी आँखों में देखकर एक मुस्कान 
दी। उसकी वो मुस्कान मैं आज तक नहीं भूला। 



उसने मेरा लण्ड छोड़ कर अपने हाथों से मेरा शॉर्ट्स नीचे खींच दिया। लण्ड 
पूरा अकड़ा हुआ था इसलिए उसकी इलास्टिक लण्ड पर तक गई और नीचे नहीं आ पाई। 
प्रिया ने ऊपर से हाथ डाल कर मेरे लण्ड को पकड़ा और फिर धीरे से उसे आजाद कर
दिया। 



"ऊफ्फ...!" प्रिया के मुँह से फिर से वैसे ही आवाज़ बाहर आई जैसे उसने दोपहर में मेरा लण्ड देखकर कहा था। 



मेरा लण्ड लोहे की तरह कड़क हो चुका था और उसकी नसें साफ़ साफ़ दिखाई दे रही 
थीं...प्रिया ने उसे अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और गौर से देखने लगी। 
लण्ड का सुपारा अपनी चमड़ी के अन्दर बंद था लेकिन आधा खुला हुआ था और उसके 
छेद पर कामरस की कुछ बूँदें उभर आईं थी। प्रिया गौर से उस रस को देख रही 
थी। 



मेरा जी कर रहा था कि पूरा लण्ड उसके मुँह में उतार दूँ, लेकिन मैं कोई 
जबरदस्ती या जल्दबाजी नहीं करना चाहता था वरना हाथ में आई हुई चिड़िया उड़ 
सकती थी। 



तभी मेरी कल्पना के परे प्रिया ने अपने होठों से मेरे लण्ड के सुपारे पर आई
बूँद को चूम लिया और दनादन उस पर पप्पियाँ देने लगी। मैं इस अदा से इतने 
जोश में आगे कि मेरे लण्ड ने दो तीन और बूँदें बाहर निकाल दी जिसे उसने 
प्यार से चाट लिया। 



प्रिया ने अपनी जीभ बाहर निकली और मेरे लण्ड के ठीक छेद पर रख दिया... 



"ओह्ह्ह्हह...प्रिया !" 



मेरे मुँह से बस इतना ही निकल सका और मैंने अपना एक हाथ उसके सर पर रख 
दिया। प्रिया ने अपनी जुबान से मेरे लण्ड की लम्बाई नापनी शुरू कर दी। 



कसम से कहता हूँ दोस्तो, जो हरकतें वो कर रही थी वो बस एक खेली खाई लड़की या औरत ही कर सकती थी। मैं उसकी इस अदा पर हैरान था। 



उसने धीरे धीरे मेरा लण्ड अपने होठों पर रगड़ना शुरू किया और कभी कभी अपना 
मुँह खोलकर अन्दर लेने की कोशिश भी करने लगी। लण्ड का आकार बड़ा था इसलिए 
उसे थोड़ी परेशानी हो रही थी लेकिन उसने अपना काम जरी रखा और चाटते सहलाते 
हुए लण्ड थोड़ा सा अपने मुँह के अन्दर डाल लिया। मेरा सुपारा अब उसके मुँह 
में था और वो हल्की हल्की ह्म्म की आवाज़ के साथ आगे पीछे करने लगी। 



मैं जितना हो सके बर्दाश्त करते हुए अपना लण्ड चुसवा रहा था और यह कोशिश कर
रहा था कि वो मेरा पूरा लण्ड अपने मुँह में भर ले। मैंने इसी कोशिश में 
अपने लण्ड को एक झटका दिया और मेरा आधा लण्ड अन्दर चला गया। 



"गूं...गूं...हम्म्म्म..." ऐसा कहकर उसने लण्ड चूसना छोड़ कर मेरी तरफ देखा 
और झटके से लण्ड को बाहर निकाल दिया... उसकी आँखें बड़ी बड़ी हो गईं थीं..। 



"जान ही निकल दोगे क्या...एक तो इतना बड़ा लण्ड पाल रखा है और ..." उसने बड़ी अदा के साथ लण्ड को हिलाते हुए मुझसे कहा। 



"नहीं मेरी रानी, तुम तो मेरी जान हो, मैं तुम्हारी जान कैसे ले सकता हूँ। 
प्लीज थोड़ा और चूसो ना..." इतना कहते हुए मैंने अपना लण्ड उसके मुँह के पास
किया। 


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