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Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

बड़े घर की बहू 


यह कहानी एक बड़े ही मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की की है नाम है कामया। कामया एक बहुत ही खूबसूरत और पढ़ी लिखी लड़की है। पापा उसके प्रोफेसर थे और माँ बैंक की कर्मचारी। शादी भी कामया की एक बहुत बड़े घर में हुई थी जो की उस शहर के बड़े ज़्वेलर थे। बड़ा घर… घर में सिर्फ़ 4 लोग थे, कामया के ससुरजी, सासू माँ, कामेश और कामया बस। 

बाकी नौकर भीमा जो की खाना बनाता था और घर का काम करता था, और घर में ही ऊपर छत पर बने हुए कमरे में रहता था। ड्राइवर लक्खा, पापाजी और मम्मीजी का पुराना ड्राइवर था। जो की बाहर मंदिर के पास एक कमरे में, जोससुरजी ने बनाकर दिया था, रहता था। 

कामेश के पास दूसरा ड्राइवर था भोले, जो की बाहर ही रहता था। रोज सुबह भोले और लक्खा आते थे और गाड़ी साफ करके बाहर खड़े हो जाते थे, घर का छोटा-मोटा काम भी करते थे। कभी भी पापाजी और मम्मीजी या फिर कामेश को ना नहीं किया था। गेट पर एक चौकीदार था जो की कंपाउंड में ही रहता था आउटहाउस में, उसकी पत्नी घर में झाड़ू पोंछा और घर का काम जल्दी ही खतम करके दुकान पर चली जाती थी, साफ-सफाई करने। 

पापाजी और मम्मीजी सुबह जल्दी उठ जाते थे और अपने पूजा पाठ में लग जाते थे। नहा धोकर कोई 11:00 बजे पापाजी दुकान केलिये निकल जाते थे और मम्मीजी दिन भर मंदिर के काम में लगी रहती थी। (घर पर ही एक मंदिर बना रखा था उन्होंने, जो की पापाजी और मम्मीजी के कमरे के पास ही था)। मम्मीजी जोड़ो में दर्द रहता था इसलिये ज्यादा चल फिर नहीं पाती थी, इसलिए हमेशा पूजा पाठ में मस्त रहती थी। घर के काम की कोई चिंता थी नहीं क्योंकी भीमा सब संभाल लेता था। 

भीमाको यहां काम करते हुए लगभग 30 साल हो गये थे। कामेश उनके सामने ही जन्मा था इसलिये कोई दिक्कत नहीं थी। पुराने नौकर थे तभी सब बेफिक्र थे। वैसे ही लक्खा था, बात निकालने से पहले ही काम हो जाता था। 

सुबह से ही घर का महौल बिल्कुल व्यवस्थित होता था। हर कोई अपने काम में लगा रहता था। फ्री होती थी तो बस कामया। कोई काम नहीं था बस पति के पीछे-पीछे घूमती रहती थी और कुछ ना कुछ डिमांड करती रहती थी, जो की शाम से पहले ही पूरी हो जाती थी। 

कामेश और कामया की सेक्स लाइफ भी मस्त चल रही थी, कोई शिकायत नहीं थी दोनों को। जमकर घूमते फिरते थे और खाते पीते थे और रात को सेक्स। सबकुछ बिल्कुल मन के हिसाब से, ना कोई रोकने वाला, ना कोई टोकने वाला।

पापाजी को सिर्फ़ दुकान से मतलब था, मम्मीजी को पूजा पाठ से।

कामेश को अपने बिज़नेस को और बढ़ाने कीधुनथी। छोटी सी दुकान से कामेश ने अपनी दुकान को बहुत बड़ा बना लिया था। पढ़ा-लिखा ज्यादा नहीं था पर सोने चाँदी के उत्तरदाइत्वों को वो अच्छे से देख लेता था और प्राफिट भी कमा लेता था। अब तो उसने रत्नों का काम भी शुरू कर दिया था। हीरा, रूबी, मोती और बहुत से। 

घर भर में एक बात सबको मालूम थी की कामया के आने के बाद से ही उनके बिज़नेस में चाँदी हो गई थी, इसलिए सभी कामया को बहुत इज़्ज़त देते थे। पर कामया दिन भर घर में बोर हो जाती थी, ना किचेन में काम और ना ही कोई और जिम्मेदारी। जब मन हुआ तो शापिंग चली जाती थी। कभी किसी दोस्त के पास, तो कभी पापा मम्मी से मिलने, तो कभी कुछ, तो कभी कुछ। इसी तरह कामया की शादी के 10 महीने गुजर गये।कामेश और पापाजी जी कुछ पहले से ज्यादा बिजी हो गये थे। 

पापाजी हमेशा ही यह कहते थे की कामया तुम्हारे आते ही हमारे दिन फिर गये हैं। तुम्हें कोई भी दिक्कत हो तो हमें बताना, क्योंकी घर की लक्ष्मी को कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए। सभी हँसते और खुश होते। कामया भी बहुत खुश होती और फूली नहीं समाती। 

घर के नौकर तो उससे आखें मिलाकर बात भी नहीं करते थे। 

अगर वो कुछ कहती तोबस- “जी बहू रानी…” कहकर चल देते और काम हो जाता। 

लेकिन कामया के जीवन में कुछ खालीपन था जो वो खुद भी नहीं समझ पाती थी की क्या?सबकुछ होते हुए भी उसकी आखें कुछ तलाशती रहती थीं। क्या?पता नहीं?पर हाँ कुछ तो था जो वो ढूँढ़ती थी। कई बार अकेले में कामया बिलकुल खाली बैठी शून्य को निहारती रहती, पर ढूँढ़ कुछ ना पाती। आखिर एक दिन उसके जीवन में वो घटना भी हो गई। (जिस पर यह कहानी लिखी जा रही है।)



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उस दिन घर पर हमेशा की तरह घर में कामया मम्मीजी और भीमा थे। कामवाली झाड़ू पोंछा करके निकल गई थी। मम्मीजी पूजा घर में थी कामया ऊपर से नीचे उतर रही थी। शायद उसे किचेन की ओर जाना था, भीमा से कुछ कहने केलिये। लेकिन सीढ़ी उतरते हुए उसका पैर आखिरी सीढ़ी में लचक खाकर मुड़ गया। दर्द के मारे कामया की हालत खराब हो गई। 

वो वहीं नीचे, आखिरी सीढ़ी में बैठ गई और जोर से भीमा को आवाज लगाई- “भीमाचाचा, जल्दी आओ…”

भीमा- दौड़ता हुआ आया और कामया को जमीन पर बैठा देखकर पूछा- क्या हुआ बहू रानी?

कामया- “उउउफफ्फ़…”और कामया अपनी एड़ी पकड़कर भीमा की ओर देखने लगी। 

भीमा जल्दी से कामया के पास जमीन पर ही बैठ गया और नीचे झुक कर वो कामया की एड़ी को देखने लगा।

कामया- “अरे देख क्या रहे हो? कुछ करो, बहुत दर्द हो रहा है…”

भीमा- पैर मुड़ गया क्या?

कामया- “अरे हाँ… ना… प्लीज चाचा, बहुत दर्द हो रहा है…”

भीमा जो की कामया के पैर के पास बैठा था कुछ कर पाता तब तक कामया ने भीमा का हाथ पकड़कर हिला दिया, औरकहा- क्या सोच रहे हो, कुछ करो की कामेश को बुलाऊँ? 

भीमा- “नहीं नहीं, मैं कुछ करता हूँ,रुकिये। आप उठिए और वहां चेयर पर बैठिये और साइड होकर खड़ा हो गया। 

कामया- “क्या चाचा… थोड़ा सपोर्ट तो दो…” 

भीमा थोड़ा सा आगे बढ़ा और कामया के बाजू को पकड़कर उठाया और थोड़ा सा सहारा देकर डाइनिंग चेयर तक ले जाने लगा। कामया का दर्द अब भी वैसा ही था। लेकिन बड़ी मुश्किल से वो भीमा का सहारा लिए चेयर तक पहुँची और धम्म से चेयर पर बैठ गई। उसके पैरों का दर्द अब भी वैसा ही था। वो चाहकर भी दर्द को सहन नहीं कर पा रही थी, और बड़ी ही दयनीय नजरों से भीमा की ओर देख रही थी। 

भीमा भी कुछ करने की स्थिति में नहीं था। जिसने आज तक कामया को नजरें उठाकर नहीं देखा था, वो आज कामया की बाहें पकड़कर चेयर तक लाया था। कितना नरम था कामया का शरीर, कितना मुलायम और कितना चिकना। भीमा ने आज तक इतना मुलायम, चिकनी और नरम चीज नहीं छुआ था। भीमा अपने में गुम था की उसे कामया की आवाज सुनाई दी। 

कामया- “क्या चाचा, क्या सोच रहे हो?”और कामया ने अपनी साड़ी को थोड़ा सा ऊपर कर दिया और भीमा की ओर देखते हुए अपने एड़ी की ओर देखने लगी। 

भीमा अब भी कामया के पास नीचे जमीन पर बैठा हुआ कामया की चिकनी टांगों की ओर देख रहा था। इतनी गोरी है बहू रानी और कितनी मुलायम। भीमा अपने को रोक ना पाया, उसने अपने हाथों को बढ़ाकर कामया के पैरों को पकड़ ही लिया और अपने हाथों से उसकी एड़ी को धीरे-धीरे दबाने लगा। और हल्के हाथों से उसकी एड़ी के ऊपर तक ले जाता, और फिर नीचे की ओर ले आता था। और जोर लगाकर एड़ी को ठीक करने की कोशिश करने लगा।

भीमा एक अच्छा मालिश करने वाला था उसे पता था की मोच का इलाज कैसे होता है? वो यह भी जानता था की कामया को कहां चोट लगी है, और कहां दबाने से ठीक होगा। पर वो तो अपने हाथों में बहू रानी की सुंदर टांगों में इतना खोया हुआ था की उसे यह तक पता नहीं चला की वो क्या कर रहा था? भीमा अपने आप में खोया हुआ कामया के पैरों की मालिश कर रहा था और कभी-कभी जोर लगाकर कामया की एड़ी में लगीमोच को ठीक कर रहा था।

कुछ देर में ही कामया को आराम मिल गया और वो बिल्कुल दर्द मुक्त हो गई। उसे जो शांती मिली, उसकी कोई मिशाल नहीं थी। जो दर्द उसकी जान लेने को था अब बिल्कुल गायब था।

इतने में पूजा घर से आवाज आई और मम्मी पूजा छोड़कर धीरे-धीरे लंगड़ाती हुई बाहर आई औरपूछा- “क्या हुआ बहू?”

कामया- मम्मीजी, कुछ नहीं सीढ़ीउतरते हुए जरा एड़ी में मोच आ गई थी।

मम्मीजी- “अरे… कहीं ज्यादा चोट तो नहीं आई?” तब तक मम्मीजीभी डाइनिंग रूम में दाखिल हो गई और कामया को देखा की वो चेयर पर बैठी है और भीमा उसकी एड़ी को धीरे-धीरे दबाकर मालिश कर रहा था।


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

मम्मीजी ने कामया से कहा- “जरा देखकर चलाकर बहू। वैसे भीमा को बहुत कुछ आता है। दर्द का एक्सपर्ट डाक्टर है मालीश भी बहुत अच्छी करता है। क्यों भीमा?”

भीमा- जी माँ जी अब बहू रानी ठीक है 
कहते हुए उसने कामया के एडी को छोटे हुए धीरे से नीचे रख दिया और चल गया उसने नजर उठाकर भी कामया की और नहीं देखा 
लेकिन भीमा के शरीर में एक आजीब तरह की हलचल मच गई थी। आज पता नहीं उसके मन उसके काबू में नहीं था। कामेश और कामया की शादी के इतने दिन बाद आज पता नहीं भीमा जाने क्यों कुछ बिचालित था। बहू रानी के मोच के कारण जो भी उसने आज किया उसके मन में एक ग्लानि सी थी । क्यों उसका मन बहू के टांगों को देखकर इतना बिचलित हो गया था उसे नहीं मालूम लेकिन जब वो वापस किचेन में आया तो उसका मन कुछ भी नहीं करने को हो रहा था। उसके जेहन में बहू के एड़ी और घुटने तक के टाँगें घूम रही थी कितना गोरा रंग था बहू का। और कितना सुडोल था और कितना नरम और कोमल था उसका शरीर। 
सोचते हुए वो ना जाने क्या करता जा रहा था। इतने में किचेन का इंटर काम बजा 

मम्मीजी- अरे भीमा जरा हल्दी और दूध ला दे बहू को कही दर्द ना बढ़ जाए। 
भीमा- जी। माजी। अभी लाया। 
और भीमा फिर से वास्तविकता में लाट आया। और दूध और हल्दी मिलाकर वापस डाइनिंग रूम में आया। मम्मीजी और बहू वही बैठे हुए आपस में बातें कर रहे थे। भीमा के अंदर आते ही कामया ने नजर उठाकर भीमा की ओर देखा पर भीमा तो नजर झुकाए हुए डाइनिंग टेबल पर दूध का ग्लास रखकर वापस किचेन की तरफ चल दिया। 

कामया- भीमा चाचा थैंक्स 

भियामा- जी। अरे इसमें क्या में तो इस घर का। नौकर हूँ। थैंक्स क्यों बहू जी 

कामया- अरे आपको क्या बताऊ कितना दर्द हो रहा था। लेकिन आप तो कमाल के हो फट से ठीक कर दिया। 
और कहती हुई वो भीमा की ओर बढ़ी और अपना हाथ बढ़ा कर भीमा की ओर किया और आखें उसकी। भीमा की ओर ही थी। भीमा कुछ नहीं समझ पाया पर हाथ आगे करके बहू क्या चाहती है 

कामया- अरे हाथ मिलाकर थैंक्स करते है। 

और एक मदहोश करने वाली हँसी पूरे डाइनिंग रूम में गूँज उठी। माँ जी भी वही बैठी हुई मुश्कुरा रही थी उनके चेहरे पर भी कोई सिकन नहीं थी की बहू उसे हाथ मिला ना चाहती थी। बड़े ही डरते हुए उसने अपना हाथ आगे किया और धीरे से बहू का हथेली को थाम लिया। कामया ने भी झट से भीमा चाचा के हथेली को कसकर अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया और मुश्कुराते हुए जोर से हिलाने लगी और थैंक्स कहा। भीमा जो की अब तक किसी सपने में ही था और भी गहरे सपने में उतरते हुए उसे दूर बहुत दूर से कुछ थैंक्स जैसा सुनाई दिया। 
उसके हाथों में अब भी कामया की नाजुक हथेली थी जो की उसे किसी रूई की तरह लग रही थी और उसकी पतली पतली उंगलियां जो की उसके मोटे और पत्थर जैसी हथेली से रगड़ खा रही थी उसे किसी स्वप्न्लोक में ले जा रही थी भीमा की नज़र कामया की हथेली से ऊपर उठी तो उसकी नजर कामया की दाई चूचि पर टिक गई जो की उसकी महीन लाइट ब्लू कलर की साड़ी के बाहर आ गई थी और डार्क ब्लू कलर के लो कट ब्लाउज से बहुत सा हिस्सा बाहर की ओर दिख रहा था कामया अब भी भीमा का हाथ पकड़े हुए हँसते हुए भीमा को थैंक्स कहकर मम्मीजी की ओर देख रही थी और अपने दोनों नाजुक हथेली से भीमा की हथेली को सहला रही थी। 

कामया- अरे हमें तो पता ही नहीं था आप तो जादूगर निकले 

भीमा अपनी नजर कामया के उभारों पर ही जमाए हुए। उसकी सुंदरता को अपने अंदर उतार रहा था और अपनी ही दुनियां में सोचते हुए घूम रहा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

मम्मीजी ने कामया से कहा- “जरा देखकर चलाकर बहू। वैसे भीमा को बहुत कुछ आता है। दर्द का एक्सपर्ट डाक्टर है मालीश भी बहुत अच्छी करता है। क्यों भीमा?”

भीमा- जी माँ जी अब बहू रानी ठीक है 
कहते हुए उसने कामया के एडी को छोटे हुए धीरे से नीचे रख दिया और चल गया उसने नजर उठाकर भी कामया की और नहीं देखा 
लेकिन भीमा के शरीर में एक आजीब तरह की हलचल मच गई थी। आज पता नहीं उसके मन उसके काबू में नहीं था। कामेश और कामया की शादी के इतने दिन बाद आज पता नहीं भीमा जाने क्यों कुछ बिचालित था। बहू रानी के मोच के कारण जो भी उसने आज किया उसके मन में एक ग्लानि सी थी । क्यों उसका मन बहू के टांगों को देखकर इतना बिचलित हो गया था उसे नहीं मालूम लेकिन जब वो वापस किचेन में आया तो उसका मन कुछ भी नहीं करने को हो रहा था। उसके जेहन में बहू के एड़ी और घुटने तक के टाँगें घूम रही थी कितना गोरा रंग था बहू का। और कितना सुडोल था और कितना नरम और कोमल था उसका शरीर। 
सोचते हुए वो ना जाने क्या करता जा रहा था। इतने में किचेन का इंटर काम बजा 

मम्मीजी- अरे भीमा जरा हल्दी और दूध ला दे बहू को कही दर्द ना बढ़ जाए। 
भीमा- जी। माजी। अभी लाया। 
और भीमा फिर से वास्तविकता में लाट आया। और दूध और हल्दी मिलाकर वापस डाइनिंग रूम में आया। मम्मीजी और बहू वही बैठे हुए आपस में बातें कर रहे थे। भीमा के अंदर आते ही कामया ने नजर उठाकर भीमा की ओर देखा पर भीमा तो नजर झुकाए हुए डाइनिंग टेबल पर दूध का ग्लास रखकर वापस किचेन की तरफ चल दिया। 

कामया- भीमा चाचा थैंक्स 

भियामा- जी। अरे इसमें क्या में तो इस घर का। नौकर हूँ। थैंक्स क्यों बहू जी 

कामया- अरे आपको क्या बताऊ कितना दर्द हो रहा था। लेकिन आप तो कमाल के हो फट से ठीक कर दिया। 
और कहती हुई वो भीमा की ओर बढ़ी और अपना हाथ बढ़ा कर भीमा की ओर किया और आखें उसकी। भीमा की ओर ही थी। भीमा कुछ नहीं समझ पाया पर हाथ आगे करके बहू क्या चाहती है 

तभी कामया की नजर भीमा चाचा की नजरसे टकराई और उसकी नजर का पीछा करती हुई जब उसने देखा की भीमा की नजर कहाँ है तो वो। अबाक रह गई उसके शरीर में एक अजीब सी सनसनी फेल गई वो भीमा चाचा की ओर देखते हुए जब मम्मीजी की ओर देखा तो पाया की मम्मीजी उठकर वापस अपने पूजा घर की ओर जा रही थी। कामया का हाथ अब भी भीमा के हाथ में ही था। कामया भीमा की हथेली की कठोरता को अपनी हथेली पर महसूस कर पा रही थी उसकी नजर जब भीमा की हथेली के ऊपर उसके हाथ की ओर गई तो वो और भी सन्न रह गई मजबूत और कठोर और बहुत से सफेद और काले बालों का समूह था वो। देखते ही पता चलता था कि कितना मजबूत और शक्ति शाली है भीमा का शरीर। कामया के पूरे शरीर में एक उत्तेजना की लहर दौड़ गई जो कि अब तक उसके जीवन काल में नहीं उठ पाई थी ना ही उसे इतनी उत्तेजना अपने पति के साथ कभी महसूस हुए थी और नही कभी उसके इतनी जीवन में। ना जाने क्या सोचते हुए कामया ने कहा
कामया- कहाँ खो गये चाचा। और धीरे से अपना हाथ भीमा के हाथ से अलग कर लिया।

भीमा जैसे नींद से जागा था झट से कामया का हाथ छोड़ कर नीचे चेहरा करते हुए।
भीमा- अरे बहू रानी हम तो सेवक है। आपके हुकुम पर कुछ भी कर सकते है इस घर का नमक खाया है।
और सिर नीचे झुकाए हुए तेज गति से किचेन की ओर मुड़ गया मुड़ते हुए उसने एक बार फिर अपनी नजर कामया के उभारों पर डाली और मुड़कर चला गया। कामया भीमा को जाते हुए देखती रही ना जाने क्यों। वो चाह कर भी भीमा की नजर को भूल नहीं पा रही थी। उसकी नजर में जो भूख कामया ने देखी थी। वो आज तक कामया ने किसी पुरुष के नजर में नहीं देखी थी। ना ही वो भूख उसने कभी अपने पति की ही नज़रों में देखी थी। जाने क्यों कामया के शरीर में एक सनसनी सी फेल गई। उसके पूरे शरीर में सिहरन सी रेंगने लगी थी। उसके शरीर में अजीब सी ऐंठन सी होने लगी थी। अपने आपको भूलने के लिए। उसने अपने सिर को एक झटका दिया और मुड़कर अपने कमरे में आ गई। दरवाजा बंद कर धम्म से बिस्तर पर पड़ गई। और शून्य की ओर एकटक देखती रही। भीमा चाचा फिर से उसके जेहन पर छा गये थे। फिर से कामया को उसकी नीचे की हुई नजर याद आ गई थी। अचानक ही कामया एक झटके से उठी और ड्रेसिंग टेबल के सामने आ गई। और अपने को मिरर में देखने लगी। साड़ी लेटने के कारण अस्तवस्त थी ही। उसके ब्लाउज के ऊपर से भी हट गई थी। गोरे रंग के उभार ऊपर से टाइट कसे हुए ब्लाउस और साड़ी की अस्तव्यस्त होने की वजह से कामया एक बहुत ही सेक्सी औरत दिख रही थी। वो अपने हाथों से अपने शरीर को टटोलने लगी। अपनी कमर से लेकर गोलाईयों तक। वो जब अपने हाथों को ऊपर की ओर उठाकर अपने शरीर को छू रही थी। तो अपने अंदर उठने वाली उत्तेजना की लहर को वो रोक नहीं पाई थी। कामया अपने आप को मिरर में निहारती हुई अपने पूरे बदन को अब एक नये नजरिए से देख रही थी। आज की घटना ने उसे मजबूर कर दिया था कि वो अपने को ठीक से देखे। वो यह तो जानती थी कि वो सुंदर देखती है। पर आज जो भी भीमा चाचा की नजर में था। वो किसी सुंदर लड़की या फिर सुंदर घरेलू औरत के लिए ऐसी नजर कभी भी नहीं हो सकती थी। वो तो शायद किसी सेक्सी लड़की और फिर औरत के लिए ही हो सकती थी

क्या वो सेक्सी दिखती है। वैसे आज तक कामेश ने तो उसे नहीं कहा था। वो तो हमेशा ही उसके पीछे पड़ा रहता था। पर आज तक उसने कभी भी कामया को सेक्सी नहीं कहा था। नहीं उसने अपने पूरे जीवन काल में ही अपने को इस नजरिए से ही देखा था। पर आज बात कुछ आलग थी। आज ना जाने क्यों। कामया को अपने आपको मिरर में देखने में बड़ा ही मजा आ रहा था। वो अपने पूरे शरीर को एक बड़े ही नाटकीय तरीके से कपड़ों के ऊपर से देख रही थी। और हर उभार और गहराई में अपनी उंगलियों को चला रही थी। वो कुछ सोचते हुए अपने साड़ी को उतार कर फेक दिया और सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही मिरर के सामने खड़ी होकर। देखती रही। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। जब उसकी नजर अपने उभारों पर गई। तो वो और भी खुश हो गई। उसने आज तक कभी भी इतने गौर से अपने को नहीं देखा था। शायद साड़ी के बाद जब भी नहाती थी या फिर कामेश तारीफ करता था। तो। शायद उसने कभी। देखा हो पर। आज। जब उसकी नजर अपने उभारों पर पड़ी तो वो दंग रह गई। साड़ी के बाद वो कुछ और भी ज्यादा गोल और उभर गये थे। शेप और साइज। का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था। कि करीब 25% हिस्सा उसका ब्लाउज से बाहर की ओर था। और 75% जो कि अंदर था। एक बहुत ही आकर्षक और सेक्सी महिला के लिए काफी था। कामया ने जल्दी से अपने ब्लाउस और पेटीकोट को भी उतार कर झट से फेक दिया और। अपने को फिर से मिरर में देखने लगी। पतली सी कमर और फिर लंबी लंबी टांगों के बीच में फँसी हुई उसकी पैंटी। गजब का लग रहा था। देखते-देखते कामया धीरे-धीरे अपने शरीर पर अपना हाथ घुमाने लगी। पूरे शरीर पर। ब्रा और पैंटी के उपर से। आआह्ह। क्या सुकून है। उसके शरीर को। कितना अच्छा लग रहा था। अचानक ही उसे भीमा चाचा के कठोर हाथ याद आ गये। और वो और भी बिचलित हो उठी। ना चाहते हुए भी उसके हाथों की उंगलियां। उसकी योनि की ओर बढ़ चली और धीरे धीरे वो अपने योनि को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगी। एक हाथ से वो अपनी चूचियां को धीरे से दबा रही थी। और दूसरे हाथ से अपने योनि पर। उसकी सांसें तेज हो चली थी। खड़े हो पाना दूभर हो गया था। टाँगें कंपकपाने लगी थी। मुख से। सस्शह। और। आअह्ह। की आवाजें अब थोड़ी सी तेज हो गई थी। शायद उसे सहारे की जरूरत है। नहीं तो वो गिर जाएगी। वो हल्के से घूमकर बिस्तर की ओर बढ़ी ही थी। कि अचानक उसके रूम का इंटरकॉम बज उठा।
कामया- जी।

मम्मीजी- अरे बहू। चल आ जा। खाना खा ले। क्या कर रही है ऊपर।

कामया- जी। मम्मीजी। कुछ नहीं। बस आई। और कामया ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और जल्दी से नीचे की ओर भागी। जब वो नीचे पहुँची तो मम्मीजी डाइनिंग टेबल पर आ चुकी थी। और कामया का ही इंतजार हो रहा था। वो जल्दी से ठीक ठाक तरीके से अपनी सीट पर जम गई पर ना जाने क्यों। वो अपनी नजर नहीं उठा पा रही थी। क्यों पता नहीं। शायद इसलिए। कि आज जो भी उसने अपने कमरे में अकेले में किया। उससे उसके मन में एक ग्लानि सी उठ रही थी। या कुछ और। क्या पता। इसी उधेड बुन में वो खाना खाती रही और मम्मीजी की बातों का भी हूँ हाँ में जबाब भी देती रही। लेकिन नजर नहीं उठा पाई। खाना खतम हुया और वो अपने कमरे की ओर पलटी। तो ना जाने क्यों उसने पलटकर। भीमा चाचा की ओर देखा। जो कि उसी की तरफ देख रहे थे। जब वो सीढ़ी चढ़ रही थी।

और जैसे ही कामया की नजर से टकराई तो। जल्दी से नीचे भी हो गई। कामया पलटकर अपने कमरे की ओर चल दी। और जाकर आराम करने लगी। सोचते सोचते पता नहीं कब उसे नींद लग गई। और शाम को इंटरकॉम की घंटी ने ही उसे उठाया। चाय के लिए। कामया कपड़े बदल कर। नीचे आई और चाय पीकर मम्मीजी के साथ। टीवी देखने लगी। सुबह की घटना अब उसके दिमाग में नहीं चल रही थी। 8। 30 के बाद पापाजी और कामेश घर आ जाते थे। दुकान बढ़ाकर।

दोनों के आते ही घर का महाल कुछ चेंज हो जाता था। सब कुछ जल्दी बाजी में होता था। खाना। और फिर थोड़ी बहुत बातें और फिर सभी अपने कमरे की ओर चल देते थे। पूरे घर में सन्नाटा छा जाता था।

कमरे में पहुँचते ही कामेश कामया से लिपट गया। कामया का पूरा शरीर जल रहा था। वो जाने क्यों आज बहुत उत्तेजित थी। कामेश के लिपट-ते ही कामया। पूरे जोश के साथ कामेश का साथ देने लगी। कामेश को भी कामया का इस तरह से उसका साथ देना कुछ आजीब सा लगा पर वो तो उसका पति ही था उसे यह पसंद था। पर कामया हमेशा से ही कुछ झिझक ही लिए हुए उसका साथ देती थी। पर आज का अनुभब कुछ अलग सा था। कामेश कामया को उठाकर बिस्तर पर ले गया और जल्दी से कामया को कपड़ों से आजाद करने लगा।

कामेश भी आज पूरे जोश में था। पर कामया कुछ ज्यादा ही जोश में थी। वो आज लगता था कि कामेश को खा जाएगी। उसके होंठ कामेश के होंठों को छोड़ ही नही रहे थे और वो अपने मुख में लिए जम के चूस रही थी। कभी ऊपर के तो कभी नीचे के होंठ कामया की जीब और होंठों के बीच पिस रहे थे। कामेश भी कामया के शरीर पर टूट पड़ा था। जहां भी हाथ जाता कसकर दबाता था। और जितना जोर उसमें था उसका वो इस्तेमाल कर रहा था। कामेश के हाथ कामया की जाँघो के बीच में पहुँच गये थे। और अपनी उंगलियों से वो कामया की योनि को टटोल रहा था। कामया पूरी तरह से तैयार थी। उसकी योनि पूरी तरह से गीली थी। बस जरूरत थी तो कामेश के आगे बढ़ने की। कामेश ने अपने होंठों को कामया से छुड़ा कर अपने होंठों को कामया की चूचियां पर रख दिया और खूब जोर-जोर से चूसने लगा। कामया धनुष की तरह ऊपर की ओर हो गई।

और अपने हाथों का दबाब पूरे जोर से उसने कामेश के सिर पर कर दिया कामेश का पूरा चेहरा उसके चूचियां से धक गया था उसको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। पर किसी तरह से उसने अपनी नाक में थोड़ा सा हवा भरा और फिर जुट गया वो कामया की चूचियां पर। कामया। जो कि बस इंतेजर में थी कि कामेश उसपर छा जाए। किसी भी तरह से बस उसके शीरीर को खा जाए। और। उसके अंदर उठ रही ज्वार को शांत कर्दे। कामेश भी कहाँ देर करने वाला था। झट से अपने को कामया की गिरफ़्त से आजाद किया और अपने को कामया की जाँघो के बीच में पोजीशन किया और। धम्म से अंदर।

आआआआआह्ह। कामया के मुख से एक जबरदस्त। आहह निकली।
और कामेश से चिपक गई। और फिर अपने होंठों को कामेश के होंठों से जोड़ दिया। और अपनी सांसें भी कामेश के मुख के अंदर ही छोड़ने लगी। कामेश आवेश में तो था ही। पूरे जोश के साथ। कामया के अंदर-बाहर हो रहा था। आज उसने कोई भी रहम या। ढील नहीं दी थी। बस किसी जंगली की तरह से वो कामया पर टूट पड़ा था। पता नही क्यों कामेश को आज कामया का जोश पूरी तरह से। नया लग रहा था। वो अपने को नहीं संभाल पा रहा था। उसने कभी भी कामया से इस तरह से संभोग करने की नहीं सोची थी। वो उसकी पत्नी थी। सुंदर और पढ़ी लिखी। वो भी एक अच्छे घर का लड़का था। संस्कारी और अच्छे घर का। उसने हमेशा ही अपनी पत्नी को एक पत्नी की तरह ही प्यार किया था। किसी। जंगली वा फिर हबसी की तरह नहीं। कामया नाम के अनुरूप ही सुंदर और नाजुक थी। उसने बड़े ही संभाल कर ही उसे इस्तेमाल किया था। पर आज कामया के जोश को देखकर वो भी। जंगली बन गया था। अपने को रोक नहीं पाया था।

धीरे-धीरे दोनों का जोश ठंडा हुआ। तो। दोनों बिस्तर पर चित लेटके। जोर-जोर से अपने साँसे। छोड़ने लगे और। किसी तरह अपनी सांसों पर नियंत्रण पाने की कोशिश करने लगे। दोनों थोड़ा सा संभले तो एक दूसरे की ओर देखकर मुस्कुराए कामेश। कामया की ओर देखता ही रहा गया। आज ना तो उसने अपने को ढँकने की कोशिश की और नहीं अपने को छुपाने की। वो अब भी बिस्तर पर वैसे ही पड़ी हुई थी। जैसा उसने छोड़ा था। बल्कि उसके होंठों पर मुश्कान ऐसी थी की जैसे आज उसको बहुत मजा आया हो। कामेश ने पलटकर कामया को अपनी बाहों में भर लिया और।
कामेश- क्या बात है। आज कुछ खास बात है क्या।

कामया- उउउहह। हूँ।

कामेश- फिर। आज। कुछ बदली हुई सी लगी।

कामया- अच्छा वो कैसे।

कामेश- नहीं बस। यूही। कोई। फिल्म वग़ैरह देखा था क्या।

कामया- नहीं तो। क्यों।

कामेश- नहीं। आज कुछ ज्यादा ही मजा आया। इसलिए।

और हँसते हुए। उठ गया और। बाथरूम की ओर चला गया।

कामया। वैसे ही। बिस्तर पर बिल्कुल नंगी ही लेटी रही। और अपने और कामेश के बारे में सोचने लगी। कि कामेश को भी आज उसमें चेंज दिखा है। क्या चेंज। आज का सेक्स तो मजेदार था। बस ऐसा ही होता रहे। तो क्या बात है। आज कामेश ने भी पूरा साथ दिया था। कामया का।

इतने में उसके ऊपर चादर गिर पड़ी और वो अपने सोच से बाहर आ गई

कामेश- चलो उठो।

कामया कामेश की ओर देख रही थी। क्यों उसने उसे ढक दिया। क्या वो उसे इस तरह नहीं देखना चाहता क्या वो सुंदर नहीं है। क्या। वो बस सेक्स के खेल के समय ही उसे नंगा देखना चाहता है। और बाकी समय बस ढँक कर रहे वो। क्यों। क्यों नहीं चाहता कामेश उसे। नंगा देखना। क्यों। नहीं वो चादर को खींचकर गिरा देता है। और फिर उसपर चढ़ जाता है। क्यों नहीं करता वो यह सब। क्या कमी है। उसमें।

तब तक कामेश। घूमकर अपने बिस्तर की ओर चला आया था। और कामया की ओर ही देख रहा था।

कामया धीरे से उठी और चाददर लपेट कर ही बाथरूम की ओर चल दी। लेकिन अंदर जाने से पहले जब पलट कर देखा तो कामया चुपचाप बाथरूम में घुस गई और। अपने को साफ करने के बाद जब वो बाहर आई तो शायद कामेश सो चुका था। वो अब भी चादर लपेटे हुई थी। और बिस्तर के कोने में आकर बैठ गई थी। सामने ड्रेसिंग टेबल पर कोने से उसकी छवि दिख रही थी। बाल उलझे हुए थे। पर चेहरे पर मायूसी थी। कामया के।

ज्यादा ना सोचते हुए। कामया भी धम्म से अपनी जगह पर गिर पड़ी और। कंबल के अंदर बिना कपड़े के ही घुस गई। और सोने की चेष्टा करने लगी। नजाने कब वो सो गई और सुबह भी हो गई।
 



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उठते ही कामया ने बगल में देखा। कामेश उठ चुका था। शायद बाथरूम में था। वो बिना हीले ही लेटी रही। पर बाथरूम से ना तो कुछ आवाज ही आ रही थी। ना ही पूरे कमरे से। वो झट से उठी और घड़ी की ओर देखा। 
बाप रे 8। 30 हो चुके है। कामेश तो शायद नीचे होगा। 

जल्दी से कामया बाथरूम में घुस गई और। फ्रेश होकर नीचे। आ गई। पापाजी, मम्मीजी। और कामेश ;आँगन में बैठे थे। चाय बिस्कट रखा था। टेबल पर। कामया की आहट सुनते ही सब पलटे

कामेश- क्या बात है। आज तुम्हारी नींद ही नहीं खुली। 

कामया- जी। 

मम्मीजी-और क्या। सोया कर बहू। कौन सा तुझे। जल्दी उठकर घर का काम करना है। आराम किया कर और खूब घुमा फिरा कर और। मस्ती में रह। 

पापाजी- और क्या। क्या करेगी घर पर यह। बोर भी तो हो जाती होगी। क्यों ना कुछ दिनों के लिए। अपने मम्मी पापा के घर हो आती। बहू। 

मम्मीजी- वहां भी क्या और करेगी। दोनों ही तो। नौकरी वाले है। वहां भी घर में बोर होगी। 

इतने में कामेश की चाय खतम हो गई और वो उठ गया। 
कामेश- चलो। में तो चला तैयार होने। और पापा। आप थोड़ा जल्दी आ जाना। 

पापाजी- हाँ… हाँ… आ जाऊँगा। 

कामेश के जाने के बाद कामया भी उठकर जल्दी से कामेश के पीछे भागी। यह तो उसका रोज का काम था। जब तक कामेश शोरुम नहीं चला जाता था। उसके पीछे-पीछे घूमती रहती थी। और चले जाने के बाद कुछ नहीं बस इधर-उधर। फालतू। 

कामेश अपने कमरे में पहुँचकर नहाने को तैयार था। एक तौलिया पहनकर कमरे में घूम रहा था। जैसे ही कामया कमरे में पहुँची। वो मुश्कुराते हुए। कामया से पूछा। 
कामेश- क्यों। अपने पापा मम्मी के घर जाना है क्या। थोड़े दिनों के लिए। 

कामया- क्यों। पीछा छुड़ाना चाहते हो। 
और अपने बिस्तर के कोने पर बैठ गई। 

कामेश- अरे नहीं यार। वो तो बस मैंने ऐसे ही पूछ लिया। पति हूँ ना तुम्हारा। और पापा भी कह रहे थे। इसलिए। नहीं तो। हम कहा जी पाएँगे आपके बिना। 
और कहते हुए। वो खूब जोर से खिलखिलाते हुए हँसते हुए बाथरूम की ओर चल दिया। 

कामया- थोड़ा रुकिये ना। बाद में नहा लेना। 

कामेश- क्यों। कुछ काम है। क्या। 

कामया- हाँ… (और एक मादक सी मुश्कुराहट अपने होंठों पर लाते हुए कहा।)

कामेश भी अपनी बीवी की ओर मुड़ा और उसके करीब आ गया। कामया बिस्तर पर अब भी बैठी थी। और कामेश की कमर तक आ रही थी। उसने अपने दोनों हाथों से कामेश की कमर को जकड़ लिया और अपने गाल को कामेश के पेट पर घिसने लगी। और अपने होंठों से किस भी करने लगी। 

कामेश ने अपने दोनों हाथों से कामया का चेहरे को पकड़कर ऊपर की ओर उठाया। और कामया की आखों में देखने लगा। कामया की आखों में सेक्स की भूख उसे साफ दिखाई दे रही थी। लेकिन अभी टाइम नहीं था। वो। अपने शो रूम के लिए लेट नहीं होना चाहता था। 

कामेश- रात को। अभी नहीं। तैयार रहना। ठीक है। 
और कहते हुए नीचे चुका और। अपने होंठ को कामया के होंठों पर रखकर चूमने लगा। कामया भी कहाँ पीछे हटने वाली थी। बस झट से कामेश को पकड़कर। बिस्तर पर गिरा लिया। और अपनी दोनों जाँघो को कामेश के दोनों ओर से रख लिया। अब कामेश कामया की गिरफ़्त में था। दोनों एक दूसरे में गुत्थम गुत्था कर रहे थे। कामया तो जैसे पागल हो गई थी। उसने कस पर कामेश के होंठों को अपने होंठों से दबा रखा था। और जोर-जोर से चूस रही थी। और अपने हाथों से कामेश के सिर को पकड़कर अपने और अंदर घुसा लेना चाहती थी। कामेश भी आवेश में आने लगा था, । पर दुकान जाने की चिंता उसके दिलोदिमाग़ पर हावी थी थोड़ी सी ताकत लगाकर उसने अपने को कामया के होंठों से अपने को छुड़ाया और झुके हुए ही कामया के कानों में कहा। 
कामेश- बाकी रात को। 
और हँसते हुए कामया को बिस्तर पर लेटा हुआ छोड़ कर ही उठ गया। उठते हुए उसकी टावल भी। खुल गया था। पर चिंता की कोई बात नहीं। वो तौलिया को अपने हाथों में लिए ही। जल्दी से बाथरूम में घुस गया। 

कामया कामेश को बाथरूम में जाते हुए देखती रही। उसकी नजर भी कामेश के लिंग पर गई थी। जो कि सेमी रिजिड पोजीशन में था वो जानती थी कि थोड़ी देर के बाद वो तैयार हो जाता। और कामया की मन की मुराद पूरी हो जाती। पर कामेश के ऊपर तो दुकान का भूत सवार था। वो कुछ भी हो जाए उसमें देरी पसंद नहीं करता था। वो भी चुपचाप उठी और कामेश का इंतेजार करने लगी। कामेश को बहुत टाइम लगता था बाथरूम में। शेव करके। और नहाने में। फिर भी कामया के पास कोई काम तो था नहीं। इसलिए। वो भी उठकर कामेश के ड्रेस निकालने लगी। और बेड में बैठकर इंतजार करने लगी। कामेश के बाहर आते ही वो झट से उसकी ओर मुखातिब हुई। और। 
कामया- आज जल्दी आ जाना शो रूम से। (थोड़ा गुस्से में कहा कामया ने।)

कामेश- क्यों। कोई खास्स है क्या। (थोड़ा चुटकी लेते हुए कामेश ने कहा)

कामया- अगर काम ना हो तो क्या शोरुम में ही पड़े रहोगे। 

कामेश- हाँ… हाँ… हाँ… अरे बाप रे। क्या हुआ है तुम्हें। कुछ नाराज सी लग रही हो।

कामया- आपको क्या। मेरी नाराजगी से। आपके लिए तो बस अपनी दुकान। मेरे लिए तो टाइम ही नहीं है। 


कामेश- अरे नहीं यार। मैं तो तुम्हारा ही हूँ। बोलो क्या करना है। 

कामया- जल्दी आना कही घूमने चलेंगे। 

कामेश- कहाँ

कामया- अरे कही भी। बस रास्ते रास्ते। में। और फिर बाहर ही डिनर करेंगे। 

कामेश- ठीक है। पर जल्दी तो में नहीं आ पाऊँगा। हाँ… घूमने और डिनर की बात पक्की है। उसमें कोई दिक्कत नहीं। 

कामया- अरे थोड़ा जल्दी आओगे तो टाइम भी तो ज्यादा मिलेगा। 

कामेश- तुम भी। कामया। कौन कहता है। अपने को कि जल्दी आ जाना या फिर देर तक बाहर नहीं रहना। क्या फरक पड़ता है। अपने को। रात भर बाहर भी घूमते रहेंगे तो भी पापा मम्मी कुछ नहीं कहेंगे। 

कामया भी। कुछ नहीं कह पाई। बात बिल्कुल सच थी। कामेश के घर से कोई भी बंदिश नहीं थी। कामया और कामेश के ऊपर लेकिन कामया चाहती थी कि कामेश जल्दी आए तो वो उसके साथ कुछ सेक्स का खेल भी खेल लेती और फिर बाहर घूमते फिरते और फिर रात को। तो होना ही था। 

कामया भी चुप हो गई। और कामेश को तैयार होने में मदद करने लगी। तभी। 

कामेश- अच्छा एक बात बताओ तुम अगर घर में बोर हो जाती हो तो कही घूम फिर क्यों नहीं आती। 

कामया- कहाँ जाऊ 

कामेश- अरे बाबा। कही भी। कुछ शापिंग कर लो कुछ दोस्तों से मिल-लो। ऐसे ही किसी माल में घूम आओ या फिर। कुछ भी तो कर सकती हो पूरे दिन। कोई भी तो तुम्हें मना नहीं करेगा। हाँ… 

कामया- मेरा मन नहीं करता अकेले। और कोई साथ देने वाला नहीं हो तो अकेले क्या अच्छा लगता है। 

कामेश- अरे अकेले कहाँ कहो तो। आज से मेरे दुकान जाने के बाद में लक्खा काका को घर भेज दूँगा। वो तुम्हें घुमा फिरा कर वापस घर छोड़ देगा और फिर दुकान चला आएगा। वैसे भी दुकान पर शाम तक दोनों गाड़ी खड़ी ही रहती है। 

कमाया- नहीं। 

कामेश- अरे एक बार निकलो तो सही। सब अच्छा लगेगा। पापा को छोड़ने के बाद लाखा काका को में भेज दूँगा। ठीक है। 

कामया- अरे नहीं। मुझे नहीं जाना। बस। ड्राइवर के साथ अकेले। नहीं। हाँ यह आलग बात थी कि मुझे गाड़ी चलानी आती होती तो में अकेली जा सकती थी। पर ड्राइवर के साथ नहीं। जाऊँगी। बस। 

कामेश- अरे वाह तुमने तो। एक नई बात। खोल दी। अरे हाँ… 

कामया- क्या। 

कामेश- अरे तुम एक काम क्यों नहीं करती। तुम गाड़ी चलाना सीख क्यों नहीं लेती। घर में 3 गाड़ी है। एक तो घर में रखे रखे धूल खा रही है। छोटी भी है। तुम चलाओ ना उसे। 

कामेश के घर में 3 गाड़ी थी। दो में तो पापा और वो खुद जाता था शोरुम पर घर में एक मम्मीजी लेने ले जाने के लिए थी। जो कि अब वैसे ही खड़ी थी। 

कामया- क्या। यार तुम भी। कौन सिखाएगा मुझे गाड़ी। आपके पास तो टाइम नहीं है। 

कामेश- अरे क्यों। लाखा काका है ना। मैं आज ही उन्हें कह देता हूँ। तुम्हें गाड़ी सीखा दे। 

और एकदम से खुश होकर कामया ने कामेश के गालों को और फिर होंठों को चूम लिया। 
कामेश- और जब तुम गाड़ी चलाना सीख जाओगी। तो मैं पास में बैठा रहूँगा और तुम गाड़ी चलाना 

कामया- क्यों। 

कामेश- और क्या। फिर हम तुम्हारे इधर-उधर हाथ लगाएँगे। और बहुत कुछ करेंगे। बड़ा मजा आएगा। ही। ही। ही। 

कामया- धात। जब गाड़ी चलाउन्गी तब। छेड़छाड़ करेंगे। घर पर क्यों नहीं। 

कामेश- अरे तुम्हें पता नहीं। गाड़ी में छेड़ छाड़ में बड़ा मजा आता है। चलो यह बात पक्की रही। कि तुम। अब गाड़ी चलाना सीख लो। जल्दी से। 

कामया- नहीं अभी नहीं। मुझे मम्मीजी से पूछना है। इसके बाद। कल बताउन्गी ठीक है। और दोनों। नीचे आ गये डाइनिंग टेबल पर कामेश का नाश्ता तैयार था। भीमा चाचा का। काम बिल्कुल टाइम से बँधा हुआ था। कोई भी देर नहीं होती थी। कामया आते ही कामेश के लिए प्लेट तैयार करने लगी। पापा जी और मम्मीजी पूजा घर में थे। उनको अभी टाइम था। 

कामेश ने जल्दी से नाश्ता किया और। पूजा घर के बाहर से ही प्रणाम करके घार के बाहर की चल दिया बाहर लाखा काका दोनों की गाड़ी को सॉफ सूफ करके चमका कर रखते थे। कामेश खुद ड्राइव करता था। पर पापाजी के पास ड्राइवर था। लाखा काका। 

कामेश के जाने के बाद कामया भी अपने कमरे में चली आई और कमरे को ठीक ठाक करने लगी। दिमाग में अब भी कामेश की बात घूम रही थी। ड्राइविंग सीखने की। कितना मजा आएगा। अगर उसे ड्राइविंग आ गई तो। कही भी आ जा सकती है। और फिर कामेश से कहकर नई गाड़ी भी खरीद सकती है। वाह मजा आ जाएगा यह बात उसके दिमाग में पहले क्यों नहीं आई। और जल्दी से अपने काम में लग गई। नहा धो कर जल्दी से तैयार होने लगी। वारड्रोब से चूड़ीदार निकाला और पहन लिया वाइट और रेड कॉंबिनेशन था। बिल्कुल टाइट फिटिंग का था। मस्त फिगर दिख रहा था। उसमें उसका। 

तैयार होने के बाद जब उसने अपने को मिरर में देखा। गजब की दिख रही थी। होंठों पर एक खूबसूरत सी मुश्कान लिए। उसने अपने ऊपर चुन्नी डाली और। मटकती हुई नीचे जाने लगी। सीढ़ी के ऊपर से डाइनिंग स्पेस का हिस्सा दिख रहा था। वहां भीमा चाचा। टेबल पर खाने का समान सजा रहे थे। उनका ध्यान पूरी तरह से। टेबल की ओर ही था। और कही नहीं। पापाजी और मम्मीजी भी अभी तक टेबल पर नहीं आए थे। कामया थोड़ा सा अपनी जगह पर रुक गई। उसे कल की बात याद आ गई भीमा चाचा की नजर और हाथों का सपर्श उसके जेहन में अचानक ही हलचल मचा दे रहा था। वो जहां थी वही खड़ी रह गई। जैसे उसके पैरों में जान ही नहीं है। खड़े-खड़े वो नीचे भीमा चाचा को काम करते दिख रही थी। चाचा अपने मन से काम में जल्दी बाजी कर रहे थे। और कभी किचेन में और कभी डाइनिंग रूम में बार-बार आ जा रहे था। वो अब भी वही अपनी पुरानी धोती और एक फाटूआ पहने हुए थे। (फाटूआ एक हाफ बनियान की तरह होता है। जो कि पुराने लोग पहना करते थे) 

वो खड़े-खड़े भीमा चाचा के बाजू को ध्यान से देख रही थी। कितने बाल थे। उनके हाथों में। किसी भालू की तरह। और कितने काले भी। भद्दे से दिखते थे। पर खाना बहुत अच्छा बनाते थे। इतने में पापाजी जी के आने की आहट सुनकर भीमा जल्दी से किचेन की ओर भागा और जाते जाते। सीडियो की तरफ भी देखता गया सीढ़ी पर कोने में कामया खड़ी थी। नजर पड़ी और चला गया उसकी नजर में ऐसा लगा कि उसे किसी का इंतजार था। शायद कामया का। कामया। के दिमाग़ में यह बात आते ही वो। सनसना गई। पति की आधी छोड़ी हुई उत्तेजना उसके अंदर फिर से जाग उठी। वो वहीं खड़ी हुई भीमा चाचा को किचेन में जाते हुए। देखती रही। पापाजी के पीछे-पीछे मम्मीजी भी डाइनिंग रूम में आ गई थी। 

कामया ने भी अपने को संभाला और। एक लंबी सी सांस छोड़ने के बाद वो भी जल्दी से नीचे की ओर चल पड़ी। पापाजी और मम्मीजी टेबल पर बैठ गये थे। कामया जाकर पापाजी और मम्मीजी को खाना लगाने लगी। और। इधर-उधर की बातें करते हुए पापाजी और मम्मीजी खाना खाने लगे थे। कामया अब भी खड़ी हुई। पापाजी और मम्मीजी के प्लेट का ध्यान रख रही थी। पापाजी और मम्मीजी खाना खाने में मस्त थे। और कामया खिलाने में। खड़े-खड़े मम्मीजी को कुछ देने के लिए। जब उसने थोड़ी सी नजर घुमाई तो उसे। किचेन का दरवाजा हल्के से नजर आया। तो भीमा चाचा के पैरों पर नजर पड़ी। तो इसका मतलब। भीमा चाचा। किचेन से छुप कर कामया को पीछे से देख रहे है। 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया अचानक ही सचेत हो गई। खुद तो टेबल पर पापाजी और मम्मीजी को खाना परोस रही थी। पर दिमाग और पूरा शरीर कही और था। उसके शरीर में चीटियाँ सी दौड़ रही थी। पता नहीं क्यों। पूरे शरीर सनसनी सी दौड़ गई थी कामया के। उसके मन में जाने क्यों। एक अजीब सी हलचल सी मच रही थी। टाँगें। अपनी जगह पर नहीं टिक रही थी। ना चाहते हुए भी वो बार-बारइधर-उधर हो रही थी। एक जगह खड़े होना उसके लिए दुश्वार हो गया था। अपनी चुन्नी को ठीक करते समय भी उसका ध्यान इस बात पर था कि चाचा पीछे से उसे देख रहे है। या नहीं। पता नहीं क्यों। उसे इस तरह का। चाचा का छुप कर देखना। अच्छा लग रहा था। उसके मन को पुलकित कर रहा था। उसके शरीर में एक अजीब सी। लहर दौड़ रही थी। 

कामया का ध्यान अब पूरी तरह से। अपने पीछे खड़े चाचा पर था। नजर। सामने पर ध्यान पीछे था। उसने अपनी चुन्नी को पीछे से हटाकर दोनों हाथों से पकड़ कर अपने सामने की ओर हाथों पर लपेट लिया और खड़ी होकर। पापा और मम्मीजी को खाते हुए देखती रही। पीछे से चुन्नी हटने की वजह से। उसकी पीठ और कमर। और नीचे नितंब बिल्कुल साफ-साफ शेप को उभार देते हुए दिख रहे थे। कामया जानती थी कि वो क्या कर रही है। (एक कहावत है। कि औरत को अपनी सुंदरता को दिखाना आता है। कैसे और कहाँ यह उसपर डिपेंड करता है।)। वो जानती थी कि चाचा अब उसके शरीर को पीछे से अच्छे से देख सकते है। वो जान बूझ कर थोड़ा सा झुक कर मम्मीजी और पापाजी को खाने को देती थी। और थोड़ा सा मटकती हुई वापस खड़ी हो जाया करती थी। उसके पैर अब भी एक जगह नहीं टिक रहे थे। 

इतने में पापाजी का खाना हो गया तो 
पापाजी- अरे बहू। तुम भी खा लो। कब तक खड़ी रहोगी। चलो बैठ जाओ। 

कामया- जी। पापाजी। बस मम्मीजी का हो जाए। फिर। खा लूँगी। 

मम्मीजी- अरे अकेले। अकेले। खाओगी क्या। चलो। बैठ जाओ। अरे भीमा। 

कामया- अरे मम्मीजी आप खा लीजिए। मैं थोड़ी देर से खा लूँगी। 

भीमा- जी। माजी। 

कामया- अरे कुछ नहीं। जाओ। में बुला लूँगी। 

मम्मीजी- अरे अकेली अकेली। क्या। 

और बीच में ही बात अधूरी छोड़ कर मम्मीजी भी खाने के टेबल से उठ गई। और थोड़ा सा लंगड़ाती हुई।वाश बेसिन में हाथ दो कर। मूडी। तब तक। पापाजी भी। तैयार होकर। अपने रूम से निकल आए। और बाहर की ओर जाने लगे। मम्मीजी और कामया भी उनके पीछे-पीछे। दरवाजे की ओर चल दी। बाहर। पोर्च में लाखा काका। गाड़ी का दरवाजा खोले। सिर नीचे किए। खड़े थे। वही अपनी धोती और एक सफेद कुर्ता। पहने मजबूत कद काठी वाले काका। पापाजी के। बहुत ही बल्कि। पूरी परिवार के बड़े ही विस्वास पात्र नौकर थे। कभी भी उनके मुख से किसी ने ना नहीं सुना था। बहुत काम बोलते थे। और काम ज्यादा करते थे। सभी नौकरो में भीमा चाचा और लाखा काका और कद परिवार में बहुत ज्यादा उँचा था। खेर। पापाजी जी के गाड़ी में बैठने के बाद लाखा भी जल्दी से। दौड़ कर सामने की ओर ड्राइवर सीट पर बैठ गया और गाड़ी। गेट के बाहर की ओर दौड़ गई। मम्मीजी के साथ कामया भी अंदर की ओर पलटी। मम्मीजी तो बस थोड़ी देर आराम करेंगी। और कामया। खाना खाकर। सो जाएगी। रोज का। रूटीन कुछ ऐसा ही था। कामया पापाजी और मम्मीजी के साथ खाना खा लेती थी पर आज उसने जान बूझ कर अपने को रोक लिया था। वो देखना चाहती थी। कि जो वो सोच रही थी। क्या वो वाकई सच है या फिर सिर्फ़ उसकी कल्पना मात्र था। वो अंदर आते ही दौड़ कर अपने कमरे की चली गई। पीछे से मम्मीजी की आवाज आई। 

मम्मीजी- अरे बहू खाना तो खा ले। 

कामया- जी। मम्मीजी। बस आई। 

मम्मीजी- (अपने रूम की ओर जाते समय भीमा को आवाज देती है।)। भीमा। बहू ने खाना नहीं खाया है। थोड़ा ध्यान रखना। 

भीमा- जी माँ जी। 

भीमा जब तक डाइनिंग रूम में आता तब तक कामया अपने कमरे में जा चुकी थी। भीमा खड़ा-खड़ा सोचने लगा कि क्या बात है आज छोटी बहू ने साहब लोगों के साथ क्यों नहीं खाया। और टेबल से झूठे प्लेट और ग्लास उठाने लगा। पर भीतर जो कुछ चल रहा था। वो सिर्फ़ भीमा ही जानता था। उसकी नजर बार-बार सीढ़ियो की ओर चली जाती थी। कि शायद बहू उतर रही है। पर। जब तक वो रूम में रहा तब तक। बहू। नहीं उतरी

भीमा सोच रहा था कि जल्दी से बहू खाना खा ले। तो वो आगे का काम निबटाए। पर। पता नहीं बहू को क्या हो गया था। लेकिन। वो तो सिर्फ़ एक नौकर था। उसे तो मालिको का ध्यान ही रखना है। चाहे जो भी हो। यह तो उसका काम है। सोचकर। वो प्लेट और ग्लास धोने लगा। भीमा अपने काम में मगन था। कि किचेन में अचानक ही बहुत ही तेज सी खुशबू। फेल गई। थी। उसने पलटकर देखा। बहू खड़ी थी। किचेन के दरवाजे पर। 

भीमा बहू को देखता रहा गया। जो चूड़ीदार वो पहेने हुए थी वो चेंज कर आई थी। एक महीन सी। लाइट ईलोव कलर की साड़ी पहने हुए थी और साथ में वैसा ही स्लीव्ले ब्लाउस। एक पतली सी लाइन सी दिख रही थी। साड़ी जिसने उसकी चूचियां के उपर से उसके ब्लाउज को ढाका हुआ था। बाल खुले हुए थे। और होंठों पर गहरे रंग का लिपस्टिक्स था। और आखों में और होंठों में एक मादक मुस्कान लिए। बहू। किचेन के दरवाजे पर। एक रति की तरह खड़ी थी। 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भीमा सबकुछ भूलकर सिर्फ़ कामया के रूप का रसपान कर रहा था उसने आज तक बहू को इतने पास से या फिर इतने गौर से कभी नहीं देखा था किसी अप्सरा जैसा बदन था उसका उतनी ही गोरी और सुडोल क्या फिगर है और कितनी सुंदर जैसे हाथ लगाओ तो काली पड़ जाए वो अपनी सोच में डूबा था कि उसे कामया की खिलखिलाती हुई हँसी सुनाई दी 

कामया- अरे भीमा चाचा खाना लगा दो भूख लगी है और नल बंद करो सब पानी बह जाएगा और हँसती हुई पलटकर डाइनिंग रूम की ओर चल दी भीमा कामया को जाते हुए देखता रहा पता नहीं क्यों आज उसके मन में कोई डर नहीं था जो इज़्ज़त वो इस घर के लोगों को देता था वो कहाँ गायब हो गई थी उसके मन से पता नहीं वो कभी भी घर के लोगों की तरफ देखना तो दूर आखें मिलाकर भी बात नहीं करता था पर जाने क्यों वो आज बिंदास कामया को सीधे देख भी रहा था और उसकी मादकता का रसपान भी कर रहा था जाते हुए कामया की पीठ थी भीमा की ओर जो कि लगभग आधे से ज्यादा खुली हुई थी शायद सिर्फ़ ब्रा के लाइन में ही थी या शायद ब्रा ही नहीं पहना होगा पता नहीं लेकिन महीन सी ब्लाउज के अंदर से उसका रंग साफ दिख रहा था गोरा और चमकीला सा और नाजुक और गदराया सा बदन वैसे ही हिलते हुए नितंब जो कि एक दूसरे से रगड़ खा रही थी और साड़ी को अपने साथ ही आगे पीछे की ओर ले जा रही थी 

भीमा खड़ा-खड़ा कामया को किचेन के दरवाजे पर से ओझल होते देखता रहा और किसी बुत की तरह खड़ा हुआ प्लेट हाथ में लिए शून्य की ओर देख रहा था तभी उसे कामया की आवाज़ सुनाई दी 

कामया- चाचा खाना तो लगा दो 

भीमा झट से प्लेट सिंक पर छोड़ नल बंद कर लगभग दौड़ते हुए डाइनिंग रूम में पहुँच गया जैसे कि देर हो गई तो शायद कामया उसके नजर से फिर से दूर ना हो जाए वो कामया को और भी देखना चाहता था मन भरकर उसके नाजुक बदन को उसके खुशबू को वो अपनी सांसों में बसा लेना चाहता था झट से वो डाइनिंग रूम में पहुँच गया

भीमा- जी छोटी बहू अभी देता हूँ 

और कहते हुए वो कामया को प्लेट लगाने लगा कामया का पूरा ध्यान टेबल पर था वो भीमा के हाथों की ओर देख रही थी बालों से भरा हुआ मजबूत और कठोर हाथ प्लेट लगाते हुए उसके मांसपेशियों में हल्का सा खिचाव भी हो रहा था उससे उसकी ताकत का अंदाज़ा लगाया जा सकता था कामया के जेहन में कल की बात घूम गई जब भीमा चाचा ने उसके पैरों की मालिश की थी कितने मजबूत और कठोर हाथ थे और भीमा जो कि कामया से थोड़ा सा दूर खड़ा था प्लेट और कटोरी, चम्मच को आगे कर फिर खड़ा हो गया हाथ बाँध कर पर कामया कहाँ मानने वाली थी आज कुछ प्लॅनिंग थी उसके मन में शायद 

कामया- अरे चाचा परोश दीजीएना प्लीज और बड़ी इठलाती हुई दोनों हाथों को टेबल पर रखकर बड़ी ही अदा से भीमा की ओर देखा भीमा जो कि बस इंतजार में ही था कि आगे क्या करे तुरंत आर्डर मिलते ही खुश हो गया वो थोड़ा सा आगे बढ़ कर कामया के करीब खड़ा हो गया और सब्जी और फिर पराठा और फिर सलाद और फिर दाल और चपाती पर उसकी आँखे कामया पर थी उसकी बातों पर थी उसके शरीर पर से उठ रही खुशबू पर थी नजरें ऊपर से उसके उभारों पर थी जो की लगभग आधे बाहर थे ब्लाउज से 

सफेद गोल गोल से मखमल जैसे या फिर रूई के गोले से ब्लाउज का कपड़ा भी इतना महीन था कि अंदर से ब्रा की लाइनिंग भी दिख रही थी भीमा अपने में ही खोया कामया के नजदीक खड़ा खड़ा यह सब देख रहा था और कामया बैठी हुई कुछ कहते हुए अपना खाना खा रही थी कामया को भी पता था कि चाचा की नजर कहाँ है पर वो तो चाहती भी यही थी उसके शरीर में उत्तेजना की जो ल़हेर उठ रही थी वो आज तक शादी के बाद कामेश के साथ नहीं उठी थी वो अपने को किसी तरह से रोके हुए बस मजे ले रही थी वो जानती थी कि वो खूबसूरत है पर वो जो सेक्सी दिखती है यह वो साबित करना चाहती थी शायद अपने को ही 

पर क्यों क्या मिलेगा उसे यह सब करके पर फिर भी वो अपने को रोक नहीं पाई थी जब से उसे भीमा चाचा की नजर लगी थी वो काम अग्नि में जल उठी थी तभी तो कल रात को कामेश के साथ एक वाइल्ड सेक्स का मजा लिया था पर वो मजा नहीं आया था पर हाँ… कामेश उतेजित तो था रोज से ज्यादा पर उसने कहा नहीं कामया को कि वो सेक्सी थी कामया तो चाहती थी कि कामेश उसे देखकर रह ना पाए और उसे पर टूट पड़े उसे निचोड़ कर रख दे बड़ी ही बेदर्दी से उसे प्यार करे वो तो पूरा साथ देने को तैयार थी पर कामेश ऐसा क्यों नहीं करता वो तो उसकी पत्नी थी वो तो कुछ भी कर सकता है उसके साथ पर क्यों वो हमेशा एग्ज़िक्युटिव स्टाइल में रहता है क्यों नहीं सेक्स के समय भूखा दरिन्दा बन जाता क्यों नहीं है उसमें इतनी समझ उसके देखने का तरीका भी वैसा नहीं है कि वो खुद ही उसके पास भागी चली जाए बस जब देखो तब बस पति ही बने रहते है कभी-कभी प्रेमी और सेक्षमनियाक भी तो बन सकता है वो . 

लेकिन भीमा चाचा की नज़रों में उसे वो भूख दिखी जो कि उसे अपने पति में चाहिए थी भीमा चाचा की लालायत नज़रों ने कामया के अंदर एक ऐसी आग भड़का दी थी कि कामया एक शुशील और पढ़ी लिखी बड़े घर की बहू आज डाइनिंग टेबल पर अपने ही नौकर को लुभाने की चाले चल रही थी कामया जानती थी कि भीमा चाचा की नजर कहाँ है और वो आज क्यों इस तरह से खुलकर उसकी ओर देख और बोल पा रहे है वो भीमा चाचा को और भी उकसाने के मूड में थी वो चाहती थी कि चाचा अपना आपा खो दे और उस पर टूट पड़े इसलिए वो हर वो कदम उठा लेना चाहती थी वो

जान बूझ कर अपनी साड़ी का पल्लू और भी ढीला कर दिया ताकि भीमा को ऊपर से उसकी गोलाइयो का पूरा लुफ्त ले सके और उनके अंदर उठने वाली आग को वो आज भड़काना चाहती थी 

कामया के इस तरह से बैठे रहने से, भीमा ना कुछ कह पा रहा था और नहीं कुछ सोच पा रहा था वो तो बस मूक दर्शक बनकर कामया के शरीर को देख रहा था ओर अपने बूढ़े हुए शरीर में उठ रही उत्तेजना के लहर को छुपाने की कोशिश कर रहा था वो चाह कर भी अपनी नजर कामया की चुचियों पर से नहीं हटा पा रहा था और ना ही उसके शरीर पर से उठ रही खुशबू से दूर जा पा रहा था वो किसी स्टॅच्यू की तरह खड़ा हुआ अपने हाथ टेबल पर रखे हुए थोड़ा सा आगे की ओर झुका हुआ 


कामया की ओर एकटक टकटकी लगाए हुए देख रहा था और अपने गले के नीचे थूक को निगलता जा रहा था उसका गला सुख रहा था उसने इस जनम में भी कभी इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि उसके कामया जैसी लड़की एक बड़े घर की बहू इस तरह से अपना यौवन देखने की छूट देगी और वो इस तरह से उसके पास खड़ा हुआ इस यौवन का लुफ्त उठा सकता था देखना तो दूर आज तक उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था नजर उठाकर देखना तो दूर नजर जमीन से ऊपर तक नहीं उठी थी उसने कभी और आज तो जैसे जन्नत के सफर में था वो एक अप्सरा उसके सामने बैठी थी वो उसके आधे खुले हुए चूचों को मन भर के देख रहा था 

भीमा उसकी खुशबू सूंघ सकता था और शायद हाथ भी लगा सकता था पर हिम्मत नहीं हो रही थी तभी कामया की आवाज उसके कानों में टकराई 

कमाया- अरे चाचा क्या कर रहे हो पड़ान्ठा खतम हो गया 

भीमा- जी जी यह 

और जब तक वो हाथ बढ़ा कर पड़ान्ठा कामया की प्लेट में रखता तब तक कामया का हाथ भी उसके हाथों से टकराया और कामया उसके हाथों से अपना पड़ान्ठा लेकर खाने लगी उसका पल्लू अब थोड़ा और भी खुल गया था उसके ब्लाउज में छुपे हुए चुचे उसको पूरी तरह से दिख रहे थे नीचे तक उसके पेट और जहां से साड़ी बाँधी थी वहां तक भीमा चाचा की उत्तेजना में यह हालत थी कि अगर घर में माजी नहीं होती तो शायद आज वो कामया का रेप ही कर देता पर नौकर था इसलिए चुपचाप प्रसाद में जो कुछ मिल रहा था उसी में खुश हो रहा था और इसी को जन्नत का मजा मान कर चुपचाप कामया को निहार रहा था कामया कुछ कहती हुई खाना भी खा रही थी पर उसका ध्यान कामया की बातों पर बिल्कुल नहीं था 


हाँ ध्यान था तो बस उसके ब्लाउज पर और उसके अंदर से दिख रहे चिकने और गुलाबी रंग के शरीर का वो हिस्सा जहां वो शायद कभी भी ना पहुँच सके वो खड़ा-खड़ा बस सोच ही सकता था और उसे बस वो इस अप्सरा की खुशबू को अपने जेहन में समेट सकता था इसी तरह कब समय खतम हो गया पता भी नहीं चला पता चला तब जब कामया ने उठते हुए कहा 
कमाया- बस हो गया चाचा 

भीमा- जी जी 

और अपनी नजर फिर से नीचे की और झुक कर हाथ बाँधे खड़ा हो गया कामया उठी और वाशबेसिन पर गई और झुक कर हाथ मुँह धोने लगी झुकने से उसके शरीर में बँधी साड़ी उसके नितंबों पर कस गया जिससे कि उसकी नितंबों का शेप और भी सुडोल और उभरा हुआ दिखने लगा भीमा पीछे खड़ा हुआ मंत्र मुग्ध सा कामया को देखता रहा और सिर्फ़ देखता रहा कामया हाथ धो कर पलटी तब भी भीमा वैसे ही खड़ा था उसकी आखें पथरा गई थी मुख सुख गया था और हाथ पाँव जमीन में धस्स गये थे पर सांसें चल रही थी या नहीं पता नहीं पर वो खड़ा था कामया की ओर देखता हुआ कामया जब पलटी तो उसकी साड़ी उसके ब्लाउज के ऊपर नहीं थी कंधे पर शायद पिन के कारण टिकी हुई थी और कमर पर से जहां से मुड़कर कंधे तक आई थी वहाँ पर ठीक ठाक थी पर जहां ढकना था वहां से गायब थी और उसका पूरा यौवन या फिर कहिए चूचियां जो कि किसी पहाड़ के चोटी की तरह सामने की ओर उठे हुए भीमा चाचा की ओर देख रही थी भीमा अपनी नजर को झुका नहीं पाया वो बस खड़ा हुआ कामया की ओर देखता ही रहा और बस देखता ही जा रहा था कामया ने भी भीमा की ओर जरा सा देखा और मुड़कर सीढ़ी की ओर चल दी अपने कमरे की ओर जाने के लिए उसने भी अपनी साड़ी को ठीक नहीं किया था क्यों भीमा सोचने लगा शायद ध्यान नहीं होगा या फिर नींद आ रही होगी या फिर बड़े लोग है सोच भी नहीं सकते कि नौकर लोग की इतनी हिम्मत तो हो ही नहीं सकती या फिर कुछ और आज कामया को हुआ क्या है या फिर मुझे ही कुछ हो गया है 


पीछे से कामया का मटकता हुआ शरीर किसी साप की तरह बलखाती हुई चाल की तरह से लग रहा था जैसे-जैसे वो एक-एक कदम आगे की ओर बढ़ाती थी उसका दिल मुँह पर आ जाता वो आज खुलकर कामया के हुश्न का लुफ्त लेरहा था उसको रोकने वाला कोई नहीं था कोई भी नहीं था घर पर माँ जी अपने कमरे में थी और बहू अपने कमरे की ओर जा रही थी और चली गई सब शून्य हो गया खाली हो गया कुछ भी नहीं था सिवाए भीमा के जो कि डाइनिंग टेबल के पास कुछ झुटे प्लेट के पास सीढ़ी की ओर देखता हुआ मंत्र मुग्ध सा खड़ा था सांसें भी चल रही थी कि नहीं पता नहीं भीमा की नजर शून्य से उठकर वापस डाइनिंग टेबल पर आई तो कुछ झुटे प्लेट ग्लास पर आके अटक गई कामया की जगह खाली थी पर उसकी खुशबू अब भी डाइनिंग रूम में फेली हुई थी 


पता नहीं या फिर सिर्फ़ भीमा के जेहन में थी भीमा शांत और थका हुआ सा अपने काम में लग गया धीरे-धीरे उसने प्लेट और झुटे बर्तन उठाए और किचेन की ओर मुड़ गया पर अपनी नजर को सीढ़ियो की ओर जाने से नहीं रोक पाया था शायद फिर से कामया दिख जाए पर वहाँ तो बस खाली था कुछ भी नहीं था सिर्फ़ सन्नाटा था मन मारकर भीमा किचेन में चला गया 
ओर उधर कामया भी जब अपने कमरे में पहुँची तो पहले अपने आपको उसने मिरर में देखा साड़ी तो क्या बस नाम मात्र की साड़ी पहने थी वो पूरा पल्लू ढीला था और उसकी चुचियों से हटा हुआ था दोनों चूचियां बिल्कुल साफ-साफ ब्लाउज में से दिख रहा था क्लीवेज तो और भी साफ था आधे खुले गले से उसके चूचियां लगभग पूरी ही दिख रही थी वो नहीं जानती थी कि उसके इस तरह से बैठने से भीमा चाचा पर क्या असर हुआ था पर हाँ… कल के बाद से वो बस अंदाज़ा ही लगा सकती थी कि आज चाचा ने उसे जी भरकर देखा होगा वो तो अपनी नजर उठाकर नहीं देख पाई थी पर हाँ… देखा तो होगा और यह सोचते ही कामया एक बार फिर गरम होने लगी थी उसकी जाँघो के बीच में हलचल मच गई थी निपल्स कड़े होने लगे थे वो दौड़ कर बाथरूम में घुस गई और अपने को किसी तरह से शांत करके बाहर आई 

कामया धम्म से बिस्तर पर अपनी साड़ी उतारकर लेट गई सोचते हुए पता नहीं कब वो सो गई शाम को फिर से वही पति का इंतजार या फिर मम्मीजी के आगे पीछे या फिर टीवी या फिर कमरा सबकुछ बोरियत से भरा हुआ जिंदगी था कामया का ना कुछ फन था और ना कुछ ट्विस्ट सोचते हुए कामया अपने कमरे में इधर उधर हो रही थी मम्मीजी शाम होते ही अपने पूजा घर में घुस जाती थी और पापाजी और कामेश के आने से पहले ही निकलती थी और फिर इसके बाद खाना पीना और फिर सोना हाँ यही जिंदगी रह गई थी कामया की 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

मम्मीजी- अरे कामया आ जा खाना ख़ाले कामेश को लेट होगा आने में 

कामया- जी आई 

धत्त तेरी की सब मजा ही किरकिरा कर दिया एक तो पूरे दिन इंतजार करो फिर शाम को पता चलता है कि देर से आएँगे कहाँ गये है वो झट से सेल उठाया ओर कामेश को रिंग कर दिया 
कामेश- हेलो 

कामया- क्या जी लेट आओगे 

कामेश- हाँ यार कुछ काम है थोड़ा लेट हो आउन्गा खाना खाकर आउन्गा तुम खा लेना ठीक है 

कामया- तुम क्या हो आज ही कहा था कि जल्दी आना कही चलेंगे और आज ही आपको काम निकल आया 
कामया का गुस्सा सातवे आसमान में था 

कामेश- अरे यार बाहर से कुछ लोग आए है तुम घर में आराम करो में आता हूँ 

कामया- और क्या करती हूँ में घर में कुछ काम तो है नहीं पूरा दिन आराम ही तो करती हूँ और आप है कि बस 

कामेश- अरे यार माफ कर दो आज के बाद ऐसा नहीं होगा प्लीज यार अगर जरूरी नहीं होता तो क्या तुम जैसी बीवी को छोड़ कर काम में लगा रहता प्लीज यार समझा करो 

कामया- ठीक है जो मन में आए करो 

और झट से फोन काट दिया और गुस्से में पैर पटकती हुई नीचे डाइनिंग टेबल पर पहुँची मम्मीजी टेबल पर आ गई थी पापाजी का इंतजार हो रहा था टेबल पर खाना ढका हुआ रखा था मम्मीजी जी ने प्लेट सजा दिए थे बस पापाजी आ जाए तो खाना शुरू हो तभी पापाजी भी आ गये और खाना शुरू हो गया 

पापा जी और मम्मीजी कुछ बातें कर रहे थे तीर्थ पर जाने की कामया का मन बिल कुल उस बात पर नहीं था शायद मम्मीजी अपने किसी संबंधी या फिर जान पहचान वालों के साथ कोई टूर अरेंज कर रहे थे कुछ दिनों के तीर्थ यात्रा 
पर जाने का 

तभी पापाजी के मुख से अपना नाम सुनकर कामया थोड़ा सा सचेत हुई 
पापा जी- बहू कामेश कह रहा था कि तुम घार पर बहुत बोर हो जाती हो 

कामया- नहीं पापाजी ऐसा कुछ नहीं है 
बहुत गुस्से में थी कामया पर फिर भी अपने को संतुलित कर कामया ने पापाजी को जबाब दिया 

मम्मीजी- अओर क्या दिन भर घर में अकेली पड़ी रहती है कोई भी नहीं है बात चीत करने को या फिर कही घूमने फिरने को कामेश को तो बस काम से फुर्सत मिले तब ना कही ले जाए बिचारी को 

कामया- नहीं मम्मीजी ऐसा कुछ नहीं है 

पापाजी- सुनो बहू तुम गाड़ी चलाना क्यों नहीं सीख लेती लाखा को कह देते है तुम्हें गाड़ी चलाना सिखा देगा 

कामया-, नहीं पापा जी ठीक है ऐसा कुछ भी नहीं जो आप लोग सोच रहे है 

पापाजी- अरे इसमें बुराई ही क्या है घर में एक गाड़ी हमेशा ही खड़ी रहती है तुम उसे चलाना जहां मन में आए जाना और कभी-कभी मम्मी को भी घुमा लाना 

मम्मीजी- हाँ… हाँ… तुम तो लाखा को बोल दो कल से आ जाए तुम्हें छोड़ने के बाद 

पापा जी- अरे दिन में कहाँ चलाएगी वो गाड़ी सुबह को ठीक रहेगा 

मम्मीजी- अरे सुबह को इतना काम रहता है और तुम दोनों को भी तो काम पर जाना है कामेश को तो हाथ में उठाकर सब देना पड़ता है नहीं तो वो तो वैसे ही चला जाए दुकान पर 

पापा जी- तो ठीक है शाम को चले जाना ग्राउंड पर दिन में और सुबह तो ग्राउंड में बच्चे खेलते है तुम शाम को चले जाना ठीक है 

मम्मीजी- हाँ हाँ ठीक है शाम का टाइम ही अच्छा है आराम से सो लेगी और शाम को कुछ काम भी नहीं रहता तुम लोग एक ही गाड़ी में आ जाना 

पापाजी - हाँ… हाँ… क्यों नहीं लाखा को में शाम को भेज दूँगा थोड़ा सा अंधेरा हो जाए तब जाना बच्चे भी खाली करदेंगे ग्राउंड ठीक है ना बहू 

कामया- जी वैसे कोई ज़रूरत नहीं है पापाजी 

मम्मीजी- (बिल्कुल चिढ़ कर बोली) कैसे जरूरत नहीं है मेरे जैसे घर में पड़ी रहोगी क्या तुम जाओ वहले गाड़ी सीखो फिर मुझे भी खूब घुमाना ही ही ही 

डाइनिंग रूम में एक खुशी का महाल हो गया था कामया ने भी सोचा ठीक ही तो है घर में पड़ी पड़ी कामेश का इंतजार ही तो करती है शाम को अगर गाड़ी चलाने चली जाएगी तो टाइम भी पास हो जाएगा ओर जब वो लौटेगी तब तक कामेश भी आ जाएगा थोड़ा चेंज भी हो जाएगा और गाड़ी भी चलाना सीख जाएगी 

तो फाइनल हो गया कि कल से लाखा काका शाम को आएँगे और कामया गाड़ी चलाने को जाएगी थोड़ी देर में खाना खतम हो गया मम्मी जी ने भीमा को आवाज लगा दी 
मम्मीजी- अरे भीमा प्लेट उठा ले हो गया 

भीमा- जी माँ जी 
और लगभग भागता हुआ सा डाइनिंग रूम में आया और नीचे गर्दन कर चुपचाप झूठे बर्तन उठाने लगा 

पापाजी ने हाथ धोया और भीमा को कहा 
पापा जी- अरे भीमा आज कल तुम्हारे खाने में कुछ स्वाद कुछ अलग सा था क्या बात है कही और दिमाग लगा है क्या 

भीमा- जी साहब नहीं तो कुछ गुस्ताख़ी हुई क्या 

पापा जी- अरे नहीं मैंने तो बस ऐसे ही पूछ लिया था तुम्हारे हाथों का खाते हुए सालो हो गये पर आज खुच चेंज था शायद मन कही और था 

भीमा- जी माफ़ कर दीजिए कल से नहीं होगा 

पापा जी- अरे यार तुम तो बस गॉव में सबकुछ ठीक ठाक तो है ना 

भीमा- जी साहब सब ठीक है जी 

पापाजी- चलो ठीक है कुछ जरूरत हो तो बताना शरमाना नहीं तुम कभी कुछ नहीं माँगते 

भीमा- वैसे ही मिल जाता है साहब इतना कुछ तो क्या माँगे माफ़ करना साहब अगर कुछ गलती हो गई हो तो 

मम्मीजी- (बीच में ही बोल उठी) अरे आअरए कुछ नहीं भीमा तू तो जा इनकी तो आदत है तू तो जानता है चुटकी लेते रहते है और पापा जी की ओर देखते हुए बोली 

मम्मीजी- क्या तुम भी बहू के सामने तो कम से कम ध्यान दिया करो 

पापाजी- हाहाहा अरे में तो बस मजाक कर रहा था बहू भी तो हमारे घर की है भीमा को क्या नहीं पता 

भीमा- जी 
और मुड़कर झूठे प्लेट और बचा हुआ खाना लेके अंदर चला गया जाते हुए चोर नजर से एक बार कामया को जरूर देखा उसने जो कि कामया की नजर पर पड़ गई थोड़ा सा मुश्कुरा कर कामया मम्मीजी के पीछे-पीछे ड्राइंग रूम में आ गई थोड़ी देर सभी ने टीवी देखा और कामेश का इंतजार करते रहे पर कामेश नहीं आया 

मम्मीजी- कामेश को क्या देर होगी आने में 

पापाजी- हाँ शायद खाना खाके ही आएगा बाहर से कुछ लोग आए है हीरा मार्चंट्स है एक्सपोर्ट का आर्डर है थोड़ा बहुत टाइम लगेगा 

कामया चुपचाप दोनों की बातें सुन रही थी उसे एक्सपोर्ट ओरडर हो या इम्पोर्ट आर्डर हो उसे क्या उसका तो बस एक ही इंतजार था कामेश जल्दी आ जाए 

पर कहाँ कामेश तो काम खतम किएबगैर कुछ नहीं सोच सकता था रात करीब 10 30 बजे तक सभी ने इंतजार किया और फिर सभी अपने कमरे में चले गये सीढ़िया चढ़ते समय कामया को मम्मीजी की आवाज सुनाई दी 

मम्मीजी- भीमा कामेश लेट ही आएगा सोना मत दरवाजा खोल देना ठीक है 

भीमा- जी माँ जी आप बेफिकर रहिए 

और नीचे बिल्कुल सुनसान होगा 

कामया ने भी कमरे में आते ही कपड़े चेंज किए और झट से बिस्तर पर ढेर हो गई गुस्सा तो उसे था ही और चिढ़ के मारे कब सो गई पता नहीं सुबह जब आखें खुली तो कामेश उठ चुका था कामया वैसे ही पड़ी रही बाथरूम से निकलने के बाद कामेश कामया की ओर बढ़ा और कामया को कंधे से हिलाकर 
कामेश- मेडम उठिए 8 बज गये है 

पर कामया के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई कामेश जानता था कामया अब भी गुस्से में है वो थोड़ा सा झुका और कामया के गालों को किस करते हुए 
कामेश- सारी बाबा क्या करता काम था ना 

कामया- तो जाइए काम ही कीजिए हम ऐसे ही ठीक है 

कामेश- अरे सोचो तो जरा यह आर्डर कितना बड़ा है हमेशा एक्सपोर्ट करते रहो ग्राहकों का झंझट ही नहीं एक बार जम जाए तो बस फिर तो आराम ही आराम फिर तुम मर्सिडेज में घूमना 

कामया- हाँ… मेर्सिडेज में वो भी अकेले अकेले है ना तुम तो बस नोट कमाने में रहो 

कामेश- अरे यार में भी तो तुम्हारे साथ रहूँगा ना चलो यार अब उठो पापा मम्मी इंतजार करते होंगे जल्दी उठो 

और कामया को प्यार से सहलाते हुए उठकर खड़ा हो गया कामया भी मन मारकर उठी और मुँह धोने के बाद नीचे पापाजी और मम्मीजी के पास पहुँच गये दोनों चाय की चुस्की ले रहे थे 

पापाजी- क्या हुआ कल 

कामेश- हो गया पापा बहुत बड़ा आर्डर है 3 साल का कांट्रॅक्ट है अच्छा हो जाएगा 

पापाजी- हूँ देख लेना कुछ पैसे वैसे की जरूरत हो तो बैंक से बात करेंगे 

कामेश- अरे अभी नहीं वो बाद में फिल हाल तो ऐसे ही ठीक है 

कामया और मम्मीजी बुत बने दोनों की बातें सुन रहे थे कुछ भी पल्ले नहीं पड़ रहा था मम्मीजी भी इधर उधर देखती रही थोड़ा सा गॅप जहां मिला झट बोल पड़ी 
मम्मीजी- और सुन कामेश यह रात को बाहर रहना अब बंद कर घर में बहू भी है अब उसका ध्यान रखाकर और कामया की ओर देखकर मुश्कुराई 

पापाजी और कामेश इस अचानक हमले को तैयार नहीं थे दोनों की नजर जैसे ही कामया पर गई तो कामया नज़रें झुका कर चाय की चुस्की लेने लगी 

पापा जी ---हहा बिल कुल ठीक है तुम ध्यान दिया करो 

कामेश- जी 

पापाजी-हाँ और आज लाखा आ जाएगा बहू तुम चले जाना ठीक है 

कामेश- हो गई बात लाखा काका आज से आएँगे चलो यह ठीक रहा 

सभी अब कामया के ड्राइविंग सीखने की और जाने की बात करते रहे और चाय खतम कर सभी अपने कमरे की ओर रवाना हो गये आगे के रुटीन की ओर कमरे में पहुँचते ही कामेश दौड़ कर बाथरूम में घुस गया और कामया कामेश के कपड़े वारड्रोब से निकालने लगी 

कपड़े निकालते समय उसे गर्दन में थोड़ी सी पेन हुई पर ठीक हो गया अपना काम करके कामया कामेश का बाथरूम से निकलने का इंतजार करने लगी कामेश हमेशा की तरह वही अपने टाइम से निकला एकदम साहब बनके बाहर आते ही जल्दी से कपड़े पहनने की जल्दी और फिर जूता मोज़ा पहन कर तैयार 10 बजे तक फुल्ली तैयार कामया बिस्तर पर बैठी बैठी कामेश को तैयार होते देखती रही और अपने हाथ से अपनी गर्दन को मसाज भी करती रही 

कामेश के तैयार होने के बाद वो नीचे चले गये और कामेश तो बस हबड ताबड़ कर खाया जल्दी से खाना खा के बाहर का रास्ता करीब 10 30 तक कामेश हमेशा ही दुकान की ओर चल देता था पापाजी तो करीब 11 30 तक निकलते थे कामया भी कामेश के चले जाने के बाद अपने कमरे की ओर चल दी टेबल पर भीमा चाचा झूठे प्लेट उठा रहे थे एक नजर उनपर डाली और अपने कमरे की ओर जाते जाते उसे लगा कि भीमा चाचा की नज़रें उसका पीछा कर रही है सीढ़ी के आखिरी मोड़ पर वो पलटी 

हाँ चाचा की नज़रें उसपर ही थी पलटते ही चाचा अपने को फिर से काम में लगा लिए और जल्दी से किचेन की ओर मुड़ गये 

कामया के शरीर में एक झुरझुरी सी फेल गई और कमरे तक आते आते पता नहीं क्यों वो बहुत ही कामुक हो गई थी एक तो पति है कि काम से फुर्सत नहीं सेक्स तो दूर की बात देखने और सुनने की भी फुर्सत नहीं है आज कल तो कामया कमरे में पहुँचकर बिस्तर पर चित्त लेट गई सीलिंग की ओर देखते हुए पता नहीं क्या सोचने लगी थी पता नहीं पर मरी हुई सी बहुत देर लेटी रही तभी घड़ी ने 11 बजे का बीप किया कामया झट से उठी और बाथरूम की ओर चली बाथरूम में भी कामया बहुत देर तक खड़ी-खड़ी सोचती रही कपड़े उतारते वक़्त उसके कंधे पर फिर से थोड़ी सी अकड़न हुई अपने हाथों से कंधे को सहलाते हुए वो मिरर में देखकर थोड़ा सा मुश्कुराई और फिर ना जाने कहाँ से उसके शरीर में जान आ गई जल्दी-जल्दी फटाफट सारे काम चुटकी में निपटा लिए और पापाजी और मम्मीजी के पास नीचे खाने की टेबल की ओर चल दी पापाजी और मम्मीजी डाइनिंग टेबल पर आते ही होंगे वो पहले पहुँचना चाहती थी पर मम्मीजी पहले ही वहां थी कामया को देखकर मम्मीजी थोड़ा सा मुश्कुराई और कामया उनके पास कुर्सी पर बैठ गई


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया पापाजी और मम्मीजी का प्लेट लगाने लगी और खड़ी-खड़ी पापाजी के आने का इंतजार करने लगी पापाजी के आने बाद खाने पीने का दौर शुरू हो गया और पापाजी और मम्मीजी का बातों का दौर पर कामया का ध्यान उनकी बातों में नहीं था उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था पापाजी और मम्मीजी के बातों का हाँ या हूँ में जबाब देती जा रही थी और खाने खतम होने का इंतजार कर रही थी पता नहीं क्यों आज ज्यादा ही टाइम लग रहा था किचेन में भीमा चाचा के काम करने की आवाजें भी आ रही थी पर दिखाई कुछ नहीं दे रहा था कामया का ध्यान उस तरफ ज्यादा था क्या भीमा चाचा उसे देख रहे है या फिर अपने काम में ही लगे हुए है आज उसने इस समय सूट ही पहना था रोज की तरह ही था लेकिन टाइट फिटिंग वाला ही उसका शरीर खिल रहा था उस सूट में वो यह जानती थी तो क्या भीमा चाचा ने उसे देख लिया है या फिर देख रहे है पता नहीं पापाजी और मम्मीजी को खाना खिलाते समय उसके दिमाग में कितनी बातें उठ रही थी हाँ… और ना के बीच में आके खतम हो जाती थी कभी-कभी वो पलटकर या फिर तिरछी नजर से पीछे की और देख भी लेती थी पर भीमा चाचा को वो नहीं देख पाई थी अब तक 

इसी तरह पापाजी और मम्मीजी का खाना भी खतम हो गया 
मम्मीजी- अरे बहू तू भी खाना खा ले अब 

कामया- जी मम्मीजी खा लूँगी 

पापाजी- ज्यादा देर मत किया कर नहीं तो गैस हो जाएगा 

कामया- जी 
और पापाजी और मम्मीजी उठकर हाथ मुख धोने लगे और पापाजी जल्दी-जल्दी अपने कमरे की ओर भागे निकलने का टाइम जो हो गया था मम्मीजी ने भीमा को आवाज देकर प्लेट उठाने को कहा और कामया के साथ ड्राइंग रूम के दरवाजे पर पहुँच गई पीछे भीमा डाइनिंग टेबल से प्लेट उठा रहा था और सामने ड्राइंग रूम के दरवाजे के पास कामया खड़ी थी उसकी ओर पीठ करके वो प्लेट उठाते हुए पीछे से उसे देख रहा था सबकी नजर बचा कर मम्मीजी कुछ कह रही थी कामया से तभी अचानक कामया पलटी और भीमा और कामया की नज़रें एक हुई भीमा सकपका गया और झट से नज़रें नीचे करके जल्दी से झुटे प्लेट लिए किचेन में घुस गया 

कामया ने जैसे ही भीमा को अपनी ओर देखते हुए देखा वो भी पलटकर मम्मीजी की ओर ध्यान देने लगी थी और तभी पापाजी भी आ गये थे वो बाहर को चले गये तो मम्मीजी और कामया भी उनके पीछे-पीछे बाहर दरवाजे तक आए बाहर गाड़ी के पास लाखा काका अपनी वही पूरी पोशाक में हाजिर थे नीचे गर्दन किए धोती और शर्ट पहने हुए पीछे का गेट खोले खड़े थे पापाजी उसके पास पहुँचकर कहा 

पापा जी- आज से तुम्हारे लिए नई ड्यूटी लगा दी है पता है 

लाखा- जी शाब 

पापाजी- आज से बहू को ड्राइविंग सिखाना है आपको 

लाखा- जी शाब 

पापाजी- कोई दिक्कत तो नहीं 

लाखा- जी नही शाब 

पापाजी- कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए ठीक है 

लाखा- जी शाब 

लाखा का सिर अब भी नहीं उठ था नाही ही उसने कामया की ओर ही देखा था 
मम्मीजी- शाम को जल्दी आ जाना ठीक है 

लाखा- जी माँ जी 

मम्मीजी कितने बजे भेजोगे 

पापाजी- हाँ… करीब 6 बजे 

मम्मीजी जी ठीक है 
और पापाजी जी गाड़ी में बैठ गये और लाखा भी जल्दी से दौड़ कर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और गाड़ी गेट के बाहर हो गई मम्मीजी और कामया भी अंदर की ओर पलटे 
डाइनिंग टेबल में कुछ ढका हुआ था शायद कामया का खाना था 

मम्मीजी जा अब तू खाना ख़ाले मैं तो जाऊ आराम करूँ 

कामया- जी 
और कामया डाइनिंग रूम में रुक गई और माँ जी अपने रूम की ओर 
कामया किचेन की ओर चली और दरवाजे पर रुकी 

कामया- चाचा एक मदद चाहिए 

भीमा - जी छोटी बहू कहिए आप तो हुकुम कीजिए 

और अपनी नजर झुका कर हाथ बाँध कर सामने खड़ा ही गया सामने कामया खड़ी थी पर वो नजर उठाकर नहीं देख पा रहा था उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी सांसो में कामया के सेंट की खुशबू बस रही थी वो मदहोश सा होने लगा था 
कामया- वो असल में अआ आप बुरा तो नहीं मानेंगे ना 
भीमा का कोई जबाब ना पाकर 

कामया- वो असल में कल ना सोने के समय थोड़ा सा गर्दन में मोच आ गई थी में चाहती थी कि अगर आप थोड़ा सा मालिश कर दे 
भीमा- ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्जििइईईईई 
कामया भी भीमा के जबाब से कुछ सकपकाई पर तीर तो छूट चुका था 

कामया- नहीं नहीं, अगर कोई दिक्कत है तो कोई बात नहीं असल में उस दिन जब आपने मेरे पैरों मोच ठीक किया था ना इसलिए मैंने कहा और आज से तो गाड़ी भी चलाने जाना है ना इसलिए सोचा आपको बोलकर देखूँ 

भीमा की तो जान ही अटक गई थी गले में मुँह सुख गया था नज़रों के सामने अंधेरा छा गया था उसके गले से कोई भी आवाज नहीं निकली वो वैसे ही खड़ा रहा और कुछ बोल भी नही पाया 

कमाया- आप अपना काम खतम कर लीजिए फिर कर देना ठीक है में उसके बाद खाना खा लूँगी 
भीमा- #### 
कामया- चलिए में आपको बुला लूँगी कितना टाइम लगेगा आपको 
भीमा- जी #### 
कामया- फ्री होकर रिंग कर देना में रूम में ही हूँ 
और कहकर कामया अपने रूम की ओर पलटकर चली गई 

भीमा किचेन में ही खड़ा था किसी भूत की तरह सांसें ऊपर की ऊपर नीचे की नीचे दिमाग सुन्न आखें पथरा गई थी हाथ पाँव में जैसे जान ही ना हो खड़ा-खड़ा कामया को जाते हुए देखता रहा पीछे से उसकी कमर बलखाती हुई और नितंबों के ऊपर से उसकी चुन्नी इधर-उधर हो रही थी 

सीढ़ी से चढ़ते हुए उसके शरीर में एक अजीब सी लचक थी फिगर जो कीदिख रहा था कितना कोमल था वो सपने में कामया को जैसे देखता था वो आज उसी तरह बलखाती हुई सीढ़ीओ से चढ़कर अपने रूम की ओर मुड़ गई थी भीमा वैसे ही थोड़ी देर खड़ा रहा सोचता रहा कि आगे वो क्या करे 

आज तक कभी भी उसने यह नहीं सोचा था कि वो कभी भी इस घर की बहू को हाथ भी नही लगा सकता था मालिश तो दूर की बात और वो भी कंधे का मतलब वो आज कामया का शरीर को कंधे से छू सकेगा आआअह्ह उसके पूरे शरीर में एक अजीब सी हलचल मच गई थी बूढ़े शरीर में उत्तेजना की लहर फेल गई उसके सोते हुए अंगो में आग सी भर गई कितनी सुंदर है कामया कही कोई गलती हो गई तो 

पूरे जीवन काल की बनी बनाई निष्ठा और नमक हलाली धरी रह जाएगी पर मन का क्या करे वो तो चाहता था कि वो कामया के पास जाए भाड़ में जाए सबकुछ वो तो जाएगा वो अपने जीवन में इतनी सुंदर और कोमल लड़की को आज तक हाथ नहीं लगाया था वो तो जाएगा कुछ भी हो जाए वो जल्दी से पलटकर किचेन में खड़ा चारो ओर देख रहा था सिंक पर झूठे प्लेट पड़े थे और किचेन भी अस्त व्यस्त था पर उसकी नजर बार बार बाहर सीढ़ियों पर चली जाती थी 

उसका मन कुछ भी करने को नहीं हो रहा था जो कुछ जैसे पड़ा था वो वैसे ही रहने दिया आगे बढ़ने ही हिम्मत या फिर कहिए मन ही नहीं कर रहा था वो तो बस अब कामया के करीब जाना चाहता था वो कुछ भी नहीं सोच पा रहा था उसकी सांसें अब तो रुक रुक कर चल रही थी वो खड़ा-खड़ा बस इंतजार कर रहा था कि क्या करे उसका अंतर मन कह रहा था कि नहीं यह गलत है पर एक तरफ वो कामया के शरीर को छूना चाहता था उसके मन के अंदर में जो उथल पुथल थी वो उसके पार नहीं कर पा रहा था 

वो अभी भी खड़ा था और उधर 

कमाया अपने कमरे में पहुँचकर जल्दी से बाथरूम में घुसी और अपने को सवारने में लग गई थी वो इतने जल्दी बाजी में लगी थी कि जैसे वो अपने बाय फ्रेंड से मिलने जा रही हो वो जल्दी से बाहर निकली और वार्ड रोब से एक स्लीव लेस ब्लाउस और एक वाइट कलर का पेटीकोट निकाल कर वापस बाथरूम में घुस गई 

वो इतनी जल्दी में थी कि कोई भी देखकर कह सकता था कि वो आज कुछ अलग मूड में थी चेहरा खिला हुआ था और एक जहरीली मुश्कान भी थी उसके बाल खुले हुए थे और होंठों पर डार्क कलर की लिपस्टिक थी कमर के बहुत नीचे उसने पेटीकोट पहना था ब्लाउस तो जैसे रखकर सिला गया हो टाइट इतना था कि जैसे हाथ रखते ही फट जाए आधे से ज्यादा चुचे सामने से ब्लाउज के बाहर आ रहे थे पीछे से सिर्फ़ ब्रा के ऊपर तक ही था ब्लाउस कंधे पर बस टिका हुआ था दो बहुत ही पतले लगभग 1्2 सेंटीमीटर की ही होगी पट्टी 

बाथरूम से निकलने के बाद कामया अपने को मिरर में देखा तो वो खुद भी देखती रह गई कि लग रही थी सेक्स की गुड़िया कोई भी ऋषि मुनि उसे ना नहीं कर सकता था कामया अपने को देखकर बहुत ही उत्तेजित हो गई थी हाँ उसके शरीर में आग सी भर गई थी वो खड़ी-खड़ी अपने शरीर को अपने ही हाथों से सहला रही थी अपने उभारों को खुद ही सहलाकर अपने को और भी उत्तेजित कर रही थी और अपने शरीर पर भीमा चाचा के हाथों का सपर्श को भी महसूस कर रही थी उसने अपने को मिरर के सामने से हटाया और एक चुन्नी अपने उपर डाल ली और भीमा चाचा का इंतजार करने लगी 

पर इंटरकम तो जैसे शांत था वैसे ही शांत पड़ा हुआ था 

उधर भीमा भी अपने हाथ को साफ करके किचेन में ही खड़ा था सोच रहा था कि क्या करे फोन करे या नहीं कही किसी को पता चल गया तो लेकिन दिल है कि मानता नहीं वो इंटरकम तक पहुँचा और फिर थम गया अंदर एक डर था मालिक और नौकर का रिश्ता था उसका वो कैसे भूल सकता था पागल शेर की तरह वो किचेन में तो कभी किचेन के बाहर तक आता और फिर अंदर चला जाता इस दौरान वो दो बार बाहर का दरवाजा भी चैक कर आया जो कि ठीक से बंद है कि नहीं पागल सा हो रहा था उसने सोचा कि कर ही देता हूँ फोन 
और वो जैसे ही फोन तक पहुँचा फोन अपने आप ही बज उठा 
भीमा ने भी झट से उठा लिया 
भीमा- ज्ज्जिि (उसकी सांसें फूल रही थी )
उधर से कामया की आवाज थी शायद वो और इंतजार नहीं करना चाहती थी 
कामया- क्या हुआ चाचा काम नहीं हुआ आपका 

जैसे मिशरी सी घुल गई थी भीमा के कानों में हकलाते हुए भीमा की आवाज निकली 
भीमा जी बहू बस 

कामया- क्या जी जी मुझे खाना भी तो खाना है आओगे कि 

जान बूझ कर कमाया ने अपना सेंटेन्स आधा छोड़ दिया भीमा जल्दी से बोल उठा 
भीमा- नही नहीं बहू में तो बस आ ही रहा था आप बस आया 
और लगभग दौड़ता हुआ वो एक साथ दो तीन सीडिया चढ़ता हुआ कामया के रूम के सामने था मगर हिम्मत नहीं हो रही थी कि खटखटा सके खड़ा हुआ भीमा क्या करे सोच ही रहा था कि दरवाजा कामया ने खोल दिया जैसे देखना चाहती हो कि कहाँ रहा गया है वो सामने से भी सुंदर बिल कुल किसी अप्सरा की तरह खड़ी थी कामया चुन्नी जो कि उसके ब्लाउज के उपर से ढलक गया था उसके आधे खुले बूब्स जो कि बाहर की ओर थे उसे न्यूता दे रहे थे कि आओ और खेलो हमारे साथ चूसो और दबाओ जो जी में आए करो पर जल्दी करो 

भीमा दरवाजे पर खड़ा हुआ कामया के इस रूप को टक टकी बाँधे देख रहा था हलक सुख गया था इस तरह से कामया को देखते हुए कामया की आखों में और होंठों में एक अजीब सी मुश्कुराहट थी वो वैसे ही खड़ी भीमा चाचा को अपने रूप का रस पिला रही थी उसने अपने चुन्नी से अपने को ढकने की कोशिश भी नहीं की बल्कि थोड़ा सा आगे आके भीमा चाचा का हाथ पकड़कर अंदर खींचा 

कामया- क्या चाचा जल्दी करो ऐसे ही खड़े रहोगे क्या जल्दी से ठीक कर दो फिर खाना खाना है मुझे 
भीमा किसी कठपुतली की तरह एक नरम सी और कोमल सी हाथ के पकड़ के साथ अपने को खींचता हुआ कामया के कमरे में चला आया नहीं तो क्या कामया में दम था कि भीमा जैसे आदमी को खींचकर अंदर ले जा पाती यह तो भीमा ही खिंचा चला गया उस खुशबू की ओर उस मल्लिका की ओर उस अप्सरा की ओर उसके सूखे हुए होंठ और सूखा गला लिए आकड़े हुए पैरों के साथ सिर घूमता हुआ और आखें कामया के शरीर पर जमी हुई 

जैसे ही भीमा अंदर आया कामया ने अपने पैरों से ही रूम का दरवाजा बंद कर दिया और साइड में रखी कुर्सी पर बैठ गई जो कि कुछ नीचे की ओर था बेड से थोड़ी दूर भीमा आज पहली बार कामेश भैया के रूम में आया था उनकी शादी के बाद कितना सुंदर सजाकर रखा था बहू ने जितनी सुंदर वो थी उतना ही अपने रूम को सजा रखा था इतने में कामया की आवाज उसके कानों में टकराई 
कामया- क्या भीमा चाचा क्या सोच रहे हो 
भीमा- ##### 
वो बुत बना कामया को देख रहा था कामया से नजर मिलते ही वो फिर से जैसे कोमा में चला गया क्या दिख रही थी कामया सफेद कलर की टाइट ब्लाउस और पेटीकोट पहने हुए थी और लाल कलर की चुन्नी तो बस डाल रखी थी क्या वो इस तरह से मालिश कराएगी क्या वो कामया को इस तरह से छू सकेगा उसके कंधों को उसके बालों को या फिर 

कामया- क्या चाचा बताइए कहाँ करेंगे यही बैठू 

भीमा- जी जी .....और गले से थूक निगलने की कोशिश करने लगा 

भीमा कामया की ओर देखता हुआ थोड़ा सा आगे बढ़ा पर फिर ठिठ्क कर रुक गया क्या करे हाथ लगाए #### उूउउफफ्फ़ क्या वो अपने को रोक पाएगा कही कोई गड़बड़ हो गई तो भाड़ में जाए सबकुछ वो अब आगे बढ़ गया था अब पीछे नहीं हटेगा वो धीरे से कामया की ओर बड़ा और सामने खड़ा हो गया देखते हुए कामया को जो कि सिटी के थोड़ा सा नीचे होने से थोड़ा नीचे हो गये थी 
कामया- मैं पलट जाऊ कि आप पीछे आएँगे 

कामया भीमा चाचा को अपनी ओर आते देखकर पूछा उसकी सांसें भी कुछ तेज चल रही थी ब्लाउज के अंदर से उसकी चूचियां बाहर आने को हो रही थी भीमा की नजर कामया के ब्लाउसपर से नहीं हट रही थी वो घूमते हुए कामया के पीछे की ओर चला गया था उसकी सांसों में एक मादक सी खुशबू बस गई थी जो कि कामया के शरीर से निकल रही थी वो कामया का रूप का रस पीते हुए, उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया उपर से दिखने में कामया का पूरा शरीर किसी मोम की गुड़िया की तरह से दिख रहा था सफेद कपड़ों में कसा हुआ उसका शरीर जो की कपड़ों से बाहर की ओर आने को तैयार था और उसके हाथों के इंतजार में था 

कामया अब भी चुपचाप वही बैठी थी और थोड़ा सा पीछे की ओर हो गई थी भीमा खड़ा हुआ, अब भी कामया को ही देख रहा था वो कामया के रूप को निहारने में इतना गुम थाकि वो यह भी ना देख पाया कि कब कामया अपना सिर उकचा करके भीमा की नजर की ओर ही देख रही थी 

कामया- क्या चाचा शुरू करो ना प्लेअसस्स्स्स्सीईईईईई 

भीमा के हाथ काप गये थे इस तरह की रिक्वेस्ट से कामया अब भी उसे ही देख रही थी उसके इस तरह से देखने से कामया की दोनों चूचियां उसके ब्लाउज के अंदर बहुत अंदर तक दिख रही थी कामया का शरीर किसी रूई के गोले के समान देख रहा था कोमल और नाजुक 

भीमा ने कपते हुए हाथ से कामया के कंधे को छुआ एक करेंट सा दौड़ गया भीमा के शरीर में उसके अंदर का सोया हुआ मर्द अचानक जाग गया आज तक भीमा ने इतनी कोमल और नरम चीज को हाथ नहीं लगाया था 

एकदम मखमल की तरह कोमल और चिकना था कामया का कंधा उसके हाथ मालिश करना तो जैसे भूल ही गये थे वो तो उस एहसास में ही खो गया था जो कि उसके हाथों को मिल रहा था वो चाह कर भी अपने हाथों को हिला नहीं पा रहा था बस अपनी उंगलियों को उसके कंधे पर हल्के से फेर रहा था और उसका नाज़ुकता का एहसास अपने अंदर भर रहा था वो अपने दूसरे हाथ को भी कामया के कंधे पर ले गया और दोनों हाथों से वो कामया के कंधे को बस छूकर देख रहा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

और उधर कामया का तो सारा शरीर ही आग में जल रहा था जैसे ही भीमा चाचा का हाथ उसके कंधे पर टकराया उसके अंदर तक सेक्स की लहर दौड़ गई उसके पूरे शरीर के रोंगटे खड़े हो गये और शरीर काँपने लगा था उसे ऐसे लग रहा था कि वो बहुत ही ठंडी में बैठी है, वो किसी तरह से ठीक से बैठी थी पर उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था वो ना चाहते हुए भी थोड़ा सा तनकर बैठ गई उसकी दोनों चूचियां अब सामने की ओर बिल्कुल कोई माउंटन पीक की तरह से खड़ी थी और सांसों के साथ ऊपर-नीचे हो रही थी उसकी सांसों की गति भी बढ़ गई थी भीमा के सिर्फ़ दोनों हाथ उसके कंधे पर छूने जैसा ही एहसास उसके शरीर में वो आग भर गया था जो कि आज तक कामया ने अपने पूरे शादीशुदा जिंदगी में महसूस नहीं किया था 

कामया अपने आपको संभालने की पूरी कोशिश कर रही थी पर नहीं संभाल पा रही थी वो ना चाहते हुए भी भीमा चाचा से टिकने की कोशिश कर रही थी वो पीछे की ओर होने लगी थी ताकि भीमा चाचा से टिक सके 
उसके इस तरह से पीछे आने से भीमा भी थोड़ा आगे की ओर हो गया अब भीमा का पेट से लेकर जाँघो तक कामया टिकी हुई थी उसका कोमल और नाजुक बदन भीमा के आधे शरीर से टीके हुए उसके जीवन काल का वो सुख दे रहे थे जिसकी कि कल्पना भीमा ने नहीं सोची थी भीमा के हाथ अब पूरी आ जादी से कामया के कंधे पर घूम रहे थे वो उसके बालों को हटा कर उसकी गर्दन को अपने बूढ़े और मजबूत हाथों से स्पर्श कर कामया के शरीर का ठीक से अवलोकन कर रहा था वो अब तक कामया के शरीर से उठ रही खुशबू में ही डूबा हुआ था और उसके कोमल शरीर को अपने हाथों में पाकर नहीं सोच पा रहा था कि आगे वो क्या करे पर हाँ… उसके हाथ कामया के कंधे और बालों से खेल रहे थे कामया कर उसके पेट पर था और वो और भी पीछे की ओर होती जा रही थी आगर भीमा उसे पीछे से सहारा ना दे तो वो धम्म से जमीन पर गिर जाए वो लगभग नशे की हालत में थी और उसके मुख से धीमी धीमी सांसें चलने की आवाज आ रही थी उसके नथुने फूल रहे थे और उसके साथ ही उसकी छाती भी अब कुछ ज्यादा ही आगे की ओर हो रही थी

भीमा खड़ा-खड़ा इस नज़ारे को देख भी रहा था और अपनी जिंदगी के हँसीन पल को याद करके खुश भी हो रहा था वो अपने हाथों को कामया की गर्दन पर फेरने से नहीं रोक पा रहा था अब तो उसके हाथ उसके गर्दन को छोड़ उसके गले को भी स्पर्श कर रहे थे कामया जो कि नशे की हालत में थी कुछ भी सोचने और करने की स्थिति में नहीं थी वो बस आखें बंद किए भीमा के हाथों को अपने कंधे और गले में घूमते हुए महसूस भरकर रही थी और अपने अंदर उठ रहे ज्वार को किसी तरह नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही थी उसके छाती आगे और आगे की ओर हो रहे थे सिर भीमा के पेट पर टच हो रहा था कमर नितंबों के साथ पीछे की ओर हो रही थी

बस भीमा इसी तरह उसे सहलाता जाए या फिर प्यार करता जाए यही कामया चाहती थी बस रुके नहीं उसके अंदर की ज्वाला जो कि अब किसी तरह से भीमा को ही शांत करना था वो अपना सब कुछ भूलकर भीमा का साथ देने को तैयार थी और भीमा जो कि पीछे खड़े-खड़े कामया की स्थिति का अवलोकन कर रहा था और जन्नत की किसी अप्सरा के हुश्न को अपने हाथों में पाकर किस तरह से आगे बढ़े ये सोच रहा था वो अपने आप में नहीं था वो भी एक नशे की हालत में ही था नहीं तो कामया जो कि उसकी मालकिन थी उसके साथ उसके कमरे मे आज इस तरह खड़े होने की कल्पना तो दूर की बात सोच से भी परे थी उसके पर आज वो कामया के कमरे में कामया के साथ जो कि सिर्फ़ एक ब्लाउस और पेटीकोट डाले उसके शरीर से टिकी हुई बैठी थी और वो उसके कंधे और गले को आराम से सहला रहा था अब तो वो उसके गाल तक पहुँच चुका था कितने नरम और चिकने गाल थे कामया के और कितने नरम होंठ थे अपने अंगूठे से उसके होंठों को छूकर देखा था भीमा ने भीमा थोड़ा सा और आगे की ओर हो गया ताकि वो कामया के होंठों को अच्छे से देख और छू सके भीमा के हाथ अब कामया की गर्दन को छू कर कामया के गालों को सहला रहे थे कामया भी नशे में थी सेक्स के नशे में और कामुकता तो उसपर हावी थी ही भीमा अब तक अपने आपको कामया के हुश्न की गिरफ़्त में पा रहा था वो अपने को रोकने में असमर्थ था वो अपने सामने इतनी सुंदर स्त्री को को पाकर अपना सूदबुद खो चुका था उसके शरीर से आवाजें उठ रही थी वो कामया को छूना चाहता था और चूमना चाहता था सबकुछ छूना चाहता था भीमा ने अपने हाथों को कामया की चिन के नीचे रखकर उसकी चिन को थोड़ा सा ऊपर की ओर किया ताकि वह उसके होंठों को ठीक से देख सके कामया भी ना नुकर ना करते हुए अपने सिर को उँचा कर दिया ताकि भीमा जो चाहे कर सके बस उसके शरीरी को ठंडा करे 


उसके शरीर की सेक्स की भूख को ठंडा कर दे उसकी कामाग्नी को ठंडा करे बस भीमा उसको इस तरह से अपना साथ देता देखकर और भी गरमा गया था उसके धोती के अंदर उसका पुरुष की निशानी अब बिल्कुल तैयार था अपने पुरुषार्थ को दिखाने के लिए भीमा अब सबकुछ भूल चुका था उसके हाथ अब कामया के गालों को छूते हुए होंठों तक बिना किसी झिझक के पहुँच जाते थे वो अपने हाथों के सपर्श से कामया की स्किन का अच्छे से छूकर देख रहा था उसकी जिंदगी का पहला एहसास था वो थोड़ा सा झुका हुआ था ताकि वो कामया को ठीक से देख सके कामया भी चेहरा उठाए चुपचाप भीमा को पूरी आजादी दे रही थी कि जो मन में आए करो और जोर-जोर से सांस ले रही थी भीमा की कुछ और हिम्मत बढ़ी तो उसने कामया के कंधों से उसकी चुन्नी को उतार फैका और फिर अपने हाथों को उसके कंधों पर घुमाने लगा उसकी नजर अब कामया के ब्लाउज के अंदर की ओर थी पर हिम्मत नहीं हो रही थी एक हाथ एक कंधे पर और दूसरा उसके गालों और होंठों पर घूम रहा था 
भीमा की उंगलियां जब भी कामया के होंठों को छूती तो कामया के मुख से एक सिसकारी निकलजाति थी उसके होंठ गीले हो जाते थे भीमा की उंगलियां उसके थूक से गीले हो जाती थी भीमा भी अब थोड़ा सा पास होकर अपनी उंगली को कामया के होंठों पर ही घिस रहा था और थोड़ा सा होंठों के अंदर कर देता था 

भीमा की सांसें जोर की चल रही थी उसका लिंग भी अब पूरी तरह से कामया की पीठ पर घिस रहा था किसी खंबे की तरह था वो इधर-उधर हो जाता था एक चोट सी पड़ती थी कामया की पीठ पर जब वो थोड़ा सा उसकी पीठ से दायां या लेफ्ट में होता था तो उसकी पीठ पर जो हलचल हो रही थी वो सिर्फ़ कामया ही जानती थी पर वो भीमा को पूरा समय देना चाहती थी भीमा की उंगली अब कामया के होंठों के अंदर तक चली जाती थी उसकी जीब को छूती थी कामया भी उत्तेजित तो थी ही झट से उसकी उंगली को अपने होंठों के अंदर दबा लिया और चूसने लगी थी कामया का पूरा ध्यान भीमा की हरकतों पर था वो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था वो अब नहीं रुकेगा हाँ… आज वो भीमा के साथ अपने शरीर की आग को ठंडा कर सकती है वो और भी सिसकारी भरकर थोड़ा और उँचा उठ गई भीमा के हाथ जो की कंधे पर थे अब धीरे-धीरे नीचे की ओर उसकी बाहों की ओर सरक रहे थे वो और भी उत्तेजित होकर भीमा की उंगली को चूसने लगी भीमा भी अब खड़े रहने की स्थिति में नहीं था 


वो झुक कर अपने हाथों को कामया की बाहों पर घिस रहा था और साथ ही साथ उंगलियों से उसकी चुचियों को छूने की कोशिश भी कर रहा था पर कामया के उत्तेजित होने के कारण वो कुछ ज्यादा ही इधर-उधर हो रही थी तो भीमा ने वापस अपना हाथ उसके कंधे पर पहुँचा दिया और वही से धीरे से अपने हाथों को उसके गले से होते हुए उसकी चुचियों पहुँचने की कोशिश में लग गया उसका पूरा ध्यान कामया पर भी था उसकी एक ना उसके सारी कोशिश को धूमिलकर सकती थी इसलिए वो बहुत ही धीरे धीरे अपने कदम बढ़ा रहा था कामया का शरीर अब पूरी तरह से भीमा की हरकतों का साथ दे रहे थे वो अपनी सांसों को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी तेज और बहुत ही तेज सांसें चल रही थी उसकी उसे भीमा के हाथों का अंदाजा था कि अब वो उसकी चूची की ओर बढ़ रहे है उसके ब्लाउज के अंदर एक ज्वार आया हुआ था उसके सांस लेने से उसके ब्लाउज के अंदर उसकी चूचियां और भी सख़्त हो गई थी निपल्स तो जैसे तनकर पत्थर की तरह ठोस से हो गये थे वो बस इंतजार में थी कि कब भीमा उसकी चूचियां छुए और तभी भीमा की हथेली उसकी चुचियों के उपर थी बड़ी बड़ी और कठोर हथेली उसके ब्लाउज के उपर से उसके अंदर तक उसके हाथों की गर्मी को पहुँचा चुकी थी कामया थोड़ा सा चिहुक कर और भी तन गई थी भीमा जो कि अब कामया की गोलाईयों को हल्के हाथों से टटोल रहा था ब्लाउज के उपर से और उपर से उनको देख भी रहा था और अपने आप पर यकीन नहीं कर पा रहा था कि वो क्या कर रहा था सपना था कि हकीकत था वो नहीं जानता था पर हाँ… उसकी हथेलियों में कामया की गोल गोल ठोस और कोमल और नाजुक सी रूई के गोले के समान चुचियाँ थी जरूर वो एक हाथ से कामया की चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही टटोल रहा था या कहिए सहला रहा था और दूसरे हाथ से कामया के होंठों में अपनी उंगलियों को डाले हुए उसके गालों को सहला रहा था वो खड़ा हुआ अपने लिंग को कामया की पीठ पर रगड़ रहा था और कामया भी उसका पूरा साथ दे रही थी कोई ना नुकर नहीं था उसकी तरफ से कामया का शरीर अब उसका साथ छोड़ चुका था अब वो भीमा के हाथ में थी उसके इशारे पर थी अब वो हर उस हरकत का इंतजार कर रही थी जो भीमा करने वाला था


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