Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

फिर उसका चहरा घुमा एक हाथों ने घुमाया और फिर से दूसरी तरफ से एक होंठों ने उसके होंठों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और बहुत देर तक उनको अपने होंठों के बीच में लेकर चूमता रहा उसके शरीर में एक साथ बहुत से हाथ और होंठ घूमने लगे थे जहां भी वो महसूस कर पाती वहां एक हथेलियाँ जरूर होती थी 

- बहू आज लाखा भी है सेलेब्रेट करने आया है और आज से यही इस घर में रहेगा हुहम्म्म्मममममममममम
और एक बार फिर से वो दूसरे सख्स ने उसके होंठों को अपने कब्ज़े में लेलिया अच्छा तो वो लाखा काका थे जो कि भीमा चाचा के बिस्तर पर सोए हुए थे अब तो कामया के शरीर में फिर से एक अजीब सी स्फूर्ति आ गई थी आज का पल वो खोना नहीं चाहती थी उसकी योनि में फिर से हलचल होनी शुरू हो गई थी और भीमा चाचा तो उसे किस कर रहे थे पर लाखा काका तो फिर से अपनी उंगली उसकी योनि में डाले उसे फिर से उत्तेजित करने में लगे थे भीमा चाचा उसे किस करते हुए उसकी चूचियां निचोड़ रहे थे जो कि उसे आज बहुत ही अच्छा लग रहा था और नीचे लाख काका भी उसकी योनि के अंदर अपनी उंगलियों को बहुत ही तेजी से अंदर बाहर कर रहे थे अचानक ही लाखा काका ने उसकी जाँघो को अलग किया और अपने लिंग को एक ही झटके में उसके अंदर तक उतार दिया कामया बिल्कुल भी तैयार नहीं थी इस तरह के बरतब के लिए और एक लंबी सी चीख उसके मुख से निकली जो कि झट से भीमा चाचा ने अपने मुख के अंदर लेके कही गुम करदी अब लाखा काका नीचे से उसकी योनि के अंदर-बाहर हो रहे थे और बहुत ही तेजी के साथ हो रहे थे जिससे कि उसका पूरा शरीर ही बिस्तर पर ऊपर-नीचे की ओर हो रहा था पर भीमा चाचा की पकड़ इतनी मजबूत थी कि जैसे वो उसे उनके हाथों से छोड़ना ही नहीं चाहते हो वो कस कर कामया को छाती से जकड़े हुए अपने होंठों से कामया के होंठों को पी रहे थे और बहुत ही बेदर्दी से उसकी चूचियां को दबा भी रहे थे कामया के मुख से निरंतर चीख निकल रही थी और उसकी योनि में एक बार फिर से तूफान आने लगा था पर वो सांसें भी नहीं ले पा रही थी भीमा चाचा और लाखा काका ने उसे इतनी जोर से जकड़ रखा था कि वो हिल भी नहीं पा रही थी बस उनकी मर्ज़ी की हिसाब से उनके हाथों का खिलोना बनी हुई थी लाखा काका तो जैसे जंगलियो की तरह से उसे भोग रहे थे वही भीमा चाचा भी बहुत ही उत्तेजित से दिख रहे थे वो अब कामया के होंठों को काटने भी लगे थे और उसकी जीब को खींचकर अपने होंठों के अंदर तक ले जाते थे कामया की जान निकल गई थीउसके शरीर का रोम रोम उसके हाथों के सुपुर्द था और जैसा वो दोनों चाहते थे कर रहे थे कोई डर नहीं था उनके मन में ना कोई चिंता बस अपने हाथों में आई इस हसीना को चीर कर रख देना चाहते थे 

लाखा काका की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी जैसे कि वो अपने मुकाम पर पहुँचने ही वाले थे पर जाने क्या हुआ कि भीमा चाचा की पकड़ अचानक ही उसके सीने पर से थोड़ी ढीली हुई और 

भीमा- लाखा हट अब मुझे करने दे

लाखा- अरे रुक जा बस थोड़ी देर 

भीमा- अरे हट ना साले तू ही करेगा क्या मुझे भी मौका दे साले 

लाखा- रुक यार साली दोनों को खुश किए बिना कहाँ जाएगी बस हो गया तू मुँह में डाल दे जबरदस्त चूसती है डाल साली के मुँह में 

कामया नीचे पड़ी हर धक्के में कोई ना कोई आवाज सुन जरूर रही थी पर धक्के इतने जबरदस्त होते थे कि पूरी बातें उसे सुनाई नहीं दी थी पर हाँ इतना जरूर था कि दोनों एक दूसरे को हटाकर उसे भोगना चाहते थे पर अचानक ही उसके मुख से चीख निकलती, वही भीमा चाचा ने जरबारदस्ती उसके बालों को खींचकर अपने लिंग पर उसका मुख रगड़ने लगे थे उसकी सांसों को एकदम से बंद कर दिया था भीमा चाचा के उतावले पन ने पर उनके जोर के आगे वो कहाँ एक ही झटके में उसके मुख में भीमा चाचा का लंबा और सख़्त सा लिंग समा गया था वो गूओगू करती हुई अपने को संभालती तब तक तो भीमा चाचा के हाथों के जोर से वो खुद आगे पीछे होने लगी थी कामया का शरीर अब अपने शिखर पर पहुँचने ही वाला था और इस तरह से छीना झपटी और बेदर्दी उसने पहली बार सहा था जिससे की वो कुछ ज्यादा ही जल्दी झड़ने लगी थी वो अपने चेहरे को भीमा चाचा के लिंग से अलग करने की कोशिस करने लगी थी और कमर के हर एक झटके के साथ ही वो दूसरी बार झड़ने लगी थी लाखा काका भी झड़ गये थे पर अभी भी लगातार झटके लगा रहे थे इतने में 

भीमा- साले हट हो तो गया 
और उसने लाखा को एक धक्का दिया और उसे पीछे की ओर धकेल दिया और जल्दी से अपने लिंग को निकाल कर कामया की जाँघो के बीच में बैठ गया और किसी ओपचारिकता के बिना ही एक ही झटके में अपना लिंग उसके अंदर तक उतार दिया कामया जो कि झड चुकी थी और अपनी सांसों को नियंत्रण करने में लगी थी इस अचानक आक्रमण के लिए तैयार नहीं थी पर अब क्या हो सकता था भीमा चाचा तो जनवरो की तरह से उसे भोग रहे थे उन्होंने कसकर कामया को अपनी बाहों में भर लिया था और उसके होंठों पर टूट पड़े थे और जम्म कर अपने पिस्टन को अंदर-बाहर कर रहे थे इतने में लाखा भी भीमा को उससे अलग करने लगा था तो भीमा की पकड़ थोड़ी सी ढीली हुई पर एक और मुसीबत उसके सामने थी लाखा काका ने अपने लिंग को उसके मुख में घुसा दिया उन्हें इस बात की कोई चिंता नहीं थी कि उसे कैसा लगेगा वो दोनों अपने हिसाब से उसे मिल बाँट कर खा रहे थे और वो भी बिना किसी ना नुकर के सब झेल भी रही थी उसके मुख में जैसे ही लाखा काका ने अपना लिंग डाला उसे उबकाई सी आने लगी थी पर लाखा काका ने जोर से उसका माथा पकड़ रखा था और अपने लिंग को आगे पीछे कर रहे थे उधर भीमा चाचा भी अपने पूरे जोर से कामया को भोग रहे थे या कहिए अपना गुस्सा निकाल रहे थे जो भी हिस्सा उनके हाथों में आता उसे मसलकर रख देते थे या फिर जो भी हिस्सा उसके होंठों में आता वहां एक काला दाग बना देते थे कामया तो जैसे मर ही गई थी उनकी हरकतों के आगे वो कुछ भी नहीं कर पा रही थी बस हर धक्के में आगे या फिर पीछे हो जाती थी और लाखा काका के लिंग को अपने गले तक उतरते हुए महसूस करती थी वो कब झड़ गई उसे पता नहीं चला पर हाँ… थोड़ी देर बाद दोनों शांत होकर उसके शरीर के हर हिस्से सटे हुए थे वो अब भी खाँसते हुए सांस ले रही थी पर वो दोनों तो जैसे मर ही गये थे उसके शरीर को किसी गद्दे की तरह समझ कर वही सो गये थे वो भी बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी और उसके जेहन में कोई भी बात आने से पहले ही वो भी वही सो गई 
वो सो क्या गई बल्कि कहिए निढाल हो चुकी थी उसका शरीर और दिमाग़ बिल कुल सुन्न हो गया था जिस तरह से भीमा और लाखा काका ने उसे यूज़ किया था वो एक खतर नाक मोड़ पर थी वो अपने आपको किस तरह से संभाले वो नहीं जानती थी 

उसके शरीर के ऊपर दोनों किसी मुर्दे की तरह लेटे हुए थे और अपने मुख से निकलने वाली लार से उसे भिगो रहे थे और अपने हाथों से उसे जाने नहीं देना चाहते थे वो सोई हुई अपनी परिस्थिति को समझने की और अपने आपको इस तरह की परिस्थिति से अलग करने के बारे में कही अपने जेहन में सोच रही थी पर उसके हाथों और पैरों में इतनी ताकत 
ही नहीं बची थी कि वो अपने को हिला भी सके और ऊपर से यह दो राक्षस उसके ऊपर उसे अभी तक कस के पड़े हुए थे उनकी सांसें अब भी उसके शरीर पर पड़ रही थी कामया बिल्कुल नंगी थी उसके शरीर में जहां तहाँ लाल काले धब्बे उभर आए थे पर उसे कोई होश नहीं था वो तो बेसूध सी पड़ी हुई थी थोड़ी देर बाद उसे अपने नीचे की ओर कोई हरकत होते सुनाई दी भीमा चाचा थे या लाखा काका थे पता नहीं पर जो भी था वो आगे की ओर जो सख्स था उसे हिलाकर उठा रहा था 
- ओये लाखा उठ बहू को उसके कमरे में छोड़ देते है 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

लाखा- हाँ… अरे रुक यार थोड़ी देर रुक जा देखने दे 

और दोनों झुक कर कामया को छूकर देख रहे थे शायद जानना चाहते थे कि जिंदा है कि मर गई कामया भी थोड़ा सा कसमसाई उनके हाथों के आगे 

भीमा- बहू उठो और अपने कमरे में जाओ बहुत देर हो गई है 

कामया- हाँ… उूउउम्म्म्म और एक बड़ी सी अंगड़ाई लेकर फिर से सिकुड़ कर सो गई 

लाखा- अभी मन नहीं भरा यार और देख इसे भी कोई फरक नहीं पड़ता थोड़ी देर रुक जा ना फिर आपण दोनों छोड़ आएँगे 
और झुक कर कामया के चहरे को अपनी हथेलियो के बीच में लेकर उसके होंठों को चूसने लगा था बड़े ही प्यार से उसके मुख के अंदर तक अपनी जीब को लेजाकर लाखा कामया को बहुत देर तक किस करता रहा उसे इस तरह से देखकर भीमा भी अपने हाथ कामया की जाँघो के चारो ओर घुमाने लगा था उसके हाथों में आई इस सुंदरी का वो हिस्सा लगता था वो किसी के साथ शेयर करने के मूड में नहीं था वो अपने होंठों को भी जोड़ कर कामया की जाँघो और टांगों को फिर से किस करने लगा था और ऊपर से लेकर पैरों के तले तक किस करते हुए जा रहा था कामया जो कि अब भी अपनी दुनियां से दूर अपने ऊपर हो रहे इस नये आक्रमण को धीरे-धीरे बढ़ते हुए सहन कर रही थी पर इस बार दोनों के हाथों और होंठों में जानवर पना नहीं था प्यार था और बहुत ही नर्मी से पेश आ रहे थे वो अपने आपको कभी सीधा तो कभी उनके किसके साथ अपने शरीर को इधर उधर करती जा रही थी उनके हाथों और उंगलियों के इशारे वो भी समझ रही थी पर जान तो बिल्कुल बची ही नहीं थी वो चाह कर भी उन दोनों को रोक नहीं पा रही थी वो इतना थक चुकी थी कि अपने हाथ पैरों को भी सीधा करने के लिए उसे बहुत ताकत लगानी पड़ रही थी पर ना जाने क्यों उसे दोनों के इस तरह से अपने जिस्म से खेलते हुए देखकर अच्छा लग रहा था वो अपने शरीर पर होने वाली हर हरकत को सहने को तैयार हो रही थी उसके अंतर्मन में एक आग फिर से भड़क ने लगी थी उसने अपने हाथों को फिर से आगे करके लाखा काका को छूने की एक कोशिश की लाखा जो की उसके होंठों को चूमने में लगा था 

अचानक ही बहू के शरीर में हुई हरकत से थोड़ा सा ठिठका पर जैसे ही बहू की हथेलिया उसके सिर के चारो ओर गई वो अस्वस्त हो गया कि बहू को कोई आपत्ति नहीं है वो फिर से अपने काम में जुट गया कामया की टांगों में भी धीरे-धीरे जान फुक रहा था भीमा और अपने होंठों से उसके हर कोने को चूमने की कोशिश कर रहा था और कामया भी अब धीरे से अपनी टांगों को मोड़कर या फिर थोड़ा उँचा करके उसे अपने यौवन कर रस पिला रही थी भीमा को भी पता चल गया था कि बहू को कोई आपत्ति नहीं है सो वो भी बहू के शरीर पर फिर से टूट पड़ा था अब तो दोनों फिर से कामया के शरीर को रौंदने लगे थे अपनी हथेलियो से और होंठों से जहां मन करता वहां किस करते और जहां मन करता वहाँ जोर से दबाते या फिर सहलाते लाखा काका तो ऊपर से कामया को किस करते हुए उसकी चुचियों पर आके रुक गये थे पर भीमा चाचा उसकी टांगों से लेकर उसकी कमर तक आ चुके थे वो अपनी जीब को निकाल कर अब कामया की नाभि में झुका हुआ था और अपनी जीब को जहां तक हो सके वो उसके अंदर तक घुसा देना चाहता था वो अब भी कामया को अपनी गोद में लिए हुए था उसकी कमर से वो कामया को अपने लिंग के ऊपर रखे हुए धीरे-धीरे अपने काम को अंजाम दे रह था और ऊपर लाखा भी कामया को अपनी दोनों बाहों में कसे हुए उसकी एक चूची को अपने होंठों के अंदर लिए हुए जम कर चूस रहा था वो अपने हाथों से दूसरी चुचि को धीरे धीरे दबा के उन्हें भी खुश करने की कोशिश कर रहा था 

भीमा भी अब तक उसकी नाभि को छोड़ कर कामया के शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर चल दिया था होंठों को उसके शरीर से बिना अलग किए वो अब भी कामया को बेतहाशा किस करते जा रहा था और कामया जो कि बस किसी तरह से अपने ऊपर हो रहे इस दोहरे आक्रमण को झेल रही थी अब फिर से काम अग्नि के भेट चढ़ने वाली थी उसके शरीर में एक बार फिर से उत्तेजना की लहर बहुत ही गति से फेलने लगी थी वो अपनी सांसों को फिर से अपनी नाक और मुख से जोर से छोड़ने लगी थी और भीमा चाचा और लाखा काका की हर हरकत पर फिर से अपने शरीर को मरोड़ कर उनकी हरकतों का आनंद लेने लगी थी वो जानती थी कि अब की बार वो दोनों को अपने जहन में उतारने में उसे कोई दिक्कत नहीं होगी और वो अपने को उस एनकाउंटर के लिए बिल्कुल तैयार कर रही थी वो अब अपने मुख से निकलने वाली सिसकारी को भी सुन सकती थी जो कि कमरे में बहुत ही तेजी से फेल रही थी 


भीमा अपने आपको कामया की चुचियों तक ले जाने में कोई देरी नहीं करना चाहता था और वो पहुँच भी गया लाखा को थोड़ा सा हटाकर उसने भी एक चुचि पर अपना कब्जा जमा लिया अब तो दोनों लाखा और भीमा ने जैसे बहू को आपस में बाँट लिया हो दोनों अपने-अपने हिस्से को चूमकर और चाट कर बहू के हर अंग का स्वाद लेने में लगे हुए थे कामया को भी जैसे जन्नत का मजा आने लगा था दोनों जिस तरह से उसकी चूचियां चुस्स रहे थे वो उसके लिए एक नया और और बिल कुल अनौखा अनुभव था दो होंठ उसकी एक-एक चुचि को अपने मुख में लिए हुए उसका रस चूस रहे थे और दोनों ही बिल्कुल अलग अलग अंदाज में दोनों के हाथों का दबाब भी अलग था और सहलाने का तरीका भी आआआआअह्ह 
एक लंबी सी सिसकारी कामया के मुख से निकलकर पूरे कमरे में फेल गई उसकी सिसकियो में कुछ ज्यादा ही उत्तेजना थी वो अब लाखा काका और भीमा चाचा की गिरफ़्त में भी मचल रही थी जैसे ही दोनों के चूसने की रफ़्तार बढ़ने लगी थी भीमा और लाखा कामया को सहारा देकर अब उठा चुके थे और दोनों ओर से उसे घेरे हुए उसकी चुचियों को ऊपर उठाकर चूस रहे थे वो एक-एक निपल्स को मुख में डाले हुए जोर-जोर से चूसते जा रहे थे और बीच बीच में पूरा का पूरा चुचि को अपने मुख के अंदर घुसाकर जोर से काट भी लेते थे और अपने हाथों से बाहर निकाल कर जोर से दबा भी देते थे कामया का सिर ऊपर हवा में लटका हुआ था पर साँसे अभी भी बहुत तेजी चल रही थी दोनों अपने हिस्से का काम बहुत ही सही अंदाज से अंजाम दे रहे थे भीमा और लाखा ने कामया को अपनी एक-एक जाँघ के सहारे बैठा रखा था और अपने एक-एक हाथों को भी उसकी पीठ पर फेर रहे थे दूसरे हाथ से दोनों कामया को चुचियों से लेकर जाँघो तक और फिर टांगों के तले तक सहलाने में व्यस्त थे 

कामया के शरीर में उठने वाली वासना की तरंगे अब उसके बस से बाहर थी वो अपने शरीर को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और अपने मुख से जोर से सांसें लेते हुए अपनी सिसकारी और अह्ह्ह को रोकने की जी भर के कोशिश करती जा रही थी पर वो उसके मुख से फिसलते हुए पूरे कमरे को भरती जा रही थी उसकी सिसकारी जब तेज होने लगी तो अचानक ही एक जोड़ी होंठों ने उसे अपने होंठों के अंदर लेके बंद कर दिया अब कामया फ्री थी कितना भी जोर से सिसकारी लेने को वो कौन था इससे उसे फरक नहीं पड़ता पर जो भी था उसे किस करना आता था और बहुत ही अच्छे ढंग से किस करना आता था अब तो वो बिल्कुल उत्तेजित थी होंठों के बीच में जब भी वो अपनी जीब से उसके मुख के अंदर चुभलाने लगता तो वो मस्त हो करके अपने सीने को और आगे बढ़ा देती वो जो सख्स उसकी चूचियां अपने मुख लिए हुए था वो भी कस कर उसकी चूचियां अपने एक हाथ से थामे दूसरे से उसे चूसते जा रहा था अब तो दोनों की उंगलियां धीरे धीरे उसकी योनि के अंदर-बाहर भी होने लगी थी पर दोनों बारी बारी से उसकी योनि के अंदर-बाहर कर रहे थे उसकी योनि रस से भरी हुई थी और अब अपने अंदर की चाह को मिटाने के लिए उत्तेजित भी थी और लाखा तो जैसे अब अपनी पर ही उतर आया था


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो कामया को अपने सीने से लगाए हुए जोर से भीचे हुए उसकी चुचियों को और निपल्स को अपने दाँतों से काट-ता जा रहा था और जोर से अपनी उंगली को उसकी योनि में घुसाता जा रहा था लगता था कि जैसे उसकी अंतिम सीमा तक पहुँचना चाहता था उधर भीमा भी अपनी उत्तेजना को नहीं रोक पा रहा था और बहू को बाहों में भरे हुए उसके होंठों पर लगा हुआ था एक हाथ में उसके कभी-कभी लाखा के छोड़ने से एक चुचि आ जाती थी तो उसे वो बहुत जोर से निचोड़ता था उसे कोई डर नहीं था क्योंकी उसने बहू का मुख बंद कर रखा था वो कोई भी अब धीरे नहीं कर रहा था वो भी जानवर हो चुका था और बहशी के समान कमाया को निचोड़ने में कोई नहीं रहा था वो भी अपनी उंगली को कामया की जाँघो के बीच में घुसाता था पर जब वहां लाखा की उंगलियां होती थी तो कामया की जाँघो को सहलाकर वापस अपने लिए जगह बनाता था दोनों के हिस्से में आए कामया का शरीर को दोनों अपने तरीके से सहला रहे थे और जोर से उसे इश्तेमाल करते जा रहे थे पर अचानक ही लाखा एकदम से कामया की जाँघो के बीच में पहुँच गया और बिना किसी पूर्व चेतावनी के ही एक ही धक्के के उसके अंदर तक समा गया वो अचानक ही कामया के पूरे शरीर को अपने गिरफ़्त में लेने को हुआ और भीमा के हाथों से छुड़ा कर उसने कामया को अपनी बाहों में भर कर अपनी गोद में बिठा लिया था और कामया की गर्दन और गालों को चूमे जा रहा था पर कामया का पूरा शरीर जैसे लटका हुआ था वो जब तक कुछ करती तब तक तो लाखा ने उसपर पूरा नियंत्रण कर लिया था और उसके होंठों को भी ढूँढ़ कर अपने होंठों से दबा लिया था लाखा घुटनों के बल बैठा हुआ कामया को गोद में लिए हुए झटके लगाता जा रहा था और हर धक्के में कामया उसकी गोद में उच्छल कर उसके कंधे से ऊपर चली जाती थी भीमा जो कि वही पास बैठे हुए लाखा को अपनी हरकत करते हुए देख रहा था और अचानक अपने हाथों से बहू के निकल जाने के बाद सोच ही रहा था कि कहाँ से अपना कब्जा शुरू करे तभी कामया पीछे की ओर धनुष जैसे हुई तो भीमा ने लपक कर कामया को अपने हाथों से सहारा दिया और कसकर फिर से कामया के होंठों पर झुक गया वो भी अपने को किसी तरह से रोके हुए था पर कामया को इस तरह से उछलते हुए देखकर वो भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और वो भी एक बहशी बन गया था वो जोर-जोर से कामया को चूमे जा रहा था और अपनी दोनों बाहों को कामया के शरीर के चारो ओर घेर कर अपने सीने से कस के लगाए हुए था लाखा भी अपने पूरे जोर से कामया की कमर को जकड़े हुए नीचे से धक्के लगाते जा रहा था और लाखा कामया को चूमते हुए देखता जा रहा था शायद वो अपने चरम सीमा की ओर पहुँचने ही वाला था क्योंकी उसके धक्के अब बहुत ही गतिवान हो गये थे और वो कामया को थोड़ा सा ऊपर करके लगातार धक्के लगा रहा था 
और उधर भीमा भी अपने आपको और ज्यादा नहीं रोक पाया तो वो कामया के पीछे की ओर हो गया और पीछे से अपने लिंग को कामया के नितंबों को छू रगड़ने लगा था और लाखा की ओर देखते हुए 

भीमा- लाखा, अब छोड़ मुझे भी करना है 

लाखा आआह्ह रुक जा यार बस हो गया 

भीमा को कहाँ शांति थी उसने एक बार अपने हाथों को कामया और लाखा के बीच में डाल ही दिया और कामया की कमर को पकड़कर एक ही झटके में कामया को अपने पास खींच लिया कामया जो कि एक लाश के समान थी एक ही झटके में भीमा की गोद में पहुँच गई और लाखा काका के हाथों से छूट गई अब वो पीछे से भीमा चाचा की गोद में पहुँच गई थी और एक फ्रॉग की तरह से नीचे गिर पड़ी पर गिर पड़ी क्या लाखा कहाँ छोड़ने वाला था उसने कामया को झट से खींच कर अपने हाथों से संभाला और उसके चहरे को अपने लिंग के आस-पास घिसने लगा और भीमा ने देर नहीं की और झट से कामया के पीछे से उसकी योनि में झट से घुस गया और क्या अपने जोर से उसे लगा जैसे कि अपनी हवस को अंजाम देने की कोशिश कर रहा हो वो बहुत उत्तेजित था उसकी हरकतों को देखकर ही कहा जा सकता था उसे कोई चिंता नहीं थी ना तो कामया की और नहीं लाखा की वो तो बस कामया के अंगो को पीछे से निचोड़ता हुआ अपने लिंग को कामया की योनि में बिना किसी रोक टोक के लगातार अंदर और बहुत अंदर तक जा रहा था कामया जो की अब दोनों ओर में अटकी हुई थी अब उसके मुख में लाखा काका के लिंग से एक लंबी सी पिचकारी निकलकर उसके गले तक उतरगई थी और नीचे भीमा चाचा के लिंग से निकली पिचकारी उसके अंदर बहुत अंदर तक कही जाकर समा गई थीएक गरम सी बौछार दोनों और से उसके शरीर के अंदर तक उतरगई थी कामया ने अपने जीवन का पहला और बहुत ही दर्दनाक सेक्स आज की रात किया था पर एक बात जरूर थी उसने एक बार भी किसी को मना नहीं किया था जाने क्यों उसे इस तरह से अपने शरीर को रौंदने वाले भीमा और लाखा पर कही से भी गुस्सा नहीं था वो बिल्कुल निश्चल सी नीचे पड़ी हुई थी जैसे कोई मर गया हो और उसके मुख की ओर लाखा काका बैठे हुए थे और नीचे की ओर भीमा चाचा लंबी सांसें लेते हुए अपने आपको कंट्रोल कर रहे थे सभी बहुत थके हुए थे और किसी के शरीर में इतनी जान नहीं बची थी कि जल्दी से हरकत में आए 
कुछ 20 25 मिनट बाद अचानक ही लाखा और भीमा जैसे नींद से जागे हो अपनी जाँघो के पास कामया को इस तरह से नंगे पड़े हुए देखकर दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा 

लाखा- क्यों इसे कमरे में कैसे ले जाए 

भीमा- रुक बहू उूुउऊबहुउऊउ 
और कामया को थोड़ा सा हिला के देखा कामया के शरीर में जान कहाँ थी इस तरह से हिलाने से क्या होना था अगर झींझोड़ कर उठाया नहीं गया तो शायद वो वही ऐसे ही पड़ी रहती सुबह तक पर लाखा और भीमा को उससे ज्यादा फिकर थी वो कामया के शरीर को अपने हाथों से एक बार अच्छे से सहलाते हुए अपने मुख को कामया के कानों के पास तक ले गये और धीरे-धीरे उसको आवाज लगाते हुए उसे उठाने लगे किसी तरहसे उठाकर बैठा लिया दोनों ने 

लाखा--- वो रहा गाउन तेरे पीछे दे 

भीमा ने अपने पीछे से गाउन उठाकर लाखा की ओर किया और कामया को सीधा करके उसके माथे के ऊपर से दोनों मिलकर उसे गाउन पहनाने में लगे थे बीच बीच में अपने हाथों से उसकी गोल गोल चूची को भी अपने हाथों से छू लेते थे और उसके पेट से लेकर नीचे तक उसे देखते हुए उसे सहला भी देते थे 
लाखा- अब तो छोड़ 
भीमा- तू भी चल ध्यान देने थोड़ा सा चल 
और दोनों कामया को अपने हाथों से उठाने को उतावले हो उठे पर यह सौभाग्य भीमा ने उठाया और आधी नंगी कामया को बिना, पैंटी के ही वैसे गाउन मे लेके बाहर आ गये लाखा धीरे-धीरे घर का जायजा लेने लगा था और भीमा अपनी बाँहों में भरे हुए कामया को उसके बेडरूम तक ले जाने लगा था लाखा आगे जाकर देख रहा था और पीछे भीमा उसे लिए हुए दबे कदम कामया के कमरे तक पहुँच गये 

कमरे के बाहर भीमा और लाखा दोनों रुक गये और फिर लाखा ने कामया को एक बार फिर से होश में लाना चाहा 

लाखा- बहू उठो बहू 

पर बहू तो जाने कहाँ थी वो अब भी मुर्दे की भाँति भीमा चाचा की बाहों में पड़ी हुई थी 
लाखा- अब हाँ… 

भीमा- रुक दरवाजा खोल 

लाखा- नहीं मरवाएगा क्या भैया है अंदर 

भीमा- नहीं बहू नहीं पहुँची ना तो तू भी और में भी और यह भी अपनी गोद में लिए कामया की ओर इशारा करते हुए भीमा ने जताया 
लाखा ने बड़ी हिम्मत करते हुए दरवाजे को धकेला पर वो नहीं खुला 
लाखा- अंदर से बंद है 
भीमा चाचा और लाखा के चहरे से रंगत उड़ गई थी पर तभी उनका ध्यान नीचे लॉक पर गया और देखकर थोड़ी सी हिम्मत बनी कि वो तो बाहर से बंद था लाखा ने धीरे से उसे खोला और अंदर आ कर देखा अंदर कामेश दूसरी तरफ मुँह किए सो रहा था अंदर मस्त एसी की ठंड थी और दरवाजा खुलते ही बाहर तक आने लगी थी लाखा ने दरवाजा खोलकर भीमा की ओर देखा भीमा धीरे से कामया को गोद में लिए अंदर की ओर हुआ और बहुत ही धीरे से कामया को भैया के पास सुलाकर वैसे ही दबे कदम बाहर की ओर हो लिया दरवाजे पर लाखा वैसे ही खड़ा हुआ भीमा को सबकुछ करते हुए देख रहा था और उसका साथ देने को खड़ा हुआ था 

भीमा अपने काम को अंजाम देने के बाद वैसे ही दबे कदम बाहर आ गया और दरवाजा बंद करते हुए दोनों जल्दी से अपने कमरे में आ गये थे 




दोनो के चहरे में एक संतोष था और एक अजीब सी खुशी भी थी जैसे कोई मैदान मारकर आए हो कमरे में पहुँचते ही दोनों कमरे को ठीक करने में लग गये थे 
लाखा- यार मजा आ गया बहू तेरे कमरे में भी आ जाती है 

भीमा- हाँ यार दूसरी बार ही आई है 

लाखा- साले बताया नहीं तूने तो साले खेल रहा था हाँ… 

भीमा- अरे यार क्या बताता तुझे तो पता है फिर तू कौन सा साधु है तूने भी तो कोई कमी नहीं छोड़ी ना 

लाखा- हाँ यार क्या माल है साले मेंने भी कभी नहीं सोचा था कि इस घर की बहू को भी भोगने का मिलेगा यार गजब की माल है 

भीमा- हाँ… सला भैया खुश नहीं कर पाता होगा नहीं तो क्या वो अपने पास आती 

लाखा- हाँ यार साला खाली कपड़े और गाड़ी ही देता होगा ही ही और बाकी हम देते है हा हा हा 
भीमा भी उसकी हँसी में शामिल हो गया और कुछ देर बात करते हुए दोनों कब सो गये पता ही नहीं चला 

उधर कामया जब अपने बिस्तर पर पहुँची तो उसे थोड़ा बहुत होश था पर शरीर में इतना जोर नहीं था कि उठ सके या कोई काम कर सके वो वैसे ही बहुत देर तक लेटी रही और फिर बहुत संघर्ष करके अपने आपको एक चादर से ढँक कर सो गई उसके जेहन में अब तक लाखा और भीमा की छवि छाइ हुई थी किसी तरह से उन दोनों ने मिलकर उसे निचोड़ कर रख दिया था उसका बुरा हाल हो रहा था और उसकी चूचियां और शरीर का हर हिस्सा दर्द में बदल चुका था वो लेटी हुई अपने बारे में सोच रही थी और पास में लेटे हुए अपने पति के बारे में भी वो क्या से क्या हो गई थी आज तो जैसे वो अपनी नजर से बहुत गिर चुकी थी उसने जो आज किया था वो क्या कोई घर की बहू करती है 
क्या उसने जो भी किया उसके लिए ठीक था जाने क्यों वो इस बात के निर्णय पर नहीं पहुँच पाई और शून्य की ओर देखती हुई कब सो गई पता ही नहीं चला 


सुबह जब आखें खुली तो कामेश उसकी बगल में नहीं था शायद नीचे चाय पीने गया था वो जल्दी से उठी और झट से बाथरूम में घुस गई नहाते समय उसे अपने शरीर में काले नीले धब्बे दिखाई दिए और मिरर में देखकर वो चकित रह गई थी यह धब्बे कल रात का परिणाम था उसके शरीर के साथ हुए कर्म की निशानी थे पर एक सी मुस्कान उसके होंठों में दौड़ गई थी क्या वो इतनी गिरी हुई है कि लाखा और भीमा उसके शरीर में इस तरह के निशान छोड़ गये 

क्या वो इतनी कामुक है कि उसे कल पता भी नहीं चला कि क्या हो गया पर हाँ… उसे दर्द या फिर कुछ भी अजीब सा नहीं लगा था तब अच्छा ही लगा होगा नहीं तो वो संघर्ष तो करती या फिर कुछ तो आशा करती जो उसे अच्छा नहीं लगने का संकेत होता पर उसने तो बल्कि उन दोनों का साथ ही दिया और उन्हें वो सब करने दिया जो कि वो चाहते थे हाँ… उसे मजा ही आया था और बहुत मजा आया था उसने कभी जिंदगी में मजा कभी नहीं लिया था वो भी सेक्स का वो इतना कभी नहीं झड़ी थी जितना कि कल रात को वो कभी सेक्स में इतना नहीं थकि थी जितना कि कल रात को उसके शरीर का इस्तेमाल भी कभी किसी ने इस तरह से नहीं किया था कि जितना कि कल हाँ… यह सच था और उसी का 
ही परिणाम था यह जो की उसके शरीर में जहां तहाँ उभर आए थे वो अपने शरीर को घुमाकर हर हिस्से को एक बार देखना चाहती थी उसकी जाँघो में नितंबों में जाँघो के पीछे के हिस्से में कमर में नाभि के आस-पास और चूचियां में और निपल्स में गले में हर कही उसे दिख रहे थे वो मिरर में एक बार अपने को देखकर और फिर अपने शरीर को मिरर में देखने लगी थी कितनी सुंदर है वो क्या शरीर पाया है उसने मस्त चूचियां जो की निपल्स के साथ किसी की चोटी की तरह से सामने की ओर देख रहे थे उसके नीचे पतली सी कमर उसके बीच में गहरी नाभि जो कि उसके शरीर को और भी ज्यादा सुंदर बना देती थी नीचे नितंबों का सिलसिला होते हुए जाँघो से नीचे तक टाँगें जो कि उसके शरीर को किसी बोतल के शेप में चेंज कर देती थी 

कंधों के ऊपर से सुराहीदार गर्दन और फिर उसका प्यारा सा चहरा लाल होंठ उसके ऊपर नोक दार नाक पतली सी और फिर उसकी कातिल निगाहे जो कि बहुत कुछ ना कहते हुए भी बहुत कुछ कह जाती थी


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वो खड़ी-खड़ी अपने को बहुत देर तक इसी तरह से देख रही थी कि डोर पर नॉक होने से वो वापस वास्तविकता में आई और बाहर खड़े कामेश को आवाज दी 
कामया- जी 

कामेश- जल्दी निकलो मुझे जाने में देर हो जाएगी 

कामया- बस दो मिनट 
और वो जल्दी से अपने आपको संभाल कर बाहर आने की जल्दी करने लगी बाहर आते ही उसे कामेश अपने आफिस बैग में कुछ करता दिखा 

कामेश- कल क्या हुआ था तुम्हें 

कामया क्यों 

कामेश उसके पास आया और, माथे को और फिर होंठों को चूमते हुए उसकी आखों में आँखे डालकर कहा 
कामेश- बिना पैंटी के ही सो गई थी 

कामया- छि छि तुमने देखा 

कामेश- ही ही हाँ… नशा ज्यादा हो गया था क्या 

कामया- जंगली हो तुम 

कामेश- यार यह तो मैंने नहीं किया 
वो कामया की गर्दन और गाल के नीचे तक लाल और काले निशानो की ओर इशारे करता हुआ बोला 

कामया- हाँ…और कहाँ आए थे किसने किया 

कामेश- यार नशे में था पर सच बताऊ तो मुझे कुछ याद नहीं 

तब तक कामया पलटकर अपने ड्रेसिंग टेबल तक पहुँच चुकी थी वो कामेश से नजर नहीं मिला पा रही थी 
पर कामेश उसके पीछे-पीछे मिरर तक आ गया और उसे पीछे से पकड़कर कंधों से बाल को हटा कर उसकी पीठ पर आया और गर्दन पर निशानो को देखकर छूता जा रहा था 

कामेश- सच में डियर मुझे कुछ भी याद नहीं सॉरी यार 

कामया- धात जाइए यहां से और अपने को झटके से कामेश से अलग करती हुई वो अपने बालों पर कंघी फेरने लगी थी कामेश भी थोड़ी देर खड़ा हुआ कुछ सोचता रहा और फिर घूमकर बाथरूम की ओर चल दिया 
कामेश- आज आओगी ना 

कामया- नहीं मन नहीं कर रहा 

कामेश- घर में क्या करोगी आ जाना पापा के साथ 

कामया देखती हूँ मन किया तो 
और कामेश बाथरूम की ओर चला गया था कामया अपने आपको संवारती हुई अपने पति के बारे में सोचने लगी क्या वो जो कर रही है वो ठीक है उसका पति उसे कितना प्यार करता है और वो उसे धोका दे रही है 

हां धोखा ही तो है वो सोच रहा है कि वो दाग उसने दिया पर हकीकत तो कुछ और ही है वो मिरर के सामने अपने से अपनी नजर नहीं मिला पा रही थी और वापस अपने बिस्तर पर आके बैठ गई और कंघी करने लगी उसके दिमाग में बहुत सी बातें चल रही थी पर उसे अपने पति को धोखा देना अच्छा नहीं लगा उसका मन एकदम से निराश सा हो गया वो शायद रो भी देती पर कामेश को क्या बताती कि वो क्यों रो रही है इसलिए चुपचाप बैठी हुई बाल ठीक करके उसके आने का इंतेजार करने लगी 

कामेश जब तक बाहर आया तब तक वो थोड़ा सा नार्मल हो चुकी थी पर जेहन में वो बातें चाल तो रही थी कामेश के तैयार होने के बाद जब वो नीचे गया तो वो भी उसके साथ ही नीचे गई डाइनिंग टेबल पर सजे हुए डिश और खाने को देखकर वो भी थोड़ा सा नार्मल होती चली गई और खाना परोश कर कामेश को खिलाने लगी थी 

पापाजी- अरे बहू थोड़ा जल्दी तैयार हो जाना आज तुम्हें एक शोरुम दिखाने ले चलता हूँ 
पापाजी अपने कमरे से निकलते हुए डाइनिंग टेबल पर आ गये थे वो कुछ जल्दी तैयार हो गये थे कामेश की नजर कामया पर रुक गई थी कुछ कहता पर उससे पहले ही 

कामया- जी पापाजी में आती हूँ 
और कामेश की देखते हुए वो जल्दी से अपने कमरे की ओर भागी हाँ… अब वो इस तरह से नहीं करेगी अपने पति का साथ देगी छि क्या किया उसने नहीं अब नहीं बहुत हो गया यह सब 
और कामया अपने कमरे में पहुँचकर जल्दी से तैयार होने लगी थी उसे जाना ही था वो अब यह धोखा धड़ी के खेल से अपने को आजाद करना चाहती थी जल्दी से तैयार होकर जब वो नीचे पहुँची तो पापाजी को उसी का इंतजार करते हुए पाया खाना खाकर कामया पापाजी के साथ बाहर निकल गई गाड़ी आज भी लाखा काका ही चला रहे थे पर कामया को कोई फरक नहीं पड़ता उसने एक बार भी लाखा काका की ओर नहीं देखा पर हाँ… कल के बारे में एक बार उसके जेहन में बात आई तो जरूर थी पर झटके से कामया ने उस बात को अपने दिमाग में घर करने से बाहर निकाल दिया 

पापाजी के साथ कामया अपने नये काम को देखती हुई कॉंप्लेक्स में आज कुछ और अंदर तक घुसी वहां के लोगों से मिली और कुछ देर बाद वहां से निकलकर अपने शोरुम में भी पहुँची और फिर कल की तरह ही पूरी शाम तक वो अपने पति और पापाजी के साथ ही रही उसके मन में एक बार भी कही कोई त्रुटि नहीं आई या फिर कहिए सेक्स के बारे में कोई भी सोच नहीं आई वो इसी तरह से अपने शाम तक का टाइम निकाल कर जब अपने पति के साथ घर पहुँची तो बहुत थक गई थी घर पहुँचकर भी उसने ना तो भीमा चाचा से नजर ही मिलाई और नहीं लाखा काका के सामने कोई उत्तेजना ही 

इसी तरह रात को भी कामया अपने कमरे में ही रही रात को कामेश के साथ सेक्स का मजा भी लिया और बहुत ही प्यार भरी बातें भी की कामेश उसे बहुत छेड़ रहा था उसे बार-बार अपने काम के बारे में पूछकर उसे एमडी एमडी कहकर, छेड़ता जा रहा था उसे भी अपने पति की छेड़ छाड़ अच्छी लग रही थी वो अगर इतना ध्यान उसे दे तो क्या जरूरत है उसे किसी के पास जाने की अगर वो उसे समय दे तो क्या जरूरत है उसे किसी से समय माँगने की वो बहुत खुश थी और अपने बिस्तर पर पड़े हुए वो एक चरम सुख का आनद ले रही थी उसे आज साफ्ट सेक्स में मजा आ रहा था कितना प्यार करते है कामेश उसे कितने हल्के हाथों से और कितने जतन से कही उसे चोट ना लग जाए या फिर निशान ना पड़ जाए कितने प्यार से उन्होंने उसकी चुचियों को छुआ था और कितने प्यार से उन्हें मुख में डालकर चूसा भी था वो एक परम आनंद के सागर में गोते लगा रही थी जब कामेश ने उसकी योनि के अंदर प्रवेश किया तो आआआआआह्ह एक सिसकारी उसके मुख से आनयास ही निकल गई थी और वो कामेश के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुबलने लगी थी कितना आनंद और सुख है कामेश के साथ कोई चिंता नहीं कैसे भी और किसी भी वक़्त वो अपने पति के साथ आनंद ले सकती थी कामेश की स्पीड धीरे-धीरे बढ़ने लगी थी और वो अब पूरी गति से कामया पर छाया हुआ था और कामया भी अपने पति का पूरा साथ दे रही थी और आज तो कुछ ज्यादा ही 

वो हर धक्के पर उच्छल जाती और अपनी बाहों के घेरे को और भी कामेश के चारो ओर कस्ति जा रही थी हर धक्के को वो भी कामेश के धक्के के साथ मिलाना चाहती थी और हर धक्के के साथ ही वो कामेश को किस भी करती जा रही थी और उसके होंठों के बाद अब तो वो उसकी जीब को भी अपने होंठों में दबा कर अपने मुख के अंदर तक ले जाने लगी थी कामया की सेक्स करने की कला से कामेश भी हैरान था और वो जानता था, कि कामया बहुत ही गरम है और वो अब ज्यादा देर तक ठहर नहीं पाएगा जिस तरह से कामया अपनी कमर को उछाल कर उसका साथ दे रही थी उसे अंदाजा हो गया था कि कामया भी कभी भी उसका साथ छोड़ सकती है कामया के होंठों से निकलने वाली हर आवाज अब उसे साफ-साफ सुनाई दे रही थी जो कि उसके कान के बिल्कुल करीब थी और भी उसे उसके करीब खींचने की कोशिश कर रही थी 

कामेश ने भी अपने पूरे जोर लगाकर कामया को अपनी बाहों के घेरे में कस रखा था और लगातार अपनी स्पीड को बढ़ा रहा था हर धक्के में वो कामया के जेहन तक उतर जाना चाहता था और उसे रास्ता भी मिल रहा था आज कामया उसे पागल कर दे रही थी वो जिस तरह से अपनी दोनों जाँघो को उसकी कमर के चारो ओर घेर रखा था उससे वो बहुत ज्यादा ऊपर भी नहीं हो पा रहा था उसकी जकड़ इतनी मजबूत थी कि वो छुड़ाने की कोशिस भी नहीं कर पा रहा था 
कामया- जोर से कामेश और जोर से 

कामेश- हूँ हूँ आअह्ह हाँ… 

कामया- और कस कर पकडो प्लीज और कस कर मारो प्लीज 
कामेश अपनी पूरी ताकत लगाके कामया को जकड़े हुए था पर कामया उसे और भी पास और भी नजदीक लाने की कोशिस कर रही थी वो उत्तेजना में जाने क्या-क्या कह रही थी वो अपने पूरे जोर से कामया के अंदर-बाहर हो रहा था पर कामया के मुख से निकल रहे शब्दों को सुनकर, सच में पागल हुए जा रहा था वो अपनी पूरी शक्ति लगाकर कामया को भोगने में लगा था पर कामया को उपने शिखर में पहुँचने में अभी थोड़ी देर थी वो कामेश को जितना हो सके उसने जोर से कस कर भिच रखा था और लगातार अपनी कमर को हिलाकर कामेश के लिंग को जितना हो सके अंदर तक ले जाने की कोशिश करती जा रही थी वो एक साधारण औरत जैसा बिहेव नहीं कर रही थी वो एक सेक्स मेनिक जैसी हो गई थी और अपने ऊपर अपने पति को ही निचोड़ने में लगी हुई थी वो अपनी योनि को भी सिकोर्ड कर उसके रस को अपने अंदर तक समा लेने चाहती थी 


और उधर कामेश जितना रुक सकता था रुका और धम्म से कामया के ऊपर ढेर हो गया वो अपनी पूरी शक्ति लगा चुका था और कामया को भोगने में कोई कसर नहीं छोड़ा था पर पता नहीं कामया को क्या हो गया था कि आज वो उसका साथ नहीं दे पाया वो अब भी नीचे से धक्के लगा रही थी और कामेश के सिकुडे हुए लिंग को अपने से बाहर निकलने नहीं दे रही थी अचानक ही कामया जैसे पागल हो गई थी एक झटके से अपनी जाँघो को खोलकर वापस आपास में जोड़ लिया और कामेश को नीचे की ओर पलट दिया और खुद उसके ऊपर आके उसके ऊपर सवार हो गई अब कामया कामेश को भोग रही थी ना कि कामया को कामेश शिथिल होता जा रहा था उसके शरीर में इतनी भी ताकत नहीं थी कि वो कामया को सहारा दे और उसे थामे पर कामया को जैसे किसी तरह की मदद की जरूरत ही ना हो वो कामेश के ऊपर सवार होकर अपनी कमर को तेजी चलाकर अपनी हवस को शांत करती जा रही थी पर शायद कामेश के सिकुड़ जाने के बाद उसे इतना मजा नहीं आया था वो एकदम से कामेश के सीने में गिर गई और उसे चूमते हुए 
कामया- प्लीज कामेश थोड़ी देर और प्लीज करो ना आआआआआआअ
कमाया की कमर अब भी अपने अंदर कामेश के लिंग को निचोड़ जा रही थी पर कामेश में अब ताकत नहीं बची थी सो वो अपने हाथों को उसकी कमर के चारो और लेजाकर कस के उसे पकड़ लिया और नीचे से धीरे-धीरे धक्के मारने लगा था ताकि कामया को शांत कर सके पर कामया ने तो जैसे आशा ही छोड़ दी थी वो कामेश के सीने से चिपकी हुई अपने कमर को आगे पीछे करती जा रही थी और कामेश के सीने पर किस करते-करते अपनी उंगलियों से उसके बालों को खींचने लगी थी 

कामेश- आहह क्या करती हो 

कामया- धात थोड़ी देर और नहीं कर सके 

कामेश- अरे आज क्या हुआ है तुम्हें पहले तो ऐसा नहीं देखा 

कामया- एक तो इतने दिन बाद हाथ लगाते हो और फिर अधूरा ही छोड़ देते हो 
और कामेश के ऊपर से अपनी साइड में उतरगई कामेश को भी दुख हुआ और कामया को अपनी बाहों में भर कर उसके गालों को चूमते हुए कहा 

कामेश- अरे यार पता नहीं क्या हुआ आज पर पहले तो ऐसा नहीं हुआ 

कामया- बुड्ढे हो गये हो और क्या सिर्फ़ दुकान और, पैसा ने तुम्हें बूढ़ा बना दिया है और कुछ नहीं 
और गुस्से में पलटकर सोने की कोशिश करने लगी पर नींद कहाँ वो अपनी अधूरी छोड़ी हुई वासना को कैसे पूरी करे सोचने लगी थी 


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वो अचानक ही कामेश की ओर मूडी और फिर से कामेश को अपनी बाहों में भर कर उसे किस करने लगी 
कामेश को भी लगा कि शायद गुस्से के कारण उसने जो कहा उसके लिए शर्मिंदा है सो उसने भी कामया को अपनी बाहों में भर लिया और वो भी कामया को किस्स करने लगा था पर कामया के दिमाग में कुछ और ही था वो कामेश को किस करते हुए अपना एक हाथ नीचे उसके लिंग तक पहुँचा चुकी थी कामेश एक दम भौचक्का रह गया वो आखें खोलकर कामया की ओर ध्यान से देखने लगा कामया के चहरे पर एक कातिल सी मुश्कान थी जैसे वो कह रही हो कहाँ जाओगे बचकर वो कामेश के लिंग को अपने हाथों में लेकर उसे अपने लिए तैयार करने चेष्टा में थी उसकी आखों में एक अजीब सी चमक थी जो कि कामेश ने आज से पहले कभी नहीं देखी थी वो एक अलग सी कामया को देख रहा था पर हाँ… उसे अपनी पत्नी का यह अंदाज अलग और अच्छा लगा वो भी फिर से अपनी में आने लगा था कामया की हथेलियो में उसके लिंग को एक नई उर्जा मिल रही थी और उसके किस में भी एक अलग ही बात थी जो कि आज तक उसने कभी महसूस नहीं किया था 


कामया कामेश के लिंग को धीरे-धीरे अपने हाथों से सहलाती हुई कामेश के होंठों को किस करती जा रही थी और एकटक कामेश की ओर देखती जा रही थी फिर धीरे से कामेश के होंठों को छोड़ कर वो कामेश के सीने के बालों में अपने होंठों को एक दो बार घुमाकर उसके पेट और नाभि तक पहुँच गई थी उसका एक हाथ अब भी उसके लिंग पर ही था जो कि अपने अस्तित्व में आने लगा था और थोड़ा बहुत झटके लेकर अपने आपको जगा हुआ परवर्तित करवाने की चेष्टा में था कामेश के होंठों से कामेश के शरीर में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी और वो झुक कर अपनी पत्नी को उसे इस तरह से प्यार करते हुए नीचे की ओर जाते हुए देख रहा था वो कामया के सिर को सहलाते हुए अपने तकिये में चुपचाप लेटा हुआ था कामया के होंठों ने जब उसकी नाभि और पेट को छोड़ कर अचानक ही उसके लिंग को किस किया तो वो लगभग चौक गया और नीचे की और देखते हुए अपनी पत्नी के सिर पर अपने हाथों के दबाब को बढ़ते हुए पाया था शायद हर मर्द की चाहत ही होती है कि कोई औरत उसके लिंग को चूसे बिस्तर पर एक वेश्या जैसे वर्ताव करे पर जब यह सब होने लगता है तो एक बार आश्चर्य होना वाजीब है और कामेश को भी हो रहा था पर कामया जिस तरह से उसके लिंग को अपने मुख के अंदर लेकर खेल रही थी या फिर उसके लिंग को अपने लिए तैयार कर रही थी वो अपना आपा खो चुका था अपने लिंग को कामया के मुख में डालने की शायद वो चाहत कामेश के अंदर भी थी पर शायद कह नही पाया था पर आज तो जैसे वो कामया को अपने लिंग का स्वाद लेने के लिए दबाब भी बनाने लगता जैसे ही कामया की जीब ने उसके लिंग को छुआ वो अपने शरीर में झटके को नहीं रोक पाया 

कामेश-----------आआआआह्ह कामयाआआआआआअ 

कामया- हाँ… क्या 

कामेश- प्लीज एक बार चूस लो प्लीज बहुत इच्छा थी प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज 
कामया- हाँ… एक बार क्यों 
और चप से उसके लिंग को अपने मुख के अंदर ले गई और प्यार क्या होता है यह अब समझ में आया कामेश को जैसे ही कमाया ने अपने होंठों के बीच में उसके लिंग को दबा के आगे पीछे अपने होंठों को किया वो तो जैसे पागल ही हो गया अपनी कमर को उठाकर कामया के मुख में अपने लिंग को घुसाने की कोशिश करने लगा था और कामया जो कि कामेश की स्थिति से भली भाँति वाकिफ थी अपने हाथों को जोड़ कर और अपने होंठों को जोड़ कर उसने अपने खेल को अंजाम देना शुरू कर दिया जीब का साथ भी लेती जा रही थी कामेश अब पूरी तरह से तैयार हो चुका था और अब वो फिर से कामया को भोगने को तैयार था वो अपने हाथों को बढ़ा कर कामया के शरीर को छूने का मजा ले रहा था कामेश अब धीरे-धीरे उठकर बैठ गया था और कामया उसके सामने घुटनों के बल बैठी हुई प्रणाम करने की मुद्रा में बैठी हुई कामेश के लिंग को चूसती जा रही थी कामेश अपनी पत्नी को अपने हाथों से सहलाते हुए अपनी कमर को भी एक बार-बार झटके दे चुका था कामया को अपने मुँह में कामेश के लिंग का सख्त होना अच्छा लग रहा था वो भूल चुकी थी कि वो अपने पति के साथ है और किसी के साथ नहीं पर वो मजबूर थी जो आग उसके शरीर में लगी थी अगर वो उसे नहीं बुझाएगी तो वो पागल हो जाएगी या फिर से उसके कदम बहक जाएँगे इसलिए वो अपने पूरे जोर से कामेश को अपने लिए तैयार करने में जुटी थी उधर कामेश भी पूरी तरह से तैयार था उसके मुख से अचानक ही एक आवाज कामया के कानों में टकराई 
कामेश- कामया निकल जाएगा 

कामया ने झट से कामेश के लिंग को छोड़ दिया और एकदम से घुटनों के बल खड़ी हो कर कामेश के होंठों को चूमते हुए 
कामया- नहीं अभी मत निकालना प्लीज अंदर करो 
और खुद ही कामेश के दोनों ओर अपनी जाँघो को खोलकर बैठ गई और अपने ही हाथों के सहारे से कामेश के लिंग को अपनी उत्तेजित योनि के अंदर डालने की कोशिश करने लगी कामेश भी कहाँ पीछे रहने वाला था एक ही झटके में कामया के अंदर तक समा गया 





कामया जो कि अब तक बस किसी तरह से अपने को रोके हुए थी पर जैसे ही कामेश उसके अंदर तक पहुँचा वो तो जैसे पागल ही हो गई अपने हाथों से जैसे इस बार उसे नहीं जाने देना चाहती थी वो खुद ही अपने अंदर तक उसके लिंग को समाने की कोशिश में लगी थी वो अपने को उपर नीचे करते हुए कामेश को अपनी दोनों बाहों के घेरे में लिए उसकी गोद में उछल कर अपने को शांत करने की कोशिश करने लगी थी 

कामेश जो कि अब पूरी तरह से तैयार था और कामया के उतावलेपन से थोड़ा सा परेशान जरूर था पर एक बात तो थी कामया के इस तरह से उसका साथ देने से वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित था हर एक धक्के में वो कामया के जेहन तक समा जाता था और फिर अपने को थोड़ा सा सिकोड़ कर फिर से वो कामया के अंदर तक चला जाता था कामया जो कि उसके ऊपर बैठी हुई थी अपनी दोनों जाँघो से कामेश की कमर को कस कर जकड़े हुई थी हर धक्के पर कामया के मुख से 
कामया- ऊऊऊऊओह्ह… कामेश प्लीज थोड़ा जोर से उउउम्म्म्मममम
और कामेश के होंठों को अपने होंठों में दबाकर चूसती और अपनी बाहों के घेरे को और भी उसके गले के चारो और और कसते जाती जाँघो का कसाव भी बढ़ता जाता 
कामया- और जोर से और जोर से 
कामेश भी क्या करता कामया को झट से नीचे गिरा कर उसके ऊपर सवार हो गया और जोर से अपनी बाहों में भरकर जोर-जोर से धक्के लगाने लगा पर कामया तो जैसे भूखी शेरनी थी कामेश के बालों को पकड़कर उसने अपने होंठों से जोड़ रखा था और लगातार उससे रिक्वेस्ट करती जा रही थी 
और जोर से और जोर से 
कामेश का दूसरी बार था पर वो अपने जोर में कोई कमी नहीं ला रहा था उसकी हथेली कामया के बालों का कस कर जकड़कर अपने होंठों से लगाए हुए था और बाहों के घेरे को कसकर कामया के सीने के चारो ओर कस रखा था अपने शरीर के जोर से उसे बेड पर निचोड़ रहा था और कमर के जोर से उसे भेदता जा रहा था और टांगों के ज़ोर से अपनी गिरफ़्त को बेड पर और मजबूती से पकड़े हुए था पर कामया लगातार उसे 
और जोर से कहती हुई उससे किसी बेल-की भाँति लिपटी हुई थी और लगातार हर चोट पर कामेश की चोट का साथ देती जा रही थी कामेश अपने आखिरी पड़ाव की ओर आग्रसर था पर कमाया का कही कोई पता नहीं था वो लगातार अपनी कमर को उछाल कर अपनी उत्तेजना को दिखा रही थी पर कामेश और कहाँ तक साथ देता वो झर झर करता हुआ झड़ने लगा था दो चार धक्कों के बाद ही वो अपने शिखर की ओर चल दिया कामया ने जैसे ही देखा कि कामेश उसका साथ छोड़ने को है वो एकदम से भयानक सी हो गई और कामेश को पलटकर झट से उसके ऊपर सावर हो गई ताकि बचाकुचा जो भी है उससे ही अपना काम बना ले वो नहीं चाहती थी कि वो अपने आपको तड़पता हुआ सा पूरी रात जागे या फिर अपनी आग को बुझाने को नौकरों के पास जाए 

वो जैसे ही कामेश पर सवार हुई कामेश तो ठंडा हो गया पर कामया उसके ऊपर सवार होकर जैसे तैसे अपने को शांत कर सकी नहाई नहीं थी ना तो सुख के सागार में गोता ही लगाया था पर हाँ… नदी के किनारे खड़े होने से थोड़े बहुत पानी से भीग जरूर गई थी जैसे नहाई हुई हो और कामेश के ऊपर गिर कर उसे और जोर से किस किया और अपनी जगह पर पलट गई 

कामेश- क्या हो गया है तुम्हें 

कामया- क्या कुछ नहीं बस ऐसे ही 

कामेश- पर आज तो कमाल कर दिया 

कामया- अच्छा नहीं लगा तो कल से नहीं करूँगी 

कामेश- अरे यार तुम भी ना 
और कामया को कस कर अपनी बाहों में भरकर सो गया 
पर कामया की आखों में नींद नहीं थी वो जागी हुई थी और अपने अतीत और भविष्य के बारे में सोच रही थी 



कामया की आखें जरूर खुली थी पर वो सोई हुई थी उसके पति की हथेलिया अब भी उसकी चुचियो पर थी और वो उन्हें धीरे-धीरे मसल रहा था कामेश शायद नींद के आगोश में समा गया था क्योंकी उसके मसलने की प्रक्रिया धीरे-धीरे मध्यम पड़ती जा रही थी पर कामया जागी हुई थी और सोच रही थी आखिर क्यों कामेश उसका साथ नहीं दे पाया आखिर क्यों 
क्या वो ही इतनी कामुक हो गई है कि अब कामेश उसके लिए पर्याप्त नहीं है या फिर कामेश पहले से ही ऐसा है पर पहले तो वो कई बार कामेश से अपने को छुड़ाने के लिए संघर्ष कर चुकी है पहले तो कामेश उसे निचोड़ कर रख देता था तो अब क्या हुआ ठीक है कोई बात नहीं कल देखेंगे सोचते हुए कामया सो गई सुबह भी वो कामेश से पहले ही उठ गई थी कामेश अब भी सा रहा था 

बाथरूम से फ्रेश होकर जब वो बाहर आई तो उसने ही कामेश को उठाया कामेश हड़बड़ा कर उठता हुआ अपने काम में लग गया फिर दोनों नीचे जाकर पापाजी के साथ चाय पिए और फिर अपने कमरे में आकर जाने की तैयारी में जुट गये कामेश कामया से कुछ कम बाते कर रहा था 
कामया- क्या हुआ 

कामेश- क्यों 

कामया- रोज तो बहुत बातें करते हो आज क्या हुआ 

कामेश- अरे नहीं यार बस कुछ सोच रहा था 

कामया- क्या 

कामेश- अरे यार वो धरम पाल जी है ना उनके बारे में 

कामया- यह धरम पाल कौन है 

कामेश- अरे वो हीरा वाले काम में में पार्टनर बनाया है 

कामया- तो 

कामेश- वो चाहते है कि उनके लड़के को भी शामिल किया जाए 

कामया- तो क्या कर लो 

कामेश- हाँ कर तो लो वो नहीं तो उनका लड़का ही सही पर साला झल्ला है 

कामया- झल्ला .....................


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामेश- हाँ कर तो लो वो नहीं तो उनका लड़का ही सही पर साला झल्ला है 

कामया- झल्ला .....................






कामेश- हाँ यार ढीला है 

कामया- हाँ… हाँ… हाँ… हूँ हीही 

कामेश- हाँ… देखोगी तो हँसोगी 

कामया- क्यों 

कामेश- अरे कुछ भी कहो समझ ही नहीं आता से डील की बातें करो तो बगले झाँकने लगता है अरे कुछ तो सिखाया पढ़ाया हो तब ना 

कामया- अरे तुम तो जबरदस्ती परेशान हो रहे हो ऐसा है तो अच्छा ही है उसे कुछ समझ नहीं आएगा और तुम अपना काम करते जाना और क्या 

कामेश कामया की ओर आश्चर्य से देखने लगा उसके होंठों में एक हँसी थी एक आँख दबाकर वो कामया के नजदीक आया और झट से अपने होंठों से कामया के होंठों को कस कर चूम लिया 

कामेश- अरे वाह मेडम सच ही तो कहा तुमने साले को ले लेता हूँ हाँ यार 

कामया- 

कामेश- लेकिन परेशानी एक है 

कामया- क्या 

कामेश- वो दिन भर तुम्हारे पीछे पड़ा रहेगा 

कामया- मेरे पीछे क्यों 

कामेश अरे वो जो कॉंप्लेक्स बन रहा है ना उसमें भी उन्होंने फाइनेंस किया है और एक्सपोर्ट में भी उनका पार्ट्नर शिप है इकलौता बेटा है थोड़ा मेंटल प्राब्लम है दो या तीन लड़कियों के बाद है ना साला वो भी लड़कियों जैसा ही हो गया है 

कामया- तो क्या हुआ में संभाल लूँगी कौन सा मुझे उसे हाथों से खिलाना है दौड़ा दूँगी दिन रात और वो कितने साल का है 

कामेश- है तो 23 24 साल का पर बहुत ही दुबला पतला है और लड़कियों जैसा है बड़ा लचक कर चलता है हिहीही 

कामया- धात तुम तो ना चलो जल्दी से तैयार हो जयो पापाजी वेट करते होंगे 
और दोनों झट पट तैयार होने लगे थे दोनों को पापाजी के साथ ही निकल ना था जब वो नीचे पहुँचे तो पापाजी नहीं आए थे डाइनिंग टेबल पर खाना लगा था कामया और कामेश के बैठने के बाद पापाजी भी आ गये और सभी खाना खाके बाहर की ओर निकल गये 

इसी तरह से दो तीन दिन निकल गये कोई बदलाब नहीं आया कामया के जीवन में रोज सुबह वो पापाजी के साथ ही निकल जाती और शाम को अपने पति के साथ ही वापस आती और रात को भी वो अपने पति के साथ ही रहती 
हर रात वो अपने शरीर की संतुष्टि के लिए अपने पति को उकसाती और अपनी ओर से कोई भी कमी नहीं रखती पर कामेश हर बार दो बार में सिर्फ़ एक बार ही कामया को साथ दे पाता था हर बार पहले झड़ जाता और दूसरी बार में थोड़ा बहुत कामया को संतुष्ट कर देता 

पर कामया को यह प्यार कुछ जम नहीं रहा था पर वो एक पति व्रता नारी की तरह अपने पति का साथ देती रही वो एक सेक्स मशीन बन चुकी थी कामेश भी उसे उकसाता था वो उसे अपने साथ होते हुए हर खेल को बहुत ही अच्छे तरीके से अपना लेता था वो कामया को खुश देखना चाहता था और उसे किसी भी तरह से मना नहीं करता था 

कामया जब उसका लिंग वा फिर उसके शरीर को किस करती तो वो उसे खूब प्यार से सहलाता और उसे और भी करने को उकसाता था कामया को मालूम था कि कामेश को यह सब अब अच्छा लगने लगा था सो वो अपने तरीके से कामेश के साथ खेलती और अपने को पतिव्रता स्त्री के रूप में रखती जा रही थी 

अब तो कामया बिज़नेस में भी थोड़ा बहुत इन्वॉल्व होने लगी थी लोग बाग अब उसे थोड़ा सीरियस्ली लेने लगे थे और बहुत कुछ बताने भी लगे थे कॉंप्लेक्स के काम के बारे में भी उसे रिपोर्टिंग करने लगे थे उसे पता था कि स्टोर में क्या शार्ट है क्या मंगाना पड़ेगा कौन सा स्टाफ क्या करता है और किसकी क्या रेपोंसिबिलिटी है कौन सा काम धीरे चल रहा है और कौन सा काम आगे 

कौन कहाँ जाता है और कौन छुट्टी पे है और भी बहुत कुछ अब कामेश कामया को बहुत से बिज़नेस पार्ट्नर्स से भी मिला चुका था और बहुत सी बातें भी समझा चुका था कामया अब एक निपुण बिज़नेस विमन की तरह रेएक्ट करने लगी थी उसकी चाल में एक कान्फिडेन्स आ गया था जो पहले नहीं था अब वो बहुत ही कॉनफीदेंतली बातें करती कोई इफ’स आंड बॅटस नहीं होते थे पापाजी सुबह हमेशा उसके आस-पास होते कभी कामेश भी जाता उसके साथ और दुपहार को जब वो शोरुम पहुँचती तब भी वो शोरुम मे बहुत से बदलाब ले आई थी ड्रेस कोड जारी कर दिया था और शोरुम में गानो की धुन हमेशा बजती रहती थी कोल्ड ड्रिंग्स कस्टमर्स के लिए सर्व होने लगी थी एक कोने को बच्चो के लिए डेवेलप किया था जहां कष्टमर के बच्चे खेल सके बड़े-बड़े सेट भी लगा दिया था शोरुम में और भी बहुत कुछ कर दिया था कामया ने जो कि उसके पति और पापाजी को बहुत ही पसंद आया 


कामया का जीवन अब बहुत ही संतुलित सा हो गया था बीच में मम्मीजी का फोन भी आया तो उन्होंने भी कामया को बहुत बधाई दी और अपने काम को ठीक से करने की नसियात भी दी कामेश और पापाजी को कामया का इस तरह से बिज़नेस में इन्वॉल्व होना बहुत ही अच्छा लगा था और वो दोनों ही कामया को और भी सजेशन्स देने को उकसाते रहते थे उनका शोरुम उस इलाके का एक ऐसा शोरुम हो गया था जिसे देखकर बड़े दुकान दार अपने हिसाब से अपनी दुकान को रेनवेट करने लगे थे पर कामया के सामने वो कुछ नहीं कर पाते थे उसका दिमाग हमेशा कुछ ना कुछ अलग करता रहता था 
इसी तरह कमाया का जीवन आगे चलता जा रहा था 

पर यह कहानी तो कुछ और ही कहने को बनी है तो अब वो बातें करते है ठीक ओके… 

तो हमेशा की तरह आज भी कामया कामेश और पापाजी के साथ ही तैयार थी शोरुम जाने को खाने के बाद कामेश तो चला गया पर कामया और पापाजी जब बाहर निकले तो आज वो कामेश के साथ ही कॉंप्लेक्स का काम देखने चली गई और पापाजी और कामेश का दिन आज कल थोड़ा बहुत व्यस्त सा हो गया था वो शोरुम पर कम टाइम दे पा रहा था उसका ज्यादा ध्यान कॉंप्लेक्स की ओर था और वहां की दुकानों को बेचने का काम भी पापाजी और कामया ने संभाल लिया था 
कामेश- कामया अब सोच रहा था कि शोरुम में आना बंद कर दूं 

कामया- क्यों 

कामेश- अरे यहां का काम थोड़ा सा सफर हो रहा है और कुछ परचेजर्स भी जब देखो तब बुला लेते है इसलिए 

कामया- आप देखो जो ठीक लगे 

कामेश- तुम क्या कहती हो 

कामया- ठीक है पर वहां के डील्स जो होते है वो पापाजी कर लेंगे 

कामेश- अरे तुम तो हो तुम डील करना शुरू करो 

कामया- अरे मुझसे नहीं बनेगा रोज तो प्राइस ऊपर-नीचे होते रहते है 

कामेश- अरे तो क्या जब बढ़ते है तो रुक जाओ और जब घट-ते है तो खरीद लो और क्या है इसमें 

कामया- पता नहीं 

कामेश- अरे तुम चिंता मत करो पापाजी तो है सीख जाओगी 
और कामेश की गाड़ी तब तक कॉंप्लेक्स के अंदर पार्क हो गई थी 

आस-पास के लोग सावधान हो गये थे और कामेश और कामया की ओर देखते हुए नमस्कार करते जा रहे थे कामेश कामया के साथ आफिस की ओर बढ़ा था पर कामया थोड़ा सा रुक कर सामने से खड़े होकर एक बार ऊपर की ओर देखते हुए अपने नाम से बन रहे कॉम्प्लेक्स की ओर देखा 

कामेश- आओ 

कामया- आप चलिए में थोड़ा देखकर आती हूँ 

और कामेश अंदर आफिस की ओर चला गया कामया इधर उधर टहलती हुई सी लोगों को अपने काम में लगे हुए देखती जा रही थी और एक-एक करके सीढ़िया चढ़ती हुई हर फ्लोर में काम का जाएजा लेती जा रही थी जहां भी जाती लोग एक बार उसे जी भर के देखते और झुक कर सलाम भी करते अब तो कामया को यह आदत सी पड़ गई थी सो कोई ज्यादा तवज्जो नहीं देती थी वो इधर उधर देखती हुई हर फ्लोर के कोने तक देखती और फिर एक फ्लोर ऊपर चढ़ जाती 

लगभग हर फ्लोर में काम अपनी तेज गति से चल रहा था और हर कोई काम में ज्यादा ही व्यस्त दिखाई दे रहा था कामया का ध्यान बारीकी से हर काम को अंजाम देते हुए देखते हुए जा रही थी फिफ्थ फ्लोर तक ही बना हुआ था और उसके ऊपर छत थी इसलिए वहां सिर्फ़ लिफ्ट का टवर था और डक्ट बने हुए थे स्टेर केस का रास्ता भी था और खोल छत थी कामया चलती हुई फिफ्थ फ्लोर पर खड़ी होकर सामने का नजारा देखती रही बहुत ही मन भावन था हर तरफ काम से लगे हुए लोग काम से खाली होकर बाहर की ओर जा रहे थे तो कुछ लोग समान भर कर अंदर की ओर आ रहे थे 

कामया ने फिफ्थ फ्लोर को धीरे-धीरे घूमकर पूरा देखा वहां लोग भी कम थे और धूल भी थोड़ा कम उड़ रही थी सो कामया को कोई दिक्कत नहीं हो रही थी जब वो सीढ़िया उतर कर नीचे की ओर जाने को हुई तो ना जाने क्यों वो ऊपर छत की ओर देखती हुई रुकी और वहां का क्या हाल है जान-ने के लिए ऊपर की ओर चल दी छत में कोई नहीं था एकदम खाली था बहुत तेज हवा चल रही थी यहां वहां थोड़ा बहुत समान फैला हुआ था पर कोई काम करता हुआ नहीं दिखा वो थोड़ी देर रुक कर वहां का हाल जानकर सामने साइन को देखती हुई वापसा नीचे की ओर जाने को पलटी ही थी कि 
उसे कोई चीज गिरने की आवाज आई उसका सिर उस तरफ घूम गया वहां कोई नहीं था पर गिरा क्या वो अपने को रोक ना पाई और उस गिरने वाली चीज को देखने को वो आगे बढ़ी पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया डक्ट और बड़े-बड़े पाइप के बीच में उसे कुछ भी ना दिखा पर फिर से किसी आहट ने उसे चोका दिया वो किसी चीज के हिलने की आवाज़ थी या फिर कुछ गड़बड़ थी जो भी हो कामया जल्दी से एक डक्ट के पीछे से जहां से वो आवाज आ रही थी वहां पहुँचने लगी थी जैसे-जैसे वो डक्ट के पीछे की ओर देखने को आगे बढ़ती जा रही थी उसे आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी उसे इतना तो पता चाल गया था कि जरूर कोई गड़बड़ है पर क्या पता नहीं 

आवाज से अंदाजा लगाया जा सकता था कि दो जने है पर क्या उठा रहे है या कुछ खिसका रहे है पता नहीं हाँ… हाँफने की आवाज जरूर आ रही थी कामया दबे पाँव जैसे ही वहां डक्ट के पीछे पहुँची तो चिहुक कर एकदम से पीछे की ओर हट गई जो उसने देखा उस चीज की कल्पना भी उसने अपने जीवन में कभी नहीं की थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वहाँ एक इंसान ने एक औरत को अपने से सटा कर रखा था और अपनी कमर को आगे पीछे करता हुआ उसके साथ संभोग कर रहा था और वो दो नो अपने इस खेल में इतना लिप्त थे कि उन्हे कामया के आने तक की भनक नहीं लगी उस औरत की साड़ी उसके कमर के ऊपर थी और टाँगें कमर तक नंगी थी साँवले रंग की वो औरत उस आदमी की तरह पीठ किए हुए थी और वो आदमी उसको कमर से पकड़कर अपने लिंग को उसके योनि में पीछे से घुसाए हुआ था और अपने दोनों हाथों से उसे कस कर पकड़े हुए था और लगातार झटके दे रहा था कामया के चिहुकने से उनकी नजर एक दम से इधर घूमी और औरत के मुख से एक चीख निकल गई और वो एक ही झटके से अपने को उस आदमी के चुंगल से छुड़ा कर वहां से भाग गई 


पर वो आदमी वही खड़ा रहा और एकटक कामया की ओर ही देखता रहा कामया उस इंसान को एकटक देख रही थी कमर के नीचे से नंगा था वो बहुत ही तगड़ा और मास पेशिया कसी हुई थी लंबा और काला सा था बहुत ही बलिष्ठ था वो और किसी सांड़ की तरह अपने लिंग को हवा में लहरा कर खड़ा था उसका लिंग किसी मूसल की तरह सामने की ओर मुँह उठाए झटके ले रहा था बहुत ही लंबा और मोटा सा था वो कामया की सांसें रुक गई थी और वो उस इंसान को एकटक पैर से लेकर माथे तक आश्चर्य से देखती ही रह गई उस इंसान के चेहरे पर भाव बदल रहे थे पर डर के भाव नहीं थे उसके हाथ से उस लड़की के निकल जाने के बाद के भाव थे जो कि उसे अधूरे में ही छोड़ कर भाग गई थीकामया उसे देखती ही रह गई जब उसके चहरे के भाव एकदम से किसी जानवर से बदल कर किसी निरीह प्राणी में तब्दील हुई तो उसके चहरे पर एक दया की माँग थी उसके चहरे पर एक हवस की जगह अब दयनीय स्थिति में पहुँचने के भाव थे वो धीरे से अपने लिंग को अपने ही हाथों से धीरे से पकड़कर कामया की आँखो में आँखे डाले अपने लिंग को कस कर पकड़कर एक दो लंबे लंबे झटके दे रहा था जैसे कि वो खड़े-खड़े ही कामया के साथ संभोग कर रहा था कामया के शरीर में एक अजीब सी झंझनाहट दौड़ गई थी और वो सांसें रोके उस इंसान की हरकतों को देखती ही रह गई वो ना तो हिल पा रही थी और नहीं इधार उधर देख ही पा रही थी वो इंसान धीरे-धीरे उसकी ओर ही बढ़ रहा था और अपने लिंग को अपनी मुट्ठी में बाँधे हुए उसकी ओर ही देखता हुआ लंबे लंबे झटके दे रहा था 

वो और कोई नहीं भोला था जो कि उसकी ओर धीरे-धीरे बढ़ रहा था पर कामया को जैसे साँप सूंघ गया था वो अपनी सांसें रोके हुए भोला को अपनी ओर बढ़ते देखती ही रही और भोला उसके सामने आके थोड़ी दूर पर ही रुक गया और उसकी आँखों में आखों डाले अपने लिंग को सहलाते हुए झटके दे रहा था कामया की नजर भी आनयास ही उसके उस लंबे और मोटे से लिंग पर टिक गई थी और उस सांड़ को अपनी ओर बढ़ते हुए देखते हुए अपनी सांसों को गति देने की कोशिश कर रही थी पर सांस जैसे मुख और नाक में अटक गई हो वो खड़ी हुई उसे देखती रही और भोला उसकी ओर देखते हुए अपने लिंग को झटके देता रहा और एक क्षण ऐसा आया कि उसके लिंग से एक लंबी सी पिचकारी सी निकलकर कामया के पैरों के पास जमीन पर गिर गई उसके वीर्य के कुछ छींटे उसके पैरों पर भी गिरे जो कि उसके सेंडल को थोड़ा बहुत गीलाकर गये 


कामया के मुख से अचानक ही एक लंबी से सांस निकली और भोला के चहरे की ओर देखने लगी आआआआआआअह्ह, उसे भोला के चहरे पर एक सुकून सा दिखाई दिया जो कि उसे देख रहा था और अब भी उसके चहरे पर एक दयनीय सा भाव था शायद कह रह हो बहुत देख चुकी मुझे अब तो कुछ कर और भोला ने अपना हाथ कामया की ओर बढ़ाया ताकि वो कामया को छू सके पर कामया को जैसे ही उसके सामने एक लंबा और काला सा हाथ दिखा उसने अपने शरीर के पूरे जोर से भोला को एक धक्का दिया ताकि भोला उसे छू ना सके पर धक्का इतना तेज था कि भोला के पैर लड़खड़ा गये और वो डक्ट के पीछे रखे छोटे बड़े पाइप पर फिसल गया और सीधे पीछे की ओर गिर पड़ा और गिरता ही चला गया 


कामया को जैसे ही होश आया तो उसने पलटकर लंबे लंबे पग भरती हुई जल्दी-जल्दी नीचे की ओर दौड़ लगा दी फिफ्थ और फोर्त फ्लोर तो बिना कुछ सोचे ही उतरगई पर थर्ड फ्लोर पर आते आते वहां मची हुई खलबली को देखकर वो थोड़ा सा सहज हुई और बिना किसी की ओर देखे और बिना किसी के जाने ही वो जल्दी से नीचे की ओर उतरगई थी जब वो आफिस में घुसी तो, अपने पति को फोन पर उलझे पाया और सेंटर टेबल पर अपनी काफी का कप ढँका हुआ पाया कामया पसीना पसीना हो चुकी थी कामेश की नजर एक बार उसपर पड़ी और फिर वो फोन पर उलझ गया 

कामया को भी शांति मिली ना तो किसी को कुछ पता चला और ना ही किसी ने उसे कोई हरकत करते हुए ही देखा वो आराम से बैठकर काफी पीने लगी थी 

इतने में एक आदमी केबिन में दाखिल हुआ और कामया और कामेश की ओर देखते हुए 
- सर मेम वो भोला छत से नीचे गिर गया है बहुत चोट लगी है उसे हास्पिटल ले जा रहे है 

कामेश- क्या छत से कैसे 

- सर पता नहीं शायद पाइप पर से पैर फिसल गया होगा बच गया नीचे थर्ड फ्लोर में रेत के ऊपर गिरा 

कामेश- हाँ हाँ… ले जाओ में भी आता हूँ मेम को छोड़ कर 
कामेश जल्दी से कामया की ओर देखते हुए 
कामेश- चलो तुम्हें शोरुम छोड़ दूं पता नहीं कैसे गिर गया में जरा हास्पिटल से हो आता हूँ 

कामया- जी 
वो चुप थी पर अंदर एक उथल पुथल मची हुई थी अगर भोला को कुछ हो गया तो कही ज्यादा चोट तो नहीं आई कामया को लिए कामेश शो रूम पहुँचा और पापाजी को भी भोला के गिरने की खबर बताया पापाजी भी चिंतित दिखे कामेश थोड़ी देर बाद ही शोरुम छोड़ कर हास्पिटल की ओर लपका 

पापाजी के साथ कामया शोरुम पर ही रुकी मगर उसका मन कही और ही घूम रहा था कही भोला ने अगर कामेश को बता दिया तो फिर क्या होगा कामेश तो उससे मार ही डालेगा वो क्या करे कहाँ जाए आखिर क्यों गई वो छत पर और क्या जरूरत थी उसे उसे आहट के पीछे जाने की आखिर क्या जरूरत थी और गई भी थी तो चुपचाप चली आती वहां खड़े होकर देखने की क्या जरूरत थी 

अचानक ही उसके हाथ पाँव में एक अजीब सी सनसनी होने लगी थी वो अपने चेयर में बैठी बैठी शून्य को घूर रही थी और उस समय उसकी नज़रें कुछ अपने सामने होते हुए सा देख रही थी पापाजी अपने काम में लगे थे और उसकी ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं था और कामया के शरीर पर होने वाली हरकत से भी अंजान थी और कामया के शरीर में एक अजीब सी सिहरनने जनम ले लिया था उसे रह रहकर वो सीन याद आरहा था क्या सीन था वो लड़की जो कि उसके सामने झुकी हुई थी कमर के नीचे से बिल्कुल नंगी थी और वो सांड़ भोला उसको पीछे से घुसाकर मजे ले रहा था उसे कोई डर नहीं था कि कोई आ जाएगा या फिर कोई देख लेगा सच में गुंडा है कामेश सच ही कह रहा था और तो और जब उसने भोला को देख लिया था तो तो डरता पर वो तो उसे ही खा जाने वाली नजर से देखता रहा था 


वो बैठे बैठे एक बार फिर से सिहर उठी एक बार पापाजी की ओर देखा और फिर से ध्यान मग्न हो गई बहुत ही बदमाश है भोला डर नाम की कोई चीज उसमें है ही नहीं मालकिन है वो वो लड़की तो भाग गई थी डर के मारे पर भोला वो तो बल्कि उसकी ओर ही बढ़ रहा था और तो और उसने अपने को धमकाने की भी कोशिश नहीं की थी कितना बड़ा और मोटा सा था काले साँप की तरह एकदम सीधा खड़ा हुआ था किसी सहारे की भी ज़रूरत नहीं थी देख कैसे रहा था उसकी ओर जैसे वो उसकी कोई खेलने की चीज है 


कामया का पूरा शरीर सनसना रहा था गुस्से में और कही कही कामुकता में उसे पता नहीं था पर जैसे ही उसका ध्यान उसके लिंग के बारे में पहुँचा वो अपने मुख से एक लंबी सांस छोड़ने से नहीं रुक पाई थी पापाजी की नजर एक बार उसकी ओर घूमी फिर से वो अपने काम में लग गए कामया भी फिर से अपनी सोच में डूब गई थी कितना बड़ा था उसका अपने हाथों से पकड़ने के बाद भी आधा उसके हाथों से बाहर की ओर निकला हुआ था काला लेकिन सामने की ओर लाल लाल था कामया की जांघे आपस में जुड़ गई थी उसके जाँघो के बीच में कुछ होने लगा था वो सोचने में ही मस्त थी 
कैसे बढ़ते हुए वो अपने लिंग को झटके दे रहा था जैसे कि उसके साथ संभोग कर रहा था और कितना सारा वीर्य उसके लिंग से निकला था उसके ऊपर भी तो आया था अचानक ही उसने अपने पैरों के बीच में अपनी पैरों की उंगलियां चलाकर देखा हाँ चिप चिपा सा अब भी था कामया अब जैसे सोचते हुए फिर से वही पहुँच गई थी कितने अजीब तरीके से उसे देख रहा था जैसे कुछ माँग रहा था या फिर तकलीफ में था पर वो उसकी तरफ क्यों आ रहा था वो उसे क्यों पकड़ना चाहता था अच्छा ही हुआ कि उसने उसे धक्का मार दिया नहीं तो पता नहीं क्या होता कोई भी नहीं था वहां छत पर और उस सांड़ से लड़ने की हिम्मत उसमें तो नहीं थी 



अच्छा हुआ कि गिर गया नहीं तो वो मर जाती उस औरत ने भी तो उसे देख लिया था पर वो थी कौन और कहाँ चली गई थी अरे हाँ… उसने इस बात पर तो ध्यान दिया ही नहीं अगर उस औरत ने ही बता दिया तो कि कामया मेडम छत पर थी मर गये अब कही कामेश को मालूम चल गया तो बाप रे अब क्या होगा अब कामया के चहरे पर परेशानी के भाव साफ-साफ देखने लगे थे और कही भोला मर गया तो तब तो पोलीस केस भी होगा और वो लाखा काका ने जो कहा था कि उसके पास एक वीडियो भी है तब वो क्या करेगी और कही भोला ने ही पोलीस को सब बता दिया तो तो तो उसकी इज़्ज़त तो गई और इस घर से भी गई 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

वो बहुत चिंतित हो उठी नहीं नहीं भोला को कुछ नहीं होगा और ना ही वो किसी को कुछ बताएगा वो जानती थी क्योंकी अगर उसे बताना होता तो क्या वो कामेश या पापाजी को अभी तक नहीं बता दिया होता बिकुल ठीक पर वो चाहता क्या है नहीं उसके सामने पड़ता है और नहीं कभी कोई इशारा ही किया उसने वो तो कई बार कॉंप्लेक्स के काम से गई थी पर हमेशा वो कही ना कही काम से ही फँसा रहता था और जब भी उसके सामने आया तो नजर बिल्कुल जमीन पर गढ़ाए हुए ही रहता था उसके दिल में जरूर कुछ है पता नहीं क्या पर अभी तो कामेश गया है पता नहीं क्या खबर लाता है वो चाहती थी कि एक बार फोन करके पता करे पर हिम्मत नहीं हुई पर उसे देखकर स्पष्ट कहा जा सकता था कि वो परेशान है आखिर पापाजी से नहीं रहा गया 
पापाजी-क्या बात है बहू कुछ परेशान हो 

कामया- जी जी नहीं बस 

पापाजी- अरे कन्स्ट्रक्षन साइट में यह सब होता ही रहता है और कामेश तो गया है तुम चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा 

कामया- जी 
पर कामया को कहाँ चैन था उसे तो इस बात की चिंता थी कि भोला कुछ उगल ना दे कही उसके बारे में किसी को बता ना दे और तो और वो औरत कौन थी जिसे उसने भोला के साथ देखा था वो भी तो बता सकती है मन में हलचल लिए कामया कामेश के इंतेजार में दोपहर से शाम और फिर रात तक बैठी रही पर कामेश का कही पता नहीं था वो पापाजी के साथ ही घर भी आ गई घर पहुँचकर ही उसने पापाजी को ही कहा कि फोन करे 
पापाजी ने ही उसके सामने फोन किया 

कामेश- जी 

पापाजी- क्या हुआ बड़ी देर लग गई तुझे 

कामेश- जी कुछ नहीं सब ठीक है निकल गया हूँ आता हूँ 

पापाजी ने फोन काट कर कामया को बताया कि कोई चिंता की बात नहीं है कामेश भी घर पहुँचता ही होगा 

कामया अपने कमरे में जाने से डर रही थी क्यों पता नहीं वो वही पापाजी के सामने खड़ी रही 

पापाजी- अरे क्या हुआ 

कामया- जी कुछ नहीं 

पापाजी- अरे जाओ प्रेश हो जाओ कामेश भी आता होगा चल कर खाना खाते है 

कामया ना चाहते हुए भी जल्दी से अपने कमरे की ओर लपकी और फ्रेश हो ही रही थी कि कामेश की गाड़ी की आवाज आई वो थोड़ा सा डरी पर खुद पर काबू रखकर कामेश का इंतेजार करती रही 

कामेश के कमरे में घुसते ही वो कामेश के सामने एक प्रश्न सूचक चेहरा लिए खड़ी मिली 
कामेश- बच गया अगर नीचे रेत नहीं होती ना मर ही जाता 

कामया- हाँ… क्या हुआ है 

कामेश कुछ नहीं थोड़ा बहुत ही चोट है असल में गिरा ऊपर से ना इसलिए थोड़ा बहुत अन्द्रूनि चोट है ठीक हो जाएगा दो एक दिन लगेंगे 

कामया- अभी कहाँ है हास्पिटल में या 

कामेश- अरे हास्पिटल में ही है पोलीस भी आई थी आक्सिडेंटल केस है ना इसलिए 

कामया- पोलीस क्यों 

कामेश-, अरे तो नहीं आएगी क्या आक्सिडेंटल केस में आती ही है गवाही के लिए 

कामया- क्या गवाही 

कामेश- अरे यार गिरा कैसे कौन था वहाँ और बहुत कुछ पूछा उससे 

कामया की तो जैसे जान ही निकल गई थी गला सुख गया था थूक निगलते हुए पूछा 
कामया- तो क्या बताया 

कामेश तब तक अपने कपड़े चेंज करते हुए बाथरूम में घुस गया था बड़ा ही कषुयल था पर कामया की जान तो जैसे जाने ही वाली थी अगर उसने पोलीस को बता दिया कि उसने उसे धक्का दिया था तो 
कामया को चैन नहीं था बाथरूम के बाहर ही खड़े होकर फिर से चिल्लाकर पूछा 
कामया- क्यों बताया नहीं क्या बताया 

कामेश की अंदर से आवाज आई 
कामेश- अरे यार मुझे नहीं पता अरे बाहर तो आने दो 

कामया की सांसें अब भी अटकी हुई थी बाथरूम का दरवाजा खुलने की राह देखते हुए वो वही बेड पर बैठी रही क्या यार कहाँ फस गई जब देखो तब वो कही ना कही फस जाती है कुछ दिनों पहले वो लाखा और भीमा के साथ फस गई थी और अब भोला 

किसी तरह से अपने को उन लोगों से अलग करके अपने को बचाया था पर अब भोला तो क्या वो कभी भी ईमानदारी से जी नहीं सकती हमेशा ही उसे कॉंप्रमाइज करते रहना पड़ेगा अगर वो भोला को धक्का नहीं देती तो क्या वो गिरता और अगर वो उसे धक्का नहीं देती तो वो तो उसे पकड़ लेता और फिर उूउउफफ्फ़ क्या स्थिति में फस गई थी कामया गुस्से के साथ-साथ उसे रोना भी आ रहा था पर करे क्या क्या लाखा या फिर भीमा उसकी मदद कर सकते है इस बारे में अगर वो थोड़ा सा रिक्वेस्ट करके उनसे कहे कि भोला को धमकी दे-दे की चुप रहे किसी को कुछ ना कहे तो कैसा रहे 


लाखा ने तो कहा ही था भोला उनसे डरता है हाँ यह ठीक रहेगा पर कहेगी कब वो तो अब पापाजी के साथ ही आती जाती है या फिर कामेश के साथ और तो और वो तो आज कल ना तो भोला की ओर ही देखती है और नहीं भीमा की ओर 
पर इस स्थिति से निकलने के लिए तो इन दोनों से अच्छा कोई नहीं है पर अचानक ही उसके दिमाग में एक ख्याल आया पर इन लोगों को कहेगी क्या कि क्या नहीं बोलना है या क्यों धमकी देना है भोला को वो कुछ सोच नहीं पा रही थी तभी कामेश भी बाथरूम से निकल आया और दोनों नीचे डिनर के लिए चले गये पापाजी के साथ डाइनिंग टेबल पर जब बैठे तो

पापाजी- कैसा है 

कामेश- हाँ ठीक है चोट ज्यादा नहीं है ठीक हो जाएगा 

पापाजी- कहाँ है सरकारी हास्पिटल में 

कामेश- हाँ… पोलीस केस हुआ है ना इसलिए कल या फिर परसो प्राइवेट में ले आएँगे 

पापाजी- ठीक है पर देखना कुछ ज्यादा गड़बड़ ना हो जाए 

कामेश- नहीं नहीं वैसा कुछ नहीं है एक्सीडेंटल केस है ना इसलिए पोलीस आई थी नहीं तो प्राइवेट हास्पिटल में ही अड्मिट करता 

पापाजी- अच्छा ठीक है वो धरम पाल जी का फोन आया था कह रहे थे बॉम्बे जाना है कुछ एक्सपोर्टेर आ रहे है बात कर लेना 

कामेश- जी कब आ रहे है 

पापाजी- पता नहीं तू ही बात कर लेना 

कामेश- हाँ… यह प्राब्लम तो ठीक हो पहले 

पापाजी- पर वो गिरा कैसे 

कामया जो कि अब तक दोनों की बातें सुन रही थी और खाने में व्यस्त थी अचानक ही रुक गई और कामेश की ओर देखती हुई चुप हो गई 

कामेश- पता नहीं कह रहा था कि पैर फिसल गया था और कुछ नहीं बताया पोलीस भी ब्यान लिख कर ले गई 

पापाजी- वो तो इतना बुद्धू नहीं है इतने दिनों से काम कर रहा है उसका पैर फिसल गया पता नहीं नशे में था क्या 

कामेश- अरे नहीं वो काम के समय नहीं पीता मुझे पता है 

पापाजी- हाँ तुझे तो सब पता रहता है बड़ा ही विस्वास पात्र है तेरा 

कामेश- अरे पापा एक बात तो है बड़ा ही स्मार्ट है पढ़ा लिखा नहीं है पर एक बार जो समझा दिया वो कभी नहीं भूलता मुझे तो विस्वास है अब उसे वहां से हटा लूँगा 

पापाजी- क्यों वहां क्या हुआ 

कामेश - नहीं ऐसा कुछ नहीं पर वो शोरुम में ठीक है और जब कॉंप्लेक्स बन जाएगा तब उसे सेक्योंरिटी का इचार्ज बना दूँगा 

पापाजी- जैसा तेरा मन ठीक है पर ध्यान रखना 

कामेश- जी 
और सभी खाने के बाद उठकर अपने-अपने कमरे में चले गये पर कामया के दिमाग में एक बात घर कर गई थी आखिर क्यों भोला ने यह बात कही कि वो पैर फिसलने से गिरा था आखिर उसने उसका नाम क्यों नहीं लिया 
क्यों उसने इस तरह से उसे बचाया पहले भी उसने लाखा को जब बताया था कि उसने कामया को उसके साथ देख लिया है तब भी उसने किसी से इस बात की चर्चा नहीं की आख़िर क्या बात है भोला क्यों उसके साथ इस तरह का वर्ताब कर रहा है आखिर वो चाहता क्या है उसके मन में ढेर सारे सवाल उठ रहे थे कमरे में वो यही सोचते हुए बिस्तर पर अपनी जगह लेट गई थी कामेश भी उसके पास लेटा था पर कामया वहां होते हुए भी कहीं और थी 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उसके मन में ढेर सारे सवालों के बीच में वो घिरी हुई अपने आपसे उत्तर ढूँडने की कोशिश करती रही पर उसे कोई जबाब नहीं मिला तभी कामेश के नजदीक आने से से और उसे कस कर पकड़ लेने से उसकी सोचने में ब्रेक लग गया 

कामेश कामया को पीछे से पकड़कर अपने हथेलियों से उसके चूचियां धीरे धीरे गाउनके ऊपर से ही दबाने लगा था और उसके गले पर अपनी जीब फेरने लगा था 
कामया- उूुउउफफ्फ़ हमम्म्म आज नहीं प्लीज 

कामेश- क्यों 

कामया- मन नहीं कर रहा 

कामेश- बाप रे तुम्हारा मन नहीं कर रहा 
बड़े ही आश्चर्य से कामेश ने कामया के चेहरे को अपनी ओर घुमाकर पूछा कामया को अचानक ही पता नहीं क्यों एक चिड सी लगी 
कामया- क्यों मेरा मन नहीं है तो इसमें बाप रे का क्या 

कामेश- हाँ… हाँ… ही ही अरे यार भूत के मुख से राम नाम पहली बार सुन रहा हूँ 

कामया- छोड़िए मुझे में भूत ही हूँ 

पर कामेश जानता था कि कामया को क्या चाहिए उसने फिर से कामया को पीछे से जकड़कर अपनी बाहों में भर लिया और उसके गर्दन और गले पर किस कने लगा था और अपनी हथेलियो को उसकी चुचियों पर बारी बारी से घुमाने लगा था अपने लिंग को भी कामया के नितंबों पर रगड़कर अपनी उत्तेजना को प्रदर्शित कर रहा था 

कामया जो कि अपनी सोच से निकलना नहीं चाहती थी पर कामेश की हरकतों से वो भी थोड़ा थोड़ा उत्तेजित होने लगी थी 

कामेश- इधर घुमो हाँ… और अपने होंठ दो, 

कामया भी बिना ना नुकार के कामेश की ओर पलट गई और अपने होंठों को कामेश को सोप दिया कामेश उसके होंठों को पीता गया और अपने हाथों से उसके गाउनको सामने से खोलकर अपने हाथों को उसके गोल गोल उभारों पर रख कर उनके साइज का सर्वे करने लगा था 

कामया- हमम्म्म कहा ना मन नहीं है 

कामेश- बस थोड़ी देर हाँ… बस लेटी रहो बाकी में कर लूँगा आज 

कामया- प्लीज ना आज नहीं 
पर उसके मना करने के तरीके से पता चलता था कि वो चाहती तो थी पर क्यों मना कर रही थी पता नहीं उसके हाथ अब कामेश के सिर और पीठ पर घूमने लगे थे 

कामेश- रूको थोड़ी देर बस 
कामया- उूउउम्म्म्ममममम ईईईईईईीीइसस्स्स्स्स्सस्स 
करती हुई धीरे-धीरे कामेश का साथ देने लगी थी कामेश के किस करने में आज कुछ अलग था वो आज बहुत ही तरीके से किस कर रहा था जोर लगा के उसके पूरे होंठों को अपने मुख के अंदर तक चूसकर घुसा लेता था और फिर अपनी जीब को भी उसके मुख के अंदर तक घुसा ले जाता था उसके हाथ अब थोड़े रफ हो गये थे 

उसकी चूचियां खूब जोर-जोर से दबाते जा रहे थे कि तभी कामेश कामया के ऊपर से थोड़ा सा हटा और अपने पाजामे को नीचे की ओर सरका दिया और कामया के हाथ को पकड़कर अपने लिंग पर रखने लगा 
कामेश- पकडो इसे 

कामया ने कोई ना नुकर नहीं की और झट से उसके लिंग को अपनी कोमल हथेलियो में जकड़ लिया और कामेश को रिटर्न किस करने लगी 

कामेश का लिंग टाइट हो चुका था पर अचानक ही उसकी आखों के सामने वो एक मोटा सा और लंबा सा लिंग घूम गया भोला का काले रंग की वो आकृति उसके जेहन में एक अजीब सी उथल पुथल मचा रही थी कसी हुई जाँघो के सामने से झूलता हुआ वो लिंग उसके मन में अंदर तक उसे हिलाकर रख दिया उसकी हथेलिया कामेश के लिंग पर बहुत कस गई और वो कामेश को किस करती हुई उसके लिंग को जैसे निचोड़ने लगी थी कामेश को भी अचानक ही हुए कामया की हरकतों में बदलाव से बेचैनी होने लगी थी वो थोड़ा सा उठा और कामया की जाँघो के बीच से एक ही झटके में उसकी पैंटी को उतार फेका और झट से उसकी योनि में समा गया 


कामया भी जैसे तैयार ही थी अंदर जाते ही कामया फिर से एक सेक्स मेनिक बन गई थी अपनी कमर को उछाल कर बहुत ही तेजी से कामेश का साथ देने लगी थी वो जानती थी कि कामेश ज्यादा देर का मेहमान नहीं है पर ना जाने क्यों वो आज बहुत ही कामुक हो उठी थी शायद उसकी बजाह थी वो आकृति जो उसके जेहन में अचानक ही उठ गई थी भोला का सर्पाकार काले और मोटे लिंग की आकृति उसकी माँस पेशियाँ और उसका वो गठीला कद काठी और खा जाने वाली नजर वो अपनी आखों के सामने उस इंसान की याद करके अपने पति का साथ दे रही थी पता नहीं क्यों वो आज कामेश से पहले ही झड गई और एक ठंडी लाश की तरह से कामेश की बाहों में लटक गई 

कामेश भी खुश था कि आज वो कामया को संतुष्ट कर सका और अपनी रफ़्तार को बढ़ाए हुए कामया को अब भी भोग रहा था और बहुत ही जोर-जोर से कामया को लगातार किस करता जा रहा था 

कामेश- क्यों क्या हुआ आज तो मन नहीं था अन्नाअनाआआआआआआआआआआ हमम्म्ममममममममममम 
हान्फते हुए कामेश भी कामया के ऊपर ढेर हो गया 

कामया कामेश के नीचे लेटी हुई अपने हाथों से कामेश के बालों को धीरे-धीरे सहलाते हुए कामेश को अपनी बाहों में धीरे से कस्ती जा रही थी जैसे वो नहीं चाहती थी कि कामेश उसके ऊपर से हटे पर अंदर की ओर देखती हुई वो भोला के बारे में सोचने को मजबूर हो रही थी क्यों सोच रही थी वो पर ना जाने क्यों बार-बार उसके जेहन में उस समय का सीन उभरकर आ जाता था उस औरत का और पीछे की ओर से भोला को आगे पीछे होते हुए देखा था उसने वो औरत चिल्ला भी नहीं रही थी यानी कि उसे मजा आ रहा था वो उसका साथ दे रही थी उस सांड़ का उस हबसी का और वो भी दिन के उजाले में छत पर आखिर क्यों 


वो औरत कौन थी और भोला के साथ वहां कैसे पहुँची क्या वो औरत उनके यहां ही काम करती है या कौन है पर भोला को मना भी कर सकती थी ऐसा क्या हुआ जो वो छत पर जाके यह सब करना पड़ा इतनी उत्तेजना किसकाम की 
पता नहीं सोचते सोचते कब वो सो गई पर रात भर उसके सपने में वो सीन उसके शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना को हवा देता रहा और जब वो सुबह उठी तो उसकी उत्तेजना वैसे ही थी जैसे रात को थी वो पलटी और कामेश की ओर घूमी पर कामेश तो उठ चुका था और शायद नीचे भी चला गया था बाथरूम भी खाली था वो भी जल्दी से उठी और चाय पीने को नीचे आई फिर तो कुछ भी पासिबल नहीं था जल्दी-जल्दी से कामेश और कामया तैयार होकर कॉंप्लेक्स फिर शोरुम और फिर शाम और पूरा दिन यू ही निकल गया रात को भी कुछ ज्यादा बदलाब नहीं हाँ… एक बदलाब जरूर था कामेश अब ज्यादा ही कामया को प्यार करने लगा था रोज रात को कामेश खुद ही कामया को पकड़कर निचोड़ने लगा था और कामया भी उसका साथ देने लगी थी पर एक बदलाब जो कि कामया के जीवन में आ गया था वो था कॉंप्लेक्स में देखा गया वो सीन जो हमेशा ही उसके जेहन में छाया रहता था और उसे उत्तेजित करता रहता था शायद इसीलिए अब हमेशा कामेश की जीत होती थी और कामया की हार पर कामेश खुश था और कामया भी लेकिन कामया थोड़ा सा आब्सेंट माइंडेड हो गई थी वो हमेशा ही कुछ ना कुछ सोचती रहती थी 


क्या वो तो कामया के आलवा कोई नहीं जानता था कि उसके जीवन में जो एक उथल पुथल मचने वाली है यह उसके पहले की शांति है यह कामया भी नहीं जानती थी कि जिस अतीत को को वो भुलाकर एक पति व्रता स्त्री का जीवन निभा रही है वो कहाँ तार तार हो जाएगा जिस मेनिक को उसने अपने अंदर दबा रखा था वो खुलकर बाहर आ जाएगा और वो एक सेक्स मशीन में फिर से तब्दील हो जाएगी इसी तरह तीन दिन निकल गये 

आज भी हमेशा की तरह कॉंप्लेक्स का काम खतम करके कामेश और कामया शोरुम की ओर जा रहे थे कि रास्ते में अचानक ही 
कामेश- सुनो कल शायद मुझे बाहर जाना पड़ेगा 

कामया- क्यों कहाँ 

कामेश- बॉम्बे कुछ एक्षपोटेर आने वाले है उनसे मिलना है और धरम पाल जी कह रहे थे कि कुछ नये डीलर्स भी ढूँढने पड़ेंगे 
कामया- तो 

कामेश- तो क्या अब तो तुम ने काफी काम देख भी लिया है और समझ भी चुकी हो थोड़ा बहुत तुम देख लेना और थोड़ा बहुत पापाजी भी मदद कर देंगे 

कामया- हाँ… पर कितने दिन के लिए 

गाड़ी चलाते हुए 
कामेश- पता नहीं, जल्दी नहीं करूँगा एक बार में ही फिक्स करके आउन्गा 

कामया- हाँ पर जल्दी आ जाना में और पापा जी ही है घर में मम्मीजी भी नहीं है 

कामेश- हाँ वो तो है पर चिंता मत करो भीमा और लाखा है ना उनके रहते कोई चिंता नहीं है 

कामया- भी चुपचाप कामेश को देखती रही 

कामेश- चलो यहां से जा रहे है तो भोला को भी देखते चलते है शायद आज या कल में उसकी भी छुट्टी हो जाएगी 

कामया एकदम से सिहर उठी पता नहीं क्यों उसके शरीर में हजारो चीटियाँ एक साथ रेंगने लगी थी वो वाइंड स्क्रीन के बाहर देख तो रही थी पर जाने क्यों पलटकर कामेश की ओर नहीं देख पाई फिर भी बड़ी हिम्मत करके 
कामया- अभी शोरुम जाना नहीं है 

कामेश- अरे रास्ते में है देखते चलते है और फिर कल बाहर चला जाऊँगा तो टाइम नहीं मिलेगा और अगर आज कल में छुट्टी दे देते है तो बिल वगेरा भी भर देता हूँ और कहता हुआ गाड़ी दूसरी ओर जहां हास्पिटल था मुड़ गई कामया को जाने क्या हो गया था उसके सामने फिर से वही दृश्य घूमने लगा था वो धीरे धीरे अपनी सांसों को बढ़ने से नहीं रोक पा रही थी वो नहीं जानती थी कि ऐसा उसके साथ क्यों हो रहा था पर वो मजबूर थी वो नहीं चाहते हुए भी अपनी सांसों को कंट्रोल में नहीं रख पा रही थी एक उत्तेजना के असीम सागर में गोते लगाने लगी थी उसके जाँघो के बीच में गीलापन उसे परेशान कने लगा था उसकी सोच टूटी तो वो एक छोटे से हास्पिटल के सामने खड़े थे बहुत बड़ा नहीं था पर सॉफ सुथरा था 

सीडिया चढ़ते हुए वो कामेश के पीछे-पीछे ऊपर आ गई ड्रेस पहने हुए नर्स और कुछ ट्रेनी डाक्टर्स घूम रहे थे कामेश और कामया को देखकर वहां खड़े हुए कुछ लोगों ने उन्हें नमस्कार भी किया कामेश को तो शायद वहां के लोग पहचानते ही थे नहीं पहचानते थे तो सभी की निगाहे कामया पर अटक गई थी 

टाइट चूड़ीदार पहने हुए पोनी टेल किए हुए बाल लाइट येल्लो कलर का उसमें मेरूँ और ब्लू कलर के चीते लिए हुए कुर्ते में उसका जिस्म एक अद्भुत सा लग रहा था टाइटनेस के कारण उसके शरीर का हर अंग कपड़े के बाहर से ही दिख रहा था और हाइ हील की सँडल के कारण उसका प्रिस्ट भाग भी उभरकर कुछ ज्यादा ही पीछे की ओर निकला हुआ था 

कामया को इस तरह की नजर की आदत थी वो जहां भी जाती थी सभी का ध्यान अपनी ओर ही खींच लेती थी सो वो एक बार फिर से अपने होंठों में एक मधुर सी मुश्कान लिए कामेश के पीछे-पीछे जाने लगी थी कामेश ने थोड़ा सा आगे बढ़ कर एक कमरे का दरवाजा खोला अंदर दो तीन बेड पड़े हुए थे एक खाली था और दो भरे हुए थे


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामेश अंदर चला गया और कामया बाहर ही रुक गई अंदर जाने की हिम्मत नहीं हुई दरवाजा बंद होने से पहले उसे कामेश की आवाज़ सुनाई दी 
कामेश- भोला कैसे हो 

भोला- जी भैया ठीक हूँ कल छोड़ देंगे भोला है 

कामेश- कल क्यों आज क्यों नहीं 
और दरवाजा बंद हो गया पर थोड़ी देर बाद फिर से दरवाजा खुला और 
कामेश- अरे आओ ना रुक क्यों गई और कामया का हाथ पकड़कर अंदर खींच लिया 


कामया लगभग लरखड़ाती हुई सी अंदर कमरे में चली गई डोर के साइड वाली बेड पर कोई लेटा था और उसके साइड से ही भोला का बेड भी था 
कामया को देखते ही भोला उठने की कोशिश करने लगा 
कामेश- अरे लेटा रह उठ मत 

भोला- नमस्ते मेम साहब 

कामया- नमस्ते 
और अपनी नजर भोला से बचा कर साइड में पड़े हुए उस आदमी की ओर देखने लगी थी वो सिकुड़ कर सोया हुआ था शायद ठंड लग रही थी कंबल ओढ़े हुए हाथ पैर सिकोडे सोया था कामया कामेश के पास खड़ी हुई इधा उधर देखती हुई अपने आपको सहज करने की कोशिश में लगी थी पर जाने क्यों वो अपनी सांसों को तेज होते हुए पा रही थी यह वही राक्षस था जो उस दिन उसके सामने ही दोपहर को छत पर एक औरत के साथ ची ची क्या सोचने लगी थी वो पर एक बात तो थी कामया नजर चुरा कर भोला को एक बार देख जरूर लेती थी कामेश हँस हँस कर उससे बातें कर रहा था और भोला भी इतने में बाहर से सिस्टर आई और भोला को एक इंजेक्षन लगाने लगी भोला ने अपनी बाँह बाहर निकाली और सिस्टर को उसे इंजेक्षन लगाने में कोई दिक्कत नहीं हुई कामया ने एक बार भोला को देखा जैसे उसे कोई फरक ही नहीं पड़ा था वो एकटक कामया की ओर देख रहा था कामया थोड़ा सा झेप गई थी और कामेश को इशारा करने लगी पर सिस्टर की आवाज ने उसे चौका दिया 
सिस्टर- सर वो आज या कल सुबह डाक्टेर साहब से मिल लीजिएगा 

कामेश- क्यों 

सिस्टर- जी सर वो डाक्टेर साहब ने ही कहा है 

कामेश- हाँ… कल तो नहीं होगा अभी है क्या 

सिस्टर- जी है तो 

कामेश- तो चलो अभी मिल लेते है (और कामया की ओर देखते हुए कहा) तुम रूको में अभी आता हूँ 


जब तक कामया कुछ कहती तब तक तो वो सिस्टर के साथ बाहर हो चुका था कामेश को भी बड़ी जल्दी रहती है सुन तो लेता कमरे में उसे बड़ा ही आजीब सा लग रहा था वो अब भी भोला के बेड के पास खड़ी हुई थी और उसकी ओर ना देखते हुए साइड में खिड़की की ओर देख रही थी उसे बड़ा ही अजीब सा एहसास धीरे-धीरे उसके पूरे शरीर में छाने लगा था वो बार-बार अपने हाथों से अपनी कलाईयों से लेकर बाहों तक एक हाथ से सहलाते जा रही थी कुछ परेशान भी थी भोला उसके सामने ही बेड पर लेटा हुआ था और शायद उसी की ओर ही देख रहा था पर कामया में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो भी भोला की ओर देख सके वो तो यहां से निकल जाना चाहती थी जल्दी से बस उसे कामेश का ही इंतेजार था 


पर कामेश को गये अभी तो बस एक मिनट ही हुआ होगा और इतने देर में ही कामया के सारे शरीर में एक अजीब सी उथल पुथाल मच गई थी वो बार-बार सिहर उठ-ती थी चहरे के एक्सप्रेशन को देखकर साफ लगा रहा था बड़ी ही संभाल कर अपनी सांसें छोड़ रही है इतने में 
भोला- कैसी है मेमसाहब 

कामया- हाँ… ठीक हूँ हमम्म्ममम सस्स्स्शह 
उसके मुख और नाक से एक अजीब सी सिसकारी भरे शब्द निकले वो नीचे भोला की ओर देखा जी कि एकटक उसकी ओर ही देख रहा था बड़े ही तरीके से और बड़े ही प्यार से 

भोला- आप नाराज है हम से 

कामया- नहीं क्यों 

भोला- जी उस दिन 

कामया- चुप रहो 
उसके आवाज़ में गुस्सा था शायद बाहर भी चली जाती अगर वो कुछ ऐसा नहीं करता तो अचानक ही भोला की हथेली उसकी गोरी और नाजुक कलाई को अपनी सख्त गिरफ़्त में ले चुकी थी छुरियो के ऊपर से ही कामया का पूरा शरीर एकदम से सनसना गया था वो भोला की ओर डर के मारे देखती र्रही 

कामया- छोड़ो मुझे क्या कर रहे हो पागल हो क्या 
गुस्सा और बहुत ही धीरे उसके मुख से यह बात निकली वो नहीं चाहती थी कि पास में सोए हुए उस आदमी को कुछ पता चले कामया की पीठ दरवाजे की ओर थी सो एक बार अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश करती हुई उसने पलटकर भी देखा पर दरवाजा बंद था 
कामया- प्लीज छोड़ो 

भोला- छोड़ दूँगा मेमसाहब पहले जोर लगाना छोड़िए नहीं तो नहीं छोड़ूँगा 

कामया का शरीर ढीला पड़ गया उसने जोर लगाना छोड़ दिया पर अपने दूसरे हाथों से उसकी उंगलियों को अपने कलाई से ढीलाकरने की कोशिश करती जा रही थी 

कामया- प्लीज कामेश आ जाएगा प्लीज 

उसकी आवाज में रुआंसी होने का साफ संकेत था वो उसकी गिरफ़्त से अपने को छुड़ाने में असमर्थ थी 

भोला- मेमसाहब मैंने किसी को भी नहीं बताया कि आपने ही मुझे धक्का दिया था 

कामया- ठीक है पर मुझे छोड़ो नहीं तो में चिल्ला दूँगी 

भोला- चिल्लाओ मेमसाहब में भी बोल दूँगा कि मेमसाहब ने ही मुझे धक्का दिया था 

कामया- प्लीज ईई अच्छा किया था तुम्हें धक्का दिया 

भोला- क्यों मेमसाहब हमें जीने का हक नहीं है क्या गरीब है इसलिए 

कामया- प्लीज ईयीई मेरा हाथ छोड़ो पहले 

भोला- नहीं आपने मेरा जीवन खराब कर दिया है पागल हो गया हूँ में पता नहीं क्या-क्या करता जा रहा हूँ शायद कभी किसी दिन किसी का खून भी कर दूं 

अचानक ही भोला की आवाज कुछ सख्त हो गई थी और थोड़ा उची आवाज में भी बोला 

कामया एकदम से सन्नाटे में रह गई वो अभी अपना हाथ उसकी हथेलियो से छुड़ाना चाहती थी पर वो भोला को देख रही थी कुछ अजीब तरीके से उसने उसका जीवन खराब कर दिया कैसे 

कामया- मैंने खराब कर दिया कुछ भी बोलागे तुम ,,अब उसके चहरे में भी गुस्सा था और आवाज में सख़्त पन था पर धीमे थी 

भोला- जी हाँ… आपने जब से मैंने आपको देखा है में पागल सा हो गया हूँ और तो और जब मैंने आपको लाखा काका के घर में जाते हुए देखा था तब से और तभी से जब भी आपको देखता हूँ में पागल हो जाता हूँ छुप छुप कर सिर्फ़ आपको देखता रहता हूँ दिन भर पागलो के समान घूमता हूँ ना जाने कितनी ही औरतों के साथ मैंने किया पर मेमसाहब
आपको नहीं भुला पाया 

भोला की आवाज में अचानक ही तेजी के बाद नर्मी आ गई थी वो शायद उससे मिन्नत कर रहा था भोला के मुख से निकली हर बात उसके जेहन में किसी तीर के माफिक उतरगई थी अब उसकी छूटने की कोशिश कुछ ढीली पड़ गई थी 

भोला- तब भी मैने किसी को कुछ नहीं कहा था मेमसाहब और जब जान भी गवाने वाला था तब भी मेमसाब किसी से कुछ नहीं कहा शायद में आपसे कभी भी नहीं कहता पर क्या करू मेमसाहब इतने पास खड़ी हुई है आप कि आपकी खुशबू से ही में पागल हो गया हूँ 

कामया- 
चुपचाप खड़ी हुई कभी पीछे की ओर तो कभी उस आदमी की ओर देख रही थी और कभी भोला की आखों में उसे भोला की आखों में एक विनती और नर्मी देखने को मिली शायद बहुत तकलीफ में था 

कामया- प्लीज भोला मुझे छोड़ दो कामेश आ जाएगा उसकी आवाज में धमकी नहीं थी मिंन्नत थी 

भोला- में क्या करू मेम्साब क्या करू पागल कर देती हो आप देखो क्या हाल है मेरा 
और अपने दूसरे हाथ से कंबल को हटा कर दिखाया सीने में और उसके नीचे बहुत सी खरोंचो के निशान थे कुछ गहरे तो कुछ सुख गये थे काले बालों के झुंड में उसके बलशाली शरीर का एक नमूना उसके सामने था छाती के दोनों तरफ उसकी चूची के समान उसका सीना फूला हुआ था ठोस था बिल्कुल पत्थर की तरह 

भोला- देखा मेमसाहब और क्या दिखाऊ मर जाता तो आपको कभी भी नहीं बताता पर क्या करू मेमसाहब शायद बहुत पाप किया है इसलिए इतनी तकलीफ के बाद भी जिंदा हूँ 

कामया- नहीं भोला तुम ठीक हो जाओगे अब प्लीज छोड़ दो मुझे कामेश आ गये तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी प्लीज 
कामया बड़े ही तरीके से भोला से गुजारिश कर रही थी वो जानती थी कि जब तक भोला नहीं छोड़ेगा वो उसकी चुगल से नहीं छूट पाएगी 

भोला- छोड़ दूँगा मेमसाहब मुझे भी चिंता है पर में क्या करू बताइए इसका क्या करूँ 
और बिना किसी संघर्ष के ही उसने कामया के हाथ को नीचे कंबल में घुसाकर अपने लिंग के पास लेगया 

कामया जब तक समझती तब तक तो सबकुछ हो चुका था उसकी हथेलियो में उसका गरम सा लिंग टच होने लगा था कामया की सांसें रुक गई थी और अपने आपको खींचकर जब तक वो संभालती तब तक तो भोला उसकी हथेली में अपने लिंग को घिसने लगा था 

कामया- क्या कर रहे हो ह्म्म्म्ममममह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह कोई आआआआजाएगा आआआआआआआअ 

भोला- नहीं मेमेसाहब बस थोड़ा सा पकड़ लीजिए प्लीज ईईई 

कामया- नहीं प्लीज ईईईईईईईईई छोड़ो 

भोला - छोड़ दूँगा मेमसाहब पर थोड़ी देर को ही मेमसाहब प्लीज़ नहीं तो मर जाऊँगा 

कामया के हाथ के चारो ओर उसका लिंग झटके से टकरा रहा था बहुत ही गरम था बड़ा था पर वो अपने हाथों को उससे बचाने की कोशिश में थी पर भोला उसे अपने लिंग को पकड़ाना चाहता था पर वो बच रही थी 

भोला- अब मेमसाहब आप ही देर कर रही है एक बार पकड़ लीजिए ना प्लीज नहीं तो भैया आ जाएँगे जल्दी 

कामेश के आ जाने के डर से कामया ने झट से उसके लिंग को कंबल के नीचे ही अपनी कोमल हथेली में कस कर पकड़ लिया पर भोला का लिंग इतना मोटा था कि उसकी हथेली भी उसके आकार को पूरा नहीं घेर सकी गरम-गरम लिंग के हाथों में आते ही कामया के शरीर में एक सनसना देने वाली सिहरन दौड़ गई थी वो अपना हाथ खींचना चाहती थी पर भोला ने भी अपने हाथों से उसकी कोमल और नाजुक हथेली को कस कर जकड़ रखा था 


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