Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला जान गया था कि कामया का अंत निकट है सो वो अपने आपको और भी तेजी से चलाने लगा था कामया एक झटके से अपने होंठों को आजाद करते हुए एक लंबी सी आह भरकर अपने हाथों से पिल्लो को खींचकर अपने सामने की ओर जोड़ लिया था और अकड़ कर फिर से भोला की स्पीड से स्पीड मिलाने लगी थी भोला जो कि अभी तक झडा नहीं था अपनी स्पीड को बरकरार रखे हुए था पर कामया के थोड़ा सा ढीला पड़ जाने सी उसे दिक्कत होने लगी थी अब कामया उसका साथ नहीं दे पा रही थी शायद थक गई थी पर भोला नहीं थका था वो थकेगा भी नहीं वो अपने मन के प्रीत के साथ आज आनंद ले रहा था और बहुत दिनों की अपनी तमन्ना को कंप्लीट करना था उसे वो आज किसी भी हालत में कामया को अपने से दूर नहीं होने देना चाहता था सो उसने कामया को धक्का देकर बेड पर उल्टा लिटा दिया और उसको फिर से पीछे की ओर से धक्कों के साथ साथ निचोड़ने लगा था अब उसके अंदर का रहम पता नहीं कहाँ खो गया था वो एक दारिन्दा बन गया था 


उसे अब कामया के चिकने और मुलायम हुश्न की ताजगी और कोमलता को वो भूल गया था और अपनी हवस को मिटाने के लिए वो अब उसपर हावी होने लगा था उसके पलटने से कामया की कमर के नीचे वो तकिया भी आ गया था जो कि उसके हाथों से खिचा हुआ था अब उसकी कमर थोड़ी सी ऊँची हो गई थी और भोला के लिए थोड़ा सा आसानी हो गया था कामया अपना चेहरा नीचे किए भोला के हर धक्के को झेल रही थी पर जान तो जैसे चूस गई थी वो सब उसकी योनि से निकल गया था एक उत्तेजना जो उसके अंदर थी वो खतम हो गई थी वो अब अपने आपको संतुष्ट कर लेना चाहती थी 


भोला के अंदर एक उमंग जो उसके अंदर जनम जनम से हिचकोले ले रही थी वो अब और इंतजार नहीं कर पा रही थी वो जानता था कि जिस जानवर को वो अब तक अपने बस में करे हुए था वो अब उसके हाथों से छूटने वाला था वो निरंतर अग्रेसिव होता जा रहा था और हर चोट के साथ-साथ वो कामया के ऊपर अपने भार को और बढ़ा रहा था उसके नीचे पड़ी कामया की जान तो पहले ही जा चुकी थी पर इस तरह से अचानक ही अपने ऊपर बढ़ते हुए दबाब से वो थोड़ा सा बिचलित जरूर हुई थी पर एक चीज जो उसके अंदर थी वो सबकुछ भुला देती थी वो अब भी हर झटके के साथ-साथ उसके मुँह तक आ जाता था अंदर कही ऐसी जगह पर चोट करता था कि वो फिर से मदहोशी के आलम में खोने लग जाती थी जान तो बची नहीं थी कि अपने आपको उठाए और उस जानवर का साथ दे पर पड़े पड़े ही अपने ऊपर के भार को नजर अंदाज करते हुए अपनी योनि के अंदर की हलचल पर ज्यादा ध्यान देने लगी थी वो और भोला की हरकतें लगा तार बढ़ती हुई अब एकदम वहशी पन तक पहुँच गई थी 


उसने कामया को बेड पर इतने जोर से दबा रखा था कि कामया की सिर्फ़ टाँगें ही हिल पा रही थी और कुछ नहीं मुख से सिर्फ़ उउंम्म की आवाज निकालती हुई हर धक्के के साथ-साथ थोड़ा सा सांस लेती थी और फिर दबाब के आगे झुक जाती थी, 

भोला की पकड़ भी इतनी मजबूत थी कि, उसकी चुचियों पर उसके उंगलियों के निशान अब साफ तरीके से दिखने लगे थे और वो उन्हें किसी आटा मथने जैसे लगातार मथे जा रहा था कोई नर्मी अब उसके अंदर नहीं बची थी और नहीं कोई रहम था कामया के लिए था थी तो सिर्फ़ एक हवस जो कि उसे पूरी करनी थी सो वो लगातार अपने आपको उसके शरीर के ऊपर रौंदने लगा था और उसकी चुचियों को बेड और कामया के बीच में दबाते हुए अपनी कमर को चला रहा था कामया काफी कोशिस करते हुए अपने चहरे को थोड़ा सा ऊपर करते हुए 

कामया- प्लीज छोड़ो प्लीज रूको 

भोला- हाँ… हाँ… रुका मेमसाब हब रुका 

कामया- नहीं प्लीज ईई बहुत दर्द हो रहा है प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज 

भोला- अऔर जोर से करो हाँ… और जोर से ईयीई 

और उसकी स्पीड और बढ़ गई थी और उसके हाथों का जोर भी उसके चुचों को निचोड़ कर शायद खून भी निकाल देता अगर कामया के मुख से एक जोरदार चीख नहीं निकल जाती पर भोला को कोई फरक नहीं पड़ा वो निरंतर कामया को बेड पर और भी दबाता हुआ अपने आपको उसके अंदर और बाहर तक बहुत ही तेजी से ले जा रहा था कामया बेड पर लगभग चिपकी हुई सी थी हाथ पाँव एकदम से बँधे हुए से लग रहे थे और हिलने तक की जगह नहीं मिल रही थी बड़ी मुश्किल से अपने चहरे को थोड़ा सा ऊपर करते हुए सांसें भर रही थी एक तो इतना दबाब और उसपर उस जानवर के इतने तेज धक्के कामया की हालत खराब थी पर एक बात जो उस पूरी प्रक्रिया में थी वो थी कि उसके शरीर का निचोड़ फिर से उसकी योनि की ओर मुड़ गया था हर धक्के में उसकी जान तो जा रही थी पर एक मजबूत पकड़ के साथ उसकी योनि के अंदर भी एक हलचल मचती हुई उसकी उत्तेजना को निरंतर बढ़ाने की कोशिश करती जा रही थी भोला की आवाज के साथ-साथ उसकी सांसें भी कामया के कानों तक साफ-साफ सुनाई दे रही थी 

भोला- आआह्ह मेमसाहब आज नहीं 

कामया- प्लीज छोड़ो मर जाउन्गी प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज रूको थोड़ा उूउउम्म्म्म आआह्ह 

भोला उसकी बातों को अनसुना करता हुआ और भी तेजी से अपने पिस्टन की तरह आगे पीछे करता रहा और उसके शरीर का हर दबाब को और भी बढ़ता रहा कामया पिसती रही रही और हर धक्के में एक नये शिखर की रचना करती रही 

भोला- आज नहीं मेमसाहब आज नहीं आज करलेने दीजिए अपने मन की नहीं तो मर जाउन्गा 

और झट से अपने होंठों को कामया के चहरे को मोड़ कर उसके होंठों में रख दिया और जोर से चूसने लगा था 

कामया- उउउम्म्म्म प्लीज ए ए ए ए इतनी जोर से नहीं आआह्ह ईईईईए प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज 

पर भोला पर कोई फरक नहीं था उसकी रिक्वेस्ट का अपने दोनों हाथो से चुचियों को निचोड़ते हुए अपनी मनमानी किए जा रहा था 

कामया की सांसें फूल रही थी और योनि के दरवाजे पर कोई उसके अंदर से दस्तक देने लगा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला- मेमसाहब बहुत तड़पाया है अपने आज चुड़ूँगा नहीं आज सिर्फ़ तो साथ देना पड़ेगा और कुछ नहीं आज तो कुछ भी कर सकता हूँ 

कामया- उउउम्म्म्म 

और कामया कर भी क्या सकती थी वो जानवर उसके ऊपर अपने भार से उसे दबाए हुए था और झटके पर झटके लगातार लगाए जा रहा था हर धक्का इतना जोर दार होता था कि कामया ना चाहते हुए भी अपने अंदर की आवाज को रोक नहीं पाती थी एक आह्ह और एक चीख उसके गले से निकलकर भोला के मुँह में गुम हो जाया करती थी कामया का सिर उसने ऊपर की ओर उठा रखा था और अपने हाथों से कसकर पकड़े हुए था एक हाथ से उसकी चूचियां एक के बाद एक को निचोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा था और अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए धक्कों की स्पीड के साथ-साथ अब तो अंदर का रुख भी और ज्यादा करने लगा था हर धक्का वायलेंट और बहुत ही अंदर तक होता था अब तो कामया के जीवन का यह पहला एहसास था जो कि इतना वायलेंट था भीमा और लाखा के साथ का वायलेंट एपिसोड जो था इसके सामने कुछ नहीं था पर वो और नहीं झेल पाई थी एक बिजली सी उसके सारे शरीर में फेल गई थी और चीखती हुई और लगभग रोती हुई सी वो झड़ने लगी थी पर भोला की ताकत के आगे वो कुछ नहीं कर पाई थी


भोला वैसे ही उसे सख्ती से पकड़े हुए उसके होंठों को चूसते हुए अब भी अपनी स्पीड को बरकरार रखे हुए था और शायद उसके सीने तक अपने लिंग को पहुँचाने की कोशिश में लगा था अंदर कही ऐसी जगह चोट पहुँच रही थी कि कामया के झड़ने की गति भी दो गुनी थी वो लगातार झड़ती जा रही थी जिसका कि कोई आँत ही नहीं था हर झटका और भी गहरा और तगड़ा होता था और फिर वो भी हो गया जो बाकी था एक गरम सा लावा उसके शरीर के अंदर कही दूर तक उतरता चला गया था और भोला की पकड़ और भी मजबूत हो गई थी उसके शरीर के हर कोने में उसकी चुचियों पर उसकी कमर पर उसके गले पर और एक बहशी जाग गया था भोला के अंदर और वो क्या करेगा उसका उसे पता नहीं था हाँ… पता था तो सिर्फ़ एक दर्द जो की हर कोने से उसके शरीर के अंदर तक पहुँच रहा था एक इतनी सख़्त पकड़ जो कि कामया को हिलने से भी नाकाम किए हुए थी और एक इतना भर जो की उसे हिलने तक नहीं दे रही थी थोड़ी देर तक तो कामया विवस सी उसके हर हरकत को झेलती रही पर जरा सा पकड़ ढीली होते ही वो लगभग चिल्ला उठी और अपने आपको भोला से छुड़ाने की कोशिश में थी कि जरा सा सांस तो ले सके पर भोला की गिरफ़्त अब भी वही सख्ती लिए हुए थी 



कामया- आआह्ह छोड़ो प्लीज मर जाऊँगी प्लीज इतनी जोर से नहीं प्लीज उउउंम्म ऊऊओफफफफफफ्फ़ प्लीज 
और उसकी आवाज एक बार फिर से गुम हो गई थी भोला के होंठों के अंदर उसके शरीर में उठ-ती हुई हर तरंग में एक आग थी जो की धीरे-धीरे समाप्ति की ओर जा रही थी पर अंदर एक और इच्छा जाग उठी थी कि भोला सच में एक राक्षस है हैवान है और एक वहशी दरिन्दा है इसलिए शायद इतनी औरतों के साथ उसके संबंध है भोला की हरकतें अब धीरे-धीरे शांत होती जा रही थी पर एक कसाव और जकड़ अब तक उसकी बाहों में थी और उसके शरीर का हर हिस्सा अब भी उसके शरीर के हर हिस्से को रगड़ रहा था और घिस रहा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया की हालत ऐसी नहीं थी कि वो कुछ विरोध कर सके और नहीं उसके शरीर में इतना दम ही बचा था कि वो खुद को उसके गिरफ़्त से आजाद कर सके उसकी सांसें भी अब मध्यम सी हो गई थी 

उसके शरीर का एक-एक कतरा दुख रहा था और भोला के भर से दबा हुआ था वो लाचार सी पड़ी हुई अपनी सांसें गिनती हुई 

अपने आपको एक नींद की गिरफ़्त में ले जा रही थी वो नहीं जानती थी कि कब वो सो गई थी हाँ… पर एक बार उसके शरीर के ऊपर से भार कम जरूर होते उसे पता चला था 

एक लंबी सी सांस लेते हुए वो थोड़ा सा अपने आपको हिलाकर देखा भी था और शायद बाथरूम में कोई था शायद भोला ही होगा वैसे ही नंगी अवस्था में लेटी रही कामया अपने आपको हिलाने की शक्ति उसमें नहीं थी और नहीं अपने आपको ढकने की बाथरूम को डोर भी खुलने की आवाज उसने सुनी थी पर अंदर नल के चलने की आवाज अब भी आ रही थी भोला बाथरूम
खोलकर क्या कर रहा है और नल चलने की आवाज तो बथटब पर से आ रही थी तो क्या वो नहा रहा था 

उसके जेहन में कही दूर यह सब घटना चल रही थी और सोच रही थी उसकी मनोस्थिति ऐसी नहीं थी या कहिए दम ही नहीं बचा था कि पलटकर एक बार देखे हाँ… पर एक पदचाप को उसके बेड के पास आके रुकते हुए उसने सुना था और एक बार फिर से उसके पीठ और कंधे से लेकर एक दो हाथों का स्पर्श फिर से उसके शरीर पर भी महसूस किया था फिर एक लंबा सा चुंबन उसकी पीठ पर था और फिर उसके गालों पर भी और एक मजबूत हाथों की गिरफ़्त में उसकी कलाई को खींचकर बेड के किनारे तक उसके शरीर को ले गया था वो उसकी शक्ति के सामने कामया एक निरीह प्राणी की तरह से लग रही थी जो की कुछ नहीं कर सकती थी सिथिल सी और कुछ भी जान ना होने के वक़्त जो होता है वो हालत में थी कामया किसी शेर की तरह भोला ने अपने शिकार को अपनी ओर खींचा और उसे पलटा कर सीधा किया कामया को कोई भी मेहनत नहीं करनी पड़ी और नहीं अपनी नग्नता को ढँकने की कोशिश ही करनी पड़ी वैसे ही पड़ी रही वो जानती थी भोला शायद फिर से उसके ऊपर होगा या फिर एक बार उसकी भूख के सामने उसे झुकना पड़ेगा, पर वो कर भी क्या सकती थी वो तो खुद ही उसकी हो गई थी और उसने ना भी तो नहीं किया था इसमें भोला की कोई गलती नहीं थी वो तो खुद ही उसके गले लगी थी उसने खुद ही तो उसे बढ़ावा दिया था अब तो वो करेगा ही और क्यों ना करे कामया उसकी तपस्या थी उसकी मन्नत थी उसकी चाहत थी उसकी भूख शांत करने की चीज थी वो वो कैसे छोड़ दे आज 

दोनों हाथों को अपने नीचे से जाते हुए और खुद को उठ-ते हुए पाया था उसने एक भयानक सी गंध उसके नथुने में घुसी थी अधसोई सी और बेहोशी की हालत में भी उसे उबकाई सी आ गई थी शराबकी गंध थी वो और बहुत ही पास थी उसकी नाक के उसके दोनों हाथों की भेट चढ़ चुकी कामया को नहीं पता था कि आगे क्या होगा पर हाँ… उसकी नाक में वो गंध फिर से आई थी और उसके होंठों पर भोला के होंठों ने फिर से कब्जा जमाया था और उसके होंठों को चूस्ते हुए वो एक दिशा की ओर बढ़ी थी कहाँ नहीं मालूम पर हाँ उसके होंठों का कचूमर बना दिया था 

इतनी देर में भोला अपनी जीब को भी निकाल कर चाट-ता हुआ वो आगे बढ़ रहा था उसके हाथों में जितना भी कामया शरीर का हिस्सा आया था उसे पकड़कर दबाता हुआ वो आगे बढ़ रहा था धीरे-धीरे उसके कानों में बाथटब पर चलने वाले नल की आवाज साफ-साफ सुनाई देने लगी थी यानी कि उसे बाथरूम में ले जा रह आता क्यों क्या करेगा वो मुझे वहां लेजाकर साफ करेगा या नहलाएगा छि छि क्या कर रहा है भोला इतनी शराब पीने के बाद भी इतनी फिकर की मेमसाहब को नहलाकर सुलाएगा 


चलो देखते है दम तो बचा नहीं था उसके शरीर में सोकर भी क्या सकती थी सिवाए देखने और सुनने के सिवा थोड़ी देर में ही उसकी कमर के पास उसे हल्के से पानी का एहसास हुआ था गरम-गरम पानी के एहसास ने एक नई शक्ति उसके शरीर में डाल दिया था थोड़ा सा फ्रेश लगा था उसे धीरे-धीरे भोला झुकते हुए उसे गरम पानी के टब में उतार कर अपने हाथों को बाहर खींच लिया था कामया बड़े ही आराम से बाथटब में लेटी हुई थी और भोला पास शायद बैठा हुआ था क्योंकी उसके हाथ अब उसके शरीर के ऊपर बड़े ही आराम से और टोह लेने की हालत में घूम रहे थे 



एक-एक हिस्सा वो अपने हाथों से सहलाते हुए महसूस कर रहा था उसके हर अंग को वो बड़े ही तरीके से सहला कर देख रहा था एक सोई की भावना को भड़का रहा था या अपने मन की कर रहा था वो नहीं जानती थी थी पर एक मधुर सा एहसास उसके शरीर के हर कोने में उसके हाथों के छूने से होता जा रहा था वो वैसे ही निढाल सी अपने आपको भोला के सुपुर्द करके बाथटब पर सोई हुई थी हिम्मत नहीं थी कि आखें खोलकर भी एक बार देखे पर हाँ… उसके हाथों का पूरा ध्यान था उसे, कहाँ और कैसे घूम रहे थे हर कोने कोने में पहुँचकर उसकी नर्मी और गोलाईयों का एहसास कर रहा था 

उसके चुचो पर उसका ध्यान ज्यादा था उठाकर और इधर उधर करते हुए उसे कभी धीरे से तो कभी थोड़ा सा जोर लगाकर दबा भी देता था एक तरंग सी उठ-ती थी कामया के शरीर में जोश नहीं था पर शरीर के साथ छेड़ छाड़ होते ही उसके अंदर एक नया सा जीवन जाग गया था वो एक बार फिर से उस जानवर का साथ देने को तैयार होती जा रही थी शरीर में जोर ना होने के बाद भी वो चाहने लगी थी कि वो यह करता रहे गरम पानी और सख़्त हाथों का स्पर्श उसके शरीर में एक नई सी जान डाल रही थी वो ना चाहते हुए भी और ना आखें खोले ही थोड़ा सा ऊपर की ओर उठ गई थी अपनी कमर के बल से अपने आपको थोड़ा सा टब से ऊँचा कर लिया था उसकी चूचियां जो कि अब तक टब के पानी में डूबी हुई थी अब थोड़ा सा बाहर 
को निकल आई थी भोला ने भी जल्दी से उसकी गर्दन के चारो ओर अपनी एक बाँह को लगाकर थोड़ा सा उठा लिया था उसे 

और फिर थोड़ा सा आगे बढ़ते हुए उसके और पास आ गया था उसके होंठों ने एक बार फिर से उसके होंठों को छुआ था बड़े ही प्यार से और उसके हाथ फिर से उसके शरीर के सामने के हिस्से पर कब्जा जमा चुके थे अब थोड़ा सा अलग सा अंदाज था प्यार तो था पर सहलाने का तरीका थोड़ा सा अलग था एक जिग्याशा थी एक ललक थी एल आतूरता थी उसके सहलाने के तरीके में जो कि कामया के शरीर में फिर से एक नई और बड़ी ही स्फूर्ति जैसे अंगारो को भड़का रही थी उसकी सांसें एक बार फिर से तेज होने लगी थी उसके होंठों भी खुलने लगे थे नाक और मुख से सांस लेने की क़बायत शुरू हो गया था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

अब तो जैसे लग रहा था कि भोला उसके शरीर को फिर से निचोड़ कर रख देगा पर नहीं भोला अब आराम से उसे सहलाते हुए कभी-कभी अपने होंठों से उसे चूमता था और चूमते हुए चाटते हुए कभी नीचे की ओर तो कभी ऊपर की ओर आता था उसकी गर्दन से लेकर चुचियों तक उसके हाथों के साथ-साथ अब उसके होंठों ने भी कमाल दिखाना शुरू कर दिया था वो जहां चाहता था अपने आपको ले जाता था पर हर बार एक से एक नई हरकतों के साथ थोड़ा सा प्यार और थोड़ा सा कड़कपन उसके छूने और सहलाने में आ गया था पर हाँ… कामया को कोई एतराज नहीं था धीरे-धीरे वो भी इस खेल का हिस्सा बनने लगी थी जान ना होते हुए भी वो कमाल का आकर्षण जो था इस खेल में वो अब उसके अंदर तक चला गया था वो अब थोड़ा सा मुँह को उठाकर अपनी सांसें फेकने लगी थी और शायद अपने हाथों को बढ़ाकर भी भोला को छूने की कोशिश करने लगी थी भोला जो कि उसके साथ ही बैठा था अब धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को फिर से उसकी योनि की ओर जा रहा था और धीरे से अपने रास्ते को देखता हुआ कामया पर झुका हुआ उसके साथ नया खेल खेलने की तैयारी करने लगा था कामया के होंठों से अब सिसकारी तेज-तेज निकलने लगी थी और वो अपनी जाँघो को खोलकर भोला की उंगलियों को रास्ता देने लगी थी उसकी टाँगें बाथटब के किनारे पर टिकी हुई थी और गर्दन भोला के सीने से टिकी हुई और वो खुद अपने चेहरे को उठाकर सांसें लेने की कोशिश करने लगी थी जब तब भोला झुक कर उसके होंठों का रस्स पान कर सकता था और वो कर भी रहा था उसके हाथों को कही भी आने जाने की कोई मनाही नहीं थी और नहीं वो कर भी रहा था हर कही उसके लिए खुला हुआ था वो भी इस सुंदरता को ठीक से और बहुत ही करीब से देखता हुआ, अपने मन में आ रही हर इच्छा को पूरा कर लेना चाहता था 

कामया की उत्तेजना को वो बाहर बैठा हुआ देख रहा था और अपने लिंग को तैयार कर रहा था वो भी इंतजार में था कि
कब वो अपने रास्ते में चलना शुरू करे कामया की हालत देखकर भोला जान चुका था कि मेमसाहब उसके लिए तैयार है और अब वो वैसी नहीं है जैसा वो उठाकर लाया था वो धीरे से कामया के चहरे पर झुका और और एक बहुत ही बड़ा सा और गीला सा किस करते हुए उसके होंठों को छोड़ कर उठने लगा था पर कामया के हाथों ने उसे पकड़ लिया था वो थोड़ा सा झुका और एक किस और एक किस और करते हुए वो अपने आपको बाथटब पर बिठा लिया और उसके बालों को सहलाते हुए अपने लिंग को उसके चहरे पर घिसने लगा था एक अजीब सी गंध ने कामया के नथुनो को भर दिया था एक मदहोश करदेने वाली खुशबू थी उसकी बिना आखें खोले ही कामया का मुँह खुल गया था और धीरे से वो चीज उसके होंठों को छू गई थी 


आआह्ह कितना गरम था वो कितना सख़्त था और कितना सेडिस्ट था कितना अच्छा लग रहा था वो उसके होंठों के अंदर अपनी जीब से एक बार उसने उस चीज का स्वाद भी लिया था और फिर से अपने अंदर तक धीरे-धीरे से उतारती चली गई थी वो बड़े ही आराम से बिना किसी चिंता और झीजक के उस चीज को चूसने लगी थी बड़ा ही प्यारा सा लग रहा था उसे वो चीज और एक मादक सी खुशबू भी जो कि एक मर्द के शरीर से ही उठ सकती थी उसके नथुनो को बार-बार छूती थी और एक मदहोशी में फिर से वो जाने लगी थी एक हाथ तो भोला को पकड़े हुए था और अब तो उसका दूसरा हाथ भी उठकर उसकी जाँघो के बीच में आ गया था और धीरे-धीरे उसके लिंग के चारो ओर घेरा बना लिया था अपने आपको भोला की जाँघो पर रेस्ट करते हुए वो बड़ी ही तन्मयता से उसके लिंग के साथ इंसाफ करने में लगी थी वो धीरे-धीरे और बहूत ही प्यार से अपनी जीब और होंठों से उसके लिंग को चूमती और चाटती हुई अपने अंदर की उठ रही उत्तेजना को दिखाने की पूरी कोशिश करती जा रही थी भोला थोड़ा सा मुड़कर अपनी उंगलियों से उसकी योनि को अब तक छेड़ रहा था और कभी-कभी अपनी उंगलियों को बहूत ही अंदर डाल देता था कामया जान चुकी थी कि रात अब बहूत हो चुकी है और उसे आज कोई भी रास्ता नहीं दिख रहा था की सो सकेगी पर हाँ… शायद वो भी सोना नहीं चाहती थी आज की रात उसके जीवन में जरूर कोई उथल पुथल मचा देगी वो यह अच्छे से जानती थी वो कभी भी इतना उत्तेजित नहीं थी जितना कि वो आज थी और अभी थी 


एक बार नहीं दो बार वो भोला उसके शरीर से खेल चुका था और कामया की हालत यह नहीं थी कि वो अपने तरीके से उसका साथ दे सके पर वो चाहती थी कि वो फिर से एक बार उसके साथ वो सब करे जो वो कर चुका था वो भी पूरा साथ देने को तैयार थी पर दम नहीं बचा था और नहीं अपने आपसे कुछ करने की हिम्मत थी उसमें पर भोला को किसी की जरूरत नहीं थी वो अपने हिसाब से अपना काम जमा ले रहा था बैठने में दिक्कत होने लगी तो जरा सा और झुका और अपने आपको भी बाथटब के अंदर की ओर ले चला एक-एक करके दोनों टांगों को धीरे से कामया को ना डिस्टर्ब करते हुए उसके सिर को यानी कि होंठों को अपने लिंग पर रखे हुए भोला की दोनों टाँगें अब बाथटब के अंदर पहुँच चुकी थी कामया अपने मन से अपने आपसे और अपने आपको ना रोक पाते हुए अपने होंठों को उसके लिंग से अलग ना कर सकी एक साथ बहुत सी हलचल मची थी पर फिर सबकुछ शांत सा हो गया था अब उसके सीने से लेकर पेट तक कान्टेदार भोला की जाँघो के बाल उसको टच हो रहे थे 



गरम-गरम पानी और फिर इस तरह का एहसास उसके लिए नया था पर आनंद था और एक चाहत भी थी उसके अंदर भोला का हाथ बार-बार उसके सिर पर घूम रहा था सहला रहा था और उसे और भी आगे बढ़ने को उत्साहित कर रहा था कामया का मुँह अब दुखने लगा था भोला का लिंग जो कि पहले पहले अपने मुख में लिया था उससे कही ज्यादा सख़्त और मोटा हो चुका था और अब तो झटके से ऊपर की ओर भी उठ-ता जा रहा था उसे अपने हाथों से उसे पकड़कर रखना पड़ रहा था नहीं तो वो छूट जाता था और कभी उसकी नाक और कभी उसकी आखों में टकराता था


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला का एक हाथ उसके बाजू से होकर चुचियों पर भी आ गया था और धीरे-धीरे उसके निपल्स को छेड़ रहे थे भोला की हरकतें अब स्थिर थी और नहीं ज्यादा आग्रेसिवे थी और नहीं ज्यादा कड़कपन था कामया को अच्छा लग रहा था उसे अंदर की आग को भड़काने में उसे मजा आ रहा था और बस अब एक ही इच्छा थी कि भोला फिर से उसके अंदर उतर जाए और जल्दी ही नहीं तो वो खुद उसे खींच लेगी पर भोला की हालत भी अब ज्यादा ठीक नहीं थी जिस तम्माना से वो वहां था वो उसे पूरा कर लेना चाहता था वो धीरे से अपने आपको बाथटब के अंदर उतार दिया और कामया के नीचे की ओर से उसको पकड़कर अपने आपसे सटा कर धीरे धीरे पानी में बैठने लगा था उसका लिंग कामया के होंठों से छूट कर उसके पूरे शरीर को छूते हुए अपने मुकाम की और बढ़ा था गले से लेकर सीने के हर हिस्से को छूते हुए और नाभि से लेकर उसके जाँघो के बीच से अपने रास्ते की तलाश में वो पहुँच गया था भोला की सख़्त सी बाँहे अब कामया को जकड़कर अपने ऊपर की और बैठाकर उसे अपने से जोड़े रखा था और धीरे-धीरे उसके होंठों का रस पान करते हुए अपने लिंग को धीरे से इंतजार करते हुए योनि के अंदर बहुत ही धीरे-धीरे से उतारता चला गया 

एक हल्की सी आह निकली थी कामया के मुख से और उसके होंठों ने फिर से भोला के होंठों पर कब्जा जमा लिया था हर धक्का अब उसके अंदर तक उतर रहा था और धक्के के साथ ही एक हल्की सी आहह भी भोला के मुख में कही गुम हो जाती थी पर कामया को कोई दिक्कत नहीं थी वो और भी आ करके उसके ऊपर बैठ गई थी ताकि उसकी चोट ठीक से और सटीक लगे भोला भी अपनी बाहों में कामया को कसे हुए धीरे-धीरेधक्के लगाता जा रहा था और अपने लिंग को अंदर और अंदर तक उतारता जा रहा था उसे बहुत मजा आने लगा था जिस शरीर की उसने इतने साल तम्माना की थी आज उसका भाग्य जाग उठा था उसी शरीर को वो जैसे चाहे वैसे भोग सकता था और जितना चाहे वो उसके साथ खेल सकता था वो उत्तेजित तो था पर वो इंतजार करना चाहता था बहुत देर तक वो कामया मेमसाहब के अंदर रहना चाहता था और वैसे ही उसके नरम और कोमल शरीर को अपने शरीर के साथ जोड़े रखना चाहता था वो अपने माथे को मेमसाहब के कंधे पर ले गया था और कामया ने भी अब भोला के सिर को कस्स कर पकड़ रखा था पता नहीं कहाँ से इतना जोर आ गया था कि वो अपनी बाहों से उसके सिर को जाने ही नहीं देना चाहती थी उसकी पकड़ में इतनी मजबूती थी कि भोला को ही अपना चेहरा हाथ कर या फिर इधर उधर करते हुए सांस लेने के लिए जगह बनानी पड़ रही थी पर वो खुश था और अपने माथे को उसके कंधे पर रखे हुए धीरे-धीरे अपनी कमर को चला रहा था उसका हर धक्का कामया के अंतर मन को झंझोर देती थी थकि हुई कामया के अंदर का हर हिस्सा झलक जाता था हर अंग में एक नई उर्जा उत्पन्न हो जाती थी वो भोला को और भी कस्स कर पा लेती थी और अपने कमर को अऔर भी आगे करते हुए उसकी चोट को अंदर तक उतार लेने की कोशिश करती थी भोला को भी कामया का इस तरह से साथ देना बहुत अच्छा और परम सुख दाईं लग रहा था वो जानता था कि कामया मेम्साब एक अंदर जो आग है वो उसके हाथों से ही भुझेगी पर कब यह वो नहीं जानता था पर हाँ… एक बात तो साफ थी कि कामया हर दम तैयार मिलेगी उसे

वो अपने दोनों हाथों से कामया की पीठ का हर कोना टटोल चुका था और अब अपने हाथों को उसके कंधों के ऊपर और एक हाथ को उसके नितंबो के ऊपर रखकर अपने आपसे जोड़े रखा था और अपनी धक्कों की रफ़्तार को धीरे-धीरे बढ़ाने लगा था अब तो कामया की कमर को भी वो अपनी जाँघो पर टिकने नहीं दे रहा था और नहीं कामया ही उसकी जाँघो पर टिक रही थी उसकी भी हालत लगता था कि भोला के जैसी हो गई थी वो भी थोड़ा सा उठकर भोला के हर धक्के को उपने अंदर समा लेने को तैयार थी और भोला के कंधे पर लटकी हुई थी वो उसके माथे को कसकर पकड़े हुए अपनी कमर को थोड़ा सा उचका करके भोला को जगह बना के देना चाहती थी, कि करो और करो 
कामया- आअह्ह प्लीज बस रुखना नहीं बस रुखना नहीं और जोर से और जोर से 
भोला- मेमसाहब ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्बबब आआआआआआआआह्ह 
कामया-- रुकना नहीं प्लीज थोड़ी देर और प्लीज 
भोला- मेमसाहब कितनी खूबसूरत हो आप्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प्प कितनी प्यारी हो आप 
लगता था कि जैसे भोला अपने मन की बातें अभी ही कामया को बता देना चाहता था पर कामया के कानो में कोई बातें नहीं जा रही थी उसका तो पूरा ध्यान भोला के लिंग की तरफ था जो कि अब तो दोगुनी रफ़्तार से उसके अंदर-बाहर हो रहा आता 

कामया- बस स्बस सस्स्शह अह्हहहहहहहह उूुुुुुुुुुुुुुुुुउउम्म्म्ममममममममममम 

और कामया एक झटके से उसके गले में लटक गई थी और हर धक्के को फिर से उपने अंदर तक उतारने के लिए जो कि उसने आपने आपको उठा रखा था धीरे-धीरे बैठने लगी थी पर पकड़ अब भी उतनी ही सख़्त थी और सांसों का चलना तो जैसे कई गुना बढ़ गया था वो स्थिर रहने की कोशिश कर रही थी पर भोला के धक्के पर हर बार उचक जाती थी अपनी पकड़ को बनाए रखने के लिए वो और भी जोर से भोला के गले के चारो और अपनी पकड़ बनाए हुए थी और उसको उसके मुकाम पर पहुँचाने की कोशिश करती जा रही थी 


वो नहीं चाहती थी कि भोला को बीच में ही छोड़ दे पर हिम्मत और ताकत की कमी थी उसमें थकि हुई थी और हर एक धक्का जो कि भोला की कमर से लग रही थी हिल सी जाती थी वो हर धक्के पर उसका बंधन चूत जाता था और बहुत रोकने पर भी उचक कर उसके माथे से ऊपर चली जाती थी भोला को भी उसकी परिस्थिति समझ में आ रही थी पर वो अपने अंदर जाग उठे हैवान से लड़ रहा था और बहुत ही धीरज से काम ले रहा था पर कामया के झरने से और उसके निढाल हो जाने से उसके अंतर मन को शांति नहीं मिल रही थी वो जो चाहता था वो नहीं हो पा रहा था वो एक बार अपने होंठों को कामया के गालों से लेकर उसके होंठों तक घुमाकर कामया को फिर से उत्साहित करने की कोशिश करता रहा पर.........

कामया तो जैसे धीरे-धीरे निढाल सी होती जा रही थी और अपना शरीर का पूरा भार भोला के ऊपर छोड़ कर अपनी ही दुनियां में कही खो जाना चाहती थी पर भोला अपने मन की किए बगैर कहाँ मानने वाला था अपने दोनों टांगों को जोड़ कर वो एक बार उकड़ू बैठ गया और कामया को अपनी गोद में चढ़ा कर वो उसे टब में लिटाने लगा था ताकि वो अपनी जिद पूरी कर सके पर जैसे ही वो कामया लिटाया था कामया का मुँह पानी में डूबने से एक झटके से उठकर भोला के गले से लिपट गई थी 

भोला को समझ में आ गया था कि अब आगे क्या करना है वो धीरे से टब का स्टॉपर निकाल कर शावर का नॉब चालू कर दिया और कामया को फिर से लिटा दिया था अब वो आजाद था कामया के शरीर को एक बार अपने लिंग को घुसाए हुए योनि की ओर देखता हुआ पानी की एक-एक बूँद उसके शरीर को छूकर टब पर वापस कही खो जाते हुए देखता रहा और वो एक बार फिर से उसके ऊपर झुक गया था और कामया की एक टाँग को टब से बाहर निकाल कर लटका दिया था और दूसरी को वाल और टब के ऊपर टिकाकर अपने लिए रास्ता बना लिया था अब वो आजाद था 



अपने मन की करने को कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी कामया ने ना ही कोई ना नुकर हाँ… एक शांति जरूर मिली थी कामया को लेटने से ऊपर से गरम पानी की बौछार अब धीरे-धीरे रुक गई थी वो अब डाइरेक्ट उसके ऊपर नहीं गिर रही थी अब वो भोला को छूते हुए उसके ऊपर गिर रही थी और वो उसके शरीर से छूकर आते हुए पानी को पी भी रही थी थकी हुई थी और प्यासी भी पर इस पानी का स्वाद कुछ अलग था शायद भोला के शरीर की गंध उसमें मिली हुई थी और एक अजीब सा नशा भी था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला अपने आपको व्यवस्थित करते हुए अपने काम को अंजाम तक पहुँचने में लग गया था और धीरे-धीरे अपने आपको संयम करता हुआ अपने आपको कामया की योनि के अंदर-बाहर पहले धीरे से फिर अपनी स्पीड को निरंतर बढ़ाते हुए अपनी पूरी जान उसमें झौंक दिया था 

कामया का शरीर साथ नहीं दे रहा था पर उसका अंतर मन पूरी तरह से भोला का एक बार फिर से साथ देने लगा था उसके झड़ने के बाद से ही वो जो अपना साथ छोड़ चुकी थी वो अब फिर से धीरे-धीरे भोला के हर धक्के के साथ एक बार फिर से जागने लगा था पर हाथ पाँव उसका साथ नहीं दे रहे थे पर शायद मन नहीं भरा था या कहिए कि मन कही भरता है वो तो शरीर साथ नहीं देता पर मन कभी नहीं भरता यही स्थिति थी कामया की हर धक्का उसके अंदर एक उफ्फान को जनम देने लगा था और वो लेटे लेटे अपनी योनि की हलचल को संभालती हुई एक सफर की ओर ना चाहते हुए भी चलने लगी थी भोला का 
आमानुष उसके निढालपन ने बढ़ा दिया था शायद हर आदमी में यह बात होती है शायद जीत की खुशी या फिर अपने पुरुसार्थ को दिखाने की खुशी में वो निरंतर आग्रेसिवे होता जा रहा था हर धक्का बहुत ही तेज और कामया को हिला देने वाला होता था 

एक हुंकार के साथ-साथ एक मजबूत सी पकड़ वो निरंतर बढ़ाए हुए था लगता था कि उसके हाथों से कही कामया छूट नहीं जाए पर कामया कहाँ तक छूटेगी वो तो एक बार फिर से उसके बंधन में एक नये और परम सुख के सागर में गोते लगाने को तैयार हो रही थी भोला की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो चाह कर भी अपने मुख से कोई आवाज नहीं निकल पा रही थी पर उसके कानों में एक दरिंदे की सांसों की और कुछ कहने की आवाज उसे लगातार सुनाई दे रही थी 

भोला- बस हो गया मेमसाब, बस, थोड़ी देर और र्र उूुउउफफफफफ्फ़ 

कामया- (सिर्फ़) उूुउउम्म्म्ममम और सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह 



अलावा कुछ नहीं कह पा रही थी पर हाँ… उसे कहने की जरूरत भी नहीं थी जिसे कहा था वो कह रहा था ऊपर से गिरते हुए गरम पानी का स्वाद वो ले रही थी और नीचे से एक अलग स्वाद अपने दोनों जोड़ी होंठों से एक-एक करके अलग अलग स्वाद को चख रही थी कामया और एक बार फिर से अपने आपको संभालने की कोशिश करती जा रही थी अब तो धीरे-धीरे उसकी दोनों बाँहे भी भोला के कंधे से होकर उसकी गर्दन के चारो ओर घूमकर उसे अपने आपसे जोड़े रखना चाहती थी और भोला का जानवर अब कोई रहम और आराम के मूड में नहीं था वो लगातार स्पीड से अपने आपको उस मुकाम में पहुँचा देना चाहता था वो लगातार कामया को अपनी बाहों में जकड़े हुए वो अपने आपको पहुँचाने की कोशिश में लगा था उसके मन की हर इच्छाओ को पूरी कर लेना चाहता था वो कभी कभी कामया को पकड़कर निचोड़ता तो कभी उसे छोड़ कर उसकी चुचियों पर 
अपने होंठों को रखकर उसका रसपान करता और कभी अपनी स्पीड को मेनटेन करने के लिए फिर से एक गति बनाता हुआ उसे कस कर पकड़ लेता और अपनी कमर को हिलाता हुआ उसके अंदर तक उतर जाता था इसी तरह से करते हुए भोला की जकड कर कामया अपने आपको नहीं रोक सकी और वो धीरे होने लगी थी और भोला भी पर भोला ने एक ही झटके में उसे उठा कर फिर से अपनी गोद में बिठा लिया था और हर धक्का उसके अंदर तक उसके पेट के कही अंदर तक पहुँचने की कोशिश में लगा हुआ था वो जानता था कि अब वो ज्यादा देर का मेहमान नहीं है पर वो हर कुछ कर लेना चाहता था पता नहीं क्या पर हर कुछ करना चाहता था और वो कर भी रहा था अपनी गोद में बिठाए हुए वो कभी कामया को कस कर पकड़ता हुआ अपने आपसे जोड़े रखता था और कभी एक हाथ से उसकी चुचियों को निचोड़ देता था तो कभी उसके नितंबो पर हाथों से एक बार मारता हुआ उसे और पास खींचने की कोशिश करता था 


वो क्या करे नहीं जानता था पर एक बात जानता था कि वो अब झड़ने वाला था वो अब ज्यादा देर नहीं रुक सकता था एक ही झटके में वो टब में ही खड़ा हुआ कामया को लेकर वो बाथटब के बाहर की ओर खड़ा होकर कामया को गोद में लेकर उसकी योनि पर वार करने लगा था पर ज्यादा देर नहीं कर पाया और तीन चार झटके में ही वो झड़ने लगा था वो टब के किनारे बैठ गया था और फिर से अपनी स्पीड को कायम रखने की कोशिश करता रहा कामया फिर से लटक गई थी उसके कंधो पर शायद वो भी झड़ चुकी थी और उसमें जान नही बची थी जोश और होश दोनों ही खो चुकी थी वो पर हर धक्के में हिलती जरूर थी और एक आहह सी निकलती थी उसके मुख से दर्द की या शांति की यह नहीं पता पर भोला तो अपने काम को अंजाम दे रहा था उसके कोई फरक नहीं पड़ता था कि कामया कैसे कर रही थी उसे तो अपनी चिंता थी वो अपने आपको झड़ते हुए अपने मन की पूरी तम्माना को पूरी कर लेना चाहता था 


वो आज बहुत थक चुका था और जान उसमें भी नहीं बची हुई थी सो वो भी अपने मुकाम में पहुँचने के बाद थोड़ी देर आराम करना चाहता था कामया का शरीर अब उसका साथ नहीं दे रहा था और ना ही उसकी पकड़ ही उसके गले के चारो ओर कसा हुआ था वो अब ढीला पड़ गया था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भोला भी थक कर चूर हो गया था वो झरने के बाद अपने होंठों से कामया के होंठों को ढूँढते हुए उनको गिरफ़्त में लेकर एक बार फिर से चुबलने लगा था उसके लिंग की आखिरी बूँद भी नीचूड़ गया था कामया के अंदर तक बाथ टब पर अब भी शावर चल रहा था भोला एक-एक करके अपने पैरों को फिर से अंदर की ओर ले गया और धीरे से कामया अपनी गोद से ना उतारते हुए वो खुद ही टब पर बैठ गया था गरम-गरम पानी अब उसके अंदर जा धीरे धीरे सेंक रहा था कामया उसके ऊपर लेटी हुई थी एकदम निढाल सी और सोई हुई सी कोई जान नहीं बची थी उसमें एकदम लस्तपस्त सी भोला के हाथ धीरे-धीरे उसके शरीर के हर कोने में घूमते हुए उसके शरीर का एक बार जायजा ले रहे थे जैसे कि जानने की कोशिश कर रहे थे हाँ… यही वो शरीर है जिसे उसने भोगा था कामया और भोला बहुत देर तक उसे बाथ टब मे बैठे रहे कोई नहीं हिला और नहीं कुछ कहा ही पर भोला थोड़ी देर बाद अपने लिंग को कामया के नीचे से निकाल कर जितना हो सके कामया के शरीर को पानी से धोया और उठकर नंगा ही बाथरोब ले आया और कामया को टब से निकाल कर बाहर खड़ा किया कामया के शारी मे जान ही नहीं थी की खड़ी होसके 

भोला- मेमसाहब 

कामया- हाँ… सस्स्स्स्स्स्स्स्स्शह 
और भोला के कंधे पर सिर रखते हुए एक असीम नींद के सागर में खो गई थी वही खड़े-खड़े पर हाँ इतना याद था उसे कि भोला उसे उठा कर वाशबेसिन के साथ वाले प्लॅटफार्म में बैठा कर बड़े ही जतन से उसे बाथरोब पहनाया था और फिर अपनी गोद में लेकर जैसे बाथरूम में ले गया था एक बार फिर से उसके रूम में ले आया था रूम में ठंडा था एसी चलने के कारण एकदम वातावरम में चेंज आने से कामया जाग सी गई थी पर अपने आपको एक मजबूत गिरफ़्त में पाकर फिर अपने आपको ढीला छोड़ दिया था उसने आपने आपको बेड पर लिटाते हुए भी महसूस किया था और फिर एक कंबल से ढँकते हुए भी और फिर एक लंबा सा किस उसके गालों में और फिर होंठों पर बहुत देर तक पर वो कुछ नहीं कर पाई थी नहीं कुछ कर पाने की इच्छा ही थी उसके अंदर वो तो बस महसूस ही कर सकती थी अब फिर भोला धीरे धीरे कमरे से बाहर चला गया था 



कामया एक सुख के सागर में गोते लगाकर अपने आपको भूल चुकी थी वो नहीं जानती थी कि वो कहाँ है और क्या हो रहा था हाँ… एक बात साफ थी वो इतना कभी नहीं थकि थी कि अपनी आखें तक खोल नहीं पा रही थी सेक्स में इतना सुख था वो जानती थी पर इतना कि उसको होश नहीं था कि वो कहाँ है और ना वो सोच ही पा रही थी नींद के आगोश में उसे पता ही नहीं चला कि कब सो गई और कब सुबह हो गई थी पर फोन की घंटी से वो जागी थी आखें खुल नहीं रही थी तकिये के नीचे था शायद फोन जो लगातार बज रहा था अपनी आखें ना खोलते हुए उसने फोन को उठाया था ना देखते हुए ही 

कामया- हेल लो 

कामेश- सो रही हो 

कामया- हाँ… 

कामया के अंदर से कही दूर से आवाज निकली थी शरीर में जान ही नहीं थी एक अजीब तरह की थकान थी आखें भारी थी और तन बेसूध था जैसे उलट कर पड़ी थी वैसे ही बातें करने की कोशिश करती जा रही थी कामेश की बातें भी ठीक से सुनाई नहीं दे रही थी उसे फिर भी 

कामेश- क्या बात है 

कामया- नहीं कुछ नहीं बस 

और एक बार थोड़ा सा अपने शरीर को खींचकर सीधा किया था कामया ने फिर अपने हाथ पैर फैलाकर आराम से लेट गई थी मुँह नीचे की ओर करते हुए सीने के बल एक टाँग को फैलाकर और दूसरे को नीचे से सीधा करते हुए एक हाथ में फोन लिए हुए वो कामेश से बातें कर रही थी 

कामेश- नींद ठीक से नहीं हुई क्या रात को 

कामया- हाँ… 

कमीश- क्यों 


कामया क्या जवाब देती चुप थी पर अचानक ही उसे अपने कमरे में किसी के होने का आभास हुआ था कौन था देखने की हिम्मत नहीं थी पर ये जरूर था कि एक बार अपने कपड़ों का ध्यान जरूर आया था पर फोन पर कामेश था और उसमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि अपने हाथ पैरों को हिलाकर वो अपने आपको ढँक सके 


उसे पता था कि उसकी जांघे बिल्कुल नंगी है और शायद कंधे पर से भी खुला हुआ था पर एक सख़्त सी हथेली ने उसकी टांगों से लेकर जाँघो तक का सफर कब शुरू कर दिया था वो नहीं जान पाई थी पर आखें खुली ना थी उसकी और नहीं मुँह से कोई आवाज ही निकली थी उसकी बिना हीलेडूले वो वैसे ही पड़ी रही और उस हथेली को अपनी जाँघो तक के सफर के एहसास को अपने अंदर समेट-ती रही 

उन हथेलियों में कोई जल्दी नहीं थी और नहीं कोई उतावला पन ही था बड़े ही आराम से वो हाथ अपने आप ही उसकी चिकनी और नरम और मुलायम सी त्वचा को स्पर्श करती हुई उसकी कमर तक आ पहुँची थी और फिर उसके नितंबों से भी गाउनको हटा कर उसके नितंबों पर हाथ घुमाने लगी थी कानों में कामेश की आवाज गूँज उठी थी 

कामेश- फिर सो गई क्या 

कामया--ना ही हुहह उउउम्म्म्मम 

कामेश- सुनो यार में आ नहीं पा रहा हूँ आज का दिन और देख लो 

कामया- उउउंम्म सस्स्शह क्यउउुउउ कहा आआ हह आ
उसके नितंबों को वो हथेली अच्छे से स्पर्श करते हुए एक-एक रोम को टटोल रही थी और उसकी जाँघो को अब तो वो किस भी करने लगा था ना चाहते हुए भी कामया के होंठों से एक लंबी से सिसकारी के साथ एक आहह भी निकली थी 

कामेश- अरे यार बहुत नींद में लग रही हो 

कामया- सस्शह नहियीई बोलो ऊऊुउउम्म्म्ममम 

कामेश- सुनो तुम आज का दिन और देख लो फिर कल निकल जाना 

कामया- हाँ… उउउम्म्म्म 

कामेश- और सुनो वो ऋषि को थोड़ा काम से भेजना है कहाँ है वो 

कामया- हाँ… 

कामया के शरीर के नीचे का हिस्सा अब बिल्कुल नंगा था और वो दोनों हाथ उसके हर हिस्से को छूते हुए उसके अंदर एक आग को फिर से जनम दे रहे थे बहुत ही अच्छा और सुख दाई था वो एहसास कामया के लिए नींद में थी और उसके साथ कोई खेल रहा था भोला ही होगा सुबह सुबह आ गया कल रात को पता नहीं कितनी बार किया था थका तक नहीं सुबह सुबह फिर से 

कामया- हाँ… कहा क्यों उउउंम्म सस्शह 

कामेश- क्या हुआ कुछ बोलो तो बस हाँ हाँ कर रही हो 

कामया- आप बोलो ना उउउम्म्म्ममम 

कामेश---अच्छा ठीक है सो जाओ बाद में फोन करूँगा 

कामया-नहीं बोलो उठ रही हूँ 

और कामया को उठने की जरूरत नहीं थी वो खुद को पलटने की कोशिश ही करती कि उन बलिष्ठ हाथों ने उसे पलटा लिया था एकदम चित थी वो अब हाथों में फोन लिए हुए अपने आपको ढकने की कोशिश भी नहीं की थी उसने पता था कि कोशिश करने से कोई फ़ायदा नहीं था उसके बाथ रोब का सामने का हिस्सा भी खुला हुआ था और वो बिल्कुल चित सी अपनी दोनों जाँघो को थोड़ा सा जोड़ कर फेल कर लेटी हुई थी और भोला अपने काम में लगा हुआ था उसके अंगो को सहलाता हुआ और चाट-ता हुआ 

बड़े ही इतमीनान से वो लगा हुआ था पर कामया को एक अजीब सी उत्तेजना के असीम सागर में धकेलते हुए वो अपने काम को अंजाम दे रहा था उसे कोई डर नहीं था कि मेमसाहब भैया से बातें कर रही है वो तो हमेशा से ही अपने काम को ठीक से अंजाम देता रहा था चाहे वो कोई भी काम हो वो अपनी एक उंगली को धीरे-धीरे उसकी योनि के लिप्स पर घुमाने लगा था और अपने होंठों को उसके चूचियां पर टिकाए हुए उन्हें धीरे से चूस रहा था 

कामया होंठों से अपने तरीके से आवाज को दबाते हुए वो बिल्कुल नार्मल होकर कामेश से बातें करने लगी थी 

कामया- हाँ… बोलो क्य्ाआअ हाईईईई 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

एक हल्की सी सांस फैंकती हुई उसकी आवाज निकली थी पर भोला को ना रोक सकी थी वो कामेश के होते हुए भी वो उसे नहीं हटा पाई थी जान नहीं थी उसके शरीर में या हटाना नहीं चाहती थी जो भी हो पर भोला अब भी वही था जहां वो चाहता था और कामया के शरीर से खेल रहा आता वो भी कामेश और मेमसाहब की बातें सुन रहा था 

और अपने काम में लगा रहा कामया को भी इस बात की चिंता नहीं थी कि भोला क्या कर रहा था पर इस बात की चिंता ज्यादा थी कि कामेश क्या सोच रहा है 

कामेश- यार थोड़ा सा उठकर मुँह धो लो नहीं तो सोते हुए ही बातें करोगी 
कामया- नहियिइ बोलो ऊओ उउउम्म्म्मममम म्म्म्ममम 
कामेश- वो ऋषि को वो फक्टरी भेज दो और कल का टिकेट बुक करने को भोला को भेज देना 

कामया- हाँ… कामया के होंठों से इसके आगे कुछ नहीं निकला था और धीरे से अपनी जाँघो को खोलकर भोला की उंगली की ओर अपनी कमर को उठाने लगी थी अपनी चूचियां को और भी भोला के होंठों के अंदर तक पहुँचने की कोशिश भी थी साथ में एक नई जान उसके अंदर जाग गई थी पर बहुत दम नहीं था पर जितना था उसके अनुसार वो चल रही थी उंगली का कमाल उसके शरीर में एक नई जान डाल रहा था और उसके होंठों का स्पर्श तो जान पर बनती जा रही थी 

कामेश- अच्छा छोड़ो में फोन करलेता हूँ जाने क्या कहोगी तुम और टिकेट भी बोल देता हूँ रीना के पति को तुम आराम करो 
कामया- हाँ… पर 
कामेश- हाँ कहो 
कामया उूउउम्म्म्म वो आआआह्ह 
बहुत छुपाने की कोशिश करती हुई वो एक बार फिर हिम्मत जुटा करके बोल उठी 
कामया- कब आओगे आआआआआआअह्ह उूउउम्म्म्मममममम हाँ… 
कामेश- कहा ना घर जा रहा हूँ तुम कल आ जाना ठीक है अब सो जाओ 
कामया- और में उुउऊकम्म्म्मममम 
कामया के होंठों पर एक बार भोला के होंठों ने कब्जा किया था और आजाद कर दिया था 
कामया- पर में अकेली हाँ… प्लीज हाँ… आआअह्ह 
कामेश- आअरए यार तुम भी ना ऋषि तो है और वो भोला भी तो है प्लीज यार थोड़ा सा अड्जस्ट कर लो अगले हफ्ते बिल्कुल टाइम नहीं मिलेगा गुरुजी आने वाले है इसलिए सबकाम खतम करना है 

कामया- हाँ… हाँ… ठीक है सस्स उउउम्म्म्ममममम 

एक बार फिर से उसके होंठों पर भोला के होंठों का कब्जा हो गया था सिर्फ़ इतना कह पाई थी और अपनी जीब पर एक बार भोला की जीब कर एहसास पाते ही वो भूल गई थी कि फोन पर कामेश है 

अपनी जाँघो को खोलकर अपनी कमर को धीरे-धीरे सर्कल करने लगी थी शायद अब उसे वो चाहिए था जो भोला ही दे सकता था पर भोला तो उसके होंठों पर टूटा हुआ था और उसके उंगलियां भी अब उसकी योनि से निकल अकर उसकी चूचियां पर खेल रहे थे फोन पर कामेश अब भी था 
कामेश- समझ रही हो ना और यार अब तुमकोई मामूली लड़की नहीं हो तुम एक कार्पोरेट हो यार 
कामया- हाँ… पर 
अपने होंठों को अलग करते हुए एक लंबी सी सांस लेते हुए और एक हाथों की माला भोला के गले में डालकर अपने शरीर का हर हिस्सा उसके साथ जोड़ने की कोशिश करती रही थी वो कमर को थोड़ा सा उँचा करते हुए वो उसके हर हिस्से को छू लेना चाहती थी 


पर भोला उससे थोड़ा सा दूर हो गया था और उसके बगल में बैठ गया था या कहाँ पर उसके सीने में बालों के टच होने से उसे पता चला था और फिर फोन हाथों में लिए वो जैसे ही थोड़ा सा भोला की ओर पलटी थी की उसकी नाक और होंठों में उसके लंबे से और गंध लिए हुए लिंग का एहसास हुआ था 

कामया- बोलो पर कल कब ऋषि को कहा हाँ… और टिकेट 
पता नहीं क्या का कह गई थी वो पर अपने होंठों के पास उसे गंध लिए हुए लिंग को अपने होंठों के बीच में लेने से नहीं रोक पाई थी और खुले हुए हाथों से सहारा देकर वो उसे लिंग को अपने होंठों से ठीक से लेने की कोशिश में लगी थी और अपने आपको रोक नहीं पाकर उसने अपनी जीब को भी उसके साथ जोड़ दिया था 

कामेश---अरे यार क्या कह रही हो पता नहीं तुम आराम करो में बाद में फोन करूँगा 

कामया- नहीं रूको आअह्ह सस्स्रर्रप्प्प्ल्ल्ल्ल्ल्ल और हाँ… और 

कामेश- हाँ कहो अरे यार क्या कह रही हो समझ नहीं आरहा है 

कामया---जी ठीक है जैसा तुम कहो उूउउम्म्म्ममममम आआआआआआह्ह 
चूत-ते हुए उसके मुख से भोला के लिंग के छूटते ही वो बस इतना ही कह पाई थी पर एक बार फिर से उसे लिंग को अपने होंठों के बीच में दबा लेने से जैसे उसे शांति मिल गई थी वो लिंग उसके होंठों में ही बहुत मोटा हो गया था थूक से लथ पथ वो अब बहुत ही आराम से उसके होंठों के बीच में फिसल रहा था और जीब को छूते हुए ही एक अजीब सा एहसास से भर देता था कामया को 
कामेश- कल मिलते है ना डियर बस कल तक का इंतजार कर लो और तुम तो मेमसाहब हो यार 
कामया- हाँ… हाँ… सस्स्रर्रप्प्प्ल सस्सश हाँ… उउउम्म्म्ममम 
और पूरे ध्यान से उसे लिंग को चूसती हुई अपने काम में लगी हुई कामया अपने पति का दिल भी बहला रही थी फोन में और वास्तविकता में भोला के साथ थी अजीब सा दृश्य था 


भोला बैठे बैठे कामया की उत्तेजना को तोल रहा था और धीरे से उसकी चूचियां सहलाता हुआ अपने हाथों को फिर से उसकी योनि तक ले गया था अंदर डालते ही उसे पता चल गया था कि मेमसाहब पूरी तरह से तैयार थी क्या गजब का शरीर है जब भी हाथ लगाओ तैयार रहती थी वो बस थोड़ी देर की बात है भोला का लिंग अब ज्यादा देर तक उसके मुख का आक्रमण नहीं झेल सकता था इसलिए वो धीरे से निकलकर उसकी टांगों के बीच में पहुँचने की कोशिश करने लगा था \


पर कामया की उंगलियों से अपने लिंग को छुड़ाने में थोड़ा सा टाइम लगा मुँह खाली होते ही कामया के मुख से एक लंबी सी सांस निकली जैसे की आंगड़ाई हो 
कामेश---हां अब उठी हो अब बोलो क्या है 

कामया- कुछ नहीं कल मिलेंगे घर पर ठीक है आआआआआह्ह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह 
भोला का लिंग उसकी योनि में अंदर तक धीरे से नहीं झटके से दोनों जाँघो के बीच में एक बार फिर से भोला था और अमानुष नहीं था एक आदरणीय था अब वो उसके शरीर का रखवाला था उसके शरीर का पुजारी था और उसके शरीर का ख्याल रखने वाला था आज वो 
कामेश- क्या हुआ 
कमाया- बस कुछ नहीं रखती हूँ बाद में फोन करती हूँ उउउम्म्म्म सस्शह आआअह्ह और हाँ… ठीक है 

भोला की टक्कर अब बढ़ गई थी ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी वो पर हाँ… रुकना नहीं चाहती थी भोला को फोन जरूर काट सकती थी और किया भी उसने बिना कुछ कहे ही फोन काट कर भोला को संभालेने में लग गई थी वो अपने दोनों हाथों का घेरा भोला की कंधों के चारो ओर घेरा लिया था उसने और कमर को उचका कर हर स्टॉक को अपने अंदर तक ले जाने के लिए बहुत ही मजा आ रहा था उसे बिना कुछ कहे और बिना आखें खोले हुए इस एनकाउंटर का मजा ही दूसरा था अपने पति का फोन को काट कर अपने शरीर की भूख को मिटाने के लिए वो आज जो कर रही थी उसे बड़ा ही मजा मिल रहा था 


सुबह सुबह की इस तरह का एन्काउन्टर वो पहले भी कर चुकी थी पर इतना मजा और इतना आनंद उसे नहीं आया था रात भर की थकान कहाँ गायब हो गई थी उसे पता नहीं था पर भोला की जकड़ ने उसे बहुत नजदीक तक पहुँचा दिया था भोला की स्पीड को देखते हुए उसे पता था कि वो भी शायद ज्यादा देर का मेहमान नहीं है उसकी पकड़ धीरे-धीरे बहूत सख़्त और टाइट होती जा रही थी पर अग्रेसिव नहीं हुआ था आज वो और नहीं कोई निचोड़ना ही था पर एक असीम आनद था उसके आज के संभोग में सिर्फ़ और सिर्फ़ सेक्षुयल एनकाउंटर था और कुछ नहीं था अपने आपको असीम आनन्द के सागर में डुबोने के लिए और कुछ नहीं 

सिर्फ़ एक दूसरे को संतुष्ट करने की चेष्टा थी आज दोनों के अंदर भोला भी यही कर रहा था और कामया भी अपने आपको कस कर भोला के शरीर के साथ जोड़े हुए लगा तार उसके धक्के को झेलती हुई और अपने होंठों को उसके कंधों से लेकर उसके होंठों तक लेजाकर वो झड़ती चली गई थी पर पकड़ को वैसे ही मजबूती से कसे हुए वो और भी कसकर उसके शरीर में चढ़ि और किसी बेल की भाँति लिपट गई थी और भोला भी कामया के इस तरह से साथ देने से लगभग अपने मुकाम पर पहुँच गया था पर अपने मन में आए हर एक विचार अपने आखिरी समय में पूरा करना लेना चाहता था एक बार जोर से उसके होंठों को चूसकर अपनी गर्दन की नीचे करता हुआ उसकी चुचियों पर झुक गया था और तेजी से अपने लिंग को चलाता हुआ अपने आपको असीम आनंद के सागर में गोते लगाने को मजबूर कर दिया था 


एक ही झटके में अपने लिंग का सारा वीर्य उसके अंदर तक उतार कर वो कस कर कामया को पकड़ कर उसके होंठों पर फिर से टूट पड़ा और अपनी कमर को आखिरी कुछ धक्कों के साथ ही कस कर कामया को पकड़कर बेड पर उसके ऊपर ही ढेर हो गया 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

फोन की घंटी फिर बज उठी थी कामेश था कामया का हाथ किसी तरह से भोला को छोड़ कर वापस फोन तक पहुँचा था कि भोला के हाथों से फोन उसके हाथों पर आया कामया को होश नहीं था पर हाँ… भोला के हाथों का टच जो उसे हुआ था वो बहुत ही सुंदर था और अभी तो बहुत ही अच्छा लगा था थकि हुई थी और ऊपर अभी भोला लेटा हुआ था और उसके हाथों में फोन लिए हुए कामया ने एक बार फिर से 
कामया- हाँ… 
कामेश- सुनो वो ऋषि दोपहर तक आ जाएगा तुम तैयार रहना 4 बजे की फ्लाइट है और भोला को ट्रेन से आने को कह देना ठीक है 
कामया- जी 
कामेश- उठ गई हो की सो रही हो 
कामया- उठ गई हूँ 
कामेश- चलो रखता हूँ कल मिलेंगे 
कामया- जी 
और फोन कट गया अपने हाथों में फोन लिए हुए कामया ने थोड़ा सा जोर लगाया था अपने शरीर में ताकि भोला उसके ऊपर से हटे पर भोला उसे और भी अपनी बाहों में कसे जा रहा था जैसे की आख़िरी बार उतरने से पहले कस रहा था 
उसके कसाव में एक अनोखी बात थी एक अजीब सी जान थी और एक अजीब सा प्यार था वो उसके शरीर को कसता हुआ एक एहसास उसके अंदर तक उतर रहा था कि वो उसे कितना प्यार करता है या फिर उसके शरीर को कितना चाहता है यार फिर उसे छोड़ना नहीं चाहता जो भी हो एक अजीब सा मजा था उसे कसते हुए बाहों में अपनी रात भर की थकान को मिटाने का रात भर और सुबह के सेक्षुयल एन्काउन्टर का 


और सुबह सुबह अपने शरीर को आराम देने का कामया चुपचाप भोला के कंधों को धीरे से अपनी बाहों में भरकर चुपचाप लेटी रही कुछ देर तक फिर खुद भोला ही धीरे से उसके ऊपर से हट-ते हुए गहरे गहरे कुछ किस करता हुआ उसके ऊपर से उतर गया और बेड पर पड़े हुए चद्दर से उसे ढँकता हुआ भहर चला गया था 

कामया वैसे ही कुछ देर लेटी रही आखें अभी भी बंद थी पर पूरा तन जाग गया था 

उसका रोम रोम पुलकित सा था और हर अंग उसे अपने होने का एहसास दिला रहा था हर अंग में मस्ती थी हर अंग उसके शरीर में अपने जगह पर तने हुए थे आज सुबह का खेल बहुत ही मजेदार था कामया सोचती हुई धीरे से अपनी आखें खोलकर एक बार पूरे कमरे की और देखा सबकुछ वैसा ही था कुछ नहीं बदला था 

लेकिन कुछ तो जरूर बदला था वो शायद कामया की नजर ही थी उसके देखने का तरीका ही था थोड़ी देर बाद वो उठी और बाथरूम में जाकर नहा दो कर बाहर निकली बाथरूम में उसने एक बार अपने आपको देखा था बहुत करीब से उसके शरीर में हर कही लाल और काले दाग थे भोला के एक एक किसका और दबाने की निशान साफ-साफ दिख रहे थे उसके शरीर में वो अजीब सी मुश्कान उसके होंठों पर दौड़ गई थी और हर निशान को एक बार ध्यान से देखती हुई वो बाथरूम 
से बाहर आ गई थी घड़ी में 11 बज चुके थे बाहर कुछ हलचल थी कमरे के पर क्या पता नहीं थोड़ी देर बाद एक नॉक हुआ था डोर में कुछ कहने से पहले ही भोला हाथों में चाय का ट्रे लिए अंदर आ गया था जैसे कुछ कहने की या पूछने की जरूरत ही नहीं थी उसे आते ही बेड के पास वाले टेबल पर ट्रे रखते हुए नीचे नजर किए 
भोला- मेमसाहब चाय पी लीजिए 
और उसकी नजर एक बार फिर से कामया से टकराई थी पर कहा कुछ नहीं उसकी नजर में अब तक भूख साफ-साफ देखी जा सकती थी कामया जिस तरह से मिरर के सामने बैठी थी उसका गाउन जाँघो से फिसल गया था एक नजर उसपर डालते हुए भोला बाहर चला गया था 


कामया ने चाय की ट्रे की ओर देखा और बाहर जाते हुए भोला को पीछे से एक मुस्कुराहट की एक हल्की सी लाइन उसके होंठों पर फिर से दौड़ गई थी 

जानवर कही का रात भर क्या कुछ तो नहीं किया फिर भी मन नहीं भरा था अब भी देख रहा था मुस्कुराती हुई उठी थी कामया और चाय पीने लगी थी अब क्या करना है उसे पता नहीं था धीरे-धीरे अपने काम से निपटने लगी थी नहा धो कर एकदम फ्रेश थी वो कोई डिस्टर्बेन्स नहीं था और ना ही कोई घटना जिसे लिख सके ऋषि भी जल्दी ही आ गया था और फिर दोपहर का खाना खाकर सभी तैयारी में थे जाने की पर भोला की नजर बार-बार कामया के ऊपर रुक जाती थी पर कामया ने एक बार भी उसकी ओर नजर नहीं किया था और नहीं उसकी ओर देखने की हिम्मत ही थी उसमें 


ऋषि के साथ वो एरपोर्ट की ओर भी रवाना हो गई और जल्दी ही घर भी घर पर मम्मीजी के साथ बहुत सी बातें और फिर रात कामेश के ना आने से कामया थोड़ा सा बिचालित थी पर एक सुखद सा एहसास उसके अंदर अब तक जीवित था कल का भोला का और उस रात की हर घटना का घर पर सभी कुछ नार्मल था एक अजीब सी तैयारी का महाल था गुरुजी के आने का बहुत दिनों बाद उनके घर पर आ रहे थे इसलिए बहुत काम था सभी को घर का हर कोना साफ और चमकदार बना हुआ था हर कोई उनके आने से पहले फ्री हो जाना चाहता था 


भीमा की खेर नहीं थी वो तो शायद सांस लेने तक की फ़ुर्सत नहीं थी उसे फिर भी कोई शिकायत नहीं थी उसे एक नजर उसने भी कामया पर डाली थी और एक आह भरकर ही रह गया था कामया अपने आप में थी पता नहीं कितनो का दिल तोड़ कर और कितनो का दिल जोड़ कर बैठी है शायद उसे भी पता नहीं था हाँ… पर रात को वो खूब सोई थी जैसे बहुत दिनों की नींद पूरी की हो पर रात भर सपने में भोला की याद उसे आती रही थी एक अजीब सी कसक उसके शरीर में पैदा हो गई थी वो ना चाह कर भी अपनी हाथों को अपने जाँघो तक ले जाने से रोक नहीं पाई थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

हर एक लम्हा उसे याद था कैसे शुरू हुआ था और कैसे आँत हुआ था कैसे उसने उसके शरीर को निचोड़ा था और कैसे उसने उसके चुचियों को चूसा था कैसे उसने उसे चूमा था और कैसे उसने उसे नहलाया था एक-एक वाक़या अपनी आखों के सामने होते हुए लग रहा था पूरी रात कामया के जेहन में यही बात चलती रही थी और एक अजीब सी कसक और भूख को बढ़ावा देती रही थी जब भी करवट लेती थी तो अपने शरीर को टच होता हुआ महसूस करती थी वो भोला से उसके शरीर का हर अंग परिचित था और वो एहसास अब भी उसके अंदर कही जमा था या कहिए की याद था 


उसका वहशीपन और उसका प्यार का हर एक लम्हा उसे याद था उसके हाथों का हर स्पर्श उसे याद था वो यह जान गई थी कि भोला एक औरत को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकता था और उसने किया भी था उसका हर एक रोम रोम को उसने छुआ था हर एक कोने को वो जानता था रात भर कामया इसी सोच में डूबी हुई करवटें बदल बदल कर सोई थी पर नींद बहुत अच्छी आई थी सुबह जब उठी थी तो उसके शरीर का हर एक अंग खिला हुआ सा था एकदम तरोताजा थी वो कही कोई दर्द नहीं और नहीं कोई खिचाव ही था एक अजीब सी खुशी और मादकता ने उसके पूरे शरीर को घेर रखा था एक अजीब सी मदहोशी थी उसके अंदर 


वो जल्दी उठकर तैयार होने लगी थी नीचे चाय पीने जाना था कामेश का कुछ पता नहीं था कब आएगा पर मम्मीजी और पापाजी थे घर में इसलिए जल्दी से तैयार होकर नीचे पहुँची थी पापाजी और मम्मीजी चाय के टेबल पर उसकी का इंतजार कर रहे थे 

मम्मीजी-, आओ बहू अच्छे से सोई की नहीं 

कामया- जी 

पापाजी- सुनो बहू आज तुम घर पर ही रहो और मम्मीजी का हाथ बँटाओ कामेश भी आता होगा 

कामया- जी 

मम्मीजी- अरे घर पर क्या करेगी 

पापाजी- नहीं कुछ ना करे पर थोड़ा आराम तो चाहिए ना बहू को कितना काम कर रही है जब से तुम गई हो 

मम्मीजी- हाँ… वो तो है 

पापाजी- अच्छा बहू परसों गुरु जी आरहे है कोई बड़ा काम है घर भी आरहे है इसलिए 

मम्मीजी---अरे हम सब है ना कहाँ बहू अकेली है तुम मत डरो बहू गुरु जी बहुत अच्छे है और तुम्हारा बहुत मान करते है 

पापाजी- हाँ यह बात तो है और तुम बिल्कुल चिंता मत करना और सभी लोग आएँगे घर पूरा भरा रहेगा 

कामया- जी इसी तरह के कुछ टिप्स और ट्रिक्स की बातें करते हुए चाय खतम हुई और सभी अपने कमरे में पहुँचे थे कामेश कब आएगा यह उसे पता नहीं था पर आज आएँगे खेर कामया नहा धो कर तैयार थी 

और तभी कामेश की आवाज आई थी उसे अरे वो आ गये है चलो थोड़ा सा टाइम कटेगा पर कामेश के आते ही वो इतना जल्दी में था की समान रखते ही जल्दी-जल्दी तैयार होने लगा था और दुनियां भर की बातें भी करता जा रहा था 

कामया भी उसकी बातों में हाँ या ना में बातें करती रही और उसके जल्दी-जल्दी काम की और एकटक देखती रही उसे गुस्सा तो बहुत आया था कि इतने दिनों बाद आने पर ही कुछ आपस की बातें ना करते हुए इधार उधर की बातों में टाइम जाया कर रहे है किस तो कर सकते थे पर नहीं इतना भी क्या काम था कि पत्नी को उसका हक ही ना मिले 

कामया भी कुछ ना कहती हुई उसके पीछे-पीछे नीचे उतर आई थी खाना खाने के बाद पापाजी और कामेश बाहर की ओर निकले थे घर में बहुत से लोगों को फिर से काम करते हुए उसने देखा था कौन थे पता नहीं पर थे सभी के चेहरे पर एक आदर का भाव था और सत्कार का भाव साफ-साफ देखा जा सकता था खेर कामया को क्या उसे तो मम्मीजी के साथ ही रहना था बाहर आते ही उसकी नजर भोला पर पड़ी थी पोर्च में तीन गाडिया लाइन से खड़ी थी एक में लाखा था और दूसरे में भोला और तीसरी खाली थी वो गाड़ी कामेश की थी 

पर जैसे ही वो लोग बाहर निकले कामेश ने भोला की ओर देखते हुए 

कामेश- भोला मेरी गाड़ी अंदर रख दे और मेरे साथ चल आज मेमसाहब की छुट्टी है 

भोला के चहरे में एक भाव आया था जो कि वहां खड़े किसी ने नोटीस नहीं किया था पर कामया से वो छुप ना सका था वो जल्दी से दौड़ कर कामेश की गाड़ी को गेराज में खड़ा करते हुए जल्दी से मर्क की और बड़ा था पर जाते जाते एक नजर से अपने सप्निली चीज को देखना नहीं भुला था और सिर झुका कर मम्मीजी को भी नमस्कार किया था 

कामया की आखें एक बार तो उससे टकराई थी पर कुछ नहीं कह या कर पाई थी वो उसके सामने से गाड़ी धीरे धीरे आगे की ओर सरक्ति हुई बाहर की ओर चली गई थी तभी उसकी नजर लाखा पर पर थी वो पापाजी की गाड़ी को आगे लेते हुए बाहर की ओर चला गया था उसके चहरे पर भी एक अजीब सा भाव उसने नोटीस किया था कामया का पूरा शरीर एक बार तो सनसना उठा था और वो सिहर उठी थी हर एक पाल जो कि उसने भोला के साथ गुजरे थे उसे याद आते रहे फिर लाखा के साथ के पल भी वो वापस तो मम्मीजी के साथ अंदर आ गई थी पर दिल का हर कोना उसे लाखा भोला और भीमा के साथ गुजरे पल की याद दिला रहा था कामेश की बेरूखी ने यह सब किया था 

वो क्या करती पर अभी तो यह सब सोचना नहीं चाहिए पर वो क्या करे उसका बस नहीं था अपनी सोच पर जितना झटकती थी और ना सोचने की कोशिश करती थी उतना ही वो उस सोच में डूबती जा रही थी हर अंग एक बार फिर से जाग रहा था और अपने आप ही एक सरसराहट और उत्तेजना की लहर उसके तन को घेर रही थी वो नहीं जानती थी कि आगे क्या पर एक उमंग सी जाग गई थी उसके तन में यह उमंग उसने कभी महसूस किया था कि नहीं मालूम नहीं हाँ… याद आया शादी के बाद बाद में महसूस किया था जब वो सुहाग रात के बाद अपने पति को देखती थी तब एक अजीब सी खुशी और एक अजीब सी सरसराहट उसके तन को घेरती जा रही थी वो मम्मीजी के साथ साथ हर काम को देख रही थी 


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