Hindi Kahani बड़े घर की बहू - Printable Version

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RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया जल्दी से इस परिस्थिति से मुक्ति चाहती थी वो खड़े-खड़े थक गई थी उसे डर था कि पास के बेड में जो सोया हुआ था अगर एक बार भी कंबल उठाकर देखेगा तो उसे कामया का हाथ साफ तौर पर कंबल के अंदर भोला के लिंग पर ही दिखेगा पर वो मजबूर थी भोला की गिरफ़्त के आगे उसके बहशिपान के आगे उसके उतावले पन के आगे वो उसका लिंग तो पकड़े हुए थी पर कुछ करने की उसे जरूरत नहीं थी भोला ही अपने हाथों से उसके हाथों को डाइरेक्ट कर रहा था 


वो अपने लिंग पर कामया के हाथों को आगे पीछे करता जा रहा था और अपनी आखें बंद किए ना जाने क्या-क्या बक रहा था 
भोला- आआह्ह मेमसाहब कितनी नरम उंगलियां है आपकी आआआह्ह कितना सुख है मेमसाहब अब में मर भी जाऊ तो कोई शिकायत नहीं मेमसाहब उसकी आखें बंद थी और चेहरे के भाव भी धीरे-धीरे बदल रहे थे एक सुख की अनुभूति उसके चहरे पर साफ देखी जा सकती थी सांसें भी बहुत तेजी से चल रही थी और अपने हाथों की गिरफ़्त भी धीरे-धीरे कामया के हाथों पर कुछ ढीली पड़ रही थी पर कामया की हथेलिया तो भोला के लिंग पर वैसे ही टाइट्ली ऊपर-नीचे होने लगी थी वो भूल चुकी थी कि उसके हाथों पर भोला की पकड़ थोड़ी सी ढीली पड़ गई थी वो् अपने आपको बचा सकती थी एक झटके से अपने हाथ को खींच सकती थी पर उसने ऐसा नहीं किया उसे पता ही नहीं चला कि कब भोला की गिरफ़्त ढीली हो गई वो तो अपने हाथों में आई उस चीज का एहसास जो कि अब तक उसके जेहन में घर कर गई थी 


उसी के समर्पण में रह गई थी अपने हाथों पर एक अजीब से एहसास के चलते वो भी अंजाने में इस खेल का हिस्सा बन चुकी थी वो अब खुद ही उसके लिंग पर अपने हाथों को चलाने लगी थी और अपनी उखड़ती हुई सांसों को कंट्रोल भी कर रही थी उसकी आँखो के सामने उस दिन का सीन फिर से घूम गया था जब उसने भोला को उस औरत के साथ देखा था और वो अवाक रह गई थीआज वही लिंग उसके हाथों में था और उसे भी एक नशे की स्थिति में पहुँचा रहा था अचानक ही उसे अपनी कमर के चारो तरफ भोला के हाथों के होने का एहसास हुआ जो कि धीरे धीरे उसे कसता जा रहा था और उसे बेड के और नजदीक लेता जा रहा था तब उसे अपनी स्थिति का ध्यान आया और अपने हाथों को खींचने की कोशिश की पर वो अब भोला की पूरी गिरफ़्त में थी भोला ने कस कर उसे जकड़ रखा था 


भोला----प्लीज मेमसाहब बस थोड़ी देर और हो गया बस मत छोड़ो उसे मेमसाहब बहुत परेशान करता है मुझे प्लीज 
कामया ने एक बार आस-पास देखा और फिर से अपनी गिरफ़्त उसके लिंग के चारो ओर धीरे धीरे कसते हुए उसके लिंग को आगे पीछे करने लगी उसका लिंग अब भी कंबल के नीच ही था पर उसका आकर कंबल के ऊपर से दिख रहा था बड़ा सा और कोई टेंट सा बना दिया था सीधा लेटा हुआ था भोला और अपने सीधे हाथ से कामया की कमर को जकड़े हुए वो अब धीरे-धीरे अपनी कमर को भी उच्छाल देता था कामया की उंगलियां भी अपने आप में कमाल कर रही थी उस गर्मी के अहसास को और भी नजदीक से झेलने की कोशिश में उसकी पकड़ उसके लिंग के चारो ओर और भी सख्त होती जा रही थी और उसी अंदाज में आगे पीछे भी होती जा रही थी कामया को अचानक ही याद आया कि वो अगर पकड़ी गई तो वो एक बार भोला की ओर देखती हुई अपने को बचाने की कोशिश में जोर-जोर से भोला के लिंग को झटकने लगी और उसके इस तरह से झटके देने से भोला का शरीर शायद अपने को और नहीं रोक पाया था उसकी गिरफ़्त अचानक ही कामया की कमर के चारो ओर बहुत ही सख़्त हो गई थी और एक हाथ उठकर उसकी चुचियों तक भी पहुँच गया था और कस कर दबाता तब तक उसके लिंग से बहुत सारा वीर्य निकलकर कामया के हाथों को भर गया और वही अंदर कंबल में चारो ओर फेल गया भोला की गिरफ़्त अब भी ढीली नहीं हुई थी पर कामया की हालत खराब थी वो एक अजीब सी आग में जल उठी थी भोला के चुचियों को दबाते ही वो चिहुक कर उसके पास से दूर हो जाती पर उसकी गिरफ़्त के आगे वो फिर से ढीली पड़ गई और अपने हाथ को ही खींचकर बाहर निकाल पाई थी और वही कंबल में ही पोंछ लिया था उसकी साँसे बहुत ही तेज चल रही थी पर भोला तो शांत हो चुका था 


भोला- शुक्रिया मेमसाहब बहुत बहुत शुक्रिया 
और अपनी गिरफ़्त को छोड़ते ही दरवाजे के बाहर कोई आहट हुई और कामेश और डाक्टर दोनों कमरे में घुसे 

डाक्टर- कैसी तबीयत है भोला 

भोला- हान्फता हुआ जी डाक्टर साहब अबती बिल कुल ठीक हूँ शेर से भी लड़ सकता हूँ 
डाक्टर और कामेश एक साथ ही हँस दिए 

डाक्टर- अरे शेर से लड़ने की क्या ज़रूरत है 

भोला- नहीं सर बहुत दिन हो गये है इसलिए कहीं बहुत नुकसान हो जाएगा अगर में काम पर नहीं लोटा तो 

कामेश---अरे अभी नहीं कुछ दिन और आराम करो फिर आना काम पर ठीक है और सुनो शायद आज ही में बाहर जा रहा हूँ कोई जरूरत हो तो पापा से या फिर मेडम से बोल देना ठीक है 

भोला- जी भैया आपके लिए तो जान हाजिर है और अब तो मेमसाब के लिए भी 
और बड़े ही नशीले अंदाज में हँसने लगा था वहां का माहॉल कुछ खट्टा मीठा सा हो गया था पर कामया जानती थी कि भोला क्या बोल रहा था और भोला भी इशारे से अपनी बात कामया तक पहुँचाने में सफल हो गया था पर कामया तो कही और ही खोई हुई थी कामेश के अचानक ही आ जाने से वो जहां पकड़े जाने के डर से भोला के पास से जल्दी से हटी थी वही अपने सांसों को नियंत्रित करने में उसे अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ी थी फिर भी कामेश की नजर उसके बदले हुए तरीके पर पड़ ही गई थी 

कामेश- क्या हुआ बहुत घबराई हुई हो 

कामया- जी नहीं वो सांस फूल रही है 

कामेश- क्यों 

कामया वो स्मेल यहां की 

कामेश अरी यार हास्पिटल में ऐसा ही स्मेल आता है अब चलो 
और कामया को लिए बाहर की ओर चल दिया डाक्टर भी उनके साथ ही बाहर की ओर चल दिया जाते जाते भोला तो कामया की ओर देखता रहा पर कामया की हिम्मत नहीं हुई 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामेश- भोला आज अगर छूट गये तो एक बार फोन करदेना ठीक है 

भोला- जी भैया आप आज जा रहे हो 

कामेश--- पता नहीं धरम पल जी क्या कहते है 

भोला- मुझे भी चलना था क्या 

कामेश- नहीं यार अभी नहीं अभी तो तू यही रह देखता हूँ पहली बार होकर आता हूँ फिर 

भोला- जी भैया आप हुकुम करना में हाजिर हो जाऊँगा 

कामेश- हाँ… ठीक है और सुन छूटने के बाद मंदिर वाले घर पर ही जाना यहां साइट वाले कमरे में नहीं जाना 

भोला- क्यों 

कामेश- अरे मंदिर वाले घर के आस-पास बहुत लोग है और पंडितजी भी है तेरा खयाल रखेंगे साइट वाले कमरे में अकेला पड़ा रहेगा इसलिए 

भोला- नहीं भैया में तो साइट वाली कमरे में ही रहूँगा कम से कम थोड़ा बहुत देखता तो रहूँगा नहीं तो यहां मंदिर वाले घर में खाली भजन सुनते सुनते पागल हो जाऊँगा 

कामेश- क्या यार थोड़े दिन आराम कर लेता ठीक है पर ध्यान रखना और ज्यादा ऊपर-नीचे नहीं होना 

भोला- ठीक है भैया 

कामेश डोर बंद करके बाहर आ गया डाक्टर और कामया बाहर ही खड़े थे उसी का इंतजार करते डाक्टर से हाथ मिलाकर वो बाहर अपनी गाड़ी की ओर चल दिए 

कामया अब भी अपने को कंट्रोल करने में असफल थी उसकी हालत बहुत खराब थी उसके शरीर में एक भयानक सी आग लगी हुई थी जो कि उसे अपने आप में ही जला रही थी गाड़ी में बैठते ही 
कामया- आप क्या आज ही बाहर जा रहे है 

कामेश- पता नहीं धरमपाल जी का कोई फोन तो अब तक नहीं आया वही बताने वाले थे क्यों 

कामया- आज मत जाना, और अपने हाथों से पास बैठे कामेश के कंधे को सहलाने लगी थी कामेश भी मुस्कुराते हुए 
कामेश- क्यों मिस करोगी क्या 

कामया- (एक बहुत ही मधुर मुश्कान अपने होंठों में लिए ) हाँ… 

कामेश- तो अभी घर चले 

कामया- हाँ… चलिए 

कामेश- क्या बात है यार तुम तो कमाल की हो 

कामया- कमाल की क्या अपने पति को ही कह रही हूँ 

कामेश- हाँ… छोड़ो अभी तो शोरुम चलते है जल्दी निकल चलेंगे ठीक 

कामया- हाँ… 
और कामया अपनी जाँघो को अचानक ही बहुत जोर से आपस में भिच अकर बैठ गई जब से भोला के लिंग की गर्माहट उसके शरीर में पहुँची थी वो एक भूखी शेरनी हो गई थी उसे अब अपने पति के साथ थोड़ी देर के लिए अकेला पन चाहिए ही था 

वो अपने मन की इच्छा को एक उसके साथ ही पूरा कर सकती थी और वो भी बिना किसी रोकटोक के पर उसे यह भी पता था कि वो अभी पासिबल नहीं है अगर शोरुम नहीं जाते तो यह पॉसीबल था पर अभी कामया क्या करे रात का इंतेजार उूुउउफफफफ्फ़ तब तक तो वो पागल हो जाएगी पर कोई चारा नहीं था उसे इंतेजार करना ही था इसके अलावा कोई रास्ता उसे तो नहीं सूझ रहा था वो शोरुम में भी आ गई और कामेश अपने काम में लग गया और वो भी पर कामया तो रह रहकर अपने शरीर में एक सनसनाहट सी महसूस करती रही बार-बार बाथरूम में भी हो आई पर उसकी उत्तेजना में कोई कमी नहीं आई थी उसे रह रहकर भोला की आखें याद आ रही थी किस तरह से उसकी तरफ खा जाने वाली नजर से देख रहा था किस तरह से वो बिना किसी डर के कामया के हाथों को अपने लिंग तक पहुँचा दिया था और उसे मजबूर कर दिया था कि आओ उसके साथ उसी खेल में शामिल हो जाए और तो और वो भी कुछ नहीं कह या कर पाई थी तब बिना कुछ बोले और बिना कुछ कहे ही वो भी अंजाने में उस खेल में शामिल हो गई थी क्यों नहीं उसने मना किया या फिर खींचकर एक चाँटा मारती या फिर जोर से चीख कर सभी को बुला लेती 

पर कहाँ वो तो बल्कि उसका साथ देने लगी थी उसके लिंग को सहलाते हुए उसे सुख का एहसास देने की कोशिश करती जा रही थी और तब भी जब भोला ने अपने हाथों को उसके कमर के चारो ओर घेर लिया था तो भी वो उसके लिंग को अपने हाथों से सहलाते जा रही थी क्यों आखिर क्योंकिया उसने वो तो अब सबकुछ भूलकर फिर से पूरी कामया बनना चाहती थी सिर्फ़ पति और घर पर आज जो कुछ हुआ क्या उसे एक इतने बड़े घर की बहू को शोभा देता है अगर कोई देख लेता तो 
और अगर किसी को पता चल जाता तो वो तो अच्छा हुआ कि कामेश और डाक्टर आते हुए बाहर थोड़ी देर के लिए रुक कर हँसते हुए अंदर आए थे अगर एक झटके से दरवाजा खोलकर अंदर आ जाते तो तो क्या होता सोचते सोचते कामया की हालत खराब हो गई थी पशीनापशीना हो गई थी कामेश और पापाजी अपने काम में लगे हुए थे उसकी ओर ध्यान नहीं था पर कामया के पसीना पसीना होने के पीछे जो भी कारण था वो वो खुद भी नहीं जानती थी शायद डर के मारे या फिर सेक्स के उतावले पन की खातिर कुछ भी हो कामया की हालत ठीक नहीं थी उसे कामेश के साथ थोड़ी देर का अकेला पन चाहिए ही था 
वो एकदम से 
कामया- सुनिए आज थोड़ा जल्दी चलिए ना 

कामेश- कहाँ 
कामया-- यहां से 
कामेश जो कि अभी तक अपने काम में इतना उलझा हुआ था कि गाड़ी में हुई छेड़ छाड़ को बिल्कुल भूल चुका था और एक अजीब से तरीके से कामया की ओर देखता हुआ बोला 
कामेश- पर जाना कहाँ है 

कामया- (पापाजी की ओर देखते हुए और थोड़ी आवाज को मंदा करते हुए ) घर और कहाँ अपने तो कहा था अभी गाड़ी में 
कामेश- (मुस्कुराते हुए पापाजी की ओर देखता हुआ जो कि अपने काम में व्यस्त थे एक आँख कामया को मारकर ) कहो तो यही कर लेते है 

कामया- धत्त जल्दी कीजिए ना प्लीज 

कामेश- हाँ… 5 30 बजे तक चले घर फिर डिनर पर भी चलते है 
अब तो कामया के पास और कोई चारा नहीं था सो वही बैठकर इंतजार करने के सिवा टाइम निकलता जा रहा था कामया की जिंदगी का यह पहला टाइम था जब वो इतनी उत्तेजित थी और वो कुछ नहीं कर पा रही थी आज उसकी योनि, मे जो हलचल मची हुई थी वो उसके जीवन में कभी नहीं हुई थी आज पहली बार उसे पता चल रहा था कि तन की अग्नि में जलना क्या होता है पहले भी उसके साथ ऐसा हुआ था पर तब या तो लाखा या फिर भोला ने उसकी आग भुजाई थी और फिर उसका पति तो था ही 


पर आज की स्थिति कुछ और थी वो यहां शोरुम मेबैठी हुई अपने पति के फ्री होने का इंतजार कर रही थी और उसके पास कोई चारा नहीं था 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामेश और पापाजी लगातार अपने काम में व्यस्त थे किसी से फोन पर किसी से पर्सनलि या फिर किसी को इंटरेक्षन देते हुए या फिर किसी को इंटरकम पर कुछ बताने में इतने में कामेश को थोड़ा सा सचेत देखकर कामया का ध्यान उनके फोन पर गया 
कामेश- जी सेठ जी आप ही के फोन का इंतजार कर रहा था कहिए 
शायद धरम पाल जी का फोन था 
कामेश- जी अरे वाह सर यह तो बहुत बढ़िया खबर है हाँ… हाँ… कोई बात नहीं में चला जाऊँगा अरे सर आप भी हाँ… हाँ… सेठ जी आपकल आ जाना 
और फोन काट कर, कामया की ओर देखा 

कामया- क्या हुआ 

कामेश- वो धरमपल जी की लड़की को बेटा हुआ है वो देल्ही जा रहे है 

कामया- तो 

पापाजी- अरे वाह यह तो बड़ी ही खुशी की खबर है रुक मैं भी बधाई दे दूं 

कामेश- (कामया की ओर देखता हुआ ) वो मुझे ही जाना होगा धरम पाल जी कल शाम तक पहुँचेंगे सुबह की मीटिंग मुझे ही आटेंड करना है 

कामया- 
गुस्से से पागल कामया कामेश की ओर एकटक देखती ही रह गई पापाजी अगर वहां नहीं होते तो शायद टेबल पर जो कुछ भी पड़ा मिलता उसे उठाकर जम कर कामेश के मुँह पर मारती पर यहां स्थिति कुछ और थी वो कुछ नहीं कर सकती थी सिवाए खामोश रहने के 

वो कामेश को घूरते हुए 
कामया- कब जाना है 

कामेश- 7 30 बजे की फ्लाइट है चलो निकलते है तुम्हें घर छोड़ दूँगा फिर तैयारी भी करना है 

कामेश- पापाजी तो में निकलु कामया को भी ले जाता हूँ आप जल्दी आ जाना 

पापाजी- लाखा को ले जा तुझे एरपोर्ट पर छोड़ कर मुझे लेजाएगा 

कामेश एक काम करना उसे 6 बजे भेज देना में यह गाड़ी ले जाता हूँ नहीं तो यह गाड़ी यही खड़ी रह जाएगी 

पापाजी- हाँ… ठीक है पापाजी और कामेश की बातों में कामया का बिल्कुल ध्यान नहीं था वो तो बस अपने बारे में सोच रही थी क्यों आखिर क्यों उसी के साथ ऐसा होता है वो कितना अपने पति के साथ रहने की कोशिश करती है पर कामेश है कि हमेशा ही उसे नजर अंदाज कर देता है उसका गुस्से में बुरा हाल था 

वो कामेश के साथ शोरूम से बाहर तो निकली पर एक बात भी नहीं की जिसे कि कामेश को समझने में जरा भी देर नहीं हुई गाड़ी में बैठते ही 
कामेश- अरे यार गुस्सा मत हो यार क्या करू काम है तो नही तो मैंने कहा ही तो था कि आज जल्दी घर चलेंगे हाँ… प्लीज यार 

कामया- नहीं में खाली यह सोच रही थी कि एक में ही हूँ जिसके लिए आपके पास टाइम की कमी है और हर एक के लिए टाइम ही टाइम है 

कामेश- अरे टाइम ही टाइम कहाँ कौन सा में रोज धरमपाल जी का काम करें चला जाता हूँ या फिर शोरुम में ही बैठा रहता हूँ कि तुम्हें टाइम नहीं दे पाता हूँ पर क्या करे काम तो करना ही पड़ेगा ना 

कामया- हूँ काम ही करो और मुझे जंगल में छोड़ आओ तो कोई नहीं कहेगा आपको 

कामेश- जंगल में अरे बाप रे कितने दिनों के लिए 

अब कामेश थोड़ा मजाक के मूड में आ गया था उसे पता था कि कामया के गुस्से को शांत करना है तो एक बार उसे हँसा दो फिर सब ठीक 

कामया- हमेशा के लिए 

कामेश- फिर वो सब करने के लिए मुझे जंगल आना पड़ेगा हाँ… ही ही ही हाँ… हाँ… हाँ… 

कामया- मजाक मत करो 
गुस्से में थोड़ा सा मुस्कुराहट को रोकती हुई वो जानती थी कि कामेश क्या कह रहा था 

कामेश- फिर तो मुझे भी शोरुम बंद करने के बाद अपना ड्रेस चेंज करके तुमसे मिलने आना पड़ेगा है ना 

कामया सिर्फ़ गुसे में कामेश की ओर देख रही थी हँसी को रोक कर कपड़े चेंज करके क्यों , अपने मन में सोचा 

कामेश- है ना पत्ते बाँध कर आना पड़ेगा ही ही 

कामया- फालतू बातें मत करो ना प्लीज क्यों जा रहे हो आज कल चले जाते हमेशा ही पूरे प्लान की ऐसी तैसी कर देते हो 
कामेश- अरे मेडम मुझे तो कल ही जाना था और धरम पाल जी को आज पर क्या करे उनकी बेटी से रोका नहीं गया सो आज ही बेटा पटक दिया लो नानाजी बना दिया सेठ जी को 

कामया-- बोर कर देते हो तूम 
अब कामया का गुस्सा हवा हो गया था वो अपने पति की स्थिति को समझ रही थी क्या करे उसे समझना ही था और कोई चारा नहीं था वो जब तक घर पहुँचे तब तक थोड़ा बहुत अंधेरा हो गया था जल्दी बाजी मच गई थी अपने कपड़े और सारा समान भी रखना था सँपल और बहुत कुछ 


कामया तो कामेश का सूटकेस जमाने में लग गई कामेश पेपर्स के पीछे पड़ गया कामया कमरे में बार-बार उसके आमने सामने घूमती रही पर कामेश का ध्यान बिल्कुल उस ओर नहीं था और नहीं उसे इस बात का ही ध्यान आया कि कामया ने आज उसे जल्दी घर चलने को क्यों कहा था पर कामया तो चाहती थी कि कामेश जाने से पहले उसके साथ कम से कम 
एक बार तो करता उसके शरीर में जो आग लगी थी उसे कुछ तो ठंडक मिलती पर कहाँ कामेश तो बस अपने पेपर्स में ही खोया हुआ और बीच बीच में कामया को कुछ लाने को जरूर कह देता था आखिर कार सूटकेस भी तैयार हो गया और कामेश भी इंटरकम पर भोला ने इनफार्म कर दिया था कि खाना लग गया है 


सो जल्दी-जल्दी कामेश भी नीचे की ओर चल दिया सूटकेस लिए हुए कामया भी पीछे-पीछे डाइनिंग स्पेस पर आ गई थी कामेश जल्दी-जल्दी अपने मुँह में ठूंस रहा था कही देर ना हो जाए तभी बाहर गाड़ी रुकने की आवाज आई लाखा आ गया था उसे एरपोर्ट छोड़ने को सबकुछ तैयार था सूटकेस कामेश और पेपर भी और जो दोपहर से ही तैयार था उसे कामेश भूल गया था और जो अभी तैयार किया था उसे लेकर वो बाहर निकल गया और कामया की ओर देखता हुआ 
कामेश- जाके फोन करता हूँ हाँ… 

कामया- जी जल्दी आ जाना 

कामेश- हाँ यार फिर भी दो दिन तो लगेंगे ही ठीक है 

कामया- जी 
और कामया दरवाजे में खड़ी कामेश को गाड़ी में बैठ-ते हुए और फिर धीरे-धीरे गाड़ी को गेट के बाहर की ओर रेगते हुए जाते हुए देखती रही वो एक बुत की भाँति दरवाजे पर खड़ी हुई शून्य की ओर देखती रही अब क्या करे जिस चीज का डर था वो ही घर में अकेली है वो और भीमा भी है अब अब क्या होगा वो अंदर जाने में सकुचा रही थी दरवाजे पर ही खड़ी रही अचानक ही गेट से दौड़ता हुआ चौकीदार को आते देखा 
चौकी दार- जी मालकिन कुछ काम है वो अपनी नजर नीचे झुका कर खड़ा हो गया था 

कामया नहीं क्यों 
चौकीदार- जी वो आप यहां खड़ी थी तो पूछ लिया 

कामया- नहीं नहीं तुम जाओ अचानक उसके मोबाइल पर पापाजी का फोन आया 
कामया- जी 

पापाजी- लाखा पहुँचा क्या 

कामया- जी पापाजी वो निकल गये है 

पापाजी- चलो ठीक है लाखा के आते ही आता हूँ तू फिकर ना कर बहू अगर खाना खाना हो तो खा ले 

कामया- जी नहीं पापाजी आप आ जाइए फिर खाते है अकेले अकेले मन नहीं करता 

पापाजी ठीक है में शोरुम बढ़ाता हूँ जैसे ही लाखा आता है में भी घर पहुँचता हूँ 

और फोन कट गया वो जब अंदर घुसी तो भीमा को टेबल से समान उठाते हुए देखा जो कि झुकी हुई नजर से कामया की ओर ही देख रहा था कामया के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई जो कि उसके जाँघो के बीच में कही खो गई वो एक बार सिहर उठी जिस चीज से वो बचना चाहती थी वो एक बार फिर उसके सामने खड़ी थी यह वही भीमा है जिसने उसके साथ सबसे पहले किया था फिर लाखा सोचते हुए कामया डाइनिंग स्पेस को क्रॉस करते हुए सीढ़ियो के पास पहुँच गई थी कि पीछे से भीमा चाचा की आवाज उसके कानों में टकराई थी 
भीमा- बहू बड़े मालिक कब तक आएँगे 

कामया- (अपनी सांसों को कंट्रोल करते हुए बिना पीछे देखे ही सीढ़िया चढ़ते हुए ) बस आते ही होंगे आप खाना लगा दो 

भीमा चाचा- जी बहुत अच्छा


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

और पीछे से आवाज आनी बंद हो गई थी कामया सीढ़िया चड़ती हुई अपने कमरे में पहुँच गई थी और झट से डोर बंद करके बेड पर चित लेट गई थी वो फिर से उसे गर्त में नहीं गिरना चाहती थी वो नहीं चाहती थी अपने पति को धोखा देना वो बिल्कुल नहीं चाहती थी सो जल्दी से अपने आपको व्यवस्थित करते हुए वो बाथरूम में घुस गई और फ्रेश होने लगी थी चेंज करते समये उसने एक काटन का सूट निकाल लिया था जो कुछ ढीला ढाला था 

मिरर के सामने खड़ी अपने को संवारते समय भी अपना दिमाग हर उस चीज से हटाना चाहती थी जिससे कि उसके मन में कोई गलत ख्याल ना आए वो कोई गाना गुनगुनाते हुए बालों को संवारते हुए माथे में सिंदूर और बिंदिया लगाना नहीं भूली फिर टीवी चालू करके अपने कमरे में ही बैठ गई थी उसे इंतजार था पापाजी के आने का खाना खाके वो सो जाएगी और फिर कल घर से बाहर और फिर पूरा दिन घर से बाहर ही रहेगी इस घर में घुसते ही उसे पता नहीं क्या हो जाता है 
हमेशा ही उसे कामेश की ज़रूरत पड़ती है पर अभी तो कामेश है नहीं इसलिए वो भी जितना हो सके घर से बाहर ही रहेगी थोड़ी देर बाद ही घर के अंदर गाड़ी आने की आवाज हुई वो खुश हो गई थी चलो पापाजी के साथ खाना खाकर वो वापस अपने कमरे में आ जाएगी टाइम बड़े ही धीरे से निकल रहा था पता नहीं क्या हुआ था आज टाइम को बहुत अकेला पन सा लग रहा था बस पापाजी के डाइनिंग स्पेस में पहुँचने का ही इंतेजार था 

30- 40 मिनट बाद ही कमरे का इंटरकम बजा वो जानती थी कि पापाजी डाइनिंग रूम में पहुँच गये है जल्दी से फोन उठाया भीमा चाचा थे 
भीमा- जी बहू आ जाइए बाबूजी आ गये है 

कामया- जी 
और फोन रखते हुए वो डोर खोलकर जल्दी से सीढ़िया उत्तेरने लगी थी डाइनिंग स्पेस पर पहुँकते ही उसे पापाजी नहीं दिखे 
भीमा चाचा खड़े हुए प्लेट लगा रहे थे अचानक ही कामया और भीमा चाचा की नजर एक साथ ही टकराई कामया को बड़ा ही आश्चर्य हुआ पापाजी तो आए नहीं तो भीमा चाचा ने झूठ क्यों कहा 

कामया- पापाजी कहाँ है 
उसकी आवाज में गुस्सा और एक मालकिन का सा रोब था एकटक वो भीमा चाचा की ओर देखते हुए पूछा 

भीमा- जी वो आरहे है 

कामया- तो फिर झूठ क्यों कहा की पापाजी आ गये है 

पापाजी- अरे मैंने ही कहा था वो मोबाइल बज रहा था लेने चला गया था ले कामेश का है तेरा फोन बजके बंद हो गया तो मुझे लगाया 

कामया का सारा गुस्सा एकदम शांत हो गया हाथ में मोबाइल पकड़े हुए उसने एक बार भीमा की ओर देखा जो कि अपनी नजर झुकाए डाइनिंग टेबल से दूर जा रहा था 

कामेश- क्या हुआ अभी भी गुस्सा हो क्या फोन क्यों नहीं उठाया 

कामया- जी वो कमरे में रह गया था नीचे डाइनिंग रूम में हूँ 

कामेश- अच्छा चलो में तो पहुँच गया हूँ कल फोन करता हूँ और सुनो कल शाम को ही करूँगा ठीक है सुबह बहुत टाइट शेड्यूल है ओके… 

कामया- जी और खाना खा लेना 

कामेश- हाँ यार खा लूँगा पापाजी जी कहाँ है 

कामया- जी फोन दूं 

कामेश- अरे रूको नहीं वूवो 

कामया- जी क्या हुआ 

कामेश- अरे यार क्या पापाजी जी को किस करू हाँ… 

कामया का सारा शरीर एक बार फिर से उत्तेजना से भर गया उसके हाथों से फोन छूटते--छूटते बचा उस तरफ से एक लंबी सी किसकी आवाज आई 

कामेश- यह तुम्हारे होंठों के लिया था और करूँ हाँ… 

कामया- रखू वो पापाजी सामने ही है बता दूँगी ठीक है 

और वो झट से अपनी नजर बचाकर खाँसते हुए फोन काट दिया और पापाजी की ओर थोड़ी देर बाद देखते हुए 

पापाजी- क्या बोल रहा था 

कामया- जी वो कह रहे थे कि कल पापाजी के साथ ही चले जाना 
पापाजी- 
कामया को नहीं समझ में आया कि क्या कहे पर किसी तरह से अपने को संभाल कर जो मन में आया कह गई और सिर नीचे करते हुए अपने खाने की प्लेट पर टूट पड़ी थी 

उसका ध्यान खाने में काम फिर से उठ रहे अपने शरीर की हलचल पर ज्यादा था कामेश ने फिर से उसके मन में एक अजीब सी हलचल मचा दी थी कितने मुश्किल से उसने अपने आपको संभाला था फिर कामेश ने ऐसी बात क्योंकी जब वो यहां नहीं है तो कम से कम इस बात का ध्यान रखना था उसे . कामया ने खाना खाते हुए कई बार अपनी जाँघो को जोड़ कर अपने आपको संतुलित करने की कोशिश करती जा रही थी 

पर काम अग्नि कोई दबाने की चीज है वो तो जितना भी अपने को काबू में रखने की कोशिश करती जा रही थी वो और भी उत्तेजित होती जा रही थी उसके मन में पता नही कहाँ से अचानक ही सुबह की घटना भी याद आ गई 

भोला के साथ हुई उस घटना की कैसे वो बिल्कुल असहयाय सी उस वक़्त महसूस कर रही थी और उस सांड़ ने जो चाहा किया वो कुछ ना कर पाई थी पर वो तो शांत हो गया था पर कामया के अंदर एक भयानक सी आग को जनम दे गया था 

वो आग अब अचानक ही एक ज्वालामुखी की तरह उसके शरीर को जला दे रही थी वो खाना तो खा रही थी पर अपने को बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं कर पा रही थी पापाजी भी कुछ कह रहे थे वो सिर्फ़ हाँ या ना में ही जबाब दे रही थी 
बहुत ही धीरे-धीरे टाइम निकल रहा था खाना है कि खतम ही नहीं हो रहा था और पापाजी भी सामने बैठे हुए पता नहीं उससे क्या-क्या बोले जा रहे थे उसका ध्यान बिल्कुल नहीं था पर वो तो अपने आप में ही मस्त होती जा रही थी उसकी नजर के सामने बहुत कुछ घूमने लगा था पता नहीं क्या-क्या भोला से शुरू होकर भीमा तक कैसे भीमा ने उसके साथ पहली बार किया था फिर उसके कमरे में 


फिर लाखा ने गाड़ी चलाते हुए वो तो बिल्कुल ही अनौखा खेल था असल में उसने ही शुरू किया था फिर आज भोला ने तो जैसे उसे पागल ही कर दिया था उस आग में वो अब भी जल रही थी फिर लाखा और भीमा ने मिलकर आआआआआआह्ह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह उसके शरीर में एक लंबी सी सिहरन के साथ मुख से सिसकारी निकल गई थी खाना खतम तो नहीं हुआ था पर उसका मन भर गया था पापाजी की नजर भी उसके ऊपर टिक गई थी 

पापाजी- क्या हुआ खाना नहीं खाया कुछ सोच रही हो 

कमाया- जी नहीं ऐसे ही 

पापाजी- अरे बहू पहली बार गया है ना इसलिए तुझे ऐसा लग रहा होगा तुझे एक काम कर आराम से जाके सो जा एक ग्लास गरम दूध पीले अच्छी नींद आएगी 

कामया- जी पापाजी 

पापाजी- और ज्यादा मत सोचा कर कल से काम में फिर से लग जाएगी तो देखना रात को नींद कैसे आ गई पता ही नहीं चलेगा 

इसी तरह किसी तरह से कामया ने पापाजी के साथ खाना खतम किया और लगभग एक नशे की हालत में लड़खड़ाती हुई अपने कमरे में पहुँची थी वो झट से बाथरूम में घुसी और सलवार उतार कर पोट पर बैठ गई और अपने को रिलीस करने में उसे थोड़ी सी शांति मिली 

वो वही बैठी रही बहुत देर तक और पता नहीं क्या सोचती रही पर बैठी बहुत देर तक रही उसे अपना सिर घूमता हुआ सा लग रहा था खाना खाने बाद भी वो भूखी थी बहुत भूकी सलवार उतारकर वो कमरे में आई और बेड पर लेटी रही फेल कर पर ज्यादा देर नहीं धीरे-धीरे अपने को सिकोड़ती चली गई जैसे अपने को ही अपनी बाहों में भरने की कोशिश करती जा रही हो 

वो ऐसे सिकुड़ कर अपने बिस्तर पर लेटी थी कि जैसे बेड पर जगह ही ना हो अपनी जाँघो को कस कर पकड़े हुए कामया अपना मुँह को उसमें छुपाए हुए थी सांसों को कंट्रोल करती हुई वो अपनी टांगों को भी हिलने से रोके हुए थी पर नहीं इससे कोई फायदा नहीं हुआ 

आआआआआअह्ह, एक लंबी सी सांस छोड़ कर कामया फिर से उठ बैठी पर इस बार अपने कुर्ते को भी उतार दिया और झपट कर अपने तौलिया को उठाकर बाथरूम में फिर से घुस गई थी 

अच्छे से नहाकर अपने को संभालना चाहती थी गरम गर्म पानी से नहाते हुए वो एक अजीब से सुख के सागर में गोते लगाने लग गई थी अच्छे से मल मल कर नहाती रही गरम-गरम पानी उसके शरीर पर गिरते हुए उसे अच्छा लग रहा था बहुत देर तक अपने को शावर के नीचे रखने से थोड़ा सा आराम मिला पर जैसे ही अपने शरीर को अपने हाथों से घिसने लगी अपने शरीर के कसेपन का एहसास फिर से उसे याद आ गया जिस आग को बुझाने की जरूरत थी वो धीरे-धीरे उसके हाथों के स्पर्श से ही बढ़ने लगा था 

वो बहुत ही काबू में रहने की कोशिश करती जा रही थी पर हर बार बात उसके हाथों से निकलती जा रही थी अपने को घिसते हुए वो शावर में ही सिर उठाकर सांसों को छोड़ रही थी अपने चुचियों को धोते हुए वो अब जोर-जोर से उनके आकार के अनुरूप सहलाते हुए ऊपर-नीचे कर रही थी अपने पेट की ओर हाथ ले जात हुए भी उसे बड़ी बेचैनी सी हो रही थी अपने शरीर में उठ रही सिहरन को वो नजर अंदाज करते हुए अपने आपको सहलाने में जो मजा उसे मिल रहा था वो आज तक उसे नहीं मिला था हर कोने को अपने हाथों से सहला रही थी और दूसरे हाथों को वो धीरे-धीरे अपनी जाँघो के बीच में लेजा रही थी बालों के गुच्छे को छूते ही एक लंबी सी आअह्ह, उसके मुख से निकलकर पूरे बाथरूम में गूँज गई थी हाथों को और नीचे नहीं ले जा पाई थी जाँघो को जोड़ कर माथे को वाल पर टिकाए हुए वो अपने शरीर को सिकोड़ती जा रही थी खड़े होना उसके लिए दुभर हो गया था टांगों में शक्ति ही नहीं बची थी घुटनों के पास से पैरों को मोडते हुए वो शावर को चलते छोड़ कर ही बाथटब के किनारे बैठ गई थी बुरी तरह से हाफ रही थी एक हाथ से अपनी चुचियों को सहलाते हुए और दूसरे हाथ से अपनी जाँघो के ऊपर से बालों के गुच्छे को सहलाती रही और हान्फते हुए बहुत देर हो गई थी सांसों को ठीक करने की बहुत कोशिस करने के बाद भी वो उसकी गिरफ़्त में नहीं आई थी थकि हुई सी कामया ने अपनी सांसों को कंट्रोल करना छोड़ कर एक हाथ बढ़ा कर तौलिया को अपनी ओर खींचा और अपने शरीर को ढँकते हुए धीरे-धीरे पोछने लगी बड़ी मुश्किल से उठकर शावर बंद करके तौलिया को लपेट कर धीमे धीमे बाथरूम डोर खोलकर बाहर निकली तौलिया अब तक उसके शरीर के चारो ओर लपेटा हुआ था पर आँखें और चहरे को देख कर लगता था कि किसी जंग से आ रही है 


RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

From Back up

कहते है कि इंसान अपनी भूख से नहीं लड़ सकता चाहे वो पेट की हो या पेट के नीचे की हो

वही हालत कामया की थी बड़ी ही मुश्किल से बाहर तक आई थी और मिरर के सामने खड़ी होकर अपने आपको संवारने लगी थी पहले बालों पर ड्राइयर चलाकर बालों को सूखाया फिर वारड्रोब से एक पतली सी महीन सा गाउन निकाल कर पहन लिया जो कि उसके कंधों के सहारे ही था पतली सी दो डोरी के सहारे वो कामया की चूची के 3्4 साइज़ को उजागर करते हुए जाँघो के आधे में ही ख़तम हो जाता था नशे की हालत में चलते हुए वो बेड के किनारे में जाकर बैठ गई थी और अपनी टांगों को हिलाकर जमीन की ओर देखते हुए कार्पेट को अंगूठे की नोक से खोदने की कोशिश करने लगी थी इतने में ही पास में रखे उसके मोबाइल पर कामेश का फोन आया नजर घुमाकर एक बार हैंडसेट की ओर देखा और हाथ बढ़ाकर उसे उठा लिया
कामया- हाँ…
कामेश- सो गई क्या
कामया- नहीं
कामेश- नाराज हो क्या
कामया- नहीं
कामेश- अरे यार दो दिन में तो आ जाऊँगा फिर मजे करेंगे ना असल में तुम्हारी याद आ रही थी इसलिए फोन कर दिया
कामया- क्यों याद आ रही थी
कामेश- अरे यार रात हो गई ना इसलिए ही ही ही हाँ… हाँ…
कामया-
एक आह सी निकली कामया के मुख से
कामेश- हेलो
कामया- जी
कामेश- नींद आ रही है चलो सो जाओ कल फोन करूँगा ओके… गुड नाइट
कामया- गुडनाइट
फोन कट गया पर कामया हाथों में फोन लिए चुपचाप बैठी हुई जमीन की ओर ही देख रही थी जाँघो को जोड़ जोड़ कर बार-बार वो अपने आपको कही और ही भूलने की कोशिस करती रही पर नहीं हुआ उससे बार बार वो हास्पिटल के बेड के पास का सीन नहीं भुला पा रही थी भोला के लिंग का स्पर्श उसे हाथों में अब तक था गरम और सख्त और मुलायम और मोटा सा लिंग अब तक उसके जेहन में उसके शरीर के हर हिस्से को एक आग में झुलसा रहा था वो मजबूर थी ना चाहते हुए भी बार-बार उसके जेहन में यह बात घर किए हुए थी अब तो उसका सिर भी घूमने लगा था


वो धम्म से बेड पर गिर पड़ी चित होकर अपने हाथों को फैला कर उसने बेड के चारो ओर एक बार देखा कि वो ठीक है कि नहीं और फिर से वो अपनी दुनियां की सैर करने लगी थी कितना मजबूत था भोला और निडर भी किसी बात की चिंता नहीं की उसने अगर उस समय कामेश या कोई और ही आ जाता तो और वो भी बिना किसी डर के बाद में उसका साथ देने लगी थी सोचते सोचते वो फिर से अपने आपको उसी आग में झौंकने लगी थी जिसे वो निरंतर खामोश करने की कोशिश कर रही थी पर हर बार वो कोशिश उसके शरीर को और भी उस आग में धकेल रहा था जिस आग से वो भाग रही थी
हर एक पहलू उसे उस ओर धकेल रहा था जिससे वो भागने की कोशिश कर रही थी लेटे लेटे वो बहुत देर तक अपने बारे में सोचती रही और अपने को कही और ही ले जाने की कोशिश करती रही पर हर बार वो लौट कर वही आ जाती थी जहां से चली थी अपने को संभालते हुए वो एक बार फिर से खड़ी हुई और अपने बेड को ठीक करने लगी थी वो नहीं सोचना चाहती थी उस बारे में नहीं वो अब और इस दलदल में नहीं फँसेगी नहीं वो अब नहीं बहकेगी हाँ… अब वो ठीक से सोच पा रही थी बिल्कुल ठीक कामया ने एक ही झटके में अपने बेड की ठीक करते हुए लाइट बंद करके चुपचाप लेट गई कमरे में बिल कुल सन्नाटा पसर गया था हल्की सी नाइट लैंप की रोशनी थी पूरे कमरे में बहुत ही मध्यम सी सिर्फ़ और सिर्फ़ कामया के सांसों की चलने की आवाज आ रही थी और कुछ नहीं


कामया बेड पर पहले तो फेल कर सोई हुई थी फिर अपने को सिकोड़ कर फिर और भी सिकोड़ कर सोने की कोशिश करती रही आखें बंद करती तो वही भोला का चेहरा उसे याद आता कैसे आखें बंद किए हुए था उस समय जब वो उसके लिंग को सहला रही थी किसी पत्थर की तरह सख्त था आआआआआआह्ह उूुुुुुुुुुुुुुउउफफफफफफफफफफफफफफ्फ़
कामया झट से उठ बैठी नहीं और नहीं सह सकती यह कामेश की गलती है वो क्या करे उसका पति ही उसका साथ नहीं देता तो वो क्या करे शादी के बाद औरत हर एक इच्छा के लिए अपने पति पर ही निर्भर रहती है और वो हमेशा ही उसे अनदेखा करता है क्यों चला गया वो खाने से लेकर हर चीज़ उसे अपने पति से ही चाहिए होता है पर वो तो सिर्फ़ खाने और पहनने तक ही सीमित था असल समय में ही गायब हो जाता था नहीं अब और नहीं सह सकती वो उससे कुछ करना ही पड़ेगा, नहीं तो वो मर जाएगी उसे कोई चाहिए कोई भी उसके तन की आग को बुझाने को कोई भी चलेगा पर चाहिए अभी ही कामया के शरीर में जाने कहाँ से एक फुर्ती सी आ गई थी वो एक झटके से अपनी चादर को अपने शरीर से अलग करके नीचे पड़े हुए सँडल पर अपने पैरों को घुसा लिया और खड़ी हो गई वो अपने रूम से बाहर जाना चाहती थी



उसे इस रूम में घुटन ही रही थी यहां अगर वो ज्यादा देर रहेगी तो पागल हो जाएगी नहीं नहीं उसे बाहर ही जाना है वो धीरे से अपने रूम का दरवाजा खोलकर बाहर आकर खड़ी हो गई सीढ़ियो के ऊपर जाने वाले रास्ते को एक बार देखा नहीं अंदर से एक हल्की सी आवाज आई वो थोड़ा सा रुक गई नहीं वो ऊपर नहीं जाएगी फिर वो धीरे-धीरे चलते हुए नीचे की ओर जाने लगी थी वो एक बात बिल कुल भूल चुकी थी कि वो क्या पहेने हुए थी सिर्फ़ एक छोटा सा शमीज टाइप का गाउन जो कि उसके अंदर का हर हिस्सा साफ-साफ दिखाने की कोशिश कर रहा था ना पैंटी और नहीं ब्रा बस एक हल्का सा गाउन था वो या कहिए एक महीन सा कपड़ा भर था उसके शरीर पर पर वो अपने आपसे नहीं लड़ पा रही थी शायद आज की पूरी रात ही वो अपने आपसे लड़ते हुए गुज़ार देगी सीढ़ियो से नीचे उतरते हुए उसे अपने पूरे घर के सन्नाटे को भी देखती हुई वो बिल्कुल धीमे कदमो से चलती हुई किचेन की ओर बढ़ रही थी किचेन में हल्की सी रोशनी थी


एक-एकदम सन्नाटा कोई नहीं था वहाँ भीमा चाचा अपना काम खतम करके ऊपर चले गये होंगे हाँ… उसने आगे बढ़ कर फ्रीज खोला और एक बोतल निकाल कर धीरे धीरे एक-एक घुट पानी पीने लगी खड़ी हुई एक बार पूरे किचेन की ओर देखा फिर एक घुट फिर थोड़ा इधर उधर फिर एक बोतल रख ही रही थी कि उसे पीछे से एक आहाट सुनाई दी वो थोड़ा सा डरी पर हिम्मत नहीं हुई पलटने की आवाज रुक गई थी फ्रीज का दरवाजा अब भी खुला था और वो झुकी हुई थी झुके झुके ही उसने पलटकर किचेन से बाहर की ओर देखा कामया की सांसें फिर से फूलने लगी थी बिना पीछे पलटे ही खड़ी हुई और फ्रीज के दरवाजे को बहुत ही धीरे से बंद करके वही फिर से खड़ी हो गई उसे नहीं पता था कि पीछे कौन था खड़ी ही हुई थी कि पीछे से दो हाथों ने उसकी कमर से चलते हुए धीरे-धीरे से उसकी चूची को अपनी गिरफ़्त में ले लिया कामया के मुख से एक लंबी सी आआह्ह निकली थी उसने उसे रोकने को कोशिश नहीं की अपने अंदर के द्वंद से वो थक चुकी थी वो नहीं गई थी किसी के पास अगर कोई उसे शांत करना चाहता है तो अब उसे क्यों रोके वो वैसे ही खड़ी रही बल्कि उसके हाथों को अपने हथेलियो से और कस कर पकड़ लिया था अपनी गर्दन को पीछे की ओर धकेल कर उसके कंधों पर टिका लिया था उसे सहारे की जरूरत थी एक बहुत ही मजबूत सहारे की अपनी चूची को बहुत ही धीरे-धीरे दब्ते हुए पा रही थी वो बहुत ही प्यार से
कामया- आअह्ह जोर से दबाओ

- क्यों अपने आपको तकलीफ देती है बहू हाँ…
और एक लंबा सा चुंबन उसके गालों को गीलाकर गया था हल्की हल्की दाढ़ी के सख्त बाल उसके कोमल और नाजुक से गालों को छू रहे थे वो और भी ज्यादा उसकी काम अग्नि को बढ़ा रहे थे वो अब अपने आप में नहीं थी अब तो वो उसके हाथों में थी और सबकुछ न्योछावर था सबकुछ

- इस घर में तेरे गुलामों के रहते क्यों

और एक लंबा सा चुंबन होंठों को होंठों से जोड़ गया और आवाजें एक के अंदर एक गुम हो गई कमाया का गाउन उसकी कमर के ऊपर की ओर उठ गया था पीछे खड़े सख्स के हाथों के कारण उसके हाथ अब उसकी चूची को अच्छे से दबा रहे थे कामया को जरा भी दर्द नही हो रहा था बल्कि बहुत अच्छा लग रहा था पीछे से उस सख्स के लिंग का अहसास भी उसे हो रहा था शायद लूँगी के अंदर था पर साफ-साफ पता था कि वहां कुछ है और बहुत ही उतावला है क्योंकी हर बार वो एक झटका जरूर लेता था कामया का एक हाथ अपने आप पीछे की ओर चला गया था और वो उस लिंग को अपने हाथों में लेना चाहती थी वो लिंग जो उसकी आग को शांत करना चाहता था उसके हाथों के पीछे पहुँचने से पहले ही पीछे खड़े सख्स ने जैसे उसकी मन की बात भाप ली हो एक ही झटके में उसकी धोती नीचे थी और कामया के नितंबों में गरम-गरम और तगड़ा सा लिंग अपने आपको आ जादी से स्पर्श करते हुए पाया उसका हाथ पीछे की ओर गया ही था कि उससे रहा नहीं गया और झट से उसने लिंग को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और बड़े ही उतावले पन के साथ उसे मसलने लगी थी पीछे खड़े सख्स को भी पता था कि कामया को क्या चाहिए वो भी कामया को धकेलते हुए पास में ही प्लॅटफार्म पर झुका कर खड़ा किया और अपने उतावले लिंग को उसके रास्ते पर चलने को छोड़ दिया लिंग अपने आप ही कामया की योनि के द्वार पर अपने सिरे को टिकाए हुए अपने आपको अंदर जाने के धक्के का इंतजार करता तब तक तो कामया ने भी अपनी जाँघो को थोड़ा खोलकर उसे रास्ता दे दिया और एक ही धक्के में लिंग अपने रास्ते चल निकला
कामया- आआआआआआह्ह,

- धीरे बहू कोई सुन लेगा

और बहू के ऊपर झुकते हुए उसके होंठों को ढूँढ़ कर अपने कब्ज़े में किया ताकि उसके मुख से निकलने वाली आवाज बाहर तक नहीं जा सके लेकिन कामया तो जैसे अपने अंदर उस लिंग को पाकर पागल हो गई थी उस सख्स के हर धक्के का साथ क्या दे रही थी बल्कि उसे पीछे की ओर ही धकेल देती थी हर धक्के के साथ वो इतना झुक जाती थी कि उस सख्स का लिंग उसके अंदर तक बिना किसी तकलीफ के बहुत ही अंदर तक समा जाता था

वो सख्स भी शायद पहले से ही बहुत उतेजित था या कहिए कामया के इस तरह से वर्ताव करने से ही, वो बहुत ही जल्दी अपने मुकाम पर पहुँचने वाला था कामया का भी यही हाल था बहुत देर से जो आग उसके शरीर में लगी थी वो हर झटके में उसके हाथों से निकलती जा रही थी उसकी योनि के अंदर एक बहुत ही तेज और बड़ा सा समुंदर का सा जोर बनने लगा था वो जाने कब और कितनी देर तक उसका साथ दे पाएगी वो नहीं जानती थी पर, जो जंगली खेल दोनों खेल रहे थे उसमें कोई भी एक दूसरे का साथ छोड़ने को तैयार नहीं था हाँ पर एक दूसरे से दूर जाने को भी तैयार नहीं थाथे पीछे के हर धक्कों को झेलते हुए वो एक असीम समुंदर में एक झटके से गोते लगाने लगी थी उसके होंठ अब आजाद थे वो एक लंबी सी चीत्कार करते हुए अपनी कमर को और भी तेजी से पीछे की ओर करती जा रही थी और उस सख्स के हर धक्के का जबाब भी दे रही थी वो सख्स भी अपनी सीमा को लगने ही वाला था उसकी पकड़ इतनी कस गई थी, थी कामया की कमर के चारो तरह कि कामया लो लगा था कि उसकी कमर की हड्डी ही टूट जाएगी पर जैसे ही वो सख्स झडा धीरे-धीरे उसकी पकड़ ढीली पड़ती गई और वो उसकी पीठ के ऊपर अपनी जीब और चेहरा घिसते हुए शांत हो गया पर जाने क्या हुआ कि जैसे ही वो सख्स शांत हुआ और अचानक ही उससे दूर भी हो गया पर एक दूसरी जोड़ी हाथों की गिरफ़्त में वो पहुँच गई थी
- बहू थोड़ा और रुक जा पागल कर दिया रे तूने

और फिर से एक लिंग उसकी योनि में धड़-धड़ाते हुए बिना किसी चेतावनी के ही सरसराते हुए घुस गया और फिर एक भयानक सी तेजी और वहशीपन वाला खेल चालू हो गया था और कामया को कुछ समझ में आता तब तक तो शायद वो फिर से गरम-गरम सा महसूस करने लगी थी अपनी योनि में शायद उसे और भी चाहिए था शायद वो इतनी गरम हो चुकी थी कि एक के बाद एक और होने से भी उसे कोई फरक नहीं पड़ता था और वो और भी झुक कर उस सख्स के लिंग को और भी अंदर तक ले जाने की कोशिस करने लगी थी उसके हाथ अब भी प्लॅटफार्म के ऊपर ही थे और पीछे के सख्स ने उसकी चुचियों को जोर से अपनी हथेलियो की गिरफ़्त में ले रखा था वो उन्हें मसलता हुआ लगातार झटके पर झटके दे रहा था हर झटके में कामया के मुख से एक लंबी और सुख के सागर में गोते लगाते हुए एक लंबी सी चीख निकलती थी जो किसी भी आदमी को और भी उत्तेजित कर सकती थी या फिर कहिए कि मुर्दे में भी जान डाल सकती थी पीछे के सख्स के लगातार होने वाले आक्रमण को कामया बिना किसी तकलीफ के झेलती चली गई और अपने मुकाम की ओर फिर से दौड़ लगाने लगी थी हर धक्के में वो चिहुक कर अपनी कमर को और भी मोड़ लेती या पीछे कर देती ताकि वो उस लिंग का कोई भी हिस्सा को मिस नहीं करे जिस तरह से वो खेल चल रहा था उसे देखकर कोई भी कह सकता था कि दोनों बहुत दिनों से भूखे है और किसी तरह से अपनी आग को ठंडा करना चाहते है और वो ही कर रहे थे कामया को अचानक ही अपने अंदर के ज्वार को योनि की ओर आते हुए पाया वो फिर से झरने वाली थी और जैसे ही वो झरने लगी थी पीछे वाले सख्स ने भी अपने लिंग से ढेर सारा वीर्य उसकी योनि में छोड़ दिया और कस कर उसे अपनी बाहों में भर लिया कामया तो जैसे निढाल सी हो गई थी थकी हुई तो पहले से ही थी और अब तो दो बार उसके शरीर के साथ जो वो चाहती थी हो चुका था लगभग लटक चुकी थी उस सख्स की बाहों में अपने आपको प्लॅटफार्म के सहारे अपने हाथों को रखकर लंबी-लंबी सांसें छोड़ती हुई वो अपने को नार्मल करने की कोशिश कर रही थी उसकी योनि में अब तक उस सख्स का लिंग घुसा हुआ था और बीच बिच में जोर का एक झटका दे देता था इतने में एक जोड़ी हाथों ने उसे फिर से सहारा दिया और उसके कंधों को पकड़कर उसे उँचा किया और सामने से उसे अपनी बाहों में भर लिया और कस कर उसके होंठों पर फिर से टूट पड़ा वो कामया के होंठों को अपने होंठों में दबाए उसे चूसता जा रहा था कामया में इतनी हिम्मत नही थी कि उसे मना करती और वो मना करना भी नहीं चाहती थी क्योंकी उसे यह अच्छा लग रहा था उसका शरीर तो ठंडा दो चुका था पर जैसे ही उस सख्स ने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे वो एक बार फिर से उसका साथ देने लगी थी अपने जीब को खोलकर उसके मुख के अंदर तक पहुँचा चुकी थी एक आआआआह्ह सी निकली उसके मुख से शायद उस सुख के लिए थी जो उसे उस सख्स से मिल रहा था एक बार उसने अपनी आँखें खोलकर देखा वो भीमा चाचा थे यानी भीमा चाचा ही वो पहले सख्स थे जिन्होने उसके तन को सुख पहुँचाया था या यह कहिए फिर से उसे उस गड्ढे में धकेल दिया था जिससे वो बच रही थी पर कोई बात नहीं वो अगर नहीं करती तो शायद आज वो पागल हो जाती और जो पीछे है वो लाखा काका है जो अब तक उसे कस कर पकड़कर अपने मुरझाए हुए लिंग को बाहर निकाल चुके थे और उसे ढीला छोड़ दिया था भीमा चाचा के लिए वो अब पूरी तरह से भीमा चाचा की बाँहों में थी और वो कामया को चूमते हुए धीरे-धीरे उसके पूरे शरीर का जाया जा ले रहे थे ऊपर से नीचे तक यानी उसके नितंबों तक जहां तक उनका हाथ पहुँच पा रहा था कभी कभी पीछे से एक और हाथ भी उसकी पीठ पर से रैन्गता हुआ नीचे की ओर आता और उसके नितंबों को छूता हुआ ऊपर की ओर उठ जाता शायद लाखा काका का मन अभी भरा नहीं था और नहीं भीमा चाचा का तभी उसे पीछे से लाखा काका की आवाज सुनाई दी


लाखा- भीमा यहां से चल कमरे में बहू के ले चलते है
और अचानक ही कामया के होंठों को अपने होंठों में सिले हुए वो एक झटके में भीमा चाचा की बाहों में हवा में उठ गई वो अब भीमा चाचा के दोनों हाथों के सहारे थी और किसी मरे हुए शरीर की तरह वो उसे अपनी गोद में उठाए हुए उसके होंठों को चूमते हुए सीढ़िया चढ़ रहे थे कामया अपने अगले राउंड के लिए फिर से तैयार थी उसे आज कोई आपत्ति नहीं थी वो आज शायद एक पूरी फूट बाल टीम को भी खुश कर सकती थी वो अपनी बाहों को कस कर भीमा चाचा के गले के चारो ओर घेर कर अपने होंठों को और भी उनके होंठों के अंदर की ओर घुसाती जा रही थी साथ में चल रहे लाखा काका भी कभी-कभी उसके गोल गोल नितंबों को सहलाते हुए उनके साथ ही ऊपर चढ़ रहे थे कामया दोनों के हाथों का खेलोना थी


आज एक-एक बार उससे खेलने के बाद दोनों ही अपने अंदर के उत्साह को दबा नहीं पा रहे थे और जैसा मन हो रहा था वो वैसा ही उसके साथ करते जा रहे थे थोड़ी देर सीढ़िया चढ़ने के बाद एकदम से भीमा चाचा रुक गये और कामया को लाखा काका के हाथों में सौंप दिया अब कामया लाखा काका की गोद में थी और वो फिर से सीडीयाँ चढ़ने लगे थे अब कामया के होंठ लाखा काका के सुपुर्द थे और वो कामया को गोद में लिए अपने बाहों को कामया के चारो ओर कसे हुए धीरे-धीरे ऊपर चढ़ते हुए उसके होंठ का रस्स पान करते जा रहे थे कामया को कभी-कभी भीमा चाचा के हाथों का स्पर्श भी होता था जाँघो में या फिर टांगों में या फिर अपने नितंबों में पर उसे कोई आपत्ति नहीं थी वो थी ही उनके लिए आज वो उसके खेलने का समान थी जी भर के खेलने का


और वो पूरा साथ दे रही थी अचानक ही वो अपने आपको एक नरम से बिस्तर पर टिकते हुए पाया यानी कि वो अब अपने कमरे में पहुँच गई है और दोनों को अपने दोनों ओर पाया एक के बाद एक उसके होंठों को अपने लिए छीनते जा रहे थे और अपने लार से उसके मुख के अंदर तक भिगाते जा रहे थे उनके हाथ उसके शरीर में जहां तहाँ भाग रहे थे चुचियों से लेकर जाँघो तक और टांगों तक पर कामया को कोई चिंता नहीं थी वो जानती थी कि आज कितनी भी कोशिश करे वो आज अपनी कामग्नी को शांत करके ही मानेगी आज के बाद वो कभी भी आज की स्थिति को नहीं दोहराएगी वो अपने शरीर की भूख के आगे झुक गई थी वो जानती थी कि वो अब कामेश के आलवा भी उसे कोई ना कोई चाहिए जो हमेशा ही उसे शांत कर सके चाहे वो भीमा हो या लाखा या फिर भोला हाँ… भोला क्यों नहीं वो ही तो आज का कल्प्रिट है उसी की वजह से ही तो आज वो इस स्थिति में पहुँची थी उसके दिमाग में जैसे ही भोला का ख्याल आया वो और भी उत्तेजित हो उठी उसकी योनि में एक अजीब सी गुड गुडी होने लगी चाहे वो इन दोनों की हरकत की वजह से हो या फिर भोला के बारे में सोचने की वजह से हो पर वो फिर से पागल सी होने लगी थी वो अपनी जाँघो को जोड़े रखना चाहती थी पर भीमा और लाखा बार-बार उसे अपनी जाँघो को खोलकर अपनी जीब को उसकी दोनों जाँघो को चूमते हुए और चाट-ते हुए उसके ऊपर से नीचे तक चले जा रहे थे इतने में
कामया- प्लीज़ छोड़ो मुझे बाथरूम जनाअ हाईईइ
भीमा तो रुक गया पर लाखा नहीं वो कामया के होंठों को कस कर अपने मुख में दबाए हुए झट से उसे अपनी बाहों में भर लिया

भीमा- छोड़ बहू को कहीं भागी नही जा रही है बाथरूम से हो आने दे 



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

पर लाखा के दिमाग में कुछ और ही था वो झट से कामया को अपनी गोद में फिर से उठा लिया और धीरे से बाथरूम की ओर चल दिया और बाथरूम के डोर को खोलकर उसे पॉट पर बिठा दिया वैसे ही नंगी
लाखा- करले बहू आज नहीं छोड़ूँगा एक मींनट के लिए भी नहीं और खुद भी नंगा उसके सामने खड़ा हुआ अपने लिंग को उसके चहरे पर अपने हाथों से मारने लगा था कामया जिंदगी में पहली बार किसी इंसान के सामने वैसे पॉट पर बैठी थी शायद जिंदगी में अपने पति के सामने भी वो यह नहीं कर पाई थी पर लाखा के सामने वो एक असहाय नारी की तरह पॉट पर बैठी हुई उसके लिंग को अपने चहरे पर घिसते हुए देख रही थी तभी बाथरूम के दरवाजे पर भीमा भी नजर आया और वो भी अंदर आ गया वो भी अपने हथियार को अपने हाथों से सहलाते हुए कामया की ओर देखते हुए अंदर आते जा रहा था कामया से और नहीं रोका गया और वो पॉट पर बैठी बैठी पिशाब करने लगी दोनों के सामने लाखा काका ने जैसे ही आवाज सुनी तो वो थोड़ा सा मुस्कुराए और थोड़ा सा आगे बढ़ कर अपने लिंग को कामया के चेहरे पर घिसते हुए उसके होंठों से घिसने लगे थे कामया जानती थी कि क्या करना है उसने भी कोई आना कानी नहीं की और अपने गिलाबी होंठों के अंदर उस बड़े से लिंग को ले लिया और धीरे-धीरे अपने जीब से उसे चाटने लगी थी लिंग बहुत सख़्त नहीं था थोड़ा सा ढीला था पर आकृति वैसे ही थी मोटा सा और काला सा तभी उसे अपने गालों के पास एक और लिंग आके टकराया वो भीमा चाचा का लिंग था वो अपने होंठों को लाखा काका के लिंग से अलग करके भीमा चाचा के लिंग पर झुक गई और एक हाथ में लाखा काका के लिंग को घिसते हुए दूसरे हाथ से भीमा चाचा के लिंग को पकड़कर अपने मुख के अंदर डाल लिया वो भी थोड़ा सा ढीला था पर उसके हाथों में आते ही जैसे जादू हो गया था वो धीरे धीरे अपने आकार में आने लगा था एक हाथ में लाखा काका का लिंग और दूसरे में हाथों में भोला चाचा का लिंग लिए वो चूस रही थी और पॉट के ऊपर बैठी हुई वो यह सब करती जा रही थी


उसे मना करने वाल कोई नहीं था और नहीं कोई आपत्ति करने वाला वो जो चाहती थी कर सकती थी कैसे भी और कितनी भी देर तक जाने क्यों उसे यह सब अच्छा लग रहा आता एक औरत को दो-दो आदमी एक साथ प्यार करे और उसे कैसा लग रहा हो यह कोई पूछे तो शायद कोई जबाब ना ही मिले पर कामया को यह खेल पसंद आया था वो पूरे तल्लीनता के साथ एक के बाद एक लिंग को अपने होंठ के पास लाती और झट से अपने मुख में घुसाते हुए अपनी जीब से चूसती जाती दोनों खड़े-खड़े नीचे बहू की हरकतों को देख रहे थे और अपने जीवन के सुख से परिचित हो रहे थे वो इस सुख की कल्पना भी नहीं किए थे की बहू उन्हें वो सुख दे जाएगी जिसे भोगने के लिए पता नहीं इंसान क्या-क्या जतनकरता है फिर भी उसे नसीब नहीं होता वो दोनों भी अपने मुख को ऊपर उठाए हुए बाथरूम के अंदर ही कामया को इस खेल का मास्टर बना चुके थे जब जब कामया के होंठ उनके लिंग को चूसकर मुख से बाहर निकालते थे तो एक सिहरन सी उठ जाती थी उनके शरीर में दोनों का लिंग बारी बारी चूसती हुई कामया को अब उनके लिंगो को पकड़ने की जरूरत नहीं थी अब उसने उनको छोड़ कर, चाचा और काका को कमर से पकड़ लिया था और अपने मुख के पास खींचने लगी थी उसकी नरम नरम हथेलिया काका और चाचा के सख़्त नितंबों पर घूम घूमकर उसकी रचना और गोलाई और मर्दाने पन का एहसास भी करने लगी थी कामया फिर से आतुर थी और वो अब तैयार थी अपनी 3री पारी के लिए एक-एक करके दो पारी तो वो खेल चुकी थी पर इस बार वो जरूरत से ज्यादा तैयार थी दोनों चाचा और काका ने उसकी दोनों जाँघो को अपनी टांगों के बीच में दबा रखा था और बहुत जोर लगा कर उसे अपनी जाँघो से ही दबाते जा रहे थे अपने हाथों से दोनों एक के बाद एक उसके सिर और चहरे पर अपनी हथेलियो को फेरते जाते थे शायद अपने प्यार को दिखने का तरीका था या फिर जो सुख कामया उन्हें दे रही थी उसे प्रदर्शित करने का यही एक तरीका था उनके पास कामया अब भी दोनों के लिंग को बारी बारी अपनी जीब और होंठों से चाट-ती और चुबलती जा रही थी और बीच बीच में थक कर अपने चहरे को उनके लिंग के आस-पास घिसते भी जा रही थी अब उसकी जाँघो के बीच से पानी जैसा कुछ बहने लगा था वो तैयार थी और बहुत तैयार वो अब नहीं रुक पा रही थी अपना चहरा उठाकर वो दोनों की ओर देखने लगी थी लाखा और भीमा भी एकटक कामया की ओर ही देख रहे थे
कामया- आअह्ह सस्स्स्स्स्स्शह चाचा आआआअ प्लीज ईईईई अब करो
भीमा- आआह्ह बहू
लाखा- उूुुुुउउम्म्म्मममम
नीचे झुक कर, लाखा ने कामया के होंठों को अपनी गिरफ़्त में लेलिया और कस कर अपनी उत्तेजना को दिखाने लगा था वो एक ही झटके में बहू को फिर से अपनी गोद में खींचकर उठा लिया था और बिना किसी परेशानी के उसे उठाकर बाहर की तरफ लगभग दौड़ता हुआ निकला कामया की दोनों जांघे लाखा काका की कमर के दोनों तरफ से कस गई थी उसे पीछे से भी अपने नितंबों पर दो हथेलियों का स्पर्श सॉफ महसूस हो रहा था जो की उसके गुदा द्वार तक जाते थे और फिर वापस उसके गोल गोल नितंबों का आकार प्रकार नापने में मस्त हो जाते थे वो वैसे ही लटकी हुई अपने रूम में आ गई थी काका का लिंग उसकी योनि और नितंब के बीच में टकरा रहा था और गरम गर्म सा एहसास उसके अंदर एक अजीब सी हलचल मचा रहा था वो जैसे ही रूम में पहुँची लाखा काका ने बिना किसी देर के झट से अपने को बिस्तर पर लिटा लिया और कामया को अड्जस्ट करते हुए उसे ऊपर बिठाकर अपने लिंग को उसकी योनि के अंदर कर दिया लिंग को बिना किसी तकलीफ के एक ही झटके में अंदर तक समा गया जैसे वो रास्ते को जानते थे या फिर वो इतना साफ था कि उसे कोई तकलीफ ही नहीं हुई भीमा चाचा भी पीछे से कामया के नितंबों को अपने हाथों और होंठों से प्यार कर रहे थे और बीच बीच में उसके गुदा द्वार पर भी सहलाते जाते थे कामया के अंदर जैसे एक सेक्स का सागार जनम ले रहा था उत्तेजना के साथ ही एक अजीब सा सुख उसे मिल रहा था जो की आज तक उसने एहसास नहीं किया था जब भी भीमा चाचा उसके गुदा द्वार को छूते वो एक झटके से आगे की ओर होती थी नीचे लेटे लाखा काका को भी इस बात का एहसास होता और वो अपने गंतव्य की ओर एक कदम आगे बढ़ जाते आज पता नहीं क्यों कामया की उत्तेजना शिखर पर थी दो बार झड़ने के बाद भी वो अब तक उत्तेजित थी कि शायद पूरी रात वो इन दोनों के साथ इस खेल में शामिल रह सकती थी पर जो भीमा चाचा कर रहे थे वो उसके लिए नया था वो लगातार उसके गुदा द्वार को छेड़ रहे थे और अचानक ही उनकी एक उंगली भी उसके अंदर चली गई वो एक झटके से आगे की ओर हुई पर कहाँ भीमा की उंगली और भी अंदर तक जाती चली गई वो पलटकर कुछ कहने वाली थी कि लाखा काका की बालिस्ट हथेलियों ने उसकी गर्दन को कस कर पकड़ लिया और अपने होंठों पर झुका लिया वो अपने होंठों को काका के होंठों से अलग नही कर पाई थी और उनका साथ देने लगी थी भीमा चाचा की उंगलियाँ अब धीरे-धीरे उसके गुदा द्वार के अंदर-बाहर होने लगी थी बहुत ही धीरे-धीरे पर वहाँ ल्यूब्रिकेशन ना होने के कारण उसे थोड़ा सा दर्द भी हो रहा था और एक अंजान सा डर उसके जेहन में घर करता जा रहा था वो अपनी कमर को हिलाकर और अपने गुदा द्वार को सिकोड कर भीमा चाचा को रोकने की कोशिश करती जा रही थी अपने हाथों को पीछे की ओर लेजाकर वो अपने गुदा द्वार को ढकने की भी कोशिस कर रही थी पर सब बेकार भीमा चाचा तो अपने काम में लगे हुए थे और अपनी उंगलियों को अब बहुत तेजी से अंदर-बाहर करने लगे थे कामया के मुख से चीख निकलने लगी थी पर जाने क्यों उसे अच्छा भी लगने लगा था वो इस खेल में नई थी पर आगे से लाखा काका अपना कमाल दिखा रहे थे और पीछे से भीमा चाचा उसके अंदर बाहर अपनी उंगलियों को कर रहे थे जिससे कि वो और भी तेजी से आगे पीछे होने लगी थी और बहुत ही तेजी से अपने मुकाम की ओर भागने लगी थी नीचे पड़े हुए लाखा काका की स्पीड भी अब लगभग किसी एंजिन की तरह हो गई थी होंठों को होंठों से जोड़े हुए बिना रुके लगातार झटके पर झटके दे रहे थे अचानक ही कामया को अपने पीछे किसी गाढ़े चिप चिपे तेल जैसी किसी चीज का अहसास हुआ वो कुछ करती इतने में भीमा चाचा के लिंग का एहसास उसे अपने गुदा द्वार पर हुआ वो चौंक गई यह क्या कर रहा है यह पागल वहां भी कोई करता है पर कुछ कहती उससे पहले ही भीमा चाचा का लिंग हल्के से उसके अंदर समा गया वो एक लंबी सी चीख के साथ ही पलट गई पर लाखा की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वो अपने अंदर से उस मान्स्टर को निकालने में सफल तो हो गई पर अपने को नीचे नही ला पाई फिर से वो उस स्थिति में आ गई थी जैसे वो पहले थी पर एक डर उसके अंदर समा गया था अगर फिर से भीमा चाचा ने कोशिश की तो नहीं यह नहीं चलेगा उंगली तक तो बात ठीक थी पर वो नहीं बहुत बड़ा है अगर वो अंदर गया तो तो वो मर जाएगी नहीं मर फिर से जैसे ही वो अपनी जगह पर पहुँची भीमा चाचा की उंगली फिर से उसके गुदा द्वार के अंदर-बाहर होने लगी थी जैसे तैसे अपने मुख को काका के होंठों से अलग करके

कामया- नहियीईईईई चाचा आआआआअ वहां नहीं प्लीज ईईईईई
पर कहाँ भीमा मानने वाला था वो लगातार अपनी उंगली को बहू के अंदर-बाहर करता जा रहा था नीचे से लाखा भी उसे निरंतर धक्के देता हुआ उसे ऊपर-नीचे कर रहा था और अब तो पीछे से भी यही हाल था भीमा चाचा की उंगली तो अब कमाल करने लगी थी कामया की ना नुकर अब बंद थी बल्कि लंबी-लंबी सांसें लेती हुई वो हर झटके के साथ लगातार अपने एक नये मुकाम पर पहुँचने वाली थी तभी शायद नीचे से लाखा ने उसे कस कर जकड़ लिया था और वो उससे लिपट गई थी पर हाँ… अब उसे भीमा चाचा से परेशानी नहीं थी वो अपने लिंग को वहां नहीं डाल रहे थे वो सिर्फ़ अपनी उंगलियों को ही वहां चला रहे थे और तेज और तेज वो अपनी योनि के साथ-साथ अपने नितंबों को भी सिकोड़ कर अपनी उत्तेजना को अंदर तक समेटने की कोशिश में लगी थी कि लाखा काका की गिरफ़्त में वो लगातार हर झटके के साथ अपनी योनि से एक लंबी सी धार लिकलते हुए महसूस कर रही थी पर पीछे का आनंद तो लगा तार बढ़ने लगा था भीमा चाचा की उंगलियां अब उसके गुदा द्वार के अंदर और बहुत ही अंदर तक समा जाती थी और उसे कोई तकलीफ भी नहीं बल्कि उसे तो मजा आने लगा था वो निढाल सी काका के ऊपर लेटी हुई थी पर अपने नितंबों को जरूर पीछे करते हुए भीमा चाचा का साथ दे रही थी और भीमा चाचा भी अब लगातार अपनी स्पीड बढ़ाने लगे थे जो कि एक अजीब सी हलचल उसके अंदर तक मचा रहे थे कामया ने अपनी पूरी जान लगाकर पीछे की ओर एक बार देखा भीमा चाचा अपने लिंग को अपने हाथों में पकड़े हुए झटके दे रहे थे और आगे पीछे कर रहे थे और एक हाथ से वो उसके गुदा द्वार के अंदर अपनी उंगलियां आगे पीछे कर रहे थे एक आवाज उसके कानों में टकराई
लाखा- कमाल की है तू बहू मजा आ गया
कामया- हाँ… आअह्ह और नहीं चाचा आआआआअ प्लीज अजीब सा लग रहा है
भीमा- रुक जा बहू आज के बाद तू कभी मना नहीं करेगी रुक जा इसे पकड़
और थोड़ा सा आगे बढ़ कर उसने अपने लिंग को कामया के हाथों में पकड़ा दिया

तभी नीचे से लाखा हट गया और कामया बेड पर आ गई थी वो अब भी वैसे ही स्थिति में थी पीछे की ओर अपने नितंबों को उठ कर साइड दे भीमा चाचा के लिंग को अपनी गिरफ़्त में लिए हुए अपने गुदा द्वार के अंदर-बाहर होते उनकी उंगलियां के मजे लेते हुए वो और भी नीचे एक ओर झुक गई थी पता नहीं क्या हुआ पर वो अपने आपको संभाल नहीं पाई और अपनी उत्तेजना को फिर से बढ़ते देखकर उसने झट से भीमा चाचा के तकड़े लिंग को झट से अपने मुख के अंदर कर लिया और खूब जोर-जोर से चुबलने लगी अब वो बेड पर थी और उसके नितंब अब पीछे की ओर हो गये थे और वो नीचे झुक कर भीमा चाचा के लिंग पर झुकी हुई थी भीमा चाचा का हाथ अब उसके नितंबों तक ही पहुँच पा रहा था गुदा द्वार उसकी पहुँच से दूर हो गया था पर नहीं वो बची नहीं थी एक उंगली फिर से उसके अंदर समा गई थी पीछे से वो लाखा काका की उंगली थी वो भी वैसे ही बहुत तेजी से उसके अंदर बाहर होने लगी थी और एक साथ उसकी योनि के अंदर भी दो उंगलियां एक पीछे और एक आगे जैसे लगता था कि अंदर से किसी चीज को जोड़ने की कोशिस में थे वो लगातार हो रहे इस तरह के आक्रमण से कामया थक गई थी और उसके अंदर अब इतनी ताकत नहीं थी कि किसी को मना कर पाई ना ही उसके घुटनों में ही इतनी ताकत बची थी कि अपने नितंबों को उँचा उठाकर रख पाई धीरे-धीरे अपने घुटनों को सीधा करते हुए वो बेड पर लेट गई थी कि तभी उसके चहरे पर गरम-गरम वीर्य एक साथ बहुत सारा झटके देता हुआ भीमा का लिंग छोड़ गया वो अपने अंदर उठ रही 4थी बार एक उमंग को शांत होते हुए भी पाया जो कि लाखा काका की उंगलियों का ही कमाल था जो कि अब भी लगातार उसकी योनि और गुदा द्वार के अंदर-बाहर उसी स्पीड से हो रहा था वो अब पीठ के बल लेटी हुई थी और अपने अंदर की उमँगो को हर झटके के साथ अपनी कमर को उठाकर निकाल रही थी अपनी योनि से वो निढाल होकर पड़ी रही और सबकुछ शून्य हो गया बहुत दूर से कुछ आवाज उसके कानों में टकरा रही थी लाखा काका और भीमा चाचा की उसे समझ नहीं आया और वो एक गभीर निद्रा की चपेट में चली गई थी
भीमा- मजा आ गया आज तो
लाखा- हाँ यार गजब की है बहू अपनी पर सताया बहुत इसने
भीमा- अरे तू ही तो बेसबरा हो रहा था मुझे तो पता था की जिस दिन टाइम मिलेगा बहू फिर से अपने पास आएगी
लाखा- हाँ यार तेरी बातों में दम है ही ही
और दोनों धीरे से उस कमरे से बाहर की ओर निकल गये


कामया वैसे ही रात भर अपने बिस्तार पर पड़ी रही उसके शरीर में जब जान आई तो सुबह हो चुकी थी वो एकदम फ्रेश थी सुबह की धूप उसके कमरे में पर्दे से छन कर आ रही थी वो एक झटके से उठी और घड़ी की ओर देखा
कामया- बाप रे 11 बज गये है
झट से बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और फोन उठकर किचेन का नंबर डाईयल किया
भीमा- जी
कामया- पापाजी कहाँ है
भीमा- जी कमरे में तैयार ही रहे है चाय लाऊ बहू
कामया- हाँ… जल्दी
थोड़ी देर में ही डोर में आवाज़ आई और भीमा चाचा पहली बार उसके कमरे में चाय लेकर आए
टेबल पर रखकर वो कामया को देखते हुए
भीमा- कुछ और बहू
कामया- नहीं जाओ
उसकी नजर जब भीमा चाचा से टकराई तो उनके चहरे में एक-एक अजीब सी, शरारत थी और एक मुश्कान भी वो झेप गई और वही खड़ी रही तब तक जब तक वो बाहर नहीं चले गये

जल्दी से चाय पीकर वो तैयार होने लगी बहुत ही सलीके से तैयार हुई थी आज वो टाइट चूड़ीदार था और कुर्ता जो की उसके शरीर के हर भाग को स्पष्ट दिखाने की कासिश कर रहा था हर उतार चढ़ाव को साफ-साफ दिखा रहा था लाल और ब्लच का कॉंबिनेशन था पर ज्यादा ब्लैक था

सिल्क टाइप का कपड़ा था और उसपर एक महीन सा चुन्नी उसके इस शरीर पर गजब ढा रहा था बालों को सिर्फ़ एक क्लुचेयर के सहारे सिर्फ़ पीछे बाँध लिया था और बाकी के खुले हुए थे जोकि उसके स्लीव्ले कुर्ते से होकर गले के कुर्ते के ऊपर पीठ तक आते थे कसे हुए कुर्ते के कारण पीछे से गजब की खूबसूरत लग रही थी कामया एक बार फिर से दर्पण में अपने को निहारने के बाद वो झटके से अपना पर्स उठाकर कमरे से बाहर निकलकर लगभग उछलती हुई सी सीढ़िया उतरने लगी थी पापाजी को डाइनिंग स्पेस पर बैठे देखकर वो थोड़ा सा सकुचा गई थी और धीरे-धीरे कदम बढ़ा कर डाइनिंग टेबल पर आ गई थी
पापाजी- आज बहुत देर तक सोई तुम
कामया- जी वो रात नींद नहीं आई इसलिए
पापाजी- हाँ… जल्दी सो जाया करो नहीं तो सुबह के काम में फरक पड़ जाएगा हाँ…
कामया- जी
और झुक कर अपना खाने में जुट गये थे दोनों बातें काम और जल्दी ही दोनों खाना खतम करके बाहर की ओर हो लिए बाहर लाखा काका हमेशा की तरह नजर नीचे किए दोनों का इंतजार करते मिले पापाजी और कामया के बैठने के बाद झट से ड्राइविंग सीट पर जम गया
पापाजी- लाखा एक काम कर पहले बहू को कॉंप्लेक्स छोड़ देते है और जरा हमें मार्केट की ओर ले चल थोड़ा काम है
लाखा- जी
पापाजी- एक काम करते है बहू तुमको कॉंप्लेक्स छोड़ देता हूँ पहले फिर मुझे थोड़ा मार्केट में काम है जाते हुए तुम्हें लेता हुआ चलूँगा
कामया- जी पर क्या आप वापस आएँगे
पापाजी- हाँ… क्यों
कामया- जी नहीं वो में सोच रही थी कि आप शोरुम चले जाइए जब मुझे आना होगा में आपको फोन कर दूँगी तो आप गाड़ी भेज देना
पापाजी- यह भी ठीक है
कामया- जी
और गाड़ी अपनी रफ़्तार से कॉंप्लेक्स की ओर दौड़ पड़ी कॉंप्लेक्स के बाहर पहुँचते ही वहां एक सन्नाटा सा छा गया था बड़े साहब की गाड़ी जो थी सब थोड़ी देर के लिए अटेन्शन में थे फिर दो एक आदमी दौड़ते हुए गाड़ी की ओर आए पापाजी के साथ कामया भी उतरी जैसे कोई अप्सरा हो हर किसी की नजर एक बार तो कामया के हुश्न के दीदार के लिए उठे ही थे और कुछ आहे भर कर शांत भी हो गये थे

पापाजी के साथ कामया भी आगे बढ़ी और इधर उधर देखती हुई अपने आफिस की ओर बड़ी थी पीछे-पीछे बहुत से लोग पापाजी को ओर उसे कुछ समझाते हुए आगे पीछे बने हुए थे थोड़ी देर बाद ही पापाजी अपने काम से निकल गये और कामया अकेली रह गई आज पहला दिन ऐसा था जब कामया अपने आप कॉंप्लेक्स के काम को अकेला देखने के लिए रुकी थी नहीं तो हमेशा ही कामेश या फिर पापाजी उसके साथ ही होते थे


आफिस में हर कोई कामया मेडम के आस-पास होने की कोशिश कर रहा था हर कोई अपने आवाज में सहद घोल कर और आखों में और चेहरे में एक मदमस्त मुश्कान लिए कामया मेडम को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहा था कामया यह बात अच्छे से जानती थी कि क्यों आज लोग उसके आस-पास और इतनी सारी बातें उससे शेयर कर रहे है कोई कुछ बताने की कोशिस कर रहा था तो कोई कुछ हर कोई अपनी इंपार्टेन्स उसके सामने साबित करने की कोशिश
कर रहा था थोड़ी देर में ही कामया को जो जानना था वो जान चुकी और एक-एक करके सारे लोग उसके केबिन से विदा हो गये अब वो अकेली रह गई थी थोड़ी देर में ही आफिस में सन्नाटा सा छा गया था बाहर चहल पहल थोड़ी सी रुक गई थी वो थोड़ा सा सचेत हुई कि क्या बात है पर जब घड़ी में नजर गई तो लंच टाइम था शायद इसलिए सबकुछ शांत था वो भी चहल कदमी करती हुई अपने केबिन से निकली और आफिस को देखती हुई बाहर की ओर चल दी दौड़ता हुआ उसका चपरासी उसके पीछे आया
चपरासी- मेडम
कामया- हाँ…
चपरासी- जी कुछ
कामया- नहीं नहीं आप जाइए हम थोड़ा सा काम देखकर आते है
चपरासी- जी और चपरासी हाथ बाँधे हुए अपनी नजर नीचे किए हुए पीछे हट गया कामया अपने आफिस से निकलते ही उसने एक नजर पूरी बिल्डिंग में घुमाई हर कही कोई ना कोई काम कर रहा था कुछ लोग खाना खा रहे थे कामया को देखकर थोड़ा सा चौके जरूर पर कामया के हाथ ऊपर करने से वो सहज हो गये और अपने काम में लगे रहे घूमते हुए कामया थोड़ा बाहर की ओर निकली और सामने का काम देखते हुए थोड़ा और बाहर वो देखना चाहती थी कि कॉंप्लेक्स सामने से कैसा देखता है सो वो थोड़ा और आगे बढ़ कर सामने से उसे देखती रही सच में जब बनकर तैयार होगा तो अकेला ही दिखेगा एक नजर घुमाकर उसने कॉंप्लेक्स और मल्टी प्लेक्स की ओर देखा फिर विला की ओर घूम गई वो उसके
बारे में भी थोड़ा बहुत जानने की कोशिस करना चाहती थी आगे बढ़ते हुए साइड की ओर देखती जा रही थी छोटे छोटे झुग्गी टाइप बने हुए थे साइट पर काम करने वाले वर्कर वही रहते थे कुछ गंदे से बच्चे वही रेत और मिट्टी में खेल रहे थे शायद माँ बाप दोनों काम पर थे इसलिए उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था थोड़ा आगे चलने पर वो थोड़ा सा ठिठकी उसे कुछ याद आया वो थोड़ा सा रुकी और एक बार अपने चारो ओर देखती रही उसके शरीर में एक सिहरन सी दौड़ गई हथेलिया आपस में जुड़ गई थी और कदम भारी से होचले थे उसपर किसी की नजर नहीं थी सब अपने काम में व्यस्त थे एक बार फिर उसके कदम आगे की ओर बढ़े और पास में खेल रहे कुछ बच्चो को उसने हँसकर देखा एक छोटी सी लड़की उसके जबाब में मुस्कुराई
कामया- यहां रहती हो
वो लर्की- (मुस्कुराते हुए अपना सिर हिला दिया )
कामया- और कौन रहता है यहां
वो लड़की- (कुछ नहीं कहा बस मुस्कुराती रही )
कामया- अच्छा वो भोला कहाँ रहता है (कामया का गला सुख गया था पूछने में )
झट से पूछकर वो एक बार पीछे घूमकर देखने लगी शायद उसे डर था कि किसी ने उसकी आवाज तो नहीं सुनी



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

उस लड़की ने अपने छोटे से हाथों को उठाकर एक कोने में बनी थोड़ी सी मजबूत सी घर की ओर इशारा कर दिया और आपस में फिर से खेल में मस्त हो गये और एक दूसरे के पीछे भागने लगे कामया उस ओर देखती रही बिल्कुल शांत था वहां का माहॉल बस बच्चो के खेलने और साइट से कुछ आवाजें इधार जरूर आती थी वो अपने कदम को धीरे-धीरे उस ओर बढ़ा रही थी जाने क्यों वो भोला को ढूँढ़ रही थी क्या काम था उसे वो तो अचानक ही उसे याद आ गया था कि कामेश ने कहा था कि कन्स्ट्रक्षन साइट वाले घर में नहीं जाना तो आखिर वो रहता कहाँ है शायद यही देखना चाहती थी वो
थोड़ा आगे बढ़ कर वो जब उस कमरे के सामने पहुँची तो दरवाजा भिड़ाया हुआ सा था थोड़ा बहुत खुला था एक माटमेला सा परदा भी था पकिंग वुड से बना दरवाजा सिर्फ़ कहने को दरवाजा था और कुछ नहीं अंदर कोई हलचल नहीं थी ना कोई आवाज वो थोड़ा सा झुक कर उस दरवाजे के पास जाके हाथों से एक थपकी दी कोई आवाज नहीं शायद नहीं है कामया ने सोचा फिर भी मन नहीं माना एक जोर दार थपकी फिर दी
अंदर से एक तेज आवाज बाहर आई
भोला- कौन है बे
कामया सुन्न रह गई उस कड़कती हुई आवाज को सुनकर जानवर सा वर्ताब है इस भोला का तो सच में इंसान कम जानवर ज्यादा है यह वो बिना कुछ आवाज देकर वापस पलट गई जाने को पर पीछे से आवाज फिर आई

भोला- कौन है साले गोली मार दूँगा अंदर आ ******* (भद्दी सी गाली देकर एक बार फिर से उसकी आवाज गूँजी )
कामया के हाथ पाँव फूल गये थे क्या करे वापस चल देती हूँ क्यों आई यहां मरने दो इसको मर ही जाना चाहिए इसे किसी जानवर से कम नहीं है इतनी बत्तमीजी पर कुछ करती इतने में झट से दरवाजा खुला और सिर्फ़ एक लूँगी पहने भोला उसके सामने अंधेरे में खड़ा था अंदर होने के कारण उसपर धूप नहीं पड़ रही थी और अंदर कोई इतना वेंटिलेशन नहीं था कि अंदर लाइट हो ढीली बँधी हुई लूँगी उसके कमर के चारो और बस झूल रही थी कामया को देखकर एक बार तो भोला भी सन्न रह गया पर एक मुश्कान उसके चहरे पर दौड़ गई और
भोला- आइए मेम साहब क्या बात है आज आप यहां कैसे
कामया थोड़ा सा सहज होकर अपने गले को तर करते हुए इधर उधर देखने लगी थी उसकी सांसें फूल रही थी और स्पष्ट दिख रहा था कि वो बेचैन है

भोला- आइए अंदर आइए यहां तक आई है तो थोड़ा सा पानी पीकर जाइए हाँ…
पर कामया वही खड़ी रही हिली तक नहीं वो अंदर जाना नहीं चाहती थी कितना गंदा सा था वो जगह ब्रिक्स से बना था ऊपर टीन की चद्दर थी रोशनी के नाम पर कुछ नहीं गंदी सी बदबू उसके नाक में घुस रही थी भोला दरवाजे के पास थोड़ी सी जगह बना के खड़ा था एक हाथ से अपनी लूँगी पकड़े जो कि शायद ढीली थी और एक हाथ से दरवाजे से टिक कर उसके सीने और कंधो पर अब भी पट्टी बँधी थी पेट के पास भी कमर के पास छिला हुआ था तभी भोला की आवाज ने उसे चोका दिया

भोला- वहां खड़ी रही तो कोई देख लेगा मेमसाहब कि आप यहां खड़ी है
और कुछ कहती या करती तब तक तो भोला के सख़्त हाथों ने उसे अंदर खींच लिया था वो लगभग चीखती हुई सी अंदर पहुँच गई थी उसकी चुन्नि उसके कंधे से, नीचे गिर पड़ी थी एक तरफ से और लड़खड़ाती हुई सी वो अंदर हो गई भोला ने पीछे से दरवाजा बंद कर दिया और उसके पास से गुज़रते हुए उसके गोल गोल नितंबों पर अपनी हथेलिया फेरते हुए वापस अपने बेड पर जाके लेट गया वैसे ही अधनन्गा
एक सिहरन सी दौड़ गई थी कामया के शरीर में पर हिम्मत करके
कामया- दरवाजा बंद क्योंकिया
भोला- खोल दीजिए मेमसाहब हमें क्या
पर कामया नहीं हिली खोल दो अगर किसी ने देख लिया तो यह कहाँ आ गई वो और क्यों और तो और इस भोला की हिम्मत तो देखो बिना कुछ कहे ही उसके शरीर को भी छू गया और वो कुछ नहीं कह सकी एक आवाज ने उसका ध्यान खींचा भोला अपने पैरों से बेड के पास पड़े हुए टीन के एक चेयर को खींच रहा था और ठीक बेड के पास ला के छोड़ दिया थोड़ा सा उठा और अपने हाथों से थोड़ा सा और आगे खींचा और कामया की ओर देखता हुआ

भोला----बैठिए मेमसाहब इस गरीब के घर में यही है बस

कामया हिली तक नहीं वो जाना चाहती थी पर ना जाने क्यों उसके कदम जम गये थे वो चाह कर भी अपने कदम को हिला नहीं पा रही थी उसकी सांसें फूल रही थी और नाक से सांस लेना दूभर हो गया था पर ना जाने क्यों वो वहां खड़ी थी और भोला कामया को लेटे लेटे देख रह आता लंबी सी खूबसूरत सी कामया काले रंग का टाइट चूड़ीदार पहने एक अप्सरा सी लग रही थी उसकी चुन्नि डल जाने के कारण उसकी गोल गोल गोलाइया उसे साफ-साफ देखाई दे रही थी वो लेटे लेटे उस सुंदरता का रस पान कर रहा था वो जानता था कि कामेश यहां नहीं है और कामया आज फिर उसके पास क्यों आई है वो एक चरित्रहीन मनुष्य था लड़कियों और औरतों के बारे में उसे कुछ ज्यादा ही मालूम था किस औरत को कैसे और कहाँ चोट करने से वो उसके काबू में आएगी वो जानता था

एक हाथ बढ़ा कर उसने फिर से कामया की कोमल सी हथेलियो को पकड़ा और खींचते हुए उसे बेड के पास खींच लिया कामया पहले तो थोड़ा सा जोर लगाकर खड़ी रही पर भोला के शक्ति के आगे वो कुछ ना कर सकी खींचती हुई वो बेड के पास पहुँच गई
कामया- नहीं प्लीज़
भोला- बैठिया ना मेमसाहब कहाँ खो गई है आप कब तक खड़ी रहेंगी
और अपने पैरों से फिर से उस टीन के चेयर को और भी बेड के पास खींच लिया वो अब लगभग उसके पेट के पास पड़ा था कामया का हाथ अब भी भोला की सख़्त गिरफ़्त में था और वो उसे खींचता हुआ सा उस चेयर पर बैठने की कोशिश कर रहा था कामिया ने भी जोर लगाना छोड़ दिया और ना चाहते हुए ही उस चेयर पर बैठ गई थी उसके घुटने बेड की ओर थे और वो बेड को छू रहे थे बैठने में थोड़ी सी असुविधा हो रही थी पर पता नहीं क्यों वो कुछ भी नहीं कर पा रही थी वो चाहती तो कब का यहां से निकल जाती या फिर उस भोला को खींचकर एक चाँटा लगाती और उसकी गुस्ताखी की सजा दे सकती थी पर क्यों वो चुप थी उसे नहीं पता बल्कि वो अपनी सांसों को कंट्रोल करती जा रही थी उसकी सांसें जब से वो यहां आई थी लगातार उसका साथ नहीं दे रही थी वो फुल्ती ही जा रही थी

वो बड़े मुश्किल से अपने सांसों को अपने अंदर थामे हुए थी और निरंतर अपने से लड़ते हुए अपने को सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही थी उसने बैठे ही भोला ने उसकी जाँघो में एक प्यार भरी थपकी दी और मुस्कुराते हुए
भोला- हो यह हुई ना बात बड़ी अच्छी लड़की हो तुम
अचानक मेम्साब से लड़की और वो भी अच्छी यह क्या हो रहा है कामया का शरीर अब सनसना रहा था भोला के गरम-गरम और लोहे जैसे कठोर हाथों ने जब उसके जाँघो को थपकी दी तो वो उसके चूड़ीदार को छूकर उसकी जाँघो तक और बहुत अंदर तक एक अजीब सी सिहरन पैदा कर गई थी चूड़ीदार का कपड़ा भी बहुत मोटा नहीं था कि वो भोला के हाथों की गर्मी को उसके स्किन तक ना पहुँचा सके वो तो लगता था कि सिर्फ़ उसकी स्किन को ही छूकर बैठ गया था
कामया एक बार भोला की ओर देखा और बैठकर अपनी नजरें झुका ली भोला बेड पर लेटा हुआ था सीधा हाथ अब उसके सिर के नीचे था और उल्टे हाथ से वो अपनी कमर से लेकर अपने सीने तक को सहलाते जा रहा था काले काले बाल और उसपर सख़्त मसमेशियो में घिरा वो दानव और बीच बीच में कही कही पट्टियाँ और लाल खून के निशान थे उसके शरीर में कामया का दिल बड़े जोरो से धड़क रहा था पर वो कुछ नहीं कर सकती थी वही किसी बुत की तरह से बैठी आने वाले पल का इंतजार करने के सिवा अब उसकी नजर थोड़ी साफ हो गई थी उसने एक बार भोला की ओर देखा वो अब भी उसे ही एक भूखी नजर से देख रहा था वो झेप गई और कमरे में इधर उधर देखने की कोशिश करने लगी थी बेड के पास एक दुनाली बंदूक रखी थी जो शायद उसकी ही थी और जमीन पर कुछ शराब की खाली बोटल थी कुछ छोटे बड़े प्लेट थे जो कि झूठे थे और कुछ में खाने के बाद सब्जी और हल्दी के दाग अब तक साफ देख रहे थे छोटे प्लेट में शायद कुछ नमकीन के आवसेश बचे हुए थे पूरा कमरा एक अजीब सी दुर्गंध लिए हुए था कही से रोशनी नहीं थी खिड़की भी बंद थी और दरवाजा भी उनके बीच से होती हुई कुछ रोशनी अंदर तक आती थी बस वही थी इतने में भोला की आवाज उसे सुनाई दी
भोला- क्या देख रही है मेमसाहब
कामया-
बस सिर हिला दिया ना करते हुए
भोला- मेरा जीवन तो मेमसाहब आप लोगो के लिए है
और एक अजीब सी हँसी से पूरा कमरा गूँज उठा वो अब भी कामया को घूरता हुआ अपने छाती और पेट को सहला रहा था और एक अजीब सी निगाहे कामया की ओर डाले अजीब सी बातें कर रहा था
भोला- कैसे आई थी मेमसाहब यहां गरीब की कुटिया में हाँ…
कामया क्या कहती कि क्यों आई थी वो एक बार भोला की ओर देखा और फिर जैसे-जैसे वो अपने हाथ अपने शरीर पर चला रहा था उस ओर गोर से देखने लगी फिर अचानक ही झेप कर अपनी निगाहे फेर ली

भोला- हाँ… हाँ… ही ही देखिए मेमसाब सब कुछ आपका ही दिया हुआ है और सबकुछ आपका ही है ही ही ही
कामया को अब थोड़ा सा गुस्सा आ रहा था कुछ नहीं कह रही है तो वो बढ़ता ही जा रहा है जो मन में आ रहा था कहे जा रहा था
कामया- फालतू बातें मत करो (
उसके आवाज में कड़कपन था जो की शायद भोला ने भी पहली बार सुना था थोड़ा सा चुप होकर वो फिर से कामया की ओर देखता हुआ मुस्कुराते हुए अपने सीने से हाथों को घिसते हुए पेट तक ले जाने लगा था उसकी नजर कमी अपर ही टिकी थी और पेट के बाद वो अपनी कमर के चारो ओर अपनी हथेलिया को घुमाने लगा था
भोला- तो कहिए मेमसाहब क्या सेवा करू और कैसे हाँ… ही ही ही
कामया-
भोला- क्या मेमसाहब हम कुछ कहते है तो डाट देती है और आप कुछ कहती नहीं
और भोला का सीधा हाथ फिर से एक बार कामया की जाँघो को छूने लगा और धीरे-धीरे सहलाने लगा था वो धीरे-धीरे अपने हाथों को उसकी जाँघो के जाइंट की ओर बढ़ा रहा था और एकटक कामया के चहरे की ओर देखता भी जा रहा था कामया की आखें भोला की हरकतों को अनदेखा नहीं कर पाई जैसे ही उसका हाथ उसकी जाँघो से टकराया कामया का एक हाथ उसके हाथों पर आ गया और जोर लगाकर उसे हटाने की कोशिश करने लगी थी उसके चहरे में भय के भाव साफ-साफ देखे जा सकते थे वो बार-बार भोला की ओर बड़े ही मिन्नत भरे नजर से देख रही थी पर वो राक्षस तो जैसे दीवाना हो गया था

मुस्कुराते हुए अपने हाथों को ठीक से सहलाते हुए वो एकटक कामया के चहरे की ओर ही देखे जा रहा था
कामया का जोर काम नहीं आ रहा था पर वो क्या करती बैठी रही रुआंसी सी होकर उसे देखकर साफ कहा जा सकता था कि अब कभी भी रो देगी पर भोला का हाथ अचानक ही उसकी जाँघो से हट गया और वो सकते में आ गई गई एक बार उसके तरफ देखती हुई वो अपने कुर्ते को खींचते हुए फिर से जगह में बनाने की कोशिश करने लगी भोला अपने हाथ को फिर से माथे के नीचे ले गया और मुस्कुराते हुए देखता रहा अपने दूसरे हाथों को वो अब भी अपने शरीर पर ही चला रहा था हाँ… थोड़ा और नीचे की ओर ले जाने लगा था ढीली बँधी हुई लूँगी ओपचारिकता भर रह गई थी उसके लिंग के ऊपर का हिस्सा लूँगी से बाहर किया दिख रहा था और घने बालों का गुच्छा तो साफ-साफ वो जान बूझ कर ऐसा कर रहा था बार-बार कामया की ओर देखता हुआ वो ऐसा दिखा रहा था कि जैसे वो उसके शरीर को नहीं बल्कि कामया के शरीर को सहला रहा था उसकी आखें बिल्कुल पत्थर के जैसे हो गई थी और आखों में एक वहशीपन ने जनम लेलिया था कामया का बुरा हाल था वो वहां कैसे बैठी थी वो नहीं जानती थी पर हाँ… उठने की कोशिश तो उसने नहीं की थी सांसों को कंट्रोल करने की कोशिश में ही लगी रही और भोला अपनी कोशिश में लगा था बार-बार अपने कमर के नीचे की ओर उसका हाथ चला जाता था तभी उसने वो किया जिसका की कामया ने सपने में भी नहीं सोचा था एक झटके से अपने बड़े से लिंग को लूँगी के बाहर निकाल कर अपने हाथों से मालिश करने लगा वो अपनी हथेलियो को बार-बार उसके लंबाई के साथ-साथ ऊपर और फिर नीचे की ओर ले जाता था कामया की नजर जैसे ही उसके लिंग पर पड़ी जितनी सांसें उसने रोक रखी थी एक बार में ही बाहर आ गई थी घबराहट से या फिर उत्तेजना से यह तो वही बता सकती थी पर भोला के होंठों पर एकलंबी सी मुस्कुराहट दौड़ गई थी

उसका एक हाथ [फिर से कामया की जाँघो तक आ गया था और अपने सिर को तकिये को फोल्ड करके टिका लिया था कामया की सांसें फूलने लगी थी और फिर से वो अपने हाथों के जोर से भोला के हाथों को हटाने की कोशिश करने लगी थी भोला भी कौन सा हटने वाला था चुपचाप अपने काम में लगा था वो बड़ी ही सरलता से अपने हाथों को घुमाकर अपनी सप्नीली रचना को अपने हाथों से सवारने में लगा था कपड़े के ऊपर से भी उसे कामया की नरम और मुलायम सी जाँघो का स्पर्श उसे अच्छा और लुभावना लग रहा था जितनी भी औरत उसकी जिंदगी में आई होंगी वो तो शायद इस कपड़ों से भी ज्यादा खुरदूरी थी या फिर सख़्त थी पर कामया मेडम का तो कोई सानी नहीं थी इतनी चिकनी थी कि हाथ रखते ही फिसल जाते थे भोला किसी तरह से अपने उत्तावलेपन को ढँके हुए और दबाए हुए मेमसाहब की जाँघो को सहलाते हुए एकटक उसकी और देखे जा रहा था और कामया जो की अपने पूरे जोर लगाने के बाद भी जब भोला के हाथ को को नहीं हटा पाई तो अपने पैरों के जोर से उस टीन की चेयर को ही पीछे की ओर धकेला पर वो गिर जाती अगर भोला के दूसरे हाथ ने कस कर उसके कलाईयों को पकड़ नहीं लिया होता कामया अब पूरी तरह से भोला के गिरफ़्त में थी
भोला- क्या मेमसाहब गिर जाती ना
कामया- प्लीज मत करो प्लीज़
उसकी आवाज में एक गुजारिश थी पर मना कही से भी नहीं था वो चाहती थी कि भोला उसे छोड़ दे पर कोशिश नहीं थी उसकी नरम नरम हथेलिया अब पूरी तरह से भोला के हाथों के ऊपर थी और दूसरा हाथ उसकी गिरफ़्त में था वो भोला की तरफ देखती पर क्या देखती वो तो अधनन्गा सा उसे ही घूर रहा था उसके चेहरे में जो वहशीपन था वो जानकर भी उसकी आखों से आखें नहीं मिला पा रही थी मन्नत तो कर रही थी पर जान नहीं थी उसका लिंग आ जादी से बार-बार झटके ले रहा था वो उसे ढकने की कोशिश भी नहीं कर रहा था बल्कि उसके हिलने से उसकी लूँगी और भी नीचे खिसक गई थी

कामया- प्लेआस्ीईईईईई नहियीईई पल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्ल्लीीआआआआअसस्स्स्स्स्स्स्सीईईईईई हमम्म्ममममममममममममम
भोला की उंगलियां कामया की जाँघो के जोड़ तक शायद पहुँच गई थी इसलिए मनाही के साथ-साथ एक सिसकारी भी उसके मुख से उस कमरे में गूँज गई थी भोला बड़े ही प्यार से कामाया की जाँघो को सहलाते हुए धीरे-धीरे उसकी जाँघो के जाइंट तक पहुँच गया था और अपनी उंगलियों से उसे छेड़ रहा था कामया को उसकी उंगलियों के नाखून जैसे ही टच हुए वो थोड़ा और आगे की ओर हो गई और अपनी जाँघो को खोल दिया ताकि उसे नाखून ना टच हो पर भोला को लगा कि कामया ने उसे रास्ता दिया है वो और भी आगे की ओर बढ़ा और धीरे से अपनी उंगलियों से कामया की योनि को छेड़ता रहा एक गीला पन सा उसकी उंगलियों से टकराया वो जानता था कि कामया को बस थोड़ा सा उत्तेजित करने भर की देर है वो मना नहीं कर पाएगी दूसरे हाथ में कामया की नरम नरम हथेलिया अब तक उसकी गिरफ़्त में थी जो की अब वो धीरे-धीरे अपने लिंग की ओर खींचने लगा था जो की कामया भी लगा रहा था पर वो जार लगाकर अपनी कलाईयो को छुड़ाने की कोशिश भी कर रही थी पर उसमें उतनी जान नहीं बची थी उसके हथेलिया लगभग उसके लिंग तक पहुँच ही चुकी थी और पीछे की ओर से उसकी हथेलियो पर टच भी हो गये थे वो कुछ ना कर पाई थी और जो कर पाई थी वो था कि अपनी मुट्ठी को कसकर बंद करके अपनी कलाईयों को घुमाने लगी थी कि वो उससे टच ना हो पर भोला की ताकत के सामने वो कहाँ तक टिकती आखिर में वही हुआ जो की होना था भोला अपने मकसद पर कामयाब हो गया था कामया की हथेलिया उसके लिंग को छू गई थी और वो अपने हाथों के जोर से कामया की हथेलियो को अपने लिंग पर घिसने लगा था
भोला- हमम्म्म छू लो मेमसाहब कुछ नहीं करेगा आपके लिए बेताब है प्लीज़ मेमसाहब
कामया- नहीं प्लीज छोड़ो मुझे
भोला- थोड़ी देर मेमसाहब प्लीज़ थोड़ी देर के लिए नहीं तो यह शांत नहीं होगा
कामया- नहीं प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज कोई आ जाएगाआआआआआअ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह
भोला- नहीं मेमसाहब कोई नहीं आएगा कोई नहीं आता यहां और मेरे कमरे में साले को मरना है क्या आप चिंता मत करो मेमसाहब
कामया- प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह
पर वो हार चुकी थी उसकी कालाई अब दर्द करने लगी थी अब उसमें ताकत नहीं बची थी भोला की पकड़ इतनी मजबूत थी की उसकी नाजुक कलाई टूट ही जाएगी उसने धीरे से बड़े ही अनमने मन से उसके लिंग को पकड़ लिया और धीरे से दबाने लगी
कामया- दर्द हो रहा है मेरा हाथ छोड़ो प्लीज
रुआंसी सी कामया के मुख से यह आवाज बड़े ही धीरे से निकली
भोला ने झट उसके हाथ को छोड़ दिया और
भोला- माफ करना मेमसाहब गलती हो गई ध्यान नहीं दिया था क्या करू आपको देखता हूँ तो पागल हो जाता हूँ
जैसे ही भोला की गिरफ़्त उसकी कालाई से छूटी उसने झट से अपने हाथों को खींच लिया और उसे दूसरे हाथ से सहलाने लगी पर भोला भी कम नहीं था झट से अपने सीधे हाथों का जोर्र उसकी योनि में बढ़ा दिया और कामया झट से थोड़ा सा आगे हो गई दोनों हाथ उसके सीधे हाथ को रोकने को पर एकटक देखती हुई भोला की आखों से वो आखें नहीं मिला पाई भोला की आखों को देखकर उसे फिर से उसके लिंग की ओर देखा
भोला- क्यों छोड़ दिया मेमसाहब प्लीज
कामया ने बिना कोई ना नुकुर के थोड़ा सा आगे बढ़ कर उसके लिंग को सीधे ही अपनी कोमल सी नाजुक सी हथेलियो के बीच में ले लिया और बहुत धीरे-धीरे दबाते हुए उसकी गर्मी और कडेपन के एहसास को अपने जेहन में समेटने लगी उसकी सांसें तो तेज चल ही रही थी पर अब तो जैसे धड़कन ज्यादा तेज हो गई थी उसकी चुन्नि तो कभी की उसकी जाँघो के ऊपर गिर चुकी थी और उसकी चूचियां कुर्ते के अंदर से बाहर की ओर निकलने को आतुर थी

साँसे रुक रुक कर चल रही थी थोड़ी सी हल्की सी होंठों से एक बार फिर से उसकी आवाज निकली
कामया- प्लीज़ मत करो नाआआ रुक जाओ प्लीज़
भोला- हाँ… तो दा सा मेमसाहब बहुत मन कर रहा है प्लीज़
कामया- प्लीज नहियीईई प्लीज तुम्हारे नाख़ून लग रहे है
झट से भोला के हाथ उसकी योनि से अलग हो गये थे और कामया जैसे एक बार फिर से अधर में लटक गई थी साँसे एक बार फिर से थम सी गई और आखें एक बार फिर से भोला के चहरे पर क्यों इतनी चिंता करता है अगर लग रहा था तो लगे पर उसे ऐसे नहीं रुकना चाहिए था क्यों रुक गया पर अगले ही पाल वो फिर से चौक गई थी भोला उन्ही उंगलियों को अपनी नाक के सामने लेजा कर सूंघने लगा था और फिर अपनी जीब को निकलकर थोड़ा सा चाट कर कामया की ओर देखता रहा कामया की हथेलिया अब भी उसके लिंग पर ही थी और धीरे-धीरे अपने आप उसका कसाव उसपर बढ़ता ही जा रहा था और उसे पता भी नहीं चला पता चला तो सिर्फ़ भोला को क्योंकी उस नरम नरम और कोमल उंगलियों की मालकिन ही थी जिसे वो अब तक अपने संपनो में देखता रहा था और जाने कितनी औरतों के साथ संभोग कर चुका था वो पड़े पड़े अपने दाँये हैंड को फिर से कामया की जाँघो तक ले आया और धीरे-धीरे फिर से उन गोल गोल और कोमल सी जाँघो को फिर से सहलाने लगा बड़े ही प्यार से वो जानता था कि अब कामया भी गरम हो चुकी थी उसके हाथों के कसाव से ही उसे पता चल रहा था और उसके हाथोंके सहलाने से भी कामया के चेहरे पर हर उतार चढ़ाव को वो निरंतर भाँपने में लगा था वो थोड़ा सा और आगे की ओर हो गया था ताकि वो कामया के और नजदीक हो सके उसके पास होते ही कामया के शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई थी क्योंकी कामया के पैर तो बेड से टच थे ही भोला के पास आते ही उसके पेट और सीने के बाल चूड़ीदार पर से होते हुए उसकी टांगों से टच होने लगे थे वो शिहरन से भर उठी थी पर हर बार अपने सांसों को कंट्रोल करती हुई बैठी रही थी पर जैसे ही भोला की उंगलियां फिर से उसके योनि के पास पहुँची वो और नहीं रुक पाई थी एक जोर दार सांस उसके मुख और नाक से एक साथ निकली जो कि एक सिसकारी के रूप में पूरे कमरे को गूँज चुकी थी वो कामया का समर्पण था की इच्छा पता नहीं पर हाँ भोला अब फ्री था उसके हाथों को रोकने के लिए इस बार कामया के हाथ नहीं थे ना जोर लगा रहे थे और नहीं मना कर रहे थे वो तो बस अब उसके बालों के गुच्छे से भरे हुए सख़्त और मजबूत कलाईयो को सहलाते जा रहे थे और अपने चहरे को ऊपर उठाकर अपने अंदर बहुत सी सांसों को भरने में लगी थी


उसकी नजर अब बंद थी पर जानती सब थी कि क्या हो रहा था पर अपनी शरीर में उठ रही काम अग्नि के हाथों मजबूर थी उसकी जांघे अब बहुत खुल चुकी थी और वो अपनी चेयर से आगे की ओर भी होने लगी थी भोला के सख़्त और मोटे-मोटे उंगलियां उसकी योनि को चूड़ीदार के ऊपर से छेड़ रहे थे जो कि उसके अंदर के तूफान को जनम दे रहा था जिसे अब शांत करना ही था और वो ही इसे शांत कर सकता था अगर भोला चाहता तो एक ही झटके में कामया की अपने ऊपर खींच सकता था और वही अपने बेड पर लिटाकर उसके साथ वो सब भी करसकता था पर नहीं उसने ऐसा नहीं किया कर रहा था तो बस इतना की वो कामया की उत्तेजना को और भी बढ़ा रहा था

और कामया उसके बहाने के तरीके में बढ़ती जा रही थी जैसा वो चाहता था उसे करने दे रही थी हाँ उसकी उत्तेजना को जानने का एक ही तरीका था उसके हाथों में जो कुछ था उसे यानी कि भोला का लिंग जो कि अब कामया की नरम उंगलियों के बीच में बहुत ही कसे हुए सा प्रतीत हो रहा था जैसे वो उसे निचोड़ कर रख देना चाहती थी और जोर-जोर से निचोड़ती ही जा रही थी उसकी सांसें लेने के तरीके से ही लगता था कि वो शायद बहुत थकी हुई है और जोर-जोर से सांसें लेती जा रही थी रुआंसी सी होकर कई बार तो खाँसती भी थी पर कोई मनाही नहीं और नहीं कोई ना नुकर हाँ थोड़ा और आगे होकर भोला की ओर इशारा जरूर हो जाता कि आगे बढ़ो सबकुछ तुम्हारा है पर भोला भी बहुत धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ा रहा था जिस चीज की इच्छा उसने की थी वो कोई मामूली चीज नहीं थी और नहीं रोज मिलने वाली चीज थी कामया वो तो एक नाचीज थी जिसकी कल्पना तो सिर्फ़ सपनो में ही हो सकता था या फिर कोई देवता ही कर सकता था किसी स्वर्ग की अप्सरा थी कामया उसकी नजर में सुडोल शरीर की मालकिन एक नम्र और मादक यौवन का मिस्रण लिए हुए एक चलती फिरती बला थी कामया जो कि उसके बेड के पास उसके आगे बढ़ने की राह देख रही थी
और भोला भी अपनी राह पर बढ़ता हुआ आगे की ओर बढ़ता ही जा रहा था वो अब कामया की जाँघो के बीच से आगे बढ़ा और अपनी हथेलियो को उसके पेट के ऊपर से एक बार घुमाकर वापस उसकी जाँघो पर ले आया कामया के मुँह से एक बार फिर से एक लंबी सी सिसकारी निकली और फिर वो हाँफने लगी थी भोला की हथेलिया अब कामया के खाली पेट तक भी पहुँचने लगी थी उसका कुर्ता भी अब उसके हाथों के साथ ही उठने लगा था उल्टे हाथों से वो कामया को संभालने के लिए उसके कंधे तक पहुँचा चुका था और कभी-कभी अपनी कमर को भी एक झटका दे देता था सीधे हाथ से कामया को सहलाते हुए जब वो अपनी उंगलियां उसकी कमर के चारो ओर उसकी खाली स्किन पर घुमाने लगा तो कामया का सिर धनुष की तरह ही पीछे हो गया था और भोला के मजबूत हाथों के सहारे के बिना वो शायद पीछे ही गिर जाती पर भोला ने उसे संभाल लिया था

खाली पेट पर कामया ने पहली बार भोला की खुरदरी उंगलियों का एहसास किया था वो उस स्पर्श को सहन नहीं कर पाई थी और अपनी जाँघो को और खोलकर और भी आगे की ओर हो गई थी भोला के लिंग को कस कर पकड़ रखा था और उसकी पकड़ से अब तो भोला को भी तकलीफ होने लगी थी अपने उल्टे हाथ को वापस लाके उसने कामया की उंगलियों की पकड़ को थोड़ा सा हिलाया और उसे ऊपर नीचे करने का इशारा किया संपनो से जागी कामया की सिर्फ़ थोड़ी सी आखें खुली और फिर अपने कसाब को थोड़ा सा ढीला करके भोला के इशारे को समझ कर अपने हाथों को हल्के से ऊपर-नीचे करने लगी थी पर कसाव तो जैसे उसके बस में नहीं था वो कसता ही जा रहा था उस गरम-गरम लोहे की सलाख पर और तो और जब भोला की उंगलियां कामया के चूड़ीदारर की नाडे को छेड़ने लगी तो कामया जैसे होश में आ गई थी झट से उसका एक हाथ भोला के हाथों को रोकने में लग गया था



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

कामया- नहीं प्लीज
भोला-
कामया- नहीं प्लीज यहां नहीं कोई आ जाएगा प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज
भोला- कोई नहीं आएगा मेमसाहब प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज मना मत कीजिए प्लीज थोड़ी देर और
कामया सिर्फ़ अपने माथे को हिलाकर ही मना कर पाई थी अब की बार जैसे उसकी आवाज गले में कही गुम हो गई थी रुआंसी सी भोला को एकटक देखती जा रही थी और भोला उसके नाडे को खोल चुका था और धीरे से अपने हाथों से उसके चूड़ीदार को ढीलाकरके थोड़ा सा नीचे कर दिया था उसकी सफेद कलर की डिजाइनर पैंटी की सिर्फ़ एक डोरी उसके सामने थी और सफेद कलर की लेस से उसके गोल्डन ट्राइंगल को नीचे तक ढँकी हुई थी अपनी उंगलियों के जोर से भोला ने अपने हाथों को फिर से कामया की जाँघो के बीच में पहुँचा दिया इस बार सलवार उसके बीच में नहीं थी और था तो सिर्फ़ पैंटी का महीन सा कपड़ा जो की उसकी उंगलियों को उसकी योनि के गीले पन को छूने से नहीं रोक पाया था एक उंगली से उसने उसे भी साइड में कर दिया था और झट से अपनी उंगली को कामया के भीतर तक समा दिया था कामया के मुँह से सिसकारी की लड़ी सी लग गई थी और शरीर को पीछे की ओर धकेल्ति हुई अपनी कमर को और आगे और आगे की और धकेलने की कोशिश करने लगी थी शायद वो भोला की उंगलियों के पास जाना चाहती थी पास और पास सांसों का एक तूफान सा उसके अंदर जनम ले रहा था और वो लगातार उसकी नाक और मुख से सिसकारी और आअह्ह के रूप में निकल रही थी गर्म हुई कामया की हथेलिया अब भोला के एक हाथ को और भी अपने अंदर की ओर इशारा कर रही थी और दूसरे हाथ में जो कुछ था हो उसे निचोड़ते हुए बहुत ही तेजी से अपनी ओर खींचने लगी थी उसकी नमर नरम उंगलियों के स्पर्श से तो भोला अपने काबू से बाहर हो ही चुका था आज उसका दूसरा अनुभव था जब मेमसाहब की नाजुक ऑर कोमल उंगलियां उसके लिंग को समेटे हुए थी पर इतनी कामुकता जो मेमसाहब के अंदर छुपी थी वो आज वो पहली बार ही देख रहा था वो अपनी उंगलियों का स्पीड धीरे-धीरे उसकी योनि में बढ़ने लगा था उसके गीले पन से वो जान चुका था कि कामया ज़्यादा देर की मेहमान नहीं है पर वो तो अपने काम में लगा रहा और कामया को जितनी जल्दी शांत कर सकता था करने की पूरी कोशिश करने लगा और उधर कामया भी अपने शिखर पर पहुँचने ही वाली थी उसके शरीर में आचनक ही एक बड़ी सी उथल पुथल मची हुई थी जैसे वो लगातार अपनी योनि की ओर जाते हुए महसूस कर रही थी वो एक झटके से आगे बढ़ी, और झट से अपने एक हाथ को अपने दूसरे हाथ से जोड़ दिया और भोला के लिंग को पूरा का पूरा अपनी हथेलियो में समेटने की कोशिश करने लगी थी


हान्फते हुए कब वो भोला के ऊपर गिर पड़ी उसे पता ही नहीं चला और भोला के पसीने की बदबू या कहिए उस जानवर की खुश्बू जैसे ही उसकी नाक में टकराई वो एक असीम सागार में गोते लगाने लगी थी उसके हाथों की पकड़ अब धीरे-धीरे उस लिंग पर भी ढीली होने लगी थी पर भोला के हाथों की रफ़्तार अब भी कम नहीं हुई थी इसलिए अपने को संभालते हुए उसने भी अपनी पकड़ फिर से उस मजबूत से लिंग को फिर से अपनी गिरफ़्त में ले लिया और बड़ी तेजी से जैसे कि भोला का हाथ चल रहा था उसे चलाने लगी अचानक ही भोला की उल्टे हाथ की गिरफ़्त उसके कंधों से लेकर अपने दूसरे कंधो तक पहुँच गई थी और वो झुकी हुई उसके सीने से चिपक गई थी और भोला के लिंग से गरम-गरम लावा सा उसकी कोमल उंगलियों को छूते हुए नीचे की ओर बह निकला भोला की पकड़ इतनी मजबूत थी कि कामया की सांसें ही रुक गई थी नाक में ढेर सारी पसीने की बदबू के साथ ही उसके दाँत भी भोला के सीने में घुसने की कोशिश करने लगे थे मुख से सांसें लेने की और भोला की पकड़ के आगे लाचार कामया और कर भी क्या सकती थी दोनों थोड़ी देर के लिए वैसे ही पड़े रहे भोला की पकड़ भी सख्ती से कामया की गर्दन के चारो ओर थी और हर झटके में बहुत सा वीर्य वो निकलता जा रहा था कामया के कोमल हाथों की पकड़ भी उसके लिंग पर वैसे ही थी जैसे की पहले थी और वही भोला के पेट और सीने के बीच में अपने सिर का सहारा लिए हुए लंबी-लंबी सांसें छोड़ती हुई वो नार्मल होने की कोशिश कर रही थी भोला का भी यही हाल था


लेटे लेटे बहुत देर बार उनके कानों में एक साथ ही बाहर की हलचल की आवाजें उन तक पहुँचने लगी थी कामया एकदम से सचेत हो उठी और बड़ी ही डरी हुई नज़रों से भोला की ओर देखने लगी थी पर भोला को जैसे कोई फरक ही नहीं पड़ रहा था वो लेटे लेटे कामया के बालों के साथ खेल रहा था अपनी चौड़ी और खुरदरी हथेली को वो कामया के सिर पर घुमा रहा था और उसकी नाक से निकलने वाली सांसों को वो अपने शरीर में महसूस कर रहा था कामया के जोर लगाने से वो भी थोड़ा सा सचेत हुआ और कामया पर से अपनी पकड़ ढीली करदी


कामया थोड़ा सा स्ट्रॅगल करने के बाद उठकर अपनी चेयर पर ठीक से बैठने लगी और धीरे से अपनी हथेलियो को भी भोला के लिंग से आजाद कर लिया अपनी हथेलियों में लगा हुआ वीर्य उसने बेड की चादर पर ही पोन्छ लिया और अपनी चूड़ीदार को पकड़कर ठीक करने लगी उसकी नजर भोला पर नहीं थी पर हाँ बाहर की आवाज पर जरूर थी डर था कि कोई आ ना जाए अपने कपड़ों को ठीक करते हुए जब वो खड़ी हुई तो भोला की नजर चली गई वो एकटक उसे ही देख रहा था उसकी आँखों में अब भी वही भूख थी जो पहले थी अब भी उसकी नजर उसे खा जाने को तैयार थी पर कामया को जाना था आफिस अगर यहां किसी ने देख लिया तो गजब हो जाएगा वो अपने चूड़ीदार को बाँधने के बाद अपनी चुन्नि को नीचे से उठाया और जैसे ही अपने को ढकने लगी कि भोला के एक हाथ ने उसे ऐसा करने से रोक लिया

भोला- रुकिये ना मेमसाहब थोड़ी देर और

कामया- नहीं
भोला की गिरफ़्त चुन्नी से ढीली पड़ गई और कामया ने झट से अपने को ढँक लिया और खड़ी हो गई वो एक बार भोला की ओर देख रही थी और फिर बाहर के दरवाजे की ओर भी उसकी नजर चली जाती थी बाहर के शोर को सुनकर वो डरी हुई थी हिम्मत नहीं हो रही थी कि कैसे जाए बाहर और यह बदमाश तो वैसे ही लेटा हुआ था जैसे कोई चिंता ही नहीं था पर कामया के चहरे पर चिंता की लकीरे साफ देखी जा सकती थी वो कभी भोला तो कभी दरवाजे की ओर ही देख रही थी वो थोड़ा सा चलती हुई दरवाजे तक पहुँची और उसकी गैप से बाहर की ओर देखने लगी थी वहाँ लेबर लोगों का हुजूम लगा हुआ था जो शायद वही रहते है कोई बीड़ी पी रहा था तो कोई कुछ कर रहा था पर हर कोई बाहर ही था कामया के तो होश उड़ गये थे वो पलटकर भोला की ओर देखने लगी चेहरा रुआंसा सा हो गया था रोने को थी वो अब कुछ पल
वो भोला को देखती रही जो अब भी अपने आपको ढके बिना ही वैसे ही लेटा हुआ था उसका मुरझाया हुआ लिंग भी इतना बड़ा था कि वो लगभग तैयार ही दिख रहा था पर कोई चिंता नहीं थी उसे

कामया- सुनो बाहर बहुत लोग है प्लीज़ उठो मुझे जाना है

भोला- मेमसाहब में तो यहां हूँ दरवाजा भी नहीं रोका है फिर

कामया लगभग दौड़ती हुई सी वापस बेड के पास पहुँची थी

कामया- प्लीज किसी ने देख लिया तो में मर जाऊँगी प्लीज मेरी मदद करो

जैसे भोला के शरीर में एक करेंट दौड़ गया था एक झटके से उठा और अपनी लूँगी को अपने कमर में बाँधने लगा एकटक नजर से वो कामया की ओर देखने लगता कामया डर के मारे थोड़ा सा पीछे की ओर हो गई थी

भोला-, मेरे होते मेमसाहब आप चिंता क्यों करती है साली पूरी दुनियां में आग लगा दूँगा लेकिन मेमसाहब आपको कुछ नहीं होने दूँगा ही ही ही

कामया डर के मारे अब तक सिहर रही थी उसकी आवाज उसके गले में ही अटक गई थी खड़ी-खड़ी उसकी टाँगें काँपने लगी थी कैसी मुसीबत में पड़ गई थी और यह भोला तो जैसे कुछ समझता ही नहीं सिर्फ़ डायलाग मार रहा है वो काँपती हुई सी खड़ी-खड़ी भोला की ओर बड़ी ही मिन्नत भरी नजरों से देख रही थी भोला उठकर उसके पास आया और अपने दोनों हाथो को जोड़ कर उसके गालों को अपने हथेलियो में भर लिया और एक नजर उस पर मार मारकर दरवाजे पर पहुँच गया और उसे खोलकर बाहर निकल गया कामया ने जल्दी से अपने को दरवाजे के सामने से हटा कर साइड में कर लिया और बाहर की आवाजें सुनने लगी कड़कती हुई भोला की आवाज ही सुनाई दे रही थी और फिर भगदड़ मची हुई थी

भोला- क्यों काम पर नहीं जाना क्या ################### साले दिहाड़ी माँगते समय तो साले सबसे आगे खड़े रहोगे चलो यहां से और मुझे सोने दो

बाहर फिर से एकदम सन्नाटा सा छा गया था उसकी बड़ी बड़ी गालियाँ जैसे ही उन तक पहुँची सब यहां वहां हो गये थे कुछ देर बाद ही उसे भोला अंदर आके फिर से दरवाजा बंद करते हुए दिखा यह क्या कर रहा है दरवाजा फिर से क्यों बंद कर रहा है उसे जाना है पर आवाज ही नहीं निकली वो एकटक भोला की ओर देखती रही भोला दरवाजा बंद करके एक बार फिर से अपनी लूँगी को खोलकर उसके सामने ही ठीक किया और धीरे-धीरे कामया की ओर बढ़ा कामया झट से थोड़ा पीछे हट गई दीवाल से टिक गई थी अपने पैर जितना पीछे कर सकती थी कर लिया था अब उसके पास जाने की कोई जगह नहीं थी दीवाल पर अपने हाथों से टटोल कर भी देख लिया हाँ दीवाल ही थी वो टिक कर खड़ी भोला की ओर देखती रही सांसें धमनियो को छूकर बाहर आ रही थी जोर-जोर से टिकने की वजह से और काँपने की वजह से धीरे-धीरे उसकी चुन्नी फिर से उसके कंधों से सरकने लगी थी और वो नीचे भी गिर पड़ती अगर भोला ने उसे संभाल नहीं लिया होता उसका सीना बिल्कुल भोला के सामने था और गोल गोल उभारों को अपने आप में छुपाने की कोई भी कोशिश नहीं थी कामया का सारा शरीर फिर से एक बार काँपने लगा था और सांसें रोक कर वो भोला ओर ही देख रही थी जाने क्या करेगा अब यहाँ कितनी देर हो गई है अगर कोई उसे ढूँढते हुए यहां तक आ गया तो वो क्या कहेगी पर भोला ने ऐसा कुछ नहीं किया आगे बढ़ कर धीरे से कामया की चुन्नी को उसके कंधे पर डालकर उसके कंधों को पकड़कर खड़ा हो गया और सीधे उसकी नजर से नजर मिलाकर
भोला- बहुत सुंदर हो मेमसाहब आप ऊपर वाले ने बड़े जतन से बनाया है आपको
और कहते हुए उसके हाथ धीरे से उसकी कमर पर से होते हुए धीरे धीरे उसके पेट पर जब उसकी हथेलिया पहुँची तो कामया थोड़ा सा और भी ऊँची हो गई साँसे बिल्कुल भोला के चहरे पर पड़ने लगी थी बड़ी मुश्किल से उसके मुख से आवाज निकली
कामया- प्लीज मत करो जाना है प्लीज ईईईई सस्स्स्स्शह

भोला- हमम्म्मममममम कितनी सुंदर हो कितनी मुलायम और मक्खन की तरह हो मेमसाहब

कामया- प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज जाने दो बहुत देर हो गई है

भोला- हाँ मेमसाहब देर तो हो गई है पर मेमसाहब क्या करू छोड़ने का मन नहीं कर रहा है और उसके दोनों हाथ अब कामया के शरीर को बड़े ही आराम से सहलाते हुए घूमने लगे थे वो धीरे से एक हाथ से कामया के पेट से होते हुए उसकी पसलियों को छूता हुआ ऊपर की ओर उठ रहा था और दूसरा हाथ धीरे-धीरे उसके गोल गोल नितंबों को सहलाते हुए पीछे से ऊपर की ओर उठ रहा था कामया का सारा शरीर फिर से एक काम अग्नि में जल उठा था वो फिर से तैयार थी पर जैसे ही भोला की मजबूत और कठोर हथेलिया उसकी चुचियों को छूते हुए इधर उधर होने लगी थे उसका सारा सब्र टूट गया था दोनों हाथों से कस कर भोला की मजबूत बाहों को कस कर पकड़ लिया था और अपनी चुचियों को भोला के हाथों में और भी धकेल दिया था पर भोला ने उन्हें दबाया नहीं था पर बड़े ही हल्के हल्के से उन्हें सहलाते हुए उनके आकार प्रकार का जाएजा ले रहा था और उनकी कोमलता को सहजता हुआ उनकी नर्मी के एहसास को महसूस कर रहा था अपने चेहरे पर पड़ती हुई कामया की सांसें अब उसके होंठों पर और नथुनो पर पड़ रही थी वो हल्के से कराहता हुआ
भोला- हाँ… मेमसाहब रुकिये में देखता हूँ फिर आप निकल जाना नहीं तो देर हो जाएगी
और कहता हुआ अपनी जीब को निकालकर उसके गोरे गोरे गालों को चाट कर उसके नथुनो को भी चाटता रहा और उसकी खुशबू को अपने अंदर समेटने की कोशिश करने लगा

भोला- कितनी प्यारी खुशबू है मेमसाहब आपकी हह, म्म्म्मममममम
और धीरे से कामया से अलग होते हुए उसकी दोनों चुचियों को हल्के से सहलाता रहा और दरवाजे की ओर चल दिया कामया की हालत खराब थी दीवाल पर टिकी हुई अपनी सांसों को कंट्रोल करती हुई वो भोला को दरवाजे की ओर जाते हुए देखती रही जैसे उसके शरीर में जान ही नहीं है सांसें रोके हुए वो अपने को ठीक से खड़ा करती तब तक तो भोला दरवाजा खोल चुका था और एक कदम आगे बढ़ाया ही था कि एक लाल रंग की गेंद उसके पैरों के पास लुढ़कती हुई आ गई थी भोला ने एक बार उस गेंद को देखा और एक जोर दार लात लगाई थोड़ी दूर से एक बच्चे की रोने की आवाज आने लगी थी
भोला- चुप यहां नहीं खेलना जाओ घर के अंदर

कामया को जैसे हँसी आई थी वो सिहर कर अपने आपको आगे की ओर धकेल्ति हुई दरवाजे तक आ गई थी भोला अब भी बाहर ही था पीछे की आवाज सुनकर वो पलटा और कामया की ओर देखकर मुस्कुराता हुआ फिर से उसकी ओर बढ़ा और बाहर खड़े हुए ही अपने हाथों को बढ़ा कर उसकी चुन्नी को उसके कंधे पर ठीक से रखता हुआ
भोला- आप साड़ी में ज्यादा सुंदर लगती हो मेमसाहब
उसके गाल में एक थपकी दी और आखों से इशारा करते हुए इस ओर से जाने को कहा कामया नज़र घुमाकर जैसे ही बाहर निकली भोला के हाथों का स्पर्श उसकी जाँघो से लेकर पीछे नितंबों तक होता चला गया था पर वो मुड़ी नहीं नाही इधर उधर देखा बस चलती चली गई और जब आखें उठाई तो अपने को कॉंप्लेक्स के पीछे की ओर पाया यहाँ से भी एक रास्ता अंदर कॉंप्लेक्स की ओर जाता था उसे अचानक वहां देखकर वहां काम करने वाले अचंभित हो गये थे और सिर्फ़ नजर झुका कर खड़े हो गये थे कामया जल्दी से उनको पार करते हुए अपने आफिस की ओर भागी पर रास्ते में उसके केबिन से पहले ही पीओन से उसे आवाज दे दी
पीओन- मेडम जी
कामया हाँ… उउउहह (खाँसती हुई ) हाँ…
पीओन- जी मेडम जी कोई आए हैं आपसे मिलने को में हर कही देख आया मेडम जी पर आप नहीं मिली
कामया- कौन है
पीओन जो कि उसके पीछे-पीछे ही चल रहा था बोला कोई लड़का है कह रहा था भाभी जी कहाँ है
कामया ने एक बार उसकी ओर देखा और पीओन उसके कमरे का दरवाजा खोलकर खड़ा हो गया

अंदर एक लड़का बैठा हुआ था बहुत ही दुबला पतला सा गोरा सा और नाजुक सा बड़ी-बड़ी आखें और किसी लड़की की तरह से दिखने वाला उठकर जल्दी से अपने हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया कामया घूमकर जब अपने सीट पर बैठी और उस सख्स को देखने लगी
कामया- जी कहिए
- जी में ऋषि हूँ धरम पाल जी का लड़का
कामया- ओहो हाँ… हाँ… अच्छा तुम हो
और एक मुस्कुराहट सी उसके होंठों में दौड़ गई थी कामेश ने सच ही कहा था बिल्कुल लड़की छाप है लड़कियों के साथ पला बढ़ा है इसलिए शायद
कामया- हाँ… ठीक है कैसे आना हुआ
और अपने बालों को ठीक करने के लिए जैसे ही पीछे अपने हाथ ले गई तो उसके बालों से क्लुचेयर गायब था पता नही कहाँ गिर गया था खेर अपने साइड के बालों को लेकर बीच में एक गाँठ बाँध लिया उसने और ऋषि की ओर देखती हुई फिर से बोली
कामया- हाँ… बताओ
ऋषि- जी वो पापाजी ने कहा था कि आपसे मिल लूँ
क्माया के होंठो एक मधुर सी मुस्कान फेल गई थी
कामया- हाँ… और मिलकर क्या करूँ हाँ…
ऋषि- हिहिहीही जी पापा कर्हते है कि भाभी बहुत स्मार्ट है उनके साथ रहेगा तो सब सीख जाएगा हिहिहीही
कामया- हिहिहीही क्या सीख जाओगे हाँ…
ऋषि झेप कर इधर उधर देखने लगा और फिर से हिहीही कर उठा
कामया- हाँ… आज तो मुझे जाना है एक काम करो तुम कल आ जाओ हाँ… फिर देखते है ठीक है
ऋषि किसी स्कूली बच्चे की तरह से झट से खड़ा हो गया और हाथ बाँध कर जी कह उठा
ऋषि- तो में जाऊ
कामया- हिहीही हाँ… कहाँ जाओगे हाँ…
वो भी ऋषि को एक बच्चे की तरह ही ट्रीट कर रही थी
ऋषि-, जी घर और कहाँ और आप
कामया- घर क्यों
ऋषि- फिर कहाँ जाऊ
कामया- हाँ… अभी तो आए हो फिर घर चले जाओगे तो कोई पूछेगा तो क्या कहोगे
ऋषि- घर पर में ही हूँ और सभी तो दीदी के यहां गये है
कामया- हाँ… हाँ… याद आया तो चलो ठीक है
और अपना मोबाइल उठाकर पापाजी का नंबर डायल करने ही वाली थी कि
ऋषि- आप कहाँ जाएँगी भाभी
कामया- में शोरुम जाउन्गी क्यों
ऋषि- कैसे गाड़ी चलानी आती है आपको
कामया- नहीं ड्राइवर को बुला लूँगी इसलिए पापाजी को फोन कर रही हूँ
ऋषि- में छोड़ दूं आपको में वही से तो जाऊँगा
कामया- हाँ ठीक है लेकिन तुम्हे तकलीफ तो नहीं होगी
ऋषि- हिहीही नहीं क्यों कौन सा मुझे आपको उठाकर ले जाना है हिहिहीही
कामया को भी हँसी आ गई थी उसके लड़कपन पर हाँ… बिल्कुल बच्चा था बस बड़ा हो गया था शायद लड़कियों के साथ पालने से ही यह ऐसा हो गया था घर में सभी बड़े थे यही सबसे छोटा था इसलिए शायद वो अपना पर्स उठाकर ऋषि के साथ बाहर निकली और उसी के साथ शोरुम की ओर बढ़ चली

रास्ते में ऋषि भी उससे खुलकर बातें करता रहा कोई अड़चान नहीं थी उसे भाभी के साथ बिल्कुल घर जैसा ही माहॉल था उसके साथ इस दोरान यह भी फिक्स हो गया कि कल से वो ही भाभी को लेने आएगा और दोनों कॉंप्लेक्स का काम देखेंगे और दोपहर को वो ही भाभी को शोरुम भी छोड़ देगा

कामया को भी ऋषि अच्छा लगा और दोनों में एक अच्छा रिस्ता बन गया था पापाजी से भी मिलवाया ऋषि थोड़ी देर तक बैठा हुआ वो भी उनके काम को देखता रहा और बीच बीच में जब उसकी आखें कामया से मिलती तो एक मुश्कान दौड़ जाती उसके चहरे पर

पूरा दिन कब निकल गया कामया को पता भी नहीं चला और शोरुम बंद करने का टाइम भी आगया रात को जब वो वापस घर पहुँची तो सबकुछ वैसा ही था जैसा जाते समय था कोई बदलाब नहीं पर जब कामया डाइनिंग रूम को क्रॉस कर रही थी तो अचानक ही उसकी नजर टेबल पर रखे ताजे और लाल पीले फूलो के गुच्छे पर पड़ी और वो चौक गई थी

पापाजी की नजर भी एक साथ ही उन गुलदस्ते पर पड़ी यह यहां कौन लाया और क्यों भीमा के अलावा और कौन रहता है इस घर में

पापाजी की ओर देखते हुए वो कुछ कहती पर
पापाजी- अरे भीमा
एक उची आवाज गूँज उठी थी भीमा जो की किचेन में था दौड़ता हुआ बाहर आया और नजर नीचे किए वहां हाथ बाँधे खड़ा हो गया

भीमा- जी
पापाजी- यह फूल कौन लाया

भीमा- जी वो फूल वाला दे गया था बाबूजी कह रहा था मेमसाहब के लिए भिजवाया है

पापाजी- अच्छा हाँ…
और वो अपने कमरे की ओर चल दिए पर कामया वही खड़ी रही मेमसाहब मतलब वो नजर उठाकर एक बार भीमा की ओर देखा तो वो गर्दन नीचे किए

वापस किचेन की ओर जाते दिखा वो जल्दी से उन फूलो के पास पहुँची और किसने भेजा था ढूँढने लगी थी कही कोई नाम नहीं था पर एक प्रश्न उसके दिमाग में घर कर गई थी किस ने भेजा उसे फूल आज तक तो किसी ने नहीं भेजा है कौन है

इसी उधेड़ बुन में वो अपने कमरे में पहुँची और चेंज करने लगी थी बाथरूम से जल्दी से तैयार होकर निकली थी कि नीचे जाकर खाना खाना है पर मोबाइल पर रिंग ने उसे एक बार फिर से जगा दिया शायद कामेश का फोन है सोचते हुए उसने फोन उठा लिया पर वो किसी नंबर से था

अरे यार यह कंपनी वाले भी ना रात को भी परेशान करने से नहीं चूकते, बिना कुछ सोचे ही उसने फोन काट दिया पर फिर वो बजने लगा क्या है कौन है वो हाथों में सेल लिए सीढ़ियो तक आ गई थी नीचे डाइनिंग स्पेस पर पापाजी भी आते दिख रहे थे
कामया ने आखिर फोन उठा लिया
कामया- हेलो
- फूल कैसे लगे मेमसाहब
कामया-
कामया जैसे थी वैसे ही जम गई थी यह और कोई नहीं भोला था इतनी हिम्मत तो सिर्फ़ वही कर सकता था और फोन भी राक्षस है शैतान है वो वही खड़ी हुई सकपका गई थी और कुछ सूझ नहीं रहा था पर नीचे से पापाजी की आवाज उसके कानों में टकराई तो वो संभली और झट से फोन काट कर जल्दी से डाइनिंग रूम में आ गई थी खाने खाते समय वो सिर्फ़ भोला के बारे में ही सोच रही थी क्या चीज है वो और कितनी हिम्मत है उसमें

जरा भी डर नहीं कि मुझे फोन कर ले रहा है वो भी रात में पर कामया के शरीर में एक तरंग सी दौड़ गई थी जैसे ही भोला का नाम उसके जेहन में आया था वो खाना तो खा रही थी पर उसे उस समय की घटना फिर से याद आ गई थी ना जाने क्यों बार-बार मन को झटकने से भी वो सब फिर से उसके सामने बिल्कुल किसी पिक्चर की तरह घूम रहा था

वो खाते खाते अपने आपको भी संभाल रही थी और अपने जाँघो के बीच में हो रही हलचल को भी दबाने की कोशिश करती जा रही थी पर वो थी कि धीरे-धीरे रात के घराने के साथ ही उसके शरीर में और गहरी होती जा रही थी वो एक बार फिर से कामुक होने लगी थी खाना खाना तो दूर अब तो वो अपने सांसों को कंट्रोल तक नहीं कर पा रही थी उसका दिल धड़क कर उसके धमनियो से टकराने लगा था पर किसी तरह से अपना खाना पूरा करके वो भी पापाजी के साथ ही उठ गई थी
पापाजी- कुछ सोच रही हो बहू
कामया- जी नहीं क्यों
पापाजी- नहीं खाना नहीं खाया ठीक से तुमने
कामया- जी वो भूख नहीं थी पता नहींक्यों
पापाजी---वो चलते समय काफी पी ली थी ना शायद इसलिए
कामया- जी
कामया ने पापाजी को झूठ बोला था पर क्या वो सच बता देती छी क्या सोचती है वो पर अब क्या वो तो अपने कमरे में जाने लगी थी पर क्या करेगी वो कमरे में जाकर कामेश तो है नहीं फिर

नहीं वो नहीं जाएगी कही वो जल्दी से अपने कमरे में घुस गई और सारे बोल्ट लगा दिए और कपड़े चेंज करने लगी थी पर बाथरूम में घुसते ही फिर से भोला का वो वहशी पन वाला चेहरा उसके सामने था उसके लोहे जैसा लिंग और हाथों का स्पर्श उसके पूरे शरीर में एक बार फिर से धूम मचा रहे थे वो बार-बार अपने को उस सोच से बाहर निकालती जा रही थी पर वो और भी उसके अंदर उतरती जा रही थी

वो फिर से उसी गर्त में जाने को एक बार फिर से तैयार थी जिससे वो बचना चाहती थी पर हिम्मत नहीं थी अपने कमरे में चेंज करने के बाद बैठी हुई कामेश के फोन का वेट करती रही पर उसका फोन नहीं आया वो एक बार दरवाजे के पास तक हो आई कि कोई आवाज उसे सुनाई दे तो कुछ आगे बढ़े पर शायद खाने के बाद सब सो गये थे पर लाखा और भीमा क्या वो भी क्या उन्हें भी इंतजार नहीं था पर क्या वो उनके पास चली जाए या क्या करे उनका इंतजार
हां इंतेजार ही करती हूँ आएँगे वो वो एक बार फिर उठी और हल्के से दरवाजे को अनलाक करके वापस आके बेड पर लेट गई और इंतजार करने लगी बहुत देर हो गई थी लेटे लेटे कामया का पूरा शरीर जल रहा था वो लेटे लेटे भोला के बारे में सोच रही थी और उसी सोच में वो काम अग्नि की आग में जलती जा रही थी और वो उसे शांत करने का रास्ता ढूँढने भी लगी थी पर कहाँ लाखा और भीमा तो जैसे मर गये थे कहीं पता नहीं था आखिर थक कर कामया खुद ही उठी और अपना बेड छोड़ कर धीरे से अपने कमरे के बाहर निकली महीन सा गाउन पहने हुए अपने आपको पूरा का पूरा उजागार करते हुए वो खाली पाँव ही बाहर आ गई थी

वो सीढ़ियो पर उतरती हुई और गर्दन घुमाकर ऊपर भी देखने की कोशिश करती रही पर कोई नहीं दिखा और नहीं कोई हलचल वो अपने आपको संभालती हुई बड़े ही भारी मन से अपने को ना रोक पाकर धीरे-धीरे अपने तन की आग के आगे हार कर सीढ़ियाँ चढ़ रही थी हर एक कदम पर वो शायद अंदर से रोती थी या फिर वापस लोटने की कोशिश करती थी पर पैरों को नहीं रोक पा रही थी वो कुछ ही सीढ़िया शेष बची थी कि पीछे से एक आहट सी हुई उसने पलटकर देखा तो भीमा चाचा ऊपर की ओर ही आ रहे थे यानी भीमा चाचा का काम खतम नहीं हुआ था अब ख़तम हुआ है यानी कि उसे भी जल्दी थी



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

अगर थोड़ा और इंतजार करती तो हो सकता था कि वो ही उसके पास आ जाते और भीमा भी एकदम से जहां था वहां ही रुक गया एक बार पीछे पलटकर देखा और धीरे-धीरे कामया की ओर बढ़ने लगा कामया तो जैसे जम गई थी वो लगातार भीमा चाचा को अपने पास आते हुए देखती रही और आते आते उनकी बाहों मे जैसे अपने आप ही पहुँच गई थी पीछे से जैसे ही भीमा चाचा ने उसे बाहों में भरा एक लंबी सी सिसकारी उसके होंठों से निकली और वो भीमा चाचा के शरीर से चिपक गई थी वो वही खड़ी रही और अपने महीन से गाउनके होते हुए भी भीमा चाचा के शरीर की गर्मी को अपनी स्किन पर महसूस करती रही वो धीरे से अपनी हथेलियो को भीमा चाचा के बड़े-बड़े और मजबूत हाथों के
ऊपर रखकर उन्हें सहलाने लगी थी वो धीरे से अपने सिर को पीछे करते हुए अपने समर्थन का और अपने समर्पण का इशारा दे चुकी थी हाँ… वो यहां आई ही इसलिए थी तो शरम कैसी उसे शांति चाहिए थी और परम आनंद के सागर में वो एक बार फिर से गोते लगाने को तैयार थी उसके अंदर की सारी झिझक और शरम ना जाने कहाँ हवा हो चुकी थी अब वो एक निडर कामया थी और एक सेक्स की भूखी औरत और उसके पास एक नहीं दो-दो मुस्टंडे थे उसके तन की आग को बुझाने को

बस उसे तैयारी करनी थी की कैसे और कितनी देर तक वो टिक सकती है और वो तैयार थी पूरी तरह से अपने होंठों को वो सिर को पीछे करते हुए भीमा चाचा के खुरदुरे गालों पर अपने से ही घिसने लगी थी छोटे छोटे बालों के होते हुए भी उसे कोई चिंता नहीं थी बल्कि उसे वो अच्छा लग रहा था साफ और चिकनी त्वचा अब उसे अच्छी नहीं लगती थी उसे तो जानवरों के साथ रहने की आदत पड़ चुकी थी और अपने को उसी हाल में खुश भी पाती थी भीमा चाचा की हथेलिया पीछे से होकर कामया के पेट से होते हुए उसकी चुचियों तक आ गई थी और धीरे धीरे उन्हें सहलाते जा रहे थे कामया के होंठ भीमा के होंठों से मिलने को आतुर थे और वो अपने सिर को बार-बार घुमाकर भीमा के होंठों के आस-पास अपने होंठों को घिसते जा रही थी भीमा भी कामया के इशारे को समझकर धीरे से अपने होंठों को उसके होंठों पर रखता हुआ
उसके होंठों को चूमने लगा था और बहुत ही हल्के और स्वाद लेता हुआ वो कामया के होंठों का रस अपने अंदर उतारता जा रहा था उसके हाथों पर आए कामया के शरीर के हर हिस्से को वो अपने कठोर हाथों से छूता और सहलाता हुआ ऊपर से नीचे और फिर ऊपर की ओर ले जाता था वो कामया के आतुर पन से वाकिफ नहीं था पर आज कुछ खास था वो नहीं जानता था कि क्या पर वो महसूस कर सकता था उसके किस करने की स्टाइल से और उसके शरीर से उठ रही तरंगो से उसकी सांसें फेकने के तरीके से और अपने शरीर को उसके हाथों के सपुर्द करने के तरीके से आज भीमा भी कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गया था अपने हाथों को ऊपर ले जाते हुए वो कामया की जाँघो के बीच से सहलाता हुआ उसके छोटे से गाउनको अपने हाथों के साथ ही उठाता चला गया और उसे नंगा करता चला गया भीमा के हाथों को अपने शरीर पर से घूमते हुए जब वो कामया के उभारों तक पहुँचे तो उसके निपल्स अपनी उत्तेजना को नहीं छुपा पाए थे वो इतने कड़े हो चुके थे कि एक हल्के से दबाब से ही कामया के मुख से निकली सिसकारी और झटके से पलटने की वजह बन गये थे वो झट से पलटकर भीमा के होंठों पर फिर से चिपक गई थी एक सीढ़ी ऊपर होने की वजह से कामया अपने आपकोआज थोड़ा सा उँचा महसूस कर रही थी और अपनी पूरी जान लगाकर भीमा चाचा के होंठों पर टूट पड़ी थी कामया की उत्तेजना से ही लगता था कि आज की रात एक कयामत की रात होगी और बहुत कुछ बाकी है जो कि पूरा करना है हाथों के स्पर्श से भीमा के हाथ उसके गाउनको उसके कंधों तक ले आए थे और धीरे धीरे उसकी गर्दन से बाहर करने की कोशिश में थे पर कामया के होंठ तो जैसे उसके होंठों से चिपक गये थे और कामया उन्हें छोड़ने को तैयार नहीं थी पर एक झटके से गाउन भी बाहर था और फिर भीमा के होंठ कामया की गिरफ़्त में थे

वो पागलो की तरह से अपने आपको भीमा चाचा की ओर धकेलती हुई और अपने को उनपर घिसती हुई उनपर गिरी जा रही थी और भीमा के चारो ओर किसी बेल की तरह से लिमटी हुई थी वो अपने टांगों को उठाकर भी भीमा की कमर के चारो ओर से उसे कसने की कोशिश करती जा रही थी अब उसके शरीर पर सिर्फ़ एक वाइट कलर की लेस वाली पैंटी ही थी पर उसे कोई चिंता नहीं थी इस घर की बहू सीढ़ियो पर अपने नौकर के साथ रात को अपने शरीर की आग को ठंडा करने की कोशिश में थी उसे कोई चिंता नहीं थी थी तो बस अपने शरीर की जला देने वाली उस आग की जो उसे हर पल अपने आपसे अलग करने की कोशिश करती थी वो परेशान हो चुकी थी अपने से लड़ते हुए और अपने पति के अनदेखे पन से वो अब फ्री है और वो अब अपने को नहीं रोकना चाहती थी इसलिए भी आज वो अपनी उत्तेजना को छुपाना नहीं चाहती थी बल्कि खुलकर भीमा चाचा का साथ दे रही थी जैसे अपने पति का साथ देती थी आज उसे कोई डर नहीं था और ना ही फिकर आज वो सब करेगी जो वो करना चाहती है और अपने आपको नहीं तड़पाएगी हाँ… अब और नहीं बहुत हो चुका है इसी सोच में डूबी कामया कब भीमा चाचा की गोद में चढ़कर आगे की ओर बढ़ने लगी थी उसे नहीं पता चला वो तो अपनी दोनों जाँघो को भीमा की कमर के चारो ओर कस के जकड़े हुए अपनी योनि को उसके लिंग के पास ले जाने की कोशिश में लगी हुई थी उसे पता ही नहीं चला कि कब भीमा की गोद में चढ़े हुए वो उसके कमरे में पहुँच गई वो तो लगातार भीमा को उत्तेजित करने में लगी थी कि जैसे भी हो उसका लिंग उसे छू जाए और वो हासिल कर सके पर एक आवाज ने उसे वर्तमान में ले आया पीछे से एक आवाज
- अरे
और फिर दो हाथों ने उसे पीछे से भी सहलाना शुरू कर दिया कामया समझ गई थी कि वो लाखा काका है और उसे इस तरह से देखकर उनके मुख से निकला होगा पर वो तो जैसे सबकुछ भूल चुकी थी वो लगातार भीमा चाचा के होंठों पर टूटी हुई थी और अपनी कमर को उसके पेट पर रगड़ रही थी पर एक जोड़ी हाथों के जुड़ने से उसकी मनोस्थिति कुछ और भी भड़क उठी थी वो हाथ उसके पीठ से लेकर उसके नितंबों तक जाते थे और फिर जाँघो को सहलाते हुए फिर से ऊपर की ओर उठने लगते थे अब तो होंठ भी जुड़ गये थे पीछे से और जहां जहां वो होंठों को ले जाते थे गीलाकरते हुए ऊपर या नीचे की ओर होते जाते थे कामया की कमर से धीरे-धीरे पैंटी का नीचे सरकना भी शुरू हो गया था वो अपने को भीमा चाचा के गोद से आजाद करते हुए पीछे के हाथों को आ जादी दे चुकी थी और फिर एकदम से वो भीमा चाचा के होंठों को छोड़ कर अपने होंठों को पीछे की ओर ले गई थी शायद सांसों को छोड़ने के लिए पर दोनों के बीच में फासी हुई कामया के होंठों को पीछे से लाखा काका ने दबुच लिया और अपने होंठों से जोड़ लिया था कामया की सांसें भी लाखा काका के अंदर ही छूट-ती चली गई थी और पूरा शरीर किसी धनुष की भाँति पीछे की ओर होता चला गया था लाखा काका के चुबलने से और भीमा काका के हाथों के सहलाने से वो अब अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी
कामया- करो प्लीज जल्दी करो

भीमा और लाखा को जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दिया था वो अपने काम में लगे हुए थे उस हसीना के शरीर के हर हिस्से को अपने हाथों और होंठों से छूते हुए बिना किसी रोकटोक के बिंदास घूम रहे थे आज का खेल उनके लिए बड़ा ही अजीब था वो इस घर की बहू अपने अंदाज में आ गई थी और जल्दी से अपने शरीर की आग से छुटकारा पाना चाहती थी कामया का एक हाथ लाखा काका को पीछे से अपने ओर खींचे हुए था और एक हाथ से वो भीमा चाचा की गर्दन के चारो ओर किए उन्हें भी खींच रही थी शरीर के हर हिस्से पर उनके हाथों और चुभन के चलते वो अब और नहीं रुक पा रही थी लगातार वो अपने मुख से एक ही आवाज सिसकारी के रूप में निकालती जा रही थी
कामया- करो प्लीज जल्दी करूऊऊऊ उूुुउउफफफफफफफफ्फ़ आआआआआआह्ह
पर दोनों मूक बने हुए थे पर कब तक आज उस शेरनी के सामने सबकुछ बेकार था एक ही झटके में लाखा काका और भीमा चाचा के सिर के बाल उसकी नरम नरम हथेलियो के बीच में थे और लगातार खींचते हुए वो उन्हें अपने होंठों के पास लाती जा रही थी और लगातार रुआंसी सी उसके मुख से आवाज निकलती जा रही थी
कामया- करो ना प्लीज जल्दी करो नाआआआआ
और एक ही धक्के में भीमा थोड़ा सा पीछे की ओर क्या हुआ कामया ने पलटकर अपनी बाँहे लाखा काक की गर्दन के चारो ओर कस लिया और बिना किसी चेतावनी के ही अपने हाथों से उनकी लूँगी को खींचने लगी थी लाखा को जैसे करेंट लग गया था उसने कामया को इतना उत्तेजित नहीं देखा था पर खुशी थी कि आज मजा आ जाएगा (एक नौकर का मान) बिना किसी अड़चन के लका काका की लूँगी एक ही झटके में नीचे थी उन्होने बड़ा सा अंडरवेर पहेना था वो पर उसका लिंग उसमें से बाहर आने को लगातार झटके ले रहा था बिना कोई शरम के कामया की हथेलिया उसके लिंग के चारो ओर कस्स गई थी और पीछे खड़े हुए भीमा चाचा की कमर के चारो ओर भी भीमा तब तक अपने कपड़ों से आजाद हो चुका था और जैसे ही वो कामया के पास खिचा था उसके लिंग ने कामया के नरम और नाजुक नितंबो को स्पर्श किया तो जैसे कामया का भाग्य ही खुल गया था वो फिर से पलटी और भीमा चाचा के होंठों से जुड़ गई और अपनी एक जाँघ को उसकी कमर पर फँसा दिया उसका एक हाथ अब भी लाखा काका के लिंग को उसके अंडरवेर के ऊपर से कस कर पकड़ रहा था और एक हाथ से भीमा चाचा की गर्दन को खींचकर अपने होंठों से जोड़े रखा था पर भीमा चाचा तो फिर से उसके होंठों का रस्स पान करने में व्यस्त हो गये थे पर कामया को तो कुछ और ही चाहिए था वो फिर से अपनी जाँघ को नीचे करती हुई थोड़ा सा पीछे हटी और अपने दूसरे हाथ से भीमा चाचा के लिंग को भी कस्स कर अपनी हथेली में पकड़ लिया था उधर लाखा तब तक अपने अंडरवेर से आजाद हो चुका था पर कामया की गिरफ़्त में उसके लिंग के होने से वो उसे उतार नहीं पाया था उसकी हथेली ने जैसे ही कामया की हथेली को छुआ तो कामया का ध्यान उसकी ओर गया और फिर नीचे की ओर बालों के गुच्छे को देखकर उसने अपनी हथेलियो की गिरफ़्त को ढीला छोड़ा और तुरत ही वापस कस्स कर उस लिंग को अपने हाथों में जकड़ लिया जैसे कि वो नहीं चाहती थी कि वो उसके हाथों से जाए अब वो दोनों के बीच में आगे पीछे की ओर होकर अपने को अडजस्ट करती हुई खड़ी हो गई और, अपनी हथेली को कस कर जकड़ी हुई सी उन लिंगो को अपने नितंबो पर और अपने पेट और उसके नीचे की ओर ले जाने की कोशिश करने लगी थी भीमा और लाखा दोनों कामया के इस रूप से थोड़े से अचंभित तो थे पर उनकी हालत भी अब खराब होने लगी थी उनकी उत्तेजना के सामने कामया की उत्तेजना कही ज्यादा ही थी कामया की पकड़ के सामने वो दो जैसे मजबूर थे पर जो अहसास उसके शरीर को छूने में और उसकी नरम हथेलियो से उन्हें मिल रहा था वो एक स्वर्गीय एहसास था
कामया की आवाज अब थोड़ा सा वहशी सी हो गई थी
कामया- चाचा करो आअब नहीं तो तोड़ दूँगी आआआआअह्ह प्लीज ईईईईईईईईईई
भीमा जैसे सपना देख रहा था वो कुछ करता पर इससे पहले ही वो कामया के धकेलने से नीचे गिर पड़ा और कामया उसके ऊपर
कामया- करो चाचा नहीं तो मार डालूंगी सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह करूऊऊऊऊऊऊऊऊओ
और पता नहीं कहाँ से कामया के अंदर इतना दम आ गया था कि भीमा के बैठते ही वो खुद भी एक झटके से उसके मुख के सामने खड़ी हो गई थी और एक झटके में उसके सिर के बालों को कस कर पकड़ते हुए अपनी योनि के पास लेआई थी अब भीमा चाचा की नाक उसके पेट के नीचे की ओर थी और भीमा चाचा के सामने एक ही रास्ता था कि वो अपनी जीब को निकाल कर कामया की योनि को संतुष्ट करे और उन्होंने किया भी वो अपने सामने कामया की उत्तेजना को देख सकता था वो जिस तरह से गुर्राती हुई सी सांसें ले रही थी और एक वहशी सी आवाज से बोल रही थी उससे अंदाजा लगाया जा सकता था कि कामया की हालत क्या थी कामया की हथेली में अब भी लाखा काका का लिंग मजबूती से कसा हुआ था और वो खड़े-खड़े कामया को भीमा को धकेलते हुए और उसके चेहरे के पास इस तरह से जाते हुए भी देख रहे थे वो भी अचंभित थे कि आज कामया को क्या हो गया था आज वो इतना कामुक क्यों है पर उसे क्या वो तो जकड़ना चाहता था उसके साथ उसका तो पूरा समर्थन था ही सो वो भी थोड़ा सा मुस्कुराता हुआ कामया को अपनी जाँघो को खोलकर भीमा के चहरे पर धकेलते और उसके बालों को खींचकर अपनी योनि से मिलाते हुए देख रहा था कामया के धक्के से और खींचने से भीमा का चेहरा कामया की जाँघो के बीच में गुम हो गया था और लाखा काका किसी कुत्ते की तरह से अपने लिंग को खीछे जाने से कामया की ओर ही बढ़ गये थे पर कामया की उतेजना को आज शांत करना इतना सहज नहीं था वो भीमा चाचा को खींचते हुए और अपनी जाँघो को खोलकर उन्हें लगातार धकेलते हुए नीचे गिरा चुकी थी और अपने योनि को उनके चहरे पर लगातार घिसती जा रही थी भीमा भी अपने आपको बचाने में असमर्थ था और अपनी जीब से कामया की योनि को लगातार चाट-ता हुआ अपने जीब को उसके योनि के अंदर और अंदर घुसाने की कोशिश करता जा रहा था उसके इस हरकत से कामया के अंदर का ज्वार अब दोगुनी तेजी से बढ़ने लगा था और पास खड़े हुए लाखा काका के लिंग को भी अब वो खींचते हुए अपने चेहरे पर मलने लगी थी उसकी कामुक आवाज एक बार फिर निकली
कामया- आआया इधार सस्शह आयो सस्शह
हाँफती हुई सी वो लाखा काका के लिंग को धीरे से अपने होंठों के अंदर लेजाकर बड़े ही प्यार से एक बार चुबलने के बाद ऊपर लाखा काका की ओर बड़ी ही कामुक दृष्टि से देखा लाखा तो जैसे पागल ही हो गया था हर एक टच जो उसके लिंग पर हो रहा था वो अपने आपको नहीं रोक पा रहा था और थोड़ा सा और आगे की ओर होता हुआ अपनी हथेलियो को कामया के सिर पर रखता हुआ उसे ऑर पास खीचने लगा था
कामया- हाथ हटाओ काका प्लीज हाथ हटाओ सिर सीईईईई
लाखा की जान निकल गई थी कामया की भारी और भयानक सी आवाज सुन के वो नीचे की ओर देख रहा था और कामया को अपने लिंग से खेलते हुए देखा कामया भी अपने मुख को खोलकर उसके लिंग को अंदर ले जाती और कभी उसे बाहर निकाल कर अपने जीब से चाट-ती और कभी , होंठों को जोड़ कर अपने हाथों में लिए उस लिंग को बड़े ही प्यार से चूमती हर एक हरकत लाखा के लिए जान लेवा थी लाखा अपनी कमर को आगे किए हुए और अपने दोनों हाथों को अपने नितंबो पर रखे हुए कामया की हर हरकतों को देखता जा रहा था और अपने आपको तेजी से दौड़ता हुआ अपने शिखर की ओर बढ़ता जा रहा था और नीचे भोला तो जैसे अपने आपको बचाने की कोशिश छोड़ कर अपने को कामया के सुपुर्द ही कर दिया था वो अपने हाथों को कामया के नितंबो से होता हुआ उसकी कमर को कस्स कर पकड़ रखा था और अपनी जीब को लगातार उसकी योनि में चलाता जा रहा था वो जानता था कि कामया किसी भी क्षण झड जाएगी पर वो अपने काम में लगा रहा उसके चहरे पर कामया की योनि अब भयानक रफ़्तार के साथ आगे पीछे हो रही थी और धीरे-धीरे उसके अंदर से एक धार सी निकलने लगी थी और कामया के शरीर का हर हिस्सा जिस आग में झुलस रहा था वो एक बार फिर से उसके योनि की ओर जाते हुए लग रहा था वो अपने होंठों को जोड़े हुए लाखा काका के लिंग को चूसती जा रही थी और अपनी कमर को हिलाते हुए कभी-कभी ज़ोर का झटका देती थी भीमा का चहरा उस झटके में पूरा का पूरा ढँक जाया करता था पर कामया के मुख से निकले वाली सिसकारी और आहों की आवाजो के बीच में यह खेल अब अपने चरम पर पहुँच अचुका था लाखा भी और कामया भी नहीं तो सिर्फ़ भीमा जिसका की लिंग अब तक खंबे की तरह खड़ा हुआ अपने आपको सलामी दे रहा था
कामया- और जोर से चाचा करो प्लेआस्ीईईईईई और जोर से
और अपने मुख में लिए लाखा काका के लिंग को उसी अंदाज में चुस्ती रही और एक पिचकारी सी उसके मुख के अंदर उतर गई

उूुउऊह्ह करते हुए उसने अपने मुख को उसके लिंग से हठाया पर छोड़ा नहीं कस्स कर पकड़े हुए लगातार अपनी हथेलियो से उसके लिंग को झटक रही थी और ऊपर खड़े हुए लाखा काका की ओर देखती हुई मदहोशी सी आखें बंद किए हुए अपने आपको रेस्ट करने लगी थी वो भी झड चुकी थी पर हटी नहीं थी अब भी वो अपनी कमर को झटके देकर अपने आखिरी ड्रॉप को भीमा चाचा के मुख में डालने की कोशिश करती जा रही थी लाखा थक कर खड़ा था उसने ही धीरे से कामया के हाथों से अपने लिंग को छुड़ाया था और हान्फता हुआ पीछे की ओर लड़खड़ाते हुए घिसक गया और धम्म से नीचे नंगा ही बैठ गया था भीमा चाचा अब भी कामया की जाँघो की गिरफ़्त में थे और लाखा काका के छूटने के बाद कामया ध्यान भीमा चाचा पर गया था वो अपने जाँघो को खोलकर धीरे से पीछे की ओर हटी थी और एकटक नीचे पड़े हुए भीमा चाचा की ओर सर्द सी आखों से देखती जा रही थी भीमा हान्फता हुआ अपने चहरे को पोंछ रहा था और एकटक कामया की ओर ही देख रहा था कामया हाफ तो रही थी पर एक नजर जब भीमा चाचा के खड़े और सख़्त लिंग पर पड़ी तो जैसे वो फिर से उत्तेजित हो गई थी झट से वो भीमा चाचा के ऊपर कूद गई थी और उसके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया था एक टाँग को ऊपर करते हुए वो उनपर सवार हो चुकी थी उसकी योनि में अब भी गर्मी थी और अब वो और भी करना चाहती थी जैसे ही वो भीमा चाचा के ऊपर सवार हुई अपनी चूची को भीमा चाचा के होंठों पर घिसने लगी थी भीमा भी अपने होंठों को खोलकर उसे चूसने लगा था वो अपनी जीब को और अपने होंठों को कसे हुए फिर से एक बार अपनी प्यारी बहू को अपने आगोश में लेने के लिया लालायित था उस सुंदर तन को उस सुंदर काया को और नरम और मखमली चीज को वो फिर से अपने शरीर के पास रखने को लालायित था अपने होंठों से से कसे हुए भीमा उसकी चूचियां धीरे-धीरे चूसता जा रहा था और अपनी कमर को उसकी योनि की ओर धकेलता जा रहा था पर उसे ज्यादा मेहनत नही करनी पड़ी क्योंकी कामया की एक नरम सी हथेली ने और उसकी पतली और नरम उंगलियों ने एक सहारा दिया था उसके लिंग को और वो झट से अपने रास्ते पर दौड़ पड़ा था एक ही झटके में वो अंदर और अंदर समाता चला गया था और कामया ने जैसे ही अपने अंदर उस गरम सी सलाख को जाते हुए पाया एक लंबी सी आह उसके मुख से निकली और वो एकदम सीधी बैठ गई और जम कर झटके देने लगी थी वो अपने अंदर तक उस लिंग के एहसास को ले जाना चाहती थी और भीमा तो जैसे उस हरकत के लिए तैयार ही नहीं था आज तक उसके लिंग को इस तरह से किसी ने नहीं निचोड़ा था जिस तरीके से कामया कर रही थी वो अपने को उसके ऊपर रखे हुए अपनी योनि को अंदर से सिकोड़ती जा रही थी और अपनी जाँघो के दबाब से उसके लिंग को जैसे चूस रही हो वो हर झटके में अपने को थोड़ा सा ऊपर उठाती पर गिरती ज्यादा थी ताकि उस लिंग का कोई भी हिस्सा बाहर ना रह जाए और जैसे ही वो पूरा का पूरा अंदर चला गया वो एक बार फिर से भीमा चाचा के ऊपर लेट गई और अपने होंठों को उनके होंठों पर रखे हुए उन्हें चूसने लगी पर अचानक ही वो अपनी जाँघो को भीमा चाचा के दोनों ओर से खिसका कर सीधा कर लिया और उसके लिंग को अपनी जाँघो में कस लिया लगभग क्रॉस करते हुए और धीरेधीरे अपनी कमर को हिलाने लगी भीमा तो जैसे पागल हो गया था और अपनी उत्तेजना को ज्यादा देर नहीं रोक पाया और अपनी गिरफ़्त में आई बहू को कस्स कर पकड़ लिया और उसके होंठों को चूसते हुए कस्स कर अपनी कमर को ऊपर की ओर चलाने लगा पर हर झटके में वो अपने आपको झड़ता हुआ पा रह था और हुआ भी ऐसा ही वो ज्यादा देर रुक नहीं पाया और बहू के अंदर और अंदर तक अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो गया पर बहू तो जैसे आज संतुष्ट नहीं होना चाहती थी वो अब भी अपनी कमर को उसी तरीके से चलाती जा रही थी और फिर थोड़ी देर बाद वो भी निढाल होकर उसके ऊपर फेल गई थी उसकी साँसे अब भी तेज चल रही थी पर हाँ… एक शांति थी बहुत ही शांत शांत होते हुए भी उसके हाथ और शरीर ऊपर पड़े होने के बावजूद भीमा के शरीर से घिस रही थी कामया और अपने हाथों से भी उसके बाहों को सहलाते हुए अपने आपको शांत कर रही थी


भीमा भी नीचे से कामया के शरीर को सहलाते हुए नीचे की ओर जाता था और अपने हाथों को उसकी हर उँचाई और घहराई को छेड़ते हुए ऊपर की ओर आ जाते थे कामया के मुख से एक हल्की हल्की सी सिसकारी के साथ अब बहुत ही धीरे-धीरे और हल्के से आवाजें आने लगी थी पर समझ में कुछ नहीं आरहा था पर हाँ… इतना तो पता था कि वो संतुष्ट है थोड़ी देर तक अपने को संभालने के बाद कामया साइड की ओर हुई और धीरे से उस गंदे से बेड पर वैसे ही नंगी लेट गई उसका चहरा अब दीवाल की ओर था


और भीमा चाचा और लाखा काका उसके पीछे थे क्या कर रहे थे उसे पता नहीं और नहीं वो जानना चाहती थी वो वैसे ही पड़ी रही और अपनी सांसों को संभालने की कोशिश करती रही और पीछे लाखा काका अपने आपको दीवाल के सहारे बैठे हुए भीमा की ओर देखता रहा लाखा ने अपने ऊपर अपनी लूँगी को डाल लिया था पर बाँधी नहीं थी

भीमा भी धीरे से उठा और लाखा की ओर देखता हुआ एक बार पास लेटी हुई कामया की ओर नजर दौड़ाई और फिर लाखा की ओर और फिर नज़रों के इशारे से बातें
भीमा- क्या और कामया की ओर इशारा करते हुए
लाखा- पता नहीं पूछ
भीमा- बहू
और धीरे से अपनी हथेलियो को उसकी पीठ पर रखा और धीरे-धीरे सहलाते हुए कमर तक ले जाता रहा कामया के शरीर में एक हल्की सी हरकत हुई और उसका दायां हैंड पीछे की ओर हुआ और भीमा चाचा की हथेली को पकड़कर सामने की ओर अपनी चुचियों की ओर खींच लिया और अपनी बाहों से उसकी कालाई को कस कर अपने साइड और बाहों के बीच में कस्स लिया भीमा चाचा की हथेली अब कामया की गोल गोल चुचियों पर थिरक रही थी और अपनी मजबूत हथेली से उनकी मुलायम और सुदोलता का धीरे-धीरे मर्दन कर रही थी कामया तो जैसे अपने आपको भूल चुकी थी वो वैसे ही लेटी हुई भीमा चाचा के हाथों को बगल में दबाए हुए अपने शरीर पर उनके हाथों को घूमते हुए एहसास करती रही थोड़ी देर में ही कामया का रूप चेंज होने लगा था वो जैसे उकूड़ू होकर सोई हुई थी धीरे-धीरे सीधी होने लगी थी उसके शरीर में एक बार फिर से उत्तेजना भरने लगी थी आज वो बिल्कुल फ्रेश थी उसे इन दोनों ने निचोड़ा नहीं था बल्कि उसने इन दोनों को निचोड़ कर रख दिया था वो दोनों अपने को अब तक संभाल रहे थे पर भीमा तो फिर से कामया की गिरफ़्त में पहुँच चुका था और अपना खेल भी खेलना चालू कर चुका था और कामया का पूरा साथ भी मिल रहा था कामया का शरीर एक बार फिर से तन गया था और वो आखें बंद किए हुए ही धीरे-धीरे अपने आपको भीमा की ओर धकेल रही थी कामया की पीठ अब भीमा के सीने से चिपक गई थी और भीमा का हाथ उसके शरीर के सामने से घूमते हुए उसके हर उतार चढ़ाव को समझते और एहसास करते हुए फिर से उसकी योनि की ओर जाने लगा था भीमा अपने हाथों को घुमा ही रहा था कि नीचे पड़े बिस्तर पर एक जोड़ी पाँव ने भी दखल दिया वो लाखा काका थे वो भी अपना हिस्सा लेने आए थे और धीरे से कामया के पास ही बैठ गये और अपने हाथों से उसकी जाँघो को सहलाते हुए धीरे-धीरे ऊपर चलाने लगे थे कामया अब धीरे-धीरे सीधी होती जा रही थी और अपने को भीमा चाचा के साथ सटा-ते हुए वो अब पीठ के बल लेट गई थी


पूरी तरह से आखें बंद किए अपने शरीर पर दो जोड़ी हाथों को घूमते हुए पाकर कामया शरीर एक बार फिर से उत्तेजना के सागार में गोते लगाने लगा था वो अब पूरी तरह से लाखा काका और भीमा चाचा के साथ अपने आपको फिर से उस खेल का हिस्सा बनाने को तैयार थी अपने एक हाथ से उसने भीमा चाचा की हथेली को अपनी चुचियों के ऊपर पकड़ रखा था और दूसरे हाथों को लाखा काक की जाँघो पर घुमाने लगी थी लाखा काका भी अपने आप पर हो रहे इस तरह के प्यार को नहीं झुठला सके और नीचे होकर अपनी प्यारी बहू के होंठों को अपने होंठों में दबाकर उनको थोड़ी देर तक चूसते रहे कामया ने भी कोई शिकायत नहीं की बल्कि अपने होंठों को खोलकर काका के सुपुर्द कर दिया और उनके चुबलने का पूरा मजा लेती रही भीमा चाचा भी कामया की चुचियों को दबाते दबाते अपने होंठों को उसकी चुचियों तक लेआए और उसकी एक चुचि को अपने होंठों के बीच में दबा के चूसने लगे कामया की नरम हथेली भीमा चाचा के बालों पर से होते हुए उन्हें अपनी चुचियों पर और अच्छे से खींचती रही और अपने दूसरे हाथों से काका को अपने होंठों के पास दोनों के हाथ अब कामया के पूरे शरीर पर घूमते रहे और कामया को उत्तेजित करते रहे कामया की जांघे अपने आप खुलकर उन दोनों की उंगलियों के लिए जगह बना दी थी ताकि वो अपने अगले स्टेप की ओर बिना किसी देर और रुकावट के जा सके

दोनो ने अपने हिस्से की कामया को बाँट लिया था दायां साइड भीमा चाचा के पास था और लेफ्ट साइड लाखा काका के पास था जो कि अपने आपको जिस तरह से चाहे अपने होंठों और हथेलियो को उसके शरीर पर चला रहे थे हथेलियो के संपर्क में आते हर हिस्से का अवलोकन और सुडोलता को नापने के अलावा उसकी नर्मी और कोमलता का मिला जुला एहसास भीमा और लाखा के जेहन तक जाता था कोई मनाही नहीं ना कोई इनकार बस करते रहो और करो और कोई सीमा नहीं किसी के लिए भी पूरा मैदान साफ है और कोई चिंता भी नहीं बस एक बात की चिंता थी कि कब और कैसे


कामया लेटी लेटी अपने शरीर पर घुमाते हुए दोनों के हाथों का खिलोना बनी हुई थी और अपने शरीर पर से उठ रही तरंगो को सिसकारी के रूप में बाहर निकालते हुए अपने दोनों हाथों से भीमा और लाखा को अपने पास और पास खींचती जा रही थी भीमा और लाखा की उंगलियां कामया की योनि में अपनी जगह बनाने लगी थी और एक के बाद एक उसकी योनि के अंदर तक उतर जाती थी और कामया को एक और स्पर्धा की ओर धकेल-ती जा रही थी वो कामातूर हो चुकी थी एक बार फिर दोनों के चुबलने से और उंगलियों के खेल से


दोनों की उंगलियां बीच में भी कई बार आपास्स में टकरा जाती थी और फिर जो जीतता था वो अंदर हो जाता था पर एक समय ऐसा भी आया जब एक साथ दो उंगलियां उसकी योनि में समा गई थी और कामया को कोई एतराज नहीं था उसने अपनी जाँघो को और खोलकर उन्हें निमंत्रण दे दिया और अपने होंठों को पता नही कौन था उसके होंठों में रहा ही रहने दिया अपने चूचियां को सीना तान कर, और भी उँचा कर दिया ताकि वो पूरा का पूरा उसके हथेलियो में समा जाए अंदर गई उंगलियां अपना कमाल दिखा रही थी और कामया के मुख से एक बार फिर से
कामया- अब करो जल्दी प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज
भीमा- (जो कि उसके होंठों को अब चूस रहा था ) हाँ बहू बस थोड़ा सा रुक
कामया- नहीं करो जल्दी
एक अजीब सी गुर्राहट उसके गले से निकली जो कि भीमा और लाखा दोनों के कानों तक गई थी उनकी उंगलियां योनि के अलावा उसके थोड़ी सी दूर उसके गुदा द्वार से भी खेल रही थी और वो एक अजीब सी, आग कामया के शरीर में लगा रही थी वो अपनी गुदा द्वार को सिकोड़ कर वहाँ कोई आक्रमण से बंचित रखना चाहती थी पर
शायद दोनों की उंगलियां वहाँ के दर्शन को भी आतुर थी और धीरे से एक उंगली उसके गुदा द्वार से भी अंदर चली गई कामया एक बार अपने को नीचे दबाए हुए भी और नहीं किसी खेल को मना करती हुई एक आवाज उसके मुख से निकली
कामया-, नहीं वहां नहीं प्लीज वहां नहीं
हाँफती हुई सी उसके मुख से निकली थी पर उसके आग्रह का कोई भी असर उसे दिखाई नहीं दिया पर हाँ… उसका इनकार कमजोर पड़ गया था और उत्तेजना की ओर ज्यादा ध्यान था उसके शरीर को अब और इंतेजार नहीं करना था
एक ही झटके से वो उठ बैठी और दोनों की ओर देखती हुई लाखा काका पर लगभग कूद पड़ी लाखा काका जब तक कुछ समझते, वो उनके ऊपर थी और उनके सीधे खड़े हुए लिंग के ऊपर कामया और धम्म से वो अंदर था
कामया- अहाआह्ह



RE: Hindi Kahani बड़े घर की बहू - sexstories - 06-10-2017

जैसे ही वो अंदर गया कामया का शरीर आकड़ गया और थोड़ा सा पीछे की ओर हुई ताकि अपने योनि में घुसे हुए लिंग को थोड़ा सा अड्जस्ट कर सके पीछे होते देखकर भीमा चाचा ने उसे अपनी बाहों में भर कर उसे सहारा दिया और धीरे-धीरे उसके गालों को चूमते हुए
भीमा- आज क्या हुआ है बहू हाँ…
और उसकी चूचियां पहले धीरे फिर अपनी ताकत को बढ़ाते हुए उन्हें मसलने लगा था लाखा काका तो नीचे पड़े हुए कामया की कमर को संभाले हुए उसे ठीक से अड्जस्ट ही करते जा रहे थे और कामया तो जैसे अपने अंदर उनके लिंग को पाकर जैसे पागल ही हो गई थी वो बिना कुछ सोचे अपने आपको उचका कर उनके लिंग को अपने अंदर तक उतारती जा रही थी

उसके अग्रसर होने के तरीके से कोई भी अंदाजा लगा सकता था कि कामया कितनी उत्तेजित है
कामया के मुख से निकलती हुई हर सिसकारी में बस इतना जरूर होता था
कामया- और जोर्र से काका उूुउउम्म्म्मम और जोर से जल्दी-जल्दी करूऊऊऊ उूुउउम्म्म्म
और अपने होंठों से पीछे बैठे हुए भीमा चाचा के होंठों पर चिपक गई थी उसकी एक हथेली तो नीचे पड़े हुए काका के सीने या पेट पर थी पर एक हाथ तो पीछे बैठे भीमा चाचा की गर्दन पर था और वो लगा तार उन्हें खींचते हुए अपने सामने या फिर अपने होंठों पर लाने की कोशिश में लगी हुई थी लाखा काका का लिंग उसके योनि पर लगातार नीचे से हमलाकर रहा था और दोनों हथेलियो को जोड़ कर वो कामया को सीधा बिठाने की कोशिश भी कर रहा था पर कामया तो जैसे पागलो की तरह कर रही थी आज वो उछलती हुई कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ हो जाती थी पर लाखा काका अपने काम में लगे रहे

भीमा भी कामया को ही संभालने में लगा हुआ था और उसकी चुचियों को और उसके होंठों को एक साथ ही मर्दन किए हुए था और अपने लिंग को भी जब भी तोड़ा सा आगे करता तो कामया के नितंबों की दरार में फँसाने में कामयाब भी हो जाता था वो अपने आप भी बड़ा ही उत्तेजित पा रहा था और शायद इंतजार में ही था कि कब उसका नंबर आएगा पर जब नहीं रहा गया तो वो कामया की हथेली को खींचते हुए अपने लिंग पर ले आया और फिर से उसकी चुचियों पर आक्रमण कर दिया वो अपने शरीर का पूरा जोर लगा दे रहा था उसकी चूचियां निचोड़ने में पर कामया के मुख से एक बार भी उउफ्फ तक नहीं निकला बल्कि हमेशा की तरह ही उसने अपने सीने को और आगे की ओर कर के उसे पूरा समर्थन दिया उसकी नरम हथेली में जैसे ही भीमा चाचा का लिंग आया वो उसे भी बहुत ही बेरहमी से अपने उंगलियों के बीच में करती हुई धीरे-धीरे आगे पीछे करने लगी थी कामया का शरीर अब शायद ज्यादा देर का मेहमान नहीं था क्योंकी उसके मुख से अब सिसकारी की जगह, सिर्फ़ चीख ही निकल रही थी और हर एक धक्के में वो ऊपर की बजाए अपने को और नीचे की ओर करती जा रही थी लाखा की भी हालत खराब थी और कभी भी वो अपने आपको शिखर पर पहुँचने से नहीं रोक पाएगा

आज तो कमाल ही कर दिया था बहू ने एक बार भी उन्हें मौका नहीं दिया और नहीं कोई लज्जा या झिझक मजा आ गया था पर एक डर भी बैठ गया था पर अभी तो मजे का वक़्त था और वो ले रहा था
आखें खोलकर जब वो अपने ऊपर की बाहू को देखता था वो सोच भी नहीं पाता था कि यह वही बहू है जिसके लिए वो कभी तरसता था या उसकी एक झलक पाने को अपनी चोर नजर उठा ही लेता था आज वो उसके ऊपर अपनी जनम के समय की तरह बिल्कुल नंगी उसके लिंग की सवारी कर रही थी और सिर्फ़ कर ही नहीं रही थी बल्कि हर एक झटके के साथ उसे एक परम आनंद के सागर की ओर धकेलते जा रही थी वो अपनी कल्पना से भी ज्यादा सुंदर और अप्सरा से भी ज्यादा कोमल और चंद्रमा से भी ज्यादा उज्ज्वल अपनी बहू को देखते हुए अपने शिखर पर पहुँच ही गया और एक ही झटके में अपनी कमर को उँचा और उँचा उठाता चला गया पर कामया के दम के आगे वो और ज्यादा नहीं उठा सका और एक लंबी सी अया के साथ हीठंडा हो गया


कामया की ओर देखता पर वो तो जैसे शेरनी की तरह ही उसे देख रही थी दो बार झड़ने के बाद भी वो इतनी कामुक थी कि वो अभी तक शांत नहीं हुई थी लेकिन लाखा काका को छोड़ने को भी तैयार नहीं थी वो अब भी उसके लिंग को अपनी योनि में लिए हुए अपनी योनि से दबाए जा रही थी और एक अजीब सी निगाहो से लाखा काका की ओर देखती रही पर उसके पास दूसरा आल्टर्नेटिव था भीमा चाचा जो की तैयार था पीछे वो एक ही झटके से घूम गई थी और बिना किसी चेतावनी के ही भीमा चाचा से लिपट गई थी अपनी बाँहे उनके गले पर रखती हुई और अपने होंठों के पास खींचती हुई वो उसपर सवार होती पर भीमा ने उसे नीचे पटक दिया और ऊपर सवार हो गया था और जब तक वो आगे बढ़ता कामया की उंगलियां उसके लिंग को खींचते हुए अपनी योनि के द्वार पर रखने लगी थी

भीमा तो तैयार ही था पर जैसे ही उसने अपने लिंग को धक्का दिया कामया के मुख से एक लंबी सी सिसकारी निकली और वो उचक कर भीमा चाचा के शरीर को नीचे की ओर खींचने लगी भीमा चाचा भी धम्म से उसके शरीर पर गिर पड़े और जरदार धक्कों के साथ अपनी बहू को रौंदने लगे पर एक बात साफ थी आज का खेल कामया के हाथों में था आज वो उनके खेलने की चीज नहीं थी आज वो दोनों उसके खेलने की चीज थे और वो पूरे तरीके से इस खेल में शामिल थी और हर तरीके से वो इस खेल का पूरा आनंद ले रही थी आज का खेल उसे भी अच्छा लग रहा था और वो अपने को शिखर को जल्दी से पा लेना चाहती थी वो भीमा चाचा को खींचते हुए अपने शरीर के हर कोने तक का स्पर्श पाना चाहती थी उसके मुख से आवाजो का गुबार निकलता जा रहा था

कामया- करूऊ चाचा जोर-जोर से करो बस थोड़ी देर और करूऊऊ

और अपने बातों के साथ ही अपनी कमर को उचका कर भीमा चाचा की हर चोट का जबाब देती जा रही थी पर कब तक आधूरा छोड़ा हुआ लाखा काका का काम भीमा चाचा ने आखिर में शिखर तक पहुँचा ही दिया एक लंबी सी आहह निकली कामया के मुख से और भीमा चाचा के होंठों को ढूँढ़ कर अपने होंठों के सुपुर्द कर लिया था कामया ने और निढाल सी पड़ी रही भीमा चाचा के नीचे भीमा भी अपने आखिरी स्टेज पर ही था कामया की योनि के कसाव के आगे और चोट के बाद वो भी अपने लिंग पर हुए आक्रमण से बच नहीं पाया था और वो भी थक कर बहू के ऊपर निढाल सा पसर गया

कामया की हथेलिया भीमा चाचा के बालों पर से घूमते हुए धीरे से उनकी पीठ तक आई और दोनों बाहों को एक हल्का सा धकेला और हान्फते हुए वही पड़ी रही कमरे मे दूधिया नाइट बल्ब की रोशनी को निहारती हुई एक बार अपनी स्थिति का जायजा लिया वो संतुष्ट थी पर थकि हुई थी नजर घुमाने की, हिम्मत नहीं हुई पर पास लेटे हुए भीमा चाचा की जांघे अब भी उसे टच हो रही थी कामया नेभी थोड़ा सा घूमकर देखा पास में भीमा चाचा पड़े हुए थे और लाखा काका भी थोड़ी दूर थे लूँगी ऊपर से कमर पर डाले हुए लंबी-लंबी साने लेते हुए दूसरी ओर मुँह घुमाए हुए थे कामया थोड़ा सा जोर लगाकर उठी और पाया कि वो फ्रेश है और बिल्कुल फ्रेश थी कोई थकावट नहीं थी हाँ थोड़ी सी थी पर यह तो होना ही चाहिए इतने लंबे सफर पर जो गई थी

वो मुस्कुराती हुई उठी और एक नजर कमरे पर पड़ी हुई चीजो पर डाली जो वो ढूँढ़ रही थी वो उसे नहीं दिखी उसका गाउन और पैंटी कोई बात नहीं वो थोड़ा सा लड़खड़ाती हुई कमरे से बाहर की ओर चालदी और दरवाजे पर जाकर एक नजर वापस कमरे पर डाली भीमा और लाखा अब भी लेटे हुए लंबी-लंबी साँसे ले रहे थे

वो पलटी और सीडीयाँ उतरते हुए वैसे ही नंगी उतरने लगी थी सीढ़ियो में उसे अपना गाउन मिल गया पैरों से उठाकर वो मदमस्त चाल से अपने कमरे की ओर चली जा रही थी

समझ सकते है आप क्या दृश्य होगा वो एक स्वप्न सुंदरी अपने शरीर की आग को ठंडा करके बिना कपड़ों के सीढ़िया उतर रही हो तो उूुुुुुुउउफफफफफफफफ्फ़
क्या सीन है यार,

संभालती हुई उसने धीरे से अपने कमरे का दरवाजा खोला और बिना पीछे पलटे ही पीछे से धक्का लगाकर बंद कर दिया और पलटकर लॉक लगा दिया और बाथरूम की ओर चल दी जाते जाते अपने गाउनको बेड की ओर उच्छाल दिया और फ्रेश होने चली गई थी जब वो निकली तो एकदम फ्रेश थी और धम्म से बेड पर गिर पड़ी और सो गई थी जल्दी बहुत जल्दी सुबह कब हुई पता ही नहीं चला हाँ… सुबह चाय के समय ही उठ गई थी और पापाजी के ही चाय पिया था नीचे जाकर
पापाजी- आज क्या ऋषि आएगा तुम्हें लेने
कामया- जी कहा तो था पता नहीं
पापाजी- हाँ… तो में चला जाऊ खाना खाके तुम फिर आराम से निकलना क्यों
कामया- जी ठीक है
पापाजी- कि रुकु जब तक नहीं आता
कामया- जी क्या बताऊ कल तो बोला था कि आएगा
पापाजी- फोन कर लो एक बार
कामया- जी नंबर नहीं है उसका
पापाजी- धत्त क्या लड़की हो तुम नंबर तो रखना चाहिए ना अब वो तुम्हारे साथ ही रहेगा धरम पाल जी ने कहा है थोड़ा सा बच्चे जैसा है और कोई दोस्त भी नहीं है उसका

कामया- जी पर मेरे साथ क्यों

पापाजी (थोड़ा हँसते हुए)- देखा तो है तुमने उसे ही ही ही

कामया को भी हँसी आ गई थी कोई बात नहीं रहने दो उसे पर नंबर तो है नहीं कैसे पता चलेगा
देखा जाएगा
कामया- जी अगर नहीं आया तो में फोन कर दूँगी आपको आप गाड़ी भेज देना
पापाजी- हाँ… ठीक है
और दोनों चाय पीकर तैयारी में लग गये ठीक खाने के बाद काम्पोन्ड में एक गाड़ी रुकने की आवाज आई थी भीमा अंदर से दौड़ता हुआ बाहर की ओर गया और बताया कि धरंपाल जी का लड़का है
दोनों खुश थे चलो आ गया था
पापाजी- उसे बुला लाओ यहां
भीमा- जी
और थोड़ी देर में ही ऋषि उसके साथ अंदर आया था
आते ही पापाजी को प्रणाम किया था और कामया की ओर देखता हुआ नमस्ते भी किया था छोटा था पर संस्कार थे उसमें
पापाजी- कैसे हो ऋषि
ऋषि- जी अच्छा हूँ
पापाजी- बड़े हो गये हो तुम्हे बहुत छोटा देखा था मैंने तुम्हें आओ खाना खा लो
ऋषि- जी नहीं खाके आया हूँ
पापाजी- अरे थोड़ा सा डेजर्ट है लेलो
ऋषि- जी
और बड़े की बातों का आदर करते हुए कामया के साइड में खाली चेयर में बैठ गया और एक बार उसे देखकर मुस्कुरा दिया बहुत ही सुंदर लगा रहा था ऋषि आज महरून कलर की काटन शर्ट पहने था और उससे मचिंग करता हुआ खाकी कलर का पैंट ब्लैक शूस मस्त लग रहा था बिल्कुल शाइट था वो सफेद दाँतों के साथ लाल लाल होंठ जैसे लिपस्टिक लगाई हो बिल्कुल स्किनी सा था वो पर आदर सत्कार और संस्कार थे उसमें नजर झुका कर बैठ गया था पापाजी के कहने पर और बड़े ही शर्मीले तरीके से थोड़ा सा लेकर खाने लगा था बड़ी मुश्किल से खा पा रहा था

पापाजी- ऋषि अब से क्या तुम लेने आओगे कामया को

ऋषि- जी जैसा आप कहे
पापाजी- नहीं नहीं वो तो इसलिए कि कामया ने बताया था कि तुम लेने आओगे इसलिए पूछा नहीं तो हम तो जाते ही है कॉंप्लेक्स का काम देखने

ऋषि- जी आ जाऊँगा यही से तो क्रॉस होता हूँ अलग रोड नहीं है इसलिए कोई दिक्कत नहीं है

पापाजी- ठीक है तुम आ जाया करो हाँ कोई काम रहेगा तो पहले बता देना ठीक है और तुम्हारा नंबर दे दो
ऋषि - जी और खाने के बाद उसने अपना नंबर पापाजी को दे दिया था और कामया को भी
कामया- तुम बैठो में आती हूँ तैयार होकर
पापाजी के जाने के बाद ही कामया ने ऋषि से कोई बात की थी पर ऋषि टपक से बोला
ऋषि- तैयार तो है आप
कामया- अरे बस आती हूँ तुम रूको
ऋषि- जी झेप-ता हुआ खड़ा रह गया था
कामया पलटकर अपने कमरे की ओर चली गई थी सीढ़िया चढ़ते हुए ऋषि की बातों पर हँसी आ रही थी कि कैसे पापाजी के हट-ते ही टपक से बोल उठा था वो शरारती है और हो भी क्यों नहीं अभी उम्र ही कितनी होगी उसकी 22 या 23 साल
उसने कमरे में पहुँचकर जल्दी से अपने कपड़ों को एक बार देखा और मेकप को सबकुछ ठीक था पलटकर चलती पर कुछ रुक सी गई थी वो एक बार खड़ी हुई कुछ देर तक पता नहीं क्या सोचती रही पर एक झटके से बाहर की ओर निकल गई थी

नीचे पापाजी तो चले चले गये पर ऋषि उसके इंतेजार में बैठा हुआ था ड्राइंग रूम में उसके आते ही वो खड़ा हुआ और एक बार मुस्कुराते हुए कामया की ओर देखा और उसके साथ ही बाहर की ओर चल दिया
गाड़ी में ड्राइविंग सीट के पास ही बैठी थी कामया ऋषि ड्राइविंग कर रहा था
ऋषि- कॉंप्लेक्स ही चले ना भाभी
कामया- हाँ… और नहीं तो कहाँ
ऋषि- नहीं ऐसे ही पूछा
कामया- हाँ… थोड़ा सा गुस्से से ऋषि की और देखा
कामया- मतलब
ऋषि झेपता हुआ कुछ नहीं कह पाया था पर ड्राइव ठीक ही कर रहा था बड़ी ही सफाई से ट्रफिक के बीच से जैसे बहुत दिनों से गाड़ी चला रहा हो
कामया- अच्छी गाड़ी चला लेते हो तुम तो
ऋषि- जी असल में बहुत दिनों से चला रहा हूँ ना 11 क्लास में ही चलाना आ गया था मुझे तो दीदी के साथ जाता था सीखने को दीदी से ही सिखाया है बिल्कुल चहकता हुआ सा उसके मुख से निकलता वो गुस्से को भूल गया था
कामया- हाँ… मुझे तो नहीं आती सीखने की कोशिश की थी पर सिख नहीं पाई
तपाक से ऋषि के मुख से निकाला
ऋषि- अरे में हूँ ना में सीखा दूँगा दो दिन में ही
कामया को उसके बोलने के तरीके पर हस्सी आ गई थी बिल्कुल चहकते हुए वो बोला था
कामया- ठीक है तुम सिखा देना और देखकर चलाओ नहीं तो टक्कर हो जाएगी

ऋषि मुस्कुराते हुए गाड़ी चलाता हुआ धीरे-धीरे कॉंप्लेक्स के अंदर तक ले आया था और आफिस बिल्डिंग के सामने खड़ी करके खुद बाहर निकला और दौड़ता हुआ साइड की ओर बढ़ा ही था कि कामया दरवाजा खोलकर बाहर आ गई थी
ऋषि की ओर मुस्कुराते हुए
कामया- क्या कर रहे थे में दरवाजा नहीं खोल सकती क्या

ऋषि- ही ही ही नहीं नहीं वो बात नहीं है में तो बस ऐसे ही पहली बार आपको ले के आया हूँ ना इसलिए

कामया- तुम ड्राइवर नहीं हो ठीक है

ऋषि धीरे-धीरे उसके साथ होकर चलता हुआ उसके केबिन की ओर बढ़ता जा रहा था
ऋषि- ठीक है
कामया को उसका साथ अच्छा लग रहा था भोला भाला सा था और शायद इतनी इज़्ज़त उसे कभी नहीं मिली थी जो उसे मिल रही थी घर में छोटा था और कुछ लजाया सा था इसलिए भी हो सकता था पर अच्छा था

कामया अपने आफिस में घुसते ही अपने टेबल पर आ गई थी और वहां रखे हुए बहुत से बिल और वाउचर्स को ठीक से देखने लगी थी ऋषि भी उसके सामने वाली सीट पर बैठा हुआ था और बड़े गौर से कामया की हर हरकतों को देख रहा था कामया भी कभी-कभी उसे ही देख लेती थी और एक बार नज़रें चार होने से ऋषि बस मुस्कुरा देता था और कामया उसे और समर्थन भी देती थी

बहुत देर तक जब कामया उन कागजों में ही उलझी हुई थी तो ऋषि से नहीं रहा गया
ऋषि - भाभी कितना काम कर रही हो
बड़े ही नाटकीय और लड़कपन सी आवाज निकालते हुए उसने भाभी को कहा था कामया की हँसी फूट पड़ी थी उसके इस अंदाज से
कामया- तो यहां काम ही करने आए है

ऋषि- अरे यार यह तो बहुत बोरिंग काम है क्या खाली साइन कर रही हो आप कब से

कामया- हाँ… यह सब खर्चे है जो कि किए हुए है और होंगे भी वोही तो देखना है तुमको हम को
ऋषि- अरे यार में तो बोर होने लगा हूँ अभी से चलिए ना बाहर घूमते है
कामया- क्या
ऋषि- तो क्या कितनी देर से आप तो काम कर रही है और में बैठा हुआ हूँ
बड़े ही नाटकीय तरीके से अपने हाथों को घुमाकर और अपनी बड़ी-बड़ी आखों को मटकाकर उसने बड़े ही उत्तावलेपन से कहा कामया उसकी ओर बड़े ही प्यार से और एक अजीब सी नजर से देखने लगी थी सच में बिल्कुल लड़कियों जैसा ही था बातें करते समय उसकी आखें और होंठों को बड़े ही तरीके से नचाता था ऋषि और साथ-साथ में अपनी हथेलियो को भी गर्दन को भी कुछ अजीब तरीके से

हँसती हुई कामया का ध्यान फिर से अपने काम में लगा लिया था और ऋषि की बातों को भी सुनते हुए उसकी ओर देखती भी जा रही थी
ऋषि- भाभी प्लीज ना ऐसे काम से तो अच्छा है कि में घर पर ही रहूं क्या काम है यह बस बैठे रहो और साइन करो कुछ मजा ही नहीं

कामया- ही ही ही क्या मजाकरना है तुम्हें हाँ…

ऋषि अपनी हथेलियो को थोड़ा सा मटकाता हुआ अपनी ठोडी के नीचे रखता हुआ कामया की ओर अपनी बड़ी-बड़ी आखों से देखता रहा और बोला
ऋषि- यहां से चलिए ना भाभी कितनी बोरिंग जगह है यह

कामया- हाँ हाँ… चलते है अभी तो शोरुम जाना है जरा सा और बचा है फिर चलते है ठीक है अभी उनकी बातें खतम भी नहीं हुई थी कि डोर पर एक थपकी ने उनका ध्यान खींच लिया वो दोनों ही दरवाजे की ओर देखने लगे थे

पीओन अंदर घुसा और वही खड़े होकर बोला
पीओन- जी मेडम वो भोला आया है
कामया के मुख से आनयास ही निकला
कामया- क्यों
पीओन- जी कह रहा है कि मेमसाहब से मिलना है
वो कुछ और कहता कि भोला पीछे से अंदर घुस आया और दरवाजे को और पीओन को पास करते हुए टेबल तक आ गया
पीओन वापस चला गया पर कामया की नजर भोला की ओर नहीं देख पाई थी वो ऋषि की ओर देख रही थी और भोला के बोलने की राह देख रही थी ऋषि भी भोला को देखकर दूसरी तरफ देखने लगा था

इतने में भोला की आवाज आई
भोला- जी मेमसाहब वो दरखास्त देनी थी
उसके हाथों में एक कागज था और वो अब भी उसमें कुछ लिख रहा था और धीरे से एक बार कामया की ओर देखता हुआ कामया की ओर कागज को सरका दिया

कामया ने एक बार उसकागज को देखा फोल्डेड था पर उसकी मोटी-मोटी उंगलियों के नीचे से उसकागज को देखते ही नहीं जान पाई थी कि कैसी दरखास्त थी वो

भोला- जी सोच रहा था कि कल से ड्यूटी जाय्न कर लूँ खोली में पड़ा पड़ा थक गया हूँ और ड्यूटी जाय्न कर लूँगा तो आते जाते लोगों को देखूँगा तो मन लगा रहेगा और एक आवाज उसके पास से निकली जो कि किसी क्लिप के चटकने से हुई हो

कामया का ध्यान उसकी हथेलियो की ओर गया वो चौक गई थी उसकी एक उंगलियों में उसका ही वो क्लुचेयर था जिसे की वो एक हाथों से दबाता हुआ अपनी एक उंगली में लगाता था और खींचकर निकालता था कामया सहम गई थी और अपने हाथों को बढ़ा कर उसकागज को अपनी ओर खींचा और एक नजर ऋषि की ओर भी डाली जो कि अब भी अपनी ठोडी में कलाईयों को रखकर दूसरी ओर ही देख रहा था

बड़े ही संभालते हुए कामया ने उसकागज जो अपनी ओर खिछा था और खोलकर उस दरखास्त को पढ़ने लगी कि भोला की आवाज आई
भोला- साइन कर दो मेमसाहब अकाउंट्स में दे दूँगा नहीं तो तनख़्वाह बनते समय पैसा काट जाएगा
और फिर से वही क्लिप चटकने की आवाज गूँज उठी कामया भी थोड़ा सा संभली और उस पेपर को साइन करने के लिए अपना पेन उठाया पर वो सन्न रह गई उसको पढ़ कर लिखा था

आपको फूल कैसे लगे बताया नहीं बड़ी याद आ रही थी आपके जाने के बाद से ही इसलिए भेज दिए थे

और नीचे थोड़ा सा टेडी मेडी लाइन में भी कुछ लिखा था आप साड़ी में ज्यादा सुंदर दिखती है कसम से

कामया का पूरा शरीर एक अजीब सी सिहरन से भर उठा था सिर से लेकर पाँव तक सन्न हो गया था वो उस सिहरन को रोकने की जी जान कोशिश करती जा रही थी पर उसके हाथों की कपकपि को देखकर कोई भी कह सकता था कि उसका क्या हाल था पर भोला चालाक था आगे झुक कर उसने उसकागज को अपनी हथेलियो में वापस ले लिया और थोड़ा सा पीछे होकर कहा
भोला- जी में कल से काम पर आ जाउन्गा मेमसाहब और बाहर चला गया

कामया की सांसें अब भी तेज ही चल रही थी टांगों की भी अजीब हालत थी काप गई थी वो बैठी नहीं रहती तो पक्का था कि गिर ही जाती वो कुछ कहती पर ऋषि की आवाज उसे सुनाई दी
ऋषि- भाभी यह भैया का ड्राइवर है ना
कामया- हाँ…
ऋषि आपकी तबीयत तो ठीक है भाभी
कामया- हाँ… क्यों
ऋषि नहीं वो आप हाफ रही थी ना इसलिए
कामया- नहीं ठीक है तुम इसे कैसे जानते हो
ऋषि- भोला को एक दिन ना वो भैया के साथ हमारे घर में आया था
कामया- क्यों
ऋषि- वो पापा से मिलने तब देखा था बड़ा ही गुंडा टाइप का है ना यह
कामया- क्यों तुम्हें क्यों लगा
कामया को ऋषि का भोला को गुंडा कहना अच्छा नहीं लगा जो भी हो पर गुंडा नहीं है



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