Mastram Kahani खिलोना - Printable Version

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RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

खिलोना पार्ट--13

साथ ही साथ रीमा ने ये भी सोच लिया कि आज रात बिस्तर मे वो दोनो से इस शंतु के बारे मे ज़रूर पुछेगि..शायद दोनो मे से कोई उसके बारे मे कुच्छ जानता हो.रीमा ने रवि की पूरी डाइयरी छान मारी थी,पर कही भी शंतु का नाम नही था सिवाय उस आखरी पन्ने के इस कारण रीमा को ये पता नही था कि ये शंतु रवि का कोई दोस्त,रिश्तेदार या फिर कोई ऐसे ही जान-पहचान वाला था...लेकिन उसे इतना यकीन क्यू था कि शंतु से उसे रवि की मौत के बारे मे कुच्छ अहम बात पता चल सकती है?...ऐसा भी तो हो सकता है कि दोनो ने किसी अफीशियल काम के बारे मे 1 दूसरे से बात की हो..ये बस 1 इत्तेफ़ाक़ हो कि शंतु की कॉल आखरी कॉल थी रवि के मोबाइल पे...हो सकता है जैसा वीरेंद्र जी & शेखर मानते थे,सच मे रवि की मौत 1 आक्सिडेंट थी & वो खमखा अपने मन मे शक़ लिए बैठी थी.

उसने अपना सर झटका..जो भी हो,अगर मन मे शक़ है तो उसे दूर करना ही होगा..वो आज रात दोनो से शंतु के बारे मे ज़रूर पुछेगि मगर इस से पहले दोनो को दोपहर मे आने वाली ब्लॅंक कॉल्स के बारे मे बताएगी.

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"क्या???!",शेखर चौंक गया,"..& तुम आज बता रही हो!"

"मुझे लगा कि कोई शरारत कर रहा होगा,उस दिन डाँटने के बाद दोबारा नही करेगा..मगर उसने जब आज फिर से कॉल किया तो मैने सोचा कि आप लोगो को बता दू."

तीनो ड्रॉयिंग रूम मे बैठे चाइ पी रहे थे.विरेन्द्र जी खामोशी से चाइ के घूँट भरते रहे.शेखर ने कहा कि वो इस बारे मे कुच्छ ज़रूर करेगा.उसे कल फिर दिल्ली जाना था & उसी सिलसिले मे वो किसी काम से बाहर चला गया & कह गया कि खाने के वक़्त तक वापस आएगा.

"तुम्हे लगा रहा है कि ये ब्लॅंक कॉलर कही रवि की मौत से जुड़ा हुआ है,है ना?"

"जी!",रीमा ने कप नीचे किया,"जी.हां."

"ह्म्म.",विरेन्द्र जी ने कप खाली कर टेबल पे रखा,"बिल्कुल मत घबराना.इस कॉलर का भी पता लगा लेंगे & तुम्हारे मन के बाकी शुबहे भी दूर कर देंगे."

जवाब मे रीमा बस मुस्कुरा दी.

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रीमा नहा कर बाथरूम से बाहर आई & 1 छ्होटी स्लिप स्टाइल की नाइटी पहन ली जो बस उसकी गंद के नीचे तक आ रही थी,इसके उपर उसने 1 ड्रेसिंग गाउन डाल लिया & किचन से पानी लेने चली गयी.हर रात की तरह ही आज रात भी उसने अपने ससुर को कह दिया था कि वो सो जाएँ,वो देर से उनके पास आयेगी.

पानी पीते वक़्त उसे शेखर ने पीछे से अपने आगोश भर लिया,"आप भी ना मरवाएँगे मुझे!आप ही के पास तो आ रही थी,थोड़ा इंतेज़ार नही कर सकते थे?",रीमा घूम कर उसके सामने आ गयी.

शेखर ने उसे किचन के काउंटर से टिका दिया & चूमने लगा,"..उम्म्म्म....यहा नही..कही पिता जी ना आ जाएँ.",शेखर ने उसकी जंघे पकड़ उसे गोद मे उठा लिया तो रीमा ने भी अपने बाहे उसकी गर्दन मे डाल दी & उस से लिपट उसके सर को चूमने लगी.

अपने कमरे मे आ शेखर बिस्तर पे बैठ गया & गोद मे बैठी रीमा को चूमने लगा.रीमा भी उसके बालो मे हाथ फिराती उसकी किस का जबाब देने लगी.हाथ आगे ला शेखर ने गाउन के सॅश को खोला & फिर उसे उसके कंधो से सरका दिया,रीमा ने भी अपने हाथ अपने जेठ के सर से हटा नीचे ले जा के गाउन को गिरने दिया.

"वाउ..!आज तो कहर ढा रही हो.",शेखर उसकी मक्खनी जंघे सहलाता हुए उसकी गर्दन चूमते हुए उसके क्लीवेज तक पहुँच गया.

"ओह्ह्ह्ह...!",उसने रीमा के सीने पे हल्के से काट लिया.रीमा ने उसके सर को अपने सीने से उठाया & फिर उसकी टी शर्ट उतार दी,फिर नीचे झुकी & उसके चिकने सीने पे काट लिया,"..आहह..!",शेखर उसकी ओर देख मुस्कुराया.

दोनो फिर से 1 दूसरे से लिपट कर चूमने लगे,रीमा चूमते हुए अपनी चूत से अपने जेठ के खड़े लंड को रगडे जा रही थी.शेखर के हाथ उसकी स्लिप के अंदर घुस उसकी पीठ पे फिसल रहे थे.उसने ब्रा नही पहनी थी & जब भी शेखर के हाथ उसकी पीठ पे घूमते हुए उसकी बगलो मे आ कर उसकी चूचियो को छु जाते तो उसे गुदगुदी सी होती.

शेखर पूरे जोश मे आ चुका था & अब उसकी गर्दन चूमता हुआ,उसकी नाइटी मे घुसे हाथ से उसकी चूचिया मसल रहा था.रीमा भी अपने जेठ की हर्कतो का पूरा मज़ा लूट रही थी,उसके नाख़ून उसकी पीठ पे खरोंच रहे थे.शेखर के होंठ उसके गले से नीचे उसके क्लीवेज पे पहुँचे तो उसके दिल मे चाह उठी की अब वो इन मस्त गोलैईयों को अपने मुँह मे भर ले.



RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

अपनी चाह पूरा करने के लिए उसने स्लिप को 1 ही झटके मे उठा कर रीमा के बदन से अलग कर दिया,इस काम मे रीमा ने भी अपने हाथ उठाकर उसकी पूरी मदद की.चूचियाँ नंगी होते ही शेखर उनपे टूट पड़ा.उसकी गोलैईयों को अपने हाथो तले दबा & मसल कर उसने अपने होंठो से उन्हे जम कर चूमा & चूसा.रीमा मस्ती मे आँहे भरने लगी.शेखर उसके निपल्स को अपनी उंगलियो मे मसल जब उसकी पूरी चूची को अपने मुँह मे भरने की कोशिश करता तो वो पागल हो उसके सर को पकड़ अपनी कमर उसकी गोद मे और दबा कर हिलने लगती.कोई 15 मिनिट तक उसकी चूचियो से खेलने के बाद शेखर ने रीमा से खड़े होने को कहा.

बैठे हुए उसने अपनी ट्रॅक पॅंट निकल दी & नंगा हो गया,"अपनी पॅंटी उतारो."

रीमा ने धीरे से अपनी पनटी उतार दी,अब उसकी चिकनी,गीली चूत ठीक उसके जेठ के चेहरे के सामने थी.शेखर ने उसकी गंद को हाथो मे भर अपने होठ उसकी चूत पे लगा दिए,"..आआआअहह....",रीमा कराह कर उसके सर को पकड़ च्चटपटाने लगी.

उसकी च्चटपटाहत से बेपरवाह शेखर उसकी चूत को चाटता रहा,उसकी जीभ किसी साँप की तरह रीमा के बिल मे आना-जाना कर उसे तडपा रही थी.रीमा की टाँगो मे तो जैसे जान ही नही बची थी.जैसे ही शेखर की जीभ ने उसके दाने को छेड़ा,वो झाड़ गयी & बस उसकी गोद मे गिर पड़ी.मुस्कुराते हुए शेखर ने उसकी गंद को उठाया & उसे अपने लंड पे बिठा लिया.

अब रीमा पानी चूत मे शेखर का लंड लिए उस से लिपटी बैठी थी,"आप बहुत बदमाश हैं.",उसने उसके कंधे पे हल्के से काट लिया.शेखर ने नीचे से हल्के-2 धक्के लगाने शुरू कर दिए.

"ऊन्णंह...",रीमा ने कराह कर उसके कंधे से सर उठाया & उसके चेहरे को हाथो मे ले उसकी आँखो मे झाँकने लगी,"कल फिर चले जा रहे हैं?यहा अकेले मैं कैसे रहती हू,पता है?",उसने बनावटी नाराज़गी से कहा.

"उम्म्म्म........बस यही सब कर मुझे चुप करा देते हैं..आनन्न..हह..",शेखर ने नीचे से थोड़े तेज़ धक्के लगा उसकी गंद मे 1 उंगली घुसा दी थी & साथ ही उसकी छाती को मुँह मे भर ज़ोर से चूस लिया था.

"जल्दी वापसा आऊंगा.",उसकी चूचिया दबाते हुए वो अभी भी उसकी गंद मे उंगली कर रहा था.

"1 बार भी मुझे यहा घुमाया नही है.बस घर मे पड़ी बोर होती रहती हू..कोई दोस्त भी तो नही है यहा मेरा.",उसने उसकी पीठ पे नाख़ून गाड़ते हुए उसके गाल को चूम लिया,"आपके तो यहा बहुत दोस्त होंगे ना?बचपन से आप & रवि यही रहे हैं."

"हां,बहुत दोस्त हैं.",शेखर का 1 हाथ उसके चेहरे को सहला रहा था.

"ह्म्‍म्म......",शेखर ने उसके गुलाबी होटो पे उंगली फिराई,"आप रवि के भी सभी दोस्तो को जानते होंगे?"

"हां...यहा तो सभी को जनता हू.",वो उसकी गर्दन सहलाता हुआ नीचे आ रहा था दूसरे हाथ की 1 उंगलीरीमा की गंद छेड़े जा रही थी.

"किसी शंतु को जानते थे?",1 पल को शेखर के बदन ने हरकत बंद कर दी पर वो तुरंत होश मे आया & फिर से उसके बदन से खेलने लगा.

"नही तो.क्यू?कौन है ये?",उसके लंड & उंगली की रफ़्तार बढ़ गयी थी.

"ऊऊ...हह.....पता नही.यू ही रवि की टेली....फोन डाइयरी पल..अट रा..आहह....रही थी की ये ना..आम..आअन्न्‍णणन्...न्नह...दिखा...अंजान नाम था...अभी ओईईईई....ख़याल आया तो आपसे ऐसे ही पूच्छ लिया....ऊऊुउउइईईईईई...!",शेखर के धक्के बहुत तेज़ हो गये थे & उसकी उंगली का छेड़ना भी,रीमा जोश मे पागल हो गयी.अपने जेठ को अपनी बाहो मे कस कमर हिला उसकी गोद मे उच्छलते हुई उसने अपने नाख़ून उसकी पीठ मे गढ़ा दिए & होठ उसकी गर्दन मे.शेखर भी उसे अपने आगोश मे भींच बस उसकी चूत & गांद को चोदे जा रहा था...रीमा के बदन मे बिजली दौड़ गयी & वो शेखर से चिपेट जोश मे पागल हो उसके कान मे जीभ फिराती हुई,बेचैनी से कमर हिलाती झाड़ गयी..तभी शेखर ने भी आह भरी & उसके सीने पे होंठ दबाए उसकी चूत मे अपना विर्य छ्चोड़ दिया.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

खिलोना पार्ट--14

"आननह...आननह..आननह...!",रीमा अपने ससुर के बिस्तर पे उनके नीचे पड़ी,उनके तेज़ धक्को का मज़ा ले रही थी,"हा..आन..हा..अन्न..ऐसे ही कर...इए..आहह.....पी..ताआआजीी..!",अपनी बाहो मे उन्हे भीच,उनसे चिपक कर वो झाड़ गयी & उसके साथ ही तेज़ साँसे भरते हुए वीरेन्द्रा जी ने भी उसकी चूत मे अपने लंड को खाली कर दिया. थोड़ी देर बाद अपनी बही की चूत से लंड निकाल उन्होने पलंग से उतार उसकी बगल मे रखी साइड टेबल से पानी की बॉटल उठा का अपने मुँह से लगा ली. रीमा करवट लेकर उनकी ओर देखने लगी,उस से कुच्छ ही दूरी पे उसके & उसके ससुर के रस से गीला विरेन्द्र जी का सिकुदा लंड लटक रहा था,उसने हाथ बढ़ा कर उसे थाम लिया & झांतो मे अपनी उंगलिया फ़िराने लगी,"आप रवि के जान-पहचान के किसी शंतु नाम के आदमी को जानते थे. "हा,क्यू?",विरेंड्रा जी अपनी बहू की इस गरम हरकत पे मुस्कुराए. "बस यू ही.रवि की टेलिफोन डाइयरी मे उसका नाम दिखा तो आपसे पुच्छ लिया.कौन है वो?",उसने उनके अंदो को अपने हाथो मे दबा लिया. "प्रशांत चौधरी.",विरेन्द्र जी पलंग पे चढ़ घुटनो के बल खड़े हो गये तो रीमा भी कोहनी पे उचक कर उठी & अपनी जीभ से लंड पे लगे पानी को सॉफ करने लगी.विरेन्द्र जी उसके बालो मे प्यार से हाथ फिराने लगा,"..रवि का सबसे अच्छा दोस्त.बचपन से ही शंतु बड़ा कमज़ोर & चुप-2 रहने वाला लड़का था.",रीमा ने लंड को मुँह मे भर उसे हिलाते हुए चूसना शुरू कर दिया,"..इस वजह से बाकी बच्चे उसे शांति कह के चिढ़ाते थे...उसकी कुच्छ हरकते भी लड़कियो जैसी थी." वीरेंद्र जी ने बिना लंड मुँह से निकाले रीमा को लिटाया & उसके उपर चढ़ 69 पोज़िशन मे आके,उसकी टाँगो के बीच अपना चेहरा दबा दिया,"उम्म्म...!",चूत पे ससुर की जीभ महसूस करते ही रीमा ने मस्ती मे अपने ससुर की गंद को भींच लिया & अपनी टाँगो मे उनके चेहरे को. "..पता नही कैसे रवि & उसकी दोस्ती हो गयी & उसके बाद रवि ने किसी को भी उसे शांति कह के नही चिढ़ाने दिया.शंतु नाम भी रवि ने ही उसे दिया था.",उसकी चूत से जीभ हटा वो उसकी अन्द्रुनि जाँघो को चूमने लगे तो रीमा बेचैन हो उनकी जीभ फिर से चूत के अंदर लेने के लिए अपनी कमर हिलने लगी. "..यही पार्क के कोने वाला मकान मे रहता था वो & अक्सर रवि & शेखर के साथ खेलने आया करता था.",वो अपनी बहू का इशारा समझ फिर से उसकी चूत मे अपनी ज़ुबानफिराने लगे,"..रवि और शंतु तो हमेशा साथ-2 नज़र आते थे,जब रवि पुणे गया तभी उनकी जोड़ी टूटी.",जीभ की जगह अब उंगली ने ले ली थी,"..फिर तो पता नही वो कहा गायब हो गया.मैने तो उसे पता नही कब्से नही देखा." अपने ससुर के साथ जिस्म का खेल खेलती रीमा अब पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी पर उस मदहोशी मे भी उसके दिमाग़ मे सवाल घूम रहे थे कि अभी थोड़ी देर पहले शेखर ने उस से झूठ क्यू बोला?..और ये शंतु आख़िर कौन था? पर उस रात वो इन सवालो के बारे मे और नही सोच पाई क्यूकी उसके ससुर अब 1 बार फिर उसके उपर चढ़ कर उसकी चूत मे अपना लंड घुसा रहे थे. "क्या कर रहे हैं?!छ्चोड़िए नही तो आपकी फ्लाइट छूट जाएगी.",ड्रॉयिंग रूम के सोफे पे बैठी रीमा शेखर की बाहो मे कसमसा रही थी.सुबह के 10 बज रहे थे & कोई आधे घंटे पहले वीरेंद्र जी दफ़्तर जा चुके थे & थोड़ी देर मे शेखर को भी दिल्ली की फ्लाइट पकड़नी थी. "छूट जाने दो,अगली पकड़ लूँगा.",शेखर ने उसकी कमर को भींचते हुए उसके नर्म होटो पे अप[ने होंठ रख दिए.रीमा जानती थी कि उसके जिस्म की हवस मे अँधा हो शेखर बड़े आराम से ऐसा कर सकता है,पर इस से उसका मीना से मिलने का प्लान खटाई मे पड़ जाता & वो ये बिल्कुल नही चाहती थी. "पागल मत बानिए.चलिए छ्चोड़िए.",रीमा ने किस तोड़ उसकी छाती पे हाथ रख उसे परे धकेलने की कोशिश की. "इसके शांत हुए बिना कैसे जाऊं?",शेखर ने उसका हाथ पकड़ पॅंट मे क़ैद अपने लंड पे रख दिया.रीमा उसकी आँखो मे झाँक बड़ी अदा से मुस्कुराइ,उसे शेखर को भागने का रास्ता मिल गया था.उसने उसकी आँखो मे देखते हुए उसकी पॅंट की ज़िप खोली & उसका लंड निकाल अपने हाथ मे जाकड़ लिया. "आहह..!",शेखर ने आँखे बंद कर सोफे पे अपना सर टीका दिया.रीमा झुकी & उसके सूपदे को हौले से चूम लिया,शेखर के हाथ उसके बालो से खेलने लगे.कुच्छ देर तक वो सूपदे को हल्के-2 चूमते रही,फिर लंड को चूमते हुए उसकी जड़ तक आ गयी.उसने बारी-2 से उसके अंदो को अपने मुँह मे ले चूसना शुरू किया,साथ ही साथ वो अपने हाथ से लंड को हिला रही थी. शेखर तो पागल सा हो गया,रीमा का सर पकड़ उसने अपनी गोद मे दबा दिया & बेचैनी से अपनी कमर हिलाने लगा.रीमा ने उसके आंडो को आज़ाद किया & फिर जड़ से चूमते हुई सूपदे तक पहुँची & अपनी जीभ से लंड के छेद को छेड़ने लगी.शेखर का तो जोश से बुरा हाल था.उसने कमर उचका कर रीमा को लंड मुँह मे लेने का इशारा किया. रीमा ने नज़रे उठा कर शेखर की नज़रो से मिलाई & अपने होटो को लंड के गिर्द कस दिया.उसके मुँह के अंदर क़ैद शेखर के लंड पे कभी वो अपनी जीभ से वार करती तो कभी चुस्ती,उसकी उंगलिया उसकी झांतो मे घुस उसके आंडो को मसल रही थी.वो जानती थी की शेखर अब ज़्यादा नही रुक सकता,उसने 1 हाथ को आंडो पे बनाए रखा & दूसरे को लंड पे ला उसे हिलाते हुए चूसने लगी.शेखर इस तिहरे हमले को नही झेल पाया & उसके सर को जाकड़ अपनी कमर हिलाता हुआ उसके मुँह मे अपना विर्य छ्चोड़ने लगा.रीमा ने तुरंत उसका सारा पानी पी लिया & फिर लंड को मुँह से निकाल बचे हुए पानी को उसके सूपदे को चाट कर सॉफ कर दिया. शेखर उसे देखा मुस्कुराया & उठ कर बाथरूम चला गया.रीमा भी सोफे से टेक लगा के बैठ गयी.अपने जेठ के साथ खेले इस वासना के खेल ने उसे भी गरम कर दिया था पर उसने अपने जज़्बातो पे किसी तरह काबू किया हुआ था.तभी उसकी नज़र पास रखे शेखर के मोबाइल पे गयी,वो उसे उठा यू ही उलटने-पलटने लगी कि तभी उसके दिमाग़ मे 1 ख़याल कौंधा. उसने मोबाइल ऑन कर कॉंटॅक्ट्स लिस्ट मे जा सर्च ऑप्षन खोला & नाम एंटर किया 'प्रशांत चौधरी'-पर इस नाम से कोई भी नंबर सेव्ड नही था.उसने फिर कोशिश की & नाम डाला 'शंतु'.इस बार वो चौंक कर सोफे से खड़ी हो गयी.उसकी आँखो के सामने मोबाइल स्क्रीन पे शंतु का नाम & नंबर दिख रहे थे.तभी बाथरूम फ्लश करने की आवाज़ आई,रीमा जैसे नींद से जागी.उसने दौड़ के लॅंडलाइन फोन के बगल मे रखे पॅड पे कलाम से वो नंबर लिखा & उसे उल्टा रख दिया ताकि किसी की नज़र उस पे ना पड़े.फिर मोबाइल बंद किया & भाग कर सोफे पे आके अपनी जगह पे बैठ गयी & मोबाइल भी उसकी जगह पे रख दिया. -------------------------------------------------------------------------------


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

"मीना मेडम तो बाहर गयी हैं.",क्लाइव रोड की 55 नंबर. की कोठी के बाहर खड़े गार्ड ने उस से कहा तो रीमा परेशान सी हो गयी. "वैसे आपको उनसे क्या काम था मेडम?" "मैं उसकी सहेली हू.कई सालो से मिली नही थी,आज मौका लगा था तो सोचा था कि मिल लू." "आप 1 मिनिट रुकिये मैं बड़ी मेडम,उनकी मा से पुचहता हू.",वो इनेटरकों पे नंबर मिलाने लगा. "मा जी आपको अंदर बुला रही हैं.जाइए मिल लीजिए." रीमा ने टॅक्सी वाले को रुकने को कह गेट के अंदर कदमा रखा तो दंग रह गयी-बंग्लॉ सच मे किसी महल की तरह आलीशान था.गेट से 1 नौकर उसे अंदर ले जा रहा था.रीमा को ये डर भी था की गणेश उसे यहा ना देख ले,वो अपना काम कर यहा से तुरंत निकल जाना चाहती थी. "आओ बेटी,यहा बैठो.",ड्रॉयिंग हॉल के सोफे पे बैठी उस भले चेहरे वाली बहुत मोटी औरत ने अपने बगल के सोफे की ओर इशारा किया,"माफ़ करना मैने तुम्हे पहचाना नही.वैसे भी इस लड़की की इतनी सहेलिया हैं,मैं बूढ़ी कहा तक सबको याद रखू!" "नमस्ते आंटी,मेरा नाम रीमा है.बहुत दीनो बाद यहा आई हू.मीना बाहर गयी है क्या?" "हां,बेटा देखो ना आज घर मे किटी पार्टी है,इतने सारे काम पड़े हैं & ये लड़की ऑफीस देखने चली गयी है." "अंकल के ऑफीस?" "अरे नही.काश ऐसा होता तो तुम्हारे अंकल तो खुशी से पागल हो जाते.इस लड़की को इंटीरियर डेकरेटर बनने का भूत सवार हुआ है तो सूरी साहब के लड़के के साथ उसका बिज़्नेस शुरू कर रही है." "ये तो बहुत अच्छी खबर आपने सुनाई आंटी.तो कहा खोल रही है ऑफीस?",ये बतुनी औरत तो खुद ही रीमा का काम आसान कर रही थी. "वो अंगद टॉवेर है ना,वो हमारी ही बिल्डिंग है,उसके 4थ फ्लोर पे थोड़ी जगह खाली थी,वही तुम्हारे अंकल ने उसे दे दी है.वही गयी है,अभी ऑफीस मे काम चल रहा है ना,अगले हफ्ते ही इनएग्रेशन है." "तो मैं वही जाके उस से मिल लेती हू,आंटी?,रीमा खड़ी हो गयी. "अरे नही बेटा,तुम बैठो ना.मीना भी थोड़ी देर मे आ जाएगी फिर हमारी पार्टी के बाद जाना." "थॅंक्स,आंटी पर बहुत देर हो जाएगी...और ऑफीस जाऊंगी तो मीना भी चौंक उठेगी.अच्छा आंटी,नमस्ते." ------------------------------------------------------------------------------- थोड़ी देर बाद रीमा की टॅक्सी अंगद टॉवेर की पार्किंग मे खड़ी थी & वो लिफ्ट की ओर जा रही थी.वो तो अच्छा हुआ की आज वीरेंद्र जी लंच करने घर नही आ रहे थे & उसके पास पूरा वक़्त था.घर से निकलते वक़्त शेखर की कार पे नज़र पड़ी तो 1 ख़याल आया की उसे ही लेकर निकले पर फिर लगा की टॅक्सी ही बेहतर होगी.रीमा ने बॅंगलुर मे ही ड्राइविंग सीखी थी,रवि ने कहा था कि कुच्छ ही दीनो बाद वो कार खरीदेगा तो उसे भी वो चलाना आना चाहिए. तभी लिफ्ट का दरवाज़ा खुला तो वो ख़यालो से बाहर आई.चौथा माला खाली पड़ा हुआ था,कुच्छ दुकानो के शटर गिरे हुए थे बस लिफ्ट के बाई ओर 1 ऑफीस खुला था.उसने दोनो तरफ झाँका तो पाया की उसके दाएँ हाथ की तरफ गलियारे के अंत मे रोशनी जल रही है.वो उधर जाने लगी. यही था मीना का ऑफीस पर यहा तो कोई नही था.वो अंदर गयी तो देखा की ऑफीस तो लगभग तय्यार था बस सफाई का काम बाकी था.1 बड़े से हॉल मे कुच्छ वर्कस्टॅशन्स बने थे & दाई तरफ 2 कॅबिन्स थे,उसने दोनो को देखा तो पाया कि दोनो बंद थे.तभी उसके कानो मे किसी के हँसने की आवाज़ आई.आवाज़ ऑफीस के दूसरे कोने से आई थी,वो उस दिशा मे चली गयी. ऑफीस की बाई दीवार की पूरी लंबाई मे 1 हॉल बना था,उस हॉल मे घुसने का दरवाज़ा ऑफीस के मेन दरवाज़े के बाई ओर थोड़ी दूरी पे था.रीमा उसपे खटखटाने ही जा रही थी कि तभी अंदर से हँसने की आवाज़ आई पर ये पहले वाली आवाज़ से अलग थी,वो समझ गयी कि अंदर 2 लोग हैं-1 मर्द & 1 औरत-उनकी आवाज़ो से उसे ये अनदज़ा हो गया था की अंदर दोनो वही खेल खेल रहे हैं जिसकी वो खुद बहुत बड़ी दीवानी थी. कही मीना तो अंदर किसी के साथ नही है?रीमा ने सोचा की क्यू ना छुप के दोनो को देखा जाए,मगर कैसे?दरवाज़ा तो बंद था.उसने देखा की हॉल की बाहरी दीवार के दूसरी छ्होर पे भी 1 दरवाज़ा है.उस तक जा उसे खोला तो वो खुल गया.रीमा अंदर दाखिल हुई तो देखा कि वो कोई स्टोर रूम है पर उसमे 1 दरवाज़ा और है जिसमे आइ लेवेल पे 4इन्चX4इंच का छेद कटा है,शायद उसमे शीशा लगाना बाकी था. रीमा ने दबे पाँव जाकर उस छेद से झाँका.अंदर 1 डेस्क पे 1 खूबसूरत लड़की बैठी थी,उसने 1 टॉप पहन रखा था & 1 शायद घुटनो तक की स्कर्ट.स्कर्ट की लंबाई उसे इसलिए नही पता चल पाई क्यूकी उस लड़की की जाँघो के बीच 1 लंबा चौड़ा जवान मर्द उस से इस कदर चिपका खड़ा था कि स्कर्ट लड़की की कमर तक आ गयी थी & बस दोनो के जिस्मो के बीच फँस के रह गयी थी. दोनो 1 दूसरे को बाहों मे भरे बड़ी गर्मजोशी से 1 दूसरे को चूम रहे थे.रीमा ने गौर से देखा तो पाया कि वो लड़की और कोई नही मीना थी.मीना बहुत गरम हो चुकी थी,उसने उस लड़के की शर्ट को पॅंट से निकाला & हाथ अंदर घुसा उसकी पीठ सहलाने लगी.अपनी टाँगो को उसके गिर्द लपेट जैसे वो उस से ऐसे लिपटी थी जैसे की अलग होने से उसकी जान चली जाएगी. उस लड़के ने चूमते हुए उसका टॉप उठा दिया & उसकी ब्रा मे क़ैद चूचिया मसल्ने लगा,फिर उसके ब्रा के कप्स उपर कर उनको आज़ाद कर दिया.


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बड़ी मस्त चूचिया थी मीना कि!रीमा भी मन ही मन उनक तारीफ किए बिना नही रह सकी,वो उसके जितनी बड़ी नही थी पर इतनी छ्होटी भी नही थी,चूचियो के सिरे पे 2 भूरे रंग के कड़े निपल्स चमक रहे थे.वो लड़का मीना को चूमते हुए उसके उभारो को अपने हाथो मे भर दबा रहा था. मीना ने अपने हाथ उसकी पीठ से हटा दिए & उन्हे अपने जिस्मो के बीच ला लड़के के पेट पे ले गयी.रीमा समझ गयी की अब वो उसकी पॅंट खोलेगी & ऐसा ही हुआ.पॅंट लड़के के टख़नो के गिर्द पड़ी थी.मीना किस तोड़ डेस्क से उतरी & ज़मीन पे अपने घुटनो पे बैठ उसके लंड को थाम लिया.दोनो ऐसे खड़े थे कि रीमा उन्हे साइड से देख रही थी.लड़के का लंड 6 इंच का तो होगा ही..उसने अंदाज़ा लगा..पर कितना मोटा था!उफ़फ्फ़!..और उसके आस-पास 1 भी बॉल नही था,रीमा ने बिना झांट का लंड पहली बार देखा था. अब तो रीमा की चूत भी गीली होने लगी थी.रीमा ने अपनी जीन्स के बटन को ढीला किया & अपना हाथ अंदर अपनी पॅंटी मे घुसा अपनी चूत को समझाने की कोशिश करने लगी.मीना तो लंड पे किसी भूखे की तरह टूट पड़ी थी.पहले उसने लंड के आस-पास की चिकनी जगह को चूमा & फिर उसके लुन्द को मुँह मे भर अपनी जीभ उस पे चलाने लगी.वो लड़का उसके सर को था,उसका नाम लेते हुए आहें भरने लगा. मीना काफ़ी देर तक उसके लंड & आंडो को चूमती,चुस्ती & चाटती रही.रीमा ने अपनी चूत मे उंगली करते हुए लड़के के चेहरे को देखा,साफ ज़ाहिर था कि लड़का अब झाड़ जाएगा.उसने 1 झटके मे मीना को पकड़ कर उठाया & फिर से डेस्क पे बैठा दिया.1 पल को दोनो बस 1 दूसरे की आँखो मे झाँकते रहे,फिर लड़के ने उसकी स्कर्ट को कमर तक उठाया & खींच कर उसकी पॅंटी निकाल दी.रीमा ने देखा कि मीना की चूत भी उसकी तरह गुलाबी & बिना बालो के थी.लड़के ने 2 उंगलिया उसमे डाल के थोड़ी देर रगडी तो मीना आहें भरने लगी,चूत पूरी तरह से गीली थी.लड़के ने उंगलिया बाहर निकाली & मीना को देखते हुए मुस्कुरा के चाट ली.रीमा भी मुस्कुराइ & उसे अपनी ओर खींचा. लड़के उसकी टाँगो के बीच आया & उसकी जाँघो को उठा के अपनी बाहों मे फँसा लिया. "आऐईयईए....!",मीना चीखी क्यूकी लड़के ने 1 ही झटके मे उसकी चूत मे अपना पूरा लंड घुसा दिया था.दोनो 1 बार फिर 1 दूसरे से लिपट गये & चूमते हुए 1 दूसरे को चुदाई करने लगे.लड़का पूरा लंड बाहर निकलता & फिर पूरा का पूरा मीना की नाज़ुक चूत मे पेल देता.मीना तो बस उस से चिपकी उसे चूमती हुई धक्को का मज़ा ले रही थी. थोड़ी देर बाद लड़के ने रफ़्तार बढ़ा दी & मीना भी अपनी कमर कुच्छ ज़्यादा ही हिलाने लगी,रीमा समझ गयी कि अब दोनो झड़ने वाले हैं तो उसने अभी अपनी उंगली की रफ़्तार तेज़ कर दी.दोनो चिपते हुए थे & लड़का पागलो की तरह धक्के मार रहा था कि तभी मीना का बदन जैसे ऐंठने लगा.उसने लड़के होंठ छ्चोड़ दिए & उसकी गर्दन मे मुँह च्छूपा सुबकने लगी,लड़का भी अचानक जैसे झटके खाने लगा & उसका नाम लेता हुए उसकी चूत मे झड़ने लगा.ठीक उसी वक़्त रीमा की उंगकी ने भी 1 आख़िरी बार उसके दाने को रगड़ & वो भी उन दोनो के साथ झाड़ गयी. रीमा ने अपनी जीन्स के बटन को वापस बंद किया & उस वक़्त उसके दिमाग़ मे बस 1 ही बात घूम रही थी कि अगर भगवान भी कहे कि मीना लेज़्बीयन है तो विश्वास नही करेगी.अभी जिस ग्रंजोशी & शिद्दत से उसने उसे उस लड़के के लंड के साथ खेलते & उस से चुद्ते देखा था-वो किसी ऐसी लड़की के बस की बात नही थी जो लड़को का नापसंद करती हो.उसने दोनो को संभालने का कुच्छ वक़्त दिया फिर स्टोर रूम से निकल वापस ऑफीस के मैं दरवाज़े पे आ गयी & वाहा नॉक कर थोडा ज़ोर से बोली,"कोई है?" थोड़ी देर बाद हॉल का दरवाज़ा खुला & वो लड़का बाहर निकला,"यस?" "हाई!मेरा नाम रीमा है & मैं मीना जी से मिलने आई हू." तभी हॉल के दरवाज़े से निकल उस लड़के के पीछे से मीना आ गयी. "हाई..तुम रीमा हो..रवि की-.." "हां,मैं वही हू." वो आगे आई & रीमा के दोनो हाथ पकड़ लिए,"आइ'एम सॉरी अबौट रवि...तुम यहा कैसे आ गयी...आओ बैठो ना?",हाथ पकड़ उसे 1 वर्कस्टेशन की कुर्सी खींच कर उसे बिठाया,जिसपे अभी तक पॅकिंग्स हीट लगी थी. "ओह्ह,मैने तुम दोनो का इंट्रोडक्षन नही कराया..ये करण सूरी हैं मेरे बिज़्नेस पार्ट्नर & ये रीमा है..रवि की वाइफ..",उसने रीमा की ओर देखा,"करण मेरे बारे मे सब जानता है,रीमा." "आप दोनो बाते कीजिए,मैं ज़रा कुच्छ काम देख कर आता हू.और हां अभी नीचे से कॉफी भी भिजवा रहा हू",कारण वहा से निकल गया.


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खिलोना पार्ट--15


"हां,अब बोलो.तुम पंचमहल कब आई?..& कब तक हो यहा? "कुच्छ ही दिन हुए हैं यहा आए हुए.मा जी को देखने आई थी.अब देखिए कितने दीनो तक यहा हू.",रीमा ने 1 गहरी साँस भरी,"रवि हमेशा आपकी बातें किया करता था,पिच्छले 1 साल मे कभी मौका ही नही लगा आपसे मिलने का & यहा आई तो आपके & शेखर भाय्या के बारे मे पता चला...पर 1 बार आपसे मिलने को खुद को रोक नही पाई." "कोई बात नही!वैसे भी तुमसे मुझे क्या शिकायत हो सकती है",उसने रीमा का हाथ पकड़ लिया,"..बल्कि अच्छा किया जो आ गयी,मैं भी तुम्हे देखना चाहती थी..रवि ने तुम्हारी तस्वीर दिखाई थी..तुम तो उस से कही ज़्यादा सुंदर हो." "क्या आप भी1",रीमा ने शर्मा के आँखे नीची कर ली,"मैं यहा आने से पहले आपके घर गयी थी,वाहा आंटी-आपकी मा ने यहा का पता दिया.मैने उनसे कहा कि मैं आपकी सहेली हू क्यूकी मुझे पता नही था कि मेरी असलियत जानने पे उन्हे अच्छा लगेगा या नही." "कोई बात नही,रीमा",मीना हँसी,1 लड़का 2 कप कॉफी रख गया था,उसने 1 रीमा को दिया & दूसरे से खुद 1 घूँट भरा,"देखो,हमे अगर किसी से कोई शिकायत है तो शेखर से,और किसी से नही.मेरा भी दिल करता है कि कभी घर आके आंटी को देखु,अंकल से मिलू..मैं बचपन से उस परिवार को जानती हू,रीमा.तुमने आंटी को बस बिस्तर पे पड़े देखा है,मैने उनका वो ख़ुशदील,हँसमुख चेहरा देखा है." "शेखर से शादी के बाद मैने खुद को दुनिया की सबसे किस्मतवाली लड़की समझा था पर उसने मेरा ये गुमान बस 1 महीने मे तोड़ दिया..बहुत ही घटिया & मतलबी इंसान है वो..कहते हैं ना 1 मछ्लि सारे तालाब को गंदा करती है-तो समझ लो शेखर वो मछ्लि है." अपने दिल की भादस निकाल मीना शांत हो गयी. "ये कारण.." "तुम ठीक समझ रही हो.बस दुआ करो कि इस बार मैं ग़लत नही हू." "कैसी बात करती हैं!अब सब कुच्छ ठीक रहेगा.",उसने अपनी घड़ी पे 1 नज़र डाली,"अब मैं चलती हू,बहुत देर हो गयी है.",कॉफी का कप रख वो खड़ी हो गयी. "अरे,मेरे साथ घर चलो ना,वाहा पार्टी है,बड़ा मज़ा आएगा!" "थॅंक्स,पर फिर कभी आऊँगी.आज सच मे देर हो गयी है." "ओके.",मीना खड़ी हुई & रीमा को गले लगा लिया,"पर आना ज़रूर.खूब बातें करेंगे." "ओके,बाइ!" "बाइ!" ------------------------------------------------------------------------------- वापस आ रीमा ड्रॉयिंग रूम के सोफे पे बैठ गयी,वो थोडा तक गयी थी.आज दिन भर की बातें उसके दिमाग़ मे घूम रही थी..शेखर तो पक्का झूठा था!उसेन मीना के बारे मे झूठ बोला था..वो तो 1 आम लड़की थी जिसे मर्द & मर्द के साथ चुदाई पसंद थी...& शंतु..अरे उसका नंबर निकाला था शेखर के मोबाइल से.ख़याल आते ही उसने फोन के पास रखे पॅड को उठाया. ये उस इंसान का नंबर था जिसने रवि से मौत के पहले आख़िरी बार बात की थी.आज वक़्त आ गया था कि वो इस इंसान से सवाल कर पुच्छे कि आख़िर वो उसके पति के बारे मे क्या जानता था.अपना मोबाइल उठा उसने वो नंबर डाइयल किया,घंटी काफ़ी देर तक बजती रही पर फिर किसी ने फोन उठाया. "हेलो." "हेलो,मिस्टर.प्रशांत चौधरी?" "यस,स्पीकिंग." "हेलो,शंतु जी कैसे हैं आप?" "कौन बोल रहा है?",आवाज़ चौकन्नि हो गयी थी. "शंतु जी,आज आप सवाल नही करेंगे सिर्फ़ जवाब देंगे.आख़िर ऐसी क्या बात थी की अपने सबसे जिगरी दोस्त कि मौत पे आप 1 बार भी अफ़सोस जताने नही आए जबकि मौत के दिन आप ही वो शख्स थे जिसने उस से आख़िरी बार बात की थी?" शंतु खामोश था,पर लग रहा था कि वो किसी भीड़ भरे इलाक़े मे है & रीमा के कानो मे वाहा का शोर सुनाई दे रहा था. "क्या हुआ?चुप क्यू हो गये?जवाब दीजिए." "आप रीमा बोल रही हैं ना?" "तो आप मुझे पहचान गये?" "जी.और आपके सभी सवालो का जवाब भी देने को तैय्यार हू.कल 11 बजे दिन मे मेरे घर आ जाइए." "कल क्यू?आज क्यू नही?" "क्यूकी आज मैं दिल्ली मे हू.मेरा यकीन कीजिए,कल मेरे घर..मेरा पता लिखिए..212,पांचल अपार्टमेंट्स,एम.जी.रोड..यहा पे 11 बजे आइए,मैं जो जानता हू आपको बताऊँगा." "ठीक है.",& फोन कट गया.कही शंतु कोई चाल तो नही चल रहा था?कही इसमे रीमा को कोई ख़तरा तो नही था?जो भी हो अब कल वो इस पते ज़रूर जाएगी.रीमा ने पॅड से वो काग़ज़ फाड़ कर अपने हॅंडबॅग मे डाला & अपने कमरे मे चली गयी. -------------------------------------------------------------------------------


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उस शाम वीरेंद्र जी आठ बजे तक घर आ गये & उसके बाद उन्होने सुबह 7 बजे तक उसे कपड़े नही पहनने दिए.पूरे वक़्त वो उनकी बाहो मे क़ैद या तो उनसे चुद्ति रही या उनकी गरम हर्कतो का लुत्फ़ उठाती रही.विरेन्द्र जी ने उसकी चूत मे 3 बार अपना विर्य गिराया & वो तो ना जाने कितनी बार झड़ी-3 के बाद उसने गिनना छ्चोड़ दिया था.कल रात उसने भी पहले से कही ज़्यादा जोश के साथ अपने ससुर का चुदाई मे साथ दिया था.इसकी वजह थी कि कल उसे ये यकीन हो गया थी कि जहा उसका जेठ 1 झूठा इंसान है वही उसके ससुर 1 भरोसेमंद,नेक्दिल शख्स हैं. उनके दफ़्तर जाने के बाद नहा कर रीमा तैय्यार हो घर से निकली.1 बार फिर शेखर की कार निकालने का ख़याल उसे आया पर फिर उसने टॅक्सी करना ही बेहतर समझा.आज उसने हल्के नीले रंग की टाइट जींस & उसके उपर पूरे बाज़ुओं वाली काले रंग की शॉर्ट कुरती पहनी थी & आँखो पे काला चश्मा भी था.कोई 10:45 पे वो पांचाल अपार्टमेंट के गेट पे टॅक्सी से उतर रही थी. चश्मे को अपनी आँखो से उपर अपने सर पे अटका कर उसने गेट पे खड़े गार्ड से कहा,"212 नंबर फ्लॅट की-.." "सीधे जाके दाहिने मूड जाइएएगा & लिफ्ट से दूसरा मंज़िल पे चले जाइए,ओही पे है..आपके बाकी सन्गि-साथी भी वही आपको मिल जावेंगे..",गार्ड ने उसके सवाल को बीच मे ही काटते हुए,खैनि मसल्ते हुए जवाब दिया. रीमा थोड़ा हैरान हो उसके बताए रास्ते पे चल पड़ी,दाए मुड़ते ही उसने देखा कि पोलीस की 2 क़ार्स & टीवी चॅनेल्स की 3-4 अब वॅन्स खड़ी हैं.अपार्टमेंट के कुच्छ लोग भी नीचे खड़े उपर बिल्डिंग की तरफ देखते हुए बाते कर रहे थे. रीमा ने लिफ्ट ली,उसके साथ कुच्छ टीवी कॅमरमेन & उनके साथी भी लिफ्ट मे थे.सारे लोग दूसरी मंज़िल पे उतर गये.रीमा उनके पीछे चल रही थी.इस फ्लोर पे तो बस पोलीस वाले & चॅनेल्स वाले घूम रहे थे & सभी जिस फ्लॅट मे जा रहे थे उसका नंबर था 212. रीमा ने देखा की वाहा 2-3 लड़किया उसी के जैसे कपड़ो मे टीवी न्यूज़ के लिए बाइट रेकॉर्ड करने की तैय्यरी मे थी..तो गार्ड ने उसे रिपोर्टर समझा था.किसी चॅनेल का रिपोर्टर & कॅमरमन 212 नंबर मे घुस रहे थे,रीमा भी धड़कते दिल से उनके पीछे हो ली. अंदर घुसते ही रीमा के मुँह से चीख निकलते-2 रह गयी,उसने बड़ी मुश्किल से अपनी घबराहट पे काबू किया,सामने का नज़ारा था ही ऐसा-पंखे से 1 जवान लड़के की लाश झूल रही थी.कमरे मे चारो तरफ पोलीस वाले फैले हुए थे,"बाहर चलो भाई..आप लोग यहा नही आओ..हमे काम करने दो.",1 हवलदार उनकी तरफ आ रहा था. रीमा बाहर निकल आई,उसकी कुच्छ समझ मे नही आ रहा था क्या यही शंतु था?अगर हा तो उसके साथ ये कैसे हो गया? "सर,प्लीज़.पहले हमे बाइट दीजिए.",शायद इनस्पेक्टर आ गया था. "ओके.आप लोग सब 1 लाइन से खड़े हो जाओ..चलो..हां..अब साहब से पुछो.",उस हवलदार ने सारे रिपोर्टर्स से कहा.रीमा कुच्छ दूर पे खड़ी सब देख रही थी. "सर,हादसे के बारे मे कैसे पता चला & ये आदमी कौन है?",सवालो का सिलसिला शुरू हो गया. "इसका नाम प्रशांत चौधरी है,ये अभी कुच्छ दीनो पहले दुबई से यहा आया था,वाहा ये 1 प्राइवेट कंपनी मे काम करता था & उसी कंपनी ने इसे यहा भेजा था.आज सुबह इसने ना नौकरानी के लिए दरवाज़ा खोला, ना ही दूधवाले से दूध लिया तो उन दोनो ने पड़ोसियो को कहा.फिर हमे खबर दी गयी.हमने ताला तोड़ा तो अंदर इस आदमी की लाश पंखे से लटक रही थी." "सर,आपको क्या लगता है,मौत कैसे हुई है?" "देखो,प्रीमा फेसी तो स्यूयिसाइड का केस लगता है,लाश के पास टेबल पे 1 स्यूयिसाइड नोट भी पड़ा था जिसे पढ़ के हमे लगता है ये डिप्रेशन का मरीज़ था.आगे तो हम पोस्ट मॉर्टेम के बाद ही कुच्छ कह सकते हैं." "सर,मरनेवाला कैसा शख्स था?उसके परिवार को खबर हो गयी है?" "सर..सर,वो यहा अकेला रहता था क्या?" "हां,वो यहा अकेला रहता था,किसी से ज़्यादा बात भी नही करता था,उस से मिलने भी बहुत कम लोग आते थे.उसकी फॅमिली के बारे मे हम पता लगा रहे हैं ,एप्र इसके माता-पिता तो काफ़ी पहले मर चुके हैं,हम इसके किसी और रिश्तेदार का पता ढूंड रहे हैं." रीमा से अब वाहा खड़ा होना मुश्किल था,वो किसी तरह नीचे आई & टॅक्सी मे बैठ घर चली गयी.घर मे घुसते ही उसने फ्रिड्ज खोला & पानी की बॉटल निकल उसे मुँह से लगा लिया & 1 ही साँस मे उसे खाली कर दिया.बाथरूम मे जा उसने अपने मुँह पे पानी के छ्चीनटे मारे-अब भी उसकी आँखो के सामने शंतु की लटकती लाश घूम रही थी & साथ ही ये ख़याल की कही इसके पीछे उसके जेठ का हाथ तो नही.उसने तय कर लिया कि आज वो अपने ससुर को सब बताएगी सिवाय इसके की अपने जेठ से उसके दिल के राज़ जानने के लिए वो उसके साथ भी चुदाई करती रही है. जब वो थोडा शांत हुई तो उसे अपनी सास का ख़याल आया.कमरे मे गयी तो वो सोई हुई थी,उसने उन्हे जगाने की कोशिश की-उनके खाने का वक़्त हो गया था,पर वो नही उठी. "मा जी..मा जी!",रीमा उन्हे हिलाने लगी पर वो वैसे ही पड़ी रही.रीमा ने उनकी साँस,धड़कन & नब्ज़ चेक की-सब चल रहे थे.उसने उन्हे झकझोर दिया पर सुमित्रा जी ने आँखे नही खोली.उसे डॉक्टर साहब की कही बात याद आ गयी-कही सुमित्रा जी कोमा मे तो नही चली गयी.चिंतित हो उसने अपने ससुर को फोन करने की सोची पर तभी उसे बाहर उनकी कार के रुकने की आवाज़ आई. वो भागती हुई बाहर पहुँची & दरवाज़ा खोला,उसके ससुर उसे देख मुस्कुराए पर उसके चेहरे की उड़ी रंगत देख उनके माथे पे शिकन पड़ गयी,"क्या हुआ रीमा?" "मा जी.." -------------------------------------------------------------------------------


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

सुमित्रा जी कोमा मे चली गयी थी & डॉक्टर साहब के कहने पे उन्हे हॉस्पिटल मे भरती करना पड़ा.शाम के 8 बजे थे जब विरेन्द्र जी ने डॉक्टर साहब से रात मे हॉस्पिटल मे रुकने के बारे मे पुचछा. "कोई फयडा नही है,विरेन्द्र जी.देखिए,कोमा से पेशेंट अभी भी निकल सकता है या फिर कुच्छ साल बाद.आप देख ही रहे हैं उन्हे कुच्छ होश भी नही है.उनकी देखभाल के लिए हम यहा हैं,आप जब मर्ज़ी हो यहा आएँ & जितनी देर दिल करे उनके पास बैठें,मैं आपको मना नही करूँगा पर आज मुझे लगता है कि आपको घर जाके आराम करना चाहिए,दोपहर से आप यहा खड़े हैं.ओके." "ओके.डॉक्टर." ------------------------------------------------------------------------------- विरेन्द्र जी &रीमा कोई 1 घंटे बाद घर पहुँचे. "मुझे आपसे कुच्छ कहना है.",रीमा ने उन्हे पानी का ग्लास थमाया. "हां,कहो." "वो शंतु है ना." "हां?" "वो मर गया." "क्या?!" और रीमा ने उन्हे शंतु के बारे मे सब बता दिया,बस ये बातें च्छूपा गयी कि जब शेखर ने उस से शंतु के बारे मे जब झूठ बोला था & जब उसने उसके मोबाइल से उसका नंबर निकाला था तो या तो उसका लंड उसकी चूत मे था,या फिर उसके हाथो मे या फिर उसके मुँह मे. विरेन्द्र जी के चेहरे पे कोई भाव नही था,मानो वो पत्थर के हो गये थे. "आप चुप क्यू हैं?कुच्छ बोलिए ना!आपको नही लगता कि शंतु की मौत के पीछे शेखर भाय्या का हाथ है & हमे पोलीस को खबर करना चाहिए." "अभी नही." "मगर क्यू?माना वो आपका बेटा है पर उसने शायद आपके 1 और बेटे को भी मौत के मुँह पहुँचाया है.हम यहा बाते कर रहहैं & वो ना जाने कहा निकल जाए?",रीमा गुस्से & डर से लगभग चीखती हुई बोली. "मैं तुम्हारी बात समझ रहा हू & यकीन करो,अगर शेखर मुजरिम है तो सबसे पहले मैं उसे क़ानून के हवाले करूँगा.",उन्होने उसकी बाँह थाम प्यार से उसके सर पे हाथ फेरा,"तुम बहुत थक गयी हो.जाओ जाके नहा लो,फिर खाना खाते हैं.मुझे तुम्हे कुच्छ बहुत ज़रूरी बात बतानी है.


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

खिलोना पार्ट--16


रीमा नहा कर केवल 1 टवल मे बातरूम से बाहर निकली तो देखा कि वीरेंद्र जी भी केवल 1 टवल कमर पे लपेटे उसके पलंग पे बैठे हैं,ज़ाहिर था कि वो भी बस थोड़ी अर पहले नहाए थे.उन्होने सर से पावं तक अपनी बहू के हुस्न को निहारा & फिर उठ कर उसके पास आ गये.उन्होने उसे अपनी बाहों मे लिए तो रीमा ने अपने होंठ उनके होटो से सटा दिए.थोड़ी ही देर मे दोनो 1 दूसरे को बाहों मे कसे पूरे जोश मे किस्सिंग कर रहे थे.बदनो की रगड़ाहट से दोनो के तौलिए ढीले हो गये & जब साँस लेने को दोनो ने किस तोड़ी तो वो ज़मीन पे गिर गये.अब दोनो नंगे थे,रीमा को लगा कि अब उसके ससुर उसे उसके ही बिस्तर पे चोदेन्गे पर उन्होने ऐसा नही किया. "चलो,पहले खाना खाते हैं.",उसका हाथ थाम वो उसे डाइनिंग टेबल पे ले गये जहा उन्होने पहले ही खाना लगा के रखा था.कुर्सी पे बैठ उन्होने रीमा को अपनी गोद मे बिठा लिया & दोनो 1 दूसरे के हाथो से खाना खाने लगे. "आप जाकर लेटो मैं ये सब सॉफ कर के आती हू.",खाना ख़त्म होते ही रीमा उनकी गोद से उतर गयी. "ठीक है.",विरेन्द्र जी रीमा के कमरे मे चले गये. थोड़ी देर बाद रीमा अपने कमरे मे आई तो लॅंप की बहुत मद्धम रोशनी मे उसने देखा की उसके ससुर बिस्तर पे लेटे गहरी सोच मे डूबे हैं.रीमा उनकी बाई बाँह पे सर रख करवट ले उनसे सॅट कर लेट गयी.काफ़ी देर से बिना कपड़ो के रहने की वजह से उसे थोड़ी ठंड महसूस हुई तो उसने चादर उठा कर दोनो के बदन पे डाल दी & उनके सीने के बालो से खेलने लगी,"अब बताइए क्या बताने वाले थे?" "रीमा,आज मैं तुम्हे मेरी ज़िंदगी का वो राज़ बताउन्गा जो मुझे मिलकर केवल 4 लोगो को पता था & उसमे से 2 अब दुनिया मे नही हैं.ये वो राज़ है जो बाद मे शेखर को भी पता चल गया & शायद उसी वजह से मेरी & मेरे परिवार की पूरी ज़िंदगी बदल गयी.",उनका 1 हाथ अपनी बहू के बालो मे था & दूसरा उसकी गोरी बाँह पे. "कॉलेज पास करते ही मुझे ये सरकारी नौकरी मिल गयी & मेरे माता-पिता मेरी शादी के लिए परेशान हो उठे.कोई 6 महीने बाद सुमित्रा के पिता,जोकि खुद 1 ऊँचे सरकारी ओहदे पे थे,हमारे घर रिश्ता लेके आए.फिर क्या था!बस कुच्छ ही दीनो मे हुमारी शादी हो गयी.",रीमा ने अपनी बाई जाँघ अपने ससुर के उपर चढ़ा दी & दाई कोहनी पे उचक उनकी दास्तान सुनने लगी. "तुमने सुमित्रा को बस 1 बीमार & लचर के रूप मे देखा है,रीमा पर तुम उस वक़्त उसे देखती!कितनी खूबसूरत थी वो..गोरी-चित्ति,भरे बदन की मालकिन..मैं तो उसके रूप का दीवाना हो गया था & वो भिमुझे बहुत प्यार करती थी.शादी के बाद जब भी मौका मिलता हम दोनो बस 1 दूसरे मे खो जाते.शायद ही कोई ऐसी रात हो जब हमने चुदाई ना की हो.",रीमा का हाथ ससुर के सीने से सरक अब पेट पे आ गया था & विरेन्द्र जी भी उसकी अपने उपर रखी मखमली जाँघ सहला रहे थे. "..ऐसे ही 2 बरस बीते गये.हम बहुत खुश थे पर 1 मसला था जो हम दोनो के माता-पिता को परेशान कर रहा था & जिसके बारे मे नाते-रिश्तेदार भी दबी ज़बान मे बात करने लगे थे.सुमित्रा अभी तक मा नही बनी थी.जब उसकी मा ने इस बारे मे उस से पुचछा तो हम दोनो को भी ख़याल आया कि हम कोई सावधानी तो बरत नही रहे थे फिर तो सुमित्रा को इन 2 सालो मे कम से कम 1 बच्चे की मा तो बन ही जाना चाहिए था." "हम दोनो ने अपनी डॉक्टोरी जाँच कराई तो पता चला कि मैं तो ठीक था पर सुमित्रा मे कुच्छ कमी थी & उसके मा बनने के चान्सस किसी भी सूरत मे बस 5% थे.उसके लिए ये बहुत दुख की बात थी,मैने उसे बहुत समझाया कि हम कोशिश करते रहे तो वो प्रेग्नेंट हो जाएगी पर वो मायूस हो गयी थी.फिर मैने उसे कहा कि हम बच्चा गोद ले लेंगे पर वो इसके लिए भी नही मानी." "..माहौल बदलने के लिए मैने अपना तबादला अंबाला करवा लिया.ये जगह नयी थी & पंचमहल से दूर.वाहा जाके सुमित्रा लगभग पहले जैसे ही हो गयी पर मैं जानता था कि बच्चे की चाह उसके अंदर बढ़ती ही जा रही है.",विरेन्द्र जी ने रीमा को पकड़ उसे थोडा अपने उपर कर लिया,अब वो कभी उसकी जाँघ सहलाते तो कभी चूचिया. ".


RE: Mastram Kahani खिलोना - - 11-12-2018

फिर 1 दिन उसने 1 नयी नौकरानी रख ली-कजरी.कजरी 1 अच्छे मगर ग़रीब परिवार की थी.बाप था नही & मा ने किसी तरह उसकी शादी करा दी,कुच्छ दिन तो सब ठीक चला,उसका पति 1 अच्छा इंसान था & मा-बेटी दोनो की ज़िम्मेदारी उसने उठा ली थी.पर 1 दिन उसे विदेश मे नौकरी का मौका मिला तो वो बाहर चला गया.6 महीने तक वो कजरी को नियम से पैसे भेजता रहा पर फिर उसके बाद उसके पैसे आने बंद हो गये & उसके खत भी." "..मा-बेटी ने उसका पता लगाने की बहुत कोशिश की पर यहा बैठे-2 कोई क्या कर सकता था!धीरे-2 करके उनके पैसे भी खर्च हो गये.इन्ही मुसीबत के दीनो मे पता नही कैसे सुमित्रा उसकी मा से मिली & कजरी को वो हमारे यहा ले आई.पर उनकी मदद करना सुमित्रा का मक़सद नही था.उसके असली मक़सद का पता मुझे तब चला जब मैने छुट्टियो मे छैल जाने का प्रोग्राम बनाया & सुमित्रा ने कहा कि कजरी भी हमारे साथ जाएगी.",रीमा गौर से उनके निपल्स को अपने नखुनो से खरोंछती हुई उनकी कहानी सुन रही थी,अपनी जाँघ के नीचे उनके लंड को तड़फ़दता वो सॉफ महसूस कर रही थी. "..तब सुमित्रा ने मुझे बाते की उसने कजरी की मा के साथ क्या सौदा किया था.उसने पैसो के बदले मे कजरी को मेरे बच्चे की मा बनने के लिए तैय्यार कर लिया था & वो चाहती थी छैल मे मैं उसे जम के चोदु & अपना बीज उसकी कोख मे डाल दू." "..शायद हमारी शादीशुदा ज़िंदगी मे पहली बार हमारा ज़ोरदार झगड़ा हुआ,मैं सुमित्रा के अलावा किसी और के साथ सोने की बात सोच भी नही सकता था.पर सुमित्रा अपनी ज़िद पे आडी रही & आख़िर मुझे ही झुकना पड़ा.मैं कजरी को हम दोनो के साथ छैल ले जाने को तैइय्यार हो गया.मैने सोचा था कि वाहा जाके मैं किसी तरह सुमित्रा को मना लूँगा & उसके दिमाग़ से ये वाहियात ख़याल भी निकाल दूँगा.",विरेन्द्र जी का हाथ रीमा की पीठ से होता हुआ अब उसकी गंद तक पहुँच गया था & जब भी वो उसकी फांको को दबाते तो जवाब मे रीमा अपनी जाँघ से उनके लंड को दबा देती. "छैल मे हम 1 कॉटेज मे रुके थे,पहले दिन घूमे-फिरने के बाद रात को जब मैं कमरे मे सोने गया तो सुमित्रा ने कजरी को कमरे मे धकेल दिया & बाहर से कुण्डी लगा दी.कजरी सहमी सी बिस्तर पे बैठी थी.मैने उसे बिस्तर पे सोने को कहा & खुद कमरे मे पड़े कार्पेट पे रज़ाई डाल कर सो गया.सुबह उठने पे मुझे लगा कि सुमित्रा आज फिर मुझ से झगदेगी.रात की खबर उसने कजरी से ले ली थी पर उसने मुझ से ज़रा भी नाराज़गी नही जताई.मैने सोचा कि अब उसके दिमाग़ से ये बेवकुफ़ाना ख़याल निकल चुका है.वो पूरा दिन हमने कुद्रत की खूबसूरती का लुत्फ़ उठाने मे बिताया." "उस रात सुमित्रा ने कजरी को मेरे पास नही भेजा बल्कि खुद कमरे मे आई.दरवाज़ा लगा मुस्कुराते हुए वो बिस्तर पे मेरे करीब आई तो मैने उसे अपने आगोश मे खींच लिया.वो भी मुझसे लिपट मुझे चूमने लगी.मेरे हाथ उसकी नाइटी मे घुसने लगे तो वो छितक कर मूह से दूर हो गयी & शरारत से मुस्कुराइ,'आज तुम पहले अपने कपड़े उतारो.'..मैने फ़ौरन उसकी बात मानते हुए अपने कपड़े निकाल दिए.",ससुर की कहानी अब मस्त मोड़ ले रही थी & रीमा भी गरम होने लगी थी.वो उनकी गर्दन चूमने लगी. "..मुझे लिटा सुमित्रा हौले-2 मेर होठ चूमने लगी.धीरे-2 उसके होठ मेरे होंठो से नीचे मेरी गर्दन पे आ गये,मैने हाथ बढ़ा उसे अपनी बाहो मे भींचना चाहा तो उसने मुझे रोक दिया,'ना,अभी नही,जब तक मैं ना काहु मुझे हाथ मत लगाना.',मैं तो बस मस्ती मे उसकी हर्कतो का मज़ा ले रहा था.और नीचे आ उसने मेरी छाती चूमि & फिर मेरे पेट से होते हुए मेरी नाभि मे जीभ फिराने लगी.मैं मस्ती मे कराहने लगा.सुमित्रा की जीभ ने और नीचे का रास्ता तय किया & मेरे लंड तक पहुँच गयी.जी तो कर रहा था कि उसे पकड़ कर लिटा दू & अपनी बाहो मे भींच उसकी चूत मे पाने लंड को पेल सवेरे तक उसे चोदु.",अब विरेन्द्र जी भी रीमा के बदन को कस के मसल रहे थे.रीमा अब बहुत जोश मे आगाई थी,उसने अपने ससुर को चूम लिया तो उन्होने उसे पूरा क पूरा अपने उपर कर लिया & उसकी कमर को भींच उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ा दी. "आगे बताइए.",रीमा ने किस तोड़ के उनका चेहरा अपने हाथो मे भर लिया.विरेन्द्र जी उसकी गंद को दबाने लगे,"..सुमित्रा ने मेरे सूपदे पे हल्के से चूमा & फिर बिस्तर से उतर कर खड़ी हो गयी...'क्या हुआ?रुक क्यू गयी,सूमी?',जवाब मे उसने अपनी नाइट का ज़िप खोल दिया तो वो ज़मीने पे सरक गयी.नीचे उसने कुच्छ भी नही पहना था & अब मेरी प्यारी बीवी मुझे अपने कातिल हुस्न का दीदार करा रही थी.मुझे लगा कि अब वो मेरे करीब आएगी पर ऐसा ना करते हुए,वो मूडी & कमरे का दरवाज़ा खोल दिया.वाहा डरी सहमी कजरी खड़ी थी.सुमित्रा ने हाथ बढ़ा उसे अंदर खींच कर कमरा फिर बंद कर लिया.",अपने ससुर के उपर लेटी रीमा अब और मस्त हो गयी.उनका लंड दोनो जिस्मो के बीच दबा हुआ था,रीमा घुटनो पे बैठ गयी & ससुर के सीने को खरोंछती उनके पेट पे दबे लंड को अपनी चूत से उसकी लंबाई पे रगड़ने लगी. "


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