Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

रूपसा और मंदिरा एक साथ गुरुजी के पास खड़ी हो गई थी और गुरु जी के हाथों को अपनी जाँघो पर महसूस करने लगी थी . रूपसा और मंदिरा एक साथ कामया की ओर पलटी थी कामया वही किसी माडेल की तरह खड़ी थी अब तक जैसे उसे किसी ने स्टॅच्यू कर दिया था पर नजर गुरु जी की हथेलियों की ओर ही थी रूपसा और मंदिरा की गोरी गोरी जाँघो को गुरुजी बहुत ही प्यार से सहलाते हुए अपनी दोनों बाहों को उनकी कमरा पर कस लिया था और अपने गाल को उसके पेट पर रखकर घिसने लगे थे कामया खड़ी-खड़ी गुरु जी को देखती रही उसके अंदर एक ईर्ष्या जाग उठी थी उसके सामने ही गुरु जी जिस प्रकार दोनों को प्यार कर रहे थे और उसे नजर अंदाज कर रहे थे वो उसे अच्छा नहीं लगा था वो तो यह सोचकर आई थी कि गुरु जी उसके साथ कुछ करेंगे पर यहां तो बात ही उल्टी निकली थी कामया खड़े-खड़े थक गई थी और जिस तरह वो खड़ी थी उसे आदत नहीं थी और अपने सामने जिस तरह का खेल गुरु जी और वो दोनों महिलाए खेल रही थी वो भी उसे अच्छा नहीं लग रहा था इतने में गुरु जी ने कहा -

गुरु जी- बैठो सखी खड़ी क्यों हो 

कामया ने एक बार आस-पास देखा पर वहाँ सिवाए गुरु जी के आसान के अलावा कुछ नहीं था और वहां तो यह खेल चल रहा था वो खड़ी-खड़ी सोच ही रही थी की 

गुरु जी- बैठो सखी यहां बैठो हमारे पास तुम अब निखर रही हो बस थोड़ा सा और जरूरत है रूपसा और मंदिरा बहुत अच्छी और कर्तव्यनिष्ठ शिष्या है 
कहते हुए गुरु जी ने अपने एक हाथ से उसकी कलाई पर कस लिया था गरम-गरम हाथों के स्पर्श से एक बार तो कामया उत्तेजित हो उठी पर हल्के से मुस्कुराती हुई गुरु जी के पास ही बैठ गई थी उसके सामने मंदिरा थी और साइड में गुरु जी गुरु जी के दूसरे साइड में रूपसा थी धीरे-धीरे दोनों के ड्रेस खुलने लगे थे एक-एक अंग निखारा हुआ था दोनों का रंग के साथ-साथ मादकता टपक रहा था उनके शरीर पर गुरु जी का हाथ जैसे-जैसे उनके शरीर पर घूम रहा था वो दोनों एक साथ गुरु जी से और ज्यादा छिपकने की कोशिश करती जा रही थी कामया अपने सामने होते इस खेल को बहुत नजदीक से ना सिर्फ़ देख रही थी और अपने अंदर की उत्तेजना को किसी तरह से दबाए हुए थी कामया के देखते-देखते वो खेल आगे बढ़ने लगा था 

गुरु जी भी जिस तरह से उन महिलाओं को छेड़ रहे थे उससे कामया के शरीर में आग भड़क रही थी रूपसा उसके बिल्कुल सामने खड़ी थी और गुरु जी के हाथ उसके सामने रूपसा के नितंबों को छूते हुए ऊपर की ओर उठ रही थी रूपसा सिसकारी भरती हुई गुरु जी की ओर मूड गई थी कामया बहुत नजदीक से रूपसा के शरीर को देख रही थी गोरा रंग और बेदाग शरीर की मालकिन थी वो बालों से भरे हुए हाथ गुरु जी के उसके शरीर के रोमो को छूते हुए ऊपर उसकी चुचियों की ओर बढ़ चले थे उसकी चूचियां भी आगे की ओर तनी हुई थी और उसकी सांसों के साथ-साथ ऊपर-नीचे हो रही थी कामया अपनी सांसों को किसी तरह से कंट्रोल किए हुए ना चाहते हुए भी उसका हाथ उठ कर रूपसा के शरीर को स्पर्श कर ही गया था उसकी कमर पर बहुत ही हल्के और नाजुक तरीके से जैसे उसे डर था कि कही उसे पता ना चल जाए पर उसके हाथ जैसे ही रूपसा की कमर पर टकराए थे गुरु जी के साथ साथ रूपसा ने भी एक बार कामया की देखा और फिर वही उत्तेजना भरी सिसकारी लेती हुई रूपसा अपने आप में घूम हो गई थी पर गुरु जी .........

गुरुजी- अपने आपको सम्भालो सखी इस खेल में आपने आपको जितना तुम कंट्रोल करोगी उतना ही तुम एश्वर्य को प्राप्त करोगी और तुम उतना ही कामुक और दर्शनीय बनोगी 

कामया- … 
कामया कुछ ना कह पाई थी पर अपने हाथों को वापस खींच लिया था और बैठी बैठी रूपसा को और पास में मंदिरा को भी देखती रही अपने मन को किसी तरह से मनाने की कोशिश करती रही पर मन के साथ-साथ शरीर भी अब जबाब देने लगा था वो अपने आपको संभालती क्या वो तो उस खेल का हिस्सा बनने को तैयार थी बस एक शरम और झीजक के रहते वो रुकी हुई थी एक नजर गुरु जी की ओर डालते ही उसका हाथ वापस रूपसा पर चला गया था उसकी कमर पर और धीरे धीरे उसे सहलाती हुई दूसरे हाथ को गुरु जी के कंधों पर भी रख दिया था और गुरु जी से सट्ने की कोशिश करने लगी थी गुरु जी की नजर एक बार कामया की ओर उठी थी और हल्के से मुस्कुराते हुए अपने खेल में लगे रहे रूपसा को तो जैसे फरक ही नहीं पड़ा था वो खड़ी हुई सिर को ऊँचा किए हुए गुरु के हाथों का मजा लेती रही और आगे बढ़ कर अपने शरीर के निचले हिस्से को गुरु जी के कंधों पर और सीने पर रगड़ने लगी थी मंदिरा का भी यही हाल था दोनों उत्तेजना से भरी हुई थी और सांसो के साथ-साथ अब तो उनके मुख से अलग अलग आवाजें भी निकलने लगी थी 

रूपसा- और करो गुरु जी आज तो आपके स्पर्श में कोई जादू हो गया है 

मंदिरा - बस गुरुजी अब और नहीं रहा जाता अब तो कृपाकर दो 
और कहते हुए मंदिरा झट से नीचे बैठ गई थी और गुरुजी की धोती को खींचती हुई अलग करने लगी थी गुरुजी के होंठों पर वही मधुर मुश्कान थी और अपने पास बैठी कामया की ओर देखते हुए अपने होंठों को उसकी ओर बढ़ा दिया था कामया एक टक मंदिरा की देख रही थी रूपसा भी अब बैठ गई थी पर अचानक उसने गुरुजी को अपनी ओर हुए देखते हुए देखा तो वो थोड़ा सा सिहर गई थी उत्तेजित तो वो थी ही पर गुरुजी की ओर देखते ही उसे गुरु जी की ओर से जो निमंत्रण मिला था वो उसे ठुकरा नहीं सकी झट से अपने होंठों को उनके होंठों पर रख दिया था और धीरे-धीरे उनके होंठो को अपने होंठों से दबाए हुए चूसती रही अपनी जीब से उनके होंठों को चूसती रही उसकी पकड़ गुरुजी के कंधों पर कस्ती रही और पास बैठी रूपसा के सिर पर भी उसकी गिरफ़्त कस गई थी रुपसा और मंदिरा अपने काम में लग गई थी गुरुजी के लिंग को पकड़कर बारी- बारी से चूसते हुए अपने चुचों को गुरु जी के पैरों पर घिसते हुए अपने हाथों को उनके सीने तक घुमाने लगी थी 

कामया अपने पूरे मन से गुरु जी के होंठों का रस पान करने में जुटी हुई थी उसे किसी बात की चिंता नहीं थी और नहीं कोई डर था वो एक बिंदास लड़की की तरह अपने काम को अंजाम दे रही थी पास बैठी हुई रूपसा और मंदिरा क्या कर रही है उसे पता नहीं था पर उसे तो सिर्फ़ गुरु जी से ही मतलब था वो चाहती थी कि गुरु जी जिस तरह से रूपसा और मंदिरा को छू रहे है उसे भी छुए पर गुरु जी के हाथ अब भी उनके सिर पर और कंधों पर घूम रहे थे कि अचानक ही उसका हाथ गुरु जी हाथों से टकराया था रूपसा के सिर पर एक ही झटके में कामया ने उनके हाथों को अपनी हाथों में दबा लियाया था और खींचती हुई अपनी जाँघो पर लाकर रख दिया था गुर जी ने भी कोई आपत्ति नहीं किया था और धीरे-धीरे कामया की जाँघो को सहलाने लगे थे 


कमी अत्ोड़ा सा आतुर हो उठी थी वो अपने दूसरे हाथों को रूपसा के सिर पर से हटते हुए गुरु के साइन पर रखती हुई उन्हें अपनी और खींचने लगी थी और धीरे-धीरे गुरु जी के दूसरे हाथ की औ र्बाद रही थी पर वो थोड़ा सा दूर था मंदिरा के शरीर का अवलोकन करते हुए पर वो हरी नहीं गुरुजी के साइन को बड़े ही प्यार से सहलाती हुई अपने होंठों को उसके होंठों से जोड़े हुए गुरु जी के साइन पर धीरे से अपने नाखून को गड़ा दिया था अचानक ही हुए इस तरीके के हमले को गुरु जी नहीं समझ पाए थे और वो हाथ जो की मंदिरा के ऊपर था उससे उन्होंने कामया के हाथों पर रख दिया था बस कामया यही तो चाहती थी झट से उस हाथ पर भी कब्जा कर लिया था उसने और खींच कर अपनी चुचियों पर ले आई थी अब उसके चुंबन का तरीका भी बदल गया था काफी उत्तेजक और अग्रेसिव हो गई थी वो नीचे बैठी हुई रूपसा और मंदिरा भी यह सब देख रही थी और एक विजयी मुश्कान थी उनके चेहरे पर कामया ने यह सब नहीं देखा था 

कामया अपने हाथों के दबाब से गुरु जी के हाथों को अपनी चुचियों से हटाने नहीं दे रही थी और एक हाथ से गुरु को खींच कर अपने होंठों से जोड़े रखा था कि उसे गुरु जी की आवाज अपने मुख के अंदर सुनाई दी थी 

गुरु जी- रूको सखी रूको इतना आतुर ना हो अभी बहुत कुछ देखना और जानना है आपको देखो रूपसा और मंदिरा भी तो है हम तो सबके है और सब हमारे है आओ तुम्हें कुछ दिखाना है कहते हुए गुरु जी ने एक बार उन दोनों की ओर देखा और इशारा किया 

गुरु जी- आओ रूपसा मंदिरा हमारी सखी को दिखाओ कि तुम क्या कर सकती हो जाओ और वो खेल खेलो 
रूपसा और मंदिरा एक झटके से उठी और अपने कपड़ों को उठाकर गुरु जी की ओर देखने लगी थी कामया अपने हाथों के बीच में गुरु जी को पकड़े हुए दोनों की ओर देखती ही रह गई थी कि गुरु जी ने भी अपनी धोती बाँध ली थी और कामया को उठने को कहा 

गुरु जी- आओ सखी तुम्हें कुछ दिखाना है 

कामया वैसी ही उठ गई थी उत्तेजना से भरी हुई थी वो उसे बड़ा ही अजीब लग रहा था कि गुरु जी आज क्या करने वाले है रूपसा और मंदिरा जो कि अभी इतनी उत्तेजित लग रही थी इतना नार्मल कैसे हो गई थी वैसे ही बिना कपड़ों के खड़ी थी कोई शरम या हया नहीं थी उनमें खड़ी-खड़ी कामया की ओर मुस्कुराती हुई देख रही थी कामया भी उठकर उनके साथ चल दी थी 

गुरजी के दोनों ओर रूपसा और मंदिरा थी और कामया पीछे थी घुमावदार गोल गोल नितंब उसके सामने बलखाते हुए चल रहे थे कितना सुंदर और कामुक सीन था वो और गुरु जी उसके दोनों कंधों पर अपनी बाँहे रखे उसे कमरे से लगे दूसरे कमरे की ओर चल दिए थे वहां अंधेरा था पर दिख रहा था बिल्कुल साफ सुथरा और कोई आवाज नहीं थी एक आसान भी था वो शायद गुरु जीके बैठने की जगह थी वो कमरे में आते ही रूपसा आगे बढ़ी और एक स्विच को ओन कर दिया था और एक परदा को खींचकर एक दीवाल से हटा दिया था पर्दे के हट-ते ही कामया की आखें फटी की फटी रह गई थीदूसरे कमरे का हिस्सा दिख रहा था 

कमरे में हल्की सी रोशनी थी और बहुत से मर्द और औरत बिल्कुल रूपसा और मंदिरा जैसी हालत में ही थे पर सिर पर मास्क चढ़ा हुआ था बस होंठों की जगह और नाक की जगह खाली थी और शायद आँखों पर भी कुछ थोड़ा बहुत ढका हुआ था क्योंकी उनको देखकर लगता था कि उन्हें साफ नहीं दिख रहा होगा पर लगे थे एक ही काम में बस जो भी हाथों में आया उसे ही चूम चाट रहे थे एक से एक तरीके की महिलाए और पुरुष थे वहां पर सुंदर सुडोल और बेढांगी भी वैसे ही मर्द भी मोटे और थुलथुले और कसे हुए शरीर के मलिक भी थे पर थे सभी बेख़ौफ़ और सेक्स में डूबे हुए एक दूसरे से गुथे हुए वही नीचे गद्दे पर और कोई बेड पर तो कोई खड़े हुए बस एक रोमन औरगी का सीन था वो पूरा का पूरा रूपसा और मंदिरा ने घूमकर एक बार कामया की ओर देखा और फिर गुरु जी को खींचकर उसके गालों और होंठों को चूमते हुए दोनों उनके सामने से चली गई थी कामया बेसूध सी खड़ी हुई कमरे के उस हिस्से को देख रही थी कि गुरु जी की आवाज उसके कानों से टकराई थी 

गुरु जी- ऐसे क्या देख रही हो सखी वो एक ऐसा खेल है जो इस संसार में र्रोज और हर कही होता है कोई बंद कमरे में करता है तो कोई खुले में कोई इच्छा से करता है तो कोई अनिक्षा से तो कोई इस खेल में इतना डूबा हुआ है कि उसे किसी की चिंता नहीं है या इस खेल की इतनी आदत लग चुकी होती है कि वो भूल जाता है की उसके हाथों में जो कोई भी आया है वो कौन है शायद यहां पर कोई अपनी ही घर वाली के साथ ही वो खेल खेल रहा है या अपनी ही किसी रिश्तेदार के साथ या जो भी हो पर हर किसी को अपने शरीर की आग को शांत करना होता है पर एक बात जो देखने लायक है वो है कि किसी का भी अपने शरीर पर नियंत्रण नहीं है तुम देखो वो थुलथुलसा आदमी देखो 
और खींचकर कामया को अपने नजदीक खड़ा कर लिया था उसके कंधों पर अपनी बाँहे रखे हुए वो कमरे के एक हिस्से में अध्लेटे से एक आधेड़ आदमी की ओर इशारा कर रहे थे 


गुरु जी- देखो उसे कितना थक गया है पर फिर भी कमरे से बाहर नहीं आना चाहता है अब भी उसे इक्षा है संभोग की कि और करे पर उसका शरीर उसका साथ नहीं दे रहा है 

इतने में उसने कमरे में रूपसा और मंदिरा को आते देखा था कमरे में आतेही जैसे जान आ गई हो एक ऊँची सी आवाज उस कमरे में गूँज गई थी और रूपसा मंदिरा का स्वागत जैसे सभी लोग उठकर करना चाहते हो उन दोनों के पीछे-पीछे कुछ पुरुष भी उस कमरे में दाखिल हुए थे बलिष्ठ और पहलवान टाइप के चेहरा कसा हुआ और सिर्फ़ एक लंबा सा कपड़ा कमर के चारो ओर बँधा हुआ था रूपसा और मंदिरा तो बिना कपड़ों के ही उस कमरे में दाखिल हुई थी और जिस तरह से दोनों ने घूमकर एक चक्कर लगाया था उस कमरे में जैसे उनको आदत थी इस तरह का करने की पीछे-पीछे उन पुरषो ने भी एक बार घूमकर उसकमरे में बैठी हुई और लेटी हुई महिलाओं की ओर देखते हुए कमरे के बीचो बीच में आके कर खड़े हो गये थे

सभी एक साथ उनकी ओर भागे थे जैसे की होड़ लगी हो कि कौन पहले पहुँचता है पुरुष तो आगे थे पर महिलाए कुछ पीछे थी पर थे सभी जल्दी में पुरषो ने रूपसा और मंदिरा को घेर लिया था और जल्दी बाजी में कुछ लोग उनको उठाकर अपने हिस्से में ले लेना चाहते थे और महिलाए एक के बाद एक करके उन पुरषो के पीछे पड़ गई थी छीना झपटी का वो खेल उन्मुखता के शिखर पर कैसे और कब पहुँच गया था देखते ही देखते पता ही नहीं चला पर हर कोई किसी तरह से अपने आपको संतुष्ट करने की होड़ में था पर एक बात जो बिल्कुल अलग थी वो थी कि कमरे में आए हुए रूपसा मंदिरा और उनके साथ आए उन चार पुरुषों की पता नहीं क्या बात थी उनमें जो हर पुरुष जो कि मंदिरा और रूपसा के पीछे पड़े थे एक-एक कर शांत होते चले गये पर रूपसा और मंदिरा के चहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी वो अब भी अपनी आदाए बिखेरती हुई बिल्कुल पहले जैसी ही खड़ी थी और लेटी हुई थी पर उत्तेजना की लहर सिर्फ़ चेहरे के सिवा और कही नहीं दिख रहा था रूपसा और मंदिरा को उठाकर चार पाँच पुरषो ने एक बड़े से गद्दे पर लिटा लिया था और जिसे जहां किस करते बन रहा था और जिसे जो करते बन रहा था कर रहे थे और रूपसा और मंदिरा खिलखिलाते हुए हँसते हुए अपने शरीर का हर अंग उनके सुपुर्द करती जा रही थी, 


कोई भी जगह नहीं बची थी जहां उन पुरषो ने किस नहीं किया था या फिर अपनी जीब से चाट कर उसका स्वाद ना चखा हो मंदिरा और रूपसा एक के बाद एक पुरषो को अपने हाथों से अपने होंठों से और अपनी योनि के अंदर होने से नहीं रोक रही थी वो तो यहां आई ही इसलिए थी कि एक-एक करके हर पुरष को शांत कर सके और उनकी तमन्नाओं को जगा कर उनको परम सुख की अनुभूति दिला सके और वो दोनों इसकाम में निपुण थी उनका चहकने का ढंग इस तरह था कि सोया हुआ सन्यासी भी शायद जाग जाए किसी भी योगी के तप को हिला सकती थी यह दोनों अंगो को मोड़कर या दिखाकर जिस तरह से वो इस खेल में उलझी थी वो देखने लायक था कामया इस तरफ खड़ी हुई उन दोनों को और उन पुरषो को देखती हुई गुरु जी से चिपक कर खड़ी थी उसे पता भी नहीं चला था कि कब गुरुजी का हाथ उसके गोल गोल और नरम कसे हुए उभारों पर आ गये थे जो बड़े ही आराम से उन्हें सहलाते हुए कामया से कुछ कह रहे थे 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

गुरुजी- देखो सखी वो लोगो का नियन्त्रण कुछ नहीं है अपने शरीर पर कैसे एक के बाद एक ढेर होते जा रहे है उनके शरीर में इतनी भी ताकत नहीं बची है कि दोबारा कुछ कर सके क्या तुम इन जैसी बनना चाहती हो नहीं सखी में तुम्हें यहां इसलिए नहीं लाया हूँ में चाहता हूँ कि तुम इस खेल में इतना निपुण हो जाओ कि हर मर्द हर औरत तुम्हें पाने की इच्छा रखे पर तुम अपनी मर्ज़ी की मालिक रहो इनकी मर्ज़ी की नहीं हाँ… सही सुना तुमने में चाहता हूँ कि तुम अपनी मर्ज़ी की मालिक रहो अपने शरीर को इतना अच्छा बनाओ कि मर्द देखकर ही तुम्हें पाने की इच्छा करे तुम्हारे हाथ लगाने भर से ही वो झड़ जाए तुम्हें देखकर ही वो झड़ जाए नाकि तुम उनको देखकर उत्तेजित होओ तुममे वो बात है में जानता हूँ पर तुम्हें बहुत कुछ सीखना है सखी बोलो मेरा साथ दोगी ना … … 

और गुरु जी ने उसकी चुचियों को धीरे से दबाकर उसके कंधों को पकड़कर अपनी और मोड़ लिया था कामया उत्तेजना के शिखर पर थी उसे एक मर्द की जरूरत थी और अभी अभी जो वो देख रही थी और गुरु जी के हाथों के स्पर्श ने जो उसके साथ किया था वो एक अलग सा अनुभव था उत्तेजना में उसके गले से आवाज नहीं निकल रही थी गला सूखा हुआ था और एकटक गुरुजी की ओर देखती हुई कामया अपने गालों पर गुरु जी के कोमल हाथों का स्पर्श पाते ही सिर्फ़ आखें बंद किए हुए सिर को हिलाकर अपना समर्थन भर दे पाई थी 

गुरु जी- ठीक है सखी आज से तुम हमेशा मेरे साथ ही रहोगी तुम्हें जो चाहिए मुझे बताना कोई झिझक नहीं करना में तुम्हारा हूँ इस संसार का हूँ पर पहले तुम्हारा फिर बाद में किसी और का ठीक है 
और कहते हुए अपने होंठों को उसके होंठों से जोड़ लिया था 

कामया अभी आतूरता में थी ही झट से गुरूरजी के होंठों को अपने होंठों के सुपुर्द करके उसके बाहों में झूल गई थी 

कामया कोशिश में थी कि जितना हो सके गुरुजी से सट कर खड़ी हो जाए उसका रोम रोम जल रहा था दीवाल के दूसरे तरफ जो खेल चल रहा था वो एक अनौखा खेल था अपनी जिंदगी में उसने इस तरह का खेल नहीं देखा था उसका शरीर उस खेल में इन्वॉल्व होने को दिल कर रहा था उसे एक साथ अपने जीवन में आए हर मर्द के बारे में याद दिला रहा था 

यादे कुछ ना करे पर शरीर और मन को झंझोर कर रख देती है कामया का भी यही हाल था हर वो पल जो उसने भीमा लाखा और भोला के साथ बिताए थे एक-एक पल उसे याद आते जा रहे थे और गुरुजी के साथ चिपकते हुए वो सिर्फ़ एक ही इच्छा रखती थी कि गुरुजी उसके साथ भी वही खेल खेले पर गुरुजी का अंदाज कुछ अलग था अब भी कोई जल्दी बाजी नहीं थी और ना ही मर्दाना भाव ही था उनमें सिर्फ़ हल्के हाथों से उसे सिर्फ़ सहारा दिए हुए थे 

कामया- गुरुजी प्लीज कुछ कीजिए ना बहुत पागलपन सा लग रहा है 

गुरुजी- नहीं सखी तुम सिर्फ़ इस खेल के लिए नहीं हो तुम्हें बहुत कुछ सीखना है यहां बैठो 
और कहते हुए कामया को साथ लिए हुए वहां रखे हुए आसन पर बैठ गये थे कामया उनसे चिपक कर बैठ गई थी उसका हाथ गुरुजी के सीने पर घूम रहे थे और रह रहकर उसका हाथ जान भुज कर उसके लिंग तक पहुँचा रही थी कामया बहुत उत्तेजित थी और गुरुजी सिर्फ़ उसे सहारा दिए हुए सामने दीवाल की ओर देख रहे थे कामया एकटक गुरुजी की ओर देखती रही और अपने काम के अंजाम के इंतजार में थी कि गुरुजी बोले

गुरु जी- देख रही हो इन महिलाओं और मर्दो को सिर्फ़ एक बार या दो बार में ही कितना थक गये है शायद अब उठाकर इन्हें मार भी डालो तो पता नहीं चलेगा और नहीं कुछ सख्ती बाजी है कि कुछ कर भी सके पर हमारी शिष्या और शिष्यों को देखो कितने जोरदार तरीके से अब भी इस खेल का पूरा आनंद ले रहे है है ना 

कामया की नजर एक बार फिर दीवाल की ओर उठी थी वहां का खेल अब अलग था जितने भी मर्द और औरत बाहर के थे सब नीचे पड़े हुए थकान से चूर थे और गहरी सांसें भरते हुए अपने आपको व्यवस्थित कर रहे थे पर रूपसा मंदिरा और चार मर्द जो कमरे में आए थे वो अब भी खड़े हुए थे और उन लोगों की ओर देखते हुए उस कमरे में घूम रहे थे मर्द सिर्फ़ औरतों को छूकर देख रहे थे और रूपसा और मंदिरा मर्दो को छूकर देख रही थी पर कोई भी हिलने की हालत में नहीं था 

पर फिर भी कुछ लोगों में इतनी हिम्मत तो थी कि पास आने वालों का मुस्कुरा कर स्वागत तो कर ही रहे थे महिलाओं से ज्यादा थके हुए मर्द थे ना कोई हिल रहा था और नहीं कोई मुस्कुरा रहा था महिलाए तो चलो थोड़ा बहुत मुस्कुरा कर एक बार उनको देख भी लेती थी इतने में कामया ने देखा कि एक औरत शायद कोई 30 35 साल की होगी बहुत सुंदर शरीर नहीं था पर थी साँचे में ढली हुई मास ज्यादा था हर कही ऊपर के साथ उसका शरीर भी कुछ वैसा ही हो गया होगा उठकर उन चार मर्दो में से एक को अपनी ओर खींचा था उस मर्द ने भी बिना कोई आपत्ति के धीरे 
से उस महिला को अपनी बाहों में भर लिया था और उसके साथ सेक्स के खेल में लिप्त होता चला गया था धीरे-धीरे उन चारो मर्दो में से बचे हुए तीन मर्दो ने भी उसे घेर लिया था हर किसी के हाथ उसके शरीर पर घूमते चले गये थे हर एक मर्द उस महिला के अंगो को तराष्ते हुए फिर हल्के से उन्हें दबाते हुए अपने होंठों के सुपुर्द करते जा रहे थे वो महिला उन चारो मर्दो के बीच में घिरी हुई अपने आपको किसी सेक्स की देवी से कम नहीं समझ रही थी बहुत ही मजे से हर एक को सहलाती हुई उनका साथ दे रही थी हर चुंबन का और हर एक को उनके मसलने का और हर एक को उनके आकर्षण का जबाब देती जा रही थी उसके मुख से सिसकारी निकलती रही और वो चारो उससे रौंद-ते रहे 


कामया बैठी हुई हर एक हरकत को देखती जा रही थी और पास बैठे हुए गुरुजी को सहलाते हुए उनसे सटी जा रही थी गुरु जी सिर्फ़ उसके पीठ को सहलाते हुए उसे उत्तेजित करते हुए उसे अपने से सटा कर कुछ कहते जा रहे थे 

गुरुजी- देखो इस महिला को अपनी प्यास बुझाने को कितनी आतुर है घर में इसका पति उसे वो नहीं दे पाता है पर यहां सबकुछ उसे मिल रहा है यहां ऐसे लोगों को भीड़ है सखी उन्हें यह सब चाहिए जो उन्हें बाहर के समाज में नहीं मिलता यहां हर कोई कुछ ना कुछ माँगने आता है और में उनकी इच्छा और अभिलाषा को पूरा करता हूँ तुम्हें भी यही करना होगा अपने हर शिष्यो की मदद करनी होगी 

कामया- … >>>

गुरु जी- हाँ… हर शिष्य की चाहे वो कोई भी हो तुम्हें पता है विद्या भी यहां आई थी ईश्वार भी सभी यहां आए है धरम पाल भी उसकी पत्नी भी और उसकी बेटियाँ भी 
कामया … … 
तोड़ा सा चौंकी थी कामया 

गुरु जी- चौको मत सखी तभी तो मुझे इतना मानते है मुझे भी नहीं पता कि तुम्हारा पति किसका बेटा है तुम्हारे ससुर का कि इनमे से कोई पर में नहीं हूँ या पता नहीं शायद में भी हूँ पर इससे क्या फरक पड़ता है में तो इस पूरे आश्रम का मलिक हूँ तुम्हारे और इस आश्रम में रहने वाले हर एक पर मेरा हक है तुम पर तो ज्यादा ही देख रही हो उस महिला के साथ यह सब क्या कर रहे है 

और दीवाल की ओर अपनी उंगलियों को उठा दिया था कामया जो कि उस बात पर थोड़ा सा ठिठक गई थी और अपने आपको भूलकर उस बात पर ध्यान देदिया था पर जब उसकी नजर दीवाल पर गई थी तो वो चौंक गई थी उन चारो ने उस महिला को इस तरह से घेर लिया था कि वो कुछ भी नहीं कर सख्ती थी कर सख्ती थी … 
नहीं कहना चाहिए कि बड़े मजे ले रही थी वो एक ने उसकी योनि के अंदर अपने लिंग को उतार दिया था और वो नीचे लेटा हुआ था पीछे से दूसरे ने उसके गुदा द्वार पर अपने लिंग को घुसा दिया था और बाकी के बचे हुए दोनों अपने लिंग को उसके हाथों में पकड़ा कर बारी बारी से उसके मुख के अंदर अपने लिंग को करते जा रहे थे ये देखकर कामया की आखें फटी की फटी रह गई थी पर गुरु जी उसी तरह से शांत बैठे हुए उसकी पीठ को सहलाते हुए उसे बड़े प्यार से समझा रहे थे 

गुरु जी- देखा तुमने उस औरत को कोई दिक्कत नहीं हो रही है बल्कि उसे मजा आ रहा है देखो उसके चेहरे को देखो कितना सुख मिल रहा है उसे 

कामया ने देखा था हाँ… सही है उसके चेहरे को देखकर कोई भी कह सकता था कि उसे जो चाहिए था उसे मिल रहा था वो बड़े मजे से उनके लिंग को चूसती जा रही थी अपनी योनि को और गुदाद्वार के अंदर तक हर एक धक्के को बर्दास्त भी करती जा रही थी और अपने अंदर के उफ्फान को शांत करती जा रही थी वो चारों पुरुष मिलकर एक के बाद एक अपनी पोजीशन भी चेंज करते जा रहे थे और वो औरत भी उसका साथ दे रही थी उसको देखकर ही लगता था कि आज जो सुख वो भोग रही थी वो उसे अच्छे से और बड़े ही तरीके से भोग कर जाना चाहती है 

उसे भी कोई जल्दी नहीं है हर किसी को वो अपने अंदर तक समा लेना चाहती है कामया देख रही थी पर अपने हाथों पर काबू नहीं रख पा रही थी और पास बैठे गुरु जी के सीने को अपने हाथों से रगड़ती हुई उनसे सट कर बैठी थी गुरु जी भी उसे अपने से सटा कर धीरे-धीरे उसके चुचों की ओर अपने हाथ ले जा रहे थे कामया ने जैसे ही देखा कि गुरुजी उसके चुचों की ओर अपनी हाथ ले जा रहे थे उसने खुद ही अपने कंधों से अपने ड्रेस को उतार दिया और गुरुजी को एक खुला निमंत्रण दे डाला 

गुरु जी हँसते हुए कामया की ओर देखे और धीरे से उसके होंठों को अपने होंठों के अंदर लेकर धीरे-धीरे चुबलने लगे थे 
कामया की आखें बंद हो रही थी वो सेक्स के सागर में डूबने लगी थी और देखते ही देखते वो खुद गुरुजी की गोद में बैठने लगी थी गुरु जी ने भी कोई आपत्ति नहीं की और अपने होंठों को उसके होंठों से जोड़े हुए धीरे से उसके होंठों को अपने होंठों से दबाए हुए उसके गोल गोल चुचों को बहुत ही धीरे-धीरे मसलने लगे थे गुरु जी बिल्कुल उत्तावाले नहीं थे उतावली तो कामया थी चाह कर भी वो अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पा रही थी आधी गुरु जी की गोद में और आधी लेटी हुई कामया अपने होंठों को उठाकर गुरुजी को न्योता दे रही थी गुरुजी भी धीरे से अपने होंठों को उसके होंठों से जोड़ कर फिर से उसके होंठों को चुबलने लगे थे कामया आखें बंद किए हुए गुरुजी के हाथों का आनंद लेती हुई अपनी जीब को धीरे से गुरुजी की जीब से मिलाने की कोशिश में लगी थी 


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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

गुरुजी भी अब धीरे धीरे अपने आपको कामया के सुपुर्द करते जा रहे थे एक नजर अपने सामने वाली दीवाल पर डाले हुए अपनी बाहों में कामया को समेटने लगे थे कामया तो पूरी तरह से गुरुजी के सुपुर्द थी और बिना कुछ सोचे अपनी काम अग्नि को शांत करने की जुगत में लगी थी कामया का दिल तो कर रहा था कि गुरुजी को पटक कर उनके ऊपर चढ़ जाए पर एक शरम और झीजक के चलते वो अपने आपको रोके हुई थी 

गुरुजी भी बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे कोई जल्दी नहीं थी उन्हें अपने एक हाथ के बाद दूसरे हाथ को भी वो अब कामया की चूचियां पर रखते हुए उसकी ओर देखते हुए मुस्कुराते हुए उसे पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया था अब कामया बिल्कुल उनकी गोद में बैठी हुई थी उसका ऊपर का कपड़ा खुला हुआ था और कमर पर बँधे हुए चैन की वजह से वो कपड़ा अटका हुआ था पर किसी काम का नहीं था नीचे से सबकुछ उठा हुआ था और कोई भी अंग कपड़े से ढँका हुआ नहीं था पूरा शरीर साफ-साफ दिख रहा था और हर अंग सेक्स की आग में डूबा हुआ गुरु से आग्रह करता नजर आता था कि शांत करो और अपनी भूख को मिटाओ गुरुजी ने अपनी गोद में लिए कामया को एक बार उसकी ठोडी पकड़कर दीवाल की ओर नजर डालने को कहा 

कामया ने जब उस ओर देखा तो वो औरत एक मर्द के ऊपर लेटी हुई थी और पीछे से उसकी गुदा द्वार पर वो लंड घुसाए हुए था ऊपर का मर्द उसकी योनि के अंदर था और साथ के दो मर्द उसके आजू बाजू में खड़े हुए अपने लिंग को उसके हाथों में पकड़ाए हुए उसकी चुचियों पर घिस रहे थे और मंदिरा और रूपसा अपनी योनि को एक-एक करके उसके होंठों पर घिस रही थी रूपसा और मंदिरा पास खड़े उन दो मर्दो को भी छू रही थी और उनके शरीर से भी खेलती थी और वो औरत तो बेसूध सी पूरे खेल का आनंद ले रही थी क्या सेक्स का तरीका था उसका कितना सेक्सी और काम की उतावली थी वो देखते ही बनता था उसे कामया भी उसे देखकर और भी उत्तेजित हो गई थी झट से घूमकर एक बार फिर से गुरुजी की ओर बड़े ही सेक्सी तरीके से देखा था और 

कामया- बस गुरुजी और मत तड़पाओ मुझसे नहीं रुका जा रहा है मुझे शांत कीजिए प्लीज 

गुरुजी- इस तरह से कर पाओगी सखी तुम हाँ… 
और उसकी ओर देखते हुए धीरे से उसकी होंठों को चूम लिया था और एकटक उसकी ओर देखते रहे थे कामया को समझ नहीं आया था कि क्या जबाब दे पर अपने हाथों को गुरुजी के गालों पर घुमाकर सिर्फ़ देखती रही थी अर्ध नग्न आवस्था में बैठी हुई वो नहीं जानती थी क्या कहे 

गुरुजी- अपने अंदर सेक्स की इच्छा इतना जगाओ कि तुम अपने आपको इस खेल में माहिर कर लो और हर मर्द तुम्हारे सामने हार जाए सखी तुम हमेशा से ही मेरी पसंद रही हो शादी के समय तुम्हारा फोटो दिखाया था मुझे ईश्वर ने तभी में जान गया था तुम क्या हो और कहाँ तक तुम जा सकती हो तभी आज तुम यहां हो मेरे पास नहीं तो उसी घर में रहती और तुम्हें यहां सिर्फ़ उस कमरे तक आने की इजाजत होती कहो जो मैंने सोचा है करोगी ना 

कामया- जी … … 
और गुरुजी से सटती हुई उनके होंठों पर फिर से टूट पड़ी थी गुरुजी अब तक अपनी धोती से आजाद नहीं हुए थे पर कामया की उंगलियां अब धीरे धीरे उनकी धोती तक पहुँच रही थी और कमर पर बँधी हुई धोती उसकी उंगलियों में उलझ रही थी अपने आपको उनकी गोद से ना उठाते हुए कामया ने उनकी धोती को खोल लिया था किसी तरह और अपनी जाँघो से उनके लिंग को दबाने लगी थी कामया की योनि तो जैसे झरने को तैयार थी पानी की हल्की सी धार उसमें से बहते हुए उसे पूरा गीलाकर चुकी थी 

पर गुरुजी का लिंग अब भी ढीला ही था बहुत कुछ टेन्शन में नहीं दिख रहा था कामया एक बार गुरुजी की ओर देखती हुई धीरे से अपनी कमर को हिलाते हुए और उनके लिंग को अपनी जाँघो से दबाते हुए धीरे से नीचे की ओर होने लगी थी उसे पता था कि उसे क्या करना था और गुरुजी भी शायद जानते थे कि कामया अगला स्टेप क्या होगा वो वैसे ही मुस्कुराते हुए कामया की पीठ को सहलाते हुए उसे अपनी बाहों से आजाद करते रहे कामया ने धीरे-धीरे उनकी जाँघो के बीच में बैठी हुई अपनी उंगलियों से उनके लिंग को उठाकर एक बार देखा और धीरे से अपनी जीब को निकाल कर उसपर फेरा था अपनी निगाहे उठाकर एक बार गुरुजी की ओर देखते हुए वो फिर से अपनी जीब से उनके लिंग को धीरे-धीरे चूसती हुई अपने होंठों के बीच में ले गई थी उसकी आँखे गुरुजी पर ही टिकी हुई थी 

उसकी नजर को देखकर साफ लगता था कि वो कितनी उत्तेजित थी और अपना हर प्रयास गुरुजी को उत्तेजित करने में लगाने वाली थी जो कुछ भी रूपसा और मंदिरा ने उसे सिखाया हुआ था वो करने को बेताब थी उस कमरे में होने वाले खेल को वो इस कमरे में जीवित करना चाहती थी पर गुरुजी के चहरे पर कोई उत्तेजना उसे दिखाई नहीं दे रही थी पर बिना थके वो अपनी आखें गुरुजी पर टिकाए हुए उनके लिंग को धीरे-धीरे अपने होंठों और जीब से चूमते हुए उनकी जाँघो को अपने हाथों से और अपनी चूचियां से सहलाते जा रही थी गुरुजी के पैरों के अंगूठे उसकी योनि को छू रहे थे बैठी बैठी कामया आपनी योनि को उनके उंगुठे पर घिसती रही और अपने अंदर की आग को और भड़काती रही थी गुरुजी की नजर भी कामया पर टिकी हुई थी और धीरे-धीरे वो भी कामया होंठों के सामने झुकने लगे थे थोड़ा बहुत टेन्शन अब उनके लिंग में आने लगा था अपने उंगुठे से कामया की योनि को छेड़ने में उन्हें बड़ा मज आ रहा था 

कामया अपने पूरे जतन से गुरुजी के लिंग को चूसे जा रही थी और बीच बीच में अपने दाँत भी हल्के से गढ़ा देती थी गुरुजी हल्का सा झटका खाते थे तो कामया को बड़ा मजा आता था आखों में मस्ती लिए हुए थोड़ा सा मुस्कुराते हुए गुरुजी के लिंग से खेलती हुई कामया अब गुरुजी के सीने को भी हथेली से सहलाते हुए धीरे से उठी और उनके सीने को चूमती रही अपनी चुचियों से गुरुजी के लिंग को स्पर्श करती हुई कामया उनके निपल्स को अपने होंठों के बीच में लिए हुए चूमती जा रही थी जीब से चुभलते हुए उनपर भी दाँत गढ़ा देती थी गुरुजी अब तैयारी में थे पर कामया का इस तरह से उनके साथ खेलना उन्हें भी अच्छा लग रहा था अपनी सखी को अपने घुटनों के पास इस तरह से बैठे और उनको चूमते हुए वो देखते रहे अपने हाथों को धीरे से कामया की चुचियों पर रखा था उन्होंने फिर धीरे से मसलते हुए नीचे झुके थे और कामया के होंठों को अपने होंठो में दबा लिया था एक हल्की सी सिसकारी भरती हुई कामया उनके गले में लटक गई थी और अपनी जीब को उनकी जीब से मिलाते हुए उनके सीने में अपने आपको रगड़ती हुई जोर-जोर से सांसें ले रही थी गुरुजी की पकड़ अब उसके चुचो पर थोड़ा सा कस गई थी और कामया को अपने ऊपर गर्व हो रहा था वो अपने सामने गुरुजी को झुकाने में सफल हो गई थी कामया पूरे मन से तन से और अपने सारे हुनर से गुरुजी को खुश करने में लगी थी हर एक कदम वो संभाल कर और बड़े नजाकत से रखती हुई गुरुजी के चुंबन का जबाब देती जा रही थी गुरुजी भी थोड़ा बहुत आवेश में आ गए थे और धीरे से कामया को पकड़कर वही आसन में अढ़लेटा सा करते हुए उसके होंठों को चूम रहे थे कामया की जांघे खुलकर गुरजी के चारो ओर कसती जा रही थी और उनके लिंग का स्पर्श अब उसके योनि द्वार पर होने लगा था आम्या अपने अंदर उस लिंग को जल्दी से ले जाना चाहती थी 

गुरु जी- बहुत उत्तावाली हो जाती हो सखी तुम इतना उत्तावाली होना अच्छा नहीं है तुम्हें तो शांत रहना चाहिए 

कामया- बस गुरुजीी बहुत हो गया प्लीज अब अंदर कर दीजिए बहुत तड़प गई हूँ प्लीज 

और कहते हुए अपने होंठ वापस गुरुजी से जोड़ लिए थे गुरुजी भी उसे शांत करने में लग गये थे और धीरे बहुत धीरे से अपने लिंग को अंदर पहुचाने में लग गये थे गुरुजी जिस तरह से कामया को सिड्यूस कर रहे थे कामया सह नहीं पा रही थी अपनी कमर के एक झटके से ही उसने गुरुजी के लिंग को आधे से ज्यादा अपने अंदर उतार लिया था 

कामया- आआआआअह्ह बस अब करते रहिए प्लीज जल्दी-जल्दी 

गुरुजी उसे देखकर मुस्कुराए और आधी जमीन पर और आधी आसन पर पड़ी हुई कामया को एक बार नीचे से ऊपर तक देखा था बिल्कुल गोरा रंग और सचे में ढाला शरीर अब उसके हाथों में था वो जैसा चाहे इसे भोग सकते है और जब चाहे तब 

गुरुजी- बस थोड़ा सा और रूको सखी वहां देखो उस महिला को कितना आनंद ले रही है 

कामया की नजर एक बार फिर से दीवाल पर गई थी वो औरत अब झड़ चुकी थी और वो चारो पुरुष उसे अभी रौंद रहे थे कोई उसके मुख में घुसा रहा था तो कोई उसके हाथों के साथ साथ उसके शरीर में अपना लिंग घिस रहा था दो जने तो निरंतर उसके योनि और गुदा द्वार पर हमलाकर ही रहे थे 


एक नजर देखकर कामया ने फिर से अपनी कमर को एक झटके से ऊपर उठाकर गुरुजी के लिंग को पूरा का पूरा अपने अंदर समा लिया था और कस कर गुरुजी को पकड़ लिया 

कामया- बस करते रहिए गुरुजी नहीं तो में पागल हो जाऊँगी प्लीज गुरुजी प्लेआस्ीईईईईई 

इतने में गुरुजी ने भी उसे थोड़ा सा ठंडा किया और एक जोर दार झटका उसके अंदर तक कर ही दिया 

गुरुजी- लो अब सम्भालो मुझे तुम नहीं मनोगी 

कामया- नहीं अब और नहीं प्लेआस्ीईई करते रहिए 

गुरुजी- घबराओ नहीं सखी तुम्हें ऐसे नहीं छोड़ूँगा शांत किए बिना नहीं छोड़ूँगा 
और गुरुजी ने आवेश में आते ही कामया को कसकर पकड़कर अपनी बाहों में भर लिया था और अढ़लेटी सी कामया की योनि पर प्रहार पर प्रहार करने लगे थे कामया तो बस कुछ ना कहते हुए अपनी जाँघो को खोलकर गुरुजी के प्रसाद का मजा लेने लगी थी वो इतना कामुक थी और उत्तेजित थी कि उसे अपने आपको रोक पाना बिल्कुल मुश्किल हो रहा था गुरुजी के लिंग का हर धक्का उसकी योनि के आखिरी छोर तक जाता था और उनकी पकड़ भी इतनी सख्त थी कि वो हिल भी नहीं पा रही थी पर मजा बहुत आरहा था गुरुजी का वहशीपन अब उसके सामने था वो कितना शांत और सभी बनते थे वो अब उसके सामने खुल गया था पर हाँ… उनके सेक्स का तरीका सबसे जुदा था वो जानते थे कि औरत को कैसे खुश किया जाता है उसे किस तरह आवेश में लाया जाता है और किस तरह उसे तड़पाया जाता है 

वो निरंतर हर धक्के में गुरुजी के बाहों में कस्ती जा रही थी सांसें लेना भी दूभर हो रहा था सिर्फ़ अपने शारीर को शांत करने की इच्छा में वो हर तरह का कष्ट सहने को तैयार थी और गुरुजी उसका पूरा इश्तेमाल भी कर रहे थे 

गुरुजी की पकड़ में वो हिल भी नहीं हो पा रही थी 

कामया- हमम्म्मम प्लीज़ और बस 

गुरुजी- बोलो सखी यह मजा और कही आया है तुम्हें 

कामया- नही और करो प्लीज ईईएआआओउुउउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर हमम्म्ममम सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह 

गुरुजी- कामेश से भी नहीं हाँ… 

कामया-, नही 

गुरुजी- और किसी और के साथ 

कामया- नही 

गुरुजी- और किसके साथ किया है तुमने बोलो हाँ… आआह्ह 

कामया- … 
गुरुजी- कहो नहीं तो रुक जाउन्गा 

कामया- नही प्लीज रुकिये नहीं प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज करते रहिए मेरा ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई 
और कामया ने कस कर गुरुजी को अपनी जकड़ में ले लिया था और अपने शरीर का हर हिस्सा गुरु जी से मिलाने की कोशिश करने लगी थी 

कामया तो शांत हो गई थी पर गुरुजी अभी शांत नहीं हो रहे थे वो कामया के झड़ने के बाद तो जैसे और आक्रामक हो गये थे अपनी बाहों में कामया के नाजुक और ढीले पड़े हुए शरीर को कस लिया था और लगातार झटके पे झटके देते रहे निचोड़ कर रख दिया था उन्होंने कामया को और जबरदस्त तरीके से उसे चूसते हुए बिल्कुल उसकी चिंता नहीं करते हुए अपने आपको शांत करने में लगे थे कामया उनके नीचे दबी हुई अब अपने आपको छुड़ाने की कोशिश भी कर रही थी पर उसकी हालत ऐसी नहीं थी आधी लेटी हुई और आधी नीचे की ओर होने से उसे बलेन्स नहीं मिल रहा था और किसी तरह से गुरुजी की बाहों का सहारा ही उसे लेना पड़ रहा था और इतने में शायद गुरुजी भी अपने अंतिम पड़ाव की ओर आ गये थे कि अचानक ही उन्होंने अपने लिंग को निकाल कर एक ही झटके में कामया को नीचे गिरा लिया और उसके होंठों के अंदर अपने लिंग को जबर दस्ती घुसा दिया था एक रेप की तरह था वो कामया कुछ कहती या करती उससे पहले ही गुरुजी का लिंग उसके गले तक पहुँचजाता था और फिर थोड़ा सा बाहर की ओर आते ही फिर से अंदर की ओर हो जाता था कामया नीचे पड़ी हुई गुरुजी की ओर देखते हुए कुछ आखों से मना करती पर गुरुजी अपनी आखें बंद किए हुए जोर-जोर से उसके सिर को पकड़कर अपने लिंग में आगे पछे की ओर करते रहे कि अचानक उनके लिंग से ढेर सारा वीर्य उसके गले में उतर गया कामया अपने आपको छुड़ाना चाहती थी पर गुरुजी की पकड़ इतनी मजबूत थी की उसे पूरा का पूरा वीर्य निगलने के अलावा कोई चारा नहीं था गुरुजी अब उसके सिर पर से अपनी गिरफ़्त ढीली करके साइड में बैठ गये थे 

कामया थक कर नीचे ही लेटी हुई थी और गुरुजी की पीठ पर टिकी हुई थी गुरुजी भी नीचे ही बैठे थे सांसों को कंट्रोल करते हुए कामया के कानों में गुरुजी की आवाज टकराई थी 

गुरुजी- इस सेक्स को जितना गंदे और आक्रामकता से खेलोगी इसमें उतना ही मजा आता है अपने अंदर के गुस्से को और हवस को शांत करने का यही तरीका है सखी 

कामया को यह आवाज बहुत दूर से आती सुनाई दी थी पर सच था यह उसे अच्छा लगा था आज गुरुजी के साथ बहुत तड़पाया था उन्होंने पर शांत करने का तरीका भी जुदा था लेटी हुई कामया को कुछ पैरों के जोड़े दिखाई दिए थे पास में आके रुक गये थे और पहले गुरु जी को सहारा देकर उठाया था फिर कामया को वही चेयर में बिठाकर दूसरे कमरे की ओर ले चले थे 

कामया जो देख पा रही थी वो था कुछ महिलाए और बड़े-बड़े कमरो के बीच से होकर निकलना कामया बेसूध टाइप की थी अपने आपको अब तक संभाल नहीं आई थी पर अचानक ही उसे अपने नहाने वाले कमरे में ले जाते हुए देखकर वो थोड़ा सा निसचिंत हो गई थी थोड़ी देर बाद वो उस कुंड में थी और सभी महिलाए उसे फिर से नहलाने में जुटी हुई थी रूपसा और मंदिरा भी वहां आ गई थी हाथों में एक ग्लास लिए हुए उसमें वही पेय था जो वो लगातार यहां आने के बाद से पीते चली आई थी 
नहाने के बाद और वो पेय पदार्थ पीने के बाद कामया फिर से तरोताजा हो उठी थी एकदम फ्रेश अपने अंगो को और अपने शरीर को ढँकते समय उसने देखा था कि वो अब भी बहुत सुंदर है और हर अंग एक नई ताज़गी लिए हुए था कमरे में उसे खाना भी सर्व किया गया और पेय पीने के बाद उसे आराम करने को कहा गया था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया लेटी हुई अपने अतीत और वर्तमान की घटनाओं में डूब गई थी कहाँ से कहाँ आ गई थी वो उस घर से बाहर निकलते ही वो एक सेक्स की देवी बन गई थी लाखा, भीमा और भोला हाँ और ऋषि भी और अब गुरुजी और पता नहीं क्या-क्या चुना हुआ है उसकी किस्मत में पर कामेश कहाँ है उसे उसकी चिंता नहीं है एक बार भी उसने कॉंटक्ट नहीं किया और नहीं उसकी कोई खबर ही है कामेश भी पैसा कमाने की जुगत में लगा है और पापा जी भी ना कोई उसकी चिंता और ना ही कोई खबर पर कामया की चिंता वो लोग क्यों करे भला वो तो गुरुजी की संपत्ति की मालकिन हो गई है और उसे संभालने के लिए कामेश और पापा जी को तो मेहनत करनी ही पड़ेगी नहीं तो कामया क्या संभाल पाएगी कामया को तो अपनी जगह 
पक्की करना है बस और गुरुजी के सिखाए हुए तरीके से चलना है और क्या बस इतना सा तो काम है पूरे मजे और वैभव भरी जिंदगी है उसकी उसे तो कोई काम करने की जरूरत ही नहीं है बस हुकुम देना है और और हाँ… उसे गुरुजी जैसा भी बनना है अपने आप पर काबू रखना है अपने मन और तन को काबू में रखना है बस पर यह होगा कैसे वो तो खुद पर काबू नहीं रख पाती उसे तो सेक्स की भूख अब तो और ज्यादा लगने लगी है इस वैभव भरी जिंदगी की उसे आदत लग गई है और हर कहीं उसे सेक्स की इच्छा होती थी हर कहीं तो वो महिलाए उसे नहलाते हुए तेल की मालिश करते हुए उबटान लगाते हुए और कपड़े तक पहनते हुए उसे उत्तेजित ही करती ही रहती थी अभी खना खाकर जब वो कमरे में आई थी तो उन में से दो महिलाओं ने उसे इत्र से और पाउड़र से अच्छे से मालिश किया था फिर वो पेय पीलाकर चली गई थी पर उसे नींद नहीं आ रही थी उसे तो रूपसा और मंदिरा की हरकत के बारे में याद आ रही थी उस महिला के बारे में सोचकर ही वो उत्तेजित सी हो उठी थी उसे क्या करना चाहिए पता नहीं पर उत्तेजना बदती जा रही थी ना चाहते हुए भी वो अपनी हाथों को अपनी जाँघो के बीच में ले गई थी और धीरे-धीरे अपनी योनि को छेड़ने लगी थी होंठों से एक आह निकल गई थी इतने में कमरे का दरवाजा खुला और एक दासी जल्दी से उसके पास आ गई थी 
दासी- क्या हुआ रानी साहिबा कुछ चाहिए 

कामया- नहीं बस ऐसे ही क्यों … … 

दासी- जी वो आवाज आई थी ना इसलिए 

कामया एक बार सोचने लगी जरा सी आवाज कमरे के बाहर कैसे चली गई थी क्या उसने बहुत जोर से चिल्ला दिया था नहीं नहीं अपने हाथों को जल्दी से निकाल कर वो सोने लगी थी दासी थोड़ी देर खड़ी रही और मूड कर जाने लगी थी की कामया ने उसे आवाज दी 
कामया- सुनो 
दासी- जी 
कामया- वो रूपसा और मंदिरा कहाँ है 

दासी- जी वो नीचे कमरे में होंगी बुलाऊ … … 

कामया नहीं- सब सो गये है क्या … 

दासी- नहीं गुरुजी जाग रहे है बाकी सोने वाले होंगे पता नहीं इस माल में आप और गुरुजी ही है नीचे का पता नहीं 

कामया- गुरुजी क्या कर रहे है … 

दासी जी पता नहीं रानी जी हमें जाने की अग्या नहीं है कहे तो आपको उनके पास ले चले … 

कामया- नहीं नहीं तुम जाओ 

कुछ सोचती हुई कामया एक बार उठी और दासी की ओर देखते हुए बोली 

कामया- गुरुजी कहाँ है मुझे कुछ काम है 

कहती हुई वो जल्दी से बेड से उतरगई थी और ढीले ढाले कपड़े को किसी तरह से व्यवस्थित करते हुए दासी के पीछे चलने लगी थी दासी भी कामया की ओर एक बार देखकर चुप हो गई थी वो कपड़ा उसके अंगो को छुपा कम रहा था बल्कि दिखा ज्यादा रहा था सिर के ऊपर से एक बड़ा सा गोलाकार काट कर बस ऊपर से ढाल दिया था ना कमर में कुछ बँधा था और नहीं कुछ सृंगार था 

साइड से उसके हर अंग का उतार चढ़ाव भी दिख रहा था सामने से और पीछे से थोड़ा बहुत ढँका हुआ था कमरे से बाहर आते ही सन्नाटे ने उसे घेर लिया था बस कुछ दूरी पर एक दासी और खड़ी थी दीवाल से चिपक कर शायद वही कमरा था गुरुजी का और पूरा फ्लोर खाली था बिना झिज़्के कामया ने अपने कदम गुरुजी के कमरे की ओर बढ़ा लिए थे दासी कुछ दूरी पर रुक गई थी और दूसरी दासी ने भी उसे झुक कर सलाम किया था और डोर के सामने से हट गई थी कामया जब डोर के सामने पहुँचि थी तो पलटकर एक बार उन दोनों दासी की ओर देखा था वो दूर जाती हुई देख रही थी यानी की पूरे फ्लोर में सिर्फ़ यह दो दासिया ही है हिम्मत करके उसने बड़े से डोर को धक्का दिया और खुलते ही वो अंदर दाखिल हो गई थी 

गुरु जी डोर से दूर पर्दो के बीचो बीच में एक बड़े से पलंग पर अधलेटे से दिखाई दिए डोर खुलते ही उनकी नजर भी डोर की ओर उठी थी और जैसे ही कामया को अंदर दाखिल होते देखा तो एक मधुर सी मुश्कान उनके होंठों पर दौड़ गई थी 

कामया ने घुसते ही डोर को धीरे से बंद कर दिया था और अंदर से लॉक भी लगा दिया था गुरुजी उसकी हरकतों को बड़े ध्यान से देख रहे थे दरवाजा बंद करने के बाद कामया ने एक नजर गुरु जी की ओर देखा जो की अब उठकर बेड पर बैठ गये थे और जो कुछ पढ़ रहे थे वो भी हटा दिया था 

कामया थोड़ा सा झिझकी थी पर अपने आपको ववस्थित करते हुए अपने कदम आगे गुरु जी के बेड की ओर बढ़ा दिए थे कामया थोड़ा सा डरी हुई थी थोड़ा सा घबराई हुई भी पर अपने तन के हाथों मजबूर कामया अपने शरीर की आग को ठंडा करने गुरुजी के पास आई थी 

गुरुजी- क्या बात है सखी … … 

कामया- जी वो नींद नहीं आ रही थी इसलिए 

गुरुजी- कोई बात नहीं सखी आओ मैं सुला दूं 
कहते हुए गुरुजी ने अपने हाथ कामया की ओर बढ़ा दिए थे कामया तब तक उनके बेड के पास पहुँच गई थी और जैसे ही गुरुजी की हाथों को अपनी ओर देखा झट से उसने अपने हाथ उसपर रख दिए थे अब उसे कोई डर नहीं था 
गुरुजी- आओ बैठो 
और अपने पास उसे बैठने का इशारा किया गुरुजी ऊपर से नंगे थे और नीचे सिर्फ़ एक लूँगी टाइप का छोटा सा कपड़ा बँधा था पूरा शरीर साफ दिख रहा था कामया उन्हें देखते ही उत्तेजना से भर गई थी पर एक झिझक थी जो उसे रोके हुए थी शायद वो झीजक ही खतम करने आई थी वो 
गुरुजी के पास बैठते ही 
गुरुजी- ठीक से बैठो सखी यह सब तुम्हारा ही है यहां इस आश्रम का हर चीज तुम्हारा है मैं भी तुम्हारा हूँ तुम इस अश्राम की मालकिन हो जिससे तुम जो कहोगी वो उसे करना है इतना जान लो इसलिए झीजक और शरम इस अश्राम के अंदर मत करना वो सब बाहरी दुनियां के लिए है 

कामया ठीक से बैठ गई थी उसके शरीर में जो कपड़ा था वो बैठते ही सरक कर उसकी जाँघो के बहुत ऊपर सरक गया था और साइड से बिल्कुल खुलकर सामने की ओर लटक गया था साइड से देखने में कामया का शरीर एक अद्भुत नजारा दे रहा था कमर से उठ-ते हुए उसके शरीर का और सुंदर और सुडौल जाँघो के नीचे उसकी टांगों का उउफ्फ… क्या लग रही थी नज़रें झुकाए बैठी कामया गुरुजी के आगे बढ़ने का इंतजार करती रही पर गुरुजी कुछ नहीं किए सिर्फ़ उसे नजर भरकर देखते रहे कामया ने एक नजर उठाकर उसे देखा था गुरुजी से आखें टकराई थी और गुरुजी के होंठों पर फिर से वही मुश्कान दौड़ गई थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

गुरुजी- कहो सखी कुछ कहना है 

कामया ने सिर्फ़ सिर हिला दिया था क्या कहती वो जो कुछ चाहिए था वो दे दो बस और क्या कामया थोड़ा सा सरक कर गुरुजी की और हो गई थी गुरुजी ने अपने हाथों के सहारे उसे अपने से सटा लिया था उसका शरीर कपड़े से बाहर झक रहा था लेफ्ट चूचियां तो पूरा ही बाहर था और सिर्फ़ निपल्स पर कपड़ा अटका था वो भी गुरु जी ने उतर कर अलग कर दिया 

गुरुजी के हाथों के सहारे कामया अपने शरीर को उनके सुपुर्द करते हुए उनके सहारे लेट गई थी उनके बहुत पास पर गुरुजी ने उसे और अपने पास खींचा और 

गुरुजी- आओ में तुम्हें सुला दूं इतना उत्तेजित क्यों हो क्या कमी है तुम्हें 

कामया- (अपने सांसों को कंट्रोल करते हुए ) बहुत मन करता है गुरुजी इसलिए रोक नहीं पाई 

गुरुजी- कोई बात नहीं सखी हमसे कैसी शरम 

कामया- इसलिए तो आ गई गुरुजी प्लीज मुझे शांत करो 

गुरु जी- हाँ… शांत में करूँगा पर ऐसे नहीं आज तुम्हें भी दिखाना होगा की तुम क्या हो और कितना चाहती हो सेक्स को ताकि हम दोनों इस खेल का आनंद ले सके 

कामया ने अपनी बाँहे गुरुजी के गले में पहना दी थी और उनके गालों को सहलती हुई धीरे-धीरे अपने होंठों को उनके पास ले गई थी 
कामया- जी गुरुजी जो आप कहेंगे में वही करूँगी 

गुरुजी ने अपने होंठ कामया के होंठो से जोड़ कर धीरे-धीरे उसके होंठों का रस्स पान करते रहे किसी को कोई जल्दी नहीं थी ना कामया और ना ही गुरुजी को पता था कि कोई रुकावट नहीं है कामया एक उत्तेजित और कामुक स्त्री थी और गुरुजी को भी उसके शरीर को चाह थी और अश्रांम का हर आदमी औरत उनके गुलाम थे 

बड़े ही अपने पन से दोनों ने यह खेल शुरू किया था कामया तो उत्तेजित थी ही अपना पूरा ध्यान गुरुजी को उत्तेजित करने में लगा रही थी कामया लेटी हुई अपने होंठों को गुरुजी से जोड़े हुए अपने हाथों को उनकी पीठ और उनके सीने पर घुमाती हुई नीचे की ओर ले जा रही थी उसके हाथों में जब गुरुजी की कमर पर बँधा कपड़ा अटका तो थोड़ी सी नजर खोलकर गुरुजी की ओर देखा था उसने गुरुजी की नजर भी खुली थी और एक मूक समर्थन दिया था उन्होंने कामया के हाथों ने उस कपड़े को खोलने में कोई देरी नहीं की और गुरुजी भी उसकी तरह से पूर्णता नग्न थे अब दोनों के शरीर एक दूसरे से जुड़े थे और एक दूसरे के शरीर का एहसास कर रहे थे कामया मूड कर गुरुजी की बाहों में समाती चली गई थी और गुरुजी भी उसे अपनी बाहों में कसते चले गये थे 

गुरुजी के साथ-साथ कामया की सांसें बहुत तेज चल रही थी और दोनों एक दूसरे के होंठों को अच्छे से और पूरे जी जान से चूमने में और चाटने में लगे थे ऐसा लग रहा था कि कोई भी एक दूसरे को छोड़ने को तैयार नहीं था गुरुजी के हाथ अब धीरे से कामया की चूचियां पर आके टिक गये थे कामया भी अपने हाथों को जोड़ कर उन्हें उत्साहित करने लगी थी कामया अपने सीने को और आग बढ़ा कर उन्हें अपनी चुचियों पर पूरा जोर लगाने को कह रही थी और गुरुजी भी अपनी ताकत दिखाने में लग गये थे गुरुजी का रूप अभी थोड़ा सा अलग था जैसा पहले कामया ने देखा था उससे अलग थोड़ी सी उत्सुकता थी उनमें और उत्तेजना भी क्योंकी जिस तरह से वो कामया को प्यार कर रहे थे वो एक मर्द की तरह ही था नकी कोई महात्मा या फिर वो गुरुजी जो उसने देखा था 

कामया खुश थी की उसने गुरुजी को उत्तेजित करना सीख लिया था और गुरुजी को उसके तन की इच्छा भी है जिस तरह से अपना जोर लगाकर उसे चूम रहे थे या फिर उसकी चूचियां मसल रहे थे वो अलग था 

कामया का शरीर तो जल ही रहा था अब गुरुजी भी अपने आपसे बाहर होती जा रहे थे उनकी उत्तेजना भी नजर आने लगी थी वो भी लगातारर कामया की चूचियां दबाते हुए धीरे से उसके गले तक पहुँच गये थे कामया तो आधी टेडी लेटी हुई गुरुजी के मुँह में अपनी चूचियां लाने की जद्दो जहद में थी ही और गुरुजी भी आतुर थे झट से कामया की चुचि को अपने होंठों के अंदर ले लिया था उन्होंने 

कामया- आआआह्ह और जोर से गुरुजी बहुत अच्छा लग रहा है बस चूस्ते जाओ और जोर-जोर से 

गुरुजी अपने आपकामया के इशारे पर चले ने लगे थे निपल्स मुँह में आते ही उनकी जिब और होंठों ने अपना काम शुरू कर दिया था और कस कर कामया के निपल्स को चूसते जा रहे थे कामया निरंतर गुरुजी को उकसाने में लगी थी और बहुत जोर से गुरुजी को अपनी बाहों में लेकर कस्ती जा रही थी उसके हाथों में गुरुजी का सिर था जिसे वो अपनी चुचियों के अंदर घुसाने की कोशिश में लगी थी वो कामया की उत्तेजना को देखकर लगता था की अब उसे किसी बात की चिंता नहीं थी और नहीं ही कोई शरम बिंदास गुरुजी को उत्साहित करती वो इस खेल का पूरा मजा लेने में जुटी थी कामया की आवाज उस कमरे में गूंजने लगी थी 

कामया- उूुउउफफफ्फ़ गुरुजी बहुत अच्छा लग रहा है और जोर से दबयो और जोर से चुसू प्लीज गुरुजी प्लीज ईईईईई
गुरुजी अपने मन से उसे पूरा संतुष्ट करने की कोशिश में लगे थे पर कामया इस तरह से मचल रही थी कि उसे संभालना गुरुजी के लिए थोड़ा सा मुश्किल पड़ रहा था गुरुजी ने अपने हाथों को कसते हुए उसे अच्छे से जकड़ लिया और अपने होंठों को कस्स कर उसकी चुचियों पर टिकाए रखा था अपनी हथेलियों को उसके नितंबों पर घुमाकर उसकी गोलाई का नाप भी लेते जा रहे थे और उसकी जाँघो की कोमलता को भी अपने अंदर समेट-ते जा रहे थे कामया गुरुजी के हाथों के साथ-साथ अपने शरीर को मोड़कर और खोलकर उनका पूरा सहयोग कर रही थी कोई भी जगह उनसे बच ना जाए यह सोचकर गुरुजी के हाथ उसके जाँघो से होकर एक बार फिर से उसकी चुचियों पर आके रुक गये थे और कामया को धीरे से अलग करते हुए उन्होने उसकी आँखों में झाँका था कामया इस तरह से गुरुजी के अलग होने से थोड़ा सा मचल गई थी पर एकटक गुरु जी को अपनी ओर देखते हुए पाया तो पूछ बैठी 

कामया-क्या हुआ गुरुजी- 

गुरुजी- कुछ नहीं तुम्हें देख रहा हूँ बहुत उत्साहित हो उत्तेजित हो तुम कुछ नहीं करोगी अपने गुरुजी के लिए 

कामया- जी गुरुजी बहुत कुछ करूँगी अब मेरी बारी है आप लेटो 

गुरुजी- ( मुस्कुराते हुए) हाँ… दिखाओ तुम कितना प्यार करती हो हम से 


कामया एकदम से उठकर बैठ गई थी एकटक गुरुजी की ओर देखते हुए अपनी आखों को बड़ा बड़ा करके गुरुजी की ओर एकटक देखती रही उसकी आखों में एक नशा था एक चाहत थी एक खुमारी थी जो कि गुरुजी को साफ नजर आ रहा था उसकी आखों में बहूत बातें थी जो की गुरुजी पहली बार इतना पास से देख रहे थे कामया देखते ही देखते अपने शरीर को एक अंगड़ाई दी और उठकर घुटनों के बल थोड़ा सा आगे बढ़ी और गुरुजी के सामने अपनी चुचियों को लेजाकर थोड़ा सा हिलाया और उनके चहरे पर घिसते हुए 

कामया- देखो गुरुजी इन्हें देखो और खूब जोर-जोर से चुसू इन्हें आपने होंठों की जरूरत है प्लीज ईई

गुरुजी अपने होंठों को खोलकर उसके आमंत्रण को ग्रहण किया और उसके चूचियां को चूसने लगे थे फिर से उनके अंदर एक अजीब तरीके का उत्साह देखने को मिला था कामया जिस तरह से वो उसकी चूचियां चूस रहे थे उनके दाँत भी उसके निपल्स को लग रहे थे 

कामया जानती थी कि गुरुजी की उत्तेजेना बढ़ रही है एक के बाद दूसरी चूंची को उसने गुरुजी के मुख में ठूंस दिया था और उनके सिर को कसकर जकड़कर पकड़ रखा था अपने हथेलियों को धीरे-धीरे उनके पीठ पर भी घुमाने लगी थी झुकी हुई कामया अपने शरीर का हर हिस्सा गुरुजी से छुआने में लगी थी अपने घुटनों को खोलकर उसने गुरुजी के दोनों ओर कर लिया था उसकी योनि में ज्वार आया हुआ था और गुरुजी के लिंग का ही सिर्फ़ इंतजार था एक झटके में गुरुजी को बेड पर धकेल कर कामया उसके पेट से लेकर उनके लिंग तक एक बार में ही पहुँच गई थी उसके लिंग का आकार थोड़ा सा बड़ा था औरो के लिंग की तरह नहीं था पर था अभी भी टेन्शन मुक्त वो झुकी और गुरुजी के लिंग को अपने जीब से चाट्ती हुई अपने मुख के अंदर तक उसे ले गई थी और धीरे से गीलाकरते हुए बाहर की ओर ले आई थी एक नजर गुरुजी के ऊपर ढलती हुई फिर से अपने काम में लग गई थी उनके लिंग को कभी अपने मुख के अंदर तो कभी बाहर करते हुए कामया उसे
अपने हाथों से भी कसकर पकड़ती थी और अपने होंठों के सुपुर्द कर देती थी बहुत देर तक करते रहने के बाद उसे लगा था कि गुरुजी अब तैयार हो गये है वो गुरुजी के लेटे में ही उनके ऊपर चढ़ गई थी और खुद ही उनके लिंग को अड्जस्ट करते हुए अपनी योनि के अंदर ले गई थी उसके बैठ-ते ही गुरुजी की कमर भी एक बार हिली और उन्होंने भी एक हल्का सा धक्का लगाकर अपने लिंग को कामया के अंदर पहुँचने में मदद की 

कामया- आआआआअह्ह उूुुुउउम्म्म्मममममम 

झूम गई थी कामया जिसका इंतजार था वो उसके पास और इतना पास था कि वो झूम उठी थी अपने शरीर को उठाकर एक बार फिर से और नीचे कर लिया था ताकि गुरुजी का लिंग पूरी तरह से अंदर समा जाए 

कामया- उूुुउउफफफ्फ़ आआह्ह उूउउम्म्म्म 
करती हुई खुशी से निढाल हो गई थी और थोड़ी थोड़ी देर में ही अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर करके धम्म से उनके लिंग में बैठ जाती गुरुजी भी एकटक उसे देखते हुए अपने लिंग को हर बार उसके अंदर तक उतार चुके थे अब वो भी थोड़ा बहुत उत्तेजित से नजर आते थे और नीचे से अपनी कमर को थोड़ा सा ऊपर करते थे कामया के अंदर लिंग के प्रवेश करते ही वो गुरुजी के ऊपर गिर गई थी और उसके साथ-साथ हिलते हुए अपनी योनि के ज्वार को शांत करने में जुट गई थी गुरुजी की बाँहे भी अब कामया को सहारा देने के लिए उठ गई थी और उसे कस्स कर पकड़ते हुए 

गुरुजी- अपना रस पान कराओ सखी 
कामया ने झट से सिर घुमाकर अपने होंठ गुरुजी की और कर दिए और वो भी गुरुजी का रस पान करने लगे थी दोनों की जीब एक दूसरे से लड़ते हुए योनि और लिंग का खेल खेलते रहे और उस कमरे में आए हुए तूफान को देखते रहे 

कामया- उउउम्म्म्म और जोर-जोर से गुरुजी निचोड़ दो मुझे मार डालो प्लीज 

गुरुजी- नहीं सखी मारूँगा क्यों तुम तो मेरी आत्मा हो मेरी सखी हो तुम्हारे जिश्म की खुशबू तो सारे संसार के लिए है में तो पहला हूँ और हमेश ही रहूँगा तुम तो मेरी हो 

जाने क्या-क्या उत्तेजना में कहते जा रहे थे गुरुजी 

कामया अपने आप में खुश थी उसने गुरुजी को जीत लिया था गुरुजी अब उसके साथ में थे वो और जोर से अपनी कमर को हिलाकर उसके लिंग को अपनी जाँघो को को जोड़ कर निचोड़ने लगी थी गुरुजी भी आवेश में आ गई थे एक झटके में कामया को नीचे करते हुए वो खुद अब उसके ऊपर आ गये थे और उसके योनि को लगातार कई झटके देने के बाद रुक गये थे एक नजर उसकी और डालते हुए जोर से उसके होंठों को चूम लिया और धक्के पर धक्के मारते रहे उनकी गति इतनी तेज थी की हर धक्का उसकी योनि के आखिरी द्वार पर लगता था और पकड़ भी इतनी मजबूत थी कि कामया से और नहीं रहा गया कस्स कर गुरुजी को पकड़कर वो उनसे लिपट गई थी 

कामया- हाँ… गुरुजी बस करते रहिए रुकिये नई आआअह्ह उ उ उूुुुुुुुउउम्म्म्मममममम करते हुए वो शांत हो गई थी पर गुरुजी अब भी शांत नहीं हुए थे कमी आपने आपको रोक नहीं पाई थी शायद उत्तेजना उनसे ज्यादा थी 

गुरुजी- बस हो गया सखी इतना ही प्यार है हमसे अभी तो हम बहुत बाकी है 
हान्फते हुए गुरुजी के मुँह से निकला था 

कामया- नहीं गुरुजी में साथ हूँ अब रोको नहीं करते रहे में पूरा साथ दे रही हूँ 

और कहते हुए कामया ने गुरुजी को कस कर पकड़ते हुए उन्हें चूमने लगी थी अपने आपको उनका साथ देते हुए वो यह दिखाना चाहती थी कि वो अब भी उत्तेजित है पर गुरुजी तो जान गये थे वो सिर्फ़ उनको दिखने के लिए ही उनका साथ दे रही थी ‘कामया अपनी कमर को बहुत तेजी से उचका कर गुरुजी से रिदम मिलाने की कोशिश में थी कि गुरुजी ने अपने लिंग को उसके योनि से निकाल लिया और कामया को घुमा लिया था अब कामया उनके नीचे थी और सोच रही थी की अब क्या 

गुरुजी ने अपने हाथों को जोड़ कर कामया की कमर को खींचकर ऊपर उठाया और अपने लिंग को उसके गुदा द्वार पर रख दिया था कामया एक बार तो सिहर उठी थी उसने अभी-अभी देखा था और सिर्फ़ एक बार भीमा के साथ वहां किया था पर, गुरुजी की उत्तेजना के सामने वो कुछ नहीं बोल सकी बस वैसे ही कमर उठाए हुए गुरुजी को अपना काम करने देने की छूट दे दी थी और गुरुजी तो आवेश में थे ही एक धक्के में ही उनका लिंग आधा फस गया था कामया की गुदा में 

कामया--------- आआआआआआआआयययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई हमम्म्ममममममममममममममममममम द्द्द्द्द्द्दद्धीईईरर्र्र्रररीईईईईईईई 
कामया की चीख उस कमरे में गूँज गई थी, , पर गुरुजी कहाँ रुकने वाले थे थोड़ा सा रुक कर एक जोर दार धक्का फिर लगा दिया था 

कामया- आआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईई उूुुउउमम्मूँमुमूमूमूंम्म्मममममम 

करते हुए रोने लगी थी दर्द के मारे वो नहीं रुक सकती थी बहुत दर्द होने लगा था उसे गुरुजी थोड़ा सा रुके और अपने लिंग को बाहर खींच लिया कामया थोड़ा सा बहाल हुई थी पर फिर से झटके से जैसे चाकू किसी मक्कन की स्लाइस पर घुसता था वैसे उसके गुदा द्वार पर घुसता चला गया था गुरुजी की हैवानियत अब उसके सामने थी बिना रुके कामया के अंदर तक उतर कर ही दम लिया गुरुजी ने 

कामया रोते हुए उनसे रुकने की मिन्नत करती रही पर गुरुजी नहीं रुके लगातार धक्के के साथ ही अपने लिंग को पूरा का पूरा उसके अंदर उतारने के बाद ही रुके वो रुक कर एक बार कामया को जी भर कर चूमा था उन्होंने कामया अटकी हुई और दर्द से बहाल गिर पड़ी थी बेड पर और रुक रुक कर उसके कहराने की आवाज उसके गले से निकल रही थी 

गुरुजी- क्या हुआ सखी थक गई 

कामया- प्लीज गुरुजी मर जाऊँगी प्लेआस्ीई उूउउम्म्म्मममम 
रोते हुए कामया के मुख से निकाला 

गुरुजी- क्यों अभी तो कह रही थी कि मार डालो अब क्या हुआ बस थोड़ा सा और फिर देखना कितना मज आता है 
और ये कहते हुए गुरुजी ने कामया को एक बार उठाकर फिर से अपने लिंग को उसके गुदा द्वार से थोड़ा सा बाहर र्निकाला और फिर धक्के के साथ अंदर पिरो दिया था 

कामया- (दाँत भिचते हुए ) उउउम्म्म्ममाआ आह्ह करती रही और गुरुजी के हाथों का खिलोना बनी हुई अपने आपको दर्द के सहारे छोड़ कर निढाल होकर घुटनों के बल और कोहनी के बल बैठी रही गुरुजी का लिंग जो कि अभी तक फँस कर जा रहा था अब आराम से उसके गुदा के अंदर तक जा रहा था अब उसे थोड़ा कम तकलीफ हो रही थी पर हर धक्का इतना तेज और आक्रामक होता था कि वो हर बार गिर जाती थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

पसीने से लतपथ दोनों इस खेल में मगन थे और कामया अभी अब हर तरीके से गुरुजी के साथ थी गुरुजी का हर धक्का उसके मुँह तक आता था कामया भी कमर को और उचका करती जा रही थी उसे अच्छा लगने लगा था उसे अब कोई तकलीफ नहीं हो रही थी उसे गुरुजी के लिंग की गर्मी भी अच्छी लग रही थी घर पर भीमा के साथ जो कुछ हुआ था यह उससे अलग था कैसे नहीं मालूम पर मज़ा आ रहा था और शांति भी गुरुजी के झटके मारने की गति बढ़ने लगी थी और उनकी बाँहे उसके चारो और कसने लगी थी उसकी चूचियां मसलते हुए गुरु जी उससे चिपक गये थे और निचोड़ते हुए 
गुरुजी- ऊऊओह्ह… सखी बहुत मजा है इसमे तुम तो लाजबाब हो मजा आ गया 

कामया बस गुरुजी थक गई हूँ जल्दी करे 

गुरुजी- बस कामया थोड़ा सा और ऊपर कर अपनी कमर को अंदर तक पहुँचना है जाने वाला हूँ में भी 
हाँफटे हुए गुरुजी ने कामया को अपनी बाहों से आजाद कर दिया था और अपने लिंग को जोर से उसके अंदर जितना हो सके सारी शक्ति लगा कर अंदर करते जा रहे थे 
और झटके से अपने लिंग का ढेर सारा पानी कामया के अंदर छोड़कर कामया के ऊपर ढेर हो गये थे 

कामया को पीछे से पकड़े हुए गुरुजी अपनी साँसे छोड़ रहे थे और अपने सांसों को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहे थे कामया पसीने से तर बतर हो चुकी थी दर्द तो नहीं था पर एक अजीब सा एहसास उसके अंदर था नितंबों के बीच में गुरुजी का लिंग अब भी फँसा हुआ था और 
कामया को याद दिलाता जा रहा था कि अभी-अभी जो कुछ हुआ था वो अब उसके साथ होगा बहुत खुश तो नहीं थी पर हाँ… एक अजीब सी गुदगुदी जरूर हो रही थी उसे . उसके शरीर का हर हिस्सा कैसे सेक्स के लालायित था और कैसे उसने अपनी भूख को शांत किया था वो सच में एक अजीब सा लग रहा था 

अभी तक तो ठीक था जब वो भीमा और लाखा के पास गई थी या भोला ने उसके साथ किया था पर आज तो अलग था वो गुरुजी को मजबूर कर दिया था और गुरुजी का मर्दाना रूप भी उसने देख लिया था हाँ वो सुंदर थी और उसके शरीर में वो बात थी जो हर किसी में नहीं होती पर एक बात उसे परेशान कर रही थी वो थी गुरुजी अपने आप पर इतना नियंत्रण कैसे रख लेते है और चाहते है कि वो भी करे पर यह कैसे संभव है इतने में गुरुजी के हाथ उसके चुचों पर थोड़ा सा हरकत करते नजर आए और हल्की आवाज में गुरुजी ने कहा 
गुरुजी- सो गई क्या सखी … … 

कामया- नहीं गुरुजी 

गुरुजी कुछ सोच रही हो … 

कामया- एक बात पुच्छू आपसे … 

गुरुजी- हाँ… क्यों नहीं तुम्हें सब जानने का हक है सखी पूछो … 

कामया- जी वो अपने कहा था कि अपने शरीर पर काबू रखो नियंत्रण वाली बात पर मुझसे तो नहीं होता … 

गुरुजी ने कामया को अपनी ओर घुमा लिया था और अपने आलिंगान में बाँधते हुए अपने बहुत करीब खींच लिया था और एकटक उसकी आखों में देखते हुए 

गुरुजी- हाँ अब पूछो 

कामया थोड़ा सा सकुचाती हुई 

कामया- जी वो आपने कहा था कि नियंत्रण रखो वो तो मुझसे नहीं होता क्या करू … 

गुरुजी- हाँ मुझे पता है सखी नहीं होता मुझसे भी नहीं होता था जब में तुम्हारी उमर का था पर अब होता है पता है क्यों … 
कामया- जी नही … 

गुरुजी- में तुम्हें अपने बारे में कुछ बताता हूँ में एक अस्ट्रॉलजर था पर उससे मेरा जीवन नहीं चलता था बस 100 50 रुपीज रोज का कमाता था फिर एक दिन अचानक ही मुझे एक बार एक बहुत बड़े धर्मात्मा को देखकर यह आइडिया आया क्यों ना में भी यह काम शुरू कर दूं और में इसकाम को अंजाम देने लगा था मेरे जीवन में बहुत सी औरते आई और गई में एक से दूसरे का भला करता रहा एक को दूसरे के लिए इस्तेमाल करता रहा और में यहां पहुँच गया 

इस अश्राम में आने वाला हर इंसान यही सोचता है कि गुरुजी के आशीर्वाद से मेरा यह काम हुआ पर बात यह नहीं है वो कुछ लोगों से कहने से हो जाता था मेरे यहां नौकरी माँगने वाले भी आते है और नौकरी देने वाले भी बस एक दूसरे से जोड़ते ही काम हो जाता है और में गुरुजी बन गया 

कामया एकटक उनकी बातें सुन रही थी गुरुजी की नजर एक बार उसके ऊपर गई और सीधे लेट गये 

गुरुजी- और तुम सोच रही थी कि में ऐसा कैसे बना यह है कहानी 

कामया- पर गुरुजी आपने वो नहीं बताया … 

गुरुजी- (हल्का सा हँसे थे ) सखी मेरी उम्र क्या है 70 साल अभी भी में क्या उतना जवान हूँ जड़ी बूटी और उनका सेवेन करके में अभी तक जिंदा हूँ और जो अभी भी मन के अंदर है उसे जीवित करने की कोशिश करता हूँ तुम क्या सोच रही हो बूढ़ा इंसान तो यहां तक पहुँच ही नहीं सकता में तो फिर भी दिन में एक बार या दो बार किसी औरत के साथ अंभोग कर भी लेता हूँ पर बूढ़ा शरीर कब तक साथ देगा एक उम्र भी तो होती है इन सब चीज़ों की 

कामया- पर आपने तो मुझे कहा था 

गुरुजी- हाँ कहा था पर यह संभव नहीं है है तो सिर्फ़ उन लोगों के लिए जो वाकई साधु है या नर्वना को प्राप्त कर चुके है में तो एक ढोंगी हूँ मुझे नहीं मालूम यह सब क्या होता है हाँ जहां तक कहने की बात है वो तो लोगों को जो अच्छा लगे वो कहना पड़ता है इसलिए तुम्हें भी कहा 

कामया एक बार तो भौचक्की रह गई थी पर कुछ सोचकर बोली

कामया- तो गुरुजी में क्या करू … 

गुरुजी- वही जो तुम्हारा मन करे इस जीवन को जिओ और खूब जिओ जैसा चाहो वैसा करो यह अश्राम तुम्हारा है जिसे जैसा भोगना है भोगो और अपनी इच्छा को शांत करो में भी जब तुम्हारे उमर का था तो यही सब करता था पर हाँ… अपने मतलब के लिए ही नहीं तो सिर्फ़ अपने सेक्स की भूख के लिए इश्तेमाल करने से बहुत कुछ नहीं मिलता हाँ… उसके पीछे धन का लालच हो या, मतलब हो तो बहुत कुछ जोड़ सकती हो 

और गुरुजी ने एक बार वही मदमस्त मुश्कान लिए कामया की ओर देखा कामया समझ चुकी थी कि गुरुजी का ढोंग और उनका मतलब उसे क्या करना है वो भी उसे पता था और कैसे वो तो आता ही था अपने शरीर को कहाँ और कैसे इश्तेमाल करना है बस वो देखना है थकि हुई कामया अपनी एक हथेली से गुरुजी के सीने को स्पर्श करती रही और गुरुजी कब सो गये थे उसे पता नहीं चला था वो भी धीरे से उठी थी और अपने कपड़े उठाकर अपने हाथों में लिए वैसे ही डोर की ओर बढ़ चली थी 
एक मदमस्त चाल लिए अपने आपको नये रूप में और नये सबेरे की ओर 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कमरे में तक कामया वैसे ही बिना कपड़ों में घूमती हुई पहुँच गई थी रास्ते में उसे कोई भी दासी या ऐसा कोई भी नहीं मिला था जिससे उसे कोई शरम या हया होती अपने कमरे में पहुँचकर वो बेड पर लेटे हुए कल के बारे में सोचते हुए सो गई थी 

दूसरे दिन सुबह से वही नहाना धोना और शरीर का सौंदर्य बढ़ाने में लगे हुए कामया तैयार होकर जब खड़ी हुई तो एक दासी ने आके कहा कि गुरु जी ने याद किया है 

कामया एक जानी पहचानी सी मुश्कान बिखेरती हुई उठी और गुरुजी से मिलने को चल पड़ी एक कमरे में गुरुजी बैठे हुए थे और पास में कुछ लोग अजीब सी पोशाक पहने हुए भी थे देखने में आफ्रिकन्स लग रहे थे यह लोग गुरुजी के पास क्या कर रहे है क्या पता कामया को देखते ही गुरुजी मुस्कुराए और 

गुरुजी- आओ सखी देखो कौन है यहां कुछ माइन ओनर्स है डायमंड के और गोल्ड के आफ्रिका के है वहां बड़ा रुतवा है इनका असोसियेशन के सर्वेसर्वा है तुमसे मिलने आए है कुछ लाभ ले सको तो लेलो तुम्हारा भी तो गोल्ड और डायमंड का काम है ना 

वो लोग कामया को एकटक देख रहे थे लालायित से काम अग्नि से भरे कामया के जिश्म को खा जाने वाली नजर से दो लोग ही थे पर कामया को लग रहा था कि भरी सभा में उसे नंगा करके देखने की इच्छा है उनमें गुरुजी के पास रखे हुए आसान पर जब वो बैठी तो उसका ड्रेस जाँघो के बहुत ऊपर उठ गया था अंदर कुछ नहीं था पर कामया ने अपनी जाँघो को एक के ऊपर एक रखकर अपनी आंतरिक अंगो को छुपा लिया था एक मधुर मुश्कान लिए उसने गुरुजी की ओर देखा था गुरुजी उसी की ओर देखते हुए एक अजीब सी हँसी लिए हुए बोले 

गुरुजी- आज से शुरू करो अपना मुहिम और अपने नाम दो चार माइन और बिज़नेस कर लो यहां से शुरू होता है तुम्हारे ऐश्वर्य का सफर कहो कैसा है इन लोगों की नजर को देखो क्या नहीं है जो चाहो लेलो मंजूर है या कोई रूपसा या मंदिरा को बुलाए 

कामया- नही मुझे मंजूर है गुरुजी जो आप जैसा कहेंगे करूँगी 

गुरुजी- मन से कह रही हो या सिर्फ़ हमारा मन रखने के लिए कह रही हो

कामया- नहीं गुरुजी मन से आपने ही तो कहा था कि अपने शरीर को यूज़ करो देखती हूँ क्या कर पाती हूँ हिहीही 

हँसती हुई कामया की नजर उन भूखे हब्सियो की ओर उठी थी वो लोग कोई बात नहीं समझ रहे थे पर एक लालसा उनके चेहरे पर साफ देखने को मिल रहा था कामया के शरीर को देखने की ओर भोगने की उनके सामने बैठी हुई यह औरत किसी अप्सरा की तरह अदाए बिखेरे हुए बैठी थी 

गुरु जी- यू कन गो वित हर शी विल टेल यू व्हाट आई वॉंट आंड यू कन बी माइ गेस्ट आंड एंजाय युवर स्टे डियर 

पहला आफ्रिकन गुरुजी यू आर सो काइंड आंड गेनरस हाउ कन वी बोत हौनोर यू वी आर लेक स्लेव्स टू यू प्लीज फर्गिव अस इफ एनी थिंग रॉंग हपन्स 

गुरुजी- नो नो माइ डियर डान’त बी अफ्रेड यू आर इन गुड हँड्ज़ डियर माइ सखी विल डिस्क्राइब यू आंड फेस यू टू दा एक्शत्रेआं प्लेषर आंड डेमाक्रेसी शी ईज़ आ लव्ली फीमेल आंड लोवेलबले टू 

दूसरा आफ्रिकन- (हाथ जोड़ कर) डियर सर प्लीज हेल्प अस वी आर तैयार टू महसूस दा पवर आंड प्लेषर प्लीज गाइड अस

गुरुजी- डेफीनितली डियर नाउ यू गो वित हर शी विल टीच यू आंड टेल यू व्हाट टू डू (और कामया की ओर देखकर ) जाओ सखी पहला दीक्षा देने का काम शुरू करो यह लोग तुम्हें वो सब देने में सक्षम है जो तुम्हें चाहिए और इन्हें जो चाहिए वो तुम इन्हें दो फिर देखना यह कैसे तुम्हारे गुलाम बनकर रहते है सारी जिंदगी जाओ 

और अपने हाथों के इशारे से उसने कामया और उन आफ्रिकन्स को जाने को कहा था कामया भी बड़ी अदा से अपने सीने को बाहर की ओर धकेलते हुए बड़े ही अंदाज से उठी थी और उन दोनों आफ्रिकन्स को लेकर गुरुजी के कमरे से बाहर आ गई थी उसके चलने की अदा इतनी लुभावनी थी की पीछे चल रहे दोनों आफ्रिकन की नजर उसके नितंबों से नहीं हट रही थी उसकी शारीर की लचक इतनी मादक थी कि उनका दिल मुँह से बाहर की ओर निकला जा रहा था मादकता और लचकती हुई कामया दासियों के बीचो बीच चलती हुई उन आफ्रिकन्स को लेकर अपने भव्य कमरे में पहुँचि थी और कमरे में आते ही उन महिलाओं ने कमरा बंद करके बाहर ही रुक गये थे कमरे में पहुँचते ही कामया ने उन्हें बैठने का इशारा किया था 

उन आफ्रिकन्स की नजर कामया के हुश्न से हट ही नहीं रही थी मुँह फाडे हुए उसके शरीर के हर हिस्से को देखने की कोशिश कर रहे थे कामया उन्हे देखकर थोड़ा सा मुस्कुराई थी और बोली 

कामया- यस जेंटल में वाइ और यू हियर कन यू डिस्क्राइब में 

पहला आफ्रिकन- वी हर्ड आफ गुरुजी सो वी केम हियर … 

कामया- आंड यू आंड व्हाट यू पीपल डू … 

दूसरा आफ्रिकन- वी आर पोस्ट होल्डर टू यूनियन आफ माइन इन आफ्रिका गोल्ड आंड डायमंड माइन्स वी आर हियर फार ट्रेडिंग वी हर्ड आफ गुरुजी सो वी केम टू विजिट आंड फार हिज ब्लेससिंग्स 

कामया- ओह्ह… एस यू आर इन राइट प्लेस वेल टेल मी हाउ कन वी हेल्प यू … 

1स्ट आफ्रिकन(सम)- वेल असल में वी वांटेड टू जाय्न हँड्ज़ वित सम आफ दा गुड आंड फेर पूरचआरएस हियर इन इंडिया हू कन टर्न और रहा गोल्ड आंड डायमंड इंटो आर्नमेंट्स आंड वित गुड कटिंग आफ रहा डायमंड कन यू हेल्प अस … 

कामया- ओह्ह… वाइ नोट आई विल सेंड यू टू दा मिस्टर धरंपाल ही इज आ नाइस पर्सन है विल गाइड यू हेल्प यू आर सेल्फ़ आंड डील वित दा पर्सन वी आर फेर बिज़नेसमन ओके… 

कामया ने पास में रखी घंटी को बजाया एक दासी लगभग दौड़ती हुई आई थी 

कामया- इन्हें धरंपाल जी के शोरुम में पहुँचा दो (और उन दोनों आफीकंस की ओर) यू गो वित हर शी विल अरेंज फार यू इफ एनी फर्दर हेल्प इस रिक्वाइयर्ड प्लीज महसूस फ्री तो अस्क मी थैंक यू 
कहती हुई कामया उस कमरे से बाहर निकल गई थी उन दोनों आफ्रिकन्स की नजर अब भी कामया के नितंबों के घुमाव और बलखाती चाल के आगे समर्पण कर चुके थे पर हिम्मत नहीं थी कि आगे कुछ कर सके पर दिल में उस हसीना के लिए जगह बना ली थी कामया भी जानती थी कि उन आफ्रिकन्स की नजर कहाँ पर है वो और बलखाती हुई चाल में अपनी कमर को लचकाती हुई एक मादक हसीना की तरह उनके दिलो में बिजली गिराती हुई बाहर की ओर चल दी थी उन आफ्रिकन्स को लेकर वो दासी चली गई थी कामया उसके बाद अपने कमरे में वापस आ गई थी और इंतजार में थी कि गुरुजी शायद अब बुलाएँगे पर ऐसा कुछ नहीं हुआ दोपहर के बाद शाम भी हो गई थी रूपसा और मंदिरा भी उसे नहीं मिले और नहीं कोई ऐसी घटना हुई 


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