Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

डोर के खुलते ही कामया थोड़ा सा चौंक कर आगे की ओर हुई और अपनी चुचियों का और पीठ का थोड़ा सा हिस्सा नुमाइश करते हुए अपनी टांगों को बाहर निकालते हुए एक हाथ को खिड़की पर रखते हुए बाहर को निकली उसका निकलना था कि दो खुशबुओं ने एक साथ अपनी जगह बदली कामया की मधुर और काम उत्तेजित करने वाली खुशबू भोला के नथुनो को भेदती हुई उसके शरीर के रोम रोम में उतरगई थी खड़ा-खड़ा भोला अपनी मदहोशी के आलम में खोया हुआ कामया को अपने सामने से होकर आगे जाते हुए देख रहा था और एक खुशबू जो कि भोला की थी पसीने और एक मर्दाना जो कि कामया के नथुने में घुसते ही एक लड़खड़ाहट सी पैदा कर चुकी थी उसके शरीर में एक लंबी सी साँस छोड़ती हुई वो आगे बढ़ी थी पीछे से उसे भोला की आवाज भी सुनाई दी थी जो कि ड्राइवर से कुछ कह रहा था पर क्या कामया ने नहीं सुना था पर जैसे ही वो लिफ्ट पर रुकी थी और बटन प्रेस किया था वो खुशबू फिर से कामया नथुनो को भेद गई थी यानी की भोला उसके पीछे ही खड़ा था वो थोड़ा सा बिचलित सी हो उठी थी शरीर का हर हिस्सा उसका जबाब दे उठा था सांसें जो कि अभी तक नियंत्रित थी अब बहक बहक कर चल रही थी रुक रुक कर चलती हुई सांसों को कंट्रोल करने में लगी कामया के सामने धीरे से लिफ्ट कर दरवाजा खुला और एक बलिशट सी बाँहे उसके पीछे से निकलकर उसके कंधों को छूकर पीछे से आई और आगे बढ़ गई थी कामया थोड़ा सा हटी पर जो आग्नि उसके अंदर जागी थी उसे और भी बढ़ा कर अलग हो गई थी कामया थोड़ा सा हटी थी और झट से अंदर हो गई थी लिफ्ट में अंदर आते ही भोला भी अंदर आ गया था और कामया के पीछे खड़ा हो गया था कामया ने पलटने की कोशिश नहीं की थी पर अपनी सांसों को कंट्रोल करने में लगी थी पीछे से उसे कोई आहट सुनाई नहीं दी थी लिफ्ट धीरे से ऊपर की ओर उठने लगी थी लिफ्ट के पीछे लगे हुए मिरर में कामया ने देखा था की भोला उसकी ओर पीठ करके खड़ा था 


वो कुछ और देखती कि भोला की नजर भी आमने लगे हुए मिरर से टकरा गई थी वो अपनी नजर झुका कर खड़ी हो गई थी सांसों के साथ उसकी साड़ी का आँचल भी उसके शरीर के हिस्से को ढकने की छोड़ चुका था वो खड़ी हुई थी कि उसके नितंबों पर एक सख़्त और कठोर हाथों ने कब्जा कर लिया था उसने एक बार अपनी नजर उठा कर फिर से मिरर की ओर देखा था भोला जो कि थोड़ा सा उसकी ओर घुमा था अपने हाथों से उसके नितंबों का जायजा ले रहा था और धीरे-धीरे उसकी हथेलिया उसकी कमर के पास आके रुक गई थी उसकी आखों में एक तारीफ थी जी उसे मिरर में दिख रही थी वो कामया की पीठ की ओर ही देख रहा था और अपने हाथों को घुमाकर उसकी रचना की और उसकी सुंदरता और उसकी कोमलता को वो सहेज रहा था अपने अंदर और एक ना भुजने वाली आग में कामया को जलाकर रखकर देना चाहता था कामया के शरीर में जो आग लगी थी वो एक बार भोला के छूने से फिर से बढ़ गई थी पर एक झटके से पलटकर खड़ी हो गई थी वो जैसे कहना चाहती थी कि छोड़ो मुझे पर भोला तो भोला ही था जानता था कि आज कामया उसे ना नहीं कर पाएगी अपने हाथ ना खींचते हुए वो फिर से कामया के पेट को छूता हुआ उसकी चुचियों की ओर बढ़ा था और अपने हाथों से उन्हें छूता हुआ एक बार उसकी ठोडी को ऊपर करके चूमता तभी लिफ्ट रुक गई थी कामया की जान में जान आ गई थी और वो भी जोर-जोर से अपनी सांसों को छोड़ती हुई खड़ी हुई एकटक भोला की ओर देखती रही पर भोला जैसे ही लिफ्ट रुकी आगे बढ़ कर गेट खोलने में लग गया था अपने कपड़ों की सुध लिए बिना ही कामया जैसी थी वैसे ही बाहर निकल आई थी और खड़ी होकर भोला के फ्लैट के मेन डोर खोलने का इंतजार करने लगी थी भोला भी जल्दी से डोर खोलकर अंदर घुस गया था और पीछे-पीछे कामया भी दौड़ती हुई घुसी और सीधे अपने कमरे में चली गई थी और झट से डोर बंद करलिया था जैसे उसे डर था कि भोला उस पर टूट ना पड़े 

पर भोला ने ऐसा कुछ नहीं किया थोड़ी देर शांति बनी रही रात के 11 बज गये थे पर एक शांति ऐसी थी उस घर में कि जैसे कोई कुछ सुनने की कोशिश कर रहा हो और कुछ नहीं कामया आते ही बेड की साइड में बैठी हुई अपनी सांसों को कंट्रोल करने की कोशिस करने लगी थी धमनियो से टकराती उसकी सांसों से उसे लग रहा था कि कही हार्ट फैल नहीं हो जाए सांसों के साथ उसके मुख से एक अजीब तरह की आवाज भी निकल रही थी जो कि सिर्फ़ उसे ही सुनाई दे है थी कह सकते है कि आअह्ह थी या कह लीजिए कि सिसकारी थी जो भी हो बहुत जान लेवा थी अपने शरीर को छूने के तरीके से भी वो बड़ी ही आश्चर्य चकित थी कितने प्यार भरे अंदाज से भोला उसके शरीर को छुआ था जैसे उसके शरीर के हर उतार चढ़ाव को वो देखना चाहता था कोई जल्दी नहीं थी पर एक कसक थी जो उसके दिल में जगा गया था वो भोला सच में उसके तरीके की गुलाम बन गई थी

कामया - सांड़ कही का जानवर अगर एक बार में पकड़कर चूम लेता तो वो क्या करती कुछ नहीं उस दिन भी उसने यही किया था ऋषि के कमरे में सिर्फ़ एक बार चूमा था और कितना कस कर पकड़ा था कि कमर ही टूट जाती पर उसके कहने पर छोड़ दिया था उसके कमरे में भी जब उसने उसकी जाँघो के बीच में उंगली डाली थी तो कैसा लगा था कामया को बता नहीं सकती और एक-एक करके कामया को सब ध्यान आता चला गया जो कि भोला ने उसके साथ किया था अपनी सांसों को कंट्रोल करती हुई और अपने दोनों हाथों को समेटती हुई कामया बेड के एक साइड में लेटी हुई थी और अपने आपसे बातें करती जा रही थी कि डोर पर हल्के से नोक हुआ भोला था 

भोला- मेमसाहब 

कामया- हाँ… 

भोला- जी मेमेसाहब में खाना खा आता हूँ आप अगर चाहे तो डोर बंद करले नहीं तो में लंच करके आता हूँ 

कामया- ठीक है लंच करके आओ 

कामया की हिम्मत नहीं थी उसके सामने आने की वो नहीं चाहती थी कि भोला एक बार फिर से उसके सामने आए बाहर की आवाज़ बंद हो चुकी थी और मेन डोर भी बंद होने की आवाज उसने सुनी थी लेटी हुई कामया अपने आपको स्थिर करने की कोशिश करती जा रही थी कि फोन ने उसे चौंका दिया था 

कामेश- खाना खा लिया 

कामया- हाँ… ताज गये थे 

कामेश- रीना के पति से मिली कैसा है 

कामया मस्त है सिर्फ़ खाने और घूमने के अलावा कुछ नहीं अच्छा लड़का है 

कामेश- हाँ… इस दुनियां में एक में ही हूँ जो खराब हूँ बाकी तो सब मस्त ही है ही ही है ना 

कामया- अरे यार बोर मत करो कब आओगे यह बताओ हद करते हो तुम 

कामेश---अरे यार आने का मन तो बहुत करता है पर यह काम जो है ना इसके चलते सब बेकार का हो जाता है 

कामया- कल आही जाना 

कामेश--चल रखता हूँ 

जो आग कामया संभालने की कोशिश कर रही थी वो कामेश के फोन ने और भी बढ़ा दिया था उसकी याद ने और उसके यहां नहीं होने से वो अपने आपको फिर से उसी आग में जलता पा उठी थी 

एक तो वो भोला और ऊपर से उसकी वो हरकत और अकेला घर सबकुछ मिलाकर कामया अपने आपको सभालने की कोशिश से लड़ती हुई सी अपने से हारती हुई पा रही थी वो चाह कर भी अपने आपको संभाल नहीं पा रही थी गला सूखने को लगा था पर बाहर जाने का डर था कही वो सांड़ नहीं आ जाए कितनी देर हुई थी और कहाँ गया था वो नहीं जानती थी पर एक डर था उसके अंदर डर यह नहीं था कि वो क्या करेगा डर था अगर वो अपने आपको ना सभाल पाई तो 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो नहीं चाहती थी कि वो इस खेल का हिस्सा बने पर परस्थिति ऐसी बन रही थी कि वो नहीं रुक पा रही थी वो उलझन में थी कि क्या करे पानी तो चाहिए ही था पर आ गया वो आ गया तो तो क्या वो ऐसे ही थोड़ी पड़ी रहेगी उसे पानी चाहिए था और वो खुद जाके ले लेगी एक बार में उठी और बाहर की ओर चल दी थी डोर खोलते समय वो थोड़ा सा रुकी भी थी बाहर की कोई आहट सुनने को पर बाहर कोई आहट नहीं थी और नहीं कोई चिंता की बात वो बाहर आ गई थी और किचेन की ओर चल दी थी फ्रीज में रखी बोटल को निकाल कर पानी पिया था और एक दो घुट पीकर अपना गला तर किया और बोतल रखकर वापस मूडी एक बार घर का अवलोकान भी किया था सबकुछ ठीक ठाक अपनी जगह पर था कही कोई कमी नहीं थी डाइनिंग टेबल की ओर जब उसका ध्यान गया था तो वो रुक गई थी एक येल्लो कलर का रोज रखा था एकदम फ्रेश वो डाइनिंग टेबल की ओर बढ़ी थी प्लास्टिक में लपेटे हुए फूल के साथ एक चिट ही थी लिखा था 

क्या लग रही हो मेमसाहब आज धन्यवाद हमारी फरमाइश सुनने का 

कामया का पूरा शरीर सनसना गया था भोला साला गुंडा कही का यह फूल उसने रखा था इतनी हिम्मत उसकी कामया का दिमाग़ खराब हो गया था मैंने साड़ी उसके लिए पहनी थी वो है कौन और में उसके लिए क्यों पहनु और क्या सब मर गये है वो है कौन 


गला एक बार फिर से सुख गया था वो फ्रीज की ओर बढ़ी थी बोतल निकाल कर पानी पिया था जल्दी और हड़बड़ी के चलते थोड़ा सा पानी उसके गले और ब्लाउज के ऊपर भी गिर गया था एक हाथ में वो फूल था फ्रीज खुला हुआ था और पानी पीते हुए एक बार वो दीवाल की ओर देखती जाती और फिर गला तर करती कि पीछे की आहट ने उसका ध्यान खींचा मैं डोर में चाबी घुसने की आवाज थी एक खामोशी और उलझन सी भरी हुई कामया हाथों में फूल लिए हाथों में पानी की बोतल लिए एकटक डोर की ओर ही देखती रही और बाहर से आते हुए भोला की नजर जैसे ही कामया पर पड़ी वो वही रुक गया था कामया की ओर एकटक देखते हुए सबसे पहले उसने मेन डोर को बंद किया और कामया को देखता रहा 


सबसे पहले उसकी नजर उसके हाथों में उस गुलाब पर पड़ी जो वो रख गया था हाथों में पानी की बोतल लिए अपने कपड़ों की सुध नहीं थी उसे या कहिए उसे अंदाजा नहीं था कि भोला आ जाएगा ढला हुए आँचल से दिखते हुए उसके आधे खुले हुए चुचे काले रंग के ब्लाउससे दूर से ही चमक रहे थे गले से बाहर की ओर पानी की एक धार जो कि ब्लाउज के गले में जाकर कही गुम हो जा रही थी दूर से ही दिख रही थी कमर के हिस्से से साड़ी नहीं के बराबर थी खाली कमर से उसके पेट का हर हिस्सा साफ-साफ दिख रहा था एक जानवर, भोला के अंदर जो सोया हुआ था अचानक ही जाग उठा और वो धीरे-धीरे कामया की ओर बढ़ने लगा था कामया सांस रोके खड़ी हुई एकटक नजर से नजर मिलाए हुए भोला को अपनी ओर बढ़ते देखती रही थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उसकी सांसें जो कि थोड़ी सी कंट्रोल में थी एक बार फिर से धमनियो से टकराने लगी थी आआहए सी निकलने लगी थी खड़े-खड़े काँपने लगी थी हाथ में रखा हुआ फूल उसे नहीं दिखा था और नहीं उसके हाथों में बोतल ही और नहीं उसे अपने कपड़ों का ध्यान था हाँ ध्यान था तो सिर्फ़ एक बात का उसके सामने खड़ा हुआ वो जानवर जो कि उसके शरीर का प्यासा है, जो की उसकी प्यास बुझा सकता था गला क्या उसके सारे शरीर में जो प्यास है उसे वो बुझा सकता है हाँ… कामेश नहीं है पर उसे अपने शरीर की प्यास के लिए कुछ करना ही था तो यह गुंडा क्यों नहीं और फिर वो तो उसका नौकर ही है उसकी खिदमत करना तो उसका फर्ज़ है वो खड़ी हुई सोच ही रही थी कि भोला एकदम उसके पास आके खड़ा हो गया और अपने सीधे हाथों को एक बार उसके लेफ्ट चुचे के ऊपर से घुमाकर उसके चहरे पर ले आया और उसके चहरे से बालों के गुच्छे को हटा कर उसकी आँखो में देखता रहा और बहुत ही धीरे से अपनी नजर को उसके सीने से लेकर उसके पूरे शरीर पर घुमाकर वापस उसकी आखों पर डाल कर उसके नजदीक चला गया 

कामया- आआअह्ह 
पर भोला की आवाज नहीं निकली निकली तो सिर्फ़ उसकी जीब जो कि कामया गले से लेकर उसके सीने पर जहां जहां पानी गिरा था उसके साथ-साथ घूमती हुई उसके ब्लाउसको चूमती हुई और उस गिरे हुए पानी को पीते हुए फिर से ऊपर की र उठने लगी थी 

कामया- आअह्ह उूउउम्म्म्मम प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज 

भोला- मेमसाहब चलिए आपको सुला दूं 

और अपने होंठों को एक बार कामया के गालों को छूते हुए अपनी दोनों बाजू को उसके गले और जाँघो के नीचे लेजाकर एक झटके में ही उसके तन को अपनी बाहों में उठा लिया था कामया जब तक संभालती तब तक तो हवा में थी और एक मजबूत गिरफ़्त में थी एक अंजाने भय के चलते एकदम से भोला की टीशर्ट पर उसकी उंगलियां कस्स गई थी और उसके पीठ पर जो बाँहे थी उसके सहारे अपने सीने को उँचा करके आखें बंद किए आगे की होने वाली घटना को सहेजती हुई कामया ने अपने शरीर को एकदम ढीला छोड़ दिया था 


एक मदहोश करने वाली गंध उसके नथुनो को अब भी भेदने में लगी थी और एक आपरिचित सी गंध भी शायद वो शराब की थी जो की भोला की सांसों से आ रही थी और उसके शरीर से भी पर कामया की मजबूरी ही थी की वो ना चाहते हुए भी उसकी गिरफ़्त में थी और नहीं जानती थी कि क्या करे पर हर स्थिति को जानती हुई भी एक अंजान सी बनी हुई उसकी बाहों के सहारे अपने कमरे की ओर चल दी थी 


उसकी पकड़ अब भी भोला की टी-शर्ट पर कसी हुई थी और नहीं जानती थी कि भोला की नजर कहाँ है पर सांसों के छोड़ने से जो गंध उसकी नाक में जा रही थी उससे तो लगता था कि उसे ही देख रहा होगा पर कामया में इतनी शक्ति नहीं थी कि वो अपने को ढँक सके खाली पेट और सीने पर पड़ती हुई ठंडक को झेलते हुए उसे यह तो अंदाज़ा था ही कि वो अपने कपड़ों का ध्यान नहीं दे रही थी और एक संपूर्ण आमंत्रण सा दे रही थी भोला को और भोला भी उस मौके का पूरा फायदा उठा रहा था 

उसे कामग्नी में जल रही नारी को जो कि उसके जीवन की सबसे ज्यादा तपस्या का फल था आज उसकी बाहों में थी और वो उसे उसी के कमरे में ले जा रहा था एक उमंग के साथ-साथ एक बड़ा ही नाटकीय सा मोड़ आ गया था उसके जीवन में ना जाने क्यों भोला भी इस औरत के लिए इतना क्यों बेकरार था और जाने क्यों वो अब तक इससे जबरदस्ती नहीं कर पाया था चाहता तो लाखा काका के बाद ही वो इस औरत को अपने नीचे लिटा सकता था पर नहीं किया था उसने और आज जब सबकुछ उसके हाथों में था एक झिझक थी उसमें क्या करे या कहाँ से शुरू करे, या फिर कुछ और था जो भोला को रोके हुए था वो तो इस औरत को छू चुका था और वहां भी ऋषि के घर में भी तो उसे इशारा करके ही बुलाया था ना कि मिन्नत करके कैसे आ गई थी यानी वो भी जानती है कि और चाहती ही होगी फिर क्यों वो पीछे हटेगा आज नहीं हटेगा कुछ भी हो 



और उधर कामया अपने आपको अंदर की ओर ले जाती हुई भोला की चाल को गिन रही थी उसकी पकड़ में अपने आपको विचलित सी होती हुई अपने नाखूनों को और भी ज्यादा तेजी से उसकी टी-शर्ट पर गाढ़ती हुई अपने को सहारा दिए हुए अपने कमरे पर पहुँच गई थी और अपने को नीचे की ओर होते हुए भी एहसास किया था और अपने को बेड पर टच भी होते हुए पाया था पर उसकी गिरफ़्त उसके टी-शर्ट पर से ढीली नहीं हुई थी 


कामया को लिटा कर भोला एक बार तो उससे दूर जाने की कोशिश करता है पर कामया की पकड़ उसके टीशर्ट पर इतनी मजबूत थी कि वो हट नहीं पाया थोड़ा सा रुक कर उसपरम सुंदरी को एक बार निहारता हुआ अपने दोनों हाथों को उसके नीचे की ओर से निकालने लगा था निकालते समय कामया के शरीर के हर हिस्से को लगातार छूते हुए और एक गहरा एहसास लेते हुए निकालता चला गया आखें कामया के शरीर के हर हिस्से को निहारती रही और अपने अंदर उठ रही हवस की आग को ठंडा करने की कोशिश करता रहा पर कामया की पकड़ के सामने वो हार गया और अपने सीधे हाथ से एक बार फिर से कामया के शरीर के हर मोड़ पर और हर अंग को शहलाने की इच्छा को वो रोक ना पाया कमर के चिकने पन से लेकर कोमलता और उसके गदराए हुए नितंबों तक वो अपने हाथों को घुमाते हुए ले चला था हर हिस्सा उसके तन में एक आग को जनम दे रहा था दूसरे हाथ से वो कामया की चुचियों पर अपने उतावलेपन को दर्शा रहा था कितनी सुंदर और सुडोल है मेमसाहब कितनी कोमल और नशीली सी और किस तरह से अपने आप में ही तड़प रही थी 


कामया अपने शरीर मे उठ रही ऐंठन को नहीं रोक पा रही थी अपने आपको सिकोड़ती हुई और तन्ती हुई भोला की टी-शर्ट पर अपनी पकड़ अब तक ढीली नहीं की थी और भोला भी धीरे-धीरे अपने हाथों को चलाते हुए उसके शरीर के हर हिस्से को सहलाता हुआ कभी ऊपर और तो कभी नीचे की ओर जा रहा था पर हर बार ही उसे लगता था कि कही कुछ छूट तो नहीं गया और फिर से वो उन्हीं जगह पर घुमाने लगता था कामया के शरीर पर घूम रहे भोला के सख़्त और कठोर हाथ उसके अंदर एक नई आग को जनम दे रहे थे आज तक किसी ने उसे इतने प्यार से नहीं सहलाया था थोड़ी देर में ही वो जंगली हो उठ-ता था और उसपर टूट पड़ता था पर यहां भोला कुछ अलग था उसके हाथों को कोई जल्दी नहीं थी और उसके हाथों के घुमाने से ही लगता था कि वो कामया के हर हिस्से को ठीक से और अच्छे से देख लेना चाहता था कामया के शरीर पर से उसकी साड़ी एक तरफ हो गई थी और जो जगह ढकनी चाहिए वो अब खुली हुई थी काले कलर की साड़ी के अंदर का हर वो पहनावा अब बिल्कुल साफ था भोला के सामने ब्लाउज के अंदर से उसकी चूचियां आधे से ज्यादा बाहर आ गई थी और हर बार उसकी सांसें लेने से वो और भी बाहर की ओर आ जाती थी कामया के मुख से सांसों के साथ-साथ कई आवाजें भी निकलती जा रही थी जो की उस समय उस कमरे में एक अजीब से महाल को जनम दे रही थी भोला की आखें पथरा सी गई थी अपने सामने इस तरह से कामया को तड़पते देखकर उसकी साड़ी को कंधे से नीचे होते ही जब वो झटके से उसकी ओर पलटी तो सिर्फ़ ब्लाउज के अंदर का हिस्सा उसके सामने था और पेटीकोट से बँधी हुई उसकी साड़ी और वो गहरी सी नाभि भी अपनी उंगलियों से उसके पेट को छूते हुए उसकी नाभि को उंगलियों से उसके आकार और प्रकार का जाएजा लेता हुआ भोला उस काम अग्नि में जल रही कामया को एकटक देख रहा था दूसरे हाथ से उसके चहरे से बालों को साफ करते हुए उसके चेहरे को ध्यान से देखता रहा पर कामया की आखें बंद थी और जोर-जोर से सांसें लेती हुई अब तो भोला को टी-शर्ट पकड़कर अपनी ओर खींचने लगी थी उसकी उत्तेजना को देखकर लगता था कि भोला को उसकी जरूरत कम थी और कामया को उसकी जरूरत ज्यादा थी उत्तेजना में हालत खराब थी कामया की पर भोला तो जैसे मंत्र मुग्ध सा अपने हाथों में आई उस हसीना के एक एक अंग को ठीक से तराशते हुए अपने हाथों को उसके जिश्म पर घुमा रहा था उस नरम और कोमल चीज के हर हिस्से को छू लेना चाहता हो जैसे कामया के तड़पने से उसकी पेटीकोट उसकी जाँघो तक आ गई थी और भोला की आखें जैसे पथरा गई हो 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो उस काया को निरंतर अपने हाथों से सहलाता हुआ उसकी जाँघो तक पहुँच गया था उसके हाथों में कोई उतावलपान नहीं था बल्कि एक जिग्यासा थी और वो जैसे अपनी जिग्यासा को परिणाम देने की कोशिश कर रहा था पर उसके छूने से और जिस तरह से वो धीरे-धीरे अपने आपको बढ़ा रहा था कामया के शरीर में एक ऐसी आग को जनम दे दिया था कि वो पागलो की तरह से बेड पर पड़ी हुई तड़प गई थी अपने हाथों से वो भोला को खींच तो रही थी पर अब तो खुद भी उसकी ओर होने लगी थी और लगातार उससे सटने की कोशिश करती जा रही थी पर भोला की पथराई हुई आखें उसकी जाँघो पर थी और अपने हाथों से वो सहलाता हुआ बिना कोई रोक टोक के आगे बढ़ता जा रहा था कामया के मुख से निकलने वाली सिसकारी और आहे भोला को और भी बिचलित करती जा रही थी और भोला अपने ख्यालो में खोया हुआ अपने हाथों को एक बार तो उसकी योनि तक लेगया था और फिर से नीचे की ओर सहलाता हुआ चला गया था पर उस टच ने एक बार फिर कामया को हिलाकर रख दिया था और वो उठकर बैठ गई और भोला के चेहरे को खींचकर अपने होंठों पर ले लिया था पर भोला तो कही और ही गुम था वो कामया की उत्तेजना को ना देखते हुए अपने काम में लगा रहा और कामया की जाँघो से होते हुए उसकी कमर पर पेटीकोट के नाडे पर अपने हाथ साफ करने के मूड में था और उसने किया भी और धीरे से उसकी साड़ी को खोलकर एकटक कामया की ओर देखता रहा 


कामया भोला के चेहरे को अपनी ओर खींचते हुए उसको किस करना चाहती थी और अपने एक हाथ से उसके गालों को सहलाती हुई उसका चेहरा अपनी ओर करने की कोशिस में थी भोला की नजर से नजर टकराते ही उसकी आखों में एक चमक सी दिखी जो कि एक आग्रह था कि जल्दी करो पर भोला के हाथ तो उसकी पेटीकोट को उतारने में लगे थे और कामया ने भी अपनी कमर को थोड़ा सा उँचा करके उसका साथ दिया था कमर के थोड़ा सा ऊँचा होने के कारण और भोला के झटके से पेटीकोट को उतारने के कारण कामया अपना बलेन्स खो कर वापस लेट गई थी और धीरे-धीरे अपने शरीर से पेटीकोट को अलग होते हुए देखती रही देखती क्या रही वो खुद अपने टांगों को सिकोड़ कर अपने शरीर से उस बोझ को अलग कर देना चाहती थी पेटीकोट के अलग होते ही कामया की सुडोल और चमकीली सी टाँगें बिल्कुल साफ-साफ भोला के सामने थी रोशनी से नहाई हुई कामया सिर्फ़ पैंटी और स्लीव्ले ब्लाउसमें बेड पर लेटी हुई तड़प सी रही थी उसकी टाँगो के साथ-साथ उसका शरीर भी किसी जल बिन मछली की तरह से बेड पर इधर उधर हो रहा था पर भोला सबकुछ भूलकर अपने सामने पड़ी हुई उस हसीना के हर अंग को अपने हाथों से सहलाता हुआ और अपने अंदर जो भी आभिलाषा थी उस नारी के लिए उसे वो कंप्लीट कर लेना चाहता था सोचते हुए वो लगातार उसके हर हिस्से को छूकर और कभी-कभी उत्तेजना बस उनको चूमकर भी देख लेता था पर कामया के शरीर में जो आग भड़क रही थी उसे उसने बिल्कुल नजर अंदाज कर दिया था पर कामया उसे अपनी ओर खींचते हुए बोली

कामया- प्लीज करो प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज 


पर भोला मूक दर्शक बना एकटक कामया की ओर देखता हुआ उसकी पैंटी की लाइनिंग के साथ अपनी उंगलियों को घुमानी लगा था और दूसरे हाथों से उसके ब्लाउसमें छुपे हुए चुचों को धीरे-धीरे मसलने लगा था कोई जोर नहीं और कोई जल्दी नहीं थी उसे वो तो आज उस हसीना के हर अंग को छूकर और सहला कर उसकी नर्मी और कोमलता आ और चिक्नेपन का एहसास अपने अंदर समेट कर रखना चाहता था कामया उसकी हर हरकत से एक झटके से, अपने शरीर को सिकोड़ती और एक ही झटके से धनुष जैसे अकड कर अपने आपको ऊपर की ओर उठाती जाती थी उसकी ब्लाउसमें फँसी हुई चूचियां अब थक गई थी वो बाहर आने को उतावली थी पर भोला तो सिर्फ़ अपनी आखें सेक रहा था और धीरे-धीरे उसको सहलाते हुए फिर से पेट और फिर उसकी पैंटी के साथ अपनी उंगलियों को घुमाता हुआ धीरे से अपनी जीब को उसकी नाभि के ऊपर रखकर उसको चाटने लगा था उसके चाटने से एक ऐसी बिजली सी कामया शरीर में दौड़ गई थी कि वो लगभग चिल्ला उठी और ‘


कामया- भोलाआ प्लीज करो ना प्लीज ईयीई इसे खोलो 

और अपने हाथ को अपने ब्लाउज के ऊपर रखकर उसे खींचने लगी थी उसके दूसरे हाथ में फँसी हुई भोला की टीशर्ट को वो खींचकर लगभग उसके कंधों तक ले आई थी वो उसे उतारना चाहती थी और अपने ब्लाउसको भी जो कि इस कदर उसके शरीर में फँसी हुई थी कि उसको सांसें लेने में आसुविधा हो रही थी भोला की एक नजर कामया से टकराई थी और, वो अपने को टीशर्ट से आजाद करके अपने आपको बेड के किनारे बिठा लिया था अभी तक वो नीचे बैठा हुआ उसके सामने कामया को सहलाता जा रहा था पर अब वो बेड पर बैठे हुए उस हसीना को एकटक देखते हुए उसके ब्लाउसको खोलने की कोशिश कर रहा था कामया की नजर एक कामुख और उत्तेजना से भरी हुई थी जो कि किसी भी इंसान तो क्या साधुसंत भी अगर हो तो उसके जीवन में भी एक जहर घोल दे और अपनी और आकर्षित कर ले पर भोला तो जैसे पत्थर का हो गया था नजर तो क्या उसके सामने जिस हालत में कमाया थी वो तो क्या अगर कोई भी होता तो अब तक उसे चीर कर रख देता पर यह कामया मेमसाब थी उसकी मेमसाहब जिसके लिए उसने कितनी तपस्या की थी और कितना इंतजार किया था वो उसके सामने थी पर वो कोई जल्दी नहीं करते हुए उसको गरम और गरम करते हुए एक ऐसे शिखर की ओर ले जा रहा था जिसे पार करना उसके बिना बिल्कुल नामुमकिन था 


धीरे धीरे कामया के शरीर से एक-एक कर खुलते हुए उसके हुक को खोलते हुए भोला उसके अंदर के चमत्कार को देखता हुआ आगे बढ़ रहा था कामया की टाँगें और जांघे उसकी कमर के तड़पने से कई बार टकरा रही थी और उसके हाथ भी उसके हाथों पर ही थे जो कि उसे जल्दी करने को दिशा दे रही थी ब्लाउज के खुलते ही कामया अपने आप ही उठ कर अपने कंधों से जैसे जितनी जल्दी हो सके उस बंधन को आजाद कर लेना चाहती थी और साथ में अपने ब्रा को भी खोलना चाहती थी पर भोला के हाथों ने उसे ब्रा खोलने से रोक दिया और सिर्फ़ ब्लाउस खोलकर एक साइड पर रख दिया कामया का चहरा भोला के बहुत पास था वो अब नहीं रुक सकी और झट से उसके होंठों पर टूट पड़ी और जम के अपने होंठों के बीच में दबा कर चूसने लगी थी पर भोला को कोई जल्दी नहीं थी वो तो सिर्फ़ कामया के ब्लाउसको उतारकर उसे देख रहा था और अपने कठोर और मजबूत हाथो से उसकी चुचियों को ब्रा के ऊपर से सहलाता हुआ एक बार एक नजर कामया के ऊपर डाली और हल्के से एक किस उसके होंठो में देकर वापस कामया को लिटाकर नीचे की ओर मुड़ गया अपनी उंगलियों को फिर से उसकी पैंटी लाइनिंग पर घुमाते हुए अपने होंठों को उसके चूचों पर से घुमाते हुए धीरे-धीरे उसके पेट से होते हुए नीचे की ओर चल दिया था और जैसे ही उसकी नाभि तक पहुँचा अपनी जीब को निकाल कर उसे खोदने लगा था कामया का सारा शरीर आकड़ कर धनुष जैसा हो गया था एक उंगली उसकी जाँघो के बीच से होते हुए उसकी योनि पर पहुँच चुकी थी वो अपनी कमर को थोड़ा सा ऊँचा करके उसकी उंगली को रास्ता देने की कोशिश करने लगी थी पर भोला तो जैसे आज उसे पागल करके ही मानेगा वो धीरे से अपनी उंगलियों को उसके योनि के लिप्स पर ही घुमाते जा रहा था और धीरे से उसे छेड़ते भी जा रहा था कामया का सबर टूट गया था 

कामया- उंगली नहीं प्लीज ए ए प्लीज जल्दी करो 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

पर भोला की जुबान तो उसकी जाँघो पर थी और उंगलियां उसकी योनि पर और वो अब धीरे-धीरे अपने रास्ते पर चल निकली थी और बहुत ही धीरे से अंदर तक बिना किसी रोक टोक के चली गई थी एक हल्की सी सिसकारी कामया के मुख से निकली और अपनी कमर को उठाकर वो भोला की उंगली को और भी अंदर तक ले जाना चाहती थी अपने हाथों को भी उसने जोड़ दिया था इस प्रक्रिया में और खुद ही भोला की हाथों को अपने जाँघो के बीच में और अंदर तक ले जाना चाहती थी पर भोला ने एक ही बार या दो तीन बार अपनी उंगलियों को अंदर-बाहर चलाकर बाहर खींच लिया 

कामया- प्लीज़ मत रूको प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज करो प्लेसीईईईई 
भोला के कानों में पड़ रही उन आवाजो में एक और भी उत्तेजना थी कि मेमसाहब उसके हाथों का खिलोना थी आज और वो जम कर इस मौके का लुफ्त उठाना चाहता था सो उसने अपनी जीब को धीरे से पैंटी के साइड से उसकी योनि में डालकर छूने लगा था अपने दोनों हाथों के जोर से उसने कामया की जाँघो को खोलकर अपनी जीब को अंदर तक पहुँचाता और बाहर निकाल लेता था 


पर भोला के जोर के आगे आज कामया जीत गई थी अपनी जाँघो को कस्स कर उसने जोड़ लिया था और भोला के सिर को अपनी जाँघ के बीच में लेजाकर अपनी कमर को और भी उसके होंठों के करीब कर लिया था उसका सबर का बाँध टूट गया था उसकी उत्तेजना को अब वो नहीं रोक पाई थी और जितना जोर उसमें था उतने जोर से अपनी योनि को उसके मुख के अंदर तक घुसाकर अपने शिखर पर पहुँच गई थी कामया और झटके से अपने शरीर का पूरा भार बेड पर छोड़ दिया था 





बेड पर हाँफती हुई सी कामया की जाँघो के बीच में अब भी भोला उसके रस कर स्वाद ले रहा था और अपनी जीब को लगातार अंदर-बाहर करते जा रहा था कामया का शरीर एक बार फिर से कामुकता की आग में जलने को तैयार था भोला के हाथ अब भी उसकी जाँघो को खोलकर पैंटी के साइड से उसकी योनि को चाट रहा था 

उसकी पकड़ में कोई जोर नहीं था पर एक कोमलता थी जो कि भोला जैसे करेक्टर पर जम नहीं रही थी पर जो था वो था कामया की हालत एक बार फिर से खराब होने लगी थी वो खुद ही अपनी जाँघो को और भी खोलकर रख रही थी ताकि भोला को कोई तकलीफ ना हो वो अपने हाथों से अपनी ही चूचियां को धीरे से दबाने लगी थी और सांसें को कंट्रोल करने के साथ ही सिसकारी भी भरने लगी थी भोला ने जैसे ही देखा कि कामया ने अपनी जांघे खुद ही खोल दी है तो वो अपने हाथों को कामया के शरीर पर फिर से घुमाने लगा था वो धीरे से अपने हाथोंको उसकी चुचियों तक लाता था और फिर सहलाते हुए नीचे की ओर अपनी कमर तक उसकी टांगों के सिरे तक ले कर आता उसकी हरकत से कामया के मुख से फिर से सिसकारी जो की अब तक उसके अंदर ही थमी हुई थी एक बार फिर से उभरकर कमरे में गूंजने लगी थी भोला की नजर अब धीरे से ऊपर की ओर उठने लगी थी और कामया को देखने की कोशिश कर रही थी कामया अपनी जाँघो को खोलकर अपने हाथों से अपनी ही चूचियां को दबाकर आखें बंद किए भोला की हरकतों का आनंद ले रही थी 


भोला का ध्यान फिर से उसकी योनि की ओर चला गया और धीरे-धीरे उसको चूमते हुए वो अब एक बार फिर से ऊपर की ओर उठने लगा था अब वो इस परी को इस असीम सुंदरी को इस कामग्नी में जल रही अप्सरा को अपनी हवस का शिकार बना लेना चाहता था ऊपर उठने के साथ ही उसने देखा था कि कामया के दोनों हाथों को उसको निमंत्रण देने के लिए उसकी चुचियों से हाथ हटा कर उसके कंधे और चहरे की ओर बड़े थे पर भोला तो जैसे मंत्र मुग्ध सा उस काया को देखता हुआ और अपने आपको उस जीवंत कयामत को देखते हुए और चूमते हुए अपने आपको कही खोया हुआ महसूस कर रहा था उसकी हर हरकत कामया के लिए एक अभिशाप सी बनती जा रही थी उसका हर स्पर्श एक आग को जनम देता जा रहा था वो अब अपने आपको ना रोक पाकर एक ही झटके से उठ गई थी और भोला के चहरे को पकड़ने की कोशिश करने लगी थी भोला के होंठों ने एक बार तो उसकी नाभि को छुआ और अपनी जीब से एक मधुर सा स्पर्श उसके पेट और नाभि में करते हुए ऊपर की ओर उठने लगा था 


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कामया के नरम हाथ उसके गालों को छू रहे थे उसके हाथों में एक आग्रह था और एक खिचाब था जो कि भोला को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही थी नजर में भी एक गुजारिश थी जो की भोला से नहीं बच पाई थी वो थोड़ा सा उठा और अपने आपको कामया के नजदीक ले गया और उसकी पतली सी कमर को अपनी बाहों में भरते हुए अपने होंठों को उसके गुलाबी होंठों पर रख दिया वो क्या करता इससे पहले ही कामया की पकड़ इतनी मजबूत हो गई थी कि भोला ने अपने आपको ढीला छोड़ दिया कामया अपने पूरे जी जान से अपने हाथों में आए उस गंदे से इंसान के होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे उसे उससे नया जीवन मिलने वाला था उसकी आतूरता को देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता था कि कामया की क्या हालत है उसके हर अंग से एक आग की लपट निकलती जा रही थी वो भोला को चूमते हुए कुछ कह भी रही थी पर क्या वो भोला को नहीं समझ आया पर हाँ… कामया से अपने होंठों को उसने जरूर छुड़ा लिया था और धीरे से कामया की नजर से नजर मिलाते हुए उसे धीरे से बेड पर लिटा दिया था और खुद खड़ा होकर अपनी पैंट उतारने लगा था और नीचे लेटी हुई कामया की ओर देखता जा रहा था कामया के शरीर में हलचल चल रही थी वो उसके हर अंग से निकल रही थी उसके अकड़ने से और अपने हाथों को बेड की चद्दर पर घुमाने से और उसका हर अंग जैसे कुछ कह रहा था भोला से 

भोला अपने आपको बहुत ही संतुलित सा करते हुए अपने अंदर के हैवान को पता नहीं कहाँ छोड़ आया था और बहुत ही धीरे-धीरे अपनी पैंट को खोलकर पैरों से बाहर निकाल ही रहा था कि कामया का सीधा हाथ उसकी जाँघो से टकराया उसकी आँखो में एक भूख थी जो कि अब धीरे-धीरे बेशरम सी होती जा रही थी और भोला की मजबूत जाँघो को अपनी पतली पतली और नरम उंगलियों से सहलाने लगी थी 


कामया की उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी कि वो अपने आपको नहीं रोक पा रही थी और उसके हाथ अब भोला के अंडरवेर तक पहुँचा कर उसे खींचने लगी थी भोला थोड़ा सा आगे बढ़ा और कामया के खींचने से अपने अंडरवेर को फटने से बचाने लगा था वो कामया की ओर देखता जा रहा था और उसके हर अंग से निकल रहे एक आमंत्रण को देख रहा था उसकी आँखों में उठ रही उसकी उत्तेजना को देख रहा था अपने अंडरवेर को खींचते देखकर वो खुद ही अपने अंडरवेर को नीचे की ओर कर दिया और कामया के हाथों को पकड़कर अलग कर दिया और अपने आपको अंडरवेर से अलग करने लगा उसके लिंग को एक ही झटके से बाहर आते देखकर कामया के शरीर में जैसे एक आहह निकल गई थी 


वो, अपने हाथों को एक बार भोला की पकड़ से छुड़ाने की कोशिश करने लगी थी पर भोला की पकड़ से वो नहीं छुड़ा पाई थी पर कोशिश बरकरार थी और अपने हाथों को मोड़कर जैसे वो भोला से बिनती करने लगी थी कि प्लीज छोड़ दो और मुझे पकड़ने दो पर भोला एकटक उसकी ओर देखता हुआ अपने ही हाथो को अपने लिंग पर चलाने लगा था दो तीन बार उसने अपने लिंग को आगे पीछे किया तब तक, कामया आ चुकी थी एक अजीब सी स्थिति में थी वो उसके अंग से निकल रही उत्तेजना की हर एक बात भोला के लिए एक पहेली थी वो जहां देखता था एक आमंत्रण सा दिखता था आखों में या कहिए होंठों में आधखुले होंठों के बीच से दिख रही उसकी जीब को जो की उसके होंठों पर कभी-कभी घूमकर फिर अंदर चली जाती है गालों में उठ रही लालिमा और फिर गले से जाते हुए घूंठ जो कि उसके सीने के उभारों को और भी उभार कर कही अंदर गुम हो जाते थे 


पेट का अंदर-बाहर होना और फिर हर एक सांसों के साथ उसके सीने को और भी बाहर की ओर धकेल देती थी जाँघो को खोलकर और फिर जोड़ लेने से जो हालत कामया की थी वो शायद इतने इतमीनान से भोला भी नहीं देख पाता अगर वो अब तक उसपर टूट गया होता तो पर यह नजारा तो उसकी जान पर बन आई थी सिर्फ़ ब्रा पहने हुए कामया उठकर बैठी हुई थी और अपने दूसरे हाथ को धीरे-धीरे उसके लिंग की ओर ले जा रही थी भोला का लिंग किसी खंबे की तरह अपने अस्तित्व की सलामी दे रहा था और अपने इस्तेमाल होने की तैयारी में था कामाया के नरम हाथों ने जैसे ही उसके लिंग को पकड़ा था एक बिजली सी भोला के शरीर में दौड़ गई थी और वो खड़ा-खड़ा थोड़ा सा हिल गया था पर जल्दी ही दूसरे हाथ से उसने कामया के हाथों को अपने लिंग को छुड़ा लिया और थोड़ा सा पीछे हो गया था 



कामया की नजर एक बार फिर से उससे टकराई थी एक अजीब सी नजर थी उसकी एक फरमाइश थी एक गुजारिश थी एक भीक थी शायद हाँ… वो भीख ही थी जो वो आज माँग रही थी उससे भोला से पर भोला अपने हाथों से उसे रोक कर धीरे से उसे थोड़ी देर तक देखता हुआ उसे पीछे की ओर धकेल दिया था कामया अपने आपको ना संभाल पा कर एक दम से चित होकर लेट गई थी पर शरीर पर उसका कंट्रोल नहीं था वो अब भी लेटी हुई अपने शरीर में उठ रही उत्तेजना से लड़ रही थी और वो गुंडा खड़ा हुआ देख रहा था साला जानवर कही का और क्या चाहिए इसे करता क्यों नहीं खड़ा-खड़ा देख रहा है उसके लिंग को देखते हुए कामया की साँसे फुल्ती जा रही थी सांसों के साथ-साथ अब उसके होंठों से आह्ह और सिसकारी के साथ साथ शायद रोने की आवाज भी आने लगी थी रोने की हाँ… यह रोने की ही आवाज थी कुछ ना कर पाने की स्थिति में जो रोना निकलता है वो ही है उसकी आखों में शायद आँसू भी आ गये थे 


उस नजर से भोला, थोड़ा सा धूमिल हो जाता पर एक सख़्त हथेली ने जैसे उसकी जान में जान डाल दी थी वो हथेली जैसे ही उसके पेट को सहलाते हुए उसके सीने की ओर उठी तो वो फिर से अकड गई थी धीरे-धीरे वो एक बोझ से दबने लगी थी वो भोला का बोझ था एक सख़्त और बहुत ही मैली खुशुबू से वो ढँक गई थी एक-एक अंग उस बोझ से दबने को तैयार था हाँ वो यही तो चाह रही थी कामया की बाँहे एक साथ ही उठी और भोला के शरीर के चारो ओर धीरे से कस गई थी और उस मर्दाना खुशबू में वो खो गई थी उसे अब कुछ याद नहीं था सिर्फ़ याद था तो अपने आपको एक सख़्त और मजबूत बाहों के घेरे में जाने का और एक अद्भुत सा एहसास जिसका कि उसे कब से इंतजार था धीरे-धीरे उसकी जाँघो के बीच में अपनी जगह बना रहा था और अपनी सांसें रोके उस चीज को अपने अंदर और अंदर तक उतारने की जगह बनाने लगी थी 


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वो साँसे रोके हुए अपने आपको उस शरीर से और भी चिपका कर रखना चाहती थी उसके सीने से लगी हुई उसकी ब्रा अब उसे चुभने लगी थी पर भोला को कोई चिंता नहीं थी उसे उतारने की पर वो उसे उतारना चाहती थी कामया अपनी सांसों को नियंत्रित करते हुए उस शरीर को अपने दूर नहीं जाने देते हुए एक हल्की सी आवाज जो कि शायद भोला के कानों में ही सुना जा सकता था 


कामया- प्लीज इसे उतार दो प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज 
और उसकी बाँहे और भी कस गई थी पर भोला के हाथ तो बस उसको पीछे से सहलाते हुए उसकी ब्रा की पट्टियों से खेल रहे थे और धीरे-धीरे भोला कामया के अंदर तक उतर रहा था वो जितना धीरे-धीरे कर रहा था वो एक आश्चर्य ही था पर इसका राज तो सिर्फ़ भोला ही जानता था आज उसकी स्थिति ऐसी थी 

(( कि जैसे वो एक रेस्तरो के बाहर से रोज जाता था और कभी-कभी परदा के उड़ने से थोड़ा सा अंदर दिख जाया करता था एक तमन्ना लिए वो हमेशा ही वहां खाने की तमन्ना लिए जीता जा रहा था और आज जब उसे अंदर से देखने का और खाने का मौका मिला तो अंदर तक जाते हुए भी अपने कदम को वहां रख रहा था कि जैसे कार्पेट तक खराब ना हो जाए या फिर कुछ और खराब ना हो जाए जितनी सहजता और नाजूक्ता को अपने आपको इस रेस्तरा में चल रहा था )))

उसकी हालत ऐसी थी कि वो धीरे धीरे उस अप्सरा को अंदर जाते हुए अपनी बाहों में कसे हुए था वो एक रूई के गोले के समान लग रही थी नाजुक और नरम सी कोमल सी और गदराई सी अपनी कमर को उठाकर अपने अंदर की जगह को निरंतर फैलाकर उसके लिए जगह पर जगह बनाती जा रही थी कामया के शरीर से उठ रही एक मादक गंध जो की उसके बालों से और उसके शरीर से आ रही थी एक अजीब सा नशा सा भर रही थी भोला के शरीर में वो अपनी रफ़्तार को बढ़ाना चाहता था पर कामया की हरकतों से वो खुद को काबू में रखे हुए था कामया नीचे से अपनी कमर को उठाकर उसके काम को आसान बना रही थी वो जैसे ही थोड़ा सा अलग होता वो खुद अपनी कमर को उठाकर उसके निकले हुए लिंग को फिर से अपने अंदर तक समा लेती थी और अपनी टांगों के दबाब से उसे फिर से अपने ऊपर खींचकर गिरा लेती थी भोला की उत्तेजना जो की धीरे-धीरे अपने शिखर पर पहुँचने वाली थी पर वो खुद होकर कुछ नहीं कर पा रहा था जो भी करना था वो कामया ही कर रही थी उसके झटके इतने तेज हो गये थे कि शायद वो फिर से एक बार झड़ने की तैयारी में थी और भोला भी पर उसने तो अपनी मेमसाहब को अपनी सप्निली चीज को देखा तक नहीं अभी तक पूरा और नहीं अपने मन की ही कर पाया और नहीं ही वो कर पाया जिसका कि वो कितने दिनों से इंतजार कर रहा था और ना जाने कितने सपने देखते थे उसने पर ऐसा लगा कि 

(((जैसे ही वो उस रेस्तरा में घुसा उसकी हर चीज उसे नई लगी थी और वो उसे देखता ही रह गया और खाते खाते ही बिल पे करने का समय आ गया )))

पर धीरे-धीरे वो भी कामया के रिदम से रिदम मिलाने लगा था पर बहुत ही आहिस्ते और बहुत ही सटीक तरीके से वो अपने आपको रिलीस करने ही वाला था कि कामया के मुख से एक जोरदार चीत्कार निकली 

कामया- जोर से करो प्लीज और जोर से जोर से पकडो और जोर से 

भोला की पकड़ धीरे-धीरे और भी मजबूत होती गई और अपनी मेमसाहब के हर शब्द जो कि उसके लिए एक आग्या थी उसे निभाने लगा था 

कामया- जोर-जोर से करो प्लीज और जोर-जोर से हाँ प्लीज और र्र्र्र्र्ररर 
और कामया का शरीर एक झटके में भोला के शरीर से लिपट गया था जैसे की कोई बेल थी वो अपने होंठों के ठिकाना ढूँडने से उसे भोला का कान ही मिला सो उसने उसे ही अपने होंठों में दबा लिया और अपने आपको रिलीज़ करने लगी थी भोला भी अपने आपको रोक नहीं पाया था और दो तीन झटके में ही वो अपने लिंग को बाहर निकाल कर अपने आपको रिलीस कर दिया और कामया को कसकर पकड़कर अपनी बाहों में भरने लगा था वो उसे इतना अपनी बाहों में भर लेना चाहता था कि वो उसके हाथों से निकल ना जाए 

और तेज-तेज सांसें लेता हुआ कामया के कंधे के पास उसकी जुल्फो में खो गया था नीचे पड़ी कामया की आखें तो बंद थी पर एक बड़ा सा चेंज उसके अंदर आ गया था वो सख्स जो कि उसके ऊपर पड़ा हुआ था वो सख्स जो की अभी-अभी, उसके तन से खेला था वो सख्स जिसे कि वो घृणा करती थी वो सही मायने में प्यार करने की चीज थी हाँ… नहीं तो आज तक जिसने भी उसके साथ यह सब किया था वो उसके अंदर ही झडा था पर भोला ने अपने आपको बाहर झड़ाया था क्यों


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

आख़िर क्यों वो उसकी इतनी चिंता करता है क्यों नही वो अपनी आमानुष होने का परिचय दिया था अभी-अभी क्यों नहीं उसे निचोड़ कर रख दिया था जैसे लाखा और भीमा ने किया था जैसे उसके पति ने किया था या कोई भी अपने सामने उस जैसी नाचीज़ को पाकर करता पर नहीं इस पागल ने तो मन जीत लिया यह सच में पागल ही है सांड़ कही का कितना दुलारा है उसने आज और कितना मजबूत था यह सोचते सोचते वो कब सो गई उसे पता ही नहीं चला पर हाँ… अपनी बाहों से निकलकर भोला को जाते हुए और एक बार प्यार से उसे चूमते हुए और उसे एक बार ठीक से प्यार से सहलाते हुए उसने देखा था 

उसे कोई दिक्कत नहीं थी भोला से अब वो जानती थी कि यह जैसा दिखता है या जैसा सब जानते है वो ऐसा नहीं है वो गवाह है उसकी “ 


सोते ही उसे भोला की हरकतों ने घेर लिया था कैसे उसने उसके हर अंग से खेला था कितने प्यार से उसने उसे सहलाया था और कितने ही प्यार से उसे उसके चरम शिखर तक एक ही झटके में पहुँचा दिया था सोते सोते वो एक सुखद और उतेजना के शिखर में कब गोते लगाने लगी थी उसे नहींमालूम चला था पर हाँ… एक खुशबू ने उसे एक बार फिर से घेर लिया था और एक गरम सा स्पर्श उसकी पीठ पर फिर से हुआ था 


और एक मजबूत सी गिरफ़्त में फिर से वो पहुँच गई थी एक हाथ जो कि उसके नीचे से उसकी कमर से होते हुए धीरे से उसकी चुचियों पर आके टिक गये थे और दूसरा हाथ उसकी जाँघो के चिकने पन से खेल रहा था कामया नींद में थी या जागी हुई उसे नहीं पता था पर हाँ… उत्तेजना में डूबती हुई कामया को यह सब अच्छा लग रहा था वो नींद में ही एक मुस्कुराहट लिए थोड़ा सा पीछे की ओर हो गई थी हाँ… पीछे कोई है भोला की खुशबू है फिर से आ गया मन नहीं भरा होगा चलो करने दो जो करना है में तो सो जाती हूँ आखें खोलने की हिम्मत नहीं थी उसमें वो जो खेल उसने खेला था 


थकि नहीं थी पर शायद शरम के चलते वो उसकी ओर नहीं देखना चाहती थी पर हाँ कोई रोक टोक नहीं था उसकी हरकतों में बल्कि अपने हाथों को लेकर उसके हाथों के सखतपन को एक बार उसने चखा जरूर था हाँ वही है करने दो जो करना है लेटी हुई कामया ने अपने आपको ढीला छोड़ दिया था भोला की हरकत को रोक सके वो सिर्फ़ कामया ही थी और उसे अपनी मेमसाहब से पहल करने की आजादी मेल चुकी थी वो अब थोड़ा सा और खुल गया था अपने आपको ना रोक पाकर वो बहुत ही उलझन में इस कमरे में वापस आया था और आते ही कामया को जिस तरह से सोया हुआ देखा था वो एक ओर तो पागल ही हो गया था पर बहुत ही धीरे से उसने अपनी सांसों पर काबू पाकर वही बॅड पर बैठे बैठे ही अपनी मेमसाहब को देखता रहा था गोरी गोरी जाँघो के नीचे से उसकी टांगों को देखकर एक बार तो मन हुआ था कि जोर से पकड़कर चूम ले पर अपने आपको संभाल कर उसने ऊपर की ओर देखना शुरू किया था और देखकर समझ गया था कि कामया ने पैंटी नहीं पहना था तो क्या मेमसाहब ऐसे ही सोती है गाउन कमर के पास था और सबकुछ खुला हुआ था और कमर के चारो तरफ जो गाउन घिरा हुआ था वो एक खुला दे रहा था और शायद ही दुनियां में कोई मर्द ऐसा होगा इस मौके को छोड़दे और भोला उन मर्दो में ही था जो आपने हाथों में आई इस मल्लिका-ये-हुश्न को फिर से अपने शरीर से जोड़ कर देखना चाहता था अपने मन की कर लेना चाहता था सो उसने किया भी 


अपने कपड़े उतार कर धीरे से उसके पीछे लेट गया था और अपने हाथों से उस काया को उस रूई की गेंद को फिर से अपनी बाहों में भर लिया था और जो कुछ देख कर लेटा था एक हाथ जरूर उस ओर ले गया था शायद हर मर्द की यही इच्छा होती है कि जिसे देखे उसे जरूर छुए सो उसने भी किया अपने हाथों को घुमाते हुए वो धीरे-धीरे ऊपर उठाने लगा था कमर के घेरे पर अपने हाथों को छूता हुआ वो कमर से ऊपर की ओर बढ़ा अपनी उंगलियों से छूते हुए वो पेट और फिर धीरे से अपने हाथों को उस कोमल और चिकने से शरीर को छुआते हुए उसकी चुचियों तक ले गया था 


उउउफफ्फ़ कितने सुंदर और सुडोल थे कितने कोमल और रूई के गोले के समान थे कामया के चुचे . निपल्स टाइट होते ही एकदम से बाहर की ओर निकले हुए एक दाने की समान थे वो दूसरे हाथ को भोला कामया के कंधे पर से घुमाकर उसके गाउन के अंदर तक पहुँचा चुका था वहां भी यही स्थिति थी पागल सा हो उठा था वो कितने दिनों की तमन्ना थी इस चीज को छूने की बहुत ही धीरे-धीरे और बहुत ही आराम से भोला अपने हाथों को घुमाकर उन चुचों को अपने हाथों से सहलाता हुआ कामया की पीठ पर अपने होंठों को रगड़ता जा रहा था और अपने जीब को निकाल कर उसके शरीर का रस भी पीता जा रहा था अपनी कलाई में कामया के हाथों का स्पर्श पाकर भोला तो जैसे मस्त ही हो उठा था वो जान गया था कि कामया जाग रही थी और उसे कोई दिक्कत नहीं है वो कर सकता था जो वो करना चाहता था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो अपने आपको कामया के और भी करीब ले गया था और बहुत ही कस कर उसको अपने से भींच लिया था उसके हाथ अब भी उसके दोनों चुचों पर कब्जा किए हुए थे और एक जाँघ को उठाकर कामया की जाँघो पर रख दिया था कामया जो की अपनी जाँघो पर भोला की सख़्त सी जाँघ का स्पर्श पाकर और भी निढाल हो गई थी वो थोड़ा सा अपने शरीर को साधने लगी थी ताकि भोला की जाँघ का पूरा स्पर्श अपनी जाँघो पर ले सके सख़्त और बालों से भरा हुआ गरम सा मर्दाना जाँघ का स्पर्श उसे अच्छा लग रहा था और उसे साथ-साथ उसके गरम-गरम लिंग का स्पर्श भी उसकी जाँघो के आस-पास जिस तरह से हो रहा था वो और भी पागल करदेने वाला था कामया की जाँघो के साथ-साथ उसकी कमर ने भी हरकत करना शुरू कर दिया था और वो थोड़ा सा और पीछे की ओर होती हुई अपनी कमर के नीचे उसके लिंग को अपने नितंबों से छूने की कोशिश करने लगी थी हर टच उसके लिए एक जान लेवा साबित हो रहा था 


जहां वो सोने का नाटक करने की कोशिश करने वाली थी वही अब अपने आपको रोक नहीं पा रही थी वो भोला के अपनी चूचियां पर से हाथों को भी रोकना चाहती ही और भोला को अपने और भी पास भी खींचना चाहती थी एक हाथ को भोला के हाथों पर रखते हुए उसके दाए हाथ को पीछे की ओर ले गई थी कामया और भोला की कमर को छूकर और फिर अपनी कोमल उंगलियों से उसे धीरे से अपनी ओर खींचने लगी थी अपनी कमर को थोड़ा सा उचका करके उसे रास्ता भी दिखाने की कोशिश करने लगी थी योनि के अंदर एक भूचाल सा आने लगा था सांसें फिर से रफ़्तार पकड़ने लगी थी उसका दिल धड़कनों को छूने लगा था और चूचियांतनकर और भी बाहर की ओर हो गई थी भोला की पकड़ से वो कभी-कभी छूट जाती थी उसकी हरकतों के कारण पर भोला की पकड़ वैसे ही सख़्त थी जो कि कामया की कमर से होकर और कामया के कंधे से होकर गये उसके हाथो में थी कामया को हिलने के लिए बहुत जोर लगाना पड़ रहा था 


पर शरीर में उठ रही उत्तेजना के ज्वार के आगे और काम अग्नि में जल रही कमाया को भोला की पकड़ भी नहीं रोक पा रही थी वो भोला की कमर को और भी अपनी ओर खींचती हुई अपने नितंब को लगातार उसके लिंग पर घिसने लगी थी भोला भी पीछे से उसके नितंबों को अच्छे से अपने लिंग से छूता हुआ अपना दायां हाथ धीरे से नीचे की ओर ले आया था और कामया की जाँघो के बीच में ले गया था कामया की जांघे अपने आप ही भोला की दाई जाँघ पर उठ गया था और उसने भोला के लिए जगह बना दी थी अपनी उंगलियों को धीरे से उसने कामया की योनि में डाली ही थी कि एकदम से कामया के मुख से एक लंबी सी सिसकारी निकली और उसका मुख थोड़ा सा घूमकर भोला की ओर आ गया था अधखुले होंठों से और नथुनो से निकलने वाली खुशबू से भरी उसकी सांसें अब भोला की नाक से टकराने लगी थी वो घूमकर शायद अपने होंठों पर कब्जा जमाने को कह रही थी 



सो भोला भी अपने पकड़ को थोड़ा सा ढील देकर ऊपर उठा और पीछे से ही उसके होंठों को छू लिया और फिर धीरे से अपनी जीब को एक बार उसके होंठों पर फेर दिया कामया की सिसकारी और भी तेज होती जा रही थी और वो अपने आपको घुमाने की कोशिस करती जा रही थी पर एक हाथ उसकी चुचियों पर और एक हाथ उसकी जाँघो के बीच में होने के कारण वो ऐसा नहीं कर पाई थी पर हाँ घूम तो थोड़ा सा गई थी और अपने होंठों को और भी खोलकर भोला को प्रेज़ेंट कर रही थी भोला ने भी उस उत्तेजना में जल रही अपनी मेमसाब को और नहीं तड़पाया और झट से उसके होंठों पर कब्जा जमा लिया था और धीरे-धीरे उसके होंठों का रस्स पान करने लगा था एक मदहोशी सी थी उसके होंठों में वो क्या किस करता उससे कही ज्यादा और उसके कही ज्यादा तेजी थी कामया की जीब और होंठों की उसके होंठों को खींच खींचकर वो छूती और अपनी जीब को उसके मुख के अंदर तक घुमाती जा रही थी 


भोला को ऐसा किस आज तक किसी ने नहीं किया था आज तक जो भी मिला वो सिर्फ़ होंठों को देकर चुपचाप अपना काम करने देता था पर आज बात कुछ और थी भोला को जितनी जरूरत मेमसाब की थी शायद उससे कही ज्यादा मेमसाब को उसकी जरूरत ज्यादा थी भोला का अंदर बैठा हुआ शैतान अब धीरे-धीरे जाग रहा था और उसकी पकड़ के साथ-साथ उसकी आक्टिविटी भी वायलेंट होने लगी थी उसकी पकड़ का कोई तोड़ नहीं था इतनी कस गई थी कि कामया का हिलना तो दूर सांस भी लेना दूभर हो रहा था पर कामया को जिस बात की चिंता थी वो थी अपनी काम अग्नि को शांत करने की भोला का जानवर वो जगा चुकी थी अब सिर्फ़ उसे रास्ता दिखाना है सो वो अपनी कमर को झटकने लगी थी उसके हाथों के साथ साथ और मुख से अजीब सी आअहहे और सिसकारी भरती हुई भोला को और भी उत्तेजित करने लगी थी कामया के शरीर का हर पार्ट अब इस खेल में शामिल था उसके हर अंग से एक अजीब सी मादक सी खुशबू निकलकर भोला को पागल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी 


भोला भी मेमसाहब की उत्तेजना में बराबर का हिस्से दार बन गया था और हर कदम में मेमसाहब का बराबर का साथ देने को तैयार था वो कामया को अपनी बाहों में कसे हुए अपनी उंगलियों को उसकी जाँघो के बीच में तेजी से चलाने लगा था और अंदर और अंदर तक जहां तक वो जा सकता था जा रहा था कामया की जांघे भोला की जाँघो के ऊपर होने की वजह से एकदम खुल गई थी और वो लगातार सिसकारी भरती हुई भोला को और भी उकसा रही थी उसकी सिसकारी में कोई गुस्सा व मनाही नहीं थी बल्कि, भोला को और भी आगे बढ़ने की तथा ऑर भी रफ होने की फरमाइश थी भोला की उंगलियाँ अब तक वो कमाल काफ़ी बार कर चुकी थी पर भोला के शरीर का सबर अब टूट गया था वो कामया को अपने तरीके से भोगना चाहता था अब तक जो उसने किया था एक सुंदर और खूबसूरत नारी का सम्मान किया था और अब जो वो करने जा रहा था वो एक भोला को करना था जो कि औरतों के बीच में पहचाना ही जाता था अपने दरिंदगी के कारण 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला ने अपनी बाहों को कामया के नीचे से निकाल कर उसके साथ उसकी गाउनको भी निकाल दिया था और एक बार उसकी नंगे तन को पीछे से देखा था और फिर से उसे घुमाकर अपने होंठों को उसके होंठों से आजाद करते हुए उसकी पीठ पर रख दिया था उसका एक हाथों कामया की एक चुचि पर था नीचे से जाते हुए और दूसरा हाथ अब भी उसकी योनि में था और अपने काम में लगा हुआ था होंठों ने एक बार उसकी पीठ का जायजा लिया और फिर अचानक ही अपने मुँह को उसकी पीठ पर गढ़ा दिया और फिर एक लंबा सा चुंबन जड़ दिया एक लंबी सी चीख और साथ में एक लंबी सी सिसकारी उस कमरे में गूँजी और फिर शांत हो गई थी पर कामया की भूख और भी बढ़ गई थी और भोला की चाहत भी 


भोला लगा तार वही करता जा रहा था और अपने हाथों का दबाब भी उसकी चुचियों पर बढ़ाने लगा था फिर आचनक ही उसने अपनी उंगली को कामया के योनि से निकाल लिया था और पीछे से ही उसकी योनि में अपना डंडा घुसाने की कोशिस करने लगा था एक गरम सा लोहे जैसा सख़्त उसका लिंग जैसे ही, कामया की चूत के द्वार पर थोड़ा सा घुसा कामया की आखें बंद थी वो और भी कसकर बंद हो गई थी और अपनी कमर को पीछे करते हुए वो लगभग भोला के ऊपर चढ़ जाना चाहती थी 


भोला की गिरफ़्त इतनी कसी हुई थी कामया के कमर पर कि कामया को दर्द होने लगा था , पर उसके लिंग के स्पर्श में जो सुख उसे मिल रहा था वो एक अनौखा एहसास था वो उसे और भी अंदर की ओर ले जाने को आतुर थी और अपनी योनि को और भी खोलकर अपनी जाँघो को उसके ऊपर किया और चढ़ती हुई अपनी कमर को और पीछे की ओर धकेलती जा रही थी और भोला अपने एक हाथ से कामया की कमर को पकड़े हुए अपने लिंग को उसकी जगह में और उसके रास्ते में आगे बढ़ाते हुए पीछे से उसको कसकर पकड़ रखा था और धीरे-धीरे आगे पीछे होने लगा था 


एक हाथ में उसके चुचे को दबाते हुए वो कामया के चहरे तक भी चला जाता था और, फिर नीचे आते हुए उसकी चुची को फिर से कस कर जकड़ लेता था भोला की मनोस्थिती एकदम मदहोशी के समान थी वो अपने लिंग को अंदर तक पहुँचाने के बाद से ही कामया को अपने आपसे कस कर जोड़े रखना चाहता था और उसकी पीठ पर अपना सिर रखकर अपनी कमर को चलाने लगा था अपने दूसरे हाथ को भी वो कामया चुचियों पर ले आया था और अपने ही जोर से वो दबाता जा रहा था पर कामया के मचलने से और उसकी हरकतो से वो कभी-कभी अपनी पकड़ को ढीला भी करता था और फिर कसकर पकड़ लेता था पर हर बार वो इस तरह से अपने आपको उठाती और गिराती थी कि भोला को अपनी स्पीड को बरकरार रखने में थोड़ा सा दिक्कत होती थी कामया के झटपटाने का ढंग अब निरंतर बढ़ने लगा था वो अपना सिर पीछे की ओर करते हुए भोला के सिर से लग गई थी अगर भोला उसे अपना सिर उठाकर जगह नहीं देता तो शायद उसके माथे पर ही जोर से सिर मार देती पर भोला के सिर उठाने से एक रास्ता कामया के लिए बन गया था और अपने सिर को भोला के कंधे पर टिका लिया था और अपनी नथुने और मुख से निकल रही सांसों को वो भोला के चहरे पर फेकने लगी थी 



कामया की हालत खराब थी पर वो अपने नितंबों को कस कर भोला की जाँघो के जाइंट पर टिकाए हुए थी और भोला का एक हाथ उसकी जाँघो के सामने की ओर से होते हुए उसके बीच में था और पीछे से वो लगातार अपनी रफ़्तार को बनाए हुए था कामया के शरीर में एक अजीब सी हलचल मची हुई थी और उसे पता था कि वो ज्यादा देर तक अब नही रुक सकती थी क्योंकी भोला की पकड़ के सामने वो अब बिल्कुल बेबस थी उसकी बाँहे सिर्फ़ शायद उसके हाथों और टांगों पर ही कुछ जगह को छोड़ती थी और हर कही भोला था उसकी चुचियों से लेकर उसके पेट तक और उसके चहरे से लेकर उसकी जाँघो तक वो था हर कही वो था एक ओक्टोपस की तरह शायद उससे भी ज्यादा जगह घेर रखी थी उसने और उसके धक्के लगाने की रफ़्तार भी इतनी तेज थी कि हर धक्के में एक आहह कामया के मुख से निकल आती थी उसकी चोट इतनी अंदर तक जाती थी कि शायद उसके मुख तक आती थी वो बड़ा सा लिंग कही अंदर एक उफ्फान सा उठाने लगा था कामया के अंदर और वो निरंतर वायलेंट होती जा रही थी उसके होंठों को अब कुछ चाहिए था अपने एक हाथ को उसने भोला के हाथों के ऊपर से हटा कर भोला के गालों को पकड़कर अपनी ओर करती हुई उसके होंठों को ढूँढ़ ही लिया था उसने और अपने होंठों से उसके होंठों पर टूट पड़ी थी जी जान लगाकर चूस रही थी 



पर भोला भी कम नहीं था अपने उल्टे हाथ को उसकी चुचियों से हटा कर उसने भी कामया के चेहरे को अपनी तरफ किया और उसके पूरे होंठों को अपने अंदर कर लिया था चूसने और चुबलने का एक ऐसा दौर शुरू हुआ था कि जिसका कि कोई अंत नहीं था कामया का एक हाथ छूट कर अब बिस्तर पर घूमने लगा था वो धीरे-धीरे अपने मुकाम को हासिल करने वाली थी उसकी उत्तेजना तो देखते ही बनती थी सीधे हाथ को भोला के हाथों पर रखे हुए अपनी कमर को उसकी स्पीड के साथ आगे पीछे करते हुए वो बिस्तर पर हर चीज को पकड़कर अपने पास खींचने लगी थी बेड शीट और पिल्लो को भी . 


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