Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

शरीर का हर रोम रोम कामया को भोगने को लालायित था इतना सुंदर और सुढ़ाल शरीर उसके सामने था और वो पूरी तरह से हर हिस्से को छू लेना चाहता था अपने होंठों से अपने हाथों से और अपने पूरे शरीर से वो कामया के शरीर को छूने की कोशिश में था 

उसकी आतूरता देखते ही बनती थी हबशियो की तरह से वो कामया पर टूट पड़ा था जहां उसके होंठ जाते कामया के शरीर को गीलाकर जाते हर एक-एक को छूते हुए भीमा कामया के शरीर को अपनी बाहों में लिए निचोड़ता जा रहा था कामया भी उसे उत्साहित करती जा रही थी मचलते हुए अपने आपको उसकी बाहों के सुपुर्द करते हुए मुख से तरह तरह की आवाजें निकालती जा रही थी 

कामया- हाँ… चाचा और जोर लगऊऊऊ और जोर-जोर से आज कर लो जो करना है कल से फिर में नहीं मिलूंगी ‘

भीमा- हाँ… बहू हाँ… आज नहीं छोड़ूँगा बहुत दिनों बाद मिली है तू, सिर्फ़ देखता रहता था इन दिनों में तुझे 
और फिर एक किस कर अपने हाथों का दबाब उसकी चुचियों पर कर दिया था भीमा ने जैसे अपनी शक्ति दिखाने का वही एक जरिया था उसके पास 

कामया के मुख से हल्की सी सिसकारी निकली थी और कही गुम हो गई थी 
कामया- सस्शह अहहाआआआआआआअ और जोर से चाचा और जोर से आज अकेले पड़ गये क्या काका के बिना 

भीमा- अरेबहू नहीं वो तो बस थोड़ा सा उतावला हो गया था नहीं तो हमम्म्ममममममममम

दोनों के होंठ एक दूसरे से जुड़ गये थे और एक ना खतम होने वाली चुंबन की शरंखला चल पड़ी थी एक दूसरे के होंठों के सिवा जीब को चूसते हुए दोनों इतना डूब चुके थे और अपने शरीर को एक दूसरे के सुपुर्द करके वो इस खेल को आगे बढ़ाते हुए अपने आपको भूल चुके थे भीमा भूल चुका था कि वो एक नौकर है और कामया यह भूल चुकी थी कि वो इस घर की बहू है और अब आश्रम की होने वाली कामयणी देवी है सेक्स का वो खेल जो वो खेल रहे थे एक बहुत ही खतरनाक मोड़ पर आ गया था भीमा की एक हथेली की उंगली कामया की जाँघो के बीच में पीछे से डाल रखी थी जहां वो कामया की योनि को छेड़ता जा रहा था और उत्साह में कभी-कभी उसकी उंगली उसके गुदा द्वार को भी छू जाती और कामया बॅया बार अपनी कमर को पीछे करके उसे और करने को उत्साहित करती जा रही थी 



अपने नितंबो को और उँचा करके अपनी जाँघो को थोड़ा सा खोलकर भीमा की उंगलियों के लिए जगह भी बनाते जा रही थी होंठों के जुड़े होते हुए भी उसके मुख से आवाजें निकलती जा रही थी आज तो भीमा भी कम नहीं था वो भी बिंदास हो गया था और अपने मन की हर दबी हुई इच्छा को जैसे वो पूरा कर लेना चाहता था वो भी कामया के रूप के बारे और कामया को उत्साहित करने के लिए जो कुछ कर सकता था करता जा रहा था 

भीमा- बहुत खूबसूरत हो बहू तुम कितना सुंदर शरीर है तुम्हारा उूुउउम्म्म्मममममम उूुउउफफफफफफफफफफ्फ़ पागल हो गया हूँ 

कामया- हूंम्म्मममममममम अंदर करो चाचा प्लीज अंदर करो और नहीं रुका जाता प्लीज ईईई 

बोल खतम होते इससे पहले तो भीमा कामया की योनि के अंदर था एक ही धक्के में आधे से ज्यादा 
भीमा- लो सस्स्शह हमम्म्ममम ओ और डालु हाँ… और 

कामया- हाँ… रूको थोड़ा रूको उूुुुउउफफफफफफफफफफफफफ्फ़ 

भीमा- क्यों रूको क्यों उउउहमम्म्मममममममममक्यों अब रूको क्यों हमम्म्मम 

कामया- हमम्म्म उउउफ्फ… इतना जल्दी नहीं थोड़ा रूको बहुत दिनों बाद है ना इसलिए सस्स्स्स्स्स्स्शह 

भीमा- और जोर से करू हमम्म्म और जोर से 
और भीमा जैसे पागल हो गया था चिपचिपी योनि के अंदर वो पीछे से कामया को कस्स कर पकड़कर उसके चुचो को निचोड़ता हुआ और उसकी कमर को एक हाथ से कस्स कर पकड़कर वो लगातार कामया की योनि पर प्रहार कर रहा था कामया जो की अब भी बेड पर लेटी हुई थी किसी तरह से अपनी जाँघो को खोलकर भीमा के ऊपर चढ़ा कर अपने अंदर जगह बनाकर भीमा को दी इससे उसकी योनि भी खुल गई थी और थोड़ी सी परेशानी भी हल हुई थी पर भीमा के धक्के इतने जोर दार होते थे की उसकी टाँगें फिसल कर आगे गिर जाया करती थी पर कामया अपने संतुलन को बनाए हुए रखते हुए भीमा को और भी उत्साहित करती जा रही थी उसके अंदर गया भीमा का लिंग इतना गरम था कि कामाया को लग रहा था की वो ज्यादा देर नहीं रुक पाएगी इतनी दिनों बाद उसके अंदर किसी पुरुष ने प्रवेश किया था


वो लिंग उसे हमेशा से ही अच्छा लगता था भीमा ही वो पहला इंसान था जो की उसके पति के बाद का पहला मर्द था जिसने उसके इस शरीर को ठीक से भोगा था उसे सब पता था की क्या क्या करने से कामया को अच्छा लगेगा वो उसके शरीर का पुजारी था वो अपने आपको आज कुछ ज्यादा ही समर्थ दिखाने की कोशिश कर रहा था शायद इसलिए की जो कामया उसे छेड़ा था इसलिए या शायद वो भी बहुत दिनों से भूखा था इसलिए जो भी हो कामया के शरीर को आज वो निचोड़ कर रख देगा यह तो तय था उसके धक्के इतने तेज और जोर दार होते थे की हर धक्का कामया के मुख से एक आह और सिसकी निकाल ही देता था भीमा कामया के शरीर को पीछे से पकड़े हुए लगातार धक्के लगाए जा रहा था और उसके शरीर पर पूरा नियंत्रण बनाए हुए था जैसे चाहे वैसे मोड़ लेता था और जैसे चाहे वैसे उठा लेता था भीमा था तो तगड़ा ही और अब तो दारू भी अपना कमाल दिखाने लगी थी 


सख्ती से पकड़े हुए वो कामया को सांस तक लेने की जगह नहीं देना चाहता था शायद उसे कामया का टोन्ट किया हुआ किचेन में उसके साथ किया हुआ और फिर कमरे में आते ही वो सब कहना शायद उसकी मर्दानगी को छू गई थी वो लगता था की अपने उसी अपमान का बदला लेलेना चाहता था कही कोई कोताही नहीं और नहीं कोई नर्मी थी आज उसके सेक्स में नहीं तो भीमा चाचा जब भी कामया के शरीर के साथ आज तक खेला था तब तब उन्होंने एक बात का तो ख्याल रखा ही था की वो इस घर की बहू है और उसकी मालकिन भी पर आज तो जैसे वो अपने में नहीं था लगता था की कोई वेश्या को भोग रहा था जिस तरह से वो बिना कुछ सुने और बिना कोई राहत के अपने आपको कामया के अंदर और बाहर कर रहा था और जिस तरह से वो कामया को उठाकर और पटक कर उसके शरीर को रौंद रहा था वो एक नया और अनौखा एक्सपीरियंस था कामया के लिए उसने आज तक भोला को ही इस तरह से उसे भोगते हुए देखा था कामया भी भीमा के हर धक्के को संभालती और झेलती हुई अपने आपको किसी तरह से रोके हुए उसका साथ देती जा रही थी और सांसों को सम्भालती हुई कभी उसे रुकने का और कभी उसे धीरे करने का आग्रह करती जा रही थी पर भीमा तो कुछ सुनने और देखने के काबिल ही नहीं था आज वो कामया के अंदर तक जैसे उतरा था जैसे वही का होकर रह जाना चाहता था वो निरंतर धक्के लगाते हुए अपने चहरे को कामया के कंधों से जोड़े हुए था और अपने हाथों से कभी भी कामया को थोड़ा सा उठाकर अपने लिए जगह भी बना लेता था आज वो कुछ सुनने की स्थिति में नहीं था धक्कों के साथ-साथ वो भी कामया से कुछ कुछ कहता जा रहा था पर कामया को कुछ समझ नहीं आरहा था पर हाँ वो इतना जानती थी कि भीमा को आज मजा आ गया था वो जिस तरह से उसे निचोड़ रहा था वो उसका तरीका नहीं था वो भोला का तरीका था और कुछ कुछ लक्खा का भी पर आज भीमा भी बहुत उत्साहित था अपने मन की कोई तमन्ना बाकी नहीं रखना चाहता था करते-करते अचानक ही उसने कामया को उठा आकर उल्टा लिटा लिया था जो की अब तक साइड होकर लेटी थी उठाते ही उसने कामया की कमर को पकड़कर कई धक्के लगा दिए थे कामया जब तक संभालती तब तक तो वो उसपर हावी हो चुका था वो कामया को पकड़कर लगातार धक्कों की स्पीड बढ़ाते ही जा रहा था 


कामया- हमम्म्म धीरे ईईई करो रूको जरा प्लेआस्ीईईईईईईई उूुुुुुुउउम्म्म्मममममममम रोने सी हालत थी कामया की 
पर भीमा को कोई फरक नहीं पड़ा था वो तो कुछ सुनने को तैयार नही था हर कदम अपने लिंग को कामया के अंदर और अंदर तक पहुँचाने में लगा हुआ था वो अब धीरे धीरे कामया की कमर को पकड़कर उठाकर अपने लिंग के हर धक्के के साथ ही मच करने लगा था कामया बेड पर चेहरा टिकाए हुए थी और कमर जो की अभी अभी भीमा ने हवा मे उठा रखी थी उसकी योनि पर चोट किए जा रहा था भीमा की नजर अब उसके कूल्हों पर थी और उसे कामया का गुदा द्वार भी आसानी से दिख रहा था उसके अंदर एक इच्छा जागी थी वो धीरे से अपनी उंगली को उसके गुदा द्वार के अंदर कर दिया था और दूसरे हाथ से कामया को कस्स कर पकड़ लिया था और अपने पास खींच लिया था कामया उसकी गोद में आ गई थी पर कमर वैसा ही उठा हुआ था उसके दोनों छेदों में अब कुछ था नीचे की ओर भीमा का लिंग था और पीछे के छेद में उंगली थी कामया को आज कोई दिक्कत नहीं हुई थी उसे अच्छा लग रहा था अब तक उसके पीछे के द्वार पर सिर्फ़ उन छोटी महिलयो ने ही दस्तक दी थी पर आज भीमा की मर्दानी उंगली ने प्रवेश किया था मोटी-मोटी और सख्त सी उंगली उसके द्वार के अंदर तक चली गई थीभीमा की चाल में कोई नर्मी या शांति नहीं थी वो अब भी वैसे ही उसकी योनि पर प्रहार कर रहा था और गुदा द्वार को भी अपनी उंगली से अंदर-बाहर करते हुए उसे एक परम आनंद के सागर में गोते लगाने की ओर ले चला था अब कामया को उसकी हर हरकत अच्छी लग रही थी वो चाहती थी की वो जैसा चाहे करे उसकी फिकर ना करे और भीमा भी कुछ कुछ वैसा ही कर रहा था लगता था की उसे आज अपनी ही चिंता है और किसी की नहीं कामया के साथ उसका यह साथ वो एक यादगार बना लेना चाहता था और वो निरंतर उसका प्रयास कर भी रहा था वो जरा भी नहीं रुक रहा था उसकी हर चोट इतनी गहरी पड़ रही थी की कामया के मुख से सिसकारी के साथ साथ एक हल्की सी चीख भी निकलती थी कामया का शरीर पूरी तरह से भीमा के नियंत्रण में था और वो उस खेल का हर हिस्सा और हर कोना अच्छे से जानती थी 



उत्तेजना में उसकी हालत खराब थी ना चाहते हुए भी वो उठ गई थी अपने शरीर में चल रहे उथल पुथल को वो और ना सह पाई थी उसका शरीर अकड़ने लगा था वो अपने अंदर और अंदर तक भीमा का लिंग ले जाने कोशिश करने लगी थी उठकर वो अपनी कोहनी पर आ गई थी पर धक्कों के चलते बड़े ही मुश्किल से संभल पा रही थी पर उत्सुकता और अंदर की हलचल को मिटाने के लिए वो जो करना चाहती थी वो अपने आप ही भीमा कर रहा था भीमा उसे सीधे बाहों से कस्स कर पकड़े हुए और अपने उल्टे हाथ के उंगुठे से उसके गुदा द्वार और लिंग से योनि को भेद-ते हुए उसे अंजाम तक पहुँचाने में लगा हुआ था 

कामया की सिसकारी अब बढ़ गई थी और भीमा की सांसें भी बहुत तेजी से चल रही थी 

कामया- जोर-जोर से करो चाचा रुकना नहीं प्लेआस्ीईईई और तेजी से अंदर तक वहां भी करो और अंदर तक 

भीमा चौक गया था कामया की आवाज सुनकर वहाँ मतलब पीछे भी पर 
भीमा- हाँ… बहू आज नहीं रुकुंगा अब देख मुझे पागल कर रखा था तूने मुझे रुक जा बस थोड़ी देर और 


कामया- नहीं चाचााआआ थोड़ी देर नहीं प्लीज़ बहुत देर बस करते रहो रुकना नहीं बस करते रहो सस्स्शह आआआआआअह्ह 



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भीमा की गति तो थी ही तेज पर अब उसने अपने को संभाल लिया था नशे में उसे कुछ नहीं दिख रहा था पर धक्का अब से थोड़ा संतुलित हो गया था हर धक्के पर उसका लिंग कामया के अंदर तक जाता था और बहुत अंदर तक हर धक्का कामया को आगे की ओर करता था और फिर पीछे की ओर हो जाती थी लगता था की भीमा का स्पर्श वहां से हटाना नहीं चाहती थी लेकिन वो अब ज्यादा देर रुक नहीं सकती थी उसके अंदर का तुफ्फान बस रास्ता ही देख रहा था की कब निकले कामया अपने जीवन का यह पल नहीं भूल पाएगी इतने दिनों के बाद जो सुख उसे मिल रहा था वो उन सुखो से कही ज्यादा था जो वो अब तक भोग चुकी थी अश्राम में भी उसे सिर्फ़ उत्तेजित ही किया गया था और उसे शांत किया गया था जो भी उन महिलाओं ने उसके साथ किया था वो तो सिर्फ़ काम चलाऊ था पर यह सुख तो स्वर्ग से भी परे है भीमा की ताकत और भेदने की गति के आगे सब कुछ फैल था भीमा की हर चोट उसकी बच्चे दानी तक जाने लगी थी और अब तो भीमा के दोनों हाथ भी उसकी कमर बल्कि नितंबों के आस-पास ही घूम रही थी और जब तब उसके गोरे और कोमल नितंबो पर प्रहार भी करने लगी थी पकड़ने की कोशिश में हुआ होगा ऐसा पर नहीं भीमा तो सच में उसके नितंबो पर जोर-जोर से चाटे मार रहा था जैसे कोई घोड़ा चलाते हुए उसे मारता है वो लगातार ऐसा ही किए जा रहा था और कस्स कस्स कर खुद के आगे होते ही उसकी कमर को खींचकर पीछे की ओर ले जाता था 

कमाया- अह्ह मारो मत चाचा मारो मत कर तो रही हूँ अच्छा नहीं लग रहा 

भीमा- अरेमार नहीं रहा हूँ बहू बस रास्ता दिखा रहा हूँ मजा आ गया आज तो और जोर से करू बोल 

कामया- हाँ… करो बस करते रहो 

भीमा अपने पूरे जोर से कामया को रोंधते हुए उसके शरीर को अपने से जोड़े हुए अपने हाथों को उसके गोल और खूबसूरत नितंबों पर घूमता जा रहा था बीच बीच में अपने उंगुठे को भी उसके गुदा द्वार के अंदर कर देता था पहले तो एक ही उंगुठे को डालता था पर धीरे-धीरे वो दोनों उंगुठे को उसके अंदर डालने लगा था कामया अपने शिखर के बहुत पास थी और उसके मुख से सीस्करी के साथ ही हर धक्के पर आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उम्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज बार-बार निकलती जा रही थी हर बार उसकी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह की आवाज गहरी होती जा रही थी 


कामया जो की अब तक अपनी कोहनी के बल अपने आपको संभाल रखा था अब अपने कंधों के बल बेड पर लेट गई थी पर कमर को झुका कर अपने नितंबों को भीमा के लिए खोलकर रखा था और भीमा भी उसके इस तरह से रहने पर अपने आपको पूरा आजाद पा रहा था उसकी चोट अंदर तक कामया को हिलाकर रख दे रही थी अब तो कामया की दोनों बाँहे भी पीछे की ओर होते होते भीमा की जाँघो को छूने लगे थे अपने नरम और कोमल हाथों पर भीमा के सख्त और बालों से भरी हुई जाँघो का एहसास पाते ही कामया उसे अपनी गिरफ़्त में लेने के लिए और भी थोड़ा सा पीछे हो गई थी पर नजाने कैसे भीमा की नजर उसकी हथेलियों पर पड़ गई थी और उसके एक-एक कर उसकी दोनों कलाईयों को पकड़कर पीठ की ओर उठा लिया था अब कामया अपने आपको हवा में पा रही थी और अब उसका शरीर भीमा के कब्ज़े में था और वो दोनों हाथों को पीछे की ओर पकड़कर उसे एक जगह पर रखते हुए धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था कामया हवा में झूलती हुई अपने शिखर की ओर बढ़ रही थी 

कामया- उूउउम्म्म्मम छोड़ो मुझे प्लेआस्ीईईईईई दर्द हो रहा है चाचा प्लेआस्ीईईईईई 

भीमा पर कोई असर नहीं हुआ था पर कामया की चीख उस कमरे के बाहर शायद नहीं जा रही थी 

कामया- प्लेआस्ीईई चाचा छोड़ो उूउउम्म्म्मममम आआआआअह्ह और नहीं प्लेआस्ीईईईईईईई ईईईईईईईईईई 
करती हुई हवा में ही उसके अंदर का सारा ज्वर निकलकर बाहर की ओर बहने लगा था पर भीमा अब भी चालू था और नशे की हालत में एक बार झड़ चूकने के बाद लगता था की वो एक वहशी दरिन्दा बन गया था उसे कामया की कोई फिकर नहीं थी और लगातार वैसे ही पकड़े हुए उसके अंदर तक भेद-ता हुआ अपने सफर को आगे बढ़ाए हुए था


कामया के मुख से अब सिर्फ़ अयाया और उउउम्म्म्म के सिवा कुछ नहीं निकल रहा था और नहीं कोई आपत्ति ही दर्ज करा रही थी भीमा भी कुछ देर योनि पर टूटा पड़ा रहा फिर अचानक ही उसका लिंग उसी तेजी से बाहर की ओर निकला था और कामया की योनि का ढेर सारा रस लिए हुए कामया की गुदा भाग में झट से धूमिल हो गया था वही तेजी और वही गति थी उसके अंदर पर जगह चेंज था कामया एक बार फिर से चीख उठी थी पर इस बार झड़ने की वजह से नहीं बल्कि गुदा भाग में लिंग और वो भी इतना मोटा सा के अंदर जाने के कारण वो छटपटा उठी थी पर भीमा नहीं रुका था 

कामया- नहीं वहां नहीं प्लेआस्ीईईईईई मर जाऊँगी प्लीज ईईईईई छोड़ो मुझे नहीं प्लेआस्ीईए 
पर अपने आपको किसी भी हालत में भीमा का साथ देते नहीं पा रही थी कामया की दर्द के मारे जान जा रही थी पर भीमा था की कोई चिंता ही नहीं थी उसे और एक के बाद एक धक्के के साथ ही उसका लिंग धीरे-धीरे उसके पीछे की और समाता जा रहा था कामया को दर्द तो था पर इतना नहीं पर इस तरह से बिना बताए और बिना आगाह किए भीमा इस तरह से उसके पीछे से प्रवेश कर जाएगा उसका उसे जरा भी अनुमान नहीं था पर यह तो जरूर था कि तेल की मालिश और उन महिलाओं ने उसके गुदा द्वार को इतना चिकना और मुलायम बना दिया था कि वो दर्द के कारण अनायास ही आक्रमण से ज्यादा डर गई थी 


भीमा को लेकिन कोई फरक नहीं पड़ता था एक तो नशे में और ऊपर से इतने दिनों बाद कामया के शरीर से खेलने का मौका उसे मिला था वो निश्चिंतता से अपने काम में लगा था उसकी आखें कामया के बदन को देखती हुई और कामया के ना नुकर के कारण और भी चमक उठी थी एक जीत दर्ज करा चुका था वो और अपनी जीत को और आगे बढ़ाते हुए वो बिना कामया की रिक्वेस्ट को सुने आवेश और रफत्तार से कामया के पीछे के भाग को भेदता जा रहा था कोई रहम नहीं ना ही कोई सम्मान था आज था तो सिर्फ़ सेक्स की भूख और एक दूसरे को हराने की भूक बस कामया भी अब ज्यादा देर तक अपने आपको भीमा के आक्रमण से रोक नहीं पाई थी धीरे-धीरे वो भी अपने आपको उस परिस्थिति में अड्जस्ट करने की कोशिश करने लगी थी भीमा अब भी उसके दोनों हाथों को पीछे की ओर खींचते हुए पकड़े रखा था और बहुत ही जबरदस्त तरीके से उसके गुदा द्वार के अंदर-बाहर हो रहा था कामया को पता भी नहीं चला की कब वो इतना बड़ा और मोटा सा लिंग उसके अंदर तक समा गया था पर हाँ… अब धीरे-धीरे उसे दर्द नहीं हो रहा था पर तकलीफ में जरूर थी वो उसे इतना मजा नहीं आरहा था पर उसे मालूम था की जब तक भीमा शांत नहीं होगा तब तक कोई चारा नहीं है बचने का सो उसने भी अपने आपको पूरा उसके सहारे और उसकी इच्छा के समर्पित कर दिया और सिर्फ़ उसके आक्रमण को झेलती रही पर लगता था की आज भीमा झड़ने वाला नहीं है 

कामया- प्लीज हाथ छोड़ दो चाचा दर्द हो रहा हाीइ उूुउउम्म्म्ममम उसके मुख से आख़िर में निकल ही गया था 

भीमा- हाँ हा बहू क्यों नहीं तू तो मेरी रानी है क्यों नहीं बोल और जोर से करू यहां 
किसी सेडिस्ट की तरह से उसने कमाया के दोनों हाथों को छोड़ते हुए कस्स कर उसकी चूचियां पर अपने हाथों का कसाव दिया था और उसके कानों में कहा था 

कामया- नहीं प्लीज वहां और नहीं प्लीज उूुउउम्म्म्ममममम 

भीमा- बस थोड़ी देर और अच्छा लग रहा है बस थोड़ा सा और सहन करले नहीं निकला तो मुख से निकाल देना ठीक है 

कामया- उूउउम्म्म्म सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह प्लेआस्ीईईईईईई ईईईईईईईईईईईईईईईईईई 

कामया की हालत खराब करके रख दिया था आज भीमा ने पर एक बात तो थी आज भीमा चाचा के मुख से भी आवाज निकली थी नहीं तो सिर्फ़ काम से काम रखने वाले थे वो 

कामया का शरीर पसीने से भीगा हुआ था और भीमा का भी पर शायद भीमा भी अपने परवान चढ़ने लगे थे कुछ देर में ही उसने एक झटके से अपने लिंग को उसके पीछे से निकाल लिया था और जोर से अपने चहरे को उसके पीछे की ओर लगाके दो तीन बार चाट-ते हुए एक झटके से कामया को पलटा लिया था और जब तक कामया कुछ समझती उसका लिंग कामया के होंठों पर सपर्श कर रहा था 

कामया घिन के मारे अपने होंठों को उससे दूर हटाना चाहती थी पर भीमा की पकड़ उसके बालों पर और चहरे पर इतनी मजबूत थी की उसे अपना मुख खोलना ही पड़ा था और एक ही धक्के में उसका मोटा सा काला सा और लंबा सा लिंग कामया के नाजुक होंठों के सुपुर्द कर दिया था 

भीमा- जल्दी जल्दी चूस बहू नहीं तो फिर से पीछे घुसा दूँगा जल्दी कर ठीक से जीब लगा के कर 

कामया- उूुुुुुुुुुुुुउउम्म्म्ममममममममममममममममममममममममममम नहियीईईईईईईईईईईईईईईई प्प्प्प्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लेआस्ीईईईईईईईईईई 

कुछ नहीं कह पाई थी जिस तरह से भीमा की पकड़ और अपने लिंग को पूरा का पूरा उसके मुख में उतारने की जल्दी थी उससे कही ज़्यादा जल्दी इस बात की थी की वो अपने शिखर पर पहुँच जाए इस जल्दी में ना तो भीमा ने कामया की स्थिति ही देखी थी और नहीं उससे कोई मतलब ही था 

भीमा का लिंग कामया के छोटे से मुख में आता कितना उसकी ताकत के आगे कितना लड़ती कामया किसी तरह से अपने आपको अड्जस्ट करते हुए उसके लिंग को जगह देने की कोशिश करने लगी थी कामया पर लिंग इतना मोटा हो चुका था की उसके मुख में सिर्फ़ 1्/4 हिस्सा से भी कम आता था पर भीमा उसके अंदर तक उतारना चाहता था कामया के गले तक पहुँच आ जाता था वो और फिर खींचकर बाहर निकालता था फिर अंदर 

कामया जैसे ही उसका लिंग थोड़ा सा बाहर की ओर आता गहरी सांसें लेने की कोशिश करती पर उससे कम देर में ही उसका लिंग उसके गले तक पहुँचा जाता किसी तरह से अपने आपको रोके हुए और अपने सांसों को नियंत्रण करते हुए कामया थोड़ा सा एडजस्ट करने की कोशिश की पर हर बार भीमा का लिंग उसके गले तक चला जाता था 

कई बार तो खाँसते हुए कामया ने अपने चेहरे को खींच भी लिया था पर भीमा जल्दी से उसके चेहरे को उसके लिंग पर फिर से अड्जस्ट करके उसके मुँह के अंदर कर देता था कामया भी लड़ते हुए थक गई थी और उसकी हालत को अनदेखा करके भीमा को शांत करने का बीड़ा उठा ही लिया और जितना दम उसमे बचा था अपनी जीब और होंठों की मदद से उसे शांत करने में लग गई थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया- रूको चाचा मर जाऊँगी में करती हूँ प्लेआईईई उूुउउम्म्म्ममम्रको आअप रूको 
अपनी नजर उठाकर बस इतना ही कह पाई थी और फिर अपने ही हाथों में भीमा के लिंग को लेकर चूस्ते हुए अपनी जीब को उसके सिरे से लेकर अपने तरीके ही उसे जल्दी से शांत करने में जुट गई थी 

भीमा भी धीरे-धीरे शांत हो गया था उसे पता था कि अब कामया उसे शांत करने में लग गई थी और वो कर भी रही थी वो घुटनों के बल खड़ा हुआ नीचे अढ़लेटी हुई कामया को देख रहा था और फिर धीरे-धीरे अपने हाथों से उसके बालों को सहलाता हुआ कभी उसके गालों तक पहुँच जाता तो कभी थोड़ा सा जोर लगा के अपने लिंग को उसके मुँह के अंदर तक डाल देता वो कभी भी झड सकता था वो सीमा लाँघ चुका था बस रक्त चाप उसके लिंग की ओर चल दिए थे बस अच्छे से एक बार या दो बार 

भीमा- जल्दी करले बहू बस गया ही समझ अच्छे से कर पूरा मुँह में लेले जीब से जब चाट्ती है तो गजब का मजा देती है रे तू करती रह करती रह हाँ… हुआ उूउउम्म्म्मममममम
और उसके हाथों की पकड़ कामया के सिर पर इतना जोर से हुआ कि कामया अपने मुँह को वापस ना खींच पाई थी ढेर सारा वीर्य उसके गले तक एक धार की तरह से टकराया था और उबकाई के रूप मे उसकी नाक से भी निकलकर बेड पर फेल गया था पर भीमा तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था हर झटका कामया के गले तक पहुँचा देता था पर ज्यादा देर नहीं शरीर के अकड़ने के बाद उसकी पकड़ जैसे ही थोड़ा सा ढीली पड़ी कामया ने अपने आपको छुड़ा लिया था और बेड पर लटक कर ही खाँसती हुई अपने मुख में आए उसके वीर्य को नीचे निकालने लगी थी पर शायद भीमा का आखिरी बूँद अब भी बाकी था बिना कोई चेतावनी के ही उसने कामया की कमर को पकड़ , झटके से उठा लिया था और फिर एक बार उसके पीछे की ओर आक्रमण कर दिया था पर अब कामया को इतना फरक नहीं पड़ा था क्योंकी वहाँ एक बार वो जा चुका था कोई ज्यादा दिक्कत नहीं हुई भीमा दो चार धक्के लगाने के बाद, ही कामया के ऊपर लेट गया था और गहरी गहरी सांसें छोड़ता हुआ 
भीमा- बहू तू गजब की है रे अपने साथ मुझे भी ले चल अब मन नहीं लगता रे तेरे बिना मजा आ गया बहू 

कामया नीचे लेटी हुई भीमा को बुदबुदाती हुई आवाज को सुन रही थी और चुपचाप लेटे लेटे ही अपनी सांसों को नियंत्रित करती जा रही थी भीमा कुछ देर वैसे ही पता नहीं क्या-क्या बोलता रहा और फिर चुप हो गया था उसके मुँह से अब कामया को शराब की गंध आने लगी थी जो उसे अब तक नहीं आई थी 

कामया अब भी नीचे ही थी भीमा के और भीमा जाने क्या नशे की हालत में बड़बड़ कर रहा था कामया को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था पर एक बात जरूर थी की भीमा का मन नहीं था वहां से जाने का कामया किसी तरह से उसके नीचे से निकलने की कोशिश कर रही थी पर जब भी वो थोड़ा सा हिल कर अपने आपको बाहर खींचना चाहती थी भीमा की मजबूत गिरफ़्त में होती थी 

कामया किसी तरह से भी निकलने की कोशिश में थी पर भीमा तो जैसे उसका मालिक ही हो गया था सेक्स के बाद तो जैसे वो उसके शरीर का हकदार हो गया था कोई चिंता नहीं थी और वैसे ही नंगा उसके ऊपर पड़ा हुआ उसके शरीर को अपने शरीर से और हाथों से सहलाता हुआ उसके ऊपर लेटा हुआ था कामया ने फिर भी थोड़ा जोर लगाकर उसके नीचे से निकलने की कोशिश की थी 

कामया- चाचा बाथरूम जाना है 

भीमा- हाँ… जा जल्दी आ जाना 

कामया हैरत में थी तो क्या भीमा फिर एक बार उसके साथ करेगा नहीं उसमें अब दम नहीं बचा था नहीं भीमा को उसके रूम से बाहर जाना होगा वो अब यहां नहीं रह सकता 

कामया- चाचा अपने रूम में जाओ 

भीमा- क्यों … … … 
अपनी नजर उठाकर उसने कामया की ओर देखा था नशे की हालत में उसकी आखें लाल हो चुकी थी और बोझिल भी थी पर एक आश्चर्य भी था उसके चहरे पर 

कामया बेड के पास बिना कपड़ों के खड़ी हुई उसे देखती रही भीमा का एक हाथ आगे बढ़ा था और उसकी जाँघो को छूकर उसकी कमर तक का सफर करने लगा था सहलाते हुए उसके हाथ काप रहे थे पर एक मर्दाना एहसास उसके अंदर तक पहुँचाने में सफल था वो 

कामया- बहुत रात हो गई है इसलिए 

भीमा- तू बाथरूम से आ जा तब चला जाऊँगा बहू थोड़ी देर रहने दे बहुत दिनों के बाद देखा है तुझे थोड़ी देर और रहने दे 
विनती भरे शब्दों के आगे कामया कुछ नहीं कह सकी वो वैसे ही नंगी बाथरूम की और बढ़ गई थीभीमा चाचा का हाथ अपने आप ही नीचे गिर कर बेड के सहारे लटक गया था और जब वो वापस आई थी तो भीमा वैसे उसके जगह पर लेटा हुआ था काले रंग का वो सख्स एक जंगली जानवर की तरह लग रहा था काले बालों के जगह जगह गुच्छे जाँघो और पीठ पर जहां तहाँ उगे हुए थे मोटी-मोटी जाँघो और कमर के सहारे वो अब भी वैसे ही पड़ा हुआ था कामया उसे देखती रही पर उठाने की हिम्मत नहीं हुई थी यह वही सख्स था जिसने अभी-अभी उसके शरीर के साथ खेला था और जी भर के खेला था जैसे चाहे भी खेला था उसके अंदर तक उतर गया था उसे जो शांति चाहिए थी वो उसे इसी सख्स ने दी थी उसके शरीर की इच्छा को इसी ने पूरा किया था उसकी सेक्स की भूख को आज इसी इंसान ने आखिरी दम तक बुझाया था अपने तरीके से और पूरे मन से 

कामया सोचते हुए बेड के पास पहुँचकर अपने हाथों से एक बार भीमा को हिलाकर जगाने की कोशिश की 

भीमा- हाँ… क्या 

कामया- जाओ चाचा अपने कमरे में जाओ 

पर भीमा ने जाने की बजाए कामया को धीरे से अपने पास खींच लिया था और अपने ही हाथों से खींचते हुए हल्के से उसे अपने गले से लगा लिया था और जैसे कामया को अपने आप में समा लेना चाहता था वो कस्स अपने से जोड़े हुए उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कस्स कर जकड़े हुए 

भोला- थोड़ी देर रुक जा बहू चला जाऊँगा थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने दे बड़ा आनंद मिल रहा है 
कहते हुए उसने कामया के माथे को चूम लिया था और फिर कस्स कर उसे अपनी बाहों में बाँध लिया था कामया उसके सीने से लगी हुई उसके हाथों का स्पर्श अपने पूरे शरीर में महसूस कर रही थी कितने प्यार से सहला रहा था और कितने जतन से उसके अंदर का शैतान अब मर चुका था उसके अंदर का हैवान पता नहीं कहा चला गया था वो अब एक इंसान की तरह बात कर रहा था और एक इंसान की तरह उसके शरीर को छू रहा था बाहों में भरे हुए भोला कुछ बोल रहा था 
भोला- कैसा लगा बहू नाराज तो नहीं है 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

क्या कहती कामया चुप ही रही उसके शरीर में घूमते हुए भीमा के हाथ अब उसे अच्छे लग रहे थे कामेश भी उसे सेक्स के बाद कपड़े नहीं पहनने देता था पूरी रात वैसे ही सोते थे वो कितना मजा आता था तब पर यह तो भीमा है पर इससे क्या यही वो इंसान है जिसने इसे शांत किया है यही वो इंसान है जिसके पास वो खुद आज गई थी और कितना इन्सल्ट तक किया था किचेन में उसके कहने पर भीमा ने आज शराब तक पिया था और उसके शरीर के हर हिस्से से सेक्स की भूख को मिटाया था नहीं वो इस इंसान को कम से कम आज तो और इन्सल्ट नहीं करेगी रहने दो यही क्या होगा घर पर कोई नहीं है 
और सोचते हुए कामया भीमा से और सट कर सो गई थी भीमा जो कि अभी तक नशे में था कुछ कह रहा था कामया के सटने से उसने उसे और भी भींच लिया था आज अगर कामेश होता तो क्या वो भी उसे इसी तरह से पकड़कर सोता और रात भर उसे आहिस्ता आहिस्ता इसी तरह से सहलाता 


भीमा- कुछ देर बाद चला जाऊँगा बहू बस थोड़ी देर रहने दे कितनी कोमल और नाजुक है तू मन नहीं भरा अभी 
कामया चुपचाप उसकी बाहों में बँधी हुई धीरे-धीरे गहरी नींद के आगोस में जाने लगी थी बालों से भरा हुआ वो आदमी उसे बड़ा अपना सा लग रहा था सेक्स का जुनून उतरने के बाद भी वो इंसान उसे कितने अच्छे से पूछ रहा था और कितनी मिन्नत कर रहा था उसे यहां रहने देने के लिए सबकुछ भूलकर कामया शांति से उसे सख्स की बाहों में सो गई थी 

कामया जब उठी तो उसे नहीं मालूम था कि कितने बजे है या कहाँ है पर एक मजबूत हाथों की गिरफ़्त में ही उठी थी बड़ा ही अपना पन लिए हुए और बहुत ही प्यार से उसके शरीर के हर अंग को छूते हुए दो मर्दाना हाथ उसके शरीर पर घूम घूमकर उसे उत्तेजित करते हुए शायद उत्तेजना के चलते ही वो उठी थी उसका कोमल शरीर जाग गया था पर आखें अब भी बंद थी उन हाथों के साथ-साथ होंठों को भी अपने शरीर पर चूमते हुए और कही कही गीलाकरते हुए वो महसूस कर रही थी वो नहीं जानती थी कि भीमा रात भर यही था या चला गया था पर हाँ इतना जानती थी कि यह भीमा ही था 


शायद कल रात को जो उसने इसके साथ किया था वो अब तक अधूरा था और भीमा को और भी कुछ चाहिए था कामया जो की नींद में ही थी अपनी आखें खोलकर नहीं देखना चाहती थी बस उन हाथों और होंठों के मजे लेना चाहती थी और खूब लेना चाहती थी कल जो कुछ भी हुआ था उसने कामया के अंदर फिर से उस आग को हवा देदि थी जिसमें की वो पहले भी जल चुकी थी भीमा जो की सुबह सुबह अपने आपको ना रोक पाया था वो अपने सपनो की रानी अपनी काम रति को अपने ढंग से और अपने तरीके से एक बार उसके जाने से पहले भोग लेना चाहता था इसलिए सुबह सुबह अपने कमरे में जाने से पहले वो कामया पर टूट पड़ा था 

उसके अंदर एक ज्वाला थी जिसे वो शांत कर लेना चाहता था अपने आपको ना रोक पाकर वो कामया के शरीर से खेलने लगा था जो की आराम से बेड पर साइड की और होकर सोई हुई थी गोरी गोरी जाँघो के साथ पतली सी कमर और फिर कंधे से नीचे की ओर जाते हुए बालों का समूह और उसपर से थोड़ा सा हिस्सा उसके शानदार और उठे हुए सीने का दृश्य उसे ना रोक पाया था और वो कामया के शरीर को थोड़ा सा सीधा करते हुए अपने होंठों को और हाथों को जोड़ कर कामया के शरीर का जाएजा लेने लगता और उधर कामया अभी थोड़ा सा छेड़ छाड़ के बाद उठ चुकी थी पर आखें अब भी बंद किए एक परम सुख का एहसास को संजोने में लगी हुई थी कामया कोई ना नुकर नहीं कर रही थी बल्कि अपने हाथों से भीमा की बाहों को पकड़कर और फिर धीरे से अपनी बाँहे उसके गले में पहना कर अपने तरीके से उसे एक मूक 
आमंत्रण दे डाला था भीमा जो की ना तो जल्दी में था और नहीं कोई चिंता थी उसे तो बस इस देवी के शरीर की भूख थी जो वो अपने तरीके से बुझाना चाहता था वो अब तक उसके अंदर सामने की कोशिश करता जा रहा था और कामया भी अपनी जाँघो को खोलकर हल्की हल्की सिसकारी भरती हुई अपने अंदर उसके लिए जगाह बनाने में लगी हुई थी थोड़ा सा अपने आपको उसे अड्जस्ट करना पड़ा था पर कोई बात नहीं उसे आपत्ति नहीं थी भीमा भी जल्दी ही उसके अंदर तक समाता हुआ अपने काम में लगा हुआ था नहीं ही कोई प्रश्ना चिन्ह और नहीं ही कोई आपत्ति नहीं कोई बात और नहीं ही मनाही बस सेक्स पूरा सेक्स वो भी प्यार भरा ना कोई जल्दी ना कोई हार्षनेस ना कोई तकलीफ ना कोई अनिक्षा दोनों अपने आखें बंद किए हुए लगातार एक दूसरे को अपने अंदर समा लेने की कोशिश में लगे हुए थे चाल धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी सांसों का रेला अपने बाँध को लगने वाला था


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पर कोई बात नहीं बस हमम्म्मम सस्स्स्स्शह के अलावा कमरे में कोई और आहट नहीं थी शायद सांसों की आवाज ने सबको शांत कर दिया था सेक्स का यह खेल देखने को शायद सबकुछ शांत बैठे थे कमरे की हर अपनी जगह पर था और कामया भीमा के इस अंतरंग संबंध का गवाह बनती जा रही थी कामया की बाँहे धीरे-धीरे भीमा के गले के चारो ओर कस्ति जा रही थी वो इस खेल में इतना डूब गई थी और भीमा इस खेल का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में लिए कामया की गिरफ़्त का हर संभव जवाब देता जा रहा था उसकी कमर जो की अब तक धीरे-धीरे चल रही थी अब तेज चलने लगी थी सूनामी का रेला उस कमरे में एक तुफ्फान के आने का संकेत कर चुका था और वो दोनों ही सुबह सुबह का यह खेल जल्दी से निपटा लेने के मूड में थे 


कामया तो यह भी नहीं जानती थी कि कितने बजे है पर शायद भीमा जानता था इसलिए अपने आपको जल्दी से खेल के समापन की ओर बढ़ा ले चला था कामया के अंदर का रक्त उसके योनि की ओर बढ़ने लगा था लगता था कि हर अंग का खून उसके योनि की ओर ही जा रहा था और वो दाँत भिंचे भीमा को और जोर से जकड़ रखा था भीमा भी पूरी रफ़्तार से कामया को भोगते हुए अपने अंतिम चरण की ओर भागते हुए उसके ऊपर छा गया था और जोर से सांसें फेकने लगा था कामया जो कि उसकी दोनों जाँघो ने अब तक भीमा की कमर को चारो ओर से जकड़ रखा था धीरे-धीरे कस्ति हुई आख़िरी बार अपनी ओर से भी प्रयास करती हुई चढ़कर शांत हो गई थी 



उसके बाद तो सिर्फ़ मम्मी जी से इजाज़त लेकर कामया वापस उसी गाड़ी में आश्राम की ओर रवाना हो गई थी पर एक संतुष्टि और तन का बहुत बड़ा सुख भोग लगा कर चली थी वो फिर से वो उस अश्राम में जाने के बाद, उन महिलाओं के हाथों का खिलोना बनने को तैयार थी पर मन से नहीं तन से उसे अब वो सब अच्छा लगने लगा था इतने सारे हाथ तरह तरह से उसे छूते थे तो उसे अच्छा लगता था उसका मन अब वो सबकुछ सहने और मजे लेने का आदि हो चुका था हर तरफ उसकी खिदमत करने वाले लोग और आदर करने वाले लोगों से घिरे रहने की आदत सी हो गई थी वो नहीं जानती थी कि आगे क्या और कैसे होगा पर हाँ एक उत्तेजना उसके अंदर थी जो बार-बार उसे उन लोगों के बीच में ले जाने को उकसाती रहती थी 

गाड़ी बड़े ही तरीके से चलती हुई और धीरे-धीरे अश्राम के अंदर तक पहुँच चुकी थी उसे लेने को मनसा तैयार खड़ी थी वही अपने होंठों पर एक मधुर सी मुश्कान लिए कामया के उतर-ते ही मनसा ने उसे प्रणाम किया और उसे अंदर ले चली थी कामया एकदम सीधी चलती हुई मनसा के पीछे पीछे चल दी और उसकी कमरे में पहुँच गई थी जहां वो सोती थी मनसा ने हँसते हुए उसे कहा 

मनसा- रानी साहिबा अब तैयार है अभी स्नान बाकी है आपका हाँ… आज गुरु जी आपसे मिलेंगे स्नान के बाद बस आने ही वाले है इस बार वो यहां 5 दिन रुकेंगे चलिए जल्दी कर लीजिए 

कामया-, … … 
कुछ समझी और कुछ नहीं भी पर मनसा के साथ अपने अगले सुख और अनुभूति की ओर बढ़ चली थी वो वही तरीका नहाने का फिर उबटान और तेल की मालिश और फिर स्नान उत्तेजित और कामुक कामया एक बार फिर से तैयार थी सजने को शरीर का हर अंग पुलकित और सुडोल हो उठा था उसका पर एक इच्छा और तड़प उसके मन के अंदर अब भी थी उसके सेक्षुयल पार्ट्स एकदम जीवित थे और अंदर की एक चाहत उसे बार-बार किसी मर्द के साथ होने की सिफारिश कर रहे थे 

मनसा जब उसे सजा रही थी तो आज उसे कुछ अलग तरह के कपड़े पहनाए गये थे पहले तो उसे एक ही कपड़ा ऊपर से गले में डाल दिया जाता था पर आज दो कपड़ों को कंधों से लेकर घुटनों तक छुपाता था वैसा ड्रेस पहनाया जा रहा था वाइट कलर का वो कपड़ा सिल्क का था और बहुत ही महीन था कंधो पर पड़े हुए कपड़े को आपस में गोल्ड चैन से एक दूसरे से जोड़ा जा रहा था ताकि उसके आगे का पीछे का और साइड का भाग छुप सके चैन के दोनों सिरे पर डायमंड का गुमाओ दार ब्रॉक्फ था और बहुत ही सुंदर लग रहा था बैठी हुई कामया जब सज कर तैयार हुई तो जूडे के साथ-साथ उसके बालों का एक गुच्छा उसके कंधों पर भी लटका हुआ था चूचियां का बहुत सा भाग सामने की ओर खुला हुआ था और क्लीवेज़ साफ उभरकर दिख रहा था कमर पर गोल्ड की एक मोटी सी कमर बंद थी और देखने में बहुत ही सुंदर लग रहा था कामया जब खड़ी हुई तो उसका ड्रेस उसके घुटनों तक आता था और उसकी पिंडलियाँ साफ और चमकदार थी गोरे रंग में सुडोल टांगों के साथ-साथ जब वो वाइट कलर का ड्रेस उसके शरीर पर चिपका हुआ सा था उसका हर अंग कपड़े के अंदर से साफ-साफ उभारों को प्रदर्शित कर रहा था कामया की आखों में एक चमक थी और होंठों में एक मादक सी मुश्कान 

मनसा- गुरु जी आपका इंतजार कर रहे है रानी साहिबा 

कामया- 
कुछ महिलाए वही चेयर नुमा पालकी को उठाकर कामया के सामने खड़ी हो गई थी कामया उसपर बैठकर अगले मुकाम की और बढ़ चली थी कामया नहीं जानती थी कि आगे उसके लिए क्या सँजो रखा था गुरु जी ने पर एक भारी उत्तेजना और उत्सुकता से घिरी कामया हर वो काम कर लेना चाहती थी जो उसके लिए गुरु जी ने सोच रखा था बहुत से गलियारे से गुजरते हुए कामया को वो महिलाए एक बड़े से डोर के सामने ले आई थी मनसा ने आगे बढ़ कर डोर को खोला था अंदर पर्दो से ढका हुआ एक बड़ा सा कमरा सिर्फ़ कामया को बाहर से दिखा था पर जैसे ही वो अंदर जाती गई आँखे फटी की फटी रह गई थी बड़ी-बड़ी पैंटिंग से सजा वो कमरा कोई राज महल सा लगता था दूर एक बड़े से आसान में गुरु जी बैठे हुए थे ड्यू के बिच और खुशबू से भरा हुआ वो कमरा किसी के भी मन को जीत सकता था थोड़ा आगे बढ़ते ही कामया को पालकी से उतार दिया गया था और वो पालकी और महिलाए वापस कमरे से बाहर की ओर चली गई थी कामया उस कमरे में अकेली गुरु जी के साथ रह गई थी खड़ी हुई मंत्रमुग्ध सी कामया उस कमरे की वैभवता को देख रही थी कि उसे गुरु जी की आवाज सुनाई दी थी 

गुरु जी- आओ सखी क्या देख रही हो 

कामया- जी 

गुरु जी- आओ बैठो यहां 

कामया थोड़ा सा सकुचाती हुई आगे बढ़ी थी पहली बार वो गुरु जी से अकेले में मिल रही थी थोड़ा सा डर और घबराहट थी उसके अंदर पर गुरु जी की आवाज में इतनी मधुरता थी और अपना पन था कि वो धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ने लगी थी फर्श की चिकने पन को देखती हुई कामया बहुत ही संतुलित कदमो से गुरु जी के पास पहुँच गई थी गुरु जी जिस आसान पर बैठे थे उसके सामने ठीक वैसा ही आसान रखा था गुरु जी के इशारे पर कामया वहाँ बैठ गई थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

बैठ ते ही उसका ड्रेस सरक कर उसकी जांघों तक आ गया था शरम और हया के मारे कामया की नजर झुक गई थी वापस खड़े होकर उसने अपने ड्रेस को खींचकर नीचे किया था और फिर बैठी थी वो पर कहाँ वो ड्रेस था ही उतना और बैठते ही वो सरक कर जाँघो तक वापस पहुँच गया था हाथों से खींचती हुई कामया अपनी जाँघो को जोड़ कर नजर झुकाए हुए बैठी रही कि गुरु जी की आवाज उसके कानों से टकराई 

गुरु जी- कैसी हो सखी 

कामया- जी 

गुरु जी - हाँ… कैसा लग रहा है तुम्हें यहां कोई दिक्कत 

कामया (अब भी उसका ध्यान अपने ड्रेस को नीचे करने में ही था )- जी अच्छा (और ना में अपना सिर हिला दिया था)

गुरु जी- कामेश और ईश्वर ने तो अपना पूरा समये अश्राम के काम में झोक दिया है बहुत मेहनत कर रहे है घर पर कामेश नहीं मिला होगा तुम्हें 

कामया- जी 

गुरु जी- हाँ… में चाहता था कि यहां रहे जब तुम घर जाओ तो पर वो पहले काम फिर आराम वाला लड़का है चलो ठीक है 

कामया- … 

गुरु जी - विद्या कैसी है 

कामया- जी अच्छी 

गुरु जी - और तुम 

कामया- जी 

गुरु जी- यहां का महाल ठीक है तुम्हारे लिए कि कुछ चेंज करना है 

कामया- जी ठीक है 

गुरु जी- हाँ… अच्छा काया कल्प तो चलता रहेगा तुम्हारा पर अब से दीक्षा भी शुरू करनी है तुम्हारी बोलो तैयार हो ना 

कामया- जी 

गुरु जी - इस दीक्षा में मैं तुम्हें बहुत सी बातें बताउन्गा और चाहूँगा कि तुम पूरी तरह से और बहुत ही अच्छे ढंग से इस दीक्षा को लो अभी से कुछ पाठ शुरू करता हूँ 

एक बात मेरी हमेशा याद रखना सखी इस जीवन में अपने तन, मन और धन के पीछे कभी नहीं भागना जब भी तुम इनके पीछे भगोगी वो तुमसे दूर जाते जाएँगे और जितना तुम इन्हें इज़्ज़त कम दोगि वो उतना ही तुम्हारे पीछे भागेंगे 

इस देश में जिस चीज का तुम तिरस्कार करोगी वो तुम्हारी उतना ही इज़्ज़त करेगी मेरी बात ध्यान से सुनना तुम एक नारी हो इस जगत की रचना नारी से ही हुई है पुरुष एक जानवर है चाहो तो उसे पाल पॉश कर अपने हाथों का खिलोना बना लो या डर के मारे उसके पीछे पीछे घूमती रहो 


ईश्वर की यह दो रचना बहूत अद्भुत है एक दूसरे के पूरक है और समझ के बनाए हुए मर्यादा में रहने को मजबूर है पर इस जिंदगी के सिवा भी बहुत कुछ है जो तुम्हें जानना है इस संसार को तुम्हें एक नया रास्ता भी दिखाना है बहुत देर तक गुरु जी कामया को जीवन के बहुत से ज्ञान देते रहे और कामया अपने आपको संभालती हुई अपने कपड़ों को खींचती हुई चुपचाप बैठी उन बातों को सुनती रही वो थोड़ा सा सचेत थी कि अब गुरु जी क्या कहते है या क्या आदेश देते है पर ऐसा कुछ नहीं हुआ बल्कि थोड़ी देर बाद ही उन्होंने उसे जाने को भी कह दिया 


गुरु जी ने अपनी टांगों को नीचे किया और उन महिलाओं की ओर कुछ इशारा किया उन महिलाओं ने आगे बढ़ कर गुरु जी की धोती को खोलनी शुरू कर दी कामया सन्न रह गई थी उनके तरीके भी अजीब थे बड़े ही जतन से और ध्यान से गुरु जी के पेट और सीने को चूमते हुए वो दोनों अपने काम में लगी हुई थी और गुरु जी भी अपने हाथों से बड़े ही आराम से उनके सिर पर हाथ फेरते हुए कभी एक ओर देखते थे तो कभी दूसरी ओर जब उनका वस्त्र खुला तो कामया की नजर उनके लिंग पर अटक गई थी अच्छा कसा मोटा ताजा लग रहा था पर बालों के गुच्छे से ढँका हुआ था इसलिए दूर से उसके आकार का पता नहीं चला था पर था मस्त सा अपने अंदर की हवस की आग को दबाते हुए कामया ने अपनी साँसों को नियंत्रण में रखते हुए एक नजर गुरु जी की ओर देखा तो पाया की गुरु जी उसकी ओर ही देख रहे थे 


अचानक ही उसकी आखें शरम से झुक गई थी पर गुरु जी की एक मनमोहने वाली मुश्कान उसकी आखों से उसके दिल में समा गई थी थोड़ा सा झिझक हटी थी उसके अंदर से एक डर जो कि उसके अंदर था वो हटा था पर फिर भी हिम्मत नहीं हुई थी उनसे आखें मिलाने की पर हाँ… नजर उन दोनों महिलाओं की ओर ही थी उसकी दोनों बड़े ही आराम से प्यार से गुरु जी के लिंग को अपने हाथों में लिए हुए धीरे-धीरे मसल रही थी अपने गालों में रगड़ रही थी और बीच बीच में अपनी जीब से थोड़ा सा चाट कर गुरु जी की ओर देखती भी जा रही थी पर उनका लिंग वैसा ही सिथिल सा उसके हाथों का खिलोना बना हुआ था थोड़ी देर बाद कामया को गुरु जी की आवाज फिर से सुनाई दी 

गुरु जी- इधर आओ सखी घबराओ नहीं 

कामया डरती हुई शरमाई हुई और थोड़ा सा झिझकति हुई धीरे-धीरे कदमो से चलती हुई गुरु जी पास जाकर खड़ी हो गई थी एकटक जमीन की ओर देखती हुई कामया जैसे ही गुरु जी के सामने खड़ी हुई उन दोनों महिलाओं ने और गुरु जी ने उसका हाथ पकड़कर ठीक अपने सामने और करीब खड़ा कर लिया था उन दोनों महिलाओं के हाथ कामया की जाँघो को सहलाने लगे थे उसके कपड़ों के अंदर से धीरे-धीरे उसकी योनि तक कामया की सांसें तो पहले से ही फूल चुकी थी गुरु जी के पास आने से और उन महिलाओं के हाथ लगाने से उसका शरीर उसके आपे से बाहर होता चला गया था सांसों की गति भी बढ़ गई थी और उत्तेजना अपने परम शिखर तक पहुँच चुकी थी गुरु जी का देखने का ढंग इतना उत्तेजग था कि कामया और आगे होकर उनसे सट कर खड़ी हो गई थी वो चाहती थी कि गुरु जी उसे हाथ लगाए और उसे छेड़े पर गुरु जी तो बस एकटक उसकी ओर देखते जा रहे थे उनका हाथ अब धीरे से उठकर कामया के सीने पर आके टिक गया था 

कामया- आआआआआह्ह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह करती हुई थोड़ा सा और आगे की ओर हो गई थी कामया की हालत देखकर नीचे बैठी महिलाए थोड़ा सा मुस्कुराइ थी उनके हाथों में अब भी गुरु जी का लिंग था और अपने होंठों से वो लगातार उसे चाट रही थी पर गुरु जी का लिंग वैसे ही ढीला ढाला सा पड़ा हुआ था गुरु जी के हाथ धीरे-धीरे कामया की चुचियों को दबाते हुए ऊपर की ओर उठ रहे थे और जब वो उसके कंधे के पास जाकर रुक गये तो कामया ने एक नजर गुरुजी पर डाली जैसे कह रही हो कि हाँ… उतार दो अब यह कपड़ा मेरे शरीर पर चुभ रहा है गुरु जी की उंगलियां धीरे से कामया के कंधे पर से उस कपड़े को नीचे की ओर सरका कर धीरे से अपने हाथों के सहारे नीचे की ओर कर दिया था उनका हाथ कामया की नंगी चुचियों को छूते हुए उसकी कमर तक आ गई थी कामया की तेज सांसें पूरे कमरे में गूँज रही थी नियंत्रण नहीं था उसका उसके ऊपर ना चाहते हुए भी सिसकारी के साथ-साथ एक तड़पती हुई सी आह भी उसके होंठों से निकल ही गई थी उन महिलाओं की उंगलियां धीरे-धीरे उसकी योनि को सहला रही थी कामया की जांघे अपने आप ही खुल गई थी ताकि उन महिलाओं को अपनी योनि तक पहुँचा सके वो आखें बंद किए माथे को ऊपर किए हुए जोर-जोर से सांसें ले रही थी और अपने शरीर पर हो रहे एक के बाद एक आक्रमण को किसी तरह से झेल रही थी कामया अपने में ही गुम थी कि उसकी कमर से वो गोल्डन कमरबंध खुलकर नीचे गिर गया था और गुरु जी के हाथों के साथ-साथ उसके शरीर का वो कपड़ा भी अलग हो गया था किसी मूरत की भाँति खड़ी हुई कामया साँसों को नियंत्रण करने में लगी थी पर गुरु जी के कोमल हाथों को नजर अंदाज नहीं कर पा रही थी गुरु जी की उंगलियां धीरे-धीरे उसके तन को सहलाती हुई उसकी योनि तक पहुँच चुकी थी और उन महिलाओं की उंगलियों के साथ ही उसकी योनि को छेड़-ते जा रहे थे कामया अपनी तेज सांसों को संभालती हुई किसी तरह से खड़ी थी कि गुरु जी आवाज उसके कानों में टकराई थी 

गुरु जी- देखो सखी क्या हालत है तुम्हारी अपने तन पर जरा भी नियंत्रण नहीं है तुम्हारा मुझे देखो कुछ हुआ मुझे इतनी सुंदर और बेदाग स्त्रियों के होते हुए भी में कितना नार्मल हूँ पता है क्यों क्योंकी मेरा मन नहीं है और जब तक मन नहीं होता तब तक सब बेकार है अपने तन को अपने मन से जोड़ो सखी और फिर देखो क्या होता है तुम्हारा मन तो नहीं है यह सब करने का पर तुम्हारा तन तुम्हारा साथ नहीं दे रहा है तुम अपने तन से हार गई हो जब तक तुम अपने तन को अपने मन से नहीं जोड़ोगी तब तक तुम ऐश्वर्य की प्राप्ति नहीं कर पाओगी आओ तुम देखो अगर मेरा मन नहीं है तो तुम मेरा क्या कर सकती हो 

और कहते हुए गुरु जी ने कामया की कमर को पकड़कर नीचे बिताने लगे थे कामया भी तड़पती हुई सी उनके घुटनों के बीच में बैठ गई थी दोनों महिलाए खड़ी होकर कामया को लगा तार सहलाती जा रही थी 

गुरु जी ने अपने हाथों से अपने लिंग को उठाकर कामया के चहरे के सामने एक बार हिलाकर दिखाया जैसे कह रहे हो कर लो जो करना है कामया की नजर गुरु जी के लिंग पर रुक गई थी होंठ खुले थे पर जल्दी ही बंद हो गये थे हाथों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और नहीं बढ़े 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

गुरु जी- डरो नहीं सखी यह तुम्हारा इम्तिहान है देखो तुम क्या कर सख्ती हो बहुत नाज है ना तुम्हें अपने ऊपर 
और कहते हुए उन्होंने कामया की एक हथेली को उठाकर अपने लिंग पर रख दिया था और धीरे-धीरे उसे सहलाने भी लगे थे कामया उनकी जाँघो के सहारे थोड़ा आगे बढ़ी थी जैसे उसके जीवन का वो इम्तिहान उसे पास करना ही था वो जो चाहती थी वो उसके सामने था पर तैयार नहीं था वो तैयार थी उसे अपने लिए तैयार करने को अपने हाथों को धीरे से उसने गुरु जी के लिंग पर कस लिया था और धीरे-धीरे सहलाते हुए अपने गालों पर घिसने लगी थी कामया के होंठों से फिर से सिसकारी निकलने लगी थी और वो बहुत उत्तेजित होकर अपने काम में जुट गई थी अपने शरीर पर उसे अब भी उन महिलाओं के हाथों का एहसास हो रहा था और कभी-कभी उनके होंठों का भी वो एक भट्टी बन चुकी थी अब उसे कोई भी नहीं बुझा सकता था जो हथियार उसके हाथों में था वो भी कोई काम का नहीं था पर वो जी जान लगाकर उसे तैयार करने में जुटी थी अपने होंठों को और जीब को मिलाकर वो लगातार गुरु जी के लिंग को चुबलने में लगी थी अपने हाथों को लगातार गुरु जी की जाँघो पर घिस रही थी अपनी चुचियों को भी वो गुरु जी की टांगों पर घिसती हुई कभी थोड़ा सा ऊपर उठकर उनके पेट को भी चूम लेती थी पर सब बेकार कुछ नहीं हुआ था गुरु जी अब भी वैसे ही थे ना ही कोई टेन्शन में और नहीं कोई उत्तेजना थी उनके शरीर में कमी नही लगी थी सांसों के साथ साथ अब तो उसका मुँह भी दुखने लगा था वो नहीं जानती थी कि अब आगे क्या करे पर अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पा रही थी अपनी नजर उठाकर एक बार गुरु जी की ओर देखा था उसने गुरु जी के होंठों पर वही मन मोहने वाली मुश्कान थी और कुछ नहीं 


गुरु जी देखा सखी तुम भी हार गई है ना आओ खड़ी हो जाओ 

और कहते हुए बड़े प्यार से अपने हाथों के सहारे कामया को खड़ा किया और धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को फिर से उसकी योनि में प्रवेश करा दिया था उन महिलाओ ने भी उसके नितंबो को सहलाते हुए पीछे से अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे उसकी योनि में घुसाने की कोशिश करती जा रही थी एक साथ तीन तीन उंगलियों उसके अंदर घुसने को तैयार थी कामया जितना अपनी जाँघो को खोल सकती थी उतना खोलकर आने वाले पल का इंतजार करने लगी थी वो जानती थी कि वो इतना उत्तेजित हो चुकी थी कि थोड़ी सी हलचल उसकी योनि में होने से ही वो झड़ जाएगी पर इंतजार था अपने शरीर के सुख का कि वो कैसा होगा खड़ी हुई कामया अपने अंदर उंगलियों को धीरे धीरे घुसते हुए एहसास करती रही और मुख से लगातार सिसकारी भरती हुई आगे की ओर होती गई थी वो लगभग गुरु जी के ऊपर गिर ही जाती पर उन दोनों महिलाओं ने उसे रुक लिया था खड़ी खड़ी कामया हिलने लगी थी उत्तजना की शिखर पर पहुँचने को तैयार कामया अपने अंदर तीन चार या पता नहीं कितनी उंगलिओ को लेकर लगातार सिसकारी भरती हुई गुरु जी से टिक गई थी अचानक ही उसकी दोनों चूचियां को उन महिलाओं ने कस कस्स कर दबाना शुरू कर दिया था एक मुँह उसके सीने पर टच होने लगा था होंठों के बीच में उसका एक निप्पल आ गया था गुरु जी उसकी चूचियां को चुस्स रहे थे वो पागलो की तरह अपने हाथों को कस कर गुरु जी के सिर को खींच कर अपने सीने पर चिपका लिया जाँघो के बीच की हलचल लगातार बढ़ गई थी और गुरु जी के होंठों का अटेक भी जोर-जोर से उसके निपल्स को चूस्ते हुए अपने सिर को थोड़ा सा जोर लगाकर उन्होंने छुड़ाया था और दूसरे चुचे पर रख दिया था 

सिसकारी अब धीरे धीरे चीत्कार का रूप लेने लगी थी कामया की चीत्कार अब उस कमरे में गूंजने लगी थी बहुत तेज और बहुत मदहोशी भरी योनि के अंदर एक तूफान सा भर गया था और लगता था कि अब नहीं रुकेगा पर गुरु जी के साथ-साथ वो महिलाए अपने काम को बखूबी निभा रही थी उन महिलाओं की उंगलियां तो बहुत तेजी से चल रही थी पर गुरु आई की उंगलियां बहुत ही धीमे और अजीब तरह का मजा दे रही थी कामया का सारा शरीर पसीने पसीने में हो गया था और ज्यादा देर तक वो सह नहीं पाई थी उन लोगों के आक्रमण को झड़ झडा कर अपनी योनि का पानी उसने झोड़ दिया खड़ी खड़ी वो हाँफने लगी थी पर उन लोगों का आक्रमाण अब भी नहीं रुका था योनि के अंदर तक वो महिलाए अपनी उंगलियों को पहुँचाने में लगी थी और गुरु जी अब भी उसकी चूचियां को चूस रहे थे कभी एक तो कभी दूसरी को उनके चूमने का और चूसने का तरीका भी गजब का था कोई जल्दी बाजी नहीं थी और नहीं कोई जानवर पन था 


कामया सिर्फ़ अब उन उंगलियों के सहारे ही खड़ी थी नहीं तो कब की गिर जाती पर उसकी योनि से अब भी लगातार पानी झड़ रहा था जैसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था कमर और पेट झटके से अंदर जाते और भी बाहर आते थे सीना कभी अंदर जाता और फिर बाहर आता था थकि हुई कामया धम्म से नीचे बैठ गई थी गुरु जी के लिंग के पास उसका मुख था और दोनों जाँघो के बीच में वो थी गुर जी अपने हाथों से एक बार फिर से उसे सहलाते हुए कुछ कह रहे थे 

गुरु जी- देखो सखी तुम्हें अपने तन पर नियंत्राण रखना सीखना होगा आज से तुम मेरे साथ तीन दिन रहोगी में तुम्हें सिखाउन्गा कि कैसे यह होता है अपने मन के अंदर भी वो इच्छा जगायो जो तुम्हारे तन में है में तुम्हें इस कला में माहिर बना दूँगा फिर देखना कि कैसे यह संसार तुम्हारे कदमो में गिरता है तन की शक्ति मन से आती है नंगा शरीर किसी काम का नहीं जब तक मन उसने जुड़ा नहीं हो ठीक है यही दीक्षा में तुम्हें आने वाले कल में दूँगा अब जाओ तुम्हें रूपसा और मंदिरा ले जाएँगी आज से तुम्हारा कमरा ऊपर है खाना खाओ और आराम करो शाम को मिलूँगा 

कामया ने किसी तरह से अपने कपड़े पहने साथ में मंदिरा ने और रूपसा ने भी हेल्प किया था एक कटु मुश्कान थी उन लोगों के चहरे पर कामया नजर नहीं मिला पाई थी उन लोगों से खड़े होने पर भी उसकी योनि से रस अब तक टपक रहा था 
चिपचिप करता हुआ उसकी जाँघो तक बह कर घुटनों तक आने लगा था गुरु जी से नजर बचा कर उन्हें थोड़ा सा झुक कर प्रणाम किया और जल्दी से कमरे के बाहर की ओर मूड गई थी 

पीछे-पीछे मंदिरा भी चली पर रूपसा वही रुक गई थी गुरु जी के पास कामया के बाहर जाते ही रूपसा एक कँटीली हँसी हँसते हुए गुरु जी की जाँघो पर अपनी हाथ रखकर बैठ गई थी और धीरे-धीरे उनके लिंग को सहलाते हुए 

रूपसा- गुरु जी बहुत दिनों बाद आपने बुलाया है हम पर थोड़ा सा कृपाकर दीजिए बहुत मन कर रहा है 

गुरु जी धीरे से अपने हाथों से रूपसा के सिर को सहलाते हुए एकटक उसकी ओर देख रहे थे मंद मंद सी मुश्कान लिए वो एक और तो कुछ कहना चाहते थे पर कहते हुए भी उनका चेहरा लगता था कि खुशी से झूम रहा था रूपसा के सिर को सहलाते हुए धीरे से बोले
गुरु जी- हाँ… क्यों रोज तो खूब मजे कर रही हो फिर मेरी जरूरत क्यों पड़ी 

रूपसा- जो बात आपके साथ है वो कहाँ औरो के साथ गुरु जी वो तो बस काम है इसलिए नहीं तो आपके सिवा आज तक इस तन से खेलने वाला और मजे देने वाला कोई है ही नहीं कृपा करे गुरु जी 

गुरु जी- तो चलो अपने हथौड़े को तैयार करो फिर देखते है 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

रूपसा - पर गुरु जी आप तो बस कुछ करने ही नहीं दे रहे थोड़ा सा अपने अंदर हमारे लिए भी प्यार जगाइए तब तो 
गुरु जी हँसते हुए अपनी हथेलियों को धीरे उसके सिर पर फेरते रहे और उसकी ओर देखते रहे उनके चहरे पर अब भाव चेंज होने लगे थे रूपसा खुश थी और अपने हाथों के साथ-साथ अब अपने होंठों को भी गुरु जी के लिंग पर घुमाने लगी थी उसकी आखें एकटक गुरु जी की ओर थी 

उसके देखने का तरीका ही इतना कामुक था कि गुरु जी का रोम रोम खिल उठा था रूपसा अपने मादक अंदाज में अपने गुरु जी को खुश करने में लगी हुई थी और अपने भाग्य का प्रसाद पाने को बैचेन थी वो रह रहकर गुरु जी के लिंग पर जिस तरह से अपने होंठों को चला रही थी उसे देखकर ऐसा लगता था कि गुरु जी से ज्यादा रूपसा को उनकी जरूरत है रूपसा 
गुरु जी के लिंग को अपने होंठों के अंदर लेजाकर अपने जीब से लपलपाति थी उसे चाट-ती थी और अंदर तक उतरने की कोशिश करती थी रूपसा की एक बात माननी पड़ेगी एक बार भी उसने अपनी निगाहे नहीं फेरी थी चाट-ते हुए और चुबलते हुए वो जिस तरीके से गुरु जी की ओर देख रही थी वो एक जान लेवा दृश्य था अगर गुरु जी के अलावा कोई होता तो शायद कब का झड़ गया होता पर गुरु जी का लिंग तो सिर्फ़ टाइट भर हुआ था 


और उसे टाइट देखकर रूपसा ने नीचे बैठे हुए ही गुरु जी की कमर को कस्स कर पकड़ लिया था और धड़ा धड़ उनके पेट को चूमने लगी थी जैसे कि उसने कोई मैदान मार लिया था आगे बढ़ते हुए उसने अपने होंठों को गुरु जी के निपल्स पर रख दिया था और उन्हें चूमने के साथ-साथ चूसने भी लगी थी गुरु जी भी अब आवेश में आने लगे थे और अपनी हथेलियों को उसके सिर से लेकर उसके कंधे पर घुमाने लगे थे उनके होंठों पर वही हँसी अब भी थी पर इस बार कुछ बदला हुआ था वो एक सेक्स की भूख और अपने साथ होने वाले इस तरह का स्पर्श को देखकर खुश होने की कहानी कहता था गुरुजी जी अब धीरे-धीरे अपने हाथों को रूपसा के सीने तक ले आए थे और उसकी चुचियों को पकड़कर हल्के-हल्के दबाते जा रहे थे रूपसा अपने काम में लगी गुरु जी के हर इशारे को समझती हुई आगे बढ़ती जा रही थी कि उसके कानों में गुरु जी के बुदबुदाने की आवाज आई थी 

गुरु जी- इस तरह अगर सखी कर पाती तो रूपसा तुम नहीं अगर सखी होती तो उसे बहुत कुछ सीखना है रूपसा तुम और मंदिरा सखी को तैयार करो उसे भी आना चाहिए उसे नहीं पता कि शरीर के साथ साथ उससे आदाए भी सीखना पड़ेंगी सिर्फ़ शरीर से कुछ नहीं होता सेक्स एक ऐसी भासा है जो कि आखों से होंठों से और शरीर के हर अंग से बोला जाता है शरीर तो बाद में आता है लोग तो पहले आखें और चेहरा देख लेंगे तब तो आगे बढ़ेंगे उसे सिख़ाओ तुम दोनों ताकि कोई भी उसे देखे तो सिर्फ़ सखी आखों से ही उसे घायल कर दे उसे छू भी ना पाए उसे इतना तैयार करो कि लोग पागल हो जाए उसे देखने के लिए उसे इतना तैयार करो कि जब वो चले तो लोग मरने मारने को तैयार होजाये तब तो मजा आएगा तब तो वो हमारी सखी और इस अश्राम की हकदार कहलाएगी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

रूपसा अपने काम में लगी गुरु जी के लिंग को छेड़ती हुई गुरु जी के आदेश को अपने अंदर समेट-ती जा रही थी 
रूपसा ----जैसी आपकी मर्ज़ी गुरु जी आप चिंता मत कीजिए ऐसा ही होगा आप देखना आज से ही में और मंदिरा अपने काम में लग जाएँगे आपको कोई शिकयात का मौका नहीं मिलेगा पर गुरु जी हमें तो जिस चीज की आवश्यकता है वो तो दीजिए और हँसती हुई फिर से गुरु जी के लिंग को अपने होंठों पर दबाए हुए उनकी ओर देखती रही 

उसे अपनी इच्छा पूरी होती नजर आ रही थी वो लगातार गुरु जी के लिंग को जितना हो सके उतना जीब से और होंठों से चुबलते हुए अपने गले के अंदर तक ले जा रही थी तभी गुरु जी का हाथ उसके सिर पर थोड़ा कस गया था रूपसा जान गई थी की बस अब कुछ ही देर की बात है 

गुरु जी के अंदर एक इंसान जाग उठा था जो कि एक नारी शरीर से हार मन गया था रूपसा का अंदाज इतना मोहक और मादक था कि गुरु जी और नहीं रुक पाए एक झटके से उसे खींचकर अपने ऊपर लिटा लिया था 

गुरु जी- बस अब अपने अंदर जाने दो बहुत मेहनत कर ली तुमने चलो तुम्हें आज खुश करते है 

कहते हुए गुरु जी अपने ऊपर बैठी हुई रूपसा की योनि के अंदर धीरे-धीरे अपने लिंग को सामने लगे थे वो क्या सामने लगे थे वो तो रूपसा ही उतावली हो गई थी और गुरु जी को बिना मेहनत अपने अंदर तक उतारती चली गई थी रूपसा का अंदाज बहुत निराला था बैठने का अंदाज़ा से लेकर देखने का अंदाज़ा एक दम जान लेवा कहते है कि सेक्स के समय औरत जितना शरीर से मर्द का साथ देती है अगर उतना ही वो अपने होंठों और आखों से भी साथ दे तो मर्द के अंदर के शैतान को कोई नहीं रोक सकता और मर्द को बिना मेहनत के ही वो सब मिल जाता है जिसकी की चाह उसे होती है वोही हाल था रूपसा का बिना बोले वो गुरु जी के ऊपर उछलती जा रही थी और उसकी कमर का भाव इस तरह का था कि समुंदर की लहरे भी जबाब दे उठी थी 

गुरु जी नीचे लेटे हुए अपने आपको एक असीम आनंद के सागर में गोते लगाते हुए पा रहे थे और रूपसा अपने पूरे तन मन से गुरु जी के साथ संभोग का पूरा आनंद ले रही थी गुरु जी आज उसे बहुत दिनों बाद मिले थे और वो यह पल खोना नहीं चाहती थी हर पल वो जीना चाहती थी वही वो कर रही थी रूपसा अपनी कमर को हिलाते हुए धीरे-धीरे कभी ऊपर भी हो जाती थी गुरु जी के चहरे पर आनंद की लहरे देखकर जान गई थी कि गुरु जी परम आनंद को प्राप्त करने वाले है उसकी कमर की लहर अब धीरे बढ़ने लगी थी और गुरु जी का हाथ उसकी कमर के चारो ओर कसने लगी थी गुरु जी अपने आप में नहीं थे आखें बंद किए हुए अपनी कमर को भी धीरे से ऊपर उठाकर रूपसा के बहाव में बहने लगे थे रूपसा ने झुक कर गुरु जी के होंठों पर फिर से आक्रमण कर दिया था लगता था कि वो भी अपने शिखर की ओर बढ़ने लगी थी गुरु जी का कसाव उसकी पीठ पर अब कस गया था 

और उनके होंठों भी अब रूपसा के होंठों से लड़ने लगे थे जीब और होंठो का मिलन वो वो पल और योनि की और लिंग का समर्पण का वो खेल अब धीरे-धीरे अपने मुकाम को हासिल करने ही वाला था और धीरे-धीरे रूपसा और गुरु जी की मिली जुली आवाज उस कमरे में गूंजने लगी थी 

रूपसा और जोर से कसो गुरु जी मज़ा आ रहा है 

गुरु जी- हाँ… रूपसा बहुत आनंद आया आज उूउउफफफफफफफफ्फ़ की आकाला है तुममे 

रूसा- आपका आसिर्वाद है गुरु जी बस अपना आशीर्वाद बनाए रखे हम पर 

गुरु जी क्यों नहीं रूपसा तुम और मंदिरा ही हमें समझ पाती हो बस करती रहो रूको मत हमम्म्मममममम आआआआआआह्ह 

रूपसा- आआआआआआह्ह म्म्म्मममममममममममममममममममममम और जोर से गुरु जी 
गुरु जी ने एक बार उसे कसते हुए अपने नीचे लिटा लिया था और अपने आपको अड्जस्ट करते हुए रूपसा की जाँघो के बीच में बैठ गये थे अब वो एक साधारण इंसान जैसे बर्ताव कर रहे थे उसके अंदर के उफ्फान को खुद ही शिखर पर पहुँचाने की कोशिश गुरु जी ने शुरू करदी थी 

रूपसा की दोनों चुचियों को कसकर पकड़कर वो लगातार धक्के देने लगे थे रुपसा नीचे लेटी हुई अपनी कमर को उठा कर हर चोट का जबाब देती जा रही थी 

रूपसा - और तेजी से गुरु जी और तेज हमम्म्म उूुउउफफफ्फ़ 

गुरु जी की रफ़्तार लगातार बढ़ती जा रही थी और लगातार रूपसा की चुचियों को आटे की तरह मसलते जा रहे थे लगता था की वो अपना गुस्सा उसकी चुचियों पर ही उतारना चाहते थे निचोड़ते समय उन्हें रूपसा की चीख का भी कोई ध्यान नहीं था बस मसलते हुए अपने आपको शांत करके कोशिश करते जा रहे थे 

रूपसा ऽ उूउउम्म्म्म धीरे गुरु जी आआआआआआअह्ह, म्म्म्ममममममममममममममममममममममम 

और जोर से गुरु जी को अपनी बाहों में भरती हुई गुरु जी के झटको के साथ ऊपर-नीचे होने लगी थी रूपसा किसी बेल की भाँति गुरु जी चिपकी हुई थी और गुरु जी अपनी हथेलियों को अब उसके पीठ पर कसते हुए लगातार धक्के देते रहे जब तक अपनी शिखर पर नहीं पहुँच गये थे धीरे धीरे उस कमरे में आया तूफान थम गया था और दो शरीर पसीने से भीगे हुए उस आसन पर पड़े हुए थे 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

थोड़ी देर में ही सबकुछ नार्मल होता चला गया था पर वो कमरा एक गवाह था एक उत्तेजना के शांत होने का और, गुरु जी के इंसान बनने का रूपसा तो थी ही औरत पर गुरु जी का रूप कुछ वैसा ही था वो एक फुर्टूने टेललरर थे और अपने भाग्य से लड़ते हुए इस मुकाम तक पहुँचे थे 

पहले पहले वो सिर्फ़ कुंडली देखते थे और लोगों के भाग्य बताते थे पर उनका जीवन यापन सही से नहीं होता था पर जैसे ही वो कुछ ऐसे लोगों से मिले जो इस समझ में एक पोजीशन रखते थे तो वो अपने रास्ते से भटक गये और एक पैसे कमाने वाले इंसान बन गये थे उनके लिए पैसा और पोजीशन सबसे पहले था लोग जुड़ते गये 

और वो अपना काम करते गये फिर इसकाम में सबसे आगे और पहले आने वाली होती है महिलाए गुरु जी ने पहले एक फिर दो और ना जाने कितनी महिलाओं के साथ अपना समय बिताया होगा वो तो शायद आज उन्हें याद नहीं पर नारी के शरीर का इश्तेमाल उन्होंने खूब किया अपने लिए और अपनी पोजीशन बनवाने के लिए भी गुरु जी असल में एक भूखे और मतलबी इंसान थे हर कही उन्हें अपने रुपये पैसे की ही चिंता रहती थी हर काम जो भी वो करते थे उसमें उनका क्या फायेदा है वो जरूर देखते थे इसके लिए उन्हें किसे और कहाँ इश्तेमाल करना है वो करते थे चाहे वो औरत हो या आदमी लड़की हो या लड़का . 

बस उनका मतलब साल्व होना चाहिए वही खेल खेलते खेलते आज वो इस पोजीशन में पहुँचे थे (खेर वो कभी बाद में लिखूंगा आज नहीं बस यह तो सिर्फ़ इसलिए लिखा था कि आपको यह अंदाज हो जाए कि गुरु जी आखिर है क्या )


रूपसा अपने कपड़े संभालती हुई गुरु जी के कपड़े भी ठीक करने लगी थी और बड़ी ही आत्मीयता से गुरु जी के पास खड़ी होकर उनको सहलाती हुई बोली 
रूपसा- गुरु जी क्या आदेश है 

गुरु जी - बस अपना काम करती रहो और मंदिरा के साथ मिलकर आज से सखी को तैयार करो जो बात उसमें नहीं है वो करो हर तरीका उसे समझाओ अदाएँ भंगिमा और शरीर का हर अंग उसका इतना निखार दो कि इंसान पागल हो जाए उसके नाम की मालाएँ जपने को एक झलक पाने को चाहे वो कोई भी हो बस तैयार करो 

रूपसा- जैसी आपकी मर्ज़ी गुरुजी आप देखना कोई कसर नहीं छोड़ेंगे हम आज से हम अपने काम में लग जाएँगे पर इस्केलिए आपको थोड़ा इंतजार करना होगा 

गुरु जी- नहीं नहीं हमारे पास इतना वक़्त नहीं है बस जल्दी करना है और फिर हम यह देश छोड़कर चले जाएँगे यहां का काम सखी ही संभालेंगी बस उनका आना जाना लगा रहेगा हमारे पास बस तुम अपना काम याद रखो इतना तैयार करो कि हमें भी लगे कि हमने कुछ किया है इतना मालिश करो कि उसके रोम-रोम खिल उठे संगमरमर की मूर्ति जैसी निखर जाए इतना नहालाओ कि उसके रोम-रोम में खुशबू भर जाए इतना पेय पिलाओ कि सेक्स उसकी आखों से लेकर उसके रोमो में बस जाए बस इतना हो गया तो काम बन गया समझो फिर तो यह दुनियां उसके कदमो में होगी और हम उसपर राज करेंगे यह जान लो कि सखी ही हमें इस दुनियां में राज करने के लाएक बना सख्ती है और कोई नहीं बस तुम अपना काम ठीक से करो 

रूपसा अपने हाथों से गुरु जी को अब भी सहला रही थी और बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रही थी एक ईर्ष्या उसके मन में उठी थी पर बोली कुछ नहीं हाँ… वो जरूर सखी को तैयार कर देगी और वो भी इतना कि सखी मर्द के लिए तरस जाए एक के बाद एक मर्द भी उसे खुश नहीं कर सके वो जानती थी कि उसे क्या करना है वो तैयार थी मंदिरा भी उसके साथ थी वो एक ऐसी आग उसके तन में जगा देंगे कि वो खुद को नहीं रोक पाएँगी फिर देखते है कि सखी क्या गुल खिलाएँगी 


तभी गुरु जी ने उसकी कमर पर एक थपकी दी और जाने का इशारा किया रूपसा अपनी हथेलियों को बड़े ही तरीके से उनके शरीर पर से खींचते हुए बड़े ही नाटकीय अंदाज में उनको देखते हुए कमरे से बाहर की ओर चल दी उसे पता था कि अब उसका काम क्या था वो जल्दी में थी बाहर आते ही उसकी नजर सीढ़ियो की ओर उठ गई थी जहां सखी का कमरा था 

(रूपसा और मंदिरा ने उसे क्या कहा और कैसे तैयार किया वो रहने देते है वो सब आगे स्टोरी में आ जाएगा लेट अस नोट काउंट दा ट्रीस लेट अस ईट दा फ्रूट्स )

शाम को कामया नहा धोकर तैयार थी उसे गुरु जी के पास जाना था मंदिरा और रूपसा उसके पास थी बहुत कुछ बताया था उसे बस एक झिझक थी उसके अंदर और एक डर था गुरु जी का सबके साथ और अकेले में गुरु जी का रूप वो देख चुकी थी पर उसे तो मजा ही आया था वो तो चाहती ही थी कि उसका शरीर को सुख मिले पर इस सुख की कल्पना उसने नहीं की थी हाँ और गुरु जी से तो बिल्कुल नहीं की थी कैसे गुरु जी ने उसे नीचा दिखाया था जैसे उसके पास कुछ है ही नहीं कितने लोग उसके दीवाने थे क्या उसका शरीर गुरु जी को उत्तेजित नहीं करता होगा क्या वो दिखने में इतनी बुरी है उसे तो बड़ा घमंड था अपने ऊपर कितनी सुंदर दिखती थी वो हर कुछ तो ठीक था उसका फिगर से लेकर रंग तक क्या कमी है उसमें जो कुछ मंदिरा ने और रूपसा ने उसे बताया था क्या वो जरूरी है एक औरत के लिए उसका शरीर काफी नहीं है, , किसी को उत्तेजित करने को 


शायद नहीं वो यह काम तो गुरु जी के साथ नहीं कर पाई थी बल्कि गुरु जी ने तो एक बार भी ऐसा कुछ नहीं किया था कि उसे लगे कि वो उत्तेजित थे बस उनके छोटे ही वो खुद पागल हो उठी थी रूपसा और मंदिरा ने कितनी कोशिश की थी उनका लिंग को खेलते हुए उत्तेजित करने का पर हुआ तो कुछ नहीं तो क्या है इस लीला का अंत और क्या चाहते है गुरु जी उससे कामया खुद सोचते हुए और मंदिरा और रूपसा के साथ गुरु के रूम की ओर बढ़ रही थी उसी फ्लोर में ही वो कही बैठे थे यह मंदिरा और रूपसा को ही मालूम था आज का ड्रेस उसका वैसा ही था कुछ अलग नहीं था वही महीन सा कपड़ा दोनों कंधे से नीचे घुटनों तक आता था कमर में गोल्डन करधनी थी और कपड़े को गोलडेन चैन से साइड और आगे पीछे की और आपस में जोड़ा गया था कामया को आज अपने कपड़ों से कोई दिक्कत नहीं था हर कोई ऐसा ही कपड़ा आश्राम में पहेंटा त और इससे भी खुला हुआ था रूपसा और मंदिरा तो साइड में पिन अप भी नहीं करती थी बस सामने से ही थोड़ा सा अटका रखा था उनका तो पूरा शरीर ही कपड़े से बाहर झाँक रहा था गोरा रंग और उसपर कयामत को भी मात देने वाला शरीर था दोनों का शायद ही कोई मर्द इन दोनों महिलाओं को देखकर अपने आपको रोक पाए कामया के दिल में भी एक ईर्ष्या ने जनम ले लिया था गुरु जी को भी यह दोनों पसंद थी और हो भी क्यों ना गजब का शरीर था उनका एकदम साँचे में ढला हुआ हर अंग कुछ कहता था हर एक अंग खिला हुआ था एक आमंत्रण देता हुआ चलने का ढंग इतना मादक था कि देखते ही बनता था कामया तो डरी हुई सी चल रही थी पर उन दोनों का हर स्टेप इतना सटीक था की शायद जमीन भी उनको अपने ऊपर चलने से रोक ना पाती जाँघो की झलक से कामया भी मंत्रमुग्ध हो उठी थी चलते में भी वो दोनों कामया को कुछ ना कुछ समझाती हुई ही आगे बढ़ रही थी 


मंदिरा - ध्यान रखना रानी साहिबा आज गुरु जी को चित कर देना जैसा वो चाहते है और जैसा हमने आपको सिखाया है करना कोई शरम वरम मत करना फिर देखना गुरु जी आपके अलावा कुछ नहीं सोचेंगे बस एक बार उनका मन भर जाए फिर देखना क्या-क्या सिखाते है आपको वैसे भी आप बहुत खूबसूरत है 

रूपसा- हाँ वो तो है तभी तो गुरु जी का दिल आया है आप पर नहीं तो कौन अपनी पूरी संपत्ति किसी को दे देता है और तो और आपको तो उनका पूरा ध्यान रखना भी चाहिए नहीं तो उनको कैसा लगेगा, 

मंदिरा बिल्कुल बस जैसा हमने आपको बताया है वो करती जाना बिल्कुल नहीं सोचना कि गुरु जी को क्या लगेगा 

रूपसा- ठीक है ना कि कुछ और करेंगी ना 
और दोनों हाथों से कामया के चहरे को अपने पास खींचकर एक हल्का सा चुंबन उसके गालों पर कर दिया था 

कामया ने देखा था कि वो लोग एक बंद दरवाजे के सामने खड़े थे और फिर मंदिरा ने भी वही किया उसे एक हल्का सा चुंबन दिया और दरवाजा खोलने लगी थी 

कामया का पूरा शरीर सनसना रहा था एक अजीब सी खुशी और एक घबराहट ने उसके पूरे शरीर को जकड़ रखा था अंदर घुसते समय उसे एक बार अपने पुराने दिनों की बात याद आ गई थी जब उसे इसी तरह से कामेश के कमरे में सजाकर रखा गया था उसके लिए आज भी कुछ वैसा ही रोमचित सा था कामया का मन और शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना ने घर कर लिया था पर शरम के मारे कुछ ना कह पाई थी वो दरवाजा खुलते ही वो लोग एक बहुत बड़े कमरे में दाखिल हुए दूर एक कोने में गुरु जी एक बड़े से पलंग पर बैठे हुए थे वही सफेद रंग की धोती और अंगरखा डाल रखा था उन्होंने कामया और दोनों महिलाओं को देखकर गुरु जी कुछ सम्भल कर बैठ गये थे और एकटक कामया की ओर देखते रहे कामया पहले तो थोड़ा सा घबराई हुई थी पर जैसे ही रूपसा ने उसके कमर पर एक चिकोटी काटी वो अकड़कर चलने लगी थी जैसे कोई मॉडल चलती है अपनी टाँगो को बहुत ही तरीके से रखते हुए गर्दन एकदम सीधी किए हुए आखों में एक नशा सा लिए हुए एक मंद सी मुश्कान बिखेरती हुई कामया एक-एक पग रखती हुई गुरु जी की ओर एकटक देखती हुई आगे बढ़ती रही चाल ऐसी थी कि हिरनी भी घायल हो जाए अदा ऐसी थी कि कोई भी वेश्या भी मात खा जाए शरीर के घूमने की अदा ऐसी थी कि सपा भी मात खा जाए 


गुरु जी एकटक कामया को देखते रहे और एक मंद सी मन को मोहने वाली मुश्कान को बिखेरते हुए कामया के साथ-साथ चलती हुई रूपसा और मंदिरा की ओर देखते रहे पास आते ही रूपसा और मंदिरा ने आगे बढ़ कर गुरु जी को प्रणाम किया पर कामया अपनी जगह पर ही खड़ी रही अपनी एक टाँग को थोड़ा सा आगे करते हुए ताकि उसकी जाँघो का आकार गुरु जी को साफ-साफ दिखाई दे 

गुरु जी ने हँसते हुए 
गुरु जी- आओ सखी कैसी हो बहुत चेंज आ गया है तुममे हाँ… 

कामया- जी 

गुरुजी- गजब कर दिया भाई रूपसा और मंदिरा तुमने तुम्हें तो इनाम मिलना चाहिए आओ इधर आओ 


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