Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भीमा अपना सुध बुध खोया हुआ अपने सामने इस सुंदर काया को अपने हाथों का खिलोना बनाने को आजाद था वो चुचियों को तो ब्लाउज के ऊपर से सहला रहा था पर उसका मन तो उसके अंदर से छूने को था उसने दूसरे हाथ को कामया के गालों और होंठों से आजाद किया और धीरे से उसके ब्लाउज के गॅप से उसके अंदर की डाल दिया मखमल सा एहसास उसके हाथों को हुआ और वो बढ़ता ही गया 

जैसे-जैसे उसका हाथ कामया के ब्लाउज के अंदर की ओर होता जा रहा था वो कामया से और भी सटताजा रहा था अब दोनों के बीच में कोई भी गॅप नहीं था कामया भीमा से पूरी तरह टिकी हुई थी या कहिए अब पूरी तरह से उसके सहारे थी उसकी जाँघो से टिकी अपने पीठ पर भीमा चाचा के लिंग का एहसास लेती हुई कामया एक अनोखे संसार की सैर कर रही थी उसके शरीर में जो आग लगी थी अब वो धीरे-धीरे इतनी भड़क चुकी थी कि उसने अपने जीवन काल में इस तरह का एहसास नहीं किया था 

वो अपने को भूलकर भीमा चाचा को उनका हाथ अपने ब्लाउसमें घुसने में थोड़ा मदद की वो थोड़ा सा आगे की ओर हुई अपने कंधों को आगे करके ताकि भीमा चाचा के हाथ आराम से अंदर जा सके भीमा चाचा की कठोर और सख्त हथेली जब उसकी स्किन से टकराई तो वो और भी सख्त हो गई उसका हाथ अपने आप उठकर अपने ब्लाउज के ऊपर से भीमा चाचा के हाथ पर आ गया एक फिर दोनों और फिर भीमा चाचा का हाथ ब्लाउज के अंदर रखे हुई थी वो और भी तन गई अपने चूचियां को और भी सामने की और करके वो थोड़ा सा सिटी से उठ गई थी 

भीमा ने भी कामया के समर्थन को पहचान लिया था वो समझ गये थे कि कामया अब ना नहीं कहेगी वो अब अपने हाथों का जोर उसके चुचियों पर बढ़ने लगे थे धीरे-धीरे भीमा उसकी चुचियों को छेड़ता रहा और उसकी सुडोलता को अपने हाथों से तोलता रहा और फिर उसके उंगलियों के बीच में निपल को लेकर धीरे से दबाने लगा 

उूुुुुुउऊह्ह कामया के मुख से एक लंबी सी सिसकारी निकली 

कामया- ऊऊह्ह पल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लीीआआआआअसस्स्स्स्स्स्सीईईई आआआआआह्ह 

भीमा को क्या पता क्या बोल गई थी कामया पर हाँ उसके दोनों हाथों के दबाब से वो यह तो समझ ही गया था कि कामया क्या चाहती थी उसने अपने दोनों हाथों को उसके ब्लाउज के अंदर घुसा दिया इस बार कोई ओपचारिकता नहीं की बस अंदर और अंदर और झट से दबाने लगा पहले धीरे फिर थोड़ा सा जोर से इतनी कोमल और नरम चीज आज तक उसके हाथ में नहीं आई थी वो अपने आप पर विश्वास नहीं कर पा रहा था वो थोड़ा सा और झुका और अपने बड़े और मोटे-मोटे होंठों को कामया के चिकने और गुलाबी गालों पर रख दिया और चूमने लगा चूमने क्या लगा सहद जैसे चाटने लगा था पागलो जैसी स्थिति थी भीमा की पाने हाथों में एक बड़े घर की बहू को वो शरीर रूपसे मोलेस्ट कर रहा था और कामया उसका पूरा समर्थन दे रही थी कंधे का दर्द कहाँ गया वो तो पता नहीं हाँ पता था तो बस एक खेल की शुरूरत हो चुकी थी और वो था सेक्स का खेल्ल शारीरिक भूख का खेल एक दूसरे को संत्ुस्त करने का खेल एक दूसरे को समर्पित करने का खेल कामया तो बस अपने आपको खो चुकी थी भीमा के झुक जाने की बजाह से उसके ब्लाउज के अंदर भीमा के हाथ अब बहुत ही सख़्त से हो गये थे वो उसके ब्लाउज के ऊपर के दो तीन बाट्टों को टाफ चुले थे दोनों तरफ के ब्लाउज के साइड लगभग अब उसका साथ छोड़ चुके थी वो अब बस किसी तरह नीचे के कुछ एक दो या फिर तीन हुक के सहारे थे वो भी कब तक साथ देंगे पता नहीं पर कामया को उससे क्या वो तो बस अपने शरीर भूख की शांत करना चाहती थी इसीलिए तो भीमा चाचा को उसने अपने कमरे में बुलाया था वो शांत थी और अपने हाथों का दबाब भीमा के हाथों पर और जोर से कर रही थी वो भीमा के झुके होने से अपना सिर भीमा के कंधे पर टिकाए हुए थी वो शायद सिटी को छोड़ कर अपने पैरों को नीचे रखे हुए और सिर को भीमा के कंधे पर टिकाए हुए अपने को हवा में उठा चुकी थी 


भीमा तो अपने होंठों को कामया के गालों और गले तक जहां तक वो जा सटका था ले जा रहा था अपने हाथों का दबाब भी वो अब बढ़ा चुका था कामया के चूचियां पर जोर जोर-जोर से और जोर से की कामया के मुख से एक जोर से चीत्कार जब तक नहीं निकल गई 

कामया- ईईईईईईईईईईईई आआआआआअह्ह उूुुुउउफफफफफफफफफफफफ्फ़ 
और झटक से कामया के ब्लाउसने भी कामया का साथ छोड़ दिया अब उसकी ब्लाउस सिर्फ़ अपना अस्तितवा बनाने के लिए ही थे उसके कंधे पर और दोनों पाट खुल चुके थे अंदर से उसकी महीन सी पतली सी स्ट्रॅप्स के सहारे कामया के कंधे पर टीके हुए थे और ब्रा के अंदर भीमा के मोटे-मोटे हाथ उसके उभारों को दबा दबा के निचोड़ रहे थे भीमा भूल चुका था की कामया एक बड़े घर की बहू है कोई गॉव की देहाती लड़की नही या फिर कोई देहात की खेतो में काम करने वाली लड़की नहीं है पर वो तो अपने हाथों में रूई सी कोमल और मखमल सी कोमल नाजुक लड़की को पाकर पागलो की तरह अब उसे रौंदने लगा था वो अपने दोनों हाथों को कामया की चुचियों पर रखे हुए उसे सहारा दिए हुए उसके गालों और गले को चाट और चूम रहा था 

उसका थूक कामया के पूरे चेहरे को भिगा चुका था वो अब एक हाथ से भीमा की गर्दन को पकड़ चुकी थी और खुद ही अपने गालों और गर्दन को इधर-उधर या फिर उचका करके भीमा को जगह दे रही थी कि यहां चाटो या फिर यहां चुमो उसके मुख और नाक से सांसें अब भीमा के चेहरे पर पड़ रही थी भीमा की उत्तेजना की कोई सीमा नहीं थी वो अधखुली आखों से कामया की ओर देखता रहा और अपने होंठों को उसके होंठों की ओर बढ़ाने लगा कामया भीमा के इस इंतजार को सह ना पाई और उसकी आखें भी खुली भीमा की आखों में देखते ही वो जैसे समझ गई थी कि भीमा क्या चाहता है उसने अपने होंठों को भीमा के हाथों में रख दिया जैसे कह रही हो लो चूमो चाटो और जो मन में आए करो पर मुझे शांत करो कामया की हालत इस समय ऐसी थी कि वो किसी भी हद तक जा सकती थी वो भीमा के होंठों को अपने कोमल होंठों से चूस रही थी और भीमा जो कि कामया की इस हरकत को नजर अंदाज नहीं कर पाया वो अब भी कामया की दोनों चुचियों को कसकर निचोड़ रहा था और अपने मुँह में कामया के होंठों को लेकर चूस रहा था वो हब्सियो की तरह हो गया था उसके जीवन में इस तरह की घटना आज तक नहीं हुई थी और आज वो इस घटना को अपने आप में समेट कर रख लेना चाहता था वो अब कामया को भोगे बगैर नहीं छोड़ना चाहता था वो भूल चुका था कि वो इस घर का नौकर है अभी तो वो सिर्फ़ और सिर्फ़ एक मर्द था और उसे भूख लगी थी किसी नारी के शरीर की और वो नारी कोई भी हो उससे फरक नहीं पड़ता था उसकी मालकिन ही क्यों ना हो वो अब नहीं रुक सकता .


उसने कामया को अपने बलिश्त हाथ से खींच लिया लगभग गिरती हुई कामया कुर्सी को छोड़ कर भीमा के ऊपर गिर पड़ी पर भीमा तैयार था उसने कामया को सहारा दिया और अपनी बाहों में कसकर बाँध लिया उसने कामया को अब भी पीठ से पकड़ा हुआ था उसके हाथों की छीना झपटी में कामया की दोनों चूचियां ब्रा के बाहर आ गई थी 

बल्कि कहिए खुद ही आजाद हो गई होंगी कितना जुल्म सहे बेचारी कैद में कामया का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि लग रहा था कि अब कभी भी बस झड जाएगी पर भीमा की उत्तेजना तो इससे भी कही अधिक थी उसका लिंग तो जैसे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था भीमा अब नहीं रुकना चाहता था और ना ही कुछ आगे की ही सोच पा रहा था उसने कामया को अपनी ओर कब मोड़ लिया कामया को पता भी ना चला बस पता चला तब जब उसकी सांसें अटकने लगी थी भीमा चाचा की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो उनकी बाहों में हिल भी नहीं पा रही थी सांस लेना तो दूर की बात वो अपने होंठों को भी भीमा चाचा से अलग करके थोड़ा सा सांस ले ले वो भी नहीं कर पा रही थी 


भीमा जो कि बस अब कामया के पूरे तन पर राज कर रहा था उसके हाथों का खिलोना पाकर वो उसे अपनी बाहों में जकड़े हुए उसके होंठों को अपने मुख में लेता जा रहा था और अंदर तक वो अपनी जीब को कामया के सुंदर और कोमल मुख में घुसाकर अंदर उसकी लार को अपने मुख में लेकर अमृत पान कर रहा था उसने कामया को इतनी जोर से जकड़ रखा था यह वो नहीं जानता था हाँ… पर उसे यह जरूर पता था रूई की गेंद सी कोई चीज़ जो कि एकदम कही से भी खुरदरी नहीं है उसके बाहों में है उसका लिंग अब कामया की जाँघो के बीच में रगड़ खा रहा था भीमा की हथेली कामया को थोड़ा सा ढीला छोड़ कर अपनी बाहों में आए हुश्न की परिक्रमा करने चल दी और कामया की पीठ से लेकर नितंबों तक घूम आए कब कहाँ कौन सा हाथ था यह कामया भी नहीं जानना चाहती थी नहीं ही भीमा हाँ… सपर्श जिसका ही एहसास दोनों को महसूस हो रहा था वो खास था कामया के शरीर को आज तक किसी ने इस तरह से नहीं छुआ था इतनी बड़ी बड़ी हाथलियो का स्पर्श और इतना कठोर स्पर्श आज तक कामया के शरीर ने नहीं झेला था या कहिए महसूस नहीं किया था भीमा जैसे आटा गूँथ रहा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो कामया के शरीर को इस तरह से मथ रहा था कि कामया का सारा शरीर ही उसके खेलने का खिलोना था वो जहां मन करता था वही उसे रगड़ रहा था भीमा और कामया अब नीचे कालीन में लेटे हुए थे और भीमा नीचे से कामया को अपने ऊपर पकड़कर उससे खेल रहा था उसके होंठ अब भी कामया के होंठों पर थे और एक दूसरे के थूक से खेल रहे थे कामया अपने को संभालने की स्थिति में नहीं थी उसकी पेटीकोट उसकी कमर के चारो तरफ एक घेरा बना के रह गया था अंदर की पैंटी पूरी तरह से गीली थी और वो भीमा चाचा को अपनी जाँघो की मदद से थोड़ा बहुत पकड़ने की कोशिश भी कर रही थी पर भीमा तो जो कुछ कर रहा था उसका उसे अनुभव ही नहीं था वो कभी कामया को इस तरफ और तो कभी उस तरफ करके उसके होंठों को अपने मुख में घुसा लेता था दोनों हाथ आ जादी से उसके जिश्म के हर हिस्से पर घूम घूमकर उनकी सुडौलता का और कोमलता का एहसास भी कर रहे थे भीमा के हाथ अचानक ही उसके नितंबो पर रुक गये थे और कामया की पैंटी की आउट लाइन के चारो तरफ घूमने लगे थे कामया का पूरा शरीर ही समर्पण के लिए तैयार था इतनी उत्तेजना उसे तो पहली बार ही हुई थी 


उसके पति ने भी कभी उसके साथ इस तरह से नहीं खेला था या फिर उसके शरीर को इस तरह से नहीं छुआ था भीमा चाचा के हर टच में कुछ नया था जो कि उसके अंदर तक उसे हिलाकर रख देता था उसके शरीर के हर हिस्से से सेक्स की भूख अपना मुँह उठाकर भीमा चाचा को पुकार रही थी वो अब और नहीं सह सकती थी वो भीमा चाचा को अपने अंदर समा लेना चाहती थी भीमा जो कि अब भी नीचे था और कामया को एक हाथ से जकड़ रखा था और दूसरे हाथ से उसकी पैंटी के चारो और से आउटलाइन बना रहा था आचनक ही उसने अपना हाथ उसकी पैंटी के अंदर घुसा दिया और कस कस कर उसके नितंबों को दबाने लगा फिर दूसरा हाथ भी इस खेल में शामिल हो गया कामया पर पकड़ जैसे ही थोड़ा ढीली हुई कामया अपनी योनि को और भी भीमा के लिंग के समीप ले गई और खुद ही उपर से घिसने लगी भीमा का लिंग तो आ जादी के लिए तड़प ही रहा था्

कामया के ऊपर-नीचे होने से वो और भी ख़ूँखार हो गया था वो भीमा को परेशान कर रहा था वो अपने जगह पर रह-ही नहीं रहा था अब तो उसे आजाद होना ही था और भीमा को यह करना ही पड़ा 

कामया ऊपर से भीमा के होंठों से जुड़ी हुई अपने हाथों को वो भी भीमा के शरीर पर चला रही थी उसके हाथों में बालों का गुछा आ रहा था जहां भी उसका हाथ जाता बाल ही बाल थे और वो भी इतने कड़े कि काँटे जैसे लग रहे थे पर कामया के नंगे शरीर पर वो कुछ अच्छे लग रहे थे यह बाल उसकी कामुकता को और भी बढ़ा रहे थे भीमा की आखें बंद थी पर कामया ने थोड़ी हिम्मत करके अपनी आखें खोली तो भीमा के नंगे पड़े हुए शरीर को देखती रह गई कसा हुआ था मास पेशिया कही से भी ढीली नहीं थी थुलथुला पन नहीं था कही भी उसके पति की तरह पति की तरह भीमा में कोई कोमलता भी नहीं थी कठोर और बड़ा भी था बालों से भरा हुआ और उसके हाथ तो बस उसकी कमर के चारो और तक जाते थे कुछ जाँघो के बीच में गढ़ रहा था अगर उसका लिंग हुआ तो बाप रे इतना बड़ा भी हो सकता है किसी का उसका मन अब तो भीमा के लिंग को आजाद करके देखने को हो रहा था वो अपने को भीमा पर जिस तरह से घिस रही थी उसका पूरा अंदाज़ा भीमा को था वो जानता था कि कामया अब पूरी तरह से तैयार थी पर वो क्या करे उसका मन तो अब तक इस हसीना के बदन से नहीं भरा था वो चाह कर भी उसे आजाद नहीं करना चाहता था पर इसी उधेड़ बुन में कब कामया उसके नीचे चली गई पता अभी नहीं चला और वो कब उसके ऊपर हावी हो गया नहीं पता वो कामया की पीठ को जकड़े हुए उसके होंठों को अब भी चूस रहा था 


कामया के शरीर पर अब वो चढ़ने की कोशिश कर रहा था कामया की पैंटी में एक हाथ ले जाते हुए उसको उतारने लगा उतारने क्या लगभग फाड़ ही दी उसने बची कुची उसके पैरों से आजाद करदी पेटीकोट तो कमर के चारो और था ही जरूरत थी तो बस अपने साहब को आजाद करने की भीमा होंठों से जुड़े हुए ही अपने हाथों से अपनी धोती को अलग करके अपने बड़े से अंडरवेयार को भी खोल दिया और अपने लिंग को आजाद कर लिया और फिर से गुथ गया कामया पर अब उसे कोई चिंता नहीं थी वो अब अपने हर अंग से कामया को छू रहा था 



अपने लिंग को भी वो कामया की जाँघो के बीच में रगड़ रहा था उसके लिंग की गर्मी से तो कामया और भी पागल सी हो उठी अपने जाँघो को खोलकर उसने उसको जाँघो के बीच में पकड़ लिया और भीमा से और भी सट गई अपने हाथों को भीमा की पीठ के चारो ओर करके भीमा चाचा को अपनी ओर खींचने लगी और कामया की इस हरकत से भीमा और भी खुल गया जैसे अपनी पत्नी को ही भोग रहा हो वो झट से कामया के शरीर पर छा गया और अपनी कमर को हिलाकर कामया के अंदर घुसने का ठिकाना ढूँडने लगा कामया भी अब तक सहन ही कर रही थी पर भीमा के झटको ने उसे भी अपनी जाँघो को खोलने और अपनी योनि द्वार को भीमा के लिंग के लिए स्वागत पर खड़े होना ही था सो उसने किया पर एक ही झटके में भीमा उसके अंदर जब उतरा तो ....


कामया- ईईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआअह्ह कर उठी भीमा का लिंग था कि मूसल बाप रे मर गई कामया तो शायद फटकर खून निकला होगा आखें पथरा गई थी कामया कि इतना मोटा और कड़ा सा लिंग जो कि उसके योनि में घुसा था अगर वो इतनी तैयार ना होती तो मर ही जाती पर उसकी योनि के रस्स ने भीमा के लिंग को आराम से अपने अंदर समा लिया पर दर्द के मारे तो कामया सिहर उठी भीमा अब भी उसके ऊपर उसे कस कर जकड़े हुए उसकी जाँघो के बीच में रास्ता बना रहा था कामया थोड़ी सी अपनी कमर को हिलाकर किसी तरह से अपने को अड्जस्ट करने की कोशिश कर ही रही थी कि भीमा का एक तेज झटका फिर पड़ा और कामया के मुख से एक तेज चीख निकल गई 

पर वो तो भीमा के गले में ही गुम हो गई भीमा अब तो जैसे पागल ही हो गया था ना कुछ सोचने की जरूरत थी और नहीं ही कुछ समझने की बस अपने लिंग को पूरी रफ़्तार से कामया की योनि में डाले हुए अपनी रफ़्तार पकड़ने में लगा था उसे इस बात की जरा भी चिंता नहीं थी कि कामया का क्या होगा उसे इस तरह से भोगना क्या ठीक होगा बहुत ही नाजुक है और कोमल भी पर भीमा तो बस पागलो की तरह अपनी रफ़्तार बढ़ाने में लगा था और कामया मारे दर्द के बुरी तरह से तड़प रही थी वो अपनी जाँघो को और भी खोलकर किसी तरह से भीमा को अड्जस्ट करने की कोशिश कर रही थी पर भीमा ने उसे इतनी जोर से जकड़ रखा था कि वो हिल तक नहीं पा रही थी उसके शरीर का कोई भी हिस्सा वो खुद नहीं हिला पा रही थी जो भी हिल रहा था वो बस भीमा के झटको के सहारे ही था भीमा अपनी स्पीड पकड़ चुका था और कामया के अंदर तक पहुँच गया था हर एक धक्के पर कामया चिहुक कर और भी ऊपर उठ जाती थी पर भीमा को क्या आज जिंदगी में पहली बार वो एक ऐसी हसीना को भोग रहा था जिसकी की कल्पना वो तो नहीं कर सकता था वो अब कोई भी कदम उठाने को तैयार था भाड़ में जाए सबकुछ वो तो इसको अपने तरीके से ही भोगेगा और वो सच मुच में पागलो की तरह से कामया के सारे बदन को चूम चाट रहा था और जहां जहां हाथ पहुँचते थे बहुत ही बेदर्दी के साथ दबा भी रहा था 


अपने भार से कामया को इस तरह से दबा रखा था कि कामया क्या कामया के पूरे घर वाले भी जमा होकर भीमा को हटाने की कोशिश करेंगे तो नहीं हटा पाएँगे और कामया जो कि भीमा के नीचे पड़े हुए अपने आपको नर्क के द्वार पर पा रही थी अचानक ही उसके शरीर में अजीब सी फुर्ती सी आ गई भीमा की दरिंदगी में उसे सुख का एहसास होने लगा उसके शरीर के हर अंग को भीमा के इस तरह से हाथों रगड़ने की आदत सी होने लगी थी यह सब अब उसे अच्छा लगने लगा था वो अब भी नीचे पड़ी हुई भीमा के धक्कों को झेल रही थी और अपने मुख से हर चोट पर चीत्कार भी निकलती पर वो तो भीमा के गले मे ही गुम हो जाती अचानक ही भीमा की स्पीड और भी तेज हो गई और उसकी जकड़ भी बहुत टाइट हो गई अब तो कामया का सांस लेना भी मुश्किल हो गया था पर उसके शरीर के अंदर भी एक ज्वालामुखी उठ रहा था जो कि बस फूटने ही वाला था हर धक्के के साथ कामया का शरीर उसके फूटने का इंतजार करता जा रहा था और और भीमा के तने हुए लिंग का एक और जोर दार झटका उसके अंदर कही तक टच होना था कि कामया का सारा शरीर काप उठा और वो झड़ने लगी और झड़ती ही जा रही थी कमाया भीमा से बुरी तरह से लिपट गई अपनी दोनों जाँघो को ऊपर उठा कर भीमा की कमर के चारो तरफ एक घेरा बनाकर शायद वो भीमा को और भी अंदर उतार लेना चाहती थी और भीमा भी एक दो जबरदस्त धक्कों के बाद झड़ने लगा था वो भी कामया के अंदर ढेर सारा वीर्य उसके लिंग से निकाला था जो कि कामया की योनि से बाहर तक आ गया था पर फिर भी भीमा आख़िर तक धक्के लगाता रहा जब तक उसके शरीर में आख़िरी बूँद तक बचा था और उसी तरह कस कर कामया को अपनी बाहों में भरे रहा, दोनों कालीन में वैसे ही पड़े रहे कामया के शरीर में तो जैसे जान ही नहीं बची थी वो निढाल सी होकर लटक गई थी भीमा चाचा जो कि अब तक उसे अपनी बाहों में समेटे हुए थे अब धीरे-धीरे अपनी गिरफ़्त को ढीला छोड़ रहे थे और ढीला छोड़ने से कामया के पूरे शरीर में जैसे जान ही वापस आ गई थी उसे सांस लेने की आ जादी मिल गई थी वो जोर-जोर से सांसें लेकर अपने आपको संभालने की कोशिश कर रही थी


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

भीमा कामया पर से अपनी पकड़ ढीली करता जा रहा था और अपने को उसके ऊपर से हटाता हुआ बगल में लुढ़क गया था वो भी अपनी सांसों को संभालने में लगा था रूम में जो तूफान आया था वो अब थम चुका था दोनों लगभग अपने को संभाल चुके थे लेकिन एक दूसरे की ओर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे भीमा वैसे ही कामया की ओर ना देखते हुए दूसरी तरफ पलट गया और पलटा हुआ अपनी धोती ठीक करने लगा अंडरवेर पहना और अपने बालों को ठीक करता हुआ धीरे से उठा और दबे पाँव कमरे से बाहर निकल गया कामया जो कि दूसरी और चेहरा किए हुए थी भीमा की ओर ना उसने देखा और ना ही उसने उठने की चेष्टा की वो भी चुपचाप वैसे ही पड़ी रही और सबकुछ ध्यान से सुनती रही उसे पता था कि भीमा चाचा उठ चुके हैं और अपने आपको ठीक ठाक करके बाहर की चले गये है कामया के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थी उसके चेहरे पर एक संतोष था एक अजीब सी खुशी थी आखों में और होंठों को देखने से यह बात सामने आ सकती थी पर वो वैसे ही लेटी रही और कुछ देर बाद उठी और अपने आपको देखा उसके शरीर में सिर्फ़ पेटीकोट था जिसका की नाड़ा कब टूट गया था उसे नहीं पता था और कुछ भी नहीं था हाँ… था कुछ और भी भीमा के हाथों और दाँतों के निशान और
उसका पूरा शरीर थूक और पसीने से नहाया हुआ था वो अपने को देखकर थोड़ा सा मुस्कुराइ आज तक उसके शरीर में इस तरह के दाग कभी नहीं आए थे होंठों पर एक मुस्कान थी भीमा चाचा के पागलपन को वो अपने शरीर पर देख सकती थी जो की उसने कभी भी अपने पति से नहीं पाया था वो आज उसने भीमा चाचा से पाया था उसकी चुचियों पर लाल लाल हथेली के निशान साफ दिख रहे थे वो यह सब देखती हुई उठी और पेटीकोट को संभालते हुए अपनी ब्लाउस और ब्रा को भी उठाया और बाथरूम में घुस गई जब वो बाथरूम से निकली तो उसे बहुत जोर से भूख लगी थी याद आया कि उसने तो खाना खाया ही नहीं था 

अब क्या करे नीचे जाने की हिम्मत नहीं थी भीमा चाचा को फेस करने की हिम्मत वो जुटा नहीं पा रही थी पर खाना तो खाना पड़ेगा नहीं तो भूख का क्या करे घड़ी पर नजर गई तो वो सन्न रह गई 2 30 हो गये थे तो क्या भीमा और वो एक दूसरे से लगभग दो घंटे तक सेक्स का खेल खेल रहे थे कामेश तो 5 से 10 मिनट में ही ठंडा हो जाता था और आज तो कमाल हो गया कामया का पूरा शरीर थक चुका था उसे हाथों पैरों में जान ही नहीं थी पूरा शरीर दुख रहा था हर एक अंग में दर्द था और भूख भी जोर से लगी थी थोड़ी हिम्मत करके उसने इंटरकम उठाया और किचेन का नंबर डायल किया एक घंटी बजते ही उधर से 
भीमा- हेलो जी खाना खा लीजिए 

भीमा की हालत खराब थी वो जब नीचे आया तो उसके हाथ पाँव फूले हुए थे वो सोच नहीं पा रहा था कि वो अब बहू को कैसे फेस करेगा वो अपने आपको कहाँ छुपाए कि बहू की नजर उसपर ना पड़े पर जैसे ही वो नीचे आया तो उसके मन में एक चिंता घर कर गई थी और खड़ा-खड़ाकिचेन में यही सोच रहा था कि बहू ने खाना तो खाया ही नहीं 

मर गये अब क्या होगा मतलब कामया को खाना ना खिलाकर वो तो किचेन साफ भी नहीं कर सकता और वो बहू को कैसे नीचे बुलाए और क्या बहू नीचे आएगी कही वो अपने कमरे से कामेश या फिर साहब को फोन करके बुला लिया तो कही पोलीस के हाथों उसे दे दिया तो क्या यार क्या कर दिया मैंने क्योंकिया यह सब वो अपने हाथ जोड़ कर भगवान को प्रार्थना करने लगा प्लीज भगवान मुझे बचा लो प्लीज अब नहीं करूँगा उसके आखों में आँसू थे वो सच मुच में शर्मिंदा था जिस घर का नमक उसने खाया था उसी घर की इज़्ज़त पर उसने हाथ डाला था अगर किसी को पता चला तो उसकी इज़्ज़त का क्या होगा गाँव में भी उसकी थू-थू हो जाएगी और तो और वो साहब और माँ जी को क्या मुँह दिखाएगा सोचते हुए वो 
खड़ा ही था की इंटरकम की घंटी बज उठी डर के साथ हकलाहट में वो सबकुछ एक साथ कह गया पर दूसरी ओर से कुछ भी आवाज ना आने से वो फिर घबरा गया 
भीमा- हेल्लू 

कामया- खाना लगा दो 

और फोन काट दिया कामया ने उसके पास और कुछ कहने को नहीं था अगर भूखी नहीं होती तो शायद नीचे भी ना जाती पर क्या करे उसने फिर से वही सुबह वाला सूट पहना और नीचे चल दी सीढ़िया के ऊपर से उसे भीमा चाचा को देखा जो की जल्दी-जल्दी खाने के टेबल पर उसका खाना लगा रहे थे वो भी बिना कुछ आहट किए चुपचाप डाइनिंग टेबल पर पहुँची कामया को आता सुनकर ही भीमा जल्दी से किचेन में वापस घुस गया कामया भी नीचे गर्दन किए खाना खाने लगी थी जल्दी-जल्दी में क्या खा रही थी उसे पता नहीं था पर जल्दी से वो यहां से निकल जाना चाहती थी किसी तरह से उसने अपने मुँह में जितनी जल्दी जितना हो सकता था ठूँसा और उठ कर वापस अपने कमरे की ओर भागी नीचे बेसिन पर हाथ मुख भी नहीं धोया था उसने 


कमरे में आकर उसने अपने मुँह के नीवाले को ठीक से खाया और बाथरूम में मुँह हाथ धोकर बिस्तर पर लेट गई अब वो सेफ थी पर अचानक ही उसके दिमाग में बात आई कि उसे तो शाम को ड्राइविंग पर जाना था अरे यार अब क्या करे उसका मन तो बिल्कुल नहीं था उसने फोन उठाया और कामेश को रिंग किया 

कामेश- हेलो 

कामया- सुनिए प्लीज आज ना में ड्राइविंग पर नहीं जाऊँगी कल से चली जाऊँगी ठीक है 

कामेश- हहा ठीक है क्यों क्या हुआ 

कामया- अरे कुछ नहीं मन नहीं कर रहा कल से ठीक है 

कामेश- हाँ ठीक है कल से चलो रखू 

कामया- जी 

और फोन काट गया 
कामया ने भी फोन रखा और बिस्तर पर लेटे लेटे सीलिंग की ओर देखती रही और पता नहीं क्या सोचती रही और कब सो गई पता नहीं चला


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

शाम को जब वो उठी तो एक अजीब सा एहसास था उसके शरीर में एक अजीब सी कशिश थी उसके अंदर एक ताजगी सी महसूस कर रही थी वो सिर हल्का था शरीर का दर्द पता नहीं कहाँ चला गया था सोई तो ऐसी थी कि जनम में ऐसी नींद उसे नहीं आई थी 

बहुत अच्छी और फ्रेश करने वाली नींद आई थी उठकर जब कामया बाथरूम से वापस आई तो मोबाइल पर रिंग बज रहा था उसने देखा कामेश का था 
कामया- हेलो 
कामेश- कहाँ थी अब तक 
कामया- क्यों क्या हुआ 
कामेश देखो 6 7 बार कॉल किया 
कामया- अरे में तो सो रही थी और अभी ही उठी हूँ 
कामेश- अच्छा बहुत सोई हो आज तुम 
कामया- जी कहिए क्या बात है 
कामेश- पार्टी में चलना है रात को 
कामया- कहाँ 
कामेश- अरे बर्तडे पार्टी है मेहता जी के बेटे के बेटे का 
कामया- हाँ हाँ ठीक है कितने बजे 
कामेश- वही रात को 9 30 10 बजे करीब तैयार रहना 
कामया- ठीक है 
और कामया का फोन कट गया अब कामया को देखा कि 6 मिस्ड कॉल थे उसे सेल पर 
कितना सोई थी आज वो फ्रेश सा लग रहा था वो मिरर के सामने खड़ी होकर अपने को देखा तो बिल्कुल फ्रेश लग रही थी चेहरा खिला हुआ था और आखें भी नींद के बाद भी खिली हुई थी अपना ड्रेस और बाल को ठीक करने के बाद वो नीचे जाती कि इंटरकम बज उठा 

मम्मीजी- बहू चाय नहीं पीनी क्या 

कामया- आती हूँ मम्मीजी 

और भागती हुई नीचे चली गई भीमा चाचा का कही पता नहीं था शायद किचेन में थे मम्मीजी डाइनिंग टेबल पर थी और कामया का ही इंतजार कर रही थी कामया भी जाकर मम्मीजी पास बैठ गई और दोनों चाय पीने लगे 

मम्मीजी- कामेश का फोन आया था कह रहा था कि कोई पार्टी में जाना है 

कामया- जी बात हो गई 

मम्मीजी- हाँ कह रहा था कि कामया फोन नहीं उठा रही है 

कामया- जी सो रही थी सुनाई नहीं दिया 

मम्मीजी- हाँ… मैंने भी यही कहा था (कुछ सोचते) थोड़ा बहुत घूम आया कर तू पूरा दिन घर में रहने से तू भी मेरे जैसे ही हो जाएगी 

कामया- जी कहाँ जाऊ 

मम्मीजी- देख बहू इन दोनों को तो कमाने से फुर्सत नहीं है पर तू तो पढ़ी लिखी है घर के चार दीवारी से बाहर निकल और देख दुनियां में क्या चल रहा है और कुछ खर्चा भी किया कर क्या करेंगे इतना पैसा जमा कर कोई तो खर्चा करे 

कामया- जी ही ही (और मम्मीजी को देखकर मुस्कुराने लगी )

मम्मीजी- और क्या मैंने तो सोच लिया है कुछ दिनों के लिए तीरथ हो आती हूँ घूमना भी हो जाएगा और थोड़ा सा बदलाब भी आ जाएगा तू भी कुछ प्रोग्राम बना ले और घूम आ ही ही 

दोनों सासू माँ और बहू में हँसी मजाक चल रहा था और एक दूसरे को सिखाने में लगे थे 
पर कामया का मन तो आज बिल्कुल साफ था आज का अनुभव उसके जीवन में जो बदलाब लाने वाला था उससे वो बिल्कुल अंजान थी बातों में उसे दोपहर ही घटना को वो भूल चुकी थी या फिर कहिए कि अब भी उसका ध्यान उस तरफ नहीं था वो तो मम्मीजी के साथ हँसी मजाक के मूड में थी और शाम की पार्टी में जाने के लिए तैयार होने को जा रही थी बहुत दिनों के बाद आज वो कही बाहर जा रही थी 

चाय पीने के बाद मम्मीजी अपने पूजा के कमरे की ओर चली गई और कामया अपने कमरे की ओर तैयार जो होना था वारड्रोब से साडियो के ढेर से अपने लिए एक जड़ी की साड़ी निकाली और उसके साथ ही मैचिंग ब्लाउस कामेश को बहुत पसंद था एक ड्रेस 

यही सोचकर वो तैयारी में लग गई 9 तक कामेश आ जाएगा सोचकर वो जल्दी से अपने काम में लग गई 

करीब 9 15 तक कामेश आ गया और अपने कमरे में पहुँचा कमरे में कामया लगभग तैयार थी कामेश को देखकर कामया ड्रेसिंग टेबल छोड़ कर खड़ी हो गई और मुस्कुराते हुए अपने आपको कामेश के सामने प्रेज़ेंट करने लगी 

कामेश जो कि उसका दिमाग़ कही और था कामया की सुंदरता को अपने सामने खड़े इस तरह की साड़ी में देखता रहता कामया इस समय एक महीन सी साड़ी पहने हुए थी स्लीव्ले ब्लाउज था और चूचियां को समझ के ढका था पर असल में दिखाने की ज्यादा कोशिश थी साड़ी का पल्लू भी दाई चुचि को छोड़ कर बीच से होता हुआ कंधे पर गया था उससे दाई चूची बाहर की और उछलकर मुँह उठाए देख रहा था

लेफ्ट चुचि ढका क्या था सामने वाले को निमंत्रण था कि कोशिश करो तो शायद कुछ ज्यादा दिख जाए क्लीवेज साफ-साफ नीचे तक दिख रहे थे मुस्कुराते हुए कामया ने पलटकर भी कामेश को अपना हुश्न दिखाया पीछे से पीठ आधे से ज्यादा खुले हुए थे पतली सी पट्टी ही उसे सामने से पकड़ी हुई थी और वैसे ही कंधे पर से पट्टी उतरी थी 

कामेश- (सिटी बजाते हुए) क्या बात है आज कुछ ज्यादा ही तैयार हो हाँ… कहाँ बिजली गिराने वाली हो 
कामया- हीही और कहाँ जहां गिर जाए यहां तो कुछ फरक नहीं पड़ता क्यों है ना 
कामेश- हाँ… फिर आज नहीं जाते यही बिजली गिराती रहो ठीक है 
कामया- ठीक है 
कामेश हँसते हुए बाथरूम में घुस गया और कामया भी वापस अपने आपको मिरर में सवारने का अंतिम टच दे रही थी
कामेश भी जल्दी से तैयार होकर कामया को साथ में लेकर नीचे की चल दिया कामेश के साथ कामया भी नीचे की जा रही थी डाइनिंग रूम के पर करते हुए वो दोनों पापाजी और मम्मीजी के कमरे की तरफ चल दिए ताकि उनको बोल कर जा सके 
कामेश- मम्मी हम जा रहे है 
मम्मीजी- ठीक है जल्दी आ जाना 
पापाजी- लाखा रुका है उसे ले जाना 
कामेश- जी 
और पलटकर वो बाहर की ओर चले 
मम्मीजी- अरे भीमा दरवाजा बंद कर देना 
कामया के शरीर में एक सिहरन सी फेल गई जैसे ही उसने भीमा चाचा का नाम सुना उसने ना चाह कर भी पीछे पलटकर किचेन की ओर देख ही लिया शायद पता करना चाहती हो कि भीमा चाचाने उसे इस तरह से तैयार हुए देखा की नहीं 
क्यों चाहती थी, कामया की भीमा उसे देखे क्यों पर कामया थोड़ा सा रुक गई कामेश आगे की निकल गया था पलटकर कामया ने जब किचेन की ओर देखा तो पाया कि किचेन के पीछे के दरवाजे से कोई बाहर की ओर निकलते हुए 
किचेन में एक दरवाजा पीछे की तरफ भी खुलता था जिससे भीमा कचरा बागेरा फैंकता था या फिर नौकरो के आने जाने का था किसी को खाना खाना हो तो बाहर एक शेड बना था उसमें वो बैठे थे बाहर निकलने वाला शायद लाखा ही होगा 
पर वो इस समय किचेन में क्या कर रहा था शायद पानी या फिर कुछ खाने आया होगा जैसे ही लाखा बाहर को निकला वैसे ही भीमा किचेन के दरवाजे पर दरवाजा बंद करने को डाइनिंग स्पेस पर निकलकर आया 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

अब भीमा और कामया एकदम आमने सामने थे कामेश बाहर निकल गया था ड्राइंग रूम के बीच में खड़ी थी फुल्ली ड्रेस अप बिजली गिराती हुई कामसुख और मादकता लिए हुए सुंदर और सेक्सी दिखती हुई और किसी भी साधु या फिर सन्यासी की नियत को हिलाने के लिए 

जैसे ही भीमा और कामया की नजर आपस में टकराई दोनों जैसे जमीन में धस्स गये थे दोनों एक दूसरे को देखते रह गये भीमा की नजर तो जैसे जम गई थी कामया के ऊपर नीचे से ऊपर तक एकटक निहारता रह गया वो कामया को क्या लग रही थी किसी अप्सरा की तरह और भीमा को देखकर कामया को दोपहर का वाकया याद आ गया कि कैसे भीमा ने उसे रोंदा था और कैसे उसके हाथ और होंठों ने उसे छुआ और चूमा था हर वो पहलू दोनों के जेहन में एक बार फिर ताजा हो गई थी दोनों के आँखों में एक सेक्स की लहर दौड़ गई थी कामया का पूरा शरीर सिहर गया था उसके जाँघो के बीच में हलचल मच गई थी निपल्स ब्रा के अंदर सख़्त हो गये थे 

भीमा का भी यही हाल था उसके धोती के अंदर एक बार फिर उसके पुरुषार्थ ने चिहुक कर अपने अस्तित्व की आवाज को बुलंद कर दिया था वो अपने को आजाद करने की गुहार लगाने लग गया था दोनों खड़े हुए एक दूसरे को देखते रह गये किसी ने भी आगे बढ़ने की या फिर नजर झुका के हटने की कोशिश नहीं की 
पर बाहर से कामेश की आवाज ने कामया और भीमा को चौंका दिया कामया पलटकर जल्दी से गाड़ी की ओर भागी और भीमा ने भी अपनी नजर झुका ली 

बाहर कामेश गाड़ी के अंदर बैठ चुका था और लाखा गाड़ी का गेट खोले नज़रें झुकाए खड़ा था कामया ने अपने पल्लू को संभाल कर जल्दी से गाड़ी के पास आई और गाड़ी में बैठने लगी पर ना जाने क्यों उसकी नजर लाखा काका पर पड़ गई जो की नज़रें झुकाए हुए भी कामया के ऊपर नजर डालने से नहीं चुका था जब कामया बैठ गई तो लाखा दरवाजा बंद करके जल्दी से घूमकर ड्राइविंग सीट पर बैठ गया और गाड़ी गेट के बाहर की ओर दौड़ चली 

कामेश और कामया पीछे बैठे हुए बाहर की ओर देख रहे थे और अपने पार्टी वाली जगह पर पहुँचने की बारे में सोच रहे थे और बीच बीच में एक दूसरे से कुछ बातें भी करते जा रहे थे लाखा काका गाड़ी चलाने में लगे थे 

कामया की नजर कभी बाहर कभी अंदर की ओर थी आज बहुत दिनों बाद बाहर निकली थी पर अचानक ही उसकी नजर बॅक व्यू पर पड़ी तो लाखा काका की नजर को अपनी ओर पाकर वो चौक गई जब वो गाड़ी में बैठ रही थी तब भी उसे लगा था कि लाखा काका उसी को देख रहे है पर उसने ध्यान नहीं दिया था शायद वो कुछ गलत सोच रही थी पर अब वो पक्का था कि लाखा काका की नजर अब उस पर थी अपने पति की नजर चुरा कर वो कई बार इस बात को प्रूव भी कर चुकी थी 
जब भी गाड़ी किसी रेड लाइट पर खड़ी होती थी तो या फिर जब भी वो मिरर में देखता था पीछे की ओर देखने के लिए तो एक बार वो कामया को जरूर निहार लेता था कामया के पूरे शरीर में जो सनसनी भीमा चाचा के पास उनके देखने पर हुए थी वो अब एक कदम और आगे बढ़ गया था वो ना चाह कर भी नज़रें बचा कर लाखा काका की नजर का पीछा कर रही थी वो कई बार इस बात की पुष्टि कर चुकी थी कि लाखा काका उसे ही देख रहे थे 

तभी वो लोग वहां पहुँच गये और गाड़ी पार्क कर लाखा काका दौड़ कर कामया की ओर के दरवाजे की ओर लपके कामेश तो दूसरी तरफ का दरवाजा खोलकर उतर गये और पास खड़े हुए किसी से बात भी करने लगे थे पर कामया को उतरने में थोड़ी देर हुई जब लाखा काका ने दरवाजा खोला तब पहले उसने अपने टांगों को बाहर निकाला पैरों के ऊपर से उसकी साड़ी थोड़ी ऊपर की ओर हुई और उसके सुंदर और गोरे गोरे पैरों के दर्शान लाखा को हुए जो की नज़रें झुकाए अब भी वही खड़े थे 
सुंदर पिंडलियो में उसकी सुंदर सी सैंडल हील वाली उसके गोरे गोरे पैरों पर बहुत ही खूबसूरत लग रही थी दूसरे पैर के बाहर निकलते ही कामया थोड़ा सा आगे की ओर हुई और झुक कर बाहर को निकली तो लाखा अपनी नजर को कामया के पेट और नाभि से लेकर ब्लाउज तक ले जाने से नहीं रोक पाया वो मंत्रमुग्ध सा कामया की उठी हुई चुचियों को और नाजुक और सुडोल शरीर को निहारता रहा जब कामया उसके सामने से निकलकर बाहर खड़ी हुई तो वो उसके नथुनो में एक फ्रेश और ताजी सी खुशबू उसके जेहन तक बस गई और वो लगभग गिरते गिरते बचा था उसका पूरा शरीर उसका साथ नहीं दे रहा था वो इस अप्सरा के इतने पास था पर वो कुछ नहीं कर सकता था बीच में सिर्फ़ गाड़ी का दरवाजा और उस तरफ कामया जिसका की पूरा साड़ी का पल्लू उसके ब्लाउज के ऊपर से ढालका हुआ था और गाड़ी से बाहर निकलने के बाद उसके सामने खड़ी हुई ठीक कर रही थी वाह क्या सीन था लाखा खड़ा-खड़ा उस सुंदरता को अपने अंदर उतार रहा था और नजरें नीचे किए अब भी उसकी कमर को देख रहा था जहां कामया की साड़ी फँसी हुई थी और अपने मुक़द्दर को कोस रहा था तभी कामेश की आवाज पर कामया झटके से पलटी और कामेश की ओर देखने लगी 


ऊऊऊओह्ह… लाखा तो शायद मर ही गया होता जब कामया के पलटने से उसके खुले हुए बाल उड़ कर लाखा के चेहरे पर पड़े और गेट के पास से होते हुए नीचे गिर गये उसके सिर के सहारे लाखा का तो जैसे दम ही घुट गया था गला सुख गया था हाथ पाँव ने जबाब दे दिया था वो जहां था वही जम गया था मुँह खुला का खुला रह गया था एक तेज लहर उसके शरीर में दौड़ गई थी और उसके नथुनो में एक और खुशबू ने प्रवेश किया था वो उसके शरीर की खुशबू से अलग थी 

उूउउफफफ्फ़ क्या खुशबू थी गाड़ी के अंदर जो खुशबू थी वो तो उसने जो सेंट या पर्फ्यूम लगाया था उसकी थी तो क्या यह खुशुबू कामया के शरीर की थी उउउफफ्फ़ 

लाखा खड़ा-खड़ा यही सोच रहा था और नजरें उठाए कामया की पतली कमर को बलखाते हुए अपने पति की ओर जाते हुए देखता रहा क्या कमर पटका पटका कर चलती थी बहू क्या फिगर था कमर कितनी पतली सी थी और चूचियां तो बहुत ही मस्त है कितनी गोरी और नाजुक सी दिखती है, बहू वो गाड़ी का दरवाजा पकड़कर, खड़ा-खड़ा कामया को अपने पति के साथ जाते हुए देखता रहा जैसे कोई भूखा अपने हाथों से रोटी छीनते हुए देख रहा हो 

वो अब भी मंत्रमुग्ध सा कामया को निहार रहा था कि अचानक ही कामया पलटी और लाखा की नज़रें उससे टकराई लाखा पथरा गया और जल्दी से नजरें नीचे कर दरवाजा बंद करने लगा पर नजरें झुकाते समय उसे बहू की नजरों में होंठों में एक मुस्कुराहट को उसने देखा था जब तक वो फिर से उसे तरफ देखता तब तक वो अंदर जा चुके थे वो सन्न रह गया था क्या बहू को मालूम था कि वो उसे देख रहा था 

बाप रे बाप कही साहब से शिकायत कर दिया तो मेरी तो नौकरी तो गया और फिर बेइज़्ज़ती बाप रे बाप आज तक लाखा इतना नहीं डरा था जो अब भी उसकी हालत थी उसे माफी माँग लेना चाहिए बहू से कह देगा कि गलती हो गई पर पर बहू तो मुस्कुराई थी हाँ… यह तो पक्का था उसे अच्छे से याद था वो जानती थी कि वो उसे देख रहा था फिर भी उसने कुछ नहीं कहा यही कामेश को कह सकती थी लाखा घर से लेकर अब तक की घटना को याद करने लगा था जब भी वो पीछे देखता था तो उसकी नजर बहू से टकराती थी 

तो क्या बहू जानती थी कि वो उसे देख रहा था या फिर ऐसे ही उसकी कल्पना थी 
और उधर कामया जब गाड़ी से बाहर निकली तो लाखा उसके लिए दरवाजा खोले खड़ा था उसके उतरते हुए साड़ी का उठना और फिर उसके खड़े होते हुए लाखा के समीप होना यह सबकामया जानती थी और जब वो पलटकर जाने लगी थी तो एक लंबी सांस लेने की आवाज भी उसे सुनाई दी थी पति के साथ जब वो अंदर की ओर जाने लगी थी तो उसने पलटकर देखा भी था कि वाकई क्या लाखा काका उसे ही देख रहे है या फिर उसके दिल की कल्पना मात्र थी हाँ… काका उसे ही निहार रहे थे 

कामया का शरीर झनझना गया था पलटते समय उसके चेहरे पर एक मुश्कान थी जो कि शायद लाखा काका ने देख लिया था 

कामया तो अंदर चली गई पर लाखा काका को बेसूध कर गई वो गाड़ी के पास खड़ा-खड़ा बहू के बारे में ही सोच रहा था और अपने आपको बड़ा ही खुशनसीब समझ रहा था कि वो एक इतनी सुंदर मालेकिन का नौकर है घर पर सब उसे बहुत इज़्ज़त देते थे और बहू भी पर आज तो बहू कमाल की लग रही थी आचनक ही उसके दिमाग में एक बात बिजली की तरह दौड़ गई अरे उसे तो बहू को ड्राइविंग भी सिखानी है पर क्या वो बहू को ड्राइविंग सिखा पाएगा कही उससे कोई गलती हो गई तो और बहू अगर इस तरह के कपड़े पहनेगी तो क्या वो अपनी निगाहो को उससे देखने से दूर रख पाएगा बाप रे अब क्या करे अभी तक तो सबकुछ ठीक था पर आज जो कुछ भी उसके मन में चल रहा था 


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उसके बाद तो वो बहू को देखते ही अपना आपा ना खो दे यही सोचकर वो काप गया था बहू के पास जब वो सामने उसे ड्राइविंग सिखाएगा तो बहू उसके बहुत पास बैठी होगी और उसकी खुशबू से लेकर उसके स्पर्श तक का अंदाज़ा लाखा गाड़ी में बैठे बैठे लगा ही रहा था और अपने में खोया हुआ बहू की सुंदरता को अपनी सोच के अनुरूप ढाल रहा था की बाहर से काँच में दस्तक हुई तो वो बाहर देखा कि कामेश खड़ा है और बहू भी उससे थोड़ी दूर अपने दोस्तों से बात कर रही है वो झट पट बाहर निकला और दौड़ता हुआ गाड़ी का दरवाजा खोलने लगा कामेश तो झट से बैठ गया पर कामया अपने दोस्तों से बात करके जब पलटी तो लाखा अपनी नजर को नीचे नहीं कर पाया वो मंत्रमुग्ध सा कामया के यौवन को निहारता रहा 

और अपने आँखों में उसकी सुंदरता को उतारता रहा कामया ने एक बार लाखा काका की ओर देखा और चुपचाप दरवाजे से अंदर जाकर अपनी सीट पर बैठ गई लाखा भी लगभग दौड़ता हुआ अपनी सीट की तरफ भागा उसे पता ही नहीं चला था कि कैसे दो घंटे बीत गये थे और वो सिर्फ़ बहू के बारे में ही सोचता रहा गया था वो अपने अंदर एक ग्लानि से पीड़ित हो गया था छि छी वो क्या सोच रहा था जिनका वो नमक खाता है उनके घर की बहू के बारे में वो क्या सोच रहा था कामेश को उसने दो साल का देखा था और तब से वो इस घर का नौकर था भीमा तो उससे पहले का था नहीं उसे यह सब नहीं सोचना चाहिए यह गलत है वो कोई जानवर तो नहीं है वो एक इंसान है जो गलत है वो उसके लिए भी गलत है वो गाड़ी चला रहा था 

पर उसका दिमाग पूरा समय घर तक इसी सोच में डूबा था पर उसके मन का वो क्या करे वो चाह कर भी अपनी नजर बहू के ऊपर से नहीं हटा पाया था पर घर लौट-ते समय उसने एक बार भी बहू की ओर नहीं देखा था उसने अपने मन पर काबू पा लिया था इंसान अगर कोई चीज ठान ले तो क्या वो नहीं कर सकता बिल्कुल कर सकता है उसने अपने दिमाग पर चल रहे ढेर सारे सवाल को एक झटके से निकाल दिया और फिर से एक नमक हलाल ड्राइवर के रूप में आ गया और गाड़ी घर की ओर तेजी से दौड़ चलो थी अंदर बिल्कुल सन्नाटा था घर के गेट पर चौकी दार खड़ा था गाड़ी आते देखकर झट से दरवाजा खुल गया गाड़ी की आवाज से अंदर से भीमा भी दौड़ कर आया और घर का दरवाजा खोलकर बाजू में सिर झुकाए खड़ा हो गया 


गाड़ी के रुकते ही लाखा काका बाहर निकले और पहले कामेश की तरफ जाते पर कामेश तो खुद ही दरवाजा खोलकर बाहर आ गया था तो वो बहू की ओर का दरवाजा खोले नीचे नजरें किए खड़ा हो गया कामेश गाड़ी से उतरते ही अंदर की ओर लपका कामया को बाहर ही छोड़ कर भीमा भी दरवाजे पर खड़ा था और लाखा गाड़ी के दरवाजे को खोले कामया अपनी ही नजाकत से बाहर निकली और लाखा के समीप खड़े होकर ही 

कामया- काका कल से में गाड़ी सीखने चलूंगी आप शाम को जल्दी से आ जाना 

लाखा- जी बहू रानी 
उसकी आवाज में लरखराहट थी गला सुख गया था कामया और उसके बीच में सिर्फ़ गाड़ी का दरवाजा ही था उसके बाल हवा में उड़ते हुए उसके चेहरे पर पड़ रहे थे और जब कामया ने अपने हाथों से अपने बालों को संवारा तो लाखा फिर से अपनी सुध खो चुका था फिर से वो सब कुछ भूल चुका था जो वो अभी-अभी गाड़ी चलाते हुए सोच रहा था वो बेसूध सा कमाया के रूप को नज़रें झुकाए हुए, देखता रहा उसके ब्लाउसमें फसी हुई उसकी दो गोलाईयों को और उसके नीचे की ओर जाते हुए चिकने पेट को और लंबी-लंबी बाहों को वो सबकुछ भूलकर सिर्फ़ कामया के हुश्न के बारे में सोचता रह गया और कामया को घर के अंदर जाते हुए देखता रह गया 

दरवाजे पर कामया के गायब होते ही उसे हँसी आई तो देखा कि भीमा उसे ही देख रहा था वो झेप गया और गाड़ी लॉक करके जल्दी से अपनी स्कूटर लेकर गेट से बाहर र्निकल गया कामया भी जल्दी से अपनी नजर को नीचे किए भीमा चाचा को पार करके सीधे सीडियो की ओर भागी और अपने रूम में पहुँची रूम में जाकर देखा कि कामेश बाथरूम में है तो वो अपनी साड़ी उतारकर सिर्फ़ ब्लाउस और पेटीकोट में ही खड़ी होकर अपने आपको मिरर पर निहारती रही 

वो जानती थी कि कामेश के बाहर आते ही वो उसपर टूट पड़ेगा इसलिए वो वैसे ही खड़ी होकर उसका इंतजार करती रही हमेशा कामेश उसे घूमके आने के बाद ऐसे ही सिर्फ़ साड़ी उतारने को ही कहता था बाकी उसका काम था आग्याकारी पत्नी की तरह कामया खड़ी कामेश का इंतजार कर रही थी और बाथरूम का दरवाजा खुला कामया को मिरर के सामने देखकर कामेश भी उसके पास आ गया और पीछे से कामया को बाहों में भरकर उसके चूचियां को दबाने लगा 

कामया के मुख से एक अया निकली और वो अपने सिर को कामेश के कंधों के सहारे छोड़ दिया और कामेश के हाथों को अपने शरीर में घूमते हुए महसूस करती रही वो कामेश का पूरा साथ देती रही और अपने आपको कामेश के ऊपर न्योछाबर करने को तैयार थी कामेश के हाथ कामया की दोनों चुचियों को छोड़ कर उसके पेट पर आ गये थे और अब वो कामया की नाभि को छेड़ रहा था वो अपनी उंगली को उसकी नाभि के अंदर तो कभी बाहर करके कामया को चिढ़ा रह था अपने होंठों को कामया के गले और गले से लेजाकर उसके होंठों पर रखकर वो कामया के होंठों से जैसे सहद को निकालकर अपने अंदर लेने की कोशिश कर रहा था कामया भी नहीं रहा गया वो पलटकर कामेश की गर्दन के चारो और अपनी बाहों को पहना कर खुद को कामेश से सटा लिया और अपने पेट और योनि को वो कामेश से रगड़ने लगी थी उसके शरीर में जो आग भड़की थी वो अब कामेश ही बुझा सकता था 

वो अपने आपको कामेश के और भी नजदीक ले जाना चाहती थी और अपने होंठों को वो कामेश के मुख में घुसाकर अपनी जीब को कामेश के मुख में चला रही थी कामेश का भी बुरा हाल था वो भी पूरे जोश के साथ कामया के बदन को अपने अंदर समा लेना चाहता था वो भी कामया को कस्स कर अपने में समेटे हुए धम्म से बिस्तर पर गिर पड़ा और गिरते ही कामेश कामया के ब्लाउसपर टूट पड़ा जल्दी-जल्दी उसने एक झटके में कामया के ब्लाउसको हवा में उछाल दिया और ब्रा भी उसके कंधे से उसी तरह बाहर हो गई थी कामया के ऊपर के वस्त्र के बाद कामेश ने कामया के पेटीकोट और पैंटी को भी खींचकर उत्तार दिया और बिना किसी देरी के वो कामया के अंदर एक ही झटके में समा गया 


कामया उउउफ तक नहीं कर पाई अऔर कामेश उसके अंदर था अंदर और अंदर और भी अंदर और फिर कामेश किसी पिस्टन के तरह कामया के अंदर-बाहर होता चला गया कामया के अंदर एक ज्वार सा उठ रही थी और वो लगभग अपने शिखर पर पहुँचने वाली ही थी कामेश जिस तरह से उसके शरीर से खेल रहा था उसको उसकी आदत थी वो कामेश का पूरा साथ दे रही थी और उसे मजा भा आ रहा था उधर कामेश भी अपने आपको जब तक संभाल सकता था संभाल चुका था अब वो भी कामया के शरीर के ऊपर ढेर होने लग गया था अपनी कमर को एक दो बार आगे पीछे करते हुए वो निढाल सा कामया के ऊपर पड़ा रहा और कामया भी कामेश के साथ ही झड चुकी थी और अपने आपको संतुष्ट पाकर वो भी खुश थी वो कामेश को कस्स कर पकड़े हुए उसके चेहरे से अपना चेहरा घिस रही थी और अपने आपको शांत कर रही थी जैसे ही कामेश को थोड़ा सा होश आया वो लुढ़क कर कामया के ऊपर से हाथ और अपने तकिये पर सिर रख कर कामया की ओर देखते हुए 
कामेश- स्वीट ड्रीम्स डार्लिंग 

कामया- स्वीट ड्रीम्स डियर और उठकर वैसे ही बिना कपड़े के बाथरूम की ओर चल दी जब वो बाहर आई तो कामेश सो चुका था और वो अपने कपड़े जो कि जमीन पर जहां तहाँ पड़े थे उसको समेट कर वारड्रोब में रखा और अपनी जगह पर लेट गई और सीलिंग की ओर देखते हुए कामेश की तरफ नज़रें घुमा ली जो कि गहरी नींद में था कामया अपनी ओर पलटकर सोने की कोशिश करने लगी और बहुत ही जल्दी वो भी नींद के आगोस में चली गई सुबह रोज की तरह वो लेट ही उठी कामेश बाथरूम में था वो भी उठकर अपने आपको मिरर में देखने के बाद कामेश का बाथरूम से निकलने का वेट करने लगी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

जब कामेश निकला तो वो भी बाथरूम में घुस गई और कुछ देर बाद दोनों चेंज करके नीचे पापाजी और मम्मीजी के साथ चाय पीरहे थे पापाजी और मम्मीजी और कामेश एक दूसरे से बातों में इतना व्यस्त थे कि कामया का ध्यान किसी को नहीं था और नहीं कामया को कोई इंटेरस्ट था इन सब बातों में वो तो बस अपने आप में ही खुश रहने वाली लड़की थी और कोई ज्यादा अपेक्षा नहीं थी उसे कामेश से और अपने घर वालों से एक तो किसी बात की बंदिश नहीं थी उसे यहां और ना ही कोई रोक टोक और नहीं ही कोई काम था तो क्या शिकायत करे वो बस कामेश की चाय खतम हुई और दोनों अपने कमरे की ओर चल दिए पापाजी और मम्मीजी भी अपने कमरे की ओर और पूरे घर में फिर से शांति सब अपने कमरे में जाने की तैयारी में लगे थे कामया वही बिस्तर बैठी कामेश के बाथरूम से निकलने की राह देख रही थी और उसके कपड़े निकालकर रख दिए थे वो बैठे बैठे सोच रही थी कि कामेश बाथरूम से निकलते ही जल्दी से अपने कपड़े उठाकर पहनने लगा 
कामेश-् हाँ… कामया आज तुम क्या गाड़ी चलाने जाओगी 

कामया- आप बताइए 

कामेश- नहीं नहीं मेरा मतलब है कि शायद मैं थोड़ा देर से आऊँगा तो अगर तुम भी कही बीजी रहोगी तो अपने पति की याद थोड़ा कम आएगी हीही 

कामया- कहिए तो पूरा दिन ही गाड़ी चलाती रहूं 

कामेश- अरे यार तुमसे तो मजाक भी नहीं कर सकते 

कामया- क्यों आएँगे लेट 

कामेश- काम है यार पापा भी साथ में रहेंगे 

कामया- ठीक है पर क्या मतलब कब तक चलाती रहूं 

कामेश- अरे जब तक तुम्हें चलानी है तब तक और क्या मेरा मतलब था कि कोई जरूरत नहीं है जल्दी बाजी करने की
कामया- ठीक है पर क्या रात को इतनी देर तक में वहां ग्राउंड पर लाखा काका के साथ मेरा मतलब 

कामेश- अरे यार तुम भी ना लाखा काका हमारे बहुत ही पुराने नौकर है अपनी जान दे देंगे पर तुम्हें कुछ नहीं होने देंगे 

कामया- जी पर 

कामेश- क्या पर पर छोड़ो मैं छोड़ दूँगा तुम तैयार रहेना ठीक है जब भी आए चली जाना 

कामया- जी 
और दोनों नीचे की ओर चल दिए डाइनिंग रूम में खाना लगा था कामेश के बैठ-ते ही कामया ने प्लेट मे खाना लगा दिया और पास में बैठकर कामेश को खाते देखती रही कामेश जल्दी-जल्दी अपने मुख में रोटी और सब्जी ठूंस रहा था और जल्दी से हाथ मुँह धोकर बाहर को लपका कामेश के जाने के बाद कामया भी अपने रूम की ओर चल दी पर जाते हुए उसे भीमा चाचा डाइनिंग टेबल के पास दिख गये वो झूठे प्लेट और बाकी का समान समेट रहे थे कामया के कदम एक बार तो लडखडाये फिर वो सम्भल कर जल्दी से अपने कमरे की ओर लपकी और जल्दी से अपने कमरे में घुसकर दरवाजा लगा लिया पता नहीं क्यों उसे डर लग रहा था अभी थोड़ी देर में ही पापाजी भी चले जाएँगे और मम्मीजी भी अपने कमरे में घुस जाएगी तब वो क्या करेगी अभी आते समय उसने भीमा चाचा को देखा था पता नहीं क्यों उनकी आखों में एक आजीब सी बात थी की उनसे नजर मिलते ही वो काप गई थी उसकी नजर में एक निमंत्रण था जैसे की कह रहा था कि आज का क्या कामया बाथरूम में जल्दी सेघुसी और जितनी जल्दी हो सके तैयार होकर नीचे जाने को तैयार थी जब उसे लगा कि पापाजी और मम्मीजी डाइनिंग टेबल पर पहुँच गये होंगे तो वो भी सलवार कुर्ता पहने हुए डाइनिंग टेबल पर पहुँच गई और मम्मी जी के पास बैठ गई पापाजी और मम्मीजी को भी कोई आपत्ति नहीं थी या फिर कोई शक या शुबह नहीं मम्मीजी ने भी कामया का प्लेट लगा दिया और कामया ने नज़रें झुका कर अपना खा ना शुरू रखा 

मम्मीजी- आज क्या आपको भी देर होगी 

पापाजी- हाँ… बैंक वालों को बुलाया है कामेश ने कुछ और लोग भी है खाना खाके ही आएँगे 

मम्मीजी- जल्दी आ जाना और हाँ… वो टूर वालों से भी पता कर लेना 

पापाजी- हाँ… कर लूँगा 

और कामया की ओर देखते हुए 

पापाजी- हाँ… लाखा आज आ जाएगा तुम चली जाना गाड़ी सीखने 

कामया- जी 
और कामया के सोए हुए अरमान फिर से जाग उठे थे जिस बात को वो भूल जाना चाहती थी पापाजी ने एक बार फिर से याद दिला दिया था वो आज अकेले नहीं जाना चाहती थी और ना ही भीमा चाचा के करीब ही आना चाहती थी कल की गलती का उसे गुमान था वो उसे फिर से नहीं दोहराना चाहती थी पर ना जाने क्यों जैसे ही पापाजी ने लाखा काका का नाम लिया तो उसे कल की शाम की घटना याद आ गई थी और फिर खाते खाते दोपहर की बात

उसके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई थी वो ना चाहते हुए भी एक जोर की सांस छोड़ी और अपने जाँघो को आपस में जोड़ लिया और नज़रें झुका के खाने लगी पर मन था कि बार-बार उसके जेहन में वही बात याद डालती जा रही थी वो आपने आपसे लड़ने लगी थी अपने मन से या फिर कहिए अपने दिमाग से बार-बार वो अपनी निगाहे उठाकर पापाजी और मम्मीजी की ओर देखने लगी थी कि शायद कोई और बात हो 

तो वो यह बात भूलकर कहीं और इन्वॉल्व हो जाए पर कहाँ सेक्स एक ऐसा खेल है या फिर कहिए एक-एक नशा है कि पेट भरने के बाद सबसे जरूरी शारीरिक भूक पेट की भूख बुझी नहीं कि पेट के नीचे की चिंता होने लगती है और,,,,,,,,,,,,,


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया तो एक बार वो चख चुकी थी और उसका पूरा मजा भी ले चुकी थी वो तो बस उसको अवाय्ड करना चाहती थी वो यह अच्छे से जानती थी, कि अगर वो ना चाहे तो भीमा क्या भीमा का बाप भी उसे हाथ नहीं लगा सकता था और वो तो इस घर का नौकर है किसे क्या बताएगा एक शिकायत में तो वो घर से बाहर हो जाएगा इसलिए उसे इस बात की चिंता तो बिल्कुल नहीं थी की भीमा उसके साथ कोई गलत हरकत कर सकता है पर वो अपने आपको कैसे रोके यही सोचते हुए ही तो वो आज पापाजी और मम्मीजी के साथ ही खाना खाने को आ गई थी अभी जब कामेश गया था तब भी उसकी आखें भीमा से टकराई थी उसने भीमा चाचा की आखों में वही भूख देखी थी या फिर शायद इंतजार देखा था जो कि उसके लिए खतरनाक था अगर वो नहीं संभली तो पता नहीं क्या होजायगा 

यही सोचते हुए वो अपनी निगाहे झुकाए खाना खा रही थी पापाजी का हो गया था और वो उठ गये थे पर मम्मीजी कामया का साथ देने को अब भी बैठी थी कामया ने जैसे ही पापाजी को उठते देखा तो जल्दी-जल्दी करने लगी 
मम्मीजी- अरे अरे आराम से ख़ालो बहू 

कामया- जी बस हो गया और आखिरी नीवाला किसी तरह से अपने मुँह में ठूँसा और पानी के ग्लास पर हाथ पहुँचा दिया 
मम्मीजी भी हँसते हुए उठ गई और कामया भी 

सभी उठकर हाथ मुँह धोया और पापाजी के कमरे से निकलने का इंतजार करने लगे 
पापाजी भी आए और बाहर निकल गये 

बाहर लाखा गाड़ी के पास खड़ा था पर आज उसकी नजर नहीं उठी ना तो उसने कामया की ओर ही देखा और नहीं कोई ऐसी बात जो की कामया को परेशान कर सकती हो 

लेकिन जैसे ही लाखा घूमकर वापस ड्राइविंग सीट पर बैठने जा रहा था कि मम्मीजी की आवाज ने उसे रोक दिया 
मम्मीजी- अरे लाखा ध्यान रखना शाम को आ जाना बहू को ले के जाना है 

लाखा- जी माँ जी 
और उसकी नजर मम्मीजी के बाद एक बार कामया से टकराई और फिर नीचे हो गई 

मम्मी जी- तू ही याद रखना इन लोगों के भरोसे नहीं रहना नहीं तो वही खड़ा रह जाएगा याद से आ जाना ठीक है 

लाखा- जी माँ जी 
और एक बार फिर से उसकी नजर कामया से टकराई और वो झट से गाड़ी के अंदर समा गया जब गाड़ी गेट के बाहर चली गई तो कामया भी मम्मीजी के साथ अंदर दाखिल हुई और मम्मीजी के पीछे-पीछे उनके कमरे की ओर बढ़ गई थी ना जाने क्यों वो अपने को अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी या फिर डर था कही कोई फिर से गलत कदम ना उठा ले या फिर अपने शरीर की भूख को संभालने की चेष्टा थी यह जो भी हो वो मम्मीजी के साथ उनके कमरे में आ गई थी आते समय जब उसका ध्यान डाइनिंग टेबल पर गया तो देखा कि डिननिग टेबल साफ था मतलब भीमा चाचा ने आज जल्दी ही टेबल साफ कर दिया था नहीं तो वो हमेश ही सबके अपने कमरे में पहुँचने का इंतजार करता था और फिर आराम से डाइनिंग टेबल साफ करके वर्तन धो कर रख देता था अंदर किचेन से वर्तन धोने की आवजे भी आ रही थी वो कुछ और ज्यादा नहीं सोचते हुए जल्दी से मम्मीजी कमरे में घुस गई 
मम्मीजी कामया को अपने कमरे में घुसते हुए देखकर थोड़ा सा अचम्भित हुई पर हँसते हुए 
मम्मीजी- क्या बात है बहू कोई बात है 

कामया- जी नहीं बस ऐसे ही 

मम्मीजी- हाँ… मैं जानती हूँ तुझे बहुत अकेलापन लगता होगा ना सारा दिन घर में अकेले अकेले और बस कमरा में और कुछ भी नहीं है 

कामया- जी नहीं मैं तो बस ऐसे ही आ गई थी जाती हूँ 

मम्मीजी- अरे अरे बुरा मान गई क्या बैठ यहां 

और कामिया को अपने पास बिठाकर मम्मीजी दुनियां भर की बातें करती रही और सुनती रही पर कामया का ध्यान तो उनकी बातों में कम था उसका ध्यान कमरे में रखी चीजो पर कही ज्यादा था बहुत ही कास्ट्ली चीज़े रखी थी कमरे में और बहुत से फोटो भी एक फोटो किसी साधु का भी था वो खड़ी होकर उन फोटो को देखने लगी 

मम्मीजी- वो हमारे गुरुजी है उन्हीं के आशीर्वाद से कामेश का जनम हुआ था 

कामया- क्याआआ

मम्मीजी- हाँ… हमारे बच्चे पहले पैदा होते ही मर जाते थे पर जब से बाबा जी का आशीर्वाद हमारे ऊपर हुआ है तब से हम लोगों ने दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की की है कभी आएँगे तो तुमको मिलाउन्गी बहुत पहुँचे हुए है वो शहर के बाहर एक आश्रम है वहां रहते है तुम्हारे पापाजी ने ही बनवाया है मैं तीरथ से हो आऊ तो तुम्हें ले चलूंगी ठीक है 

कामया- जी 

कामया को इन साधु सन्यासी से कोई मतलब नहीं था वो तो बस दूर से नमस्कार करती थी उनसबको कोई इच्छा भी नहीं थी मिलने की 

मम्मीजी कहते कहते अपने बिस्तर पर पहुँच चुकी थी और आराम से अपने तकिये में सिर रखकर, लेट गई थी कामया जानती थी कि मम्मीजी को नींद आ रही है पर वो अपने को मम्मीजी के साथ ही बँधे रहना चाहती थी पर मम्मीजी की हालत देखकर कामया ने अपना मूड बदला और जाने को खड़ी हो गई 
कामया-- मम्मीजी आप आराम कीजिए में चलती हूँ 

मम्मीजी- हाँ… थोड़ा तू भी सो ले शाम को लाखा आएगा तैयार रहना हाँ… 

कामया- जी 
और एक लंबी सी सांस फेक कर कामया अपने कमरे की ओर चल दी रूम के बाहर आते ही वो थोड़ा सा सचेत हो गई थी उसकी नजर अनायास ही डाइनिंग रूम और फिर उसके आगे किचेन तक चली गई थी पर वहां शांति थी बिल्कुल सन्नाटा वो थोड़ा रुकी और थोड़ा धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाते हुए सीडियो की ओर चली पर उसे कोई भी आहट सुनाई नहीं दी कहाँ है भीमा चाचा किचेन में नहीं है क्या या फिर अपने कमरे में चले गये होंगे ऊपर या फिर सोचते हुए कामया सीडियो पर चढ़ती हुई अपने कमरे की ओर जा रही थी पर ना जाने क्यों उसका मन बार-बारकिचेन की ओर देखने को हो रहा था शायद इसलिए कि कल दोपहर को जो घटना हुई थी क्या वो भीमा चाचा भूल गये थे या फिर घर छोड़ कर भाग गये थे या फिर कुछ और ......


वो सीडिया चढ़ती जा रही थी और सोच रही थी क्या भीमा चाचा उससे एक बार खेल कर ही उसे भूल गये है पर वो तो नहीं भूल पाई तो क्या वो जितनी सुंदर और सेक्सी लगती थी वो है नहीं क्या भीमा चाचा भी एक बार के बाद उसे फिर से अपने साथ सेक्स के लिए लालायित नहीं होंगे मैंने तो सुना था कि आदमी एक बार किसी औरत को भोग ले तो बार-बार उसकी इच्छा करता है और वो तो इतनी खूबसूरत है और उसने इस बात की पुष्टि भी की थी उसे भीमा चाचा की नज़रों में ही यह बात दिखी थी पर अभी तो कही गायब ही हो गये थे वो सीढ़ियाँ चढ़ना भूल गई थी वही एक जगह खड़ी होकर एकटककिचेन की ओर ही देख रही थी 

कुछ सोचते हुए वो फिर से नीचे की ओर उत्तरी और धीरे-धीरेकिचेन की ओर चल दी उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था पर फिर भी हिम्मत करके वो किचेन की ओर जा रही थी पर क्यों क्या पता नहीं पर कामया के पैर जो कि अपने आप ही किचेन की ओर जा रहे थे किचेन के दरवाजे पर पहुँचकर उसने अंदर देखा वहाँ शांति थी वो थोड़ा और 
आगे बढ़ी तो उसे भीमा चाचा के पैर देखके वो शायद नीचे फ्लोर पर पोछा लगा रहे थे उसे अपने को इस स्थिति में पाकर आगे क्या करे सोचने का टाइम भी ना मिला कि तभी भीमा की नजर कामया पर पड़ गई वो कामया को दरवाजे पर खड़ा देखकर जल्दी से उठा और अपने धोती को संभालते हुए हाथ पीछे करके खड़ा हो गया 
और 
भीमा- जी बहू रानी कुछ चाहिए 

कामया -- जी वो पानी 

भीमा- जी बहू रानी 

उसकी नजर अब भी नीचे ही थी पर बहू के इस समय अपने पास खड़े होना उसके लिए एक बहुत बड़ा बरदान था वो नजरें झुकाए हुए कामया की टांगों की ओर देख रहा था और पानी का ग्लास फिल्टर से भरकर कामया की ओर पलटा कामया ने हाथ बढ़ाकर ग्लास लिया तो दोनों की उंगलियां आपस में टच हो गये कामया और भीमा के शरीर में एक साथ एक लहर सी दौड़ गई और शरीर के कोने कोने पर छा गई वो एक दूसरे को आखें उठाकर देखने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे 

पर किसी तरह कामया ने पानी पिया पिया वो तो अपने आपको भीमा के सामने पाकर कुछ और नहीं कह पाई थी तो पानी माँग लिया था और झट से ग्लास प्लतेफोर्म में रख कर पलट गई और अपने कमरे की ओर चल दी 

भीमा वही खड़ा-खड़ा अपने सामने सुंदरी को जाते हुए देखता रहा वो चाहता था कि कामया रुक कर उससे बात करे कुछ और नहीं भी करे तो कम से कम रुक जाए और वही खड़े रहे वो उसको देखना चाहता था बस देखना चाहता था नजर भर के पर वो तो जा रही थी उसका मन कर रहा था कि जाके रोक ले वो बहू को और कल की घटना के बारे में पूछे कि कल क्यों उसने वो सब किया मेरे साथ पर हिम्मत नहीं हुई वो अब भी कामया को सीडिया चढ़ते देख रहा था किसी पागल भिखारी की तरह जिसे सामने जाती हुई राहगीर से कुछ मिलने की आसा अब भी बाकी थी 

तभी कामया आखिरी सीढ़ी में जाकर थोड़ा सा रुकी और पलट कर किचेन की ओर देखी पर भीमा को उसकी तरफ देखता देखकर जल्दी से ऊपर चली गई भीमा अब भी अपनी आखें फाड़-फाड़कर सीडियो की ओर यूँ ही देख रहा था पर वहाँ तो कुछ भी नहीं था सबकुछ खाली था और सिर्फ़ उसके जाने के बाद एक सन्नाटा सा पसर गया था उसे कोने में 

कोने में ही नही बल्कि पूरे घर में वो भी पलटा और अपने काम में लग गया पर उसके दिमाग में बहू की छवि अब भी घूम रही थी सीधी साधी सी लगने वाली बहू रानी अभी भी उसके जेहन पर राज कर रही थी कितनी सुंदर सी सलवार कमीज पहेने हुए थी और उसपर कितना जम रहा था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उसका चेहरा कितना चमक रहा था कितनी सुंदर लगती थी वो पर वो अचानक किचेन में क्यों आई थी भीमा का दिमाग ठनका हाँ… यार क्यों आई थी वो तो मम्मीजी कमरे में थी और अगर पानी ही पीना था तो मम्मीजी कमरे में भी तो रखा था और तो और उनके कमरे में भी था तो वो यहां क्यों आई थी कही सिर्फ़ उसे देखने के लिए तो नहीं या फिर कल के बारे में कुछ कह रही हो या फिर उसे फिर से बुला रही हो अरे यार उसने पूछा क्यों नहीं कि और कुछ चाहिए क्या क्या बेवकूफ है वो धत्त तेरी की अच्छा मौका था निकल गया अब क्या करे अभी भी शाम होने को देर थी क्या वो बहू को फोन करके पूछे अरे नहीं कही बहू ने शिकायत कर दी तो 


वो अपने दिमाग को एक झटका देकर फिर से अपने काम में जुट गया था पर ना चाहते हुए भी उसकी नजर सीडियो की ओर चली ही जाती थी 

और उधर कामया ने जब पलटकर देखा था तो वो बस इतना जानना चाहती थी कि भीमा क्या कर रहा था पर उसे अपनी ओर देखते हुए पाकर वो घबरा गई थी और जल्दी से अपने कमरे में भाग गई थी और जाकर अपने कमरे की कुण्डी लगाकर बिस्तर पर बैठ गई थी पूरे घर में बिल्कुल शांति थी पर उसके मन में एक उथल पुथल मची हुई थी उसने अपनी चुन्नि को उतार फेका और चित्त होकर लेट गई वो सीलिंग की ओर देखते हुए बिस्तर पर लेटी थी उसकी आखों में नींद नहीं थी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था उसके शरीर में एक अजीब सी कसक सी उठ रही थी वो ना चाहते हुए भी अपने आपको अपने में समेटने की कोशिश में लगी हुई थी वो एक तरफ घूमकर अपने को ही अपनी बाहों में भरने की कोशिश कर रही थी 


पर नहीं वो यह नहीं कर पा रही थी उसे भीमा चाचा की नज़रें याद आ रही थी उसके पानी देते समय जो उंगलियां उससे टकराई थी वो उसे याद करके सनसना गई थी वो एक झटके से उठी और बेड पर ही बैठे बैठे अपने को मिरर में देखने लगी बिल्कुल भी सामान्य नहीं लग रही थी वो मिरर में पता नहीं क्या पर कुछ चाहिए था क्या पता नहीं हाँ… शायद भीमा हाँ… उसे भीमा चाचा के हाथ अपने पूरे शरीर में चाहिए थे उसने बैठे बैठे ही अपनी सलवार को खोलकर खींचकर उतार दिया और अपनी गोरी गोरी टांगों को और जाँघो को खुद ही सहलाने लगी थी जो अच्छी शेप लिए हुए थे उसके टाँगें पतली और सिडौल सी गोरी गोरी और कोमल सी उसकी टांगों को वो सहलाते हुए उनपर भीमा चाचा के सख़्त हाथों की कल्पना कर रही थी उसकी सांसें अब बहुत तेज चलने लगी थी 



उसके हाथ अपने आप ही उसके कुर्ते के अंदर उसकी गोलाईयो की ओर बढ़ चले थे जैसे की वो खुद को ही टटोल कर देखना चाहती थी कि क्या वो वाकई इतनी सुंदर है या फिर ऐसे ही हाँ वो बहुत सुंदर है जब उसके हाथ उसके कुर्ते के अंदर उसकी गोलाईयों पर पहुँचे तो खुद को रोक नहीं पाई और खुद ही उन्हें थोड़ा सा दबाकरदेखा उसके मुख से एक आआह्ह निकली कितना सुख है पर अपने हाथों की बजाए और किसी के हाथों से उसे मजा दोगुना हो जाएगा कामेश भी तो कितना खेलता है इन दोनों से पर अपने हाथों के स्पर्श का वो आनंद उसे नहीं मिल पा रहा था उसने अपने कुर्ते को भी उतार दिया और खड़े होकर अपने को मिरर में देखने लगी थी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में वो कितनी खूबसूरत लग रही थी लंबी-लंबी टाँगों से लेकर जाँघो तक बिल्कुल सफेद और चिकनी थी वो कमर के चारो ओर पैंटी फँसी हुई थी जो की उसकी जाँघो के बीच से होकर पीछे कही चली गई थी 

बिल्कुल सपाट पेट और उसपर गहरी सी नाभि और उसके ऊपर उसके ब्रा में क़ैद दो ठग हाँ… कामेश उनको ठग ही कहता था मस्त उभार लिए हुए थे कामया अपने शरीर को मिरर में देखते हुए कही खो गई थी और अपने हाथों को अपने पूरे शरीर पर चला रही थी और अपने अंदर सोई हुई ज्वाला को और भी भड़का रही थी वो नहीं जानती थी कि आगे क्या होगा पर उसे ऐसा अच्छा लग रहा था आज पहली बार कामया अपने जीवन काल में अपने को इस तरह से देखते हुए खेल रही थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो अपने आपसे खेलते हुए पता क्यों अपनी ब्रा और पैंटी को भी धीरे से उतार कर एक तरफ बड़े ही स्टाइल से फेक दिया और बिल्कुल नग्न अवस्था, में खड़ी हुई अपने आपको मिरर में देखती रही उसने आपने आपको बहुत बार देखा था पर आज वो अपने आपको कुछ अजीब ही तरह से देख रही थी उसके हाथ उसे पूरे शरीर पर घूमते हुए उसे एक अजीब सा एहसास दे रहे थे उसके अंदर एक ज्वाला सा भड़क रही थी जो कि अब उसके बर्दास्त के बाहर होती जा रही थी उसकी उंगलियां धीरे-धीरे अपने निपल्स के ऊपर घुमाती हुई कामया अपने पेट की ओर जा रही थी और अपने नाभि को भी अंदर तक छू के देखती जा रही थी दूसरे हाथों की उंगलियां अब उसकी जाँघो के बीच में लेने की कोशिश में थी वो उसके मुख से एक हल्की सी सिसकारी पूरे कमरे में फेल गई और वो अपने सिर को उचका करके नाक से और मुख से सांसें छोड़ने लगी उसकी जाँघो के बीच में अब आग लग गई थी वो उसके लिए कुछ भी कर सकती थी हाँ… कुछ भी वो एकदम से नींद से जागी और फिर से अपने आपको मिरर में देखते हुए अपने आपको वारड्रोब के पास ले गई और एक सफेद पेटीकोट और ब्लाउस निकाल कर पहनने लगी बिना ब्रा के ब्लाउस पहनने में उसे थोड़ा सा दिक्कत हुई पर, ठीक है वो तैयार थी अपने बालों को एक झटका देकर वो अपने को एक बड़े ही मादक पोज में मिरर की ओर देखा और लड़खड़ाती हुई इंटरकम तक पहुँची और किचेन का नंबर डायल कर दिया 
किचेन में एक घंटी जाते ही भीमा ने फोन उठा लिया 
भीमा- हेलो 
कामया ने तुरंत फोन कट दिया, और रखकर तेज-तेज सांसें लेने लगी 

उसके अंतर मन में एक ग्लानि सी उठ रही थी ना चाहते हुए भी उसने फोन रख दिया था और बिस्तर पर बैठे बैठे सोचने लगी क्या कर रही है वो एक इतने बड़े घर की बहू को क्या यह सोभा देता है अपने घर के नौकरके साथ और वो भी इसी घर में क्या वो पागल हो गई है नहीं उसे यह सब नहीं करना चाहिए वो सोचते हुए बिस्तर पर लूड़क गई और अपने दोनों हाथों से अपने को समेटे हुए वैसे ही पड़ी रही उसका पूरा शरीर जिस आग में जल रहा था उसके लिए उसके पास कोई भी तरीका नहीं था बुझाने को पर क्या कर सकती थी वो जो वो करना चाहती थी वो गलत था पर पर हाँ… नहा लेती हूँ सोचकर वो एक झटके से उठी और तौलिया हाथ में लिए बाथरूम की ओर चल दी उसका पूरा शरीर थर थर काप 
रहा था और शरीर से पसीना भी निकल रहा था वो कुछ धीरे कदमो से बाथरूम की ओर जा ही रही थी कि दरवाजे पर एक हल्की सी क्नॉच से वो चौंक गई 

वो जहां थी वही खड़ी हो गई और ध्यान से सुनने की कोशिस करने लगी नहीं कोई आहट नहीं हुई थी शायद उसके मन का भ्रम था कोई नहीं है दरवाजे पर मम्मीजी तो नीचे सो रही होंगी और कौन हो सकता है भीमा चाचा अरे नहीं वो इतनी हिम्मत नहीं कर सकता वो क्यों आएगा 

और उधर भीमा ने जैसे ही फोन उठाकर हेलो कहाँ फोन कट गया था वो भी फोन हाथ में लिए खड़ा का खड़ा रह गया था सोचता हुआ कि क्या हुआ बहू को कही कोई चीज तो नहीं चाहिए शायद भूल गई हो नीचे या फिर कोई काम था उससे या कुछ और वो धीरे से किचेन से निकला और ऊपर सीडियो की ओर देखता रहा पर कही कोई आवाज ना देखकर वो बड़ी ही हिम्मत करके ऊपर की ओर चला और बहू के कमरे की ओर आते आते पशीनापशीना हो गया बड़ी ही हिम्मत की थी उसने आज दरवाजे पर आकर वो चुपचाप खड़ा हुआ अंदर की आवाज को सुनने की कोशिश करने लगा था एक हल्की सी आहट हुई तो वो कुछ सोचकर हल्के से दरवाजे पर एक कान करके खड़ा हो गया और इंतजार करने लगा था पर कोई आहट नहीं हुई तो यह सोचते हुए नीचे की ओर चल दिया की शायद बहू सो गई होगी 


अंदर कामया का पूरा ध्यान दरवाजे पर ही था नारी मन की जिग्याशा ही कहिए वो अपने को उस नोक का कारण जानने की कोशिश में दरवाजे की ओर चली और कान लगाकर सुनने की कोशिश करने लगी कि कही कोई आहट या फिर कोई चहल पहल की आवाज हो रही है कि नहीं पर कोई आवाज ना देखकर वो दरवाजे की कुण्डी खोलकर बाहर की ओर देखती है पर कोई नहीं था वहाँ कुछ भी नहीं था तो वो बाहर आ गई थी बाहर भी कोई नहीं था लेकिन आचनक ही उसकी नजर सामने सीढ़ियो पर पड़ी तो वहां भीमा खड़ा था जो कि अब उसी की ओर देख रहा था कामया ने अब भी सफेद ब्लाउस और पेटीकोट ही पहना हुआ था और हाथ में तौलिया था वो भीमा चाचा को सीढ़ियो में देख अकर सबकुछ भूल गई थीउसे अपने आपको ढकने की बात तो दूर वो फिर से अपने को उस आग की गिरफ़्त में पाती जा रही थी जिस आग से वो अब तक निकलने की कोशिश कर रही थी 


उसकी सांसों में अचानक ही तेजी आ गई थी और वो उसकी धमनिओ से टकरा रही थी भीमा सीढ़ियो में खड़ा-खड़ा बहू के इस रूप को देख रहा था बहू तो कल जैसे ही स्थिति में है ती क्या वो आज भी मालिश के बहाने उसे बुला रही थी हाँ शायद पर अब क्या करे वो हिम्मत करके सीढ़ियो में ही घुमा और बहू की ओर कदम बढ़ाया अपने सामने इस तरह से खड़ी कोई स्वप्न सुंदरी को कैसेछोड़ कर जा सकता था वो उसका दीवाना था वो तो उस रूप का पुजारी था उस रूप को उसकाया को वो भोग चुका था उसकी मादकता और नाजूक्ता का अनुमान था उसे उसके लिए वो तो कब से लालायित था और वो उसके सामने इस तरह से खड़ी थी भीमा अपने आपको रोक ना पाया और बड़े ही सधे हुए कदमो से बहू की ओर बढ़ने लगा 



और कामया ने जब भीमा चाचा को अपनी ओर बढ़ते हुए देखा तो जैसे वो जमीन में गढ़ गई थी उसकी सांसें जो कि अब तक उसकी धमनियों से ही टकरा रही थी अब उसके मुँह से बाहर आने को थी हर सांस के साथ उसके मुख से एक हल्की सी सिसकारी भी निकलने लगी थी उसके शरीर के हर एक रोएँ में सेक्स की एक लहर दौड़ गई थी उसे भीमा चाचा के हाथ और उनके शरीर के बालों का गुच्छे याद आने लगे थे कल जब भीमा चाचा ने उसे अपनी बाहों में लेकररोंधा था वो एक-एक वाकया उसे याद आने लगा था वो खड़ी-खड़ी काँपने लगी थी उसका शरीर ने एक के बाद एक झटके लेना शुरू कर दिया था वो खड़े-खड़े लड़खड़ा गई थी और दीवाल का सहारा लेने को मजबूर हो गई थी उसकी और भीमा चाचा की आखें एक दूसरे की ओर ही थी एक बार के लिए भी नहीं हटी थी अब कामया पीछे दीवार के सहारे खड़ी थी कंधा भर टिका था दीवाल से और पूरा शरीर पाँव के सहारे खड़ा था सांसों की तेजी के साथ कामया की चूचियां अब ज्यादा ही ऊपर की ओर उठ जा रही थी वो नाक और मुख से सांस लेते हुए भीमा चाचा को अपने करीब आते देख रही थी भीमा करीब और करीब आते हुए उसके बहुत नजदीक खड़ा हो गया अब भीमा की नजर बहू के शरीर का अवलोकन कर रही थी वही शरीर जिसे कल उसने भोगा था और बहुत ही अच्छे तरीके से भोगा था जैसा मन किया था वैसे ही आज फिर वो उसके सामने खड़ी थी कल जैसे ही परिस्थिटी में और, खुल्ला आमंत्रण था भीमा को वो सिर से पैर तक बहू को निहारता रहा और 

भीमा की नजर एक बार फिर से बहू के चेहरे पर पड़ी और उनको देखते हुए उसने अपने हाथों को बहू की ओर बढ़ाया धीरे से उसने बहू के पेट को छुआ 

कामया- आआआआआआअह्ह उूुुुुुुुुउउम्म्म्मममममममममम 
भीमा के हाथों में जैसे मखमल आ गया हो नाजुक नाजुक और नरम नरम सा बहू का पेट उसकी सांसों के साथ अंदर-बाहर और ऊपर नीचे होते हुए वो अपने हाथों को एक जगह नहीं रख पाया वो अपने दूसरे हाथ को भी लाकर बहू के पेट पर रख दिया और अपने दोनों हाथों से उसको सहलाने लगा सहलाने लगा बल्कि कहिए उनका नाप लेने लगा वो अपने हाथों से बहू के पेट का आकार नाप रहा था और उस ऊपर वाले की रचना को महसूस कर रहा था वो अपनी आखें गढ़ाए बहू के पेट को ऊपर से देख भी रहा था और अपने हाथों से उस रचना की तारीफ भी कर रहा था उसकी आखों के सामने बहू की दोनों चूचियां अपनी जगह से आजाद होने की कोशिश कर रही थी वो अपने हाथों को धीरे से बहू के ब्लाउसकी ओर ले जाने लगा कि आचनक ही बहू लड़खड़ाई और भीमा की सख़्त बाहों ने बहू को संभाल लिया अब बहू भीमा की ग्रफ्त में थी और बेसूध थी उसकी आखें बंद सी थी नथुने फूल रहे थे मुख से सिसकारी निकल रही थी उसका पूरा शरीर अब भीमा के हाथों में था उसके भरोसे में था वो चाहे तो वही पटक कर बहू को भोग सकता था या फिर उठाकर अपने कमरे में ले जा सकता था या फिर अंदर उसी के कमरे में कल जैसे बिल्कुल नंगा करके उसके सारे शरीर को जो चाहे वो कर सकता था उसकी आखें बहू की चेहरे पर थी वो अपना सबकुछ भीमा के हाथों में सौंप कर लंबी-लंबी सांसें लेते हुई उसकी बाहों ले लटकी हुई थी भीमा उस अप्सरा को अपने बाहों में संभाले हुए अपने एक हाथों से उसकी पीठ को सहारा दिया और दूसरे हाथ से उसके पैरों के नीचे से हाथ डालकर एक झटके से उसे उठाकर उसी के बेडरूम में घुस गया वो कमरे में आते ही अपने हाथों की उस सुंदर और कामुक काया को कहाँ रखे सोचने लगा उसके हाथों में कामया एक बेसूध सी जान लग रही थी एक रति के रूप में वो लगभग बेहोशी की मुद्रा में थी उसे सब पता था कि क्या चल रहा था पर उसके हाथों से अब बात निकल चुकी थी वो अब भीमा को भेट चढ़ चुकी थी या कहिए वो अपने को भीमा के सुपुर्द कर चुकी थी अब वो इस खेल का हिस्सा बनने को तैयार थी अब वो उसे भीम काय दैत्य के हर उस पुरुषार्थ को सहने को तैयार थी जो कि उसे चाहिए था जो कि उसे कामेश से नहीं मिला था या फिर उसे नहीं पता था इतनी दिनों तक वो अब अपने आपको किसी भी स्थिति में रोकना नहीं चाहती थी भीमा के गोद में वो ऐसी लग रही थी कि कोई बनमानुष उसे उठाकर अपने हवस का शिकार करने जा रहा हो वो तैयार थी उस बनमानुष को झेलने को उसे राक्षस को अपने अंदर समा लेने को वो चुपचाप उस राक्षस का साथ दे रही थी उसके हर कदम को देख भी रही थी और समझ भी रही थी जैसे कह रही हो करो और करो जो मन में आए करो पर मेरे तन की आग को ठंडा करो प्लीज 

भीमा अपने हाथों में बहू को उठाए कमरे में दाखिल हुआ और सोचने लगा की अब क्या करे पर वो खुद ही बिना किसी इजाज़त के बहू को उसके बिस्तर तक ले गया और धीरे से हाँ बहुत ही धीरे से बहू को उसके बिस्तर पर लिटा दिया बहू अब सिर और नितंबों और पैरों के तले को रखकर बिस्तर पर लेटी हुई थी कामया को जैसे ही भीमा ने बिस्तर पर रखा वो एक जल बिन मछली की तरह से तड़प उठी उसके हाथ पाँव और सिर बिस्तर पर अपने आपसे इधर उधर होने लगे थे वो अपने को भीमा के शरीर से अलग नहीं करना चाहती थी वो जब भीमा उसे अपने गोद में भरकर लाया था तो उसके नथुनो में भीमा के पसीने की खुशबू को सूंघ कर ही बेसूध हो गई थी कितनी मर्दानी खुशबू थी कितनी मादक थी यह खुशबूओ काम अग्नि में जलती हुई कामया का पूरा शरीर अब भीमा के रहमो करम पर था वो चाहती थी कि भीमा कल जैसे उससे निचोड़ कर रख दे उसके शरीर में उठ रही हर एक लहर को अपने हाथों से रोक दे, वो अपने आपको अकेला सा पा रही थी बिस्तर पर और भीमा पास खड़े हुए बहू की इस स्थिति को अपने आखों से देख रहा था बहू के ब्लाउसमें फँसे हुए उसके गोल गोल बड़े-बड़े चुचो को वो वही खड़े-खड़े निहार रहा था उसके ऊपर-नीचे होते हुए आकर को बढ़ते घटते देख रहा था उसके पेट को अंदर-बाहर होते देख रहा था जाँघो में फाँसी हुई पेटीकोट को उसकी टांगों के साथ ऊपर-नीचे होते हुए देख रहा था उसकी आखें बहू के हर हिस्से को देख रही थी और उसकी सुंदरता को अपने अंदर उतारने की कोशिश कर रही थी वो खड़े-खड़े देख ही रहा था कि उसके हाथों से बहू की नाजुक हथेली टकराई वो उसकी मजबूत हथेली को अपनी हथेली में लेने की कोशिश कर रही थी वो अपनी हथेली को भीमा की हथेली पर कस कर पकड़ बनाने की कोशिश कर रही थी और अपने पास खींच रही थी उसके हाथ भीमा को अपने पास और पास आने का न्यौता दे रहे थे भीमा भी अब कहाँ रुकने वाला था वो भी बहू के हाथों के साथ अपने आपको आगे बढ़ाया और बहू के हाथों का अनुसरण करने लगा बहू अपने हाथों को भीमा के हाथों के सहारे अपने चूची तक लाने में सफल हो गई थी उसके चूचियां और भी तेज गति से ऊपर की ओर हो गये 


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