Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - Printable Version

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RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

तनु और सूरज नहा कर चट्टान पर बैठ गए । तनु चट्टान पर खड़े होकर आसपास देखती है लगभग सब लोग नहा कर चले गए थे । एक दो प्रेमी प्रेमिका काफी दूर पर नहाते हुए दिखाई दिए । तनु और सूरज मुख्य केन्द्र से काफी दूर थे और एक सुनसान जगह पर थे ।
तनु-" सूरज अब कपडे कैसे सुखाऊं?" तनु भीगे कपडे दिखाते हुए बोली 
सूरज-" दीदी उतार कर सुखा लो"
तनु-" फिर में क्या पहन कर बैठू, कपडे सूखने में 2 घंटे लगेंगे" 
सूरज-" आप चट्टान के पीछे बैठ जाओ,कपडे उतार कर दो, में सूखने डाल दूंगा"
तनु-" में दो घंटे तक बिना कपड़ो के कैसे बैठूंगी चट्टान के पीछे? 
सूरज-" दीदी में गाडी ले आता हूँ उसमे बैठ जाना आप" 
तनु-" हाँ ये ठीक रहेगा"
सूरज अपने कपडे लेकर चट्टान के पीछे जाता है और अपना कच्छा उतार कर पेंट और शर्ट पहन लेता है । कच्छे को चट्टान पर रखकर गाडी लेने चला जाता है ।
तनु की नज़र सूरज के कच्छे पर पड़ती है जिसपर सफ़ेद द्रव्य लगा हुआ था ।
तनु समझ जाती है की सूरज कच्छे में स्खलन हो गया है ।
तनु सोचती है की में अकेली 2 घंटे तक सूरज के सामने कैसे नंगी रहूंगी, सोच सोच कर उसकी चूत रस छोड़ रही थी ।
सूरज के साथ नए मित्रता वाले सम्बन्ध स्थापित करके उसे बड़ा अच्छा भी लग रहा था । 
सूरज गाडी लेकर आता है । चट्टान के सामने खड़ी कर देता है ।
सूरज तनु के पास आकर कहता है ।
सूरज-' दीदी जाओ जल्दी से कपडे उतार दो"
तनु गाडी में जाती है जींस और टॉप उतार कर गाडी के सीसे से बहार फेंक देती है ।
सूरज तनु के कपडे उठाकर पानी में धोकर चट्टान पर डाल देता है ।
सूरज गाडी से थोड़ी ही दूर पर था । तनु गाडी के पिछली सीट पर अपने जिस्म को छुपा कर बैठ गई ।तभी उसे ब्रा और पेंटी के गीलेपन का खयल आता है । अपनी पेंटी को देखती है जिस पर बहुत सारा चूतरस लगा हुआ था, तनु पेंटी के इस गीलेपन और चिपचिपेपन से बैचैनी होती है वह पेंटी और पानी से भीगी ब्रा को उतार देती है ।तनु बिलकुल नग्न हो जाती है गाडी में उसके बूब्स हवा में झूलने लगते है ऐसा महसूस हो रहा था जैसे अब तक किसी के कैद में थे।
तनु अपनी चूचियों को देखती है। जिनके निप्पल खड़े थे तभी चूत पर नज़र जाती है झांटो के बालो पर चूत रस लगा हुआ था तनु अपनी पेंटी से चूत को रगड़ कर साफ़ करती है उसके शारीर में उत्तेजना का संचार होता है वह चूत के अंदर लगे पानी को पेंटी से साफ़ करने लगती है ।चूत साफ़ करने के उपरान्त गन्दी पेंटी और ब्रा को साफ़ कैसे करे उसे धोने के बारे में सोचती है परंतु बहार सूरज था उसके सामने नंगी तो जा नहीं सकती थी ।
तनु ब्रा और पेंटी को उतार कर चट्टान की तरफ फेंकने का प्रयास करती है ।लेकिन वह जमीन पर गिर जाते हैं । सूरज देख लेता है ।
सूरज-" दीदी रुको में धोकर डाल देता हूँ" तनु यह सुनकर चोंक जाती है क्योंकि उसकी पेंटी चूतरस से भीगी हुई थी ।
तनु गाडी से बहार निकल भी नहीं सकती थी ब्रा और पेंटी को खुद धोकर डाल दे ।
सूरज जैसे ही गाडी के पास आता है तनु की ब्रा और पेंटी को उठाकर देखने लगता है ।फैशनेवल ब्रा और पेंटी को बड़ी गौर से देखता है । तनु को ब्रा 32 साइज़ की थी जो बड़ी सॉफ्ट थी । सूरज ब्रा को हाँथ से मसलता हुआ महसूस करता है ।
जैसे ही पेंटी को मसलता है तनु की चूत का कामरस सूरज की उंगलियो पर लग जाता है जो किसी फेविकोल की तरह उंगलियों पर चिपचिपा रहा था ।तनु गाडी के सीसे से देखती है और सूरज को आवाज़ लगाती है ।
तनु-" सूरज ये कपडे ऐसे ही सूखने डाल दे, धोना नहीं तू"
सूरज-" दीदी आपकी पेंटी बहुत गन्दी है इसे धोकर साफ़ कर देता हूँ" सूरज पेंटी पर लगे चूतरस को दिखाते हुए बोलता है, तनु सूरज की इस हरकत से बहुत सिहर जाती है । सूरज भी तनु दीदी की चूत के रस को उंगलियो में लगने की बजह से बहुत एक्सीटेड हो जाता है लंड फड़फड़ाने लगता है उसका मन करता है की पेंटी पर लगे चूतरस को चाट ले ।
तनु-" (शीशे में गर्दन निकाल कर सूरज से मना करती है) सूरज पेंटी बहुत गन्दी उसे हाथ मत लगा, ऐसे ही सूखने डाल दे"
सूरज-" दीदी उस दिन शैली के घर पर आपने भी तो मेरा गंदा कच्छा धोकर डाला था, तो में आपकी पेंटी क्यूँ नहीं साफ़ कर सकता हूँ" सूरज पेंटी पर लगे पानी को दिखाते हुए बोलता है तनु बेचारी शर्म की बजह से गाडी से तो निकल नहीं सकती वह गाडी के शीशे से सूरज को देखने लगती है ।
सूरज नदी के पानी में पेंटी और ब्रा को धोने लगता है । सूरज की इस हरकत से उसकी चूत पर असर पड़ रहा था ।वह उंगलियो से अपनी कोमल चूत को रगड़ती है ।
उसकी नज़र सूरज पर टिकी थी । सूरज पेंटी पर लगे कामरस को ऊँगली से लेकर नाक से सूंघ कर देख रहा था तनु ने जैसे ही देखा उसे ऐसा महसूस हुआ की सूरज मेरी पेंटी को नहीं मेरी चूत को सूंघ कर देख रहा है । तनु की उंगलियां चूत में तेजी से चलने लगती है । तभी तनु को एक और झटका लगता है सूरज तनु की पेंटी पर लगे चूत के पानी को अपनी जीव्ह से चाटने लगता है ।
जिसे देखकर तनु बहुत तेजी से अपनी चूत मसलती है और तेज सिसकी के साथ झड़ जाती है, तनु की सिसकी इतनी तेज थी की उसकी चीखने की आवाज़ सूरज के कानो तक पहुँची, सूरज घबरा जाता है उसे लगा तनु कोई परेसानी है वो भागकर गाड़ी की तरफ जाता है और शीशे में जैसे ही देखता है तनु को तो हैरान रह जाता है उसका लंड झटके मारने लगता है तनु की चूत से बहता हुआ सफ़ेद पानी एक ऊँगली चूत के मुँह पर राखी हुई थी उसकी साँसे बहुत तेजी से चल रही थी जिसके कारण उसकी चूचियाँ ऊपर नीचे हो रही थी ।सुरज समझ गया था तनु दीदी ने ऊँगली से हस्तमैथुन किया है ।
सूरज जब तनु के पास पंहुचा ।
सूरज-' दीदी क्या बात है आप चिल्लाई क्यूँ?
ये शब्द जैसे ही तनु के कानो में पड़े तनु एक दम घबरा गई और सीट पर अपनी चूत और चूचियों को छुपाते हुए बोली
तनु-" सूरज कुछ नहीं हुआ तू यहाँ से जा,में नंगी बैठी हूँ" तनु जब तक ये बोलती तब तक सूरज उसके नंग्न जिस्म का मुयायना कर चूका था ।

तनु का जिस्म देखने के बाद सूरज के जिस्म में गर्मी पैदा हो जाती है । उसका लंड पेंट के अंदर बगावत सुरु कर देता है ।
सूरज खुद की ही बड़ी बहन तनु की झान्टो से भरी हुई चूत को देख कर अपने लंड को शांत करने में बिफलता महसूस कर रहा था । बहन भाई का रिश्ता उसके जिस्म और लंड के बीच बना हुआ था । सूरज का मन 
तनु की चूचियों को दबाने की कल्पना करता है तो कभी तनु की चूत से निकले कामरस को चाटने के हसीन कामुक कल्पना करता है । इधर तनु भी शर्म से मरी जा रही थी आखिर वो भी क्या करती इस उम्र में चूत की आग को शांत करने के लिए उसे हर दिन उँगलियों से ही मदद करनी पड़ती है ।
आज सूरज के साथ बिताए हुए पल और सूरज के साथ कामुकता से भरी बातें सुनकर उसकी चूत गर्म भट्टी की तरह उबल रही थी यदि उसको शांत नहीं करती तो बैचैनी के कारण उसे सुकून नहीं मिलता।
ये जिश्म की आग ऐसे ही होती है ।एक बार भड़क जाए तो बड़ी मुश्किल से सांत होती है। तनु को इस बात की फ़िक्र हो रही थी आज उसके सगे छोटे भाई ने उसे ऐसे हालात में देख लिया, मेरे बारे में क्या सोचेगा,
सूरज-" ओह्ह्हो दीदी माफ़ करना, मुझे लगा आपको कोई परेसानी है इस लिए आप चिल्लाई हो" सूरज गाडी के विपरीत मुह करके बोलता है ।
तनु-" कोई बात नहीं सूरज, मुझे माफ़ करना"
सूरज-" इसमें माफ़ी की क्या बात है दीदी, इस उम्र हर किसी के जिस्म में सेक्स की क्रिया होती है, और सभी लोग इसको शांत करते हैं । आप टेंसन मत लो दीदी, आप फिर से अपना अधूरा काम सुरु कर सकती हो, में थोड़ी देर के लिए कही ओर चला जाता हूँ"
तनु-" नहीं सूरज मेरा काम हो गया, तू कहीं मत जाना मुझे अकेले डर लगेगा" 
सूरज-"ठीक है दीदी कहीं नहीं जा रहा हूँ, 
तभी सूरज तनु की पेंटी उठा कर लाता है और तनु को देता है ।
सूरज-" दीदी इससे आप निचे की सफाई कर लो, फिर में इसे धोकर डाल दूंगा" जैसे ही सूरज ये बोलता है तनु को फिर से झटका लगता है लेकिन तनु को सूरज की इस समझदारी पर अच्छा भी लग था क्योंकि उसकी चूत से बहुत सारा पानी निकला था जिसे साफ़ करने के लिए उसके पास कोई कपडा नहीं था । तनु गाडी की खिड़की से एक हाँथ निकाल कर पेंटी लेती है और अपनी चूत पर लगे कामरस को साफ़ करती है उसकी पेंटी कामरस से पूरी तरह से भीग चुकी थी अच्छी तरह से चूत साफ़ करने के बाद गन्दी पेंटी फिर से सूरज को पकड़ा देती है, इस बार तनु ने कुछ नहीं बोला सूरज से और आराम से पेंटी पकड़ा दी ।सूरज ने जैसे ही पेंटी के लिए मुड़ा उसकी नज़र तनु पर पड़ती है उसके एक बूब्स पर जिसे देखकर सूरज लंड झटका मारता है । सूरज पेंटी को लेकर देखने लगता है तनु की चूत का पानी उसके हाँथ में लग जाता है ।
सूरज-" दीदी आपका पानी तो बहुत निकला है इतना तो मेरा भी कभी नहीं निकला" तनु को उसकी गीली पेंटी दिखाते हुए बोला
तनु-" ओह्ह सूरज तू तो पक्का बेशरम होता जा रहा है, कुछ तो शर्म कर, तेरे साथ रह कर में भी तेरी तरह होती जा रही हूँ, तेरी ऐसी हरकतों की बजह से ही मुझे अपने आपको शांत करना पड़ा, तेरी ऐसी कामुक बातें सुनकर मेरे अंदर कुछ होने लगता है, 
तू अगर मेरी पेंटी को चाटता नहीं तो मेरे अंदर कोई आग नहीं फैलती, और न ही ऊँगली करने की नोबत आती" तनु ने अपनी पीड़ा को उजाकर किया
सूरज-" दीदी आपका पानी बहुत स्वादिस्ट है इसलिए चाटने का मन हुआ, दीदी क्या में इस पानी को भी चाट लू" सूरज ने तुरंत तनु की पेंटी को मुह में लेकर चाटने लगा, जैसे ही तनु ने देखा उसका पूरा जिस्म में हवस का खून दौड़ने लगा ।
तनु-" नहीं सूरज ऐसा मत कर प्लीज़"

सूरज-" दीदी जबसे मैंने शैली के साथ सम्भोग किया है तबसे मेरा मन बार बार उसी काम को करने के लिए करता है, में अपने आपको कैसे शांत करु" 
तनु-"तू भी अपने आपको शांत कर ले जैसे मैंने कर लिया है, अपने हाथ से तो तू करता ही होगा" 
सूरज-" दीदी मन तो बहुत कर रहा है हिलाने का लेकिन शांत जगह पर हिलाने में अच्छा लगता है क्या में गाडी के अंदर आ जाऊ" तनु सूरज की हिलाने बाली बात से सिहर जाती है ऊपर से सूरज मेरे सामने गाडी में हिलाएगा, मेरे सामने । तनु सोचती है इतना सबकुछ तो हो ही गया है अब सूरज को मेरे सामने हिलाने में कोई आपत्ति नहीं है तो मुझे क्या प्रॉब्लम होगी, आखिर इसमें मुझे भी तो मजा आ रहा है ।
तनु-" सूरज तू अपना वो मेरे सामने हिलाएगा, तुझे शर्म नहीं आएगी" 
सूरज-" वो क्या होता है दीदी ऊसे लंड बोलते है दीदी, शर्म किस बात की मैंने आपका जिस्म देखा है और आपने तो मेरी और शैलू की चुदाई भी देखी है तो अब आपसे पर्दा कैसे" सूरज पहली बार तनु से साफ़ और असली शब्द बोलता है तनु शर्मा जाती है 
तनु-" ओह्ह्ह सूरज तू इतने गंदे शब्द भी बोलने लग गया मेरे सामने,
सूरज-" दीदी अब लंड को लंड न कहूँ तो क्या कहूँ, दीदी मेरे लंड की नसे फूलती जा रही हैं अगर थोड़ी देर और रुका तो मेरा पूरा कच्चा और पेंट गन्दी हो जाएगी, में गाडी में आकर हिला लेता हूँ" सूरज जल्दी से आगे ड्राइवर सीट पर आकर बैठ जाता है और अपनी पेंट और कच्छा उतार कर अपना मोटा लंड हिलाने लगता है । 
तनु पीछे सीट पर अपने आपको छुपाती हुई बैठ जाती है लेकिन जैसे ही फ्रंट सीसे पर तनु की नज़र जाती है उसकी चूत फिर से पानी छोड़ने लगती है सीसे में सूरज का लंड साफ़ दिखाई दे रहा था उसका 8 इंची लंड लाल गुलाबी सुपाड़ा देखकर तनु का मन चाटने और चूसने का करता है ।
भी तनु को सीसे में देख कर एक और झटका लगता है सूरज तनु की पेंटी को पहले चाटता है फिर लंड़ पर पेंटी रगड़ने लगता है । तनु की चूत से कामरस की कुछ बुँदे टपकने लगती है ।
सूरज-' दीदी आपकी पेंटी में भी जादू है, शैली की चूत से भी ज्यादा मजा आपकी पेंटी में है, आपका पानी तो शैली की चूत के पानी से भी स्वादिष्ट है" 
तनु-" ऐसी बात मत कर सूरज में भी अपने आपको रोक नहीं पाउंगी, 
सूरज-" आप भी अपनी चूत में उंगली कर लो मेरे साथ" सूरज अपनी सीट को लेटा देता है जिससे पिछली और ड्राइवर सीट एक हो जाती है ।
तनु एक दम घबरा जाती है सूरज तनु के सामने अपना लंड हिलाता है ।
तनु-" ये क्या किया सूरज,तू मेरे पास बैठकर हिलाएगा में नंगी बैठी हूँ,
सूरज-" दीदी आप भी मेरे साथ बैठ कर ऊँगली करो न प्लीज़,"
तनु-' नहीं सूरज मुझे शर्म आ रही है तू अपना जल्दी हिला कर जा यहां से, में बाद में करुँगी" तनु की चूत से भी पानी बह रहा था ।
सूरज-" एक बार मुझे अपनी चूत दिखा दो, मेरा जल्दी हो जाएगा प्लीज़"
तनु-" ओह्हो सूरज ये तू क्या कह रहा है,
तुझे शर्म नहीं आएगी मेरी चूत देख कर, ले देख ले" तनु अपनी चूत सूरज के सामने कर देती है सूरज अपना लंड को छोड़कर तनु की चूत को सहलाने लगता है, तनु पर रहा नहीं जाता वह सूरज के लिप्स किस्स करने लगती है ।15 मिनट तक सूरज और तनु एक दूसरे के होंठो को जंगली तरह से चूसते हैं ।
सूरज तनु की चूचियों को मुह में लेकर चूसता है बारी बारी । तनु के जिस्म में आग सी लग जाती है । तनु सूरज का लंड मुह में लेकर चूसने लगती है सूरज भी तनु की चूत में अपनी जिव्हा डालकर चाटने लगता है ।दस मिनट तक तनु की चूत चाटने के बाद तनु को सीधा करके अपना लंड तनु की चूत में घुसाने लगता है । तनु की चूत बहुत टाइट थी लंड आधा ही घुस पाता है ।तनु को दर्द होता है ।
तनु-" ओह्ह्ह्ह्ह सूरज आराम से पहली बार इतना मोटा लंड मेरी चूत में घुसेगा, आराम से डाल"
सूरज-" बस दीदी थोडा दर्द बर्दास्त कर लो, सूरज लंड को निकालता है फिर से डालता है । दो तीन बार लंड चूत में डालता है और निकालता है । फिर एक बार तेज धक्के के साथ अपना पूरा लंड तनु की चूत में घुसेड़ देता है ।
तनु-" आआह्ह्ह्ह्ह्ह् सुराज्ज्ज् मार डाला तूने आह्ह्ह्ह,
सूरज तेज तेज धक्के मारने लगता है ।
सूरज-" दीदी बस थोड़ी देर में आपको भी मजा आएगा दीदी, आपकी चूत बहुत मस्त है दीदी, आपकी चूत स्वादिस्ट भी है दीदी, अह्ह्ह दीदी 
तनु-" आह्ह सूरज अब मजा आता जा रहा है ऐसे ही करता रह, बहुत मजा आ रहा है उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् आह्ह्ह्ह फक सूरज
सूरज-" आप बहुत प्यारी हो दीदी, ऐसा लग रहा है स्वर्ग आपकी चूत में है" 

तनु-' आह्ह्ह्ह्ह् उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ सूरज तेज तेज कर मेरा निकल रहा है ओफ्ग्गफग्ग्ग
सूरज-" आःह्ह्ह दीदी मेरा भी पानी निकल रहा है कहाँ निकालू पानी?"
तनु-" भर दे मेरी चूत अपने पानी से सूरज मेरे भाई" 
दोनों बहन भाई एक साथ झड़ जाते हैं ।
दोनों की साँसे बहुत तेज चल रही थी ।
सूरज-" i love you didi
तनु-" love you 2 मेरे भाई 
सूरज-" दीदी कैसा लगा
तनु-" बहुत अच्छा लगा मुझे नहीं पता था इतना मजा आता है अब तो तू ही मेरी चूत की प्यास बुझाया करना"
सूरज-" हाँ दीदी में ही बुझाऊँगा।
सूरज 
का लंड तनु की चूत में था । जैसे लंड निकालता है चूत से बहुत सारा पानी बहने लगता है ।तनु अपने आपको साफ़ करती है । सूरज भी अपने आपको साफ करता है ।
तनु के कपडे भी सूख चुके थे ।
दोनों बहन भाई फ़ार्म हॉउस की ओर निकल जाते है ।

सूरज ने तनु को फ़ार्म हॉउस छोड़ा और अपने नए घर चला जाता है ।
घर पहुँच कर उसने देखा तान्या और संध्या माँ दोनों बैठकर खाना खा रही थी ।
संध्या-" अरे सूर्या तू आ गया" 
सूरज-" माँ मुझे भी बहुत तेज भूक लगी है"
संध्या-" आजा बेटा जल्दी से में खाना लगाती हूँ" सूरज फ्रेस होकर आया और खाना खाने लगता है तभी उसने देखा की तान्या दीदी उदास सी बैठी हैं ।
दीदी ने मुझसे अभी तक ढंग से बात नहीं की है जबसे में इस घर में आया हूँ । गुस्सा उनकी नाक पर रखा रहता है ।में भी डर की बजह से उनसे ज्यादा बात नहीं करता हूँ ।
सूरज-" तान्या दीदी आपको क्या हुआ है" मैंने दीदी से पूछा 
तान्या-" तुझे क्या फर्क पड़ता है मेरी उदासी से, तुझे तो कंपनी और फेक्ट्री की बिलकुल फ़िक्र ही नहीं है।
संध्या-" दिल्ली गई थी बिजनेस मीटिंग के लिए अभी लौटी है, बेटा तू अब तान्या के साथ अपनी कंपनी को संभालने में मदद कर, ये बेचारी अकेली ही पूरी कंपनी और फेक्ट्री संभालती है"
सूरज-" माँ में खुद चाहता हूँ की कंपनी की जिम्मेदारी सम्भालू, में कल से ही कंपनी जाया करूँगा, दो या तीन महीने में सब सीख जाऊंगा फिर आपको कोई तखलिफ् नहीं होगी, में बहुत मेहनत करूँगा माँ" 
संध्या-" Thankes बेटा, तू कल से तान्या के साथ जाना ये तुझे सब समझा देगी"
हम तीनो खाना खा कर अपने अपने कमरो में सोने चले गए, कल खुद की कंपनी सम्भालूंगा इस बात से में बहुत उत्साहित था ।इस घर की जिम्मेदारी संभालना मेरे लिए ख़ुशी की बात थी ।
कम समय में मेरे साथ एक के बाद एक नई नई घटना घट रही थी । गाँव से शहर आना फिर इतने बड़े घर में सूर्या की जगह लेना, किसी चमत्कार से कम नह था मेरे लिए, 
तनु दीदी की सहेली शैली के साथ मेरे जीवन का पहला सम्भोग उसके बाद तनु दीदी के साथ सम्भोग ये परिवर्तन मेरी जिंदगी में एक नए अनुभव की तरह था ।
शहर की चकाचौन्ध में खुद को ढालने का प्रयत्न मेरे लिए कड़े संघर्ष की तरह था जिसमे में स्वयं ही हर कदम पर परीक्षा का प्रतिभागी था ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

आज तनु दीदी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना कर मेरे अंदर एक और हवस की चिंगारी पैदा कर दी थी अब ये हवस की आग मुझे सम्भोग करने के लिए बार बार प्रेरित कर रही थी । मेरा मन बार बार सम्भोग करने के लिए उकसा रहा था । 
यही सब सोच ही रहा था तभी मेरा मोबाइल बजा, तनु की कोल थी, रात के 11 बज रहे थे । मैंने तुरंत फोन उठाया ।

तनु-" हेलो सूरज, सोए नहीं अभी तुम" 
सूरज-" दीदी नींद नहीं आ रही थी, आप भी अभी तक सोई नहीं, 
तनु-" आज नींद नहीं आ रही है सूरज, तुझे बहुत मिस्स कर रहीं हूँ"दीदी ने कामुक आवाज़ में बोला 
सूरज-" दीदी मेरी याद आ रही है किसी ओर की" मैंने मजा लेते हुए बोला 
तनु-" तेरी याद भी आ रही है और उसकी भी" दीदी का इशारा मेरे लंड की ओर था 
सूरज-" पूनम दीदी कहाँ है, आपके पास तो नहीं हैं" 
तनु-" पूनम दीदी अपने रूम में सो रहीं है, में अपने रूम में लेटी हूँ" 
सूरज-" दीदी सो जाओ आप, बहुत थक गई होगी आप आज, कल में आऊंगा घर पर" 
तनु-" ok सूरज, कल जरूर आना, में इंतज़ार करुँगी"
में आज बहुत थक गया था इसलिए नींद आ रही थी मुझे । बिस्तर पर लेटते ही मुझे नींद आ गई । सुबह सात बजे माँ के उठाने पर में उठा ।
संध्या-" गुड मॉर्निंग बेटा उठो आज कंपनी जाना है तुम्हे, जल्दी उठ कर फ्रेस हो जाओ।
में जल्दी से फ्रेस हुआ, मैंने और तान्या दीदी ने खाना खाया ।
संध्या-" तान्या बेटा सूर्या आज पहली बार कंपनी जा रहा है इसको अच्छे से समझा देना" 
तान्या-" ये कोई बच्चा नहीं ये माँ, कंपनी जाएगा तो अपने आप सब सीख जाएगा" गुस्से से बोली, 
तान्या दीदी की इतनी नफरत देखकर मेरा तो मूड ही खराब हो गया, 
तान्या ने खाना खाया और कंपनी के लिए अकेली निकल गई, मुझे साथ लेकर भी नहीं गई ।
सूरज-" माँ दीदी तो मुझे लेकर ही नहीं गई, 
दीदी इतना गुस्से में क्यूँ रहती हैं अभी तक, 
संध्या-" बेटा वो पुरानी बातें अभी तक भूली नहीं है, तूने भी तो उसे बहुत रुलाया है, उसे कभी एक भाई का साथ नहीं मिला इसलिए अकेले दम पर उसने जीना सीखा है बेटा, 
सूरज-" माँ क्या में तान्या दीदी से लड़ता था?" 
संध्या-" लड़ाई कहाँ होती थी तुम दोनो में युद्ध होता था, खैर अब तू उन बातों को भूल चूका है इसलिए में चाहती हूँ तू नई जिंदगी प्यार और परिवार के साथ बिता, बेटा बहुत दुःख सहा है उसने अब तेरा फ़र्ज़ बनता है की तू उसे एक भाई की तरह अपनी जिम्मेदारी निभा" 
सूरज-" माँ मुझे नहीं पता मेरा अतीत कैसा था लेकिन आज में आपसे वादा करता हूँ आज के बाद में इस घर को खुशियों से भर दूँगा, तान्या दीदी को यह अहसास दिलाकर ही दम लूंगा की में उनका सबसे अच्छा भाई हूँ, एक दिन देखना माँ दीदी मुझसे जरूर प्यार से बात करेंगी और मुझपर गर्व करेंगी" में रुआसां हो गया था । माँ की आँख में भी मेरी बात सुनकर पानी आ गया था, मैंने माँ की आँखों से आंसू साफ़ किए, माँ ने मुझे गले से लगा लिया ।
संध्या-" बेटा आज में बहुत खुस हूँ, पहली बार तेरे मुह से यह बात सुनकर धन्य हो गई, शायद भगवान् ने मेरी सुन ली और मेरा बेटा मुझे लौटा दिया, में भगवन से दुआ करुँगी की तेरी यादास्त कभी वापिस न लौटे, मुझे हमेसा तू ऐसा ही चाहिए" 
सूरज-" माँ आप फ़िक्र मत करो, आज के बाद आपको कोई तखलीफ नहीं होगी, मेरी बजह से,
संध्या-" बेटा तू ड्राइवर को लेकर कंपनी चला जा, वहां तुझे कंपनी के मेनेजर सब समझा देंगे, और हाँ तान्या की बात का बुरा मत मानना बेटा" 
सूरज-" ठीक है माँ" में ड्राइवर को लेकर कंपनी पहुचा, आज पहली बार मैंने अपनी कंपनी को देखा तो मेरी भी आँखे फटी की फटी रह गई, कंपनी में घुसते ही बोर्ड लगा था मेरे नाम का जिस पर सूर्या लिमटेड कंपनी लिखा था । जैसे ही में कंपनी के मैंन गेट पर पंहुचा गाडी से उतर कर तो गार्ड ने मुझे सेल्यूट किया, जीवन में पहली बार राजा महाराज बाली फिलिंग्स आई ।
में मैन गेट से कंपनी के अंदर पंहुचा तो देखा पूरी कंपनी का मैन ऑफिस आलीसान बना हुआ है, बहुत सारे लोग काम कर रहे थे ।
मेरी कंपनी कपड़ो का व्यापार करती थी जिसमे बहुत सारे कपडे बनते थे जो विदेशो में जाते हैं ।
मैं ऑफिस की तरफ गया तभी एक लड़की मेरे पास आई ।
लड़की-" आप कौन है, यहां क्या कर रहें हैं" में तो उसे देख कर दंग ही रह गया, शायद ये कंपनी में नई आई है इसलिए सूर्या को नहीं जानती होगी ।स्कर्ट और शर्ट पहनी हुई थी में समझ गया ये जरूर सेक्रेटरी होगी ।
मैंने-" में इस कंपनी को देखने आया था,
लड़की-" क्या देखने आए थे, आपको घुसने किसने दिया, कोई भी मुह उठाकर चला आता है, चलो बहार जाओ" लड़की गुस्से में बोली, तभी तान्या दीदी ऑफिस की केबिन से बहार निकली, उन्हें लगा शायद में उस लड़की से झगड़ रहा हूँ ।गुस्से से मेरी तरफ आई ।
तान्या-" तू कभी सुधर नहीं सकता है, पहले दिन कंपनी में आकर तू मेनेजर गीता मेम जी से लड़ने लगा" लड़की एक दम चोंक गई ।
मेनेजर गीता(लड़की का नाम है)"- मेम क्या आप इन्हें जानती है,
तान्या-" हाँ ये सुर्या है" जैसे ही लड़की ने मेरा नाम सुना एक दम चोंक गई ।
गीता-' ओह्ह्ह सॉरी सर मुझे पता नहीं था की आप सूर्या हैं, में नई आई हूँ इस कंपनी में, तान्या मेम इनकी कोई गलती नहीं है, में ही सूर्या सर को पहचान नहीं पाई" 
मैंने-" कोई बात नहीं गीत जी, बस आपसे एक निबेदन है की मुझे कंपनी के बारे में सब कुछ समझा दीजिए आज के बाद में रौज कंपनी आया करूँगा" तान्या अपने ऑफिस में चली गई थी ।
गीता-" सर आइए में पहले आपका ऑफिस दिखा दूँ फिर कंपनी के बारे में समझा दूंगी" 
मैंने सबसे पहले अपना ऑफिस देखा बहुत अच्छा था । फिर गीता ने पूरी कंपनी दिखाई । कंपनी के सभी आर्डर और आय व्यय की फाइले दिखाई ।
पूरा दिन ऑफिस के कामो को सीखते और जानने में निकल गया ।
पहला दिन बहुत अच्छा गुजरा, शाम को में घर पहुँचा, तान्या दीदी पहले से ही घर आ चुकी थी तभी मुझे तनु दीदी की याद आई, कंपनी के चक्कर में तनु दीदी को भूल गया ।
में घर पंहुचा तो माँ तुरंत मेरे पास आई ।
कंपनी में पहला दिन कैसा गुज़रा यही सब जानने की उत्सुकता माँ के चेहरे पर साफ़ दिखाई दे रही थी ।
संध्या-" अरे बेटा तुम आ गए, कैसा लगा आज कंपनी जाकर, कोई परेसानी तो नहीं हुई बेटा" 
सूरज-" आज का दिन बहुत अच्छा गुज़रा माँ, पहले दिन ही में सब कुछ जान गया, अब हर रौज कंपनी जाया करूँगा" 
संध्या-" में आज बहुत खुश हूँ बेटा तूने अपनी जिम्मेदारी संभाल ली, चल जल्दी से फ्रेस हो जा में खाना लगाती हूँ" 
सूरज-" ठीक है माँ, बस अभी फ्रेस होकर आया" में ऊपर गया, फ्रेस होकर नीचे आकर खाना खाया, आज पुरे दिन कंपनी को समझते समझते मानसिक रुप से थक गया था इसलिए ऊपर अपने रूम में आकर बिस्तर पर लेट गया । 
धीरे धीरे इस घर की सभी जिम्मेदारी को संभालता जा रहा था में, बस एक ही बात को लेकर चिंतित था की सूर्या कैसा था, आखिर उसने ऐसा क्या किया, मंदिर में गुंडे माँ को क्यूँ मारना चाहते थे ऐसा सूर्या ने क्या किया, माँ और तान्या से तो पूछ नहीं सकता सूर्या के बारे में मुझे ही इन सवालो के जवाब ढूंढ़ने होंगे, तभी मेरे दिमाग में एक आयडिया आया की क्यूँ न सूर्या के लेपटोप को खोलकर देखा जाए शायद उसके कुछ दोस्तों के बारे में पता चल जाए ।
मैंने तुरंत सूर्या का लेपटोप अलमारी से निकाला और उसे स्टार्ट किया। 5 महीने कंप्यूटर की पढ़ाई करने से में कंप्यूटर के बारे में बहुत कुछ सीख गया था ।
मैंने my computer खोल कर देखा तो बहुत सारे फोल्डर बने हुए थे । मैंने एक एक करके सभी फोल्डर खोलकर देखने लगा ।
एक फोल्डर में सूर्या के और उसके दोस्तों के साथ बहुत सारे फोटो थे । ये फोटो स्कूल के समय के थे जिस समय सूर्या मुम्बई में पढता था । मैंने एक एक करके बहुत सारे फोल्डर चेक किए लेकिन कोई सूर्या के बारे में जानकारी नहीं मिली तभी मेरे दिमाग में एक और आयडिया आया मैंने hide फाइले को unhide किया तभी बहुत सारे फोल्डर खुल कर मेरे सामने आ गए ।
मैंने एक फोल्डर खोला जिस पर शिवानी लिखा हुआ था, फोल्डर को खोलते ही उसमे वीडियो थी मैंने एक वीडियो ओपन की तो देखा सूर्या शिवानी नाम की लड़की को चौद रहा था । मैंने एक एक करके बहुत सारी वीडियो देखी जिसमे सूर्या के साथ अलग अलग लड़की थी । दूसरा फोल्डर खोला तो उसमे सूर्या एक आंटी के साथ सेक्स कर रहा था, सूर्या उस औरत को आंटी कह कर पुकार रहा था, मैंने कभी उस औरत को नहीं देखा था, दूसरी वीडियो में सूर्या इसी कमरे में एक औरत को जबरदस्ती चोद रहा था, औरत सूर्या को मना कर रही थी, सूर्या नशे की हालात में था । सूर्या बहुत अय्यास प्रवती का था ये में जान गया था । मैंने एक एक करके सभी वीडियो देखी तभी मैंने एक वीडियो का नाम पढ़ा जिस पर तान्या फ्रेंड सोनिया लिखा था । मैंने वीडियो को प्ले किया तो देखा सूर्या एक लड़की को सोनिया दीदी कह कर बुला रहा था । लड़की देखने में बहुत सुन्दर थी, मैं वीडियो में उन दोनों की बाते सुनने लगा ।सूर्या ने जितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया उनकी वीडियो बना लेता था, कैमरा छुपा कर ।
वीडियो में सोनिया नाम की लड़की थी जिसको सूर्या नंगा कर रहा था ।
इसी रूम में बनाई गई वीडियो थी ।
सोनिया-" सूर्या मुझे डर लग रहा है कहीं तान्या न आ जाए" 
सूर्या-" तुम चिंता मत करो सोनिया दीदी, तान्या मेरे रूम में नहीं आएगी, तुम जल्दी से मेरे लंड की गर्मी शांत कर दो" 
सोनिया-" तान्या को पता चल गया तो मुझे मार डालेगी सूर्या, 
सूर्या-" आएगी तो साली को यहीं पटक के मुँह फोड़ दूंगा उसका, मेरे हर काम में टांग अड़ाती है" 
सोनिया-" तुम्हे क्या हो गया है इतनी नफ़रत क्यूँ करते हो एकदूसरे से, 
सूर्या-" तुम उसका नाम मत लो मेरा लंड उसके नाम से बैठ जाता है, जल्दी से मेरा लंड चूसो" सोनिया सूर्या का लंड चूसने लगती है और सूर्या उसकी चूत चाटता है ।
सोनिया की चूत चाटने से उसके जिस्म में उत्तेजना बढ़ जाती है और तेज तेज सांसे चलने लगती है । सूर्या अपनी जिव्हा सोनिया की चूत में अंदर बहार करता है ।
सोनिया तड़प जाती है ।
सूर्या सोनिया के बूब्स को मसलता है बुरी तरह से फिर सोनिया को लेटा कर उसकी चूत में लंड डालता है ।
सोनिया-"आह्ह्ह्ह सूर्या आराम से दर्द होता है" 
सूर्या-" ओह्ह्हो सोनिया दीदी तुम्हारी चूत बहुत मस्त है" सूर्या तेज धक्को के साथ सोनिया को चोदता है ।
सोनिया-" आह्ह्ह्ह चोद सूर्या, आह्ह्ह में तेरे लंड की गुलाम हूँ, मेरी चूत को फाड़ दे" 
सूर्या बहुत तेज तेज चोदता है ।
करीब दस मिनट चोदने के बाद दोनों झड़ जाते हैं ।सोनिया जल्दी से कपडे पहनती है ताकि तान्या कहीं आ न जाए ।
सोनिया-" सूर्या तुझ से एक बात करनी थी, कल मुझे शंकर डॉन की बहन शिवानी मिली थी ।तुझे और तेरे घर वालो को जान से मारने की धमकी दे रही थी वो, तान्या भी मेरे साथ थी। तान्या को पता चल गया की तूने शंकर डॉन की बहन शिवानी को शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार सेक्स किया, वो बहुत खतरनाक लोग हैं, तुझ पर जानलेवा हमला भी कर सकते हैं, थोडा सतर्क रहना तू" 
सूर्या-" मुझे नहीं पता था की वो शंकर डॉन की बहन है बर्ना में कभी उसे चोदता नहीं, खैर अब जो होगा वो देखा जाएगा, में उन लोगो से डरता नहीं हूँ" 
सोनिया-" फिर भी ध्यान रखना वो लोग इस शहर के नामी गुंडे हैं, माँ और तान्या को नुकसान पहुंचा सकते हैं" इतना कह कर सोनिया रूम से चली गई" वीडियो भी ख़त्म हो गई ।
वीडियो देख कर बहुत सी बातें साफ़ हो गई थी की सूर्या हवस के लिए लड़कियों का शिकार करता है, हवस के लिए लड़कियों का फंसा कर उनकी वीडियो बना लेता है ताकि उन्हें ब्लैकमेल कर सके ।
शिवानी शंकर की बहन है जिसे सूर्या ने फंसा कर उसके साथ सेक्स करता था, ये बात उसने अपने भाई शंकर को बताई होगी। उन्होंने ही सूर्या को गायब किया है, और उस दिन मंदिर में माँ के ऊपर हमला उन्होंने ही किया था और मुझे देखकर चोंक भी गए थे, इसका मतलब सूर्या को पहले ही ठिकाने लगा चुके हैं वो लोग,मुझे जिन्दा देखकर उन्हें हैरानी हुई होगी, लेकिन अब सोचने बाली बात ये थी की उन्होंने माँ पर क्यूँ हमला किया? 
ये बात संध्या माँ और तान्या दीदी तो बताएगी नहीं मुझे सोनिया को ढूँढना पड़ेगा, वो ही मुझे पूरा रहस्य बता सकती हैं ।
मैंने सूर्या की अलमारी देखने लगा शायद सोनिया का मोबाइल नम्बर पता लग जाए लेकिन नहीं मिला तभी मुझे एक बात ध्यान आई की लेपटोप में फेसबुक पर सोनिया का नम्बर मिल सकता है । मैंने लेपटोप को wifi से कनेक्ट किया और गूगल हिस्ट्री देखने लगा। सूर्या ने लास्ट 6 महीने पहले फेसबुक चलाई थी और उसकी फेसबुक लोगिन थी ।
जैसे ही सूर्या की फेसबुक id लोगिन की तो देखा बहुत सारे मेसेज आए हुए थे । 
मैंने प्राइवेट मेसेज एक एक खोलकर पढ़ने लगा तभी मुझे सोनिया की id से आए मेसेज पढ़ने लगा । सभी मेसेज पढ़े, मैंने सोनिया के प्रोफाइल इंफॉर्मेसं में जाकर उसका नम्बर नॉट किया ।
और उसको कोल कर दी ।दो बार घंटी जाने पर तीसरी घंटी पर फोन उठा सोनिया का ।
सोनिया-" हेलो कौन?" रात के 11:30 बज रहे थे शायद सो रही होगी वो 
सूरज-"हेलो दीदी में सूर्या हूँ" मेरा नाम सुनते ही एक दम चोंक गई सोनिया 
सोनिया-" सूर्या तुम कहाँ हो, तुम तो कहीं गायब हो गए थे, शंकर डॉन ने तुम्हे गायब करवा दिया था" 
सूर्या-" हाँ दीदी अब में बिलकुल ठीक हूँ, और 5 महीने से घर पर ही हूँ,
आप इन पांच महीनो में घर पर क्यूँ नहीं आई मुझसे मिलने" 
सोनिया-" तुझे नहीं पता ! तेरे गायब होने के बाद मेरे साथ क्या क्या हुआ, मेरे और तेरे बारे में तान्या को सब पता चल गया था इसलिए तान्या ने मुझसे दोस्ती ही छोड़ दी, तुम्हारी माँ ने भी मुझसे बहुत उल्टा सीधा बोला इसलिए में उस शहर को छोड़ कर चण्डीगढ़ आ गई" 
सूर्या-" ओह्ह्ह दीदी माफ़ करना मेरी बजह से आपको तखलीफ सहनी पढ़ी, ये बताओ दीदी मेरे गायब होने के बाद शंकर डॉन के आदमियों ने माँ पर हमला क्यूँ किया" 
सोनिया-" क्यूँ तुझे संध्या आंटी ने नहीं बताया क्या? आंटी को तान्या ने बता दिया था की तूने शिवानी के साथ सेक्स किया और उसे शादी के नाम पर धोका दिया इसलिए शिवानी ने अपने भाई से कह कर तुझे गायब करबा दिया, तेरे गायब होते ही आंटी ने शंकर डॉन पर केस कर दिया बो इस समय जेल में है, उसी के आदमीयो ने आंटी पर हमला किया होगा, सूर्या अब भी वक़्त है शंकर डॉन से और शिवानी से माफ़ी मांग ले वरना वो जेल से आते ही फिर से तुझ पर हमला करेगा" 
सूर्या-" हाँ दीदी आप चिंता मत करो में सब ठीक कर दूंगा, जो पाप सूर्या ने किए हैं उसकी सजा उसकी मिल चुकी है। अब में सब ठीक कर दूंगा" इतना कह कर सूर्या ने फोन काट दिया ।
बिस्तर पर लेट कर सोचने लगा की कैसे इस मामले को सुलझाया जाए ।सोचते सोचते नींद आ गई ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

सुबह की चहल- पहल और माँ की मधुर आवाज़ मेरे कानो पर दस्तक दे रही थी ।
में नींद के आगोस से निकलने का प्रयास करता हुआ उठा ।
माँ-" बेटा उठो कंपनी जाना है तुम्हे, जल्दी से तैयार हो जाओ में नास्ता लगाती हूँ" 
सूरज-" हाँ माँ अभी तैयार होता हूँ"
माँ के जाते ही में जल्दी से फ्रेस होकर नीचे पहुँचा । तान्या दीदी कंपनी जा चुकी थी ।
मैं डायनिंग टेवल पर बैठ कर नास्ता करने लगा । तभी मेरे दिमाग में आया की शंकर डॉन की रिहाई के लिए माँ से बात करू, और इस रंजिस को सुलझाऊँ ताकि भविष्य में कोई खतरा न हो ।
सूरज-" माँ एक बात पूछनी थी आपसे?"
संध्या माँ-"हाँ बोलो बेटा" 
सूरज-" माँ में शंकर डॉन की रिहाई चाहता हूँ" जैसे ही माँ ने यह् सूना एकदम चोंक गई, माँ को लगा की शायद मुझे सबकुछ याद आ गया है ।
संध्या-" क्या तेरी यादास्त वापिस आ गई है, तुझे कैसे पता की शंकर के लिए मैंने जेल भिजबाया है?" माँ हैरान और परेसान थी ।उसे डर था की कहीं मेरी यादास्त वापिस न आ जाए और में फिर से उस नर्क की जिंदगी को गले न लगा लू ।
सूरज-" नहीं माँ मुझे कुछ याद नहीं है लेकिन मुझे पता चल गया है की शंकर डॉन मेरी बजह से जेल में है, माँ गलती मेरी थी उस गलती का प्रायश्चित करना चाहता हूँ, में नहीं चाहता की मेरी बजह से आपको कोई तखलीफ हो आप पर या दीदी पर कोई फिर से हमला करे, में उनसे अपनी गलती की माफ़ी मांग लूंगा माँ, शिवानी के साथ जो हुआ गलत हुआ है, मेरी नासमझी रही होगी शायद, में पापी था और उस पाप की सजा मुझे मिल चुकी है, अब आप भी उसे माफ़ कर दो" माँ मेरी बात को हैरानी से सुनती हुई बोली ।
संध्या-" बेटा तू कितना समझदार हो गया है, में केस को वापिस तो ले लुंगी लेकिन मुझे डर है कहीं शंकर फिर से तुझे हानि न पहुचा दे, में तुझे खोना नहीं चाहती हूँ बेटा"
सूरज-" माँ मुझे कुछ नहीं होगा भरोसा रखो, इस सूर्या से अगर कोई टकराएगा तो खुद जल कर भस्म हो जाएगा,आप आज ही उसे रिहा करवा दीजिए में उससे बात करूँगा माँ" 
संध्या-" बेटा तू कहता है तो ठीक है, में अपने वकील से कह कर उसे अभी रिहा करबा देती हूँ" 
माँ ने तुरंत फोन निकाल कर वकील से शंकर की रिहाई के लिए बात की, मुझे बहुत सुकून मिला लेकिन डर भी था की कहीं जैल से छूटने के बाद कोई गलत हरकत न करे ।
संध्या माँ-" बेटा अभी एक घंटे में शंकर की जमानत हो जाएगी, तू थोडा सतर्क रहना, अब जल्दी से कंपनी जा, देर हो रही है" मैंने माँ को गले से लगा कर किस्स किया और गाडी लेकर कंपनी आ गया।
कंपनी जाकर मैंने सबसे पहले सभी लोगों से परिचय किया । कंपनी के सभी लोग मुझसे बहुत प्रभावित हुए, कंपनी में काम करने बालो की सभी समस्या सुनी, उन्हें भरोसा दिलाया की कंपनी उनके उज्जवल भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करेगी ।
कंपनी की मेनेजर गीता भी मेरे कार्य से व्यवहार से बहुत प्रशन्न थी ।तान्या कंपनी में आकर पूरा दिन ऑफिस में बैठकर कंपनी के बिल और जरुरी फाइल पूरी करती रहती थी, सूरज के कंपनी आने से उसे थोड़ी राहत तो मिली थी परंतु कंपनी का सभी कारोबार उसे ही संभालना पड़ता था ।
गीता मेनेजर तान्या के ऑफिस में पहुँची ।
गीता मेनेजर-" मेम आपके भाई सूर्या जी तो बहुत अच्छे इंसान हैं, कंपनी के सभी वर्कर उनकी प्रसंसा कर रहें हैं, आज उन्होंने ने सबकी निजी समस्या सुनी तो सब लोग उनसे खुश हो गए" 
तान्या-" आप ज्यादा उसके करीब मत जाना, वो दिखने में जितना अच्छा है उतना ही अंदर से शैतान है,उसकी तारीफ़ मेरे से नहीं करना आज के बाद" तान्या गुस्से से समझाते हुए बोली ।
गीता तान्या से माफ़ी मांगते हुए अपने केबिन में चली गई ।गीता समझ जाती है की तान्या मेडम सूर्या से बहुत नफरत करती है, 
इधर सूरज अपने ओफ़ीस में बैठा कंपनी के हिसाब किताब को पढ़ रहा था तभी उसका फोन बजा, सूर्या ने फोन देखा तो पूनम दीदी का फोन था, सूर्या ने तुरंत फोन को उठाया।
सूरज-" हेलो दीदी" 
पूनम-" सूरज कहाँ है" घबराई हुई थी
सूरज-" दीदी कंपनी में हूँ अपनी, क्या बात है दीदी" 
पूनम-" तनु को तेज बुखार है घर आजा थोड़ी देर के लिए, तुझे बुला रही है" मैंने जैसे ही सुना तुरंत कंपनी से गाडी लेकर फ़ार्म हाउस निकल गया । गाडी को बड़ी तेजी से दौड़ता हुआ में लगभग 10 मिनट में फ़ार्म हाउस पंहुचा । में भागता हूँ तनु दीदी के कमरे में पंहुचा तो देखा मेरी माँ रेखा दीदी के सर पर ठन्डे पानी की पट्टिया रख रही थी और पूनम दीदी तनु के पास बैठी थी जैसे ही मुझे देखा माँ और पूनम दीदी के चेहरे पर ख़ुशी के भाव थे, मैंने तनु दीदी को देखा तो वो सो रही थी ।
रेखा-" आ गया बेटा"
सूरज-" हाँ माँ कैसी है दीदी की तबियत" 
माँ-" बेटा अब तो आराम है पूनम ने बुखार की दवाई खिला दी थी तबसे आराम है" 
में तनु के पास बैठ कर उसके माथे पर हाँथ से बुखार को देखने लगा, इस समय बुखार नार्मल था । मेरे हाथ रखते ही तनु की आँख खुली तो मुझे देख कर खुश हो गई ।
तनु-" सूरज तुम कब आए?"
सूरज-" दीदी अभी आया हूँ, आप चलो मेरे साथ दवाई दिलवा कर लाता हूँ" 
तनु-" अब ठीक हूँ सूरज" 
रेखा-" चली जा बेटा दवाई ले आ" 
पूनम-" में खाना बनाती हूँ सूरज" पूनम दीदी चली गई । माँ अभी भी तनु के पास बैठकर उसके सर को सहला रही थी ।
तनु-" माँ अब रहने दो में बिलकुल ठीक हूँ, काफी देर लेटने के कारण में बोर हो गई हूँ, बहार गार्डेन में टहल कर आती हूँ" फ़ार्म हाउस में ही सुन्दर बगीचा था जो कई एकड़ में फैला था, फलदार वृक्ष और कई प्रकार के छाया बाले पेड़ भी थे ।
रेखा-" ठीक है बेटा आप थोडा टहल लो" में और तनु दीदी बहार बगीचे की तरफ निकल आए ।
सूरज-" दीदी आपको बुखार आ गया, आपने बताया नहीं मुझे, कबसे आ गया" 
तनु-" परसो के दिन झरने के ठन्डे पानी से नहाए थे, तबसे ही हल्का हल्का बुखार था" 
सूरज-" ओह्ह्ह दीदी मेरी बजह से आपको यह तखलीफ साहनी पड़ी" बगीचे में घूमते घूमते काफी आगे तक निकल आए, जहां अंगूर और अनार के पेड़ थे ।
तनु-" कोई बात नहीं सूरज, उस दिन मजा भी तो बहुत आया था नहा कर" दीदी हँसते हुए बोली 
सूरज-" दीदी नहा कर मजा आया था या उस दिन जो किया था उससे मजा आया था" दीदी शर्मा गई, मैंने दीदी का हाँथ पकड़ कर अपनी बाहों में भींचते हुए कहा, 
तनु-" सूरज पता नहीं तूने ऐसा क्या जादू किया है मेरे ऊपर हर वक़्त तेरे ही ख्यालो में रहती हूँ, तू मेरा भाई, एक ही माँ की कोख से जन्मे है हम दोनों, फिर भी मैंने उस खून के रिश्ते को भुला कर तेरे साथ सम्भोग किया, रिश्ता कहता है की ये गलत है लेकिन मेरा जिस्म कहता है ये सही है, इसी उधेड़बुन में दो दिन निकल गए" 
सूरज-" दीदी हमने जो किया पता नहीं सही था या गलत लेकिन में इतना जानता हूँ की आपको बहुत ख़ुशी मिली उस काम को कर के और मुझे भी, फिर बो काम गलत नहीं हो सकता" मैंने तनु दीदी के लिप्स को चूसने लगा, दीदी ने भी मुझे कस कर गले से लगा लिया, पकड़ इतनी मजबूत थी दीदी की ऐसा लग रहा था की कब की प्यासी हैं दीदी, होंठ चूसने के बाद दीदी ने मेरे पुरे चेहरे को किस्स किया, मैंने भी दीदी के चेहरे को अपनी जीव्ह से चाटने लगा, दीदी की साँसे तेज हो गई,दीदी टीशर्ट पहनी थी नीचे लेगी पहनी हुई थी, मैंने टीशर्ट के ऊपर से दीदी के बूब्स को सहलाने लगा, निप्पल को मरोड़ने लगा, दीदी मेरे होंठ को चूसने लगी, 
दीदी की टीशर्ट को उतार दिया, दीदी ब्रा नहीं पहनी थी, और उनके बूब्स के निप्पल को चूसने लगा, एक हाथ से लेगी के ऊपर से ही दीदी की चूत को सहलाने लगा, दीदी की चूत पानी छोड़ रही थी, मैंने दीदी की लेगी को उतार दिया, 
तनु-" ओह्ह्ह सूरज जल्दी जल्दी कर लो, ज्यादा समय नहीं है हमारे पास, पूनम दीदी इंतज़ार कर रही होंगी" 
मैंने जल्दी से अपने कपडे उतारे, और दोनों नंगे ही मखमली घास पर लेट गए, दीदी मेरे लंड को चूसने लगी, और में दीदी की चूत में जीव्ह डालकर चूत का सारा पानी चाटने लगा, मैने तेजी से अपनी जीव्ह चूत के अंदर बहार करने लगा दीदी की साँसे तेजी से चलने लगी, एक दम उनका जिस्म अकड़ा और उनकी चूत से पानी का फब्बारा छूट गया, दीदी झड़ चुकी थी ऐसा लगा जाने कबसे प्यासी थी । दीदी की चूत से सफ़ेद और गाड़ा पानी वड़ा स्वादिष्ट था, मैंने जीव्ह से सारा पानी चाट लिया, 
तनु-" ओह्ह्ह सूरज रुक मुझे बहुत तेज पिसाव लगी है, अभी पिसाव करके आती हूँ" 

सूरज-" दीदी आपकी चूत का पानी बहुत स्वादिष्ट है, तो पिसाव भी स्वादिष्ट होगी, मेरे मुह पर बैठ कर मूतो दीदी, आपकी पिसाव पीना है मुझे" दीदी की चूत को चाटते हुए बोला 
तनु-" छी छी पिसाव नहीं पीते है सूरज, मुझे शर्म आ रही है में यह नहीं कर पाउंगी" 
सूरज-" प्लीज़ दीदी मूतो मेरे मुह" मैंने दीदी को अपने मुह पर बैठा लिया उनकी चूत मेरे मुह पर थी, तभी दीदी की चूत एक दम खुली और एक सिटी की आवाज़ के साथ मुत की धार मेरे मुह में गिरने लगी, पिसाव की धार इतनी तेज थी की मेरे पूरा मुह पिसाव से भर गया,और कुछ पिसाव मेरे चेहरे पर गिरने लगी, दीदी की नमकीन पिसाव को में गटकने लगा, थोड़ी देर बाद पिसाव करने के बाद मैंने दीदी को घोड़ी बना कर अपना लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया, एक बार चुदाई करने की बजह से इस बार लंड उनकी चूत को चीरता हुआ आसानी से पूरा घुस गया।
तनु-" ओह्ह्ह्ह मेरे भाई आराम से दर्द होता है,तेरी दीदी की चूत बहुत कोमल है आराम से लंड घुसा"
सूरज-" दीदी आपकी चूत में भट्टी लगी है क्या, बहुत गर्म है अंदर" मैंने धक्के मारते हुए कहा
तनु-" ये आग तूने ही लगाई है सूरज, आग मेरी चूत में ही नहीं पूरे जिस्म में लगी है, अब तू ही इसे बुझा मेरे भाई" दीदी गांड से धक्के मारते हुए बोली, में उनकी मखमली गांड को मसलने लगा और तेजी से चूत में लंड अंदर बहार कर रहा था ।
तनु-" आह्ह्ह्ह्ह् ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ मेरे भाई चोदो मुझे" 
सूरज-" आह्ह्ह्ह दीदी मेरा पानी छूटने वाला है" 
तनु-" सूरज अपना पानी मेरे मुह में छोड़ना बरना तेरे बच्चे की माँ बन जाउंगी में" दीदी झड़ते हुए बोली मेरा भी पानी निकलने बाल था दीदी ने चूत से लंड निकाल कर अपने मुह में डाल कर चूसने लगी तभी एक तेज पुचकारी दीदी के मुह में छूट गई और में उनके मुह में झड़ गया ।
वीर्य से उनका पूरा मुह भर चूका था दीदी सारा पानी गटक गई ।में दीदी के ऊपर गिर गया, सारा शारीर थक चूका था । 10 मिनट सांस सामान्य होने के बाद मैंने और दीदी ने जल्दी से कपडे पहने, और घर की ओर चल पड़े ।
तनु-" सूरज मजा आ गया, शारीर बहुत हल्का सा हो गया, 
सूरज-" दीदी सच में आप बहुत प्यारी हो, मन करता है आपको बाहों में चिपका कर रखू" दीदी ने मुझे गले लगा लिया ।
तनु-" भाई आज रात यही रुक जाओ, साथ में सोएंगे" 
सूरज-" दीदी आज नहीं, मुझे बहुत काम है ऑफिस का, कल आकर रुकुंगा" 
तनु-" ठीक है मेरे भाई" हम दोनों घर आ गए, पूनम दीदी हमारा ही इंतज़ार कर रही थी ।
पूनम-" आ गए तुम दोनों, चलो जल्दी से खाना खा लो" में और तनु दीदी बाथरूम में फ्रेस होकर खाना खाया ।
थोड़ी देर माँ और पूनम दीदी से बात करके अपने नए घर यानी की संध्या माँ के घर लौट आया ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

घर पहुँचते-पहुचते रात के 9 बज चुके थे। जैसे ही में घर पंहुचा माँ ने दरवाजा खोला, माँ के चेहरे पर इंतज़ार व् चिंता के भाव थे ।
संध्या-" बेटा इतनी देर कहाँ लगा दी, कहाँ गए थे तुम, कंपनी से तो जल्दी निकल आए थे आज, मैंने फोन से पता किया था" 
सूरज-" ओह्ह माँ आप परेसान मत हुआ करो, में एक जरुरी काम से कॉलेज चला गया था" 
संध्या-" बेटा फोन तो कर दिया कर, मुझे बहुत चिंता हो रही थी, शंकर डॉन भी आज जेल से रिहा हो गया है,इसलिए और ज्यादा डर लग रहा था ।
सूरज-" अच्छा हुआ माँ शंकर को आपने छुड़वा दिया, चलो माँ आप आराम कर लो" 
संध्या-" बेटा खाना तो खा ले" 
सूरज-"माँ आज बहार ही खाना खा लिया"
संध्या-" ठीक है बेटा जाओ तुम भी सो जाओ अब, थक गया होगा मेरा बेटा" माँ मुझे चूमते हुए बोली ।
अपने रूम में आकर मैंने कपडे उतारे और बेड पर लेट गया, रोजाना 12 बजे सोने की आदत थी मेरी इसलिए समय पास करने के लिए मैंने सूर्या का लेपटोप चालू कर लिया, wifi से इंटरनेट कनेक्ट करके सूर्या की फेसबुक चलाने लगा । थोड़ी देर सूर्या के मेसेज पढ़ने के बाद लेपटोप के सभी सॉफ्टवेयर को क्लीक करके देखने लगा, एक हिडन कैमरा के नाम से एप्स देखा मैंने उस पर क्लिक किया तो मैंने देखा उसमे बहुत सी पिक्चर दिखने लगी, मैंने गौर से देखा तो चोंक गया ये कैमरा इसी घर के सभी कमरो में लगा हुआ था जो wifi से से कनेक्ट होता है । माँ के कमरे में मैंने माँ को चलते फिरते देखा तो खुद हैरान था की सूर्या अपने ही घर की निगरानी करता था ।
मैंने हिडन कैमरा रिकॉर्डिंग पर क्लिक किया तो उसमे 6 महीने पहले की प्रत्येक दिन की वीडियो थी जिस पर दिनाक और समय अंकित था ।
मैंने एक वीडियो पर क्लिक किया तो उस विडियो में माँ को देखा जो रूम में लेट कर मोबाइल पर टाइम पास कर रही थी ।
दूसरे दिन की वीडियो में माँ को एक नाइटी पहने हुए देखा जो उनकी झांघो तक थी, यह सब देख कर मुझे बहुत शर्म आ रही थी और सोच रहा था की सूर्या ने ये कैमरा किस मक़सद से लगाएं होंगे । मैंने वीडियो को थोडा सा आगे बढ़ाया और जैसे ही वीडियो को देखा तो मेरी साँसे थम गई, पैरो तले जमीन खिसक सी गई, जिस माँ को मैंने हमेसा भारतीय संस्कृति में ढले हुए देखा वो सब ये वीडियो देखकर धूमिल हो गई ।
वीडियो में मैंने संध्या माँ को बेड पर नंगी चूत में ऊँगली करते हुए देखा, जिसमे मैंने एक औरत को हवस की आग में तड़पते देखा, वीडियो इतनी साफ़ थी की माँ का हर अंग विल्कुल साफ़ दिखाई दे रहा था उनकी आवाज़ जिसमे वो तड़प साफ़ सुनाई दे रही थी । मैने उस वीडियो को तुरंत बंद कर दिया, एक पुत्र होने के नाते मेरी मर्यादा ने मुझे यह सब देखने से रोक लिया हालांकि में जानता हूँ की संध्या मेरी सगी माँ नहीं है लेकिन सगी माँ से कम भी नहीं है । सूर्या के इस घिनोने कृत्य की में बार बार निंदा कर रहा था अपने मन में ।अपनी ही सगी माँ को इस हालात में देखना गलत है ।
मेरी नींद उड़ चुकी थी वीडियो देखने के बाद जिस माँ को हमेसा एक सम्मान और प्यार की नज़रो से देखा आज उसी के गुप्त अंगो को देख कर मुझे घ्रणित पाप सा लगा ।
संध्या माँ की उम्र लगभग 45 वर्ष की होगी, इस उम्र में अपने आपको बड़े अच्छे से मेनटेन किया था । उन्हें देख कर हर व्यक्ति उन्हें 35 वर्ष से ज्यादा नहीं बताएगा । जब से इस घर में आया मैंने संध्या माँ के पति को नहीं देखा न ही उनकी कोई तस्वीर देखी। जिसका पति न हो उस औरत की हालात क्या होती है ये में अच्छे से जानता हूँ। संध्या माँ से किसी दिन पूछूँगा सूर्या के पिता के बारे में । में बिस्तर पर लेट गया, लेकिन मेरा ध्यान बार बार संध्या माँ पर था। समझ नहीं आ रहा था की ये गलत है या सही है । सूर्या अपनी माँ को इस हालात में देखता होगा इसका मतलब उसकी नियत ख़राब थी अपनी ही माँ को हवस की नज़रो से देखता होगा कितना गलत इंसान था वो, तभी मेरे दिमाग में तनु को लेकर विचार आया की में भी तो गलत हूँ। मैंने तो अपनी ही बहन के साथ सम्भोग किया है ।तो सूर्या गलत कैसे वो तो सिर्फ देखता होगा लेकिन मैंने तो अपनी ही बहन के साथ सेक्स किया । ये सिर्फ परिस्तिथि पर निर्भर करता है मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ यदि शैली के साथ सेक्स करते हुए तनु न देखती तो उसके साथ सम्भोग नहीं करता में , हो सकता है सूर्या भी मजबूर हुआ होगा । संध्या माँ भी बेचारी क्या करे आखिर औरत की भी शारीरिक भूंक होती है । बहुत सी औरते तो अपने जिस्म की भूंक शांत करने के लिए बहार के मर्दों से चुदवा कर अपनी हवस को शांत करती है मुझे तो संध्या माँ पर गर्व होना चाहिए, गैर पराए मर्द से न चुदवा कर खुद ही अपनी भूंक को शांत कर लेती हैं ।पराए मर्दों से सेक्स करने का खतरा बना रहता है । ये सब बातें सोचकर मेरी लोअर में तम्बू बन गया था ।इस बात से में बहुत हैरान था की जान से प्यार करने बाली माँ के बारे में सोचकर मेरा लंड पानी छोड़ रहा था । में सोने का प्रयास करने लगा । मुझे कब नींद आ गईं पता नहीं चला । सुबह माँ के उठाने पर में जागा।



सुबह माँ के उठाने पर में उठा, रात भर जागने के कारण मेरी नींद पूरी नहीं हो पाई थी, मेरी आँखे हलकी लाल थी, माँ ने मेरी लाल आँखों को देखा तो घबरा सी गई ।
संध्या-" अरे बेटा तेरी आँखे लाल क्यूँ हैं, क्या रात भर सोया नहीं था तू" अब में माँ को कैसे बताता की आपके कमीने बेटा सूर्या को करतूत रात भर लेपटोप पर देखता रहा हूँ,इसलिए रात भर ढंग से सो नहीं पाया ।
सूरज-" माँ वो रात में अचनाक पेट में दर्द उठा इसलिए सो नहीं पाया था इसीलिए आँखे लाल हैं"माँ परेसान हो गई यह सुनकर 
संध्या-" ओह्ह बेटा पेट में दर्द था तो रात में बताया क्यूँ नहीं,रात में ही डॉक्टर को बुला लेती में,कमसे कम मुझे तो बता देता बेटा" 
सूरज-" माफ़ करना माँ,अब में ठीक हूँ,में जल्दी से फ्रेस होकर कंपनी निकलता हूँ माँ" 
संध्या-" कहीं नहीं जाएगा तू आज, रात भर परेसान रहा है,आज घर पर ही आराम कर,कल चले जाना बेटा" माँ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा" 
सूरज-" माँ में ठीक हूँ बिलकुल" 
संध्या-"मैंने बोल दिया न,आज आराम कर ले बेटा, तू आराम कर में तेरे लिए नास्ता यहीं लेकर आती हूँ" माँ नीचे चली गई, में बिस्तर पर आलस्य की बजह से फिर से लेट गया,नींद कब आ गई पता नहीं चला, जब आँख खुली तो देखा माँ मेरे पास ही बिस्तर पर लेती थी,मैंने घडी की ओर देखा तो 11 बज रहे थे, माँ अभी भी आँखे बंद किए सो रही थी, रात की घटना मेरे दिमाग में फिर से जाग्रत हुई,माँ का वह रूप बार बार मेरे दिलो दिमाग पर छाप बना चूका था। माँ को हवस की आग में तड़पना, उनकी सिसकारी और चीख बार बार मेरे दिलो दिमाग पर दस्तक दे रही थी ।
मैंने अपना ध्यान हटाते हुए माँ के मासूम चेहरे को देखा, माँ की मासूमियत किसी बच्चे की तरह थी,कितना प्यार करती है मुझे,हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखती है मेरा, में माँ के चेहरे को निहार रहा था तभी माँ ने करवट बदली, उनकी आँखे खुली।
माँ ने मुझे जागा हुआ देखा तो एक दम उठकर बैठ गई ।
संध्या-" अरे बेटा तुम जाग गए, तुझे सोया देखकर मुझे भी नींद आ गई,में तेरे पास ही सो गई, चल अब जल्दी से फ्रेस हो जा, में नास्ता कर ले बेटा" 
सूरज-" माँ बस अभी फ्रेस होकर नीचे आता हूँ" माँ नीचे चली गई ।
में फ्रेस होकर निचे पंहुचा और नास्ता किया। 
सूरज-" माँ हमारे पास इतना पैसा है।
सेकड़ो नोकरानी रख सकते है फिर आप खाना क्यूँ बनाती हो, खाना बनाने के लिए एक नोकरानी रख लो माँ आपको आराम रहेगा" 
संध्या-" बेटा तान्या को मेरे हाथ का खाना पसंद है इसीलिए खाना में ही बनाती हूँ, इतने बड़े घर में हम तीन लोग ही तो है, नोकरानी की जरुरत ही नहीं है, तीन चार नोकर है वो घर की साफ सफाई कर देते है" संध्या झूठ बोलते हुए बोली असल बात तो सूर्या की अय्यासी थी, तीन चार नोकरानी के साथ जबरदस्ती सेक्स कर चूका था इसलिए संध्या नोकरानी नहीं रखती थी, ये बात सूरज को नहीं पता थी।
सूरज-" कोई बात नहीं माँ" 
संध्या-" बेटा मुझे मार्केट जाना है तुम चलोगे मेरे साथ" 
सूरज-" ठीक है माँ में भी चलूँगा, वैसे भी अकेला रहा था बोर हो जाऊँगा" 
संध्या-" में तैयार होकर आती हूँ, बस 10 मिनट इंतज़ार करो"
सूरज-" okk माँ" संध्या तैयार होने चली गई, संध्या किसी पार्टी में जाती तो साडी ही पहनती थी लेकिन मार्केट जाने के लिए वो जीन्स और ऊपर कुर्ता पहन लिया करती थी ।आज भी संध्या ने जीन्स और ऊपर कुर्ता पहना हुआ था, जैसे ही संध्या कमरे से बहार निकलती है सूरज अपनी माँ को देखकर दंग रह गया था,उसने पांच महीनो में पहली बार माँ को जीन्स पहने हुए देखा था।घर में मेक्सी या सलवार कुरता ही पहने देखा था, मंदिर जाते समय साडी में देखा है, 
हालांकि सूर्या कंपनी की मालकिन थी, करोडो अरबो रुपए की मालकिन के लिए जीन्स पहनना कोई बड़ी बात नही थी ।
बड़े घर की महिलाएं जीन्स पहनती थी ।
सूरज संध्या के इस रूप को देख कर खो जाता है, संध्या जीन्स के ऊपर लॉन्ग कुर्ता पहने हुए थी आँखों पर बड़ा काला चश्मा लगाए हुए देख कर कोई नहीं कह सकता था की 45 वर्ष की उम्र की महिला है, संध्या की उम्र 32 साल की लग रही थी । बिलकुल बिद्या बालन की तरह उसका रूप था ।
बेटे के ऐसे घूरने की बजह से संध्या शर्मा जाती है ।
संध्या-" बेटा चले मार्केट" सूर्या की ओर चुटकी बजाते हुए उसका ध्यान भटकाती है और हँसने लगती है ।
सूरज-" हा हाँ माँ चलो" दोनों लोग बहार गाडी में बैठ जाते है । सूरज गाडी चलाता है संध्या बगल बाली सीट पर बैठ जाती है ।
सूरज नज़र छुपाते हुए कभी संध्या को देखता तो कभी सामने, 
सूरज-" माँ किधर चलना है, कौनसी मार्केट ?" 
संध्या-"डेल्टा मोल में चलो वहीँ शॉपिंग करुँगी" सूरज डेल्टा मॉल की तरफ गाडी दौड़ता है, 10 मिनट में दोनों मॉल पहुँच जाते हैं ।
सूरज गाड़ी को पार्किंग में लगा कर संध्या और सूरज मॉल के अंदर चले जाते हैं ।
संध्या एक मेकअप की शॉप पर जाकर बहुत सारा सामन खरीदती है, सूरज बहार मॉल में आते जाते लोगों को देख रहा था, 
संध्या मेकअप का सामन खरीदने के बाद सूरज के पास आती है।
संध्या-" बेटा तुम यहीं 10 मिनट रुको मुझे अपने लिए कुछ कपडे खरीदने हैं" 
सूरज-" ठीक है माँ, में यही आपका इंतज़ार कर रहा हूँ" संध्या एक कपडे के काउण्टर पर जाकर अपने लिए दो तीन मेक्सी और ब्रा पेंटी खरीदती है ।उसके बाद जीन्स और कुर्ता खरीदने चली जाती है । इधर सूरज को पिसाव लगती है तो वह बाथरूम ढूंढता है तभी उसे टॉयलेट दिखाई दिया सूरज को बड़ी तेज पिसाव लग रही थी सूरज टॉयलेट में घुसते ही पेंट की जीप खोल कर अपना लंड निकालता है और बाथरूम का दरवाजा खोलता है तो एक दम चोंक जाता है अंदर एक खूबसूरत महिला जिसकी उम्र लगभग 40 की होगी वह पिसाव करके अपनी चूत को पानी से धो रही थी जैसे ही बाथरूम का दरवाजा सूरज ने खोला तो उसकी नज़र सीधे उस खूबसूरत महिला की चूत पर गई।और उस महिला की नज़र सीधे सूरज के लंड पर जाती है, सूरज पिसाव करने ही वाला था एक दम रुक जाता है लेकिन सूरज की पिसाव आखरी मोड़ पर आ चुकी थी सूरज वहीँ बहार पिसाव करने लगता है ।इधर 
महिला ने जल्दी से पेंटी पहन कर बहार आई और सूरज पर चिल्लाई ।सूरज बहार पिसाव करके लंड की टपकती बून्द को हिला कर निकाल रहा था । महिला सूरज के लंड को पुनः देखती हुई फिर से गुस्से से बोली 
महिला-" ऐ लड़के तुझे शर्म नहीं आती है महिला के टॉयलेट में क्या कर रहा है तू" सूरज गलती से महिला टॉयलेट में घुस आया था ।
सूरज-" ओह्ह्ह माफ़ कीजिए आंटी, में गलती से आ गया" पेंट में लंड डालकर बोला 
महिला-" ये आजकल के लड़के जानबूझ कर गलतियां करते है, में सब जानती हूँ, बहार निकल जाओ बर्ना में अभी सिक्योररिटी को बुला कर शिकायत कर दूंगी" महिला ने चिल्ला कर गुस्से से बोला, सूरज तो भयभीत हो गया ।
सूरज-" मेरा यकीन कीजिए आंटी जी में गलती से आ गया था और बहुत तेज पिसाव लगी इसी लिए अपने आपको रोक नहीं पाया" इतना बोलकर सूरज बाथरूम से निकल कर सीधे संध्या के पास चला जाता है । संध्या की सारी शॉपिंग हो चुकी थी ।
संध्या-" बेटा शॉपिंग तो हो गई, तेरे लिए एक जोड़ी पेंट शर्ट भी ले ली है, तुझे और कुछ लेना है तो बोल" 
सूरज-" माँ मुझे कुछ नहीं लेना है अब चलो घर चलते हैं" सूरज उस महिला के डर से निकलना चाह रहा था ।
संध्या-" बेटा 10 मिनट रुक तान्या के लिए एक अच्छी सी ड्रेस ले लू" संध्या इतना बोलकर ड्रेस लेने दूसरे काउंटर पर जाती है जहां वह बाथरूम बाली महिला थी ।वो महिला जैसे ही संध्या को देखती है एक दम आवाज़ लगाती है ।
महिला-" संध्या तुम यहाँ" संध्या जैसे ही उस महिला को देखती है तो ख़ुशी से गले लगा लेती है ।
संध्या-" अरे मधु तू" महिला का नाम मधु था जो बाथरूम में थी । मधु संध्या की सहेली थी दोनों ने साथ साथ एक ही स्कूल में पढ़ाई की और मौज मस्ती की ।
मधु-" संध्या तू तो बिलकुल बैसी ही है बिलकुल नहीं बदली,
संध्या-" तू भी तो बैसी ही है, तू लन्दन से कब आई" मधु शादी के बाद लन्दन चली गई थी, आज दोनों सहेलियां 22 साल बाद मिली थी ।
मधु-" मुझे 15 दिन हो गए यहाँ आए, ये बता यहाँ मॉल में किसके साथ आई है" 
संध्या-" में अपने बेटे के साथ आई हूँ और तू किसके साथ आई है?" 
मधु-" में अकेली आई हूँ, बेटा तो बहुत बड़ा हो गया होगा तेरा, कहाँ है वो मुझे तो मिलवा उससे" 
संध्या-" मिलवा दूंगी थोड़ी शान्ति तो कर, अभी यहीं आ रहा होगा सूर्या, और बता मधुबाला,कैसी है तू" संध्या हँसते हुए बोलती है, आज बहुत खुश भी थी क्यूंकि बचपन की सहेली जो मिली थी ।
मधु-" वो सब छोड़ तुझे अभी की एक घटना सुनाती हूँ, इस मॉल में लड़के बड़े हरामी है, अभी में बॉथरूम में पिसाव कर रही थी तभी एक बत्तमीज लड़का अपना हथियार निकाल कर मेरे सामने ही पिसाव करने लगा, में तो घबरा गई की कहीं मेरा बलात्कार न कर दे वो" मधु को क्या पता है जिस लड़के का हथियार देखा वह उसकी सहेली संध्या का ही बेटा है ।
संध्या-" क्या उसने भी बहीं पिसाव कर ली तेरे सामने?" 
मधु-" हाँ और क्या, बड़ा बत्तमीज था,अपना हथियार निकाल कर मेरे सामने ही मूत रहा था, में तो डर ही गई" 
संध्या-" तू लड़को के हथियार से कबसे डरने लगी, भूल गई कॉलेज के समय तू नए नए लड़को को फंसा कर उनके हथियार से खेलती थी" संध्या ने पुरानी यादों को याद दिलाते हुए कहा ।
मधु-" तू भी तो कम नहीं थी मेरी हर चुदाई को छुप कर देखती थी, और खुद उंगलियो से शांत करती थी अपनी चूत की आग को" संध्या-" हाँ खुद ही ऊँगली से शांत कर लेती थी लेकिन तेरी तरह किसी लड़के के हथियार से नहीं खेलती थी"
मधु-" हाँ ये बात तो ठीक है तेरी, यार संध्या उस लड़के का हथियार बाकई बहुत मोटा और लंबा था, उसका हथियार देख कर तो आज मेरी चूत भी गीली हो रही है" संध्या ये सुनकर हैरान थी ।
संध्या-" शर्म कर और अपनी उम्र तो देख ले तेरे बेटे की उम्र का ही होगा वो, वैसे एक बात बता तेरे बच्चे कितने हैं और कितनी उम्र के हैं?" 
मधु-" मेरी सिर्फ एक बेटी है 23 वर्ष की, और तेरे कितने बच्चे हैं संध्या" 
संध्या-" मेरे दो बच्चे हैं बड़ी बेटी 24 साल की है और बेटा 22 साल का है" 
मधु-"बहुत बढ़िया है यार, चल अब जल्दी से शॉपिंग कर ले फिर तेरे बेटे से मिलवा मुझे, में भी तो देखूं मेरा बच्चा कैसा है" दोनों सहेलियां शॉपिंग करके बहार आती हैं।
संध्या-" तू आज मेरे घर चलेगी, बहुत सारी बातें करनी है तुझसे" 
मधु-" ठीक है मेरी जान आज तेरे साथ ही चलूंगी, बैसे भी में 15 दिनों से अकेली बोर हो रही थी, बेटी लन्दन में ही है, में अकेली ही आई हूँ इंडिया" 
संध्या-" फिर तो तू मेरे घर ही रहेगी" 
मधु-" ठीक है यार, अब चल जल्दी से औने बेटे को बुला कहाँ है वो" 
अब आगे देखते हैं क्या होता है...


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

"ओह , ये तो तुम्हारे साथ बहुत बुरा हुआ , समीर । लेकिन मेरी दोस्त के मामले में तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होगा ।
जहाँ तक मुझे मालूम है वो आजकल सिंगल ही है और अभी तो वो सेक्स के लिए उतावली भी है ।
तुम्हें भी बहुत मज़ा आएगा उसके साथ , सच में , मेरा यकीन मानो तुम ।”

ये सुनकर समीर हंस दिया । रिया के साथ अब उसका मूड भी थोड़ा ठीक हो गया था ।

“ वो बहुत अच्छी लड़की है और खूबसूरत भी । बल्कि मुझसे भी कहीं ज्यादा सुन्दर ।
मुझे उसको अपने से सुन्दर बताने में जलन हो रही है । लेकिन वो वास्तव में बहुत सुन्दर है तुम मेरा विश्वास करो । “

मूड थोड़ा ठीक होने से समीर को रिया का ये प्रस्ताव भा जाता है ।
जब लड़की की इतनी तारीफ ये कर रही है तो मौका हाथ से क्यों जाने दूँ ।
काम्या के साथ वैसे भी उसकी KLPD हो गयी थी।
अब अपनी अधूरी रह गयी उत्तेजना को शांत करने का ये सुनहरा मौका था ।

" ठीक है , मैं तैयार हूँ । "

“एक बात और है समीर , मेरी दोस्त फर्स्ट फ्लोर में एक अँधेरे कमरे में है ।
और वो अपनी पहचान उजागर करना नहीं चाहती । वो तुमसे कुछ भी नहीं बोलेगी और तुम भी उसे कुछ नहीं बोलोगे ।
अजनबियों की तरह सेक्स करोगे और बिना कुछ बोले ही कमरे से बाहर आ जाओगे ।
मंजूर है तुम्हें ? “

“ ये है तो कुछ अजीब सी बात लेकिन चलेगा । तुम चाहती हो कि मैं अभी जाऊं उसके पास या …..”
समीर ने अपनी बात अधूरी छोड़ दी ताकि ये न लगे कि वो सेक्स के लिए उतावला हो रहा है ।

“तुम्हारी मर्ज़ी जब भी तुम जाना चाहो । मैं तुम्हें वो कमरा दिखा देती हूँ ।
मैं फिर से तुम्हें बता रही हूँ कि अगर तुम्हें कुछ बोलना पड़ ही जाये तो अपनी आवाज़ चेंज कर के धीमे से बोलना
और जितना हो सके कम से कम शब्द ही बोलना , ठीक है ? ”

“ ठीक है । "

रिया समीर को कमरे की तरफ ले जाती है ।
कमरे के पास पहुंचकर दोनों रुक गये ।

“ दरवाज़ा खोलने से पहले मुझसे वादा करो कि तुम मेरी प्यारी दोस्त को कोई भी कष्ट नहीं दोगे ।
मैं नहीं चाहती कि उसे कुछ भी परेशानी हो । “

समीर सहमति में सर हिला देता है और कमरे के अंदर जाकर दरवाज़ा बंद कर देता है ।

आँचल बेड पर दरवाज़े की तरफ पीठ करके बैठी थी अँधेरे और सुनसानी की वजह से वह अपने दिल की तेज धड़कनो को साफ़ महसूस कर पा रही थी । घबराहट से वो हांफ रही थी और उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी ।

तभी दरवाज़ा खुलने और बंद होने की आवाज़ कमरे में गूँज उठी और उसके पीछे से क़दमों की आहट नज़दीक आते गयी । आँचल नर्वस होकर अपने हाथ आपस में मलने लगी । उसकी घबराहट और बढ़ गयी । एक अनजाने डर से उसके शरीर में एक कंपकंपी सी दौड़ गयी । तभी उसने अपने कन्धों पर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस किया । उसका शरीर बुरी तरह से काँप उठा ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

सूरज मॉल की चकांचौध देखने में व्यस्त था तभी उसे संध्या माँ की याद आती है।काफी देर हो चुकी थी वो संध्या को ढूंढते हुए उसी काउंटर की तरफ जाता है जहाँ उसने संध्या को शॉपिंग करते हुए छोड़ा था। सूरज काउंटर की तरफ पहुचने ही वाला था की तभी उसे संध्या की आवाज़ सुनाई पड़ी । 
संध्या-"सूर्या बेटा में इधर हूँ" संध्या और मधु दोनों लेडीज काउंटर पर खड़ी थी, 
जैसे ही मधु की नज़र सूर्या पर पड़ी तो एक दम चोंक गई, पैरो तले जमीन खिसक गई थी । मधु हैरान थी की जिस लड़के को आज डांट लगाईं वो संध्या का ही बेटा है। इधर सूर्या जैसे ही अपनी माँ के साथ उस बाथरूम बाली सुन्दर आंटी को देखता है तो उसकी गांड फट जाती है । घबराहट की बजह से पसीना उसके माथे पर बह रहा था । सूर्या सोचता है की शायद इस आंटी ने मेरी माँ से शिकायत कर दी है, अब माँ मेरे बारे में क्या सोचेगी, जिस बात का डर था वही हो गया ।
संध्या-" क्या हुआ बेटा तू इतना परेसान क्यूँ है, तेरे माथे पर यह पसीना कैसा है' संध्या सूर्या के माथे पर पसीना और चेहरे पर घबराहट देखती है तो घबरा जाती है ।
संध्या का सामान्य व्यवहार देखकर सूरज की घबराहट कुछ कम होती है लेकिन जैसे ही मधु की तरफ देखता है तो उसका हलक सुख जाता है शब्द नहीं निकल रहे थे, बड़ी हिम्मत के साथ सूरज बोलता है ।
सूरज-" म में ठीक हूँ माँ, आपको ढूढ़ रहा था, आप नहीं दिखी इसलिए घबरा गया था" 
संध्या-" बहुत प्यारा है मेरा बेटा, अरे मधु तू कुछ बोल क्यूँ नहीं रही है, यही तो है मेरा बेटा सूर्या, अभी तो बेटा से मिलने की रट लागए थी तू" मधु को हिलाते हुए बोली 
संध्या-" सूर्या बेटा ये मेरी सबसे प्यारी सहेली मधु है लन्दन से आई है, मेरी बहन की तरह ही है, तेरी मोसी है ये" संध्या मधु की ओर इशारा करती हुई बोली ।
सूरज-" नमस्ते मौसी जी" सूर्या मधु की ओर हाथ जोड़ कर मासूमियत से नमस्ते बोलता है । मधु समझ गई थी की सूर्या घबराया हुआ है मुझे देख कर, उसकी मासूमियत सी सूरत देख कर हलकी हँसी आ जाती है । इधर सूर्या का भी डर निकल गया था, मधु तो माँ की सहेली निकली, उसे लगा शायद बाथरूम बाली घटना की शिकायत करने आई है ।
मधु-" नमस्ते सूर्या बेटा" मधु इतना ही बोल पाई, जिस लड़के के हथियार को देखकर उसकी चूत गीली हो गई थी ईश्वर ने उसी लड़के को बेटा के रुप में भेजा था, ईश्वर की अदभुद विडम्बना के लिए कोष रही थी मधु, आखिर मधु सूर्या की मोसी थी, और मौसी तो माँ सामान होती है । भले ही सूर्या की सगी मौसी नहीं थी फिर भी खून के रिश्ते से गहरा रिश्ता मानती थी मधु।
संध्या-" चलो अब काफी देर हो गई है, घर चलते हैं बेटा, मधु भी आज हमारे साथ घर चलेगी" संध्या ने सूर्या को खुश होते हुए बताया ।इस खबर से सूर्या ज्यादा चिंतित हो गया था, कहीं मधु माँ को बाथरूम बाली घटना न बता दे । सूर्या मन बनाता है की घर चल कर मधु से पुनः अपनी गलती की माफ मांग लेगा, ताकि मधु संध्या को बाथरूम बाली बात न बताए ।
सूरज-' चलो माँ, काफी देर हो चुकी है" तीनो लोग मॉल से बहार निकल कर गाडी में बैठकर घर की ओर निकल गए ।
संध्या मधु को शांत देखकर उसे थोडा अटपटा लगता है वो मधु को झकझोरती हुई पूछती है । संध्या मधु के साथ पीछे ही बैठी थी और सूर्या गाडी चला रहा था ।
संध्या-" तुझे क्या हुआ मधु, चुप कैसी है" 
मधु-" कुछ नहीं संध्या, में ठीक हूँ" 
मधु मुस्कराती हुई बोलती है हालांकि वो सूर्या की बजह से चुप थी, सूर्या उसकी चूत देख चूका था और मधु सूर्या का लंड देख चुकी थी इसलिए अभी भी बाथरूम बाली घटना को याद करके परेसान थी । घर आ चूका था सूरज गाड़ी रोकता है । संध्या और मधु दोनों घर के अंदर प्रवेश करती हैं । दोनों सहेलियां सोफे पर बैठ जाती है । सूरज गाडी खड़ी करके अंदर आता है और ऊपर जाने लगता है तभी संध्या रोकती है ।
संध्या-" अरे बेटा तुम थोड़ी देर अपनी मधु मौसी से बात करो, में कपडे बदल कर आती हूँ" सूर्या तो चोंक जाता है ।
सूर्या-" ठीक है माँ" संध्या के जाते ही सूर्या मधु के पास सोफे पर बैठ जाता है ।और मधु से पुनः माफ़ी मांगता है ।
सूरज-" मौसी मुझे माफ़ कर दीजिए, में गलती से लेडीज टॉयलेट में घुस गया था, मुझे नहीं पता था, मुझे बहुत तेज पिसाब का रही थी, प्लीज़ आप माँ को नहीं बताना" सूर्या मासूमियत के साथ बोला ।

मधु-" तुम इतना घबरा क्यूँ रहे हो! चलो ठीक है में नहीं बताउंगी, अब खुश हो" मधु मुस्कराती हुई बोली, सूर्या के जान आई यह सुनकर, अब उसका डर निकल गया था ।
सूरज-" thankes आंटी, ओह्ह सॉरी मौसी, आप बहुत अच्छी हो, में तो बहुत डर ही गया था आज, मुझे लगा शायद आपने माँ से शिकायत कर दी होगी" 
मधु-" संध्या को तो मैं बता चुकी हूँ बाथरूम बाली घटना लेकिन यह नहीं बताया था की तू ही था"
सूरज-" क्या आपने बता भी दिया माँ को, वैसे मौसी आप मेरा यकीन करो में गलती से लेडीज टॉयलेट में घुस गया था, पिसाब भी बड़ी जोरो पर लगी थी मुझे" 
मधु-" अगर में नहीं चिल्लाती तो तू मेरे ऊपर ही मूत देता, चल कोई बात नहीं सूर्या, घबरा मत में किसी से नहीं कहूँगी, आखिर तू अब मेरा बेटा" संध्या रूम से निकली, और सोफे पर आकर बैठ गई, 
संध्या-' क्या बात हो रही है तुम दोनों में" 
मधु-" संध्या मुझे तो सूर्या बेटा बहुत अच्छा लगा" मधु सूर्या की तारीफ़ करती है, सूरज को अच्छा लगा ।
संध्या-" बेटा किसका है" संध्या घमंड के साथ हँसते हुए बोलती है ।
तीनो लोग आपस में काफी देर बात करते हैं। शाम हो चुकी थी ।
संध्या-" मधु बोल क्या खाएगी, अपनी पसंद बोल" 
मधु-" आज चिकेन बना, तेरे हाथ का चिकेन कई सालो से नहीं खाया है" 
संध्या-" बेटा सूर्या नोकर से कह दो मार्केट से चिकेन ले आएं" 
सूर्या-" माँ में ही मार्केट से ले आता हूँ चिकेन"
मधु-" संध्या में भी सूर्या के साथ अपने घर तक चली जाती हूँ, मेरा कुछ जरुरी सामान है सो लेती आउंगी" 
संध्या-" ठीक है मधु जल्दी आ जाना" 
सूर्या और मधु दोनों गाडी से निकल जाते हैं, सूरज गाडी चला रहा था और मधु आगे बैठी थी ।


सुर्या गाड़ी चला रहा था मधु साथ वाली सीट पर बैठी थी । मधु सूर्या के साथ बाथरूम बाली घटना को लेकर उसके जिस्म में एक लहर सी थी, आखिर उत्साहित क्यूँ न हो वो, सूर्या का मोटा और लंबा हथियार उसके जहन में बसा हुआ था, मोटा हथियार पाने की लालसा और लालच उसके दिलो दिमाग में बस चूका था, 44 वर्षीय हवस की भूकी मधु को अपनी गर्मी शांत करने के लिए ऐसे ही लंडो की तलाश हमेसा से थी, इसलिए सूर्या पर डोरे डालने का पूरा मन बना चुकी थी वो, इधर सूर्या भी शैली और तनु की चुदाई करने के कारण उसका मन चुदाई करने के लिए अत्यधिक आकर्षित होता जा रहा था, सूर्या के ऊपर चूत का खुमार चढ़ चूका था आखिर जवान है तो सेक्स की इच्छा होना भी लाजमी है, अब तक अपनई हवस को जैसे तैसे अपने जिस्म में कैद करके समय बिताया हो लेकिन अब उसकी हवस आज़ाद हो चुकी थी,हर दिन हर पल चुदाई के बारे में सोचने के कारण उसका लंड चूत की बली मांगने लगा था । मधु को जब उसने बाथरूम में चूत को साफ़ करते हुए देखा तो उसका लंड चूत के प्रति और भड़क गया था, वो हस्तमैथुन मार कर लंड शांत करना चाहता था परंतु उसे समय न मिलने के कारण मन मसोस कर ही हथियार बैठालना पड़ा ।
मधुर और सूरज दोनों अपनी सोच में डूबे हुए थे तभी मधु का घर आ जाता है उसे पता ही नहीं चलता ।
मधु-" ओह्ह्ह सूर्या बेटा रुक जा, घर आ चूका है"' सूर्या तुरंत गाडी को रोकता है, मधु सूर्या को लेकर अपने घर की ले जाती है ।

मधु-" आओ बेटा, यही मेरा घर है" मधु चावी से घर का ताला खोलती है ।
सूर्या-" मौसी कोई रहता नहीं है यहाँ पर?"
मधु-" मेरे माँ और पिताजी तीर्थ यात्रा पर गए हैं, दस दिन बाद आएँगे वो" 
सूर्या-" कोई बात नहीं मौसी जब तक आपके माता पिता न आ जाए तब तक आप हमारे साथ रहो" 
मधु-" हाँ बेटा, में अकेली बोर हो जाती हूँ इस घर में" मधु दरवाजा खोल कर सूर्या को अंदर लेकर जाती है, घर बहुत आलिशान बना हुआ था, मधु और सूर्या दोनों सोफे पर बैठ जाते हैं,
मधु-" सूर्या बेटा 10 मिनट रुको में कपडे बदल लेती हूँ, और थोडा जरुरी सामन भी पैक कर लेती हूँ, जब तक तुम बैठो" इतना कह कर मधु कमरे में जाकर अपने कपडे उतारती है, आज मधु ने साड़ी पहनी थी, मधु साडी उतार कर ब्लॉउज और पेटीकोट उतार देती है । मधु का जिस्म गदराया हुआ था थोड़ी सी मोटी थी लेकिन ज्यादा नहीं थी ।मधु की चूचियाँ 38 साइज़ की और ब्राउन निप्पल उसके जिस्म को और ज्यादा आकर्षित करते थे ।मधु ब्रा उतारती है, उसकी चुचिया ब्रा में कैद होने के कारण हवा में आजाद होकर झूलती हैं, मधु का जिस्म एक दम दूधिया जैसा था । मधु जैसे ही अपनी पेंटी पर हाथ फिराती है तो उसके जिस्म में सिरहन सी दौड़ जाती है, उसकी पेंटी चूत रस से भीगी हुई थी।मधु पेंटी को उतार कर चूतरस को उसी पेंटी से पोंछती है। पेंटी से चूत के छेद को रगड़ने के कारण उसके जिस्म में एक खुमारी सी चढ़ने लगती है ।उसकी साँसे तेजी से चलने लगती है, उत्तेजित हो जाती है, सूर्या के लंड की कल्पना करते ही उसके सिसकी फूटने लगती है, मधु अपनी अलमारी खोल कर बायब्रेट वाला डीडलो (कृत्रिम रबड़ का बना लंड) निकालती है और अपनी चूत की फांको पर रगड़ने लगती है उत्तेजना और चूत की हवस के चक्कर में मधु यह भूल जाती है की सूरज कमरे के बहार सोफे पर बैठा है, डिडलो की आवाज़ ऐसी थी जैसे किसी तेज सायरन की आवाज़ हो, डिडलो और मधु की सिसकारी दोनों एकसाथ निकलने के कारण आवाज़ की तीब्रता और ज्यादा बढ़ गई थी।
मधु हवस की आग में झुलसने लगती है तड़पती हुई डिडलो को ज्यो ही चूत के अंदर प्रवेश करती है उसके मुख से आनंद और उत्तेजना की मिली जुली चीख से पूरा कमरा गूंजने लगता है, जैसे ही मधु के चीखने की आवाज़ सूरज के कानो में पड़ती है तो सूरज चोंकता हुआ मधु के कमरे की और दौड़ता हुआ कमरे के पास जाता है, कमरा अंदर से बंद था, सूरज बहार खड़ा होकर मधु को आवाज़ लगाता है ।
सूरज-" मौसी क्या हुआ, आप चीखी क्यूँ" सूरज दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोलता है। मधु की चूत में डिडलो बड़ी तेजी से अंदर बहार करके अपनी प्यास बुझाने में व्यस्त थी, बेड पर चित्त लेट कर टांगो को ऊपर करके अपनी चूत में बड़ी तेजी से डिडलो से को चूत की गोलाकार दीवारो से रगड़ते ही उसकी चूत से पानी रिसने लगता है । मधु एक हाँथ से चुचियो को मसलती है तो दूसरे हाँथ से चूत की गर्मी को शांत करने में यह भूल जाती है की दरवाजे पर सूर्या खड़ा उसे आवाज़ मार रहा था । इधर सूर्या जब कोई जवाब मधु की ओर से नहीं आता है तो तेज तेज दरवाजा बजाता हुआ मधु को आवाज़ लगाता है, इस बार मधु के कानो तक सूर्या की आवाज़ को पाकर तुरंत सतर्क हो जाती है और तुरंत डिडलो को चूत में फंसाकर ही सूरज को आवाज़ देती है ।
मधु-" एक मिनट सूर्या अभी आई" कांपती हुई आवाज़ में बोलती है, मधु तुरंत डिडलो को स्विच ऑफ़ करती है जिससे उसका बायब्रेट होना बंद हो जाता है लेकिन डिडलो चूत में ही फसा रखती है, क्यूंकि मधु अभी तक झड़ी नहीं थी, और मधु की ये रोज की बात थी जब तक उसकी चूत से पानी न निकल जाए तब तक डिडलो को चूत में डालकर पेंटी पहन लेती थी, कई बार तो वो डिडलो को चूत में डालकर मार्केट या घर में काम करती रहती थी। 
मधु एक खुली मेक्सी पहनती है जिसमे बटन की जगह बेल्ट होती है । मधु दरवाजा खोलती है बहार सूर्या घबराया हुआ चेहरा लेकर खड़ा था, जब वो मधु को मेक्सी में देखता है तो उसका लंड झटके मारने लगता है, चूँकि उसकी मेक्सी उसकी जांघो तक ही थी अंदर ब्रा और पेंटी न होने के कारण हलकी सी चुचियो की आकृति दिखाई दे रही थी ।
मधु-" क्या हुआ बेटा, में कपडे पैक कर रही थी, इसलिए तुम्हारी आवाज़ नहीं सुन पाई" 
मधु कमरे से बाहर आती हुई बोलती है ।
सूरज-" मोसी मैंने आपके चीखने की आवाज़ सुनी तो डर गया था मुझे लगा शायद आपको कोई परेसानी है, इसलिए में घबरा गया था" मधु सूरज की बात सुनकर घबरा जाती है की कहीं सूर्या को शक तो नहीं हो गया ।
मधु-" अरे वो चीखने की आवाज़ तो टी.वी. से आ रही थी, मैंने टी वी चला रखी थी" मधु झूठ बोलते हुए घबरा रही थी सूरज समझ जाता है की मौसी झूठ बोल रही है।
सूरज-" कोई नहीं मौसी, आप जल्दी से तैयार हो जाओ" 
मधु-" बस अभी तैयार होती हूँ, अरे हाँ में तो भूल ही गई तू आज पहली बार घर आया है और मैंने तुझे चाय और कोफ़ी की भी नहीं पुंछी, बता क्या पियेगा" मधु सूर्या के सामने खड़े होकर बोलती है जिसके कारण सूरज की नज़र मधु की चुचिया हिलती हुई नज़र आती हैं, मेक्सी की पारदर्शिता के कारण चूचियाँ और काले निप्पल साफ़ साफ दिखाई दे रहे थे, निप्पल के खड़े होने के कारण ऐसा लग रहा था जैसे पहाड़ो की दो चोटियां हो, सूरज का मन करता है की 
चाय और कोफ़ी की जगह मधु के मोटे मोटे दूध का रसपान कर लू, उसका लंड पेंट में अकडने लगता है ।
सूर्या-" मौसी कुछ भी पिला दो" सूर्या यह बात मधु के बूब्स की ओर देखते हुए बोलता है, मधु समझ जाती है की सूर्या की नज़र उसकी चूचियों की तरफ है, मधु को थोड़ी सरारत सूझी, और सूरज को उकसाने का बहाना भी मिल जाता है । 
मधु-" बेटा दूध पियोगे, दूध भी बहुत सारा है? मधु झुक कर पूछती है । सूर्या सोफे पर बैठा था जिसके कारण उसके बड़े बड़े बूब्स मेक्सी से आधे से ज्यादा सूरज के सामने प्रदर्सन करने लगते हैं । सुबह से ही सूरज का लंड पेंट में बगावत कर रहा था अब मधु की अधनंगी चुचियो की झलक पाकर उसका लंड संघर्ष करने के लिए अपनी पूरी अकड़ में आ चूका था । 
सूरज-" मौसी दूध तो मेरा सांसे मनपसंद है आप दूध ही पिला दो" मधु की नज़र चुचियो पर थी जिसके कारण मधु की चूत में खुजली मचने लगती है । डिडलो चूत में फसा होने के कारण उसे हल्का हल्का मजा का अहसास होता है । मधु अपनी झांघो को जब आपस में मिलाती तो डिडलो की रगड़ से उसकी को मजा मिलता । हलकी सी सिसकारी के साथ मधु की आँखे भी नशीली हो जाती थी 
मधु-" अभी लेकर आती हूँ तेरे लिए दूध" कामुक अंदाज़ में बोलकर मधु सामने किचेन में जाती है और जाते ही सबसे पहले अपने डिडलो को चूत में अंदर सरकाती है, चूत रस निकलने के कारण डिडलो बहार की और सरक रहा था, जल्दबाजी में बेचारी पेंटी पहनना तो भूल ही गई थी ।मधु जब डिडलो को अंदर सरकाती है तो उसके मुह से सिसकारी फूटती है और चूतरस से उसकी उँगलियाँ भीग जाती हैं । मधु उन्ही हांथो से भगोने का दूध एक गिलास में डालकर सूरज को लेकर आती है । मधु की चूत का रस गिलास के इर्द गिर्द लग जाता है और उसी ग्लास को सूरज को देती है । जब सूरज उस ग्लास को पकड़ता है तो उसकी उँगलियों में सफ़ेद चूतरस लग जाता है। सूरज उस गाढ़े चिपचिपे पानी को देखते ही समझ जाता है की यह चूत से बहने बाला पानी है । सूरज मजा लेते हुए मधु से बोलता है ।
सूरज-" मोसी ये दूध की मालाई तो बहुत गाढ़ी है, मुझे तो यह मलाई बहुत पसंद है" 
सूरज चूत रस को दिखाते हुए बोलता है जो उसकी उंगलियो पर लग गया था। मधु यह सुनकर अत्यधिक कामुक हो जाती है । 
सूरज-" मौसी मुझे तो यह मालाई चाटने में ज्यादा अच्छा लगता है" इतना कह कर सूरज उस चूतरस को उंगलियो से चाटने लगता है । मधु के सब्र का बाँध उसकी चूत से रस बनकार बहने लगता है । 
मधु-" तुझे मलाई बहुत पसंद है क्या" 
सूरज-" हाँ मौसी मुझे तो बहुत मजा आता है, और ये वाली मलाई तो बहुत स्वादिष्ट है, और है क्या मौसी?" 
मधु-" बेटा मलाई तो मेरे भगोने में है तुझे अंदर मुह डालकर चाटनी पड़ेगी" 
सूरज-" मौसी में सारी मलाई जीव्ह से चाट लूंगा, आप अपना भगोना तो दिखाओ" यह सुनकर मधु की चूत में एक दम पानी की बाढ़ सी आ जाती है, चूत रस के तीब्रता के साथ पेंटी न पहने होने के कारण डिडलो उसकी चूत से निकल कर नीचे गिर जाता है और उसकी चूत से पानी बहने लगता है ।
जैसे ही सूरज लंडनुमा डिडलो देखता है तो हैरान रह जाता है ।


RE: Antarvasna Sex kahani जीवन एक संघर्ष है - sexstories - 12-25-2018

सूरज लंडनुमा डिडलो को देखकर हैरान था, आज से पहले उसने कभी ऐसा मनुष्य के लींग के हु-ब-हु दिखने वाला लंड नहीं देखा था ।मधु की चूत से डिडलो के निकलते ही उसकी चूत से पानी का सैलाव निकलता है, मधु चर्म सुख स्खलन की प्राप्ति कर चुकी थी, उसकी साँसे बडी तेजी के साथ चल रहीं थी, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मधु कई कोषो दौड़ कर आई हो, मधु जैसे ही जमीन पर डिडलो को देखती है और चूत रस की पिचकारी जिससे आसपास की जमीन को गिला कर दिया था, चरम सुख के उपरान्त उसे ग्लानि होती है की मैंने ये क्या कर दिया, अपनी ही सहेली के बेटे को हवस का शिकार करने का प्रयास कर रही थी, संध्या को यदि ये भनक लग गई की मैंने अपनी हवस की आग बुझाने के लिए सूर्या का सहारा लिया तो वो मुझे कभी माफ़ नहीं करेगी, मधु की इच्छा थी की वो सूरज से चुदे, लेकिन कच्चे रिश्ते की मर्यादा ने उसे झकझोर दिया,सूरज तो बेचारा मूरत बनकर कभी मधु के उत्तेजित चेहरे को देखता तो कभी चूत से निकले डिडलो को देखता जिसमे चूत की मलाई भरपूर मात्रा में बह रही थी । 
हवस में प्रत्येक व्यक्ति अँधा हो जाता है, हवस के समय रिश्ता नहीं चूत हावी होती है हस्तमैथुन या स्खलन के पस्चात हवस रफूचक्कर हो जाती है उस समय सिर्फ आत्मग्लानि और रिश्ते की मर्यादा का ख्याला आता है और बुद्धि कार्य करने लगती है यही मधु के साथ हुआ, मधु आनन् फानन में जमीन पर पड़े डिडलो को उठाकर अपने कमरे में भाग जाती है,सूरज हैरान होकर देखता रह जाता है, मधु के इस तरह जाने से उसकी आशा और उम्मीदों पर पानी फिर चूका था, मधु तो स्खलन का आनन्द ले चुकी थी लेकिन सूरज का लंड अभी भी पेंट में आज़ाद होने का बेसबरी से इंतज़ार कर रहा था । सूरज डर जाता है की कहीं मधु मौसी मेरी किसी बात या हरकत से नाराज़ तो नहीं है ।
1 5 मिनट के उपरान्त मधु कमरे से तैयार होकर निकलती है ।चेहरे पर ग्लानि और शर्म के भाव दिखाई दे रहे थे ।
सूर्या के पास आकर मधु बोलती है ।
मधु-" सूर्या चलो देर हो रही है" सूरज और मधु घर का ताला लगा कर गाडी से मार्केट निकल जाते हैं ।
सूरज उदास होकर गाडी चला रहा था क्योंकि उसके खड़े लंड पर धोका मिला था, मधु को भोगने की एक उम्मीद जो उसके मन में जागी थी उस पर पानी फिर चूका था ।
मधु भी बिना बोले ही शांत बैठी थी परंतु उसका दिमाग शांत नहीं था, सेकड़ो सवाल और उलझने उसके मन में चल रही थी ।
सूरज चुप्पी तोड़ते हुए बोलता है ।
सूरज-" मोसी आपको अचानक क्या हो गया, एक दम आप शांत हो गई,आप नाराज़ हो क्या मुझसे" 
मधु-" नहीं सूर्या में नाराज नहीं हूँ तुझसे, तू तो मेरा बेटा है, गलती तो मुझसे हुई है की तेरे सामने आँखे नहीं मिला पा रही हूँ" 
सूरज-" किस गलती की बात कर रही हो मौसी' 
मधु-"में हवस के आगे मजबूर हो गई थी सूर्या, इसलिए मुझे कृत्रिम यंत्रो का सहारा लेना पड़ा, और तेरे सामने ही शर्मसार हो गई में" मधु अपनी प्यास बुझाने के लिए डिडलो का इस्तेमाल हर रौज करती है,आज भी वो डिडलो लेने ही आई थी अपने घर।
सूरज-" मोसी इसमें गलत ही क्या करती हो आप, अपनी जरुरतो को पूरा करने के लिए हर कोई किसी न किसी का सहारा तो लेता ही है" मधु सूर्या की बातों को बड़े ही गंभीरता से सुनती है,सूर्या की समझदारी की दाद देती है वो।
मधु-" बेटा मुझे माफ़ कर देना,में मजबूर थी इसलिए ये सब करना पड़ा"
सूरज-" मोसी क्या मौसा जी आपके साथ वो नहीं करते हैं" सूरज सेक्स के लिए बोलता है लेकिन स्पष्ट बोलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था ।
मधु-" उनके पास मेरे लिए कभी समय ही नहीं रहा, बिजनेस और पैसो की हवस कमाने के चक्कर में वो मेरी जरुरतो को ही भूल गए" मधु धीरे धीरे खुलती जा रही थी।
सूर्या-" मौसी जो सुख पति के जिस्म से मिल सकता है वो सुख इस नकली डंडे से नहीं मिलता है" सूरज को नहीं पता था की डंडे को डिडलो बोलते हैं ।
मधु-" उसे डंडा नहीं डिडलो बोलते हैं सूर्या, डिडलो पति का सुख तो नहीं दे पाता लेकिन कुछ देर के लिए तूफ़ान को शांत जरूर कर देता है" मधु हस्ते हुए बोलती है ।
सूर्या-" मौसी डिडलो बहुत छोटा और पतला भी तो है जबकि लंड ओह्ह्ह सॉरी मोसी, पेनिस तो इससे बड़ा और मोटा होता है" सूरज के मुह से लंड शब्द सुनकर मधु शर्मा जाती है लेकिन सूरज तुरंत अपनी गलती की माफ़ी मांग लेता है और लंड को पेनिस बोलकर बात संभाल लेता है ।
मधु-" ओह्ह्ह सूर्या तू किस टॉपिक पर बात कर रहा है मुझे तो शर्म आती है, तू मेरा बेटा जैसा ही है अब तुझे सच कैसे बोलू" मधु शर्मा रहि थी लेकिन चूत में चुंगारि भी भड़क चुकी थी ।
सूरज-" मौसी अब मुझसे क्या शर्माना, बोल भी दो" सूरज को बड़ा मजा आ रहा था, सूरज तो ठान लेता है की मौसी की चुदाई जरूर करूँगा ।
मधु-" सूरज सच तो यह है की डिडलो छोटा नहीं है अधिकतर आदमियों का पेनिस उतना ही होता है लेकिन तेरा पेनिस कुछ ज्यादा ही बड़ा है,मैंने मॉल के बाथरूम में देखा था" सूरज को यह सुनकर ख़ुशी मिलती है की मेरा पेनिस ही बड़ा है ।
तभी संध्या का फोन आता है, काफी देर हो चुकी थी सूरज जल्दी से चिकेन लेकर घर पहुचता है, तान्या भी घर आ चुकी थी ।
संध्या मधु को तान्या से परिचय करवाती है काफी देर बात करने के बाद संध्या खाना तैयार करने में जुट जाती है और में ऊपर अपने कमरे में जाकर फ्रेस होकर आराम करने लगता हूँ ।

सूरज कमरे में आकर फ्रेस होकर आज दिन भर की घटनाक्रम के बारे में सोचता है की रात भर सूर्या के लेपटोप में संध्या माँ की अस्लील योनिमैथुन करते हुए देखना और आज मॉल के बाथरूम में खूबसूरत महिला को पिसाब करते हुए खुद मूतना, 
जिस महिला को आज देखा बही महिला संध्या माँ की सबसे करीबी सहेली निकलना ये कैसा संयोग था ।
मधु की तड़प और चूत में डिडलो से आग शांत करना ये सबकुछ एक ही दिन में बहुत बड़ी घटना घटी सूरज के साथ ।
सूरज लेटा हुआ था तभी संध्या माँ की आवाज़ आई ।
संध्या-" बेटा खाना खा ले, जल्दी से नीचे आओ" माँ ने दरवाजा खोल कर सूरज को नीचे आने के लिए कहा, सूरज जल्दी से नीचे गया और मधु आंटी के बगल में खाना खाने लगा ।मधु और सूरज ने एकदूसरे को देखा, मधु की आँखों में एक कसिस सी थी ।
मधु की नज़रे कभी मेरी और जाती तो कभी शर्म से झुका लेती। में भी कई बार खाना खाते समय मधु मौसी को निहारता।
पास में बैठी माँ और तान्या को कोई शक़ न हो इसलिए मैंने जल्दी से खाना खाया।
तान्या और संध्या माँ भी सामने बैठ कर खाना खा रही थी । मैंने जल्दी से खाना निपटाया और ऊपर टहलने चला गया ।
करीब एक घंटा टहलने के पश्चात में नीचे की और जा ही रहा था तभी मधु मौसी ऊपर आ गई ।
मधु-" सूर्या तू ऊपर है, में बहुत देर से तेरा इंतज़ार कर रही थी, मेरे मोबाइल की बैटरी डाऊन है अपना चार्जर दे देना" मधु मौसी मेक्सी पहनी हुई थी जिसमे उनका बदन बहुत सेक्सी लग रहा था ।उनके बूब्स का उभार बहुत मस्त लग रहा था ।
सूरज-" मौसी मेरा चार्जर आपके मोबाइल में लग जाएगा क्या, मेरे चार्जर की पिन बहुत मोटी है" मैंने हँसते हुए मजे लेते हुए बोला।
मधु-" अच्छा सूर्या! अब क्या करू, जब तक तेरे घर पर तब तक तेरे ही चार्जर से अपनी बैटरी चार्ज कर लूँगी, एक बार चार्जर घुसा के तो देख शायद घुस जाए"" मोसी भी कामुकता के साथ बोली, दोहरी अर्थ बाली भाषा को अच्छी तरह समझ रही थी ।
सूर्या-" मौसी चार्जर तो लगा दूंगा, ऐसा न हो कहीं आपकी बैटरी ही फट जाए, मेरे चार्जर के हाई वोल्टेज से" 
मधु-" मेरी बैटरी में बहुत दम है, तेरे चार्जर का सारा करेंट पी लेगी मेरी बैटरी" मौसी आँख मारते हुए बोली ।
सूर्या-" फिर तो आपकी बैटरी का दम देखना ही पड़ेगा मौसी, बैसे भी मौसी आप जिस चार्जर से अपनी बैटरी चार्ज करती हो वो बहुत छोटा है" मेरा इशारा डिडलो की तरफ था जिससे मौसी अपनी प्यास बुझाती हैं ।
मधु-" ओह्ह क्या करू बेटा, उसी चार्जर के साहरे ही तो में जिन्दा हूँ, उस चार्जर को तो में हमेसा लगाए रखती हूँ" मौसी कामुक हो चुकी थी, उनकी सिसकियाँ सी निकल रही थी ।पूरी छत पर सिर्फ हमदोनो ही दिबाल के सहारे खड़े होकर बतला रहे थे ।
मधु ने जैसे ही कहा की चार्जर जो की डिडलो का संकेत था उसको हमेसा लगाए रखती हूँ, यह सुनकर सूरज का माथा ठनक गया, सूरज समझ गया की मौसी शायद अभी भी चूत में डिडलो घुसाए हुई हैं ।
सूरज-" मौसी क्या अभी भी वो छोटा सा चार्जर घुसा हुआ है? मधु एक दम चोंक गई यह सुनकर ।मैंने मेक्सी के ऊपर ही चूत की और इशारा करते हुए बोला ।
मधु-" अब तुझसे क्या छुपाना सूरज, में अभी भी उसी चार्जर से चार्ज हो रहीं हूँ" मौसी ने बड़ी कामुकता के साथ बोला, सूरज का लंड झटके मारने लगा ।तभी अचानक संध्या माँ की आवाज़ आई नीचे से ।
संध्या-" मधु नीचे आ जा, सोना नहीं है क्या? 
मधु हड़बड़ा कर नीचे चली गई, थोड़ी देर बाद सूरज भी नीचे अपने रूम में चला गया।
कमरे में आकर सूरज लेट गया उसका मन बैचेन था, लंड महाराज सोने नहीं दे रहे थे, लंड बार बार झटके मार रहा था ।सूरज का मन मुठ मारने के लिए तड़प रहा था ।
मधु की तड़पती जवानी का रसपान करने के लिए लंड तड़प रहा था ।
तभी सूरज को घर में लगे कमरे का ख्याल आता है वह लेपटोप खोल कर इंटरनेट से कनेक्ट करके मधु को देखने लगता है ।
मधु संध्या माँ के कमरे में मधु को देखता है ।
मधु और संध्या दोनों आपस में बात कर रही थी। सूरज उनदोनो की बातें सुनने लगता है ।
मधु-" संध्या तुझे तेरे पति की बिलकुल कमी महसूस नहीं होती है, पति के बिना तूने इतने दीन कैसे बिताए" 
संध्या-" अब क्या बताऊँ मधु, बिना आदमी के मैंने कैसे अपना जीवन बिताया है यह सिर्फ में ही जानती हूँ, 18 वर्ष हो गए मुझे अपने आदमी से बिछड़े लेकिन आज तक अपनी जरुरतो के लिए किसी अन्य पुरुष का सहारा नहीं लिया मैंने" 
मधु-" आखिर ऐसा क्या हुआ था की तूने उन्हें छोड़ दिया" में यह सुनकर चोंक गया की सूर्या के पिता जी अभी भी जिन्दा है, आखिर माँ ने उन्हें क्यूँ छोड़ दिया यह जानने की उत्सुकता मेरे लिए भी बड़ गई ।
संध्या-" धोखेबाज़ इंसान था वो, इसलिए छोड़ दिया, में इस विषय पर कोई बात नहीं करना चाहती हूँ मधु" 
मधु-" okk ठीक है संध्या में कोई बात नहीं करुँगी लेकिन एक बात और बता तेरे पति इस समय कहाँ है?" 
संध्या-" अमेरिका में हैं, सूना है अब बहुत बड़े बिजनेस मैन हैं इस समय, मधु तू यह बात किसी को बताना मत,मैंने यह बात आजतक अपने बच्चों से भी छुपा कर रखी है" माँ की यह बात सुनकर मुझे तो तगड़ा झटका लगा, आखिर माँ ने क्यों छोड़ दिया?यह सवाल मेरे मन में अभी तक था ।


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मधु-" चल ठीक है संध्या में यह बात किसी को नहीं बताउंगी,लेकिन यह बता तू बिना पति के कैसे अपने आपको शांत करती है" 
संध्या-" जैसे शादी से पहले करती थी, वही तरीका आज भी करती हूँ,जब ज्यादा मन चलता है तब" 
मधु-" मतलब तू आज भी अपनी चूत में ऊँगली करती है? 
संध्या-" ओह्हो मधु तू बिदेश में रह कर और ज्यादा बिगड़ गई है, कैसे शब्दों का इस्तेमाल करती है, तुझे तो बिलकुल शर्म नहीं आती है"
मधु-" अब तेरे सामने क्या शर्माना संध्या, तूने तो मेरी हर चुदाई को देखा है" 
दोनों की बातें सुनकर में हैरान था ऐसा लग रहा था की लण्ड की नशे फट जाएंगी, संध्या माँ की बातें अत्यधिक कामुकता पंहुचा रही थी मेरे लंड को ।
संध्या-" मुझे सब पता है मधु,तू तो हर लड़के को अपने जाल में फंसा कर सेक्स करवाती थी, अब तो तू अपने पति से ही सेक्स करवाती होगी?" 
मधु-" मेरे पति अब बुड्ढे हो गए हैं, उनके लंड में जान नहीं है, अब तो में भी तेरी तरह ही हूँ संध्या" 
संध्या-" मतलब तू भी ऊँगली से काम चलाती है" 
मधु-" ऊँगली से तो नहीं, मेरे पास एक लंड है जो मेरी वासना को शांत करता है" हस्ते हुए बोली ।
संध्या-" मतलब तूने कोई आदमी फंसा रखा है जो तेरी वासना को शांत करता है" माँ चौकते हुए बोली ।
मधु-" नहीं मेरी जान आदमी नहीं, मेरे पास लंड है जो हमेसा मेरी आग बुझाता है" 
संध्या-" यह कैसी बात कर रही है मधु,आदमी नहीं है तो लंड कहाँ से आ गया तेरे पास" 
मधु-" हाँ मेरी जान संध्या, मेरे पास लंड है,रुक तुझे अभी दिखाती हूँ" मधु ने मेक्सी को निकाल दिया, जैसे ही मधु ने पेंटी को निकाला संध्या की आँखे फटी की फटी रह गई, मधु की चूत में डिडलो घुसा हुआ था, मधु ने चूत में घुसे डिडलो को निकाल कर संध्या को दिखाया, मधु पूरी तरह से नंगी थी ।पहली बार मधु मौसी का कामुक बदन देखा था, उनके बूब्स 38 साइज़ के मस्त फुले हुए थे, गांड की बनावट ऐसी थी जैसे दो मटके हो, चूत पर हलके बाल थे जो चूत की कामुकता को और बढ़ावा दे रहे थे ।
संध्या-"ओह माय गॉड मधु यह तो पुरुषो के लिंग जैसा है, तू तो बाकई में आज भी रंडी है मधु" 
मधु-" संध्या क्या करू इस चूत में बड़ी आग है जिसे शांत करने के लिए रंडी बनना पड़ता है, देख इसे डिडलो बोलते है। ये बायब्रेट करता है" मधु ने डिडलो को चालु करके अपनी चूत में घुसा लिया, मधु के मुख से सिसकारी फूटने लगी, संध्या यह नज़ारा देख कर कामुक सी हो गई थी, उसका भी मन कर रहा था की एक बार इसे अपनी चूत में घुसा कर देखे, 18 साल से चूत सुखी थी कोई हल नहीं चला था, लेकिन आज संध्या की चूत हल के साथ साथ पानी भी मांग रही थी ।
इधर मधु अपनी चूत में डिडलो डालकर अंदर बाहर कर रही थी ।
मधु-" संध्या देख क्या रही है आपनी मेक्सी उतार दे, आज तेरी चूत की भी प्यास बुझा देती हूँ, मधु संध्या की जांघ पर हाँथ फेरते हुए बोली,
संध्या-" तू तो बेशरम है मधु, में तेरे सामने कुछ नहीं करुँगी" मधु कहाँ मानने बाली थी उसने संध्या की मेक्सी में हाथ डालकर उसकी चूत को मसल दिया,आग भड़काने के लिए इतना ही काफी था ।
इधर सूरज लेपटोप में दोनों की रासलीला देख कर बहुत ही भड़क सा गया था,उसका लंड पानी छोड़ रहा था । संध्या उसकी माँ थी । सूरज भी संध्या को इस तरह देख कर बड़ा ही शर्मा रहा था लेकिन इस समय हवस उसके ऊपर सवार थी ।
मधु संध्या की मेक्सी के अंदर ही हाथ डाल कर चूत में ऊँगली करने लगती है ।संध्या की चूत भड़काने लगती है । मधु अपनी चूत से डिडलो निकाल कर रख देती है और संध्या की मेक्सी को निकाल कर नंगा कर देती है । संध्या हवस की आग में कोई विरोध नहीं करती है ।इधर सूरज ने जैसे ही संध्या के बूब्स को देखा तो उसका लंड फड़कने लगता है ।संध्या का जिस्म एक दम स्लिम और सेक्सी था ।संध्या रात में सोते समय मेक्सी के अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनती थी । संध्या जैसे ही नग्न होती है सूरज संध्या की चूत को देखता है जिस पर बहुत सारे बाल उग आए थे, बालो के झुण्ड के कारण संध्या की चूत का छेद दिखाई नहीं दे रहा था ।
मधु-' संध्या तेरी चूत पर तो बहुत बाल है, चूत को साफ़ रखा कर" मधु चूत में ऊँगली घुसाते हुए बोली, संध्या तड़प उठी, उसकी सिसकारी फूटने लगी ।
संध्या-" अह्ह्ह्ह्ह मधु किसके लिए चूत साफ़ रखु, मेरे सिवा और कोई नहीं देखता है इसे" 
मधु-" संध्या तेरी चूत का छेद तो बहुत छोटा है,इसमें ये डिडलो कैसे घुसेगा, रुक में तेरी चूत को जीव्ह से चाटकर सांत कर देती हूँ" मधु 69 की पोजीसन में आकर संध्या की चूत को चाटने लगती है, संध्या तड़पती है, उसकी चीख निकल रही थी, मधु अपनी जीव्ह को संध्या की चूत में घुसाने लगती है।
संध्या-" ओह्ह्ह्ह्ह मधु तूने ये कैसी आग लगा दी है मेरे जिस्म में, 18 वर्ष से इस चूत में लंड नहीं घुसा है इसलिए छेद सिकुड़ गया है मधु" मधु संध्या की चूत को जीव्ह से रगड़ती है । संध्या भी मधु की चूत में तेजी से ऊँगली डालकर अंदर बहार करने लगती है, मधु की आग भड़क जाती है, मधु डिडलो लेकर संध्या की चूत में घुसाने लगती है, मधु संध्या की चूत में थूकती है ताकि गीलापन रहे ।
जैसे ही डिडलो का अग्रभाग संध्या की चूत में घुसता है संध्या तड़पने लगती है ।
संध्या-" आआह्ह्ह्ह्ह्ह् मधु दर्द हो रहा है आराम से घुसा" मधु डिडलो को निकाल कर पुनः तेजी के साथ चूत में घुसेड़ देती है, संध्या की चीख निकलती है ।
सूरज यह देख कर झड़ जाता है, पहली बार इतना कामुक दृश्य देख रहा था ।
मधु डिडलो को अंदर बहार चलाने लगती है।
थोड़ी देर बाद संध्या को मजा आने लगता है।
मधु-"अह्ह्ह्ह्ह संध्या में अगर लड़का होती तो अपने लंड से तुझे रौज चोदती,तेरा जिस्म बहुत ही नसीला और कामुक है, तेरी गांड तो मेरी गांड से भी गठीली है, 
संध्या-" तू भी कुछ कम नहीं है मधु,तुझे देख कर आज भी लड़को का लंड खड़ा हो जाता होगा, काश तू लड़का ही होती तो आज तो में तुझसे जी भर के चुदती मधु" यह सुनकर सूरज का लंड पुनः झटके मारकर खड़ा हो जाता है । संध्या की चूत में डिडलो को चलता हुआ देख कर सूरज का मन कर रहा था की कमरे में जाकर दोनों की प्यास बुझा दू।
संध्या की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी,मधु भी उसकी चूत से बराबर खेल रही थी तभी संध्या का जिस्म एक दम अकड़ गया और एक तेज पिचकारी के साथ झड़ गई, संध्या भी मधु की चूत में तेजी से दो ऊँगली करने लगती है और दोनों सहेलियां एक साथ झड़ जाती हैं ।
मधु और संध्या दोनों एक दूसरे का पानी चाट कर पी जाती हैं ।
संध्या का जिस्म एक दम शांत पड जाता है ऐसा महसूस हो रहा था जैसे पहली बार उसकी चुदाई हुई थी ।संध्या की साँसे तेजी से चल रही थी ।कुछ ही देर में संध्या को आराम सा मिल गया था और नंगी ही सो गई ।
मधु संध्या की ओर देखती है तो संध्या को सोती हुई पाती है । मधु को बहुत तेज पिसाब लगती है तो मधु नंगी ही रूम से निकल कर लॉन में बने बाथरूम में घुस जाती है, सूरज यह सब लेपटोप में देख रहा था तभी सूरज भी पिसाब का बहाना बना कर मधु के जिस्म को निहारने के लिए नीचे बाथरूम में जाता है ।
सूर्या जैसे ही नीचे बाथरूम जाने के लिए दरबाजा खोलता है, तभी सूरज की नज़र तान्या पर पड़ती है,अपने कमरे से निकल कर बाहर टहल रही थी, सूरज की गांड फट जाती है और नीचे जाने का इरादा छोड़ कर पुनः मुठ मारकर सो जाता है ।
सुबह 7 बजे माँ की आवाज़ से मेरी नींद खुली, मै जल्दी से फ्रेश होकर नीचे गया ।
संध्या माँ और मधु मौसी आपस में हंस हंस कर बातें कर रही थी, काफी समय बाद आज मैंने माँ के चेहरे पर ख़ुशी के भाव देखे, यह ख़ुशी शायद रात के लेस्बियन सेक्स और डिडलो के द्वारा किए गए कृत्रिम सेक्स से आई हुई ख़ुशी के थे, मधु मौसी के आने से माँ जो ख़ुशी मिली थी उसके लिए में उन्हें मन ही मन धन्यवाद कर रहा था ।
एक तरफ मधु मौसी ने माँ की कामवासना को भड़का दिया था तो दूसरी तरफ मेरी हवस को भी जगा दिया था, अब तक में केवल मधु मौसी के जिस्म की भोगने की ही कल्पना कर रहा था लेकिन कल रात मोसी और माँ की कामलीला देख कर मेरा ध्यान संध्या माँ की तरफ आकर्षित होता जा रहा था । संध्या माँ के सुन्दर शिखरनुमा बूब्स और गोलाइदार गांड, हल्के बालों से घिरी रसभरी चूत मेरे मन में घर बना चुकी थी, 
में संध्या माँ और मधु मौसी के पास डायनिंग टेवल पर बैठा तभी माँ और मौसी ने मुझे गुड़ मॉर्निंग विश् किया ।
सूरज-" क्या बात है माँ आज बहुत खुश लग रही हो" 
संध्या-" बेटा ये ख़ुशी तेरी मधु मौसी के घर आने से मिली है,कितने वर्ष बाद मिली है मुझे ये" मधु की और इशारा करते हुए बोला।
मधु-" सूर्या मेरे पास ख़ुशी की एक चाबी है, ये उसी चाबी का कमाल है, अब देखना तेरी माँ कभी उदास नहीं रहा करेगी" में अच्छी तरह समझ रहा था की कौनसी चाबी है मौसी के पास, माँ भी समझ गई थी की मधु डिडलो नामक ख़ुशी की चाबी की बात कर रही है। माँ का चेहरा शर्म से लाल था ।


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सूरज-" मौसी ऐसी कौनसी चाबी है आपके पास, मुझे भी बह चाबी दे दो, आपके जाने के बाद में माँ को हमेसा खुश रखूँगा" जैसे ही मैंने थ बात बोली, माँ का चेहरा एक दम लाल हो गया शर्म से, लेकिन मौसी के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान दौड़ गई ।
मधु-" सूरज तेरे पास तो ऐसी चाबी है जिससे दुनिया के हर ताले ख़ुशी से खुल जाएगें" मौसी मेरी और ललचाई नज़र से देखती हुई बोली, संध्या माँ ने इन बातों को विराम देने के लिए जल्दी से मेरे लिए नास्ता लेकर आई ।
संध्या-" बेटा नास्ता कर ले पहले, यह मधु तो पुरे दिन बोल बोल कर तुझे पकाती रहेगी" 
मधु मौसी और में हँसने लगे, मैंने जल्दी से नास्ता किया तभी तान्या भी कंपनी जाने के लिए नीचे आई ।
माँ ने दीदी को नास्ता दिया ।
मधु-" तान्या बेटा कारोबार कैसा चल रहा है" 
तान्या-" मौसी जी अभी तक तो ठीक है,कल टेंडर की मीटिंग है अगर ये टेंडर नहीं मिला तो कंपनी का काफी नुक्सान होगा, हमारी कंपनी में माल काफी स्टॉक है, समझ नहीं आ रहा है कैसे ये टेंडर मिले" तान्या परेसान होकर बोली ।सूरज भी यह बात सुनकर परेसान हो जाता है, सोचने लगता है की यह टेंडर कैसे मिले, चूँकि प्रत्येक कंपनी टेंडर को प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के हथकंडे अपनाती है ।
मधु-" बेटा ऊपर बाले पर विस्वास रखो, सब ठीक हो जाएगा" 
सूरज-" कल इस टेंडर की मीटिंग में,मैं भी जाऊँगा, किसी भी हाल में यह टेंडर हांसिल करके रहूँगा" तान्या गुस्से से सूरज की ओर घूर कर देखने लगती है जैसे सूरज ने कोई विस्फोट कर दिया हो ।
तान्या-" माँ में इस टेंडर की मीटिंग में अकेली जाउंगी, किसी को मेरे साथ जाने की जरुरत नहीं है" इतना कह कर गुस्से में कंपनी चली गई ।
मधु-" संध्या क्या हुआ तान्या को,यह गुस्से में क्यूँ चली गई, सूर्या ने तो कुछ गलत भी नहीं बोला"" मधु हैरत में थी ।
संध्या-" ऐसा कुछ नहीं है मधु, कंपनी के काम के कारण थक जाती है जिससे थोड़ी चिड़चिड़ी हो गई है" 
सूरज-" हाँ मौसी तान्या दीदी बाकई पूरी कंपनी अकेले ही संभालती है इसलिए परेसान रहती है" दोनों माँ बेटो ने बात को स्थगित किया ।
सूरज भी जल्दी से तैयार होकर कंपनी के लिए निकल जाता है, अभी सूरज हाइवे पर गाडी दौडा ही रहा था तभी उसने देखा की एक कार किसी ट्रक से टकरा के उल्टी पड़ी हुई है ।
कार के अंदर से किसी महिला और बच्चे के चीखने की आवाज़ सुनकर सूरज जल्दी से अपनी गाडी साइड से लगा कर उस क्षतिग्रस्त कार के पास पहुँच कर शीशे को तोड़ कर एक महिला को बहार निकालता है, उसके बाद उस कार में दो 7-8वर्ष के दो बच्चे और फंसे थे, सूरज आनन फानन में दोनों बच्चों को निकाल कर दूर खड़ी अपनी गाडी में बैठाता है तभी क्षतिग्रस्त कार में एक तेज धामखे के साथ जल जाती है ।जख्मी महिला जब अपनी कार को जलते हुए देखती है तो सिहर जाती है, और मन ही मन सूरज का शुक्रिया अदा करती है ।
सूरज जल्दी से सिटी के बड़े हॉस्पिटल में तीनो को भर्ती कराता है । किसी को ज्यादा चोट नहीं आई थी । एक घंटे बाद
सूरज डॉक्टर से बोलता है ।
सूरज-" डॉक्टर साहब तीनो की कैसी तबियत है?" 
डॉक्टर-" तीनो लोग खतरे से बाहर हैं, जल्दी ही होश आ जाएगा, आप इनके घर बालो को फोन करके बुला लीजिए" सूरज असमंजस में पड जाता है की इनके घर बालो को कैसे सुचना दें, तभी सूरज को ध्यान आता है की दोनों बच्चे स्कूल ड्रेस में थे, और उनके गले में पहचान पत्र पड़ा हुआ है, उसमे जरूर फोन नम्बर होगा ।सूरज जल्दी से बच्चों के पास जाता है और पहचान पत्र में पड़े नम्बर पर फोन करता है।
फोन पर किसी लड़की ने बात की, सूरज ने पूरी बात बता दी । सूरज कंपनी के लिए देर हो रही थी इसलिए डाक्टर साहब से इजाजत लेकर कंपनी चला गया ।
कार में जख्मी औरत और बच्चे किसी ओर के नहीं शंकर डॉन के ही हैं ।
शंकर को को फोन से किसी ने बताया की उसकी कार का एक्सिडेंट हो गया है, कार पूरी तरह जल कर ख़ाक हो चुकी है, शंकर डर जाता है की कहीं उसके पत्नी और दोनों बच्चे तो नहीं जल गए । शंकर भागता हूँ गाडी के पास जाता है तब तक काफी पुलिस फ़ोर्स आ चूका था । शंकर पोलिस बालो से पूछता है ।
शंकर-" गाडी में मेरी बीबी और बच्चे कहाँ है इन्स्पेक्टर?" 
इन्स्पेक्टर-' शंकर जी धीरज रखिए, आग इतनी भयंकर थी की सबकुछ जलकर राख हो चुका है, हम छानबीन कर रहें है,हो सकता है आपका परिवार इसी गाडी में जल गया हो" शंकर जैसे ही यह सुनता है दहाड़ कर रोने लगता है, आज एक पल में ही उसकी बनाई हुई दुनिया जैसे ख़ाक में मिल गई हो, बीबी और बच्चों में शंकर की जान बसती है । 
इधर शंकर की बहन शिवानी को जैसे ही हॉस्पिटल से सुचना मिलती है की उसकी भावी और दोनों बच्चे एक्सिसडेन्ट होने के कारण भर्ती है वह तुरंत अपने भाई शंकर को फोन करती है ।
शिवानी-" भैया हॉस्पिटल से किसी अनजान व्यक्ति का फोन आया उसने बताया की भावी और बच्चे हॉस्पिटल में भर्ती है, आप जल्दी से हॉस्पिटल आ जाओ, में निकल चुकी हूँ" शंकर जैसे ही यह सुनता है उसकी जान में जान आ गई, बचाने बाले व्यक्ति का शुक्रिया अदा करता है और अपने आदमियो के साथ हॉस्पिटल पहुँच कर अपनी बीबी और बच्चों से मिलता है, सभी को होश आ चूका था, शंकर की बीबी सारी बात बता देती है,जिस लडके ने जान बचाई उसके बारे में बताती है ।
शंकर की बीबी ने कभी सूर्या को नहीं देखा था ।
शंकर की बीबी-" एक फरिस्ते ने हमें बचा लिया बरना उस कार में ही हम तीनो जल जाते" 
शिवानी-" वो फरिस्ता कहाँ है भावी?" डॉक्टर से पूछती है ।
डाक्टर-" वो किसी काम की बजह से जल्दी चला गया, बाकई में वो फरिस्ता ही था' 
शंकर-" शिवानी पता लगाओ की वो फरिस्ता कौन था,जो हमपर उपकार कर गया,उस फरिस्ते से हम मिलना चाहते हैं" 
शिवानी-" भैया उसका नम्बर है मेरे पास, में उनको फोन करके घर पर बुला लूँगी" 
शंकर-" उनसे कहो की आज शाम को हमारे घर पर भोजन पर बुलाओ,उस फरिस्ते ने बहुत बड़ा उपकार किया है हम पर" 
कोई नहीं जानता था की जिस फरिस्ते की बात कर रहें हैं वो सूर्या का हमसकल सूरज ही है । शिवानी फोन मिला देती है ।
शिवानी-' हेलो जी! 
सूरज-" हेलो मेडम बोलिए क्या बात है, आपकी भावी और बच्चे ठीक तो हैं अब,माफ़ कीजिए में जल्दी में था इसलिए रुक न सका" 
शिवानी-" सर हम आपका सुक्रिया अदा करना चाहते हैं,आपने भावी और बचचो की जान बचा कर बहुत बड़ा उपकार किया है हम पर, आप आज शाम को घर आ सकते हैं डिनर पर? 
सूरज-" अरे मेडम जी यह तो मेरा फर्ज था, इंसान ही इंसान की मदद नहीं करेगा तो कौन करेगा, और हाँ में बच्चों से मिलने जरूर आऊँगा लेकिन आज नहीं कल" 
शिवानी-" आप बाकई में फरिस्ते हैं,में कल आपका इंतज़ार करुँगी" फोन कट जाता है ।
शिवानी शंकर को बता देती है की वो फरिस्ता कल घर आएगा ।
डॉक्टर तीनो को छुट्टी दे देता है, तीनो लोग स्वस्थ थे । शंकर अपने परिवार को लेकर घर चला जाता है । शिवानी सूरज से बात करके बहुत आकर्षित हो चुकी थी, वो कल मिलना चाहती थी सूरज से ।
इधर कंपनी में सूरज कल टेंडर कैसे मिले इसी बात की चर्चा अपने सीनियर कर्मचारी से कर रहा था । सूरज किसी भी तरह यह टेंडर लेना चाहता था, काफी देर चर्चा और विचार करता है । 
तभी सूरज के मोबाइल पर तनु दीदी का फोन आता है,
तनु-" सूरज कैसा है तू, आज शाम को घर आजा,सब लोग बहुत याद कर रहें है तुझे" 
सूरज-" दीदी कंपनी के काम में बहुत व्यस्त हूँ, एक दो दिन में फ्री होते ही आपके पास आ जाऊंगा कुछ दिन रहने के लिए" 
तनु-" माँ और पूनम दीदी भी बहुत याद कर रहीं है तुझे" 
सूरज-" दीदी आप माँ और पूनम दीदी का ख्याल रखना, बस कुछ दिन की परेसानी और है फिर आप लोगों के साथ ही समय बिताऊंगा" 
तनु-"कोई नहीं सूरज,तू चिंता न कर"तनु फोन काट देती है ।
शाम होते ही सूरज घर की और निकल जाता है ।
मधु मौसी और संध्या माँ में बहुत घुट रही थी, जैसे ही घर पहुंचा मधु मेरी तरफ देख कर कामुक मुस्कान देती है ।
में अपने कमरे में जाकर फ्रेस होकर आराम करने लगता हूँ । 
थोड़ी देर बाद फिर से मोबाइल बजता है सूरज ने मोबाइल देखा तो शिवानी की कोल थी ।
शिवानी-" हेलो सर जी क्या में आपसे कुछ देर बात कर सकती हूँ" 
सूरज-" हाँ जी बोलिए मेडम" 
शिवानी-" सर जी आपका नाम पूछना भूल गई थी में" 
सूरज-" ओह्ह्ह में तो अपना नाम बताना ही भूल गया था मेरा नाम सूरज है"(सूरज के मुह से सूरज ही नाम निकल गया जल्दबाजी में, जबकि वो अपना नाम सूर्या ही बताता है हर किसी को।
शिवानी-" बहुत प्यारा नाम है आपका, आपके विचार बहुत अच्छे हैं इसलिए आपसे बात करने का मन हुआ" 
सूरज-" थेंक्स मेडम आप भी बहुत अच्छी हो इसलिए अच्छे विचार सुनना पसंद करती हो" 
शिवानी-"यह तो आपका नजरिया है सूरज जी,इस फरेबी दुनिया में आप जैसे अच्छे व्यक्ति बहुत कम ही होते हैं" 
सूरज-' मेडम ये जिंदगी चार दिन की है या तो ख़ुशी से काट लो या रो रो कर ये इंसान पर डिपेंड करता है, नजरिया अच्छा हो तो सामने बाला हर व्यक्ति अच्छा होता है" 
शिवानी-" हाँ यह बात आपने बहुत अच्छी कही है" तभी सूरज के कमरे में मधु का आगमन होता है, 
सूरज-" मेडम में कल बात करूँगा आपसे"यह कह कर फोन काट देता है ।
मधु को लगता है की सूर्या अपनी गर्ल फ्रेण्ड से बात कर रहा है ।
मधु-"अरे क्या हुआ सूर्या, फोन क्यूँ काट दिया, गर्ल फ्रेंड से बात कर रहे थे क्या?" 
सूरज-"अरे नहीं मौसी गर्ल फ्रेंड मेरे नसीब में कहाँ हैं" 
मधु-"क्या तेरी अभी तक कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है?" 
सूरज-"नहीं मौसी अभी तक नहीं है' सूरज मासुमियात से बोलता है ।
मधु-' फिर तो बड़ी दिक्कत होती होगी तुझे" 
सुरज-" कैसी दिक्कत मौसी? 
मधु-" फिर तो तू भी अपने हाँथ से ही......" 
अधूरी बात छोड़ देती है,लेकिन सूरज समझ जाता है मौसी मुठ मारने की कह रही हैं ।
सूरज-" हाँथ से क्या मौसी?" 
मधु-"ओह्हो बड़ा भोला बन रहा है,बातें तो बड़ी बड़ी करता है, तू भी अपने हाँथ से हिलाता है क्या? मधु साफ़ साफ़ बोलती है ।
सूरज-" नहीं मौसी, हाँथ से नहीं करता हूँ' 
मधु-" में सब जानती हूँ, खा मेरी कसम कभी नहीं हिलाया तूने" अब तो सूरज कसम के जाल में फंस गया था ।
सूरज-" हाँ मौसी किया है दो तीन बार ही बस' 
मधु-" इसमें शर्माने की क्या बात है सब करते हैं, में भी करती हूँ" 
सूरज-" मौसी क्या अभी भी वो डिडलो अंदर घुसा है" सूरज मधु की चूत की तरफ इशारा करता हुआ बोला, मधु लाल रंग की नायटी पहनी हुई थी जिसमे उसका जिस्म क़यामत लग रहा था ।
मधु-" अरे नहीं सूरज तुझे क्या लगता है पुरे दिन उसे घुसा कर रखती हूँ, वो तो जब ज्यादा मन चलता है सेक्स का तभी उस से आग शांत कर लेती हूँ"मधु कामुकता के साथ सूरज से खुलती जा रही थी,सूरज का लंड लोअर में खड़ा हो जाता है, मधु की नज़र खड़े लंड पर पड़ती है ।उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान तैर जाती है ।
मधु-" मुझे लगता है तेरा शेर जाग गया, बाथरूम चला जा और इसे शांत कर ले, बरना रात भर नींद नहीं आएगी तुझे" हँसते हुए बोली ।
सूरज-" मौसी आपके पास तो डिडलो है जिससे आपको पुरुस के पेनिस जैसा अनुभव मिल जाता है, लड़को के लिए कोई चूत जैसा रबड़ का आयटम नहीं आता है क्या,मेरा भी काम चल जाता'" सूरज के मुह से चूत शब्द सुनकर मधु शर्मा जाती है उसकी चूत में खुजली मचने लगती है ।
मधु-'कोई लड़की पटा ले बेटा, जो मजा लड़की दे सकती है वो मजा रबड़ का खिलौना नहीं" 
सूरज-" मौसी क्या डिडलो आपको पूरा मजा नहीं दे पाता है क्या" मधु कामुक हो चुकी थी मन कर रहा था की बस अब सूरज से चुदबा ले,इधर सूरज का मोटा और तगड़ा लंड जिसे महसूस करके ही चूत गीली हो रही थी ।
मधु-" अब तुझे क्या बताऊँ सूरज, जब जिस्म से जिस्म रगड़ता है उसकी बात ही कुछ ओर होती है,डिडलो तो बस कुछ देर के तूफ़ान को शांत कर देता है आग नहीं बुझा पाता है" मधु ने मेक्सी के ऊपर से ही चूत को मसलते हुए बोला। यह हरक़त सूरज देख लेता है उसका लंड झटके मारने लगता है ।
सूरज-" हाँ मौसी यह बात तो ठीक है आपकी, मौसी में लड़की को पटाना नहीं चाहता हूँ, मेरा पेनिस इतना बडा है की लड़की उसको झेल नहीं पाएगी,मेरे पेनिस को तो आप जैसी ही कोई भरे बदन की महिला झेल पाएगी'
मधु-'हाँ यह बात तो तेरी सही है तेरा पेनिस तो घोड़े जैसा है,नई लड़की की तो चूत फट जाएगी" दोनो लोग काफी खुल चुके थे,और दोनों ही तरफ आग भड़क चुकी थी । 
सूरज-" मौसी कोई आप जैसी महिला की चूत ही मेरे लंड की आग बुझा सकती है,कोई आप जैसी सुन्दर महिला से दोस्ती करबा दो मेरी,मधु की चूत से आग का सैलाब भड़क गया ।
मधु-"ओह्ह्ह्हो सूरज तेरी इन बातों को सुनकर अब मुझ पर रहा नहीं जा रहा है, में अभी ऊँगली करके आती हूँ" मधु चूत मसलती हुई बोली ।
सूरज-" मौसी ऊँगली कैसे करती हो यहीं कर लो मेरे सामने ही" सूरज ने जैसे ही बोला मधु की तो मन की मुराद ही पूरी हो गई हो ।
मधु-"एक शर्त पर ऊँगली करुँगी,अगर तू भी मेरे सामने मुठ मारे तो...."


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मधु और सूरज दोनों बेड पर एक दूसरे के सामने बैठ कर हस्तमैथुन क्रिया को अंजाम देने के लिए एक दूसरे को चुनोती दे रहे थे ।
जिस्म में जब आग भड़कती है तो अच्छा और बुरा भूल कर कामाग्नि को शांत करने के लिए किसी भी हद तक चुनौती स्वीकार कर सकते हैं । सूरज का लंड इस बात पर झटके मार रहा था की मधु मौसी मेरे सामने ही चूत में ऊँगली डालकर अपना पानी बहार निकालेगी,इधर मधु के दिमाग में भी सूर्या के मोटे लंड का दीदार करने की लालसा लगी हुई थी ।
मधु-" क्या सोच रहा है सूरज, मुठ मारेगा मेरे सामने तो में भी तेरे सामने ही अपनी चूत में ऊँगली डालूंगी, जल्दी बोल ज्यादा समय नहीं मेरे पास, एक तो मेरी चूत में आग लगी है और एक डर भी सता रहा है की कोई नीचे से ऊपर न आ जाए" मधु ने मेक्सी के ऊपर से ही अपनी चूत को मसलते हुवे बोला,यह देख कर सूरज का लंड लोअर के अंदर ही आजादी की जंग छेड़ देता है, लंड वस्त्रो से स्वतंत्र होने के लिए गुस्से से फटा जा रहा था ।
सूरज-" मौसी में तैयार हूँ आपके सामने मुठ मारने के लिए, मुझ पर भी अब रहा नहीं जा रहा है, देखो न मौसी मेरा लंड कैसे उत्तेजना के मारे फटा जा रहा है" लोअर में बने तम्बू को दिखाते हुए बोला। 
मधु पर रहा नहीं गया उसने अपनी मेक्सी के अंदर हाथ डालकर अपनी चूत को मसलने लगी, मेक्सी के अंदर उसका हाथ बड़ी तेजी से चलने लगा, सूरज तो मौसी के चेहरे पर कामुकता भरे अंदाज़ को देख कर अपनी शहनशीलता खो देता है और लोअर में लंड निकाल कर बड़ी तेजी के साथ लंड को सहलाने लगता है, सूरज की नज़र मधु के हाथ पर थी जो मेक्सी के अंदर बड़ी तेजी से चल रहा था ।
मधु-" सूर्या तेरा लंड तो बाकई में गधे जैसा लंबा और मोटा है, जिस किसी चूत में घुसेगा तो चूत का भोसड़ा बना देगा" मधु सिसकती हुई बोली 
सूरज-" हाँ मौसी आप मेक्सी को उतारो, मुझे आपकी रासिली चूत देखनी है, आप बड़ी चालाक हो मेरा लंड देख लिया लेकिन अपनी चूत नहीं दिखाई तुमने" मधु मेक्सी को उतार कर सूरज को चूत दिखाती हुई बोली ।
मधु-" ले बेटा सूरज देख अपनी मौसी की चूत, कितनी प्यासी है ये चूत,तेरा लंड देख कर बहुत पानी छोड़ रही है" मधु सूरज को अपनी चिकनी चूत दिखाते हुए बोली सूरज को, सूरज मधु की चूत को देख कर ललचा जाता है,उसका मन कर रहा था की चूत को चाट ले।
सूरज-" मौसी क्या में आपकी चूत को छूकर देखू, आप चाहो तो मेरा लंड पकड़ सकती हो' 
मधु-" हाँ सूरज तेरे लंड को देखकर तो मेरे मुह में पानी आ रहा है' सूरज देर न करते हुए मधु की चूत पर ऊँगली फिराता है, मधु की सिसकियाँ फुटने लगती है, डिडलो से प्यास बुझाने बाली मधु सूरज को लंड को देखते ही लंड पर टूट पड़ती है जैसे कई दिनों की भूकी प्यासी हो ।
मधु 69 की पोजीसन में लेट कर सूरज के लंड को मुह में लेकर चूसने लगती है, सूरज पर भी रहा नहीं जाता है और वह भी मधु की चूत में जुव्ह डालकर चाटने लगता है।
मधु और सूरज भूके की तरह एक दूसरे की चूत का पानी चाटने में लगे हुए थे ।
मधु-"आअह्ह्ह्ह्ह सूर्या चाट मेरी चूत को, बहुत पानी छोड़ती है यह" 
सूरज-" मौसी में चोदना चाहता हूँ तुम्हें, चौद कर तुम्हारी चूत की प्यास बुझाना चाहता हूँ" 
मधु-" रोका किसने है बेटा चौद अपनी मौसी को, बुझा दे प्यास मेरी" इतना बोलते ही सूरज मधु को नीचे लेटा कर अपना लंड एक ही झटके में मधु की चूत में घुसेड़ देता है ।
मधु-" आआईईईई आह्ह्ह्ह्ह् उफ्फ्फ सूर्या ये क्या किया तूने दर्द हो रहा है,आराम से चोद अपनी मौसी को" सूरज लंड निकाल कर दुबारा मधु की चूत में डालता है और धक्के मारने लगता है, मधु की चुचिया किसी छोटी छोटी मटकियों की तरह हिल रही थी, सूरज मधु की चुचियो को मसलते हुए धक्के मारता है ।
मधु-"आअह्ह्ह सूरज तू नीचे लेट, में ऊपर से तुझे चौदूंगी," सूरज नीचे आ जाता है मधु लंड के ऊपर बैठ कर अपनी भारी भरकम गांड को ऊपर नीचे करने लगती है ।
सूरज मधु की गदाराइ गांड को मसलता है, मधु तेज तेज लंड पर कूदने लगती है ।लंड पर कूदते समय मधु की चूचियाँ भी पुरे जोर से उछाल रही थी ।
10 मिनट चोदने के बाद सूरज मधु को घोड़ी बना कर चोदने लगता है ।
मधु-"आह्ह्ह तेरे लंड ने आज मुझे बहुत सुख दिया है सूरज,चौद अपनी मौसी को" सूरज तेजी से चोदते बोलता है ।
सूरज-"मौसी तुम्हारी चूत भी जन्नत से कम नहीं, तुम्हारी जैसी घोड़ियों ही मेरे लंड को झेल सकती है मौसी" 
मधु-" एक घोड़ी और है बहुत प्यासी बेटा, उसकी चूत और गांड तो मेरे से भी अच्छी है, एक दम कुँवारी घोड़ी है मेरे पास,अगर चोदना हो तो बोल ?" 
सूरज-" नेकी और पूछ पूछ मौसी, कौन है वो घोड़ी मौसी, बोलो में उसे भी चौद दूंगा" सूरज समझ गया था की मधु संध्या माँ की ही बात कर रही है, मधु तो अब तक चार बार झड़ चुकी थी, सूरज का ध्यान जैसे ही संध्या की कोमल चूत और मस्त गांड का ख्याल आता है तो बड़ी तेजी से चौदने लगता है, मधु की हालात ख़राब हो जाती है। सूरज तेज तेज धक्को के साथ ही मधु की चूत में झड़ जाता है और चौदने के बाद मधु के ऊपर ही लेट कर दोनों लोग साँसे लेने लगते है।
15 मिनट बाद संध्या आवाज़ लगाती है ।
संध्या-" अरे मधु कहाँ है जल्दी आ जा नीचे,सूर्या को भी ले आ,खाना तैयार है" मधु और सूरज जल्दी से कपडे पहन कर नीचे जाकर नास्ता करते हैं । सभी लोग खाना खाकर अपने अपने कमरे में चले जाते हैं ।
आज संध्या की चूत में डिडलो लेने की जल्दी थी, कल चूत में डिडलो का जो आनंद मिला था वही आनंद आज लेने के लिए बड़ी बेसब्री का इंतज़ार कर रही थी ।
मधु और संध्या कमरे आते ही बेड पर दोनों चित हो गई ।
मधु की चूत की आग तो आज सूरज में ठंडी कर दी थी ।इसलिए वो आराम से सोना चाहती थी लेकिन संध्या की चूत में खुजली मच रही थी ।
संध्या अपनी चूत को बार बार मसलती है ।
इधर सूरज भी कमरे में आकर लेपटोप खोलता है और मधु को देखता है की कहीं मधु माँ को सब बता न दे की आज मैंने उसकी चुदाई की है ।
सूरज लेपटोप में देखता है की संध्या माँ अपनी चूत को मसल रही है मेक्सी के ऊपर से ही ।
संध्या-" मधु क्या हुआ, आज तू कुछ किए बिना ही लेट गई" 
मधु-" क्या करू संध्या, तुझे कुछ चाहिए तो बोल" 
संध्या-" हाँ मधु वो डिडलो मुझे चाहिए, पता नहीं क्यूँ बड़ा मन कर रहा है मेरा आज" संध्या अपनी चूत मसलती हुई बोलती है ।
मधु-" डिडलो को छोड़ ला तेरी चूत को चाट कर ही झाड़ दूँ संध्या" मधु संध्या की मेक्सी को उठाकर चूत में ऊँगली डालते हुए बोली, संध्या कसमसा गई । मधु ऊँगली को बड़ी तेजी से चलाती है, मधु ऊँगली निकाल कर संध्या की चूत में जिव्हा डालकर चाटने लगती है, मधु की चूत में भी खुजली मचती है, मधु संध्या 69 की पोजीसन में आकर चूत की चुसाई करने लगती है ।
मधु और सूरज की दमदार चुदाई के पश्चात मधु अपनी चूत जल्दबाजी में साफ़ नहीं कर पाई थी, सूरज के लंड का वीर्य अभी भी मधु की चूत में थोडा बहुत भरा पड़ा था, संध्या जैसे ही मधु की चूत में जीव्ह डालती है उसे आज मधु की चूत का पानी का स्वाद अलग सा लगता है, संध्या चूत में जीव्ह डालकर उस स्वादिष्ट पानी को चाटने लगती है तभी संध्या को झटका सा लगता है वो समझ जाती है की ये किसी आदमी का वीर्य है मधु की चूत में, संध्या मधु की चूत में ऊँगली डालकर सफ़ेद पानी को देखने लगती है, संध्या सफ़ेद पानी को देखते ही समझ जाती है की ये किसी आदमी का वीर्य है मधु की चूत में, संध्या हेरात में पड़ जाती है और सोचने लगती है की मधु किससे चुदवा कर आई है, कहीं मधु बहार किसी नोकर से तो नहीं चुदवा कर आई है, फिर उसे ध्यान आता है की मधु तो सूर्या के कमरे से आई है और वीर्य भी ताज़ा है कहीं ये मधु सूर्या से तो नहीं चुदवा कर आई है, 
संध्या-" मधु एक बात बता तुझे मेरी कसम है तू सच बताएगी" 
मधु-" हाँ बोल मेरी जान" संध्या की चूत चाटते हुए बोली 
संध्या-" तू किससे चुदवा कर आई है,तेरी चूत पुरुष के वीर्य से भरी हुई है, कहीं तू सूर्या से तो चुद कर नहीं आई है?" मधु जैसे ही ये सुनती है उसकी साँसे अटक जाती है, मधु के क्रोधित और गुस्सा न हो जाए इस बात का डर था मधु को,सूरज भी जब ये बात सुनता है तो उसकी भी गांड फट जाती है की अब क्या बहाना बनाएगी मौसी।
मधु-" संध्या तुझे बहम हुआ है वो किसी पुरुस का वीर्य नहीं है मेरी चूत का ही पानी है" मधु यह बात डरते हुए बोलती है,लेकिन मधु का डर संध्या के सक को और मजबूत कर देता है ।
संध्या-" मुझे मत पढ़ा मधु, मैं चूत के पानी और लंड के पानी में अच्छी तरह से अंतर पहचानती हूँ, सच बता मधु तू आज शाम को सूर्या से ही चुद कर आई है न" 
मधु बैठती हुई बोली ।
मधु-" मुझे माफ़ करना बहन, में बहक गई थी, हाँ सूर्या से ही अपनी प्यास बुझाई है मैंने, उसके मोटे लंड को देखकर में अपने आपको रोक नहीं पाई" जैसे ही संध्या ने यह बात सुनी उसके पैरो तले जमीन खिसक गई, अपने ही बेटे के लैंड का पानी चख चुकी थी संध्या, उसकी अंतरात्मा ग्लानि के भाव महसूस कर रहे थे, संध्या रोने लगती है, 
सूरज भी यह सब देख कर बैचैन हो जाता है। सूरज डर जाता है की कहीं माँ अब मुझे घर से न निकाल दे, अगर ऐसा हुआ तो वो कहीं मुह दिखाने के लायक नहीं रहेगा, अपनी सगी माँ रेखा और पूनम और तनु दीदी को कहाँ लेकर जाएगा अब,गाँव तो वापिस जा नहीं सकता था ।
संध्या-" तुझे शर्म नहीं आई मधु, वो तेरे बेटे जैसा है, में कुछ उल्टा सीधा कहूँ उससे पहले तू इस घर से निकल जा,में तेरी सूरत भी देखना नहीं चाहती हूँ" मधु को तेज झटका लगता है,काफी देर तक माफ़ी मांगती है लेकिन संध्या एक नहीं सुनती है, मधु को लगता है की अब इस घर से निकलना ही ठीक है, मधु अपने कपडे पहन कर निकलने लगती है घर से,तभी संध्या ड्राइवर से मधु को उसके घर छोड़ने के लिए बोलती है, मधु के जाते ही संध्या कमरे में ऑस्कर फुट फूट कर रोने लगती है, सूरज बेचारा सिर्फ देखता रहता है लेकिन कुछ कर नहीं पाता है ।
सूरज बिस्तर पर लेट जाता है पूरी रात उसे नींद नहीं आती है, सुबह कब हो जाती है उसे पता नहीं चलता है ।
सूरज की आँख सुबह 8 बजे खुलती है,आज संध्या उसे जगाने नहीं आई थी ।
सूरज ही जल्दी से तैयार होकर नीचे पहुँचता है ।
संध्या माँ आज सुबह उठाने नहीं आई इससे साफ़ पता चल गया था की माँ बहुत नाराज है, माँ से कैसे नज़रे मिलाऊंगा, माँ की क्या प्रतिक्रिया होगी, कहीं माँ मुझे घर से न निकाल दे यही सब सोच कर मेरी गांड फट रही थी, 
में जैसे ही नीचे गया तो देखा माँ किचेन में थी, में डायनिंग टेबल पर बैठ कर नास्ते का इंतज़ार करने लगा, लेकिन माँ ने मेरी तरफ मुड़ कर भी नहीं देखा और न ही गुड़ मॉर्निंग किया जबकि हर रौज माँ ही पहले करती थी। 
में समझ गया की आज बहुत बड़ा पहाड़ टूट कर गिरने बाला है मेरे ऊपर, मेरा ह्रदय बडी तेजी से धड़क रहा था, काफी देर तक बैठने पर जब माँ ने मेरी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया तो मैंने ही माँ को डरते हुए आवाज़ लगाईं ।
सूरज-" माँ गुड़ मॉर्निंग,क्या हुआ माँ आज आप मुझे उठाने नहीं आई,और हाँ मधु मौसी कहाँ है दिखाई नहीं दे रही हैं" मैंने डरते हुए और अनजान बनते हुए पूछा, जैसे ही माँ ने मेरे मुह से मधु मौसी का सुना माँ एक दम भड़कती हुई मेरी तरफ घुमी, जैसे ही मैंने माँ का चेहरा गुस्से से भरा हुआ देखा,मेरी घबराहट बढ गई,रात भर जागने के कारण माँ की आँखे लाल थी,और उन आँखों में आंसू, शायद माँ रात भर रोती रही है ।
संध्या-" क्या करेगा मधु का, बड़ी फ़िक्र हो रही है तुझे उसकी, तुझे ज़रा सी भी शर्म नहीं आई, क्यूँ किया तूने ऐसा" फुट फुट के रोते हुए बोली
मेरी तो सुनकर हवा ही निकल गई, 
सूरज-" क्या हुआ माँ, ऐसा क्या किया मैंने" अनजान होते हुए बोला।
संध्या-" ये झूठ का पर्दा अपने चेहरे से हटा दे सूर्या, तूने घिनोना पाप किया है, अपनी माँ की उम्र की महिला के साथ तूने....छी मुझे बोलते हुए शर्म आ रही है, मैंने सोचा तेरी यादास्त चली गई है शायद अब तुझमे सुधार आ जाएगा लेकिन गलत थी तू कभी नहीं सुधर सकता,में तेरी शक्ल भी देखना नहीं चाहती सूर्या दूर हो जा मेरी नज़रो से" माँ रोटी हुई बोली, वास्तव में मुझे अपनी गलती का पछतावा हुआ, माँ को रोता देख मेरे आँख से भी आंसू बहने लगे, 
मैंने माँ के पैर पकड़ लिए ।
सूरज-" माँ मुझे माफ़ कर दो, में अंधा हो गया था, सब इस उम्र और समय की गलती है, हालात ऐसे बन गए की मुझे सब कुछ करना पड़ा" मैंने रोते हुए बोला ।
माँ रोती हुई अपने कमरे में चली गई, में काफी देर तक माँ का इंतज़ार करता रहा,माँ ने दरबाजा नहीं खोला,जब काफी देर हो गई माँ बहार निकल कर नहीं आई तो में माँ बहार से ही बोला
सूरज-" माँ मुझे सज़ा दो, मेरी पिटाई लगाओ लेकिन प्लीज़ मुझसे नाराज़ मत हो,आपको मेरी शक्ल से नफरत है तो में यहां से चला जाऊँगा,माँ एक बार मुझसे बात तो करो" काफी देर इंतज़ार करने के बाद कोई आवाज़ नहीं आई तो में भी गाडी लेकर घर निकल गया और कंपनी चला गया, आज टेंडर की मीटिंग हमारी ही कंपनी के हॉल में थी, तान्या टेंडर को लेकर दुखी थी की कहीं ये टेंडर किसी और कंपनी न मिल जाए और में माँ की बजह से दुखी था ।


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