Mastram Kahani खिलोना - Printable Version

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RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

रीमा सोचने लगी कि आख़िर ये हैवान उसकी नाज़ुक,कसी चूत मे जाएगा कैसे.उसे डर लगा कि आज तो उसकी चूत ज़रूर फॅट जाएगी.उसका हलक सुख गया & उसने थूक गटका.विरेन्द्र जी शायद उसकी घबराहट भाँप गये थे.उन्होने बड़े प्यार से उसके गालो & बालो को सहलाया & फिर उसकी टाँगे उठा अपने कंधो पे लगा ली.

अब वो घुटनो पे बैठे उसके पैर चूम रहे थे.रीमा अपना डर भूल फिर से मस्त होने लगी.विरेन्द्र जी ने देखा की उनकी बहू फिर से मज़े मे आने लगी है तो उन्होने उसकी बाई टांग को तो कंधे पे ही रहने दिया पर दाई को उतार अपनी कमर पे लपेट लिया.फिर अपना लंड लिया & उसकी चूत पे लगा दिया.जहा 1 तरफ रीमा को डर लग रहा था वही दूसरी तरफ उसके दिल मे ख्वाहिश भी थी कि वो अपने ससुर का ये लंबा,मोटा लंड पूरा का पूरा अपनी चूत मे ले.

विरेन्द्र जी ने हल्के से लंड को उसकी गीली चूत मे धकेला तो लंड का सूपड़ा आधा अंदर चला गया.रीमा ने 1 हाथ से तकिया पकड़ लिया & दूसरा उनके पेट पे लगा दिया जैसे उन्हे रोक रही हो.विरेन्द्र जी उसकी दाई जाँघ & बाई टाँग थामे लंड अंदर पेलने लगे.

"ऊवन्न...न्नह...",जैसे ही पूरा सूपड़ा अंदर गया,रीमा अपना बदन उपर उठाते हुए करही.थोड़ी देर तक विरेन्द्र जीशांत पड़े उसकी चूचियो को दबाते & उसकी टांगे सहलाते रहे.फिर उन्होने 1 हल्का धक्का दिया तो लंड 1 इंच और अंदर चला गया.रीमा को अभी उतनी तकलीफ़ नही हुई थी.

पर जैसे ही विरेन्द्र जी ने थोड़े धक्के दिए & 2 तिहाई लंड अंदर गया कि उसकी चीख निकल गयी & विरेन्द्र जी की आह ,उन्होने नही सोचा था कि उनकी विधवा बहू किचूत इतनी कसी होगी,उन्हे लग रहा था जैसे किसी बहुत नाज़ुक हाथ ने उनके लंड को बड़ी मज़बूत गिरफ़्त मे लिया हो.रीमा तो बेचैन थी,इस से ज़्यादा आगे उसकी चूत मे कभी कोई लंड नही गया था & उसे दर्द होने लगा था.

"आहह...पिताजी...दर्द हो रहा है.इसे निकाल लीजिए ना!"

"अभी सब ठीक हो जाएगा,बहू.मुझपे भरोसा रखो.",विरेन्द्र जी उसके चेहरे को प्यार से सहलाने लगे.थोड़ी देर बाद बिना लंड को और अंदर घुसाए वो रीमा को बहुत धीरे-2 चोदने लगे.शुरू मे तो रीमा को तकलीफ़ हुई पर कुच्छ मिनिट के बाद उसे मज़ा आने लगा.वो आहें भरती हुई कमर हिलाने लगी.

विरेन्द्र जी ने अब उसकी दाई टाँग को भी अपने कंधे पे ले लिया & उसके पैरो की उंगलिया चूमने लगे.वो 1-1 उंगली को मुँह मे भर के चूसने लगे.रीमा को उसके पति या उसके जेठ ने कभी ऐसे प्यार नही किया था.उसे बहुत अच्छा लग रहा था,पैरो मे जैसे गुदगुदी हो रही थी.

दोनो पैरो को बारी-2 से चूमने के बाद विरेन्द्र जी ने उसकी कंधो पे रखी टांगे पकड़ी & 1 ज़ोर का धक्का दिया.

"ऊओ...उउउक्चह...!",रीमा चीखी,विरेन्द्र जी ने सोचा था कि लंड पूरा अंदर चला जाएगा पर वो तो बस आधा इंच ही और गया था,"...और मत घुसाइए पिताजी,प्लीज़.......आआआअ...ईईईईययययी....ययइईई...!",रीमा की गुज़ारिश को अनसुना करते हुए विरेन्द्र जी ने ज़ोर के 2-3 धक्के लगा लंड को जड़ तक उसकी चूत मे उतार दिया था.

रीमा दर्द से छत्पताने लगी तो विरेन्द्र जी उसके होंठो पे झुक आए.ऐसा करने मे उसकी कंधो पे लगी टाँगे मूड गयी & उसकी जांघे उसकी चूचियो पे दब गयी,गंद भी बिस्तर से उठी हुई थी & लंड जितना अंदर जा सकता था उतनी गहराई मे उतरा हुआ था.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

रीमा को अपनी चूत बहुत फैली हुई महसूस हो रही थी & लग रहा था जैसे लंड उसकी कोख को छु रहा है.दर्द से उसका बुरा हाल था & उसके ससुर उसके चेहरे पे प्यार कर उसे दिलासा दे रहे थे,"बस थोड़ी देर और रीमा.फिर दर्द नही होगा.",उन्होने उसके होंठ चूम लिए & बालो मे प्यार से उंगलिया फिराई.

थोड़ी देर तक दोनो ऐसे ही पड़े रहे.रीमा को अब चूत मे उतना दर्द महसूस नही हो रहा था.ससुर ने जब उसे चूमा तो उसने भी उनका जवाब दिया.विरेन्द्र जी समझ गये कि उनकी बहू अब तैय्यार है.उन्होने उसके होटो को छ्चोड़ा & अपने शरीर का वज़न अपने हाथो पे लिया & अपनी बहू की चुदाई शुरू कर दी.पहले उन्होने तेज़-2 धक्के लगाए जिसमे लंड को बस 1-2 इंच निकालते & वापस अंदर घुसेड़ते.रीमा को धीरे-2 मज़ा आने लगा.वो अपने ससुर के चेहरे & बालो को सहलाती आहें भरने लगी.

तभी विरेन्द्र जी ने अपना पूरा लंड बाहर खींच लिया,रीमा ने बेचैन होकर उन्हे देखा तो उन्होने 1 ही झटके मे पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत मे पेल दिया,"ययय्याअ...अहह.....!"

वो अब वैसे ही उसकी चुदाई करने लगे.लंड पूरा बाहर निकलता & फिर उसकी चूत की दीवारो को रगड़ता पूरा अंदर उसकी कोख पे चोट करता.रीमा को आज चुदाई मे 1 अलग ही मज़ा आ रहा था,उसकी चूचिया उसी की जाँघो से दबी थी & उसकी गंद हवा मे उठी थी,उसकी चूत पूरी तरह से भरी हुई थी & उसके ससुर के लंड ने आज वाहा की अंजनी गहरआीओं की भी थाह पा ली थी.कमरे मे उसकी मस्त आहों & दोनो बदनो के टकराने से होने वाली ठप-ठप का शोर भर गया था.

उसे उनपे बहुत प्यार आ रहा था,उसने उनके कंधे से अपनी टांगे उतारी &उन्हे अपनी बाहो मे भर लिया.विरेन्द्र जी उसके सीने पे आ गिरे & उसकी छातियो को 1-1 कर चूमने,चूसने लगे.रीमा ने उन्हे बाँहो मे भर लिया,उसकी चूत मे फिर से सैलाब आने वाला था.नीचे से कमर हिला के अपने ससुर के धक्को की ताल से ताल मिलाती हुई रीमा ने अपनी टांगे अपने ससुर की कमर पे लपेट दी & उनकी पीठ पे अपने नाख़ून गढ़ा दिए.

उसकी इस हरकत से विरेन्द्र जी की कराह निकल गयी & जवाब मे उन्होने उसके निपल पे हल्के से काट लिया,"..आउच.."रीमा ने 1 हाथ से उनके सर को पकड़ा & उनके बालो को चूमने लगी.उसके अंदर का सैलाब अब बाँध तोड़ने वाला था,वो अपने ससुर से चिपेट गयी & उसकी टांगे भी उनकी कमर पे और कस गयी.विरेन्द्र जी समझ गये कि रीमा झड़ने वाली है.उन्होने भी अपनी रफ़्तार बढ़ा दी.उनके झांतो भरे अंदो हर धक्के के अंत मे उनकी बहू की गंद से टकराते हुए उसे गुदगुदी का एहसास करा रहे थे.

रीमा ने अपनी कोख पे उनके लंड की 2-3 चोटे & और बर्दाश्त की और उसके अंदर उस सैलाब ने बाँध तोड़ दिया,उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया & वो अपने ससुर के बदन से चिपकी बिस्तर से उठाते हुए उनके कानो मे पागलो की तरह जीभ फिराती हुई सिसकते हुए झाड़ गयी.ठीक उसी वक़्त विरेन्द्र जी ने भी अपने उपर से काबू हटाया & 2-3 ज़ोर के गहरे झटको के साथ अपनी बहू की चूत को अपने गाढ़े पानी से भर दिया.

थोड़ी देर तक दोनो वैसे ही पड़े अपनी साँसे संभालते रहे.फिर वीरेंद्र जी ने बड़े प्यार से अपनी बहू के होटो को चूम लिया.वासना का तूफान थम गया था & अब रीमा फिर से होश मे आ गयी थी.उसके ससुर ने उसके होंठ छ्चोड़े तो उसने शरमे से चेहरा घुमा लिया & उसकी नज़र कमरे के दूसरी ओर सो रही अपनी सास पे पड़ी.

रीमा तो शर्म से पानी-2 हो गयी.उसने सपने मे भी नही सोचा था कि वो 1 दिन अपनी सास के उसी कमरे मे होते हुए अपने ससुर से चूड़ेगी.विरेंड्रा जी का लंड सिकुड चुका था पर उनका सिकुदा लंड भी उनके बिटो के खड़े लंड के बराबर था & रीमा को कहीं से भी ये महसूस नही हो रहा था कि उसकी चूत के अंदर 1 झाड़ा हुआ लंड पड़ा है.उन्होने अपना लंड बाहर खींचा तो रीमा को लगा जैसे उसके अंदर कुच्छ खाली सा हो गया है.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

विरेन्द्र जी अपनी बहू के बगल मे लेट गये.रीमा उनसे नज़रे नही मिला पा रही थी.उन्होने उसे पशोपेश मे पड़ा देख करवट ली & अपनी कोहनी के बल अढ़लेते हो उसका चेहरा पानी ओर घुमाया,"मैं तुम्हारी मन की हालत समझ रहा हू,रीमा."

उन्होने प्यार से उसके चेहरे पे हाथ फेरा,"हम सब तक़दीर के हाथ के खिलोने हैं, रीमा.अगर सुमित्रा ठीक होती तो शायद आज हम दोनो 1 दूसरे की बाहों मे सुकून नही ढूँढ रहे होते.",वो उसके थोड़ा और करीब आ गये & उसके चेहरे को हाथ मे भर लिया,"तुमने कोई ग़लती नही की है.हम दोनो को सुकून चाहिए था,प्यार चाहिए था जो आज हमने पा लिया है."

उन्होने उसे अपने सीने से लगा लिया.रीमा ने उनके सीने मे मुँह च्छूपौंके बालो से खेलने लगी,"फिर भी मुझे अजीब लग रहा है.मा जी भी इसी कमरे मे हैं & हम दोनो.."

"तुमने सुना था ना आज सवेरे डॉक्टर ने क्या कहा.तुम्हे लगता है उसे कुच्छ पता भी चलता है.",उन्होने उसके चेहरे को अपने सीने से उठाया & उसे उसकी सास की ओर घुमा दिया,"खुद ही देखो & समझो.वो बेख़बर सो रही है.तुम बेकार मे ही इतना सोच रही हो."

उन्होने फिर से उसका चेहरा अपनी ओर घुमा लिया,"मैं तुम्हारे जिस्म के लालच मे ऐसी बातें नही करा रहा,रीमा.अब तो जब तक ज़िंदा रहूँगा तुम्हे खुद से अलग नही करूँगा.",सुनते ही रीमा ने 1 बार फिर उनके सीने मे सर छुपा लिया & अपनी बाहें उनके गिर्द लपेट दी.

कल जेठ ने उस से ऐसा ही वादा किया था.उसे यकीन हो गया कि दोनो बाप-बेटे अब उसके दीवाने हो चुके हैं.अब बस उनसे रवि के बारे मे पुच्छना था पर सीधे रवि के मुद्दे पे पहुँचना ठीक नही था.

विरेन्द्र जी पीठ के बाल लेट गये तो वो उनके सीने पे ठुड्डी रख उनके सीने के बालो मे हाथ फिरते उन्हे देखने लगी,वो भी 1 हाथ से उसकी पीठ सहला रहे थे & दूसरे से उसका चेहरा.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

खिलोना पार्ट--9

"मा जी की ऐसी हालत के कारण आप काफ़ी परेशान रहते है ना."

"हा,वो तो है पर मैं उसे बहुत चाहता हू.",उन्होने उसके नर्म होंठो पे अपनी 1 उंगली फिराई,"अभी हम दोनो ने जो किया उसके बाद तुम्हे लग रहा होगा कि मैं यू ही कह रहा हू पर ऐसा नही है,मैं सच मे सुमित्रा को बहुत चाहता हू."

रीमा को होतो मे सिहरन महसूस हुई तो उसने आँखे बंद कर ली,"ऐसा मत सोचिए,मैं समझती हू आपकी बात."उसने वीरेन्द्रा जी की हथेली चूम ली.उन्होने उसे उपर खींच उसका चेहरा अपने चेहरे के करीब कर लिया.अब रीमा की छातिया उसके ससुर के सीने पे दबी थी & वाहा के बालो का गुदगुदाता एहसास उसे बहुत भला लग रहा था.

"मा जी की बीमारी का कारण तो डॉक्टर साहब ने मुझे समझाया था पर उन्हे कोई तनाव भी था क्या जिसकी वजह से बीमारी ने ये रूप इकतियार कर लिया?",वो अपनी उंगलियो से उनके निपल के गिर्द दायरा बना रही थी & विरेन्द्र जी 1 हाथ उसके बदन के गिर्द लपेट उसकी गंद सहला रहे थे & दूसरे से उसके मासूम चेहरे को.

"पता नही,रीमा मेरे सुखी परिवार को किस की नज़र लग गयी!लोग कहते थे कि मेरे 2 बेटे हैं & मैं कितना किस्मतवाला हू.पर तक़दीर का खेल देखो 1 बेटा जो मेरे साथ रहना चाहता था,उसे मैने खुद अपने से दूर कर दिया & दूसरा खुद हमसे दूर चला गया."

"आप शेखर भाय्या की बात कर रहे हैं क्या?पर वो तो यही हैं,कहा दूर हैं आपसे?",उसने अपने ससुर के गाल पे बड़े प्यार से चूमा,उनके हाथ अब उसकी गंद को थोड़ा और ज़ोर से दबा रहे थे.

"मैं दिलो की दूरी की बात कर रहा हू.इस लड़के को हमने इतना प्यार दिया,जहा तक हो सका इसकी हर ख्वाहिश पूरी की पर ना जाने क्यों ये इतना मतलबी हो गया.",उन्होने उसकी गंद की दरार मे 1 उंगली घुसा के फिराया तो रीमा ने चिहुनक के अपनी जाँघ उनके उपर चढ़ा दी.

"1 आम इंसान इंसान के पास गैरत की दौलत होती है & मेरे पास भी वही है,रीमा.बाप-दादा की थोड़ी बहुत दौलत है पर मैने तो सिर्फ़ इज़्ज़त कमाई है जिसे शेखर ने धूल मे मिलाने की पूरी कोशिश की है."

"क्या?!ऐसा क्या किया है भाय्या ने?"

"उसे बिज़्नेस करना था,मैं पैसे देने को तैय्यार था पर उसे केवल पैसा नही मेरे ओहदे का ग़लत इस्तेमाल भी चाहिए था.मैने इस के लिए मना कर दिया तो आए दिन घर मे हम दोनो के बीच बहस होने लगी.शायद इसी बात ने सुमित्रा को तनाव पहुँचाया & वो आज ऐसे पड़ी है."

"भाय्या को देख कर तो ऐसा बिल्कुल नही लगता कि वो इतने मतलबी हैं."

"मैं जानता हू,रीमा.पर तुम्ही बताओ कि अगर शेखर 1 शरीफ लड़का है तो आख़िर मीना ने,जिसने अपनी पसंद से शेखर से शादी की थी,उसे क्यू छ्चोड़ दिया?"

"क्यू छ्चोड़ा?",रीमा फिर से मस्त होने लगी थी,उसके ससुर जितनी संजीदा बातें कर रहे थे उनके हाथ उतनी ही संजीदगी से उसकी भारी गंद को मसल रहे थे.उन्होने ने उसका हाथ अपने चेहरे से हटाया & पकड़ कर अपने लंड पे रख दिया तो शर्मा के रीमा ने अपना हाथ खींच लिया.उन्होने दुबारा उसका हाथ अपने लंड पे दबा दिया & तब तक दबाए रखा जब तक रीमा ने अपने हाथ से लंड को पकड़ कर हिलाना शुरू नही कर दिया.पहली बार उसने रवि के अलावा किसी और मर्द का लंड अपने हाथो मे लिया था,शर्म से उसने अपना चेहरा विरेन्द्र जी की गर्दन मे च्छूपा लिया.

"मीना & शेखर 1 दूसरे को कॉलेज के दीनो से जानते था.उसके पिता एस.के.आहूजा इस शहर के बहुत जाने-माने बिज़्नेसमॅन हैं.आहूजा साहब ने जब सुना की उनकी लड़की शेखर से शादी करना चाहती है तो वो फ़ौरन तैय्यार हो गये,केवल इसलिए क्यूंकी शेखर मेरा बेटा था,उस इंसान का जिसकी ईमानदारी & ग़ैरतमंदी की लोग मिसाल देते हैं."

"..पर इस नालयक ने शादी के बाद मीना को परेशान करना शुरू कर दिया,उस से कहने लगा कि अपने बाप से उसके लिए पैसे माँग के लाए.मीना 1 खुद्दार लड़की थी,फ़ौरन तलाक़ दे दिया इसे."

"ओह्ह..",तो ये बात थी.उसका जेठ इतना दूध का धुला नही था जितना वो खुद को दिखाता था.

विरेन्द्र जी ने उसका चेहरा अपनी गर्दन से उठाया & अपनी 1 उंगली को अपने होटो से चूम कर पहले उसके होटो पे रखा & फिर उसके हाथो मे क़ैद अपने लंड की नोक पे.रीमा उनका इशारा समझ गयी,वो चाहते थे कि वो उनके लंड को अपने मुँह मे ले.शर्म से 1 बार फिर उसने अपना चेहरा उनके सीने मे दफ़्न कर दिया.विरेन्द्र जी ने उसका चेहरा उपर उठाया & मिन्नत भरी नज़रो से उसे देखा पर रीमा ने शर्म से इनकार मे सर हिला दिया.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

विरेन्द्र जी उसे छ्चोड़ उठ के पलंग के हेडबोर्ड से टेक लगा के बैठ गये.अब रीमा उनकी बगल मे लेटी थी,उन्होने उसे उठाया & अपनी टाँगो के बीच लिटा दिया.अब रीमा अपने पेट के बल अपनी कोहनियो पे उनकी टाँगो के बीच लेटी थी & उनका पूरी तरह से तना हुआ लंड उसके गुलाबी होटो से बस कुच्छ इंच की दूरी पे था.रीमा समझ गयी कि आज वो उसके मुँह मे इस राक्षस को घुसाए बिना नही मानेंगे.

विरेन्द्र जी ने उसकी ठुड्डी पकड़ी & अपने लंड की नोक को उसके होटो से सटा दिया,रीमा ने शर्मा के मुँह फेर लिया.उन्होने फिर से उसका चेहरा सीधा किया & वही हरकत दोहराई,रीमा ने फिर मुँह फेरना चाहा तो उन्होने उसके सर को दोनो हाथो मे थाम उसकी कोशिश नाकाम कर दी & लंड फिर होटो से सटा दिया.रीमा समझ गयी थी कि वो उस से बिना लंड चुस्वाए मानेंगे नही.उसने सूपदे को हल्के से चूम लिया.

"आहह..",विरेन्द्र जी की आँखे मज़े मे बंद हो गयी.उसने उनके लंड को पकड़ा & उसके मत्थे को हल्के-2 चूमने लगी.विरेन्द्र जी उसके सर को पकड़ उसके बालो मे उंगलिया फिराने लगे.रीमा ने ज़िंदगी मे पहली बार इतना बड़ा लंड देखा था.उसे उसके साथ खेलने मे काफ़ी मज़ा आ रहा था.वो कभी उसके छेद को अपनी जीभ से छेड़ती तो कभी केवल लंड के मत्थे को अपने मुँह मे भर इतनी ज़ोर से चुस्ती की उसके ससुर की आह निकल जाती.

उसने जीभ की नोक से लंड के सिरे से लेके जड़ तक चॅटा & फिर जड़ से लेके नोक तक.फिर उनके अंदो को पकड़ अपने हाथो से दबा दिया,विरेन्द्र जी आँखे बंद किए बस उसकी हर्कतो का लुत्फ़ उठा रहे थे.आज से पहले इतनी मस्ती से किसी ने उनके लंड को नही चूसा था,सुमित्रा जी ने भी नही.

वो बेताबी से अपनी बहू के सर को अपने लंड पे दबाने लगे तो उसने लंड को मुँह मे भरे हुए उनकी ओर शिकायत भरी निगाहो से देखा.उन्होने माफी माँगते हुए अपनी पकड़ ढीली कर दी.रीमा ने उनके लंड को पकड़ अब उनके अंदो को मुँह मे भर लिया तो वीरेंद्र जी आह भरते हुए अपनी कमर बेचैनी से उचकाने लगे.जब रीमा रवि का लंड मुँह मे लेती तो थोड़ी देर चूसने के बाद वो लंड छ्चोड़ उसके बदन के साथ कोई और मस्ती भरी छेड़-खानी शुरू कर देती.पर आज तो ये लंड छ्चोड़ने का उसका दिल ही नही कर रहा था.उसने सोच लिया था कि जब तक इस लंड को अपने मुँह मे नही झाद्वाएगी तब तक इसे नही छ्चोड़ेगी.

रीमा ने उनके अंडे अपने मुँह से निकाल & उन्हे अपने हाथो मे भर लिया & अपने ससुर की नज़र से नज़र मिलाती हुई 1 बार फिर लंड को अपने मुँह मे भर लिया,उसकी जीभ लंड पे बड़ी तेज़ी से घूम रही थी.विरेन्द्र जी अब खुद को रोक नही पा रहे थे,उन्होने रीमा का सर पकड़ा & उसे अपने लंड पे दबाते हुए नीचे से कमर ऐसे हिलाने लगे मानो उसके मुँह को चोद रहे हो.रीमा ने अपने हाथो से उनके लंड को हिलाते हुए अपने मुँह मे आधा लंड भर लिया & अपनी जीभ उस पे चलते हुए चूसने लगी.

विरेन्द्र जी उसकी इस हरकत से बेकाबू हो गये & उसके सर को पकड़ उसपे झुक,उसके सर को चूमने की कोशिश करते हुए,नीचे से अपनी कमर हिलाते हुए उसके मुँह मे झाड़ गये.रीमा ने फ़ौरन उनके पानी को गटक लिया.लंड मुँह से निकाला तो वो अभी भी अपना गरम लावा उगल रहा था,उसने अपनी जीभ से सारा पानी अपने हलक मे उतार लिया.ससुर के झाडे लंड को हाथो मे ले उसने चाट-2 कर पूरा सॉफ कर दिया & फिर उनकी ओर देखा.

वीरेंद्र जी ने खींच कर उसे उठाया & अपनी बाहों मे भर उसके चेहरे पे किस्सस की झड़ी लगा दी.

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पर्दे से छन कर आती रोशनी रीमा के चेहरे पे पड़ी तो उसकी आँख खुली.उसने देखा कि वो अपने ससुर के बिस्तर पे उनके साथ नंगी पड़ी है.उसके ससुर की बाँह उसके सीने पे & उनकी टांग उसकी कमर के उपर पड़ी थी.कल रात उन्होने उसे 2 बार और चोदा था.अपने ससुर के साथ खुद को इस हाल मे देख उसे शर्म आ गयी.वो उनसे अलग हो उठने लगी तो उनकी आँख खुल गयी & वो उसे अपने आगोश मे खींचने लगे.

"छ्चोड़िए ना.उठिए,जाकर तैय्यार होइए,दफ़्तर नही जाना है?",उसने उन्हे परे धकेला.

"सोचता हू,आज छुट्टी कर लू.",उन्होने उसे खींच उसकी गर्दन चूम ली.

"बिल्कुल नही,उठिए.जाकर नहाइए.गणेश काम करने आता ही होगा.",रीमा उनकी पकड़ से निकल बिस्तर से उतर खड़ी हो गयी.

"अरे ये तो पहेन्ति जाओ.",उसके ससुर ने उसकी कमर मे हाथ डाल उसे खींचा & कल रात उतरी हुई नेवेल रिंग उसकी नाभि मे पहनाने लगे.रीमा ने मस्ती मे आँखे बंद कर ली & उनका सर पकड़ लिया.रिंग पहना जैसे ही उन्होने उसके पेट को चूमते हुए उसकी गंद दबाई,वो जैसे नींद से जागी,"जाइए जाकर नहाइए.",उसने उन्हे परे धकेला & अपने कपड़े उठा हँसती हुई वाहा से भाग गयी.

दफ़्तर जाने से पहले विरेन्द्र जी ने उसे पकड़ने की काफ़ी कोशिश की पर रीमा ने हर बार उन्हे चकमा दे दिया.दोपहर को जब वो खाना खाने आए तो गणेश फिर वाहा मुजूद था & वो मन मसोसते हुए खा कर वापस दफ़्तर चले गये.

रीमा अपना समान ठीक कर रही थी.जब यहा आई थी तो उसने सोचा था कि दसेक दिन से ज़्यादा वो यहा नही रह पाएगी & उसने अपना सारा समान खोला भी नही था,बस काम लायक कपड़े बाहर निकाले थे.पर अब तो हालात बिल्कुल बदल गये थे.उसने आज अपना सारा समान खोल अलमारी मे रखने का फ़ैसला किया था बस रवि के समान का 1 बक्सा उसने वैसे ही बंद छ्चोड़ दिया था.

उसके बिस्तर पे उसके कपड़े फैले थे.शादी से पहले तो वो बस सारी या सलवार-कमीज़ पहनती थी पर शादी के बाद रवि ने उसे हर तरह के कपड़े खरीद के दिए-स्कर्ट्स,जीन्स,शर्ट्स,टॉप्स,ड्रेसस-वो उसे हर लिबास मे देखना चाहता था.उसने 4-5 मिनी-स्कर्ट्स & शॉर्ट्स को उठा अलमारी के शेल्फ मे रखा.ये स्कर्ट्स & शॉर्ट्स & बाकी छ्होटे कपड़े वो केवल घर मे पहनती थी & रेकॉर्ड था कि अगर रवि घर मे होता तो 15 मिनिट मे ही उतार दी जाती.शुरू मे तो उसे घर मे भी ऐसे कपड़े पहनने मे शर्म आती थी पर बाद मे वो रवि के साथ बाहर जाते वक़्त घुटनो तक की ड्रेसस या स्कर्ट्स पहनने लगी थी.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

थोड़ी ही देर मे लगभग सारे कपड़े करीने से अलमारी मे सजे हुए थे.तभी बाहर विरेन्द्र जी की कार रुकने की आवाज़ आई तो उसने आकर दरवाज़ा खोल दिया & फिर अपने कमरे मे लौट कर 1-2 बचे खुचे कपड़े रखने लगी.

"क्या कर रही हो?",उसके ससुर ने उसे पीछे से अपनी मज़बूत बाहो मे भर लिया & उसकी गर्दन चूमने लगे.

"छ्चोड़िए ना.देखते नही कपड़े रख रही हू."

"ये क्या है?",उन्होने पास मे पड़ी 1 स्कर्ट उठा ली,"ये तुम्हारा है?"

रीमा ने हा मे सर हिलाया.

"ह्म्म.चलो ये पहन कर आज घूमने चलो."

"पागल हो गये हैं."

"क्यू?ये तुम पहनती हो ना.तो आज ये स्कर्ट & ये शर्ट पहन घूमने चलो."

"लेकिन-"

"लेकिन-वेकीन कुच्छ नही.तैय्यार हो जाओ.अगर सुमित्रा की चिंता कर रही हो तो ज़्यादा परेशान मत हो.जब तुम यहा नही थी तो कितनी ही बार मुझे उसे अकेले छ्चोड़ कर काम के लिए जाना पड़ा है.उसे खाना खिला दो & दवाएँ दे दो & फिर तैय्यार हो जाओ."

थोड़ी देर बाद रीमा घुटनो तक की गहरी नीली स्कर्ट & आधे बाज़ू की सिल्क की सफेद शर्ट मे अपने ससुर के सामने थी.विरेन्द्र जी कुच्छ देर उसे सर से पाँव तक निहारते रहे & फिर उसे चूम लिया,"बाहर जाना ज़रूरी है क्या?"

"हा,ज़रूरी है.घर मे बैठे बोर नही होती तुम.चलो आज तुम्हे फिल्म दिखा लाऊँ.इसी बहाने आज अरसे बाद मैं भी सिनिमा हॉल की शक्ल देखूँगा.",विरेन्द्र जी ने थोड़े नाटकिया ढंग से ये बात कही तो रीमा को हँसी आ गयी.

थियेटर की सबसे आखरी रो की कोने की सीट्स पे दोनो बैठे थे.हॉल मे कुच्छ ज़्यादा भीड़ नही थी & उनके बगल की 4 सीट्स खाली पड़ी थी & उसके बाद 1 प्रेमी जोड़ा बैठा था जो अपने मे ही मगन था.लाइट्स ऑफ होते ही विरेन्द्र जी ने अपनी बाँह रीमा के कंधे पे डाल दी & उसे अपने पास खींच लिया,"क्या कर रहे हैं?कोई देख लेगा?"

"यहा देखने के लिए नही वाहा देखने के लिए लोगो ने टिकेट खरीदे हैं.",विरेन्द्र जी ने पर्दे की तरफ इशारा किया तो रीमा हंस दी.

"ओवव..."

"क्या हुआ?"

"ये हत्था पेट मे चुभ गया."

"अच्छा.",विरेन्द्र जी ने दोनो के बीच के कुर्सी के हत्थे को उपर उठा दिया,अब रीमा उनसे बिल्कुल सॅट के बैठी थी & वो उसे बाहो मे भर चूम रहे थे.रीमा भी उनकी किस का मज़ा लेते हुए उनके सर & पीठ को सहला रही थी.

चूमते हुए विरेन्द्र जी ने अपना 1 हाथ उसके घुटने पे रख दिया,रीमा समझ गयी की उनका इरादा क्या है & उनका हाथ वाहा से हटाने लगी.उसे डर लग रहा था की कही कोई देख ना ले.पर विरेन्द्र जी ने उसकी नही चलने दी उनका हाथ घुटने को सहलाता हुए उसकी स्कर्ट के नादर घुस उसकी मलाई जैसी चिकनी जंघे सहलाने लगा.

रीमा ने मस्ती मे उनके हाथ को अपनी भरी जाँघो मे भींच लिया.विरेन्द्र जी उसके होटो को छ्चोड़ उसकी गर्दन को चूमने लगे.हाथ अब जाँघो को मसलना छ्चोड़ उसकी पॅंटी तक पहुँच गया था.रीमा की हालत खराब हो गयी,वो जानती थी की थोड़ी देर मे वो झाड़ जाएगी & उस वक़्त उसे कोई होश नही रहता.अगर झाड़ते वक़्त वो चीख़ने लगी तो हॉल मे बैठे लोग क्या सोचेंगे.पर साथ ही साथ इस डर की वजह से उसे ज़्यादा मज़ा भी आ रहा था.

विरेन्द्र जी ने उसकी पॅंटी के बगल से अपनी उंगली अंदर घुसते हुए उसके चूत मे डाल दी.रीमा चिहुनकि & अपनी आह अपने हलक मे ही दफ़्न कर दी.विरेन्द्र जी उसके होंठ चूमते हुए उंगली से उसकी चूत को ऐसे चोदने लगे की साथ ही साथ उसका दाना भी रगड़ खा रहा था.थोड़ी ही देर मे रीमा ने अपना चेहरा उनकी गर्दन मे छुपाया & वाहा पे अपनी आहें दबाती हुई झाड़ गयी.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

विरेन्द्र जी ने स्कर्ट से हाथ बाहर निकाला & उसे दिखाकर उसके रस से भीगी अपनी उंगली चाट ली.थोड़ी देर तक दोनो 1 दूसरे से सटे बैठे यूही फिल्म देखते रहे.विरेन्द्र जी उसके बालो को सहलाते हुए उसके अस्र को चूम रहे थे.उन्होने ने रीमा का हाथ उठाया & अपनी पंत मे बंद लंड पे रख दिया.रीमा पॅंट के उपर से ही लंड को मसल्ती रही.

विरेन्द्र जी ने जॅकेट पहन रखी थी,उन्होने उसे उतारा और सामने से ऐसे डाल दिया जैसे कोई कंबल ओढ़ता हो.रीमा ने ज़िप खोल लंड बाहर निकाल लिया & उस से खेलने लगी.विरेन्द्र जी उसकी बाँह के नीचे से हाथ घुसा कर उसकी शर्ट के उपर से ही उसकी चूची दबाने लगे.

रीमा के लंड हिलाने से विरेन्द्र जी झड़ने के करीब पहुँच गये थे,उन्होने आस-पास देखा,उनकी रो वाला जोड़ा 1 दूसरे मे गुम किस्सिंग मे लगा था,उन्होने जॅकेट सर्काई & रीमा का सर अपने लंड पे झुका दिया.लंड मुँह मे जाते ही उन्होने पानी छ्चोड़ दिया जिसे रीमा ने निगल लिया.उसके बाद पॅंट की ज़िप लगा दोनो ऐसे बैठ गये जैसे कुच्छ हुआ ही ना हो.पूरी फिल्म के दौरान रीमा उनके हाथो दो बार और झड़ी.

"ये क्या कर रहे हैं?",रीमा ने उनका हाथ पकड़ लिया.

"डरो मत.",विरेन्द्र जी ने उसकी स्कर्ट मे हाथ घुसा उसकी गीली पॅंटी को बाहर खींच लिया & उसे मोड़ के अपनी जेब मे डाल दिया.फिल्म ख़त्म हुई तो दोनो हॉल से बाहर निकल आए.रीमा आज तक घर से बाहर बिना पॅंटी के नही आई थी & उसे थोडा अजीब लग रहा था.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

खिलोना पार्ट--10

दोनो कार पार्किंग मे आ गये थे.जब हवा रीमा की बिना पनटी की गीली चूत को छुति तो रीमा के बदन मे सिहरन दौड़ जाती.दोनो जैसे ही गाड़ी के अंदर बैठे वीरेन्द्रा जी ने उसे बाहों मे खीच कर चूमना शुरू कर दिया.

"पागल हो गये हैं क्या?!थोड़ी देर मे घर पहुँच जाएँगे फिर जो मर्ज़ी आए करिएगा."

"घर पहुँचने तक कौन सब्र करेगा!",विरेन्द्र जी ने उसकी कमर मे हाथ डाल कर अपने उपर खींच लिया.उसकी दाई जाँघ पकड़ उसे उन्होने अपनी गोद मे बैठा लिया.अब रीमा अपने दोनो घुटने विरेन्द्र जी के दोनो तरफ उनकी सीट पे टिकाए उनकी ओर चेहरा किए बैठे थी.

"क्या कर रहे हैं?घर चलिए ना!कोई देख लेगा!",पर वो मन ही मन जानती थी की कार के काले शीशो से किसी को कुच्छ भी नज़र नही आएगा.

जवाब मे खामोश विरेन्द्र जी ने उसकी स्कर्ट उसकी कमर तक उठा उसकी गंद को नंगा कर दिया & उसे मसल दिया.

"ऊव्वव..!,"रीमा चिहुनक के पीछे हुई तो उसकी गंद से दब के हॉर्न बज उठा.वो चौंक के आगे को हुई तो उसका सीना उसके ससुर के मुँह पे दब गया.विरेन्द्र जी ने हाथ उसकी गंद से हटा उसकी शर्ट के बटन खोल दिए & उसके ब्रा कप्स नीचे कर उसकी छातिया नुमाया कर दी.वो अपने होंठो मे उसका निपल लेने ही जा रहे थे की आँखो के कोने से उन्हे कोई गाड़ी की ओर आता दिखा.उन्होने सर घुमाया तो देखा पार्किंग अटेंडेंट शायद हॉर्न सुन कर वाहा आ रहा था,"अब तो जाने दीजिए,वो देख लेगा."

उन्होने रीमा का सर अपने बाए कंधे पे लगा दिया तो उसने शर्म & डर से उनकी गर्दन मे मुँह च्छूपा लिया.विरेन्द्र जी ने कार स्टार्ट कर अपनी बगल का शीशा 1 इंच नीचे सरकया & अपनी जेब से पार्किंग स्लिप निकल कर बाहर कर दी.जैसे ही अटेंडेंट ने स्लिप ली उन्होने शीशा वापस बंद किया & कार गियर मे डाल वाहा से निकल गये.

रीमा उनकी गर्दन से लगी उनके बालो को चूमती उनके कान तक आ गयी & वाहा जीभ फिराने लगी.विरेन्द्र जी का 1 हाथ स्टियरिंग संभाले था & दूसरा उसकी गंद.गंद मसल्ते हुए वो बीच-2 मे अपनी उंगलिया उसकी पहले से ही गीली चूत मे घुसेड उसे और मस्त कर देते.कार 1 लाल बत्ती पे रुकी तो उन्होने उसका सर अपनी गर्दन से उठाया & उसकी गर्दन चूमने लगे & उसकी नंगी छातिया दबाने लगे.अपनी बहू के जिस्म से खेलते वक़्त भी उनकी 1 नज़र ट्रॅफिक सिग्नल पे थी.

जब बत्ती हरी होने 4 सेकेंड बाकी थे उन्होने रीमा को वापस अपने कंधे पे झुका दिया & हाथ स्टियरिंग व्हील पे जमा दिए.थोड़ी देर बाद कार 1 सुनसान रास्ते के किनारे खड़ी थी.अंदर विरेन्द्र जी अपनी पॅंट की ज़िप खोल अपने तने लुंड को आज़ाद कर रहे थे.जैसे ही लंड बाहर आया उन्होने रीमा की कमर पकड़ उसे थोडा उपर उठाया तो रीमा को अपना सर,छत से टकराने से बचाने के लिए,मोड़ना पड़ा.रीमा को इतनी सी जगह मे तकलीफ़ तो हो रही थी पर अब वो इतनी मस्त हो चुकी थी कि उसका भी पूरा ध्यान इसी पे था की लंड जल्द से जल्द उसकी चूत मे उतर जाए.

"ऊवन्न्नह...!",उसकी कमर पकड़ विरेन्द्र जी उसकी चूत को नीचे अपने लंड पे बिठा रहे थे.रीमा आँखे बंद किए जन्नत का मज़ा ले रही थी.धीरे-2 विरेन्द्र जी ने उसकी गीली,कसी चूत मे अपना पूरा लंड घुसा दिया था.जैसे ही लंड उसकी चूत मे उतरा रीमा हौले-2 अपनी कमर हिला अपने ससुर को चोदने लगी.अपनी बाहो मे उनका सर थामे वो उनके चेहरे को चूम रही थी & वो उसकी जाँघो & गंद की फांको को सहला & मसल रहे थे.

"औउईई...."!,विरेन्द्र जी ने उसकी गंद की फांको को पकड़ फैलाया & नीचे से 1 धक्का मार लंड को थोड़ा & अंदर पेल दिया.रीमा ने मज़े मे अपना सर पीएच्छे झुका लिया तो विरेन्द्र जी का मुँह उसकी चूचियो से आ लगा.अपने बड़े-2 हाथो मे उन गोलैईयों को दबाते हुए जब उन्होने उसके निपल्स को चूसना शुरू किया तो रीमा मस्त हो ज़ोर-2 से आँहे भरने लगी.

हॉल मे उसके ससुर की हर्कतो ने तो उसे पहले से ही गरम कर दिया था & अब तो वो बस मस्ती मे सब कुच्छ भूल गयी थी.उसका तो अब 1 ही मक़सद था,ससुर के लंड का पूरा लुत्फ़ उठाते हुए झड़ना.वो झुक कर अपने ससुर का गाल चूमने लगी& उसकी कमर हिलाने की रफ़्तार बढ़ गयी.विरेन्द्र जी ने आखरी बार उसकी चूचियो को चूसा & फिर उसका चेहरा अपनी गर्दन मे च्छूपा दिया.

उन्होने कार स्टार्ट की & अपनी बहू से चुदवाते हुए घर की ओर बढ़ चले.रीमा तो पागल ही हो गयी थी.उसे कोई होश नही था की उसके ससुर ड्राइव कर रहे हैं,वो तो बस पागल हो उनके कभी उनके होंठ चूमती तो कभी गाल,मस्ती मे उसने उनका चेहरा अपने सीने मे दबाना चाहा तो बड़ी मुश्किल से उन्होने उसे ऐसा करने से रोक रास्ते पे आँखे लगाई.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

रीमा अब झड़ने के बहुत करीब थी & उसकी कमर तेज़ी से हिलने लगी थी & उसकी कसी चूत ने सिकुड-2 कर विरेन्द्र जी के लंड को भी बेकाबू कर दिया.कार सिविल लाइन्स मे दाखिल हो चुकी थी & जैसे ही घर के सामने रुकी,रीमा ने अपने ससुर को ज़ोर से अपनी बाहो मे भींच लिया & बेचैनी मे कमर हिलाने लगी.विरेन्द्र जी ने भी उसकी कमर को अपनी बाहो मे जाकड़ लिया & उसकी छातियो बीच अपना चेहरा घुसा अपनी जोश मे सिसकती हुई बहू के साथ झाड़ गये.

उन्होने उसे धीरे से अपनी गोद से उठाया & उसकी सीट पे बिठाया,अपनी पॅंट की ज़िप बंद की & कार से उतर कर गेट खोला & फिर वापस कार मे आ गये.कार घर के अंदर आ गयी तो वो फिर कार से उतरे & घूम कर आए & रीमा की साइड का दरवाज़ा खोला.अंदर रीमा सीट पे ऐसे पड़ी थी जैसे अभी-2 बेहोशी से जागी हो.वो अधखुली आँखो से अपने ससुर की ओर देख कर मुस्कुराइ तो उन्होने झुक कर उसे गोद मे उठा लिया.

थोड़ी ही देर बाद वो अपने ससुर के कमरे मे उन्ही के बिस्तर पे पड़ी थी.वो अपने कपड़े उतार उसकी बगल मे आए & उसे नंगी करने लगे.रीमा ने गर्दन घुमा कर देखा उसकी सास बेख़बर सो रही थी.वो अब पूरी नंगी थी & सुके ससुर उसके जिस्म से खेल रहे थे.उसने अपनी सास से नज़रे हटाई & अपने ससुर को बाहो मे भर उनकी गरम हर्कतो का मज़ा लेने लगी.

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सुबह रीमा की आँख खुली तो वो कल रात ही की तरह अपने ससुर के बिस्तर मे नंगी पड़ी थी पर आज वो वाहा नही थे.बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी,शायद वो नहा रहे थे.रात उसके ससुर ने उसे 2 बार जम के चोद कर उसका बुरा हाल कर दिया था,पर उसे मज़ा भी बहुत आया था.उसे ख़याल आया की कल शायद पहली बार वो चुदाई से इतना संतुष्ट हुई थी.

वो अंगड़ाई लेते हुए उठी,अपने कपड़े समेटे & अपने कमरे मे चली गयी.उस दिन सवेरे दफ़्तर जाने से पहले & दोपहर को खाने के वक़्त उसके ससुर को उसे चोदने को मौका नही मिला क्यूकी गणेश वाहा था.उन्हे बस उसे बाहों मे भर कुच्छ किस्सस से ही संतोष करना पड़ा.

रीमा ने मन ही मन गणेश का शुक्रिया अदा किया,आख़िर उसकी चूत को थोडा आराम भी तो चाहिए था.आज उसने रवि के समान का बक्सा खोला & उन्हे ठीक करने लगी.समान मे उसे 1 आल्बम मिला,ये शेखर की शादी का आल्बम था.उसने आल्बम पलट के देखा तो उसमे उसे मीना & उसके परिवार वालो की भी तस्वीरे दिखी.तभी ड्रॉयिंग रूम मे रखा फोन घनघना उठा.

रीमा को परसो की ब्लॅंक कॉल्स याद आ गयी.वो डरते हुए ड्रॉयिंग रूम मे पहुँची,"हे..हेलो."

उधर से कोई आवाज़ नही आई,बस रोड पे जाते ट्रॅफिक की हल्की आवाज़.

"हेलो,कुच्छ बोलते क्यू नही?"

अभी भी बस किसी की सांसो की आवाज़ & बस ट्रॅफिक का शोर.

"देखो ये फोन करना बंद करो वरना पोलीस मे कंप्लेंट कर दूँगी!",रीमा चीखी& तुरंत फोन काट दिया गया.शायद जो भी था वो डर गया...रीमा के माथे पे पसीने की बूंदे छल्छला आई थी.सारी के पल्लू से उसने उसे पोच्छा & वापस अपने कमरे मे आ गयी & रवि का समान ठीक करने लगी.अभी भी उसका आधा ध्यान फोन पे ही लगा हुआ था.

पर उस रोज़ वो बल्न्क कॉल दुबारा नही आई.रीमा ने चैन की साँस ली,ज़रूर कोई बदतमीज़ इंसान शरारत कर रहा होगा...तभी तो पोलीस की धमकी से डर गया..पर आख़िर था कौन वो?उसने सर झटक कर रवि के समान से खाली बक्सा लॉफ्ट मे डाल & स्टूल से उतार बिस्तर पे रखी उन चीज़ो को देखने लगी जो उसे काम की लगी थी.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

पलंग पे रवि की 2 डाइयरीस पड़ी थी जिसमे उसके सैकड़ो फोन नॉस. & ईमेल आइड्स & ऐसे और उसके काम से संबंधित बाते लिखी थी.साथ मे था रवि का मोबाइल फोन & पर्स.ये दोनो चीज़े पोलीस ने नदी से निकली रवि की लाश से बरामद की थी & बाद मे रीमा के हवाले कर दिया था.मोबाइल फोन तो पानी घुसने से बिल्कुल बेकार हो चुका था.

ये चीज़े देख रीमा उदास हो उठी थी.मोबाइल उलटते-पलटते उसे ख़याल आया कि इस छ्होटी सी चीज़ पे दोनो ने कितनी प्यार & शरारत भरी बातें की थी.रवि तो फोन पे ही ऐसी-2 शरीर बातें करता की वो मस्त हो उठती & अपने बदन से खेलने लगती,जब होश आता तो वो शर्म से दोहरी हो जाती & अपने पति पे उसे गुस्सा आता पर गुस्से से कहीं,कहीं ज़्यादा प्यार.

रीमा की आँखो के कोने से आँसू की 2 बूंदे ढालाक गयी.तभी उसके दिमाग़ मे 1 ख़याल कौंधा.उस दिन रवि ने किस-2 से बात की थी?रवि शहर से बाहर क्यू गया था वो भी उनकी अन्निवेर्सरि के दिन?क्या इसका सुराग उसे फोन की कॉल डीटेल्स से मिल सकता था?पर ये फोन तो बेकार हो चुका था...तो क्या हुआ..मोबाइल फोन सर्विस प्रवाइडर कंपनी से वो ये डेअतिल्स निकलवा सकती थी.हां!मौका मिलते ही वो ऐसा करेगी & आज..आज वो कैसे भी करके अपने ससुर & जेठ से रवि के बारे मे बात करेगी.

तभी बाहर विरेन्द्र जी के कार रुकने की आवाज़ आई,उसने अपनी आँखे पोन्छि & सारा समान उठा कर अलमारी के अंदर बंद किया & दरवाज़े की ओर बढ़ गयी.तभी 1 और कार के रुकने की आवाज़ आई.वो बाहर आई तो देखा कि उसके ससुर अपनी कार लॉक कर रहे हैं & उनके पीछे टॅक्सी से शेखर उतर रहा है.

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पूरी शाम रात के खाने तक उसके ससुर & जेठ 1 दूसरे की नज़र बचा कर उसे बाहो मे भरने की कोशिश करते रहे पर रीमा भी उनकी हर कोशिश नाकाम करती रही.उसे दोनो को तड़पाने मे बड़ा मज़ा आ रहा था.जब वो देखती की दोनो मे से 1 भी उसे तन्हा पा दबोच सकता है तो वो अपने कमरे मे घुस जाती.वो जानती थी की आज दोनो मे से किसी को,1 दूसरे के कारण,उसके कमरे मे घुसने की हिम्मत नही होगी.पर आख़िरकार दोनो ने उस से 1 दूसरे की मौजूदगी मे थोड़ी च्छेद-च्छाद कर ही ली.

हुआ यूँ की रात तीनो खाने की मेज़ पे बैठे थे.मेज़ के 1 सिरे पे जो अकेली कुर्सी थी,उसपे विरेन्द्र जी बैठे थे.उनके दाए हाथ वाली बगल की कुर्सी पे रीमा & रीमा के बगल वाली कुर्सी पे शेखर बैठा था.

सभी खामोशी से खाना खा रहे थे कि तभी रीमा को अपने बाएँ पैर पे कुच्छ महसूस हुआ-ये उसके ससुर का पाँव था.रीमा की तो हालत खराब हो गयी,अगर शेखर ने ये देख लिया तो क्या होगा?!उसने हल्के से अपना पैर अलग किया & उनके पैर पे उस से चपत लगा कर उनके पाँव को दूर कर दिया.पर विरेन्द्र जी कहा मानने वाले थे,उन्होने वही हरकत दोहराई & इस बार उनका पाँव उसके पाँव को सहलाता हुआ उसकी पिंडली पे आ गया & उसकी सारी मे घुस उसकी मखमली टाँग को सहलाने लगा.

रीमा ने आँख के कोने से देखा की शेखर खाने मे मगन है तो उसने मिन्नत भरी नज़र से अपनी ससुर को देखा & पैर अलग करने की कोशिश की पर उन्होने मज़बूती से उसकी टांग पे अपने पाँव का दबाव बनाए रखा & बहुत हल्के से 1 शरारत भरी मुस्कान उसकी तरफ फेंकी.

घबराई रीमा अभी ससुर के हमले से सहमी हुई थी कि तभी उसे अपनी दाई जाँघ पे अपने जेठ के बाए हाथ का एहसास हुआ.उसेन 1 हाथ हल्के से नीचे ले जा अपने ससुर की नज़र बच उसे हटाना चाहा पर शेखर भी बाप की तरह उसके जिस्म को छेड़ता रहा.बल्कि उसने तो हद ही कर दी.खाना खाते हुए बहुत धीरे से उसने उसकी सारी घुटनो तक खेंची & अपना हाथ घुसा उसकी जाँघ सहलाने लगा.

रीमा का तो घबराहट से बुरा हाल था पर उसके जिस्म को दोनो की च्छेद-च्छाद बहुत पसंद आरहि थी & उसकी चूत मे कुच्छ-कुच्छ होने लगा था.दोनो बाप-बेटे 1 दूसरे से अंजान उसकी टाँगो से खेल रहे थे & वो शर्म & डर से पानी-2 हो रही थी.जैसे-तैसे उसने खाना ख़त्म किया & झटके से उठ खड़ी हुई,उसके खड़े होते ही दोनो ने अपना पाँव & हाथ खींच लिया,"मैं पानी लेकर आती हू.",रीमा ने जग उठाया & किचन मे चली गयी.

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