Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - Printable Version

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RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--21

छत पर जैसे ही पहुँचे कि पूजा हमें पीछे से जकड़ती हुई बोली,"भाभी, अब तो कहो...आज कहाँ जाकर कुटाई करवा के आ गई."

मैं हँसते हुए पीछे गर्दन नचाई और बोली,"पागल है क्या? यहाँ किसी को ठीक से जानती नहीं फिर कैसे करवा लूँगी.."

भैया : "अच्छा, तो फिर बिना किए ही तुम्हारे चेहरे पर सेक्स की नशा चढ़ी हुई थी.."

"की नहीं थी पर मजे ले कर आई थी.."मैंने हंसी लाते हुए भैया की तरफ देखते हुए बोली..जिसे सुनते ही पूजा मेरी एक चुची को मसलते हुए बोली,"वॉव,,कौन है वो खुशनसीब जिस पर अपने जवानी के रस छिड़क के आ गई.."

"नाम नहीं पता और ना ही उसे जानती हूँ.."मैं भी सोची अब थोड़ी मजे ले ही लूँ बता कर..

"क्या? मतलब किसी अंजाने को मजे दे कर आई हो..ओफ्फ भाभी...देख रहे हैं ना अपनी लाडली बहन को जी कैसे गुल खिला रही है...ही..ही..ही.."पूजा भैया की तरफ मेरे चेहरे को दूसरे हाथ से करती हुई बोली..

जिसे सुन भैया आगे बढ़ ठीक मेरे सामने से सटते हुए बोले,"हाँ पूजा जी...पर आप भूल रही हैं कि मेरी बहन पहले थी..अब मेरी बहन से पहले आपकी भाभी और मि. श्याम की बीवी हैं..तो आप टेंशन लो..मैं नहीं"

कहते हुए भैया मेरी दूसरी चुची को अपनी चुटकी से रगड़ दिए जिससे मेरी चीख निकल गई...शुक्र है आसपास की छत बिल्कुल खाली थी वरना सभी तक मेरी चीख गूँजती...

"अच्छा तो आप अपनी बहन की नहीं, मेरी भाभी की बैंड बजाते हैं.."पूजा अपनी आँखें नचाती हुई व्यंग्य पूर्ण शब्दों में पूछी..जिसके जवाब में भैया "बिल्कुल" कह अपनी हामी भर दी...

जिसे सुन हम तीनों की हँसी छूट गई..तभी पूजा एक बार फिर से आज की रंगरलिया के बारे में पूछ बैठी..मैंने ओके कहते हुए पूजा को खुद से अलग की और छत की रेलिंग के सहारे पीठ करके खड़ी हो गई...

जिसे देख वो दोनों भी मेरे बाएं-दाएं सट के खड़े हो गए और शांत मुद्रा में मेरी हाल-ए-बयां सुनने का इंतजार करने लगे..

मैंने मुस्कुराते हुए सुबह घर से निकलने से लेकर ऑटो तक हुई हर एक पल का हाल सुनाने लगी..जिसे सुन दोनों की आँखें फटी की फटी रह गई...

उन्हें तो विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं सेक्स की आग में इतनी जल रही थी आज..बस में कई लोगों द्वारा रगड़ाई सुन वो दोनों अपनी सांसें रोक सुन रहे थे...और जब उस बाथरूम वाले की तरफ से दिए 500 रूपए की बात सुने तो हँस हँस के लोटपोट हो रहे थे...साथ ही लंड चुसाई, उसका पानी पीना, रंडी समझना ये सब बातें सुने तो गर्म भी हो रहे थे...

पूजा अपने चूत को ऊपर से ही सेंक रही थी जबकि भैया अपने पैंट के अंदर हाथ डाले हुए थे...मेरी चूत भी पानी के धार छोड़नी शुरू कर दी थी..मैं अपनी जांघों से ही चूत को दबाते हुए बोली जा रही थी..

फिर ऑटो वाले को बीच सड़क पर अपनी निप्पल दिखाई जिसे सुनते ही पूजा धम्म से नीचे बैठ गई और झड़-झड़ पानी बहाने लगी...भैया भी पूरे चरम सीमा पर थे..और जैसे ही मेरी बात पूरी हुई उन्होंने तेजी से अपना घोड़ा निकाल दिया...

और उनका घोड़ा एक पर एक लगातार कई पिचकारी छोड़ने लगा...खुली छत पर उनका 8 इंची लण्ड पूरे छत को गीला करनी शुरू कर दी थी...

अब जब दो ज्वालामुखी भड़क गई हैं तो मैं भला पीछे क्यों रहती...मैं खड़ी खड़ी ही रेलिंग पर सिर टिका झड़ रही थी...कुछ देर तक यूँ सब चुपचाप खड़े रहे...तभी पूजा उठी और हँसते हुए बोली..

पूजा : "भाभी, पता नहीं उन सब की हालत क्या हुई होगी...अभी भी कहती हूँ उनमें से किसी का पप्पू सोया नहीं होगा..ही..ही..ही.."

भैया : "एकदम सही पूजाजी...मेरी तो सिर्फ सुनने भर से ये हालत हो गई..उनके पप्पू पर तो हमला किया गया है...वैसे सीता एक बात बोलूँ.."

मैं अब तक सीधी हो चुकी थी..भैया की तरफ देख हाँ कह उन्हें बोलने का इंडार करने लगी..

भैया : "वो केतन ऑटो वाला 8 बजे तक आने बोला है ना तो तुम चली जाना.."

"नहीं भैया, आज तो आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाउंगी.."मैंने साफ मना कर दी क्योंकि भैया आए हैं और इन्हें छोड़ बिना निमंत्रण कहीं जाने की सोच भी नहीं सकती...

भैया : "वही तो मैं कह रहा हूँ जान..8 बजे तक चली जाना तुम दोनों और 10 तक आ जाना..फिर पूरी रात तुम्हारे नाम जानू..."

मैं चौंक सी गई कि 8-8:30 तक श्याम आते हैं..फिर अगर मैं चोरी से भी करूँगी तो एक बार से ज्यादा नहीं कर पाती...हाँ दिन में कर लूँगी पर पूरी रात...

पूजा : " वॉव मतलब इन दो घंटों में उनका काम कर सुबह तक सूला दोगे फिर उनकी बीवी को रात भर बजाएंगे.."

भैया : " बिल्कुल पूजा जी...और बीच बीच में श्याम की बहन की भी...हा..हा...हा.."

मैं और पूजा उनका प्लान सुन शरमा सी गई कि मेरे पति की मौजूदगी में ही मुझे पेलेंगे...थोड़ी सी डर भी होगी कि अगर उन्हें नशा टूट गई तो....पर डर के बीच सेक्स का एक अलग ही मजा होता है..ये तो आज देख ही ली हूँ...

और केतन से भी कुछ करने का मिल जाएगा..मैं बिना कुछ बोले मुस्कुराए जा रही थी..जिसमें मेरी सहमति साफ झलक रही थी...

तभी पूजा की नजर उसी छत पर घूमी हुई दिखी जहां वो दोनों पति-पत्नी रोज शाम को सेक्स करते हैं...पूजा के साथ मैं भी देखी तो ओहह..वो दोनों स्मूच करने में लीन थे..

हम दोनों की नजर का पीछा भैया भी कर दिए..उनकी नजर पड़ते ही वे चौंकते हुए "ओह साला" कह पड़े..

हम दोनों हंस पड़े उनकी बात पर...शायद ये उनका पहला अवसर था किसी को ऐसे खुले में देखने का...मैं बिना भैया की तरफ देखे बोली,"ये दोनों रोज शाम को छत पर खुले में मस्ती करने आते हैं..."

पूजा : " मस्ती बोले तो खुल्लम खुल्ला चुदाई..कुछ ही देर में दोनों भिड़ जाएंगे..देखते रहिएगा बस.."

तभी भैया को पता नहीं क्या सूझी..एक पल में ही मुझे जकड़े और पलक झपकते ही उनके होंठ मेरे होंठ से चिपक गए..मैं सोच भी नहीं पाई थी कुछ...जिसे देख पूजा खिलखिला कर हँस पड़ी...

मैं छूटना चाहती थी पर कुछ ही पल में शां हो गई और किस का साथ देने लगी..करीब 5 मिनट तक लगातार किस करती रही जिससे मेरी चूत एक बार फिर पानी बहाने लगी थी...

और भैया का लंड तो कब से मेरी चूत पर ठोंकरे मार रहा था...किस के बाद भैया मुझे नीचे बैठने के लिए दबाव देने लगे..मैं बैठती हुई भैया से बोली,"भैया प्लीज, अब कुछ नहीं करो ना...अंदर चलो फिर करना.."

पर भैया कुछ सुने बिना ही अपना देहाती गबरू लण्ड बाहर निकाला और मेरे सिर को पकड़ एक ही बार में पूरा लंड ठूस दिया...मैं उबकाई लेती किसी तरह खुद पर काबू पाई और लंड को धीरे धीरे चूसने लगी...

अगले ही पल पूजा ठीक मेरे बगल में खड़ी हुई...लंड मुंह में रखे ही ऊपर नजर की तो देखी भैया अब पूजा को स्मूच किस करते हुए मेरे मुंह में लंड डाले मजे ले रहे थे...

भैया के हाथ मेरे बालों पर महसूस हुई जो अगले पल ही पकड़ में तब्दील हो गई और फिर चला दिए अपनी रेलगाड़ी नो इंट्री वाले क्षेत्र में...

पूजा के होंठो का रसपान करते हुए मेरे मुँह में लंड अंदर बाहर करने लगे...अगले कुछ ही पल में उनकी स्पीड बढ़ने लगी..मेरी सांस उखड़ने लगी थी पर भैया बिना रूके और तेज शॉट मारने लगे थे...

मेरे मुंह से लार बहने लगी थी जिसमें भैया के रस की दुर्गंध आ रही थी..माथे से पसीना टपकती हुई पूरे चेहरे को भिंगों रही थी..अब मेरी मुँह दुखने लगी थी..मैंने पीछे हटने के लिए हल्की दबाव उनके पैर पर डाली तो अगले ही पल पूजा मेरी बगल में बैठी दिखी...

फिर अचानक से लंड बाहर निकला और सीधा पूजा के गले में उतर गई..जो कि इस हमले से पूरी तरह वाकिफ थी..मैं हांफते हुए नीचे सिर झुकाए मुंह से लार जमीन पर गिरा रही थी..बगल में पूजा गूं-गूं करती हुई लंड के तेज धक्के अपने मुख में ले रही थी...

तभी भैया मेरे बाल पकड़े और लंड की तरफ करते हुए बोले,"अण्डे चूस शाली...इतनी जल्दी कोई राण्ड नहीं थकती.." भैया से गाली सुनते ही मेरी जोश दुगनी हो गई और अगले ही पल मेरी जीभ उनके अण्डों से टकराने लगी...

और 8 इंच में से 5 इंच तक लंड पूजा के मुंह में जा रही थी जिससे हमें भी ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी अण्डे को चूसने में...पूरा लण्ड हम दोनों के थूक-लार से भींगी चमक रही थी...

कुछ देर बाद ही भैया अपने सर को आसमान की तरफ कर चीखने लगे और लंड को बाहर खींच अपने हाथों से पकड़ बारी बारी से हम दोनों के चेहरे को भिंगोने लगे...लंड के गर्म पानी महसूस होते ही हम दोनों भी चीखती हुई झड़ रही थी...

उनका लंड इतनी बार झड़ने के बाद भी इतना वीर्य छोड़ा कि हम दोनों के चेहरे कहीं से खाली नहीं बची थी...झड़ने के बाद भी उनका लंड दूसरे लंड की तरह सिकुड़ा नहीं थी...मैंने लंड को मुंह में भर चंद मिनटों में ही साफ कर दी...

फिर भैया मेरी साड़ी से ही अपना लंड पोंछे और लंड अंदर कर रिलेक्स मूड में दूसरे छत पर नजर दौड़ाए...उनकी हंसी निकल गई वहां देख कर...हम दोनों भी झट से खड़ी हो वीर्य से चमकते चेहरे उस छत की तरफ घुमा दी...

ये क्या...वो दोनों आज चुदाई ना कर आँखें फाड़े हमारी तरफ देखे जा रहे थे..हम तीनों हँस पड़े उसे देख..वो दोनों हमारे चेहरे पर पड़ी ढ़ेर सारी वीर्य देख एक-दूसरे की तरफ आश्चर्य से देखे जा रहा था...शायद उन्हें यकीं नहीं हो रहा था कि इतना पानी कैसे निकला एक लंड से...

तभी पूजा मुझे बांहों में जकड़ी और चेहरे की एक एक वीर्य के कतरे को खाने लगी..वो भी उन दोनों को दिखा दिखा कर...उसके बाद मैं भी पूजा के चेहरे पर पड़ी सारी वीर्य को खा कर चट कर दी...

फिर पूजा उन दोनों की तरफ हाथ हिला कर बॉय की और हम तीनों हँसते हुए नीचे आ गए..फिर फ्रेश हुई साथ ही और शादी में जाने के लिए किचन का सारा काम निपटाने घुस गई...


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--22

किचन का सारा काम निपटा मैं तैयार होने चली गई...पर तभी अचानक से बेल बजी..मैंने घड़ी की तरफ निहारी तो अभी साढ़े सात ही बजे थे..इतनी जल्दी श्याम कैसे आ गए आज...

तब तक पूजा भैया से गप्पे लड़ाना बंद कर गेट खोलने चली गई..मैं भी बाहर निकली पर पूजा को देख आगे बढ़ भैया के साथ लगी चेयर पर बैठ गई..जहाँ पर अभी तक पूजा के साथ बैठे थे...

अंदर आते ही श्याम और भैया ने प्रणाम किए और वहीं साथ में एक कुर्सी पर बैठ गए..मैं उठ के अंदर चली आई..कुछ ही देर बाद श्याम भी कपड़े चेंज करने अंदर आए...

अब मैं तो काफी उलझन में पड़ गई थी..अगर ये नहीं आते तो चली जाती शादी में और बाद में कोई बहाना बना देती कि बगल वाली खींच के ले गई..पर अब तो पूछनी पड़ेगी..

खैर,, पूछ लेती हूँ...अगर हाँ बोले तो ठीक नहीं तो बाद में देखी जाएगी केतन के साथ....मैंने अपने अंदर थोड़ी हिम्मत लाती हुई बोली..

"वो बगल में एक शादी है, तो देखने का मन है..काफी दिन हो गए देखे..."इतनी कह मैं चुप हो गई और उनकी तरफ देखने लगी..वो पहले तो एकटक से देखने लगे फिर मुस्कुराते हुए बोले,"खाना बना ली क्या?"

थोड़ी सी उम्मीद की किरण देख मैं चहकती हुई बोली,"हाँ और खाना फ्रिज में रख दिया है..." वो मेरी बात सुन हँस पड़े जिससे मैं भी हँसे बिना रह ना सकी..

श्याम : "शादी किसकी है?"

श्याम ने अपने नाइट ड्रेस निकालते हुए पूछे जिसे मेरी हलक एक बार फिर सूखने लगी कि कैसा सवाल कर दिए? अब मेरी जगी हुई उम्मीद की किरण पर एक बार फिर बादल छाने लगी थी क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलना चाहती थी...

"जी....वो...आगे वाले मुहल्ले में किसी लड़की की है...नाम नहीं पता.."मैं उन्हें देखती हुई बोल दी...जिसे सुनते ही उनका चेहरा आश्चर्य से भर मुझे घूरने लगा...

श्याम : "बिल्कुल नहीं जाना...जिसे तुम जानती तक नहीं और कोई निमंत्रण नहीं है...और ना ही कोई पड़ोसी दोस्त के साथ जाओगी...तो कैसे सोच ली कि जाने के लिए हाँ कर दूँगा मैं...अगर कोई वहाँ पूछ दिया कि कौन हो तुम तो क्या जवाब दोगी...ख्वामखाह बदनाम हो जाओगी...समझी?"

उन्होंने साफ मना कर दिया...थोड़ी सी दिक्कत जरूर हुई पर वो सच ही कह रही थी..मैं ज्यादा जिद नहीं करना चाहती थी...अगर निमंत्रण रहती तो करती भी...और मैं कैसे कहती कि केतन बुलाया था....

"खाना लगा दूँ?" मैं अब जाने की प्रोग्राम कैंसिल करती हुई पूछी..जिसे सुन वो मेरे पास आते हुए गले से लगा लिए और प्यार से पीठ सहलाने लगे...

"सीता, मुझे कोई दिक्कत नहीं होती अगर कोई निमंत्रण रहती तो पर ऐसे जाना मुझे ठीक नहीं लग रहा.."श्याम मुझे शायद पूरी तसल्ली दिलाने के लिए अपने दिल की बात कह रहे थे...

मैं उनकी बात सुन धीरे से सिर पीछे की और मुस्कुराते होंठ उनके होंठ पर रख दी..किस करने के बाद बोली,"मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूँ जी...मैं आपसे बहुत प्रेम करती हूँ और आप भी मुझे हर वक्त खुश देखने की कोशिश करते हैं..तो आप मना किए हैं तो उसकी वजह मैं समझ सकती हूँ.."

मेरी बात सुनते ही उन्होंने I Love You कहते हुए जोर से अपनी बाँहों में भींच लिए..फिर मुझे उसी तरह चिपकाए हुए पूछे,"जान, आपके भैया कुछ लेते हैं कि नहीं...आज पहली बार आए हैं तो कुछ पार्टी तो होनी चाहिए ना..."

मैं उनकी बात सुनते ही चौंक पड़ी...कहाँ भैया इन्हें बेहोश करने का प्लान बना रहे थे, पर ये तो खुद ही फंसना चाहते हैं...ये सोचते हुए मैं मुस्कुराती हुई थोड़ी पीछे हुई....

" हाँ, लेते हैं पर कभी कभी..."मैं हँसती हुई बोली जिसे सुनते ही श्याम चहकते हुए मुझे अपने से अलग करते हुए बोले,"थोड़ी देर रूक जाओ फिर खाना लगाना...बाहर से कुछ लेकर आ रहे हैं.."

और श्याम हँसते हुए बाहर निकल गए...उनसे ज्यादा हँसी तो मेरी निकल रही थी कि ये पीने की खुशी में हँस रहे हैं या अपनी बीवी की चुदाई में साथ देने के लिए....

कुछ देर में ही श्याम और भैया बाहर निकल गए...करीब आधे घंटे बाद दोनों हँसते हुए आ गए थे...फिर बरामदे में ही बैठ गए दोनों...

मैं उनका खाना दे आई...वे पार्टी के लिए सारा समान दारू,नमकीन,सिगरेट आदि रख दिए बगल में..खाना मिलते ही पहले वे खाना शुरू कर दिए....

करीब आधा खाना खाने के बाद उन्होंने अपनी मिनी पार्टी शुरू कर दी..2-3 पैग चलने के बाद उनका खाने की स्पीड धीमी और बात करने की गति तेज हो गई..

बाद में थोड़ी और खाना की मांग किए..खाना देने पहुँची तो देखी बोतल अभी आधी भी खत्म नहीं हुई थी जबकि एक छोटी बोतल अभी बंद ही थी...

और दोनों के बैठे करीब 1:30 घंटे हो चुके थे...वहाँ से आने के बाद मैं सीधी पूजा के कमरे में गई जो अंदर कुछ पढ़ रही थी..मुझे देखते ही पूजा मुस्कुरा दी...

"खाना नहीं है क्या?" मैं पूजा के बगल में लेटती हुई पूछी..पूजा के हाथ में कोई मैगजीन थी जिसे वो दरकिनार करती हुई बोली,"हाँ ,भैया लोग खा लिए?"

"उंहहहु.. उनका अभी 2 घंटा और लगेगा..सब कुछ दे दी, अपना खाते रहेंगे..चलो, हम लोग भी खाना खा कर कुछ आराम कर लेते हैं.."मैं बाहर के हालात बताती हुई बोली..

मेरी बात सुन पूजा मुस्कुराई और उठती हुई चलने की हाँ कह दी..हम दोनों खाना खा अपने अपने रूम में आ आराम करने लगी..

अभी कुछ ही देर हुई थी कि बाहर से श्याम की लड़खड़ाती आवाज हमें पुकारने लगी..मैं उठी और बाहर चली आई...

मुझे देखते ही श्याम नशे में मेरी तरफ देख मुस्कुराते हुए बोले,"बैठो इधर.." श्याम और भैया आमने-सामने बैठे थे और मुझे अपने दाएं तरफ बैठने का इशारा किए..

मै असमंजस में पड़ी चुपचाप बैठ गई और उनके आगे की बात का इंतजार करने लगी...तब श्याम अपने सामने रखे तीन ग्लास में दारू उड़ेलने लगे...शायद ये पहले ही एक ग्लास ले आए थे...

पर उससे ज्यादा मैं ये सोच में चिंतित थी कि तीन क्यों? पीने वाले तो दो ही हैं..कीं ये मेरे लिए तो.....उफ्फ्फ.. मैं ये सोच के ही सिहर गई...

श्याम : "सीता, आपके भाई साहब की ये शिकायत है कि मैं आपको यहाँ शहर में ले तो आया हूँ, पर यहां के रहन सहन की छूट नहीं दे रहा हूँ तुम्हे...अब ये ग्लास उठाओ और भैया को बता दो कि मैं तुम्हें किसी भी चीज पर पाबंदी नहीं लगा रहा हूँ..."

मैं उनकी बात सुन आश्चर्य से कभी श्याम की तरफ तो कभी भैया की ओर देखे जा रही थी..कुछ समझ में नहीं आ रही थी..

"नहीं भैया, मुझे किसी तरह की पाबंदी नहीं है.."मैं अपने भैया की तरफ मुड़ बोली..

भैया : "जानता हूँ सीता, पर मुझे देखना है...यहाँ शहर में तो सब लड़की -औरतें ऐसी पार्टी अक्सर जाती हैं जहां दारू-शराब चलती है और वो इसका मजे से लुत्फ उठाती है...पर तुम तो आज तक तो वही गांव वाली ही सीता हो..."

श्याम :" सुन ली ना...अब जल्दी से उठाओ वर्ना कड़वी हो जाएगी ये...वैसे मैं भी चाहता हूँ ताकि कभी मन हुआ तो तुम्हारे साथ भी सर्व कर लूंगा...तुम तो जानती हो मैं बाहर लेता नहीं..कभी कभार दोस्त के साथ ही हो जाता है पर घर पर ही, बाहर नहीं...और अब घर पर किसी को बुलाना मुझे ठीक नहीं लगता क्योंकि मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ..प्लीज.."

अब मैं तो और सोच में पड़ गई थी क्या कहूँ...इनकी बात ठीक थी..घर पर पी के सो जाते हैं और वो भी कभी कभार ही..और मेरी सहमति के बाद ही....पर आज तक पीना तो दूर, सूंघी भी नहीं थी मैंने...मैं अब राजी तो थी पर जो समस्या थी उसे सामने लाती हुई बोली,"पर आज तक कभी पी नहीं तो.."

मैं इतनी ही बोल पाई कि दोनों उछलते हुए अपने अपने चेहरे मेरे सामने लाते हुए बोले," अरे...कुछ नहीं होता...बस पहली बार थोड़ी लगेगी फिर सब ठीक और मस्ती ही मस्ती..." दोनों एक साथ हाँ कहते हुए बोल पड़े...

तभी भैया मेरे कानों में धीमे से बोले,"बिल्कुल पहली चुदाई जैसी..." और पीछे हट मुस्कुरा दिए..जिससे मैं भी मुस्कुरा दी..श्याम भैया की बात नहीं सुन पाए थे...मैं एक बार फिर उन दोनों की तरफ देखी...

तभी मेरी नजर सामने पड़ी जहाँ परदे की ओट से पूजा की बड़ी आँखें चमक रही थी..अचानक से पूजा का पूरा चेहरा सामने आया और मुझे पीने की हाँ का इशारा कर ओझल हो गई फिर परदे की ओट में..

मैं अंदर ही अंदर काफी खुश थी अपनी इस नई तजुरबे को सोचकर...फिर मैंने हाथ को धीमे से ग्लास की तरफ बढ़ा दी..."ये हुई ना बात..."कह दोनों भी अपने-अपने ग्लास उठा चियर्स करने लगे...

वो दोनों को एक बार फिर पीने का इशारा किए जिसे देख मैं ग्लास अपने होंठ तक ले गई...पर गंध लगते ही अगले ही पल ग्लास एक बार फिर नीचे आ गई...

भैया : " साँस मत लो सीता,, और आँखें बंद कर जय माता दी कह एक बार में ही खत्म कर दो...दुबारा नहीं होंठ पर लगना चाहिए जूठी ग्लास..."

श्याम : " बिल्कुल करेक्ट...शुरू करो सीता डॉर्लिंग...." श्याम की बात खत्म होते ही भैया भी "हाँ डॉर्लिंग" कह दिए...जिस पर श्याम ध्यान नहीं दिए..

मैं मुस्कुराई और मन ही मन जय माता दी बोलती हुई साँस पर काबू करती हुई ग्लास को अपने लबों पर रखते हुए पूरी ग्लास खाली कर दी...

जिसे देख दोनों खुशी से झूम उठे और थोड़ी सी नमकीन मेरी तरफ बढ़ा दिए...मैं कड़वी से मुँह बिचकाती नमकीन ली और झट से अंदर कर ली जिससे थोड़ी राहत मिली पर अंदर से काफी जलन हो रही थी...

फिर वो दोनों भी अपने - 2 ग्लास खाली कर दिए...मेरी नजर परदे की तरफ गई जहाँ से पूजा अपने अँगूठे दिखाती हुई शाबासी दे रही थी..

कुछ देर बैठ हम तीनों कुछ इधर उधर की बात किए...फिर मेरे अंदर अभी भी जलन महसूस हो रही थी पर कम थी...सोची आराम कर लेती हूँ तो ठीक हो जाएगी...यही सोच जैसे ही मैं उठनी चाही कि श्याम मुझे कस के पकड़ लिए...

श्याम : " अब कहाँ चली जान...पहले खत्म तो कर लो, अभी तो शुरू ही हुई है आपके साथ...और हाँ अब पैग आप बनाएगी.."

मैं श्याम की बात सुन चौंक पड़ी...मतलब अभी से बैठ के अंत तक पीनी है...मर गई...

भैया : " कुछ नहीं होगा सीता,, अब कड़वी नहीं लगेगी और मजा तो अब आएगा...जब कोई लड़की साथ होती है तो पीने का मजा ही अलग है.."

भैया की बात सुन मैं शर्मा गई कि श्याम के सामने ही मुझे ऐसी बात कह रहे हैं...क्या सोचेंगे ये..पर मेरी सोच के विपरित श्याम बोले...

श्याम : "बिल्कुल सही...और हाँ सीता., अब तुम ये बिल्कुल भूल जाओ कि मैं तुम्हारा पति और ये भैया हैं..बस एक दोस्त की तरह मजे लो और दो..."

फिर श्याम बोतल और ग्लास मेरे सामने रख दिए...मैं सोचने लगी कि क्या करूँ? फिर अंदर से आवाज आई,"सीता, ऐसे मौके मत गंवा..जो होगा देखा जाएगा कल..पर आज की रात शादी में मिलने वाली मजे के बदले घर पर मजा लेने का मौका मिल रहा है तो इसे हाथ से जाने मत दे.."

और फिर मैं बोतल उठाई और तीनों ग्लास में डालने लगी...मदद के ख्याल से भैया बता दिए कि कितनी मात्रा में डालनी है..और तब चल पड़ा रात को रंगीन करने का सफर...

एक पर एक पैग चलने लगा और मैं इन मस्ती की दुनिया में डूबती जा रही थी...जिससे आज तक मैं बेखबर थी और पहली ही दिन इतनी रंगीन होगी, ये सोच भी नहीं सकती थी...

तभी अचानक से मुझे क्या सूझी, मैं उठी और म्यूजिक प्लेयर ऑन करती हुई सेक्सी गानों से भरपूर सीडी प्लेयर के अंदर डाल दी और वापस अपनी जगह पर बैठ गई...

आवाज इतनी कम थी जिससे बाहर नहीं जा पा रही थी और हम तीनों को आसानी से सुनाई पड़ रही थी..वो दोनों वाह कहते हुए गानों की धुन पर झुमते पार्टी को बढ़ाने लगे...मैं भी झूमनी शुरू कर दी थी...

अचानक से मुझे कुछ ज्यादा गर्मी महसूस हुई और ये गर्मी मेरे होंठो से बाहर आ गई,"श्याम, काफी गर्मी लग रही है..." और मैंने अपने साड़ी के पल्लू को जमीन पर रख दी बिना उनके जवाब का इंतजार किए..

जाम का शुरूर अब मेरे ऊपर हावी हो चुकी थी जिससे सारी शर्म-ह्या भूल गई थी...भैया की कंट्रोल पावर काफी थी जिससे वो मेरी तरफ देखने लगे जबकि श्याम मेरी बात सुने भी या नहीं पता नहीं..वो मस्ती में झूमे जा रहे थे...मैं ज्यादा नहीं ली थी तो अब तक सिर्फ झूम रही थी, बेहोश नहीं हुई थी...

भैया : "इनरवियर पहनी है ना तो इसे भी उतार तो ना..क्यों श्याम? " श्याम अब बेहोश होते नजर आ रहे थे..भैया क्या बोले, वो सुने या नहीं पता नहीं पर हाँ जरूर कर दिए...

अगले ही पल मैं सिर्फ पेन्टी और ब्रॉ में दो मर्दो के बीच नशे में झूमने लगी..श्याम की आँखें एक बार खुली और मुझे ऐसी अवस्था में देख हल्के से हँसे...फिर वो ठीक से देखने की कोशिश करते तब तक उनकी आँखों पर शराब ने परदा डाल दिया...

तब मैंने अगली पैग बनाई..भैया जैसे ही ग्ललास उठाने आगे हाथ किए मैं रोक दी..और उनका ग्लास उठा मैं खिसक के उनकी जांघों पर बैठ गई और अपनी नशीली आँखों से देख उनको पिलाने लगी...

भैया भी मेरी इस अदा पर हँस दिए और पूरी ग्लास खाली कर दिए..अंत में मेरी उभारों पर श्याम की तरफ देख किस कर दिए जिससे मैं सिसक पड़ी और किसी तरह उठ गई श्याम को पिलाने...

ठीक इसी तरह ग्लास लिए श्याम की जांघ पर बैठी और उन्हें पिलाने लगी..श्याम होश में थे नहीं पर वाह सीता कहते हुए गटकने लगे..पूरी ग्लास खाली होते ही मैंने अपने होंठ उनके होंठ पर रख किस करने लगी...

किस रूकते ही मेरे मन में क्या आई कि अचानक से बोल पड़ी,"जानू, इस मस्ती की महफिल में अगर आप पूजा को भी शामिल कर लें तो वो बहुत खुश होगी.."

मेरी आवाज सुनते ही वो एकाएक शांत हो गए, मानों सारा नशा चूर हो गया हो..वो एकटक से मुझे घूरने लगे...

इधर मेरे साथ-2 भैया का नशा टूट चुका था...मैं खुद पर काफी शर्मिंदगी महसूस कर रही थी कि ये क्या बोल दी..इनको बुरा लग गया, पता नहीं क्या कहेंगे...

श्याम अपनी लड़खड़ाती आवाज में बोले,"उतरोओओऽ नीऽचे....."

मैं डर के मारे नीचे उतर गई और सिर नीचे कर बैठ गई...भैया भी ऐसी सिचुएशन देख उठे और बाथरूम की तरफ बढ़ गए... 


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--23

मैं बैठी मन ही मन खुद को कोसे जा रही थी...कितना मजा आ रहा था हम तीनों को...क्या जरूरत थी पूजा के बारे में बोलने की...यही सब सोचते मेरी आँखों में आँसूं उतर आई और बाहर निकालती सिसकने लगी...

कुछ पल रोने के बाद जब आँखें ऊपर उठाई तो ये क्या?श्याम जा चुके थे...और भैया अभी भी बाथरूम में ही थे..मैं तेजी से उठी और माफी मांगने के ख्याल से बेडरूम की तरफ दौड़ पड़ी...

अंदर घुसते ही एक और शॉक सगी...श्याम नहीं थे...उफ्फ...क्या हो रहा है मेरे साथ...एक बार फिर मैं वहीं खड़ी दिवाल के सहारे रोने लग गई...फिर ढ़ूँढ़ने के ख्याल से वापस छत पर जाने की सोची शायद वहीं होंगे...

बाहर निकल गेट की तरफ बढ़ ही रही थी अचानक पूजा के रूम से श्याम की हल्की आवाज सुनाई दी..जिससे मेरे पांव ठिठक कर रूक गए...मेरी नजर गेट के लॉकर पर पड़ी जो अभी भी बंद थी..

मेरे चेहरे पर हल्की सुकून की लकीरें उभर आई और अंदर खुशी...मतलब श्याम पूजा को बुलाने गए हैं..मेरे कदम पूजा के कमरे की ओर बढ़ने लगी...और गेट पर रूक अंदर के नजारे देखने लगी...

पूजा : "सच भैया, मैं बिल्कुल नाराज नहीं हूँ..और मैं लेती भी नहीं सो प्लीज आप लोग इंज्वाय करो..मैं नाराज नहीं होऊँगी..प्रॉमिस भैया..."

श्याम : "जानता हूँ पूजा पर अगर नाराज नहीं हो तो चलो बाहर..जस्ट फ्रेंड...और सीता भी तो पहली बार ली कि नहीं आज...और यहाँ जब फ्रेंड बनेंगे तो उनके साथ पार्टी में कोई शर्मिंदगी नहीं झेलनी होगी ऐसी बात का...चलो उठो माई बेबी.."

पूजा कुछ सोचने लगी, जबकि श्याम बार बार रिक्वेस्ट किए जा रहे थे..और श्याम के इस रवैये को देख मेरी दिल भर आई कि श्याम नाराज नहीं हैं...

पूजा : "ठीक है भैया, मैं पार्टी ज्वाइन करूँगी पर आज नहीं..किसी और दिन..आज वैसे भी पार्टी इंड होने वाली होगी आज की..." और पूजा पर हल्की मुस्कान फैल गई कहते कहते...

श्याम भी उसकी हामी से मुस्कुराने लगे और उसे देखने लगे..अचानक वो आगे बढ़े और बोले,"तू ऐसे नहीं मानेगी...." और फिर..श्याम अपना एक हाथ पूजा के गर्दन के नीचे,जबकि दुसरा हाथ जांघों के नीचे डाले और हँसते हुए झटके से गोद में उठा लिए...

पूजा हँसते हुए चिल्ला पड़ी,"आहहह भैया...प्लीज नीचे करो..चलती हूँ...." पर श्याम बिना कुछ सुने बाहर की तरफ मुड़ गए..पूजा गोद में छटपटा रही थी और हँस भी रही थी..जिसे देख मेरी भी हँसी निकल पड़ी और वापस जल्दी से अपने जगह पर आ कर बैठ गई...

पूजा की नजर जैसे ही मेरी नजर से टकराई कि शर्म से उसकी आँखें बंद हो गई..अजीब बात है...ब्रॉ -पेन्टी में मैं बैठी हूँ और शर्मा वो रही है.. खैर, बात तो कुछ और थी जो मैं अच्छी तरह से जानती थी...

तब तक भैया बाथरूम से निकल चुके थे और उनकी बाँछें पूजा को देखते ही खिल पड़ी..वो आते ही पूजा के बगल में बैठते हुए चुपके से उसकी चुची मसल दिए जिससे पूजा चौंक पड़ी..

श्याम के बैठे दो मिनट भी नहीं हुए कि वो एक बार फिर आँखें झलफलाने लगी उनकी..हम दोनों पर भी खुमारी छाई थी पर फिर भी होश में थी...तभी श्याम अपने कांपते हाथों से बोतल लिए और एक सिंगल पैग बनाने लगे...

श्याम : "हम्म्म...सीता डॉर्लिंग..वो क्या है ना कि घर की पार्टी में मैं घर के मेम्बर को ही भूल गया था..तुम अगर याद नहीं दिलाती तो कसम से कल मैं खुद को काफी कोसता...थैंक्यू जान.."

मैं उनकी बात पर पूजा की तरफ देख मुस्कुरा पड़ी...पूजा की नजर तो श्याम के हाथों में ग्लास पर ही जमी थी..शाली, मन तो इसकी भी है पर क्या करती बेचारी..किसी ने ऑफर ही नहीं किया अब तक..

श्याम : "पूजा, लोऽ...और सीता की तरह जय माता दी कह अंदर कर लो एक ही बार में...नो कमेंट...चुपचाप.." श्याम ग्लास पूजा की तरफ बढ़ाते हुए बोले...

पूजा की नजर हम पर आ टिकी, फिर मैंने लेने की इशारा की तो वो भैया की तरफ देखी..हे राम! ये तो अपना लंड दबा रहे थे खुलेआम...पूजा से नजर मिलते ही बोले," पी लो डियर...बाद में ये भी पीना है.." और वो अपने लंड की तरफ इशारा कर दिए...

जिसे सुनते ही श्याम चौंकते हुओ भैया की तरफ देखते हुए "ऐंऽऽऽ "कह पड़े.. भैया तेजी से छोटी बोतल श्याम के सामने करते हुए बोले,"ये जनाब..आप तो कुछ और ही समझ गए..."

जिसे सुनते ही श्याम हँस पड़े और बोले,"हम्म्म, देखिए जनाब..वो चढ़ने के बाद पता नहीं ऐसे गंदे ख्याल कैसे आ जाते हैं..पर डोंट टेक सिरीयस...चियर्स पूजा.."अबकी बार ग्लास पूजा के हाथ में थी और हम तीनों की नजरें पूजा पर...

फिर तो वही होना था...पूजा सारा ग्लास खाली कर दी....और सब ताली बजा पूजा का स्वागत कर गानें की धुन पर झूमने लगे..अगले कुछ ही पल में छोटी बोतल की सील टूटी और फिर चली एक रंगीन रात का सफर...

पर अब इस सफर में सिर्फ श्याम ही थे...भैया के आज्ञानुसार बड़ी 2 पैग श्याम को पिलाती तो एक छोटी पैक पूजा की तरफ कर देती..पूजा तुरंत समझ
गई कि क्या होने वाला है अब...वो बस मुस्कुरा के रह गई...

अंत होते होते श्याम चारों खाने चित्त वहीं पर ढ़ेर हो गए...जबकि भैया की आवाजें लड़खड़ा रही थी पर होश में थे कि क्या कहना है और क्या करना है...मैं भी टुल्ल थी, आँखें नशे में कभी-2 बंद हो जाती थी पर फिर जोर से खोल कर जगने की कोशिश करती...जबकि पूजा तो बिल्कुल होश में थी..बस उस पर हल्की नशा थी..

श्याम के बेहोश होते ही भैया पूजा पर कूद गए और उसे वहीं जमीन पर लिटा किस करने लगे और चुची मसलने लगे...शायद अब वो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे..अगले ही पल वो पूजा की समीज में अंदर हाथ घुसाकर चुची पकड़ने की कोशिश करने लगे...

पूजा चिल्लाने लगी कि फट जाएगी...मैं भी देखी तो वाकई काफी वहशी लग रहे थे भैया...मैं तेजी से उनके पास गई और उन्हें पकड़ती हुई बोली,"भैया, रूक जाओ ना...वो निकाल रही है कपड़े...तब तक इनको अंदर सुला आते हैं..."

मेरी बात सुनते ही भैया अपने दांत जोर से पूजा की चुची पर लगा दिए जिससे पूजा चीख पड़ी... और फिर उठते हुए बोले," जल्दी खोल शाली वर्ना बाद में कुछ मत कहना..." जिसे सुन पूजा मुँह बिचकाती हुई उठी और समीज सलवार खोलने लगी...

तब तक मैंने और भैया ने किसी तरह गिरते पड़ते श्याम को बेडरूम में लाए और उन्हें बेड पर पटक दिए...मैं एक बार भैया की तरफ देख हंस दी, फिर बाहर की तरफ चल दी कि अब भरपूर मजे लूँगी...

पर जैसे ही मेरी पहली कदम बढ़ी कि भैया के हाथ तेजी से मेरी ब्रॉ पर पड़ी और अगले ही पल ब्रॉ दो टुकड़े में बँट जमीन पर पड़ी थी...जितनी दिवानी मैं भैया से चुदाई की थी, उतनी ही उनके दरिंदगी की भी...

और फिर भैया कस के जकड़ते हुए अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए...मैं तुरंत ही अपनी सुधि खो बैठी और किस का साथ देने लगी...किस करते हुए मेरी आँखें बंद हो गई....जब काफी देर तक किस करने के बाद किस रूकी तो ये क्या? मैं श्याम के बगल में नंगी लेटी थी...पेंटी कब फटी, पता नहीं..

और भैया अपने सारे कपड़े जल्दी-2 खोल रहे थे...मैं एक बार सिहर गई कि अगर श्याम की नींद खुल गई तो....भैया जब पूरे नंगे हो गए तो नीचे झुक मेरी चुची चूसने और मसलने लगे...मैं सिसक पड़ी दर्द और मस्ती में...

किसी तरह अपनी सिसक को दबाती हुई बोली," भैया प्लीज, यहाँ नहीं..अगर ये जग गए तो..." मैंने अपनी बातें अधूरी छोड़ दी..भैया मेरी बात सुनते ही अपने मुँह ऊपर किए और बोले...

भैया : "हम्म्मऽ तो डर लग रहा है..."मैं उनकी बात सुन श्याम की तरफ देख डर से भयभीत चेहरे को हाँ में हिला दी...

भैया : "तो सुन, अगर मजे लेने हैं तो ये डर-वर निकाल दे अपनी जेहन से..क्योंकि इस गांड़ू की सुबह से पहले नशे फटने की उम्मीद नहीं...और आज तुम मेरी बहन नहीं, सिर्फ एक रंडी हो और मैं तेरा यार..समझी कुछ..अब चुपचाप मजे ले..."

भैया की बात सुनते ही मैं मुस्कुरा दी...उनकी बात मेरे दिल में चुभने की बजाय., मस्ती की लहरें जगा दी थी..तभी पूजा भी अंदर भैया से सटते हुई बोली,"और मैं...?" भैया पूजा को देख अपने लंड सहलाते हुए बोले," तुम इसकी कुतिया हो जानेमन...मेरी तो रंडी बनने लायक भी नहीं हो..." जिसे सुन हम तीनों हंस पड़े..

मेरी हंसी अभी रूकी भी नहीं कि भैया अपने तने हुए लंड का मोटा सुपाड़ा मेरे मुँह में धकेल दिए...मैं चौंकी फिर सहज होती हुई अंदर कर ली...और ऊपर पूजा को जकड़ते हुए उसके होंठ पर टूट पड़े....

कुछ ही पलों में मैं जोर जोर से चुप्पे लगाने लगी जिससे भैया तड़प उठे और चीखते हुए गंदी-2 गालियाँ बरसाने लगे...

भैया : "आहहहहह मेरी रंडीईईईईईई..शाबासऽऽ ़ चूऊंऊऊऊऊससस छिनाललललऽ अपने पति को छोड़ मेरा लंड चूससस...आज तो खूब चोदूंगा तेरी चूत...ऐसी हालत करूंगा कि कुत्ते भी तेरी चूत देख हंस पड़ेगे....."
और ना जाने क्या क्या बक रहे थे...

कुछ ही पल में हम सब पसीने से तर बतर हो गए और भैया अकड़ने लगे...और फिर वही हुआ...झड़ने के कगार पर पहुँचते ही भैया ने अपना लंड तेजी से बाहर खींच लिए...पता नहीं क्यों? मैं रस पीना चाहती थी पर ऐन वक्त पर.....

और फिर बाहर निकाल सीधा मेरे चेहरे पर अपनी पिचकारी छोड़ने लगे...मैं आँखें बंद कर ली और मुस्काती हुई हर झटके से पड़ रही पानी का लुत्फ लेने लगी...हल्की चोट भी लग रही थी जो रोमांच पैदा कर रही थी...ऐसा नहीं था कि मैं गर्म नहीं हुई...मेरी चूत तो बाहर से ही कई दफा नदी बहा चुकी थी...

अब रस आनी बंद हो गई थी...तभी भैया की आवाज सुनाई पड़ी,"चल कुतिया., अपने मालिक का पानी चाट के खा जल्दी इसके चेहरे से..." और तभी पूजा की जीभ मेरे चेहरे पर फिसलने लगी...वो चटकारे लेती खाई जा रही थी...मैं आँखें बंद किए चटवा रही थी...

पूरी साफ करने के बाद पूजा एक किस दी जिसमें वीर्य की दुर्गंध आ रही थी, फिर उठ गई..तभी भैया ने उसे अगली हुक्म दे दी,"उस मादरचोद का भी चेहरा साफ कर दे छिनाल..." मैं सुनी तो होश ही उड़ गई...क्या श्याम पर भी...

मैं तेजी से आँखें खोली तो उफ्फ....श्याम का चोहरा भी पूरी तरह वीर्य से नहाया थी..मेरी तो हँसी निकल गई..पूजा एकटक भैया को देखे जा रही थी कि तभी चटाकऽऽऽ भैया ने उसकी चुची पर जोर से थप्पड़ जमाते उसे खींच कर श्याम के चेहरे के पास कर दिए...

बेचारी दर्द से कुलबुला गई पर क्या करती...अपनी जीभ अपने प्यारे भैया के चेहरे पर रख दी...और वीर्य खाने लगी चाट-2 के...

पूजा श्याम के चेहरे पर पड़ी एक-एक बूँद साफ कर रही थी और डर भी रही थी...तभी अचानक से मेरी बुर पर कुछ खुरदुरी चीज महसूस हुई..नीचे देखी तो आउच्चच...भैया मेरी बुर पर दांत गड़ा दिए जिससे मैं तड़प उठी...

भैया तेजी से अपनी जीभ अंदर बाहर करनी शुरू कर दी थी जिससे मैं मचलती हुई उन्हें कभी रोकने की कोशिश करती तो कभी अंदर कर रही थी...अजीब हालात बन गई थी धोबी के कुत्ते की तरह..ना घर ना घाट के...

"आहहह सीताऽ" ये आवाज सुनते ही मैं और भैया एक साथ रूक गए और सांसें रोकती हुई घूमी...आवाजें श्याम की थी जो शायद पूजा की जीभ की गर्मी से जोश में आ गए थे...पूजा हक्की बक्की रोनी सूरत बनाई पसीने से तर बतर हो गई थी...

भैया हल्के से ऊपर उठे और श्याम को गौर से देखने लगे...हमारी नजर भी वहीं जम गई..अगर श्याम जग गए तो आज तो गई काम से...थोड़ी देर बाद श्याम सीताऽ..सीताऽ...कह फिर सो गए...

हम्म्म...थोड़ी राहत मिली कि वो होश में नहीं आए थे...बस शरीर की गर्मी मिलते ही वो जोश में आ गए थे और मुझे समझ नाम लेने लग गए..तभी भैया अपना हाथ बढ़ाकर श्याम की निक्कर एक झटके में नीचे कर दिए...

ओह गॉड...भैया की हिम्मत को देख दंग रह गई...पूजा की नजर श्याम के लंड पर पड़ते ही वो शर्म से अपना चेहरा ढ़ँक ली...पूरा तना हुआ आसमान की तरफ खड़ा था...मतलब जो अनुमान लगाई थी वो बिल्कुल सही थी मेरी...

तभी भैया पूजा का हाथ पकड़े और श्याम के लंड पर दबाते हुए बोले,"देख शाली, ये नशे में है...तुम चुपचाप इसके मजे ले लो..ऐसा मौका शायद फिर मिलेगा.." और फिर पूजा के बाल पकड़ श्याम के लंड पर झुका दिए..

पूजा बिल्कुल नहीं करना चाहती थी और वो ऊपर उठने के लिए जोर लगा रही थी..पर शराब की नशे और लंड की गंध पाते ही पूजा टूट कर बिखड़ गई...अगले पल ही श्याम का लंड अपनी प्यारी बहनिया के मुँह में था और अपने प्यारे भैया की जीभ पुन: मेरी चूत पर चिपक गई थी...

कुछ ही देर बाद कमरे में मेरी और भैया की सेक्सी तरंगे गूँजने लगी और पूजा पूरे जोर से अपने भैया का लंड चूसे जा रही थी...तभी भैया एक हाथ बढ़ा कुतिया की तरह झुकी पूजा की बुर पर रख दिए जो पहले से पानी छोड़ रही थी...

भैया की उंगली पूजा की बूर में शायद घुस गई थी., तभी तो पूजा बिल्ली की तरह उछल पड़ी..अब एक पल भी बर्दाश्त करना संभव नहीं था..मैं लगभग रोती हुई भैया से बोली," प्लीज, अब मत तरपाओ भैया..मरररर जाऊंगीईऽ"

जिसे सुनते ही भैया आँख लाल पीली करते बोले,"मादरचोद, मैं किसी रंडी का भाई नहीं हूँ...बोल अपनी कुतिया रंडी को चोदो..तब पेलूंगा हरामी..."

मरती क्या ना करती...बिल्कुल हू-बहू डॉयलाग बोल दी...जिसे सुनते ही भैया ऊपर मुस्काते हुए आए और अपना लंड मेरी बुर पर घिसने लगे...और लंड चूसने में लगी पूजा को घूरते बोले,"ऐ हरमिन, ये क्या रात भर चूसती ही रहेगी..नशे में है बिना चूत मिले नहीं झड़ेगा वो...चल उठ और चढ़ के चोद अपने यार को....

एक बारगी तो पूजा सहमी, फिर होंठो पर मुस्कान लाती उठ गई..शायद अब पूजा को भी मजा आने लगा था..वो दोनों तरफ पैर करके श्याम के लंड के सामने चूत कर नीचे बैठने लगी..मेरे हाथ अचानक श्याम के लंड की जड़ को पकड़ लिए ताकि पूजा इधर-उधर ना हो जाए...

भैया के 1-2-3 करते ही पूजा सीधी श्याम के लंड को जड़ तक निगल गई और ठीक उसी पल भैया भी अपना रामपुरी पूरी की पूरी मेरी नाजुक बूर में उतार दिए...मेरी और पूजा की एक साथ आहहह निकल पड़ी..

फिर चल पड़ा असली पार्टी का दौर जिसे हम सब शाम से इंतजार कर रहे थे...ये तो जानती थी कि आज की रात रंगीन होगी पर ऐसी हसीन होगी सोची भी नहीं थी...

भैया दनादन पेले जा रहे थे और मेरी बूर की धज्जियां उड़ाए जा रहे थे जबकि भैया का नाम सुनते ही बिदकने वाली पूजा मस्ती से कूद-2 कर श्याम का लंड अपने अंदर लिए जा रही थी...

समय ज्यों-2 बढ़ती जा रही थी, हम सब की गूँज उसी अनुपात में बढ़ती जा रही थी...भैया बीच बीच में कभी पूजा की तो कभी मेरी चुची पर चपत लगा रहे थे...एक बेड पर हम पति पत्नी दोनों चुद रहे थे...फर्क सिर्फ इतनी थी कि मुझे गैर मर्द मर्जी से चोद रहे थे जबकि मेरे पति को एक लड़की बेहोशी की हालत में चोद रही थी....

आखिर वो पल आ ही गई...इस तूफान की अंत घड़ी आ गई जो कि करीब आधे घंटे से हम सब इसका इंतजार कर रहे थे...एक तेज चीख गूँजी कमरे में जिसमे भैया,मेरी और पूजा की मिली जुली आवाज थी और एक साथ झड़ने लग गए...

श्याम भी बेहोशी की हालत में भी खुद पर काबू नहीं पा सके और आहहहह सीता कहते हुए पूजा की बूर में अपना पानी डालने लगे...जो पूरी तरह बूर से वापस बेड पर गिर रही थी..जबकि मेरी बूर में पूरी की पूरी बोतल जा रही थी...

और इस अनोखे पल की घड़ी रूकते ही भैया मेरे शरीर पर लद गए जबकि पूजा श्याम के शरीर पर...अब उसके चेहरे पर डर बिल्कुल नहीं थी..थी तो
बस असीम सुख वो भी चुदाई वाली....

हम दोनों की नजर एक बार मिली जिसमें पूजा थैंक्स बोलती नजर आई और फिर अपनी-2 आँखें बंद कर सुस्ताने लगी...


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--24

अभी दस मिनट भी नहीं बीती कि भैया का लंड एक बार फिर से अंगराई लेता हुआ उठ गया...मेरी बूर पर उनके लंड की दस्तक हुई तो मैंने अपनी आँखें खोल दी...भैया भी सर ऊपर कर देख मुस्कुराते हुए बोले,"आज बिना कबाड़ा किए ये भी नहीं रूकने वाला है...."

और भैया उठते हुए पूजा की बाँह पकड़ अपनी तरफ खींच लिए और उसकी चूत में उंगली घुसाते बोले," अब तुम अपने प्राण प्रिय का लंड चूस,,तब तक मैं इस पूजा की मां चोदता हूँ..." ये सुनते ही मैं श्याम के लंड की हो गई और मुंह में गप्प से सोए लंड भर जगाने की कोशिश करने लगी...

पूजा की कुतिया की तरह करते हुए उसका मुँह बेड पर टिका भैया ने एक झटके में ही पूरा उतार दिए....पूजा की भयंकर चीख गूँज उठी जिससे मैं भी घबरा गई..उधर नजर की तो देखी मिशन शुरू हो गई तब तक और सटासट पेले जा रहे थे...

इधर मेरी कोशिश भी रंग लाई और श्याम का लंड एक बार फिर मिशन चुदाई के लिए तैयार था...मैं उधर देखी तो अभी भी खेल जारी थी...सोची वक्त क्यों जया करूँ और अपनी बुर को श्याम के लंड को सेंटर में मिलाती धम्म से बैठ गई...हल्की चीख के साथ मैं पूरी निगल गई थी...

और फिर मैं कूदने लगी...गाड़ी समान थी पर ड्राईवर अब चेंज थी...मैं अभी 10 धक्के भी नहीं लगाई थी कि पूजा हुंकार भरती हुई झड़ने लगी..जिसे देख भैया बोले,"मादरचोद मेरा अभी ठीक से एडजस्ट भी नहीं हुआ कि झड़ गई..." और फिर भैया बड़बड़ाते हुए अपना लंड खींच लिए जिसे देख मैं बोली,"आपका है ही इतना ताकतवर तो इसमें उसकी क्या गलती.."

भैया : " तू चुप छिनाल, पता है मुझे झड़ी चूत मारने में मजा नहीं आता...चल कोई बात नहीं है..तुम तो हो ना..."और भैया मेरी तरफ सरकने लगे...

पूजा : " भाभी, काफी दर्द कर रही है...आहहहहहह...मर जाऊंगी भाभीईईई..."
पूजा अचानक दर्द से कराह पड़ी...मतलब अब भैया के लंड उस पर असर करनी शुरू हो चुकी थी..मैं श्याम के लंड भीतर कर स्थिर हो भैया की तरफ देखनी लगी...

भैया मुझे अपनी तरफ देखते हुए पा, बाहर की तरफ निकले और कुछ ही देर में पानी और दवा ला पूजा को देते हुए बोले,"लो खालो, आराम हो जाएगा.." और फिर पूजा दवा खा फिर आराम करने लगी...

और फिर भैया बेड पर चढ़ मेरे पीछे आ मुझे आगे की तरफ झुकाते हुए बोले,"एक का तो काम हो गया, अब तो पूरी रात तुझे ही बजाऊंगा.." और फिर बिना श्याम का लंड मेरी बूर से निकाले अपना लंड मेरी गांड़ पर टिका दिए और रगड़ने लगे....ओह गॉड....पीछे करेंगे और एक साथ दो-2...

मैं कुछ कहती इससे पहले ही मेरी कोरी गांड़ में पूरी ताकत से लंड पेल दिए...मैं चीखती हुई श्याम के ऊपर धम्म से गिरी...दर्द से मैं तड़पने लगी और कोसने लगी कि क्यों नहीं कुछ देर रूक गई..अगर रूकती तो शायद गांड़ बच जाती...

अचानक एक और हमला हुआ और मैं बेहोश सी हो गई...बस सांसे चल रही थी और इतनी महसूस कर रही थी कि मैं चुद रही थी...

भैया : " शाबास...एक दम ताजी गांड़ मिली...बहनचोद मजा आ गया..कुछ तो मेरे लंड को नसीब हुआ...अब मजे कर सीता राण्ड...आज से तू परमानेंट रंडी बन गई..."

और फिर भैया कुछ रहमदिली दिखाते हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए...मैं कराहती हुई थोड़ी होश में आई पर इतनी हिम्मत नहीं कि कुछ रिएक्ट करूँ..बस शांत पड़ी धक्के खाने लगी...

तभी मेरे होंठ पर कुछ गीली महसूस हुई..आँखें खोली तो पूजा मेरे होंठ चूस रही थी...शायद पूजा को थोड़ी राहत मिल गई थी...कुछ ही पल में मेरी भी दर्द कम गई...जिससे मैं भी अब पूजा के किस का जवाब देती अपनी कुल्हों में हरकत करने लगी...

जिसे देखते ही भैया मेरी कमर पर दवाब बनाए और लगे दनादन पेलने...करीब 10 मिनट बाद भैया मेरी कसी गांड़ पर अपना लंड दबाते हुए जोर से चीख पड़े और अपना गरम लावा मेरी गांड़ में उड़ेल दिए...

और फिर लुढ़क गए हम सब..रात के करीब 2-3 बज रहे थे...और हम सब थक भी गए थे..सो भैया और पूजा दूसरे कमरे में,जबकि मैं वहीं पर सो गई...

सुबह सबसे पहले श्याम जगे...मेरी नींद तब खुली जब वो ऑफिस जाने के लिए तैयार मुझे जगा रहे थे...गुड मॉर्निंग किस आज उन्होंने ही दिया जिससे मैं मुस्कुराती हुई उठ गई...फिर वो लेट हो गया कह बाहर निकल गए...

फिर भैया व पूजा को जगा फ्रेश होने चली गई...सारा काम खत्म करने के बाद भैया एक-एक राउंड हम दोनों की चुदाई की और फिर विदा ले चले गए घर...

पूजा : "सच भाभी, मेरी तो जान निकाल दिए थे..ऐन वक्त पर मेडिसीन ना लेती तो शायद मैं जिंदा भी नहीं बचती...ओफ्फ...."

मैं हँसती हुई बोली," पागल है क्या, चुदाई से कोई मरती है क्या? वो तो उनके स्टाइल से दर्द हो रही थी...मेरी भी पहली दफा यही हालत हुई थी..आज भी है पर कम..."

और फिर इस तरह रात की हर पल की बातें करती रही और फिर सो गए...अचानक फोन की रिंग से मेरी नींद खुली..देखी उठा के तो अंकल का था...

मैंने तेजी से बैठते हुए पिक करती हुई नमस्ते की..अंकल भी प्यार से खुश रहने की दुआ कर बोले," कहाँ थी फोन रिसीव नहीं कर रही थी..."

"वो अंकल आराम कर रही थी.."

अंकल : "समय देखो, 5 बजने वाले हैं..रात में श्याम सोने नहीं देता क्या?"

अंकल की बात सुन मैं बिना जवाब दिए बस हँस दी...

"अंकल, आज तो इलेक्शन का रिजल्ट था ना..."मैं बातों को आगे बढ़ाती हुई पूछी..

अंकल : "हाँ, वही बताने तो फोन किया हूँ...अभी-2 वहीं से आया हूँ और पटना आ रहा हूँ...मैं एकतरफा बहुमत से जीत गया हूँ और इस जीत की पार्टी तुम्हारे साथ मनाने आ रहा हूँ.."

अंकल के शब्दों में अपार खुशी झलक रही थी..मैंने अंकल को हंसते हुए बधाई दी जिसे सुनते ही अंकल बोले," थैंक्स माई लव पर इतने से काम नहीं चलेगा अब..."

मैं अंकल के मंसूबे को पलक झपकते ही ताड़ ली और फिर थोड़ी इठलाती हुई बोली,"..तो फिर काम चलाने के लिए क्या करना होगा मेरे प्यारे अंकल.."

अंकल : "हम्म्म..समझदारी तो दिखाई हाँ कह के...बस ज्यादा नहीं, मेरे तोप की देखभाल करनी होगी और ये शुभ काम आज हुआ तो ठीक वर्ना कल निश्चित करना होगा..." और फिर अंकल हंस दिए...

"हम्म्म...ठीक है..पहले जल्दी से आ जाओ फिर अपनी ड्यूटी शुरू कर दूँगी.."मैं भी अंकल से बेहिचक बोल दी...जिसे सुन अंकल के मुख से एक ठंडी आहह निकल पड़ी और इधर मेरी बूर से...

2 घंटे में आने को बोल अंकल फोन रख दिए...मैं भी अंकल की चुदाई को याद करती मुस्कुरा दी...और फिर पूजा को उठाती फ्रेश होने बाहर निकल गई...

शाम में श्याम के साथ ही अंकल आए जिनके हाथ में मिठाई और गिफ्ट भरे थे...मैं तो मन ही मन सोच रही थी कि काश..आज भी छोटी पार्टी हो जाए...

पर नहीं हुई...खाना पीना के बाद अंकल आज यहीं रूक गए...अंकल और श्याम एक रूम में और पूजा मेरे साथ दूसरे रूम में चले गए...उन दोनों का तो पता नहीं पर हम दोनों की नींद आ ही नहीं रही थी..

बस करवट बदल रही थी और जब पूजा से नजरें मिलती तो आँखों ही आँखों बात करती कि ऐसा क्यों? कभी बाढ़ आ जाती तो कभी एक बूंद को तरस रही हूँ....

खैर, रात के 1 बजे करीब गेट पर हल्की दस्तक हुई...मैं झट से उठ गई..लगता है कि अंकल हैं...पूजा भी उठनी चाही पर उसे रोकती हुई बोली,"तुम रूको, मैं देखती हूँ...और श्याम को भी देख लूँगी..."

कहते हुए मैं उठी और गेट खोली..गेट खुलते ही मैं सन्न रह गई..सामने श्याम थे...शायद ये भी तड़प रहे होंगे...पहली बार साथ रहते अलग सोए हैं ना इसलिए..मैं तुरंत ही अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेरती हुई पूछी,"क्या हुआ?"

श्याम धीरे से मुझे बाँहों में कसते हुए बोले,"तुम्हें भी नींद नहीं आ रही क्या..?" मैं उनके होंठों को चूमती हुई ना में सिर हिला दी...श्याम भी किस का जवाब देते मेरे होंठ चूसने लगे...

जब किस रूकी तो श्याम मेरे चेहरे पर आई बाल को पीछे कान पर ले जाते हुए बोले,"मैं तो सो जाता पर अपनी जान की फिक्र ने हमें सोने नहीं दिया.."

मेरे प्रति फिक्र देख मेरे अंदर ढ़ेर सारा प्यार उमड़ आया...मैं उनके सीने को अपनी जीभ से चाटने लगी...तभी श्याम मेरे कानों में फुसफुसाते हुए बोले,"भैया को मिस कर रही हो...?"

मेरी जीभ जस की तस रूक गई श्याम की बात सुनकर...ऐसा लगा मानों किसी ने विस्फोट कर दिया हो मेरे अंदर...क्या श्याम रात में.....मेरी आँखें छलक पड़ी और आंसे उनके सीने पर पड़ने लगी...

श्याम ने मेरे चेहरे को पकड़ सीधे किए जिससे मेरी आँखें बंद हो गई और लगातार आँसू निकली जा रही थी...फिर वो मेरे होंठ के पास अपने होंठ लाते हुए बोले...

श्याम : "ऐ सीता, रोती क्यों हो? ज्यादा कुछ मैं नहीं जानता...बस इतना जानता हूँ कि इस चारदीवारी के बाहर भी एक जिंदगी है...किसी की पत्नी के बाद भी तुम्हारी अपनी जिंदगी है...मेरी भी है...अब जिसे मैं प्यार करता हूँ,उसकी इच्छा-पसंद को मैं कैसे दबा सकता..फिर तो मेरा प्यार बेकार है...मैं तुम्हें दिल से चाहता हूँ सीता...और शायद तुम भी...तुम्हें जो भी पसंद हो बेहिचक करो पर मेरे प्यार को कभी चोट मत पहुँचाना...क्योंकि प्यार एक बार होता है और शारीरिक आकर्षण बार-बार...तुम्हारी आँखें जब देखता हूँ तो मैं दुनिया से चिल्ला कर कह सकता हूँ कि तुम मुझे बेइंतहा प्यार करती हो..और बाकी के लिए तुम्हारी नजरें सिर्फ शरीर की भूख मिटाने उठती है...ऐसा नहीं है कि तुम मेरे साथ भूखी रहती पर तुम्हारी भूख कुछ और है...ऐसा सिर्फ तुम्हारे साथ ही नहीं बल्कि कईयों के साथ होती है...मैं भी ऐसा ही हूँ...कभी बताने की हिम्मत नहीं पड़ती थी तुम्हारे प्यार को देखकर...मैं ड्यूटी के बाद रोज अपनी गर्ल-फ्रेंड के पास जाता हूँ..."

अब मेरी सिसकी रूक गई थी पर आँसूं बह रही थी...और सारा ध्यान श्याम की कही एक-एक शब्द पर थी....

श्याम : "कभी कभी गर्लफ्रेंड से जब ऊब जाता हूँ तो रेड लाईट भी चला जाता हूँ...मैं ऐसे हालात से अच्छी तरह वाकिफ हूँ...आज तुमसे मैंने ये बात कह डाली दिल काफी हल्का हो गया...पहले तो कभी-2 तुमसे नजरें भी नहीं मिला पाता था...खैर अगर ऐसे कहता रहा तो पूरी रात निकल जाएगी पर बातें खत्म ना होगी...अब अगर मेरी बात को समझ गई हो तो प्लीज माफ कर देना...मैंने ये बातें तुमसे छिपाई थी..."

मैं उनके माफी मांगने पर आश्चर्य से आंसू भरे चेहरे ऊपर कर उनकी नजरों में देखने लगी...वो मुस्कुराते हुए मेरे आँसू पोंछते हुए बोले,"ऐसे क्या देख रही हो? अब तुम कहोगी कि मैं भी तो नहीं बोली थी तो सुनो...मैं तुम्हें कब का माफ कर चुका हूँ...तुम्हारे कारण ही आज पहली बार सुकून मिल पाया दिल के बोझ हटाकर...अब जल्दी से माफ करो और एक किस दो...."

उफ्फ्फ...मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी ऐसा प्यार पा कर..आज मन हो रही थी कि शादी के बाद हुई सारी घटना बता दूँ...पर इतनी खुशी में मेरी आवाजे ही नहीं निकल रही थी...अगर गॉड अगले जन्म का प्यार मुझे दे देते तो वो भी न्योछावर कर देती....और अंतत: मैं रो पड़ी, फिर हँसी और अपने होंठ चिपका दिए....

सच अब महसूस कर रही थी कि मैं सीधे दिल से किस कर रही हूँ...पहले तो ऐसी सुकून कभी नहीं मिली थी...

कूछ देर बाद जब किस रूकी तो श्याम मेरी तरफ निहारते हुए मुस्कुरा रहे थे...मैं उनकी तरफ देखीतो मुस्कुराए बिना ना रह सकी...

श्याम : "अच्छा मैडम जी, अब मैं सोने जा रहा हूँ...मैं गहरी नींद में सो जाऊंगा..फिर आप चुपके से अंदर आना और अंकल को उठा के इधर ले आना...ओके.." और फिर श्याम जाने के लिए हल्की सी जोर लगाते मुझे हटाने की कोशिश किए...

पर मैं उनकी बात सुनते ही उनके सीने पर हल्की चपत लगाते पुन: चिपक गई और बोली,"मुझे नहीं जाना अब कहीं..."

श्याम : "अच्छा तो फिर बुलाई क्यों उन्हें...और शाम से आप दोनों की नजरें ताड़ रहा था...दोनों की आँखें कह रही थी काफी दिनों से प्यासी हूँ...अब ये झूठे नखरे बंद करो..."

मैं कुछ देर बिना कुछ कहे मुस्कुराती रही...फिर बोली,"अंकल के साथ आज पहली दफा होगी...थोड़ी सी शर्म आती है इसलिए...."

मैं पूरी बात कह भी नहीं पाई कि बीच में श्याम रोकते हुए बोले,"रियली...वॉव...फिर तो अंकल किसी स्वर्ग से कम नहीं महसूस करेंगे...प्लीज हाँ कह दो...मैं भी थोड़ी लाइव देख लूंगा अपनी जान की...."

"प्लीज...अब ऐसी बातें मत करिए वर्ना फिर से रो पड़ूंगी..."मैं रोनी सूरत बनाते हुए बोली तो श्याम हंसते हुए सॉरी बोल पड़े...फिर गुड नाइट बोले और चल दिए...

एक कदम चलने के बाद अचानक ठिठके और वापस मुड़ गए...फिर आगे बढ़ते हुए सीधे पूजा के पास पहुँच गए...पूजा के बगल में बैठते हुए मेरी तरफ देख बोले,"पता नहीं क्या हो जाता है मुझे...बार-2 मैं अपनी इस गुड़िया जान को भूल जाता हूँ..."

"वो सो रही है अभी तो छोड़ दीजिए ना उसे...कल याद कर लीजिएगा अपनी गुड़िया को..." मैं झूठी झूठ बोल के देखी...मैं भी जानती थी कि पूजा हम दोनों की बातें सुन रही थी...अब पूरी सुनी या नहीं पता नहीं क्योंकि हमलोग धीमे बोल रहे थे...

श्याम मुस्कुराते हुए "अभी दिखाता हूँ कि ये कैसी सो रही है.." कहते हुए पूजा की बाँह पकड़े और औंधें मुँह कर सो रही पूजा को सीधे चित्त कर दिए...वॉव..ये तो सचमुच सोने का नाटक कर रही थी या सच में सो गई...कह नहीं सकती..

तभी श्याम ने पूजा की एक चुच्ची की निप्पल पकड़े और कस के उमेठ दिए...पूजा "ओह नो भैया" कहती हुई चीख पड़ी...चीख इतनी तेज नहीं थी कि कि आवाज रूम से बाहर निकलती...शायद पूजा अपनी चीख दबा दी थी...और फिर पूजा हँसती हुई अपने चेहरे को ढ़ंक ली...

फिर श्याम मेरी तरफ देख हंस पड़े...मानों कह रहे थे कि देखी, कितना सो रही थी...फिर आगे बढ़ पूजा के शरीर पर लद गए जिससे पूजा के चेहरे के ठीक सामने उनका चेहरा आ गया...फिर पूजा के हाथों को पकड़ दोनों तरफ कर बोले,"वाह मेरीशाली, रात में तो बड़ी मजे ले रही थी..अब जब मेरी बारी आई तो शर्माने की नाटक कर रही है..."

उनकी बात खत्म होते ही मैं बोल पड़ी,"ऐ...ये आपकी शाली कब से हुई...सेक्स अपनी जगह और रिलेशन अपनी जगह..समझे..."

श्याम : "आज से....क्योंकि तुम दोनों कहीं से भी ननद-भाभी नहीं लगती...बिल्कुल सगी बहन लगती...तुम किसी से भी पूछ लो..."

"अच्छाऽ तो जनाब यहाँ तक पहुँच गए...चलिए अब उठिए और जाइए सोने...बाकी बात कल कीजिएगा अपनी शाली से..."मैं समझ गई कि अब ये पूजा को तंग करेंगे उल्टी सीधी बोल के...

श्याम : "क्यों, ज्यादा खुजली हो रही है क्या अंदर जो अंकल के लिए उतावले हो रही हो.."
उफ्फ...क्या बोल दी...मैं थोड़ी नाराजगी में उनकी तरफ देखी और फिर बेड पर चढ़ सोती हुई बोली,"गुड नाइट..अब आप जितनी देर तक हो, आराम से बात करिए अपनी पूजा शाली से..." और मैं आँखें बंद कर सोने का नाटक करने लगी...

श्याम : " ओहो नाराज क्यों होती हो..जा रहा हूँ बाबा...बस पूजा को गुड नाइट किस करने आया था..."

और फिर किस करती हुई मालूम होते ही मैंने देखी तो दोनों आराम से किस कर रहे थे...कुछ देर किस करने के बाद श्याम मेरे चेहरे को अपनी तरफ कर गुड नाइट किस दिए और बोले,"आ जाना कुछ देर में...ओके..."

मैं मुस्कुराती हुई हाँ में सिर हिला दी...फिर पूजा की तरफ देखते बोले,"शाली जी, थोड़ा अपने जीजू के लिए भी बचा के रखिएगा...ओके..." जिसे सुन पूजा हँसती गुई अपनी आँख खोल दी...

फिर श्याम बेड से उतर गए और बाहर की तरफ चल दिए...तभी पूजा पीछे से बोली,"जीजू...."

पूजा की आवाज सुनते ही श्याम एकाएक रूक गए और मुस्कुराते हुए पीछे मुड़ र देखने लगे..उनके पीछे पलटते ही पूजा एक फ्लाइंग किस उनकी तरफ उछाल दी...श्याम कैच करते हुए अपने दिल से लगाए और फिर एक फ्लाइंग किस देते हुए बाहर निकल गए... 


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--25

श्याम के जाते ही मैं पूजा पर चढ़ गई और उसके गाल काटती हुई बोली,"हाय मेरी बहना, ये क्या हो गया....हम लोग एक निवाला को तरस रहे थे, वहीं अब पूरी थाली मिल गई.."

पूजा चीखती हुई हंसी और बोली,"यस दीदी जी, अब तो बाहर भी मस्ती और अंदर भी..." फिर हम दोनों एक जोरदार किस किए...काफी देर बाद किस रूकी तो मैं उठी और बोली,"अब अपनी बूर की जुगाड़ कर के आती हूँ...तब तक तुम नंगी हो जा मेरी बुल्लो..."

पूजा ओके कहती हुई कपड़े खोलने लग गई और मैं बाहर दूसरे रूम की तरफ चल दी जहां मेरे पति के साथ अंकल सो रहे थे, उन्हें जगाने...

अंकल बेसुध हो पड़े लम्बी लम्बी खर्राटे भर रहे थे जबकि श्याम दूसरी तरफ मुँह किए सोने का नाटक कर रहे थे..मैंने धीमे से अंकल के पास बैठते हुए झुकी और अपने दांत अंकल के गालों पर भिड़ा दी...

श्याम अगर नहीं जानते तो मैं कभी हिम्मत नहीं करती ऐसा करने की, पर अब तो डर नाम की कोई चीज तो बची ही नहीं थी..मेरे दांत गड़ते ही अंकल हड़बड़ कर "कौन है" कहते हुए उठ बैठे...जिसे देख मैंने फौरन अपने हाथ अंकल के मुँह पर रख दी और बोली,"अंकल...मैं सीता. चलो उस रूम में.. "

अंकल मुझे देख हैरानी से उनकी आँखें फट गई..वे कभी सोए श्याम को देखते तो कभी मेरी तरफ...उन्हें ऐसा देख मैंने उनकी बाँह कस के पकड़ी और खींचते हुए इस रूम में ले आई...

रूम में आते ही मैं उनसे कस के लिपट गई और अपने होंठ उनके होंठ पर रखती बेतहाशा चूमने लगी...अंकल को कुछ समझ नहीं आ रही थी कि आखिर ये हो क्या रहा है..पर कब तक समझने की कोशिश करते...आखिर वे दिमाग चलाना छोड़ अपने जीभ मेरे मुँह के अंदर चलाने लगे...

तभी एक और जीभ मेरे गालों से सटती हम दोनों के होंठों के बीच आ गई..ये पूजा थी..अंकल ने पूजा को अपनी ओर भींच जगह दे दिए और अब हम तीनों अपनी - 2 जीभ टकरा के खेल रहे थे...

और अंकल के दोनों हाथ बारी-2 से हम दोनों की चुचिया मसल रहे थे...चुसाई के बीच चुची में हो रही दर्द से हम दोनों आनंदमयी मस्ती की गली में घूम रही थी...अचानक अंकल हम दोनों को अलग किये और अपने तन पर की एक-दो कपड़े खोल दिए...

बस फिर क्या था..अंकल के आदेश का इंतजार किए बिना ही मैं और पूजा एक-साथ नीचे उनके विशाल लंड की तरफ लपकी...सच काबिल-ए-तारीफ था अंकल का लंड..एकदम लोहे की तरह कड़क...ऊपर टमाटर इतनी बड़ी लाल सुपाड़ा...साइज करीब 9 इंच...

मैं हाथ में जैसी ही ली कि मेरी बुर से कामरस टपकने लगी..और मेरी जीभ से लार टपकने लगी...अनायासतः अंकल के हाथ मेरे सर को हल्के दबाव देने लगे...

बदले में मैं किसी चुम्बक की तरह लोहे की तरफ खिंचती चली गई और अब मेरे मुँह के अंदर गरम गरम रॉड समाई हुई थी...काफी उत्तेडक दृश्य थी...पूजा नीचे से आधे लंड को जीभ से सेवा दे रही थी और मैं जितनी तक हो सकी अंदर की हुई सेवा कर रही थी...

ऊपर अंकल आकाश की तरफ मुँह किए आहें भर रहे थे...काफी देर तक अंकल को हम दोनों एक पर एक तरीके से मुँह से सुख दे रहे थे...अब शायद अंकल की सहन शक्ति जवाब देने वाली थी...अचानक वे पूजा को एक तरफ कर दिए और मेरे बाल पकड़ कर तेज तेज शॉट मारने लगे...हचाक...हचाक की तेज आवाजों के साथ मेरी आँखें निकलने लगी और मेरी गले की नस नस खींचने लगी थी...

आँखों से आँसू की धार फूट कर बाहर निकलने लगी थी...पर अंकल इन सब चीजों को अनदेखा कर धमाधम मेरी होंठो को चीरते धमाका किए जा रहे थे...मेरे मुँह से ढ़ेर सारी लार बह कर नीचे मेरी पर्वतनुमा चुची से टपकती जमीन पर गिर रही थी और पसीने से नहा गई थी....

तभी अचानक से अंकल अपना लंड बाहर कर लिए और तेज साँसें लेने लगे और मेरी तो जान में जान आ गई...मैं सर नीचे कर हाँफ रही थी...कुछ देर बाद जब थोड़ी शांत हुई तो नजर ऊपर की तो उफ्फ्फ...अंकल का लंड को अब और विकराल लग रहा था...

अंकल अभी झड़े नहीं थे...शायद वो झड़ना नहीं चाहते थे तभी लंड बाहर कर लिए...वर्ना अगर दो धक्के भी और लगते तो वे झड़ जाते...बगल में पूजा अंकल से पूरी तरह वाकिफ अपनी टांगें चौड़ी किए बुर में अंगुली घुसा कर अंदर बाहर कर रही थी और चुची मसल रही थी...

फिर अंकल मुझे उठाए और बेड पर धक्का दे दिए..मैं गिर पड़ी पीछे की तरफ जिससे मेरी टांगे जमीन पर थी और मेरी भींगी हुई चूत बेड के किनारे पर ऊपर की तरफ थी...अंकल मेरे गिरने के साथ ही मुझ पर झुकने लगे और अगले ही पल उनका 9 इंची लंड सटाक से मेरी बुर में समा गया....

मैं "आहहहह श्याम..." करती चिल्ला पड़ी...जिससे डर के मारे अंकल मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दिए...सच में इतनी देर से पानी में फूल रही लंड काफी मोटा हो गया था और एक ही बार में पूरा जाने से मेरी बुर तो फट ही गयी थी...मुझे तो अजीब लग रही थी कि लगातार लंड की साईज बढ़ती ही जा रही थी और पहली बार सबके साथ लगती आज ही मेरी सील टूटी है...

कुछ देर तक मेरी निप्पल को दांतों से कुरेद कर मेरी दर्द को कम करते रहे...जब कुछ दर्द कम हुई तो मैं नीचे अपनी बुर को ऊपर कर लंड की रगड़ पाने की कोशिश करने लगी..जिसे अंकल तुरंत समझ गए कि अब सब ठीक है, अब गाड़ी को बढ़ाना चाहिए...

फिर अंकल मेरी चुची पर एक लम्बे चुप्पे मारे और सीधे हो गए...वे इतनी सरलता से सीधे हुए कि उनका लंड आधी इंच भी बाहर नहीं निकली..पर पूरे खड़े नहीं हो पाए थे....

उन्होंने तकिया बगल से खींचा और पूजा की तरफ उछाल दिए...पूजा समझदारी दिखाई और तकिया लेती हुई मेरे निकट आई...तभी अंकल ने मेरी कमर को थोड़ा ऊपर किए..उसी समय पूजा तकिया मेरी गांडं के नीचे घुसा दी...

वॉव...अब अंकल बिल्कुल ही सीधे हो पा रहे थे. .और साथ ही मैं अपनी बुर में घुसे लंड को साफ देख रही थी...तभी अंकल मेरी कमर दोनों हाथों से जकड़ लिए जिससे उनके दोनों अँगूठे मेरी नाभी के पास मिल रही थी...

और फिर अपना लंड बाहर खींचना शुरू किए, जब सिर्फ सुपाड़ा निकलनी बची थी कि तभी रॉकेट की गति से वापस अंदर कर दिए...आउच्च्च...कितनी भयंकर थी ये प्रयोग...मैं कसमसा कर रह गई...

फिर ठीक उसी तरह हौले-2 बाहर निकालना और फिर तड़ाक से अंदर घुसेड़ देना...काफी असहनीय, पर लाजवाब थी मेरे लिए...मेरी बुर की नस नस बिखर जाती थी...ऐसी लग रही थी कि मेरी बुर कतरी जा रही है...

उनके तेज धक्के से मैं बार -2 पीछे की तरफ खिसक जाती थी...मेरी बुर से पानी की पतली धारें निकलनी शुरू हो चुकी थी..मैं आतुर हो गई थी अब लगातार ऐसी ही अपनी बुर को कतरवाऊं...

अंततः मैंने अपने पांवों को मोड़कर अंकल के चूतड़ को जकड़ ली ताकि ना फिसलूं अब...और साथ ही लंड को ज्यादा से ज्यादा अपनी चूत में कर सकूँ...मुझे ऐसा करते देख अंकल मुस्कुराते हुए पूजा की तरफ देखे और...

तभी पूजा झुकती हुई मेरी बुर के पास आई और अपनी जीभ लपलपाती हुई मेरी बुर पर रख दी..जिससे वो मेरी बुर के साथ-2 लंड का भी स्वाद चख रही थी...ऊपर पूजा के हाथ बढ़कर मेरी चुची को मसलने लगी...

और अंकल अपने काम में लग गए...वे धीरे-2 पर लगातार लंड मेरी बुर में चलाने लगे...जिसे पूजा बड़ी सफाई से अंकल के लंड का स्वाद चख रही थी...मैं इस दोहरी मार को नहीं झेल पा रही थी और सिसकी लेती हुई अपने सर बाएँ-दाएँ करने लगी...

कुछ ही पलों में अंकल की स्पीड काफी तेज हो गई....उनका लंड सटासट मेरी बुर को छलनी किए जा रहा था...बीच-2 में उनका लंड पूरा बाहर आ जाता तो अगला शॉट सीधा पूजा के गले में उतर जाती....

ओफ्फ...काफी उत्तेजक थी ये पोजीशन...मैं इस तरह की खेल में नई थी तो झेल नहीं पाई और नदी की बाँध टूट गई...जिसे पूजा कुतिया की तरह चट कर गई...पर अंकल की स्टेमिना लाजवाब थी..वो अब दुनिया से बेखबर लगातार मेरी धज्जियाँ उड़ा रहे थे...

अब तो वे जान बूझकर भी अपना लंड बाहर खींचकर पूजा के मुँह को बूर बना कर पेल देते...5 शॉट पूजा के मुख में तो 10 शॉट मेरी चूत पर लगती...तभी अंकल और जोर से शॉट लगाने लगे, शायद चरम सीमा की तरफ बढ़ रहे थे...

अंकल : "आहहहह...शाबासऽ मेरी पूजाऽ राण्डडडडडऽऽ...ऐसे ही अपने मुँह खोल के रखा कर कुतिया....ओहहहहह...याहहह..याह...याहहह....यस मेरी सीता रानीईईईऽ आज से तू भी मेरी रखैलऽलऽलऽलऽ... है शाली...."

मैं भी अब अपना नियंत्रण खो चुकी थी..अंकल के साथ मैं भी बड़बड़ाने लगी,"हाँ अंकअअलऽऽ मुझे अपनी रखैल बना लोओओओ....रण्डी हूँ आपकी.ई.ई.ई..आहहह याईईई...हाँ अंकललल...ऐसे ही...और जोर से चोदो अपनी कुतिया कोओओ...आहहह.."

इधर पूजा अपने भींगे चेहरे से लगातार मेरी चूत से निकल रही पानी को सोख रही थी...मेरे हाथ अब बढ़ के पूजा के बाल पकड़ कर अंदर बूर की तरफ धकेल रही थी और पूरे कमरे में मेरी और अंकल की चीखें गूँज रही थी...

एक बारगी मेरे मन में इच्छा हुई कि श्याम को देखूं...जरूर गेट पर छुप के देख रहे होंगे...पर आँखें खोली तो सामने अंकल का विशाल मांसल पेट नजर आया...फिर अपनी आँखें बंद कर मस्ती में श्याम को भुला खो गई...

तभी अंकल एक हुंकार से लबालब चीख मारी और बड़बड़ाते हुए मेरी बुर में अपना पानी डालने लगे...

अंकल: "ले रंडी, मेरे लंड का पानी अपनी बुर में लेएएएऽ..आहहहह..पहले तेरी सास की बुर में डालाआआआऽ...फिर तेरी ननद पूजा के बूर मेंऐऐएऽ...और अब तेरी बूर को भर रहा हूँ...आहहहह...आहहहह..."

मैं अंकल के साथ ही झड़ रही थी पर झड़ने से ज्यादा विचलित अपनी सास के बारे में सुन के हो गई थी...क्या अंकल सबको चोदते हैं....झड़ने के साथ ही अंकल मेरे शरीर पर औंधे मुँह लेट कर हाँफने लगे...मैं भी हांफती हुई अंकल को बांहों में भर ली...

कुछ देर बाद जब आँख खुली तो मेरी नजर सीधी गेट की तरफ गई जहाँ श्याम बिना हिचक के अंदर आ अपने लंड को मसलते बीवी को चुदते देख रहे थे...मेरी नजर मिलते ही वो मुस्कुराते हुए अपना अंगूठा ऊपर की तरफ करते हुए वापस सोने चले गए...ये देख मैं भी हौले से हँस पड़ी...

वापस पूजा की तरफ देखी तो वो लाल आँखें किए अंकल को घूरे जा रही थी...शायद मम्मी के बारे में सुन उसे भी शॉक लगी थी...

कुछ देर बाद जब अंकल साइड हुए तो पूजा को अपनी तरफ यूँ देख सकपका गए, पर जल्द ही माजरा समझ गए...फिर भी अंकल अनजान बन मुस्कुराते हुए पूछे,"क्या हुआ डियर?"

पर पूजा तो बस यूँ ही घूरे ही जा रही थी...मैं पूजा को ऐसे देख उठी और उसके बालों को सहलाती हुई बोली,"सॉरी पूजा, पर इसमें तुम्हारी गलती नहीं है..जैसे हम दोनों चाहते थे, शायद वैसे भी मम्मी जी भी चाहती हों...हाँ अंकल आपको ऐसे नहीं बोलना चाहिए था..."

अंकल: "क्यों? पूजा नहीं जानती है थोड़े ही...नाटक करती है तुम्हारे सामने...पता है दोनों माँ-बेटी को कई बार एक साथ चोद चुका हूँ पूछ इससे...अब अगर तुम भी जान गई तो इसमें प्रॉब्लम क्या है...वैसे इस घर की बात इसी घर में रहती हो, ये पूजा अच्छी तरह जानती है..और हाँ.. पूजा की बूर पेलते वक्त इसकी माँ बड़े ही मजे से मेरा लंड चूसती है, जैसे आज ये चूस रही थी..." और फिर अंकल पूजा की नंगी बूर पर अंगूली फेरने लगे...

मैं अंकल की बात सुनते ही शॉक हो गई कि ये क्या माजरा है...मेरे जेहन में एक डर समा गई कि कहीं मम्मी जी मेरे बारे में सुन....वो करते हैं वो अलग बात है पर मैं.....वो भी ससुर के साथ...मैं पूजा की तरफ देखती सोच में पड़ गई...

तभी अंकल बोले," तुम क्या सोच रही हो सीता....डरो मत वो ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगी अगर जान गई तो...और हाँ तुम अब गाँव आएगी तो तेरी देखना तेरी सासू माता ही तुम्हारी बूर में लंड डालेगी...."

मैं ये सुनते ही शर्म से नीचे कर ली...उसी पल पूजा अंकल के सीने पर एक चपत लगाते हुए हँस पड़ी...जिससे अंकल भी हँस पड़े...मैं उन दोनों को हंसते देख नजरे ऊपर की तो मेरी नजर सीधा अंकल के लंड पर पड़ी जो हॉट बातें सुन अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी थी...

खड़े लंड को देखते ही मेरी बुर में हरकत होनी लगी और ललचाई नजरों से अपनी जीभ फेरने लगी होंठो पर...अंकल की नजर मुझ पर पड़ते ही उन्होंने अपना पंजा मेरे गालों पर रख अंगूठा मेरे होंठ पर रख दिए...मैं तुरंत ही आँखें बंद करती अँगूठे को लंड समझ अंदर की और चुसने लगी...

अंकल: "एक बात तो है पूजा,आज तक मैंने ना जाने कितनी रण्डियाँ चोदी है, पर इसके जैसी गरम रण्डी आज तक नहीं मिली..." और तभी अंकल एक झटके से अपना अंगूठा खींच लिए जिससे मैं नशीली और प्यासी नजरों से अंकल की तरफ देखने लगी...

अंकल तभी घुटनों के बल खड़े होते हुए बोले,"चल, कुतिया बन जा मादरचोद..." और मैं सुनते ही किसी दासी की तरह फौरन कुतिया बन गई और अपनी गाँड़ अंकल के लंड की तरफ कर दी...

अगले ही पल अंकल का लंड मेरे गांड़ों के छेद पर महसूस हुई...मैं सिहरती हुईअपनी आँखें भींचती हुई दांत पीस ली अगली वार को सोच कर...

और पूजा आगे बढ़ झुकी और मेरी मुंह में अंगुली डाल निप्पल को अपने मुंह से चूसने लगी...कि तभी एक जोरदार धक्के लगे...मेरी चीख गूँजने से पहले ही पूजा के हाथ मेरे मुंह सील दिए...अंकल जड़ तक लंड पेले मेरी चूतड़ को थपथपा रहे थे...मेरे आँसूं बेड पर बह रही थी...

कुछ पल तक अंकल स्थिर रहे, फिर लगे पेलने...और मेरी बुर से भी बदतर हाल 5 मिनट में ही कर दिए...और फिर कुछ देर बाद तेज धक्के लगाते हुए अपना लंड की टोटी खोल मेरी गांड़ को भरने लगे....

फिर अंकल जैसे ही लंड बाहर खींचे, मैं धम्म सी बेड पर बेहोश गिर पड़ी...अंकल कुछ देर बाद आराम किए फिर पूजा की भी मस्ती में दमदार चुदाई किए...मैं कुछ देर बाद उठी और उन दोनों की हेल्प की, जैसे पूजा कर रही थी...पूजा की भी बूर-गांड़ की अच्छी धुलाई किए अंकल ने....सुबह 4 बज गए गए थे चुदाई करते-करते...

फिर अंकल वापस अपने कपड़े ले श्याम के पास सोने चले गए...जबकि कुछ ही पल में पूजा नंगी ही नींद की आगोश में समा गई...कुछ ही देर में सुबह होने वाली थी या यूँ कहिए सुबह हो गई थी...

मैंने दिन में ही सोने की सोच बाथरूम की तरफ नंगी ही चल दी...


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--26

फ्रेश होने के बाद पूजा के रूम में कपड़े पहनने आई...साड़ी उठाई कि मेरी नजर पूजा की एक समीज सलवार पर गई जो क्रीम कलर थी और झीनी सी थी...पूजा ये सूट अब केवल घर पर ही पहनती थी...कॉलेज या कहीं जाती तो चुस्त कपड़े पहनती थी...

मैंने साड़ी वहीं रख सूट-सलवार निकाली..फिर पेन्टी पहनते हुए सलवार डाल के नाड़ा कसने लगी..काफी ज्यादा दिक्कत नहीं हुई पहनने में क्योंकि सलवार अक्सर बड़ी ही रहती है जिसे नाड़े से सही जगह एडजस्ट कर बाँधनी होती है...

दिक्कत थी तो समीज में...दिखने से ही काफी तंग लग रही थी...2 साल पुरानी थी,,,गांव में थी तभी अंकल ही दिए थे पर वहाँ भी ज्यादा नहीं पहन पाई थी...एक या दो बार ही पहनी थी, वो भी शादी में ही...

खैर मैं कुछ सोची फिर सर के ऊपर से डालने लगी...उफ्फ..सच में कितनी कसी थी....मुश्किल से पर आराम-2 पहन ही ली...ओफ्फो, मेरी तो पूरी बॉडी ही बँध गई थी...इतनी चुस्त थी कि अगर थोड़ी अंगराई भी लेती तो फट जाती...

खैर, पहनने के बाद शीशे के पास खड़ी हुई तो ओह गॉड...मेरी चुची इतनी भयंकर लग रही थी कि मैं खुद शॉक रह गई...एकदम बड़ी नींबू की तरह गोल शेप में आ गई थी..और मेरी भूरे रंग की निप्पल साफ झलक रही थी...

मेरे हाथ अनायास ही चुची पर चली गई...और फिर हाथों को ऊपर से हल्की दबाती हुई फिसलाने लगी...कुछ ही पलों में दोनों निप्पल कड़क हो गई और समीज को फाड़ने आतुर होने लगी...मैं मुस्कुराती हुई दोनों को चुटकी से मसल दी जिससे मैं तड़प कर सिसक दी...

मन ही मन सोच ली कि अब दोनों लंड वालों के सामने ऐसे ही जाऊंगी...फिर उनका हरकत देखूंगी...खासकर अंकल का कि उनमें कितनी हिम्मत है...फिर मैंने घड़ी पर नजर डाली तो अभी 5 बजे थे...अचानक कुछ याद पड़ते हीमेरे चेहरे की लाली बढ़ गई...

और फिर गेट के पास टंगी चाभी ली और बाहर ऐसे ही निकल गई...कैम्पस के मेन गेट खोली और दो कदम बाहर निकल सड़क पर नजरें दौड़ाने लगी..कहीं किसी का अता पता नहीं था...मैं वापस अंदर आई और मेन गेट को दो इंच के करीब खुली छोड़ फ्लैट की तरफ बढ़ गई...

अंदर आते ही पहले तो श्याम को देखने गई, जहाँ दोनों गहरी नीं में पड़े हुए थे...फिर दूसरे रूम में पूजा पर बाहर से ही परदा हटा झाँकी तो पूजा नंगी एक पतली जादर ओढ़े लुढ़की पड़ी थी...मैं वापस मुड़ पास रखी कुर्सी पर बैठ गई और रात की बातें याद कर सोच में डूब गई...

अचानक बजी बेल से मैं चौंकती हुई उठ खड़ी हुई...फिर गलियारे की तरफ मुड़नी चाही जहाँ से बेल बजने पर पहले मेन गेट पर देखती थी..पर रूक गई और फिर फ्लैट के गेट की तरफ कदम बढ़ा गेट खोली...सामने दूधवाला खड़ा था...

मैं गेट खुली छोड़ किचन में वापस आई और बर्तन ले दूधवाले के पास जाकर खड़ी हो गई..वो तो मुझे छोड़, मेरी चुची को मुंह फाड़े घूरे जा रहा था...मैं भी अंदर से मुस्काती हुई खड़ी हो उसके तरफ देखने लगी...कुछ पलों के बाद जब उसकी नजर मेरी नजर से टकराई तो वो सकपका सा गया...

पर मुझे मुस्कुराते देख वो भी हंस पड़ा...फिर बिना कुछ कहे नीचे दूध के केन में अपनी लीटर वाला बर्तन डाल दिया...फिर थोड़ा ऊपर होते हुए बोला,"नीचे झुक के लो मैडम वरना जमीन पर गिर जाएगा..." मैं उसकी तरफ देख हल्की मुस्कान लाती हुई अंदर से होंठों पर हल्की जीभ चलाती हुई झुक गई...

और बर्तन उसके केन के पास कर दी...झुकने से चुची दिखने वाली ढ़ीली समीज तो पहनी नहीं थी जो ये झुकने बोला...पर झुकने पर जो चुची जमीन पर गिरती प्रतीत होती है, वो मर्दों को ज्यादा लुभाते हैं...शायद इसी वजह से कहा होगा...

मैं और अपनी चुची को नीचे करने के ख्याल से कुछ ज्यादा नीचे हो गई, जिससे मेरा चेहरा ठीक उसके लंड के सामने पहुंच गया..मैं एक नजर डाली तो लंड धोती में ही ठुमके लगा रहा था..मैं मंद मंद हंस पड़ी....

तभी वो मेरी बर्तन में दूध उड़ेलने लगा...जैसे ही दूध पूरा डाला उसने अपना दूसरा हाथ मेरे सर पर रख हल्का दवाब देने लगा..मैं आश्चर्यचकित रह गई, फिर सोची थोड़ी देर और देखना चाहता है शायद...मैं बिना जोर किए हाथ में दूध लिए झुकी रही...

तभी उसने दूध मापने वाला हाथ मेरे सर पर रख दिया और वो हाथ हटा लिया...उस मापक से दूध की बूँदे मेरे बाल और पीठ पर पड़ने लगी...अचानक से अपना धोती में हाथ डाला और अगले ही पल उसका काला लौड़ा मेरे होंठो से टकराने लगा....

"चूससससऽ लो मैडम...आज के लिए एकदम ताजा है...."दूधवाले सित्कारते हुए अपना लंड धकेलते हुए बोला...और अब उसने एक हाथ नीचे से गर्दन पर रख दिया और दूसरा हाथ तो ऊपर से जकड़े हुए था ही...मेरे हाथों में दूध से भरी बर्तन थी जिससे मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रही थी...

अगर दूध छोड़ती तो दोहरी नुकसान झेलनी पड़ती...क्योंकि लंड तो अब जाता ही मुंह में...मैं दूध के बर्तन पर पकड़ अच्छी से बनाई और साँस रोकती हुई लंड के लिए हल्की जगह दे दी...

पर इस हल्की जगह अगले ही पल बड़ी जगह में बदल गई और पूरा का पूरा लंड मेरे गले में उतर गया...मैं तड़पती हुई पीछे होनी चाही पर हो ना सकी..हाँ वो जरूर समझ गया जिससे अपना लंड हल्का पीछे खींच लिया...

मैं थोड़ी राहत की साँस ली..पर ज्यादा नहीं ले पाई..अगले ही पल दुबारा पेल दिया था..नैं हिचक पड़ी...पर मानने वाले था नहीं...छेद मिलते ही लंड पत्थर समान पत्थरदिल जो हो जाता है...वो इसी तरह हल्के-2 मगर तगड़ा शॉट लगाए जा रहा था...

कुछ ही देर में मेरी लार में सनी उसके लंड के प्रीकम बाहर टपकने लगी जो सीधी नीचे दूध में गिर रही थी...पर अब इस बात की खबर ना हमें थी और ना उसे...मेरी चूत भी गरम हो कर पिघलने लगी थी...

तभी उसने दोनों हाथ हटा लिए और मेरी बड़ी सी शेप लिए चुची को पकड़ लिया...अब चाहती तो पीछे हट सकती थी पर हट ना सकी...ऐसे पोजीशन में चुची पर पकड़ भी ढ़ंग से नहीं बन पाती है...

शांत मुद्रा में अपना मुंह खोली झुकी चुची रगड़वाते लंड खा रही थी वो भी दूधवाले का....वो अब दनादन मेरे मुखद्वार में अपना खूँटा गाड़े जा रहा था...दूध में गिर रही रस की मात्रा भी बढ़ रही थी...

करीब दस मिनट तक यूँ ही झुकी रही और वो पेलता रहा...अगर वो चाहता तो इतनी देर में चूत भी बजा सकता था पर नहीं...शायद धीरे धीरे बढ़ना चाहता हो...तभी एक करारा शॉट लगा और वो दांत भींचते हुए कांपने लगा...

उसके लंड ने फव्वारे छोड़ने शुरू कर दिए थे...इधर मेरी चूत भी नदी बहा दी....उसका लंडरस सीधा मेरे पेट में गिर रहा था...कुछ देर तक यूँ ही रूका रहा...फिर शांत हुआ तो वो अपना लंड बाहर खींचने लगा...

बाहर निकलने के क्रम में सॉलिड वीर्य की कुछ मात्रा नीचे टप्प की आवाज से दूध में गिरी...जिसे हम दोनों की हल्की हंसी निकल पड़ी..फिर मैं सीधी हुई...

वो भी अपना लंड धोती से ही पोंछा और अंदर छुपाते हुए बोला,"आज का दूध में ज्यादा विटामिन है मैडम...ऐसा दूध एक महीने तक लेगी तो पूरी फैमिली तंदुरूस्त हो जाओगी..." और फिर वो हंसने लगा...

मैं भी मुस्कुराती हुई बोली,"सांड़ कहीं का., ऐसे कोई करता है क्या? कोई देख लेता तो..." पर वो मेरी बात का जवाब दिए बिना ही हंसता हुआ दूध का के उठाया और नीचे चल पड़ा...मैं भी वापस किचन की तरफ चल दी...

किचन में दूध रखते ही गेट पर नॉक हुई...गेट बंद भी नहीं की थी...अब क्या लेने आया है? मैं ऐसे ही बड़बड़ाती गेट की तरफ चल दी...जैसे ही गेट पर खड़े व्यक्ति पर नजर गई कि मैं हड़बड़ाती हुई रूम में भागी दुपट्टा लेने...

मकान मालिक खड़े थे बाहर...उनका नाम तो नहीं जानती थी पर पहचानती थी..दुपट्टे को सीने पर रखी और चेहरे को साफ करती हुई वापस गेट पर आई और बोली,"नमस्ते जी.."

उनकी उम्र कोई 35 के आसपास थी...ज्यादा मोटे नहीं थे पर भरा हुआ शरीर था...बाल गोल्डेन कलर की थी और मूंछें तो सफाचट ही थी...निकर और टीशर्ट पहने हुए थे...शायद मॉर्निंग वॉक गए थे...और वो कुछ ही दूर आगे वाले घर में रहते थे...

मकान मालिक: "नमस्ते, वो मेन गेट रात में खुला छोड़ दिए थे क्या?" मैं उनकी बात सुनते ही ना में सिर हिला दी..जिससे उनके चेहरे पर आश्चर्य की लकीरें साफ उभर आई...फिर बोले,"दूधवाला को अभी यहाँ से ही निकलते देखा तो उससे पूछा..तो वो आपका ही नाम बताया कि यहां सिर्फ आप ही दूध लेते हैं तो...."

आगे उनको बीच में ही रोकती हुई बोली,"हाँ...दरअसल आज कुछ जल्दी नींद खुल गई तो नीचे टहलने गई थी और वापस आते वक्त गेट खोल दी थी..."

मकान मालिक: "ओह..फिर ठीक है पर एक बात का ख्याल रखिएगा..अंदर ऐसे लोगों को मत आने दीजिएगा..यही सब घर में गैरमौजूदगी का फायदा उठा लेते हैं...सब कुछ तो अंदर आ मुआयना कर ही लेते हैं, फिर बस मौके की तलाश में रहते हैं...बात को समझ रहे हैं ना.."

मैं उनकी बात समझ हाँ में सिर हिला दी...तभी वो मेरे चेहरे की तरफ आगे बढ़ काफी निकट आ खड़े हो गए, फिर मेरे एक तरफ झुक अंदर देखने लगे...मैं कुछ नहीं समझ पा रही थी कि अब क्या देख रहे हैं...

अंदर देखने के बाद वो फिर सीधे हुए और अगले ही क्षण अपनी एक अंगुली मेरी होंठ पर घिसते हुए हटा लिए...मैं हैरानी से पीछे हटती उन्हें देखने लगी...और फिर वो उसी अंगुली को अपनी नाक से सूंघे, ओह कहते हुए अपनी अंगुली तुरंत ही हटा लिए...

अब मैं सोच में पड़ गई कि क्या कर रहे हैं? यही सोच अपनी अंगुली जब होंठ पर लाई तो कुछ चिपचिपा महसूस हुआ...ओह गॉड...मर गई...मैं वापस मुड़ी ही थी कि उसने मेरी बाँह पकड़ हमें रोक दिए...

और फिर अपनी वही अंगुली एक ही झटके में मेरे मुँह में डालते हुए नजदीक सटते हुए बोले,"आज पहली बार है इसलिए वार्निंग दे रहा हूँ बस...अगर आगे से ऐसी घिनौनी हरकत की तो सीधा घर से बाहर...ये कोई रंडीखाना नहीं, मेरा घर है...और बाहर करने से पहले तेरा वो हश्र करूंगा कि जिंदगी भर हमें याद रखोगी...समझी..."

और फिर अंगुली मेरे मुँह से निकाल मेरी दोनों चुची के बीच की दरार में घुसा पोंछने लगे समीज में...मैं चौंक कर रह गई.. और फिर बाहर की तरफ खींच अंगुली नीचे एक चुची पर होते हुए सरका दिए... जिससे मेरी चुची पूरी तरह दब गई...मेरे मुंह से हल्की आह निकल गई....फिर वो मुझे ऊपर से नीचे एक बार घूरे और वापस निकल गए...

उफ्फ...ये क्या मुसीबत आ गई...अगर श्याम से शिकायत कर दिए तो वो गुस्से से बौखला जाएंगे...उन्होंने मस्ती की प्रमीशन दिए थे, ना कि इज्जत कबाड़ा करने की...मन ही मन सोच भी ली थी कि आज से ऐरे-गैरे से तौबा...

मैं गेट बंद कर वापस गलियारे की तरफ बढ़ गई जहाँ से सड़क साफ दिखती है...

सड़क पर नजर दौड़ाई तो वे जा रहे थे...कुछ देर तक रूकी रही...तभी वे अचानक मेरे फ्लैट की तरफ पलटे..मेरी नजर मिलते ही मैंने झट से अपने दोनों हाथों से कान पकड़ माफी मांगने लगी...पर वो बिना कोई जवाब दिए वापस मुड़ चलते रहे...

आँखों से ओझल होने के बाद मैं भी वापस आ गई....चाय बना कर सभी को जगाती हुई दी..फिर मैं किचन में घुस गई...श्याम मुझे देखे तो उनका मुंह खुला का खुला रह गया...अंकल भी काफी मेहनत से खुद पर कंट्रोल कर रहे थे...

श्याम नाश्ता करने के बाद रूम में जाते ही मुझे आवाज दिए...मैं अंदर ही अंदर समझ गई थी क्यों बुला रहे हैं..बाहर निकली तो देखी अंकल नहीं है और बाथरूम से पानी की आवाजें आ रही है...मैं मुस्काती हुई अंदर गई...

"आउच्च्च्च्च....छोड़ो ना..क्या कर रहे हैं..."अंदर घुसते ही श्याम मुझे कस के दबोच लिए जिससे मैं उछल पड़ी...पर वो हंसते हुए मेरे गाल काटे जा रहे थे...कितनी भी कोशिश कर ली पर श्याम रूके तो अपनी मर्जी से ही...

श्याम: "गजब की माल लग रही हो डॉर्लिंग...जब से देखा हूँ तब से पप्पू खड़ा ही है...पता नहीं आज दिन भर कैसे रोकूंगा...वैसे मेरे जाने के बाद अंकल तुझे नहीं छोड़ने वाले.."

मैं भला क्या बोलती...बस हंस दी..फिर बोली,"वैसे आप अपने पप्पू का क्या करेंगे आज दिन भर...कहो तो जब तक अंकल अंदर हैं तो शांत कर दूँ.." और अपनी जीभ अपने होंठो पर फेर कर इशारा कर दी कि कैसे शांत करूंगी....

श्याम: "थैंक्स जान, पर लेट हो रहा हूँ वर्ना...वैसे जुगाड़ कर लूंगा मैं...अब चलता हूँ..." कहते हुए गुडबाय किस करते हुए मेरे होंठ से चिपक गए...कुछ देर बाद किस टूटी तो वे अलग होते हुए अपना बैग उठाते हुए बोले,"जान, आज नाइट शो चलेंगे मूवी देखने...तुम दोनों तैयार हो के रहना..."

मैं उनकी बात सुनते ही खुश होते हुए बोली,"थैंक्यू जान, जरूर रहूंगी..पर हाँ बाहर अपने पप्पू की सेवा ज्यादा मत करवाना, मेरे लिए भी बचा के रखना..."

श्याम: "ओके पर आज के लिए सॉरी...कोई ना कोई रंडी जरूर चोदूंगा...तुम हाल ही ऐसी कर दी...पर तुम टेंशन मत लेना,,तुम्हारे लिए तो ये हर वक्त तैयार रहता है..."कहते हुए श्याम बाहर की तरफ निकल गए...पीछे से मुस्कुराती हुई बॉय बोल जल्दी आने कही...

कुछ ही देर में किचन का काम तमाम कर मैं अपने बेडरूम में आ गई..तभी बाथरूम से अंकल तौलिया में निकले और सीधे मेरे पास आ गए...आते ही तौलिया दूसरी तरफ फेंके और अपना लंड मेरे होंठ के पास रख दिए...

मैं हंसती हुई अंकल की आँखों में देखती चूसने लगी..अंकल की आहह निकल पड़ी...आखिर काफी देर से इंतजार में जो थे...तभी अंकल मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए बोले,"सीता,आज शाम को फ्री हो क्या?"

"मैं तो फ्री ही रहती हूँ अंकल..." मैं लंड को हाथ से पकड़ बाहर निकालते हुए जवाब दी और वापस मुंह में डाल चूसने लगे...फिर अंकल बेड पर बैठ गए और मुझे जमीन पर बैठा सर पर हाथ फेरते हुए लंड चुसवाने लगे...

अंकल: "दरअसल आज एक नई गाड़ी लेने जा रहा हूँ...वो अब पुरानी हो गई है तो उसे गांव में दे दूँगा किसी को चलाने...तो आज शाम हम दोनों अकेले घूमने कहीं जाएंगे,थोड़ी पार्टी करेंगे और फिर रात साथ गुजारेंगे हम और सुबह तुम्हें छोड़ देंगे...श्याम को कह देंगे कि एक पार्टी में गए थे,,लेट होने की वजह से रूक गए थे...चलोगी..."

वॉव, मैं तो अंदर ही अंदर काफी खुश हो गई थी...वैसे श्याम मना तो नहीं करते पर इनसे पहले वो ऑफर कर चुके थे मूवी चलने की...सो उन्हें मना नहीं नहीं कर सकती थी...मैं पुनः लंड को हाथ से हिलाती हुई बोली,"थैंक्स अंकल, पर वो क्या है ना..अभी श्याम बोल के गए हैं कि शाम में मूवी चलेंगे सो प्लीज फिर कभी...उन्हें ना नहीं कर सकती..."

अपनी बात कहने के बाद मैं अंकल की ओर देखने लगी...फिर अंकल मेरे सर को पीछे से पकड़ लंड की ओर धकेल दिए, जिससे मेरे मुंह में पुनः लंड समा गई...

अंकल: "ओके जानू, कोई बात नहीं...हम अगले दिन चले जाएंगे..ओके..." अंकल की बात का जवाब मैं तेजी से लंड को चूस कर दे दी..जिससे अंकल की साँसे अब तेज होने लग गई..

फिर कोई बात नहीं हुई...कोई 5 मिनट बाद अंकल तेज आवाज किए और पूरा पानी मुझे पिला दिए..मैं चटकारे लेती लंड के अंदर बाहर सारा पानी चट कर गई...फिर अंकल मेरी चुची पर किस किए और चलने की बात कह कपड़े पहनने लगे...

मैं उनके लिए खाना लगा दी...अंकल तैयार हो कर नाश्ता किए और बॉय बोल निकल गए..फिर मैं भी खाना खाई और पूजा के रूम की तरफ चल दी..पूजा की नींद मेरी आवाज से जैसे ही खुली वो मुझ पर टूट गई...

काफी देर तक किस के बाद मैंने शाम में मूवी चलने की बात बताई, जिसे सुन वो भी काफी खुश हुई..फिर फ्रेश हो खाना खाई और हम दोनों साथ आराम करने एक-दूसरे को बांहों में समेट सो गई...
_______[......क्रमशः]_______ 


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--27

शाम में श्याम जल्दी ही आ गए...फिर हम दोनों तैयार हुए और निकल पड़े श्याम के साथ..खाना बाहर ही खाते...और आज पूजा के साथ मैं जींस-टीशर्ट पहनी थी..वो भी श्याम के कहने पर...

हम दोनों हल्की मेकअप ली थी रात की वजह से...कैम्पस के बाहर सड़क पर एक 4- व्हीलर लगी थी...जिसे देख मैं श्याम की ओर देखते हुए निगाहों से सवाल कर ली...वो बिना कुछ बोले हां में कहते हुए बैठने का इशारा कर दिए...

मैं और पूजा पीछे बैठी और श्याम आगे...फिर गाड़ी चल पड़ी...मामूली सी नौकरी की बदौलत फिलहाल अपनी तो सोच ही नहीं सकती थी...शायद श्याम हमें भाड़े की ही सही पर ढ़ेर सारी प्यार निछावर कर रहे थे ऐसे बाहर ले जाकर...

कुछ ही देर में हम सब एक अच्छे से रेस्टोरेंट के बाहर खड़ी थी...हम तीनों अंदर गए और एक कोने में बनी केबिन में घुस गई...अगले ही क्षण एक स्टाप आया और ऑर्डर ले कर चला गया...मैंने समय देखी तो 7 बज रहे थे...मूवी 8 बजे से शुरू होती है..

करीब आधी खाना खाने के बाद श्याम बाहर की तरफ झाँकें, और फिर सीधे होते हुए तेजी से अपनी जेब से एक दारू की छोटी बोतल निकाले और जल्दी से तीनों ग्लास में उड़ेल दिए...एक ही बार में पूरी समाप्त...वापस खाली बोतल पॉकेट में...

श्याम: "यहाँ अलॉव नहीं है पर मैं जब भी आता हूँ तो अक्सर ऐसे ही मार लेता हूँ...अब जल्दी से तुम दोनों उठाओ....."कहते हुए श्याम अपनी ग्लास उठा लिए...मैं और पूजा एक-दूसरे को देख दबी हंसी हंस दी और फुर्ती से गिलास उठा गटकने लगी...

पैग लगाने से मेरी नसों में खून दौड़ने लगी थी...और फिर खाना खाने लगे...खाना जब खत्म हुई तो हाथ मुंह साफ करने के बाद जब बाहर निकल समय देखी तो ओह गॉड 8:30 बज रहे थे...

"पूजा,साढ़े बज गए...अब मूवी कैसे जाएंगे..."मैं बगल में खड़ी पूजा से बोली जबकि श्याम अभी काउन्टर पर बिल दे रहे थे..पूजा मेरी बात सुनते ही चौंक पड़ी...

पूजा: "क्या...? ये जीजू भी ना...थोड़ी सी पीने चक्कर में सारा मजा किरकिरा कर दिए...यू नो दीदी...मैं क्या-2 सोच के रखी थी कि अंदर जीजू से ये करूंगी,वो करूंगी...कितना मजा आता सैकड़ों पब्लिक के बीच में कर रही होती...ओफ्फ.."

"आने दो फिर पूछती हूँ...जब केवल खाना ही खिलानी थी तो मूवी का बहाना क्यों किए..."मैं भी गुस्से में आती हुई बोली...तभी सामने श्याम आते हुए दिखे...जैसे ही पास आए मैं गुस्से से सवालों की झड़ी लगा दी...बीच-2 में पूजा भी सपोर्ट कर रही थी...

श्याम कुछ बोले बिना मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखे जा रहे थे...जिससे मैं और आग बबूला हो बोली,"ओ हैलो मिस्टर, अभी आप अपने प्यार को अपने पास ही रखिए...बाद में दिखाइएगा...चलिए घर अब..."

और मैं भड़कती हुई पूजा के हाथ पकड़ बाहर कुछ मीटर दूर सड़क की तरफ मुड़ गई...इतने में ही श्याम तेजी से हम दोनों के आगे आ खड़े होते हुए बोले,"सॉरी डिअर, मेरा इरादा ऐसी बेहूदा हरकत की बिल्कुल नहीं थी...पर पीने बाद खाने की रफ्तार धीमी हो गई और समय मालूम ही नहीं पड़ी..."

मैं उनकी बात सुन मुँह बिचकाती हुई उन्हें क्रॉस कर बगल से आगे निकल गई..पर एक बार फिर श्याम हम दोनों के सामने खड़े थे...

श्याम: "जानू, मेरे दिमाग में एक मस्त आइडिया है जो मूवी से भी मस्त मजा देगी..कहो तो सु...." आगे कुछ कहते कि बीच में ही पूजा रोकती हुई बोली,"जरूरत नहीं जीजू...आप अपनी आइडिया अपने गांड़ में रख लो...बॉय..आपको चलनी है तो मेरे पीछे आ जाओ..."

पूजा की बात सुन मैं हंसना चाहती थी जोर की पर चोरी से ही मुस्कुरा कर रह गई...और पूजा के खिंचने से आगे सड़क किनारे तक आ पहुँची...अब बस किसी ऑटो का इंतजार कर रही थी...तब तक श्याम पुनः आगे आते हुए बोले,"ओए होए मेरी तीखी मिर्ची शाली साहिबा...आपकी अदा तो गुस्से में और कयामत बरपाती है...मन तो होती है यहीं पटक के चोद दूँ..."

पूजा गुस्से में आँख लाल पीली करती बोली,"ओके, जींस खोल रही हूँ...मुझे चुदनी है यहाँ सबके सामने..." और फिर पूजा अपनी जींस की बटन खोलने लगी...मैं देखी तो तेजी से पूजा की हाथ पकड़ खींच ली...

आसपास नजर दौड़ाई कि कोई देख तो नहीं रहा..पर यहाँ सब अपने में मस्त था...तभी मेरी नजर सामने एक छोटी सी पान की दुकान पर गई जहाँ से एक आदमी लगातार घूरे जा रहा था...मेरी नजर उससे मिलते ही वो गंदी सी हंसी हंस पड़ा....

मैं उससे नजर हटा श्याम की तरफ देखते हुए बोली,"आपको चलना है या नहीं...अगर नहीं जाना तो प्लीज हमें जाने दीजिए...यहां सब देख रहे हैं..."

मेरी बात सुनते ही श्याम मेरी तरफ आगे बढ़े और बोले,"शाली साहिबा की खुजली मिटाए बिना थोड़े ही जाऊंगा...कुछ ही दूर आगे रेड लाइट एरिया है...चलो वहीं जा के पेलता हूँ तुम दोनों को...सोचो जब तुम कोठे पर चुदेगी तो कैसा फील करोगी...बिल्कुल रंडी की तरह...बोलो पसंद है आइडिया...वहां एक कोठे मालकिन से जान पहचान है, वो कमरा दे देगी..."

एकदम धाँसू...मेरी तो सुन के ही बूर में सनसनी की लहर दौड़ गई...मन ही मन गाली दे रही थी शाले पहले क्यों नहीं बताया... मैं तो तैयार थी...बस पूजा की हाँ जानने उसकी तरफ देखने लगी...पूजा भी रेडी ही थी मुझे मालूम थी पर फिर भी पूछनी जरूरी थी..पूजा की आँखें चमकने लगी थी रजामंदी में पर बोली कुछ नहीं...

हम दोनों को यूँ घूरते देख श्याम बीच में हल्के से टोकते हुए बोले,"चलो रण्डियों, अपने कर्म-स्थल पर..."जिससे हम दोनों एक साथ उनकी तरफ देख हौले से मुस्कुरा दी, जिसके जवाब में वो भी मुस्कुराते हुए आगे की तरफ बढ़ गए...

हम दोनों भी खुशी-खुशी चल पड़ी...तभी पूजा हौले से मेरे कान में बोली,"अच्छा हुआ जो मूवी छूट गई...क्यों?" मैं पूजा की बात सुनते ही हँसते हुए उसकी तरफ देख हाँ में मूंडी हिला दी...तभी पता नहीं क्या सूझी पीछे की तरफ पलटी...

ओह नो...वो पान की गुमटी पर खड़ा व्यक्ति कुछ ही दूरी पर पीछे पीछे चला आ रहा था...मैं पूजा को बिना कुछ बताए आगे बढ़ श्याम के ठीक बगल में हो गई..फिर श्याम से नजरें मिलाती साथ साथ मुस्कुरा दिए...

श्याम किसी को फोन कर रहे थे, पता नबीं किसे...शायद कोठे मालकिन...ओफ्फ...मैं भी ना...किसी दूसरे को भी तो कर सकते हैं ना..पर इस वक्त तो नहीं कर सकते हैं दूसरे को....

श्याम: "राम-राम आंटी जी,क्या हाल है?" तभी श्याम फोन पर बोल दिए..ये तो आंटी को ही कर रहे थे...मैं उनकी तरफ नजर डाली तो वे हमारी तरफ ही देख मुस्कुरा रहे थे...

श्याम: "अपना भी ठीक है आंटी, बस एक छोटा सा मदद चाहिए आंटी अभी.."
श्याम कान में ही फोन सटा कर बात कर थे जिससे मैं उधर की आवाजें नहीं सुन रही थी...

श्याम: " आंटी एक रूम चाहिए अभी...दो मस्त लौंडिया हाथ लगी है.." श्याम की बात सुनते ही मैं और पूजा एक साथ मुस्कुरा पड़ी...इसकी वजह थी वो छुपा रहे थे कि मैं उनकी बीवी और पूजा बहन थी...

श्याम: "नहीं आंटी लोकल नहीं है...बाहर से आई है...और कल चली जाएगी..आप तो जानती ही है कि मुझे चोदने का कितना शौक है...और लोकल में तो सब को कर ही चुका हूँ...तो सोचा...."

हम्म्म...जनाब तो एक दम तेज दिमाग लगा दिए थे...अब शायद हम दोनों को भी इस बनावटी हालात को मैनेज करनी होगी आंटी के सामने...मैं और पूजा एक-दूसरे को ताकते हुए फैसला भी कर ली थी स्थिति को मैनेज करने की...

श्याम: "अच्छा आंटी 10 मिनट में पहुँच रहा हूँ..फिर बात करते हैं...बॉय.." और फिर श्याम फोन रख दिए...फोन रखते ही श्याम हँस पड़े जिससे हम दोनों भी अपनी हंसी नहीं रोक पाई...

तभी श्याम की नजर एक शोरूम पर पड़ी..वे हम दोनों को उधर चलने कह बढ़ गए..ये रेडिमेड कपड़ो की बड़ी सी शोरूम थी..हम तीनों अंदर पहुँचे...कस्टमर एक भी नहीं थे..यानि ये भी कुछ देर में बंद होने वाली थी..

श्याम काउंटर के पास जाते ही हेडस्कॉर्फ दिखाने बोले...हम्म्म..समझ गई...ताकि कोई पहचान ना ले दूसरे दिन हमें...कई तरह की हेडस्कॉर्फ सामने बिखेर दिया उसने...हम दोनों ने एक काली और एक पिंक आसमानी कलर की चूज की और अपने चेहरे ढ़क ली...श्याम बिल पे किए और बाहर निकल गए...

बाहर आते ही मेरी नजर उस आदमी को ढूढ़ने लगी जो कुछ देर पहले पीछा कर रहा था...पर वो दूर दूर तक नदारद था..चलो अच्छा हुआ पीछा छूटा कमबख्त से...ख्वामोखाह परेशानी में डाल रहा था...

करीब पाँच मिनट के बाद हम सब एक गली की तरफ मुड़ गए जो गुप्प अँधेरा था...आगे कुछ दूरी पर एक घर में जल रही लाइट से हल्की रोशनी सड़को पर पड़ रही थी पर वो उतनी तेज नहीं थी कि साफ साफ कुछ दिखाई दे सके...

उस घर के समीप पहुँचते ही मेरी नजर उधर घूम गई, पर वहाँ बिल्कुल सन्नाटा था...घर भी कोई खंडहर लग रही थी...बस लाइट की वजह से ही समझ सकती थी कि कोई रहता है...खैर इन बातों को पीछे छोड़ आगे चल पड़ी...

डर भी लग रही थी इस वीरानी अँधेरे से...कुछ दूर और चली तो श्याम बाएँ की ओर मुड़ गए...हम्म्म...सामने काफी दूर तक सड़क नजर आई अब...सड़कों पर स्ट्रीट लाइट तो दिख रही थी पर जल एक भी नहीं रही थी...वो तो हर घर से निकल रही रोशनी सड़कों पर हल्की उजाला ला रही थी....

हाँ जहाँ मुड़ी वहाँ की जरूर जल रही थी जिसके नीचे खड़े 4 लोग आपस में बात कर रहे थे...तभी उनमें से एक बोला,"ऐ हिरो... रूक.."

मैं और पूजा तो बक सी रह गई और झट से रूक गई...जबकि श्याम बिल्कुल ही निडर बन आराम से रूकते हुए उसगी तरफ बढ़ गए...मैं कुछ अनहोनी की डर से श्याम को रोकना चाहती थी पर वो तब तक वो उसके सामने जाते हुए कड़क आवाज में पूछे,"क्या बात है?"

तभी उनमें से एक बोला," कहाँ से लाए दोनों को...जरा देखूँ तो कौन है..." कहते हुए वो मेरी तरफ बढ़ा जिससे श्याम तुरंत ही अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा रोकते हुए बोले,"देखने से पहले ये जान तो ले कि ये किस कोठे की है...फिर देख लेना इसकी सूरत..."

वो रूकता हुआ श्याम की घूरता हुआ पूछा,"कहां की है.." तभी श्याम खिसक के उसके ठीक सामने जाते हुए दांत पीसते हुए बोले,"तुम सबकी नानी शबनम आंटी की है ये.." फिर क्या...इतना सुनते ही उसके चेहरे की रंगत हवा हो गई और वो पीछे हो गया बिना कुछ आवाज किए....

जिसे देख श्याम हल्के से मुस्कुराए और फिर हम दोनों को इशारा कर चल दिए...हम दोनों भी तेजी से मुड़ते श्याम के बगल में हो गई..फिर श्याम से बोली,"अगर कोई पुलिस वाला रहता तो..."

श्याम मेरी डर को भांपते हुए नजर घुमाते हुए बोले,"जानू, ये शबनम आंटी के डर से पुलिस क्या, कोई एस.पी. भी इधर आने से डरता है...इसकी एक वजह है आंटी समय पर उसका हिस्सा पहुंचा देती और दूसरी यहाँ का सबसे मोस्ट वांटेड अपराधी से आंटी की जान पहचान..."

हम्म्म्म...मतलब पावरफूल हैं आंटी...मैं उनकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाई या कुछ और पूछ नहीं पाई...तभी मेरी नजर दोनों तरफ से आ रही रोशनी का पीछा करने लगी..घर अधिकतर दो मंजिला थी...

कुछ पुरानी तो कुछ ठीक ठाक...और सब घरों में कुछ औरतें अपनी खुली जिस्म लिए बैठी थी...एक-दो की तो आवाज भी सुनाई पड़ी.."आ जाओ साब, आपकी उस दोनों से ज्यादा मजे दूँगी और पैसे भी कम लगेंगे...आ जा..."

पर श्याम बिना उसकी तरफ देखे बढ़े जा रहे थे...कुछ औरतें जो मालकिन टाइप लग रही थी वो गौर से हम दोनों की तरफ घूरे जा रही थी..शायद पहचानने की कोशिश कर रही थी...तभी श्याम एक तीन मंजिले घर की तरफ रूख कर दिए...

ये भी तो उतनी ढ़ंग की नहीं थी...पर हाँ खंडहर बिल्कुल नहीं लगती थी...गेट पर खड़े दो मर्द बिल्कुल पहलवान की तरह खड़े थे...वो श्याम को देखते ही बोला,"क्या साब, क्या हाल है..."

श्याम मुस्काते हुए बोले,"एकदम झकास उस्मान भाई..." तभी उनमें से दूसरा बोल पड़ा,"भाई, आज तो छोकरी साथ लाए हो...कहाँ की है..." जिसे सुन श्याम रूके और फिर कुछ सोचते हुए हम दोनों की तरफ की आए...अपना हाथ बढ़ा एक झटके में हेडस्कार्फ खींच दिए...

श्याम: "पहचानो तो..." वे दोनों एक टक पहचानने की बजाए भूखी नजरों से घूरने लगे...मैं ज्यादा देर तक नजरे नहीं मिला पाई उससे..तो नजरें आगे की तरफ कर दी..आँखें चुराती तो समझ जाते की ये रंडी नहीं है...फिर कुछ देर बाद श्याम बोले...

श्याम: "उस्मान भाई...ये बाहर की लौंडिया है..खास अपने लिए बुलाया हूँ और सोचा आंटी को भी दिखा दूँ ताकि वो भी ऐसी कड़क माल रखें..." जिसे सुन दोनों हकलाते हुए हाँ में हाँ मिला दिए, पर कुछ बोल ना सके...

फिर श्याम को कुछ शरारत सूझी..वो मेरी बांह पकड़े और उससे सटाते हुए बोले,"छू कर देख लो उस्मान भाई...एकदम घरेलू माल है...बिल्कुल आपकी पसंद की है...एक दिन आंटी से छुट्टी ले कर फुर्सत में रहना...बुलवा दूंगा खास आपके लिए...आप आधे पैसे दे देना...बस...."

उफ्फफ...क्या तगड़ा था वो...सटते ही उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रख कस लिया अपने से...लुंगी में से उसका धारदार लंड सीधा मेरी जींस को फाड़ती चुत तक पहुंच गई...और उससे भी ज्यादा उत्तेजित तो इस बात से हो गई कि कैसे मेरे पति मुझे रंडी बना कर पराये मर्द को सौंप दिए...

अचानक उसने अपना हाथ मेरी गर्दन पर रख हौले से नीचे करने लगा..मेरी तो हालत खराब हो गई खुरदुरे हाथ की छुअन पा कर...मैं अपनी बंद होती आँखें खोलने की कोशिश करने लगी जो मदहोशी से बंद हो रही थी...ऐसे में मैं बिल्कुल नशीली लग रही थी...

तभी मेरी चुची को कुछ रगड़न महसूस हुई...क्या ये मेरी चुची....ओह नो...तभी उसकी उंगली मेरी टी-शर्ट के गले पर महसूस हुई...ये क्या...जब उंगली ऊपर ही है तो अंदर क्या डाल दिया इसने जो रगड़ती हुई ऊपर की तरफ बढ़ रही है...

मैंने काफी कोशिश कर आँखें नीचे कर अपनी चुची पर की...ओह..ये तो मेरी टी-शर्ट के अंदर घुसी मंगल सूत्र को बाहर खींच रहा था..तभी उसने मंगलसूत्र पूरी बाहर कर मेरी दोनों चुची के बीच रख मेरी चुची दबा दिया...

मैं सिहर सी गई इस चुभन से...तभी उसने मुझे पलट मेरी गांड़ पर अपना लंड चिपका दिया और अपना हाथ मेरी चुची के ठीक निचले हिस्से पर रखते हुए बोला,"साब, अब देखो...एकदम मेरे ख्यालों वाली..."

मैं उसके सीने से चिपकी श्याम की तरफ देख मुस्कुराने लगी..जबकि पूजा को वो दूसरा आदमी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाल देख रहा था...श्याम की नजर मुझ पर पड़ते ही मवो मुस्कुरा कर वाव कह पड़े...

उस्मान: "साब, अब ले जाओ दोनों को वरना आप का पैसा बरबाद हो जाएगा...पूरी रात छोड़ूंगा नहीं इसे..."कहते हुए उसने मुझे श्याम की तरफ धकेल दिया..मैं सीधी श्याम के बांहों में आ गई...श्याम हंसते हुए ओके कहे और पूजा को चलने बोले...

पूजा पूरे मस्त हो गई थी पर मजबूरी थी छोड़ने की, मेरी हालत भी बिगड़ ही चुकी थी...मन मसोस कर वो अलग हुई और धीरे से उस आदमी के होंठ पर किस कर अलग हो गई बिल्कुल रंडी की तरह जो कहीं नहीं शरमाती...

फिर श्याम के हाथों से हेडस्कॉर्फ ली और उनके साथ सीढ़ी की तरफ चल दी...सीढ़ी चढ़ते जब वापस उस्मान की तरफ देखी तो मेरी हंसी निकल पड़ी..वो दोनों अपना-2 लंड बाहर निकाल हिला रहा था...मुझे हंसते देख पूजा भी पलट गई...

पूजा के पलटते ही वो दोनों अब हमारी तरफ घूर रहे थे...जिसे देख पूजा एक फ्लाइंग किस दोनों तरफ उछाल दी..जिससे वो कराहते हुए अपना पानी छोड़ दिए...फिर हम दोनों आगे की तरफ भागती हुई चढ़ने लगी...
_____[....क्रमशः]_____


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--28

मैं और पूजा कुछ ही पलों में आंटी के सामने खड़ी थी...आंटी एक बहुत ही गद्देदार डबल बेड पर दीवाल के सहारे बैठी पान चबा रही थी...उनका रौबदार चेहरा देखते ही हम दोनों एक-दूसरे का हाथ डर से पकड़ लिए...

श्याम जाते ही आंटी के बगल में लगी कुरसी पर बैठ गए...मेरी नजर तभी दूसरी तरफ गई जहाँ बेंच पर दो लड़की बैठी थी...बिल्कुल बदसूरत...शायद इसलिए दोनों अभी तक बैठी ही थी...

"ऐ छोकरी, जा के उधर बैठ ना..." आंटी हम दोनों को उसी बेंच पर बैठी लड़की की ओर इशारा करती हुई बोली...जितना दिखने में भयानक लग रही थी, उयये भी डरावनी तो उनकी आवाज थी...पलक झपकते ही हम दोनों उन दो लड़कियों के बगल में थी...

उफ्फफ...कितनी गंदी परिवेश में रहती है ये दोनों...मैं एक नजर बगल में बैठी दोनों लड़की पर डाली,फिर सीधी हो आंटी की तरफ देखने लगी...श्याम के साथ वो हंस हंस के पहले तो हाल समाचार पूछी... शायद श्याम भी कई दिनों बाद आए थे...

फिर हम दोनों की तरफ इशारा करती हुई पूछी,"कहां से फंसा के लाए इन दोनों चिड़िया को..दिखने में तो सुंदर है..लगती नहीं कि कहीं कोठे पर रहती है..." श्याम आंटी की बात सुन हम दोनों की तरफ मुड़ कर देखने लगे...

श्याम: "बिल्कुल सही आंटी...ये कोठे पर नहीं रहती...ये एक होटल के सम्पर्क रहती है...फिर आपकी मर्जी आप होटल में करें या फिर अपने घर बुला ले...बंगाल की है दोनों...वहां एक दोस्त की दोस्ती उसी होटल वाले से है तो उसी ने भिजवाया है..सुबह चली जाएगी..."

आंटी: "ओहो...तो ये बात है...हाई प्रोफाइल है..." कहती हुई आंटी मुस्कुरा पड़ी जिसके साथ श्याम भी हंस पड़े...हम दोनों अपने बारे में ऐसी बाते सुन काफी कसमसा रही थी...बूर में खुजली काफी बढ़ गई थी...

तभी आंटी हम दोनों को अपनी तरफ आने का इशारा की...थोड़ी डर लगी कि पता नहीं क्यों बुला रही है...पर बिना कोई सवाल किए उनके सामने जा कर खड़ी हो गई...

आंटी: "देख,पैसे तो मिल ही गई है तो मैं कह रही थी कि अब इतनी दूर आ ही गई हो तो कुछ मजे भी ले लो...आज मेरे कोठे की रंडी के परिवेश में चुदवा ले...काफी मजा आएगा...और दिन तो जींस पहन के चुदती ही,आज नया करने का मौका मिला तो इसका भी मजा ले लो..."

मैं आंटी की बात से भौचक रह गई और पूजा की तरफ देखने लगी...पर पूजा को जैसे ये मंजूर थी...वो बस मुस्कुरा रही थी...

"तुम्हें कोई दिक्कत है क्या..." तभी आंटी की तेज आवाज मेरे कानों में गूँजी, जिससे मैं हड़बड़ती हुई नहीं में मुंडी हिला...तब आंटी "हम्म्म" करती हुई मुझे ऊपर से नीचे तक देखी...

"ऐ झुनकी,जा इन दोनों को अंदर ले जा और वो कपड़े दे देना...जा पहन के आ जा..."आंटी सामने बैठी एक लड़की को बोलती हम दोनों को जाने कह दी...वो लड़की उठी तो हम दोनों उसके पीछे हो लिए...

अंदर की रूम कुछ ही दूर गलियारे क्रॉस कर थी...इन गलियारे से गुजरते जब दूसरे रूम के गेट के पास से गुजरती तो अंदर से चुदाई की आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी...कुछ के तो गेट भी खुली थी जिससे अंदर हो रही चुदाई साफ दिख रही थी....

अंदर पहुंचते ही झुनकी ने दो ड्रेस सामने आलमारी में से निकाल कर दे दी...मैंने ड्रेस उठाई...ड्रेस देखते ही मेरी भौंह सिकुड़ गई..एकदम मैली-कुचली छोटी सी चोली और घुटने तक ही आने वाली छोटी सी घांघरा..वापस रख टी-शर्ट जींस खोलने लगी...

मैं और पूजा कुछ ही पलों में एकदम नंगी खड़ी थी...सामने एक अंजान लड़की थी,जिसकी परवाह किए बिना ही नंगी हो गई...अब तो जब तक यहां हूँ,शर्म को सोच भी नहीं सकती थी...मैंने घांघरे पहनती हुई झुनकी से पूछी,"आज तुम खाली ही हो क्या...?"

झुनकी: "हाँ, शाला अपुन की फेस मर्द लोग को पसंद ही नहीं आती...देर रात तक अगर कोई आ जाता है तो खाने के पैसे मिल जाते हैं, नहीं तो भूखा ही रहना पड़ता...आज भी लगभग यही हालत है..."

मैं उसकी बात सुन थोड़ी भावुक जरूर हो गई, पर बिना कुछ बोले अपने काम में लग गई...चोली तो इतनी तंग आ रही थी कि मानों सीने की हड्डी टूट रही हो...और आधी चुची तो बाहर ही निकली थी...पूजा की भी यही हालत थी....

जींस टीशर्ट वहीं पर तह लगा कर रख दी और झुनकी को चलने की बोल दी...झुनकी के साथ हम दोनों बाहर की तरफ निकल गई...काफी अजीब लग रही थी ऐसे कपड़ों में...खुद को नंगी ही महसूस कर रही थी..

कुछ ही देर में हम सब आंटी के करीब थी..जहाँ श्याम के साथ एक और व्यक्ति बैठा था..मैं तो शर्म से लाल हो गई अंदर ही अंदर. जिसे बाहर नहीं निकलने दी...वो भी हिष्ट-पुष्ट शरीर वाला था श्याम की तरह पर रंग का पूरा काला था...

मैं उस पर एक नजर डाली और फिर सीधी उसी बेंच पर आ बैठ गई एक रंडी की तरह...तभी उस काले की नजर हम पर पड़ी...वो एकटक देखता ही रह गया...उसके मुख से वाह निकल पड़ी...

"वॉव आंटी,क्या माल मंगाई हो...आंटी इसी में एक को दे दो आज...मजा आ जाएगा..." वो काले हम दोनों की आधी नंगी चुची को देख जीभ फेरता हुआ बोला...जबकि श्याम भी हम दोनों को ऐसे रूप में देख अपने लंड पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे...

आंटी: "अए-हए ठिकेदार साहब...पानी निकल गया क्या...पूरे 3 हजार लेती है एक...चाहिए तो रूपए दो मेरी कमिशन सहित और ले जाओ किसी एक को...काहे कि एक तो श्याम ले जा रहा है...दोनों ले जाता ये पर तुम बोल दिए तो नाराज नहीं करूंगी तुम्हें..."

ये क्या..सौदा भी होने लग गई...मैं और पूजा एक दूसर को देख श्याम की तरफ देखी...हम दोनों हैरान थी...यहाँ सिर्फ श्याम के साथ करने आई थी पर यहाँ तो सच की रंडी बन गई..श्याम हम दोनों की तरफ देखते हुए आंटी से बोले....

श्याम: "आंटी, एकदम सही बोली..जैसा मैं,वैसा ये...ये भी चाहते हैं इनमें से ही एक को तो जरूर दो...वैसे ठिकेदार साहब, मैं इन दोनों को सिर्फ अपने लिए मंगाया था...पर अब आप भी कह रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं हमें...पसंद कर लो कोई..."

मतलब श्याम भी चाहते थे पूरे मजे देने और लेने की...हम दोनों श्याम की बात सुन सोची जब इन्हें कोई दिक्कत ही नहीं तो मैं क्यों ज्यादा सोचूं...हाँ, अब नए लंड चखना किसके नसीब में है, वो देखना शेष है...

तब तक वो काला तेजी से हम दोनों के पास आ गया..फिर उसने एक साथ हम दोनों को खड़ा किया और ऊपर से नीचे तक शरीर के एक-एक अंग को गौर करने लगा कि कौन बेस्ट है...वह हम दोनों को देख गोल गोल चक्कर लगाने लगाने...

एक चक्कर लगाने के बाद वो हंसता हुआ बोला,"यार कुछ समझ ही नहीं आता कि कौन बेस्ट है..." जिस पर आंटी और श्याम हंस पड़े...हम दोनों की भी मुस्कानें आ गई होठों पर...तभी आंटी बोली,"अरे तो ज्यादा क्या सोचता है...कोई एक ले ले..."

तभी वो हम दोनों के बीच में घुसा और अंतिम बार एक-एक नजर हम दोनों पर डाला और मेरे कंधों पर हाथ रख सीधा एक चुच्ची को मुट्ठी में कसता आगे बढ़ श्याम के पास रूकते हुए बोला,"दोस्त,मैं इसे ले जा रहा हूँ..तुम उसे ले जाओ...काफी मुश्किल है इन दोनों में से एक को चूज करना..."

श्याम ओके कहते हुए उठे और पूजा को भी ठीक मेरी तरह चुची पकड़ कंधे पर हाथ रख ले आए...

आंटी: "ऊपर एक कमरा खाली है कोने वाली...उसी में चले जाओ दोनों...और सब तो बुक है..."

श्याम: "फिर तो और मजा आएगा आंटी...एक ही कमरे में...मन हुआ तो अदल बदल कर लूंगा...हा..हा..हा..." और फिर सब हंस पड़े..हम दोनों भी हल्की दबी हंसी हंस दी....

कुछ ही देर में हम दोनों अपनी चुचियाँ मसलवाते रूम में घुस गए...रूम में आते ही श्याम पूजा को स्मूच किस करने लगे...जिसे देख मैं गरम हो अपने पार्टनर की तरफ देखने लगी...

"ओए, ये क्या कर रहा है...ये सब रण्डियाँ पता नहीं कैसा-कैसा लण्ड अपने मुंह में लेती है और तुम इसे किस कर रहे हो...संभल के करो यार..कहीं कुछ हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे..."तभी काले आदमी श्याम को टोकते हुए बोला...हम दोनों तो गस्से से लाल हो गई पर क्या कर सकती थी...अगर डगह दूसरी होती तो इसे पास फटकने भ नहीं देती...

श्याम किस रोकते हुए बोले,"क्या बोलते हो यार...ये औरों की तरह गंवार रंडी लगती है क्या जो खुद को ढ़ंग से साफ भी नहीं रखती...ये शिक्षित हैं जनाब जो इंफेक्शन का पूरा ख्याल करती है और उससे हर वक्त बची रहती है...तभी तो इतने पैसे दिए हैं कि हर तरह से मजे लूँ...यहाँ की रंडी की तरह नहीं जिसे सिर्फ चोदो वो भी कंडोम लगा के...समझा कुछ..."

श्याम की बात उसे बड़ी तेजी से समझ आ गई और बिना कोई जवाब दिए अपना कड़क होंठ मेरे नर्म होंठो पर रख दिया..ओफ्फ्फ...कितनी खुरदुरी लग रही थी..मैं इस खुरदुरेपन से तुरंत ही अपनी बूर से पानी छोड़ने लगी...

कुछ ही पलों में मेरी चोली खुल गई और नंगी चुची उसके हाथों में समा गई...वो पूरी दरिंदगी से चुची मसलता हुआ मेरे होंठ को तरबतर कर रहा था...

कोई 5 मिनट तक चुसाई रगड़ाई करने के बाद वो किस तोड़ते हुए बोला,"मादरचोद, मेरा लंड दर्द करने लगा...पहले इसका दर्द कम करो चूस के...फिर किस करते हुए चोदूंगा.." और उसने तेजी से अपने कपड़े खोल कर फेंक दिए...

इस बीच मेरी नजर पूजा की तरफ गई जहाँ वो दोनों अभी भी किस में डूबे हुए थे...पर अब वो बेड पर थे लेटे...पूजा की भी चुची नंगी थी जिसे श्याम मसले जा रहे थे...अगले ही पल अचानक मेरे बाल जोर से नीचे की तरफ खिंची और मैं चीखती हुई धम्म से नीचे बैठ गई...

मेरी चीख से श्याम और पूजा अचानक ही किस तोड़ते हुए मेरी तरफ देखे..तब तक काले आदमी का कोयलों से भी काली और धनुषाकार विकराल लंड मेरी गोरी-चिट्टी मुंह में अकड़ने लगी...मैं अपनी मुंह को आगे पीछे कर इस टेढ़े लंड को एडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी...

मेरे मुंह में लंड को देख पूजा उठी और एक ही प्रयास में अपने भैया का पूरा लंड गटक गई...और फिर अपने मुख से अपने भैया के लंड की सेवा में जुट गई...

तभी इधर इस काले ने अपने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ा और मेरी मुंह में ही कस कस रे धक्के लगाने लगा और ढ़ेर सारी गंदी गंदी गाली सुनाने लगा...बगल में पति के सामने गाली सुन मैं काफी गरम हो गई और गूं गूं की आवाज तेज कर दी ताकि श्याम भी सुने कि उनकी बीवी आज रंडी बन के चुद रही है कोठे पर...

कुछ ही देर में टेढ़ी लंड से मेरी मुंह दुखने लगी...उसका लंड मेरे मुख में और टेढ़ी होती जा रही थी जिससे अब ऐसी महसूस हो रही थी कि मेरी तालु में छेद हो जाएगी...

अब वो धक्के नहीं लगा रहा था...मैं इतनी देर में दो बार पानी बहा चुकी थी...और मैं अपने हाथ उसके अण्डों पर रख खुद ही आगे पीछे हो रही थी...मेरी जीभ उसके सुपाड़े पर घिसती तो वह कराह उठता...तभी वो एक गहरी चीख के साथ दांत पीसते मेरे सर को झटक अपने लंड से दूर कर दिया...

मैं अपनी जीभ ललचाती हुई ऊपर की तरफ उसकी आँखों में देखने लगी...वो झड़ा नहीं था पर उसके लंड के ऊपरी भाग से प्रीकम साफ दिख रही थी बहती हूई और पूरा लंड मेरी थूक से भींगी...

वो हांफता हुआ मेरी तरफ लाल आँखें किए देखते हुए बोला,"मस्त रांड है तू तो...क्या चूसती है शाली...नस नस ढ़ीला कर दिया...आज पहली बार तेरी मुंह में ही झड़ने के कगार पर था...चल बेड पर अब, देखता हूँ मेरा लंड तेरी बूर को कितना सह पाता है..."

मैं इस खेल में अपनी जीत देख गदगद हो गई और उठती हुई घाघरे को अपनी कमर से वहीं पर नीचे कर दी और बेड की ओर चल दी...बेड कोई गद्देदार नहीं थी...बस एक पतली सी चादर बिछी थी जिस पर इस वक्त मेरे पति अपनी बहन को अपना लंड चुसवा रहे थे...वो दोनों बीच में थे...

मैं उनके पास पहुँची और पूजा की पीठ पर हाथ रखती हुई बोली,"पूजा, उधर खिसको...लेटना है हमें.." पूजा मेरी बात सुन लंड से मुंह हटा सीधी हुई और मुस्काती हुई बोली,"ओके दीदी..." जबकि श्याम मेरी नंगी गोरी जिस्म को देखे जा रहे थे जिसे एक काले भुजंग और चौड़ी छाती वाले नंगे मर्द ने पीछे से पकड़ सहला रहा था...उसका काला लंड मेरी गांड़ के नीचे से होती ऊपर की तरफ घूम के गोरी बूर पर ठुनके लगा रहा था...

श्याम खिसकने के बजाए उठ गए और पूजा को अपनी जगह पर लिटाते हुए बोले," तू भी बहुत सेवा की अपने मुख से...अब अपनी बूर से मेरे लंड की सेवा कर मादरचोद पूजा रंडी..." पूजा के साथ साथ मैं भी उसके बगल में हल्की हंसी हंसती लेट गई...

फिर दोनों एक साथ अपना-2 लंड पकड़ हम दोनों की बूर पर रख रगड़ने लगा...अपना लंड रगड़ते हुए वो काला आदमी पूछा,"और तेरा क्या नाम है कुतिया..? " मैं लंड की गरमी बूर पर पा आहें भरती हुई "सीता" बोली...

तभी श्याम बोले,"ये दीदी कहती है तुम्हें...तुम दोनों सगी बहन हो या फिर धंधे में बनी हो..." हम दोनों की तो हंसी भी निकल रही थी कि शाला कितना एक्टिंग करता है...इसे तो फिल्मों में रहना चाहिए... तभी पूजा सिसकती हुई बोली,"हाँ,हम सगी बहन हैं..."

पूजा की बात खत्म होते ही दोनों मर्द एक साथ मेरे शरीर पर दबाव डालते अपना लंड जड़ तक पेल दिए...हम दोनों एक साथ चीख पड़ी...ये सच्ची वाली दर्द की चीख थी...अपने दर्द को कम करने मैं और पूजा एक दूसरे को किस करने सगी...

"तभी तो शाला मैं कन्फ्यूज हो गया चूज करने में...वाह मजा आ गया यार...हम दोनों एक ही बेड पर दो सगी रंडी बहन को चोद रहा हूँ..." मजे में डूबता वो काला आदमी मेरी बूर में धक्का लगाते हुए बोला...

"हाँ यार..और शाली अपनी बूर का भी काफी मेंटेन करती है..इतनी कसी बूर आज तक किसी रंडी की नहीं देखी..." श्याम बगल में पूजा को धक्के मारते हुए बोले...जिससे वो आदमी हाँ में अपनी सहमति कर दी...

कुछ देर तक इसी तरह मैं और पूजा चीखनी बंद कर, सिसकती हुई चुदती रही..और दोनों मर्द एक साथ गाली बकते हुए चोदे जा रहे थे...हर धक्के पर बेड चरमरा जाती थी...नीचे की चादर कब सिमट गई मालूम नहीं..हम दोनों अब बेड की लकड़ी पर थी जो चुभ रही थी...पर ये चुभन बूर में डाती लंड के माफिक कुछ भी नहीं थी...

तभी अचानक से मेरा ग्राहक मेरी बूर से अपना लंड खींचा और बेड से उतर गया..मैं उसकी तरफ प्यासी नजरों से देखने लगी कि क्यों चला गया...फिर वो अपनी पेंट से एक 500 का नोट निकाला और वापस आते ही मेरी बूर में लंड पेलता हुआ बोला,"आज मैं बहुत खुश हुआ तेरे से...ले अपना इनाम..." और फिर उसने 500 का नोट मेरे मुंह में फंसा दिया...मैं नशीली आँखों से मुस्काती हल्के दांतो से नोट दबा ली...

उधर श्याम भी देखा देखी एक 500 का नोट पूजा के भी मुंह में फंसा दिए...अब हम दोनो रंडी के मुंह में बूर की इनाम थी...और फिर लगे दोनों धड़ाम-2 शॉट मारने...हम दोनों की नस ढ़ीली हो गई करारे शॉट से...

काफी देर तक पोज बदल बदल कर चोदते रहे...कभी कुतिया बनाकर तो कभी घोड़ी बनाकर...कभी मुझे नीचे करते तो कभी खुद नीचे रहते...इन सब के दौरान नोट एक बार भी मुंह से नहीं हटाई...जिससे वो दोनों और जोश से पेलते...

अंततः उनका पतन हो ही गया...जीत की पतन थी ये...एक साथ दोनों चीखते हुए हम दोनों की बूर में अपना पानी उड़ेलने लगे...बूर में जाती गर्म पानी से हम दोनों पूरी तरह बेहोश हो गई और नोट मेरे मुख से निकल गालों बगल में गिर गई...पूजा भी बेहोश हो गई थी...

और हम दोनों बेहोशी की हालत में ही फ्रेंच किस कर रही थी..और दोनों मर्द पूरा लंड खाली करने के बाद औंधें मुँह लद गए हमारे शरीर पर...काफी देर तक सुस्ताने के बाद जब हम सब उठे तो वो काला आदमी मेरे होंठों पर किस करता हुआ थैंक्स बोला...पता नहीं क्यों...शायद आज वो पूरी तसल्ली से चोदा और खुश हुआ इसलिए...

फिर वो अपना कपड़े खोज पहनते हुए बोला,"गजब की हो यार तुम दोनों...लग ही नहीं रहा था कि रंडी चोद रहा था आज...बिल्कुल बीवी या gf की तरह महसूस हो रही थी...एक ही बार में पस्त कर दी...अब तो 5 दिन तक आराम से मस्ती में रहूँगा..."

श्याम भी हाँ कहता हुआ अपने कपड़े पहनने लगे..हम दोनों भी मुस्काती हुई उठी और कपड़े पहनी और सब साथ निकल गए...

_____[....क्रमशः]_____


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--29

हम चारों अस्त-व्यस्त खुद को ठीक करते हुए आंटी के पास पहुँच गए...आंटी हम सब की तरफ देख मुस्कुरा रही थी...उसने उस काले की तरफ देख बोली,"कैसी थी टेस्ट? दिल खुश हुआ कि नहीं..."

"पूछो मत आंटी, सीधा स्वर्ग में पहुंच गया था...एक ही बार में पस्त हो गया..."काले आदमी ने अपनी व्यथा कहते हुए कुर्सी पर बैठ गया...मैं और पूजा कपड़े चेंज करने चेंजिगरूम की तरफ जाने से पहले इनाम के पैसे आंटी की कर दी...

आंटी: "अरे वाह..तोहफा भी मिल गई..बहुत ज्यादा खुश कर दी क्या रे छोरी.." आंटी की बात का कोई जवाब सिर्फ मुस्कुरा कर दी और वापस चेंजिग रूम की तरफ बढ़ गई...कुछ ही पलों में हम दोनों अपने कपड़े पहन चलने के लिए आंटी के पास खड़ी थी...

आंटी: "ऐ, तू मेरे यहाँ काम करेगी...तेरे बंगाल से ज्यादा पैसे दिलवाउंगी दोनों को...यहां सब गोरी चमड़ी के दिवाने होते हैं..." मेरी तरफ देख आंटी पूछी...मैं उनकी बात सुन पूजा की तरफ देखने लगी...

"नहीं आंटी, मैं यहां नहीं रह सकती...काफी दिनों से इनके दोस्त कह रहे थे तो बड़ी मुश्किल से शादी का बहाना बना आई हूँ...सुबह तक यहाँ से निकल लूंगी नहीं तो मेरे शकमिजाजी पति हम दोनों की खैर नहीं छोड़ेंगे..."श्याम की तरफ देख मुस्काती हुई मैंने सरासर इस नाटक में भागीदरी कर ली...जिससे श्याम मंद मंद कुटिल हंसी हंस रहे थे...

आंटी:" ओह...मतलब पति प्यास नहीं बुझाता तो चोरी से करती है...अच्छा है...प्यास भी बुझ जाती और पैसे भी..." आंटी कहते हुए पैसे की बंडल मेरी तरफ बढ़ा दी जो काले आदमी ने दिए थे...मैंने पैसे लिए और उनमें से इनाम की राशि निकाल बेंच पर बैठी दोनों लड़की की तरफ बढ़ा दी...

सब अचानक मेरी इस हरकत से भौचक्के हो देख रहे थे..उन दोनों को भी विश्वास नहीं हो रही थी..वे बस मेरी तरफ टकटकी लगाए घूरे जा रही थी...वो लेने के हाथ ही नहीं खोल रही थी तो मैंने खुद आगे बढ़ वो रूपए उसकी चोली में घुसेड़ती हुई बोली...

"जब काम नहीं मिली तो भूखी थोड़े ही रहेगी..., मदद के तौर पर रह ही रख लो...अपनी बिरादरी की है तो ऐसे नहीं देख पाई...चलती हूँ अब..अपना ख्याल रखना..."कहती हुई मैं वापस मुड़ी और श्याम से चलने बोली...

पर सब तो बस घूरे ही जा रहे थे...बिना कोई जवाब दिए श्याम उठ गए...और वो काला आदमी सबसे पहले ही निकल गया...आंटी भी पता नहीं क्यों पहली बार बेड से उतरी और बोली,"रूको,गाड़ी मंगवाए देती हूँ...स्टेशन तक छोड़ देगा..."

मैं मना की पर वो नहीं मानी...कुछ ही देर में गाड़ी में बैठ हम तीनों आंटी से विदा ले स्टेशन पर आ गए...गाड़ी के वापस जाते ही श्याम ने एक गाड़ी की और एक घंटे में हम घर पहुंच गए...घर पहुँचते ही हम सब ने खूब हंसी आज की यादगार मूवी को याद कर....फिर हम तीनों एक ही बेडरूम में घुस पसर गए...

सुबह में घंटी की तेज आवाजों ने मेरी नींद तोड़ ती..मैं उठी तो ये क्या...श्याम पूजा पर चढ़े अपना लंड उसकी बुर में पेले जा रहे थे और पूजा भी मस्ती में चिल्लाए जा रही थी...मैं तो गुस्से से भर गई कि बेल कब से बज रही है और ये दोनों चुदाई में लगे हैं...

मैंने श्याम की पीठ पर एक मुक्का जमाती हुई बोली,"बेल सुनाई नहीं दे रहा क्या? दूध लेने चले जाते तो ये भाग जाती क्या..?" श्याम मुक्के की चोट से आह भर हंसते हुए बोले,"भाग तो नहीं जाती पर अगर लंड शांत हो जाता तो...."

मैं उनकी बातों से हल्की मुस्काती हुई बेड से उतरती हुई बोली,"हाँ तो कोई बात नहीं...वो दूधवाला देखेगा कि रोज सुबह मैं ही आती हूँ और तुम दोनों सोते ही रहते हो तो किसी दिन मौका पा कर आपकी बीवी चोद देगा तो बाद में दोष दूधवाले का मत देना.."

श्याम मेरी बात सुन पूजा को जोरदार धक्के लगाते हुए बोला,"कोई बात नहीं...हम दोनों तो फायदे में ही रहूंगा...मेरे दूध के भी पैसे बचेंगे और तुम्हें नए लंड मिल जाएंगे...जाओ जल्दी चुदवा के ही आना..."

श्याम अपनी बात कह हंस पड़े जिससे पूजा भी आहहहह कहती हुई हंस पड़ी...मैं उन दोनों के कान एक साथ पकड़ती हुई बोली,"तुम दोनों को हंसी आ रही है..अब तो सच में चुदवा के ही आऊंगी..." और फिर उनके कान मरोड़ कर छोड़ दी जिससे दोनों की एक साथ ईससससऽ निकल पड़ी...

मैं फिर बाहर निकल किचन से बर्तन लेती चाभी ली और चल दी बाहर...मेन गेट खुलते ही दूधवाले से नजर मिली तो हम दोनों की अनायास मुस्कान निकल गई...फिर दूधवाले ने दूध माप के दे दिया...मैं दूध ले उसकी तरफ देखी और अंदर ही अंदर मुस्काती हुई वापस मुड़ गई बिना कुछ कहे...

दूधवाला: "आज क्रीम नहीं लोगी मैडम..? आज भी एकदम ताजा है..सोचा आपको दे दूँ फिर किसी और को दूँगा..." दूध वाले मुझे जाते देख बोला...जिससे मैं हल्की रूकी और सड़क पर दोनों तरफ देखी...रूम मालिक को देख रही थी वरना फिर कहीं वो बात करते भी देख लेता बेवजह तो परेशानी में डाल देता...

पर वो कहीं नहीं दिखा तो उसके धोती में फड़फड़ा रहे लंड को देखती बोली,"अब नहीं लेनी, कल रूम मालिक को शक हो गया था...अब कहीं दुबारा शक हुआ तो मुसीबत हो जाएगी...वैसे आपकी क्रीम बेस्ट थी...लेकिन क्या कर सकती...सो अब बस काम से काम रखिएगा..." और मैं वापस मुड़ गई...

बेचारा उस दूधवाले के सपने तो चूरचूर हो गए...रोज सपने देखता होगा कि मेरी बूर में अपना लंड डाल रहा है...वह कुछ कह भी नहीं सका...बस मुझे जाते हुए देखता रह गया...मैं बिना मुड़े अंदर चली गई...

अंदर किचन में दूध रखी और बेडरूम में गई दोनों को देखने...हम्म्म..चुदाई खत्म हो चुकी थी...अब पूजा बेड पर पसरे श्याम के मुरझाए लंड को जीभ से साफ करने में लगी थी...मेरी आहट पाते ही पूजा एक नजर मेरी तरफ देखी, फिर मुस्काती हुई अपने काम में लग गई....

"छोड़ने का मन नहीं है क्या...चलो हटो,अब मैं करूंगी..."कहती हुई मैं पूजा के बगल में बैठ गई...श्याम मेरी बात सुन मुस्काते हुए बोले,"अभी कहाँ रानी...अब एक राउंड और करूंगा अपनी कमसिन शाली की...फिर छोड़ेंगे...वैसे तुम तो दूधवाले से चुदने गई थी ना..."

"उफ्फ्फ, घर की गेट खुली ही छोड़ दी..आती हूँ बंद कर..."मैं दूधवाले के बारे में सोचते-2 गेट बंद भी नहीं की...मैं गेट के पहुंच आधी गेट ही लगाई थी कि सीढ़ी पर किसी की आहट सुनाई दी...

थोड़ी गौर से सुनी तो आहट ऊपर छत की तरफ जाती लग रही थी...इस वक्त सुबह-2 कौन छत पर जा रहा है...नीचे की फ्लैट से तो कोई कभी सुबह जल्दी उठता तक नहीं तो फिर कौन है...और नीचे से अभी आई ही हूँ, रूममालिक भी तो कहीं नहीं दिखे थे...

कौन हो सकता है? यही जानने मेरे कदम बाहर निकल छत की तरफ बढ़ गई...अंतिम सीढ़ी से छत पर देखी तो सामने कोई नजर नहीं आया...अब हल्की डर भी होने लगी कि पता नहीं कौन है जो छत पर आया और गायब हो गया...

एक बार मन हुई वापस हो जाऊं...फिर सोची सुबह हो ही गई तो दूसरी अप्राकृतिक चीजें तो हो ही नहीं सकती...छत पर घूम कर ही देखती हूँ शायद पानी टंकी के दूसरी तरफ हो....और मैं आगे बढ़ छत पर चारों तरफ देखती मुआयना करने लगी...

पानी टंकी के उस तरफ जैसे ही पहुँची सामने रूम मालिक पर नजर पड़ी...मैं राहत की सांस ली पर अब इस मुसीबत से पीछा छुटकारा पाने की सोच में पड़ गई...अगर वो नहीं देखते तो चुपके से रिटर्न हो जाती पर....

रूम मालिक: "आइए..आइए...मैडम...सुबह की ताजी हवा काफी फायदेमंद होती है...ऱोज लेनी चाहिए सबको..." मैं उसकी बात से बेवजह मुस्कुरा पड़ी और ना चाहते हुए भी उनकी तरफ बढ़ गई...

मैं आगे जा रेलिंग के सहारे उनसे काफी हट कर खड़ी हो गई और सामने उगती हुई सूरज की तरफ मुंह कर दी...वो हम दोनों के फासले को कम करने मेरी तरफ खिसक गए और लगभग एक फीट की दूरी पर खड़े हो गए...

मैं उनके करीब आने की आहट महसूस कर सनसना गई...शरीर के रोंगटे खड़े हो गए...वो मेरे बगल में आ मुझे गौर से निहारने लगे जिससे मैं काफी असहज महसूस करने लगी...मेरे हाथ छत की रेलिंग पर कस गई...

"आती हूँ कुछ देर में...गेट खुला ही है कोई आ गया तो..."मैं अब यहां से हटने की सोच बहाने बनाई और जाने के लिए पीछे मुड़ी कि तभी उनके हाथ रेलिंग पर पड़े मेरे हाथों को जकड़ के दबा दिया...मैं अचानक से हुई उनकी हरकत से एकटक आश्चर्य से उनकी आँखों में देखने लगी...

"अरी मैडम, इतनी जल्दी क्यों भागने की कोशिश कर रही हो..मैं कोई बाघ थोड़े ही हूँ जो गिल जाऊंगा..."रूम मालिक ने मुझे अपनी तरफ देख बोला...जिससे मैं अब और मुश्किल में पड़ गई...कल की वारदात से तो हाथ छुड़ाने की भी हिम्मत नहीं पड़ रही थी...

रूम मालिक: "पता है आज मैं आपसे काफी खुश हूँ...कल मैं आप पर जितना गुस्सा था आपने आज सब खत्म कर दिया...मैं वहीं सामने वाले कैम्पस में छुप के बैठा सुन रहा था...आज अगर कोई हरकत करती तो सच बहुत बुरा होता..."

मैं बिना कोई हरकत किए बस उनका चेहरा हैरानी से निहारने लगी...मैं खुद को आज लकी समझ रही थी...अपनी तरफ यूँ ऐसे घूरते पा उसने मुस्कुराते हुए अपनी एक आँख दबा दी,जिससे मैं झेंप सी गई और नजरें घुमा ली...

रूम मालिक: "एक बात तो है आप दिल की बुरी नहीं है...कोई कुछ कहे तो आप उस पर गलत सही सोचने के बाद कोई फैसले लेती हो...यही आप में अच्छी बात है...हाँ कुछ गलत भी करते हैं पर इसमें आपकी गलती नहीं है..."

मैं एक बार दुविधा में पड़ गई कि अब क्या कहेंगे ये..मैं पुनः उनकी तरफ मुंह घुमा दी...सूरज की लालिमा फट चुकी थी जिससे उसकी किरण सीधी हमारी गाल पर पड़ कर और सुर्ख बना रही थी...तभी वो मेरे चेहरे के बिल्कुल निकट आते हुए बोले...

रूम मालिक: "अब आप हो ही इतनी हॉट और सेक्सी कि आप लाख चाहो,खुद को रोक नहीं पाओगी ज्यादा देर...इसी वजह से आप कभी कभार बहक जाती हो..." वो इतना कह चुप हो गए...

पर उनका चेहरा अभी भी ज्यों के त्यों थी..मेरी तेज हो चुकी साँसें उनकी साँसों से टकरा रही थी...और मेरी वासना में बदल चुकी नजरें सीधी उनकी आँखों में झाँक रही थी...

कुछ देर तक यूँ ही खड़े रहे हम दोनों बिना कोई सवाल जवाब के...उनका एक हाथ तो रेलिंग पर मेरी एक हाथ दबाए ही था...अब उन्होंने अपना दूसरा हाथ आगे बढ़ा मेरी दूसरी हाथ पकड़ अपनी अंगलियां मेरी अँगुली में फंसा पकड़ लिए...

मैं चाह कर भी उन्हें नहीं रोक पा रही थी...अगर रोकती तो वे कहीं सवाल कर देते कि दूधवाले से भी बुरा हूँ क्या..? तो मैं क्या जवाब देती...या फिर चाहते तो मेरी इज्जत सरेआम लुटा देते तो क्या करती..आखिर मेरी दुखती नस जो उनकी पकड़ में आ गई थी...

तभी उन्होंने रेलिंग पर से अपना हाथ पीछे खींच मेरी कमर के पास रख दिए और दबाब बनाने लगे अपनी तरफ...मैं होशोहवाश खोती उनके शरीर में सटती चली गई और रेलिंग पर से हाथ उठ के अपने आप उनके कंधों पर पड़ गई...बिल्कुल प्रेमी जोड़ो की तरह चिपक गए थे..

मैं पसीने से तरबतर हो गई थी...और सुबह की उगती सूर्य की किरण से मेरी शरीर दमक रही थी...मेरी साँसें सीधी उनके सीने में घुस रही थी...और तेज साँसों में मेरी चुची उफ्फ्फ...उनके सीने से टच करती हुई एक बार पीछे हटती तो एक बार पूरी धंस जाती....

"दोस्ती करोगी हमसे...अच्छी वाली दोस्ती..." फिर वो हौले स्वर के साथ गर्म साँसे मेरी गालों पर डिम्पल की तरह धँसाते हुए बोले...साँसों की तेजी ने मेरे अंदर गुदगुदी सी कर दी...मैं ईससससऽ की आवाजें करती हुई मुंह फेर ली...

रूम मालिक: "अरे, ऐसे क्यों मुंह फेर रही हो...जो बात तुम सोच रही हो वैसा मैं अब कुछ नहीं करने वाला...कल वाली बात बिल्कुल भूल जाओ...ब्लैकमेल,झाँसा में फँसाना आदि सब चीजों का मैं सख्त विरोधी हूँ...दोस्ती की कह रहा हूँ तो सिर्फ दोस्ती..."

थैंक्स गॉड...जिस बात से डर रही थी इनसे वैसी बात नहीं थी...गलत देखे तो शायद ज्यादा गुस्सा कर गए कल जिससे धमकी दे रहे थे...पर अब जो ये कर रहे हैं ऐसे मुझे चिपका कर वो क्या है...ये फायदा ही तो उठा रहे हैं मेरी बेबसी का...

"मैं समझ सकता हूँ कि आपके मन में क्या चल रहा है इस वक्त...तो मैं बता दूँ कि आप ही के जैसी सुंदर मेरी भी बीवी है, पर वो कुछ अलग किस्म की है...मतलब बीवी तो है मेरी पर बीवी बनना नहीं जानती..."उन्होंने अपनी बात से मेरी अंदर चल रही सवालों का जवाब देते हुए बोले...

काफी तेज दिमाग है इनका तो..बिना सवाल पूछे ही जवाब देने लग गए...

"मैं अपनी बीवी में हर रोज एक दोस्त खोजता रहता हूँ...पर कभी मिली नहीं..वो तो बस बीवी का मतलब सिर्फ सेक्स ही जानती है...सेक्स के बाद कभी मेरे दिल की आवाज सुनने की कोशिश नहीं की और ना ही कभी सुनाई...इसलिए मैं तुम्हारी जैसी हसीन बला से दोस्ती करना चाहता हूँ ताकि हम अपनी दिल की बात कह-सुन सकें..." वो अपने दिल की बयान अपने साफ लफ्जों से सुनाने लगे...

मैं उनके इस दर्द को सुन पिघलने लग गई...अब उनसे हटने की बजाय आराम से खड़ी उनकी बाते सुनने लगी...

"...मेरे और भी कई लेडिज फ्रेंड हैं पर सब सिर्फ फ्रेंड ही हैं...कोई ऐसी नहीं मिली जिससे अपना हाल-ए-दिल सुना सकूँ...पर आज अगर तुम दोस्त बन जाओगी तो मेरी जिंदगी में ये कमी शायद पूरी हो सकती है..क्योंकि तुम सबसे अलग हो...हर रिश्ते को निभाना जानती हो..अब ये मत कहना कि सोचूँगी...दोस्ती लोग सोच कर नहीं करते...वो तो प्यार से भी तेज होता है और इसमें कोई रिस्क भी नहीं..." वे अपनी बात खत्म कर मेरी जवाब का इंतजार करने लगे...

मैं उनकी आखिरी बात पर थोड़ी सी शर्मा के हंस पड़ी..जिससे वे भी हंस पड़े...अब तो मेरे अंदर की सारी डर इनके प्रति जो थी ऱफ्फूचक्कर हो चली थी...इनके अकेलेपन पर तरस आ गई थी...शायद इसी वजह से ये कभी-कभार ज्यादा गुस्से में आ जाते हैं...

"...तो ये कौन सा तरीका है दोस्ती प्रपोज करने की." मैंने अपनी झिझक समाप्त करते हुए उनसे बोली...जिससे वो खिखिलाकर हंस पड़े...फिर वो बोले,"अपना तरीका है...मैं ऐसे ही सब के साथ रहता हूँ...बोरिंग वाली दोस्ती मुझे नहीं पसंद...दोस्ती में रोमांस,प्यार,शरारत,गुस्सा सब होना चाहिए पर लिमिट तक ही...ऐसा नहीं कि तुम अगर ऐसे मेरे बांहों में हो मैं गलत हरकत कर दूँ..."

"अगर कभी आपको दोस्तों के संग ऐसी हालत में आपकी बीवी देख ले तो..."मैं भी कुछ नॉर्मल हो कुछ अंदर की बात जाननी चाही इनसे...जिसे सुन वो नाक-भौं सिकुड़ाते हुए बोले...

"मोहतर्मा,मुझे इस बात की कोई डर नहीं..बीवी के डर से मैं अपने दोस्तों से मिल रही जिंदगी को कैसे छोड़ सकता भला...वैसे कल सुबह मेरे साथ वॉक पे चलना पसंद करेंगी...4 बजे..."उन्होंने बस शार्ट कट में ही अपनी हिम्मत-ए-दिल बयां कर दी...

"इतनी सुबह तो जगती भी नहीं..5 बजे के बाद नींद...."मैं अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई कि वो पड़े,"अं.हं....जगने की चिंता छोड़ दो...नींद ठीक 4 बजे खुद खुल जाएगी...मैं इंतजार करूँगा...अब चलता हूँ..बॉय.."

और फिर अलग होने से पहले मेरे माथे को हल्के से चूम लिए...फिर हम दोनों एक साथ मुस्कुराते हुए नीचे चल दिए...मैं नीचे अपने घर के दरवाजे से अंदर हुई और अंदर देखी तो अभी भी दोनों बाहर नहीं निकले थे...

अचानक मैं मुड़ी और और नीचे की तरफ बढ़ रहे रूम मालिक को सीसी की आवाज से बुलाई...वो आश्चर्य से मुड़ते हुए वापस ऊपर की तरफ आया...पास आते ही इशारे से पूछा क्या बात है..

मैं उनके गर्दन पकड़ उनके शरीर पर लद सी गई और कान के समीप अपने लब ले जाती बोली,"थैंक्स फॉर फ्रेंडशिप...." और पीछे हटने से पहले उनके गाल पर एक गहरी चुंबन जड़ दी दोस्ती वाला...फिर मुस्कुराते हुए तेजी से अंदर आ गेट लॉक कर ली...वो भी मेरी इस शरारत पर मुस्कुराते हुए नीचे चले गए....
_____[.....क्रमशः]_____


RE: Porn Kahani सीता --एक गाँव की लड़की - sexstories - 01-23-2018

सीता --एक गाँव की लड़की--30

फिर हमने वापस बेडरूम में गई तो पूजा नहीं थी..शायद बाथरूम गई थी..श्याम अभी भी बेड पर पड़े हुए थे..मैं उनके पास बैठती हुई उनके सीने पर किस करती हुई बोली,"उठिए ना...ऑफिस नहीं जाना..."

श्याम: "उम्म्म्म...मूड नहीं है डियर..आज सोने दो...हुअंअअअ्म्म..."श्याम करवट बदलते हुए सोने की कोशिश करने लगी...मैं भी मुस्कुराते हुए छोड़ दी और उठ गई..फिर पूजा बाथरूम से फ्रेश हो कर निकली तो मैं फ्रेश होने घुस गई...

फ्रेश होने के खाना खाई और आराम करने चली गई..श्याम करीब 12 बजे उठे और फ्रेश होने के बाद बाहर निकल गए...मैं फिर वापस पूजा के बदन से चिपक के सो गई...शाम में करीब 5 बजे नींद खुली...

पूजा और मैं कुछ टहलने छत पर चली गई...कुछ घूमने के बाद बोली,"पूजा,वो सामने वाला नजर नहीं आता.."

पूजा: "हाँ दीदी, अब शायद उसे शर्म आती होगी कि उसका भी बाप है सेक्स में..खुद को मॉडर्न समझता था छत पर चुदाई कर के..शाले की हेकड़ी निकल गई हम दोनों को एक मर्द के साथ देखकर...ही..ही..ही.."

"हाँ...हम दोनो जितने कमीनी हैं,उतनी तो वो सोच भी नहीं सकती..."मैं हंसती हुई पूजा की बात में हाँ मिलाई...फिर इसी तरह की कुछ इधर उधर की बातें होती रही...अचानक तभी सीढ़ी से ऊपर किसी के चढ़ने की पदचाप सुनाई दी...

हम दोनों आपस में गुपचुप ही इशारे से पूछ रही थी कि कौन हो सकता है...तभी पूजा आगे बढ़ नीचे कैम्पस में झाँकी तो तेजी से अपने पास बुलाई...मैं झटपट पुजा के बगल में खड़ी हो गई...

नीचे एक बाइक लगी थी...इस घर में तो बाइक थी पर ऐसी नई नहीं थी...बिल्कुल चमकती हुई...शायद खरीदे हुए कुछ दिन ही हुए हों...मैं हौले से पूजा से बोली,"शायद नीचे किसी के गेस्ट होंगे और वो घूमनेछत पर आ रहे है..."

पूजा: "आने दो, अकेला आया और मस्त लगा तो खा ही जाऊंगी...ही..ही..ही..." और पूजा खिलखिला पड़ी जिससे मैं भी खुद को रोक नहीं पाई...फिर हम दोनों वापस सीढ़ी की तरफ देखने लगी भूखी लोमड़ी की तरह कि शिकार आ रहा है...

तभी सामने देख हम दोनों के सारे अरमान शीशे की तरह बिखर गई...सामने श्याम थे...हम दोनों अपने मंसूबे की नाकामयाबी पर एक दूसरे की तरफ ताक हंस पड़े...जिसे देख श्याम हंसते हुए बोले,"क्यों गर्ल्स, हमें देख के हंसी क्यों निकल पड़ी..."

"नहीं दरअसल हम दोनों नीचे नई बाइक देखी तो सोची नीचे किसी के यहाँ गेस्ट आए हैं जो ऊपर आ रहे हैं तो सोची कुछ लाइनबाजी कर लूँ..पर....वैसे ये किसकी बाइक है..." मैं मुस्कुराती हुई बोली..

"ओहहह...फिर तो बहुत बुरा हुआ तुम दोनों के साथ...खैर इस बुरेपन को दूर करने ही आया हूँ...चलो तैयार हो जाओ और घूमने चलते हैं नई बाइक से..."श्याम हमदरदी जताते हुए बोले...

पूजा: "वॉव जीजू, बाइक लिए हैं क्या...थैंक्स जीजू..." और पूजा श्याम से लिपटती हुई किस करने लगी खुशी से...मैं भी खुश थी कि श्याम को अब ऑफिस ऑटो से नहीं जानी पड़ेगी और साथ में हम लोग भी बाहर घूम लेंगे...

"आज कहाँ ले जाएँगे घुमाने...?" मैं भी आगे बढ़ श्याम के शरीर से चिपक उनके गाल चूमती हुई पूछी...जिसे सुन श्याम और पूजा किस तोड़ दिए...

श्याम: "मेला...शहर के बाहर एक जगह कृष्णाष्टमी का मेला लगा है...वहीं चलेंगे..अब चलो नीचे और तैयार हो जाओ मेरी रानी..." कहते हुए श्याम अपने होंठ मेरे होंठ पर रख दिए ...

कुछ देर किस करने के बाद हम अलग हुए और नीचे चले आए...फिर हम एक साथ कपड़े चेंज करने लगी...कुछ ही पलों में हम दोनों लड़की सिर्फ पेंटी और ब्रॉ में थी...

श्याम इस पल का बखूबी से मस्ती लेते हुए बेड पर बैठे देख रहे थे...मैं ब्लैक कलर की एक ट्रांसपैरेंट साड़ी निकाली और साथ की मैच्युवल ब्लॉउज,पेटीकोट बेड पर रख दी...तभी श्याम बीच में बोले..

श्याम: "जान, आज बिना ब्रॉ की ब्लॉउज पहनो...मस्त लगोगी...और पूजा तुम भी ब्रॉ निकाल दो.. " श्याम कह कर मजे से उड़ते हुए आनंदमय हो गए...मैं भी मुस्कुराते हुए ब्रॉ की हुक खोल दी...

पूजा: "दीदी, मुझे भी साड़ी पहननी है आज..."और फिर पूजा अपनी आँखें नचाती हुई मुस्कुराने लगी..मैं और श्याम उसकी बात पर हंस पड़े,जिससे पूजा भी हँसे बिना रह नहीं पाई...

अगले ही पल एक गुलाबी पारदर्शी साड़ी उसके सामने रख दी...पूजा काफी खुश होती हुई अपनी ब्रॉ की हुक खोलने लगी...

श्याम: "पूजा, अगर साड़ी बाँधने में मदद की जरूरत हो मैं पास ही बैठा हूँ..." कहते हुए चुटकी बजाते हुए अपनी दावेदारी पेश कर दिए...जिस पर पूजा आँखें ऊपर कर हँसती हुई बोली,"सॉरी...मैं साड़ी पहनना अच्छी तरह जानती हूँ..."

कुछ ही देर में हम दोनों तैयार हो गए, जिसे श्याम आँखें फाड़ फाड़ कर देखे जा रहे थे...जब मैं उन्हें ऐसे एकटक निहारती देख इशारे में पूछी क्या हुआ...

श्याम: "माशाल्लाह....लोग उस मेले को छोड़ इस मेले को देखने टूट पड़ेंगे...कसम से, सेक्स की देवी दिखती हो तुम दोनों जो 80 साल के बुड्ढ़े का भी खड़ा कर दे..."

"अच्छा,अच्छा...मैं आज पहली दफा मेले घूमने नहीं जा रही हूँ...वहाँ ढ़ेर सारी खूबसूरत लेडिज बन-ठन के आती हूँ..अच्छी लगती हूँ या नहीं ये बताइए बस..." मैं मुस्कुराहट में बोल पड़ी...

श्याम: "सुपर...बिल्कुल परी लग रही हो...गोरे बदन पर ब्लैक साड़ी...अल्लाह बचाए नजर लगने से...चलें अब.."

मैं खुश होती हुई हाँ कह दी और उनके साथ रूम लॉक कर निकल गई गुलाबी पूजा के साथ...वो तो और खूबसूरत लग रही थी गुलाबी साड़ी,गुलाबी लिपस्टिक,गुलाबी सैंडल,गुलाबी हेयरबैंड,गुलाबी नेलपॉलिश...सुपर...

मैं और पूजा श्याम के संग बाइक से करीब एक घंटे तक चलने के बाद मेला पहुँचे...श्याम ने बाइक स्टैंड में बाइक लगा दी..इस दौरान अकेली लड़की देख ना जाने कितने कमेंट सुनने को मिल गए...

पर हम दोनों कोई जवाब दिए बिना बस बातों में मशगूल मजे लेती रही कमेंट्स के...कुछ पल में श्याम के साथ मंदिर की तरफ गई जहाँ भक्तों की काफी भीड़ थी...हम दोनों लेडिज लाइन में लग गई मंदिर में जाने के लिए..

जबकि कुछेक दूरी पर मर्दों की लाइन थी, जिसमें से कुछ तो चुपचाप थे और कुछ सभी लेडिज को देख हल्के से कमेंट्स कर रहे थे...अजीब इंसान है...भगवान के सामने भी नहीं चुप रहते...

खैर कुछ ही पलों में हम दोनों भगवान के सामने शीश नमन किए...तभी मेरे सर पर हाथ पड़ी और सरकती हुई नंगी पीठ पर रगड़ गई..मैं चौंक सी गई और उठी तो सामने पंडा थे जो मंदिरों में रहते हैं...

ऐसी रगड़ तो सिर्फ वासना की होती है, जिसे हम लेडिज लोग अच्छी तरह पहचान लेते हैं..वो मेरी तरफ वहशी निगाहों से देख आशीर्वाद में कुछ बुदबुदाते हुए प्रसाद बढ़ा दिया..जिसे मैं ली और चुपचाप वापस हो ली...

पूजा: "दीदी, ये तो पाखण्डी लगता था...देखी कैसे पीठ सहला रहा था कमीना..." पूजा चुप ना रह पाई और अपनी व्यथा कह डाली...

"छोड़ ना...आदत होगी उसकी...सभी को शायद ऐसे ही आशीर्वाद देते होंगे...चल अब घूमते हैं कुछ..."मैं बातों को टालती हुई बोली..पर पूजा बोल तो सच ही रही थी...वो भी कुछ समझ चुप रह गई...

पर श्याम अभी भी अंदर ही थे...हम दोनों बाहर खड़ी हो उनके आने का इंतजार करने लगी...कुछ ही देर में वो आते हुए दिखे पर वो अकेले नहीं थे...उनके साथ एक लेडिज थी जो साथ में हंसती हुई बातें करती आ रही थी...

हम दोनों कुछ समझ नहीं पा रही थी कौन है ये..तू तक श्याम मेरे निकट पहुँचते हुए बोले,"सीता, ये मेरी दोस्त है. सुमन..और सुमन से मेरी पत्नी सीता और ये पूजा.."

फिर ना चाहते हुए भी हम ने सुमन को हैलो बोली और फिर हम सब चल दिए...रास्ते में चुपके से श्याम कह दिए कि गर्लफ्रेंड है...जिसे सुन हम दोनों के होंठों पर मुस्कान तैर गई और थोड़ी जलन भी...

जलन इसलिए कि श्याम की प्रार्थना भगवान ने सुन ली और इनकी गर्लफ्रेंड से मिला दिए और हम दोनों....हम दोनों को ठेंगा दे दिए..खैर अब इन्हीं के साथ घूमती हूँ...

"आप अकेली आई है क्या..?"मैं अचानक सुमन से सवाल कर गई...मैं तो सोची कि ये मेरी सवाल से नर्वस हो जाएगी पर वो बोल्ड होती हुई हंसती हुई बोली,"नहीं...मैं अपने दोस्त के साथ आई थी पर यहाँ उसका बॉयफ्रेंड मिल गया तो थोड़ी देर में आती हूँ कह निकल गई और फिर मैं यहाँ एक घंटे से उसके इंतजार में खड़ी थी..."

उसकी बात सुन हम सब हँस पड़े...मन ही मन बोली कि हाँ अब तुम्हारा भी बॉयफ्रेंड मिल गया तो तुम भी उड़ जाओ कहीं...तभी मेरी नजर बगल में पूजा की तरफ मुड़ी तो वो नदारद थी...मैं डरती हुई श्याम से बोली,"पूजा कहाँ गई..."

श्याम भी चौंकते हुए रूकते हुए चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोले,"तुम्हारे साथ ही तो आ रही थी...हम दोनों तो आगे चल रहे थे..."

"हाँ पर जैसे ही मैं अभी इनसे बात करने थोड़ी आगे हुई इसी बीच कहाँ गायब हुई देख नहीं पाई..."मैं थोड़ी परेशानसी होती हुई बोली...श्याम के चेहरे पर परेशानी साफ झलक रही थी और वो चारों तरफ नजर घुमा ढ़ूँढ़ रहे थे...

अचानक सुमन बोल पड़ी,"श्याम, वो वहाँ गोलगप्पे के पास कौन खड़ी है.." सुमन की आवाज से हम दोनों उस तरफ देखे...जो कि मेले के सबसे एकांत सी जगह थी...मेरी नजर तुरंत ही पूजा को पहचान ली...वो पूजा ही थी...

तभी मेरी नजर उसके साथ बंटी और सन्नी पर पड़ी जो पूजा के साथ गोलगप्पे खा रहे थे...सारा माजरा समझ में आ गई...श्याम भी देख चुके थे और वो मेरी तऱफ घूरने लगे कि ये क्या चक्कर है...

"वो दोनों पूजा के दोस्त हैं कॉलेज के...वही ले गया होगा..."मैं श्याम के सवालिया नजरों का जवाब देती हुई बोली..श्याम को थोड़ा गुस्सा आ गया कि कम से कम बता कर तो जाती...और श्याम भी तुरंत समझ गए कि किस टाइप का दोस्त है और उसे मैं भी अच्छी तरह जानती हूँ...

श्याम: "ठीक है, जाओ पूजा के पास..जब उसका पेट भर जाए लेती आना..तब तक हम इधर घूमते हैं...फोन कर लेना...ओह सिट..तब से ध्यान ही नहीं आया कि पूजा के पास भी तो फोन है...मैं भी ना. "

श्याम की बात से हमें थोड़ी हंसी भी आ गई...फिर ओके कह मैं वहाँ से निकल गई पूजा की तरफ..कुछ दूर जाकर जब वापस मुड़ी तो हमें हंसी आ गई...श्याम सुमन के हाथ में हाथ डालकर चल दिए थे...

मैं जैसे ही सीधी हुई कि एक जोरदार टक्कर हो गई...ओहहह गॉड....आउच्च्च्चचच...मर गईईईईईईई...एक लड़का फिल्मी स्टाइल में पीछे मुड़ने का फायदा उठा ठीक सामने से मेरी एक चुची पर हाथ रख टक्कर मार दिया और हटते वक्त बड़ी सफाई से कस के मसल भी दिया..

"मैडम, भीड़ में आगे देख कर चला करो..कहीं आपका बम फट जाता तो मैं तो गया काम से..."उस लड़के को मैं कुछ कहती इससे पहले ही वो बोल पड़ा और चल दिया...उसके साथ दो और लड़के थे जो उसके पीछे बारी-2 से मेरी चुची पर ही नजर गड़ाए आगे निकल गया...

कुछ देर तक वहीं मूक बनी खड़ी उसे जाते देखती रही कि कितना कमीना था...एक तो मजे भी लूट लिया और गलती हमही को बोल आसानी से निकल गया...उसकी शरारत पर अचानक मेरी हंसी निकल पड़ी...और ठीक उसी वक्त वो तीनों लड़का भी आगे बढ़ मेरी तरफ पलट गया...

और मुझे हँसते देख वो आश्चर्य से भर गया और अचानक मेरी तरफ बढ़ने लगा...मैं उसे अपनी तरफ आते देख चौंकी और तेजी से मुड़ पूजा की तरफ चल दी...पूजा तक आने के चक्कर में मैं खुद कई बार कई औरतें,लड़के,अंकल से टकरा गई...काफी हंसी आ रही थी खुद पर...

पूजा के समीप पहुँचते ही पूजा पर बरस पड़ी, पर पूजा मेरी बातों को दरकिनार कर बस गोलगप्पे खाने में मशगूल रही...अंत में पूजा के शरीर अपनी तरफ करते हुए लगभग डाँटती हुई बोली,"ऐ...मैं तुमहे ही कह रही हूँ..कुछ सुन भी रही है या बहरी हो गई..."

जिस पर वह मेरी तरफ गोलगप्पे दिखाती हुई बोली,"खाओगी...?"

उफ्फ्फ...अजीब किस्म की लड़की है ये...इस पर कोई असर ना देख बंटी को बुरा भला सुनाने लगी...जिस पर वह दूसरी तरफ हो गया और सन्नी को मेरे सामने कर दिया...सन्नी गोलगप्पे की प्लेट रखता हुआ मेरी बाँह पकड़ा और चलने लगा..

"भैया जी, मेमसाब को साइड में ले जाओ तभी शांत होगी...बहुत गरमी है इनमें..." पीछे से गोलगप्पे वाले ने आवाज दी जिसे सुन पूजा और बंटी की हंसी साफ सुनाई दी...मैं गुस्से में उसकी तरफ लपकनी चाही पर सन्नी कस के दबोचता हुआ दूसरी तरफ खींचता चला गया...

गोलगप्पे वाले के पीछे कुछ दूर हट के एक पुराना खंडहरनुमा घर था...आगे एक बड़ी सी वृक्ष जो पूरी तरह उस घर को ढ़ँक रही थी...एकदम गुप्प अंधेरा...शाले मेला संचालक को इस पर ध्यान देनी चाहिए..कम से कम एक लाईट तो दे देते...पर वो मेला से इतनी दूर थी कि शायद जरूरत नहीं समझा होगा...

फिर ये गोलगप्पे वाला इतना एकांत में क्यों है...जबकि इसे मालूम है कि गोलगप्पे ज्यादातर लड़की ही खाती है...यही सब सोच ही रही थी कि तभी सन्नी एक दीवाल से हमें चिपकाता हुआ मेरे होंठों पर टूट पड़ा...

मैं गुस्से के कारण खुद को अलग करना चाह रही थी पर वो अगले ही पल मेरी चुची पर कब्जा करता हुआ रगड़ने लगा...जिससे मैं ज्यादा देर तक खुद को रोक नहीं पाई...और लगी मैं भी चूसने...हम दोनों की किस तब टूटी जब बगल में हरकत हुई कुछ...

मैं रूकती हुई अंधेरे में हाथ बढ़ाई तो मेरे हाथ सीधी किसी लड़की के चुची पर पड़ गई...उसने बिना कुछ कहे मेरे हाथ पकड़ के हटा दी..मैं कुछ कहना चाहती थी पर तब तक सन्नी दुबारा किस करने लगा...मैं भी उस तरफ से ध्यान हटा किस करने लगी...

जब मेरे होंठ दर्द करने लगी तो सन्नी से हल्की अलग हो गई...सन्नी भी समझ गया...वो अलग हो मेरे हाथ थामा और बाहर की तरफ रूख कर लिया...मैं बाहर निकलते वक्त एक बार फिर गौर की उस लड़की की तरफ कि कौन है और लड़का कौन है...पर अंधेरे की वजह से नहीं पहचान पाई...

बाहर निकल जब हल्की रोशनी पड़ने लगी तो सन्नी रूक गया और बोला,"हाँ तो मैडम जी क्या कह रही थी आप...?" सन्नी की बात सुन मेरी हंसी निकल गई...कमीना पहले तो जबरदस्ती किस कर बात को बदल देता है, फिर पूछता है क्या बात है...

मुझे हंसता देख बोला,"दरअसल मुझे नहीं पता था पूजा मेरे इशारों से ही चली आएगी...साथ में आपके पति थे तो हिम्मत नहीं हुई निकट जाने की तो जब पूजा हमलोगों को देखी तो बंटी ने आने का इशारा कर दिया...हम दोनों देखते रह गए कि ये पागल हो गई है क्या...फिर निकट आते ही बोली डरते क्यों हो...भैया पूछेंगे तो कह दूंगी दोस्त हैं...उनकी भी तो दोस्त मिल गई है यहाँ तो मेरे दोस्त से प्रॉब्लम क्यों होगी...फिर हमें क्या दिक्कत होती भला...और इतनी परेशान क्यों हो रही जब फोन था ही तो एक कॉल कर लेती..."

"अचानक से गायब हो गई ना तो ध्यान ही नहीं रहा कि फोन कर लूँ..चलो अब.."मैं भी शांत होती हुई बोली...तो वो मुस्कुराते हुए बोला,"चलो गोलगप्पे खाते हैं..."

"नहीं, मुझे नहीं खानी उसके पास...शाला कैसे बेशर्मो की तरह चिल्ला के बोल रहा था...सुना नहीं.."अचानक से मुझे गोलगप्पे वाले की बात याद आ गई...मैं सन्नी के साथ आगे बढ़ती हुई बोल पड़ी..

सन्नी: "अरे वो वैसा नहीं है..बस बोलने की बीमारी है...दरअसल ये वीमेंस कॉलेज के पास रोजाना बेचता है तो लड़कियों से सीख लिया ज्यादा बोलना..और लड़कियों से हॉट बातें करना ये अच्छी तरह जानता है...एक खास बात ये भी कि अब तक ये सैकड़ों प्रेमी युगल को मिलवा चुका है, पर गद्दारी या गलत फायदा कभी नहीं उठाया किसी का...पर मजाक सबसे करता रहता है एकदम ओपेन...अब चलो और तुम भी कुछ मजे ले लो..मस्त कर देगा..."

मैं उसकी कहनी सुनते-2 गोलगप्पे वाले के पास पहुँच गई...मेरी नजर उन तीन लड़कों को ढ़ूँढ़ने लगी जिनसे टकराई थी...पर वो कहीं नहीं दिखे..तभी मेरी तरफ देख गोलगप्पे वाला दाँत दिखाता बोला,"गुस्सा शांत हुआ कि, और चाहिए कुछ.." उसकी बात सुन सब के साथ मैं भी हँस पड़ी...

"देखा मेमसाब,इनके साथ कुछ देर खड़ी रही तो इतनी खुश हो गई...जब ये साथ में सोएगी तो किता खुश होगी..." अपने आदत से मजबूर उसने मजाकिया लहजे में बोल पड़ा जिसे सुन मैं शर्म से मुँह दूसरी तरफ कर ली जबकि वो तीनों जोर से हँस पड़ा...

"लो मैडम, मेरा वाला भी मुँह में ले को देखो कि कैसा टेस्ट है..."एक बार फिर उसने एक और द्विअर्थी शब्द बोल दिया..इस बार मैं खुद की हंसी रोक नहीं पाई और हंसती हुई वापस मुड़ प्लेट पकड़ गोलगप्पे खाने लगी...

जब तक खाती रही वो कुछ ना कुछ बकड़-2 करता रहा...तभी मेरी नजर उसी अंधेरे से निकलती लड़के-लड़की पर पड़ी...पर पहचान नहीं सकी...फिर हम सब वहाँ से निकल लिए..फिर कुछ देर तक मस्ती में इधर उधर अपने-2 साथी के हाथों में हाथ डाल घूमती रही...

बाहर तो ज्यादा भीड़ नहीं थी पर अंदर मुख्य मेले की जगह भीड़ काफी थी..इस भीड़ में सन्नी के हाथ तो मेरे हाथ पकड़े थे पर औरों बगल से गुजरने वाले के हाथ सीधा मेरी चुची के साइड पर पड़ती या फिर पीछे चूतड़ पर...इन सब के बीच हम दोनों मस्ती में डूबी घूमती रही अपने यार के संग...फिर अचानक से पूजा बोली...

पूजा: "दीदीजी, अभी तक आपके पति महोदय नजर नहीं आए हैं..."

"इतनी भीड़ में वो बगल से भी गुजर जाते होंगे तो मालूम थोड़े ही पड़ेगी.."मैं अपनी बात से पूजा को संतुष्ट करती हुई श्याम पर ज्यादा चर्चा नहीं करना चाहती थी हम और पूजा श्याम के साथ किस तरह रहते हैं...

_____[.....क्रमशः]_____


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