बहू नगीना और ससुर कमीना - Printable Version

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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

उधर शाम की चाय मालिनी और राजीव भी पी रहे थे।

राजीव: और बताओ क्या क्या किया मम्मी के यहाँ? 

मालिनी: पापा बताया था ना बहनों के साथ शॉपिंग की और फ़िल्म देखी। शिवा नहीं जा पाए थे। उनका सर दर्द हो रहा था। 

राजीव अनजान बन कर : तो उसे घर में अकेला छोड़ गए थे। सरला भी तो तुम्हारे साथ गयी होगी ना ?

मालिनी: नहीं, मम्मी नहीं गयी थीं । 

राजीव : ओह तो तुम शिवा को सरला के पास अकेले छोड़ गयी थी? ये क्या किया बेटा तुमने? तुम अपनी मम्मी को जानती हो ना कि वो कितनी चुदासी है? वो ज़रूर शिवा से चुदवा ली होगी। 

मालिनी का मुँह हैरानी से खुला ही रह गया। वो बोली: छी पापा आप कितनी गंदी बात कहते हैं। शिवा ऐसे नहीं है और ना ही मम्मी कभी उनसे चुदवाएँगी। ये सब आपकी कोरी गंदी कल्पना है। 

राजीव: अरे बेटा मैंने शिवा को उस दिन पार्टी में सरला की चूचियों को घूरते हुए देखा था। अगर मौक़ा मिला तो वो उसे चोदे बिना नहीं रहा होगा। 

मालिनी: पापा आप भी कुछ भी बोले जा रहे हो। मैं नहीं मान सकती। वह ग़ुस्से से पैर पटक कर चली गयी। 


राजीव मन ही मन मुस्कुराया और सोचा कि तीर निशाने पर लगा है। जल्दी ही बात आगे बढ़ाऊँगा। 

रात को शिवा के साथ दोनों ने खाना खाया। शिवा और मालिनी अपने कमरे में आ गए। 

जल्दी ही दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे और फिर चूमने सहलाने के बाद शिवा उसके ऊपर आकर उसे चोदने लगा। जब दोनों मस्ती से चुदाई कर रहे थे तभी मालिनी उसके कान को काट कर बोली: आऽऽहहह क्या मस्त चोओओओओओद रहे हो हाऽऽययय जाऽऽऽऽऽऽऽन । अच्छा ये तो बताओ कि क्या आप मम्मी के साथ भी ये सब किए थे जब हम फ़िल्म देख रहे थे। 

शिवा तो जैसे आसमान से गिरा। वो हड़बड़ाकर बोला: क्या फ़ालतू बात कर रही हो। 

तभी मालिनी ने महसूस किया कि उसका लण्ड नरम पड़ गया है। वो सोची कि इसकी क्या वजह हो सकती है। क्या सच में वह मम्मी को चोदा है। इस लिए घबरा गया है। या मैंने इतनी ग़लत बात कह दी है कि वो अपसेट होकर अपनी उत्तेजना गँवा बैठा है। पता नहीं क्या सच है और क्या झूठ? 

शिवा अब उसके ऊपर से उतरकर बग़ल में लेटकर बोला: क्या पूरा चुदाई का मूड ख़राब कर दिया। आख़िर ये बात तुमको सूझी कैसे? वो मन ही मन डर भी रहा था कि इसको शक कैसे हो गया? 

मालिनी: अरे मैं तो मस्ती कर रही थी और आप इतना सीरीयस हो गए? वो सोची कि इसे ये तो नहीं बता सकती कि ये सब पापा के दिमाग़ की ख़ुराफ़ात है। 

मालिनी अब उठ कर सॉरी बोली और उसका लण्ड सहलायी और फिर चूसने लगी। जल्दी ही वो फिर से मूड में आ गया और उसका मस्त खड़ा हो गया। वो अब फिर से उसके ऊपर आकर मालिनी की ज़बरदस्त चुदाई में लग गया। फिर दोनों झड़कर सुस्ताने लगे। 

शिवा: जान ये मम्मी वाली बात तुम्हारे दिमाग़ में आयी कैसे? 

मालिनी बात बना कर बोली: उस दिन पार्टी में आप मम्मी की चूचियों को घूर रहे थे। तो मैंने सोचा कि कहीं मौक़ा मिलते ही आपने उनका मज़ा तो नहीं ले लिया ?

शिवा: मेरा छोड़ो तुमको अपनी मम्मी पर विश्वाश नहीं है क्या? 

मालिनी थोड़ी सी गम्भीर होकर: देखो आज आपको एक बात बताऊँगी किसी को कहिएगा नहीं।

शिवा: क्या बात? 

मालिनी: मम्मी पापा के जाने के बाद ताऊजी से सम्बंध बना चुकी थीं । घर में सबको पता है पर सब ऐसा दिखाते हैं जैसे किसी को भी पता नहीं है। 

शिवा बनते हुए : ओह ऐसा क्या? वो सोचा कि ये तो उसको पता ही है। 

मालिनी: हाँ मैंने दोनों को कई बार चुदाई करते देखा है। इसीलिए मैं सोची कि कहीं वो आपसे भी तो नहीं चुदवा ली? 

शिवा हँसकर: अच्छा अगर वो सच में मुझसे भी चुदवा लेती तो तुम क्या करती? 

मालिनी हँसकर : तो मैं आपसे बदला ले लेती। 

शिवा: वो कैसे ? 

मालिनी: आप मेरी मम्मी को चोदे तो मैं किससे चुदवाऊँगी बदला लेने के लिए? बताइये । 

शिवा सोचकर: ओह भगवान । तो क्या तुम वही सोच रही हो जो मैं सोच रहा हूँ। 

मालिनी: मुझे क्या पता आप क्या सोच रहे हो? 

शिवा: यही कि बदला तो तभी पूरा होगा जब तुम मतलब- याने कि - ओह मैं कैसे कहूँ? 

मालिनी: मैं बोल देती हूँ जब मैं पापा से चूदूँ । यही ना। 

शिवा सन्न रह गया और हैरानी से मालिनी को देखने लगा। 

फिर वो बोला : हाँ बदला तो यही हो सकता है। पर- क्या - तुम-- 

मालिनी: आप बर्दाश्त कर पाओगे? मैं आपके पापा से चुदवाऊँ? 

शिवा चुप होकर उसको ध्यान से देखने लगा। दोनों अभी भी चुदाई के बाद नंगे ही थे। अचानक उसने देखा कि मालिनी के निपल्ज़ अब पूरे तन गए थे। उधर मालिनी ने भी देखा कि शिवा का लण्ड अब फिर से फ़नफ़ना रहा था। 

दोनों सोचने लगे कि मालिनी का पापा से चुदवाने का ख़याल भी दोनों को ही उत्तेजित कर रहा है। इसका मतलब? 

शिवा मालिनी को लुढ़काया और वो पेट के बल हो गयी। वो उसके पीछे जाकर उसको कमर से पकड़कर घोड़ी बनाया। अब उसके उसकी बुर में ऊँगली डाली और वो स्तब्ध रह गया क्योंकि वहाँ तो जैसे रस की धार निकल रही थी। इसका क्या मतलब है वो सोचा। क्या पापा से चुदवाने के ख़याल से ही वो उत्तेजित हो उठी है। वो ख़ुद बहुत उत्तेजित होने लगा। उसका लण्ड बहुत कड़ा हो गया था और दर्द कर रहा था। उसने अपना लंड उसकी बुर में एक झटके में डाला। बुर गीली थी गपाक से उसको निगल ली। अब वो जैसे पागल हो गया हो वैसे उसकी ज़बरदस्त धक्कों के साथ चुदाई करने लगा। मालिनी की चीख़ें निकलने लगीं: आऽऽऽऽऽऽहहह और जोओओओओओओओर सेएएएएए चोओओओओओदो। 

शिवा भी बिना रुके धक्के मारे जा रहा था। मालिनी को भी लगा कि शायद इतनी भयानक चुदाई शिवा ने आजतक नहीं की है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मज़ा आ रहा था। क्या मस्त चुदक्कड हो गया है शिवा। आज तो लगता है मेरी बुर सुज़ा कर ही मानेगा। जल्दी ही दोनों चिल्लाकर झड़ने लगे। फिर दोनों लस्त होकर पड़ गए। और नींद की आग़ोश में समा गए। 

उधर सरला के घर में रात का खाना सबने खाया। मगर राकेश नहीं आया। श्याम ने भी पूछा: राकेश नहीं दिख रहा? 

सरला: वो अभी आराम कर रहा है। मैं उसे खिला दूँगी बाद में। वो श्याम को क्या बताती कि उसका बेटा ज़िद में अड़ा है कि वो खाना तभी खाएगा जब वो अपने बेटे से चुदने के लिए राज़ी होगी। कोई सुनेगा तो क्या कहेगा। 

सब खाना खाकर अपने अपने कमरे में चले गए। श्याम ने सरला को इशारे से बताया कि आज चुदाई का मूड है। सरला मुस्कुरा कर हाँ कर दी। 
अब सरला ने एक थाली में खाना सजाया और राकेश के कमरे में गयी। वो अभी भी लेटा हुआ था। उसका चेहरा बुरी तरह से कमज़ोर दिख रहा था। माँ का दिल कचोट गया। वो बिस्तर पर बैठ कर उसका सर सहला कर बोली: चल अब पागलपन छोड़ और खाना खा ले। 

राकेश : नहीं मम्मी मैं नहीं खाऊँगा। 

सरला: मैं तेरे ताऊ जी को बुलाऊँ? वो ही तुझे ठीक करेंगे। 

राकेश: मम्मी आप उनको कहोगी क्या ये तो सोच लो। 

सरला ग़ुस्सा दिखाकर: मुझसे बुरा कोई नहीं होगा। चल उठ और खाना खा। 
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

राकेश उठकर बैठा और बोला: मम्मी लो मैंने अपने गाल आपके पास किया । मारो थप्पड़ ज़ोर से । 

अब सरला रुआंसी होकर: बेटा क्यों तंग कर रहा है अपनी माँ को। प्लीज़ खाना खा ले । ऐसी ज़िद नहीं करते बेटा। 

राकेश: मम्मी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। मैं अपने बिना नहीं रह सकता । आप हाँ कर दो मैं अभी खाना खा लूँगा। 

सरला: मेरे हाँ करते ही तू मेरे ऊपर टूट पड़ेगा । हैं ना ?

राकेश: नहीं मम्मी आप बस हाँ कर दो। फिर आप जब कहोगी और जैसा कहोगी वैसा हो होगा। 

सरला:मतलब हाँ कहने पर भी तू मुझे थोड़ा वक़्त देगा ना? 

राकेश: मम्मी बिलकुल । आप जब तक नहीं चाहोगी मैं आपको नहीं चोदूँगा। पर प्यार तो हम कर हो सकते हैं ना? 

सरला : अच्छा चल मैंने हाँ की। पर तुझे मेरे को मानसिक रूप से तय्यार होने का समय देना होगा। 

राकेश ख़ुशी से उछल कर मम्मी की गोद में लेट गया। वह उसके बालों में हाथ फेरी और बोली: बहुत ज़िद्दी हो गया है तू। अपनी बात आख़िर मनवा कर ही माना। चल अब खाना खा। 

राकेश : मम्मी आप ही खिलाओ आज। अब वह अपनी मम्मी की साड़ी का पल्लू गिराया और उसकी ब्लाउस में से बाहर झाँकती छातियों को चूमकर मस्त हो गया।

सरला हँसकर: अच्छा अब तबियत ठीक हो गयी। चल बदमाश ठीक है मैं ही खिला देती हूँ। फिर वो अपने बेटे को प्यार से खिलाने लगी। वो भी सुबह से भूका था इसलिए जल्दी जल्दी खाने लगा। मालिनी ने उसे पकड़कर उठाया और बिठाकर खिलाने लगी। उधर वो उसकी साड़ी के ऊपर से जाँघें दबाने लगा, और बोला : मम्मी आपकी जाँघें कितनी गद्दीदार हैं। 

वो हँसकर: अच्छा, और क्या गद्दीदार है मेरा ?

राकेश: ये मम्मी । कहते हुए वो उसकी छातियाँ दबाने लगा। 

सरला ने उसका हाथ वहाँ से नहीं हटाया और कहा: अच्छा ये बता कि तू मेरी छातियाँ ऐसे दबाएगा तो मैं परेशान नहीं होऊँगी क्या? और क्या तू मुझे परेशान करना चाहता है? 

राकेश उसी समय उसकी छातियों से हाथ हटाया और बोला: नहीं मम्मी मैं आपको बिलकुल परेशान नहीं करना चाहता। मैं तो बस आपको प्यार करना चाहता हूँ। 

सरला: अगर तू मुझे सच्चा प्यार करता है तो चल जल्दी से खाना खा ले । और मुझे जाने दे । 

राकेश: मम्मी आज मेरे साथ सो जाइए ना प्लीज़। मैं आपको नहीं चोदूँगा। पक्का। 

सरला: अरे तू तो नहीं चोदेगा मगर तेरे ताऊ तो अभी इशारा करके गये हैं कि वो आज आयेंगे चुदाई के लिए। अब तुझसे क्या छिपाना। तुम तो सब जानते हो। 

राकेश: ओह मम्मी कोई बात नहीं। मैं तो बस आपसे चिपक कर सोना चाहता था। चलो कल सही। आप जाओ ताऊ जी के साथ आपका रिश्ता बहुत पुराना है। मैंने कई बार आप दोनों को चुदाई करते देखा है ।

सरला: सच तू अब बड़ा हो गया है। मुझे तुझपर गर्व है। अच्छा अब चलती हूँ। उसके खाने के ख़ाली बर्तन उठाए और झुक कर बेटे का गाल चूमने लगी। पर बेटा कहाँ कम था , उसने अपने गाल घुमाए और अपने होंठ अपनी मम्मी के होंठ पर रख दिए। एक लम्बे चुम्बन के बस सरला अलग हुई और हाँफते हुए बाहर चली गयी। जाते हुए राकेश का खड़ा लण्ड इसकी तेज़ निगाहों से नहीं बच सका। 

उस रात सरला के कमरे में श्याम करीब रात को ११ बजे आया और उसने जमकर चुदाई की। राकेश चुदाई देखने के लोभ से अपने आप को वंचित नहीं रख सकता था । सो वह खिड़की से पूरी चुदाई देखा ।आज श्याम उसे घोड़ी बनाकर पीछे से चोद रहा था। मम्मी की बड़ी सी गाँड़ में श्याम की जाघें थप्प थप्प कर के आवाज़ निकाल रही थी। वह उसकी चूचियाँ भी दबाए जा रहा था। राकेश मज़े से भर गया और मूठ्ठ मारकर अपनी भूक़ शांत किया। वहाँ बिस्तर पर मम्मी पेट के बल लेटी थी और उसकी बड़ी गोरी गाँड़ बहुत मस्त लगी राकेश को। श्याम का लण्ड अब सिकुड़ चुका था। वो उठा और बोला: सरला मैं अब जाता हूँ जान। 

राकेश चुपचाप वहाँ से हट गया और ताऊ को बाहर जाते देखा। फिर वो खिड़की से अंदर झाँका और वहाँ मम्मी नहीं थी। शायद बाथरूम गयी होंगी। वो चुपचाप अंदर कमरे में पहुँच कर बिस्तर पर बैठ कर मम्मी के वापस आने का इंतज़ार करने लगा। सरला बाहर आइ और वो सिर्फ़ नायटी में थी। उसकी हिलती बड़ी चूचियाँ इस बात की गवाही दे रही थी कि उसने ब्रा नहीं पहनी है। वो राकेश को देखकर बोली: बेटा, तू इस समय यहाँ क्या कर रहा है? वो उसके पास आकर बैठी। 

राकेश: मम्मी आपकी चुदाई देख रहा था। मैं तो बचपन से ही आपकी चुदाई देख रहा हूँ। मुझे बहुत अच्छा लगता है। 

सरला: पागल है तू। एक ही चीज़ को बार बार देखने में क्या मज़ा आता है तुझे? 

राकेश उसकी गोद में लेट गया और बोला: मम्मी मैं तो आपके बदन का दीवाना हूँ। अब वो नायटी के ऊपर से उसकी चूचियों को सहलाने लगा और बोला: मम्मी दुद्दु पिलाओ ना। 

सरला: चल हट बदमाश। इतना बड़ा हो गया है। अभी भी माँ का ही दूध पीना है। कोई गर्ल फ़्रेंड ढूँढ ले और उसका दूध पी। 

राकेश ने देखा कि मम्मी उसका हाथ अपनी चूचियों से हटाया नहीं था। इसलिए वो अब उसके निपल्ज़ को दबाया। सरला: आऽऽऽऽऽह क्यों तंग कर रहा है बेटा। जा अब सो जा। मैं भी थक गयी हूँ। 

राकेश: मम्मी चुदाई से थकावट हो जाती है क्या? 

सरला: हाँ बेटा मुझे अब थकावट हो जाती है। मेरी उम्र भी तो हो रही है। 

राकेश: मम्मी अभी तो आप मस्त जवान हो। उफफफ क्या मस्त चूचियाँ हैं आपकी। मम्मी एक बार चुदवा लो ना अभी? प्लीज़। 

सरला ने देखा कि उसका लोअर पूरी तरह से तन गया था। वो उसके उभार को देखकर बोली: देख तू तो अपना खड़ा कर के बैठ गया। 

राकेश: मम्मी तभी तो कह रहा हूँ कि चुदवा लो ना। 

सरला: अच्छा चल बाहर निकाल । चूस देती हूँ। चुदाई के लिए मैं अभी भी तय्यार नहीं हूँ। माँ बेटे में चुदाई नहीं हो सकती। 

राकेश अपना लोअर और चड्डी नीचे किया और सरला उसके लण्ड को प्यार से देखी और बोली: बाप रे कितना बड़ा हो गया है तेरा। ये कहकर उसने प्यार से मुट्ठी में भर लिया। और उसको सहलाने लगी। फिर उसके टोपी के ऊपर की चमड़ी पीछे की और मोटे सुपाडे को देखकर मस्त होकर उसे अंगूठे से सहलाई। 

राकेश के सपने मानो साकार होने लगे थे। वो मस्ती में आकर मम्मी की गोदे में लेटे हुए नायटी के ऊपर से उसके दूध को मुँह में लेने लगा। अब सरला बोली: चल बिस्तर पर लेट तभी तो चूसूँगी। अच्छा ये तो बता कि किसी लड़की के साथ मज़ा लिया है या नहीं? 

राकेश: मम्मी आप पहली औरत हो जिसने इसे पकड़ा है। मैं तो आपका ही दीवाना हूँ । मुझे कोई लड़की नहीं चाहिए। 

अब वह बिस्तर पर लेट गया। सरला ने उसके लौड़े पर अपना मुँह झुकाया। और उसकी झाँटे सहलाते हुए उसके सुपाडे को चूमने लगी। राकेश आऽऽऽऽहह कर उठा। अब सरला ने उसके पूरे लम्बाई को चूमा और फिर उसके बालों से भरे बॉल्ज़ को भी चूमी। अब वो अपने होंठ और जीभ से उसके सुपाडे को चूसने लगी। अब राकेश की -आऽऽऽह मम्मी - निकल गयी। अचानक उसने लंड को पूरा मुँह में लेकर चूसना शुरू किया। अब वो उसे डीप थ्रोट देने लगी। राकेश आऽऽऽऽहहह मम्मीइइइइइइइ मैं तो गयाआऽऽऽऽऽऽऽ। अब वो प्यासी औरत अपने बेटे का कामरस पीती चली गयी। राकेश आँखें फाड़े मम्मी को अपना वीर्य पीते देख रहा था और झटके मार मार कर झड़े जा रहा था। बाद में वो उसके लण्ड के एक एक हिस्से को प्यार से चाट कर साफ़ की। जब वो मुँह ऊपर उठाई तो उसके होंठों में कुछ बूँदें लगी हुईं थीं जिसे वो हाथ से साफ़ की और फिर हाथ को भी चाट ली। राकेश मज़े से लस्त होकर पड़ा रहा। सरला उसकी ओर देखी और मुस्कुराती हुए बोली: मज़ा आया? 

राकेश: मम्मी इससे ज़्यादा मज़ा आज तक कभी किसी चीज़ में नहीं आया। थैंक्स । 

सरला हँसती हुई बाथरूम चली गयी। अब वो भी अपना लोअर ऊपर किया। मम्मी के आने पर वो उससे लिपट गया और दोनों ने एक दूसरे को बहुत प्यार किया। फिर सरला बोली: चल अब जा अपने कमरे में देर हो गयी है। कल कोलेज भी जाना है ना? 

राकेश : ठीक है मम्मी । कहकर वहाँ से चला गया। सरला भी अब लेटकर सोने की कोशिश की। 

उधर राजीव भी सोने की कोशिश कर रहा था। दिन भर की घटनाओं के बारे में सोचने लगा। आज बहुत कुछ हुआ था। मालिनी ने उसको शीला की बुर दिलाई थी। साथ ही आज उसने मालिनी के मन में शिवा और सरला के बारे में शक की बुनियाद रख दी है। देखें तीर कितना निशाने पर लगता है? वो भी सो गया।

सुबह किचन में चाय बनाकर वह राजीव को आवाज़ दी। वह बाहर आकर चाय पीते हुए बोला: रात में शिवा ने चोदा? 

मालिनी: उफफफ पापा आप भी ना। शायद ही दुनिया में कोई ससुर अपनी बहु से ऐसा अजीब सवाल पूछता होगा? 

राजीव: ये मेरी बात का जवाब तो नहीं हुआ बेटा। 

मालिनी : ओह्ह्ह्ह्ह अच्छा आपकी बात का जवाब है हाँ हाँ । बस अब ख़ुश? वैसे आपके कारण बड़ी अजीब स्तिथि बन गयी थी । जब मैंने उनको पूछा कि आप मम्मी के साथ कुछ किए थे क्या? तो उनका तो बस खड़ा हुआ उसी समय नरम पड़ गया था। 

राजीव: ओह तो चुदाई आधी रह गयी क्या? 

मालिनी: नहीं बाद में वो फिर और ज़्यादा उत्तेजित होकर बुरी तरह से चोदे। 

राजीव: पर बाद में ऐसा क्या हो गया कि वो इतना उत्तेजित हो गया? मुझे कुछ समझ नहीं आया। 

मालिनी: वो वो असल में अब कैसे बताऊँ? छोड़िए ना। 

राजीव ने उसका हाथ पकड़ा और बोला: बेटा बताओ ना ऐसा क्या हुआ? 

मालिनी: जब हम दोनों में थोड़ी बहस हुई तो मैंने कह दिया कि अगर आप मेरी मम्मी से करोगे तो मैं भी बदला लूँगी। 

राजीव : कैसे लोगी बदला? 

मालिनी: आपको बताऊँगी तो आप मस्त हो जाओगे। 

राजीव: अरे जान अब बता भी दो ना। वैसे उसे अंदाज़ा हो गया था पर वह उसके मुँह से सुनना चाहता था। 

मालिनी: मैंने कहा कि आप मेरी माँ से करोगे तो मैं आपके पापा से करूँगी। हा हा मज़ा आ गया ना आपको? 

राजीव: आऽऽऽऽह बेटी सच मज़ा आ गया। 
वह उठकर उसके पास आकर उसकी बग़ल की कुर्सी पर बैठा और उसकी जाँघ दबाकर बोला: फिर शिवा क्या बोला?

मालिनी: वो बहुत उत्तेजित हो गए थे और - और - 

राजीव: उसकी जाँघ सहलाकर: हाँ हाँ बोलो बेटा। 

मालिनी: मैं भी बहुत उत्तेजित हो गयी थी। फिर उन्होंने मुझे ज़बरदस्त तरीक़े से चोदा। एक बात कहूँ मुझे लगता है इतना उत्तेजित वो कभी नहीं हुए थे पहले। उफफफफ क्या चुदाई किए। पागल ही हो गए थे वो। 

राजीव हैरान होकर: वो ग़ुस्सा नहीं हुआ बल्कि उत्तेजित हुआ? Wow । अच्छा ? 
वो सोचने लगा कि इसका क्या मतलब हो सकता है? 

तब वो सोचा कि कहीं शिवा भी तो यही नहीं चाहता कि वो मालिनी को चोदे? पर ये कैसे हो सकता है ? वो तो इसको प्यार करता है? इसका मतलब क्या वो भी कुछ नया चाहता है? वो सामने से बोला: ओह वो उत्तेजित क्यों हुआ ये तो पता नहीं पर एक बात बताओ कि तुम क्यों उत्तेजित हुई?

मालिनी ने आँखें झुकाकर कहा: पता नहीं। 

अब वो उसकी नायटी के ऊपर से जाँघ दबाकर बोला: इसका मतलब है कि तुम भी मुझसे चुदवाना चाहती हो? 

मालिनी: पापा आपको इसमे शक है क्या? पर आप जानते हो कि मेरा ज़मीर इसकी इजाज़त नहीं देता। राजीव ने उसका हाथ अपने लण्ड पर रखा और वो उसे लूँगी के ऊपर से दबाकर बोली: आज सुबह सुबह ही शुरू हो गए आप?

राजीव: तुमने बात ही इतनी बढ़िया बताई है। 
अब मालिनी भी उसके लण्ड को दबाकर महसूस की और उठती हुई बोली: पापा अब मैं शिवा को भी उठा देती हूँ। 

जैसे ही वो उठी राजीव ने उसकी नायटी के ऊपर से उसकी मस्त गाँड़ को अपने पंजों में भर लिया और दबाकर बोला: आऽऽऽह बेटी कब चुदवाओगी मुझसे ? सच बहुत मन करता है तुम्हारी जवानी का मज़ा लूटने का। 

वो: पापा बस थोड़ा सा और इंतज़ार करो। मुझे लगता है कि आप जल्दी ही अपनी इच्छा पूरी कर पाओगे। 

वह उसको छोड़ा और बोला: आह पता नहीं बेटा कितना और इंतज़ार करवाओगी? चलो ठीक है देखते हैं क्या होता है?

वह चाय बनाई और शिवा को उठाई । शिवा बाथरूम से आकर उससे चिपक गया और बोला: आह रात की चुदाई बहुत मस्त थी। पता नहीं हम दोनों बहुत उत्तेजित हो गए थे। वो उसके कमर को सहला कर मस्त होकर बोला।

मालिनी: हाँ सच बहुत मज़ा आया था। अच्छा अब आप तय्यार हो जाओ। 
शिवा उसके गाल को चूमकर उसकी चूचियाँ दबाया। और फिर बाथरूम में चला गया। 

मालिनी सोची कि दोनों बाप बेटा हर समय मेरे बदन को दबाकर मुझे मस्त करते रहते हैं। वो मुस्कुराकर किचन में चली गयी। 

शिवा दुकान जाकर सरला को फ़ोन किया। उस वक़्त सरला सबको नाश्ता कराके आराम कर रही थी। सरला: हेलो हाँ शिवा कैसे हो। 

शिवा: नमस्ते मम्मी । ठीक हूँ। आज आपकी याद आ रही थी। 

सरला: ओह सच । मैं तो सोची थी कि तुम मुझे भूल ही गए। 

शिवा: मम्मी आपको कोई कैसे भूल सकता है। क्या मज़ा दिया था आपने। उफफफ अब भी याद आता है तो लण्ड खड़ा हो जाता है। मैंने अपने जीवन में सिर्फ़ आपको और मालिनी को ही तो चोदा है। तो कैसे भूल जाऊँगा आपको ?

सरला: चल बदमाश कहीं का। मेरी हड्डी हड्डी दुखा दी थी तेरी चुदाई ने। सच कहती हूँ तू तो घोड़ा है आदमी थोड़ी है। 

शिवा हँसकर : मम्मी आप भी ना। अच्छा एक बात बताओ कल रात को मालिनी बोल रही थी चुदाई के समय कि क्या मैंने आपको चोदा है उस दिन जब वो फ़िल्म देखने गयी थी? उसे ऐसा शक कैसे हुआ होगा? 

सरला: ओह तुमने मना कर दिया ना? 

शिवा: अरे मना तो किया पर ये ये विचार उसे आया कैसे? 

सरला: पता नहीं। हो सकता है कि तुम्हारे पापा ने उसे ये बोला हो? 

शिवा: पापा ने ? क्या पापा उसके साथ ऐसी बात कर सकते हैं? 

सरला: पता नहीं पर मुझे लगता है कि मालिनी को ये बात उन्होंने ही कही होगी। 

शिवा: पर आप ऐसा कैसे कह सकते हो? पापा उसे अपनी बेटी मानते हैं और वो उससे मेरी और आपकी चुदाई की बात कैसे कहेंगे? 

सरला: बेटा मैंने तुमको बताया था ना कि तुम्हारे पापा दूसरी शादी की बात करे हैं मालिनी से । वो तुमको कहाँ बताई। वो और क्या क्या बोलते होंगे मालिनी शायद तुमको नहीं बता पाती होगी। 

शिवा: ओह हाँ ये हो सकता है कि वो किसी दबाव में होगी? मुझे पता करना ही होगा। 

सरला: बेटा कोई आया है बाहर घंटी बज रही है मैंने बाद में बात करूँगी। 

शिवा ने फ़ोन बन्द किया और सोचने लगा कि ये माजरा क्या है? सबसे पहले मालिनी का ये कहना कि वो मम्मी के साथ मज़ा लिया क्या। और अब सरला का ये कहना कि पापा मालिनी से इस तरह की बातें कर सकते है। और सबसे बड़ी बात वो सोचा कि जब मालिनी उससे बदले लेने की बात की तो वो ख़ुद इतना क्यों उत्तेजित हो गया था? इसका क्या मतलब है कि वो ख़ुद चाहता है कि उसकी बीवी पापा से चुदे? और एक बात ये मालिनी भी इतनी उत्तेजित क्यों हुई थी? उसकी बुर में मानो नदी बह रही थी। इसका क्या मतलब है कि मालिनी भी पापा से चुदवाना चाहती है? उफफफ वो ये क्या सोच रहा है? उसने देखा कि उसका लंड पूरा तन गया था। वो सोचने लगा कि वो ख़ुद क्या चाहता है। अपने लण्ड को सहलाकर लैपटॉप खोला और उसने एक सीडी लगाई जो वो अपने कैबिन में छिपा कर रखता था। उस सीडी में एक बाप और बेटा एक लड़की को चोद रहे हैं । वो लड़की उस लड़के की गर्ल फ़्रेंड है। जिसको बेटा बाप को ऑफ़र करता है। 
इस सीडी को वो कई बार देख चुका था। ये उसकी पसंदीदा सीड़ी है। अब क्या सच में उसके जीवन में ऐसा ही कुछ होने वाला है?
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

शिवा सीडी देखकर अपना लंड दबा रहा था। बहुत ही कामुक दृश्य था जिसमें एक जवान लड़की पीठ के बल लेट कर सिसकियाँ भर रही थी और बाप बेटा उसके एक दूध चूस रहे थे। उफफफफ क्या मज़ा ले रहे थे दोनों। लड़की के एक एक हाथ में दोनों के बड़े बड़े लण्ड थे जिनको वह सहला रही थी। दोनों आदमियों के हाथ उसके बदन पर घूम रहे थे और उसकी बुर में भी तीन उँगलियाँ घुसी हुई थीं। 
तभी फ़ोन बजा। शिवा ने फ़िल्म बंद की और फ़ोन उठाया। सरला का ही फ़ोन था। वो बोली: हाँ बेटा क्या बोल रहे थे। 
शिवा: मम्मी रात को मालिनी बदला लेने की बात कर रही थी । वह बोली अगर आप मेरी मम्मी को चोदे हो तो मैं भी आपके पापा से चुदवाऊँगी। 

सरला: ओह इसका मतलब कि तुम्हारे पापा अपने मक़सद में कामयाब होते दिखाई दे रहें हैं। 

शिवा: क्या मतलब? क्या मक़सद है पापा का? 

सरला: मालिनी को चोदना । वो अपनी बहु पर बहुत दिनों से निगाह रखे हैं। वो कहते हैं कि वो दूसरी शादी करेंगे। इसलिए मालिनी उनकी बात शायद मान गयी है। तभी ऐसा बोल रही है। 

शिवा: मेरे पापा के बारे में आप इतना सब कैसे जानती हैं जो कि मैं भी नहीं जानता। 

सरला: वो - वो - क्या है ना - मतलब - अब मैं क्या बोलूँ? 

शिवा: मम्मी कहीं आप पापा से चुदीं तो नहीं हो? 

सरला: ये कैसे बोल रहे हो? क्या ऐसी बात कोई पूछता है भला? 

शिवा: मम्मी आप भूल रही हो कि मैं भी आपको चोद चुका हूँ। और आप सिर्फ़ मेरी सास नहीं हो बल्कि मेरी चुदाई पार्ट्नर भी हो। मैं तो चाहता हूँ की आप कुछ दिनों के लिए यहाँ आ जाओ ताकि मैं आपको मस्ती से चोद सकूँ। 

सरला: धत्त ये कैसे हो सकता है, वहाँ मालिनी और तुम्हारे पापा भी होंगे। तुम्हें मज़ा लेने यहाँ मेरे घर आना होगा। 

शिवा: मम्मी वो तो सिर्फ़ इतवार को ही हो सकता है। चलो प्लान करते हैं। अच्छा रखता हूँ। 

शिवा फ़ोन काट कर सोचने लगा। कही कुछ गड़बड़ है। उसे पता करना होगा कि पापा और मालिनी के बीच क्या चल रहा है? पर कैसे पता करे वो? वो सोचता रहा । तभी उसे याद आया कि वो जब लिंगरी लेकर गया था मालिनी के लिए तो रात में उसे पहनकर वो पापा को दूध देने गयी थी। उसने उस दिन उसके ऊपर एक कपड़ा ढाँक लिया था। क्या वो सब उसे धोका देने के लिए था। अगर ऐसा है तो वह पापा को लिंगरी में अपना बदन दिखाने गयी थी। वो जितना इस बात के बारे में सोचता उतना ही उसका शक पक्का होता जाता। वो सोचा कि आज फिर एक सेक्सी ड्रेस लेकर जाता हूँ। देखता हूँ कि वो फिर से कोई बहाना बना कर पापा के कमरे में जाती है क्या? अगर गयी तो फिर साफ़ है कि वो पापा के साथ मज़ा कर रही है। उसका लण्ड इन बातों को सोचकर पूरा तना हुआ था। वो बाथरूम में गया और मालिनी के नाम की मूठ्ठ मारा। और फिर शांत होकर बाहर आया और एक सेक्सी ड्रेस खोजने लगा। आज उसने एक ऐसी ड्रेस पसंद की जिसका सोच कर वो फिर से उत्तेजित होने लगा। इस ड्रेस से उसकी चूचियाँ आधी से ज़्यादा नंगी दिखाई देंगी और पूरा पेट और आधी कमर भी नंगी रहेगी। और सिर्फ़ बुर का भी आधा हिस्सा ही ढकेगा।जाँघों के ऊपर एक कपड़े का हिस्सा अलग अलग लहरा रहा था। पीछे से गाँड़ के ऊपर एक रस्सी भर होगी। उसने ड्रेस पैक कर ली। आज ये फ़ैसला होना था कि क्या सच में मालिनी और पापा के बीच कुछ है? 

उधर शिवा के जाने के बाद मालिनी नहाकर सलवार क़ुर्ती में बाहर आयी और किचन में बाई के साथ खाना बनाने लगी। तभी राजीव ने उसे आवाज़ दी: बेटा ज़रा आना तो। 

मालिनी उसके कमरे में आयी और बोली: जी पापा। 

राजीव उसके बदन की ओर देखता हुआ बोला: वाह नहा कर कितनी मस्त लग रही हो। बाल ऐसे ही खुला रखा करो। 

मालिनी हँसकर: अच्छा समझ गयी। बोलिए किस लिए आवाज़ दी? 

राजीव: तुमको ये दिखाने को। ये कहते हुए उसने एक सेक्सी ड्रेस निकाली और बोला: ये मैंने तुम्हारी सास के लिए ख़रीदी थी। पर वह कभी नहीं पहनी। तुम पहनकर दिखाओ। मस्त लगोगी। 

मालिनी ने उस ड्रेस को चेक किया और हँसकर बोली: पापा सासु माँ ने नहीं पहना ठीक ही किया। आप इसको ड्रेस कहते हो? इससे तो अच्छा है कि कुछ पहना ही ना जाए। देखिए तो यहाँ से तो पूरा खुला हुआ है। पूरी नंगी ही दिखूँगी। 

राजीव: बेटा एक बार पहन कर तो दिखा दो। इतने प्यार से ख़रीदी थी मैंने। 

मालिनी उसको हाथ में पकड़कर बाहर जाकर दरवाज़े के पास खड़ी होकर बोली:अब आप सुनिए मैं इसको अपनी सेकंड सुहागरत में पहनूँगी जो आपके साथ मनाऊँगी। वो कहकर हँसी और वहाँ से भाग गयी। राजीव के लण्ड ने ये सुनकर झटका मारा और वो भी बाहर आया । पर तब तक मालिनी किचन में जा चुकी थी जहाँ काम वाली बाई काम कर रही थी। उसके पैर थम गए। वह मन ही मन मुस्कुराता हुआ सोचा कि अब दिल्ली दूर नहीं है। जल्दी ही उसकी बहु उसकी बाहों में होगी। उसका दिल बल्लियों उछलने लगा। 

उधर सरला ने राजीव को फ़ोन लगाया: कैसे है आप? 

राजीव : ठीक हूँ जान। आ जाओ ना कुछ मज़े करेंगे। 

सरला: आपको बस एक ही बात सूझती है। अच्छा ये बताओ कि आपने मालिनी के दिल में ये शक क्यों डाला कि शिवा और मेरे बीच कुछ हुआ होगा। क्या फ़ायदा होगा आपको ऐसा कहकर। 

राजीव: अरे फ़ायदा तो हो गया। मालिनी कल शिवा को बोली कि अगर ये सच है तो वो इसका बदला लेगी। और बदला होगा कि क्योंकि शिवा ने उसकी मम्मी को चोदा है इसलिए वो शिवा के पापा से चुदवाएगी। बताओ कितना मीठा सा बदला लेगी ना तुम्हारी बिटिया। 

सरला: ओह हे भगवान। आपने क्या क्या भर दिया है उसके दिमाग़ में। प्लीज़ उसे छोड़ दीजिए शिवा के लिए। आपको जो करना है मेरे साथ कर लीजिएगा। 

राजीव: अरे तुम्हारे साथ भी कर लेंगे और तुम्हारी प्यारी सी बिटिया के साथ भी कर लेंगे।

सरला: अरे आप क्यों उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी में आग लगा रहे हो। 

राजीव: आग तो तुम लगायी हो शिवा के बदन में ,मैं तो मालिनी की आग बुझाऊँगा जानू। 

सरला कुछ कहती इसके पहले श्याम अंदर आने लगा, तो वह अच्छा अभी रखती हूँ कहकर फ़ोन काट दी। 

रात को आठ बजे शिवा घर आया और अपने कमरे में जाकर फ़्रेश हुआ। मालिनी उसके पास आइ और बोली: कैसा रहा दिन आज का? 

शिवा: बहुत अच्छा धन्धा हुआ है। इसीलिए देखो तुम्हारे लिए ये गिफ़्ट लाया हूँ। 
मालिनी ने गिफ़्ट खोली और उसमें एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस देखकर उसका मन हुआ कि अपना सर पीट ले। वहाँ बाप उसे एक सेक्सी ड्रेस दे रहा है और यहाँ बेटा भी एक सेक्सी ड्रेस लेकर आ गया है। वो मन ही मन सोची कि बाप बेटा एकदम एक जैसे ही हैं। 

शिवा: आज रात को ये पहन कर दिखाना और फिर तुम्हारी चुदाई करूँगा जैसे ब्लू फ़िल्म में होता है। ठीक है ना? मेरी जान। 

मालिनी: अब क्या कहूँ आपको । आप हमेशा ही अपने मन की तो करते हो। है कि नहीं? 

शिवा: चलो अब भाषण मत दो जान। बस पहन लेना। 

मालिनी हँसके : अच्छा जो चाहोगे सब हो जाएगा मेरी जान। चलो अब खाना लगाती हूँ। 

सबने खाना खाया। आज पहली बार शिवा ध्यान से देख रहा था कि क्या पापा मालिनी को ताड़ते हैं? उसने पाया कि वो उसको अच्छी तरह से घूर रहे थे। कभी उसकी चूचियों को तो कभी उसके पेट को और उसकी गाँड़ को भी। वो सोचा कि उसने तो कभी सोचा ही नहीं कि पापा ऐसा भी कर सकते हैं ? फिर वो अचानक महसूस किया कि उसका लण्ड तन रहा है । वो अपने आप पर हैरान था कि उसे ग़ुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि वो उत्तेजित हो रहा था। यह क्या हो रहा है उसे? क्या वो ख़ुद ही चाहता है कि पापा अपनी बहु के साथ ये सब करे? वो काफ़ी कन्फ़्यूज़्ड था। 

खाना खाने के बाद शिवा अपने कमरे में आ गया और इंतज़ार करने लगा कि कब वो आए और वो उसे लिंगरी में देखे। फिर देखना ये है कि क्या बहाना बना कर मालिनी ससुर के कमरे में जाएगी?

उधर मालिनी किचन जाकर काम निपटाई और दूध का गिलास लेकर ससुर के कमरे में दे आइ। 
फिर वो बोली: पापा आपको पता है कि जैसी लिंगरी आप लाए हो वैसी ही या उससे भी ज़्यादा सेक्सी लिंगरी आपका बेटा भी लाया है। और वो मुझे अभी पहनकर उनको दिखाना है। 

राजीव: उसके बाद वो तुम्हारी ज़बरदस्त चुदाई भी करेगा। है ना? 

मालिनी: वो तो करेंगे ही। चलती हूँ अब वो रास्ता देख रहे होंगे। 

राजीव: जान एक बार मुझे भी दिखाना कैसी लगती हो लिंगरी में। प्लीज़ ।

मालिनी: क्या बहाना बनाऊँगी? पिछली बार तो दूध का बहाना बनाया था। आज तो दूध भी ले कर आ गयी हूँ। 

राजीव: अरे कुछ भी बहाना बना लेना।बस एक बार जलवा दिखा देना। 

मालिनी: अच्छा देखती हूँ। कोई बहाना बन पाया तो। 

अब वो अपने कमरे में गयी और देखी की शिवा सिर्फ़ एक चड्डी में उसका इंतज़ार कर रहा था । उसका लण्ड आधा खड़ा था। वह टी वी देख रहा था। 

शिवा: क्या जान बड़ी देर लगा दी? 

मालिनी: वो किचन साफ़ की और फिर पापा को दूध देकर आयी हूँ। 

शिवा: जान चलो अब वो लिंगरी पहन कर दिखा दो। देखो लण्ड कैसे झटके मार रहा है। 

मालिनी हँसकर : अच्छा अभी आयी। ये कहकर वो बाथरूम में जाकर फ़्रेश हुई और फिर सब कपड़े निकल कर सिर्फ़ लिंगरी पहन ली। उसकी बड़ी छातियाँ आधी नंगी थीं और जाघें भी नंगी थीं । सिर्फ़ बुर के ऊपर एक छोटी सी पट्टी थी उसमें से भी आधी बुर बाहर दिख रही थी। उफफफ क्या क़यामत दिख रही थी। वो ख़ुद से ही शर्मा गयी । जब वो बाहर आइ तो शिवा मस्ती से भर गया और अपनी सेक्सी बीवी को देखकर लंड दबाने लगा। शिवा: आऽऽऽह क्या माल लग रही हो मेरी जान। 

मालिनी शर्माकर: सच में बहुत ही छोटी सी लिंगरी है। पूरी तो नंगी ही दिख रही हूँ। 

फिर से शिवा ने उसे चलकर दिखाने को कहा और वो भी गाँड़ मटकाकर चल के दिखाई। शिवा मस्ती से भर गया। तभी शिवा सोचा कि अब वो पापा के कमरे में जाने का अगर बहाना बनाई तो उन दोनों में कोई ना कोई चक्कर है ये पक्का हो जाएगा। वो इंतज़ार करने लगा। उसका दिल बुरी तरह से धड़क रहा था। क्या मालिनी कोई बहाना बनाएगी। पर मालिनी आकर शिवा के पास आकर बैठ गयी। शिवा को मानो निराशा ही हुई। वो सोच रहा था कि वो पापा के पास जाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। 

शिवा सोचा कि उसे तो ख़ुश होना चाहिए। पर वो उदास क्यों है। आख़िर वो ख़ुद क्या चाहता है? 

अब मालिनी उसकी गोद में आकर बैठी और वो उसे चूमने लगा।मालिनी अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: आपका तो खड़ा है बहुत चुभ रहा है। उसके बाद वो भी चुम्बन में उसका साथ देने लगी। 

पर शिवा का लण्ड बैठने लगा था । शायद वो उम्मीद किया था कि वो पापा के पास जाएगी। पर ऐसा कुछ हो नहीं रहा था। तभी उसके दिमाग़ में एक विचार आया और वो सोचा कि शायद उसे मालिनी को थोड़ा सा समय अकेले में देना चाहिए। वो ये सोचकर बोला: जान मैं ज़रा बाथरूम जाकर आता हूँ। नहाने की इच्छा हो रही है। 

मालिनी: इस समय आप नहाओगे ?

शिवा: बस दस मिनट दो फिर नहा कर आता हूँ। फिर चुदाई करेंगे। 

मालिनी : ठीक है। आप आओ। यह कहकर वो बिस्तर पर बैठी और टी वी लगा ली। 

शिवा ने अंदर जाकर शॉवर चालू किया। थोड़ा सा भीगकर वह तौलिए से ख़ुद को पोंछ भी लिया। फिर धीरे से दरवाज़ा थोड़ा सा खोलकर उसके अंदर से झाँका। उसने देखा कि मालिनी फ़ोन पर मेसिज कर रही थी। फिर वो उठी और उसने एक शॉल सी लपेटी और बाहर निकल गयी। हुआ ये था कि मालिनी अकेली होते ही राजीव को sms की और पूछा :क्या आप जाग रहे हो? 

राजीव : हाँ ।

मालिनी: मैंने लिंगरी पहनी है देखोगे? 

राजीव: अरे आ जाओ ना मेरी जान। दिखा दो। 

मालिनी: बस दो मिनट के लिए। कोई गड़बड़ नहीं । ठीक? 

राजीव: प्रॉमिस । 

इसके बाद मालिनी उठकर गयी जिसे शिवा ने देख लिया और जल्दी से तौलिया लपेट कर उसके पीछे जाकर पापा के कमरे की खिड़की से अंदर झाँका। उसका मुँह खुला का खुला रह गया। 

अंदर मालिनी शाल लपेटी पापा के सामने वैसे ही चल रही थी जैसे अभी वो उसके कमरे में चल कर दिखाई थी। राजीव बिस्तर पर बैठे लूँगी के ऊपर से अपने तने लंड को सहला रहा था। वो बोला: बेटी, शॉल उतारो ना। अपनी जवानी का जलवा दिखाओ ना। 

वो मुस्कुराई और शॉल को धीरे से उतारी और लिंगरी में उसकी आधी नंगी जवानी देखकर राजीव गरम हो गया और लूँगी से अपना लण्ड बाहर निकाल कर सहलाने लगा। 

शिवा ने भी अपना लण्ड सहलाना शुरू किया और आँखें फाड़े अपनी बीवी को अपने ससुर के सामने लिंगरी में गाँड़ मटका कर चलते देखने लगा। 

राजीव उत्तेजना में भर कर लंड मूठियाते हुए बोला: आऽऽऽऽऽऽऽह क़याऽऽऽऽऽ गाँआऽऽऽऽऽऽऽड़ है बेएएएएएएएएटी तेरी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कब चुदाअअअअअअअअअअएगी। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।

मालिनी उसके पास आइ और झुककर उसके लण्ड के सुपाडे को चुमी और बोली: बस थोड़ा सा और इंतज़ार मेरे राऽऽजा। पापा ने उसकी चूचियाँ दबाई और उसकी मस्त गाँड़ पर हाथ भी फेरा और बोला: आऽऽऽऽह बहु अभी तो मूठ्ठ मारे बगेर नींद आएगी ही नहीं। 

वो हँसकर शाल लपेटी और बोली: चलती हूँ शिवा नहाकर आने वाले होंगे। बाई । और इसके पहले कि वो निकल आती शिवा जल्दी से अपने कमरे में आकर बाथरूम में घुस गया। फिर अपनी फूली हुई साँसों को क़ब्ज़े में करके वो बाहर आया। मालिनी बिस्तर पर बैठी कितनी भोली लग रही थी। कौन कह सकता था कि ये लड़की अभी अपनी जवानी का जलवा अपने ससुर को दिखा कर आइ थी और उसका लण्ड चूस कर आइ थी। शिवा का लण्ड तो उत्तेजना के मारे फटा जा रहा था । वह बाहर आके मालिनी को बिस्तर पर लिटाया और फिर उसके ऊपर आकर उसकी चूचियाँ दबाके होंठ चूसने लगा। फिर वो लिंगरी से चूचियाँ बाहर निकाला और उनको दबाके बारी बारी से चूसने लगा। फिर वो नीचे जाकर उसकी बुर के पास से लिंगरी का कपड़ा हटाकर वहाँ अपना लंड सेट किया और एक ही धक्के में अपना आठ इंचि अंदर पेल कर उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर मज़े से चोदने लगा । मालिनी भी नीचे से कमर उठाकर चुदवाने लगी। मस्ती से उन्न्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न करके वो हर धक्के का मज़ा ले रही थी। शिवा भी उत्तेजना में भरकर उसकी बुर फाड़ने में जुटा हुआ था। पलंग तो मानो आज टूटने ही वाला था। उफ़्ग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ आज क्या चुदाई कर रहा है शिवा। मालिनी सोची की आज इनके सिर पर क्या सवार हो गया है? लिंगरी अभी भी उसके बदन पर थी। जल्दी ही दोनों हाय्ययय कहकर झड़ने लगे। मालिनी अब शांत होकर पड़े शिवा को देखी। अब वो उठकर बाथरूम में गयी और वापस आकर सो गयी। शिवा भी सोने की कोशिश कर रहा था पर उसके आँखों के सामने बार बार मालिनी का चेहरा आ रहा था जो कि पापा के लौड़े के सुपाडे को चूस रही थी। अचानक उसने नोटिस किया कि उसका लण्ड फिर से तन गया था। वो मुड़कर पास ही सोयी मालिनी के सुंदर चेहरे को देखता रहा और सोचा कि उफफफ क्या बच्ची सी भोली दिखाई दे रही थी। और उसकी आँखों के सामने उसका बदन घूम गया जिसको वो गाँड़ हिलाकर लिंगरी में से पापा को दिखा रही थी। वह अपना लण्ड दबाया और सोने की कोशिश करने लगा।
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

मालिनी सुबह उठी तो शिवा बेसुध सो रहा था। वह बाथरूम से फ़्रेश होकर एक नायटी पहनी और किचन में पहुँची। जैसे ही वो बाहर निकली शिवा उठा और बाथरूम से फ़्रेश हुआ। मालिनी को पता नहीं था कि वो जाग रहा था। वो बाहर ना जाकर चुपचाप ड्रॉइंग रूम में खुलने वाली खिड़की को थोड़ा सा खोला और पर्दा हल्का सा हटाकर बाहर झाँका। ड्रॉइंग रूम पूरा दिख रहा था। वो एक स्टूल लेकर वहाँ धैर्य से बैठ गया। तभी मालिनी किचन से बाहर आयी और राजीव को आवाज़ दी: पापा आओ चाय बन गयी। 

राजीव बाहर आकर डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ा । वो बनियान और लूँगी में ही था। तभी चाय लेकर मालिनी आयी। जैसे ही वो उसके पास आयी और चाय टेबल पर रखी , राजीव ने खींचकर उसे अपनी गोदी में खींच लिया। और वो उसकी गोद में आकर मचल कर बोली: उफफफ पापा चाय तो पी लो। 

शिवा हैरान रह गया कि इनमे तो बहुत याराना है। 

राजीव: बेटी चाय भी पी लेंगे। पहले ये शहद तो पी लूँ। ये कहते हुए वह उसके गाल और फिर होंठ चूसने लगा। पहले मालिनी ने उसका विरोध किया फिर ख़ुद भी उसका साथ देने लगी। फिर मालिनी उठी और बग़ल की कुर्सी में बैठने लगी। तभी वो उसकी गाँड़ सहलाने लगा। और कुर्सी में हाथ का पंजा रख दिया। 

मालिनी हंस कर : पापा हाथ निकालो दब जाएगा ।

वह: दबने दो बेटी तुम्हारी गाँड़ के नीचे ही तो दबेगा ना। वो उसकी गाँड़ मसलकर बोला। 

शिवा अब अपने लंड को सहलाने लगा था। भोली सी दिखने वाली मालिनी इतनी गरम माल होगी। ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा था। 

मालिनी: पापा प्लीज़ हटाओ ना हाथ। वह हँसकर हाथ हटाया। पर अब वो बग़ल की कुर्सी में बैठी मालिनी की चूचि दबाकर बोला: बेटी रात को लिंगरी में तुम क़यामत ढा रही थी। तुम्हारी ये चूचियाँ तो बड़ी ही रसीलि दिख रहीं थीं। उफ़फ़्फ़ क्या गाँड़ मटकाती हुई चल रही थी। जानती हो मैं मूठ्ठ मारा तभी सो पाया। 

मालिनी: पापा आप भी ना। बहुत गरम हो इस उम्र में भी। 

राजीव अपनी लूँगी में से लण्ड बाहर निकाला और बोला: देखो अभी भी खड़ा है। 

मालिनी हँसकर उसको पकड़ ली और सहलाकर बोली: आप दोनों बाप बेटा दो मिनट में ही खड़ा कर लेते हो। 

शिवा हैरान रह गया मालिनी के मुँह से ऐसी बातें सुनकर। वो पापा और उसकी तुलना भी बड़ी बेशर्मी से कर रही है। 

तभी राजीव बोला: बेटी थोड़ा सा चूस दो ना। 

मालीनी झुक कर थोड़ी देर चूसी फिर बोली: पापा इनके जाने के बाद अच्छे से चुसवा लेना।

अब वो उठी और राजीव ने फिर से उसे पकड़ लिया और बोला: अच्छा एक मीठी सी चुम्मी दे दो ना। प्लीज़ । 

मालिनी : उफफक पापा आप भी ना बच्चों जैसी ज़िद करते हो। 

शिवा को समझ नहीं आया कि पापा इतनी चुम्मियाँ तो ले चुके हैं तब तो मालिनी कुछ नहीं बोली अब क्या मुश्किल है उसे फिर से चुम्मी देने में? तभी उसका मुँह खुला रह गया। उफफफ ये क्या हो रहा है उसकी आँखों के सामने। 

मालिनी ने अपनी नायटी ऊपर करनी शुरू की। अब उसकी नायटी उसके पेट तक उठ चुकी थी। राजीव नीचे बैठा और मालिनी की जाँघें सहलाया और फिर बुर में ऊँगली फेरकर मस्ती से उसको चूमने लगा। शिवा की साँसे फूल रही थी। उग्फ़्फ़्फ़्फ़ ये कैसी बहु है जो ड्रॉइंग रूम में अपनी नायटी उठाकर अपनी बुर अपने ससुर से चटवा रही है। और वो भी तब जब कि बग़ल के कमरे में उसका पति मौजूद है। शिवा ने देखा कि अब पापा उसकी बुर को चाट रहे थे और मालिनी उइइइइइइइइ कहकर मस्ती से उसका सिर अपनी बुर में दबा रही थी। 

तभी राजीव ने उसको घुमाया और उसके मस्त गोल चूतरों को दबाकर उनको चूमने लगा। फिर वो उसके चूतरों को फैलाया और पूरी दरार चाटा और फिर उसकी गाँड़ के छेद में जीभ डालकर वह मानो गाँड़ चोदने लगा। शिवा ने मालिनी के चेहरे को ओर देखा तो वो मानो आनंद में डूबकर आँखें बंदकरके गाँड़ चुसाई का मज़ा ले रही थी और उसकी आवाज़ आऽऽऽहहह करके निकल रही थी। वो अब भी एक हाथ से अपनी नायटी उठाई हुई थी। 

मालिनी: आऽऽऽहहहह पापा बस आप छोड़िए ना । शिवा को चाय देनी है । उइइइइइइइ बस कीजिए नाआऽऽऽऽऽ।

राजीव मुस्कुरा कर उठा और मालिनी ने भी नायटी नीचे की। शिवा लूँगी से बाहर झाँकते हुए उसके लण्ड को देखा और मालिनी ने उस मस्त लंड को सहलाया और हँसकर बोली: पापा आप इस उम्र में भी मस्त मर्द हो। 

शिवा उत्तेजना से कांप रहा था। तभी शिवा ने देखा कि राजीव मालिनी की पीठ से चिपक गया है। और नायटी के ऊपर से ही अपना लण्ड उसकी गाँड़ की दरार में रगड़ रहा था। मालिनी उफफफफ छोड़िए ना पापा कहकर छूटने की कोशिश की। तब वो उसकी दोनों चूचियों को अपने पंजों में दबाकर बोला: बेटी कब चुदवाओगी ? क्या मेरे मरने के बाद हाँ करोगी चुदवाने के लिए? 

मालिनी: आऽऽहहह पापा छोड़िए ना। आप क्यों मरेंगे । मरे आपके दुश्मन। आपको तो अभी मेरी चुदाई का शुभारम्भ करना है। 

शिवा सोचने लगा कि इसका क्या मतलब है? वो पापा के साथ ये सब कर रही है और अभी भी उनसे चुदी नहीं है? ये क्या चक्कर है? 

राजीव ख़ुश होकर उसको चूमा और छोड़ दिया। वो अपनी गाँड़ की दरार से फँसी हुई नायटी को निकाली और किचन में चली गयी। राजीव भी अपना लण्ड दबाके अपने कमरे में चला गया।

चाय लेकर मालिनी शिवा के पास आयी। वो जाकर उलटा होकर लेट गया था। वो चड्डी में था और पेट के बल लेट कर अपना खड़ा लंड दबाकर पड़ा हुआ था । वो बुरी तरह से उत्तेजित था। अब मालिनी आकर उसके कंधे पर हाथ रखकर हिलाई और बोली: उठिए ना चाय लाई हूँ। शिवा उठने का नाटक किया और सीधा होकर लेट गया। मालिनी की आँखों के सामने उसका लण्ड चडड्डी से खड़ा हुआ और मोटा लाल सुपाडा चड्डी से बाहर था। मालिनी मुस्कुराई और बोली: नींद में किसकी ले रहे थे? 

शिवा हँसकर: अरे तुम्हारे सिवा किसी और को चोदने का सवाल ही नहीं है जान। फिर वह चाय पीने लगा। मालिनी बड़े प्यार से उसके लाल सुपाड़े को सहला कर बोली: बेचारा कितना कड़ा हो गया है। वो झुकी और उसके सुपाड़े को वैसे ही चूसी जैसे अभी पाँच मिनट पहले उसने पापा का सुपाडा चूसा था। शिवा चाय रखकर उसे अपनी बाँहों में लेकर उसको चूमने लगा और फिर बिस्तर पर गिरा कर उसके ऊपर आ गया।अब वो उसके होंठ चूमा और फिर उसकी नायटी को ऊपर उठा दिया। अब वो कमर के नीचे पूरी नंगी थी। उसकी जाँघ सहलाया और फिर उसकी टाँगे उठाया और फैलाकर जैसे ही उसका हाथ उसकी बुर पर गया वो उत्तेजित हो गया। पापा का थूक अभी भी वहाँ लगा हुआ था। उन्होंने अभी अभी चाटा था वहाँ। तभी उसकी निगाह गाँड़ की दरार पर गया और छेद को सहलाया और वहाँ भी पूरा पापा का थूक पाकर वो मस्त हो गया। उफफफफ क्या लड़की है अभी अभी पापा से चटवा कर आइ है और पूरी गीली है। अब वो दो उँगलियाँ बुर के अंदर डाला और पाया कि अंदर भी पूरी गीली है। लगता है पापा ने बहुत मज़ा दिया है उसको। तभी तो इतनी मस्त होकर पूरी तरह से इसकी बुर पनियायी हुई है। आऽऽऽऽह वो सोचा और उत्तेजित होकर उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और अपना लण्ड एक ही धक्के में उसकी बुर में घुसेड़ दिया। मालिनी आऽऽऽहहहह कर के मज़े से नीचे से अपनी गाँड़ उछाली और लंड पूरा निगल गयी। अब उसने अपनी टाँगें शिवा के चूतर पर कैंची सी मारकर चिपक गयी। अब चुदाई शुरू हुई और वो उन्न्न्न्न्न उन्ननन करके चुदाने लगी ।
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

उधर राजीव अपने कमरे से बाहर आया क्योंकि उसका मोबाइल डाइनिंग टेबल पर ही छूट गया था। जब वो वापस जा रहा था तभी उसको हल्की सी सिसकारियाँ और कुछ आवाज़ें सुनाई दीं। वो चौंक कर शिवा के कमरे की तरफ़ देखा। अभी सुबह के ८ बजे थे और ये दोनों क्या लगे हुए हैं? वो ये सोचकर उत्तेजित हो गया और उसी खिड़की के पास आकर धीरे से पर्दा हटाकर अंदर झाँका जहाँ से थोड़ी देर पहले शिवा उसको और मालिनी को देखा था। उसकी आँखों के सामने उसका बेटा मालिनी की ज़बरदस्त चुदाई कर रहा था। उसकी कमर पिस्टन की तरह आगे पीछे हो रही थी। मालिनी भी अपनी गाँड़ उछाल उछाल कर उसके धक्कों का बराबर दे जवाब दे रही थी। जिस तरह से पलंग चूँ चूँ कर रहा था , राजीव को लगा कि कहीं वो टूट ही ना जाए। अब शिवा ने उसकी नायटी को और ऊपर उठाया और उसकी ब्रा में क़ैद चूचियाँ दबाने लगा। फिर वो उसकी एक एक चूचि को ब्रा से बाहर किया और उनको बारी बारी से दबाकर चूसने लगा ।

मालिनी की सिसकारियाँ अब आऽऽऽहहह उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ के रूप में जारी थीं।उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ देखकर राजीव भी मस्त हो रहा था। उसका हाथ अपने लण्ड पर था और वो उसे मूठिया रहा था। तभी अचानक मालिनी चिल्लायी: उइइइइइइइइ माँआऽऽऽऽऽऽऽ मैं गईइइइइइइइइइ । और वो अपनी जाघें सिकोड़कर अपने आप को ऊपर की ओर उठाई और मानो एक एक इंच लंड निगल ली। तभी शिवा भी उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ कहकर झड़ने लगा। अब दोनों बुरी तरह से एक दूसरे से चिपके हुए थे। फिर वो अग़ल बग़ल लेट गए। 

राजीव ने देखा कि दोनों कितने मस्त होकर पड़े थे। मालिनी की छातियाँ तनी हुई थी और ऊपर नीचे हो रहीं थीं। उसकी बुर से सफ़ेद रस टपक रहा था। शिवा भी मस्ती से पड़ा हुआ था और उसका लम्बा लण्ड उसकी जाँघ के ऊपर मानो सुस्ता रहा था। राजीव सोचने लगा कि जब उसका बेटा बहु को इतना मज़ा देता है और इतनी तगड़ी चुदाई करता है तो भला मैं उसे कैसे पटा पाउँगा। वो थोड़ा सा उदास हो गया। वो जानता था कि वो इतनी तगड़ी चुदाई अब इस उम्र में नहीं कर पाएगा। फिर वो सोचा कि अगर ऐसा होता तो बहु क्यों उसको इतना प्यार देती है। वो उलझ सा गया था। 
वह वहाँ से हट गया।
शिवा मालिनी को चूमा और उठकर नहाने चला गया। मालिनी भी उठी और एक तौलिए से अपनी बुर पोंछी और फिर नायटी डाल के कंघी फेरकर बाहर आइ और किचन में जाकर काम में लग गयी। तभी बाई भी आ गयी थी। शिवा नहाते हुए सोच रहा था कि वो मालिनी को इतना मज़ा देता है फिर वो पापा से क्यों मज़े लेती है? वो आपस में क्या क्या करते होंगे? घर में बाई भी तो होती है फिर दिन भर वो कैसे कर पाते होंगे? उसे पता था कि बाई दोपहर को खाना खाने अपने घर जाती थी। शायद तभी ये दोनों मज़ा लेते होंगे। 

नाश्ते के टेबल पर वह बातों बातों में मालिनी से पूछा: काम ज़्यादा तो नहीं हो जाता? वरना एक और बाई रख लो। 

मालिनी: नहीं कोई ज़रूरत नहीं है। बाई काम पूरा कर लेती है। 

शिवा: अच्छा इसका काम का क्या समय तय किया है तुमने ? 

मालिनी: वो सुबह ८ से १२ और फिर दोपहर को ४ से ६ बजे तक काम करती है। अच्छी है मेहनती भी है। 

शिवा : ओह चलो फिर ठीक है। वो सोचने लगा कि तो ये बात है १२ बजे से ४ बजे तक पापा और मालिनी अकेले होते हैं। तभी ये दोनों पता नहीं क्या क्या करते होंगे। उसका लण्ड फिर से तनाव में आने लगा। 

वो नाश्ता करके चला गया। वो दुकान जाते हुए एक योजना बनाने लगा। 

इधर मालिनी भी राजीव के कमरे में गयी और पूछी: पापा चाय बनाऊँ क्या? 

राजीव कुर्सी पर बैठा अपने हाथों में तेल लगा रहा था। वो बोला: हाँ बेटी चाय ही पिला दो। अपना दूध तो तुम मुझे पिलाओगी नहीं? 

मालिनी मुस्कुराई और बोली: पापा आप बस ऐसी ही बात करते हो। अभी तो मेरी हड्डी हड्डी दुःख रही है। 

राजीव अनजान बनकर: क्यों क्या हुआ बेटी? 

मालिनी: ओह पापा आज तो इन्होंने सुबह सुबह ही मेरी ज़बरदस्त ढंग से ली है। उफफफ आज तो वो जैसे पागल ही हो गए थे। 

राजीव हँसकर: बेटी मज़ा भी तो आया होगा ना? 

मालिनी हँसकर: पापा वो तो बहुत आया । पर अब बहुत आलस सा लग रहा है। 

राजीव: चलो तुमको नहला देता हूँ सारी थकावट मिट जाएगी। 

मालिनी: हा हा आपने नहलाया तो उसके बाद आप जो ठुकाई करेंगे, उससे थकावट और बढ़ेगी। अच्छा चलती हूँ चाय बनाकर लाती हूँ। यह कहकर वो चली गयी। 

उधर १२ बजे से दस मिनट पहले शिवा अपनी योजना के अनुसार अपने ही घर के सामने खड़ा था। वो इंतज़ार कर रहा था और उसका लण्ड उत्तेजना से खड़ा था। वो शांति से इंतज़ार करते रहा। तभी उसने देखा कि बाई बाहर आ रही है। वो अपनी उत्तेजना को कंट्रोल किया और चुपके से अपने ही घर में अंदर आया। उसके पास एक चाबी थी। 
वो अंदर आया और एक कमरे के परदे के पीछे से चुपचाप ये समझने की कोशिश करने लगा कि दोनों कहाँ हैं ? 

तभी उसने देखा कि मालिनी शायद अभी नहाकर आयी थी।वो अपने कपड़े सुखाने लगी। खुले बालों में वो अप्सरा लग रही थी। उसने साड़ी पहनी थी। उसके ब्लाउस से उसका पेट और कमर नंगा था। उफफफ क्या दिख रही थी। अब उसने देखा कि मालिनी ड्रॉइंग रूम में बैठी और टी वी चालू करी। 

शिवा बोर होने लगा। तभी राजीव बाहर आया और बोला: बेटी बाई चली गयी? 

मालिनी: जी पापा चली गयी। 

राजीव उसके पास आकर बैठा और बोला: तो आराम हो रहा है? 

मालिनी: आप करने दोगे तभी तो आराम होगा? 

राजीव: क्या बात है हमारी बिटिया हमसे नाराज़ है क्या? वो उसके खुले बालों को सहला कर बोला। 

मालिनी: नहीं पापा मैं आपसे क्यों नाराज़ हूँगी। मैं तो बस मज़ाक़ कर रही थी। 

राजीव: आओ ना बेटी गोद में बैठो और थोड़ा सा प्यार करने दो। 

शिवा का लण्ड पूरा तन गया था। 

मालिनी हँसी और आकर उसकी गोद में बैठ गयी। राजीव अब उसके गाल को चूमने लगा। फिर वो उसकी गरदन और कंधों को भी चूमने लगा। अब उसने साड़ी का पल्लू गिराया और जल्दी ही उसके हाथ उसकी चूचियो पर आ गए थे ।वह उनको दबाकर मज़ा लेने लगा। 


मालिनी अपनी गाँड़ हिलाकर बोली: उफफफ पापा आपका बहुत चुभ रहा है। 

राजीव: बेटी इसे चूसकर ठंडा कर दो ना। 

मालिनी हँसकर उठी और ज़मीन पर बैठ गयी और उसकी लूँगी हटाकर उसके लण्ड को प्यार से सहलाई और बॉल्ज़ भी दबाने लगी। जल्दी ही वो लंड और बॉल्ज़ चूसने लगी। 

शिवा की आँखें उसके मुँह पर ही चिपकी हुई थी। वो कैसे पूरे मज़े से लंड चूसने का मज़ा ले रही थी। क़रीब दस मिनट चूसने के बाद राजीव बोला: बेटी ६९ करें? मुझे भी तेरी बुर चूसनी है। 

मालिनी मुस्कुरा कर उठी और राजीव वहीं पड़े दीवान पर लेट गया। मालिनी ने अपनी साड़ी उतार दी। फिर अपने पेटिकोट को ऊपर उठाया और आकर के राजीव के ऊपर उलटा लेट गयी। अब उसकी बुर राजीव के मुँह के ऊपर था और उसका मुँह फिर से उसके लंड के ऊपर था । 

शिवा बड़ी बड़ी आँखों से देख रहा था कि कैसे उसकी बीवी अपने ससुर का लंड चूस रही थी। और कैसे पापा अपनी बहु की बुर और गाँड़ चाट रहे थे। उफफफफ उसका लण्ड बहुत टाइट हो गया था और वह उसे बाहर निकाल कर मूठ्ठ मारने लगा। 

जल्दी ही दोनों ससुर बहु झड़ने लगे। मालिनी लंड से निकली हुई एक एक बूँद पी गयी। राजीव भी रस को चाटे जा रहा था। फिर दोनों उठकर बैठे और सफ़ाई करके आए और टी वी देखने लगे। शिवा चुपचाप खड़ा होकर मूठ मारे जा रहा था। 

अचानक से राजीव बोला: अच्छा बेटी ये बताओ कि माँ से बात हुई क्या? 

मालिनी: नहीं तो । किस बारे में? 

राजीव: वही उस दिन के बारे में जब तुम लोग शिवा और सरला को अकेला छोड़ गए थे। 

मालिनी: उफफफ पापा आपको भी कैसे कैसे ख़याल आते रहते हैं। ऐसा कुछ नहीं हुआ है जैसा आप सोच रहे हो। 

शिवा हैरान रह गया कि पापा अपनी बहु को अपने बेटे के ख़िलाफ़ भड़का रहे हैं। वो ध्यान से सुनने लगा। 

राजीव: तुमको विश्वास दिला दूँ अभी के अभी? 

मालिनी: कैसे दिलाएँगे? 

राजीव: वो मुझपर छोड़ो। बोलो अभी इनकी पोल खोलूँ? 

शिवा की साँसे रुकने लगी। वो कुछ कर भी नहीं सकता था। 
मालिनी: ठीक है दिलाइए विश्वास। 

राजीव : ठीक है देखो अभी दिलाता हु पर तुमको चुप रहना होगा। 

मालिनी: ठीक है। 

राजीव ने अब सरला को फ़ोन लगाया। और फ़ोन स्पीकर मोड में रख दिया। 

सरला: हेलो। 

राजीव: कैसी हो मेरी जान। 

शिवा उसके इस सम्बोधन से चौंका और सिर पीट लिया । उसे पापा की चाल समझ में आ गयी थी। 

सरला: मैं ठीक हूँ । पर आप मेरी बेटी को तंग तो नहीं कर रहे हो? 

राजीव : अरे नहीं नहीं । वो अभी किचन में है। वो बहु को आँख मार कर बोला। 

शिवा समझ गया कि वो सरला के मुँह से सब उगलवा लेगा। उसे समझ नहीं आया कि वो क्या करे? वो चुप चाप खड़ा अपने राज़ का पर्दाफ़ाश होते देखता रहा। 

सरला: ओह और कुछ उसको तो नहीं बता दिया आपने? 

राजीव: अरे कुछ नहीं बताया। पर लगता है तुम अपने दामाद को मिस तो कर रही हो? 

सरला: आप भी वही बात हमेशा क्यों करते हो? 

राजीव: अरे हमेशा कहाँ ? आज कितने दिन बाद तो हम बात कर रहे हैं? बताओ ना शिवा का लण्ड याद आता है कि नहीं? उसने तुमको बड़ी मस्ती से चोदा था ना? 

शिवा ने अपना सिर पीट लिया। वो जानता था कि वो और उसका सच अब मालिनी के सामने नंगा होने वाला है। पापा कमीनेपन पर उतरे हुए थे। 

सरला: हे भगवान कितनी गंदी बातें करते हैं आप। मुझे इस पर बात नहीं करनी है। 

राजीव: अरे जान तुम भी ना , अरे मुझसे कैसा शर्माना? हम तो कई बार मज़े कर चुके हैं? अच्छा ये बताओ कि कौन अच्छा चोदता है मैं या शिवा? 

मालिनी का चेहरा तनाव में आ गया था। पता नहीं मम्मी क्या जवाब देंगी? शिवा भी परदे के पीछे छिपा हुआ बहुत तनाव में खड़ा हुआ ध्यान से सरला के जवाब का इंतज़ार कर रहा था ।

सरला: उफफफ क्या कोई एक औरत से ऐसी बात करता है क्या? छी आप बहुत गंदे हो। 

राजीव: अरे बता भी दो ना । प्लीज़ क्यों भाव खा रही हो? 

सरला: देखो आप में अनुभव है और आपके साथ बहुत मज़ा मिला था। पर शिवा जवान है उसकी कमर की ताक़त का आप मुक़ाबला नहीं कर सकते।उफफफफ क्या ताक़त है उसके धक्कों में। 

यह सुनकर उधर मालिनी के चेहरे का रंग उड़ गया और इधर शिवा ने भी अपना सिर पीट लिया। वो जानता था कि आज के बाद सबकी ज़िंदगी बदल जाएगी। पापा अपने कमीनेपन का सबूत दे चुके थे। नगीना सी बहु का दिल टूट गया था। और शिवा को समझ नहीं आ रहा था कि अब वो क्या करे ? वह चुपके से घर से बाहर आया और दुकान को चला गया।
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

मालिनी अपने कमरे में आकर सोचने लगी कि आख़िर मुझमें क्या कमी थी जो शिवा मम्मी से चक्कर चला बैठे ।फिर उसे पापा की कही हुई बात याद आइ कि हर मर्द इधर उधर मुँह मारना चाहता है बशर्ते उसे मौक़ा मिले। और मम्मी तो मौक़ा देने को मानो तय्यार ही बैठी थी। वह सोचने लगी कि ग़लत तो वह ख़ुद भी कर रही थी, जो पापा के साथ इतनी आगे बढ़ गयी थी। फिर वो सोची कि सब करने के बाद भी वो अब तक पापा से चुदी नहीं थी। पर अब शायद पापा को रोकने का कोई मतलब बचा नहीं था। उसने फ़ैसला किया कि अब ये सब शिवा के बारे में जानकार उसे पापा की इच्छा पूरी कर देनी चाहिए। पहले वो थोड़े शंसय में थी पर अब मानो पूरी तस्वीर साफ़ हो चुकी थी। बस अब उसे पापा को हरी झंडी दिखानी थी। वो अब दिन में उनकी और रात में शिवा की बीवी बनकर रहने को मानसिक रूप से तय्यार हो चुकी थी। यह फ़ैसला लेने के बाद अब वो हल्का महसूस करने लगी। 

उधर राजीव बड़ा ख़ुश था क्योंकि आज उसने अपना आख़री दाँव खेल दिया था। वो यह मान कर बैठा था कि अब मालिनी उससे चुदवाने को मान ही जाएगी। 

उधर शिवा बहुत ही अप्सेट था और घर से निकल कर दुकान जाते हुए सोचा कि इस परस्तिथि में कौन उसे कुछ सलाह दे सकता है। उसे असलम की याद आइ। पता नहीं क्या सोचकर उसने कार खड़ी की और उसे फ़ोन लगाया। 

असलम: हाय आज कैसे हमारी याद आइ? 

शिवा: यार तुम कहाँ हो? मुझे तुमसे मिलना है। 

असलम: मैं घर आया हूँ खाना खाने। आजा तू भी खा लेना। 

शिवा: यार घर पर बात नहीं हो पाएगी। कहीं बाहर मिलते हैं। 

असलम: यार मेरी आयशा से मैं कुछ नहीं छिपाता तू आ जा हम मिलकर बात करेंगे। 

शिवा: ठीक है मैं आता हूँ। तू पता भेज sms से।

थोड़ी देर में शिवा असलम के घर पहुँचा। असलम ने उसे आयशा से मिलवाया। वो शक्ल से बहुत साधारण दिखने वाली औरत थी पर भगवान ने उसे ग़ज़ब का फ़िगर दिया था। दुबली पतली काया में पूरी ३८ की चूचियाँ और भारी नितम्ब उसकी पतली कमर से बहुत कामुक लग रहे थे। पेट भी गोरा सपाट था। उसने साड़ी पहनी थी। जब वो पानी लायी तो उसकी एक चूचि से पल्लू हटा हुआ था। उफफफ आधी चूचि बाहर थी ब्लाउस के और शिवा को अपने लण्ड में हलचल सी महसूस हुई। 

असलम ने देखा कि उसकी आँखें आयशा की चूचि पर थी वो मन ही मन मुस्कुराया और बोला: हाँ यार बता क्या बात है? क्यों इतना अप्सेट सा हो रहा है? 

शिवा आयशा की ओर देखा और चुप रहा। 

असलम: यार आयशा से कुछ छिपाने की ज़रूरत नहीं है। वो मुझसे ज़्यादा स्मार्ट है। वो तुमको एकदम सही सलाह देगी। 

शिवा: पर ये बात हम तीनों के अलावा किसी को पता नहीं चलना चाहिए। 

आयशा: भाई साहब ये हमारे बीच ही रहेगी। आप बिना संकोच बोलो। 

शिवा: असल में बात ही कुछ अजीब सी है। फिर वो अपनी और सरला की सेक्स की बात उनको बताया और साथ ही मालिनी और ससुर के बीच चल रहे चक्कर की बात भी किया। वो पूछा: मुझे अब क्या करना चाहिए। 

आयशा: अब आपको क्या करना है? जो भी करना है मालिनी करेगी। वह अब आपके पापा का लेकर ही रहेगी। आप उसको रोक थोड़े ना पाओगे। 

शिवा उसकी भाषा से चौंक गया और बोला: ओह ये तो सच है भाभी पर इस सब का अंत क्या होगा? 

आयशा: वही जो हमारी कहानी का हुआ था। क्यों असलम सही कहा ना? 

असलम मुस्कुरा कर: हाँ लगता है इनकी कहानी का भी वैसा ही सुखद अंत होगा जैसा हमारा हुआ था। 

शिवा हैरानी से : क्या हुआ था? मैं समझा नहीं। 

असलम: अरे ये जब हमारे घर शादी होकर आयी तो मेरे अब्बा अम्मी और मेरा छोटा भाई साथ में हो थे। अब ये तो मस्त १८ साल की जवान गदराई हुई लड़की थी। पापा और मेरे भाई की नीयत ख़राब हो गयी। अब्बा तो जैसे पागल ही हो गए थे। इसने मना किया तो वो मुझसे नाराज़ होकर मुझे घर से निकालने को तय्यार हो गए। उस समय मेरी नौकरी भी नहीं थी। तब अम्मी ने बात को सम्भाला और आयशा को मनाया कि अब्बा से चुदवा ले। आयशा अम्मी की बात मान गयी और घर में शांति बरक़रार हो गयी। बाद में ये अपने देवर से भी चुदवाने लगी। पापा ने मुझे कहा था कि मैं तुम्हारी बीवी को चोदता हूँ इसलिए तुम चाहो तो मेरी बीवी को चोद सकते हो। मेरी अम्मी सौतेलि थी तो मैं भी उनको चोदने लगा। इस तरह पूरा परिवार ही एक दूसरे से चुदाई करने लगा। फिर तो कई बार हम सामूहिक चुदाई भी किए। फिर मेरी नौकरी लगी और मुझे यहाँ आना पड़ा। अब भी अब्बा अम्मी आते हैं तो ख़ूब मज़ा करते हैं। 

शिवा उसकी बातें आँखें फाड़ कर सुन रहा था और उसका लण्ड पैंट में पूरा खड़ा हो कर तंबू की शक्ल ले चुका था। इसका मतलब है कि वो सब भी ऐसी सामूहिक पारिवारिक चुदाई का आनंद ले सकते हैं । उफफफफ कितना मज़ा आएगा अगर पापा और वो मिलकर मालिनी को चोदेंगे जैसे वो ब्लू फ़िल्म में चोद रहे थे ।

शिवा ने देखा कि आयशा उसके लण्ड के उभार को ग़ौर से देख रही थी। असलम ने भी ये नोटिस किया और मुस्कुरा कर बोला: यार तेरा तो खड़ा ही हो गया घरेलू चुदाई का सोचकर। आयशा कुछ करो यार इसका । देखो बेचारा कैसे तड़प रहा है। 

शिवा चौंककर असलम को देखा और बोला: अरे यार क्या बोले जा रहा है। सोच समझ कर बोल। 

असलम: यार मैंने तो पहले भी कहा था कि मैं वाइफ़ सवेप्पिंग में विश्वास करता हूँ। मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता । 

शिवा: पर मैं नहीं जानता कि मालिनी इसके लिए तय्यार होगी कि नहीं। 

असलम: अरे यार एक बार सामूहिक चुदाई का चस्का लग गया ना तो वो ख़ुद वेरायिटी ढूँढेगी। तभी मुझसे चुदवा देना उसको। अभी तो तू आयशा को चोद कर अपना लण्ड शांत कर ले। मैंने खाना खा लिया है और वापस ऑफ़िस जा रहा हूँ। तू पहले इसे खा और फिर खाना भी खा। चल मैं चलता हूँ। 

शिवा उसे हैरानी से जाते देखता रहा और फिर आयशा बोली: भाई साब बेडरूम में चलें? 

शिवा ने उसकी मस्त जवानी का जायज़ा लिया और खड़े होकर बोला: चलो किधर है बेडरूम? 

आयशा उसके आगे आगे गाँड़ मटका कर चलने लगी। बेडरूम में आकर वो पलटी और तभी शिवा ने उसको बाहों में भींच लिया और उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए। शिवा सोचा कि उफफफ क्या गरम जवानी है। अब वो उसकी गारदन और कन्धों को भी चूमने लगा। आयशा भी अब उसका साथ देने लगी। जल्दी ही वो दोनों एक दूसरे को चूमने लगे। शिवा के हाथ उसके कमर से होकर उसके चूतरों पर ले गया और उनको दबाने लगा। आयशा भी बड़ी बेशर्मी से अपना हाथ उसके पैंट के ऊपर से लेज़ाकर उसके लौड़े को दबाने लगी। 

आयशा: आऽऽऽऽह आपका बहुत बड़ा है। वो उसके लौड़े को ऊपर से नीचे तक महसूस करके बोली। शिवा भी अब उसका पल्लू गिराया और उसकी मस्त चूचियाँ ब्लाउस के ऊपर से दबाने लगा। अब वो उसकी ब्रा का हुक खोला और ब्लाउस का हुक भी खोल दिया। मोटे मोटे ३८ C कप के चूचे देखकर वो मस्ती से दबाने लगा। फिर वो उसको बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आकर उसके होंठ और चूचियाँ चूसने लगा। फिर वो उठा और अपनी पैंट और चड्डी एक साथ उतारकर अपना लौड़ा उसके मुँह के पास ले गया। आयशा मज़े से उसे दबाकर चूसने लगी। उसकी जीभ सुपाडे पर मज़े से घूम रही थी। तभी शिवा का फ़ोन बजा और वो देखा कि दुकान से फ़ोन था। उसने बात की और आयशा को बोला: जान जल्दी से चुदाई ख़त्म करनी होगी। दुकान में कुछ सप्लाइअर्ज़ आए हुए हैं । फिर वह उसकी साड़ी और पेटिकोट को एक साथ उठाया और उसकी फूलों वाली पैंटी का गीलापन देखकर समझ गया कि माल गरम है।उसने पैंटी नीचे कर उतारी। अब वो उसकी टाँगे फैलाया और अपना लण्ड उसकी गीली बुर में डाला और चुदाई में लग गया। आयशा की आऽऽऽह निकल गयी। वो अब मज़े से चुदवाने लगी। आयशा: आऽऽऽऽऽऽऽह आपका तो अब्बा जितना ही मोटा है। बहुत मज़ा आ रहा है। हाऽऽऽय्यय। 

शिवा चोदते हुए: आऽऽऽऽह अब्बा कितनी बार आते हैं यहाँ ? 

आयशा: आऽऽऽऽऽऽह महीने में एक बार ८/१० दिन के लिए । और बहुत बुरी तरह से चोदते है जैसे अभी आप चोद रहे हो। 

शिवा: असलम भी अपने अब्बा के साथ चोदता है तुमको? 

आयशा: हाँआऽऽऽऽऽऽ दोनों रात भर मेरी बजाते है। 

शिवा ने अपना हाथ नीचे लेज़ाकर उसकी गाँड़ के छेद का सहलाया। वो जगह पूरी गीली थी क्योंकि बुर का पानी नीचे बह रहा था। उसने अपनी दो ऊँगली उसकी बुर के रस से गीली की और उसकी गाँड़ में डाल दिया। वो चिल्लाई: आऽऽऽऽऽऽह बहुत मज़ा आ रहा है। और ज़ोर से चोओओओओओओदो । 

शिवा: ह्म्म्म्म्म लगता है दोनों तुम्हारी गाँड़ भी मारते हैं। 

आयशा: आऽऽऽऽऽह हाँआऽऽऽऽ दोनों को बहुत मज़ा आता है गाँड़ मारने में। 

शिवा: और तुमको? 

आयशा: हाऽऽऽऽऽय्य मुझेएएएएए भी बहुत अच्छाआऽऽऽऽ लगता है। आऽऽऽऽऽऽऽह अब्बा तो मुझे कई बार दिन भर नंगी रखते हैं। और ख़ुद पूरे कपड़े पहने रहते हैं। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ ।क्या मस्त चोओओओओओद रहे हो आऽऽऽऽऽप। 

शिवा उसकी बात सुनकर उत्तेजित होकर: आऽऽऽऽह बहुत मस्त माऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽल हो तुम । अब वो दोनों उन्न्न्न्न्न्न्न करके झड़ने लगे। 

शिवा को जल्दी थी सो वह तय्यार होकर जाने लगा। 

आयशा वैसी ही नंगी पड़ी हुई बोली: अगली बार मालिनी को लाना और असलम से चुदवाना। 

शिवा हँसकर: अगर वो मान गयी तो पक्का लाऊँगा। वैसे उसे तुम्हारे ससुर याने अब्बा से भी चुदवाना चाहिए। 

वो उसको चूमा और बाहर निकल गया। उसे जल्दी से दुकान जो पहुँचना था। 

उधर सरला बच्चों को स्कूल और कोलेज भेजकर पसीना पोंछ रही थी। उसके दिमाग़ में वही बात घूम रही थी कि पता नहीं राजीव मालिनी के साथ कैसा व्यवहार करेगा। तभी राकेश का फ़ोन आया: मम्मी हमारे कोलेज में हड़ताल हो गयी है। मैं वापस आ रहा हूँ। कुछ लाना है क्या। 

सरला: हाँ बेटा दो सब्ज़ियाँ ले आना। बस और कुछ नहीं। 

सरला जाकर अपनी जेठानी से थोड़ी देर बात की और फिर जब वो सोने लगी तो वह अपने कमरे में आकर बैठी थी तभी राकेश आ गया। वह आकर सरला के पास बैठा और बोला: मम्मी आप कुछ परेशान दिख रही हो। 

सरला: हाँ मैं मालिनी का सोच रही हूँ। उसका ससुर उसके पीछे पड़ा है। 

राकेश: मम्मी दीदी बहुत स्ट्रोंग है वो सम्भाल लेगी। आप मेरे ख़याल रखो । दीदी की चिंता छोड़ो। 

पिछले दिनों राकेश अपनी मम्मी के काफ़ी क़रीब आ गया था। वो अब किचन में अपनी मम्मी को पीछे से पकड़ कर उसके गाल और गरदन चूम लेता था और उसकी चूचियाँ भी ब्लाउस के ऊपर से ही दबा भी देता था। कई बार अपना लण्ड भी मम्मी की गाँड़ में रगड़ देता था । सरला भी अब उसको थोड़ा बहुत मज़ा ले लेने देती थी और बाद में डाँट कर भगा देती थी। किचन में कई बार वो अपना लण्ड लोअर से बाहर निकाल कर मम्मी को पकड़ा भी देता था। वो भी मस्ती से थोड़ा सा सहला देती थी। 

आज भी राकेश मम्मी को अपनी गोद में खींच कर लिटा लिया और सरला अब उसकी गोद में लेटी हुई थी और बोली: क्या कर रहा है बदमाश? 

राकेश: मम्मी आपके रूप का रसपान कर रहा हूँ। ये कहकर वो सरला के हाथों को सहलाने लगा। सरला की चिकनी बग़ल पसीने से भीगी हुई दिख रही थी। वो नीचे झुका और वहाँ नाक लगाकर सूँघते हुए बोला: आऽऽह मम्मी क्या मादक गंध है आपकी। उफफफफ । 

सरला को अपनी पीठ पर उसका खड़ा लण्ड गड़ने लगा था। उसका पल्लू नीचे गिरा हुआ था और उसके बड़े बूब्ज़ ब्लाउस फाड़ने को मानो तय्यार थे। राकेश ने उसके बूब्ज़ को दबाया और बोला: मम्मी खोलूँ इनको ? चूसने की इच्छा हो रही है। 

सरला: नहीं ऊपर से ही दबा ले। बाद में देखेंगे। 

राकेश मचल कर बोला : मम्मी हमेशा बाद में देखेंगे कह देती हो। मुझे आपको चोदने को कब मिलेगा? वो यह कहकर झुका और अपनी मम्मी के होंठ चूसने लगा और चूचियाँ दबाने लगा। वो बोला: अब तो दीदी का भी जुगाड़ हो गया और आपका भी। बस मेरा ही कुछ नहीं हो पा रहा है। वह यह कहकर मम्मी की साड़ी और पेटिकोट उठाने लगा । अब सरला की जाँघे नंगी होकर उसे व्याकुल कर रही थी। वह जाँघों के चिकनेपन से मस्त होकर बोला: मम्मी मैं क्या कुँवारा ही मर जाऊँगा। 

सरला हँसकर : मरे तेरे दुश्मन। अच्छा चलो आज रात को तुम्हारा कुँवारापन छीन लेती हूँ। तू भी क्या याद रखेगा । आज रात हम सुहागरात मनाएँगे। ठीक है? 

यह सुनकर राकेश का उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो गया। वो अपने हाथ को उसकी जाँघों के बीच ले गया यर बुर को दबाने लगा । सरला पैंटी तो पहनती ही नहीं थी। 

अब सरला ने पानी जाँघों को चिपका लिया और बोली: बदमाश रात का इंतज़ार कर। 

राकेश : अच्छा मम्मी रात का इंतज़ार करूँगा।मम्मी सुहागरात में क्या होगा? 

सरला: मैं तुझे एक सामान की लिस्ट दूँगी। तू वो ले आना शाम को ठीक है? फिर रात को ११ बजे मेरे कमरे में आना और अपनी मम्मी के साथ सुहागरात मनाना। 

रात के मज़े का सोचकर राकेश बहुत उत्तेजित हो गया और बोला: आऽऽह मम्मी आपके नीचे मेरा लण्ड दब रहा है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मेरा झड़ जाएगा। सरला हँसकर उठी और उसके लण्ड को पैंट से बाहर निकाली और उसने देखा कि वो आँसू बहा रहा था वो हँसकर उसको चूसने लगी और दो मिनट में ही उत्तेजना से भरकर राकेश आऽऽऽहहह मम्मीइइइइइइइइ मैं गयाआऽऽऽऽऽऽऽऽ कहकर अपनी मम्मी के मुँह में झड़ने लगा। सरला भी मस्ती में आकर पूरा रस पी गयी और बोली: उफफफफ कितना माल इकट्ठा करके रखा था तूने? फिर वो बड़े प्यार से अपने पल्लू से उसका लण्ड पोंछी और अपना मुँह भी साफ़ की। 

राकेश : मम्मी लिस्ट दो ना शाम को क्या लाना है? 

सरला: अभी इतनी जल्दी क्या है। शाम को दे दूँगी। 

राकेश: मम्मी पता नहीं कब रात होगी? आऽऽहहह । 

सरला: चल बदमाश अब भाग यहाँ से । मुझे आराम करने दे। 

राकेश हँसकर अपने कमरे में चला गया। 

उधर मालिनी दोपहर के खाने के लिए राजीव को आवाज़ दी। खाना खाते हुए मालिनी बोली: पापा आप किसी पंडित को जानते हैं क्या? 

राजीव चौंककर : हाँ मगर क्यों? तुम्हें पंडित से क्या काम आ गया? 

मालिनी: आप खाना खा कर उससे पूछना कि किसी शुभ काम के लिए अच्छा दिन और समय बताए वो। 

राजीव: बेटी मैं समझा नहीं? 

मालिनी: पापा इसमें समझने का क्या है? मैं सिर्फ़ यह जानना चाहती हूँ कि किसी काम के लिए शुभ दिन और समय क्या है? बस यही। 

राजीव उठकर हाथ धोया और फ़ोन लगाया: हाँ पंडित जी मेरी बहु जानना चाहती है कि आजकल कैसा समय चल रहा है? 

पंडित: मतलब ? मैं समझा नहीं। 

राजीव : लो आप उसी से बात कर लो। समझा तो मैं भी नहीं। 

मालिनी: पंडित जी मान लो मैं कोई नया काम करना चाहती हूँ तो कौन सा दिन शुभ होगा ? 

पंडित: ओह तो ऐसा कहो ना। मैं देखता हूँ। फिर वो बोला: बेटी कल का दिन शुभ है। 

मालिनी: और समय ? 

पंडित: बेटी कल सुबह १० बजे से शाम को ७ बजे तक का समय शुभ है। 

मालिनी: धन्यवाद पंडित जी। वह फ़ोन काट दी। 

राजीव : बेटी कौन सा काम शुरू करोगी जिसके लिए शुभ समय का इंतज़ार हो रहा है। 

मालिनी: बस आप इंतज़ार करो कल का। 

राजीव हैरानी से उसे देखता रह गया। वो सोचा कि पता नहीं क्या चल रहा है इसके मन में। 

मालिनी: पापा अब मैं आराम करूँगी। और वो अपने कमरे में चली गयी। राजीव भी उलझा सा अपने कमरे में आ गया। 

जल्दी ही कई लोगों के जीवन में बहुत से बदलाव आने वाले थे।
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

शाम को मालिनी तय्यार होकर बाज़ार जाने लगी तो राजीव बोला: बेटी मैं भी चलता हूँ ना तुम्हारे साथ? 

मालिनी: पापा यहीं पास में जाना है वहाँ कार की कोई ज़रूरत नहीं है। मैं एक घंटे में आती हूँ। 

राजीव : ठीक है बेटा जैसी तुम्हारी मर्ज़ी। 

मालिनी बाज़ार चली गयी। वो एक घण्टे के बाद आयी और समान सम्भालने लगी। फिर वो चाय बनाई और राजीव को आवाज़ दी। दोनों चाय पीने लगे। राजीव ने उसे छेड़ने की कोशिश की पर उसने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया। वो हैरान था कि आख़िर इसको क्या हो गया है? ये ऐसा क्यों बर्ताव कर रही है। शायद इसे शिवा और सरला की चुदाई का सुनकर लगता है बहुत धक्का लगा है। उसने मालिनी की जाँघ सहलाई पर उसने उसका हाथ हटा दिया।राजीव थोड़ा परेशान होकर वह वहाँ से उठकर अपने कमरे में चला गया। मालिनी उसे जाते देख कर मन ही मन मुस्करायी। 

उधर शिवा दुकान में व्यस्त हो गया। बाद में जब ख़ाली हुआ तो सोचने लगा की आज जब मालिनी को पता चल गया है कि वो सरला को चोदा है तो आज वो ना जाने कैसे रीऐक्ट करेगी। 

उधर शाम को सरला ने एक लिस्ट राकेश को थमा दी और पैसे भी दे दिए। राकेश ने देखा कि लिस्ट में राशन का सामान था और फूल भी थे और एक एक पोंड का केक और रूम स्प्रे भी था। 
सरला लिस्ट देकर बोली: सामान लाकर मुझे ही देना। बच्चों को मत दे देना। 

राकेश हाँ कहकर चला गया। सामान लाकर उसने अपनी माँ को दिया। वो उसे लेकर किचन में चली गयी। राकेश को लग रहा था पता नहीं कब रात होगी, और कब वो मम्मी के साथ सुहागरत मना पाएगा।

सरला ने भी सब सामान चेक किया और मुस्कुराकर फूलों को फ्रिज में रख दिया ताकि मुरझा ना जाएँ। उसने गुलाब की पंखड़िया मँगाई थीं । अचानक उसको अपने बुर में ज़ोर की खुजाल मची और वो बुर को खुजा कर सोची कि चल तेरी प्यास आज तेरे से बाहर निकला तेरा बेटा ही बुझाएगा। 

उधर रात आठ बजे शिवा दुकान से वापस आया और आकर मालिनी के साथ बेडरूम में जाकर कपड़े बदलने लगा। मालिनी: आप खाना खाओगे या पहले चाय बनाऊँ? 

शिवा: मैं नहा कर आता हूँ फिर खाना ही खाऊँगा। वह बाथरूम में घुस कर सोचा कि आज पहली बार दोनों ने एक दूसरे को प्यार नहीं किया। पता नहीं ऐसा क्यों हुआ? मालिनी ने भी अपनी ओर से कोई आतुरता नहीं दिखाई और ना ही मैंने- वो सोचा। फिर पता नहीं उसे क्या सूझा कि वो पूरा नंगा होकर चिल्लाया: मालिनी ज़रा एक मिनट के लिए आना तो। 

मालिनी बाथरूम के दरवाज़े के बाहर आकर बोली: क्या हुआ? 

शिवा ने दरवाज़ा खोला और वो पूरा नंगा था। उसका लण्ड साँप की तरह लटक रहा था। मालिनी उसके लण्ड को देखी और बोली: क्यों आवाज़ दी? 

शिवा ने मुस्कुराकर उसको बाथरूम में खींच लिया और शॉवर चालू कर दिया। अब मालिनी के कपड़े भी भीगने लगे। वो चिल्लाई: उफ़्फ़ क्या कर रहे हो? पूरा भिग़ा दिया। 

शिवा: अरे ये सज़ा है मुझे प्यार नहीं करने की। आह पहली बार तुमने मुझे किस्स नहीं किया दुकान से वापस आने पर।

मालिनी: आपने भी तो नहीं किया था। आप भी चाहते तो कर सकते थे। आपको क्या सज़ा दूँ? 

शिवा: तुम मेरे लण्ड को सज़ा दो। इसे ज़ोर से चूसो। 

अब मालिनी भी मस्ती में आकर: वाह ये कोई सज़ा थोड़े ना होगी। ये तो इसकी मज़ा हो जाएगी। वो उसके लण्ड को सहलाकर बोली। 

शिवा : अरे तो इसको मज़ा भी तुमको ही देना है ना? 

मालिनी ने आँखें मटका कर कहा: अच्छा सिर्फ़ मैंने ही देना है क्या? 

शिवा समझ गया कि उसका इशारा किधर को है पर वो अनजान बनकर बोला: हाँ ये बिचारा आपके भरोसे ही तो है। चलो ना कपड़े उतारो बहुत मन कर रहा है चुदाई का। 

मालिनी हँसकर: अब गीली हो गयी हूँ तो कपड़े तो उतारने ही पड़ेंगे । फिर आप भी अपना काम कर ही लो। यह कह कर वो अपनी साड़ी निकाली और फिर एक एक करके गीले कपड़े उतारे और फिर शिवा उसके नंगे बदन को अपने बदन से चिपका कर नहाने लगा। दोनों के हाथ एक दूसरे के जवान बदन पर चल रहे थे। शिवा का लण्ड अब पूरी तरह से तन गया था। मालिनी के भी निपल्ज़ पूरे खड़े थे और बुर भी बिलकुल पनिया गयी थी। पानी उसकी बड़ी चूचियों के ऊपर से गिर कर नीचे उसके पेट पर गिरता हुआ मस्त दिख रहा था। शिवा मन ही मन में उसकी चूचियों की तुलना आयशा और सरला से करने लगा। इसमे कोई शक नहीं था कि आयशा की ज़्यादा बड़ी और सेक्सी थीं । दूसरे नम्बर पर मालिनी की थोड़ी छोटी पर ठोस चूचियाँ थी। सरला की बहुत बड़ी और थोड़ी नरम हो चलीं थीं । अब वो नीचे देखा और पेट और जाँघें देखकर तुलना करने लगा। यहाँ मालिनी एक नम्बर पर थी। पेट और जाँघें भरी हुई गदराई हुईं थीं। आयशा की थोड़ी पतली थी। सरला की उम्र का असर उसके पेट और जाँघों पर आने लगा था। अब वो बुर की सोचा और अब फिर से मालिनी की ही सबसे टाइट थी उसके बाद आयशा और फिर सरला का नम्बर आता था। अब वो मालिनी के बदन को पोंछने लगा और जब उसको घुमाया और उसकी पीठ पोंछने लगा। तब उसने उसके चूतरों को देखा और अब सोचा कि ये तो मस्त गोल और उभरे हुएँ है। पर ये तीसरे नम्बर पर है। आयशा के इससे ज़्यादा भरे हुए चूतर दूसरे नम्बर पर होंगे। और सरला के बड़े बड़े उभरे हुए चूतर सबसे मस्त और पहले नम्बर पर हैं। वो सोचा कि वो क्या उलटा पुलटा सोच रहा है। फिर वो मालिनी को आगे की ओर झुकाया और पीछे से उसकी बुर में ऊँगली डाला और पाया कि वो गीली थी । अब उसने पीछे से उसकी बुर में अपना मोटा लौड़ा पेल दिया और उसकी चूचियाँ मसलकर उसको चोदने लगा। मालिनी भी आऽऽहह्ह करके चुदवाते हुए अपनी गाँड़ पीछे को दबाकर पूरा लण्ड निगलकर मज़े लेने लगी। वो सोच रही थी कि मम्मी को शिवा ने किस आसान में चोदा होगा। तभी शिवा ने उसकी चूचियों की घुंडियाँ मसली और वो बहुत मस्त होकर सोची कि मम्मी की तो बड़ी बड़ी छातियाँ हैं पता नहीं कितना मज़े से दबाया होगा शिवा ने। अचानक वो सोची कि उसको उत्तेजना क्यों हो रही है यह सोचकर कि शिवा ने मम्मी को कैसे चोदा होगा? उसे तो ग़ुस्सा आना चाहिए। पता नहीं ऐसा क्यों है? वो उलझ सी गयी। तभी शिवा ने अपनी एक ऊँगली उसकी क्लिट पर रखी और वो मस्ती से उइइइइइइ माँआऽऽऽऽ चिल्ला उठी। फिर थोड़ी देर की ज़बरदस्त चुदाई के बाद वो हाऽऽयययय कहकर झड़ने लगी। शिवा भी जल्दी जल्दी धक्के मारकर झड़ गया। 

थोड़ी देर बाद जब कपड़े पहन कर वो बाहर कमरे में आए तो शिवा बोला : जान मज़ा आ गया। मस्त चुदाई हुई आज तो। 

मालिनी मुस्कुराती हुई बोली: अच्छा ! आपको कब मज़ा नहीं आता इसमें ? 

दोनों हँसने लगे। 

खाने के बीच कुछ ख़ास नहीं हुआ। 

मालिनी जब राजीव के कमरे में दूध लेकर गयी तो शिवा अभी भी ड्रॉइंग रूम में टी वी देख रहा था ।राजीव ने मालिनी को उतावलेपन से पकड़कर कहा: बेटा मुझसे कुछ ग़लती हुई क्या जो आज तुम मुझे अवोयड कर रही हो? 

मालिनी: नहीं पापा ऐसा कुछ नहीं है। आप दूध पी लो। वो हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली। 

राजीव उसकी चूचि दबाकर बोला: बेटा मुझे तो ये वाला दूध पीना है। 

मालिनी हँसकर बोली: पापा ये भी पिला दूँगी। अभी छोड़िए। शिवा बाहर ही बैठा है। 

राजीव ने उसके होंठ चूमे और उसे छोड़ दिया। 

शिवा और मालिनी अपने कमरे में गए। थोड़ी देर बात करने के बाद दोनों सोने की कोशिश करने लगे। चुदाई तो हो चुकी थी और शायद अब दोनों में से कोई भी शायद दूसरा राउंड नहीं चाहता था। मालिनी कल के अपने प्लान का सोच रही थी। और शिवा आयशा से हुई चुदाई और उससे मिले मज़े का सोच रहा था। आयशा किस मज़े से बता रही थी कि वो अपने ससुर से बड़े प्यार से चुदवाती है। फिर वो सोचा कि क्या मालिनी भी पापा से चुदवाएगी और शिवा और सरला की चुदाई का बदला लेगी। ये सोचकर उसका लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। इसी तरह के विचारों में उलझे दोनों नींद की आग़ोश में समा गए। 

राजीव भी मालिनी की हरकत और अजीब सा व्यवहार का सोचकर सो गया। 

पर कहीं कोई जाग रहा था वो था राकेश जो कि ११ बजने का इंतज़ार कर रहा था ।आज उसका सपना पूरा होने वाला था। आज उसकी मम्मी उसके साथ सुहागरात मनाने वाली थी। उसका लौड़ा पूरा टाइट था। वो उसे हल्के से सहला भी रहा था ।सरला भी पूरी तय्यारी से अपने बेटे को पूरा मज़ा देने का मन बना चुकी थी। वो जानती थी कि आज के बाद उसकी ज़िंदगी भी हमेशा के लिए बदलने वाली है। उसने अपने आप को देखा और सोची कि इतनी बूढ़ी भी नहीं हुई हूँ। वह आगे और पीछे से साड़ी में लिपटा अपना बदन देखकर ख़ुद ही अपने आप पर मुग्ध हो गयी। फिर उसने सब तय्यारियों का जायज़ा लिया। ठीक ११ बजे उसने राकेश को एक मिस्ड कॉल दिया ।राकेश तो इंतज़ार ही कर रहा था। वो झट से उठा और बाहर आकर शांत घर को देखा। सब सो रहे थे। वो सरला के कमरे में गया और धीरे से दरवाज़ा खोला। वहाँ घुप अँधेरा था। सरला की आवाज़ आयी: बेटा दरवाज़ा बंद कर ले।और बत्ती जला दे। 

राकेश ने अंधेरे में दरवाजा बंद किया और बत्ती जलायी। वह वहीं का वहीं खड़ा रह गया। कमरे में रूम फ़्रेशेनेर की ख़ुशबू फैली हुई थी। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं । बिस्तर के साइड टेबल पर दूध के दो गिलास रखे थे। केक भी रखा था। और उन सबके बीच में उसकी माँ दुल्हन के लाल लिबास में लिपटी बैठी थी ।उसने घूँघट से अपना मुँह छुपा रखा था। राकेश ने ऐसी सुहाग रात की कल्पना नहीं की थी। उसे समझ में आ गया कि मम्मी ने फ़िल्मी तरीक़ा अपनाया है। वो बहुत ख़ुश होकर बिस्तर पर बैठा और बोला: मम्मी थैंक यू । आपने तो समाँ ही बाँध दिया। उफफफफ क्या मस्त सजावट की है। 

सरला: मैं सोची कि तुझे शादी से पहले सुहागरात की ट्रेनिंग दे देती हूँ। 

राकेश: मम्मी आप भी ना। यहाँ आपके रहते शादी करना ही किसे है । मैं तो आपके साथ ही रहना चाहता हूँ। 

सरला: मैं तो आठ दस साल में बुढ़िया हो जाऊँगी और तू जवान का जवान ही रहेगा। इसलिए शादी तो मैं तेरी करूँगी ही। मुझे तू अपनी दूसरी बीवी की तरह रख लेना। 

राकेश: मम्मी ये सब छोड़ो और अपना घूँघट हटाओ। 

सरला: लो सुन लो इस अनाड़ी की बात। अपना घूँघट भी क्या मैं ख़ुद ही उठाऊँ? पागल कहीं का। वो तो तेरा काम है। और हाँ मुँह दिखाई में क्या देगा? 

राकेश मुँह लटका कर: मम्मी मैं क्या दे सकता हूँ? 

सरला हँसकर: वो टेबल पर रखा डिब्बा दे देना। 

राकेश ने देखा कि वो ज़ेवर का डिब्बा था। अब वो सरला के सामने आया और उसका घूँघट हटाया और अपनी माँ की सुंदरता को देखते ही रह गया। आज वो बहुत ही सजी हुई थी। आँखों में काजल और होंठों पर लाल लीपस्टिक क्या लग रही थी। लाल ज़रीदार साड़ी और वैसा ही ब्लाउस उसकी सुंदरता को मानो चार चाँद लगा रहे थे। अब उसने वो डिब्बा मम्मी को दिया और वो प्यार से बोली: तू ख़ुद ही पहना दे ना। 

राकेश ने डिब्बा खोला और उसमें एक सुंदर सा लॉकट था। वो उसकी चेन को खोल कर उसकी गरदन में डाला और ये करते हुए उसके हाथ उसकी छातियों को छू गए और उसका लौड़ा झटके मारने लगा। अब मालिनी ने उसे एक सिंदूर की डिब्ब्बी दी और बोली: चल मेरी माँग भर दे । अब मैं तुझे बता दूँ कि तू तीसरा मर्द है जो मेरी माँग भरेगा। पहला तेरा पापा उसके बाद तेरे ताऊ और अब तू मेरा बेटा। 

राकेश ने उसकी माँग भरी और उसका माथा चूम लिया। 

राकेश: मम्मी थैंक यू । आपने मुझे ये दर्जा दिया। मैं आपका पूरा ध्यान रखूँगा। इसी साल मेरी पढ़ाई पूरी हो जाएगी और जॉब लगते ही आप मेरे साथ रहना मेरी बीवी बनकर । 

सरला: हा हा वो सब बाद में देखेंगे। चल अब दूध पी ले इसमे मैंने बादाम और पिस्ता डाला है। अब सरला ने उसे भी दूध पिलाया और ख़ुद भी दूध पीकर बोली: वैसे आज तू भी बहुत प्यारा लग रहा है। 

राकेश झुककर सरला के होंठ पर अपने होंठ रखा और एक चुम्बन लिया। अब वो बोला: मम्मी आप आज सच में बहुत सुंदर लग रही हो।

सरला: आज मैंने एक पार्लर वाली को घर में बुलाया था । उसने मेरे चेहरे का मसाज़ किया है और मेरे चेहरे के बाल निकाले हैं। 

राकेश: मम्मी सिर्फ़ चेहरे के बाल? और बाक़ी जगह के बाल नहीं निकाले? 

सरला: चल बदमाश कही का। क्या बाक़ी के बाल मैं उससे निकलवाऊँगी? वो तो मैंने ख़ुद ही साफ़ किए है। 

राकेश: सच मम्मी आपने सब जगह के बाल साफ़ किए हैं? बताओ ना कहाँ कहाँ के किए हैं ? 

सरला बनकर: अभी तू देख ही लेगा की मैंने कहाँ कहाँ के साफ़ किए हैं । 

राकेश अब उसको अपनी गोद में खींच कर बोला: मम्मी मुझे कभी अकेला मत छोड़ना। 

सरला: नहीं रे तू अब हमेशा मेरे पास रहेगा। 

अब वो उसकी साड़ी का पल्लू गिराया और उसके ब्लाउस के ऊपर से उसकी छातियों को दबाकर बोला: मम्मी साड़ी उतार दूँ ? 

सरला: जैसी तेरी मर्ज़ी। 

राकेश अब उसकी साड़ी को उतारने की कोशिश किया। तब सरला ने उसे सिखाया कि साड़ी कैसी उतारी जाती है। अब सरला ब्लाउस और पेटिकोट में थी और बहुत मस्त लग रही थी। राकेश ने अब सरला के होंठ चूसते हुए उसकी छातियाँ दबानी शुरू की और वो भी उफफफफ करके उससे चिपक गयी। अब राकेश ने उसके ब्लाउस के हुक खोले और ब्लाउस को उतार दिया। वो भी बाहँ उठा कर उसकी मदद की। तभी वो देखा कि सरला का बग़ल उसकी आँख के सामने था। उसकी चिकनी बग़ल देख कर वो समझे गया किमम्मी ने यहाँ के बाल निकाले हैं। 

वो उसकी बग़ल सूँघा और फिर जीभ और होंठों से उसको चाटा और चूमा और बोला: आपने यहाँ के बाल साफ़ किए हैं। 

फिर उसने दूसरी बग़ल को भी चूमा और चाटा। ब्रा में क़ैद उसको बड़ी चूचियाँ अब उसकी आँखों के सामने थीं। वो उनको भी सहलाया और दबाया। अब वो उसके पेटिकोट के नाड़े को खोला और उठकर बैठा और सरला को लिटा दिया और पेटिकोट को निकालने लगा। सरला ने भी गाँड़ उठकर उसका साथ दिया। 

अब सरला ब्रा और पैंटी में बहुत मस्त माल लग रही थी। भरा हुआ गोरा बदन जैसे चुदाई के लिए चिल्ला रहा हो। राकेश बहुत उत्तेजित हो चुका था।

सरला: मुझे तो नंगा किए जा रहा है और ख़ुद पूरे कपड़े पहन कर बैठा है। 

राकेश: मम्मी, आप मेरे कपड़े खोल दो ना। 

सरला: सुहागरात में दुल्हन ऐसा नहीं करती। वो शर्माती जो है। 

राकेश अब अपना लोअर और टी शर्ट उतारा और अब वो सिर्फ़ चड्डी में था और उसका खड़ा लंड साफ़ दिखाई दे रहा था। सरला की बुर ने उसका आभास पाकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। अब वो सरला के ऊपर आकर उसकी चूचियाँ दबाकर उसके होंठ चूसने लगा। सरला के हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे। अब वो उसकी ब्रा खोलने की कोशिश किया पर उससे खुला नहीं। सरला हँसकर बोली : चल मैं सिखाती हूँ। फिर उसने उसे ब्रा का हुक खोलना सिखाया। अब उसकी बड़ी चूचियाँ राकेश के आँखों के सामने नंगी थी। वो उन पर झपट पड़ा और दबाकर चूसने लगा। सरला बोली: बेटा ये निपल्ज़ को ऊँगली और अंगूठे के बीच में पकड़कर मसलो। जब वो ऐसा ही किया तो वो सिसकारी मारकर बोली: उफ़्फ़्फ़।आऽऽऽह बड़ाआऽऽऽऽ अच्छा लग रहा है ।

अब वो उसकी पैंटी भी उतारा और सरला की बिना बालों की चिकनी बुर उसके सामने थी। उसने उसकी जाँघें फैलाया और वो मंत्र मुग्ध सा अपने जन्म स्थान को देखता रहा । उसकी बुर को बहुत देर देखने के बाद वो उसे सहलाया और फिर झुककर उसको चूमने लगा। सरला आऽऽऽह करके मज़े से भरने लगी। अब वो उठके अपनी चड्डी खोला और अपने मस्त लौड़े को बाहर निकाला और मालिनी को बोला/ आऽऽह मम्मी चूसो ना। 

सरला: नयी दुल्हन से पहली बार में इसे चूसने को नहीं कहना। समझे? और उसने चूसने से मना कर दिया। 

अब वो सोचा कि वो अपना लण्ड अंदर डाले। पर अनुभव नहीं था सो वह उसके ऊपर आया और उसकी सीधी रखी टाँगो के बीच अपना लंड अंदर डालने के लिए छेद के पास लगाकर दबाना शुरू किया। सरला हँसकर बोली: बुद्धू मेरी टाँगें तो मोड और बाहर की ओर झुका। 

अनाड़ी बलमा ने वैसे ही किया और अब स्वर्ग का द्वार खुला हुआ साफ़ दिखाई दिया। वो अब अपना लण्ड उसकी बुर के मुँह पर रख कर उसमें लंड दबाया और पूरी गीली बुर में वो सरसराता हुआ घुस गया। राकेश: उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मम्मीइइइइइइइइ । कहकर उसके होंठ चूसने लगा और दोनों बड़ी चूचियाँ मसलने लगा। 

सरला: आऽऽऽह बेएएएएएटा उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मस्त लग रहा है। हाऽऽऽऽययय। 

अब वो ऊपर नीचे होकर चुदाई में लग गया। सरला भी अब नीचे से कमर उछालकर पूरा लंड निगलकर उसे मस्ती से भरने लगी। सरला: उन्न्न्न्न्न उन्न्न्न्न आऽऽहहब फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽड़ दो बेएएएएएएएटा कहकर गाँड़ उछाल कर मज़े से चुदवा रही थी। उसने अपनी जीभ राकेश के मुँह में डाल दी जिसे वो मस्ती से चूसने लगा। क़रीब २० मिनट की चुदाई के बाद सरला आऽऽऽऽऽहहह मैं गयीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। 

अब राकेश भी आऽऽहहह कहकर झड़ गया। थोड़ी देर बाद दोनों अग़ल बग़ल में चिपक के लेटे हुए बातें करने लगे। 

सरला: तो सुहाग रात की ट्रेनिंग हो गयी तेरी? अब शादी के बाद अच्छी तरह से मज़ा ले लेना। 

राकेश ने उसके बड़े बड़े चूतरों को दबाकर कहा: मम्मी मैं तो शादी करूँगा ही नहीं। मैं तो बस आपका ही दीवाना हूँ। और आजमुझे सब कुछ मिल गया है आपसे। ये कहते हुए उसकी एक ऊँगली सरला के गाँड़ के छेद पर घूमने लगी। सरला: आऽऽऽहब सब कुछ मिल गया है तुझे? जहाँ तू ऊँगली डाल रहा है वो अभी कहाँ मिला है? 

राकेश: तो मम्मी दे दो ना वो भी। 

सरला हँसकर : आज ही सब कुछ ले लेगा क्या? वैसे वो ख़ुद भी गाँड़ मरवाना चाहती थी क्योंकि कई दिनों से वहाँ लण्ड नहीं ली थी। 

राकेश ने एक ऊँगली अंदर बाहर करते हुए कहा: मम्मी गाँड़ भी मरवा लो ना प्लीज़। 

सरला: आऽऽऽह ऊँगली बाहर निकाल । बिना तेल या क्रीम के जलन होती है। जा वहाँ क्रीम रखा है ला उसे और मेरी गाँड़ में लगा। पर पहले तेरा लंड चूसकर उसे खड़ा तो कर दूँ। 

अब वो अपने बेटे के लंड को चूसने लगी और राकेश तो जैसे सुख के सागर में डूब गया। उफफफफ क्या मस्ती से चूस रही थी वो। उसका लंड अब उसके गले के अंदर तक जा रहा था। राकेश बोला: मम्मीइइइइइइ रुकोओओओओओ । वरना मैं झड़ जाऊँगा। 

वो मुस्कुरा कर अपना मुँह हटाई और पेट के बल लेट गयी। उग्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ गोरे गोरे मोटे चूतर क्या मस्त दिख रहे थे। वो इनका ही तो दीवाना था। उसने पूरी ताक़त से उनको आटे की तरह गूँथना चालू किया।फिर उसकी दरार ने हाथ फेर कर बोला: मम्मी आज आपकी बुर और गाँड़ में एक भी बाल नहीं है, लगता है आज सफ़ाई की है। 

सरला: हाँ सफ़ाई तो की है पर सामने की। मेरे पीछे बाल आते ही नहीं। 

राकेश उसकी गाँड़ के छेद को सहलाते हुए: तो मम्मी ये नैचरल चिकनी है। आह । फिर वो उसको सहलाते हुए नीचे झुककर चूमने लगा और वहाँ जीभ फिराने लगा। सरला अब सिसकारियाँ भरने लगी। फिर वो बोली: उफफफफ बेटा अब क्रीम लगा और मार ले मेरी गाँड़ । राकेश ने ऊँगली में क्रीम लगाई और उसकी छेद में डालकर अंदर बाहर किया। सरला: आऽऽऽह बेटा अब दो ऊँगली डाल क्रीम लगाकर। 

अब उसकी दो उँगलियाँ अंदर बाहर होने लगी। अब सरला बोली: आऽऽह चल अब अपने लण्ड में क्रीम लगा और डाल मेरी गाँड़ में। पर एकदम धीरे धीरे डालना। ये कहकर वो अपनी गाँड़ हवा में ऊँची कर दी और अपने आप को हाथों का सहारा लेकर घुटने मोड़कर मानो कुतिया ही बन गयी। राकेश की आँखें उसके पिछवाड़े पर जम सी गयी थी। उफफफ क्या मस्त माल है मम्मी वो सोचा। अब वो उसके पीछे आकर अपने हाथों से उसके चूतरों को फैलाया और अपने लंड को क्रीम मल कर उसकी गाँड़ के छेद में रख कर छेड़ने लगा। 

सरला ने अपनी गाँड़ के छेद बाहर की ओर दबाकर उसको बड़ा किया और बोली: आऽऽऽऽऽह बेटा अब और ना तड़पा । अब डाल भी दे।

राकेश ने मस्त होकर अपना लंड उसकी गाँड़ में दबाना शुरू किया और वो आऽऽऽहहहह करके अपनी गाँड़ को पीछे दबाकर धीरे धीरे पूरा लण्ड निगल ली। फिर वो कमर हिलाकर अपनी गाँड़ में लंड को अजस्ट करके मज़े से भर गयी। अब सरला बोली: बेटा आऽऽहहहह मज़ा आऽऽऽऽऽऽ रहा है। चल अब फाड़ मेरी गाँड़। हाय्य्य्य्य। फिर वो मस्ती से उसकी चुदाई में लग गया। सरला ने उसके हाथ पकड़कर अपनी चूचियों पर रख दिए और वो मस्ती से उनको दबाने और निपल्ज़ मसलने लगा। राकेश की जाँघें सरला के गुदाज चूतरों से टकराकर थप्प थप्प की आवाज़ पैदा कर रही थी। तभी सरला ने उसका एक हाथ छाती से हटाकर अपनी बुर पर रखा और वो तीन उँगलियाँ अंदर डालकर उसे हिलाने लगा। उसका अँगूठा उसकी क्लिट को रगड़ रहा था। अब सरला आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह फ़ाआऽऽऽऽऽऽऽड़ दोओओओओओओओ मेरीइइइइइइइ
गाऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽँड़ । वो अब झड़ने लगी और राकेश की उँगलियाँ उसके कामरस से पूरी गीली हो गयीं थीं। वो भी अब अपना वीर्य उसकी गाँड़ में छोड़ने लगा। फिर वो लस्त होककर उसके बग़ल में लेट गया। 

सफ़ाई करके दोनों बैठे और सरला और राकेश ने केक काटा और एक दूसरे को खिलाया। फिर वो लिपट कर सोने लगे तो राकेश बोला: मम्मी आज आपने मुझे अपने तीनों छेदों का मज़ा दे दिया। थैंक यू । 

सरला: बेटा अब मैं तेरी हो गयी हूँ। अब तू जब चाहे मज़ा ले लेना। बस कभी कभी तेरे ताऊ जी को चान्स दे देना। वो हफ़्ते में एक बार तो चुदाई करते हैं । पर वो पहले ही इशारा कर देते हैं। 

राकेश: मम्मी मैं रोज़ आपके साथ सो सकता हूँ क्या ?

सरला: हाँ बेटा क्यों नहीं। फिर वो दोनों एक दूसरे को चूमकर आपस में लिपट कर सो गए। 

सुबह अचानक सरला ने महसूस किया कि राकेश उसको सीधा लिटा रहा है। इसके पहले वो कुछ समझ पाती वो अपना लंड क्रीम लगाकर उसकी सुखी बुर में दाल दिया और उसकी चुदाई में लग गया। वो मुस्करायी: अरे मुझे जगा तो लेता । पागल कहीं का। आऽऽऽहहह चल अब अच्छी तरह से चोद। हाऽऽऽय्यय। 

अब वो दोनों ज़बरदस्त चुदाई में लग गए। 

उधर सुबह को मालिनी की आँख खुली और वो फ़्रेश होकर अपनी नायटी में अपना बदन देखी और मुस्कुराई कि आज का दिन उसके लिए विशेष होने वाला है। फिर उसने एक नज़र शिवा पर डाली जो कि बेसुध सो रहा था। वो सोची कि कितना भोला दिख रहा है। पर पता नहीं अपने मन में क्या क्या राज़ छिपाए हुए है? वो बाहर आकर किचन में चाय बनाने लगी। आज उसकी बाई नहीं आने वाली थी क्योंकि उसने उसे आने से मना कर दिया था ये कहकर कि वो बाहर जाने वाले हैं एक दिन के लिए। आज उसे पूरा एकांत जो चाहिए था। वो मुस्कुराई और अपनी बुर को खुजा कर हाथ धोयी और राजीव को आवाज़ दी।
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

राजीव बाहर आकर चाय पीने लगा और मालिनी को घूरने लगा। वो चुपचाप चाय पीती रही । राजीव उसकी चुप्पी से असहज हो कर पूछा: बेटा क्या बात है? जब से तुमने शिवा और सरला की मस्ती का सुना है तुम थोड़ा अजीब सा व्यवहार कर रही हो? वह उसकी बाँह सहला कर बोला। 

मालिनी : कुछ नहीं पापा ऐसा कुछ नहीं है। सब ठीक है। 

अब राजीव उसकी नायटी के ऊपर से उसकी चूची दबाकर बोला: नहीं कुछ बात तो है, बेटा। बताओ ना? उफफफफ क्या मस्त चूचि है तुम्हारी। पता नहीं कब इनका रस पिलाओगी? 

मालिनी: पापा आप भी बस पीछे ही पड़े रहते हो। 

राजीव ने नोटिस किया कि आज वो उसका हाथ अपनी चूचि से नहीं हटा रही थी। अब वो उसकी चूची को ऊपर से सहलाना शुरू किया जहाँ से वो थोड़ी सी नंगी दिखाई दे रहीं थीं । मालिनी बोली: पापा आप छोड़िए ना मुझे शिवा को भी जगाना है। वैसे आज बाई भी नहीं आएगी तो काम भी ज़्यादा होगा ।

राजीव ने उसको अपनी गोद में खींचकर बिठा लिया और बोला: अरे बाई नहीं आएगी तो क्या हुआ? मैं तुम्हारी मदद करूँगा । बोलो क्या करना है। वो उसकी चूचियों को ऊपर से चूमकर बोला। 

मालिनी हँसकर: पापा आप पहले इनको छोड़िए। तभी तो मैं कोई काम कर सकूँगी। और हाँ देखती हूँ क्या मदद करते हो आप? 

राजीव उसको छोड़ते हुए बोला: बेटा बोलो बर्तन साफ़ करूँ या झाड़ू लगाऊँ? 

मालिनी उठकर उसके गाल को चूमकर बोली: अरे आपको ये सब नहीं करना पड़ेगा। फिर प्यार से उसके लौड़े को लूँगी के ऊपर से दबाकर बोली: पापा ये तो बस खड़ा होने का बहाना ही ढूँढता रहता है, है ना? 

राजीव: बेटा अब इसको पता नहीं कितने दिन तुम प्यासा रखोगी? ये तो यहाँ घुसने के लिए मरा जा रहा है। उसने उसकी बुर को नायटी के ऊपर से दबाकर कहा। 

मालिनी हँसकर: पापा इसके अंदर डालने का आपका प्लान तो बहुत पहले से ही है। चलो मैं शिवा को उठाती हूँ। और हाँ एक बात और, आज आप नाश्ता नहीं करोगे। शिवा पूछेगा तो कोई बहाना बना दीजिएगा। मैं भी नाश्ता नहीं करूँगी। ठीक है? 

राजीव: वो क्यों? 

मालिनी: पापा आप सवाल बहुत पूछते हो। एक दिन थोड़ा देर से नाश्ता नहीं कर सकते मेरे लिए। 

राजीव: अरे बेटा तेरे लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ। नाश्ते की क्या बात है ।

मालिनी: अच्छा अब मैं शिवा को चाय देकर आती हूँ। फिर वो किचन में जाकर शिवा के लिए चाय बनाई और शिवा को उठाई। शिवा चाय पीकर फ़्रेश हुआ और नहाने चला गया। जब वो नाश्ता करने बैठा तो राजीव बोला: मैं आज नाश्ता देर से करूँगा , अभी मेरी तबियत थोड़ी ढीली है। 

मालिनी : आज मैं भी नहा कर ही खाऊँगी । 

शिवा नाश्ता करके जाने लगा तो मालिनी बोली: आज का क्या प्रोग्राम है? 

शिवा हैरानी से: कुछ नहीं बस दुकान जाऊँगा, और क्या? 

मालिनी: बस ऐसे ही पूछा ,और कुछ नहीं । 

फिर वो चला गया। मालिनी उसके जाने के बाद राजीव से बोली: आप ज़रा अपने कमरे में आयिए ना। 

राजीव उठकर उसके पीछे अपने कमरे में आया और बोला: क्या हुआ बेटा? क्या बात है? 

मालिनी: पापा आप उस दिन मुझे एक लिंगरी निकाल कर दी थी ना। उस समय मैंने आलमारी में कुछ सुंदर साड़ियाँ देखीं थीं मम्मी जी की। एक बार दिखाएँगे क्या? 

राजीव : हाँ हाँ क्यों नहीं बेटा, अब वो तो नहीं रही , इसलिए ये सब तुम्हारा ही है। लो देखो। ये कहकर वो आलमारी खोला और मालिनी वहाँ लटकी हुई साड़ियों का कलेक्शन देखकर बोली: पापा मम्मी बहुत शौक़ीन थीं । कितनी साड़ियाँ ख़रीद रखीं हैं। अब वो कुछ सुंदर साड़ी निकाली और फिर बोली: पापा ये लाल साड़ी कितनी भारी है ना? बहुत महँगी होगी? 

राजीव: बेटा ये साड़ी उसने हमारी शादी के दिन पहनी थी। ये साड़ियाँ सिल्क की हैं जो उसे बहुत पसंद थीं। ये सब तुम रख लो। 

मालिनी: पापा इनके ब्लाउस कहाँ हैं ? वो ढूँढती हुई बोली। 

राजीव पीछे से आकर उसके चूतरों पर हाथ फेरा और बोला: ये देखो इस शेल्फ़ में रखे हैं। पर वो तुमको ढीले होंगे क्योंकि उसका बदन बाद में भारी हो गया था। 

मालिनी: ये लाल ब्लाउस तो लगता है आ जाएगा। बाक़ी ज़रूर बड़े लग रहे हैं। 

राजीव: अरे लाल वाला तो शादी के दिन पहनी थी ना, उस समय वो तुम्हारी जैसी थी । वो तो बच्चे होने के बाद ज़्यादा ही भारी हो गयी थी। 

मालिनी: ठीक है पापा मैं ये ले लेती हूँ। जो बड़े होंगे वो दर्ज़ी से ठीक करवा लूँगी। 

राजीव उसकी गाँड़ दबाकर और उसकी गर्दन चूमकर बोला: हाँ बेटा सब रख लो। सब तुम्हारा ही है और मैं भी तो तुम्हारा हूँ। 

मालिनी हँसकर : आऽऽह पापा बस अब छोड़ो ना। मुझे नहाना है। 
तभी उसकी निगाह कुछ डिब्बों पर पड़ीं और वो बोला: बेटा ये भी देख लो।ये तो उसने पहना ही नहीं। उसने डिब्बा खोला तो उसमें ब्रा और पैंटी रखीं थीं । 

राजीव: बेटा ये ब्रा तो तुमको बड़ी होंगी। उसकी छातियाँ बड़ी थीं ना। तुम्हारी उससे छोटी है अभी। 

मालिनी हँसकर: पापा आप जितना इनको दबाते हैं उससे तो लगता है जल्दी ही ये भी इतने बड़े हो जाएँगे। ये कहते हुए उसने नयी ब्रा का कप अपनी एक छाती पर रखा और बोली: मेरी भी जल्दी ही आप इतना बड़ा कर दोगे हा हा ।

राजीव : बेटा सिर्फ़ दबाने से बड़ी नहीं होतीं उनको चूसना भी पड़ता है। वो तो मुझे तुम करने नहीं देती। अरे बेटा ये पैंटी रख लो। ये तो काम आ ही जाएँगी। 

मालिनी हँसकर: हाँ जब आप बाप बेटा पहनने दोगे तो ही ना काम आएँगी। आप दोनों को तो मेरा पैंटी पहनना ही पसंद नहीं है। 

राजीव उसकी गाँड़ की गोलायी को दबाकर बोला: बेटा देखो कितनी अच्छी लगती है बिना पैंटी की गाँड़ । उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त फ़ीलिंग आती है। पैंटी रहने से ऐसा अहसास थोड़े ना होता है। 

मालिनी: आऽऽह पापा छोड़िए अब। ठीक है पैंटी रख लेती हूँ। बाहर तो मैं पहनकर ही जाती हूँ। अच्छा अब आप भी नहाकर तय्यार हो जाओ। आपकी आलमारी दिखाओ तो। 

राजीव हैरान होकर बोला: क्यों क्या हुआ? 

मालिनी: अरे दिखाइए ना। फिर उसने राजीव के किए वो चूड़ीदार पजामा और कुर्ता निकाला जो कि उसने मालिनी की शादी में पहना था। 

वो बोली: पापा आप आज इसको पहनो । 

राजीव: कहाँ जाना है हमको? 

मालिनी: बताऊँगी ना अभी थोड़ी देर में। आप यही पहनना । ठीक है ? चलो दस बज गए हैं । आधे घंटे में बिलकुल तय्यार हो जाइए। 

राजीव थोड़ा सा कन्फ़्यूज़्ड होकर हाँ में सर हिलाया, और सोचने लगा कि इसके मन में क्या चल रहा है। अब वो उसके कमरे से कपड़े लेकर निकल गयी। 

अपने कमरे में आकर वो नहाने के लिए घुसी और अपनी नायटी उतारकर सिर्फ़ ब्रा में ख़ुद को निहार कर अपने आप पर ही मुग्ध हो गयी। अब उसने अपनी बग़लें चेक कीं और वहाँ वीट लगाकर उसने अपने बाल साफ़ किए। फिर उसने अपनी झाँटे चेक कीं और थोड़े से ही बाल उगे थे। उसने बुर और गाँड़ के आसपास की सभी बालों की सफ़ाई की। अब उसने अपनी ब्रा खोली और अपने मस्त टाइट मम्मे देखकर मुस्कुराई और फिर शॉवर लेने लगी। आज जो होने वाला है उसका सोचकर उसकी बुर पनिया चुकी थी। उसने उसे नहीं छेड़ा। वो आज बहुत मस्त मूड में थी। अब वो नहाकर अपनी मदमस्त जवानी को देखती रही और फिर तौलिए से बदन सुखाकर वो नंगी ही बाहर कमरे में आयी। अब वो लिंगरीपहनी जो पापा ने उस दिन दी थी जब शिवा भी एक लिंगरी लेकर आया था। इसमे जाली वाली ब्रा और जाली वाली ही पैंटी थी । जाँघों पर थोंग भी थी और गाँड़ की दरार में एक पट्टी सी थी। उसने ख़ुद को शीशे में देखा ।पूरी रँडी लग रही थी जैसे ब्लू फ़िल्मों की होती हैं। वो पीछे अपनी गोल ठोस गाँड़ देखकर मस्ती से मुस्कुराई। अब वो सास का लाल ब्लाउस पहनी और चेक की । मामूली सा ही ढीला था। फिर उसने लाल पेटिकोट पहना । अब वो और भी सेक्सी लग रही थी। फिर उसने सास की लाल साड़ी पहनी जो उसकी सास ने अपनी और पापा की शादी में पहनी थी।अब वो अपने चेहरे का मेकअप की और फिर वो ज़ेवर पहने जो कि उसको ससुर ने समय समय पर दिए थे। पैरों में पायल ,कानों में झूमके, गले में सुंदर सा हार और हाथों में लाल काँच की चूड़ियाँ भी पहनी। आख़िर में उसने लाल लिप्स्टिक लगाई। अब वो अपने आप को आगे और पिच्छे से देखी और मुस्कुराई । पता नहीं पापा का क्या हाल होगा उसको इस रूप में देखकर। 

वो सज सँवर कर बाहर आयी और किचन में जाकर पिछले दिन जो सामान लायी थी उसे थाली में सजायी और ऊपर से एक सुंदर सा लाल कपड़ा डालकर उस थाल को ढाँक दी। 

अब वो पूजा के कमरे में गयी और वहाँ उसने सजावट की थोड़ी सी। और वो ढाँकि हुई थाल भगवान के आगे रख दी। अब वो बाहर आकर आराम से टी वी देखने लगी। अब उसने पास के रेस्तराँ में पूरी और छोले ऑर्डर किए और कहा कि आधे घंटे में भेज दो। अब वो शांति से पापा का इंतज़ार करने लगी। तभी राजीव बाहर आया और मालिनी उसे देखकर मुस्कुराई और बोली: पापा आप तो बहुत जवान दिख रहे हो। ये ड्रेस आप पर बहुत फ़ब रही है। 
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

राजीव मुस्कुराया और बोला: ये तुमने क्या पहना हुआ है? आज तो दुल्हन दिख रही हो? अरे ये क्या तुमने तो वही सास की साड़ी पहन ली जो वो हमारे शादी के दिन पहनी थी। 

मालिनी: आप सही पहचाने। ये वही साड़ी है। अब वो उठकर बोली: पापा किसी दिख रही हूँ मैं? 

राजीव:उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ बेटा क्या कहूँ? बिलकुल वैसी दिख रही हो जैसे तुम्हारी सास दिखी थी सालों पहले शादी के दिन।बल्कि उससे भी ज़्यादा प्यारी और सुंदर। 

मालिनी: आज तो पापा आप भी कई क़त्ल कर दोगे अगर ऐसे बाहर गए तो। पता नहीं कितनी लड़कियाँ और अंटियाँ आप पर मर मिटेंगी। क्या लग रहे हो आप? 

राजीव झेंप कर: अरे मुझे ही खींचने लगी अब तुम। वैसे इरादा क्या है तुम्हारा? ये दुल्हन का लिबास पहनकर कहाँ जाओगी? और मुझे भी कहाँ ले जाओगी? 

वो हँसी: पापा आपको इतना तय्यार करके अगर मैं बाहर गयी तो पता नहीं आप जब वापस आएँगे तो पता नहीं कितनी लड़कियों के साथ आएँगे? ऐसा रिस्क मैं ले नहीं सकती। इस लिए अब हम कहीं बाहर नहीं जा रहे हैं । ठीक है? बस इस पूजा घर तक ही जाएँगे। 

राजीव चौंक कर: पूजा घर ? वहाँ क्यों? 

मालिनी: क्योंकि आज मैं आपसे गंधर्व विवाह करने वाली हूँ। 

राजीव को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ, वो हैरानी से बोला: क्या कहा? ज़रा फिर से कहना। 

वो मुस्कुराई : हाँ हम अभी गंधर्व विवाह करेंगे। आपकी इच्छा थी ना कि मैं आपकी भी पत्नी बनूँ, वो आज मैं पूरी करूँगी। इसी लिए तो मैंने आपसे शुभ समय का पूछा था। अब से लेकर १२ बजे तक अत्यंत शुभ समय है आपको कल पंडित ने बताया था ना। बस अब चलिए पूजा घर में , मैंने सब तय्यारियाँ कर रखी हैं। 

राजीव ख़ुशी से झूम कर: वाह बहु तुमने तो एकदम से मुझे हैरत में ही डाल दिया। मुझे तो यक़ीन ही नहीं हो रहा है किमेरी क़िस्मत खुल गयी है ।

वह आगे बढ़ा और उसको बाहों में लेकर चूम लिया। वो उसको बोली: पापा अभी छोड़ो और पूजा घर चलो। 

दोनों ने वॉश्बेसिन में हाथ धोए और पूजा घर में घुसे । अब मालिनी बोली: पापा हम इसका वीडीयो बनाते हैं। यादगार रहेगा। उसने अपने फ़ोन का वीडीयो रिकॉर्डिंग चालू की और वहाँ खिड़की पर रख दिया। फिर दोनों वहाँ पर बैठ गए। अब मालिनी ने एक पुस्तक निकाली और कुछ भजन पढ़ने लगी। राजीव मंत्र मुग्ध सा उसके चेहरे को देखता ही रह गया। अब मालिनी ने भगवान के आगे दिया जलाया। और आँख बंद करके प्रार्थना की। फिर वो खड़ी हुई और राजीव भी खड़ा हुआ। अब वो थाल का कपड़ा उठाई और उसमें से दो फूलों की माला निकाली। एक माला उसने राजीव को दी। अब वो ख़ुद राजीव के सामने खड़ी होकर उसके गले में माला डाली और अब राजीव भी उसके गले में माला डाला। अब उसने राजीव को सिंदूर की डिब्बी दी जिसमें से लाल सिंदूर निकालके वह उसकी माँग भरा और मालिनी झुककर उसके पैर छुई। राजीव ने उसे उठाकर अपने सीने से लगा लिया और उसका माथा चूम लिया। अब मालिनी बोली: पापा चलो हो गया। देखें विडीओ कैसा बना है। 

अब दोनों बाहर आए और ड्रॉइंग रूम में बैठे तभी घंटी बजी और मालिनी ने रेस्तराँ से आए पैकेट को लेकर पैसा दिया। 

राजीव अपने कमरे में गया और एक चाबियों का गुच्छा लेकर आया और उसने मालिनी की कमर में उसे खोंस कर बोला: बेटा अब ये चाबियाँ तुम ही सम्भालो। आज से ये घर तुम्हारा हुआ। और तुम इस घर की महारानी हो। 

मालिनी मुस्कुराकर: पापा थैंक यू। मैं अपनी ज़िम्मेदारी पूरी ईमानदारी से सम्भालूँगी। राजीव ने उसे चिपका कर उसे प्यार किया। फिर मालिनी बोली: पापा चलो छोले भटूरे खाते हैं। आपकी पसंद की रेस्तराँ से मँगाये है।

अब मालिनी ने टेबल में नाश्ता लगाया और एक थाली में सब लगाया। मालिनी: पापा अब एक ही थाली में खाएँ ना। 

राजीव उसके गाल चूमकर: हाँ बेटा क्यों नहीं। अब तो हम दो बदन एक जान है । पर एक बात बता कि मैं अब तेरा पति भी हूँ और ससुर भी। तो क्या तुमको बेटी बोलूँ या नहीं? 

मालिनी: पापा आप मुझे बेटी ही कहिए। वो क्या है ना सबके सामने जो बोलेंगे वही अकेले में भी बोलेंगे तो ठीक ही रहेगा। 

राजीव खाते हुए बोला: चलो जैसा तुम चाहो। फिर दोनों खाना खाते हुए विडीओ देखने लगे। 

दोनों खा कर उठे और अब मालिनी बोली: पापा क्या आप मेरे लिए वही पान ला देंगे जो कभी कभी खिलाते हो। 

राजीव हैरानी से : पान खाना है वो भी अभी? ठीक है आज तो मैं तुम्हारी सभी शर्तें पूरी करूँगा। वो उठकर बाहर चला गया। क़रीब १० मिनट का पैदल रास्ता था। गली में थी पान की दुकान तो वो पैदल ही चला गया। 

जब वो चला गया तो मालिनी ने राजीव के कमरे में जाकर बिस्तर पर नयी चादर बिछाई और फिर फूलों की पंखुड़ियाँ बिखेरीं ।दरवाज़े पर फूलों के हार सेलो टेप से चिपकायी। अब वो रूम में ख़ुशबू वाली स्प्रे भी करी। सब कुछ सुंदर बना दिया था उसने। अब वो वाशरूम गयी और फ़्रेश होकर अपनी बुर को साफ़ किया। अब उसने वहाँ भी एक ख़ुशबू वाला स्प्रे किया अब वो अपनी घूँघट नीचे करके बिस्तर पर दुल्हन बन कर बैठ गयी। अब वो अपने दूल्हे राजा का इंतज़ार कर रही थी। उसके निपल्ज़ कड़े हो गए थे और बुर गीली हो गयी थी। 

तभी राजीव आया और अंदर आकर मालिनी को आवाज़ दिया। फिर वो उसके कमरे में गया और वहाँ उसको ना पाकर वो किचन में गया। अब वो सोचा कि कहाँ चली गयी? तभी मालिनी ने आवाज़ लगाई : पापा मैं यहाँ हूँ आपके कमरे में। 

राजीव अपने कमरे की ओर बढ़ा और जैसे ही कमरे में पहुँचा वो ख़ुशी से झूम उठा। उफफफफ ये लड़की भी क्या क्या सोच लेती है? मस्त दुल्हन बनी बैठी है मेरे बिस्तर पर। आह्ह्ह्ह्ह उसका लौड़ा तनाव में आने लगा। अब वह बोला: बेटी पान लाया हूँ। 

मालिनी ने हाथ बढ़ाकर कहा: लायिए मुझे खाना है। 

राजीव ने उसके नाज़ुक हथेली पर पान रखा और वो उसे खाने लगी। घूँघट के अंदर से ही वो राजीव को देख रही थी जो अपना पान भी खाने लगा था। 

राजीव: बेटी क्या सजावट की है तुमने ? मेरे जीवन की आज सबसे ख़ुशनुमा घड़ी है। सच में आज तुमने मुझे अपना ग़ुलाम बना लिया है। 

अब राजीव ने आलमारी खोली और एक ज़ेवर का बॉक्स निकाला और लाकर बिस्तर पर रखा। अब वो वाश रूम गया और फ़्रेश होकर आया । उसने अपना लौड़ा अच्छी तरह से साफ़ किया और मालिनी के बग़ल में आकर बैठ गया। 

अब वो मालिनी को बोला: बेटा घूँघट उठाऊँ क्या? या और कोई रस्म बाक़ी है। 

मालिनी अपनी बुर के गीलेपन से परेशान ही थी सो बोली: आह पापा अब और कोई रस्म बाक़ी नहीं है ।

राजीव ने उसका घूँघट उठाया और उसके रूप का तेज़ देखकर वो मस्ती से भर गया। अब वो उसके हाथ में ज़ेवर का बॉक्स रखा और बोला: बेटा ये मेरी तरफ़ से तुम्हारी मुँह दिखाई का तोहफ़ा। 

मालिनी मुस्कुरा कर उसको लेकर बोली: पापा थैंक यू। 

अब राजीव बोला: बेटा अब और ना तड़पाने । आओ मेंरी बाँहों में आ जाओ। अब वो उसको खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया। अब वो उसके गाल को चूमने लगा। मालिनी ने महसूस किया कि पापा का खूँटा उसके गाँड़ में चुभ रहा था। वो और भी मस्त हो गयी थी। अब राजीव उसके गरदन और होंठ चूसने लगा। अब राजीव ने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। वो उसके बग़ल में लेटा और मालिनी को अपनी बाँह में भरकर चूमने लगा। मालिनी भी राजीव के बलिष्ठ शरीर से लिपट गयी।

राजीव: कितने दिनों के बाद आज मेरी तमन्ना पूरी होगी। उफ़्फ़ कितना तड़पाया है तुमने। 

मालिनी: पापा मैंने नहीं तड़पाया है बल्कि आप ख़ुद ही तड़प रहे थे। मुझे तो कई बार शक होता है कि आप मुझे इस घर में अपने लिए लाए हो या शिवा के लिए? 

राजीव हँसकर उसकी गाँड़ में एक चपत लगा कर बोला: वैसे ये सच है कि मेरा कमीना दिल तो तुम पर तभी से आया हुआ था जब मैं तुमको पहली बार शिवा के साथ देखने आया था। तुम चीज़ ही ऐसी मस्त हो जान। अब चलो ना ये भारी भरकम साड़ी उतारो और अपनी जवानी दिखाओ। 

मालिनी हँसकर: आप ही उतारो ना। गरज तो आपकी है। 

राजीव हँसकर : बिलकुल सही कहा। मैं ही तो मरा जा रहा हूँ तुम्हें चोदने को। यह कह कर उसने उसकी साड़ी की गाँठ कमर से खोली और एक ही झटके में साड़ी उसके बदन से अलग कर दी। अब वो मालिनी की रसीलि जवानी को ब्लाउस और पेटिकोट में देखकर मस्ती से भर गया। वो उसके ऊपर झुका और उसकी गरदन और कंधे को चूमने लगा। अब वो उसकी ब्लाउस को देखा और छातियों को दबाकर बोला: ये लगता है तुमने अपनी सास का ब्लाउस ही पहना है ना? बिलकुल फ़िट आ गया है। ऐसी ही मस्त टाइट अनार थे उसके भी शुरू में । फिर वो उसके नंगे सपाट पेट को चूमा और नाभि के छेद में अपनी जीभ फिराने लगा। मालिनी बोली: पापा आऽऽह गुदगुदी हो रही है। 
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RE: बहू नगीना और ससुर कमीना - - 06-10-2017

अब राजीव नीचे होकर उसके पेटिकोट का नाड़ा खोला और मालिनी ने अपनी गाँड़ उठाकर उसको निकालने में मदद की। राजीव की आँखें उस लिंगरी वाली पैंटी पर पड़ी जिसकी जाली से उसकी बुर की फाँक साफ़ नज़र आ रही थी। वो मस्ती में आकर उसकी बुर को देखता रहा और बोला: बेटा क्या मस्त बुर है और इस पैंटी में तू मस्त माल लग रही है। अब वो उसकी एक टाँग उठाया और उसके पैर के तलवे को चूमने और चाटने लगा। अब वो उसकी एक एक ऊँगली को मुँह में लेकर चूस रहा था। मालिनी के लिए ये नया अनुभव था। वो सिसकारियाँ भरने लगीं। फिर वो उसकी पिंडली चाटते हुए उसके घुटने और फिर जाँघ चाटने लगा। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ मालिनी सोची कि पापा आज तो उसकी जान ही ले लेंगे। अब वो उसकी बुर के पास जाकर रुका और फिर दूसरी जाँघ चाटते हुए वापस नीचे दूसरी पैर की उँगलियों तक आया। मालिनी अब गरम होने लगी थी। वो अपनी कमर हिलाकर अपनी बेचैनी दिखाई। राजीव अब उसके पेट को चूमता हुआ उसके हाथों तक पहुँचा। अब वो उसकी हाथ की उँगलियाँ एक एक कर चूस रहा था। वो उसकी उँगलियों के जोड़ भी चाटकर मस्त हो रहा था। अब वो कलाई और बाँह चाटा और फिर उसका हाथ उठाकर उसकी बग़ल को सूँघा और फिर वहाँ भी जीभ से चाटने लगा। मालिनी को लगा कि वो पागल ही हो जाएगी। 

अब वो मालिनी का ब्लाउस का हुक खोलने लगा। मालिनी ने हाथ उठा कर अपना ब्लाउस उतारने में उसकी मदद की। अब उसका गोरा बदन सिर्फ़ लिंगरी में बहुत ही मादक लग रहा था। वह उसके इस रूप को मुग्ध होकर देखता रहा और बोला: बेटी उफफफ क्या फ़िगर है और इस लिंगरी में तो बहुत क़ातिलाना लग रही हो। ये लिंगरी मैंने तुम्हारी सास के लिए ख़रीदा था। वो तो पहनी नहीं पर सच में तुमपे यह बहुत सेक्सी लग रही है।देखो तुम्हारे निपल्ज़ कितने मस्त दिख रहे हैं, नेट के अंदर से । 

मालिनी: पापा मैं तो ये लिंगरी पहन कर अपने आप को नंगी ही महसूस करती हूँ। और आप तो अभी भी पूरे कपड़े पहने हो। 

राजीव: चलो मैं भी कपड़े उतार देता हूँ। 

यह कहकर वो अपने कपड़े उतारने लगा और चड्डी में आकर बोला: सच में बहुत कामुक बदन है तुम्हारा। अब वो झुका और उसकी ब्रा के ऊपर से उसके गोरे दूध को चूमने लगा। मालिनी के बदन में भी सिहरन होने लगी। चड्डी में से राजीव का खड़ा लौड़ा बहुत मस्त दिख रहा था और चड्डी में दो बूँद प्रीकम भी चमक रहा था। मालिनी हाथ बढ़ा कर उसके चड्डी के ऊपर से उसके लौड़े को दबाई। 
अब वो उसकी ब्रा के पीछे हाथ डाल कर उसका हुक खोला। अब उसने धीरे से उसके ब्रा का कप उठाया और उसके मदमस्त करने वाले सख़्त दूधिया अनार उसकी आँखों के सामने थे। काले बड़े निपल उन गोलायियों के ऊपर उफफफ क्या सज रहे थे। वह इन चूचियों को दबाने , सहलाने और चूसने के लिए पागल हुआ जा रहा था इतने दिनों से । 

अब वो झुका और उसने उसकी मस्त छातियों को सहलाना शुरू किया मानो वो उनकी मालिश कर रहा हो। उसकी ऊँगली और अंगूठे ने निपल को मसलना शुरू किया । अब मालिनी आऽऽहहहह कर उठी। उसकी बुर ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। अब राजीव ने उसकी एक छाती मुँह में लेकर चूसना और दूसरे को मस्ती से दबाना चालू किया। अब मालिनी आऽऽह कर उठी। वह अपनी जीभ से उसके निपल को सहलाने लगा। मालिनी उइइइइइइ करके उसका सिर पकड़कर अपनी चुचि पर दबा दी। क़रीब दस मिनट तक चूसने के बाद वो अपना सिर उठाया और मालिनी के होंठ चूसने लगा। अब वो अपनी जीभ उसके मुँह में डाला और मालिनी उसे चूसने लगी। अब दोनों बहुत गरम हो गए थे। राजीव नीचे होकर उसकी पैंटी को नीचे किया । मालिनी ने भी गाँड़ उठाकर पैंटी उतारने में मदद की। अब उसको पनियाई हुई गीली बुर उसके सामने थी। वो उसकी जाँघें फैलाया और उनके बीच में फूलि हुई बुर को सहलाया और फिर दो ऊँगली अंदर डाला और बोला: आऽऽह कितनी गरम हो गयी हो तुम। बिलकुल गीली हो। 

मालिनी: आऽऽह पापा अब डाआऽऽऽऽऽऽल दो ना। अब नहीं रहा जा रहा । 

राजीव झुक कर उसकी बुर को चूमा और चाटने लगा। 

मालिनी: आऽऽऽह पापा इतने दिनों से बस चटवा ही तो रही हूँ और आपका चूस रही हूँ। अब बस चोओओओओओओद दीजिए। आऽऽहहहह बहुत खुजा रही है। 

राजीव: हाँ बेटा मैं भी अब बस अंदर डाले बिना नहीं रह सकता। वो अपने लौडे को चड्डी से मुक्त करके बोला। मालिनी ने देखा कि उनका लौड़ा बहुत मस्त दिख रहा था।

वो बोली: पापा अब और मत तड़पाओ अंदर डाऽऽऽऽऽऽऽऽल दो। 

वो उसकी टाँगें उठाकर अपने लौडे के सुपाड़े को उसकी बुर के छेद पर सेट किया और उसे वहाँ रगड़ने लगा। मालिनी उइइइइइइइ करके चिल्लाई :आऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽऽपा । क्यों तड़पा रहे हो डाआऽऽऽऽऽलो। 

राजीव मज़े से भर गया और अपनी बहू की तड़प का मज़ा लेकर बोला: आऽऽऽह बेटा अब डालता हूँ। लो मेरा लौड़ा अपनी बुर में। आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ह्म्म्म्म्म्म्म्म। अब उसका सुपाडा उसके बुर में घुस गया। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़ क्या टाइट बुर है। अब वो एक धक्का मारा और आधा लौड़ा उसकी बुर में समा गया। मालिनी: आऽऽऽऽऽऽह पाआऽऽऽऽऽपा। धीरे सेएएएएएएए प्लीज़। बहुत मोटा है हाऽऽऽऽऽय। 

राजीव अब अगले धक्के में पूरा लौड़ा अंदर कर दिया और अब पूरा लौड़ा उसकी बुर में समा चुका था। मालिनी भी मस्ती से बोली: आऽऽऽहहह पापा बहुत बड़ा है आऽऽऽऽऽपका ।

राजीव: शिवा का भी तो बड़ा होगा ना? वो भी मेरे जैसा ही तगड़ा मर्द है। 

मालिनी: आऽऽऽह उनका भी मस्त है मगर आपका मोटा ज़्यादा है। आह्ह्ह्ह्ह। अब चोदिए प्लीज़। 

अब राजीव ने उसकी चुदाई शुरू की और मालिनी भी अपनी गाँड़ उछालकर चुदावने लगी। राजीव उसकी चूचियाँ दबाकर उसके होंठ चूस रहा था। अब फ़च फ़च की आवाज़ के साथ पलंग की भी चूँ चूँ की आवाज़ आ रही थी। तभी राजीव ने महसूस किया कि उसकी बुर के मसल्स ने उसके लौडे को जैसे अपने ग्रिप में ले लिया है। उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ वह सोचा कि ऐसी चुदाई का मज़ा बरसों बाद मिल रहा था। कुछ तो बात है इस कामुक जवानी में। क्या मज़े से चुदवा रही है। पूरा मज़ा दे रही है। तभी मालिनी : आऽऽहहह पाआऽऽऽऽपा मैं गयीइइइइइइइ। और वो झड़ने लगी । राजीव भी ह्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा।
दोनों झड़कर अग़ल बग़ल लेटे थे और एक दूसरे के बदन पर हाथ फेर रहे थे। मालिनी हाथ से राजीव के नरम लौड़े को दबा रही थी। अब वो उसके बड़े बॉल्ज़ को सहला कर बोली: पापा आपके इन बॉल्ज़ ने तो कई लड़कियों को माँ बनाया है। मुझे लगता है अब मेरा भी नम्बर आ जाएगा अब। 

राजीव: ओह हाँ ये हो तो सकता है । मगर तुम अगर प्रेगनेंट हुई तो कैसे पता चलेगा कि बाप शिवा है या मैं? 

मालिनी हँसकर बोली: मुझे क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आप उस बच्चे के पापा हैं या दादा? मुझे तो प्यारा से बच्चा मिल जाएगा। अगर शिवा का होगा तो वो पापा और आप दादा। 

राजीव उसे हैरानी से देखता रह गया।
दिन के १२ बजे थे और शिवा बेचैन था। उसे पता नहीं क्यों लग रहा था कि मालिनी कुछ करने वाली है। उसे याद आया कि वो बोली थी कि आज कामवाली बाई नहीं आएगी। इसका मतलब वो दिन भर आज पापा के साथ अकेली रहेगी। क्या वो कुछ करने वाली है? ये बात तो तो उसे पता चल गयी थी कि दोनों एक दूसरे के सब अंग छूते और चूमते और चाटते हैं! पर उनकी बातों से ऐसा लगा था कि चुदाई अब तक नहीं हुई है। वह कैसे पता करे ? तभी उसे असलम का ख़याल आया और वो उसको फ़ोन लगाकर बोला: यार मैं बहुत परेशान हूँ और जानना चाहता हूँ कि मालिनी पापा से चुदी या नहीं? कैसे पता करूँ? 

असलम: यार इन सब चीज़ों में आयशा का दिमाग़ चलता है। मैं अभी खाना खाने जा रहा हूँ। तू भी आ जा। हम दोनों मिलकर आयशा की चुदाई भी कर लेंगे और उससे सलाह भी कर लेंगे कि कैसे पता करें मालिनी और तेरी पापा की चुदाई का? 

शिवा का लण्ड तनने लगा ये सोचकर कि आयशा दोनों से चुदेगी । वो बोला: देख यार तू तो अपनी बीवी को मुझसे चुदवाए जा रहा है, मगर मैं नहीं जानता कि मालिनी तुमसे चुदवाएगी या नहीं।बाद में दोष नहीं देना। 

असलम: यार तू आयशा को चोद लेगा तो क्या उसकी बुर घिस जाएगी? वैसे भी वो कई दिनों से डबल चुदाई का मज़ा नहीं ली है। उसे भी मज़ा आ जाएगा। 

शिवा: ठीक है मैं आता हूँ। वो ये कहकर अपना लण्ड पैंट में ऐडजस्ट किया। 

उधर सरला और राकेश की चुदाई के बाद अब राकेश उससे बहुत खुल गया था। अब वो किचन में सरला को पकड़कर चूम लेता था और उसके मस्त दूध दबाकर उनको ब्लाउस के ऊपर से खुले हिस्से को चूम भी लेता था। सरला भी अब उसके लण्ड को पैंट के ऊपर से जब तब दबा देती थी। उस दिन सबके जाने के बाद क़रीब १२ बजे वो सरला को लेकर उसके बेडरूम में घुस गया और उसकी ज़बरदस्त चुदाई करने लगा। सरला भी मज़े से उसका साथ दी और बाद में बोली: बेटा तेरा आख़री साल है अब पढ़ाई पर ध्यान दे । रात को मैं तेरी प्यास बुझा दिया करूँगी। राकेश मुस्कुरा कर उसकी चूचि चूसा और तय्यार होकर कोलेज चला गया। सरला अपने घर के काम में लग गयी। 

उधर मालिनी और राजीव चुदाई के बाद सुस्ता रहे थे। 
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