Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - Printable Version

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RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

मैं हूँ हसीना गजब की --पार्ट--4

गतान्क से आगे........................

वो भोचक्के से कुच्छ देर तक मेरी आँखों मे झाँकते रहे.

"मुझे सब पता है. मुझे पहले ही संदेह हो गया था. पंकज को ज़ोर

देकर पूचछा तो उसने स्वीकार कर लिया."

" तुम......तुमने कुच्छ कहा नही? तुम नयी बीवी हो उसकी तुमने उसका

विरोध नही किया?" कमल ने पूचछा.

" विरोध तो आप भी कर सकते थे. आप को सब पता था लेकिन आप ने

कभी दोनो को कुच्छ कहा नही. आप तो मर्द हैं और उनसे बड़े भी."

मैने उल्टा उनसे ही सवाल किया.

" चाह कर भी कभी नही किया. मैं दोनो को बेहद चाहता हूँ

और......."

" और क्या?"

" और.......कल्पना मुझे कमजोर समझती है." कहते हुए उन्हों ने

अपना चेहरा नीचे झुका लिया. मैं उस प्यारे इंसान की परेशानी पर

अपने को रोक नही पायी. और मैने उनके चहरे को अपनी हथेली मे भर

कर उठाया. मैने देखा की उनके आँखों के कोनो पर दो आँसू चमक

रहे हैं. मैने ये देख कर तड़प उठी. मैने अपनी उंगलियों से उनको

पोंच्छ कर उनके चेहरे को अपने सीने पर खींच लिया. वो किसी

बच्चेकी तरह मेरी चूचियो से अपना चेहरा सटा रखे थे.

"आपने कभी किसी डॉक्टर से जाँच क्यों नही करवाया" मैने उनके

बालोंमे अपनी उंगलियाँ फिराते हुए पूचछा.

" दिखाया था. कई बार चेक करवाया"

" फिर?"

" डॉक्टर ने कहा........ " दो पल को वो रुके. ऐसा लगा मानो सोच

रहेहों कि मुझे बताएँ या नही फिर धीरे से कहा " मुझमे कोई कमी

नहीहै."

" क्या?" मैं ज़ोर से बोली, " फिर भी आप सारा दोष अपने ऊपर लेकर

चुप बैठे हैं. आपने किसी को बताया क्यों नही? ये तो बुजदिली है."

" अब तुम इसे मेरी बुजदिली समझो चाहे जो भी. लेकिन मैं उसकी उमीद

कोतोड़ना नही चाहता. भले ही वो सारी जिंदगी मुझे एक नमार्द समझती

रहे."

" मुझे आप से पूरी हमदर्दी है. लेकिन मैं आपको वो दूँगी जो

कल्पना भाभी ने नही दिया."

वो चोंक कर मेरी तरफ देखे. उनकी गहरी आँखों मे उत्सुकता थी मेरा

जवाब सुनने की. मैने आगे कहा, " मैं आपको अपनी कोख से एक बच्चा

दूँगी."

" क्या???? कैसे??" वह हॅड बड़ा उठे.

" अब इतने बुद्धू भी आप हो नही कि समझना पड़े कैसे." मैं उनके

सीने से लग गयी, " अगर वो दोनो आपकी की चिंता किए बिना जिस्मानी

ताल्लुक़ात रख सकते है तो आपको किसने ऐसा करने से रोका है?" मैने

अपनी आँखें बंद कर के फुसफुसते हुए कहा जो उसके अलावा किसी को

सुनाई नही दे सकता था.

इतना सुनना था कि उन्हों ने मुझे अपने सीने मे दाब लिया. मैने अपना

चेहरा उपर उठाया तो उनके होंठ मेरे होंठों से आ मिले. मेरा बदन

कुच्छ तो बुखार से और कुच्छ उत्तेजना से तप रहा था. मैने अपने

होंठ खोल कर उनके होंठों का स्वागत किया. उन्होने मुझे इस तरह

चूमना शुरू किया मानो बरसों के भूखे हों. मैं उनके चौड़े सीने

के बालों पर अपनी उंगलियाँ फिरा रही थी. उन्हों ने मेरे गाउन को बदन

पर बँधे उस डोर को खींच कर खोल दिया. मैं पूरी तरह नग्न

उनके सामने थी. मैने भी उनके पायजामे के उपर से उनके लिंग को अपने

हाथों से थाम कर सहलाना शुरू किया.

" एम्म्म काफ़ी मोटा है. दीदी को तो मज़ा आ जाता होगा?" मैने उनके लिंग

को अपनी मुट्ठी मे भर कर दबाया. फिर पायजामे की डोरी को खोल कर

उनके लिंग को बाहर निकाला. उनका लिंग काफ़ी मोटा था. उसके लिंग के

ऊपर का सूपड़ा एक टेन्निस की गेंद की तरह मोटा था. कमल्जी गोरे

चिट थे लेकिन लिंग काफ़ी काला था. लिंग के उपर से चंदे को नीचे

किया तो मैने देखा कि उनके लिंग के मुँह से पानी जैसा चिप चिपा

रस निकल रहा है. मैने उनकी आँखों मे झाँका. वो मेरी हरकतों को

गोर से देख रहे थे. मैं उनको इतनी खुशी देना चाहती थी जितनी

कल्पना दीदी ने भी नही दी होगी. मैने अपनी जीभ पूरी बाहर

निकली. और स्लो मोशन मे अपने सिर को उनके लिंग पर झुकाया. मेरी

आँखे लगातार उनके चेहरे पर टिकी हुई थी. मैं उनके चेहरे पर

उभरने वाली खुशी को अपनी आँखों से देखना चाहती थी. मैने अपनी

जीभ उनके लिंग के टिप पर लगाया. और उसस्से निकालने वाले रस को

चाट कर अपनी जीभ पर ले लिया. फिर उसी तरह धीरे धीरे मैने

अपना सिर उठा कर अपने जीभ पर लगे उनके रस को उनकी आँखों के

सामने किया और मुँह खोल कर जीभ को अंदर कर ली. मुझे अपना रस

पीते देख वो खुशी से भर उठे और वापस मेरे चेहरे पर अपने

होंठ फिराने लगे. वो मेरे होंठों को मेरे कानो को मेरी आँखों को

गालों को चूमे जा रहे थे और मैं उनके लिंग को अपनी मुट्ठी मे भर

कर सहला रही थी. मैने उनके सिर को पकड़ कर नीचे अपनी

छातियो से लगाया. वो जीभ निकाल कर दोनो चूचियो के बीच की

गहरी खाई मे फिराए. फिर एक स्तन को अपने हाथों से पकड़ कर उसके

निपल को अपने मुँह मे भर लिया. मेरे निपल पहले से ही तन कर

कड़े हो गये थे. वो एक निपल को चूस रहे थे और दूसरी चूची

को अपनी हथेली मे भर कर मसल रहे थे. पहले धीरे धीरे

मसले मगर कुच्छ ही देर मे दोनो स्तनो को पूरी ताक़त से मसल

मसल कर लाल कर दिए. मैं उत्तेजना मे सुलगने लगी. मैने उनके लिंग

के नीचे उनकी गेंदों को अपनी मुट्ठी मे भर कर सहलाना शुरू किया.

बीच बीच मे मेरे फूले हुए निपल्स को दन्तो से काट रहे थे.

जीभ से निपल को छेड़ने लगते. मैं "सीईई…..

आआअहह….म्‍म्म्ममम… उन्न्ञन्… " जैसी आवाज़ें निकालने से नही रोक पा

रही थी. उनके होंठ पूरे स्तन युगल पर घूमने लगे. जगह जगह

मेरे स्तनो को काट काट कर अपने मिलन की निशानी छ्चोड़ने लगे. पूरे

स्तन पर लाल लाल दन्तो के निशान उभर आए. मैं दर्द और उत्तेजना मे

सीईएसीए कर रही थी. और अपने हाथों से अपने स्तनो को उठाकर

उनके मुँह मे दे रही थी.

"कितनी खूबसूरत हो….." कमल ने मेरे दोनो बूब्स को पकड़ कर

खींचते हुए कहा.

"आगे भी कुच्छ करोगे या इनसे ही चिपके रहने का विचार है." मैने

उनको प्यार भारी एक झिड़की दी. निपल्स लगातार चूस्ते रहने के

कारण दुखने लगे थे. स्तनो पर जगह जगह उनके दन्तो से काटने के

लाल लाल निशान उभरने लगे थे. मैं काफ़ी उत्तेजित हो गयी थी.

पंकज इतना फोरप्ले कभी नही करता था. उसको तो बस टाँगें चौड़ी

करके अंदर डाल कर धक्के लगाने मे ही मज़ा आता था.

उन्हों ने मेरी टाँगों को पकड़ कर नीचे की ओर खींचा तो मैं

बिस्तर पर लेट गयी. अब उन्हों ने मेरे दोनो पैरों को उठा कर उनके

नीचे दो तकिये लगा दिए. जिससे मेरी योनि उपर को उठ गयी. मैने

अपनी टाँगों को चौड़ा करके छत की ओर उठा दिए. फिर उनके सिर को

पकड़ कर अपनी योनि के उपा दबा दिया. कमल जी अपनी जीभ निकाल कर

मेरी योनि के अंदर उसे डाल कर घुमाने लगे पूरे बदन मे सिहरन

सी दौड़ने लगी. मैं अपनी कमर को और ऊपर उठाने लगी जिससे उनकी

जीभ ज़यादा अंदर तक जा सके. मेरे हाथ बिस्तर को मजबूती से थाम

रखे थे. मेरी आँखों की पुतलियान पीछे की ओर उलट गयी और मेरा

मुँह खुल गया. मैं ज़ोर से चीख पड़ी,

" हाआअँ और अंदार्रर्ररर. कमाआल आआआहह ऊऊओह

इतनीईए दीईइन कहाआन थीईए. मैईईईन पाआगाअल हो

जाउउउउन्गीईईईई . ऊऊऊओह उउउउउईईईइ माआआअ क्याआआ

कारर्र रहीईई हूऊऊओ कमाआाअल मुझीईई सम्हलूऊऊ

मेराआआ छ्च्ट्नेयी वलाआअ हाईईईईईई. कॅमेययायायायाल इसीईईईईईई

तराआअह साआरी जिन्दगीईई तुम्हाआरि दूओसरीईई बिवीईईइ

बनकर चुड़वटिईई रहूऊऊओँगी" एक दम से मेरी योनि से वीर्य की

बाढ़ सी आई और बाहर की ओर बह निकली. मेरा पूरा बदन किसी पत्ते

की तरह कान्प्प रहा था. काफ़ी देर तक मेरा स्खलन होता रहा. जब

सारा वीर्य कमाल जी के मुँह मे उधेल दिया तो मैने उनके सिर को

पकड़ कर उठाया. उनकी मूच्छें, नाक होंठ सब मेरे वीर्य से सने

हुए थे. उन्हों ने अपनी जीभ निकाली और अपने होंठों पर फिराई.

"छि गंदे." मैने उनसे कहा.

"इसमे गंदी वाली क्या बात हुई?" ये तो टॉनिक है. तुम मेरा टॉनिक पी

कर देखना अगर बदन मे रंगत ना अजाए तो कहना.

" जानू अब आ जाओ." मैने उनको अपने उपर खींचा. "मेरा बदन तप

रहा है. बुखार मे कमज़ोरी आती जा रही है. इससे पहले की मैं थक

जाउ मेरे अंदर अपना बीज डाल दो."

कमल ने अपने लिंग को मेरे मुँह से लगाया.

"एक बार मुँह मे तो लो उसके बाद तुम्हारी योनि मे डालूँगा. पहले एक

बार प्यार तो करो इसे." मैने उनके लिंग को अपनी मुट्ठी मे पकड़ा और

अपनी जीभ निकाल उसे चूसना और चाटना शुरू कर दिया. मैं अपनी

जीभ से उनके लिंग के एकद्ूम नीचे से उपर तक चाट रही थी. अपनी

जीभ से उनके लिंग के नीचे लटकते हुए अंडकोषों को भी चाट रही

थी. उनका लिंग मुझे बड़ा प्यारा लग रहा था. मैं उनके लिंग को

चाटते हुए उनके चेहरे को देख रही थी. उनका उत्तेजित चेहरा बड़ा

प्यारा लग रहा था. दिल को सुकून मिल रहा था कि मैं उन्हे कुच्छ तो

आराम दे पाने मे सफल रही थी. उन्हों ने मुझे इतना प्यार दिया था

कि उसका एक टुकड़ा भी मैं वापस अगर दे सकी तो मुझे अपने ऊपर गर्व

होगा.

उनके लिंग से चिपचिपा सा बेरंग का प्रेकुं निकल रहा था. जिसे मैं

बड़ी तत्परता से चाट कर सॉफ कर देती थी. मैं काफ़ी देर तक उनके

लिंग को तरह तरह से चाटी रही. उनका लिंग काफ़ी मोटा था इसलिए

मुँह के अंदर ज़्यादा नही ले पा रही थी इसलिए जीभ से चाट चाट

कर ही उसे गीला कर दिया था. कुच्छ देर बाद उनका लिंग झटके खाने

लगा. उन्हों ने मेरे सिर पर हाथ रख कर मुझे रुकने का इशारा किया.

"बस.......बस और नही. नही तो अंदर जाने से पहले ही निकल

जाएगा" कहते हुए उन्हों ने मेरे हाथों से अपने लिंग को छुड़ा लिया

और मेरे टाँगों को फैला कर उनके बीच घुटने मोड़ कर झुक गये.

उन्हों ने अपने लिंग को मेरी योनि से सटाया.

"आपका बहुत मोटा है. मेरी योनि को फाड़ कर रख देगा." मैने

घबराते हुए कहा" कमल्जी धीरे धीरे करना नही तो मैं दर्द से

मर जाउन्गि."

वो हँसने लगे.

" आअप बहुत खराब हो. इधर तो मेरे जान की पड़ी है" मैने उनसे

कहा.

मैने भी अपने हाथों से अपनी योनि को चौड़ा कर उनके लिंग के लिए

रास्ता बनाया. उन्हों ने अपने लिंग को मेरी योनि के द्वार पर टीका दिया.

मैने उनके लिंग को पकड़ कर अपनी फैली हुई योनि के अंदर खींचा.

"अंदर कर दो...." मेरी आवाज़ भारी हो गयी थी. उन्हों ने अपने बदन

को मेरे बदन के ऊपर लिटा दिया. उनका लिंग मेरी योनि की दीवारों को

चौड़ा करता हुआ अंदर जाने लगा. मैं सब कुच्छ भूल कर अपने जेठ

के सीने से लग गयी. बस सामने सिर्फ़ कमल थे और कुच्छ नही. वो

ही इस वक़्त मेरे प्रेमी, मेरे सेक्स पार्ट्नर और जो कुच्छ भी मानो, थे.

मुझे तो अब सिर्फ़ उनका लिंग ही दिख रहा था.

जैसे ही उनका लिंग मेरी योनि को चीरता हुआ आगे बढ़ा मेरे मुँह

से "आआआहह" की आवाज़ निकली और उनका लिंग पूरा का पूरा मेरी

योनि मे धँस गया. वो इस पोज़िशन मे मेरे होंठों को चूमने लगे.

" अच्च्छा तो अब पता चला कि मुझसे मिलने तुम भी इतनी बेसब्र थी.

और मैं बेवकूफ़ सोच रहा था कि मैं ही तुम्हारे पीछे पड़ा हूँ.

अगर पता होता ना कि तुम भी मुझसे मिलने को इतनी बेताब हो

तो.......... " वक़्क्या को अधूरा ही रख कर वो कुच्छ रुके.

"तो?.......तो? "

" तो तुम्हे किसी की भी परवाह किए बिना कब का पटक कर ठोक चुका

होता." उन्हों ने शरारती लहजे मे कहा.

"धात..... इस तरह कभी अपने छ्होटे भाई की बीवी से बात करते

हैं? शर्म नही आती आपको?" मैने उनके कान को अपने दाँतों से

चबाते हुए कहा.

" शर्म? अच्च्छा चोदने मे कोई शर्म नही है शर्म बात करने मे ही

है ना?" कहकर वो अपने हाथों का सहारा लेकर मेरे बदन से उठे

साथ साथ उनका लिंग भी मेरी योनि को रगड़ता हुआ बाहर की ओर निकला

फिर वापस पूरे ज़ोर से मेरी योनि मे अंदर तक धँस गया.

"ऊऊहह दर्द कर रहा है." आपका वाकई काफ़ी बड़ा है. मेरी योनि

छिल गयी है. पता नही कल्पना दीदी इतने मोटे लिंग को छ्चोड़ कर

मेरे पंकज मे क्या पाती है?" मैने उनके आगे पीछे होने के र्य्थेम

से पानी र्य्थेम भी मिलाई. हर धक्के के साथ उनका लिंग मेरी योनि

मे अंदर तक घुस जाता और हुमारी कोमल झांते एक दूसरे से रगड़

खा जाती. वो ज़ोर ज़ोर से मुझे ठोकने लगे उनके हर धक्के से पूरा

बिस्तर हिलने लगता. काफ़ी देर तक वो ऊपर से धक्के मारते रहे. मैं

नीचे से अपने पैरों को उठा कर उनकी कमर को अपने लपेट ली थी.

उनके बालों भरे सीने मे अपने तने हुए निपल्स रगड़ रही थी. इस

रगड़ से एक सिहरन सी पूरे बदन मे दौड़ रही थी. मैने अपने

हाथों से उनके सिर को पकड़ कर अपने होंठ उनके होंठों पर लगा कर

अपनी जीभ उनके मुँह मे घुसा दी. मैं इसी तरह उनके लिंग को अपनी

योनि मे लेने के लिए अपने कमर को उचका रही थी. उनके जोरदार

धक्के मुझे पागल बना रहे थे. उन्हों ने अपना चेहरा उपर किया तो

मैं उनके होंठो की चुअन के लिए तड़प कर उनकी गर्देन से लटक

गयी. कमल जी के शरीर मे दम काफ़ी था जो मेरे बदन का बोझ

उठा रखा था. मैं तो अपने हाथों और पैरों के बल पर उनके बदन

पर झूल रही थी. इसी तरह मुझे उठाए हुए वो लगातार चोदे जा

रहे थे. मैं "आअहह उुउऊहह माआअ म्‍म्म्ममम उफफफफफफफ्फ़" जैसी

आवाज़ें निकाले जा रही थी. उनके धक्कों से तो मैं निढाल हो गयी

थी. वो लगातार इसी तरह पंद्रह मिनिट तक ठोकते रहे. इन

पंद्रह मिनिट मे मैं दो बार झ्हड चुकी थी लेकिन उनकी रफ़्तार मे

कोई कमी नही आई थी. उनके सीने पर पसीने की कुच्छ बूँदें

ज़रूर चमकने लगी थी. मैने अपनी जीभ निकाल कर उन नमकीन

बूँदों को चाट दिया. वो मेरी इस हरकत से और जोश मे आ गये.

पंद्रह मिनूट बाद उन्हों ने मेरी योनि से अपने लिंग को खींच कर

बाहर निकाला.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

उन्हों ने मुझे किसी बेबी डॉल की तरह एक झटके मे उठाकर हाथों

और पैरों के बल घोड़ी बना दिया. मेरी टपकती हुई योनि अब उन के

सामने थी.

"म्‍म्म्मम द्डूऊऊ डॅयेयल दूऊव.आआज मुझीई जिथनाआअ जीए मे

आईई मसल डलूऊऊ. आआआः मेरिइई गर्मीईइ शाआंट कर

डूऊऊ." मैं सेक्स की भूखी किसी वेश्या की तरह छत्पता रही थी

उनके लिंग के लिए.

"एक मिनूट ठहरो." कह कर उन्हों ने मेरा गाउन उठाया और मेरी योनि

को अच्छि तरह सॉफ करने लगे. ये ज़रूरी भी हो गया था. मेरी

योनि मे इतना रस निकाला था कि पूरी योनि चिकनी हो गयी थी. उनके

इतने मोटे लिंग के रगड़ने का अब अहसाआस भी नही हो रहा था. जब

तक लिंग के रगड़ने का दर्द नही महसूस होता तब तक मज़ा उतना नही

आ पता है. इसलिए मैं भी उनके इस काम से बहुत खुश हुई. मैने

अपनी टाँगों को फैला कर अपनी योनि के अंदर तक का सारा पानी सोख

लेने मे मदद किया. मेरी योनि को अच्छि तरह सॉफ करने के बाद

उन्होने ने अपनी लिंग पर लगे मेरे रस को भी मेरे गाउन से सॉफ

किया. मैने बेड के सिरहाने को पकड़ रखा था और कमर उनके तरफ

कर रखी थी. उन्हों ने वापस अपने लिंग को मेरी योनि के द्वार पर

लगा कर एक और जोरदार धक्का दिया.

"ह्म्‍म्म्मममफफफफफफफफ्फ़" मेरे मुँह से एक आवाज़ निकली और मैने वापस

महसूस किया उनके लिंग को अपनी दुखती हुई योनि को रगड़ते हुए अंदर

जाते हुए. वो दोबारा ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगे. उनके धक्कों से

मेरे बड़े बड़े स्तन किसी पेड पर लटके आम की तरह झूल रहे थे.

मेरे गले पर पहना हुआ भारी मंगलसूत्रा उनके धक्को से उच्छल

उच्छल कर मेरे स्तनो को और मेरी थुदी को टक्कर मार रहा था.

मैने उसके लॉकेट को अपने दाँतों से दबा लिया. जिससे कि वो झूले

नही. कमल जी ने मेरी इस हरकत को देख कर मेरे मंगलसूत्रा को

अपने हाथों मे लेकर अपनी ओर खींचा. मैने अपना मुँह खोल दिया. अब

ऐसा लग रहा था मानो वो किसी घोड़ी की सवारी कर रहे हों. और

मंगलसूत्रा उनके हाथों मे दबी उसकी लगाम हो. वो इस तरह मेरी

लगाम थामे मुझे पीछे से ठोकते जा रहे थे.

"कमल...... .ऊऊऊहह. ....कमल. .....मेरा वापस झड़ने वाला

है.

तुम भी मेरा साथ दो प्लीईईसससे" मैने कमाल से मेरे साथ

झड़ने का आग्रह किया. कमल्जी ने मेरी पीठ पर झुक कर मेरे झूलते

हुए दोनो स्तनो को अपनी मुट्ठी मे पकड़ लिया और पीछे से अपने

कमर को आगे पीछे थेल्ते हुए ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगे. मैने

अपने सिर को झटका देकर अपने चेहरे पर बिखरी अपनी ज़ुल्फो को

पीछे किया तो मेरे दोनो स्तनो को मसल्ते हुए जेत्जी के हाथों को

देखा. उनके हाथ मेरे निपल्स को अपनी चुटकियों मे भर कर मसल

रहे थे.

"म्‍म्म्मम….कमल……कमल……" अब हुमारे बीच कोई रिश्तों की ओपचारिकता

नही बची थी. मैं अपने जेठ को उनके नाम से ही बुला रही थी,"

कमल......मैं झाड़ रही हूँ......कमल तुम भी आ जाओ... तुम भी

अपनी धार छ्चोड़ कर संगम कर्दूऊओ"

मैने महसूस किया कि उनका लिंग भी झटके लेने लगा है. उन्हों ने

मेरे गर्दन के पास अपना चेहरा रख दिया/ उनकी गर्म गर्म साँस मेरी

गर्दन पर महसूस कर रही थी. उन्हों ने लगभग मेरे कान मे

फुसफुसते हुए कहा, " सीमी........ .मेरा निकल रहा है. आआअज

तुम्हारी कोख तुम्हारे जेठ के रस से भर जाएगी."

" भर जाने दो मेरीई जानां…….दाआल्दूओ……मेरे पेट मे अपना

बच्चा डाल दो. मैं अप्नकूऊ अपनी कोख सीईए बच्चाअ

दूँगी." मैने कहा और एक साथ दोनो के बदन से अमृत की धार बह

निकली. उनकी उंगलियाँ मेरे स्तनों को बुरी तरह निचोड़ दिए. मेरे

दाँत मेरे मंगलसूत्रा पर गड़ गये. और हम धोनो बिस्तर पर गिर

पड़े. वो मेरे उपर ही पड़े हुए थे. हमारे बदन पसीने से लत्पथ

हो रहे थे.

" आआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह कमल्जीिइईई…….आआज्जजज आआपनईए मुझीए वााक़ई

ठंडाअ कार दियाआ………आआअपनीईए………मुझीईए……वूऊओ…

मज़ाआअ…..दियाआअ……जिसक्ीईए …लिईईए मैईईइ…..काफ़िईईईई… .दीनो

से तड़प रही……थी…..म्‍म्म्मममम" मेरा चेहरा तकिये मे धंसा हुआ था

और मैं बड़बड़ाई जा रही थी. वो बहुत खुश हो गये. और मेरी नग्न

पीठ को चूमने लगे बीच बीच मे मेरे पीठ पर काट भी देते.

मैं बुरी तरह तक चुकी थी. वापस बुखार ने मुझे घेर लिया. पता

ही नही चला कब मैं नींद के आगोश मे चली गयी.

जेठ जी ने मेरे नग्न बदन पर कपड़े किस तरह पहनाए ये भी पता

नही चल पाया. उन्हों ने मुझे कपड़े पहना कर चादर से अच्छि

तरह लपेट कर सुला दिया. मैं सुंदर सुंदर सपनो मे खो गयी.

अच्च्छा हुआ कि उन्हों ने मुझे कपड़े पहना दिए थे वरना अपनी इस

हालत की व्याख्या पंकज और कल्पना दीदी से करना मुश्किल काम होता.

मेरे पूरे बदन पर उकेरे गये दाँतों के निशानो की सुंदर

चित्रकारी का भी कोई जवाब नही था.

जब तक दोनो वापस नही आ गये कमल जी की गोद मे ही सिर रख कर

सोती रही. और कमल जी घंटों मेरे बालों मे अपनी उंगलियाँ फेरते

रहे. बीच बीच मे मेरे गालों पर या मेरे होंठों पर अपने गर्म

होंठ रख देते.

पंकज और कल्पना रात के दस बजे तक चहकते हुए वापस लौटे.

होटेल से खाना पॅक करवा कर ही लौटे थे. मेरी हालत देख कर

पंकज और कल्पना घबरा गये. बगल मे ही एक डॉक्टर रहता था उसे

बुला कर मेरी जाँच करवाई.डॉक्टर ने देख कर कहा कि वाइरल

इन्फेक्षन है दवाइयाँ लिख कर चले गये.

दवाई खाने के बाद ही हालत थोड़ी ठीक हुई. दो दिन मे एकद्ूम स्वस्थ

हो गयी. इस दौरान हम चारों के बीच किसी तरह का कोई सेक्स का

खेल नही हुआ.

अगले दिन पंकज का जन्मदिन था. शाम को बाहर खाने का प्रोग्राम था.

एक बड़े होटेल मे सीट पहले से ही बुक कर रखे थे. वहीं पर

पहले दोनो भाइयों ने ड्रिंक्स ली फिर खाना खाया. वापस लौटते समय

पंकज बज़ार से एक ब्लू फिल्म का ड्व्ड खरीद लाए.

घर पहुँच कर हम चारों कपड़े बदल कर हल्के फ्लूके गाउन मे

हुमारे बेडरूम मे इकट्ठे हुए. फिर पहले एंपी3 चला कर कुच्छ देर

तक एक दूसरे की बीवियों के साथ हमने डॅन्स किया. मैं जेत्जी की

बाहों मे थिरक रही थी और कल्पना दीदी को पंकज ने अपने बाँहों

मे भर रखा था. फिर पंकज ने कमरे की ट्यूबलाइज्ट ऑफ कर दी और

सिर्फ़ एक हल्का नाइट लॅंप जला दिया. हम चारों बिस्तर पर बैठ गये.

पंकज ने द्वड ऑन करके ब्लू फिल्म चला दी. फिर बिस्तर के सिरहाने पर

पीठ लगा कर हम चारों बैठ गये. एक किनारे पर पंकज बैठा

था और दूरे किनारे पर कमल्जी थे. बीच मे हम दोनो औरतें थी.

दोनो ने अपनी अपनी बीवियों को अपनी बाँहों मे समेट रखा था. इस

हालत मे हम ब्लू फिल्म देखने लगे. फिल्म जैसे जैसे आगे बढ़ती

गयी कमरे का महॉल गर्म होता गया. दोनो मर्द बिना किसी शर्म के

अपनी अपनी बीवियों के गुप्तांगों को मसल्ने लगे. पंकज मेरे स्तनो को

मसल रहा था और कमल कल्पना दीदी के. पंकज ने मुझे उठा कर

अपनी टाँगों के बीच बिठा लिया. मेरी पीठ उनके सीने से सटी हुई

थी. वो अपने दोनो हाथ मेरी गाउन के अंदर डाल कर अब मेरे स्तनो को

मसल रहे थे. मैने देखा कल्पना दीदी पंकज को चूम रही थी

और पंकज के हाथ भी कल्पना दीदी की गाउन के अंदर थे. मुझे उन

दोनो को इस हालत मे देख कर पता नही क्यों कुच्छ जलन सी होने

लगी. हम दोनो के गाउन कमर तक उठ गये थे. और नंगी जंघें

सबके सामने थी. पंकज ने अपने एक हाथ को नीचे से मेरे गाउन मे

घुसा कर मेरी योनि को सहलाने लगे. मैं अपनी पीठ पर उनके लिंग की

ठिकार को महसूस कर रही थी.

कमल ने कल्पना दीदी के गाउन को कंधे पर से उतार दिया था और एक

स्तन को बाहर निकाल कर चूसने लगे. ये देख कर पंकज ने भी मेरे

एक स्तन को गाउन के बाहर निकालने की कोशिश की. मगर मेरे इस गाउन

का गला कुच्छ छ्होटा था इसलिए उसमे से मेरा स्तन बाहर नही निकल

पाया. उन्हों ने काफ़ी कोशिशें की मगर सफल ना होते देख कर गुस्से

मे एक झटके मे मेरे गाउन को मेरे बदन से हटा दिया. मैं सबके

सामने बिल्कुल नंगी हो गयी क्योंकि प्रोग्राम के अनुसार हम दोनो ने

गाउन के अंदर कुच्छ भी नही पहन रखा था. मैं शर्म के मारे अपने

हाथों से अपने स्तनो को छिपाने लगी अपनी टाँगों को एक दूसरे से

सख्ती से दाब रखी थी जिससे मेरी योनि के दर्शन ना हों.

"क्या करते हो….शर्म करो……बगल मे कमल भैया और कल्पना दीदी

हैं तुम उनके सामने मुझे नंगी कर दिए. छ्ह्हि छि क्या सोचेंगे

जेत्जी? मैने फुसफुसते हुए पंकज के कानो मे कहा जिससे बगल वाले

नही सुन सके.

"तो इसमे क्या है ? कल्पना भाभी भी तो लगभग नंगी ही हो चुकी

हैं. देखो उनकी तरफ…" मैने अपनी गर्देन घुमा कर देखा तो पाया

कि पंकज सही कह रहा था. कमल्जीई ने दीदी के गाउन को छातियो

से भी उपर उठा रखा था. वो दीदी की चूचियो को मसले जा रहे

थे. उन्हों ने दीदी के एक निपल को अपने दाँतों से काटते हुए दूसरे

बूब को अपनी मुट्ठी मे भर कर मसल्ते जा रहे थे. कल्पना दीदी ने

कमल्जी के पायजामे को खोल कर उनके लिंग को अपने हाथों मे लेकर

सहलाना शुरू कर दिया था.

इधर पंकज ने मेरी टाँगों को खोल कर अपने होंठों से मेरी योनि के

उपर फेरने लगा. उसने उपर बढ़ते हुए मेरे दोनो निपल्स को कुच्छ

देर चूसा फिर मेरे होंठों को चूमने लगा. कल्पना दीदी के बूब्स

भी मेरी तरह काफ़ी बड़े बड़े थे दोनो भाइयों ने लगता है दूध की

बोतलों का मुआयना करके ही शादी के लिए पसंद किया था. कल्पना

दीदी के निपल्स काफ़ी लंबे और मोटे हैं जबकि मेरे निपल्स कुच्छ

छ्होटे हैं. अब हम चारों एक दूसरे की जोड़ी को निहार रहे थे. पता

नही टीवी स्क्रीन पर क्या चल रहा था. सामने लिव ब्लू फिल्म इतनी गर्म

थी कि टीवी पर देखने की किसे फुरसत थी. पंकज ने मेरे हाथों को

अपने हाथों से अपने लिंग पर दबा कर सहलाने का इशारा किया. मैने

भी कल्पना दीदी की देखा देखी पंकज के पायजामे को ढीला करके

उनके लिंग को बाहर निकाल कर सहला रही थी. कमल की नज़रें मेरे

बदन पर टिकी हुई थी. उनका लिंग मेरे नग्न बदन को देख कर

फूल कर कुप्पा हो रहा था.

चारों अपने अपने लाइफ पार्ट्नर्स के साथ सेक्स के गेम मे लगे हुए

थे. मगर चारों ही एक दूसरे के साथी की कल्पना करके उत्तेजित हो

रहे थे. पंकज ने बेड पर लेटते हुए कल्पना दीदी को अपनी टाँगों

के बीच खींच लिया और उनके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर

झुकाया. कल्पना दीदी उनके लिंग पर झुकते हुए हुमारी तरफ देखी.

पल भर को मेरी नज़रों से उनकी नज़रें मिली तो उन्हों ने मुझे भी

ऐसा करने को इशारा करते हुए मुस्कुरा दी. मैने भी पंकज के लिंग

पर झुक कर उसे चाटना शुरू किया. पंकज के लिंग को मैं अपने मुँह

मे भर कर चूसने लगी और कल्पना दीदी कमल के लिंग को चूस

रही थी. इसी दौरान हम चारों बिल्कुल नग्न हो गये.

" पंकज लाइट बंद कर दो शर्म आ रही है." मैने पंकज को

फुसफुसते हुए कहा.

"इसमे शर्म किस बात की. वो भी तो हमारे जैसी हालत मे ही हैं."

कहकर उन्हों ने पास मे काम क्रीड़ा मे व्यस्त कमल और कल्पना की ओर

इशारा किया. पंकज ने मुझे अपने उपर लिटा लिया. वो ज़्यादा देर तक

ये सब पसंद नही करते थे. थोड़े से फोरप्ले के बाद ही वो योनि

के अंदर अपने लिंग को घुसा कर अपनी सारी ताक़त चोदने मे लगाने

पर ही विस्वास करते थे. उन्हों ने मुझे अपने उपर खींच कर अपनी

योनि मे उनका लिंग लेने के लिए इशारा किया. मैं उनकी कमर के पास

बैठ कर घुटनो के बल अपनी बदन को उनके लिंग के उपर किया. फिर

उनके लिंग को अपने हाथों से अपनी योनि के मुँह पर सेट करके मैं अपने

बदन का सारा बोझ उनके लिंग पर डाल दी. उनका लिंग मेरे योनि के

अंदर घुस गया. मैने पास मे दूसरे जोड़े की ओर देखा. दोनो अभी

भी मच मैथुन मे बिज़ी थे. कल्पना दीदी अभी भी उनके लिंग को

चूस रही थी. मेरा तो उन दोनो के मुख मैथुन की अवस्था देख कर

ही पहली बार झाड़ गया.

तभी पंकज ने ऐसी हरकत की जिससे हुमारे बीच बची खुचि शर्म

का परदा भी तर्तर हो गया, पंकज ने कमल्जी का हाथ पकड़ा और

मेरे एक स्तन पर रख दिया. कमल ने अपने हाथों मे मेरे स्तन को

थाम कर कुच्छ देर सहलाया. ये पहली बार था जब किसी गैर मर्द ने

मुझे मेरे हज़्बेंड के सामने ही मसला था. कमल मेरे एक स्तन को

थोड़ी देर तक मसल्ते रहे फिर मेरे निपल को पकड़ कर अपनी

उंगलियों से उमेथ्ने लगे.

पंकज इसी का बहाना लेकर कल्पना दीदी के एक स्तन को अपने हाथों मे

भर कर दबाने लगे. पंकज की आँखें कल्पना दीदी से मिली और

कल्पना दीदी अपने सिर को कमल्जी के जांघों के बीच से उठा कर आगे

आ गयी. जिससे पंकज को उनके स्तनो पर हाथ फिराने के लिए ज़्यादा

मेहनत नही करनी पड़े. अब हम दोनो महिलाएँ अपने अपने हज़्बेंड के

लिंग की सवारी कर रहे थे. उपर नीचे होने से दोनो की बड़ी बड़ी

चूचिया उच्छल रही थी. पंकज के हाथों की मालिश अपने स्तनो पर

पाकर कल्पना दीदी की धक्के मारने की रफ़्तार बढ़ गयी. और वो, "

आआहह म्‍म्म्मम" जैसी आवाज़ें मुँह से निकालती हुई कमल जी पर लेट

गयी. लेकिन कमल्जी का तना हुआ लिंग उनकी योनि से नही निकला.

कुच्छ देर तक इसी तरह चोदने के बाद. पंकज ने मुझे अपने उपर से

उठा कर बिस्तर पर लिटाया और मेरी दोनो टाँगें उठा कर अपने कंधे

पर रख दिया और मेरी योनि पर अपने लिंग को लगा कर अंदर धक्का

दे दिया. फिर मेरी योनि पर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे. मैं कमल

की बगल मे लेटी हुई उनको कल्पना दीदी के चूमते और प्यार करते

हुए देख रही थी. मेरे मन मे जलन की आग लगी हुई थी. काश

वहाँ उनके बदन पर कल्पना दीदी नही बल्कि मेरा नग्न बड़ा पसरा हुआ

होता.

वो मुझे बिस्तर पर लेते हुए ही निहार रहे थे. उनके होंठ कल्पना

दीदी को चूम चाट रहे थे लेकिन आँखें और दिल मेरे पास था. वो

अपने हाथों को मेरे बदन पर फेरते हुए शायद मेरी कल्पना करते

हुए अपनी कल्पना को वापस ठोकने लगे. कल्पना दीदी के काफ़ी देर तक

ऊपर से करने के बाद कमल्जी ने उसे हाथों और पैरों के बल झुका

दिया. ये देख पंकज भी मुझे उल्टा कर मुझे भी उसी पोज़िशन मे

कर दिया. सामने आईना लगा हुआ था. हम दोनो जेठानी देवरानी पास

पास घोड़ी बने हुए थे. दोनो ने एक साथ एक र्य्थेम मे हम दोनो को

ठोकना शुरू किया. चार बड़े बड़े स्तन एक साथ आगे पीछे हिल

रहे थे. हम दोनो एक दूसरे की हालत देख कर और अधिक उत्तेजित हो

रहे थे. कुकछ देर तक इस तरह करने के बाद दोनो ने हम दोनो को

बिस्तर पर लिटा दिया और उपर से मिशनरी स्टाइल मे धक्के मारने

लगे. इस तरह संभोग करते हुए हमारे बदन अक्सर एक दूसरे से

रगड़ खा कर और अधिक उत्तेजना का संचार कर रहे थे.

कल्पना दीदी अब झड़ने वाली थी वो ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी, "

हाआअँ ……हाआअँ….ओउउउर्र्र जूऊओर सीई और जूऊर सीई. हाआँ

इसीईईईई तराआहह. काअमाअल आअज तुम मे काफ़िईई जोश हाीइ… आअज

तो तुम्हारा बहुत तन रहा है. आअज तूओ मैईईईई निहाआअल हो

गइईए" इस तरह बड़बड़ाते हुए उसने अपनी कमर को उचकाना शुरू

किया और कुच्छ ही देर मे इस तरह बिस्तर पर निढाल होकर गिरी मानो

उसके बदन से हवा निकल दी गयी हो. अब तो कमल्जी उसके ठंडे पड़े

शरीर को ठोक रहे थे.

क्रमशः........................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

मैं हूँ हसीना गजब की--पार्ट--5

गतान्क से आगे........................

जब बार बार परेशानी हुई तो उन्हों ने मुझे बिस्तर से नीचे उतार
कर पहले बिस्तर के कोने मे मसनद रखा फिर मुझे घुटनो के बल
झुका दिया. अब मेरे पैर ज़मीन पर घुटनो के बल टीके हुए थे और
कमर के उपर का बदन मसनद के उपर से होता हुआ बिस्तर पर पसरा
हुआ था. मसनद होने के कारण मेरे नितंब उपर की उर उठ गये थे.
येअवस्था मेरे लिए ज़्यादा सही थी. मेरे किसी भी अंग पर अब ज़्यादा ज़ोर
नही पड़ रहा था. इस अवस्था मे उन्हों ने बिस्तर के उपर अपने हाथ
रख कर अपने लिंग को वापस मेरी योनि मे ठोक. कुच्छ देर तक इस
तरहठोकने के बाद उनके लिंग से रस झड़ने लगा. उन्हों ने मेरी योनि मे
सेअपना लिंग निकाल कर मुझे सीधा किया और अपने वीर्य की धार मेरे
चेहरे पर और मेरे बालों पर कर दिया. इससे पहले कि मैं अपना मुँह
खोलती, मैं उनके वीर्य से भीग चुकी थी. इस बार झड़ने मे उन्हे
बहुत टाइम लग गया.

मैं थकान से एकद्ूम निढाल हो चुकी थी. मुझमे उठकर बाथरूम मे
जाकर अपने को सॉफ करने की भी हिम्मत नही थी. मैं उसी अवस्था मे
आँखें बंद किए पड़ी रही. मेरा आधा बदन बिस्तर पर था और आधा
नीचे. ऐसे अजीबोगरीब अवस्था मे भी मैं गहरी नींद मे डूब
गयी. पता ही नही चला कब कमल्जी ने मुझस सीधा कर के बिस्तर
पर लिटा दिया और मेरे नग्न बदन से लिपट कर खुद भी सो गये.


बीच मे एक बार ज़ोर की पेशाब आने की वजह से नींद खुली तो मैने
पाया कि कमल्जी मेरे एक स्तन पर सिर रखे सो रहे थे. मैने उठने
की कोशिश की लेकिन पूरा बदन दर्द से टूट रहा था इस लिए मैं
दर्द से कराह उठी. मुझसे उठा नही गया तो मैने कमल्जी को उठाया.

"मुझे सहारा देकर बाथरूम तक ले चलो प्लीईएसए" मैने उनसे
कहा. उन्हों ने उठ कर मुझे सहारा दिया मैं लड़खड़ते कदमों से उनके
कंधे पर सारा बोझ डालते हुए बाथरूम मे गयी. उन्हों ने मुझे
अंदर छ्चोड़ कर खड़े हो गये.

" आप बाहर इंतेज़ार कीजिए. मैं बुला लूँगी." मैने कहा.

" अरे कोई बात नही मैं यहीं खड़ा रहता हूँ अगर तुम गिर गयी
तो?"

" छि इस तरह आपके सामने इस हालत मे मैं कैसे पेशाब कर सकती
हूँ?"

"तो इसमे शरमाने की क्या बात है? हम दोनो मे तो सब कुच्छ हो गया
है अब शरम किस बात की?" उन्हों ने बाथरूम का दरवाजा भीतर से
बंद करते हुए कहा.

"मैने शर्म के मारे अपनी आँखें बंद कर ली. मेरा चेहरा शर्म से
लाल हो रहा था. लेकिन मैं इस हालत मे अपने पेशाब को रोकने मे
असमर्थ थी सो मैं कॉमोड की सीट पर इसी हालत मे बैठ गयी.

जब मैं फ्री हुई तो उन्हों ने वापस मुझे सहारा देकर बिस्तर तक
छ्चोड़ा. मैं वापस उनकी बाहों मे दुबक कर गहरी नींद मे सो गयी.

अगले दिन सुबह मुझे कल्पना दीदी ने उठाया तब सुबह के दस बज

रहे
थे. मैं उस पर भी उठने के मूड मे नही थी और "उन्ह उन्ह" कर रही
थी. अचानक मुझे रात की सारी घटना याद आई. मैने चौंक कर
आँखें खोली तो मैने देखा कि मेरा नग्न बदन गले तक चादर से
ढका हुआ है. मुझ पर किसने चादर ढक दिया था पता नही चल
पाया. वैसे ये तो लग गया था कि ये कमल के अलावा कोई नही हो
सकताहै.

"क्यों बन्नो? रात भर कुटाई हुई क्या?" कल्पना दीदी ने मुझे छेड़ते
हुए पूचछा.

"दीदी आअप भी ना बस……"मैने उठते हुए कहा.

" कितनी बार डाला तेरे अंदर अपना रस. रात भर मे तूने तो उसकी
गेंदों का सारा माल खाली कर दिया होगा."

मैं उठ कर बाथरूम की ओर भागने लगी तो उन्हों ने मेरी बाँह पकड़
कर रोक लिया, "बताया नही तूने?"

मैं अपना हाथ छुड़ा कर बाथरूम मे भाग गयी. कल्पना दीदी
दरवाजा
खटखटती रह गयी लेकिन मैने दरवाजा नही खोला. काफ़ी देर तक
मैं शवर के नीचे नहाती रही और अपने बदन पर बने अनगिनत
दाँतों के दागों को सहलाती हुई रात के मिलन की एक एक बात को याद
करने लगी. मैं बावरइयों की तरह खुद ही मुस्कुरा रही थी कमल्जी
की
हरकतें याद करके. उनका प्यार करना, उनकी हरकतें, उनका गठा हुआ
बदन. उनके बाजुओं से उठती पसीने की खुश्बू, उनकी हर चीज़ मुझ
पर एक नशा मे डुबती जा रही थी. मेरे बदन का रोया रोया किसी
बिन ब्याही युवती की तरह अपने प्रेमी को पुकार रही थी. शवर से
गिरती ठंडे पानी की फुहार भी मेरे बदन की गर्मी को ठंडा नही
कर पा रही थी बकली खुद गर्म भाप बन कर उड़ जा रही थी.

काफ़ी देर तक नहाने के बाद मैं बाहर निकली. कपड़े पहन कर मैं
बेडरूम से निकली तो मैने पाया की जेठ जेठानी दोनो निकलने की
तैयारीमे लगे हुए हैं. ये देख कर मेरा वजूद जो रात के मिलन के बाद
सेबादलों मे उड़ रहा था एक दम से कठोर ज़मीन पर आ गिरा. मेरा
चहकता हुआ चेहरा एकद्ूम से कुम्हला गया.

मुझे देखते ही पंकज ने कहा, "स्मृति खाना तैयार करलो. भाभी
ने काफ़ी कुच्छ तैयारी कर ली है अब फिनिशिंग टच तुम देदो.
भैया भाभी जल्दी ही निकल जाएँगे."
मैं कुच्छ देर तक चुपचाप खड़ी रही और तीनो को समान पॅक करते
देखती रही. कमल्जी कनखियों से मुझे देख रहे थे. मेरी आँखें
भारी हो गयी और मैं तुरंत वापस मूड कर किचन मे चली गयी.

मैं किचन मे जाकर रोने लगी. अभी तो एक प्यारे से रिश्ते की
शुरुआत ही हुई थी और वो पत्थर दिल बस अभी छ्चोड़ कर जा रहा है. मैं
अपने होंठों पर अपने हाथ को रख कर सुबकने लगी. तभी पीछे
सेकोई मेरे बदन से लिपट गया. मैं उनको पहचानते ही घूम कर उनके
सीने से लग कर फफक कर रो पड़ी. मेरे आँसुओं का बाँध टूट गया
था.

"प्लीज़ कुच्छ दिन और रुक जाओ." मैने सुबक्ते हुए कहा.

"नही आज मेरा ऑफीस मे पहुँचना बहुत ज़रूरी है वरना एक
इंपॉर्टेंट मीटिंग कॅन्सल करनी पड़ेगी."

"कितने बेदर्द हो. आपको मीटिंग की पड़ी है और मेरा क्या होगा?"

"क्यों पंकज है ना. और हम हमेशा के लिए थोड़ी जा रहे हैं
कुच्छ
दिन बाद बाद मिलते रहेंगे. ज़्यादा साथ रहने से रिश्तों मे बसीपान
आ जाता है." वो मुझे सांत्वना देते हुए मेरे बालों को सहला रहे
थे. मेरे आँसू रुक चुके थे लेकिन अभी भी उनके सीने से लग कर
सूबक रही थी. मैने आँसुओं से भरा चेहरा उपर किया. कमल ने
अपनी
उंगलियों से मेरे पलकों पर टीके आँसुओं को सॉफ किया फिर मेरे गीले
गालों पर अपने होंठ फिराते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख
दिए. मैं तड़प कर उनसे किसी बेल की तरह लिपट गयी. हमारा
वजूद
एक हो गया था. मैने अपने बदन का सारा बोझ उनपर डाल दिया और
उनके मुँह मे अपनी जीभ डाल कर उनके रस को चूसने लगी. मैने
अपने
हाथों से उनके लिंग को टटोला

"तेरी बहुत याद आएगी." मैने ऐसे कहा मानो मैं उनके लिंग से बातें
कर रही हूँ," तुझे नही आएगी मेरी याद?"

" इसे भी हमेशा तेरी याद आती रहे गी." उन्हों ने मुझसे कहा.

"आप चल कर तैयारी कीजिए मैं अभी आती हूँ." मैने उनसे कहा.
वोमुझे एक बार और चूम कर वापस चले गये.

उनके निकलने की तयारि हो चुकी थी. उनके निकलने से पहले मैने
सबकी आँख बचा कर उनको एक गुलाब भेंट किया जिसे उन्हों ने तुरंत
अपने होंठों से छुआ कर अपनी जेब मे रख लिया.

काफ़ी दीनो तक मैं उदास रही. पंकज मुझे बहुत टीज़ करता था
उनका नाम ले लेकर. मैं भी उनके बातों के जवाब मे कल्पना दीदी को ले
आतीथी. धीरे धीरे हुमारा रिश्ता वापस नॉर्मल हो गया. कमल का
अक्सरमेरे पास फोन आता था. हम नेट पर कॅम की हेल्प से एक दूसरे को
देखते हुए बातें करते थे.

लेकिन जो सबसे बुरा हुआ वो ये कि मेरी प्रेग्नेन्सी नही ठहरी. कमल्जी
को एक यादगार गिफ्ट देने की तमन्ना दिल मे ही रह गयी.

उसके बाद काफ़ी दीनो तक ज़्ब कुच्छ अच्च्छा चलता रहा सबसे बुरा तो
येहुआ कि कमल्जी से उन मुलाकात के बाद उस महीने मेरे पीरियड्स आ गये.
उनके स्पर्म से मैं प्रज्नेन्ट नही हुई. ये उनको और ज़्यादा उदास कर
गया.
लेकिन मैने उन्हे दिलासा दिया. उनको मैने कहा कि मैने जब ठान
लियाहै तो मैं तुम्हे ये गिफ्ट तो देकर ही रहूंगी.

वहाँ सब ठीक ठाक चलता रहा लेकिन कुच्छ महीने बाद पंकज
काम से देर रात तक घर आने लगा. मैने उनके ऑफीस मे भी पता
किया तो पता लगा कि वो बिज़्नेस मे घाटे के दौर से गुजर रहा है.
और जो फर्म उनका सारा प्रोडक्षन खरीद कर अब्रोड भेजता था उस
फर्मने उनसे रिस्ता तोड़ देने का ऐलान किया है.

एक दिन जब उदास हो कर घर आए तो मैने उनसे इस बारे मे डिसकस
करने का सोचा. मैने उनसे पूछा कि वो परेशान क्यों रहने लगे
हैं. तो उन्होने कहा,


"एलीट एक्शप्रोटिंग फर्म हुमारी कंपनी से नाता तोड़ रहा है. जहाँ तक
मैने सुना है उनका मुंबई की किसी फर के साथ पॅक्ट हुआ है."

"लेकिन हुमारी कंपनी से इतना पुराना रिश्ता कैसे तोड़ सकते हैं."

"क्या बताउ उस फर्म का मालिक रस्तोगी और छिन्नास्वामी पैसे के अलावा
भी कुच्छ फेवर माँगते हैं जो कि मैं पूरा नही कर सकता." पंकज
ने कहा

"ऐसा क्या डिमॅंड करते हैं?" मैने उनसे पूचछा

"दोनो एक नंबर के रांदबाज हैं. उन्हे लड़की चाहिए."

"तो इसमे क्या परेशान होने की बात हुई. इस तरह की फरमाइश तो कई
लोग करते हैं और करते रहेंगे." मैने उनके सिर पर हाथ फेर कर
सांत्वना दी " आप तो कुच्छ इस तरह की लड़कियाँ रख लो अपनी कंपनी
मे या फिर किसी प्रोस को एक दो दिन का पेमेंट देकर मंगवा लो उनके
लिए."

" अरे बात इतनी सी होती तो परेशानी क्या थी. वो बाजारू औरतों को
नही पसंद करते. उन्हे तो कोई सॉफ सुथरी औरत चाहिए कोई
घरेलू महिला." पंकज ने कहा, "दोनो अगले हफ्ते यहाँ आ रहे हैं
और अपना ऑर्डर कॅन्सल करके इनवेस्टमेंट वापस ले जाएँगे. हुमारी
कंपनी बंद हो जाएगी."

" तो पापा से बात कर लो वो आपको पैसे दे देंगे." मैने कहा

" नही मैं उनसे कुच्छ नही माँगूंगा. मुझे अपनी परेशानी खुद ही
हलकरना पड़ेगा. अगर पैसे दे भी दिए तो भी जब खरीदने वाला कोई
नही रहेगा तो कंपनी को तो बंद करना ही पड़ेगा." पंकज ने
कहा, "
वो यूएसए मे जो फर्म हमारा माल खरीदता है उसका पता देने को
तैयारनही हैं. नही तो मैं डाइरेक्ट डीलिंग ही कर लेता."

"फिर?" मैं कुच्छ समझ नही पा रही थी कि इसका क्या उपाय सोचा जाय.

"फिर क्या....? जो होना है होकर रहेगा." उन्हों ने एक गहरी साँस ली.
मैने उन्हे इतना परेशान कभी नही देखा था.

"कल आप उनको कह दो कि लड़कियों का इंतेज़ाम हो जाएगा." मैने
कहा "देखते है उनके यहाँ पहुँचने से पहले क्या किया जा सकता

अगले दिन जब वो आए तो उन्हे रिलॅक्स्ड पाने की जगह और ज़्यादा टूटा
हुआपाया. मैने कारण पूचछा तो वो टाल गये.

" अपने बात की थी उनसे? "

"हां"

"फिर क्या कहा अपने? वो तैयार हो गये? अरे परेशान क्यों होते हो
हम लोग इस तरह किकिसी औरत को ढूँढ लेंगे. जो दिखने मे सीधी
साधी घरेलू महिला लगे."

" अब कुच्छ नही हो सकता"

"क्यों?" मैने पूचछा.

" तुम्हे याद है वो हुमारी शादी मे आए थे."

" हाँ तो?"

" उन्हों ने शादी मे तुम्हे देखा था."

"तो..?" मुझे अपनी साँस रुकती सी लगी एक अजीब तरह का भय पुर
बदन मे छाने लगा.

" उन्हे सिर्फ़ तुम चाहिए."

" क्या?" मैं लगभग चोंक उठी," उन हरमजदों ने स्मझा क्या है
मुझे? कोई रंडी?"


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

वो सिर झुकाए हुए बैठे रहे. मैं गुस्से से बिफर रही थी औरूनको
गलियाँ दे रही थी कोस रही थी. मैने अपना गुस्सा शांत करने के
लिए किचन मे जाकर एक ग्लास पानी पिया. फिर वापस आकर उनके पास
बैठ गयी और कहा,

"फिर?......" मैने अपने गुस्से को दबाते हुए उनसे धीरे धीरे
पूछि.

" कुच्छ नही हो सकता." उन्हों ने कहा, " उन्हों ने सॉफ सॉफ कहा
है.
कि या तो तुम उनके साथ एक रात गुजारो या मैं एलीट ग्रूप से अपना
कांट्रॅक्ट ख़तम समझू." उन्हों ने नीचे कार्पेट की ओर देखते हुए
कहा.

" हो जाने दो कांट्रॅक्ट ख़त्म. ऐसे लोगों से संबंध तोड़ लेने मे ही
भलाई होती है. तुम परेशान मत हो. एक जाता है तो दूसरा आ जाता
है."

" बात अगर यहाँ तक होती तो भी कोई परेशानी नही थी." उन्हों ने
अपना सिर उठाया और मेरी आँखों मे झाँकते हुए कहा, " बात इससे
कहीं ज़्यादा गंभीर है. अगर वो अलग हो गये तो एक तो हमारे माल की
खपत बंद हो जाएगी जिससे कंपनी बंद हो जाएगी दूसरा उनसे
संबंध तोड़ते ही मुझे उन्हे 15 करोड़ रुपये देने पड़ेंगे जो उन्हों
नेहमारे फर्म मे इनवेस्ट कर रखे हैं."

मैं चुप चाप उनकी बातों को सुन रही थी लेकिन मेरे दिमाग़ मे एक
लड़ाईछिड़ी हुई थी.

"अगर फॅक्टरी बंद हो गयी तो इतनी बड़ी रकम मैं कैसे चुका
पौँगा. अपने फॅक्टरी बेच कर भी इतना नही जमा कर पौँगा" अब
मुझेभी अपनी हार होती दिखाई दी. उनकी माँग मानने के अलावा अब और कोई
रास्ता नही बचा था. उस दिन और हम दोनो के बीच बात नही हुई.
चुप चाप खाना खा कर हम सो गये. मैने तो सारी रात सोचते हुए
गुज़ारी. ये ठीक है कि पंकज के अलावा मैने उनके बहनोई और उनके
बड़े भैया से सरिरिक संबंध बनाए हैं और कुछ कुछ संबंध
ससुर जी के साथ भी बने थे लेकिन उस फॅमिली से बाहर मैने कभी
किसी से संबंध नही बनाए.

अगर मैं उनके साथ एक रात बिताती तो मुझमे और दो टके की किसी
वेश्या मे क्या अंतर रह जाएगा. कोई भी मर्द सिर्फ़ मन बहलाने के
लिएएक रात की माँग करता है क्योंकि उसे मालूम होता है कि अगर एक बार
उसके साथ शारीरिक संबंध बन गये तो ऐसी एक और रात के लिए
औरत कभी मना नही कर पाएगी.

लेकिन इसके अलावा हो भी क्या सकता था. इस भंवर से निकलने का कोई
रास्ता नही दिख रहा था. ऐसा लग रहा था कि मैं एक ग्रहणी से एक
रंडी बनती जा रही हूँ. किसी ओर भी उजाले की कोई किरण नही दिख
रही थी. किसी और से अपना दुखड़ा सुना कर मैं पंकज को जॅलील नही
करना चाहती थी.

सुबह मैं अलसाई हुई उठी और मैने पंकज को कह दिया, " ठीक है
मैं तैयार हूँ"

पंकज चुपचाप सुनता रहा और नाश्ता करके चला गया. उस दिन
शामको उसने बताया की रस्तोगी से उनकी बात हुई थी और उन्हों ने रस्तोगी
को मेरे राज़ी होने की बात कह दी है."

" हरमज़दा खुशी से मारा जा रहा होगा." मैने मन ही मन सोचा.

"अगले हफ्ते दोनो एक दिन के लिए आ रहे हैं." पंकज ने कहा" दोनो
दिन भर ऑफीस के काम मे बिज़ी होंगे शाम को तुम्हे उनको एंटरटेन
करना होगा.

" कुच्छ तैयारी करनी होगी क्या?"

"किस बात की तैयारी?" पंकज ने मेरी ओर देखते हुए कहा, "शाम
कोवो खाना यहीं खाएँगे. उसका इंतज़ाम कर लेना. पहले हम ड्रिंक्स
करेंगे."

मैं बुझे मन से उस दिन का इंतेज़ार करने लगी

अगले हफ्ते पंकज ने उनके आने की सूचना दी. उनके आने के बाद सारा
दिन पंकज उनके साथ बिज़ी था. शाम को छह बजे के आस पास वो
घर आया और उन्हों ने एक पॅकेट मेरी ओर बढ़ाया.

"इसमे उनलोगों ने तुम्हारे लिए कोई ड्रेस पसंद की है. आज शाम को
तुम्हे यही ड्रेस पहनना है. इसके अलावा बदन पर और कुच्छ नही
रहे ये कहा है उन्हों ने.



मैने उस पॅकेट को खोल कर देखा. उसमे एक पारदर्शी झिलमिलती
सारीथी. और कुच्छ भी नही था. उनके कहे अनुसार मुझे अपने नग्न बदन
पर सिर्फ़ वो सारी पहँनी थी बिना किसी पेटिकोट और ब्लाउस के.
सारीइतनी महीन थी कि उसके दूसरी तरफ की हर चीज़ सॉफ सॉफ दिखाई
देरही थी.

"ये ….?? ये क्या है? मैं ये पहनूँगी? इसके साथ अंडरगार्मेंट्स
कहाँहैं?" मैने पंकज से पूचछा.

"कोई अंडरगार्मेंट नही है. वैसे भी कुच्छ ही देर मे ये भी वो
तुम्हारे बदन से नोच देंगे." मैं एक दम से चुप हो गयी.

"तुम?......तुम कहाँ रहोगे?" मैने कुच्छ देर बाद पूचछा.

" वहीं तुम्हारे पास." पंकज ने कहा.

" नहीं तुम वहाँ मत रहना. तुम कहीं चले जाना. मैं तुम्हारे सामने
वो सब नहीं कर पौँगी. मुझे शर्म आएगी." मैने पंकज से लिपटते
हुए कहा.

" क्या करूँ. मैं भी उस समय वहाँ मौजूद नही रहना चाहता. मेरे
लिए भी अपनी बीवी को किसी और की बाहों मे झूलता सहन नही कर
सकता. लेकिन उन दोनो हरमजदों ने मुझे बेइज्जत करने मे कोई कसर
नही छ्चोड़ी. वो जानते हैं कि मेरी दुखती रग उन लोगों के हाथों मे
दबी है. इसलिए वो जो भी कहेंगे मुझे करना पड़ेगा. उन सालों ने
मुझे उस वक़्त वहीं मौजूद रहने को कहा है." कहते कहते उनका
चेहरा लाल हो गया और उनकी आवाज़ रुंध गयी. मैने उनको अपनी बाहों
मे ले लिया और उनके सिर को अपने दोनो स्तनो मे दबा कर सांत्वना दी.

"तुम घबराव मत जानेमन. तुम पर किसी तरह की परेशानी नही आने
दूँगी."


मैने अपने जेठानी से इस बारे मे कुच्छ घुमा फिरा कर चर्चा की तो
पता चला उसके साथ भी इस तरह के वक्यात होते रहते हैं. मैने
उन्हे दोनो के बारे मे बताया तो उसने मुझे कहा कि बिज़्नेस मे इस
तरह के ऑफर्स चलते रहते हैं और मुझे आगे भी इस तरह की किसी
सिचुयेशान लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए.

उस दिन शाम को मैं बन संवार कर तैयार हुई. मैने कमर मे एक
डोरकी सहयता से अपनी सारी को लपेटा. मेरा पूरा बदन सामने से सॉफ
झलक रहा था कितना भी कोशिश करती अपने गुप्तांगों को छिपाने
कीलेकिन कुच्छ भी नही छिपा पा रही थी. एक अंग पर सारी दोहरी
करतीतो दूसरे अंग के लिए सारे नही बचती. खैर मैने उसे अपने बदन
पर नॉर्मल सारी की तरह पहना. मैने उनके आने से पहले अपने आप को
एक बार आईने मे देख कर तसल्ली की और. सारी के आँचल को अपनी
छातियो पर दोहरा करके लिया फिर भी मेरे स्तन सॉफ झलक रहे
थे.

उन लोगों की पसंद के अनुसार मैने अपने चेहरे पर गहरा मेकप
किया
था. मैने उनके आने से पहले कॉंट्रॅसेप्टिव का इस्तेमाल कर लिया था.
क्योंकि प्रिकॉशन लेने के मामले मे इस तरह के संबंधों मे किसी
परभरोसा करना एक भूल होती है.

उनके आने पर पंकज ने जा कर दरवाजा खोला. मैं अंदर ही रही. उनके
बातें करने के आवाज़ से समझ गयी कि दोनो अपनी रात हसीन होने की
कल्पना करके चहक रहे हैं. मैने एक गहरी साँस लेकर अपने आप
कोसमय के हाथों छ्चोड़ दिया. जब इसके अलावा हुमारे सामने कोई रास्ता ही
नही बचा था तो फिर कोई झिझक कैसी. मैने अपने आप को उनकी
खुशी के मुताबिक पूर्ण रूप से समर्पित करने की ठान ली.

पंकज के आवाज़ देने पर मैं एक ट्रे मे तीन बियर के ग्लास और आइस
क्यूब कंटेनर लेकर ड्रॉयिंग रूम मे पहुँची. सब की आँखें मेरे
हुष्ण को देख कर बड़ी बड़ी हो गयी. मेरी आँखें ज़मीन मे धँसी
जारही थी. मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी. किसी अपरिचित के
सामनेअपने बदन की नुमाइश करने का ये मेरा पहला मौका था. मैं धीरे
धीरे कदम बढ़ाती हुई उनके पास पहुँची. मैं अपनी झुकी हुई
नज़रों से देख रही थी कि मेरे आज़ाद स्तन युगल मेरे बदन के हर
हल्के से हिलने पर काँप कांप उठते. और उनकी ये उच्छल कूद सामने
बैठे लोगों की भूकि आँखों को सुकून दे रहे थे.


पंकज ने पहले उन दोनो से मेरा इंट्रोडक्षन कराया,

"माइ वाइफ स्मृति" उन्हों ने मेरी ओर इशारा करके उन दोनो को कहा, फिर
मेरी ओर देख कर कहा, "ये हैं मिस्टर. रस्तोगी और ये हैं…."

"चिन्नास्वामी… ..चिन्नास्वामी एरगुंटूर मेडम. यू कॅन कॉल मी
चिना
इन शॉर्ट." चिन्नास्वामी ने पंकज की बात पूरी की. मैने सामने देखा
दोनो लंबे चौड़े शरीर के मालिक थे. चिन्नास्वामी साढ़े छह फीट
का मोटा आदमी था. रंग एकद्ूम कार्बन की तरह क़ाला और ख्छिछड़ी
दाढ़ी
मे एकद्ूम सौथिन्डियन फिल्म का कोई टिपिकल विलेन लग रहा था. उसकी
उम्र 55 से साथ साल के करीब थी और वेट लगभग 120 केजी के
आसपास होगी. जब वो मुझे देख कर हाथ जोड़ कर हंसा तो ऐसा लगा
मानो बादलों के बीचमे चाँद निकल आया हो.

और रस्तोगी? वो भी बहुत बुरा था देखने मे. वो भी 50 साल के
आसपास का 5'8" हाइट वाला आदमी था. जिसकी फूली हुई तोंद बाहर
निकली हुई थी. सिर बिल्कुल सॉफ था. उसमे एक भी बॉल नही थे.
पूरेमुँह पर चेचक के दाग उसे और वीभत्स बना रहे थे. जब भी वो
बात करता तो उसके होंठों के कोनो से लार की झाग निकलती. मुझे उन
दोनो को देख कर बहुत बुरा लगा. मैं उन दोनो के सामने लगभग नग्न
खड़ी थी. कोई और वक़्त होता तो ऐसे गंदे आदमियों को तो मैं अपने
पास ही नही फटकने देती. लेकिन वो दोनो तो इस वक़्त मेरे फूल से
बदन को नोचने को लालायित हो रहे थे. दोनो की आँखें मुझे देख
करचमक उठी. दोनो की आँखों से लग रहा था कि मैं उस सारी को भी
क्यों पहन रखी थी. दोनो ने मुझे सिर से पैर तक भूखी नज़रों
सेघूरा. मैं ग्लास टेबल पर रखने के लिए झुकी तो मेरे स्तनो के
भर से मेरी सारी का आँचल नीचे झुक गया और मेरे रसीले फलों
की तरह लटकते स्तनो को देख कर उनके सीनो पर साँप लोटने लगे.
मैं ग्लास और आइस क्यूब टेबल पर रख कर वापस किचन मे जाना
चाहती थी की चिन्नास्वामी ने मेरी बाजू को पकड़ कर मुझे वहाँ से
जाने से रोका.

"तुम क्यू जाता है. तुम बैठो. हमारे पास" उन्हों ने थ्री सीटर
सोफे पर बैठते हुए मुझे बीच मे खींच लिया. दूसरी तरफ
रस्तोगी बैठा हुआ था. मैं उन दोनो के बीच सॅंडविच बनी हुई थी.

"पंकज भाई ये समान किचन मे रख कर आओ. अब हुमारी प्यारी
भाभी
यहाँ से नही जाएगी." रस्तोगी ने कहा. पंकज उठ कर ट्रे किचन
मे रख कर आ गया. उसके हाथ मे कोल्ड ड्रिंक्स की बॉटल थी. जब वो
वापस आया तो मुझे दोनो के बीच कसमसाते हुए पाया. दोनो मेरे
बदन
से सटे हुए थे और कभी एक तो कभी दूसरा मेरे होंठों को मेरी
सारी के बाहर झँकति नग्न बाजुओं को और मेरी गर्दन को चूम रहे
थे. रस्तोगी के मुँह से अजीब तरह की बदबू आ रही थी. मैं किसी
तरह सांसो को बंद करके उनके हरकतों को चुपचाप झेल रही थी.

पंकज कॅबिनेट से बियर की कई बॉटल ले कर आया. उसे उसने स्वामी की
तरफ बढ़ाया.

"नाक्को….भाभी खोलेंगी." उसने वो बॉटल मेरे आगे करते हुए कहा

"लो तीनो के लिए बियर डालो ग्लास मे. रस्तोगियान्ना का गला प्यास से
सूख रहा होगा. " छीनना ने कहा

"पंकज युवर वाइफ ईज़ ए रियल ज्यूयेल" रस्तोगी ने कहा" यू लकी
बस्टर्ड, क्या सेक्सी बदन
है इसका. यू आर रियली ए लकी बेगर"


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

पंकज तब तक सामने के
सोफेपर बैठ चुका था दोनो के हाथ आपस मे मेरे एक एक स्तनो को बाँट
चुके थे. दोनो सारी के आँचल को चूचियो से हटा कर मेरे दोनो
स्तनो को चूम रहे थे. ऐसे हालत मे तीनो के लिए बियर उधेलना एक
मुश्किल का काम था. दोनो तो ऐसे जोंक की तरह मेरे बदन से चिपके
हुए थे कि कोशिश के बाद भी उन्हे अलग नही कर सकी.

मैने उसी हालत मे तीनो ग्लास मे ड्रिंक्स डाल कर उनकी तरफ
बढ़ाया.

पहला ग्लास मैने रस्तोगी की तरफ बढ़ाया.

"इस तरह नही. जो सकी होता है पहले वो ग्लास से एक सीप लेता है
फिर वो दूसरों को देता है"

"ल……लेकिन मैं ड्रिंक्स नही करती"

"अरे ये तो बियर है. बियर ड्रिंक्स नही होती."

"प्लीज़ रस्तोगी…. इसे ज़बरदस्ती मत पिलाओ ये आल्कोहॉल नही लेती

है."
पंकज ने रस्तोगी को मनाया.

"कोई बात नही ग्लास के रिम को तो चूम सकती है. इसे बस चूम दो
तो
इसका नशा बढ़ जाएगा"

मैने ग्लास के रिम को अपने होंठों से छुआ फिर उसे रस्तोगी की
तरफ बढ़ा दिया. फिर दूसरा ग्लास उसी तरह चिना स्वामी को दिया
और
तीसरा पंकज को. तीनो ने मेरी खूबसूरती पर चियर्स किया. पंकज
और रस्तोगी ने अपने अपने ग्लास होंठों से लगा लिए. स्वामी कुच्छ
ज़्यादा ही मूड मे हो रहा था. उसने मेरे नग्न स्तन को अपने हाथ से
छुआ कर मेरे निपल को अपने ग्लास मे रखे बियर मे डुबोया फिर उसे
अपने होंठों से लगा लिया. उसे ऐसा करते देख रस्तोगी भी मूड मे
आगेया. दोनो एक एक स्तन पर अपना अधिकार जमाए उसे बुरी तरह मसल
रहे थे और निचोड़ रहे थे. रस्तोगी ने अपने ग्लास से एक उंगली से
बियर की झाग को उठा कर मेरे निपल पर लगा दिया फिर उसे अपनी
जीभसे चाट कर सॉफ किया.

" म्‍म्म्मम…. मज़ा आ गया." रस्तोगी ने कहा, " पंकज तुम्हारी बीवी तो
बहुत नशीली चीज़ है."

मेरे निपल्स उत्तेजना मे खड़े होकर किसी बुलेट की तरह कड़े हो
गये थे.

मैने सामने देखा. सामने पंकज अपनी जगह बैठे हुए एकटक मेरे
साथ हो रही हरकतों को देख रहे थे. उनका अपनी जगह बैठे
बैठेकसमसाना ये दिखा रहा था कि वो भी किस तरह उत्तेजित होते जा रहे
हैं. मुझे उनका इस तरह उत्तेजित होना बिल्कुल भी अच्च्छा नही लगा.
ठीक है जान पहचान मे स्वापिंग एक अलग बात होती है लेकिन अपनी
बीवी को किसी अंजान आदमी के द्वारा मसले जाने का मज़ा लेना अलग होता
है.

मुझे वहाँ मौजूद हर मर्द पर गुस्सा आ रहा था लेकिन मेरा जिस्म
मेरे दिमाग़ मे चल रहे उथेल पुथल से बिकुल बेख़बर अपनी भूक
सेपागल हो रहा था. रस्तोगी से और नही रहा गया वो उठ कर मुझे
हाथ पकड़ कर खड़ा किया और मेरे बदन पर झूल रहे मेरी इकलौती
सारी को खींच कर अलग कर दिया. अब तक मेरा जिस्म का सारी के
बाहर से आभास मिल रहा था अब बेपर्दा होकर सामने आ गया. मैं शर्म
से दोहरी हो गयी. तो रस्तोगी ने मेरे बदन के पीछे से लिपट कर
मुझे अपने गुप्तांगों को छिपाने से रोका. उनोोने मेरे बगलों के
नीचे से अपने हाथों को डाल कर मेरे दोनो स्तन थाम लिए और उन्हे
अपने हथेलियों से उपर उठा कर स्वामी के सामने करके एक भद्दी सी
हँसी हंसा.

"स्वामी…. देख क्या माल है. साली खूब मज़े देगी." और मेरे दोनो
निपल्स को अपनी चुटकियों मे भर कर बुरी तरह उमेथ दिया. मैं
दर्दसे"आआआआअहह" कर उठी. स्वामी अपनी हथेली से मेरी योनि के उपर
सहला रहा था. मैं अपने दोनो टाँगों को सख्ती से एक दूसरे से
भींचे खड़ी थी जिससे मेरी योनि उनके सामने छिपि रहे. लेकिन
स्वामी ने ज़बरदस्ती अपनी दो उंगलियाँ मेरे दोनो टाँगों के बीच
घुसेडदी.

क्रमशः....................................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

गतान्क से आगे........................

चिन्नास्वामी ने मुझे बाहों से पकड़ अपनी ओर खींचा जिसके कारण मैं
लड़खड़ा कर उसकी गोद मे गिर गयी. उसने मेरे नाज़ुक बदन को अपने
मजबूत बाहों मे भर लिया और मुझे अपने सीने मे कस कर दबा
दिया.
मेरी बड़ी बड़ी चूचिया उसके मजबूत सीने पर दब कर चपटी हो
रही थी. चिन्नास्वामी ना अपनी जीभ मेरे मुँह मे डाल दी. मुझे उसके
इस तरह अपनी जीभ मेरे मुँह मे फिरने से घिंन आ रही थी लेकिन
मैने अपने जज्बातों को कंट्रोल किया. उसके दोनो हाथ मेरे दोनो
चूचियो को थाम लिए अब वो उन दोनो को आटे की तरह गूथ रहे थे.
मेरे दोनो गोरे स्तन उनके मसल्ने के कारण लाल हो गये थे. स्वामी के
मसल्ने के कारण दोनो स्तन दर्द करने लगे थे.

"अबे स्वामी इन नाज़ुक फलों को क्या उखाड़ फेंकने का इरादा है तेरा?
ज़रा
प्यार से सहला इन अमरूदों को. तू तो इस तरह हरकत कर रहा है
मानो तू इसे **** कर रहा हो. ये पूरी रात हुमारे साथ रहेगी
इसलिए ज़रा प्यार से....." रस्तोगी ने चिन्नास्वामी को टोका.

रस्तोगी मेरी बगल मे बैठ गया और मुझे चिना स्वामी की गोद से
खींच कर अपनी गोद मे बिठा लिया. मैं चिन्नास्वामी की बदन से अलग
हो कर रस्तोगी के बदन से लग गयी. स्वामी उठकर अपने कपड़ों को
अपने बदन से अलग कर के वापस सोफे पर बैठ गया. उसने नग्न हालत
मे अपने लिंग को मेरे जिस्म से सटा कर उसे सहलाने लगा. रस्तोगी मेरे
स्तनो को मसलता हुआ मेरे होंठों को चूम रहा था.

फिर वो ज़ोर ज़ोर से मेरी दोनो छातियो को मसल्ने लगा. मेरे मुँह
से "आआआहह" , "म्‍म्म्ममम" जैसी आवाज़ें निकल रही थी. पराए मर्द
के हाथ बदन पर पड़ते ही एक अजीब सा सेन्सेशन होने लगता है.
मेरेपूरे बदन मे सिहरन सी दौड़ रही थी. रस्तोगी ने आइस बॉक्स से कुच्छ
आइस क्यूब्स निकल कर अपने ग्लास मे डाले और एक आइस क्यूब निकाल कर
मेरेनिपल के चारों ओर फिराने लगा. उसकी इस हरकत से पूरा बदन
गन्गना उठा. मेरा मुँह खुल गया और ज़ुबान सूखने लगी. ना चाहते
हुए भी मुँह से उत्तेजना की अजीब अजीब सी आवाज़ें निकालने लगी. मेरा
निपल जितना फूल सकता था उतना फूल चुका था. वो फूल कर ऐसा
कड़ा हो गया था मानो वो किसी पत्थर से बना हो. मेरे निपल के
चारों ओर गोल काले छकते मे रोएँ खड़े हो गये थे और छ्होटे
छ्होटे दाने जैसे निकल आए थे. बर्फ ठंडा था और निपल गरम.
दोनो के मिलन से बर्फ मे आग सी लग गयी थी. फिर रस्तोगी ने उस
बर्फको अपने मुँह मे डाल लिया और अपने दाँतों से उसे पकड़ कर दोबारा
मेरे निपल्स के उपर फिराने लगा. मैं सिहरन से काँप रही थी.
मैनेउसके सिर को पकड़ कर अपने स्तन के उपर दबा दिया. उसकी साँसे घुट
गयी थी. मैने सामने देखा पंकज मुझे इस तरह हरकत करता देख
मंद मंद मुस्कुरा रहा है. मैने बेबसी से अपने दाँत से अपना
निचला
होंठ काट लिया. मेरा बदन गर्म होता जा रहा था. अब उत्तेजना इतनी
बढ़ गयी थी कि अगर मैं सब लोक लाज छ्चोड़ कर एक वेश्याओं जैसा
हरकत भी करने लगती तो किसी को ताज्जुब नही होता. तभी स्वामी
बचाव के लिए आगे आ गया.

" आईयू रास्तोगी तुम कितना देर करेगा. सारी रात ऐसा ही करता
रहेगा
क्या. मैं तो पागल हो जाएगा. अब आगे बढ़ो अन्ना." स्वामी ने मुझे
अपनी ओर खींचा. मैं उठ कर उसके काले रीछ की तरह बालों वाले
सीने से लग गयी. उसने मुझे अपनी बाहों मे लेकर ऐसे दबाया कि
मेरी सास ही रुकने लगी. मुझे लगा कि शायद आज एक दो हड्डियाँ तो
टूट ही जाएँगी. मेरे जांघों के बीच उसका लिंग धक्के मार रहा
था.
मैने अपने हाथ नीचे ले जाकर उसके लिंग को थामा तो मेरी आँखें
फटी की फटी रह गयी. उसका लिंग किसी बेस बाल की तरह मोटा था.
इतना मोटा लिंग तो मैने बस ब्लू फिल्म मे ही देखा था. उसका लिंग
ज़्यादा लंबा नही था लेकिन इतना मोटा था कि मेरी योनि को चीर कर
रख देता. उसके लिंग की मोटाई मेरी कलाई के बराबर थी. मैं उसे
अपनीमुट्ठी मे पूरी तरह से नही ले पा रही थी.

मेरी आँख घबराहट से बड़ी बड़ी हो गयी. स्वामी की नज़रें मेरे
चेहरे पर ही थी. शायद वो अपने लिंग के बारे मे मेरी तारीफ सुनना
चाहता था जो की उसे मेरे चेहरे के भावों से ही मिल गया. वो मुझे
घबराता देख मुस्कुरा उठा. अभी तो उसका लिंग पूरा खड़ा भी नही
हुआ था.

" घबराव मत….. पहले तुम्हारी कंट को रस्तोगी चौड़ा कर देगा फिर
मैं उसमे डालेगा" कहते हुए उसने मुझ वापस अपने सीने मे दबा दिया
और अपना लिंग मेरी जांघों के बीच रगड़ने लगा.

रस्तोगी मेरे नितंबो से लिपट गया उसका लिंग मेरे नितंबों के बीच
रगड़ खा रहा था. रस्तोगी ने टेबल के उपर से एक बियर की बॉटल
उठाई और पंकज को इशारा किया उसे खोलने के लिए. पंकज ने

ओपनेर
ले कर उसके ढक्कन को खोला. रस्तोगी ने उस बॉटल से बियर मेरे एक
स्तन के उपर उधेलनी शुरू की.

"स्वामी ले पी ऐसा नसीला बियर साले गेंदे तूने जिंदगी मे नही पी
होगी." रस्तोगी ने कहा. स्वामी ने मेरे पूरे निपल को अपने मुँह मे
लेरखा था इसलिए मेरे स्तन के उपर से होती हुई बियर की धार मेरे
निपल के उपर से स्वामी के मुँह मे जा रही थी. वो खूब चटखारे
लेले कर पी रहा था. मेरे पूरे बदन मे सिहरन हो रही थी. मेरा
निपल तो इतना लंबा और कड़ा हो गया था की मुझे उसके साइज़ पर
खुद
ताज्जुब हो रहा था. बियर की बॉटल ख़तम होने पर स्वामी ने भी वही
दोहराया. इस बार स्वामी बियर उधेल रहा था और दूसरे निपल के उपर
से बियर चूसने वाला रस्तोगी था. दोनो ने इस तरह से बियर ख़तम
की.मेरी योनि से इन सब हरकतों के कारण इतना रस निकल रहा था कि
मेरीजंघें भी गीली हो गयी थी. मैं उत्तेजना मे अपनी दोनो जांघों को
एकदूसरे से रगड़ रही थी. और अपने दोनो हाथों से दोनो के तने हुए
लिंग को अपनी मुट्ठी मे लेकर सहला रही थी. अब मुझे उन्दोनो के
संभोग मे देरी करने पर गुस्सा आ रहा था. मेरी योनि मे मानो आग
लगी हुई थी. मैं सिसकारियाँ ले रही थी. मैने अपने निचले होंठों
को दाँतों मे दबा कर सिसकारियों को मुँह से बाहर निकलने से रोकती
हुई पंकज को देख रही थी और आँखों ही आँखों मे मानो कह रही
थीकि अब रहा नही जा रहा है. प्लीज़ इनको बोलो कि मुझे मसल मसल
कर रख दें.

इस खेल मे उन दोनो का भी मेरे जैस ही हाल हो गया था अब वो भी
अपने अंदर उबाल रहे लावा को मेरी योनि मे डाल कर शांत होना
चाहते
थे. उनके लिंगों से प्रेकुं टपक रहे थे.

" आईयू पंकज तुम कुच्छ करता क्यों नही. तुम सारा समान इस टेबल से
हटाओ." स्वामी ने पंकज को कहा. पंकज और रस्तोगी ने फटाफट
सेंटरटेबल से सारा समान हटा कर उसे खाली कर दिया. स्वामी मुझे बाहों
मेलेकर उपर कर दिया. मेरे पैर ज़मीन से उपर उठ गये. वो इतना
ताकतवर था कि मुझे इस तरह उठाए हुए वो टेबल का आधा चक्कर
लगाया और पंकज के सामने पहुँच कर मुझे टेबल पर लिटा दिया.
ग्लास टॉप की सेंटर टेबल पर बैठते ही मेरा बदन ठंडे काँच को
च्छुकर काँप उठा. मुझे उसने सेंटर टेबल के उपर लिटा दिया. मैं
इस
तरह लेटी थी कि मेरी योनि पंकज के सामने थी. मेरा चेहरा दूसरी
तरफ होने के कारण मुझे पता नही चल पाया कि मुझे इस तरफ अपनी
योनि को पराए मर्द के सामने खोल कर लेते देख कर मेरे पति के
चेहरे पर किस तरह के एक्सप्रेशन्स थे.

उन्हों ने मेरे पैरों को फैला कर पंखे की तरफ उठा दिए. मेरी
योनि उनके सामने खुली हुई थी. स्वामी ने मेरी योनि को सहलाना शुरू
किया. दोनो के होंठों पर जीभ फिर रहे थे.

" पंकज देखो तुम्हारी बीवी को कितना मज़ा आ रहा है." रस्तोगी ने
मेरी योनि के अंदर अपनी उंगलियाँ डाल कर अंदर के चिपचिपे रस से
लिसदी हुई उंगलियाँ पंकज को दिखाते हुए कहा.

फिर स्वामी मेरी योनि से चिपक गया और रस्तोगी मेरे स्तानो से. दोनो
के
मुँह मेरे गुप्तांगों से इस तरह चिपके हुए थे मानो फेविकोल से
चिपका दिए हों. दोनो की जीभ और दाँत इस अवस्था मे अपने काम
शुरू
कर दिए थे. मैं उत्तेजित हो कर अपने टाँगों को फेंक रही थी.

मैने अपने बगल मे बैठे पंकज की ओर देखा. पंकज अपने पॅंट के
उपर से अपने लिंग को हाथों से दबा रहा था. पंकज अपने सामने चल
रहे सेक्स के खेल मे डूबा हुआ था.

"आआआहह पंकज. म्‍म्म्ममम मुझीए क्याआ होता जा रहाआ है…"
मैने अपने सूखे होंठों पर ज़ुबान फिराई, " मेरा बदन सेक्स की
गर्मी से झुलस रहा है."


पंकज उठ कर मेरे पास आकर खड़ा हो गया. मैने अपने हाथ बढ़ा
कर उसके पॅंट की जीप को नीचे करके उसके बाहर निकलने को च्चटपटा
रहे लिंग को खींच कर बाहर निकाला. और उसे अपने हाथों से
सहलाने
लगी. रस्तोगी ने पल भर को मेरे निपल्स पर से अपना चेहरा उठाया
और पंकज को देख कर मुस्कुरा दिया और वापस अपने काम मे लग गया.
मेरे लंबे रेशमी बाल जिन्हे मैने जुड़े मे बाँध रखा था खुल कर
बिखर गये और ज़मीन पर फैल गये.

र्स्तोगी अब मेरे निपल्स को छ्चोड़ कर उठा और मेरे सिर के दूसरी
तरफ
आकर खड़ा हो गया. मेरी नज़रें पंकज के लिंग पर अटकी हुई थी
इसलिए रस्तोगी ने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी ओर घुमाया. मैने देखा
कि मेरे चेहरे के पास उसका तना हुआ लिंग झटके मार रहा था. उसके
लिंग से निकलने वाले प्रेकुं की एक बूँद मेरे गाल पर आकर गिरी जिसके
कारण मेरे और उसके बीच एक महीन रिशम की डोर से संबंध हो
गया.उसके लिंग से मेरे मुँह तक उसके प्रेकुं की एक डोर चिपकी हुई थी.
उसनेमेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर कुच्छ उँचा किया. दोनो हाथों
सेमेरे सिर को पकड़ कर अपने लिंग को मेरे होंठों पर फिराने लगा.
मैने अपने होंठों को सख्ती से बंद कर रखे थे. जितना वो देखने
मे भद्दा था उसका लिंग भी उतना ही गंदा था.

उसका लिंग पतला और लंबा था. उसका लिंग का शेप भी कुच्छ टेढ़ा
था. उसमे से पेशाब की बदबू आ रही थी. सॉफ सफाई का ध्यान नही
रखता था. उसके लिंग के चारों ओर फैले घने जंगल भी गंदा दिख
रहा था. लेकिन मैं आज इनके हाथों बेबस थी. मुझे तो उनकी पसंद
के अनुसार हरकतें करनी थी. मेरी पसंद ना पसंद की किसी को
परवाहनही थी. अगर मेरे से पूच जाता तो ऐसे गेंदों से अपने बदन को
नुचवाने से अच्च्छा मैं किसी और के नीचे लेटना पसंद करती.

मैने ना चाहते हुए भी अपने होंठों को खोला तो उसका लिंग जितना सा
भी सुराख मिला उसमे रस्तोगी ने उसे ठेलना शुरू किया. मैने अपने
मुँह को पूरा खोल दिया तो उसका लिंग मेरे मुँह के अंदर तक चला
गया. मुझे एक ज़ोर की उबकाई आए जिसे मैने जैसे तैसे जब्त किया.
रस्तोगी मेरे सिर को पकड़ कर अपने लिंग को अंदर ठेलने लगा लेकिन
उसका लिंग आधा भी मेरे मुँह मे नही घुस पाया. उसका लिंग मेरे गले
मे जा कर फँस गया. उसने और अंदर ठेलने की कोशिश की तो उसका
लिंग
गले के च्छेद मे फँस गया. मेरा दम घुटने लगा तो मैं च्चटपटाने
लगी. मेरे च्चटपटाने से स्वामी का काम मे बाधा आ रही थी इसलिए
वोमेरी योनि से अपना मुँह हटा कर रस्तोगी से लड़ने लगा.

" आबे इसे मार डालेगा क्या. तुझसे क्या अभी तक किसी सी अपना लंड
चुसवाना भी नही आया?"

रस्तोगी ने अपने लिंग को अब कुच्छ पीछे खींच कर मेरे मुँह मे
आगेपीछे धक्के लगाने लगा. उसने मेरे सिर को सख्ती से अपने दोनो
हाथों के बीच थाम रखा था. पंकज मेरे पास खड़ा मुझे दूसरों
के द्वारा आगे पीछे से उसे किया जाता देख रहा था. उसका लिंग बुरी
तरह तना हुआ था. यहाँ तक की स्वामी भी मेरी योनि को चूसना
छ्चोड़कर मेरे और रस्तोगी के बीच मुख मैथुन देख रहा था.

"युवर वाइफ ईज़ एक्सलेंट. शी ईज़ ए रियल सकर" स्वामी ने पंकज को
कहा.

"ऊऊहह अन्ना तुम ठीक ही कहता है. ये तो अपनी रशमा को भी फैल
कर देगी लंड चूसने मे" पंकज उनके विकहरों को सुनता हुआ असचर्या
से मुझे देख रहा था. मैने कभी इस तरह से अपने हज़्बेंड के लिंग
को भी नही चूसा था. ये तो उन दोनो ने मेरे बदन की गर्मी को इस
कदर बढ़ा दिया था कि मैं अपने आप को किसी चीप वेश्या जैसी
हरकत करने से नही रोक पा रही थी.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

स्वामी ने कुच्छ ही देर मे रस्तोगी के पीछे आकर उसको मेरे सामने से
खींच कर हटाया.

"रस्तोगी तुम इसको फक करो. इसके कंट को रगड़ रगड़ कर चौड़ा कर
दो. मैं तब तक इसके मुँह को अपने इस मिज़ाइल से चोद्ता हूँ." ये कह
कर स्वामी आ कर रस्तोगी की जगह खड़ा हो गया और उसकी तरह ही
मेरेसिर को उठा कर अपने कमर को आगे किया जिससे मैं उसके लिंग को अपने
मुँह मे ले सकूँ. उसका लिंग एक दम कोयले सा काला था. लेकिन वो
इतनामोटा था कि पूरा मुँह खोलने के बाद भी उसके लिंग के सामने का
सूपड़ा मुँह के अंदर नही जा पा रहा था. उसने अपने लिंग को आगे
ठेला. मुझे लगा कि मेरे होंठों के किनारे अब चिर जाएँगे. मैने
उसको सिर हिला कर अपनी असमर्थता जताई. लेकिन वो मानने को तैयार
नही था. उसने मेरे सिर को अपने दोनो हाथों से पकड़ कर एक ज़ोर का
धक्का मेरे मुँह मे दिया. और उसका लिंग के आगे का टोपा मेरे मुँह मे
घुस गया. मैं उस लिंग के आगे वाले मोटे से गेंद को अपने मुँह मे
प्रवेश करते देख कर घबरा गयी. मुझे लगा कि अब मैं और नही
बच सकती. पहाड़ की तरह दिखने वाला काला भुजंग मेरे उपर और
नीचे के रास्तों को फाड़ कर रखेगा. मैं बड़ी मुश्किल से उसके लिंग
पर अपने मुँह को चला पा रही थी. मैं आगे पीछे तो क्या कर रही
थी स्वामी खुद मेरे सिर को अपने हाथों से पकड़ कर अपने लिंग के आगे
पीछे कर रहा था. मेरे मुँह मे स्वामी के लिंग को प्रवेश करते
देख अब रस्तोगी मेरे पैरों के बीच आ गया था. उसने मेरी टाँगों को
पकड़ कर अपने कंधे पर रख लिया और अपने लिंग को मेरी योनि पर
लगाया. मैं उसके लिंग के टिप को अपनी योनि के दोनो फांकों के बीच
महसूस कर रही थी. मैने एक बार नज़रें तिर्छि करके पंकज को
देखा उसकी आँखें मेरे योनि पर लगे लिंग को सांस रोक कर देख रही
थी. मैने अपनी आँखें बंद कर ली. मैं हालत से तो समझौता कर ही
चुकी थी. अब मैने भी इस संभोग को पूरी तरह एंजाय करने का मन
बना लिया.

रस्तोगी काफ़ी देर से इसी तरह अपने लिंग को मेरी योनि से सताए खड़ा
था और मेरी टाँगों को अपनी जीभ से चाट रहा था अब हालत बेकाबू
होते जा रहे थे. अब मुझसे और देरी बर्दस्त नही हो रही थी. मैने
अपनी कमर को थोड़ा उपर किया जिससे उसका लिंग बिना किसी प्राब्लम के
अंदर घुस जाए. लेकिन उसने मेरे कमर को आगे आते देख अपने लिंग को
उसी गति से पीछे कर लिया. उसके लिंग को अपनी योनि के अंदर ना
सरकता पाकर मैने अपने मुँह से "गूऊँ गूऊँ" करके उसे और देर
नही करने का इशारा किया. कहना तो बहुत कुच्छ चाहती थी लेकिन उस
विशाल लंड के गले तक ठोकर मरते हुए इतनी सी आवाज़ भी कैसे
निकल गयी पता नही चला.

मैने अपनी टाँगें उसके कंधे से उतार कर उसकी कमर के इर्दगिर्द
घेरा
डाल दिया और उसके कमर को अपने टाँगों के ज़ोर से अपनी योनि मे
खींचा लेकिन वो मुझसे भी ज़्यादा ताकतवर था उसने इतने पर भी
अपने लिंग को अंदर नही जाने दिया. आख़िर हार कर मैने अपने एक हाथ
से उसके लिंग को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपनी योनि के द्वार को चौड़ा
करके अपने कमर को उसके लिंग पर उँचा कर दिया.

" देख पंकज तेरी बीवी कैसे किसी रंडी की तरह मेरा लंड लेने के
लिए च्चटपटा रही है." रस्तोगी मेरी हालत पर हँसने लगा. उसका
लिंग अब मेरी योनि के अंदर तक घुस गया था. मैने उसके कमर को
सख्ती से अपनी टाँगों से अपनी योनि पर जाकड़ रखा था. उसके लिंग को
मैने अपने योनि के मुस्सलेस से एक दम कस कर पकड़ लिया और अपनी
कमर को आगे पीछे करने लगी. अब रस्तोगी मुझे नही बल्कि मैं
रस्तोगी को चोद रही थी. रस्तोगी ने भी कुच्छ देर तक मेरी हालत का
मज़ा लेने के बाद अपने लिंग से धक्के देना शुरू कर दिया.
वो कुच्छ ही देर मे पूरे जोश मे आ गया और मेरी योनि मे दनादन
धक्के मारने लगा. हर धक्के के साथ लगता था की मैं टेबल से आगे
गिर पाड़ूँगी. इसलिए मैने अपनी हाथों से टेबल को पकड़ लिया.
रस्तोगी ने मेरे दोनो स्तानो को अपनी मुट्ठी मे भर कर उनसे रस
निकालने की कोशिश करने लगा. मेरे स्तनो पर वो कुच्छ ज़यादा ही
मेहरबान था. जब से आया था उन्हे मसल मसल कर लाल कर दिया
था.
दस मिनिट तक इसी तरह ठोकने के बाद उसके लिंग से तेज वीर्य की
धार मेरी योनि मे बह निकली. उसके वीर्य का साथ देने के लिए मेरे
बदन से भी धारा फूट निकली. उसने मेरे एक स्तन को अपने दाँतों के
बीच बुरी तरह जाकड़ लिया. जब सारा वीर्य निकल गया तब जाकर

उसने मेरे स्तन को छ्चोड़ा. मेरे स्तन पर उसके दन्तो से हल्के से कट
लग गये थे जिनसे खून के दो बूँद चमकने लगी थी.
स्वामी अभी भी मेरे मुँह को अपने खंबे से चोदे जा रहा था. मेरा
मुँह उसके हमले से दुखने लगा था. लेकिन रस्तोगी को मेरी योनि से
हटते देख कर उसकी आँखें चमक गयी. और उसने मेरे मुँह से अपने
लिंग को निकाल लिया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरे मुँह का कोई भी अंग
काम नही कर रहा है. जीभ बुरी तरह दुख रही थी उसे हिलाया
भी
नही जा रहा था. और मेरा जबड़ा खुला का खुला रह गया. वो मेरी
योनि की तरफ आकर मेरी योनि पर अपना लिंग सटाया.

पंकज वापस मेरे मुँह के पास आ गया. मैने उसके लिंग को वापस अपनी
मुट्ठी मे लेकर सहलाना चालू किया. मैं उसके लिंग पर से अपना
ध्यान
हटाना चाहती थी. मैने पंकज की ओर देखा तो पंकज ने मुस्कुराते
हुए अपना लिंग मेरे होंठों से सटा दिया मैने भी मुस्कुरा कर अपना
मुँह खोल कर उसके लिंग को अंदर आने का रास्ता दिया. स्वामी के लिंग को
झेलने के बाद तो पंकज का लिंग किसी बच्चे का हथियार लग रहा
था.

स्वामी ने मेरी टाँगों को दोनो हाथों से जितना फैला सकता था उतना
फैला दिया. वो अपने लिंग को मेरी योनि पर फिराने लगा. मैने उसके
लिंग को हाथों मे भर कर अपनी योनि पर रखा.

" धीरे धीरे….. स्वामी जी नही तो मैं मर जौंगी." मैने स्वामी से
रिक्वेस्ट किया. स्वामी एक भद्दी हँसी हंसा. हंसते हुए उसका पूरा
बदन हिल रहा था. उसका लिंग वापस मेरी योनि पर से हट गया.

" ओये पंकज तुम्हारी बीवी को तुम जब चाहे कर सकता है अभी तो
मेरी
हेल्प करो. इडार आओ… मेरे रोड को हाथों से पकड़ कर अपने वाइफ के
कंट
मे डालो. मैं इसकी टाँगे पकड़ा हूँ. इसलिए मेरा कॉक बार बार
तुम्हारे वाइफ के कंट से फिसल जाता है. पाकड़ो इसे…….." पंकज ने आगे
की ओर हाथ बढ़ा कर स्वामी के लिंग को अपनी मुट्ठी मे पकड़ा. कुच्छ
देरसे कोशिश करने के कारण उसका लिंग थोडा ढीला पड़ गया था.

" पंकज पहले इसे अपने हाथो से सहला कर वापस खड़ा करो. उसके
बाद अपनी बीवी की पुसी मे डालना. आज तेरे फाइफ की पुसी को फाड़ कर
रखूँगा." पंकज उसके लिंग को हाथों मे लेकर सहलाने लगा. मैने
भी हाथ बढ़ा कर उसके लिंग के नीचे लटक रही गेंदों को सहलाना
शुरू किया. कैसा अजीब महॉल; था अपनी बीवी की योनि को ठुकवाने के
लिए मेरा हज़्बेंड एक अजनबी के लिंग को सहला कर खड़ा कर रहा था.
कुच्छ ही देर मे हम दोनो की कोशिशें रंग लाई और स्वामी का लिंग
वापस खड़ा होना शुरू हो गया. उसका आकार बढ़ता ही जा रहा था.
उसेदेख देख कर मेरी घिग्घी बाँधने लगी.

" धीरे धीरे…….स्वामी जी मैं इतना बड़ा नही ले पौँगी. मेरी योनि
अभी बहुत टाइट है." मैने कसमसाते हुए कहा, "तुम …तुम बोलते
क्यों नही…" मैने पंकज से कहा.

पंकज ने स्वामी की तरफ देख कर उनसे धीरे से रिक्वेस्ट की, " मिस्टर.
स्वामी……प्लीज़ थोडा धीरे से. शी हॅड नेवेर बिफोर एक्सपीरियेन्स्ड
सच
ए मॅसिव कॉक. यू मे हार्म हर. युवर कॉक ईज़ शुवर टू टियर हर
अपार्ट."

"हः… डॉन'ट वरी पंकज. वेट फॉर फाइव मिनिट्स. वन्स आइ स्टार्ट
हमपिंग
शी विल स्टार्ट आस्किंग फॉर मोरे लाइक ए रियल स्लट" स्वामी ने पंकज को
दिलासा दिया. उसने मेरी योनि के अंदर अपनी दो उंगली डाल कर उसे
घुमाया और फिर मेरे और रस्तोगी के वीर्य से लिसदी हुई उंगलियों को
बाहर निकाल कर मेरे आँखों के सामने एक बार हिलाया और फिर उसे अपने
लिंग पर लगाने लगा. ये काम उसने कई बार रिपीट किया. उसका लिंग
हम दोनो के वीर्य से गीला हो कर चमक रहा था. उसने वापस अपने
लिंग को मेरी योनि पर सताया और दूसरे हाथ से मेरी योनि की फांकों
को अलग करते हुए अपने लिंग को एक हल्का धक्का दिया. मैने अपनी
टाँगों को छत की तरफ उठा रखा था. मेरी योनि उसके लिंग के
सामने
खुल कर फैली हुई थी. हल्के से धक्के से उसका लिंग अंदर ना जाकर
गीली योनि पर नीचे की ओर फिसल गया. उसने दोबारा अपने लिंग को
मेरी
योनि पर सताया. पंकज उसके पास ही खड़ा था. उसने अपनी उंगलियों
से
मेरी योनि की फांकों को अलग किया और योनि पर स्वामी के लिंग को
फँसाया. स्वामी ने अब एक ज़ोर का धक्का दिया और उसके लिंग के सामने का
टोपा मेरी योनि मे धँस गया. मुझे ऐसा लगा मानो मेरे दोनो टाँगों
के बीच किसी ने खंजर से चीर दिया हो. मैं दर्द से च्चटपटा
उठी,"आआआआआअहह ह" मेरे नाख़ून पंकज के लिंग पर गड़ गये.
मेरे
साथ वो भी दर्द से बिलबिला उठा. लेकिन स्वामी आज मुझ पर रहम
करने के बिल्कुल मूड मे नही था. उसने वापस अपने लिंग को पूरा
बाहर
खींचा तो एक "फक" सी आवाज़ आई मानो किसी बॉटल का कॉर्क खोला
गया हो.



उसे मुझे दर्द देने मे मज़ा आ रहा था. नही तो वो अगर चाहता तो उस
अवस्था मे ही अपने लिंग को धक्का दे कर और अंदर कर देता. लेकिन
वो तो पूरे लिंग को बाहर निकल कर वापस मुझे उसी तरह के दर्द से
च्चटपटाता देखना चाहता था. मैने उसके आवेग को कम करने के लिए
उसके सीने पर अपना एक हाथ रख दिया था. लेकिन उसका काम तो आँधी
मे एक कमजोर फूल की जुर्रत के समान ही था.

उसने वापस अपने लिंग को मेरी योनि पर लगा कर एक ज़ोर का धक्का
दिया. मैं दर्द से बचने के लिए आगे की ओर खिसकी लेकिन कोई फ़र्क
नही पड़ा. मई दर्द से दोहरी हो कर चीख उठी,"उफफफफफ्फ़ माआआअ
मर गइईई"

उसका आधा लिंग मेरी योनि के मुँह को फाड़ता हुआ अंदर धँस गया. मेरा
एक हाथ उसके सीने पर पहले से ही गढ़ा हुआ था. मैने दर्द से राहत
पाने के लिए अपने दूसरे हाथ को भी उसके सीने पर रख दिया. उसके
काले सीने पर घने काले सफेद बाल उगे हुए थे मैने दर्द से अपनी
उंगलियों के नाख़ून उनके सीने पर गढ़ा दिए. एक दो जगह से तो
खून भी छलक आया और मुत्ठिया बंद हो कर जब खुली तो मुझे
उसमे उसके सीने के टूटे हुए बॉल नज़र आए. स्वामी एक भद्दी सी
हँसी हंसा और मेरी टाँगों को पकड़ कर हंसते हुए मुझ से पूचछा,

" कैसा लग रहा है जान…..मेरा ये मिज़ाइल? मज़ा आ गया ना?"

मैं दर्द को पीती हुई फटी हुई आँखों से उसको देख रही थी. उसने
दुगने ज़ोर से एक और धक्के के साथ अपने पूरे लिंग को अंदर डाल
दिया. मैं किसी मच्चली की तरह च्चटपटा रही थी.


"आआआआआअहह ह म्‍म्म्माआआ….. पंकाआआअज बचऊूऊ………
मुझीई ईईए फ़ाआआद डेनेगीई"

मैं टेबल से उठने की कोशिश करने लगी मेगेर रस्तोगी ने मेरे स्तनो
को अपने हाथों से बुरी तरह मसल्ते हुए मुझे वापस लिटा दिया.
उसने मेरे दोनो निपल्स को अपनी मुत्ठियों मे भर कर इतनी ज़ोर का
मसला कि मुझे लगा मेरे दोनो निपल्स उखाड़ ही जाएँगे. मैं इस दो
तरफ़ा हमले से च्चटपटाने लगी.

स्वामी अपने पूरे लिंग को मेरी योनि मे डाल कर कुच्छ देर तक उसी
तरह खड़ा रहा. मेरी योनि के अंदर मानो आग लगी हुई थी. मेरी
योनि की दीवारें चरमरा रही थी. रस्तोगी उस वक़्त मेरे निपल्स और
मेरे स्तनो को अपने हाथों से और दाँतों से बुरी तरह नोच रहा था
काट रहा था. इससे मेरा ध्यान बाँटने लगा और कुच्छ देर मे मैं अपने
नीचे उठ रही दर्द की लहर को भूल कर रस्तोगी से अपने स्तनो को
च्छुदाने लगी. कुच्छ देर बाद स्वामी का लिंग सरसरता हुआ बाहर की
ओर निकलता महसूस हुआ . उसने अपने लिंग को टिप तक बाहर निकाला और
फिर पूरे जोश के साथ अंदर डाल दिया. अब वो मेरी योनि पर ज़ोर ज़ोर
से धक्के मरने लगा. उसको हरकत मे आते देख रस्तोगी का लिंग वापस
खड़ा होने लगा. वो घूम कर मेरे दोनो कंधों के पास टाँगें रख
कर अपने लिंग को मेरे होंठों पर रगड़ने लगा. मैं उसका आशय
समझ कर अपने मुँह को खोल कर उसके लिंग को अपने मुँह मे ले ली. वो
मेरी च्चातियों के उपर बैठ गया. मुझे ईसा लगा मानो मेरे सीने की
सारी हवा निकल गयी हो. उसने अपने लिंग को मेरे मुँह मे देकर झुक
कर अपने दोनो हाथों को अपने घुटनो पर रख कर मेरे मुँह मे अपने
लिंग से धक्के मारने लगा. इस पोज़िशन मे स्वामी मुझे दिखाई नही
दे रहा था मगर उसके जबरदस्त धक्के मेरे पूरे जिस्म को बुरी
तरह झकझोर रहे थे.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

कुउच्च देर बाद मुझे रस्तोगी का लिंग फूलते हुए महसूस हुआ. उसने
एक झटके से अपने पूरे लिंग को बाहर की ओर खींचा और उसे पूरा
बाहर निकाल लिया. उसकी ये हरकत मुझे बहुत बुरी लगी. किसी को इतना
चोद्नने के बाद भी उसके पेट मे अपना रस नही उधहेलो तो लगता है
मानो सामने वाला धोखे बाज़ हो. मैने उसके वीर्य को पाने के लिए
अपने मुँह को पूरा खोल दिया. उसने अपने लिंग को अपनी मुट्ठी मे पकड़ा
एक तेज वीर्य की धार हवा मे उच्छलती हुई मेरी ओर बढ़ी. उसने ढेर
सारा वीर्य मेरे चेहरे पर मेरे बालों मे और मेरे खुले हुए मुँह
मे डाल दिया. मैं तड़प कर अपने मुँह को उसके लिंग के उपर लगाई
और उसके बचे हुए वीर्य को अपने मुँह मे भरने लगी.

"मेरे वीर्य को पीना नही. इसे मुँह मे ही रख जबतक स्वामी का
वीरया तेरी चूत मे नही छूट जाता. " रस्तोगी ने मुझसे कहा.
स्वामी के धक्कों की गति काफ़ी बढ़ गयी. मैने रस्तोगी का वीर्य
अपने मुँह मे भर रखा था जिससे मेरा मुँह फूल गया था उसके
कोरों से वीर्य छलक कर बाहर आ रहा था. बहुत सारा वीर्य
डाला था उसने मेरे मुँह मे. रस्तोगी मेरे उपर से हट गया और मेरे
स्तनो पर अपने हाथ रखते हुए स्वामी मेरी योनि पर धक्के मारने
लगा. कुच्छ देर बाद उसने नीचे झुक कर अपना सारा बोझ मेरे बदन
पर डालते हुए मेरे स्तनो को अपने दाँतों से बुरी तरह काटने लगा
उसके जिस्म से वीर्य की तेज धार मेरी योनि मे बहने लगी. स्वामी से
चुद्ते हुए मैं भी दो बार स्खलित हो गयी. पूरा वीर्य मेरी योनि
मे डाल कर वो उठा. मैं अपनी टाँगे फैलाए वही टेबल पर पड़ी पड़ी
लंबी लंबी साँसे ले रही थी. कुच्छ देर तक इसी तरह पड़े रहने के
बाद रस्तोगी ने मुझे सहारा देकर उठाया.

"दिखा रस्तोगी के वीर्य को अभी तक मुँह मे सम्हल कर रखा है या
नही." स्वामी ने कहा. मैने अपना मुँह खोल कर अंदर भरे हुए
वीर्य को दोनो को दिखाया.

"ले अब अपने मुँह से सारा वीर्य निकाल कर अपने हज़्बेंड को पीला. दोनो
हज़्बेंड वाइफ हो हर चीज़ की बराबर भागेदारी होनी चाहिए. "
रस्तोगी ने कहा. पंकज पास के सोफे पर बैठा हुया था. मुझे
रस्तोगी खड़ा कर के पंकज की तरफ धकेला. मेरी टाँगों मे ज़ोर
नही बचा था इसलिए मैं भरभरा कर पंकज के उपर गिर गयी.
मैने अपने होंठ पंकज के होंठों पर रख कर अपने मुँह का सारा
वीर्य पंकज के मुँह मे डाल दिया. ऐसी हालत से पंकज का कभी
वास्ता नही पड़ा था. वो किसी का वीर्य नही पीना चाहता था लेकिन
स्वामी ने उसके सिर को अपने हाथों से पकड़ लिया.

उसने ना चाहते हुए भी रस्तोगी का वीर्य अपने मुँह मे भर कर
धीरे धीरे गटक लिया. मेरी योनि से दोनो का वीर्य बहता हुया
पंकज की पॅंट पर लग रहा था.

मैं अब उठ कर दौड़ती हुई बाथरूम मे गयी. मेरी टाँगों से होते
हुए दोनो का वीर्य नीचे की ओर बह रहा था. बाथरूम मे जाकर
जैसे ही अपना चेहरा आईने मे देखा तो मुझे रोना आ गया मेरा पूरा
बदन, मेरे रेशमी बाल, मेरा मंगल सुत्र सब कुच्छ वीर्य से सना
हुया था. मेरे स्तनो पर अनगिनत दाँतों के दाग थे. मैने अपने
बदन से उनके वीर्य को सॉफ करने लगी तभी दोनो बाथरूम मे
पहुँच गये और मुझे अपनी गोद मे उठा लिया.

"प्लेज मुझे छ्चोड़ दो मुझे अपना बदन सॉफ करने दो. मुझे घिंन
आ रही है अपने बदन से" मैं उनके आगे गिड गिड़ाई.

" अरे मेरी जान तुम तो और भी खूबसूरत लग रही हो इस हालत मे
अभी तो पूरी रात पड़ी है. कब तक अपने बदन को पोंच्छ पोंच्छ कर
आओगी हुमारे पास." रस्तोगी हँसने लगा. दोनो मुझे गोद मे उठा कर
बेड रूम मे ले आए. स्वामी बिस्तर पर नग्न लेट गया और मुझे अपनी ओर
खींचा.


"आजा मेरे ऊपर" स्वामी ने मुझे उनके लिंग को अपने अंदर लेने का
इशारा किया. मैने अपनी कमर उठाकर उसके खड़े हुए लिंग को अपनी
योनि पर सेट किया. उसने अपने हाथों को आगे बढ़ा कर मेरे दोनो स्तन
युगल थाम लिए. मैने अपने चेहरे के सामने आए बालों को एक झटके
से पीछे किया और अपनी कमर को उसके लिंग पर धीरे धीरे नीचे
करने लगी. उसका मोटा लिंग एक झटके से मेरी योनि का दरवाजा खोल
कर अंदर प्रवेश किया. "आआआअहह……ओफफफफफफफफूओ" मैं कराह उठी.
एक बार उसके लिंग से चुदाई हो जाने के बाद भी उसका लिंग मेरी योनि
मे प्रवेश करते वक़्त मैं दर्द से च्चटपटा उठी. ऐसा लगता था
शायद पिच्छली ठुकाई मे मेरी योनि अंदर से छिल गयी थी. इसलिए
उसका लिंग वापस जैसे ही अंदर रगड़ता हुआ आगे बढ़ा दर्द की एक तेज
लहर पूरे बदन मे समा गयी. मैने अपने हाथ उसके सीने पर रख
कर अपने कमर को धीरे धीरे नीचे किया.

रस्तोगी का वीरय अब चेहरे पर और स्तनो पर से सूख कर पपड़ी का
रूप ले लिए थे. मैं कुच्छ देर तक यूँ ही स्वामी के लिंग पर बैठी
अपनी उखड़ी हुई सांसो को काबू मे करने की कोशिश करने लगी तो
पीछे से मेरे दोनो बगलों के नीचे से रस्तोगी ने अपने हाथ डाल
कर मेरे बदन को जाकड़ लिया और उसे उपर नीचे करना शुरू किया.
धीरे धीरे मैं खुद ही अपनी कमर को उसके लिंग पर हिलने लगी.
अब दर्द कुच्छ कम हो गया था. अब मैं तेज़ी से स्वामी के लिंग पर उपर
नीचे हो रही थी.

अचानक स्वामी ने मेरे दोनो निपल्स को अपनी मुत्ठियों मे भर कर
अपनी ओर खींचा. मैं उसके खींचने के कारण उसके उपर झुकते
झुकते लेट ही गयी. वो अब मुझे अपनी बाहों मे जाकड़ कर अपने सीने
पर दाब लिया. मेरे स्तन युगल उसके सीने मे पिसे जा रहे थे. तभी
पीछे से किसी की उंगलियों को च्छुअन मेरे नितंबों के उपर हुई. मैं
उसे देखने के लिए अपने सिर को पीछे की ओर मोड़ना चाहती थी लेकिन
मेरी हरकत को भाँप कर स्वामी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख
दिए और मेरे निचले होंठ को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा. मैने
महसूस किया कि वो हाथ रस्तोगी का था. रस्तोगी मेरे मांसल नितंबों
पर अपने हाथ से सहला रहा था. कुच्छ ही देर मे उसकी उंगलियाँ
सरक्ति हुई मेरी योनि पर ढोँकनी की तरह चल रहे स्वामी के लिंग
के बीच पास पहुँच गये. उसने अपनी उंगलियों को मेरी योनि से
उफनते हुए रस से गीला कर मेरे गुदा पर फेरने लगा. मैं उसका आशय
समझ कर छ्छूटने के लिए च्चटपटाने लगी मगर स्वामी ने मुझे
जोंक की तरह जाकड़ रखा था. उन संडो से मुझ जैसी नाज़ुक कली
कितनी देर लड़ सकती थी. मैने कुच्छ ही देर मे थक कर अपने बदन
को ढीला छ्चोड़ दिया.

रस्तोगी की पहले एक उंगली मेरे गुदा के अंदर घुस कर काम रस से
गीला करने लगी मगर जल्दी ही दो तीन उंगलियाँ मेरे गुदा मे
ठूँसने लगा. मैं हर हमले पर अपनी कमर को उच्छल देती मगर उस
पर कोई असर नही होता. कुच्छ ही देर मे मेरे गुदा को अच्छि तरह
योनि क इरस से गीला कर के रस्तोगी ने अपने लिंग को वहाँ सताया.
स्वामी ने अपने दोनो हाथों से मेरे दोनो नितंबों को अलग करके
रस्तोगी के लिए काम आसान कर दिया. मैने पहले कभी अप्राकृतिक
मैथुन नही किया था इसलिए घबराहट से मेरा दिल बैठने लगा.

रस्तोगी ने एक ज़ोर के धक्के से अपने लिंग को मेरे गुदा मे घुसाने की
कोशिश की मगर उसका लिंग आधा इंच भी अंदर नही जा पाया. मैं
दर्द से च्चटपटा उठी. रस्तोगी ने अब अपनी दो उंगलियों से मेरे गुदा
द्वार को फैला कर अपने लिंग को उसमे ठूँसने की कोशिश की मगर इस
बार भी उसका लिंग रास्ता नही बना सका. इस नाकामियाबी से रस्तोगी
झुंझला उठा उसने लगभग चीखते हुए पंकज से कहा,

"क्या तुकर तुकर देख रहा है जा जल्दी से कोई क्रीम ले कर आ. लगता
है तूने आज तक तेरी बीवी की ये सील नही तोड़ी. साली बहुत टाइट
है. मेरे लंड को पीस कर रख देगी." रस्तोगी उत्तेजना मे गंदी
गंदी बातें बड़बड़ा रहा था. पंकज पास के ड्रेसिंग टेबल से कोल्ड
क्रीम की बॉटल लाकर रस्तोगी को दिया. रस्तोगी ने अपनी उंगली से
लगभग आधी शीशी क्रीम निकाल कर मेरे गुदा द्वार पर लगाया. फिर
वो अपनी उंगलियों से अंदर तक अच्छे से चिकना करने लगा. कुच्छ
क्रीम उठा कर अपने लंड पर भी लगाया. इस बार जब वो मेरे गुदा
द्वार पर अपने लिंग को रख कर धक्का दिया तो उसका लिंग मेरे गुदा
द्वार को फड़ता हुया अंदर घुस गया. दर्द से मेरा बदन एंथने लगा.
ऐसा लगा मानो कोई एक मोटी सलाख मेरे गुदा मे डाल दिया हो.

"आआआआ..ऊऊऊऊ ओह…आआआआअ… .ईईईईंमम्ममम माआ" मैं
दर्द
से च्चटपटा रही थी. दो तीन धक्के मे ही उसका पूरा लिंग मेरे
पिच्छले द्वार से अंदर घुस गया. जब तक उसका पूरा मेरे शरीर मे
प्रवेश नही कर गया तब तक स्वामी ने अपने धक्के बंद रखे और
मेरे बदन को बुरी तरह अपने सीने पर जाकड़ के रखा था. मुझे
लगा कि मेरा शरीर सुन्न होता जा रहा है. लेकिन कुच्छ ही देर मे
वापस दर्द की तेज लहर पूरे बदन को जाकड़ ली. अब दोनो धक्के
मारने शुरू कर दिए. हर धक्के के साथ मैं कसमसा उठती. दोनो के
विशाल लिंग लग रहा था मेरे पेट की सारी अंतदियों को तोड़ कर रख
देंगे. पंद्रह बीस मिनिट तक दोनो की ठुकाई चलती रही फिर एक
साथ दोनो ने मेरे दोनो च्छेदो को रस से भर दिया. रस्तोगी स्खलित
होने के बाद मेरे बदन से हटा. मैं काफ़ी देर तक स्वामी के बदन पर
ही पसरी रही. उसका लिंग नरम हो कर मेरी योनि से निकल चुक्का था.
लेकिन मुझमे अब बिल्कुल भी ताक़त नही बची थी. मुझे स्वामी ने अपने
उपर से हटाया और अपने बगल मे लिटा लिया. मेरी आँखें बंद होती
चली गयी. मैं थकान से नींद की आगोश मे चली गयी. उसके बाद
रात भर मेरे तीनो च्छेदों को आराम नही करने दिया गया. मुझे कई
बार कई तरह से उन दोनो ने भोगा. मगर मैं थकान के मारे नींद
मे डूबी रही. एक दो बार दर्द से मेरी खुमारी ज़रूर टूटी लेकिन
अगले ही पल वापस मैं नींद की आगोश मे चली गयी. दोनो रात भर
मेरे बदन को नोचते रहे.

सुबह दोनो कपड़े पहन कर वापस चले गये. पंकज उन्हे होटेल पर
छ्चोड़ आया. मैं उसी तरह बिस्तर पर पड़ी हुई थी. सुबह ग्यारह बजे
की आस पास मेरी नींद खुली तो पंकज को मैने अपने पास बैठे
हुए पाया. उसने सहारा देकर मुझे उठाया और बाथरूम तक
पहुँचाया. मेरे पैर बुरी तरह काँप रहे थे. बाथरूम मे शवर
के नीचे मैं लगभग पंद्रह मिनिट तक बैठी रही.

मैं एक लेडी डॉक्टर के पास भी हो आई. लेडी डॉक्टर मेरी हालत देख
कर समझी की मेरे साथ कोई रेप जैसा हादसा हुआ है. मैने भी
उसे अपने कॉन्फिडेन्स मे लेते हुए कहा, "कल घर पर हज़्बेंड नही
थे. चार आदमी ज़बरदस्ती घुस आए थे और उन्हों ने मेरे साथ रात
भर रेप किया."

लेडी डॉक्टर ने पूछा कि मैने पोलीस मे फिर दर्ज करवाई या नही तो
मैने उसको कहा "मैं इस घटना का ज़िक्र कर बदनाम नही होना
चाहती.मैने अंधेरे मे उनके चेहरे तो देखे नही तो फिर कैसे
पहचानूँगी उन्हे इसलिए आप भी इसका ज़िक्र किसी से ना करें."

डॉक्टर मेरी बातों से सहमत होकर मेरा मुआयना करके कुच्छ दवाइयाँ
लिख दी. मुझे पूरी तरह नॉर्मल होने मे कई दिन लग गये. मेरे
स्तनो पर से दाँतों के काले काले धब्बे तो महीने भर तक नज़र
आते रहे. पंकज का काम हो गया था. उनकी एलीट कंपनी से वापस
मधुर संबंध हो गये. पंकज ने जब तक मैं बिल्कुल ठीक नही हो
गयी तब तक मुझे पलकों पर बिठाए रखा. मुझे दो दीनो तक तो
बिस्तर से ही उठने नही दिया. उसके मन मे एक गिल्टी फीलिंग तो थी
ही. कि मेरी इस हालत की वजह वो और उसका बिज़्नेस है.


कुच्छ ही दीनो मे एक बहुत बड़ा कांट्रॅक्ट हाथ लगा. उसके लिए पंकज
को यूएसए जाना पड़ा. वहाँ कस्टमर्स के साथ डीलिंग्स तय करनी थी.
और नये कस्टमर्स भी तलाश करने थे. उसे वहाँ करीब छह
महीने लगने थे. मैने इस दौरान उनके पेरेंट्स के साथ रहने की
इच्च्छा जाहिर की. मैं अब मिस्टर. राज शर्मा के लड़के की बीवी बन चुकी थी
मगर अभी भी जब मैं उनके साथ अकेली
होती तो मेरा मन मचलने लगता. मेरे बदन मे एक सिहरन सी दौड़ने
लगती. कहावत ही है की लड़किया अपना पहला प्यार कभी नही भूल
पाती.

राज जी के ऑफीस मे मेरी जगह अब उन्हों ने एक 45 साल की महिला
सुनयना को रख लिया था. नाम के बिल्कुल विपरीत थी वो. मोटी और
काली सी. वो अब डॅडी की सेक्रेटरी थी. मैने एक बार पापा को छेड़ते
हुए कहा था,

"क्या पूरी दुनिया मे कोई ढंग की सेक्रेटरी आपको नही मिली?"

क्रमशः.......................................


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

गतान्क से आगे........................

तो उन्हों ने हंस कर मेरी ओर देखते हुए एक आँख दबा कर कहा, "
यही सही है. तुम्हारी जगह कोई दूसरा ले भी नही सकती और बाइ दा
वे मेरा और कोई कुँवारा बेटा भी तो नही बचा ना."

अभी दो महीने ही हुए थे कि मैने राज जी को कुच्छ परेशान
देखा.

"क्या बात है डॅडी आप कुच्छ परेशान हैं." मैने पूचछा.

"शिम्रिति तुम कल से हफ्ते भर के लिए ऑफीस आने लागो." उन्हों ने
मेरी ओर देखते हुए पूचछा," तुम्हे कोई परेशानी तो नही होगी ना
अपने पुराने काम को सम्हालने मे?

"नही. लेकिन क्यों?" मैने पूचछा

"अरे वो नयी सेक्रेटरी अकल के मामले मे बिल्कुल खाली है. दस दिन
बाद पॅरिस मे एक सेमिनार है हफ्ते भर का. मुझे अपने सारे पेपर्स
और नोट्स तैयार करने हैं जो कि तुम्हारे अलावा और कोई नही कर
सकता. तुम जितनी जल्दी अपने काम मे एक्सपर्ट हो गयी थी वैसी कोई
दूसरी मिलना मुश्किल है."

"लेकिन डॅडी मैं वापस उस पोस्ट पर रेग्युलर काम नही कर सकती क्योंकि
पंकज आने पर मैं वापस मथुरा चली जौंगी"

"कोई बात नही. तुम तो केवल मेरे सेमिनार के पेपर्स तैयार कर दो
और मेरी सेक्रेटरी बन कर पॅरिस मे सेमिनार अटेंड कर लो. नही
इनकार मत करना. तुम्हे मेरे साथ सेमिनार अटेंड करना ही पड़ेगा.
सुनयना के बस का नही है ये सब. इन सब सेमिनार मे सेक्रेटरी स्मार्ट
और सेक्सी होना बहुत ज़रूरी होता है. जोकि सुनयना है नही. यहाँ
केच्छोटे मोटे कामो के लिए सुनयना रहेगी"


"ठीक है मैं कल से ऑफीस चलूंगी आपके साथ." मैने उन्हे
छेड़ते हुए पूचछा, "मुझे वापस स्कर्ट तो नही पहन्नि पड़ेगी ना?"
मैने अपनी राई सुना दी उन्हे. मैने ये कहते हुए उनकी तरफ हल्के से
अपनी एक आँख दबाई. वो मेरी बातों को सुन कर मुस्कुरा दिए.

"तुम्हारी जो मर्ज़ी पहन लेना. कुच्छ नही पहनो तो भी राज शर्मा के
बेटे की बीवी को लाइन मारने की हिम्मत किसी मे नही होगी." हम हंसते
हुए अपने अपने कमरों की ओर बढ़ गये. उस रात मुझे बहुत अच्छि
नींद आई. सपनो मे मैं उस ऑफीस मे बीते हर पल को याद करती
रही.

मैं अगले दिन से ऑफीस जाने लगी. डॅडी के साथ कार मे ही जाती और
उनके साथ ही वापस आती. ऑफीस मे भी अब सलवार कमीज़ या सारी मे
डीसेंट तरीके से ही रहती. लेकिन जब कॅबिन मे सिर्फ़ हम दोनो बचते
तो मेरा मन मचलने लगता. मैने महसूस किया था कि उस वक़्त
राज जी भी असहज हो उठते. जब मैं ऑफीस मे बैठ कर
कंप्यूटर पर सारे नोट्स तैयार करती तो उनकी निगाहों की तपिश
लगातार अपने बदन पर महसूस करती.

मैने सारे पेपर्स तैयार कर लिए. चार दिन बाद मुझे फादर इन
लॉ के साथ पॅरिस जाना था.
एक दिन खाना खाने के बाद मैं और पापा टी.वी. देख रहे थे. मम्मी
जल्दी सोने चली जाती है. कुच्छ देर बाद राज जी ने कहा

"स्मृति पॅरिस जाने की तैयारी करना शुरू करदो. टिकेट आ चुक्का
है बस कुच्छ ही दीनो मे फ्लाइट पकड़नी है."

"मैं और क्या तैयारी करूँ. बस कुच्छ कपड़े रखने हैं."

"ये कपड़े वहाँ नही चलेंगे." उन्हों ने कहा " ऑर्गनाइज़िंग कंपनी
ने सेमिनार का ड्रेस कोड रखा है. और उसकी कॉपी अपने सारे
कॅंडिडेट्स को भेजा है. उन्हों ने स्ट्रिक्ट्ली ड्रेस कोड फॉलो करने
के लिए सारी कंपनी के रेप्रेज़ेंटेटिव्स से रिक्वेस्ट की है. जिसमे
तुम्हे यानी सेक्रेटरी को सेमिनार के वक़्त लोंग स्कर्ट और ब्लाउस मे
रहना पड़ेगा. शाम को डिन्नर और कॉकटेल के समय माइक्रो स्कर्ट और
टाइट टी शर्ट पहँनी पड़ेगी विदाउट..... ....... अंडर गारमेंट्स"
उन्हों ने मेरी ओर देखा. मेरा मुँह उनकी बातों से खुला का खुला रह
गया. " शाम को अंडरगार्मेंट्स पहनना अल्लोव नही है. दोपहर और
ईव्निंग मे पूल मे टू पीस बिकनी पहनना पड़ेगा."


"लेकिन?" मैने थूक का घूँट निगल कर बोला" मेरे पास तो इस तरह
के सेक्सी ड्रेस हैं नही. और आपके सामने मैं कैसे उन ड्रेस को पहन
कर रहूंगी?"

"क्यों क्या प्राब्लम है?"
"मैं आपकी पुत्रवधू हूँ" मैने कहा.

"लेकिन वहाँ तुम मेरी सेक्रेटरी बन कर चलॉगी." राज जी ने
कहा.

"ठीक है सेक्रेटरी तो रहूंगी लेकिन इस रिश्ते को भी तो नही
भुलाया जा सकता ना" मैने कहा.

"वहाँ देखने वाला ही कौन होगा. वहाँ हम दोनो को पहचानेगा ही
कौन. वहाँ तुम केवल मेरी सेक्रेटरी होगी. एक सेक्सी और…." मुझे
उपर से नीचे तक देखते हुए आगे कहा" हॉट. तुम वहाँ हर अवक़्त
मेरी पर्सनल नीड्स का ख़याल रखोगी जैसा कि कोई अच्छि सेक्रेटरी
रखती है. ना कि जैसा कोई बहू अपने ससुर का रखती है."

उनके इस कथन मे गंभीर बात को मैने भाँप कर अपना सिर झुका
लिया.

"तुम परेशान मत हो सारा अरेंज्मेंट कंपनी करेगी तुम कल मेरे
साथ चल कर टेलर के पास अपना नाप दे आना. बाकी किस तरह के
ड्रेस सिलवाने हैं कितने सिलवनी हैं सब मेरी हेडएक है"

अगले दिन मैं उनके साथ जाकर एक फेमस टेलर के पास अपना नाप दे
आई. जाने के दो दिन पहले राज जी नेदो आदमियों के साथ एक बॉक्स
भर कर कपड़े भिजवा दिए.

मैने देखा की उनमे हर तरह के कपड़े थे. कपड़े काफ़ी कीमती थे.
मैने उन कपड़ों पर एक नज़र डाल कर अपने बेडरूम मे रख लिए. मैं
नही चाहती थी कि मेरी सास को वो एक्सपोसिंग कपड़े दिखें. पता नही
उसके बारे मे वो कुच्छ भी सोच सकती थी.

शाम को उनके वापस आने के बाद जब मैने उन्हे अकेला पाया तो मैने
उनसे पूचछा,

"इतने कपड़े! सिर्फ़ मेरे लिए हैं?"

"और नही तो क्या. तुम वहाँ मेरी सेक्रेटरी होगी. और मेरी सेकरटरी
सबसे अलग दिखनी चाहिए. तुम हर रोज एक नये डिज़ाइन का कपड़ा
पहनना. उन्हे भी तो पता चले हम इंडियन्स कितने शौकीन हैं.
तुमने पहन कर देखा उन्हे"

"नही, मैने अभी तक इन्हे ट्राइ करके तो देखा ही नही"


" कोई बात नही आज रात खाना ख़ान एके बाद तुम्हारा ट्राइयल लेलेटे
हैं. फिर मुस्कुरा कर बोले " मम्मी को जल्दी सुला देना"

रात को खाना खाने के बाद मम्मी सोने चली गयी. डॅडी ने खाना
नही खाया उन्हों ने कहा कि वो खाने से पहले दो पेग विस्की के लेना
चाहते हैं. मम्मी तो इंतेज़ार ना करके खुद खाना खाकर उन्हे मेरे
हवाले कर के चली गयी. मैने सारा समान सेंटर टेबल पर तैयार
कर के रख दिया. वो सोफे पर बैठ कर धीरे धीर ड्रिंक्स सीप
करने लगे. वो इस काम को लंबा खींचना चाहते थे. जिससे मम्मी
गहरी नींद मे डूब जाती. मैं उनके पास बैठी उनके काम मे हेल्प
कर रही थी कुच्छ देर बाद उन्हों ने पूचछा,

"मम्मी सो गयी? देखना तो सही" मैं उठ कर उनके बेड रूम मे जाकर
एक बार सासू जी पर नज़र मार आई. वो तब गहरी नींद मे सो रही
थी. मैं सामने के सोफे पर बैठने लगी तो उन्हों ने मुझे अपने पास
उसी सोफे पर बैठने का इशारा किया. मैं उठ कर उनके पास बैठ
गयी. उन्हों ने कुच्छ देर तक मुझे निहारा और फिर कहा,

" जाओ स्मृति और एक एक करके सारे कपड़े मुझे पहन कर दिखाओ."
कहते हुए उन्हों ने अपना ड्रिंक बनाया. मैं उठ कर अपने बेड रूम मे
चली गयी. बेडरूम मे आकर दोनो बॉक्स खोल कर
सारे कपड़ों को बिस्तर के उपर बिच्छा दी. मैने सबसे पहले एक
ट्राउज़र और शर्ट छेंटा. उसे पहन कर कॅट वॉक केरते हुए किसी
मॉडेल की तरह उनके सामने सोफे तक पहुँची और अपने हाथ कमर पर
रख कर दो सेकेंड रुकी फिर झुककर उन्हे बो किया और धीरे से
पीछे मूड कर उन्हे अपने पिच्छवाड़े का भी पूरा अवलोकन करने दिया
फिर मुड़कर पूचछा "ठीक है?"

उन्हों ने कुसकुरा कर कहा "सेक्सी…..एम्म्म"

मैं वापस अपने कमरे मे आ गयी फिर दूसरे कपड़े को पहन कर उनके
सामने पहुँची...फिर तीसरे..... बनाने वाले ने बड़े ही खूबसूरत
डेस्ज्ञ मे सारे कपड़े सिले थे. जो रेडीमेड थे उन्हे भी काफ़ी नाप
जोख करके सेलेक्ट किया होगा क्यों की कपड़े ऐसे लग रहे थे मानो
मेरे लिए ही बने हों. बदन से ऐसे चिपक गये थे मानो मेरे बदन
पर दूसरी चाँदी चढ़ गयी हो.

ट्राउज़र्स के बाद लोंग स्कर्ट और ब्लाउस की बारी आई. राज जी
मेरे शो का दिल से एंजाय कर रहे थे. हर कपड़े पर कुच्छ ना कुच्छ
कॉमेंट्स पास करते जा रहे थे.

लोंग स्कर्ट के बाद माइक्रो स्कर्ट की बारी आई. मैने एक पहना तो मुझे
काफ़ी शर्म आई. स्कर्ट की लंबाई पॅंटी के दो अंगुल नीचे तक थी. टी
शर्ट भी जस्ट मेरी गोलैईयों के नीचे ही ख़त्म हो रहे थे. टी
शर्ट्स के गले भी काफ़ी डीप थे. मेरे आधे बूब्स सामने नज़र आ रहे
थे. मैने ब्रा और पॅंटी के उपर ही उन्हे पहना और एक बार अपने
बदन को सामने लगे फुल लेंग्थ आईने मे देख कर शरमाती हुई उनके
सामने पहुँची.

"नो नो .... तुम्हे पूरे ड्रेस कोड को निभाना पड़ेगा" उन्हों ने अपने
ग्लास से सीप करते हुए कहा "नो अंडर गारमेंट्स"


" मैं वहाँ उसी तरह पहन लूँगी. यहाँ मुझे शर्म आ रही है"
मैने शरमाते हुए कहा.

"यहाँ मैं अकेला हूँ तो शर्म आ रही है वहाँ तो सैकड़ों लोग
देखेंगे फिर?"

"डॅडी वहाँ तो सारी लड़कियाँ इसी ड्रेस मे होंगी इसलिए शर्म नही
लगेगा"

"नही नही तुम तो उसी तरह आओ. नही तो पता कैसे चलेगा इन कपड़ों
मे तुम कैसी लगोगी." उन्हों ने कहा मैं चुपचाप लौट आई. और अपनी
ब्रा और पॅंटी उतार कर पैरों को सिकोडते हुए वापस पहुँची. उनके
सामने जाकर जैसे ही मैने अपने हाथ कमर पर रखे उनकी आँखें
बड़ी बड़ी हो गयी. उन्हों ने शॉर्ट्स पहन रखी थी उसमे से उनके
लिंग का उभार सॉफ दिख ने लगा. उनका लीग मेरे एक्सपोषर का सम्मान
देते हुए टंकार खड़ा हो गया. पॅंट के उपर से तंबू की तरह
उभार नज़र आने लगा..

"सामने की ओर थोडा झुको" उन्हों ने मुझे कहा तो मैं सामने की ओर
झुकी. मेरे टी शर्ट के गले से मेरे पूरे उभार बाहर झाँकने लगे.
पूरा स्तनउनकी नज़रों के सामने था.

"पीछे घूमओ" उन्हों ने फिर कहा

मैं धीरे धीरे पीछे घूमी. मुझे पूरी उम्मीद है कि मेरे झुके
होने के कारण पीछे घूमने पर छ्होटे से स्कर्ट के अंदर से मेरी
योनि उनको नज़र आ गयी होगी. उन्हों ने मेरी तारीफ करते हुए
कहा "बाइ गॉड तुम आग लगा दोगि सारे पॅरिस मे"

मुस्कुराते हुए मैं वापस बेड रूम मे चली गयी. कुच्छ देर बाद एक
के ब्बाद एक सारे स्कर्ट और टी शर्ट ट्राइ कर लिए. अब सिर्फ़ बिकनी बची
थी.

"डॅडी सारे कपड़े ख़त्म हो गये अब सिर्फ़ बिकनी ही बची हैं" मैने
कहा

"तो क्या उन्हे भी पहन कर दिखाओ" उन्हों ने कसमसाते हुए अपने तने
हुए लिंग को सेट किया. इस तरह की हरकत करते हुए उनको मेरे सामने
किसी तरह की शर्म महसूस नही हो रही थी.

मैं वापस कमरे मे जाकर पहली बिकनी उठाई. उसे अपने बदन पर पहन
कर देखी. बिकनी सिर्फ़ ब्रा और पॅंटी की तरह टू पीस थी. बाकी
सारा बदन नग्न था. उन्ही कपड़ों मे चलती हुई राज जी के पास
आई. राज जी की जीभ मेरे लगभग नग्न बड़ा को देख कर
होंठों पर फिरने लगी.


RE: Hindi sex मैं हूँ हसीना गजब की - - 06-25-2017

"मुझे तो अपने लड़के की किस्मत पर जलन हो रही है. ऐसी
खूबसूरत अप्सरा तो बस किस्मेत वालो को ही नसीब होती है." उन्हों
ने मेरी तारीफ की. मैने उनके सामने आकर उसी तरह झुक कर अपने
स्तनो को उनकी आँखों के सामने किया फिर एक हल्के झटके से स्तनो को
हिलाया और घूम कर अपनी नितंबों पर चिपकी पॅंटी के भरपूर
दर्शन कराए. फिर अंदर चली गयी.


एक के बाद एक बिकनी ट्राइ करने लगी. हर बिकनी पिच्छलीवाली बिकनी से
ज़्यादा छ्होटी रहती थी. आख़िरी बिकनी तो बस तो बस निपल को ढकने
के लिए दो इंच घेर के दो गोल आकर के कपड़े के टुकड़े थे. दोनो एक
दूसरे से पतली डोर से बँधे थे. उन्हे निपल के उपर सेट करके
मैने डोर अपने पीछे बाँध लिए. पॅंटी के नाम पर एक छ्होटा सा एक
ही रंग का तिकोना कपड़ा योनि को ढकने के लिए एलास्टिक से
बँधा हुआ था. मैने आईने मे देखा. मैं पूरी तरह नग्न नज़र आ
रही थी.

मैं वो पहन कर जब चलते हुए उनके सामने पहुँची तो उनके हाथ का
ग्लास फिसल कर कार्पेट पर गिर पड़ा. मैं उनकी हालत देख कर हंस
पड़ी. लेकिन तुरंत ही शर्म से मेरा चेहरा लाल हो गया.

मैने अब तक कई गैर मर्दों के साथ मजबूरी मे सब कुच्छ किया था
मगर कमल जी साथ ही सेक्स को एंजाय किया था. उनकी तरह इनके साथ
तो मैं भी एंजाय कर रही थी. मैं इस बार उनके कुच्छ ज़्यादा ही पास
पहुँच गयी. उनके सामने जाकर झुकी तो मेरे बड़े बड़े बूब्स उनकी
आँखों के सामने नाचने लगे. मेरे दोनो स्तन उनसे बस एक हाथ की
दूरी पर थे. वो अपने हाथों को उठा कर उन्हे छ्छू सकते थे. मैने
अपने बदन को एक झटका दिया जिससे मेरे स्तन बुरी तरह उच्छल
उठे. फिर मैं पीछे मुड़कर अपने कमरे मे जाने को हुई तो उन्हों ने
मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी गोद मे खींचा. मैं लहरा कर उनकी
गोद मे आ गिर गयी. उनके होंठ मेरे होंठों से चिपक गये. उनके
हाथ मेरी गोलैईयों को मसल्ने लगे. एक हाथ मेरे नग्न बदन पर
फिरता हुआ नीचे टाँगों के जोड़ तक पहुँचा. उन्हों ने मेरी योनि के
उपर अपना हाथ रख कर पॅंटी के उपर से ही उस जगह को मुट्ठी मे
भर कर मसला. अब उनके हाथ मेरे ब्रा को मेरे बदन से अलग करना
चाहते थे.

वो कुच्छ और करते की उनका मोबाइल बज उठा. उनके ऑफीस के किसी आदमी
का फोन था. वो किसी अफीशियल काम बारे मे बात कर रहा था. मैं
मौका देख कर उन कपड़ो को समेत कर वहाँ से भाग गयी. मैने अपने
कपड़े उतार कर वापस सलवार कमीज़ पहनी और सारे कपड़ों को समेत
कर बॉक्स मे रख दिया. मैं पूरी तरह तैयार होकर दस मिनिट बाद
बाहर आई. तब तक राज जी जा चुके थे. मैं टेबल से ड्रिंक्स का
सारा समान उठाने को झुकी तो मुझे सोफे पर एक गीला गोल धब्बा
नज़र आया. वो धब्बा उनके वीर्य से बना था. मैं सब समझ कर
मुस्कुरा उठी.

मैं अपने कमरे मे जाकर सो गयी. आज मेरे ससुर जी की रात खराब
होनी थी. और मैं आने वाले दीनो के बारे सोचती हुई सो गयी जुब
हफ्ते भर के लिए हम दोनो को एक साथ रहना था पॅरिस जैसी
रंगीन जगह मे.
हम आज़ पर शेड्यूल फ्रॅन्स के लिए निकल पड़े. पॅरिस मे हमारी तरह
तकरीबन 100 कंपनी के रेप्रेज़ेंटेटिव आए थे. हमे एक शानदार
होटेल मे ठहराया गया. उस दिन शाम को कोई प्रोग्राम नही था. हमे
साइट सीयिंग के लिए ले जाया गया. वहाँ एइफले टवर के नीचे खड़े
होकर हम दोनो ने कई फोटो खिंचवाए. फोटोग्राफर्स ने हम दोनो को
हज़्बेंड वाइफ समझा. वो हम दोनो को कुच्छ इंटिमेट फोटो के लिए
उकसाने लगे. ससुरजी ने मुझे देखा और मेरी राई माँगी. मैं कुच्छ
कहे बिना उनके सीने से लिपट कर अपनी रज़ामंदी जाता दी. हम दोनो
ने एक दूसरे को चूमते हुए और लिपटे हुए कई फोटो खींचे.
मैने उनकी गोद मे बैठ कर भी कई फोटो खिंचवाए. ये सब फोटो
उन्हों ने छिपा कर रखने की मुझे सांत्वना दी. ये रिश्ता किसी भी
तरह से इंडियन कल्चर मे आक्सेप्टबल नही था.

अगले दिन सुबह से बहुत बिज़ी प्रोग्राम था. सुबह से ही मैं सेमिनार मे
बिज़ी रही. राज जी यानी मेरे ससुर जी एक ब्लॅक सूयीट जिसपर
गोलडेन लिनिंग थी मे बहुत जाच रहे थे. उन्हे देख कर किसी को
अंदाज़ लगाना मुश्किल हो जाए कि उनके लड़कों की शादी भी हो चुकी
होगी. वो खुद 40 साल से ज़्यादा के नही लगते थे. जैसा की मैने
पहले पार्ट्स मे लिखा था शादी से पहले से ही मैं उन पर मर मिटी
थी. अगर मेरी पंकज से शादी नही हुई होती तो मैं तो उनकी मिस्ट्रस
बनकर रहने को भी तैयार थी. पंकज से मुलाकात कुच्छ दीनो के
बाद भी होती तो मैं अपनी वर्जिनिटी राज जी पर न्योचछवर कर
चुकी होती.

खैर वापस घटनाओ पर लौटा जाए. सुबह एज पर ड्रेस कोड मैं
स्कर्ट ब्लाउस पहन रखी थी. 12 बजे के आस पास दो घंटों का
ब्रेक मिलता था. जिसमे स्वीमिंग और लंच करते थे. सब कुच्छ एज पर
स्ट्रिक्ट टाइम टेबल किया जा रहा था. सुबह उठने से लेकर कब कब क्या
क्या करना है सब कुच्छ पहले से ही डिसाइडेड था.

हमे अपने अपने कमरे मे जाकर तैयार होकर स्विम्मिंग पूल पर मिलने
के लिए कहा गया. मैने एक छ्होटी सी टू पीस बिकनी पहनी हुई थी.
बिकनी काफ़ी छ्होटी सी थी. इसलिए मैने उसके उपर एक शर्ट पहन ली
थी. कमरे से बाहर निकल कर बगल वाले कमरे मे जिसमे ससुर जी रह
रहे थे उसमे चली गयी. ससुर जी कमरे मे नही थे. मैने इधर
उधर नज़र दौड़ाई. बाथरूम से पानी बहने की आवाज़ सुनकर उस तरफ
गयी तो देखा की बाथरूम का दरवाजा आधा खुला हुआ था. सामने
राज जी पेशाब कर रहे थे. उनके हाथ मे उनका काला लिंग सम्हाल
रखा था. लिंग आधा उत्तेजित अवस्था मे था इसलिए काफ़ी बड़ा दिख
रहा था. मैं झट थोड़ा ओट मे हो गयी जिससे की उनकी नज़र अचानक
मुझ पर नही पड़े और मैं वहाँ से उनको पेशाब करते हुए देखती
रही. जैसे ही उन्हों ने पेशाब ख़त्म करके अपने लिंग को अंदर किया
तो मैं एक बनावटी खाँसी देते हुए उन्हे अपने आने की सूचना दी. वो
कपड़े ठीक करके बाहर निकले. राज जी ने नग्न बदन पर एक
छ्होटी से वी शेप का स्विम्मिंग कॉस्ट्यूम पहन रखा था. जिसमे से उनके
लिंग का उभार सॉफ सॉफ दिख रहा था. उन्हों ने अपने लिंग को उपर की
ओर करके सेट कर रखा था.

उन्हों ने मुझे बाहों से पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो मैं उनके नग्न
बदन से लग गयी. उसी अवस्था मे उन्हों ने मेरे कंधे पर अपनी
बाँह रख कर मुझे अपने से चिपका लिया. हम दोनो एक दूसरे के गले
मे हाथ डाले किसी नाव विवाहित जोड़े की तरह स्विम्मिंग पूल तक
पहुँचे.


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