Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - Printable Version

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RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

"घबराओ मत, इसे तो आज मैं चूस चूस कर खा ही जाऊँगी। बहुत दिन से तड़प रही थी
तुम्हारा लण्ड खाने के लिए...लेकिन तुम तो बुद्धू हो, इशारा ही नहीं समझते
और अपने हाथों से ही इस बेचारे को तकलीफ देते रहते हो। आज के बाद तुम इसे 
हाथ मत लगाना, जब भी यह खड़ा हो तो मुझे बता देना मैं इसे चूस कर शांत कर 
दूँगी...!" प्रिया ने यह कहते हुए मुझे आँख मारी। 



मैं उसकी बातों से हैरान पर हैरान हो रहा था, पता नहीं वो कब से यह करना 
चाहती थी और मैं बेवक़ूफ़ ब्लू फ़िल्में और कहानियाँ पढ़ पढ़ कर मुठ मार रहा था।
मैंने अब खुलकर बात करने की सोची और झुक कर उसके होठों को चूम लिया। 



"मेरी जान, मेरी प्रिया रानी अगर पहले बता दिया होता तो मैं इतना परेशान 
नहीं होता ना और अब तक तो तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना दिया होता।" मैंने 
उसका सर सहलाते हुए कहा। 



मेरे ऐसा बोलने से प्रिया ने एक जोर की सांस ली और मुझे देखकर मुस्कुराते 
हुए मेरे लण्ड पर पप्पी करी और कहने लगी,"कोई बात नहीं अब तो मैं तुम्हारी 
हो गई हूँ...जब चाहे मुझसे अपनी प्यास बुझा लेना...लेकिन मुझे डर लग रहा 
है, तुम्हारा यह मोटा लम्बा लण्ड मेरी छोटी सी मुनिया को फाड़ ही 
डालेगा...कैसे झेल पाऊँगी इसको...?" 



"अरे मेरी रांड, तू एक बार इसे चूस चूस कर चिकना तो कर फिर देखना तेरी चूत 
कैसे इसे अपने अन्दर ले लेती है।" मैंने अपना लण्ड उसके मुँह में फ़िर से 
ठूंस दिया और धक्के मारने लगा। 



वो किसी अनुभवी रंडी की तरह मज़े से मेरा लण्ड चूसने लगी और साथ साथ मेरे 
गोलों से भी खेलने लगी। उसने मेरे गोलों को दबाना शुरू किया और धीरे धीरे 
मेरा पूरा लण्ड अपने गले तक उतार लिया। 



लण्ड चुसवाने में कितना मज़ा है, यह बस वो जानते हैं जिनका लण्ड कभी किसी ने प्यार से चूसा हो। 



प्रिया पूरी तन्मयता से मेरा लण्ड चूस रही थी और मैं अपनी आँखें बंद करके 
मज़े ले रहा था। मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और बिल्कुल चूत की तरह 
उसका मुँह चोदने लगा। मैं अब अपने चरम सीमा पर था। काफी देर से उसकी 
चूचियों और चूत का मज़ा लेते लेते मेरा लण्ड अपना माल बाहर निकालने के लिए 
तड़प रहा था। 



"हाँ मेरी जान...हाँ...ऊह्ह ...हह्मम्म...और चूसो...और चूसो...मैं आ रहा 
हूँ...हम्म्म्म." मैंने उसका सर अपने लण्ड पर दबाते हुए कहा। 



जैसे ही प्रिया ने यह सुना कि मैं आनेवाला हूँ तो उसने लण्ड अपने मुँह से 
निकाल लिया। मैं अचानक से हुई इस अनहोनी से तड़प उठा। मैं उसके मुँह में ही 
झाड़ना चाहता था, पर शायद उसे यह पसंद नहीं था तो उसने अपने दोनों हाथों से 
मेरा लण्ड जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया और मेरे लण्ड को चूमने लगी। 



"आःह्ह्ह...ह्म्म्मम्म...आःह्ह्ह..." और मैंने ढेर सारा माल एक जोरदार पिचकारी के साथ उसके पूरे मुँह पर छोड़ दिया... 



प्रिया ने अपनी आँखें बंद कर लीं और तब तक लण्ड हिलाती रही जब तक उसमें से 
एक एक बूँद बाहर नहीं आ गई। मैं पूरी तरह से निढाल हो गया और धम्म से पीठ 
के बल बिस्तर पर गिर पड़ा। मेरी आँखें उस चरम आनन्द की वजह से बंद हो गई थीं
और मेरा लण्ड अपना सर उठाये छत को निहार रहा था और थोड़ा थोड़ा ठुनक रहा था 
जैसे माल निकलने के बाद होता है। 



प्रिया अब भी वहीं बैठी मेरे लण्ड रस का मज़ा ले रही थी। मैंने धीरे से अपनी
आँखें खोलकर देखा तो पाया कि उसने अपने हाथों में चेहरे पर लगे रस को लेकर
अपनी चूचियों पर मलना शुरू कर दिया है। 



हे भगवन, यह लड़की तो सच में पूरी रंडी है...मैंने सोचते हुए फिर से अपनी नज़रें फेर लीं और अपनी गर्दन घुमा ली। 



प्रिया वहाँ से उठी और उसी हालत में सीधे बाथरूम में चली गई। 



मैंने भी उठकर अपन लण्ड अपने पैंट में डाला और घडी की तरफ देखा तो साढ़े 
बारह बज चुके थे। मेरे मन में यह ख्याल आने लगा कि अभी तक सिन्हा आंटी ने 
प्रिया को आवाज़ क्यूँ नहीं लगाईं। शायद वो सो गई होंगी। लेकिन मेरा सोचना 
गलत था यारों... 



मैंने अपनी खिड़की के परदे के पीछे कुछ हलचल महसूस करी। जैसे कोई चुप कर 
अन्दर का सारा हाल देख रहा हो। मेरी एक बार फिर से फट गई। हम दोनों अपने 
चूमा चाटी के खेल में इतने खोये हुए थे कि हमें पता ही नहीं चला कि हमने 
खिड़की तो बंद ही नहीं की थी। 



मैं डर कर सहम गया कि पता नहीं कौन हो सकता है। घर पर सब लोग हैं। नेहा 
दीदी और रिंकी बगल वाले कमरे में सोई हुई थी...कहीं उनमें से किसी ने तो 
नहीं देख लिया...या फिर सिन्हा आंटी !! 



मैं इस सोच में था कि तभी प्रिया बाथरूम से बाहर आई और आकर धड़ाम से बिस्तर 
पर गिर गई। उसने अपने कपड़े ठीक कर लिए थे और मुँह धो लिया था। मैंने एक बार
उसकी तरफ देखा और फिर दरवाज़े की तरफ बढ़ा। 



जैसे ही मैंने दरवाज़े की कुण्डी खोलनी चाही तो कुण्डी की आवाज़ सुनकर किसी 
के तेज़ क़दमों की आहट सुनाई दी, मानो कोई भाग रहा हो। और फिर आई एक आवाज़ 
जिसे सुनकर मैं चौंक पड़ा। 



पायल की झंकार थी उस क़दमों की आहट में और सीढ़ियों पर तेज़ तेज़ चढ़ने की आवाज़।
अब मेरा शक यकीन में बदल गया, वो और कोई नहीं सिन्हा आंटी ही थीं। मेरा 
सारा जोश एक ही बार में पूरा ठंडा हो गया। अब तो मेरी खैर नहीं... 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

मैंने प्रिया का हाथ पकड़कर उठाया और उसे अपनी बाँहों में लेकर एक पप्पी दी 
और कहा,"अब तुम्हें जाना चाहिए, बहुत रात हो गई है कहीं आंटी न आ जाएँ।" 



प्रिया ने भी मेरे होठों पर अपने होठ रख दिए और चूमते हुए कहा,"ठीक है मेरे
स्वामी, अब मैं जाती हूँ। लेकिन कल हम अपना अधूरा काम पूरा करेंगे।" और 
मुझे आँख मार दी। 



उसने अपनी किताबें और नोट्स उठा लीं और जाने लगी। जाते जाते वो मुड़ कर मेरे
पास वापस आई और बिना कुछ बोले झुक कर मेरे लण्ड पर पैंट के ऊपर से एक 
पप्पी ली और हंसते हुए भाग गई। 



उसकी इस हरकत पर मैं हस पड़ा और अपन दरवाज़ा बंद कर लिया। इस जोश भरे खेल के 
बाद मैं थक चुका था और आंटी के देखने वाली बात से डर गया था। 



मैंने लाइट बंद की और कंप्यूटर भी बंद करके अपने बिस्तर पर गिर पड़ा। डर की 
वजह से नींद तो आ नहीं रही थी लेकिन फिर भी मैंने अपनी आँखें बंद की और 
सुबह होने वाले ड्रामे के बारे में सोचते सोचते सो गया...।
प्रिया ने भी मेरे होंठों पर अपने 
होंठ रख दिए और चूमते हुए कहा,"ठीक है मेरे स्वामी, अब मैं जाती हूँ। लेकिन
कल हम अपना अधूरा काम पूरा करेंगे।" और मुझे आँख मार दी। 



उसने अपनी किताबें और नोट्स उठा लीं और जाने लगी। जाते जाते वो मुड़ कर मेरे
पास वापस आई और बिना कुछ बोले झुक कर मेरे लण्ड पर पैंट के ऊपर से एक 
पप्पी ली और हंसते हुए भाग गई। 



उसकी इस हरकत पर मैं हस पड़ा और अपन दरवाज़ा बंद कर लिया। इस जोश भरे खेल के 
बाद मैं थक चुका था और आंटी के देखने वाली बात से डर गया था। 



मैंने लाइट बंद की और कंप्यूटर भी बंद करके अपने बिस्तर पर गिर पड़ा। डर की 
वजह से नींद तो आ नहीं रही थी लेकिन फिर भी मैंने अपनी आँखें बंद की और 
सुबह होने वाले ड्रामे के बारे में सोचते सोचते सो गया... 



सुबह जल्दी ही मेरी आँख खुल गई। बहुत फ्रेश फील कर रहा था मैं। शायद कल रात
के हुए उस हसीं खेल का असर था। बिस्तर पे लेटे-लेटे ही मेरी आँखों के 
सामने वो हर एक पल नज़र आने लगा। 



मैं मुस्कुरा उठा और फिर अपने बाथरूम की तरफ चल पड़ा। 



घर में सब कुछ सामान्य था। सब लोग अपने अपने काम में लगे हुए थे। मैं नहा 
धोकर अपने रूटीन के अनुसार छत पर पूजा करने और सूरज देवता को जल अर्पित 
करने गया। यह मेरा रोज़ का काम था। छत पर सिन्हा आंटी कपड़े डालने आई हुईं 
थीं। उन्हें देखते ही मेरी हवा निकल गई और मुझे वो दृश्य याद आ गया जब मेरे
और प्रिया के खेल को किसी ने खिड़की से देखा था। 



मुझे पूरी पूरी आशंका इसी बात की थी कि वो आंटी ही थीं क्यूंकि मुझे पायल 
की आवाज़ सुनाई दी थी और सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने की आवाज़ भी सुनी थी मैंने। 



मेरे अन्दर का डर जो अब तक कहीं गुम था अचानक से सामने आ गया और मेरा दिल 
जोर जोर से धड़कने लगा, मुझे लगा कि अब तो मैं गया और आंटी मेरी अच्छी खबर 
लेंगी। 



मैं डरते डरते आगे बढ़ा और अपने हाथ के लोटे से सूरज को जल अर्पित करने लगा,
यकीन मानिए कि मेरे हाथ इतने काँप रहे थे कि मेरे लोटे से जल गिर ही नहीं 
रहा था। जैसे तैसे मैंने पूजा की और वापस मुड़ कर जाने लगा। तब तक आंटी ने 
सारे कपड़े सूखने के लिए डाल दिए थे। 



कपड़े धोने और सुखाने के क्रम में सिन्हा आंटी की साड़ी नीचे से थोड़ी गीली हो
गई थी जिसे उन्होंने अपने हाथों से निचोड़ने के लिए हल्का सा ऊपर उठाया और 
अपने हाथों में लेकर निचोड़ने लगी। मेरा ध्यान सीधे उनके पैरों पर गया और यह
क्या? 



मैं तो जैसे स्तब्ध रह गया। 

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सिन्हा आंटी के पैर तो बिल्कुल खाली पड़े थे। मतलब उनके पैरों में तो पायल थी ही नहीं। 



मैं चौंक कर एकटक उनकी तरफ देखने लगा। मेरा दिमाग जल्दी जल्दी न जाने क्या क्या कयास लगाने लगा। मैं कुछ भी नहीं समझ पा रहा था। 



तभी आंटी ने मेरी ओर देख कर एक हल्की सी स्माइल दी जैसा कि वो हमेशा करती थीं और अपनी साड़ी ठीक करके नीचे उतर गईं। 



मैं उसी अवस्था में छत की रेलिंग पर बैठ गया और सोचने लगा कि अगर रात को आंटी नहीं थीं तो और कौन हो सकता है? वो भी पायल पहने हुए ! 



मैं चाह कर भी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पा रहा था। हार कर मैं नीचे उतर 
गया और अपने कमरे में जाकर थोड़ी देर के लिए टेबल पे बैठकर अनमने ढंग से 
कंप्यूटर ऑन करके सोच में पड़ गया। 



एक तरफ मैं खुश था कि चलो आंटी से बच गया पर आखिर वो कौन हो सकती थी। 



तभी मेरी नेहा दीदी ने मुझे आवाज़ लगाई और सुबह के नाश्ते के लिए ऊपर चलने को कहा।


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

मैंने अपना कंप्यूटर बंद किया और उनके साथ ऊपर चला गया। आंटी किचन में थीं 
और रिंकी उनके साथ उनकी मदद में लगी हुई थी। मैं और नेहा दीदी खाने की मेज 
पर बैठ गए। मेरी नज़रें प्रिया को ढूंढ रही थीं। पता चला कि वो बाथरूम में 
है और नहा रही है। 



मैं वापस अपनी उलझन में खो गया और उसी बात के बारे में सोचने लगा। 



अचानक से मेरे कानों में वही आवाज़ पड़ी... वही पायल की आवाज़ जो कल रात सुनी 
थी। मैंने हड़बड़ा कर अपना ध्यान उस आवाज़ की तरफ लगाया और मेरे आश्चर्य का 
ठिकाना नहीं रहा। 



रिंकी अपने हाथों में नाश्ते का प्लेट लेकर हमारी तरफ आ रही थी और उसके 
कदमों की हर आहट के साथ उसी पायल की आवाज़ आ रही थी। मेरी नज़र सीधे उसके 
पैरों की तरफ चली गई और मेरी आँखों के सामने उसके पैरों में बल खाते पायल 
नज़र आई। 



थोड़ी देर के लिए तो मैं बिल्कुल जम सा गया...तो वो आंटी नहीं रिंकी थी जिसने कल हमारा खेल देखा था। 



हे भगवन...यह क्या खेल खेल रहा था ऊपर वाला मेरे साथ..!!! 



रिंकी की आँखें मेरी आँखों में ही थीं और उसकी आँखों में एक चमक थी और 
चुहलपन भी था। कुछ न कहते हुए भी उसकी आँखों ने मुझसे सब कुछ कह दिया था। 
मैंने अपनी आँखें झुका लीं और सहसा मेरे अधरों पे एक मुस्कान उभर आई। मैंने
फिर से अपनी नज़र उठाई तो पाया कि रिंकी नेहा दीदी के बगल में बैठ कर मुझे 
देखकर मुस्कुराये जा रही थी। 



मैंने राहत भरी सांस ली, मेरी उलझन दूर हो गई थी। मैं इस बात से खुश था कि 
मुझे डरने की कोई जरुरत नहीं है क्यूंकि अब हम दोनों एक दूसरे का राज़ जान 
गए थे। 



तभी प्रिया अपने कमरे से नहाकर बाहर आई और दरवाज़े के पास से ही मुझे आँख 
मार दी। आज उसके चेहरे पे एक अलग ही ख़ुशी झलक रही थी और आँखे चमक रही थीं। 
उसके बाल गीले थे और उनसे पानी की बूँदें टपक टपक कर उसके टॉप को भिगो रही 
थी। 



क़यामत लग रही थी वो लाल रंग के टॉप और काले रंग की शलवार में ! दिल में आया
कि अभी जाकर उसको अपनी बाहों में ले लूँ और उसके होंठों को चूम लूँ। पर 
मैंने अपने जज्बातों पे काबू किया और चुपचाप उसे एक प्यारी सी स्माइल देकर 
नाश्ता करने लगा। 



अब तक सारे जने खाने की मेज पे आ गए थे और हम सब एक दूसरे से बातें करते हुए अपना अपना नाश्ता ख़त्म करने लगे। 



नाश्ते के बीच में हम सबने अपन अपना प्रोग्राम शेयर किया। नेहा दीदी और 
आंटी अपने पहले से बनाये हुए प्लान के अनुसार थोड़ी देर में बाज़ार जा रही 
थीं, प्रिया अपने कॉलेज और रिंकी ने कहा कि वो अपनी सहेली के घर जाएगी कुछ 
काम से और थोड़ी देर में वापस आ जाएगी। 



मैंने यह बताया कि पप्पू अभी थोड़ी देर में आएगा और हम दोनों को साक्ची (जमशेदपुर का एक बाज़ार) जाना है कुछ किताबें खरीदने के लिए।
हम सब अपने अपने प्रोग्राम की तैयारी
में लग गए। नेहा दीदी और आंटी सबसे पहले तैयार होकर बाज़ार के लिए निकलने 
लगीं। उनके जाने के बाद प्रिया नीचे उतर आई और मेरे कमरे में आकर मुझसे 
पीछे से लिपट गई। मैं अचानक से इस तरह से लिपटने से चौंक पड़ा पर जब प्रिया 
ने पीछे से मेरे गालों को चूमा तो मैं खुश हो गया और उसे अपनी तरफ मुड़ा कर 
उसको जोर से अपनी बाहों में भर लिया। 



उसने वही लाल टॉप पहना हुआ था, लेकिन नीचे शलवार की जगह डेनिम की एक स्कर्ट
पहन ली थी। बालों को खुला छोड़ रखा था और होंठों पे सुर्ख लाल लिपस्टिक लगा
ली थी। चेहरे पे हल्का सा मेकअप। 



कुल मिलकर पूरी माल लग रही थी। चूचियों को ब्रा में कैद किया था उसने जिसकी
वजह से उसकी चूचियाँ हिमालय की तरह खड़ी हो गईं थीं। जब उसे मैंने अपने 
सीने से लगाया तो उसकी प्यारी चूचियों ने मेरे सीने को प्यार भरा चुम्बन 
दिया और मुझे अन्दर तक सिहरन से भर दिया। 



मैंने अपने हाथ बढ़ाकर उसकी चूचियों पे रखा और प्यार से सहला दिया। उसने 
मस्ती में आकर अपनी आँखें बंद कर लीं और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी। 



मेरे दिमाग में यह ख्याल था कि उसे कॉलेज जाना है इसलिए मैंने उसकी चूचियों
को दबाया नहीं वरना उसके टॉप पे निशान पड़ जाते और उसे शर्मिंदगी उठानी 
पड़ती। इस बात का एहसास उसे भी था और मेरी इस बात पे उसे प्यार आ गया और 
उसने एक बार फिर से अपने होंठों को मेरे होंठों पे रख दिया और लम्बा सा 
चुम्बन देकर मुझसे विदा लेकर चली गई। 



मैं उसे बाहर तक जाते हुए देखता रहा और हाथ हिलाकर उसे टाटा किया। मेरा मन 
बहुत खुश था, मैं अपनी किस्मत पे फख्र महसूस कर रहा था कि प्रिया जैसी चंचल
और शोख हसीना मेरी बाहों में आ चुकी थी और वो मेरी छोटी छोटी बातों से 
मुझसे बहुत प्रभावित रहती थी। 



प्रिया के जाने के बाद मैं अपने कमरे में बैठ कर अपने दोस्त पप्पू का 
इंतज़ार करने लगा। मैं जानता था कि आज तो वो दुनिया की हर दीवार तोड़ कर 
जल्दी से जल्दी मेरे घर पहुँचेगा और अपनी अधूरी प्यास पूरी करेगा। 



मैं मन ही मन कभी प्रिया कभी रिंकी के बारे में सोच सोचकर मुस्कुरा रहा था और कंप्यूटर पे अपनी मनपसंद साइट्स चेक कर रहा था। 



थोड़ी देर ही बीती थी कि मेरे घर के फ़ोन पे एक कॉल आई। मैंने उठाकर हेलो किया तो दूसरी तरफ से पप्पू की आवाज़ आई। 



"सोनू, मेरे भाई...एक हादसा हो गया है।"...पप्पू ने हड़बड़ाते हुए कहा। 



"क्या हुआ पप्पू ?"...मैंने भी हड़बड़ा कर पूछा। 



"यार, मेरे मामा जी का एक्सीडेंट हो गया है और मुझे अभी तुरंत अपने मम्मी 
पापा के साथ रांची जाना पड़ेगा। मैं आज नहीं आ सकूँगा। तू अकेले ही किताबें 
लेने चले जाना।" पप्पू ने एक सांस में ही सब कुछ कह दिया। 



उसकी आवाज़ में मुझे एक दर्द और चिंता का आभास हुआ। मैंने उसे हिम्मत देते 
हुए कहा,"कोई बात नहीं मेरे दोस्त, तू घबरा मत, मामा जी को कुछ नहीं होगा। 
तू आराम से जा और वहाँ पहुँच कर मुझे बताना।" 



मैंने इतना कहा और पप्पू ने फ़ोन रख दिया। 



मैं थोड़ी देर के लिए उसके मामा जी के बारे में सोचने लगा और भगवान् से प्रार्थना करने लगा की सब कुछ अच्छा हो। 



अपनी इसी सोच में बैठे बैठे थोड़ी देर के बाद मुझे एक आहट सुनाई दी। मैंने 
देखा तो रिंकी हस्ते हुए मेरी तरफ देख रही थी। वो अभी अभी सीढ़ियों से उतर 
कर मेरे कमरे के सामने पहुँची थी। उसने सफ़ेद रंग का शलवार सूट पहना हुआ था 
और लाल रंग का दुपट्टा लिया हुआ था। बिल्कुल पंजाबी माल लग रही थी। मैंने 
नज़र भर कर उसकी ओर देखा और एक ठण्डी आह भरी। 



वो मेरे कमरे के दरवाज़े पे आई और धीरे से मुझसे कहा, "मैं थोड़ी देर में चली आऊँगी। तुम कब तक वापस आओगे?" 



मुझे पता था कि वो मेरे बारे में नहीं बल्कि पप्पू के बारे में जानना चाहती
थी। उसे पता था कि मैं पप्पू के साथ बाज़ार जा रहा हूँ और फिर उसके साथ ही 
वापस आऊँगा...और फिर उन दोनों की अधूरी प्यास पूरी हो जायेगी। 



पता नहीं मुझे क्या हुआ लेकिन मैंने उसे यह नहीं बताया कि पप्पू के मामा जी
का एक्सीडेंट हुआ है और वो रांची चला गया है। मैंने बस मुस्कुरा कर उसकी 
तरफ देखा और अपनी एक आँख मार कर कहा,"हम भी जल्दी ही वापस आ जायेंगे।" 



मेरे आँख मरने पर उसने एक स्माइल दी और अपना सर झुका कर तेज़ क़दमों से चल कर बाहर निकल गई। 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

अब मैं अपने कमरे में अकेला यह सोचने लगा कि अब मैं क्या करूँ। पप्पू था 
नहीं इसलिए बाहर जाने का दिल नहीं था। मैंने अपना कंप्यूटर चालू किया और 
लगा सेक्सी फ़िल्में देखने। टेबल पे तेल की बोतल देखी और थोड़ा सा तेल अपने 
हाथों में लेकर अपने लंड महाराज की सेवा करने लगा।
लगभग एक घंटे के बाद गेट पे किसी के 
आने की आहट हुई। मैंने बाहर निकल कर झाँका तो पाया कि रिंकी अपने हाथों में
कुछ किताबें और एक हाथ में एक छोटी सी पोलीथिन लटकाए घर के अन्दर दाखिल 
हुई। मैंने गौर से उसके हाथ में लटके पोलीथिन को देखा तो एक बड़ी सी ट्यूब 
थी वीट क्रीम की ! टी वी पे कई बार इस क्रीम के बारे में देखा था। 



मेरी आँखों में एक चमक आ गई, मैं समझ गया कि आज रिंकी रानी अपनी मुनिया को 
चिकनी करने वाली है। मैं इस ख्याल से ही सिहर गया और उसकी झांटों भरी चूत 
को याद करके यह कल्पना करने लगा कि जब उसकी चूत चिकनी होकर सामने आएगी तो 
क्या नज़ारा होगा। 



रिंकी ने मुझे देखकर एक सवालिया निगाहों से कुछ पूछना चाहा पर कोई शब्द 
उसके मुँह से बाहर नहीं आये। और वो मुस्कुराते हुए सीढियाँ चढ़ गई और अपने 
घर में चली गई। शायद वो सोच रही थी कि पप्पू मेरे कमरे में है और थोड़ी देर 
में उसकी चुदाई लीला चालू हो जाएगी। लेकिन उसे क्या पता था कि आज तो उसका 
यार शहर में था ही नहीं। 



मेरे दिमाग में एक शैतानी भरा ख्याल आया और मैंने पूरी प्लानिंग कर ली। मैंने ठान लिया कि आज पप्पू की कमी मैं पूरी करूँगा। 



मैं इस ख्याल से खुश होकर वापस अपने कमरे में घुस गया और अपने मनपसंद साईट 
पे चिकनी चिकनी चूत की तस्वीरें देखने लगा। मेरा लंड खड़ा होकर सलामी देने 
लगा। 



मुझे पता था कि रिंकी सीधा अपने बाथरूम में घुसेगी और अपनी चूत की सफाई 
करेगी। इस सब में उसे कम से कम आधा घंटा तो लगना ही था। मैंने भी जल्दी 
नहीं की और आराम से वक़्त बीतने का इंतज़ार करता रहा। 



थोड़ी देर में रिंकी अपने बालकनी में आई जो मेरे कमरे की खिड़की से साफ़ दिखाई
देता है। अब तक उसने अपने कपड़े बदल लिए थे और एक हल्के गुलाबी रंग का टॉप 
पहन लिया था। नीचे का कुछ दिख नहीं रहा था इसलिए समझ में नहीं आया कि नीचे 
क्या पहना है। 



खैर, उसे देखकर मैं समझ गया कि उसने अपना काम पूरा कर लिया है और अब वो अपने प्रीतम का इंतज़ार कर रही है। 



थोड़ी देर वहाँ खड़े रहने के बाद वो अन्दर चली गई। 



अब मैंने अपने धड़कते दिल को संभाला और हिम्मत जुटा कर अपने कमरे से बाहर 
निकल कर सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने लगा। मेरे मन में ये ख्याल चल रहे थे कि किस 
तरह से इस मौके का फायदा उठाया जाए। मुझे इतना तो विश्वास था कि आज रिंकी 
पूरी तरह से मानसिक रूप से अपनी चूत में लंड लेने के लिए तैयार है। बस उसे 
थोड़ा सा उत्तेजित करने की जरुरत है फिर वो खुद बा खुद अपनी टाँगें फैला कर 
लंड का स्वागत करेगी। 



मैं ऊपर पहुँच गया और हॉल में जाकर रिंकी को आवाज़ लगाई। रिंकी वहीं सोफे पे बैठी थी और टी वी पर फिल्म देख रही थी। 



मुझे देख कर उसने स्माइल दी और मेरे पीछे देखने लगी। उसे लगा शायद पप्पू 
मेरे पीछे पीछे आ रहा होगा। लेकिन किसी को न देख कर उसका चेहरा थोड़ा सा 
उदास हो गया। 



"आओ, सोनू...बैठो। कुछ काम था क्या?" बड़े भोलेपन से रिंकी ने मुझसे पूछा। 



"हाँ जी, आपको एक सन्देश देना था। इसीलिए आपके पास आना पड़ा।" मैंने 
मुस्कुराते हुए कहा और उसके बगल में जाकर सोफे पे बैठ गया। हम दोनों एक बड़े
से सोफे पे एक एक किनारे पे एक दूसरे की तरफ मुड़कर बैठ गए। 



मैं गौर से रिंकी की आँखों में देख रहा था और मुस्कुरा रहा था। रिंकी भी 
एकटक मुझे देखे जा रही थी फिर उसने चुप्पी तोड़ी,"हाँ बोलो, कुछ बोलने वाले 
थे न तुम...?" 



"हाँ, असल में तुम्हारे लिए एक बुरी खबर है। पप्पू को अचानक किसी जरुरी काम
से रांची जाना पड़ा इसलिए वो आज नहीं आ सकता।" मैंने पप्पू का नाम लेते हुए
उसे आँख मारी। 



रिंकी मेरी इस हरकत से थोड़ा शरमा गई और पप्पू के बाहर जाने की बात सुनकर थोड़ा उदास हो गई। 



"अरे चिंता मत करो, मैं हूँ ना !! तुम्हें बोर नहीं होने दूँगा।" इतना कहते
हुए मैं थोड़ा सा सरक कर उसके करीब चला गया। अब हमारे बीच महज कुछ इंच का 
ही फासला रह गया था। 



"वैसे आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।" मैंने उसके ऊपर अपना जाल डालते हुए कहा। 



"क्यूँ, आज से पहले कभी नहीं लगी क्या?" रिंकी ने अपनी तारीफ सुनकर थोड़ा सा लजाते हुए मुझे उलाहना देने के अंदाज में पूछा। 



"ऐसी बात नहीं है, असल में कभी तुम्हें उस नज़र से देखा नहीं था लेकिन आज तो
तुम्हारे ऊपर से मेरी नज़र ही नहीं हट रही है।"मैंने एक लम्बी सांस लेते 
हुए उसका हाथ पकड़ लिया और उसकी आँखों में बिना पलकें झपकाए देखने लगा। 



"हाँ जी...आपको फुर्सत ही कहाँ है जो आप मेरी तरफ देखोगे। तुम्हारी आँखें 
तो आजकल किसी और को देखती रहती हैं।" रिंकी ने दिखावटी गुस्सा दिखाते हुए 
कहा। 



"यह क्या बात हुई, मैंने कभी किसी को नहीं देखा यार...मेरे पास इतना वक़्त 
ही कहाँ है।" मैंने कहते हुए उसके हाथों को अपने हाथों से सहलाने लगा। 



"अब बनो मत...मेरे पास भी आँखें हैं और मुझे भी सब दिखता है कि आजकल साहब कहाँ बिजी रहते हैं..." रिंकी ने इस बार मुझे आँख मारी। 



मैं समझ गया कि वो बीती रात की बात कर रही है। मैं थोड़ी देर के लिए चुप सा हो गया लेकिन उसकी तरफ देखता ही रहा। 



"बड़े थके थके से लग रहे हो, रात भर सोये नहीं क्या?" रिंकी ने मेरी आँखों में देखते हुए पूछा। 



"मेरी छोड़ो, तुम अपनी बताओ...लगता है तुम्हें रात भर नींद नहीं आई...शायद 
किसी का इंतज़ार करते करते बेचैन हो रही होगी रात भर, है न?" मैंने उल्टा 
उसके ऊपर एक सवाल दगा और उसके हाथ को धीरे से दबा दिया। 



उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए एक ठण्डी सांस भरी...
"अपनी आँखों के सामने वो सब होता देख
कर किसी नींद आएगी।" रिंकी ने अब मेरे जांघ पर अपने दूसरे हाथ से एक चपत 
लगाते हुए कहा और फिर अपने हाथ को वहीं रहने दिया। 



मैंने उस वक़्त एक छोटी सी निकर पहनी हुई थी जो कि मेरे जांघों के बहुत ऊपर 
तक उठा हुआ था। जब रिंकी ने अपने हाथ रखे तो वो आधा मेरे निकर पे और आधा 
मेरी जांघों पे था। मेरी टांगों पे ढेर सारे बाल थे। रिंकी ने अपनी 
उँगलियों से थोड़ी सी हरकत करनी शुरू कर दी और मेरे जांघों को धीरे धीरे 
सहलाने लगी। 



मेरी तो मानो मन की मुराद ही पूरी हो रही थी। मैं मन ही मन खुश हो रहा था 
यह सोच कर कि अब मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। मैं अब सीधा आगे बढ़ 
सकता था लेन मैंने उसे छेड़ने के लिए अनजान बनते हुए पूछा,"ऐसा क्या देख 
लिया तुमने जो तुम्हें रात भर नींद नहीं आ रही थी। वैसे मुझे पता है कि तुम
असली बात छुपा रही हो, असल में तुम पप्पू का इंतज़ार कर रही थी और ..."
रिंकी मेरे मुँह से यह सुनकर थोड़ा शरमा सी गई और मेरे जांघों पर फिर से 
मारा। मैंने झूठ मूठ ही बचने के लिए उसका हाथ खींचा तो वो मेरे ऊपर गिर पड़ी
और उसकी मौसम्मी सी चूचियाँ मेरे हाथों को रगड़ने लगीं। एकदम से नर्म 
मुलायम चूचियों के स्पर्श से मेरा लंड जो कि पहले से ही अपने रोवाब पे था 
और भी तन गया। 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

रिंकी हड़बड़ा कर पीछे हुई और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी लेकिन उसने न तो अपना हाथ छुड़ाया और न ही मेरे जांघों से अपना हाथ उठाया। 



"बच्चू, मैंने कल रात सब देख लिया था...तुम और प्रिया मिलकर जो रासलीला रचा
रहे थे वो मेरी आँखों से बच नहीं सका। तुम्हें क्या लगता है...वो सब खेल 
देख कर मुझे नींद आ जाएगी...वैसे कब से चल रहा है ये..." रिंकी ने मुझे 
लाजवाब कर दिया और मुझसे पूरी तरह खुलकर बातें करने लगी... 



"वो मैं...मम्म..." मेरे मुँह से कोई शब्द ही नहीं निकल रहा था... 



"अब शरमाना छोड़ भी दो, हम दोनों एक दूसरे का राज़ जानते हैं तो बेहतर है कि 
हम एक दोस्त की तरह एक दूसरे से सारी बातें शेयर करें !" रिंकी ने बड़ी 
सहजता से कह दिया। 



मैं बस एक तक उसे देखता रहा और सोचता रहा कि क्या बोलूं...आज मैं रिंकी की 
बेबाकी से भी हैरान हो गया। दोनों बहनें कमाल की थीं। इतने दिनों से उनके 
साथ एक ही छत के नीचे रह रहा था लेकिन कभी यह नहीं सोचा था कि वो इतने खुले
विचारों की होंगी।
खैर मैं इस बात से खुश था कि मुझे बिना प्रयास के अपनी हर मनोकामना पूरी होती दिख रही है। 



मैंने रिंकी के छेड़ते हुए उसकी तरफ थोड़ा झुक कर उसे कहा, "वैसे आज तो बस 
तुम्हें देखने का मन कर रहा है मेरा ! ह्म्म्म...कितना लकी है मेरा दोस्त 
जिसे तुम जैसी हसीना मिली।" 



मेरी बातों से रिंकी मुस्कुरा उठी...और वापस से मुझे मारने लगी...लेकिन फिर
से उसकी आँखों में उदासी छ गई। मैं समझ गया कि वो पप्पू के न आ पाने की 
वजह से दुखी है। 



मैंने आगे बढ़ कर उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसकी आँखों में झाँकने लगा। उसकी आँखें आंसुओं से भर चुके थे। 



"अरे, इसमें इतना उदास होने वाली कौन सी बात है यार? मैं हूँ न..." इतना 
कहते हुए मैंने उसकी आँखों पे अपने होंठ रख दिए और दोनों आँखों को चूम 
लिया। 



मेरी इस हरकत से रिंकी जैसे सिहर सी गई। उसने एक लम्बी सांस लेते हुए मेरे 
दोनों हाथों को पकड़ लिया और अपनी आँखें बंद किये हुए ही उसी अवस्था में 
बैठी रही। उसके सुर्ख गुलाबी होंठ थरथरा रहे थे। मुझसे रहा नहीं गया और 
मैंने अपने होंठ उसके होंठों पे रख दिए। 



हम दोनों के होंठ एक दूसरे के ऊपर बिल्कुल स्थिर थे...न तो मैंने अपने 
होंठों से कोई हरकत की न ही रिंकी ने। हम दोनों बस एक दूसरे की साँसों की 
गर्मी को महसूस कर रहे थे। 



रिंकी ने अब अपने होंठों को थोड़ी सी हरकत दी और मेरे होंठों से रगड़ने लगी। 
मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गई और मैंने भी अपने होंठों को खोलकर उसके नर्म 
नाज़ुक अधरों को अपने अधरों में कैद कर लिया और बड़े प्यार से उन्हें चूमने 
लगा। 



मेरे हाथ अपने आप हरकत में आ गए और उसके गालों को छोड़ कर उसकी गर्दन को 
सहलाने लगे। उसके कन्धों पे मेरे हाथ ऐसे फिसल रहे थे जैसे कोई नर्म मुलायम
रेशम हो। मैंने अपनी उंगलियों से उसके गले के चारों तरफ घुमा घुमा कर उसे 
उत्तेजित करने कीकोशिश की लेकिन वो तो पहले से ही जोश में थी। 



रिंकी ने अपने हाथों को मेरी कमर के चारों तरफ कर लिया और मुझे अपने और 
करीब खींचने लगी। हम दोनों एक दूसरे को चूमते हुए बिल्कुल करीब हो गए। 
रिंकी के हाथ मेरे पीठ पर घूमने लगे और मुझे अजीब सी फीलिंग होने लगी। मेरी
पकड़ और भी मजबूत हो गई। 



अब मैंने अपना एक हाथ धीरे से सामने लाकर रिंकी के टॉप के ऊपर से उसके 
मुलायम अनारों पे रखा। जैसे ही मैंने उसकी चूचियों को पकड़ा...रिंकी ने मेरे
होंठों को अपने दांतों से काट लिया...
"हम्मम्मम्म..."...एक हल्की सी सिसकारी के साथ रिंकी ने अपने हाथों से मेरे पीठ को और भी जकड़ लिया। 



मैंने अब धीरे धीरे उसकी चूचियों को सहलाना शुरू किया और साथ ही साथ उसके 
होंठों को भी चूसता रहा। मैंने अपना दूसरा हाथ भी सामने कर दिया और उसकी 
दोनों चूचियों को पकड़ लिया। 



इतनी नर्म और मुलायम चूचियाँ थी कि बस पूछो मत। मेरे दिमाग में प्रिया की 
चूचियों का ख्याल आ गया। उसकी चूचियाँ इतनी नर्म नहीं थीं। जैसे जैसे मैं 
रिंकी की चूचियाँ दबा रहा था रिंकी जोश से भरती चली जा रही थी। उसने अपने 
होंठ मेरे होंठों से छुड़ा लिए और सहसा मेरे सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ 
कर नीचे झुका दिया। 



ऐसा करने से मेरा सर अब रिंकी के गले और चूचियों के बीच के खाली जगह पे आ 
गया। रिंकी ने वी शेप का टॉप पहना था जिसकी वजह से उसकी चूचियों की घाटी 
मेरी आँखों के ठीक सामने नज़र आ रही थी। मैंने देरी न करते हुए अपने गीले 
होंठ उसकी घाटी के ऊपर रख दिए और एक प्यारा सा चुम्बन किया। 



"ईसस...ह्म्म्मम्म...ओ सोनू...हम्म्म्म..." रिंकी के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। 



मैंने अपना काम जारी रखा और अपने दबाव को थोड़ा बढ़ाया। मेरे हाथ अब सख्त हो 
चुके थे और बेरहमी पे उतर आये थे। साथ ही साथ मेरी जीभ उसकी चूचियों की 
दरारों को ऊपर से नीचे तक चाट रहे थे। 



रिंकी बड़े मज़े से अपनी आँखें बंद किये हुए मेरे सर पर अपना हाथ फेरती रही और मादक सिसकारियाँ निकालती रही। 



अब और ज्यादा बर्दाश्त करना मुश्किल था, मैंने रिंकी की चूचियों को छोड़ कर 
उसे खुद से थोड़ा सा अलग किया और अपने हाथों से उसके टॉप को उठा कर ऊपर करने
लगा। जैसे ही मैंने उसकी टॉप को थोड़ा ऊपर उठाया उसकी नाभि नज़र आ गई। 


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इतनी खूबसूरत नाभि जैसे कि सपाट चिकने पेट के ऊपर एक छोटा सा छेद बना दिया 
गया हो। मैंने अपनी एक उंगली उसकी नाभि में डाल दी और धीरे से सहला दिया। 



रिंकी सिहर गई और उसका कोमल सा पेट थरथराने लगा। उसकी थरथराहट देख कर मुझे 
यह एहसास होने लगा कि उसे जबर्दस्त सिहरन हो रही है। मैं मुस्कुरा उठा और 
उसकी आँखों में देखने लगा।
रिंकी की आँखों में एक मौन आमंत्रण था। उसके होंठ तो खामोश थे लेकिन आँखें कह रही थी कि आओ मुझे मसल डालो। 



उसके आमंत्रण को मैंने स्वीकार किया और उसके होंठों पे एक बार फिर से अपने 
होंठ रख दिए। इस बार मैंने अपनी जीभ उसके होंठों पर चलाये और धीरे से उसके 
मुँह में डाल दी। रिंकी ने मेरी जीभ का स्वागत किया और एक मंझे हुए खिलाड़ी 
कि तरह मेरी जीभ को अपने होंठों से चूसने लगी। 



जीभ के चूसने से मेरा जोश और भी बढ़ गया और मैंने अब उसके टॉप को और भी ऊपर 
तक उठा दिया। जैसे ही उसका टॉप और ऊपर आया उसकी काली ब्रा ने मेरा ध्यान 
अपनी ओर खींच लिया। मैंने अपने हाथ उसके ब्रा के ऊपर रख दिए और प्यार से 
सहला दिया दोनों कबूतरों को ! 



उधर रिंकी मेरी जीभ चूसने में व्यस्त थी। मैंने अब उसके टॉप को उसके शरीर 
से अलग कर देना उचित समझा और यह सोच कर मैंने उसकी टॉप को उतरने की कोशिश 
शुरू कर दी। 



अचानक से रिंकी ने अपना मुँह मेरे मुँह से छुड़ाया और मेरे हाथों को रोक दिया। 



मैं चौंक कर उसकी तरफ देखने लगा,"क्या हुआ??? अब इसकी क्या जरूरत है, इसे निकाल दो न प्लीज।" मैंने विनती भरे शब्दों में कहा। 



"निकाल दूंगी मेरे राजा, लेकिन यहाँ नहीं...अन्दर चलते हैं। यहाँ कोई भी 
देख सकता है।" रिंकी ने अपनी टॉप को नीचे करते हुए एक नशीली आवाज़ में कहा। 



"अरे यार, यहाँ कौन है? वैसे भी हम घर में अकेले हैं। कोई नहीं देखेगा।" मैंने तड़पते हुए कहा और वापस उसकी चूचियों को दबाने लगा। 



"अरे तुम्हें तो किसी का ख्याल ही नहीं रहता है, तुम बस अपनी धुन में मस्त 
रहते हो और यह भी नहीं देखते कि कहीं कोई और तुम्हारे खेल का मज़ा तो नहीं 
ले रहा। भूल गए कल रात की बात !! वो तो शुक्र है भगवान का, जो मैंने देखा, 
अगर मम्मी ने या नेहा ने देख लिया होता तो आज तुम्हारी खैर नहीं थी बच्चू।"
रिंकी ने मेरे हाथों के ऊपर अपने हाथ रख कर अपनी चूचियों को दबवाते हुए 
कहा। 



"जाओ पहले नीचे का गेट बंद करके आओ और फिर सारी खिड़कियाँ दरवाज़े भी बंद कर 
देना। मैं अपने बेडरूम में तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ।" रिंकी ने सोफे से 
उठते हुए कहा और अचानक से मेरे सख्त होकर निकर के अन्दर से झाँक रहे लंड पर
हल्की सी चपत लगा कर आँख मार दी। 



लंड पर हाथ जाते ही लंड ने ठुनक कर सलामी दी और अकड़ गया। मैंने भी देरी 
नहीं की, सोफे से उठ गया और अचानक से उसकी एक चूची को जोर से दबा कर नीचे 
की तरफ गेट बंद करने के लिए भागा। 



"उईईइ...शैतान, उखाड़ ही डालोगे क्या?" रिंकी ने चीखते हुए कहा और मुझे जाते हुए देख कर मुस्कुराते हुए अपने कमरे की तरफ चल पड़ी। 



पता नहीं मेरे अन्दर इतनी फुर्ती कहाँ से आ गई, मैं पलक झपकते ही गेट बंद 
करके सीधा ऊपर पहुँच गया और रिंकी के कमरे के दरवाज़े पर पहुँच गया। दरवाज़े 
से अन्दर देखा तो रिंकी अपने कमरे में रखे बड़े से आईने के सामने खड़ी है और 
अपने खुद के हाथों से अपनी चूचियों को सहला रही है। 



मैं उसे देख कर एकदम मस्त हो गया। मैं दबे पाँव उसके पीछे पहुँच कर रुक गया
और अपने हाथ आगे बढ़ा कर उसके टॉप को पीछे से ऊपर करने लगा। 



रिंकी का ध्यान मेरी तरफ गया और उसने मुझे देख कर एक मादक सी स्माइल दी लेकिन अपनी चूचियों को वैसे ही सहलाती रही। 



मैंने उसकी टॉप को ऊपर करते हुए उसके चिकने और गोरी गोरी कमर पर अपने होंठों से हल्की हल्की पप्पी देने लगा। 



मैंने सुना था कि औरतों के बदन के कुछ ऐसे हिस्से होते हैं जहाँ मर्द का 
ध्यान ज्यादा नहीं जाता और वो जगह अनछुई सी रह जाती है। जब उन जगहों पे 
उँगलियों से या होंठों से हरकत करो तो उन्हें बहुत मज़ा आता है और यहाँ तक 
कि चूत झड़ तक जाती है। 



खैर, मैं अपने होंठों को उसके कमर से होते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और उसकी पीठ पे भी चूमने लगा। 



उसकी मदहोशी का ठिकाना नहीं था। रिंकी से बर्दाश्त नहीं हुआ और वो सीधे मुड़
गई। उसने अपनी चूचियों को छोड़ कर मेरा सर अपने हाथों से थाम लिया और अब 
मेरे होंठ उसके पेट पे चलने लगे।
मेरी नज़र उसकी नाभि पर गई तो मुझसे 
रहा नहीं गया और मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी नाभि के अन्दर घुमाने 
लगा। रिंकी ने मेरे बालों को अपने उँगलियों में पूरा जकड़ लिया था। मैं मज़े 
से उसकी जवानी का रसपान करने में लगा हुआ था। 



मैंने अपने हाथों से उसका टॉप उठा रखा था जिसे मैं बाहर निकल देना चाहता 
था। मैंने अपने हाथों को थोड़ा सा और ऊपर करके रिंकी को एक इशारा किया। 
रिंकी काफी समझदार निकली और उसने मेरे हाथों से अपना टॉप छुड़ा कर खुद ही 
पूरा बाहर निकाल दिया। 



अब तक मैं अपने घुटने पर बैठ चुका था ताकि आराम से उसके हुस्न का दीदार कर 
सकूँ। रिंकी ने अपनी चूचियों को ब्रा में कैद कर रखा था और ब्रा ऐसी थी कि 
उसकी आधी चूचियाँ बाहर आने को तड़प रही थी। 



मैंने अपना हाथ ऊपर की तरफ बढ़ाया और उसकी ब्रा के ऊपर से ही चूचियों को 
दबाने लगा। रिंकी ने मेरा सर ऊपर की तरफ खींचना शुरू किया जैसे कि वो कुछ 
इशारा करना चाह रही हो। 



मैं उसका इशारा समझ गया और खड़ा होने लगा और अब मेरा सर उसकी चूचियों के 
बिल्कुल सामने आ गया। मैं एक बार फिर से उसकी चूचियों पे टूट पड़ा। अब मुझे 
और सब्र नहीं बचा था मैंने जोर जोर से उसकी चूचियाँ दबानी शुरू कर दी... 



"उह्ह्ह्ह......आऐईईइ... धीरे सोनू, मार डालोगे क्या...?" रिंकी पूरे उत्तेजना में थी और अपना सर इधर उधर कर रही थी। 



मैंने धीरे से अपना एक हाथ पीछे लेजाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और अब मेरे सामने दो आज़ाद कबूतर उछल रहे थे। 



मैंने उसकी ब्रा को उसके बाँहों से निकाल कर नीचे फेंक दिया और उसकी नंगी चूचियों को अपने हथेली में पूरा भर लिया। 



32 इन्च की रही होगी उसकी उस वक़्त। 



मैंने अपना मुँह उसकी नंगी चूची के निप्पल पे रखा और किशमिश के दाने जैसे निप्पल को मुँह में भर लिया। 



मुँह में डालते ही रिंकी ने एक जोर कि सिसकारी भरी, "उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़...ह्म्म्मम्म।" 



मैंने पूरे जोश में आकर उसकी चूचियों को चूसना शुरू किया मानो आज ही उसका 
सारा रस निचोड़ कर पी जाऊँगा। एक हाथ उसकी दूसरी चूची पर था। रिंकी ने अपनी 
उस चूची को जो मेरे मुँह में थी, अपने हाथों से पकड़ लिया और मेरे मुँह में 
डालने लगी। 



रिंकी के मुँह से निरंतर मादक आवाजें निकल रही थीं जो मेरा जोश बढ़ाये जा रही थीं..
मैंने अब चूची बदल ली और दूसरी चूची 
को मुँह में भरा और उसी तरह से चूसने लगा। पहली चूची मेरे चूसने की वजह से 
पूरी लाल हो गई थी। उसपर मेरे होंठों के निशाँ साफ़ दिख रहे थे। 



मैंने एक परिवर्तन देखा, थोड़ी देर पहले जो चूची मुलायम लग रही थी वो अब कड़ी
हो गई थी और फूल गई थी। अब उसकी चूची और भी ज्यादा गोल हो गई थी और निप्पल
तो मानो सुपारी की तरह से कठोर हो गए थे। 



मैंने उसकी चूची को चूसते हुए अपने दोनों हाथ नीचे किये और स्कर्ट के ऊपर 
से उसके पिछवाड़े को सहलाने लगा। मेरे हाथ उसके बड़े और गोल गोल पिछवाड़े को 
धीरे अपनी हथेली में भर कर सहलाने लगा। 



मुझे कुछ अजीब सा लगा, मैंने अपने हाथों को और अच्छी तरह से सहला कर देखा तो पाया कि रिंकी ने अन्दर कुछ नहीं पहना है। 



मुझे बीती रात की प्रिया की बात याद आ गई और मैं मुस्कुरा उठा।
"दोनों बहनें बिल्कुल समझदार 
हैं...समय गँवाने का चांस ही नहीं रखतीं।" मैंने मन ही मन सोचा और अपने 
हाथों को उसकी स्कर्ट के अन्दर डालने लगा। 



मैंने उसकी जांघों को सहलाते हुए उसके पिछवाड़े पे अपना हाथ रखा... 



"उफ्फ्फ्फ़...कितनी चिकनी थी उसकी स्किन ! मानो मक्खन मेरे हाथ में है।" 



मेरे हाथ अब उसके कूल्हों तक आ गए थे, मैंने उसकी नंगी गाण्ड को अपने हथेली
में दबा दिया और उसकी चूची के निप्पल को अपने दाँतों से हल्के हल्के काटने
लगा। 



रिंकी अपने पूरे शवाब पे थी और मेरा भरपूर साथ दे रही थी। मैं अपने हाथ 
सामने की तरफ लाया और जैसा कि मुझे उम्मीद थी वैसा ही पाया, उसने अपनी चूत 
को थोड़ी देर पहले ही चिकना किया था। मेरे हाथ की उंगलियाँ उसके चूत पे जाते
ही फिसल सी गईं और उस छुवन ने रिंकी को सिहरा सा दिया, उसने मेरे कंधे पे 
अपने दांत गड़ा दिए। 


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मैंने उसकी चूत को अपने हाथों की मुट्ठी में कैद कर लिया और उसे स्पंज की 
तरह मसलने लगा लेकिन प्यार से। इतने देर से चूमने और चाटने चूसने का खेल 
खेलते खेलते उसकी मुनिया रानी अपना काम रस छोड़ चुकी थी और बहुत ही गीली हो 
गई थी। 



मैं ठहरा चूत चाटने और चूसने का दीवाना। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने झट से उसकी चूची अपने मुँह से बाहर निकाल लिया। 



रिंकी ने भी झट से मेरा मुँह पकड़ा और अपनी जीभ मेरे मुँह में ठेल दी। कुछ 
देर ऐसे ही जीभ चूसने और चुसवाने के बाद मैंने उसकी स्कर्ट का बटन अपने 
हाथों से खोलना चाहा। उसकी स्कर्ट में कहीं भी बटन नहीं मिल रहे थे, मैं 
कोशिश किये जा रहा था। 



रिंकी को शायद मेरी इस कोशिश में मज़ा आ रहा था। उसने अचानक से मुझे खुद से अलग किया और मुझे धक्का देकर बिस्तर पे लिटा दिया... 



मैं अपनी कोहनियों के बल बिस्तर पे आधा लेट गया। मेरे दोनों पैर नीचे लटक 
रहे थे और मैं आधा उठा हुआ था अपनी कोहनियों के बल। रिंकी मेरे सामने खड़ी 
थी और अपनी लाल हो चुकी चूचियों को प्यार से सहला रही थी। 



"जानवर कहीं के.. यह देखो क्या हाल किया है तुमने इनका..." रिंकी मेरी तरफ सेक्सी सी स्माइल देते हुए कहने लगी... 



मैं अपने होंथों पर अपनी जीभ फिर रहा था, मेरा गला सूख गया था।
तभी रिंकी ने अपनी चूचियाँ छोड़ कर 
अपने हाथ अपनी स्कर्ट के पीछे ले गई और अपनी स्कर्ट का जिप खोला। स्कर्ट 
धीरे से उसके पैरों से होता हुआ नीचे फर्श पर गिर गया। कमरे में दिन का 
उजाला था और उस उजाले में रिंकी का बदन किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक 
रहा था। बिल्कुल चिकना बदन...एक रोयाँ तक नहीं था उसके बदन पे... 



वो मेरे सामने खड़ी होकर अपना बदन लहरा रही थी। मैं सब्र नहीं रख पा रहा था।
मैं उठ गया और बिस्तर पे बैठे बैठे ही उसे अपनी तरफ खींच लिया। वो लहराती 
हुई मेरे सीने से चिपक गई। 



रिंकी को तो मैंने बिल्कुल नंगा कर दिया था लेकिन अब तक मेरे बदन पे सारे 
कपड़े वैसे ही थे। रिंकी ने मेरे गले में अपनी बाहें डाल दीं और मेरे कानों 
के लोम को अपने होंठों से चुभलाने लगी। मुझे बहुत तेज़ गुदगुदी हुई। मैंने 
अपने कान छुड़ाने की कोशिश की लेकिन उसने छोड़ा नहीं। 



"शैतान, मुझे तो पूरी नंगी कर दिया...सब कुछ देख लिया मेरा और खुद...??" रिंकी ने मेरे कान में धीरे से कहा। 



"तुमने भी तो मेरा सब कुछ देख लिया है..." मैंने भी सेक्सी आवाज़ निकलते हुए कहा। 



"मैंने कब देखा...?" रिंकी ने चौंकते हुए पूछा। 



"तुम ही तो कह रही थी कि तुमने कल रात को सब देख लिया है...फिर बचा क्या !"...मैंने उसे छेड़ते हुए जवाब दिया... 



"ओहो...उस वक़्त तो तुम्हारा वो उसके मुँह में कैद था...मैंने ठीक से देखा ही कहाँ !"...रिंकी ने थोड़ा शरमाते हुए कहा। 



"क्या किसके मुँह में था...ठीक से बताओ न..."मैंने जानबूझकर ऐसा कहा ताकि 
रिंकी पूरी तरह खुलकर मेरे साथ मज़े ले सके। मुझे सेक्स के समय देसी भाषा का
इस्तेमाल करना बहुत पसंद है, और दोस्तों शायद आप सब ने भी इसका तजुर्बा 
लिया होगा। अगर किसी ने नहीं किया तो एक बार करके देखना...लंड और भी तन 
जायेगा और चूत और भी गीली हो जायेगी। 



खैर मैंने रिंकी को अपने गले से लगा रखा था और उससे ठिठोली कर रहा था।जब 
मैंने उससे खुलकर बात करने का इशारा किया तो वो जैसे छुई मुई से शरमा गई। 



"धत, तुम बड़े शैतान हो...मुझे नहीं पता उसे क्या कहते हैं।" रिंकी ने अपनी आँखें मेरी आँखों में डालकर शरमाते हुए कहा। 



"प्लीज रिंकी...ऐसा मत करो...बोलो ना...मैं जनता हूँ, तुम्हें सब पता है।" मैंने आँख मरते हुए उससे विनती करी। 



रिंकी धीरे से मेरे कानों के पास आकर फुसफुसा कर बोल पड़ी," तुम्हारा लंड 
प्रिया के मुँह में था इसलिए मैं तुम्हारे लण्ड को देख नहीं सकी थी।" यह कह
कर उसने अपना मुँह मेरे सीने में छुपा लिया।
मैंने रिंकी को अपनी गोद में बिठा 
लिया और अपने हाथों से उसका चेहरा ऊपर उठा दिया। उसने अपनी आँखें बंद कर 
लीं। मैंने उसकी चूची को अपने मुँह से फिर से पकड़ लिया और चूसने लगा। उसने 
मुझे फिर से धक्का दिया और बिस्तर पे उसी तरह से लिटा दिया। मैं फिर वैसे 
ही अपनी कोहनियों पे आधा लेट सा गया। रिंकी ने बिना कुछ कहे फुर्ती से मेरे
निक्कर के ऊपर से मेरे लंड पे हाथ रखा और उसकी लम्बाई-मोटाई का जायजा लेने
लगी। 



जैसे जैसे वो मेरे लंड का आकार महसूस कर रही थी, वैसे वैसे उसके मुँह पे 
चमक सी आ रही थी। उसने अब मेरा लंड अच्छी तरह से पकड़ लिया और दबा दिया। फिर
उसने निकर के ऊपर से ही मेरे गोलों को भी पकड़ा जो कि उत्तेजना में आकर 
सख्त और गोल हो गए थे। उसने मेरे गोलों को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर दबा 
दिया। 



"उह्ह्हह्ह......रिंकी, जान ही ले लोगी तुम तो !"...मैं दर्द से तड़प उठा और सिसकारते हुए उससे कहने लगा। 



रिंकी ने हँसते हुए मेरे गोलों को एक बार फिर दबा दिया और फिर मेरा हाथ 
अपनी तरफ माँगा। मैंने अपने दोनों हाथ बढ़ा दिए। उसने मुझे मेरे हाथों से 
खींच कर बिठा दिया और फिर एक ही झटके में मेरे बदन से मेरा टी-शर्ट अलग कर 
दिया। मेरे सीने पे ढेर सारे बाल थे। रिंकी ने अपनी उंगलियाँ मेरे सीने पे 
फिरानी शुरू कर दी और अपना मुँह मेरे सीने के करीब लाकर मेरे निप्पल को चूम
लिया। 



मैं सिहर गया और अपने हाथों से उसका सर पकड़ लिया। लेकिन रिंकी ने मेरी 
हरकतों को दरकिनार करते हुए मुझे फिर से वापस धकेल कर लिटा दिया और अब उसके
हाथ मेरे निक्कर पर चलने लगे। लंड ने तो पता नहीं कब से टेंट बना रखा था। 
उसने एक बार और मेरे लण्ड को अपनी हथेली से पकड़ा और सहला कर उसे अपने 
होंठों से चूम लिया। 



मैं खुश हो गया, मुझे समझ में आ गया कि इन दोनों बहनों को किसी भी मर्द को 
दीवाना बनाना आता है। मैं अपनी किस्मत पर फ़ख्र महसूस कर रहा था। मैं इन्हीं
ख्यालों में खुश था कि तभी रिंकी ने मेरी निक्कर को खींचना शुरू करा। और 
फिर वही हुआ जो कल रात प्रिया के साथ हुआ था, यानि मेरा लंड अकड़ कर इतना 
टाइट हो गया था कि निक्कर को उसने अटका दिया था। निकर उतरने का नाम ही नहीं
ले रही थी, रिंकी निक्कर को लगातार खींच रही थी लेकिन वो नीचे नहीं सरक 
रही थी। वो झुंझला सी उठी लेकिन कोशिश बंद नहीं की। 



मुझे उस पर दया आ गई और मैंने अपने हाथों से अपने लंड को नीचे की तरफ झुका 
दिया। ऐसा करने से निक्कर सरक कर नीचे आ गई जिसे रिंकी ने बेरहमी से फेंक 
दिया मानो वो उसकी सबसे बड़ी दुश्मन हो। 



निक्कर फेंकने के बाद अब मैं भी उसकी तरह पूरा नंगा हो गया और मेरा भीमकाय 
लंड तनकर छत की तरफ देखते हुए रिंकी को सलामी देने लगा। रिंकी का ध्यान जब 
मेरे लंड पर गया तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं... 



"हे भगवन...ये तो...लेकिन पप्पू का तो...हाय राम !" रिंकी के चेहरे पर 
चिंता के भाव उभर आये थे। मैंने उसकी मनोस्थिति भांप ली और चुपचाप यह देखने
लगा कि अब वो क्या करेगी। 



रिंकी थोड़ी देर तक मेरे लंड महाराज को ऐसे ही निहारती रही और अपने मुँह से 
हल्की हल्की सिसकारियाँ निकलती रही। फिर उसने धीरे से अपना एक हाथ आगे 
बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया। मेरे लंड का घेरा इतना मोटा था कि उसके 
हाथों में पूरी तरह समा नहीं पाया। उसने लंड को बड़े प्यार से सहलाया और 
अपने होंठों को दाँतों से चबाने लगी। उसकी आँखें ऐसे चमक रही थीं जैसे किसी
बच्चे को कई दिनों के बाद उसकी सबसे मनपसंद चोकलेट मिल गई हो।
रिंकी ने अब मेरे लंड को धीरे धीरे 
ऊपर नीचे करना शुरू किया। उसकी हरकत यह बताने के लिए काफी थी कि उसे लंड के
साथ खेलना आता है। मैं इस सोच में डूब गया कि कहीं इसने पहले भी तो ये खेल
नहीं खेल रखा है। 



खैर जो भी हो, अभी तो मुझे बस वो काम की देवी रति नज़र आ रही थी जो मुझे 
ज़न्नत का मज़ा दे रही थी। उसने मेरे लंड के चमड़े को खींच कर सुपारा बाहर 
निकल लिया। सुपारा एकदम लाल होकर चमक रहा था। इतनी देर से यह सब चल रहा था 
तो ज़ाहिर है कि लण्ड ने अपना काम रस निकाला था जिसकी वजह से वो और भी चिकना
और चमकीला हो गया था। 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

रिंकी धीरे धीरे एक मंझे हुए खिलाड़ी की तरह मेरा लंड हिला रही थी। वो अपने 
घुटनों पर बैठ गई थी जिस वजह से उसका मुँह ठीक मेरे लंड के आगे हो गया था। 
लंड अपने पूरे जोश में था और ठनक ठनक कर उसे धन्यवाद कह रहा था। मेरा मन कर
रहा था कि अभी तुरंत रिंकी का मुँह पकड़ कर अपना लंड जड़ तक पेल दूँ और उसके
मुँह को चूत की तरह चोद दूँ। लेकिन मैंने सब्र करना ही ठीक समझा, मैं समझ 
गया था कि जब प्रिया मुझे इतना मज़ा दे सकती है तो रिंकी तो शायद खेली खाई 
है और हो सकता है वो मुझे कुछ अलग ही मज़ा दे। 



कहते हैं कि दिल से कुछ सोचो तो वो होता जरुर है। ऐसा ही हुआ... 



रिंकी अचानक से उठ गई और बाहर की ओर चली गई। मैं चौंक कर उठने लगा तो बाहर 
से उसकी आवाज़ आई,"उठाना मत सोनू, वैसे ही लेटे रहो, मैं अभी आती हूँ।" उसकी
आवाज़ में एक आदेश था। मैं हैरान भी था और उत्तेजित भी था। रिंकी का अगला 
कदम जानने की उत्सुकता थी मन में। 



तभी वो तेज़ क़दमों से कमरे के अन्दर दाखिल हुई अपने हाथों में एक हल्का पीला
सा पैकेट लेकर। सामने पहुँची तो देखा कि वो बटर का पैकेट था। शायद रिंकी 
किचन में गई थी बटर लाने... लेकिन उसका इरादा क्या था...आखिर वो इस बटर का 
करेगी क्या ? मेरे दिमाग में एक साथ कई सवाल कौंध गए। 



तभी रिंकी वापस उसी अवस्था में मेरे पैरों के पास बैठ गई और उपनी हथेली में
बटर लेकर उसे मेरे लंड पे अच्छी तरह से लगा दिया। हथेली में बचे हुए बाकी 
के बटर को उसने दोनों हाथों की हथेलियों में ऐसे लपेट लिया जैसे कोई क्रीम 
लगाते वक़्त करते हैं। 



मेरा लंड अब भी पूरी तरह से तना हुआ था और यह तो आप सब ही जानते हैं कि लंड
जब खड़ा होता है तो गर्म भी हो जाता है। मेरा लंड भी गर्म था और इस वजह से 
उस पर लगा बटर थोड़ा थोड़ा पिघलने लगा। रिंकी ने देरी न करते हुए अपने दोनों 
हथेलियों से मेरे लंड को पकड़ लिया और ऊपर नीचे करने लगी। एक तो लंड का जोश 
ऊपर से उस पर लगा बटर और सबसे ज्यादा आनन्द देने वाली रिंकी की मुलायम 
हथेलियाँ। मेरा लंड तो फूले नहीं समा रहा था।
"ह्म्म्मम्म...ओह्ह्ह्ह...रिंकी, यह क्या जादू जानती हो तुम?" मैंने मज़े में अपने मुँह से यह सिसकारी भरी आवाज़ निकाली। 



रिंकी की हल्की सी हंसी सुनाई दी, वो मेरे सामने पैरों के पास बैठी थी और 
मैं आधा लेटे लेटे उसे अपने लंड से खेलते हुए देख रहा था। रिंकी ने अपने 
होंठों पे जीभ फेरनी शुरू कर दी और अब लंड को थोड़ा तेज़ी से हिलाने लगी। 
उसने दोनों हाथों से लंड को थाम रखा था। उसने लम्बे लम्बे स्ट्रोक देने 
शुरू किये। लंड को पूरी तरह से खोलकर सुपारे को भी अपनी हथेली में लगे बटर 
से सराबोर कर दिया। 



मैंने अपने लंड को देखा तो मुझे खुद उस लंड पर प्यार आ गया। बटर की वजह से 
मेरा लंड बिल्कुल चमक सा रहा था और रिंकी के हाथों में मस्ती से खेल रहा 
था। सच कहता हूँ दोस्तों...कभी ऐसा करके देखना...मुझे दुआएं दोगे। 



रिंकी की यह करामात मुझे अन्दर तक सिहरा गई। मैं अब बर्दाश्त करने की हालत 
में नहीं रह गया। मैंने रिंकी की आँखों में देखा और बिना कुछ बोले यह विनती
करने लगा कि अब कुछ करो...वरना मैं मर ही जाऊँगा। रिंकी ने मेरी आँखों में
देखा और मुस्कुरा कर अपनी जीभ पूरी बाहर निकाल ली और मेरी आँखों में देखते
हुए मेरे सुपारे पे अपनी जीभ से छुआ। उसकी वो नज़र आज भी मेरी निगाहों में 
कैद है। उन आँखों में ऐसी कशिश थी कि बस पूछो मत।
"रिंकी ने देरी नहीं की और उठ कर 
मेरे दोनों पैरों के बीच आकर मुझ पर लेट गई। उसका नंगा बदन मेरे नंगे बदन 
से चिपक गया। मेरा लंड अब भी सख्त था और ठुनक रहा था। 



रिंकी ने मेरे लंड को अपने हाथों से नीचे की तरफ एडजस्ट किया और अपनी चूत 
की दीवार को मेरे लंड पे रख कर उसे अपनी चूत से दबा दिया। लंड तो दबने का 
नाम ही नहीं ले रहा था लेकिन रिंकी ने उसे जबरदस्ती दबाये रखा और मेरे सीने
पे अपनी चूचियों को रगड़ने लगी। 



मैं अब भी अपनी आँखें बंद किये हुए मज़े ले रहा था। 



तभी मेरे होंठों से कुछ लगा और मैंने अपनी आँखें खोल लीं। सामने देखा तो 
रिंकी अपने एक हाथ से अपनी एक चूची के निप्पल को मेरे होंठों पे रगड़ रही 
थी। मैंने उसकी निप्पल का स्वागत किया और अपने होंठ खोल कर उसे अन्दर कर 
लिया और जोर से चूस लिया। 



"उह्ह्ह्ह...धीरे जान...अभी भी दुःख रहा है।" रिंकी ने एक सिसकारी लेकर मेरे बालों में उँगलियाँ फिराते हुए कहा। 



मैंने उसे मुस्कुरा कर देखा और उसे पकड़ कर अपने बगल में पलट दिया। अब रिंकी
मदर्जात नंगी मेरी बाहों में बिस्तर पे लेटी हुई थी और मेरा मुँह उसकी 
चूची को चूस रहा था। मैंने अपने हाथ को हरकत दी और उसके चिकने बदन को ऊपर 
से नीचे तक सहलाने लगा। रिंकी मज़े से तड़पने लगी और मुँह से हल्की हल्की 
सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने अपने हाथों को उसकी जाँघों पे लेजाकर उसकी 
चिकनी जाँघों को हल्के हल्के मुट्ठी में भर कर दबाना शुरू किया। रिंकी के 
पैर खुद बा खुद अलग होने लगे। यह इस बात का इशारा था कि अब उसकी चूत कुछ 
मांग रही थी। 



मैंने अपने हाथ को उसकी जाँघों के बीच सरका दिया और धीरे धीरे ज़न्नत के 
दरवाज़े की तरफ बढ़ा। जैसे जैसे मेरे हाथ उसकी चूत की तरफ बढ़ रहे थे, मुझे 
कुछ गीलापन और गर्मी महसूस होने लगी। मैं समझ गया था कि इतने देर से चल रहे
इस चुदाई क्रीड़ा का असर था कि उसकी चूत ने अपना रस बाहर निकाल दिया था। 



मैंने सहसा अपना हाथ सीधे उसकी चूत पे रख दिया और उसकी छोटी सी नर्म मुलायम
चिकनी चूत मेरी हथेली में खो गई। उफ्फ्फ्फ़......क्या गर्म चूत थी, मानो 
किसी आग की भट्टी पे हाथ रख दिया हो मैंने... 



"उफ्फ्फ्फ़......सोनू..." रिंकी ने मेरे बालों को जोर से पकड़ लिया और अपनी कमर को ऊपर उठा लिया।
उसे एक झटका सा लगा और उसने अपनी 
अवस्था का ज्ञान अपनी कमर हिलाकर करवाया। मैंने उसकी चूत को अपनी मुट्ठी 
में हल्के से भर कर धीरे धीरे ऐसे दबाना चालू किया जैसे कॉस्को की गेंद हो।
उसकी चूत पूरी तरह से गीली थी और मेरे हथेली को रस से भर दिया था। मैं मज़े
से उसकी चूचियों को पीते पीते उसकी चूत को सहलाता रहा और अपनी उँगलियों से
चूत की दीवारों को छेड़ता रहा। 



रिंकी लगातार मेरे बालों में अपनी उँगलियों से खेलते हुए अपनी कमर उठा उठा 
कर मज़े लेती रही। उसकी रस से भरी चूत ने मुझे ज्यादा देर खुद से दूर नहीं 
रहने दिया। रस से भरी चूत मेरी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हो रही थी। मैंने 
उसकी चूचियों को मुँह से निकाल कर उसके होंठों को एक बार फिर से चूमा और 
सीधे नीचे उसकी चूत की तरफ बढ़ गया। 



उसकी चूत कमरे की रोशनी में चमक रही थी। चूत की दीवारें रस से भरी हुई थीं।
लेकिन उसकी चूत का उपरी हिस्सा जो कि पाव रोटी की तरह फूली हुई थी वो थोड़ी
खुश्क लग रही थी। शायद बालों को साफ़ करने के लिए क्रीम लगाने कि वजह से वो
जगह थोड़ी ज्यादा खुश्क हो गई थी। मैंने उस फूली हुई जगह पे अपने हाथ फेरे 
और अपना मुँह नीचे करके चूम लिया। जैसे ही मैंने चूमा, रिंकी ने एक जोर की 
सांस ली। 



मैंने लगातार कई चुम्बन उसकी चूत के ऊपरी भाग पे किये और अपने दांतों से थोड़ा सा काट लिया। 



"उईईइ...हम्म्म्म...क्या कर रहे हो मेरे राजा जी...दुखता है ना।" रिंकी ने 
इतने प्यार से और इतनी अदा के साथ कहा कि मेरा दिल खुश हो गया। 



तभी मेरी नज़र बिस्तर पे पास में रखे हुए उस पैकेट पे गई जो रिंकी किचन से 
लेकर आई थी। मैंने झट से वो पैकेट उठाया और अपनी दो उँगलियों से ढेर सारा 
मक्खन निकल कर उसकी चूत के ऊपर रख दिया। 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

रिंकी को शायद इस बात का एहसास हो गया, उसने मेरी तरफ देखा और शरमाकर 
मुस्कुराने लगी। हमारे बीच ज्यादा बातचीत तो नहीं हो रही थी लेकिन हम दोनों
अपनी अपनी हरकतों और अदाओं से एक दूसरे को घायल किये जा रहे थे और अपनी हर
बात एक दूसरे को समझा रहे थे। 



मैंने मक्खन को अच्छी तरह से उसकी चूत पे फिला दिया और अपनी हथेली में भी 
थोड़ा सा मक्खन लगा कर उसकी चूत को धीरे धीरे मसलने लगा। मक्खन की चिकनाई ने
रिंकी की चूत को और भी ज्यादा चिकना और मुलायम कर दिया। मेरे हाथ अब अपने 
आप उसकी चूत पे फिसलने लगे। मुझे बड़ा मज़ा आरहा था और मैं बिल्कुल मन लगा कर
उसकी चूत को सहलाता रहा। 



रिंकी की चूत से निकल रहे रस ने मक्खन के साथ मिलकर ऐसा संगम बना दिया था कि देख कर किसी के भी मुँह में पानी आ जाता। 



मेरा गला सूख गया और मैंने अपनी जीभ अपने होंठों पे फेरनी शुरू कर दी। अपनी
जीभ होंठों पे फेरते फेरते मैंने रिंकी की तरफ एक बार देखा तो उसे अपनी 
धुन में गर्दन इधर उधर करते हुए पाया। 



मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और झुक कर अपनी जीभ सीधे उसकी चूत के मुँह पे
रख दिया। मेरे जीभ की गर्मी ने रिंकी को इसका एहसास दिलाया और उसने अपनी 
टाँगें और भी खोल दी। मैंने अपनी जीभ को पूरी तरह से बाहर निकाल कर उसकी 
चूत की दरारों पे ऊपर से नीचे की तरफ सहलाया। मेरे नाक में उसकी चूत की एक 
मादक सी सुगंध समां गई। चूत से एक और भी भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। मुझे 
समझते देर नहीं लगी कि वो उस क्रीम की खुशबू थी जिससे रिंकी ने अपनी झांटों
को साफ़ किया था।
मैंने अपनी दो उँगलियों से उसकी 
चूत को थोड़ा खोला तो एक सुर्ख गुलाबी रस से सराबोर बिल्कुल बंद सा सुराख 
दिखाई दिया। उसके ठीक ऊपर किशमिश के दाने के समान उसकी चूत का दाना दिखा जो
कि धीरे धीरे हिल रहा था। मैंने अपनी जीभ थोड़ी लम्बी करके उसके दाने को 
जीभ की नोक से छुआ। 



"उम्म्मम्म......उफफ्फ्फ्फ़...सोनू...चाट लो इसे...ये तुम्हारी है ...सिर्फ 
तुम्हारी..." रिंकी ने जोर से सिसकते हुए कहा और मेरे बालों को खींचने लगी।




मैंने मंद मंद उसकी चूत को वैसे ही खोलकर अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और 
धीरे से अपने हाथों को ऊपर लेजाकर उसकी दोनों चूचियों को थाम लिया। रिंकी 
ने अब मेरा सर पकड़ लिया और अपनी चूत पे घिसने लगी। साथ ही साथ वो अपनी कमर 
को भी ऊपर नीचे करने लगी। 



मैंने अब तेज़ी से उसकी चूत को अन्दर तक चाटना और चूसना शुरू किया और साथ साथ उसकी चूचियों को भी मसलता रहा। 



"उम्म्म्म...ह्म्म्मम्म...ओह सोनू...खा जाओ ...चबा जाओ इसे...कल रात से 
तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही है।" रिंकी ने जोश से भर कर मुझसे कहा और मेरे
सर को अपनी चूत पर दबा दिया। 



मैंने रिंकी की बात सुनी तो अपना सर उसकी चूत से हटा लिया और उसकी तरफ 
देखकर आँख मारते हुए पूछा, "मेरे लंड के लिए तड़प रही थी या पप्पू के लंड के
लिए।" 



"तड़प तो मैं पप्पू के लंड के लिए ही रही थी लेकिन मुझे क्या पता था कि मुझे
तुम्हारा लंड मिल जायेगा...पप्पू का लंड तो तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं 
मेरे रजा...बस मेरी प्यास बुझा दो..." रिंकी ने भी आँख मारी और फिर मदहोश 
होकर मेरे सर को अपनी चूत पे दबा दिया। 



मैंने भी एक लम्बी सी सांस अन्दर खींची और तेज़ी से अपनी पूरी जीभ उसकी चूत 
में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा। रिंकी की चूत ने मचल कर ढेर सारा पानी छोड़
दिया और अब मेरे जीभ और चूत के मिलन का स्वर कमरे में रिंकी की सिसकारियों
के साथ गूंजने लगा। 



चपर चपर करके मैंने उसके चूत से निकलते हुए काम रस को गटक लिया और चूत की चुसाई जारी रखी... 



"उफ्फ्फ...मेरे जान... अब बर्दाश्त नहीं होता...प्लीज कुछ 
करो......प्लीज...अब और नहीं सहा जाता।" रिंकी ने मेरे बालों को जोर से 
खींच कर मेरा मुँह अपनी चूत से अलग कर दिया और अपनी एक उंगली चूत पर ले 
जाकर चूत को तेज़ी से सहलाने लगी। 



मैंने रिंकी को हाथ से पकड़ कर उठाया और उसे अपने सीने से लगा लिया। उसने 
मुझसे लिपट कर न जाने कितने चुम्बन मेरे गले और गालों पर जड़ दिए।
इन सब के बीच रिंकी का हाथ मेरे 
लंड पर पहुँच गया जो कि चूत की रासलीला से एक बार फिर तन कर अकड़ गया था और 
अब अपनी असली जगह ढूंढ रहा था। रिंकी ने मेरे लंड को पकड़ कर हिलाया और उसे 
खींचने लगी अपनी चूत की तरफ। 



मैं उसकी इस बेताबी पर बहुत खुश हुआ और उसे वापस धीरे से बिस्तर पे लिटा 
दिया। अब मैं उठ कर उसकी टांगों के बीच में आ गया। मैंने एक भरपूर निगाह 
उसकी चूत पर डाली जो कि मेरे मुँह के लार और उसके खुद के रस से सराबोर होकर
चमक रही थी। मैंने थोड़ा गौर से देखा तो पाया कि उसकी चूत के फांकें धीरे 
धीरे हिल रही हैं...जै से कि वो मेरे लंड को बुला रही हों। 



मैंने देरी नहीं की ...बर्दाश्त तो मुझसे भी नहीं हो रहा था। मैंने अपने 
लंड की चमड़ी हटाई और अपने सुपारे को बाहर निकाल कर थोड़ा सा झुक गया और उसकी
चूत की दरार पर रख दिया। रिंकी ने एक आह भरी और अपनी टांगों को अच्छी तरह 
से एडजस्ट कर लिया। शायद उसे पता था कि अब वो चुदने वाली है। मैंने अपने 
सुपाड़े को उसकी चूत की दरार पे धीरे धीरे रगड़ा और वैसे ही थोड़ी देर उसकी 
चूत को अपने लंड से सहलाता रहा। 



रिंकी ने अपने हाथ नीचे किये और अपनी दो उँगलियों से चूत की दरार को फैला 
दिया। इससे उसकी चूत का मुँह थोड़ा खुला और मैंने सुपारे को और अन्दर करके 
रगड़ना शुरू किया। 



रिंकी ने अपनी साँसें रोक लीं, वो अब धक्के खाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। 



मैंने कई बार ब्लू फिल्म में देखा था कि मर्द एक ही झटके में लंड पूरा 
अन्दर डाल देते हैं और लड़की की चूत को फाड़ डालते हैं। मैंने भी ऐसा ही करने
का सोचा लेकिन तभी मेरे दिमाग में एक ख्याल आया कि कहीं मेरी हरकत से 
रिंकी को ज्यादा तकलीफ न हो जाए और हमारा भाण्डा न फूट जाए। 



मैंने प्यार से काम लेना ही उचित समझा। अब मैंने अपने लंड को धीरे से रिंकी
की चूत में धकेला। सुपारा फिसला और धक्का उसके चूत के दाने पे लगा। 



"उह्ह्ह्ह...क्या कर रहे हो?" रिंकी ने तड़प कर कहा। 


RE: Sex Kahani आंटी और उनकी दो बेटियाँ - - 08-18-2018

मैंने फिर से अपने लंड को ठीक जगह पे रखकर सख्ती से धक्का दिया। सुपारा चूत
के छोटे से दरवाज़े में अटक गया और रिंकी ने एक जोर की सांस लेकर अपने शरीर
को कड़ा कर लिया। मैंने थोड़ा सा रुक कर एक हल्का सा धक्का और दिया। इस बार 
मेरा सुपारा थोड़ा और अन्दर गया। 



"उह्ह्ह...जान, थोड़ा धीरे करना...तुम्हारा लंड सच में बहुत ज़ालिम है, मेरी 
हालत ख़राब कर देगा।" रिंकी ने डरते हुए अपना सर उठा कर मुझसे कहा और अपने 
दांत भींच लिए। 



उसकी चूत सच में बहुत कसी थी। अब तक जैसा कि मैं सोच रहा था कि उसने पहले 
भी लंड खाए होंगे वैसा लग नहीं रहा था। उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड के
सुपारे को पूरी तरह से जकड़ लिया था। मेरे सुपारे पे एक खुजली सी होने लगी 
और ऐसा लगा मानो चूत लंड को अपनी ओर खींच रही हो।
उह्ह्ह...जान, थोड़ा धीरे 
करना...तुम्हारा लंड सच में बहुत ज़ालिम है, मेरी हालत ख़राब कर देगा।" रिंकी
ने डरते हुए अपना सर उठा कर मुझसे कहा और अपने दांत भींच लिए। 



उसकी चूत सच में बहुत कसी थी। अब तक जैसा कि मैं सोच रहा था कि उसने पहले 
भी लंड खाए होंगे वैसा लग नहीं रहा था। उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड के
सुपारे को पूरी तरह से जकड़ लिया था। मेरे सुपारे पे एक खुजली सी होने लगी 
और ऐसा लगा मानो चूत लंड को अपनी ओर खींच रही हो। 



मैंने अब थोड़ा जोर का झटका देने का सोचा, मुझे पता था कि जिस तरह से उसकी 
चूत ने सुपारे को जकड़ा था उस अवस्था में धीरे धीरे लंड को अन्दर करना कठिन 
था। मैंने अपनी सांस रोकी और एक जोरदार धक्का उसकी चूत पे दे मारा। 



"आई ईई ईईई ईईईई ईईईग......मर गई......सोनू, मुझे छोड़ दो...मुझसे नहीं होगा......" रिंकी के मुँह से एक तेज़ चीख निकल गई। 



उसकी चीख ने मुझे थोड़ा डरा दिया और मैं रुक गया। मैंने उसकी तरफ देखा और 
अपने एक हाथ से उसके चेहरे पे अपनी उंगलियाँ बिखेर कर उसके होंठों को छुआ। 



मैंने झुक कर देखा तो मेरा आधा लंड रिंकी की चूत में समा चुका था। मेरे चेहरे पर एक मुस्कान खिल गई।
"अब बस अगली बार में तो किला फ़तेह ही समझो।" मैंने अपने आप से कहा और आगे झुक कर रिंकी की चूचियों को अपने मुँह में भर लिया। 



मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियों को चुभलाना शुरू किया और दूसरी चूची को अपने हाथों से हल्के हल्के दबाने लगा। 



मैंने कई कहानियों में पढ़ा था कि जब लड़की या औरत कि चूत में लंड अटक जाए या
दर्द देने लगे तो उसका ध्यान उसकी चूचियों को चूस कर बाँट देना चाहिए ताकि
वो अपना दर्द भूल जाए। 



कहानियों से सीखी हुईं बातों को ध्यान में रख कर मैंने उसे प्यार से सहलाते
हुए उलझाये रखा और धीरे धीरे अपने लंड को उतना ही अन्दर रखते हुए रगड़ता 
रहा। रिंकी अब शांत हो गई थी और मेरे लंड का स्वागत अपनी कमर हिला कर करने 
लगी। उसने अपनी गांड नीचे से उठा कर मेरे लंड को चूत में खींचा। 



मैं समझ गया कि अब असली खेल खेलने का सही वक़्त आ चुका है। मैंने फिर से एक 
लम्बी सांस खींची और अपने हाथों के सहारे अपनी कमर के ऊपर के हिस्से को उठा
लिया। अब मैं तैयार था रिंकी को ज़न्नत दिखाने के लिए। मैंने सांस रोक कर 
एक जबरदस्त धक्का मारा और मेरा पूरा लंड रिंकी की कोमल चिकनी मुनिया को 
चीरता हुआ अन्दर घुस गया। 



"आईईई ईईईई ईई ईईईई......ओह माँ......बचाओ मुझे..." रिंकी ने इतनी जोर से 
चीख मारी कि उसकी आवाज़ कमरे में गूंजने लगी और उसने अपना सर उठा कर मेरे 
सीने पे अपने दांत जोर से गड़ा दिए। 



मैं तड़प उठा...लेकिन बिना रुके अपना लंड पूरा बाहर खींचकर एक और जोर का 
झटका दिया। इस बार भी मेरा पूरा लंड उसकी चूत में उतर गया पर इस बार कुछ और
भी हुआ...
रिंकी की चूत से 'फचाक' की एक आवाज़ आई और खून के एक धार बाहर निकलने लगी। 



"ओह...ये तो बिल्कुल कुंवारी है।" मैंने अपने मन में सोचा और मेरी आँखें इस
बात से चमक उठीं। मैं और जोश में आ गया और तेज़ी से एक धक्का लगाया। 



"आअह्ह्ह्ह...ममम्मम्म...मैं गई।" इतना बोलकर रिंकी ने अपन सर बिस्तर पर 
गिरा दिया। मेरा ध्यान बरबस ही उस पर चला गया। मैंने देखा कि रिंकी की 
आँखें सफ़ेद हो गईं थीं और वो बेहोश होने लगी थी। 



मैं थोड़ा डर गया। मैं रुक गया और उसके गालों पे अपने हाथ से थपकी देने 
लगा...थपकी देने से रिंकी ने अपनी आँखों को धीरे से खोला और मेरी तरफ देख 
कर ऐसा करने लगी जैसे उसे असहनीय पीड़ा हो रही हो... 



"प...प्लीज सोनू...मैं मर जाऊँगी..." रिंकी ने टूटे हुए शब्दों में मुझसे कहा। 



मुझे उस पर दया आ गई। मैंने उसे पुचकारते हुए उसके होंठों को चूमा और कहा, 
"बस मेरी जान, जो होना था वो हो चुका है। अब तुम्हें तकलीफ नहीं होगी।" 



"ओह माँ... मुझसे भूल हो गई जो मैं तुम्हारा लंड लेने के लिए तड़प उठी। 
प्लीज इसे बाहर निकाल लो...प्लीज सोनू...फिर किसी दिन कर लेना।" रिंकी ने 
रोनी सी सूरत बनाकर मुझे कहा। 



एक बार तो मैंने सोचा कि उसकी बात मान लूँ और उसे छोड़ दूँ...फिर मेरे दिमाग
में एक ख्याल आया कि अगर आज इसे छोड़ दिया तो फिर यह पट्ठी कभी भी मेरा लंड
लेने को तैयार नहीं होगी, इसलिए आज इसे लंड का असली मज़ा देना ही होगा ताकि
यह मेरी गुलाम बन जाए और दिन रात मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर रखे।
मैंने रिंकी के होंठों को अपने 
होंठों में भरा और प्यार से चुभलाने लगा और अपने हाथों को उसकी चूचियों पे 
रख कर मसलता रहा। साथ ही साथ मैंने अपने लंड को बिल्कुल धीरे धीरे उसकी चूत
में वैसे ही फंसा कर आगे पीछे करना शुरू किया। 



चूत को मैंने चाट चाट कर भरपूर गीला कर दिया था और साथ ही उसकी चूत ने पानी
छोड़ कर चिकनाई और भी बढ़ा दी थी लेकिन इतनी चिकनाई के बावजूद मेरा लंड ऐसे 
फंस गया था जैसे बिना तेल लगे बालों में कंघी फंस जाती है। 



मैंने अपनी कोशिश जारी रखी और लंड से उसकी चूत को रगड़ता रहा। थोड़ी देर 
बीतने के बाद रिंकी ने मेरे होंठों को अपने होंठों से चूसना शुरू किया और 
अपनी जीभ को मेरे मुँह में ठेलने लगी। अब वो अपने दर्द को भूल कर चूचियों 
की मसलाई और चूत में लंड की रगड़ का मज़ा लेने लगी। 



मैंने भी महसूस किया कि अब उसकी चूत ने अपना मुँह खोलना शुरू किया है। धीरे
धीरे उसकी गांड हिलने लगी और उसने मस्त होकर मुझे अपनी बाहीं में लपेट 
लिया। मैंने उसका इशारा समझ लिया और उसी अवस्था में अपने लंड को बाहर निकल 
कर धक्के मारने लगा। मैंने अपनी गति धीमी ही रखी थी ताकि उसे दुबारा दर्द 
का एहसास न हो। मैं मंद गति से चोद रहा था और वो मेरे पीठ पे अपने हाथ फेर 
रही थी। थोड़ी देर के बाद मैंने अपना मुँह उसके मुँह से अलग किया और थोड़ा सा
उठ कर एक तेज़ धक्का पेल दिया। 



"उम्म्म्म...हाँ...सोनू अब ठीक है...अब करते जाओ...करते जाओ..." रिंकी ने 
मेरी कमर पे अपने हाथ रख दिए और अपनी गांड थोड़ा थोड़ा ऊपर उठा कर लंड का 
स्वागत करने लगी। 



"क्या करूँ मेरी जान...खुलकर बोलो ना?" मैंने उसे और भी मस्ती में लाने के 
लिए उससे खुल कर मज़े लेने के लिए कहा और अपने लंड का प्रहार जारी रखा। 



"बड़े वो हो तुम...मुझे अपनी तरह गन्दी बना दोगे क्या?" रिंकी ने मुझे प्यार भरी नज़रों से देखते हुए लंड खाते खाते कहा।
"तुम एक बार खुल कर मज़े लेने की
कोशिश तो करो रिंकी रानी...देखना तुम अपना सारा दर्द भूल कर मुझे अपनी चूत
में घुसा लोगी।" मैंने भी उसे चोदते हुए सेक्सी अंदाज़ में उसे जवाब दिया। 


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